सीमांत क्षेत्रों के निवासी देश की सीमा के प्रहरी: धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जनपद चमोली के बिरही (बेडूबगड़) में नीति-माणा जनजाति कल्याण समिति की ओर से आयोजित तीन दिवसीय जनजाति समागम 2026 के समापन कार्यक्रम में प्रतिभाग किया।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने नीति घाटी भोटिया जनजाति के शीतकालीन प्रवास एवं अन्य भूमि संबंधी मामलों का निस्तारण किये जाने, बेडूबगड़ भोटिया पड़ाव में सामुदायिक भवन का निर्माण, स्व. गौरा देवी जी की प्रतिमा एवं पार्क निर्माण किये जाने, बैरासकुंड मंदिर का सौंदर्यीकरण किये जाने, बेडूबगड़ पड़ाव की भूमि को सुरक्षित करने के लिए कार्य किये जाने की घोषणा की।

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि ऐसे आयोजन हमारी जनजातीय परंपराएं, सांस्कृतिक विरासत को सहेजने और नई पीढ़ी तक पहुंचाने का माध्यम है। जनजातीय समाज ने सदियों से अपनी परंपराओं और प्रकृति संरक्षण की भावना को पहचान दिलाने का काम किया है। हमारे सीमांत क्षेत्रों में रहने वाले जनजातीय भाई देश के सजग प्रहरी भी हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में जनजातीय समाज के उत्थान के लिए निरंतर प्रयास किये जा रहे हैं। प्रधानमंत्री के नेतृत्व में जनजातीय उन्नत ग्राम अभियान, एकलव्य आदर्श विद्यालय समेत जनजातीय समाज के लिए कई कल्याकारी योजनाएं चलाई जा रही हैं, जिससे जनजातीय समाज की आजीविका में सुधार हुआ है। समाज के अन्तिम पंक्ति में खडे व्यक्ति तक विकास का लाभ पहुंचाना हमारा उद्देश्य है।

मुख्यमंत्री ने कहा जनजाति समाज के बच्चों को शिक्षा के लिए प्रेरित करने हेतु प्राइमरी से लेकर स्नातकोत्तर स्तर तक छात्रवृत्ति प्रदान की जा रही है। प्रदेश में 16 स्थानों में राजकीय आश्रम पद्धति विद्यालय भी संचालित किए जा रहे हैं। जनजाति समुदाय की बेटियों की शादी के लिए 50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता का प्रावधान किया गया है।

उन्होंने कहा कि जनजातीय संस्कृति को प्रोत्साहित करने के लिए प्रत्येक वर्ष जनजातीय महोत्सव एवं खेल महोत्सव का आयोजन भी किया जा रहा है। टिम्मरसैंण महादेव के सौंदर्यकरण और पहुंच मार्ग के लिए 26 करोड़, हीरामणि मंदिर के लिए 75 लाख और मलारी गांव के सामुदायिक स्थल के लिए 34 लाख की राशि जारी की चुकी है।

मुख्यमंत्री ने आयोजन में जनसहभागिता को अनुपम उदाहरण बताते हुए कहा कि ऐसे धार्मिक एवं सामाजिक आयोजन ही उत्तराखंड की विशिष्ट पहचान हैं। ये आयोजन न केवल समाज में समरसता और एकता को सुदृढ़ करते हैं, बल्कि नई पीढ़ी को अपनी परंपराओं और मूल जड़ों से जुड़ने का अवसर भी प्रदान करते हैं। उन्होंने सामाजिक सद्भाव और सांस्कृतिक संरक्षण के लिए सामूहिक सहभागिता की आवश्यकता पर बल दिया।

मुख्यमंत्री ने कहा जनजातीय समुदाय ने सदियों से अपनी परंपराओं, लोकज्ञान और प्रकृति-संरक्षण की भावना से हमारी सभ्यता को मजबूती प्रदान की है। विशेषकर सीमांत क्षेत्रों में रहने वाले हमारे जनजातीय भाई-बहनों का जीवन हमेशा से संघर्ष, अनुशासन और सामूहिकता की अनुपम मिसाल रहा है। आज आवश्यकता है कि हमारी इस महान जनजातीय परंपरा के पारंपरिक ज्ञान, स्थानीय उत्पादों और प्राकृतिक संसाधनों को सहेजा जाए, जिससे ये ज्ञान हमारी आने वाली पीढ़ियों तक पहुंच सके।

उन्होंने कहा कि भगवान बिरसा मुंडा जी की जयंती को जनजातीय गौरव दिवस के रूप में मनाने का निर्णय भी आदरणीय प्रधानमंत्री जी की सकारात्मक सोच का प्रतीक है। देशभर में लगभग 200 करोड़ रुपये की लागत से आदिवासी स्वतंत्रता सेनानियों के संग्रहालय स्थापित किए गए हैं। पूरे देश के लिए ये गर्व की बात है कि आज संथाल आदि वासियों की बेटी आदरणीय श्रीमती द्रौपदी मूर्मू जी देश के सर्वाेच्च संवैधानिक पद पर आसीन हैं। जो ये दिखाता है कि जनजातीय समुदाय अब देश का नेतृत्व करने में भी सक्षम है। इतना ही नहीं, प्रधानमंत्री जी ने जनजातीय समाज के विकास के लिए बजट को 3 गुना बढ़ाकर ये सुनिश्चित किया है कि शिक्षा, स्वास्थ्य, आजीविका और बुनियादी सुविधाओं का लाभ इस समुदाय के प्रत्येक परिवार तक पहुँचे ये सभी ऐतिहासिक परिवर्तन केवल डबल इंजन वाली केन्द्र व राज्य सरकार में ही संभव हो सके।

मुख्यमंत्री ने कहा माणा को देश के अंतिम गांव की जगह देश के प्रथम गांव की संज्ञा दी, और उनके इसी विचार और मार्गदर्शन से प्रेरणा लेते हुए हमारी सरकार भी उत्तराखंड के जनजातीय समूदाय के जीवन स्तर को बेहतर बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा हमारी सरकार ने प्रधानमंत्री जनजातीय उन्नत ग्राम अभियान के तहत प्रदेश के 128 जनजातीयगांवों को चिन्हित किया है। जहाँ अब बुनियादी सुविधाओं के विकास के साथ -साथ रोज़गार, बेहतर शिक्षा औरस्वास्थ्य सेवाओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।साथ ही, राज्य में कालसी, मेहरावना, बाजपुर और खटीमा में संचालित एकलव्य आदर्शआवासीय विद्यालयों के माध्यम से जनजातीय बच्चों को निशुल्क शिक्षा और आवास की सुविधा मिल रही है। वहीं, देहरादून के चकराता और बाजपुर में नए आवासीय विद्यालयों का निर्माण कार्यभी तेजी से जारी है। वर्तमान में 16 राजकीय आश्रम पद्धति विद्यालय भी संचालित किए जा रहे हैं। राज्य में जनजातीय वर्ग के जो शिक्षित बेरोजगार युवा हैं। उन्हें तकनीकी शिक्षा सेजोड़ने के लिए तीन आई.टी.आई. संस्थान भी संचालित किए जा रहे हैं, जिससे वे कौशल प्राप्त कर सकें और आत्मनिर्भर बन सकें । इसके साथ ही प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले जनजातीय छात्र-छात्राओं के लिए निशुल्क कोचिंग की व्यवस्था की गई है और उन्हें हर माह छात्रृत्ति भी दी जा रही है।

उन्होंने कहा जनजातीय समुदाय की बेटियों के विवाह हेतु 50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है तथा जनजातीय शोध संस्थान के लिए 1 करोड़ रुपये का कॉर्पस फंड भी स्थापित किया गया है। वहीं, जनजातीय संस्कृति को संरक्षित और प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से राज्य मेंप्रतिवर्ष जनजाति महोत्सव एवं खेल महोत्सव का आयोजन भी किया जा रहा है। उन्होंने कहा हमारा प्रयास है कि देवभूमि में पलायन रुके और हमारे युवाओं को अपने ही गाँव में रोजगार के अवसर मिलें, इसी दिशा में होम स्टे योजना एक मजबूत माध्यम बनकर उभरी है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि चमोली जनपद में 800 से अधिक होम स्टे संचालित हो रहे हैं, जिनसे 4 हजार से अधिक स्थानीय लोग स्वरोजगार से जुड़ चुके हैं। वहीं, उत्तराखंड की जनजातीय संस्कृति अपने आप में पर्यटन का एक बड़ा आकर्षण है। इसालिए होम स्टे के साथ-साथ साहसिक, धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन के जरिए न कवल आजीविका के नए अवसर सृजित कर रहे हैं, बल्कि अपनी समृद्ध परंपराओंऔर संस्कृति को भी वैश्विक पहचान दिला रहे हैं।

इस मौके पर थराली विधायक भूपाल राम टम्टा, कर्णप्रयाग विधायक अनिल नौटियाल, भाजपा जिला अध्यक्ष गजपाल बर्तवाल, जिला पंचायत अध्यक्ष चमोली दौलत सिंह बिष्ट,पूर्व कैबिनेट मंत्री राजेंद्र सिंह भंडारी, नगर पालिका अध्यक्ष गोपेश्वर संदीप रावत, नीति माणा जनजाति कल्याण समिति के अध्यक्ष हरीश परमार, मुख्यमंत्री के मुख्य सलाहकार बीडी सिंह, दलबीर दानू, राज्य मंत्री हरक सिंह नेगी, भाजपा महामंत्री अरुण मैठाणी, बीकेटीसी के उपाध्यक्ष ऋषि प्रसाद सती, जिलाधिकारी गौरव कुमार, पुलिस अधीक्षक सुरजीत सिंह पंवार, मुख्य विकास अधिकारी डॉ अभिषेक त्रिपाठी सहित सभी जिला स्तरीय अधिकारी मौजूद थे।

दिव्य, भव्य और ऐतिहासिक होगा कुंभ मेला: धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हरिद्वार में आयोजित एक उच्च स्तरीय बैठक में कुंभ मेला-2027 की तैयारियों की समीक्षा की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि हरिद्वार में अगले वर्ष आयोजित होने वाला कुंभ मेला दिव्य, भव्य और ऐतिहासिक होगा। मेले के दौरान श्रद्धालुओं के लिए बेहतर सुविधा, सुगमता और सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। इस महाआयोजन की व्यवस्थाओं में कोई भी कमी नहीं रहने दी जाएगी। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को कुंभ मेले से संबंधित कार्य निर्धारित समय पर पूर्ण करने के सख्त निर्देश देते हुए कहा कि सभी विभाग बेहतर समन्वय के साथ कार्य करें और लिए गए निर्णयों का अविलंब अनुपालन सुनिश्चित किया जाए।

मेला नियंत्रण भवन, हरिद्वार में आयोजित इस बैठक में मुख्यमंत्री ने मेले की तैयारियों की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने पिछली बैठक में दिए गए निर्देशों पर हुई कार्रवाई तथा वर्तमान में चल रहे कार्यों की प्रगति की जानकारी भी ली। मुख्यमंत्री ने मेले से संबंधित सभी कार्य आगामी अक्टूबर माह तक पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि मेले के लिए सभी प्रमुख स्थायी कार्यों को स्वीकृति प्रदान की जा चुकी है तथा अस्थायी कार्यों के प्रस्तावों को अंतिम रूप देकर उन्हें भी समयबद्ध रूप से पूर्ण किया जाए। जोन एवं सेक्टर स्तर पर की जाने वाली तैयारियों को तय लक्ष्यों और समयसीमा के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण ढंग से संपन्न करने के निर्देश दिए गए। निर्माण कार्यों की मॉनिटरिंग हेतु थर्ड पार्टी ऑडिट भी कराने के निर्देश दिए गए।

मुख्यमंत्री ने मेले के दौरान परिवहन एवं पार्किंग की प्रभावी एवं पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित करने पर जोर देते हुए वैकल्पिक मार्गों को चिन्हित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि श्रद्धालुओं के सुरक्षित एवं सुविधाजनक आवागमन तथा स्नान की समुचित व्यवस्था की जाए। संभावित भीड़ को ध्यान में रखते हुए स्नान, आवागमन एवं ठहराव के लिए विस्तृत योजना तैयार की जाए। महिला एवं वृद्ध श्रद्धालुओं के लिए विशेष प्रबंध किए जाने के भी निर्देश दिए गए।

कुंभ क्षेत्र में स्वच्छता व्यवस्था पर विशेष ध्यान देने के निर्देश देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इस कार्य में स्वयंसेवी संगठनों का सहयोग भी लिया जाए। स्वास्थ्य सुविधाओं की बेहतर व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश देते हुए उन्होंने कहा कि बीमार श्रद्धालुओं को निकटतम स्वास्थ्य केंद्र तक पहुंचाने के लिए बोट एवं बाइक एंबुलेंस की व्यवस्था की जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि कुंभ मेले के सुव्यवस्थित एवं सफल आयोजन के लिए साधु-संतों, अखाड़ों, जनप्रतिनिधियों तथा धार्मिक एवं स्वयंसेवी संगठनों का सहयोग लिया जाए और उनके सुझावों को ध्यान में रखकर कार्य किए जाएं।

उन्होंने कुंभ मेले में चाक-चौबंद सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश देते हुए पर्याप्त पुलिस बल की तैनाती पर जोर दिया। साथ ही साइबर सुरक्षा, अग्निशमन व्यवस्था तथा रेस्क्यू कार्यों के लिए दक्ष कार्मिकों की तैनाती सुनिश्चित करने को कहा।

स्थायी कार्यों की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि कुंभ क्षेत्र में निर्मित सभी पुलों का सुरक्षा ऑडिट कराया जाए तथा आवश्यकता पड़ने पर उनकी मरम्मत समय पर पूर्ण की जाए। गंगा नदी के घाटों के अनुरक्षण हेतु यदि गंग नहर के क्लोजर की आवश्यकता हो तो उत्तर प्रदेश के अधिकारियों से समन्वय स्थापित किया जाए। घाटों के सुदृढ़ीकरण, सुरक्षा रेलिंग तथा फिसलन-रोधी व्यवस्थाएं समय से पूर्ण की जाएं। कुंभ प्रारंभ होने से पूर्व सभी विद्युत लाइनों को भूमिगत कर लिया जाए।

कुंभ क्षेत्र में भूमि प्रबंधन एवं आवंटन की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इसकी मॉनिटरिंग मेलाधिकारी स्वयं करें तथा क्षेत्र को अतिक्रमणमुक्त रखा जाए।

बैठक में कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज, सुबोध उनियाल तथा पूर्व मुख्यमंत्री एवं सांसद त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने भी प्रतिभाग करते हुए उपयोगी सुझाव दिए। इस अवसर पर मेलाधिकारी सोनिका ने बैठक में मेले से संबंधित स्वीकृत कार्यों की प्रगति की जानकारी दी तथा प्रस्तावित कार्यों एवं व्यवस्थाओं पर विस्तृत प्रस्तुतीकरण प्रस्तुत किया। बैठक में सचिव, शहरी विकास विभाग नितेश कुमार झा; सचिव, लोक निर्माण विभाग पंकज कुमार पाण्डे; आयुक्त, गढ़वाल मंडल विनय शंकर पाण्डेय; सचिव, पेयजल रणवीर सिंह चौहान; सचिव, सिंचाई युगल किशोर पंत, सचिव, पर्यटन धीराज गर्ब्याल; अपर पुलिस महानिदेशक ए.पी. अंशुमान तथा उत्तर रेलवे के मुरादाबाद मंडल की डीआरएम विनीता श्रीवास्तव सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने मेले की तैयारियों की विस्तृत जानकारी दी।

बैठक में मेयर हरिद्वार किरन जैसल, मेयर रुड़की अनीता अग्रवाल, मेयर ऋषिकेश शंभू पासवान, विधायक रानीपुर आदेश चौहान, विधायक रुड़की प्रदीप बत्रा, विधायक हरिद्वार ग्रामीण अनुपमा रावत, विधायक ज्वालापुर रवि बहादुर, दायित्वधारी अजीत चौधरी, जयपाल सिंह चौहान, देशराज कर्णवाल, शोभाराम प्रजापति, पूर्व मंत्री एवं प्रदेश उपाध्यक्ष स्वामी यतीश्वरानंद, जिलाध्यक्ष भाजपा हरिद्वार आशुतोष शर्मा, जिलाध्यक्ष रुड़की डॉ. मधु, पुलिस महानिरीक्षक गढ़वाल राजीव स्वरूप, सचिव सी. रविशंकर, आनंद स्वरूप, जिलाधिकारी मयूर दीक्षित, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक नवनीत सिंह भुल्लर, मुख्य विकास अधिकारी ललित नारायण मिश्रा, अपर जिलाधिकारी पी.आर. चौहान, अपर मेलाधिकारी दयानंद सरस्वती सहित विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने प्रतिभाग किया।

उत्तराखंड में अब रोड सेफ्टी के अंतर्गत इलेक्ट्रॉनिक इंफोर्समेंट

उत्तराखण्ड में परिवहन क्षेत्र में किए जा रहे व्यापक सुधारों को केन्द्र सरकार ने सराहते हुए पूंजीगत निवेश योजना (SASCI) 2025-26 के अंतर्गत राज्य को ₹105.11 करोड़ की प्रोत्साहन राशि स्वीकृत की है। साथ ही अप्रैल से पूर्व लागू किए गए सुधारों के लिए ₹20 करोड़ की अतिरिक्त धनराशि भी स्वीकृत की गई है। इस प्रकार कुल ₹125 करोड़ की प्रोत्साहन राशि परिवहन विभाग, उत्तराखण्ड को प्राप्त हुई है।

यह उपलब्धि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में परिवहन क्षेत्र में लागू की जा रही तकनीक आधारित सुधारात्मक नीतियों का परिणाम मानी जा रही है।

इस पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि उत्तराखण्ड में परिवहन क्षेत्र में तकनीक आधारित सुधारों को प्राथमिकता दी जा रही है, जिससे सड़क सुरक्षा को सुदृढ़ करने के साथ-साथ पारदर्शिता भी सुनिश्चित हो रही है। इलेक्ट्रॉनिक इंफोर्समेंट एवं वाहन स्क्रैपिंग नीति के प्रभावी क्रियान्वयन से राज्य में दुर्घटनाओं में कमी लाने तथा पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा। केन्द्र सरकार द्वारा प्राप्त यह प्रोत्साहन राशि राज्य में स्मार्ट एवं सुरक्षित परिवहन व्यवस्था विकसित करने में सहायक सिद्ध होगी।

सड़क सुरक्षा के दृष्टिगत राज्य में हाई-रिस्क, हाई-डेंसिटी एवं क्रिटिकल जंक्शनों पर इलेक्ट्रॉनिक इंफोर्समेंट सिस्टम लागू किए गए हैं। इसके अंतर्गत दुर्घटना संभावित क्षेत्रों में ANPR (ऑटोमेटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन) कैमरे लगाए गए हैं तथा उन्हें ट्रैफिक कंट्रोल रूम एवं ई-चालान प्रणाली से इंटीग्रेट किया गया है।

वित्तीय वर्ष 2025-26 में दिसम्बर 2025 तक 20 स्थानों पर ANPR कैमरे स्थापित कर दिए गए हैं, जबकि राज्य में अब तक कुल 37 लोकेशनों पर कैमरे लगाए जा चुके हैं। इन कैमरों के माध्यम से ट्रिपल राइडिंग, ओवरस्पीडिंग, बिना हेलमेट जैसे मामलों में प्रतिदिन 5 हजार से अधिक चालान किए जा रहे हैं।

विशेष उल्लेखनीय है कि उत्तराखण्ड देश का पहला राज्य बन गया है जहां ANPR कैमरों के माध्यम से ग्रीन सेस की वसूली की जा रही है। इस प्रणाली के तहत वाहनों को रोके बिना ही Fastag वॉलेट से ग्रीन सेस स्वतः कटकर संबंधित खाते में जमा हो जाता है।

*वाहन स्क्रैपिंग नीति में प्रभावी क्रियान्वयन*

वाहन स्क्रैपिंग नीति के अंतर्गत पुराने वाहनों को पंजीकृत स्क्रैपिंग केंद्रों में निस्तारित करने पर जारी प्रमाण पत्र के आधार पर नए वाहन क्रय करने पर विभिन्न श्रेणियों में रोड टैक्स में 50 प्रतिशत तक की छूट प्रदान की जा रही है।

राज्य में अब तक 564 सरकारी एवं 5861 निजी वाहनों को स्क्रैप किया जा चुका है। इसके लिए कुल 6425 वाहनों के विरुद्ध ₹9.58 करोड़ की प्रोत्साहन राशि स्वीकृत की गई है।

*ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन (ATS)*

राज्य में ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशनों की स्थापना को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। इस दिशा में दो ATS को Preliminary Registration Certificate जारी किए जाने पर ₹2.5 करोड़ की प्रोत्साहन राशि प्राप्त हुई है।

इन सुधारात्मक योजनाओं का क्रियान्वयन सीएम पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर परिवहन सचिव बृजेश कुमार संत के निर्देशन में किया गया है, जिससे उत्तराखण्ड परिवहन क्षेत्र में नवाचार आधारित सुधार लागू करने वाले अग्रणी राज्यों में शामिल हो गया है।

सीएम बीरों देवल रुद्रप्रयाग में आयोजित मां चंडिका महावन्याथ देवरा यात्रा में हुए शामिल

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी जनपद रुद्रप्रयाग के विकासखंड अगस्त्यमुनि के ग्राम बीरों देवल में आयोजित मां चंडिका महावन्याथ देवरा यात्रा में सम्मिलित हुए। उन्होंने मां चंडिका मंदिर पहुंचकर महायज्ञ में भाग लिया तथा वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच पूर्ण विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर मां चंडिका का आशीर्वाद प्राप्त कर प्रदेश की खुशहाली की भी कामना की।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने मां चंडिका मंदिर प्रांगण एवं मंदिर समूह का पुरातत्व विभाग के माध्यम से पुनर्निर्माण कराये जाने तथा तहसील बसुकेदार में नवीन तहसील भवन निर्माण की घोषणा की

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने आयोजन स्थल को धार्मिक एवं आध्यात्मिक संगम का प्रतीक बताते हुए कहा कि 20 वर्षों के बाद आयोजित यह महायज्ञ केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि सांस्कृतिक पुनर्जागरण का भी प्रतीक है। उन्होंने कहा कि किसी भी देवस्थान पर जाना मात्र संयोग नहीं होता, बल्कि इसे ईश्वरीय आह्वान और आशीर्वाद के रूप में देखना चाहिए।

मुख्यमंत्री ने आयोजन में जनसहभागिता को अनुपम उदाहरण बताते हुए कहा कि ऐसे धार्मिक एवं सामाजिक आयोजन ही उत्तराखंड की विशिष्ट पहचान हैं। ये आयोजन न केवल समाज में समरसता और एकता को सुदृढ़ करते हैं, बल्कि नई पीढ़ी को अपनी परंपराओं और मूल जड़ों से जुड़ने का अवसर भी प्रदान करते हैं। उन्होंने सामाजिक सद्भाव और सांस्कृतिक संरक्षण के लिए सामूहिक सहभागिता की आवश्यकता पर बल दिया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश निरंतर विकास के नए आयाम स्थापित कर रहा है। सनातन संस्कृति की रक्षा और संवर्धन के लिए महत्वपूर्ण प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने वर्तमान समय को सांस्कृतिक, सामाजिक और सहयोग की दृष्टि से स्वर्णिम काल बताते हुए कहा कि भारत को विश्व की आध्यात्मिक राजधानी बनाने की दिशा में कार्य हो रहा है तथा वैश्विक स्तर पर भारतीय संस्कृति को विशेष सम्मान प्राप्त हो रहा है।

मुख्यमंत्री ने वर्ष 2013 की आपदा के बाद केदारनाथ मंदिर में हुए व्यापक पुनर्निर्माण कार्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि आज ‘दिव्य एवं भव्य केदार’ का स्वरूप सभी के सामने है। उन्होंने आश्वस्त किया कि राज्य सरकार धार्मिक आयोजनों की सफलता और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के लिए सदैव प्रतिबद्ध है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड को समृद्ध राज्य बनाने हेतु सरकार निरंतर प्रयासरत है और युवाओं के उज्ज्वल भविष्य के लिए पूर्णतः संकल्पित है। देवभूमि के मूल स्वरूप से छेड़छाड़ करने वालों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार द्वारा धर्मांतरण विरोधी कानून, दंगा-निरोधक प्रावधानों सहित विभिन्न सख्त कानूनी उपाय लागू किए गए हैं। राज्यभर में 12 हजार से अधिक भूमि अतिक्रमण से मुक्त कराई गई है, जिसे उन्होंने देवभूमि की पवित्रता की रक्षा का अभियान बताया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड समूचे राष्ट्र में समान नागरिक संहिता लागू करने वाला अग्रणी राज्य बनकर उभरा है और राज्य सरकार प्रदेश के सर्वांगीण विकास तथा सांस्कृतिक अस्मिता की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। इस अवसर पर विभिन्न विभागों द्वारा विकास योजनाओं से संबंधित स्टॉल स्थापित कर आमजन को राज्य एवं केंद्र सरकार की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी प्रदान की गई।

इस अवसर पर आशा नौटियाल, विधायक केदारनाथ, द्वारा क्षेत्र की विभिन्न मांगों के संबंध में मुख्यमंत्री को मांग पत्र भी सौंपा गया। मुख्यमंत्री ने उक्त मांगों पर परीक्षण कर आवश्यक कार्यवाही करने का आश्वासन प्रदान किया।

कार्यक्रम में विधायक रुद्रप्रयाग भरत चौधरी, जिला पंचायत अध्यक्ष पूनम कठैत, उपाध्यक्ष रितु नेगी, ब्लॉक प्रमुख अगस्त्यमुनि भुवनेश्वरी देवी, बीकेटीसी उपाध्यक्ष विजय कपरवाण, महिला आयोग उपाध्यक्ष ऐश्वर्या रावत, भाजपा जिलाध्यक्ष भारत भूषण भट्ट, महायज्ञ समिति अध्यक्ष डॉ. आशुतोष भंडारी, महासचिव मदन मोहन डिमरी, जिलाधिकारी विशाल मिश्रा, पुलिस अधीक्षक निहारिका तोमर, उप वन संरक्षक रजत सुमन, मुख्य विकास अधिकारी राजेंद्र सिंह रावत सहित अन्य पदाधिकारी उपस्थित रहे।

*20 वर्षों बाद आयोजित हो रही है दिवारा यात्रा*

मां चंडिका की दिवारा यात्रा 21 नवम्बर 2025 से प्रारंभ होकर लगभग 26 गांवों के भ्रमण पर रही। यह यात्रा 20 वर्षों के अंतराल के बाद आयोजित की जा रही है। यात्रा के दौरान वीरों देवल, संगूड़, नैणी पौण्डार, क्यार्क बरसूड़ी, पाली, बष्टी, डुंगर, बड़ेथ, पाटियू, भटवाड़ी, जोला, उच्छोला, मथ्यागांव, बक्सीर, भुनालगांव, डांगी, खोड, स्यूर, डडोली, खाटली किमाणा, दानकोट, कौशलपुर, अरखण्ड, डालसिंगी, हाट, नैली कुंड, रयांसू सहित विभिन्न गांवों का भ्रमण किया गया।

यात्रा के अंतर्गत बीरों देवल में 15 फरवरी से 9 दिवसीय महायज्ञ का आयोजन किया जा रहा है। 22 फरवरी 2026 को विशाल जलयात्रा आयोजित होगी तथा 24 फरवरी 2026 को पूर्णाहुति के साथ यह महावन्याथ यात्रा सम्पन्न होगी और मां अपने दिव्य स्थल पर विराजमान होंगी।

राज्य सरकार फिल्म उद्योग को प्रोत्साहित करने के लिए निरंतर कार्य कर रही है: धामी

उत्तराखंड राज्य सरकार फिल्म उद्योग के समग्र विकास के लिए निरंतर प्रयासरत है। प्राकृतिक सौंदर्य, सुरक्षित वातावरण, सरल प्रक्रियाएँ और फिल्म-फ्रेंडली नीति के कारण ही उत्तराखण्ड आज देश और विदेश के फिल्म निर्माताओं के लिए आकर्षण का केंद्र बनकर उभर रहा है। प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की संकल्पना का ही असर है कि आज राज्य में क्षेत्रीय सिनेमा को नये आयाम मिल रहे है। मुख्यमंत्री धामी द्वारा दिये गये निर्देशों के क्रम में लागू की फिल्म नीति-2024 प्रभावी रही है। मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि उत्तराखंड प्राकृतिक सौंदर्य, विविध भौगोलिक परिस्थितियों, सांस्कृतिक विरासत और शांत वातावरण के कारण फिल्म निर्माण के लिए एक आदर्श राज्य के रूप में उभर रहा है। राज्य सरकार फिल्म उद्योग को प्रोत्साहित करने के लिए निरंतर कार्य कर रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड में फिल्म नीति को प्रभावी रूप से लागू किया गया है, जिसके अंतर्गत फिल्म निर्माताओं को सिंगल विंडो सिस्टम के माध्यम से त्वरित अनुमति प्रदान की जा रही है। शूटिंग की अनुमति प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी और समयबद्ध बनाया गया है, जिससे फिल्म निर्माताओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो। मुख्यमंत्री ने कहा कि फिल्म नीति का उद्देश्य केवल फिल्मों की शूटिंग तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे पर्यटन, स्थानीय अर्थव्यवस्था, रोजगार सृजन और राज्य की सांस्कृतिक पहचान को भी मजबूती मिल रही है। उत्तराखंड में वेब सीरीज, डॉक्यूमेंट्री, शॉर्ट फिल्म और फीचर फिल्मों के निर्माण को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है।

उत्तराखण्ड फिल्म विकास परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्री बंशीधर तिवारी ने बताया कि परिषद द्वारा वर्ष में 02 बार (माह जुलाई एवं माह जनवरी) फिल्मों को अनुदान दिये जाने हेतु समिति की बैठक आयोजित की जाती है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में 25 फिल्मों को अनुदान धनराशि दी गई है। माह जुलाई, 2025 की बैठक में 12 फिल्मों के प्रस्ताव का परीक्षण अनुदान दिया गया, जबकि माह जनवरी, 2026 में 13 फिल्मों को अनुदान दिया गया है। इस वर्ष रुपये 8.28 करोड़ धनराशि अनुदान के रूप में 25 फिल्मों को जारी की गई है। श्री तिवारी ने बताया कि मा. मुख्यमंत्री श्री धामी के दिशा-निर्देश में परिषद द्वारा फिल्म निर्माता-निर्देशकों को राज्य में फिल्म शूटिंग हेतु अनुकूल वातावरण प्रदान किया जा रहा है। राज्य में फिल्मों की शूटिंग होने से स्थानीय स्तर पर भी रोजगार के अवसर बढ़ रहे है।

*उत्तराखण्ड की इन फिल्मों को मिला अनुदान*

फिल्म नीति-2024 के कारण क्षेत्रीय सिनेमा को प्रोत्साहन मिला है। इस वित्तीय वर्ष 2025-26 में गढ़वाली, कुमाऊंनी एवं जौनसारी फिल्मों को अनुदान राशि जारी की गई है। जोना (गढ़वाली) ₹5,84,528/-, ‘मीठी’ माँ कु आशीर्वाद (गढ़वाली) ₹20,83,050/-, मेरे गांव की बाट (जौनसारी) ₹31,04,360/-, घपरोल (गढ़वाली) ₹21,85,819/-, द्वी होला जब साथ (गढवाली) ₹18,48,883/-, गढ़-कुमौं (उत्तराखण्डी) ₹20,93,140/-, असग़ार (गढ़वाली) ₹16,96,852/-, रतब्याण-(गढ़वाली) ₹9,96,193/-, संस्कार (गढ़वाली) ₹26,68,175/-, मेरु गौ (गढ़वाली) ₹7,91,305/-, अजाण (गढ़वाली) ₹9,24,286/-, बथों सुबेरो घाम -2 (गढ़वाली) ₹6,53,073/-, धरती म्यर कुमाऊँ (कुमाऊंनी) ₹17,63,528/-, कारा एक प्रथा (गढ़वाली) ₹18,86,726/- फिल्में शमिल है।

*हिन्दी भाषा की इन फिल्मों को मिला अनुदान*

फिल्म नीति-2024 से आकर्षित होकर देश-विदेश के फिल्म निर्माता निर्देशक आकर्षित होकर फिल्मों की शूटिंग के लिए उत्तराखण्ड आ रहे है। इस वित्तीय वर्ष 2025-26 में हिन्दी फिल्मों को अनुदान राशि जारी की गई है, जिनमें विकी विद्या का वह वाला वीडियो (हिन्दी) ₹1,95,00,000/-, वेब सीरीज लाइफ हिल गई (हिन्दी) ₹ 94,76,565/-, Tanvi the Great (हिंदी/अंग्रेजी) ₹99,85,806/-, माली (हिन्दी) ₹28,01,229/-, मैं लड़ेगा (हिंदी) ₹15,11,907/-, 5th सितम्बर (हिंदी) ₹17,33,028/-, केसरी चैप्टर-2 (हिंदी) ₹41,22,664/-, ढाई आखर प्रेम का (हिन्दी) ₹33,76,00,8/-, गंगा संग रविदास (हिन्दी) ₹9,34,980/-, ए वेडिंग स्टोरी-(हिन्दी) ₹9,50,302/-, Middle Class Love (हिंदी) ₹51,96,578/- फिल्मों को अनुदान दिया गया है।

जनसहभागिता से तैयार होगा आम जनता का बजट, रांसी में सीएम की मौजूदगी में हुआ व्यापक मंथन

जनपद पौड़ी के रांसी स्थित बहुउद्देश्यीय भवन में प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की उपस्थिति में बजट पूर्व संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में प्रदेश के विभिन्न जनपदों से आए जनप्रतिनिधियों, कृषकों, उद्यमियों, व्यापारियों, महिला समूहों, पर्यटन व्यवसायियों, मत्स्य पालकों, कृषि वैज्ञानिकों, स्थानीय निकाय प्रतिनिधियों एवं विभिन्न क्षेत्रों के हितधारकों ने सहभागिता करते हुए आगामी बजट के लिए अपने सुझाव प्रस्तुत किए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य ऐसा जनहितकारी बजट तैयार करना है, जो प्रदेश की जमीनी आवश्यकताओं, क्षेत्रीय विशेषताओं और जनअपेक्षाओं के अनुरूप हो। उन्होंने कहा कि बजट केवल आय-व्यय का दस्तावेज नहीं, बल्कि विकसित उत्तराखण्ड के निर्माण का रोडमैप है, जिसमें प्रत्येक वर्ग की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी।

इस संवाद कार्यक्रम में शामिल होकर अपने महत्वपूर्ण सुझाव देने के लिए सभी का आभार व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारा प्रयास है कि समाज के प्रत्येक वर्ग जैसे पर्यटन व्यवसायियों, व्यापारियों, महिला स्वयं सहायता समूहों, किसानों और उद्यमियों की अपेक्षाएं और आवश्यकताएं बजट में समुचित रूप से परिलक्षित हों। उन्होंने कहा कि इस संवाद के दौरान अनेक व्यावहारिक और दूरदर्शी सुझाव प्राप्त हुए हैं, जो राज्य के विकास की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

उन्होंने कहा कि हमने बजट निर्माण की प्रक्रिया को पारदर्शी, सहभागी और जनोन्मुखी बनाने का संकल्प लिया है। सीमांत क्षेत्रों सहित प्रदेश के विभिन्न स्थानों पर जनता से संवाद कर सुझाव प्राप्त किए जा रहे हैं, ताकि विकास का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे और प्रत्येक वर्ग की भागीदारी इसमें सुनिश्चित हो सके।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड निरंतर विकास के पथ पर अग्रसर है और व्यापार, उद्योग, पर्यटन, कृषि एवं महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। राज्य में होमस्टे, स्वरोजगार और निवेश के नए अवसर सृजित हुए हैं, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार को बढ़ावा मिला है। सरकार का लक्ष्य किसानों को उद्यमी के रूप में विकसित करना, महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना तथा राज्य की अर्थव्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ करना है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बजट पूर्व संवाद के दौरान प्राप्त सभी सुझावों का गंभीरता से परीक्षण कर उन्हें आगामी बजट और नीतिगत निर्णयों में यथासंभव शामिल किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य ऐसा बजट प्रस्तुत करना है, जो आकार में व्यापक, प्रभाव में ठोस और पूरी तरह जनहित पर केंद्रित हो, ताकि विकास का लाभ समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंच सके।

मुख्यमंत्री ने वर्ष 2047 तक उत्तराखंड को आत्मनिर्भर एवं अग्रणी राज्य बनाने के संकल्प को दोहराते हुए कहा कि प्रदेश ने वित्तीय अनुशासन और विकास के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि जनसहभागिता से तैयार होने वाला यह बजट राज्य की विकास यात्रा को और अधिक गति प्रदान करते हुए समृद्ध और सशक्त उत्तराखंड के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

संवाद के दौरान ग्रामीण विकास को गति देने के लिए अनुदान में वृद्धि, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन व्यवस्था सुदृढ़ करने, सीवर लाइन एवं शौचालय निर्माण, पंचायतों को सशक्त बनाने, बंजर भूमि के उत्पादक उपयोग तथा ग्राम स्तर पर सोलर प्लांट संचालन जैसे सुझाव प्राप्त हुए। शहरी क्षेत्रों के लिए नगर निकायों के संसाधन बढ़ाने, सोलर सिटी की अवधारणा को बढ़ावा देने, पार्किंग व सफाई व्यवस्था सुदृढ़ करने तथा शहरी आधारभूत संरचना के सुदृढ़ीकरण पर बल दिया गया।

कृषि एवं उद्यान क्षेत्र में पर्वतीय कृषि को प्रोत्साहन, बागवानी एवं उच्च मूल्य वाली फसलों के उत्पादन, जंगली जानवरों से फसलों की सुरक्षा हेतु प्रभावी उपाय, पोस्ट-हार्वेस्ट प्रबंधन, कोल्ड स्टोरेज एवं क्लस्टर आधारित खेती को बढ़ावा देने के सुझाव सामने आए। कृषकों के तकनीकी प्रशिक्षण, जिला स्तर पर प्रसंस्करण केंद्रों की स्थापना तथा ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ विकसित करने पर भी जोर दिया गया।

उद्योग एवं एमएसएमई क्षेत्र में पर्वतीय क्षेत्रों में उद्योग स्थापना हेतु पूंजीगत सब्सिडी, ब्याज अनुदान, मशीनरी पर विशेष छूट, सेवा क्षेत्र आधारित उद्योगों को बढ़ावा तथा स्थानीय उत्पादों पर आधारित उद्योगों को प्रोत्साहन की मांग रखी गई। आईटीआई एवं पॉलिटेक्निक संस्थानों को उद्योगों से सीधे जोड़ने, जिससे स्थानीय युवाओं को रोजगार के अवसर मिलें और पलायन रुके, इस पर भी सुझाव दिए गए।

महिला सशक्तिकरण के अंतर्गत प्रत्येक जनपद में प्रशिक्षण केंद्र स्थापित करने, ब्याज-मुक्त ऋण उपलब्ध कराने तथा स्थानीय सेवाओं में महिलाओं को प्राथमिकता देने की बात कही गई। गौशालाओं के लिए भूमि उपलब्ध कराने, जैविक खाद उत्पादन को प्रोत्साहन देने तथा मत्स्य पालन के लिए आधुनिक तकनीकों एवं बायोफ्लॉक टैंकों को बढ़ावा देने के सुझाव भी प्रस्तुत किए गए।

पर्यटन क्षेत्र में होमस्टे के लिए रियायती ऋण सुविधा, हैली सेवा का विस्तार, वैकल्पिक मार्गों का निर्माण, छोटे पर्यटन स्थलों का विकास, संस्कृत ग्रामों एवं सांस्कृतिक स्थलों को पर्यटक ग्राम के रूप में विकसित करने, नेचर एवं एग्री-टूरिज्म को बढ़ावा देने तथा स्थानीय उत्पादों के विपणन के लिए ठोस नीति बनाने की आवश्यकता बताई गई।

ऊर्जा क्षेत्र में ऊर्जा नेटवर्क को सुदृढ़ बनाने, कृषि एवं उद्योग आधारित गतिविधियों को प्रोत्साहन देने हेतु कर एवं शुल्क में राहत तथा ऐतिहासिक स्थलों के संरक्षण एवं सौंदर्यीकरण के सुझाव भी प्राप्त हुए।

बजट पूर्व संवाद कार्यक्रम में स्थानीय विधायक राजकुमार पोरी ने कहा कि जनसहभागिता के आधार पर तैयार होने वाला बजट ही प्रदेश के समग्र विकास की नींव बनेगा। उन्होंने पर्वतीय क्षेत्रों की विशेष आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए पर्यटन, कृषि, लघु उद्योग एवं आधारभूत सुविधाओं को प्राथमिकता देने की बात कही। उन्होंने विश्वास जताया कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में आगामी बजट जनअपेक्षाओं के अनुरूप होगा और पौड़ी सहित पूरे प्रदेश के संतुलित विकास को नई दिशा देगा।

वित्त सचिव दिलीप जावलकर ने सभी होमस्टे संचालकों, एमएसएमई उद्यमियों, लखपति दीदियों, जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों का स्वागत करते हुए कहा कि इस संवाद का उद्देश्य आगामी बजट को जनभावनाओं, स्थानीय आवश्यकताओं और विकास की प्राथमिकताओं के अनुरूप दिशा देना है, ताकि वित्तीय संसाधनों का प्रभावी प्रबंधन करते हुए अधिकतम जनकल्याण सुनिश्चित किया जा सके। राज्य में आधारभूत संरचना, पर्यटन, कनेक्टिविटी, स्वरोजगार और महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में निरंतर सकारात्मक प्रगति हो रही है, जिससे विकास की नई संभावनाएं साकार हो रही हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखंड ने विकास की दिशा में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं और सरकार का स्पष्ट लक्ष्य है कि प्रत्येक रुपया पारदर्शिता के साथ सही व्यक्ति तक पहुंचे और उसका अधिकतम जनहित में उपयोग हो। बजट पूर्व संवाद इसी सहभागी सोच का महत्वपूर्ण माध्यम है। उन्होंने सभी से अपेक्षा की कि वे अपने संक्षिप्त, व्यवहारिक एवं दूरदर्शी सुझाव प्रस्तुत कर आगामी बजट को और अधिक जनोन्मुखी, प्रभावी एवं विकासोन्मुख बनाने में सहभागी बनें।

जिलाधिकारी स्वाति एस. भदौरिया ने सभी जनप्रतिनिधियों, हितधारकों एवं प्रतिभागियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस प्रकार के संवाद से जनता की सहभागिता और विश्वास और अधिक सुदृढ़ होता है। उन्होंने कहा कि प्राप्त सुझाव प्रदेश के संतुलित, समावेशी एवं सतत विकास के लिए महत्वपूर्ण आधार सिद्ध होंगे।

बजट पूर्व संवाद कार्यक्रम का संचालन अपर सचिव मनमोहन मैनाली द्वारा किया गया। कार्यक्रम में कृषि, उद्योग, व्यापार, पंचायत, शहरी विकास आदि से जुड़े 200 से अधिक प्रतिनिधियों ने प्रतिभाग किया। जिला पंचायत पौड़ी की अध्यक्षा रचना बुटोला, मेयर नगर निगम श्रीनगर आरती भंडारी, ऋषिकेश शंभू पासवान, कोटद्वार शैलेन्द्र रावत, रुड़की अनीता देवी अग्रवाल, नगर पालिकाध्यक्ष पौड़ी हिमानी नेगी, आयुक्त गढ़वाल/सचिव उद्योग विनय शंकर पांडे, पुलिस महानिरीक्षक राजीव स्वरूप, संयुक्त सचिव सुरेन्द्र सिंह रावत, आयुक्त ग्राम विकास अनुराधा पाल, अपर सचिव डॉ. आनंद श्रीवास्तव, डॉ. सौरभ गहरवार, अभिषेक रोहिला, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक सर्वेश पंवार, मुख्य विकास अधिकारी गिरीश गुणवंत, अपर ज़िलाधिकारी अनिल गर्ब्याल, संयुक्त मजिस्ट्रेट दीक्षिता जोशी, जिलाध्यक्ष भाजपा कमल किशोर रावत सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी, कृषक, उद्यमी, जनप्रतिनिधि तथा हितधारक मौजूद रहे।

सीएम के दिशा निर्देशन में आवास परिषद का बड़ा फैसला, प्रदेश के प्रमुख शहरों में विकसित होंगे आधुनिक सामुदायिक केंद्र और आवासीय योजनाएं

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के दिशा निर्देशन में उत्तराखण्ड आवास एवं विकास परिषद ने शहरी विकास को नई दिशा देने के लिए महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं। गुरुवार को आवास सचिव एवं आवास आयुक्त डॉ. आर. राजेश कुमार की अध्यक्षता में हुई समीक्षा बैठक में कई महत्वपूर्ण फैसलों पर मुहर लगी। उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में परिषद की विभिन्न योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की गई और आम जनता को सुनियोजित, सुविधायुक्त एवं किफायती आवास उपलब्ध कराने के लिए ठोस कार्ययोजना तय की गई। बैठक में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि परिषद की योजनाएं केवल भवन निर्माण तक सीमित न रहें, बल्कि नागरिकों को बेहतर जीवनस्तर और आधुनिक आधारभूत सुविधाएं भी उपलब्ध कराएं।

*प्रमुख शहरों में बनेंगे आधुनिक सामुदायिक केंद्र*
बैठक की अध्यक्षता करते हुए आवास सचिव एवं आवास आयुक्त डॉ. आर. राजेश कुमार ने कहा कि परिषद द्वारा देहरादून, ऋषिकेश, रूड़की, काशीपुर सहित अन्य नगरों में आधुनिक सामुदायिक केंद्र विकसित किए जाने का प्रस्ताव रखा गया है। इन केंद्रों को इस प्रकार डिजाइन किया जाएगा कि आम नागरिक विवाह समारोह, सामाजिक कार्यक्रम एवं अन्य आयोजनों के लिए कम दरों पर इनका उपयोग कर सकें। यह पहल मध्यमवर्गीय और निम्न आय वर्ग के परिवारों के लिए विशेष राहत लेकर आएगी। परिषद का मानना है कि इससे सामाजिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा और लोगों को निजी महंगे बैंक्वेट हॉल पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।

*चौड़ी सड़क, पार्क और बेहतर सुविधाओं से युक्त आवासीय कॉलोनियां*
आवास सचिव एवं आवास आयुक्त डॉ. आर. राजेश कुमार ने कहा कि समीक्षा बैठक में देहरादून, ऋषिकेश, हरिद्वार, रूड़की, काशीपुर, जसपुर और अल्मोड़ा में भूखण्डों और भवनों के आवंटन की प्रक्रिया को तेज करने के निर्देश दिए गए। इन योजनाओं में चौड़ी सड़कें, हरित पार्क, सामुदायिक केंद्र और अन्य मूलभूत सुविधाएं सुनिश्चित की जाएंगी। परिषद का उद्देश्य है कि नागरिकों को सुनियोजित वातावरण में सुरक्षित और व्यवस्थित आवास मिल सके। इससे न केवल जीवनस्तर सुधरेगा बल्कि राज्य की आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि होगी।

*श्रीनगर और जसपुर योजना को प्राथमिकता*
बैठक में श्रीनगर आवास योजना और जसपुर आवास योजना को प्राथमिकता के आधार पर विकसित करने का निर्णय लिया गया। इन योजनाओं में आधुनिक सुविधाओं से युक्त आवासीय ढांचा तैयार किया जाएगा, जिससे स्थानीय नागरिकों को बेहतर आवासीय विकल्प उपलब्ध हो सकें। परिषद ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि इन योजनाओं की रूपरेखा समयबद्ध तरीके से तैयार कर शीघ्र क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए।

आवास सचिव एवं आवास आयुक्त डॉ. आर. राजेश कुमार ने कहा कि उत्तर प्रदेश आवास एवं विकास परिषद की तर्ज पर उत्तराखण्ड में भी लैंड पूलिंग मॉडल लागू करने के प्रस्ताव पर विस्तार से चर्चा हुई। इस मॉडल के माध्यम से भूमि स्वामियों की सहभागिता से बड़ी और सुव्यवस्थित आवासीय योजनाएं विकसित की जाएंगी। इस व्यवस्था से अवैध प्लॉटिंग पर रोक लगेगी और पारदर्शी, योजनाबद्ध विकास को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही आम नागरिकों को बेहतर बुनियादी ढांचे के साथ आवास उपलब्ध कराना संभव होगा। इस महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक में अपर आवास आयुक्त दिनेश प्रताप सिंह, सीनियर अस्टिेंट नवीन शाह समेत अधिकारी-कर्मचारी मौजूद थे।

आवास सचिव एवं आवास आयुक्त डॉ. आर. राजेश कुमार ने कहा कि परिषद का लक्ष्य केवल मकान बनाना नहीं, बल्कि नागरिकों को सम्मानजनक और सुविधायुक्त जीवन देना है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के विभिन्न शहरों में सामुदायिक केंद्रों का निर्माण सामाजिक दृष्टि से एक बड़ी पहल होगी, जिससे आम जनता को कम लागत में बेहतर सुविधा मिल सकेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि सभी आवासीय योजनाओं में गुणवत्ता, पारदर्शिता और समयबद्धता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी। श्रीनगर और जसपुर योजनाओं को शीघ्र धरातल पर उतारने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही लैंड पूलिंग मॉडल को अपनाकर सहभागितापूर्ण और संतुलित शहरी विकास सुनिश्चित किया जाएगा।

जनता दरबार अभियान से प्रशासनिक व्यवस्था बनी और अधिक सुलभ और पारदर्शी: धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने विकास खंड परिसर चिन्यालीसौड़ में आयोजित जन-जन की सरकार,जन -जन के द्वार कार्यक्रम में विभागीय स्टालों का निरीक्षण कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री ने ग्रामीणों की समस्या एवं शिकायतें सुनते हुए मौके पर ही अधिकारियों की उपस्थिति में अधिकांश समस्याओं का निस्तारण किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा संचालित “जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार” कार्यक्रम से आम जन को राहत मिली है तथा प्रशासनिक व्यवस्था और अधिक सुगम और पारदर्शी हुई है। इस अभियान के तहत अब तक 600 से अधिक शिविर आयोजित किए जा चुके हैं। इन शिविरों में पाँच लाख से अधिक लोगों ने भाग लिया, जबकि 40 हजार से ज्यादा लोगों को विभिन्न योजनाओं का सीधा लाभ प्रदान किया गया है। उन्होंने कहा कि सरकार की मंशा है कि दूर-दराज के ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को छोटी-छोटी समस्याओं के समाधान के लिए जिला मुख्यालय तक न जाना पड़े। इसी उद्देश्य से अभियान चलाकर गांव-गांव में शिविर लगाए जा रहे हैं, जहां मौके पर ही समस्याओं का निराकरण किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस पहल से आमजन को राहत मिली है और प्रशासनिक व्यवस्था अधिक सुलभ एवं पारदर्शी बनी है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में हैली सेवा के विस्तार के लिए सरकार ने अहम निर्णय लिए है। उन्होंने कहा कि चिन्यालीसौड़ एवं गौचर हवाई पट्टी से हैली सेवा शुरू होगी। दोनों हवाई पट्टी सेना के माध्यम से संचालित करने की योजना है। उन्होंने कहा कि अप्रैल से चारधाम यात्रा शुरू हो जाएगी। सरकार ने यात्रा की तैयारी पहले से ही शुरू कर दी है। ताकि यात्री, श्रद्धालु यहां से अच्छा अनुभव लेकर जाएं। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार यात्रा शुरू कराने में समन्वयक के रूप में है जबकि असली यात्रा शुरू कराने में स्थानीय हितधारक, तीर्थ पुरोहित, होटल,टैक्सी, मैक्सी स्थानीय लोग है।

मुख्यमंत्री ने कहा की आज पूरी दुनिया में सनातन का उद्घोष हो रहा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत दुनिया का सिरमौर बनेगा प्रधानमंत्री ने जो विकसित भारत का संकल्प लिया है उसमें उत्तराखंड भी अपना महत्वपूर्ण रूप से योगदान देगा। मुख्यमंत्री ने महिला सशक्तिकरण का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य सरकार ने तय किया है कि हमारी बहनों द्वारा उत्पादित उत्पादों की देश ही नही बल्कि दुनिया में पहचान मिल सके जिसके लिए निरंतर काम किया जा रहा है। कहा कि महिलाओं द्वारा जो भी उत्पाद बनाये जा रहे है उसकी देश और दुनिया में मांग बढ़ी है। इस दिशा में राज्य सरकार ने अब तक दो लाख से अधिक लखपति दीदियों को सशक्त किया है। इस दौरान मुख्यमंत्री ने स्थानीय लोगों की मांग पर सीएचसी चिन्यालीसौड़ एवं महाविद्यालय का उच्चीकरण को सीएम घोषणा में सम्मिलित करने का आश्वसन दिया।

मुख्य सचिव आनन्द वर्द्धन ने इस अवसर पर अपने सम्बोधन में कहा कि मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में जन-जन की सरकार,जन जन के द्वार अभियान सफलतापूर्वक चलाया गया है। जिसमें अब तक 5 लाख से अधिक नागरिकों ने प्रतिभाग किया तथा 40 हजार से अधिक नागरिकों के विभिन्न प्रकार के प्रमाण पत्र जारी किए गए। ग्रामीणों की छोटी-छोटी समस्याओं के निस्तारण के लिए संयुक्त टीमें गठित कर समस्याओं का मौके पर समाधान किया जा रहा है। जिनका निस्तारण नही किया जा सका उन्हें ऑनलाइन कर नियमित रूप से फॉलोअप करते हुए उनका निस्तारण किया जाएगा।

इस अवसर पर मुख्य सचिव उत्तराखंड शासन आनन्द वर्द्धन, यमुनोत्री विधायक संजय डोभाल, दर्जाधारी राज्य मंत्री रामसुंदर नौटियाल, प्रताप पंवार, गीताराम गौड़, गढ़वाल समन्वयक किशोर भट्ट, प्रदेश मीडिया प्रभारी भाजपा मनवीर चौहान, प्रदेश उपाध्यक्ष भाजपा डॉ. स्वराज विद्वान, ब्लाक प्रमुख रणबीर सिंह महंत, नगर पालिका अध्यक्ष मनोज कोहली, अन्य जनप्रतिनिधिगण एवं जिलाधिकारी प्रशान्त आर्य, पुलिस अधीक्षक कमलेश उपाध्याय, सहित अन्य जिला स्तरीय अधिकारी उपस्थित रहे।

दून मेडिकल कॉलेज में सीएम ने मरीजों और तीमारदारो से सीधे संवाद कर जाना हाल-चाल

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बुधवार रात्रि राजकीय दून मेडिकल कॉलेज चिकित्सालय, देहरादून पहुंचकर अस्पताल की व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया। देर रात हुए इस निरीक्षण से अस्पताल प्रशासन में सक्रियता बढ़ गई।

मुख्यमंत्री ने आपातकालीन कक्ष, वार्डों, दवा वितरण केंद्र, स्वच्छता व्यवस्था तथा मरीजों को उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं का निरीक्षण किया। उन्होंने अस्पताल में भर्ती मरीजों और उनके तीमारदारों से सीधे बातचीत कर उपचार, दवाओं की उपलब्धता, जांच सुविधाओं तथा अन्य व्यवस्थाओं के संबंध में फीडबैक लिया।

मरीजों से संवाद करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार का लक्ष्य प्रत्येक नागरिक को समय पर, सुलभ और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि अस्पताल में स्वच्छता, दवाओं की उपलब्धता, चिकित्सकीय स्टाफ की उपस्थिति तथा जांच सेवाओं में किसी भी प्रकार की ढिलाई स्वीकार नहीं की जाएगी।

मुख्यमंत्री ने अस्पताल प्रशासन को निर्देश दिए कि गंभीर मरीजों के उपचार में विशेष सतर्कता बरती जाए तथा तीमारदारों को आवश्यक जानकारी समय पर उपलब्ध कराई जाए। उन्होंने यह भी कहा कि सरकारी अस्पतालों की व्यवस्थाएं निजी अस्पतालों के समकक्ष बेहतर और भरोसेमंद बनें, यह सरकार की प्राथमिकता है।

इस दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए राज्य सरकार लगातार संसाधनों का विस्तार कर रही है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि आमजन को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो, यह सुनिश्चित किया जाए।

इस अवसर पर दून मेडिकल कॉलेज चिकित्सालय के चिकित्सक व अधिकारी मौजूद थे।

उत्तराखंड ने सौर ऊर्जा स्थापना में 01 गीगावाट का ऐतिहासिक आंकड़ा पार किया

उत्तराखंड ने नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए राज्य में स्थापित सौर ऊर्जा क्षमता को 1 गीगावाट (1000 मेगावाट) से अधिक के स्तर पर पहुँचा दिया है। नवीनतम आँकड़ों के अनुसार राज्य में कुल स्थापित सौर क्षमता लगभग 1027.87 मेगावाट से अधिक हो चुकी है, जो स्वच्छ और हरित ऊर्जा की दिशा में राज्य की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्य में सौर ऊर्जा क्षमता के 1 गीगावाट का आंकड़ा पार करने पर कहा कि यह उपलब्धि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व और नवीकरणीय ऊर्जा के प्रति उनकी स्पष्ट नीति का परिणाम है|मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने “आत्मनिर्भर भारत” और हरित ऊर्जा के जिस विजन को देश के सामने रखा, उसी से प्रेरित होकर उत्तराखंड में सौर ऊर्जा को जनआंदोलन का रूप दिया गया है। केंद्र सरकार की योजनाओं और राज्य सरकार की सक्रिय पहल के समन्वय से आज हजारों युवाओं और स्थानीय उद्यमियों को स्वरोजगार के नए अवसर प्राप्त हुए हैं।उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि प्रधानमंत्री मोदी जी के मार्गदर्शन में उत्तराखंड हरित ऊर्जा के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में अपनी पहचान और मजबूत करेगा।

यह उपलब्धि विभिन्न योजनाओं और पहलों के माध्यम से संभव हुई है, जिनमें ग्रिड कनेक्टेड रूफटॉप सोलर परियोजनाएं, ग्राउंड माउंटेड सोलर प्लांट, सरकारी भवनों पर सौर संयंत्र, कृषि क्षेत्र के लिए सोलर पंप, घरेलू उपभोक्ताओं के लिए सोलर योजनाएं तथा कॉमर्शियल एवं औद्योगिक क्षेत्र शामिल हैं।

राज्य की कुल स्थापित सौर क्षमता में प्रमुखतः ग्राउंड माउंटेड 397 मेगावाट, रूफटॉप सोलर पावर प्लांट (पीएम सूर्यघर) 241 मेगावाट, मुख्यमंत्री सौर स्वरोजगार योजना 137 मेगावाट, कॉमर्शियल नेट मीटरिंग 110 मेगावाट, कैप्टिव सोलर पावर प्लांट 51 मेगावाट, कनाल टॉप एवं कनाल बैंक पर 37 मेगावाट एवं सरकारी भवनों पर 26 मेगावाट सोलर पावर प्लांट शामिल हैं। वर्तमान में मुख्यमंत्री सौर स्वरोजगार योजना के अंतर्गत 100 मेगावाट से अधिक क्षमता के संयंत्र, कैप्टिव सोलर पावर प्लांट के 30 मेगावाट तथा सरकारी भवनों पर 13.5 मेगावाट के सोलर पावर प्लांट क्षमता के संयंत्र स्थापित किए जा रहे हैं। इन प्रयासों से केवल स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन बढ़ा है, बल्कि कार्बन उत्सर्जन में कमी, ऊर्जा आत्मनिर्भरता और स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन को भी बढ़ावा मिला है।

इस ऐतिहासिक उपलब्धि में Uttarakhand Renewable Energy Development Agency (UREDA) का विशेष योगदान रहा है। UREDA ने राज्य में सौर ऊर्जा परियोजनाओं के क्रियान्वयन, जन-जागरूकता, तकनीकी मार्गदर्शन तथा विभिन्न सरकारी योजनाओं के प्रभावी संचालन में अग्रणी भूमिका निभाई है। दूरस्थ और पर्वतीय क्षेत्रों तक सौर ऊर्जा समाधान पहुँचाने के निरंतर प्रयासों ने इस उपलब्धि को संभव बनाया है।

राज्य में सौर ऊर्जा की बढ़ावा देने हेतु अनुकूल नीतिगत वातावरण, सब्सिडी प्रावधान, सरल अनुमोदन प्रक्रिया तथा निजी निवेश को प्रोत्साहन जैसी पहलों ने भी सकारात्मक परिणाम दिए हैं। उत्तराखंड तेजी से देश के अग्रणी सौर ऊर्जा राज्यों में अपनी पहचान मजबूत कर रहा है।

सरकार ने भविष्य में भी सौर ऊर्जा क्षमता को और बढ़ाने, दूरस्थ क्षेत्रों में सौर समाधानों को प्रोत्साहित करने तथा आम नागरिकों की भागीदारी बढ़ाने का लक्ष्य रखा है। यह उपलब्धि सतत विकास, पर्यावरण संरक्षण और ऊर्जा सुरक्षा की दिशा में एक मजबूत कदम है।