मजबूत एम-पैक्स से गांव मजबूत होंगे और मजबूत गांवों से समृद्ध उत्तराखण्ड बनेगाः धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने वर्चुअल माध्यम से गोविन्द बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, पंतनगर में सहकार भारती उत्तराखण्ड द्वारा आयोजित श्री लक्ष्मणराव इनामदार द्वितीय सहकारिता नेतृत्व प्रशिक्षण वर्ग के शुभारंभ सत्र को संबोधित किया।

मुख्यमंत्री ने सहकार भारती के संस्थापक लक्ष्मणराव इनामदार की जयंती पर उन्हें नमन करते हुए कहा कि सहकारिता को सशक्त बनाकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करने की दिशा में ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। उन्होंने कहा कि मजबूत नेतृत्व से एम-पैक्स मजबूत होंगे, मजबूत एम-पैक्स से गांव मजबूत होंगे और मजबूत गांवों से उत्तराखण्ड समृद्ध बनेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पंतनगर की ज्ञानभूमि से सहकारिता को नई दिशा देने वाली अनेक महत्वपूर्ण पहल प्रारंभ की गई हैं। सहकार ग्रंथ के लोकार्पण, देवभूमि सारथी राज्य सहकारी संघ की पहल, सहकारिता के क्षेत्र में नए पाठ्यक्रम की शुरुआत, युवाओं को सहकारिता से जोड़ने के लिए सोशल मीडिया रील्स अभियान तथा एम-पैक्स नेतृत्व प्रशिक्षण कार्यक्रम के शुभारंभ से सहकारिता के क्षेत्र को नई ऊर्जा मिलेगी। उन्होंने इन पहलों के लिए सहकारिता विभाग, पंतनगर विश्वविद्यालय और सहकार भारती को शुभकामनाएं दीं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य देवभूमि उत्तराखण्ड को ‘सहकार से समृद्धि’ की दिशा में तेजी से आगे बढ़ाना है। पर्वतीय राज्य उत्तराखण्ड में सहकारिता अनेक चुनौतियों के समाधान का प्रभावी माध्यम बन सकती है। पलायन को रोकने, पर्वतीय कृषि को मजबूत करने, स्थानीय उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने में सहकारिता की महत्वपूर्ण भूमिका है।

उन्होंने कहा कि पैक्स राज्य की सहकारिता व्यवस्था की महत्वपूर्ण आधारशिला हैं। बदलती आवश्यकताओं के अनुरूप इन्हें एम-पैक्स के रूप में और अधिक सक्षम एवं प्रभावी बनाया जा रहा है। राज्य सरकार एम-पैक्स के माध्यम से किसानों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने, युवाओं के लिए नए अवसर सृजित करने और ग्रामीण क्षेत्रों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने की दिशा में कार्य कर रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि एम-पैक्स को प्रभावी बनाने के लिए कुशल और दूरदर्शी नेतृत्व आवश्यक है। इसी उद्देश्य से नेतृत्व प्रशिक्षण कार्यक्रम प्रारंभ किया गया है। प्रशिक्षण केवल जानकारी बढ़ाने का माध्यम नहीं, बल्कि नेतृत्व को नई सोच, कार्यदृष्टि और दिशा प्रदान करने का भी सशक्त माध्यम है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि किसान, युवा और मातृशक्ति सभी को सहकारिता से जोड़ना राज्य सरकार की प्राथमिकता है। सरकार सहकारिता को केवल समितियों तक सीमित रखने के बजाय इसे जनभागीदारी और आर्थिक सशक्तिकरण का प्रभावी माध्यम बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। प्रयास है कि सहकारिता का लाभ गांव के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे और प्रत्येक व्यक्ति विकास की प्रक्रिया में सहभागी बने।

मुख्यमंत्री ने प्रशिक्षण कार्यक्रम में प्रतिभाग कर रहे प्रतिनिधियों से अपने-अपने क्षेत्रों में सहकारिता की भावना को और अधिक मजबूत करने तथा अधिक से अधिक लोगों को इससे जोड़ने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि सहकारिता को जन-जन की शक्ति बनाकर गांवों को सशक्त करने, युवाओं को अवसर प्रदान करने और किसानों की आर्थिक शक्ति बढ़ाने की दिशा में सभी को मिलकर कार्य करना होगा।

इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री डॉ. धन सिंह रावत, कुलपति गोविन्द बल्लभ पंत कृषि विश्वविद्यालय पंतनगर शिवेन्द्र कुमार कश्यप, सहकार भारती संघ से राष्ट्रीय महासचिव दीपक चौरसिया, प्रदेश अध्यक्ष विनोद कुमार गौड़, संगठन मंत्री मणिराम नौटियाल, प्रदेश कोषाध्यक्ष सुधीर कुमार जोशी सहित डॉ. बृजेश, डॉ. दिनेश कुमार सिंह वर्चुअल माध्यम से जुड़े रहे।

धामी सरकार की दूरगामी सोच, 51 रोपवे के साथ 160 किमी लंबा नेटवर्क की तैयारी

देहरादून। उत्तराखण्ड को देश का रोपवे हब बनाने की बड़ी तैयारी है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर रोपवे परियोजनाओं को धरातल पर उतारने का काम तेज कर दिया गया है। राज्य और केंद्र सरकार की साझेदारी में प्रदेश में लगभग 160 किमी लंबाई के 51 रोपवे परियोजनाएं प्रस्तावित की गई हैं।

सुगम, सुरक्षित और पर्यावरण के अनुकूल परिवहन कनेक्टिविटी का विकास मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का संकल्प है। इस संकल्प को साकार करने के लिए प्रदेश में सड़क, रेल और हवाई सेवाओ के साथ ही अब रोपवे कनेक्टिविटी को रफ्तार दी जा रही है। प्रदेश की विषम भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए रोपवे बेहतर वैकल्पिक परिवहन साधन है। इससे जहां धार्मिक और पर्यटन स्थलों की पहुंच आसान होगी, वहीं तीर्थाटन, पर्यटन, रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। मुख्यमंत्री ने कार्यदायी संस्थाओं को आगामी 09 नवंबर तक रोपवे परियोजनाओं के कार्य धरातल पर शुरू करने के निर्देश दिए हैं। सीएम के कड़े रुख को देखते हुए अब परियोजनाओं का काम रफ्तार पकड़ रहा है।

क्यों जरूरी हैं रोपवे परियोजनाएं
उत्तराखण्ड में पर्यटकों की संख्या लगातार बढ़ रही है। बीते वर्ष 2025 में 06 करोड़ 03 लाख से अधिक पर्यटक/तीर्थयात्री यहां पहुंचे हैं। इसको देखते हुए सुगम, सुरक्षित और सुविधाजनक परिवहन व्यवस्था जरूरी है। जिस प्रकार से सड़कों पर यातायात के दबाव के साथ वाहन प्रदूषण बढ़ रहा है, उसका बेहतर विकल्प रोपवे व्यवस्था बन सकती है। दुर्गम पर्वतीय क्षेत्रों, जहां सड़क का निर्माण नहीं किया जा सका है, उन क्षेत्रों की मुश्किलें भी रोपवे बनने से कम होंगी।

इन एजेंसियों के जिम्मे हैं रोपवे परियोजनाएं
राष्ट्रीय राजमार्ग लॉजिस्टिक्स मैनेजमेंट लिमिटेड (एनएचएलएमएल), उत्तराखण्ड मैट्रो रेल कॉरपोरेशन, शहरी स्थापना एवं भवन निर्माण निगम व पर्यटन विभाग।

प्राथमिकता में छह परियोजनाएं
-सोनप्रयाग-केदारनाथ (रुद्रप्रयाग)
-गोविंदघाट- हेमकुंड साहिब (चमोली)
-रानीबाग-हनुमानगढ़ी-कैची धाम (नैनीताल)
-कनकचौरी-कार्तिक स्वामी (रुद्रप्रयाग)
-जोशीमठ-औली-गोरसों (चमोली)
-रैथल-दयारा बुग्याल (उत्तरकाशी)

मसूरी रोपवे का काम प्रगति पर
देहरादून जिले में पुरुकुल गांव से लाइब्रेरी मसूरी तक लगभग 5.2 किमी लंबे रोपवे प्रोजेक्ट का निर्माण कार्य प्रगति पर है। इस रोपवे के बनने से देहरादून से मसूरी तक का एक से डेढ़ घंटे का सफर 15 से 20 मिनट में पूरा हो सकेगा।

जानकी चट्टी (खरसाली)-यमुनोत्री रोपवे
इस रोपवे के बनने से श्रद्धालुओं को जानकी चट्टी से यमुनोत्री मंदिर तक की करीब पांच किलोमीटर की खड़ी पैदल चढ़ाई से राहत मिल जाएगी।

ठुलीगाड़-पूर्णागिरि रोपवे
उत्तर भारत का प्रमुख सिद्धपीठ है चंपावत जिले में स्थित पूर्णागिरि धाम। यहां भी श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। इस वर्ष 01 अप्रैल से 19 सितंबर तक 24 लाख 62 हजार 319 श्रद्धालु यहां पहुंच चुके हैं। यह यात्रा भी कठिन पहाड़ी मार्ग से गुजरती है। रोपवे बनने से यात्रियों को राहत मिलेगी।

फिजिबिलिटी स्टडी के लिए उत्तराखण्ड मैट्रो को हस्तांतरित रोपवे परियोजनाएं

जनपद अल्मोड़ा
रानीखेत-चौबटिया (4 किमी)।
कसारदेवी-अल्मोड़ा (2.76 किमी)।
अल्मोड़ा-द्वाराहाट दूनागिरी मोटर मार्ग 14 किमी (हनुमान मंदिर)-दूनागिरी मंदिर (.63 किमी)।
द्वाराहाट-कुकुछीना-पाण्डुखोली (1.9 किमी)।
चौखुटिया-तरगताल-कुकुछीना (1.9 किमी)।
चौघानपाटा-बेस अस्पताल (1.5 किमी)
बेस अस्पताल से नवीन कलक्ट्रेट (1.35 किमी)।

जनपद नैनीताल
नवगढ़ क्लब तल्लीताल बाजार से गंगनाथ मंदिर के नीचे (01 किमी)।

जनपद देहरादून
ई एस आई डिस्पेंसरी, कैमल बैक रोड से लाल टिब्बा मसूरी (2.5 किमी)।

-ई एस आई डिस्पेंसरी, कैमल बैक रोड से जॉर्ज एवरेस्ट मसूरी (4.1 किमी)।

-भनोट एस्टेट, कैमल बैक रोड से कैम्पटी फॉल, मसूरी (4.4 किमी)।

-मल्टी लेवल पार्किंग से चिक चॉकलेट मसूरी, (0.23 किमी)।

-जॉर्ज एवरेस्ट हाउस से भद्राज मंदिर, मसूरी (7.4 किमी)।

-टपकेश्वर महादेव मंदिर से गुच्चूपानी रॉबर्स केव (4.5 किमी)।

-गुच्चूपानी से पैसिफिक मॉल (1.5 किमी)।

-पैसिफिक मॉल से पैसिफिक गोल्फ (3.7किमी)।

-पैसिफिक मॉल से पुरुकुल (4.4 किमी)।
-पैसिफिक गोल्फ से सहस्त्रधारा (1.5 किमी)

-रायपुर से मालदेवता (4.6 किमी)।

-मालदेवता से धनोल्टी (15 किमी)।

नीलकंठ और हरिद्वार रोपवे पर फोकस रू डॉ राजेश
सचिव आवास डॉ आर राजेश कुमार के मुताबिक सबसे पहले ऋषिकेश त्रिवेणी घाट से पौड़ी जनपद में स्थित नीलकंठ मंदिर और हरिद्वार के इंटीग्रेटेड रोपवे पर फोकस किया जा रहा है। नीलकंठ रोपवे की लंबाई छह किमी होगी। पहले चरण में 4.1 किलोमीटर लंबा रोपवे त्रिवेणी घाट से नीलकंठ महादेव मंदिर तक बनाया जा रहा है। इस परियोजना के पूर्ण होने पर ऋषिकेश में यातायात का दबाव काफी कम हो सकेगा। चंडी देवी-मंसादेवी रोपवे परियोजना के तहत मौजूदा अलाइनमेंट के अतिरिक्त दो समानांतर नए अलाइनमेंट विकसित किए जा रहे हैं।

उत्तराखंड की विषम भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए रोपवे कनेक्टिविटी अत्यंत महत्वपूर्ण है। इससे न केवल धार्मिक और पर्यटन स्थलों की पहुँच आसान होगी बल्कि सड़कों पर यातायात का दबाव कम होने के साथ ही पर्यावरण की सुरक्षा भी हो सकेगी। पर्यटन गतिविधियां बढ़ने से स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और स्वरोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।
-पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री, उत्तराखण्ड

भारतीय सेना और स्थानीय नागरिकों के बीच सहयोग एवं समन्वय को मजबूत करता देवभूमि कल्चरल फेस्टिवल-2026 संपन्न

श्री बदरीनाथ धाम के टूरिस्ट अराइवल प्लाजा में भारतीय सेना एवं जिला प्रशासन चमोली के संयुक्त तत्वावधान में ऑपरेशन सद्भावना के तहत आयोजित दो दिवसीय ‘देवभूमि कल्चरल फेस्टिवल-2026’ का समापन हुआ। ‘हमारी विरासत, हमारा भविष्य’ थीम पर आयोजित महोत्सव में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्य अतिथि के रूप में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने विभिन्न सांस्कृतिक प्रतियोगिताओं के विजेता एवं उपविजेता प्रतिभागियों को पुरस्कार प्रदान कर सम्मानित किया।

मुख्यमंत्री ने इससे पहले बामणी गांव पहुंचकर नंदा अष्टमी के पावन अवसर पर आयोजित उत्सव में ग्रामीणों के साथ प्रतिभाग किया। उन्होंने ग्रामीणों को नंदा अष्टमी की शुभकामनाएं देते हुए देवभूमि की समृद्ध लोक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण एवं संवर्धन पर जोर दिया।

मुख्यमंत्री ने महोत्सव परिसर में लगाए गए स्थानीय उत्पादों, महिला स्वयं सहायता समूहों, हस्तशिल्प, पारंपरिक व्यंजनों एवं अन्य प्रदर्शनी स्टॉलों का अवलोकन किया। उन्होंने महिला स्वयं सहायता समूहों द्वारा तैयार किए जा रहे स्थानीय उत्पादों एवं पहाड़ी व्यंजनों की जानकारी ली और स्थानीय उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने के प्रयासों की सराहना की। मुख्यमंत्री ने कहा कि स्थानीय उत्पादों को पर्यटन से जोड़ने से सीमांत क्षेत्रों में आजीविका और स्वरोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।

मुख्यमंत्री ने भारतीय सेना द्वारा लगाई गई सैन्य प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया तथा अत्याधुनिक हथियारों एवं सैन्य उपकरणों के संबंध में जानकारी ली। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की प्रदर्शनी युवाओं को भारतीय सेना की कार्यप्रणाली से परिचित कराने के साथ ही उनमें राष्ट्र सेवा और देशभक्ति की भावना को और मजबूत करने का माध्यम है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने समारोह को संबोधित करते हुए भगवान बदरीविशाल की पावन धरा पर आयोजित इस सांस्कृतिक महोत्सव में सेना के वीर जवानों, अधिकारियों, स्थानीय नागरिकों, युवाओं, विद्यार्थियों, कलाकारों एवं श्रद्धालुओं का स्वागत एवं अभिनंदन किया। उन्होंने कहा कि देवभूमि उत्तराखण्ड की आत्मा उसकी लोक संस्कृति में बसती है। हमारे लोक नृत्य, लोक गीत, परंपराएं एवं रीति-रिवाज हमारी विशिष्ट पहचान हैं। ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को अपनी भाषा, संस्कृति और जड़ों से जोड़ने के साथ ही सीमांत क्षेत्रों के युवाओं को भारतीय सेना में सेवा के लिए प्रेरित करते हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘विकास भी, विरासत भी’ के मूल मंत्र के साथ राज्य सरकार संस्कृति एवं विरासत के संरक्षण के साथ विकास कार्यों को गति दे रही है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व एवं मार्गदर्शन में श्री बदरीनाथ धाम मास्टर प्लान के तहत तेजी से कार्य किया जा रहा है। कठिन भौगोलिक एवं मौसमी परिस्थितियों के बावजूद श्रद्धालुओं की सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए विकास कार्यों को समयबद्ध रूप से आगे बढ़ाया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम के माध्यम से सीमांत क्षेत्रों में सड़क, बिजली, दूरसंचार, पर्यटन एवं आजीविका से जुड़ी सुविधाओं को मजबूत किया जा रहा है। माणा, नीति और जादुंग जैसे सीमांत क्षेत्रों को पर्यटन एवं आजीविका से जोड़ते हुए स्थानीय रोजगार और स्वरोजगार को बढ़ावा दिया जा रहा है। सीमांत क्षेत्रों से पलायन रोकना और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना राज्य सरकार की प्राथमिकता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इसके लिए मिलेट मिशन, एप्पल मिशन, होम स्टे, कृषि, बागवानी, पशुपालन, दुग्ध उत्पादन, मधुमक्खी पालन, सुगंधित पौधों एवं स्थानीय मसालों की खेती के साथ-साथ शीतकालीन पर्यटन, साहसिक पर्यटन और ‘वेडिंग इन उत्तराखण्ड’ जैसी पहलों को बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में 3.10 लाख महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं और स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं स्थानीय उत्पादों, पहाड़ी व्यंजनों एवं हस्तशिल्प के माध्यम से आत्मनिर्भरता की नई मिसाल कायम कर रही हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय सेना एवं स्थानीय नागरिकों के बीच सहयोग, समन्वय और आपसी जुड़ाव को मजबूत करने में इस प्रकार के आयोजनों की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने महोत्सव में माणा गांव के ग्रामीणों द्वारा दी गई पारंपरिक प्रस्तुति की भी सराहना की।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड पर्यटन, आयुष, वेलनेस, आईटी एवं सौर ऊर्जा सहित विभिन्न क्षेत्रों में निवेश और रोजगार के अवसर बढ़ाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि स्टार्टअप इंडिया की रैंकिंग में उत्तराखण्ड को ‘लीडर्स’ श्रेणी प्राप्त हुई है तथा नीति आयोग के ैक्ळ इंडेक्स में उत्तराखण्ड ने देश में प्रथम स्थान प्राप्त किया है। उन्होंने कहा कि विकास की यात्रा में अपनी संस्कृति और जड़ों को साथ लेकर आगे बढ़ना आवश्यक है। लोक भाषाओं, लोक गीतों, लोक नृत्यों, पारंपरिक वेशभूषा, मेलों एवं पर्वों का संरक्षण हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।

मुख्यमंत्री ने देवभूमि कल्चरल फेस्टिवल-2026 के सफल आयोजन के लिए भारतीय सेना, जिला प्रशासन चमोली एवं सभी आयोजकों को बधाई दी। उन्होंने भगवान बदरीविशाल से सभी के सुख, समृद्धि एवं कल्याण की कामना की।

इस अवसर पर जीओसी-इन-सी सेंट्रल कमान लेफ्टिनेंट जनरल अनिंद्य सेनगुप्ता, जीओसी उत्तर भारत एरिया लेफ्टिनेंट जनरल डी.जी. मिश्रा, दर्जा मंत्री हरक सिंह, ब्रिगेडियर गौरव बत्रा, माधव प्रसाद सेमवाल सहित भारतीय सेना के अधिकारी, जनप्रतिनिधि, स्थानीय नागरिक, युवा, विद्यार्थी एवं विभिन्न क्षेत्रों से आए अतिथि उपस्थित रहे।

भगवान बदरीविशाल से प्रदेश की सुख-समृद्धि एवं खुशहाली की कामना की

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने श्री बदरीनाथ धाम पहुंचकर भगवान बदरीविशाल के दर्शन किए और विधिवत पूजा-अर्चना कर प्रदेश की सुख-समृद्धि एवं खुशहाली की कामना की।

इसके पश्चात मुख्यमंत्री ने बदरीनाथ मास्टर प्लान के अंतर्गत संचालित विभिन्न निर्माण एवं विकास कार्यों का स्थलीय निरीक्षण किया। उन्होंने आस्था पथ सहित अन्य निर्माणाधीन कार्यों का जायजा लेते हुए संबंधित अधिकारियों से कार्यों की प्रगति की जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्माण कार्य निर्धारित मानकों के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण एवं समयबद्ध तरीके से पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि कार्यों के दौरान श्रद्धालुओं की सुविधा के साथ ही धाम की धार्मिक, आध्यात्मिक एवं पारंपरिक गरिमा का विशेष ध्यान रखा जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में श्री बदरीनाथ धाम को उसके धार्मिक एवं पौराणिक महत्व के अनुरूप भव्य, दिव्य और सुव्यवस्थित स्वरूप देने की दिशा में तेजी से कार्य किए जा रहे हैं। मास्टर प्लान के अंतर्गत विकसित की जा रही सुविधाओं से धाम में आने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध होंगी। उन्होंने कहा कि विकास कार्यों में धाम की पारंपरिक पहचान, प्राकृतिक सौंदर्य और आध्यात्मिक स्वरूप के संरक्षण का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए।

इसके बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने श्री स्वामीनारायण गुरुकुल राजकोट संस्थान के तत्वावधान में आयोजित ‘बदरीनाथ धाम कथा महोत्सव’ में प्रतिभाग किया। महोत्सव में देश के विभिन्न क्षेत्रों से आए 150 से अधिक संत-साध्वी तथा 1200 से अधिक हरिभक्त शामिल हुए। इस अवसर पर श्री स्वामीनारायण गुरुकुल राजकोट संस्थान के पूज्यपाद महंत स्वामी श्री देवप्रसाददास स्वामी, पूज्यपाद सद्गुरुवर्य धर्मवल्लभदास स्वामी सहित बड़ी संख्या में संत एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि श्री बदरीनाथ धाम आना अपने आप में एक विशिष्ट आध्यात्मिक अनुभूति है। भगवान बदरीविशाल की कृपा और आशीर्वाद से इस पावन धाम में संतों एवं श्रद्धालुओं के बीच आयोजित कथा महोत्सव में सहभागी होना उनके लिए सौभाग्य का विषय है। उन्होंने कहा कि श्री बदरीनाथ धाम भारत की सनातन चेतना और आध्यात्मिक विरासत का प्रमुख केंद्र है। भारतीय शास्त्रों में भी इस पवित्र धाम की महिमा का विशेष वर्णन मिलता है। यह भूमि सदियों से तप, साधना और आध्यात्मिक चेतना का केंद्र रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश की प्राचीन विरासत, सनातन संस्कृति और आस्था के केंद्रों के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए निरंतर कार्य किया जा रहा है। प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में उत्तराखण्ड के प्रमुख तीर्थस्थलों पर श्रद्धालुओं के लिए सुविधाओं के विस्तार के साथ ही उनकी धार्मिक एवं सांस्कृतिक पहचान को और अधिक सुदृढ़ किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बाबा केदार की भूमि से 21वीं सदी के तीसरे दशक को उत्तराखण्ड का दशक बताया था। राज्य सरकार इस संकल्प को साकार करने के लिए पूरी प्रतिबद्धता से कार्य कर रही है। उत्तराखण्ड को प्रकृति ने अनुपम सौंदर्य के साथ ही अद्वितीय आध्यात्मिक संपदा भी प्रदान की है। चारधाम, पवित्र गंगा-यमुना, हिमालय और हेमकुंड साहिब सहित अनेक धार्मिक एवं आध्यात्मिक स्थल देवभूमि की विशिष्ट पहचान हैं। सरकार का प्रयास है कि इन तीर्थस्थलों का विकास श्रद्धालुओं की सुविधा के अनुरूप सुव्यवस्थित तरीके से हो और उनकी आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक गरिमा भी अक्षुण्ण रहे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि संत समाज का आशीर्वाद एवं मार्गदर्शन समाज और राष्ट्र के लिए सदैव प्रेरणादायी रहा है। इस प्रकार के आध्यात्मिक आयोजनों से हमारी सनातन परंपराओं, संस्कृति और जीवन मूल्यों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण योगदान मिलता है। उन्होंने कार्यक्रम में उपस्थित संतों एवं श्रद्धालुओं का आभार भी व्यक्त किया।

इस अवसर पर राज्य मंत्री हरक सिंह, माधव प्रसाद सेमवाल, भाजपा जिलाध्यक्ष गजपाल सिंह बर्त्वाल, जिला सहकारी बैंक के अध्यक्ष गजेन्द्र सिंह रावत, भाजपा जिला महामंत्री विनोद कनवासी, अरुण मैठाणी, जिलाधिकारी गौरव कुमार, पुलिस अधीक्षक सुरजीत सिंह पंवार सहित विभिन्न जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

उत्तराखंडः फर्जी प्रमाणपत्र मामले में सीएम पुष्कर सिंह धामी का सख्त एक्शन

नीट यू०जी० 2026 की उत्तराखण्ड राज्य केन्द्रीयकृत काउन्सिलिंग के दौरान फर्जी प्रमाणपत्रों के आधार पर प्रवेश लिए जाने की शिकायत पर, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सख्त रुख अपनाया है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर इस तरह के प्रकरण में शामिल सभी 8 अभ्यर्थियों के प्रमाणपत्र निरस्त किए जा चुके हैं। साथ ही, मुख्यमंत्री ने जांच का दायरा बढ़ाते हुए, सभी तरह की आरक्षित श्रेणी का लाभ लेने वाले प्रमाणपत्रों की जांच करने का निर्णय लिया है। इन प्रमाण पत्रों की जाँच/सत्यापन के बाद फर्जी प्रमाण पत्र पाये जाने पर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के भी निर्देश दिए हैं।

नीट यू०जी० 2026 की उत्तराखण्ड राज्य केन्द्रीयकृत काउन्सिलिंग में फर्जी प्रमाणपत्र की शुरुआती शिकायत के बाद से ही मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अधिकारियों को इस मामले में दूध का दूध, पानी का पानी करने के निर्देश दिए थे।ताकि फर्जी तथ्यों के आधार पर यही यदि किसी ने फर्जी प्रमाण पत्र बनाकर अनुचित लाभ लिया है तो उनके खिलाफ और इसको जारी करने की प्रक्रिया में शामिल सर्जरी कर्मियों के खिलाफ सख्त कार्यवाही की जा सके।इसी क्रम में जिला प्रशासन के स्तर से हुई जांच के बाद अब तक कुल 8 अभ्यर्थियों के प्रमाणपत्र निरस्त करते हुए, उनकी प्रवेश प्रक्रिया भी निरस्त की जा चुकी है। इस बीच कुछ और छात्रों द्वारा अलग -अलग आरक्षित श्रेणियों में कूटरचित प्रमाणपत्रों का प्रयोग किए जाने की आशंका को देखते हुए, इसकी जिला प्रशासन के स्तर पर जांच चल रही है। इसी क्रम में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने दो टूक कहा है कि यदि किसी अभ्यर्थी का प्रमाणपत्र कूटरचित पाया जाता है तो, ना सिर्फ प्रमाणपत्र को निरस्त किया जाएगा, साथ ही दोषियों के खिलाफ भी कठोर कार्रवाई की जाएगी।

नकल पर रोक के बाद नकली प्रमाणपत्रों पर सख्ती
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में प्रदेश सरकार इससे पहले सख्त नकल विरोधी कानून के जरिए भर्ती परीक्षाओं में नकल के चोर दरवाजों को हमेशा के लिए बंद कर चुकी है। इसके बाद प्रदेश में भर्ती परीक्षा पारदर्शी तरीके से सम्पन्न हो रही हैं, इसी क्रम में मुख्यमंत्री ने अब फर्जी प्रमाणपत्रों के आधार पर प्रवेश का लाभ लेने वालों पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार किसी भी स्तर पर योग्य अभ्यर्थियों का अहित नहीं होने देगी।

फर्जी प्रमाणपत्रों के जरिए प्रवेश का अपराध भी नकल जितना ही संगीन है। इसलिए प्रकरण संज्ञान में आते ही हमने अधिकारियों को इस मामले में पारदर्शी जांच कर कार्रवाई के निर्देश दिए। इसके बाद अब तक जांच में फर्जी प्रमाणित हो चुके प्रमाणपत्रों का निरस्त किया जा चुका है, जांच का दायरा बढ़ाते हुए, अब सभी श्रेणी के प्रमाणपत्रों की जांच की जाएगी। जो भी दोषी होगा उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री उत्तराखंड

सीएम बोले, युवा आयोग और अग्निवीर सेल से सुरक्षित होगा युवाओं का भविष्य

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने काशीपुर स्थित एक निजी होटल में आयोजित युवा विद्यार्थी संवाद कार्यक्रम में प्रतिभाग किया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने छात्र-छात्राओं से संवाद करते हुए उनके विचार और सुझाव सुने तथा विकसित भारत के लक्ष्य को साकार करने में युवाओं की भूमिका पर चर्चा की। विद्यार्थी संवाद कार्यक्रम में 17 विद्यालयों के 1400 से अधिक विद्यार्थियों प्रतिभाग किया।

मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विकसित भारत 2047 का संकल्प देश के सामने रखा है। इस संकल्प को सिद्धि तक पहुँचाने में युवाओं का योगदान सबसे महत्वपूर्ण रहने वाला है। उन्होंने कहा युवाओं के पास नया विजन है, आउट-ऑफ-द-बॉक्स थिंकिंग है और सबसे बड़ी बात कुछ कर गुजरने का जुनून है। उन्होंने कहा जब भी उन्हें प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों में जाकर विद्यार्थियों और युवाओं से मिलने का अवसर मिलता है, तो वो युवाओं से अवश्य संवाद करते हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा युवाओं के विचार सुनकर महसूस होता है कि देश का युवा बहुत जागरूक है, युवाओं को हर विषय की गहरी समझ है। उन्होंने कहा हाल ही में सरकार ने युवाओं से ष्मेरे सपनों के उत्तराखंडष् को लेकर सुझाव मांगे थे। इन सुझावों के माध्यम से विद्यार्थियों ने राज्य के अलग-अलग विषयों को लेकर बहुत अच्छे सुझाव दिए। युवाओं के विचारों को पढ़कर उनका विश्वास और मजबूत हो गया है कि उत्तराखंड का भविष्य बेहद ही सुरक्षित और सक्षम हाथों में है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड छोटा राज्य जरूर है, लेकिन यहां के युवाओं के सपने छोटे नहीं हैं। उन्होंने आज की पीढ़ी सपने देखने के साथ उन सपनों को पूरा करने का भी साहस रखती है। विकसित उत्तराखंड और विकसित भारत में युवाओं का योगदान सबसे महत्वपूर्ण होने वाला है। युवाओं में वो क्षमता है कि जो दुनिया के किसी भी बड़े मंच पर जाकर अपने प्रदेश और अपने देश का नाम रोशन कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि आगे चलकर आपमें से कोई वैज्ञानिक शिक्षक, खिलाड़ी बनेगा, तो कई युवा अपना स्टार्टअप शुरू करेंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा जब से उन्हें ष्मुख्य सेवकष् के रूप में काम करने का अवसर मिला, उनका यह संकल्प रहा है कि उत्तराखंड का कोई भी होनहार बेटा या बेटी अवसरों के अभाव में पीछे नहीं छूटना चाहिए। उन्होंने कहा राज्य सरकार, वर्चुअल क्लासरूम नेटवर्क का लगातार विस्तार कर रही है। शिक्षा की गुणवत्ता को मजबूत करने के लिए प्रदेश में 189 अटल उत्कृष्ट विद्यालय संचालित किए हैं तथा सरकारी विद्यालयों में एन.सीई.आर।टी आधारित पाठ्यक्रम लागू किया गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा सरकार द्वारा छात्राओं को नंदा गौरा योजना के माध्यम से आर्थिक सहायता दी जा रही है। विद्यार्थी विज्ञान और नई तकनीक से भी अवगत हो इसके लिए देहरादून में देश की पाँचवीं साइंस सिटी विकसित की जा रही है। प्रदेश में स्टेम लैब्स, साइंस और इनोवेशन से जुड़ी गतिविधियों तथा बाल विज्ञान कार्यक्रमों के जरिए विद्यार्थियों में वैज्ञानिक सोच, क्रिएटिविटी और प्रैक्टिकल लर्निंग को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। सरकार का स्पष्ट लक्ष्य है कि उत्तराखंड का हर विद्यार्थी ज्ञान, कौशल और तकनीक से सशक्त होकर भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार हो।

मुख्यमंत्री ने कहा राज्य सरकार का प्रयास है कि युवा जॉब सीकर के साथ जॉब क्रिएटर बनने का सपना देखें। जिसके लिए प्रदेश में स्टार्टअप और नवाचार को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। युवाओं को बदलती जरूरतों के अनुसार आधुनिक और डिमांड-बेस्ड स्किल्स से जोड़ने का प्रयास जारी है। युवाओं को बेहतर अवसरों के लिए अपना घर और अपना पहाड़ छोड़ने की मजबूरी न हो, इसके लिए प्रदेश में लगातार औद्योगिक और रोजगार के नए अवसर विकसित किए जा रहे हैं। खेल के क्षेत्र में राज्य सरकार द्वारा विश्वस्तरीय खेल नीतियां और स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स तैयार किए जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा सरकार युवाओं को बेहतर अवसर, संसाधन और प्लेटफॉर्म दे सकती है, लेकिन उन अवसरों को सफलता में बदलना सिर्फ और सिर्फ युवाओं के अपने हाथों में है। मुख्यमंत्री ने सभी युवाओं को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि सभी युवा खूब मेहनत करें, खूब पढ़ाई करें और सबसे बढ़कर अपने आप पर विश्वास रखें। उन्होंने कहा कोई भी लक्ष्य युवाओं के लिए बड़ा नहीं है, और युवा अपने सपनों को पूरा करने का संकल्प लेकर किसी भी कार्य में सफलता ले सकते हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पूर्व राष्ट्रपति और महान वैज्ञानिक डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम का जीवन हम सभी के लिए प्रेरणादायक उदाहरण है। उनका जीवन हमें सिखाता है कि परिस्थितियां चाहे कितनी भी कठिन क्यों न हों,अगर सीखने की इच्छा हो तो इंसान अपनी मंजिल तक जरूर पहुंचता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि समाज में नशा, बड़ी चुनौती बनकर सामने खड़ी है। नशा व्यक्ति के साथ पूरे परिवार के सपनों को बर्बाद कर देता है। मुख्यमंत्री ने युवाओं से नशे से दूर रहने का संकल्प लेने की भी बात कही। उन्होंने कहा स्वयं के साथ अपने दोस्तों,साथियों को भी इससे दूर रहने के लिए प्रेरित करना है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड की इस विकास यात्रा के युवा असली कर्णधार हैं युवाओं की सोच और मेहनत ही देवभूमि को विकास की नई ऊँचाइयों पर ले जाएगी। राज्य सरकार युवाओं की प्रतिभा को नए अवसर देने और रास्ते को आसान बनाने के लिए हरसंभव प्रयास करती रहेगी। उन्होंने विश्वास जताते हुए कहा कि आप जैसे प्रतिभाशाली व मेहनती युवा उत्तराखंड को देश का सबसे अग्रणी और सर्वश्रेष्ठ राज्य बनाने के ष्विकल्प रहित संकल्पष् को पूर्ण करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

मुख्यमंत्री ने विभिन्न मुद्दों पर विद्यार्थियों के सवालों का सहजता व सरलता जवाब देते हुए सरकार की प्राथमिकताओं और आगामी योजनाओं को स्पष्ट किया। विद्यार्थी शौर्य, दक्ष, चंद्रा, प्रभजोत, खुशी, सिमरन, कात्यायनी ,आरती, वैष्णवी और आद्रिका द्वारा पूछे गए प्रश्नों पर मुख्यमंत्री ने युवा आयोग, उत्तराखंड के विकास, अग्निवीर योजना, साईबर क्राइम और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर विचार साझा किए। छात्र शौर्य के सवाल का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि युवा आयोग युवाओं की पढ़ाई पूरी होने के बाद उनके लिए रोजगार के अवसर पैदा करने और सरकारी सेवाओं से जोड़ने का काम करेगा। छात्र दक्ष के श्सपनों का उत्तराखंडश् से जुड़े सवाल पर मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ऐसा उत्तराखंड बनाना चाहती है जहाँ युवाओं को शिक्षा, रोजगार और कौशल विकास के लिए पलायन न करना पड़े। राज्य में ही स्वास्थ्य, शिक्षा और बेहतर कनेक्टिविटी जैसी आधुनिक सुविधाएँ उपलब्ध कराई जा रही हैं। इसके साथ ही किसानों को उनके उत्पादों का स्थानीय स्तर पर बाजार मिले ताकि फसलों का उचित मूल्य प्राप्त हो सके।

छात्रा चंद्रा द्वारा अग्निवीर सैनिकों के भविष्य को लेकर पूछे गए प्रश्न पर उन्होंने बताया कि सरकार अग्निवीरों के भविष्य को लेकर पूरी तरह सजग है और इसके लिए अग्निवीर सेल का गठन किया जा रहा है। छात्रा ख़ुशी द्वारा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और टेक्नोलॉजी पर किए गए सवाल के जवाब देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि एआई हमारे लिए चुनौती के साथ-साथ एक बेहतरीन अवसर भी है। आधुनिकता के इस दौर में हमें इसके अनुरूप खुद को ढालना होगा। टेक्नोलॉजी से अनभिज्ञ न रहने की सलाह देते हुए उन्होंने कहा कि साइंस एंड टेक्नोलॉजी के नए शोधों ने कठिन कार्यों को आसान बना दिया है।

छात्रा प्रभजोत ने भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने को लेकर मुख्यमंत्री से सवाल किया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने छात्रों से संवाद करते हुए एक पारदर्शी, भ्रष्टाचार-मुक्त और सशक्त उत्तराखंड के निर्माण का संकल्प दोहराया। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ श्जीरो टॉलरेंसश् की नीति पर काम कर रही है और इसे पूरी तरह समाप्त करने के लिए प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री ने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि यदि कोई भी व्यक्ति काम के बदले रिश्वत मांगता है या अनुचित दबाव बनाता है, तो नागरिक निसंकोच टोल-फ्री नंबर 1064 या संबंधित मोबाइल ऐप पर अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं। उन्होंने आश्वस्त किया कि शिकायतकर्ता की पहचान पूरी तरह गुप्त रखी जाती है और प्राप्त शिकायतों पर विशेष टीमों द्वारा त्वरित जांच की जाती है। मुख्यमंत्री ने कहा हमारा राज्य देवभूमि है और देवभूमि की कार्यप्रणाली पूरी तरह पारदर्शी और भ्रष्टाचार-मुक्त होनी चाहिए।

इस दौरान विधायक त्रिलोक सिंह चीमा, मेयर दीपक बाली, दायित्वधारी उत्तम दत्ता, फ़रजाना बेगम, मनजीत सिंह राजू, सुरेंद्र सिंह नामधारी, मुकेश कुमार, जिलाध्यक्ष मनोजपाल, खिलेंद्र चौधरी, मोहनपाल, गुरविंदर सिंह चंडोक, एसएसपी अजय गणपति एवं अन्य अधिकारी व जनप्रतिनिधिगण मौजूद रहे।

महिलाएं सकारात्मक होकर अपने लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित करें, सरकार देगी पूरा साथः धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि प्रदेश सरकार महिलाओं के बनाए उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने के लिए संकल्पित होकर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि मातृशक्ति को सकारात्मक होकर, अपने लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित करना होगा, सरकार पूरी तरह उनके साथ है।

मुख्य सेवक सदन में मातृशक्ति संवाद एवं सम्मान समारोह आयोजित किया गया। आयोजन के दौरान मुख्यमंत्री ने महिलाओं से सीधा संवाद किया, जिसमें महिलाओं ने विभिन्न सरकारी योजनाओं पर अपने विचार रखे साथ ही सुझाव दिए। एक सवाल के जवाब में मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार महिलाओं में कौशल और उद्यमिता विकास से लेकर उनके बनाए उत्पादों का वैश्विक स्तर पर पहुंचाने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है। इसके लिए मुख्यमंत्री उद्यमशाला जैसी योजना लागू की गई है। महिला उद्यमियों को बढ़ावा देने के लिए आसान लोन उपलब्ध कराया जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश और प्रदेश की महिलाएं लगातार सशक्त हो रही हैं, खासकर हिमालय जैसी हिम्मत वाली उत्तराखंड की महिलाओं को केंद्र और राज्य सरकार की महिला केंद्रित नीतियों का विशेष लाभ मिला है।

महिला स्वयं सहायता समूहों को बड़े कारोबारी समूहों के रूप में विकसित करने के सुझाव पर सीएम पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि, सरकार इसके लिए मुख्यमंत्री सशक्त बहना योजना, संचालित कर रही है। साथ ही उत्तराखंड की महिलाओं के तैयार विशिष्ट उत्पादों को हाउस ऑफ हिमालय ब्रांड के जरिए नई पहचान दी गई है। अब सरकार देहरादून के सहस्रधारा रोड पर एक बड़ा सेंटर विकसित कर रही है, जहां सभी 13 जिलों की महिलाओं के बनाए विशिष्ट उत्पाद बिक्री के लिए उपलब्ध होंगे। उन्होंने कहा कि सरकार के प्रयासों से प्रदेश की महिलाएं सिलाई, बुनाई से लेकर कारखाना चलाने तक में सक्षम हो रही हैं। महिलाओं को सकारात्मक होकर, अपने लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित करना होगा, सरकार पूरी तरह उनके साथ है।
जीएमवीएन, केएमवीएन के गेस्ट हाउस के जरिए समूहों के उत्पाद बिक्री के सुझाव पर मुख्यमंत्री ने कहा कि महिला समूहों के उत्पादों को विभिन्न मेलों और आयोजनों के अलावा एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशन, रोडवेज बस अड्डे पर बिक्री के लिए उपलब्ध कराया जा रहा है। हाउस ऑफ हिमालयाज ब्रांड के उत्पाद ऑनलाइन बिक्री के लिए उपलब्ध हैं, उन्होंने कहा कि महिलाएं अपने उत्पाद की क्वालिटी पर ध्यान दें, एक बार भरोसा बन जाएगा तो लोग खुद खरीदने के लिए आगे आएंगे। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की महिलाओं के उत्पाद गुणवत्ता में बहुराष्ट्रीय कंपनियों के उत्पादों पर भारी पड़ते हैं। एक सवाल पर सीएम ने कहा कि मुख्यमंत्री उद्यमशाला योजना को वर्षभर लागू किए जाने पर विचार किया जाएगा।

इस अवसर पर विधायक दलीप रावत, गौ सेवा आयोग के अध्यक्ष राजेंद्र अंथवाल, नेहा शर्मा, किरण भट्ट, डॉ. प्राची कंडवाल एवं मातृशक्ति उपस्थित थी।

संवाद में भावुक पल
संवाद के दौरान एक महिला लाभार्थी ने बताया कि जीवन में एक क्षण ऐसा भी आया जब उनका घर तक बिक गया था, बच्चे खाना खाने के लिए भी मोहताज हो गए थे, लेकिन महिला स्वयं सहायता समूह से जुड़कर उन्होंने फिर अपने परिवार को संभाला। सरकार की बिना गारंटी का ऋण समूहों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। उक्त महिला लाभार्थी ने केंद्र और राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं पर आधारित गीत स्वतरूस्फूर्त तरीके से प्रस्तुत किया। उन्होंने ‘हमें तो मोदी ने बहुत कुछ दिया है, बहुत शुक्रिया है’ गीत के जरिए महिलाओं को बिना ब्याज के ऋण, लखपति दीदी योजना, महिला स्वयं सहायता समूहों के गठन सहित अन्य जनकल्याणकारी योजनाओं का उल्लेख करते हुए, कहा कि केंद्र और राज्य सरकार की महिला सशक्तिकरण को समर्पित नीतियों के चलते महिलाएं लगातार मजबूत हो रही हैं।

उत्तराखंड में धामी सरकार की नीति से मिला रिवर्स पलायन को बढ़ावा

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सरकार की होम स्टे नीति पहाड़ के गांवों में पर्यटन को नई रफ्तार देने के साथ ही रिवर्स पलायन को बढ़ावा देने में मील का पत्थर साबित हुई है। आज बड़ी संख्या में युवाओं और महिलाओं ने होम स्टे व्यवसाय को अपनाकर आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश की है। रिवर्स पलायन की बात करें तो करीब साढ़े छह हजार प्रवासी अपने गांव लौटे हैं। इनमें 22 फीसदी से अधिक प्रवासियों ने होम स्टे व्यवसाय को अपनाया है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में प्रदेश सरकार ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने और स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए पर्यटन को गांव-गांव तक पहुंचाने पर विशेष जोर दे रही है। इसी उद्देश्य से प्रदेश में होम स्टे को बढ़ावा दिया जा रहा है। एक अनुमान के मुताबिक प्रदेश भर में अब तक लगभग पांच हजार से अधिक होम स्टे संचालित हो रहे हैं। इस दिशा में दीनदयाल उपाध्याय होम स्टे विकास योजना कारगर सिद्ध हुई है। योजना के तहत चार वर्षों में 537 लाभार्थियों को 79 करोड़ 28 लाख 18 हजार की धनराशि होम स्टे निर्माण के लिए अनुदान के रूप में दी जा चुकी है। योजना के तहत पर्वतीय क्षेत्र में परियोजना लागत की 50 फीसदी (अधिकतम 15 लाख) और मैदानी क्षेत्रों में लागत की 25 प्रतिशत सब्सिडी (अधिकतम 7.50 लाख) दी जा रही है।

योजना को लेकर युवाओं और महिलाओं में खासा उत्साह है। धामी सरकार की यह योजना गांवों के पर्यटन विकास का बड़ा आधार बनी है। रुद्रप्रयाग जिले का सारी गांव इसका बड़ा उदाहरण है। यहां 40 से अधिक होम स्टे संचालित हो रहे हैं और बड़ी संख्या में ट्रेकर्स और पर्यटक पहुंच रहे हैं।

पर्यटकों से गुलजार होगा जादुंग गांव
उत्तरकाशी जिले में भारत-चीन सीमा पर स्थित जादुंग गांव अब पर्यटकों से गुलजार होगा। धामी सरकार ने इस गांव को होम स्टे क्लस्टर के रूप में विकसित करने का बीड़ा उठाया है। यहां छह होम स्टे का निर्माण अंतिम चरण में है। बता दें कि वर्ष 1962 में भारत-चीन युद्ध के दौरान सामरिक कारणों से सेना ने सीमांत नेलांग और जादुंग गांव को खाली करा दिया था। अब यह दोनों गांव केंद्र सरकार के वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम के अंतर्गत शामिल हैं।

ट्रेकिंग ट्रेक्शन सेंटर होम स्टे योजना में 258 लाभान्वित
ष्मेरी योजना मेरी सरकारष् कार्यक्रम के तहत ट्रेकिंग ट्रेक्शन सेंटर होम स्टे अनुदान योजना लागू की गई है। इसका मुख्य उद्देश्य पर्यटन के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के साथ ही इसमें स्थानीय लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करना है। इस योजना के तहत बीते चार वर्षों में 258 पात्र लोगों को लाभान्वित किया जा चुका है।

’योजना की खास बातें

-दीनदयाल उपाध्याय होमस्टे विकास योजना पूरे राज्य में लागू है लेकिन नगर निगम और नगर पालिका क्षेत्र को इसके दायरे से बाहर रखा गया है।

-उत्तराखण्ड के मूल निवासी ही योजना का लाभ लेने के लिए पात्र हैं।

-होम स्टे का निर्माण या पुराने भवन के नवीनीकरण के बाद उसे पर्यटन विकास परिषद में पंजीकृत कराना अनिवार्य है।

-योजना के लिए उत्तराखण्ड सरकार के ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से आवेदन किया जाता है। जिलाधिकारी की अध्यक्षता में आयोजित समिति की बैठक में आवेदक के साक्षात्कार के बाद प्रस्ताव स्वीकृत होने बाद आवेदन ऋण स्वीकृति के लिए बैंक को भेजा जाता है।

कोट—-

हमारे गांव खुशहाल होंगे तो प्रदेश और देश भी खुशहाल होंगे। इस
ध्येय वाक्य के साथ हम पर्यटन को गांव-गांव तक पहुंचाना चाहते हैं। इस दिशा में होम स्टे योजना कारगर सिद्ध हुई हैं। बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों के होम स्टे व्यवसाय अपनाने से जहां युवाओं के लिए रोजगार के अवसर सृजित हुए हैं, वहीं हमारे गांव देश विदेश के पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं।
-पुष्कर सिंह धामी
मुख्यमंत्री, उत्तराखण्ड

स्वास्थ्य जांच में बीमारी सामने आने वाले श्रमिकों के उपचार की भी व्यवस्था सुनिश्चित की जाएः धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शनिवार को मुख्यमंत्री आवास में आयोजित कार्यक्रम में उत्तराखण्ड भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड की विभिन्न श्रमिक कल्याण योजनाओं के अंतर्गत 10,709 पात्र लाभार्थियों के बैंक खातों में एक क्लिक के माध्यम से 18 करोड़ 49 लाख रूपये की सहायता राशि डीबीटी के माध्यम से हस्तांतरित की।

मुख्यमंत्री ने कहा कि निर्माण श्रमिक राज्य के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। राज्य सरकार का प्रयास है कि श्रमिकों और उनके परिवारों को शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण और सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी योजनाओं का लाभ सरल, पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से मिले। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि श्रमिक कल्याण योजनाओं का लाभ प्रत्येक पात्र श्रमिक परिवार तक पहुंचाना सुनिश्चित किया जाए। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि श्रमिकों की स्वास्थ्य जांच के दौरान जिन लोगों में किसी बीमारी की पहचान हुई है, स्वास्थ्य विभाग से समन्वय कर उनके समुचित उपचार की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि त्योहारी सीजन शुरू होने वाला है। सभी विभाग यह सुनिश्चित करें कि अपनी विभागीय योजनाओं के माध्यम से अधिक से अधिक जनसुविधा और जनसेवा के कार्य किए जाएं। मुख्यमंत्री ने श्रमिकों के बच्चों की शिक्षा, परिवारों के पोषण, महिलाओं के स्वास्थ्य तथा कार्यस्थल पर स्वास्थ्य सेवाओं को प्रभावी रूप से आगे बढ़ाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता के साथ पात्रता सत्यापन और जनपदवार कवरेज की नियमित मॉनिटरिंग की जाए। दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले पात्र श्रमिक भी योजनाओं के लाभ से वंचित न रहें।

कार्यक्रम में जानकारी दी गई कि वर्तमान डीबीटी के अंतर्गत प्रसूति एवं प्रसविधा हेतु सहायता के 95, मृत्युपरांत सहायता के 177, विवाहोपरांत (पुत्री विवाह) सहायता के 2,354 तथा शिक्षा सहायता के 8,083 लाभार्थी शामिल हैं। इस प्रकार कुल 10,709 लाभार्थियों को सहायता राशि हस्तांतरित की गई। बैठक में उत्तराखण्ड भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड द्वारा निर्माण श्रमिक परिवारों के लिए संचालित समेकित कल्याण मॉडल की प्रगति की जानकारी भी दी गई। बताया गया कि अब तक 33,429 शिक्षण सामग्री किट, 26,674 स्वच्छता सामग्री किट और 23,216 पोषाहार किट वितरित की गई हैं। इस प्रकार कुल 83,319 किट का वितरण किया जा चुका है। श्रमिक स्वास्थ्य योजना के अंतर्गत 20,527 स्वास्थ्य स्क्रीनिंग और 2,32,281 स्वास्थ्य परीक्षण किए गए हैं।

प्रस्तुतीकरण के दौरान Labour Cess Collection Management System (LCCMS) की प्रगति की भी जानकारी दी गई। बताया गया कि इस प्रणाली को वर्ष 2025 में ई-गवर्नेंस श्रेणी में SKOCH Gold Award से सम्मानित किया गया है। भारत सरकार के स्तर पर भी इस प्रणाली की सराहना की गई है तथा इसे Best Practices Compendium में शामिल किया गया है। इस प्रणाली के माध्यम से 21,200 प्रतिष्ठानों का ऑनलाइन पंजीकरण किया गया है और सेस संग्रह में 47.21 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। LCCMS को देशभर में अपनाए जाने योग्य डिजिटल गवर्नेंस मॉडल के रूप में भी प्रस्तुत किया गया है।

मुख्यमंत्री ने मुख्यमंत्री श्रमिक स्वास्थ्य योजना की प्रगति पर संतोष व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि योजना के अंतर्गत श्रमिकों की नियमित स्वास्थ्य जांच से कुछ गंभीर बीमारियों की समय रहते पहचान होने में भी मदद मिली है। प्रस्तुतीकरण में बताया गया कि मुंबई में आयोजित राष्ट्रीय भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार सम्मेलन में इस योजना को राष्ट्रीय स्तर पर सराहना मिली तथा पश्चिम बंगाल, दिल्ली, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के प्रतिनिधियों ने उत्तराखण्ड के इस मॉडल को अपने राज्यों में अपनाने में रुचि व्यक्त की। मोबाइल मेडिकल यूनिट के माध्यम से श्रमिकों को कार्यस्थल पर ही जांच, परामर्श और रेफरल सेवाएं उपलब्ध कराने की इस पहल को विस्तार योग्य एवं अनुकरणीय मॉडल के रूप में प्रस्तुत किया गया।

इस अवसर पर राज्य सलाहकार संविदा बोर्ड के अध्यक्ष कैलाश पंत, सतर्कता समिति की अध्यक्ष गीता रावत, उपाध्यक्ष मोहनी पोखरिया, उत्तराखण्ड भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. श्रीधर बाबू अदांकी, सचिव प्रकाश चन्द्र दुम्का सहित श्रम विभाग एवं बोर्ड के अधिकारी उपस्थित रहे।

स्वच्छ, स्वस्थ और हरित देहरादून के संकल्प को मिल रही नई गतिः धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) द्वारा मुख्यमंत्री की घोषणा के अंतर्गत मियांवाला, देहरादून में लगभग ₹8 करोड़ 64 लाख की लागत से विकसित ‘जल सृष्टि पार्क’ का लोकार्पण किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने क्षेत्रवासियों को नए पार्क की सौगात मिलने पर बधाई दी और इसे स्वच्छ, स्वस्थ एवं हरित देहरादून के संकल्प की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि रायपुर क्षेत्र के लोगों के बीच इस सुंदर पार्क का लोकार्पण उनके लिए प्रसन्नता का विषय है। उन्होंने कहा कि ‘जल सृष्टि पार्क’ आधुनिक सुविधाओं और प्राकृतिक सौंदर्य का सुंदर समन्वय प्रस्तुत करता है। पार्क को इस प्रकार विकसित किया गया है कि यहां बच्चों से लेकर बुजुर्गों, महिलाओं और युवाओं तक सभी आयु वर्ग के लोगों को बेहतर सुविधाएं मिल सकें।

पुराने तालाब का पुनर्जीवन कर विकसित किया गया आकर्षक पार्क
मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से इस बात पर प्रसन्नता व्यक्त की कि पार्क के निर्माण के दौरान यहां पहले से मौजूद पुराने तालाब को समाप्त करने के बजाय उसका पुनर्जीवन किया गया है। उन्होंने कहा कि तालाब के संरक्षण और उसके आसपास सुविधाओं के विकास से इस स्थान को नई पहचान मिली है। तालाब के मध्य सुंदर आइलैंड विकसित किया गया है तथा लोगों के मनोरंजन के लिए पेडल बोटिंग की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है। उन्होंने कहा कि अब रायपुर क्षेत्र के लोगों को देहरादून में ही एक खूबसूरत प्राकृतिक स्थल के साथ ‘नैनीताल जैसी फीलिंग’ का अनुभव प्राप्त हो सकेगा।

जल और जंगल हमारी संस्कृति का हिस्सा, संरक्षण हमारी जिम्मेदारी
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय संस्कृति में जल और जंगल को केवल प्राकृतिक संसाधन नहीं माना गया, बल्कि इन्हें जीवन और संस्कृति का अभिन्न हिस्सा समझा गया है। ऐसे में पुराने तालाबों और जल स्रोतों का पुनर्जीवन केवल पर्यावरण संरक्षण का कार्य नहीं है, बल्कि यह हमारी विरासत को बचाने और आने वाली पीढ़ियों के लिए जल एवं प्रकृति को सुरक्षित रखने का भी महत्वपूर्ण प्रयास है।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाकर आगे बढ़ने के लिए प्रतिबद्ध है। विकास का अर्थ केवल बड़ी इमारतें और कंक्रीट के ढांचे तैयार करना नहीं है। वास्तविक विकास वही है, जिससे लोगों का जीवन सुगम हो, शहर सुंदर बने, पर्यावरण सुरक्षित रहे और आने वाली पीढ़ियों को बेहतर भविष्य मिल सके। उन्होंने जल सृष्टि पार्क को इसी सोच का एक सुंदर उदाहरण बताया।

रायपुर क्षेत्र में शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क और पेयजल सुविधाओं को मिल रही गति
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में केंद्र और राज्य सरकार के बेहतर समन्वय से उत्तराखंड में विकास की गति को लगातार तेज किया जा रहा है। सरकार का प्रयास है कि विकास का लाभ प्रदेश के प्रत्येक क्षेत्र और प्रत्येक वर्ग तक पहुंचे।

उन्होंने कहा कि इसी क्रम में रायपुर क्षेत्र में शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, पेयजल, पार्क, सीवर और बाढ़ सुरक्षा से जुड़े अनेक कार्य आगे बढ़ाए गए हैं। युवाओं को बेहतर शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए उच्च शिक्षण संस्थानों में सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है तथा क्षेत्र की स्वास्थ्य सेवाओं को भी मजबूत किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि क्षेत्र में सड़कों के डामरीकरण, नवीनीकरण और चौड़ीकरण के साथ सीवर व्यवस्था को बेहतर बनाने का कार्य भी जारी है। पेयजल की समस्या के समाधान के लिए नए ट्यूबवेल और ओवरहेड टैंक बनाए गए हैं। पुरानी पाइपलाइनों को बदलने तथा नई पेयजल लाइनें बिछाने का कार्य भी निरंतर आगे बढ़ाया जा रहा है।

हरित क्षेत्रों के विकास से बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों को मिल रही बेहतर सुविधाएं
मुख्यमंत्री ने कहा कि डिफेंस कॉलोनी, सिंयावाला, नेहरू कॉलोनी सहित विभिन्न क्षेत्रों में पार्कों के निर्माण एवं सौंदर्यीकरण के कार्य किए गए हैं। इसका उद्देश्य लोगों को अपने आसपास ही ऐसे सुंदर और हरित स्थान उपलब्ध कराना है, जहां वे स्वस्थ वातावरण में समय बिता सकें।

उन्होंने कहा कि आईटी पार्क से पॉलीटेक्निक होते हुए मंगलूवाला की ओर सड़क व्यवस्था को बेहतर बनाने के कार्य भी आगे बढ़ाए जा रहे हैं। इससे क्षेत्र की कनेक्टिविटी बेहतर होने के साथ यातायात व्यवस्था को भी सुगम बनाने में मदद मिलेगी।

सौंग डैम से मजबूत होगी देहरादून की पेयजल व्यवस्था
मुख्यमंत्री ने कहा कि देहरादून लगातार विस्तार ले रहा है और बढ़ती आबादी के साथ पानी की आवश्यकता भी बढ़ रही है। ऐसे में सौंग डैम जैसी महत्वपूर्ण परियोजना पर भी कार्य आगे बढ़ाया जा रहा है। इससे भविष्य में देहरादून की पेयजल व्यवस्था को और अधिक मजबूत करने में सहायता मिलेगी।

उन्होंने कहा कि बरसात के दौरान बाढ़ और जलभराव की समस्या से लोगों को राहत दिलाने के लिए रायपुर क्षेत्र में नदियों और बरसाती नालों पर बाढ़ सुरक्षा तथा चौनलाइजेशन के कार्य भी किए जा रहे हैं। सरकार का प्रयास है कि जहां सड़क की आवश्यकता हो वहां सड़क बने, जहां पेयजल की समस्या हो वहां पानी पहुंचे, जहां जलभराव हो वहां उसका स्थायी समाधान हो और जहां हरियाली की आवश्यकता हो वहां सुंदर पार्क विकसित किए जाएं।

विकास का उद्देश्य लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी को बेहतर बनाना
मुख्यमंत्री ने कहा कि विकास किसी एक परियोजना का नाम नहीं है, बल्कि इसका वास्तविक उद्देश्य लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी को बेहतर बनाना है। जल सृष्टि पार्क भी इसी व्यापक सोच का हिस्सा है, जहां पर्यावरण संरक्षण के साथ लोगों के लिए मनोरंजन, स्वास्थ्य और प्रकृति से जुड़ने की सुविधाएं विकसित की गई हैं।

उन्होंने इस कार्य के लिए एमडीडीए के अधिकारियों, इंजीनियरों और कर्मचारियों को बधाई देते हुए विश्वास व्यक्त किया कि आने वाले समय में यह पार्क केवल रायपुर क्षेत्र ही नहीं, बल्कि पूरे देहरादून के लोगों के लिए आकर्षण का प्रमुख केंद्र बनेगा।

पार्क को अपना समझकर स्वच्छ एवं सुंदर बनाए रखने की अपील
मुख्यमंत्री धामी ने क्षेत्रवासियों से अपील की कि सरकार पार्क का निर्माण कर सकती है, उसे सुंदर बना सकती है और सुविधाएं उपलब्ध करा सकती है, लेकिन उसे लंबे समय तक स्वच्छ और सुंदर बनाए रखना सभी की साझा जिम्मेदारी है। उन्होंने लोगों से पार्क को केवल सरकारी संपत्ति न मानकर अपना पार्क समझने और अपने घर की तरह इसकी स्वच्छता एवं देखभाल करने का आग्रह किया।

उन्होंने विशेष रूप से बच्चों और युवाओं से पार्क का अधिक से अधिक उपयोग करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि बच्चे और युवा यहां खेलें, दौड़ें, योग करें और प्रकृति के बीच समय बिताएं, लेकिन इसके साथ पार्क और जलाशय की देखभाल की जिम्मेदारी भी समझें। सरकार और समाज के सामूहिक प्रयास से ही कोई विकास कार्य लंबे समय तक सुंदर और उपयोगी बना रह सकता है।

आधुनिक सुविधाओं के साथ देहरादून की हरियाली और प्राकृतिक पहचान को बनाए रखने पर जोर

मुख्यमंत्री ने कहा कि देहरादून अपनी प्राकृतिक सुंदरता और हरियाली के लिए देशभर में जाना जाता है। विकास की यात्रा में इस पहचान को बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है। सरकार का प्रयास है कि देहरादून में आधुनिक सुविधाओं का विस्तार हो, लेकिन इसके साथ ही शहर के प्राकृतिक सौंदर्य और पर्यावरण का संरक्षण भी सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि यही राज्य सरकार के विकास मॉडल की मूल भावना है।

मुख्यमंत्री ने रायपुर क्षेत्र के लोगों को विश्वास दिलाया कि उनके जीवन को अधिक सुविधाजनक, सुरक्षित और बेहतर बनाने के लिए सरकार इसी प्रकार निरंतर कार्य करती रहेगी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार देवभूमि उत्तराखंड को देश के अग्रणी राज्यों में शामिल करने तथा इसे देश का सर्वश्रेष्ठ राज्य बनाने के अपने ‘विकल्प रहित संकल्प’ को पूरा करने की दिशा में निरंतर आगे बढ़ रही है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस संकल्प को सिद्धि तक पहुंचाने में रायपुर क्षेत्र के लोग भी इसी प्रकार अपना सहयोग और योगदान प्रदान करते रहेंगे।

जल सृष्टि पार्क में हर आयु वर्ग के लिए सुविधाएं, प्राकृतिक सौंदर्य बना विशेष आकर्षण

एमडीडीए द्वारा मियांवाला, देहरादून में ₹8.64 करोड़ की लागत से विकसित यह जल सृष्टि पार्क एक बहुआयामी हरित एवं मनोरंजन स्थल है, जिसमें पुराने तालाब का पुनर्जीवन करते हुए उसके आसपास आधुनिक सुविधाओं का विकास किया गया है। पार्क में सुबह-शाम भ्रमण एवं दौड़ने के लिए जॉगिंग ट्रैक, योग के लिए योगा डेक, बच्चों के लिए चिल्ड्रन पार्क, फूलों एवं वनस्पतियों की जानकारी देने वाला एजुकेशनल फ्लावर गार्डन, आकर्षक लैंडस्केपिंग, हरित क्षेत्र तथा बैठने की सुविधाएं विकसित की गई हैं। तालाब के मध्य सुंदर आइलैंड बनाया गया है और लोगों के मनोरंजन के लिए पेडल बोटिंग की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है। इस प्रकार एमडीडीए ने पुराने जल स्रोत के संरक्षण को आधुनिक शहरी सुविधाओं के साथ जोड़ते हुए एक ऐसे खूबसूरत पार्क का विकास किया है, जो पर्यावरण संरक्षण, जल स्रोतों के पुनर्जीवन, स्वास्थ्य, मनोरंजन और प्राकृतिक सौंदर्यकृसभी को एक स्थान पर समाहित करता है। यह कार्य देहरादून में हरित एवं पर्यावरण अनुकूल शहरी विकास की दिशा में एमडीडीए के प्रयासों का एक उल्लेखनीय उदाहरण है।