उत्तराखंड रजतोत्सवः पीएम मोदी ने एफआरआई से जारी किया विशेष डाक टिकट

उत्तराखंड राज्य स्थापना की रजत जयंती समारोह के अवसर पर आज देहरादून आगमन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उत्तराखंड डाक परिमंडल द्वारा राज्य के प्रमुख तीर्थ स्थलों एवं सांस्कृतिक प्रतीकों पर आधारित विशेष डाक टिकट श्रृंखला का विमोचन किया। इस विशेष डाक टिकट श्रृंखला के माध्यम से देवभूमि उत्तराखंड की धार्मिक, सांस्कृतिक और प्राकृतिक धरोहर को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान प्रदान की गई है।

कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अंतर्गत राज्य के 28,000 से अधिक किसानों के बैंक खातों में ₹62 करोड़ से अधिक की राशि प्रत्यक्ष लाभ अंतरण के माध्यम से जारी की। इस पहल से राज्य के किसानों को प्राकृतिक आपदाओं एवं फसल क्षति से सुरक्षा का लाभ प्राप्त होगा।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ओंकारेश्वर मंदिर, उखीमठ पर आधारित एक विशेष प्रतीक चिन्ह भेंट किया।

पहाड़ी बोली और टोपी पहन पीएम मोदी ने जनता से किया सीधा संवाद, उत्तराखंड रजतोत्सव कार्यक्रम में पहुंचे पीएम

सिर पर पहाड़ी टोपी और भाषण में जगह-जगह गढ़वाली कुमाऊनी बोली। उत्तराखंड के रजत जयंती के मुख्य कार्यक्रम में रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का हर अंदाज पहाड़ीपन से घुला-मिला दिखा। उन्होंने गढ़वाली कुमाऊनी के कई-कई वाक्य बोले। वो भी कई बार। अक्सर प्रधानमंत्री उत्तराखंड के कार्यक्रमों में पहाड़ी बोली-भाषा का इस्तेमाल करते रहे हैं, मगर आज के भाषण में उन्होंने जितनी गढ़वाली कुमाऊनी बोली, उतनी कभी नहीं बोली थी। ये ही वजह रही, कि उत्तराखंड ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ इस बार और भी गहरा कनेक्ट महसूस किया।

प्रधानमंत्री ने अपने चिर-परिचित अंदाज में भाषण की शुरूआत की और कहा-देवभूमि उत्तराखंड का मेरा भै बंधु, दीदी, भुलियों, दाना सयानो, आप सबू तई म्यारू नमस्कार। पैलाग, सैंवा सौंली। अपने भाषण के बीच में प्रधानमंत्री ने जब फिर से गढ़वाली में बोलना शुरू किया, तो इसने लोगों को और रोमांचित कर दिया। प्रधानमंत्री बोले-पैली पहाडू कू चढ़ाई, विकास की बाट कैल रोक दी छै। अब वखि बटि नई बाट खुलण लग ली।
प्रधानमंत्री ने अपने भाषण मे पहाड़ के लोक पर्वों, लोक परंपराओं और महत्वपूर्ण आयोजनों को भी शामिल किया। इस क्रम में उन्होंने हरेला, फुलदेई, भिटोली, नंदादेवी, जौलजीबी, देवीधुरा मेले से लेकर दयारा बुग्याल के बटर फेस्टिवल तक का जिक्र किया।

पीएम मोदी 9 नवंबर को उत्तराखंड राज्य की रजत जयंती कार्यक्रम में करेंगे भागीदारी

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 9 नवम्बर को उत्तराखंड राज्य गठन की रजत जयंती पर एफआरआई देहरादून में आयोजित समारोह में बतौर मुख्य अतिथि भाग लेंगे। इस अवसर पर प्रधानमंत्री एक स्मारक डाक टिकट जारी करेंगे तथा समारोह में उपस्थित जनसमूह को संबोधित करेंगे।

राज्य स्थापना की 25वीं वर्षगांठ के इस अवसर पर प्रधानमंत्री ₹8260 करोड़ रुपये से अधिक की विभिन्न विकास परियोजनाओं का उद्घाटन एवं शिलान्यास करेंगे। ये परियोजनाएं पेयजल, सिंचाई, तकनीकी शिक्षा, ऊर्जा, शहरी विकास, खेल और कौशल विकास जैसे प्रमुख क्षेत्रों से संबंधित हैं।

प्रधानमंत्री जिन परियोजनाओं का उद्घाटन करेंगे, उनमें अमृत योजना के अंतर्गत देहरादून जलापूर्ति कवरेज, पिथौरागढ़ में विद्युत सबस्टेशन, सरकारी भवनों में सौर ऊर्जा संयंत्र, तथा हल्द्वानी स्टेडियम (नैनीताल) में एस्ट्रोटर्फ हॉकी मैदान प्रमुख हैं।

इसके साथ ही प्रधानमंत्री दो महत्वपूर्ण पेयजल परियोजनाओं-सोंग बांध पेयजल परियोजना (देहरादून) और जमरानी बहुउद्देशीय बांध परियोजना (नैनीताल) का शिलान्यास करेंगे। सोंग बांध परियोजना देहरादून को प्रतिदिन 150 एमएलडी पेयजल उपलब्ध कराएगी, जबकि जमरानी परियोजना सिंचाई, पेयजल आपूर्ति और बिजली उत्पादन में सहायक होगी।

इसके अतिरिक्त जिन अन्य परियोजनाओं का शिलान्यास किया जाएगा, उनमें चंपावत में महिला खेल महाविद्यालय की स्थापना, नैनीताल में अत्याधुनिक डेयरी संयंत्र, तथा विद्युत सबस्टेशन परियोजनाएं शामिल हैं।

राज्य आंदोलनकारियों और उनके आश्रितों की बढ़ी पेंशन, सीएम ने स्थापना दिवस की पूर्व संध्या पर की घोषणा

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने देहरादून स्थित शहीद स्थल कचहरी परिसर में उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी शहीदों को पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी।

इसी क्रम में उत्तराखंड राज्य स्थापना के रजत जयंती वर्ष के अवसर पर मुख्यमंत्री ने पुलिस लाइन में आयोजित राज्य आंदोलनकारी सम्मान समारोह में राज्य आंदोलनकारियों और शहीद राज्य आंदोलनकारियों के परिवारजनों को सम्मानित किया। कचहरी परिसर शहीद स्थल और पुलिस लाइन देहरादून में इस अवसर पर राज्य आंदोलनकारियों पर हेलीकॉप्टर से पुष्प वर्षा भी की गई।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड राज्य का निर्माण केवल राजनीतिक निर्णय नहीं, बल्कि देवभूमि के लाखों लोगों के बलिदान, संघर्ष और तप का परिणाम है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड आंदोलन के दौरान खटीमा, मसूरी और रामपुर तिराहा जैसी दर्दनाक घटनाएं हमारे इतिहास के अमर अध्याय हैं। राज्य निर्माण में अपने प्राणों की आहुति देने वाले सभी ज्ञात-अज्ञात बलिदानियों को नमन करते हुए उन्होंने कहा कि राज्य सरकार आंदोलनकारियों के सम्मान को सर्वाेच्च प्राथमिकता देती रही है और देती रहेगी। उन्होंने राज्य आंदोलनकारियों के लिए संचालित पेंशन एवं अन्य सुविधाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि यह केवल सहायता नहीं, बल्कि हमारी कृतज्ञता का प्रतीक है।

मुख्यमंत्री घोषणा
1.शहीद राज्य आंदोलनकारियों के नाम पर उनके क्षेत्र की मुख्य अवस्थापना सुविधाओं का नामकरण किया जायेगा।

2 उत्तराखण्ड राज्य आन्दोलन के दौरान 7 दिन जेल गये अथवा राज्य आन्दोलन के दौरान घायल हुये आन्दोलनकारियों की पेंशन प्रतिमाह 6 हजार रुपए से बढ़ाकर 7 हजार रुपए प्रतिमाह की जाएगी।

3 उत्तराखण्ड राज्य आन्दोलन के दौरान जेल गये या घायल श्रेणी से भिन्न अन्य राज्य आन्दोलनकारियों की पेंशन प्रतिमाह 4500 रुपए से बढ़ाकर 5500 रुपए प्रतिमाह की जाएगी।

4 उत्तराखण्ड राज्य आन्दोलन के दौरान विकलांग होकर पूर्णतः शय्याग्रस्त हुए राज्य आन्दोलनकारियों की पेंशन प्रतिमाह 20,000 हजार रूपए से बढ़ाकर 30,000 हजार रुपए की जाएगी और उनकी देखभाल के लिए मेडिकल अटेंडेंड की व्यवस्था भी की जाएगी।

5 उत्तराखण्ड राज्य आन्दोलन के दौरान शहीद हुये राज्य आन्दोलनकारियों के आश्रितों की पेंशन प्रतिमाह 3000 रुपए से बढ़ाकर 5500 रुपए की जाएगी।

6 उत्तराखण्ड राज्य आन्दोलनकारियों के चिन्हीकरण हेतु वर्ष 2021 तक जिलाधिकारी कार्यालय में प्राप्त लम्बित आवेदन पत्रों के निस्तारण हेतु छः माह का समय विस्तार प्रदान किया जायेगा।

7 समस्त शहीद स्मारकों का सौंदर्यीकरण किया जायेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार आंदोलनकारियों के योगदान को सदैव सम्मान पूर्वक याद रखेगी और उनकी भावना को प्रत्येक नीति एवं निर्णय में स्थान देगी। उन्होंने अपील की कि राज्य स्थापना दिवस पर प्रदेशवासी अपने घरों में पाँच दीपक राज्य आंदोलनकारियों की स्मृति में अवश्य जलाएँ। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड को देश का सर्वश्रेष्ठ राज्य बनाने के लक्ष्य की प्राप्ति के लिए राज्य आंदोलन की भावना ही हमारी प्रेरणा है। उन्होंने सभी से इस प्रयास में सहभागिता का आह्वान किया।

इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी, सुबोध उनियाल, सांसद माला राज्यलक्ष्मी शाह, राज्यसभा सांसद एवं भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट, राज्यसभा सांसद नरेश बंसल, विधायक विनोद चमोली, खजानदास, उमेश शर्मा काऊ, सविता कपूर, उपाध्यक्ष राज्य आंदोलनकारी सम्मान परिषद सुभाष बड़थ्वाल, जिलाधिकारी देहरादून सविन बंसल, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अजय सिंह एवं राज्य आंदोलनकारी मौजूद थे।

सीएम ने हिमालय निनाद उत्सव का शुभारंभ कर प्रदेश में संस्कृति के उत्थान और कलाकारों के हित में की चार घोषणाएं

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्य स्थापना की रजत जयंती के अवसर पर हिमालयन संस्कृति केंद्र गढ़ी कैंट देहरादून में आयोजित हिमालय निनाद उत्सव- 2025 में प्रतिभाग करते हुए कलाकारों का उत्साहवर्धन किया तथा संस्कृति के उत्थान और कलाकारों के हित में चार घोषणाएं की।

उन्होंने वृद्ध एवं आर्थिक रूप से कमजोर कलाकारों तथा लेखकों को जिन्होंने अपना पूरा जीवन कला एवं संस्कृति तथा साहित्य की आराधना में लगा दिया परंतु वृद्धावस्था व खराब स्वास्थ्य के कारण वह अपने जीविकोपार्जन में असमर्थ हो गए हैं, को देय मासिक पेंशन ₹3000 में वृद्धि करते हुए 6000 रुपए मासिक करने की घोषणा की।

मुख्यमंत्री ने संस्कृति विभाग के अंतर्गत सूचीबद्ध सांस्कृतिक दलों के कलाकारों का मानदेय एवं अन्य व्यवस्थाएं भारत सरकार के उपक्रम नॉर्थ जोन कल्चरल सेंटर की तर्ज पर दिए जाने की घोषणा की। उन्होंने प्रदेश के समस्त जनपद स्तर पर प्रेक्षागृह का निर्माण करने की घोषणा की। इसके अतिरिक्त सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण व प्रदर्शन हेतु प्रदेश में एक राज्य स्तरीय संग्रहालय एवं कुमाऊं व गढ़वाल मंडल में एक-एक मंडल स्तरीय संग्रहालय का निर्माण किए जाने की भी घोषणा की।

मुख्यमंत्री ने हिमालय निनाद महोत्सव- 2025 के अवसर पर सभी को राज्य के रजत उत्सव की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह उत्सव मात्र एक सांस्कृतिक समारोह नहीं है बल्कि हिमालय की आत्मा, उसकी विविध परंपराओं, लोक धुनों और साझा चेतना का उत्सव है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड की स्थापना के 25 वर्ष पूरे हो रहे हैं, यह हमारे राज्य के विकास, संघर्ष और स्वाभिमान का रजत जयंती वर्ष है। यह केवल उत्सव का नहीं बल्कि आत्ममंथन और नए संकल्प का भी अवसर है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस मंच के माध्यम से न केवल उत्तराखंड बल्कि पूरे हिमालय क्षेत्र की विविध संस्कृतियों को एक सूत्र में पिरोया गया है। तिब्बत की आध्यात्मिक परंपराओं, अरुणाचल और मणिपुर के जनजातीय गीत, हिमाचल का खोड़ा नृत्य, असम का बिहू, लद्दाख का जोब्रा नृत्य सबने इस मंच को जीवंत बना दिया है। उन्होंने कहा कि यह सांस्कृतिक संगम इस बात का भी प्रमाण है की भौगोलिक सीमाएं हमें बांट नहीं सकती, हम सब एक साझा विरासत और एक साझा हिमालय की चेतना से जुड़े हुए हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि निनाद- 2025 में आयोजित परिचर्चा सत्रों ने इस आयोजन को और भी अर्थपूर्ण बना दिया है। हिमालय में रंगमंच, उत्तराखंड का सिनेमा और समाज, लोक भाषा और संस्कृति, नंदा राजजात और हिमालय में खानपान, विरासत और उत्तराधिकार जैसे विषयों पर हुई चर्चाओं ने यह स्पष्ट किया है कि हमारी संस्कृति केवल परंपरा में नहीं बल्कि रचनात्मक विमर्श और नवाचार में भी जीवित है।

उन्होंने कहा कि मैं इस अवसर पर उन महान आत्माओं को नमन करता हूं जिन्होंने उत्तराखंड राज्य के लिए संघर्ष किया। उनकी स्मृति हमें याद दिलाती है कि यह राज्य हमें कितनी कठिनाइयों, बलिदानों और जन समर्पण के बाद मिला है। उनकी यादों को संजोना और नई पीढ़ी को उस संघर्ष की प्रेरणा देना हम सबका कर्तव्य बनता है।

इस अवसर पर निनाद उत्सव- 2025 में राज्यसभा सांसद और पद्म विभूषण शास्त्रीय नृत्यांगना सोनल मानसिंह, राज्यसभा सांसद नरेश बंसल, उपाध्यक्ष संस्कृत साहित्य एवं कला परिषद मधु भट्ट, संस्कृति सचिव युगल किशोर पंत सहित संबंधित लोग उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री धामी ने एफआरआई में लिया तैयारियों का जायजा

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने एफ आर आई पहुंचकर राज्य के रजत उत्सव आयोजन की तैयारियों का जायजा लिया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह हमारे लिए हर्ष का विषय है कि हम राज्य स्थापना दिवस के रजत वर्ष में प्रवेश करने जा रहे हैं। कहा कि हमारे राज्य को पूर्व प्रधानमंत्री आदरणीय अटल जी ने बनाया और आदरणीय प्रधानमंत्री मोदी जी इसको संवार रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह हमारे लिए सौभाग्य की बात है कि प्रधानमंत्री हमारे राज्य के इस रजत उत्सव में प्रतिभाग करने आ रहे हैं और हमारे राज्य को हमेशा से उनका सानिध्य मिलता रहता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य ने इन 25 वर्षों में अनेक उपलब्धियां हासिल की हैं और 2047 के विकसित भारत निर्माण की दिशा में हमारा राज्य अग्रणी भूमिका निभाने को तत्पर है।

उन्होंने जिला प्रशासन देहरादून, नगर निगम, लोक निर्माण विभाग और संबंधित अधिकारियों को रजत उत्सव की तैयारियों को समय से पूरा करने के निर्देश दिए।

इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी, विधायक मुन्ना सिंह चौहान, खजानदास, सहदेव पुंडीर सहित संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित थे।

किसानों का परिश्रम और सरकार की नीतियां पीढ़ियों के लिए तैयार करेंगे स्वस्थ, समृद्ध और स्वर्णिम भविष्य का निर्माणः धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्य के रजत जयंती उत्सव के अवसर पर पंतनगर कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में वृहद कृषक सम्मेलन का शुभारम्भ किया।

कार्यक्रम में कृषि, उद्यान, दुग्ध, मत्स्य, सहकारिता के प्रगतिशील कृषक व लखपति दीदीयों को मुख्यमंत्री द्वारा प्रतीक चिन्ह, प्रशस्ति पत्र व अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर कृषि मंत्री गणेश जोशी भी उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में आये सभी किसानों को उत्तराखंड राज्य स्थापना के रजत जयंती पर्व की हार्दिक बधाई देते हुए कहा कि किसान भाइयों का परिश्रम और त्याग ही हमारी सच्ची पूंजी है और उनका पसीना हमारी ताकत है। उन्होंने उत्तराखंड निर्माण के सपने को साकार करने में अपना योगदान देने वाले और बीते 25 वर्षों में राज्य को आत्मनिर्भर बनाने में अपना अतुलनीय योगदान देने वाले किसानों को भी नमन किया। उन्होंने कहा कि यह सम्मेलन केवल कृषि संबंधी योजनाओं की चर्चा हेतु एक आम कार्यक्रम नहीं है, बल्कि उत्तराखंड के हमारे सभी किसान भाइयों और उनके परिवारों के प्रति कृतज्ञता प्रकट करने का भी अवसर है। उन्होंने कहा कि देश व प्रदेश के संतुलित विकास के लिए यह आवश्यक है कि हमारे किसान भाइयों की परेशानियां कम हों, वे सशक्त बनें। किसानों के सशक्तिकरण के बिना राष्ट्र का सशक्तिकरण अधूरा है। उन्होंने कहा कि आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी का विकसित भारत के निर्माण का सपना भी तभी साकार हो सकता है, जब हमारा किसान विकसित हो। हम सभी जानते हैं कि भारत आदि काल से ही एक कृषि प्रधान देश रहा है।

कृषि मानव जीवन का आधार है
मुख्यमंत्री ने कहा कि खेती-किसानी के इर्द-गिर्द ही हमारा समाज विकसित हुआ, हमारी परम्पराएं पोषित हुईं और हमारे पर्व व त्योहार निर्धारित हुए। उन्होंने कहा कि हमारे शास्त्रों में भी लिखा है कि कृषि संपत्ति और मेधा प्रदान करती है और कृषि ही मानव जीवन का आधार है। उन्होंने कहा कि उनके लिए तो खेती करना देव उपासना जैसा है, क्योंकि उनके पिता एक जवान भी थे और एक किसान भी। खेती द्वारा, लोगों का पेट भरने से जो संतुष्टि प्राप्त होती है, उसकी व्याख्या नहीं की जा सकती। यही कारण है कि वे आज भी खेती से जुड़े हैं और जब भी उन्हें समय मिलता है तो अपने गांव में खेती करने भी जाते हैं। उन्होंने कहा कि खेती से उन्हें आत्मिक शांति तो मिलती ही है साथ ही अपनी जमीन से भी जोड़े रखती है। माटी से ये जुड़ाव उन्हें सदैव उनके अस्तित्व, वांछित कर्म और कर्तव्य का बोध कराता है।

प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि किसानों के लिए बनी वरदान
मुख्यमंत्री ने कहा कि 2014 के बाद से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में किसानों का जितना सशक्तिकरण हुआ है वो अभूतपूर्व है। प्रधानमंत्री का मत है कि देश के किसान का आत्मविश्वास देश का सबसे बड़ा सामर्थ्य है, और इसी को मूल मानकर केंद्र सरकार किसानों की दशा सुधारने और कृषि नीतियों को किसान केंद्रित बनाने का कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार का निरंतर ये प्रयास है कि दुनिया के बड़े-बड़े देशों के किसानों को जो आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हैं वो भारत के किसान को भी मिलें। प्रधानमंत्री का संकल्प है कि हमारे किसान के लिए बीज से बाजार तक की यात्रा ना केवल सुगम हो बल्कि ये उसकी आय में वृद्धि करने वाली भी हो। आज, देशभर के 11 करोड़ किसानों को प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के माध्यम से आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है, जिसके अंतर्गत उत्तराखंड के भी लगभग 9 लाख के करीब अन्नदाताओं को सहायता राशि प्रदान की जा रही है।

किसानों का कल्याण हमारा संकल्प
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज जहां एक ओर सभी प्रमुख फसलों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य में अभूतपूर्व वृद्धि कर किसानों को उनकी फसल का उचित मूल्य प्रदान किया जा रहा है। वहीं, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के माध्यम से किसान को प्राकृतिक आपदाओं, फसल रोगों और कीटों से होने वाले नुकसान हेतु सुरक्षा कवच भी प्रदान किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना के द्वारा खेतों की मिट्टी की वैज्ञानिक जांच कर किसानों को पोषक तत्वों की कमी और आवश्यक उर्वरकों की जानकारी भी दी जा रही है, जिससे उनकी उपज की गुणवत्ता और भूमि की उर्वरता दोनों में सुधार हो रहा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व और मार्गदर्शन में हमारी राज्य सरकार भी प्रदेश के किसानों के उत्थान एवं समृद्धि हेतु संकल्पित होकर निरंतर कार्य कर रही है। हम एक ओर जहां प्रदेश में किसानों को तीन लाख रुपए तक का ऋण बिना ब्याज के उपलब्ध करा रहे हैं, वहीं कृषि उपकरण खरीदने हेतु फार्म मशीनरी बैंक योजना के माध्यम से 80 प्रतिशत तक की सब्सिडी भी प्रदान कर रहे हैं। यहीं नहीं, हमने किसानों के हित में नहरों से सिंचाई को पूरी तरह मुफ्त करने का काम किया है।

किसानों की आय बढ़ाने के किए जा रहे हैं प्रयास
मुख्यमंत्री ने कहा कि हमने किसानों की आय बढ़ाने के लिए पॉलीहाउस के निर्माण हेतु 200 करोड़ रूपए की राशि का प्रावधान भी किया है। इसके अंतर्गत अब तक राज्य में लगभग 115 करोड़ रुपए की सहायता से करीब 350 पॉलीहाउस स्थापित किए जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि हम जहां एक ओर गेहूं खरीद पर किसानों को 20 रूपए प्रति क्विंटल का बोनस प्रदान रहे हैं, वहीं हमने गन्ने के रेट में भी 20 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोत्तरी की है। इसके अतिरिक्त, हमने उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में वर्षा आधारित खेती को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए लगभग 1,000 करोड़ रुपये की लागत से उत्तराखंड क्लाइमेट रिस्पॉन्सिव रेन-फेड फार्मिंग प्रोजेक्ट भी स्वीकृत किया है। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार सब्जियों की तरह ही फलों के उत्पादन को बढ़ाने के लिए भी विभिन्न स्तरों पर काम कर रही है। हमारी सरकार ने 1200 करोड़ रुपये की लागत से नई सेब नीति, कीवी नीति, स्टेट मिलेट मिशन और ड्रैगन फ्रूट नीति जैसी कई महत्वपूर्ण योजनाओं को लागू किया है। उन्होंने कहा कि इन नीतियों के तहत बागवानी को प्रोत्साहन देने के लिए किसानों को 80 प्रतिशत तक सब्सिडी प्रदान की जा रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हम किसानों की उपज की गुणवत्ता को बढ़ाने के लिए ग्रेडिंग-सॉर्टिंग यूनिट के निर्माण के लिए भी अनुदान प्रदान कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में 50 से अधिक मशरूम इकाईयां, 30 से अधिक मौनपालन इकाइयाँ, 30 कोल्ड चेन इकाइयाँ, 18 कोल्ड स्टोरेज, 5 सी.ए. स्टोरेज, 128 बड़ी खाद्य प्रसंस्करण इकाइयाँ, 1030 सूक्ष्म खाद्य उद्यम और 2 मेगा फूड पार्क स्थापित हैं। उन्होंने कहा कि बागवानी मिशन योजना के अंतर्गत प्रदेश के कृषकों को पौधशाला स्थापना, संरक्षित खेती, औद्यानिक यंत्रीकरण, तुड़ाई उपरान्त प्रबंधन व प्रसंस्करण हेतु 50 से 55 प्रतिशत तक अनुदान दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार के प्रयासों से फलों की उत्पादकता में ढाई गुना वृद्धि हुई है, जो पहले 1.82 मैट्रिक टन प्रति हैक्टेयर थी, वह अब 4.52 मैट्रिक टन हो गई है। मशरूम उत्पादन में आज उत्तराखण्ड देश में पाँचवें स्थान पर है। राज्य गठन के समय जहाँ मशरूम का उत्पादन मात्र 500 मैट्रिक टन उत्पादन था, वहीं आज यह बढ़कर 27,390 मैट्रिक टन हो गया है। इसी प्रकार शहद उत्पादन में भी राज्य देश में आठवें स्थान पर पहुँचा है और अब 3,320 मैट्रिक टन शहद का उत्पादन किया जा रहा है।

टी टूरिज्म को दिया जा रहा है बढ़ावा
मुख्यमंत्री ने कहा कि बागवानी के समग्र विकास हेतु जापान सहयोगित उत्तराखण्ड एकीकृत औद्यानिक विकास परियोजना के तहत 526 करोड़ रुपये की बाह्य सहायतित परियोजना टिहरी, उत्तरकाशी, नैनीताल और पिथौरागढ़ जनपदों में लागू की जा रही है। उन्होंने कहा कि सगंध पौधा केन्द्र द्वारा लैमनग्रास, मिन्ट, गुलाब, तेजपात, कैमोमिल जैसी फसलों को प्रोत्साहन देकर 9,500 हेक्टेयर क्षेत्र में सगंध खेती विकसित की गई है, जिससे 28,000 से अधिक कृषक 109 एरोमा क्लस्टरों के माध्यम से जुड़ चुके हैं। उन्होंने कहा कि चाय उत्पादन में भी राज्य ने उल्लेखनीय प्रगति की है। राज्य गठन के समय जहाँ केवल 196 हेक्टेयर में चाय की खेती होती थी, वहीं आज यह 1,585 हेक्टेयर तक विस्तृत हो चुकी है। अब प्रदेश में छः लाख किलोग्राम हरी पत्तियाँ उत्पादित हो रही हैं और लगभग डेढ़ लाख किलोग्राम प्रसंस्कृत चाय तैयार की जा रही है। उन्होंने कहा कि टी-टूरिज्म को बढ़ावा देते हुए चम्पावत के सिलिंगटॉग, नैनीताल के श्यामखेत व घोड़ाखाल, तथा बागेश्वर के कौसानी में चाय बागानों को पर्यटन से जोड़ा गया है, जिससे स्थानीय युवाओं को नए रोजगार अवसर प्राप्त हो रहे हैं।

कृषि के क्षेत्र में राज्य को आत्मनिर्भर बनाने का है हमारा प्रयास
मुख्यमंत्री ने कहा कि रजत जयंती वर्ष में हम उत्तराखंड का किसान-उत्तराखंड का गौरव के संदेश के साथ एक नई शुरुआत कर रहे हैं। उन्होंने सबसे आह्वान करते हुए कहा कि आइए, हम सभी मिलकर उत्तराखंड को समृद्ध, आत्मनिर्भर और आधुनिक कृषि राज्य बनाएं। क्योंकि आपका परिश्रम, हमारी नीतियां और केंद्र सरकार का सहयोग, यही मिलकर हमारी आने वाली पीढ़ियों के लिए एक स्वस्थ, समृद्ध और स्वर्णिम भविष्य का निर्माण करेंगे, और उत्तराखंड को देश का सर्वश्रेष्ठ राज्य बनाने के हमारे विकल्प रहित संकल्प को पोषित करने में सार्थक सिद्ध होंगे। इस दौरान मुख्यमंत्री ने विभिन्न स्टालो का निरीक्षण भी किया।

किसान सम्मेलन में कृषि मंत्री गणेश जोशी ने अपने संबोधन में सभी को रजत जयंती की बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि पिछले 25 वर्षों में कृषि एवं उद्यान के क्षेत्र में अभूतपूर्व कार्य हुए हैं। उन्होने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जितनी चिंता सीमा पर खड़े जवान की करते हैं, उतनी ही चिंता किसान की भी करते हैं। उन्होंने कहा कि देश की जीडीपी में कृषि का अहम योगदान है और प्रधानमंत्री ने 10 करोड़ किसानों के खातों में डीबीटी के माध्यम से धनराशि भेजने का ऐतिहासिक कार्य किया है। उन्होंने कहा कि बागवानी के क्षेत्र में उत्तराखंड अब कश्मीर और हिमाचल के बाद तीसरे स्थान पर है। मंत्री जोशी ने कहा कि राज्य सरकार ने ड्रैगन फ्रूट, एप्पल, कीवी और मिलेट के लिए विशेष नीतियां तैयार की हैं ताकि किसानों को अधिक लाभ मिल सके।

कृषि मंत्री ने कहा कि “किसान हमारे अन्नदाता हैं, किसान मजबूत होगा तो देश मजबूत होगा। उन्होंने कहा कि धामी सरकार किसानों के कल्याण और उनकी आजीविका को दोगुना करने की दिशा में निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि प्रदेश की महिलाएं भी आत्मनिर्भरता की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही हैं। समूहों के माध्यम से महिलाएं आजीविका संवर्धन का कार्य कर रही हैं और अब तक 1.65 लाख महिलाएं ‘लखपति दीदी’ बन चुकी हैं।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए क्षेत्रीय विधायक तिलकराज बेहड़ ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में प्रदेश दिनो दिन प्रगति कर रहा है व मुख्यमंत्री निरंतर कृषकों के बीच जाते रहते है व संवाद करते है। उन्होने कहा कि हमे दलगत राजनीति से उपर उठकर जनसमस्याओं का प्राथमिकता से निराकरण करना होगा। उन्होने किच्छा में में औद्योगिक पार्क बनाये जाने के लिए आभार व्यक्त किया साथ ही उन्होने पंतनगर की जर्जर सड़कों की मरम्मत की घोषणा करने के लिए मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया।

इस अवसर पर दायित्वधारी अनिल कपूर डब्बू, बलराज पासी, उत्तम दत्ता, खतीब अहमद, महापौर विकास शर्मा, दीपक बाली, सचिव मुख्यमंत्री एवं कुमाऊं आयुक्त दीपक रावत, सचिव एसएन पाण्डे, जिलाधिकारी नितिन सिंह भदौरिया, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक नैनीताल मंजूनाथ टीसी, सहित अनेक जनप्रतिनिधि व बड़ी संख्या में कृषक बन्धु मौजूद थे।

तकनीक, नवाचार और स्टार्टअप के क्षेत्र में अग्रणी बनकर प्रदेश के विकास में योगदान दें युवाः गर्वनर

उत्तराखंड राज्य स्थापना दिवस की रैतिक परेड में राज्यपाल और मुख्यमंत्री ने प्रतिभाग किया। इस दौरान सीएम पुष्कर सिंह धामी ने विभिन्न घोषणाएं भी की। इसमें
01- प्रदेश की सम्पूर्ण कृषि भूमि का आगामी 05 वर्षों में फेजवाईज सर्वेक्षण कर बन्दोबस्त करवाया जायेगा।
02- प्रदेश में साइबर अपराधों की रोकथाम के लिए स्टेट साइबर क्राइम कॉर्डिनेशन सेंटर की स्थापना की जाएगी।
03- ड्रग्स फ्री देवभूमि के लिए प्रदेश में एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स का विस्तार किया जाएगा।
04- राजकीय विद्यालयों में पीएम पोषण योजना के अंतर्गत मानदेय पर रखी गई भोजन माताओं के लिए कल्याण कोष की स्थापना की जाएगी।
05- राज्य में जंगली जानवरों एवं आवास पशुओं से कृषि एवं औद्यानिकी फसलों की सुरक्षा हेतु फार्म फेंसिंग पॉलिसी लाई जाएगी।
06- पारंपरिक धारे, नौले आदि प्राकृतिक जल स्रोतों के संरक्षण, पुनर्जीवन एवं सौंदर्यीकरण के लिए विशेष संवर्धन योजना प्रारंभ की जाएगी।
07- उच्च शिक्षा शिक्षण संस्थाओं के छात्र-छात्राओं में कौशल विकास के लिए ऑनलाइन स्किल कोर्सेज उपलब्ध कराए जाएंगे तथा सिविल सर्विसेज, बैंकिंग, मैनेजमेंट, नेट आदि परीक्षाओं की तैयारी के लिए ऑनलाइन कोचिंग सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी।
08- मानसखण्ड माला मिशन की तर्ज पर ही केदारखण्ड माला मिशन का विकास किया जाएगा।
09- आदर्श चम्पावत की भांति आदर्श रुद्रप्रयाग जनपद का विकास किया जाएगा।
10- कुमाऊँ के शारदा कॉरीडोर एवं आदि कैलाश तथा गढ़वाल के अंजनीसैण एवं बेलाकेदार क्षेत्र को स्प्रिचुअल इकोनॉमिक जोन के रूप में विकसित किया जाएगा।
11- प्रत्येक जिला अस्पताल में टाइप-1 डायबिटीज के लिए विशेष क्लीनिक खोले जाएंगे और 15 वर्ष तक के बच्चों की डायबिटीज स्क्रीनिंग मुफ्त की जाएगी।

उत्तराखण्ड राज्य स्थापना के रजत जयंती समारोह के अवसर पर शुक्रवार को पुलिस लाइन, देहरादून में आयोजित कार्यक्रम में राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि) एवं मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रतिभाग किया। राज्यपाल ने इस अवसर पर आयोजित रैतिक परेड का निरीक्षण कर सलामी ली। राष्ट्रीय गीत ‘‘वंदे मातरम’’ के 150 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर कार्यक्रम की शुरुआत वंदे मातरम गीत से हुई। इस अवसर पर राज्यपाल एवं मुख्यमंत्री द्वारा ‘‘उत्तराखण्ड पुलिस पत्रिका-2025’’ का विमोचन एवं रजत जयंती पदक के प्रतीकात्मक चिन्ह का अनावरण किया गया।

कार्यक्रम में पुलिस विभाग द्वारा विशिष्ट साहसिक प्रदर्शन किया गया, इसमें विशेष रूप से मोटरसाइकिल दल द्वारा किए गए उत्कृष्ट प्रदर्शन ने उपस्थित दर्शकों को रोमांचित कर दिया।
राज्यपाल ने उकृष्ट सेवाओं के लिए ‘राष्ट्रपति पुलिस पदक’ एवं ‘पुलिस पदक’ प्राप्त पुलिस अधिकारियों को सम्मानित किया।

रजत जयंती समारोह के अवसर पर इस वर्ष का उत्तराखण्ड गौरव सम्मान निशानेबाज पद्श्री जसपाल राणा, उद्यमी एवं समाजसेवी देव रतूड़ी, अभिनेता एवं लेखक स्व. टॉम ऑल्टर, उत्तराखण्ड राज्य आंदोलनकारी स्व. सुशीला बलूनी, चिपको आंदोलन की जननी स्व. गौरा देवी, भूवैज्ञानिक स्व. खड़ग सिंह वल्दिया, वीरांगना स्व. तीलू रौतेली एवं लेखक स्व. शैलेश मटियानी को दिया गया। राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि) एवं मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उत्तराखण्ड गौरव सम्मान-2025 प्रदान किए। उक्त महानुभावों की अनुपस्थिति में यह सम्मान उनके परिजनों द्वारा प्राप्त किया गया।

इस अवसर पर राज्यपाल ने उत्तराखण्ड राज्य स्थापना के रजत जयंती समारोह की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं देते हुए कहा कि हम उत्तराखण्ड की 25 वर्षों की गौरवशाली यात्रा का उत्सव मना रहे हैं, यह क्षण हमारे लिए खुशी और आत्म-गौरव के पल हैं। राज्यपाल ने सभी अमर शहीदों, आंदोलनकारियों और जन नायकों को श्रद्धांजलि अर्पित की, जिनके बलिदान और संघर्ष से यह राज्य अस्तित्व में आया।

राज्यपाल ने कहा कि जैसे स्वदेशी के मंत्र से देश की आजादी को बल मिला, वैसे ही स्वदेशी के मंत्र से देश की समृद्धि भी सुदृढ़ होगी। उन्होंने आह्वान किया कि हम वही वस्तुएँ खदीदें जो मेड इन इंडिया हों, जिनमें हमारे युवाओं का श्रम और परिश्रम निहित हो, यही आत्मनिर्भर भारत और आत्मनिर्भर उत्तराखण्ड का सबसे बड़ा मंत्र है।

राज्यपाल ने राज्य के युवाओं से आह्वान किया कि वे तकनीक, नवाचार और स्टार्टअप के क्षेत्र में अग्रणी बनें तथा देश-प्रदेश के विकास में योगदान दें। यही वह मार्ग है जो विकसित उत्तराखण्ड, विकसित भारत 2047 के संकल्प को साकार करेगा। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आने वाले वर्षों में उत्तराखण्ड देश का सर्वश्रेष्ठ राज्य बनेगा- जहाँ विकास और प्रकृति, विज्ञान और संस्कृति, आधुनिकता और परंपरा, तकनीक और मानवता साथ-साथ आगे बढ़ेंगी।

कार्यक्रम में राज्यपाल ने भव्य परेड की सराहना करते हुए कहा कि उत्तराखण्ड पुलिस ने अपनी कार्यकुशलता, अनुशासन और दूरदर्शी दृष्टिकोण से एक सशक्त और आधुनिक पुलिस बल के रूप में पूरे देश में अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित की है। उन्होंने कहा ‘‘ड्रग्स-फ्री उत्तराखण्ड’’ के लक्ष्य की दिशा में पुलिस द्वारा अपराधियों के विरुद्ध निरंतर और प्रभावी कार्रवाई की जा रही है। साइबर अपराधों से निपटने के लिए विशेष रूप से प्रशिक्षित साइबर कमांडो तैयार किए गए हैं, जिससे डिजिटल सुरक्षा के क्षेत्र में नई क्षमता विकसित हुई है। उन्होंने कम्युनिटी पुलिसिंग पर बल देते हुए कहा कि पुलिस ने जनता के साथ विश्वास, सहयोग और सहभागिता का सेतु मजबूत किया है, जो प्रशंसनीय है।

राज्यपाल ने कहा कि पिछले 25 वर्षों का सफर उत्तराखण्ड के सतत परिश्रम और प्रगति की कहानी है। राज्य की स्थापना के बाद से शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यटन, कृषि, उद्योग, विज्ञान, तकनीक और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। उन्होंने कहा कि आज उत्तराखण्ड चार धाम यात्रा से आगे बढ़कर वैश्विक वेलनेस डेस्टिनेशन, वेडिंग डेस्टिनेशन, शूटिंग डेस्टिनेशन, योग और आयुर्वेद डेस्टिनेशन के रूप में उभर रहा है। सैकड़ों युवा अपने गाँव लौटकर आत्मनिर्भरता और स्वावलम्बन का नया अध्याय लिख रहे हैं।

राज्यपाल ने कहा कि उत्तराखण्ड राज्य आंदोलन में मातृशक्ति की भूमिका रीढ़ की भांति रही है। जल, जंगल, पहाड़ और पर्यावरण संरक्षण में महिलाओं का योगदान उल्लेखनीय रहा है। आज भी वही मातृशक्ति राज्य के विकास की सशक्त धुरी है। स्वयं सहायता समूहों से लेकर नवाचार आधारित स्टार्टअप्स तक, महिलाएं आत्मनिर्भरता की नई कहानियां लिख रही हैं। उत्तराखण्ड की बेटियाँ शिक्षा, खेल, रक्षा और विज्ञान के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रही हैं जो सराहनीय है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्य स्थापना रजत जयंती समारोह के अंतर्गत रैतिक परेड के दौरान देश की रक्षा के लिए अपने प्राण न्योछावर करने वाले जवानों और राज्य आन्दोलन के अमर बलिदानियों को श्रद्धापूर्वक नमन किया। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री, भारत रत्न स्व. अटल बिहारी वाजपेयी का स्मरण करते हुए कहा कि उनके प्रधानमंत्रित्व काल में उत्तराखण्ड की स्थापना का स्वप्न साकार हुआ और विशेष औद्योगिक पैकेज के माध्यम से राज्य की नींव को मजबूती प्रदान करने का कार्य भी उन्होंने किया। पिछले 25 वर्षों की इस गौरवशाली यात्रा में राज्य के विकास में अपना योगदान देने वाले सभी लोगों का भी उन्होंने आभार व्यक्त किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य निर्माण के इन 25 वर्षों की यात्रा में राज्य ने अनेकों चुनौतियों और समस्याओं का सामना करते हुए आज देश के अग्रणी और सशक्त राज्य के रूप में अपनी एक विशिष्ट पहचान बनाई है। समय-समय पर राज्य को कई प्राकृतिक आपदाओं और कठिन परिस्थितियों से भी जूझना पड़ा है। उन्होंने कहा कि विशिष्ट भौगोलिक परिस्थितियों में राज्य की कानून-व्यवस्था को बनाए रखना भी अपने आप में एक बड़ी चुनौती रही है। इन कठिनाइयों के बीच उत्तराखण्ड पुलिस ने राज्य की आत्मा की प्रहरी और मूक साधक की भांति प्रत्येक मोर्चे पर डटकर जनसेवा का अद्वितीय उदाहरण प्रस्तुत किया है। उत्तराखण्ड पुलिस ने महिला अपराधों के निराकरण में सराहनीय कार्य किया है। गृह मंत्रालय द्वारा जारी महिला अपराधों एवं पोक्सो अधिनियम के मामलों के निस्तारण में भी उत्तराखण्ड देश में पांचवें स्थान पर रहा है। उन्होंने कहा कि साइबर अपराधों पर प्रभावी लगाम लगाने के लिए तकनीकी क्षमता को और अधिक सशक्त बनाने के साथ ही ‘ड्रग फ्री उत्तराखण्ड’ के संकल्प को एक जन आंदोलन का रूप देना होगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में राज्य सरकार ने पिछले करीब साढ़े चार वर्षों में उल्लेखनीय उपलब्धियाँ हासिल की है। प्रदेश ने किसानों की आय में वृद्धि करने में देश भर में प्रथम स्थान प्राप्त किया है। राज्य की कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट 12.69 प्रतिशत रही है, जो राष्ट्रीय औसत से चार गुना अधिक है। राज्य युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने में देश का अग्रणी राज्य बनकर उभरा है। उत्तराखण्ड के चार गांवों जखोल, हर्षिल, गूंजी और सूपी को देश भर में सर्वश्रेष्ठ पर्यटन ग्राम पुरस्कार मिला है। राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में उत्तराखण्ड को मोस्ट फिल्म फ्रेंडली स्टेट के अवॉर्ड से भी सम्मानित किया गया है। सरकार राज्य के समग्र विकास के साथ-साथ अपने सांस्कृतिक मूल्यों और डेमोग्राफी को संरक्षित रखने हेतु भी पूर्ण रूप से संकल्पबद्ध है।

इस अवसर पर राज्यसभा सांसद नरेश बंसल, विधायक प्रेमचंद अग्रवाल, खजान दास, दुर्गेश्वर लाल, मेयर देहरादून सौरभ थपलियाल मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन, डीजीपी दीपम सेठ सहित शासन, पुलिस एवं जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी एवं अन्य महानुभाव उपस्थित थे।

25 वर्षों में उत्तराखंड की सेहत में सुधार, राज्य के हर कोने तक पहुंच रही चिकित्सा

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के मार्गदर्शन और कुशल नेतृत्व में उत्तराखंड का स्वास्थ्य विभाग अभूतपूर्व गति से आगे बढ़ रहा है। राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं से लेकर मेडिकल एजुकेशन तक, हर क्षेत्र में सुधार की नई मिसालें स्थापित हो रही हैं। स्वास्थ्य विभाग के अंतर्गत राज्य ने मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में उल्लेखनीय कमी लाने, संस्थागत प्रसव को प्रोत्साहन देने और ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं का दायरा बढ़ाने में बड़ी सफलता हासिल की है। राज्य गठन के 25 वर्षों में उत्तराखंड ने स्वास्थ्य ढांचे को सुदृढ़ करने की दिशा में लंबी छलांग लगाई है। आज प्रदेश के हर जिले में स्वास्थ्य सुविधाओं का जाल बिछ चुका है। वर्तमान में राज्य में 13 जिला चिकित्सालय, 21 उपजिला चिकित्सालय, 80 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, 577 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और करीब 2000 मातृ-शिशु कल्याण केंद्र सक्रिय हैं, जहाँ आम जनता को स्थानीय स्तर पर उपचार मिल रहा है।

सरकार ने हाल ही में 6 उपजिला चिकित्सालय, 6 सीएचसी और 9 पीएचसी के उन्नयन को मंजूरी दी है। साथ ही सेलाकुई (देहरादून) और गेठिया (नैनीताल) में 100-100 शैय्यायुक्त मानसिक चिकित्सालयों का निर्माण तेजी से जारी है। भारत सरकार के सहयोग से उत्तरकाशी, गोपेश्वर, बागेश्वर और रुड़की में 200 शैय्यायुक्त क्रीटिकल केयर ब्लॉक, जबकि मोतीनगर (हल्द्वानी) और नैनीताल में 50-50 शैय्यायुक्त ब्लॉक तैयार किए जा रहे हैं। देश में पहली बार एम्स ऋषिकेश के सहयोग से उत्तराखंड में हेली-एम्बुलेंस सेवा शुरू की गई है, जिससे पर्वतीय व दुर्गम इलाकों में आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाएं सुलभ हुई हैं।

स्वास्थ्य सेवाओं में अभूतपूर्व सुधार
उत्तराखंड में स्वास्थ्य सेवाओं को सशक्त बनाने में अहम भूमिका निभा रहा है। स्वास्थ्य विभाग पिछले पांच सालों में मातृ मृत्यु दर (एमएमआर) और नवजात शिशु मृत्यु दर (एनएमआर) में निरंतर कमी आई है। स्वास्थ्य सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने बताया कि सरकार का लक्ष्य है कि एनएमआर को घटाकर 12 और एमएमआर को 70 प्रति लाख जीवित जन्म तक लाया जाए। राज्य में एनएचएम की शुरुआत 27 अक्टूबर 2005 को हुई थी। इसका उद्देश्य ग्रामीण व दूरस्थ इलाकों में रहने वाले गरीबों, महिलाओं और बच्चों को सुलभ व गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करना है। डॉ. कुमार के अनुसार मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के कुशल नेतृत्व और स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत की अगुवाई में मिशन ने अपने लक्ष्यों की दिशा में अभूतपूर्व प्रगति की है।

शिशु और मातृ मृत्यु दर में ऐतिहासिक गिरावट
राज्य गठन के समय शिशु मृत्यु दर 52 प्रति हजार थी, जो अब घटकर 20 रह गई है। एसआरएस 2023 रिपोर्ट के अनुसार मातृ मृत्यु दर 450 प्रति लाख से घटकर अब मात्र 91 रह गई है। सकल प्रजनन दर भी 3.3 से घटकर 1.7 हो गई है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे 2020-21 के अनुसार राज्य में संपूर्ण प्रतिरक्षण दर 88.6 प्रतिशत तक पहुँच चुकी है, जो राज्य गठन के समय 47 प्रतिशत थी। वहीं संस्थागत प्रसव दर अब 83.2 प्रतिशत हो गई है, जबकि राज्य निर्माण के समय यह मात्र 21 प्रतिशत थी।

चिकित्सकों की संख्या में ऐतिहासिक बढ़ोतरी
राज्य निर्माण के समय स्वास्थ्य विभाग में 1621 डॉक्टरों के पद स्वीकृत थे। सरकार ने 1264 नए पद सृजित कर यह संख्या 2885 तक पहुंचाई।रिक्तियों को भरने के लिए निरंतर भर्ती अभियानों के साथ-साथ, सरकार ने 220 चिकित्सकों को दुर्गम क्षेत्रों में तैनात किया है। वर्तमान में कुल 2885 पदों के सापेक्ष 2598 डॉक्टर तैनात हैं। विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता बढ़ाने के लिए उनकी सेवानिवृत्ति आयु 60 से बढ़ाकर 65 वर्ष कर दी गई है। लंबे समय से अनुपस्थित 56 डॉक्टरों की सेवा समाप्त कर सरकार ने सख्ती का संदेश भी दिया है।

नर्सिंग और पैरामेडिकल स्टाफ की तैनाती
राज्य सरकार ने अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने के लिए 1399 नर्सिंग अधिकारियों की नियुक्ति की है। एएनएम के 1933 पदों को बढ़ाकर 2295 किया गया, जिनमें से 1918 पद भरे जा चुके हैं। चिकित्सा सेवा चयन बोर्ड के माध्यम से 34 एक्स-रे टेक्नीशियन सहित अन्य पैरामेडिकल कर्मियों की भर्ती भी की गई है।

मातृ मृत्यु दर में 77 प्रतिशत की कमी
स्वास्थ्य विभाग के प्रभावी क्रियान्वयन का परिणाम है कि मातृ मृत्यु दर में 77 प्रतिशत की कमी आई है। राज्य गठन के समय से मातृ मृत्यु दर (440/100000 जीवित प्रसव) के सापेक्ष (91/100000 जीवित प्रसव) हो गई है। वित्तीय वर्ष 2024-25 के दौरान 1,47,717 संस्थागत प्रसव कराए गए, जो कुल प्रसव का 85 प्रतिशत हैं। 2025 में चलाए गए 17 सितम्बर से 2 अक्टूबर तक के विशेष अभियान के तहत 37 हजार से अधिक गर्भवती महिलाओं की एनीमिया जांच की गई। राज्य में हरिद्वार व ऊधमसिंह नगर में दो पोषण पुनर्वास केंद्र भी स्थापित किए गए हैं, जिनमें इस वर्ष अब तक 32 कुपोषित शिशुओं का उपचार किया गया।

प्रदेश में 1985 आयुष्मान आरोग्य केंद्र
स्वास्थ्य सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने बताया कि प्रदेश के 13 जिलों में अब तक 1985 आयुष्मान आरोग्य मंदिर (हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर) स्थापित किए जा चुके हैं। इन केंद्रों से हर वर्ष 34 लाख से अधिक लोग स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ ले रहे हैं। बीते तीन वर्षों में 28.8 लाख लोगों की हाई ब्लड प्रेशर और डायबिटीज की जांच, 28.4 लाख लोगों के मुख कैंसर, और 13.1 लाख महिलाओं के स्तन कैंसर की स्क्रीनिंग की गई। इससे स्वास्थ्य के प्रति जनजागरूकता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

108 आपातकालीन सेवा बनी जीवन रक्षक
वर्ष 2008 में शुरू हुई 108 आपातकालीन एम्बुलेंस सेवा अब राज्य की स्वास्थ्य प्रणाली की रीढ़ बन चुकी है। वर्तमान में इसके पास 272 एम्बुलेंस हैं जिनमें 217 बेसिक लाइफ सपोर्ट, 54 एडवांस लाइफ सपोर्ट और 1 बोट एम्बुलेंस शामिल है। वर्ष 2019 से अगस्त 2025 तक, इस सेवा के माध्यम से 8.79 लाख से अधिक लोगों को आपातकालीन सहायता मिली है।

गंभीर बीमारियों के लिए आर्थिक सहायता
राज्य व्याधि सहायता निधि समिति के तहत बीपीएल वर्ग के मरीजों को 11 गंभीर बीमारियों के इलाज हेतु आर्थिक मदद दी जाती है। वर्ष 2005-06 से अब तक 1045 लाभार्थियों को इस योजना से सहायता मिली है, जिस पर 12.85 करोड़ रुपये से अधिक व्यय हुआ है।

जन औषधि केंद्रों से सस्ती दवाएं
सस्ती और गुणवत्तापूर्ण दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए राज्य में 335 प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र संचालित हैं, जबकि 48 नए केंद्र प्रस्तावित हैं। इन केंद्रों से आम नागरिकों को दवाएं बाजार मूल्य से 50-80 प्रतिशत तक सस्ती मिल रही हैं।

टीबी उन्मूलन में उल्लेखनीय सफलता
राज्य में टीबी मुक्त उत्तराखंड अभियान के तहत 2182 पंचायतें टीबी मुक्त घोषित की जा चुकी हैं। 18,159 निक्षय मित्र अब तक जुड़ चुके हैं, जिनमें से 8658 सक्रिय रूप से टीबी मरीजों को गोद लेकर सहयोग कर रहे हैं।

तीर्थ यात्रियों के लिए विशेष स्वास्थ्य व्यवस्था
हर वर्ष चार धाम और कैलाश मानसरोवर यात्रा के दौरान यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए, सभी धामों और यात्रा मार्गों पर विशेषज्ञ डॉक्टरों, पैरामेडिकल स्टाफ और जीवनरक्षक उपकरणों की तैनाती की जाती है। स्वास्थ्य सलाह 13 भाषाओं में जारी की जाती है ताकि देश-विदेश से आने वाले यात्रियों को कोई असुविधा न हो।

परिवार नियोजन और जन स्वास्थ्य विस्तार
परिवार नियोजन कार्यक्रम के तहत देहरादून और अल्मोड़ा में दो नए परिवार नियोजन साधनों की शुरुआत की गई है। इसके साथ ही डेंगू और अन्य वेक्टर जनित रोगों की रोकथाम को लेकर विशेष अभियान चलाए जा रहे हैं। प्रधानमंत्री राष्ट्रीय डायलिसिस कार्यक्रम के तहत 19 केंद्रों में 166 मशीनों द्वारा इस वर्ष अब तक 46,958 डायलिसिस सत्र संपन्न किए जा चुके हैं।

रक्त संचरण सेवाओं का विस्तार
2016 से अब तक राज्य में 65 रक्तकोष (ब्लड बैंक) स्थापित किए जा चुके हैं, जिनमें 28 सरकारी, 18 निजी व 19 चौरिटेबल संस्थान हैं। रक्त की उपलब्धता और आपातकालीन सेवाओं में बड़ी सुविधा मिली है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का विस्तृत बयान
उत्तराखंड सरकार का लक्ष्य है कि राज्य का हर नागरिक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ सके। हमने स्वास्थ्य सेवाओं को अंतिम छोर तक पहुँचाने के लिए एनएचएम को एक मजबूत स्तंभ के रूप में कार्यरत किया है। आज प्रदेश में मातृ और शिशु मृत्यु दर ऐतिहासिक रूप से घटी है, संस्थागत प्रसव की दर में वृद्धि हुई है और लोगों में स्वास्थ्य के प्रति नई चेतना आई है। हमारी सरकार की प्राथमिकता है ‘स्वस्थ उत्तराखंड, समृद्ध उत्तराखंड’। हमने स्वास्थ्य ढांचे को सशक्त बनाने के लिए रिकॉर्ड स्तर पर निवेश किया है। हेली-एंबुलेंस सेवा, आयुष्मान आरोग्य केंद्र, नर्सिंग और पैरामेडिकल शिक्षा में विस्तार जैसी पहलों से हमने स्वास्थ्य सेवाओं को गांव-गांव तक पहुँचाया है। मेरा विश्वास है कि आने वाले वर्षों में उत्तराखंड देश के सबसे स्वस्थ राज्यों में शामिल होगा और हमारी नीतियां जनसेवा की नई दिशा तय करेंगी।

स्वास्थ्य सचिव डॉ आर राजेश कुमार का बयान
स्वास्थ्य सचिव डॉ आर राजेश कुमार ने बताया कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में स्वास्थ्य सेवाओं में ऐतिहासिक परिवर्तन आया है। अगर बात करें पिछले 25 वर्षों की तो उत्तराखंड ने स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। राज्य सरकार की प्राथमिकता हर नागरिक तक गुणवत्तापूर्ण और सुलभ स्वास्थ्य सुविधा पहुंचाना है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, आयुष्मान भारत, टेलीमेडिसिन, 108 आपातकालीन सेवा और जन औषधि केंद्र जैसे कार्यक्रमों ने स्वास्थ्य ढांचे को नई मजबूती दी है। हमने मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में उल्लेखनीय कमी दर्ज की है और दूरस्थ क्षेत्रों में चिकित्सकों एवं पैरामेडिकल स्टाफ की तैनाती सुनिश्चित की है। सरकार की नीति ‘स्वस्थ उत्तराखंड समर्थ उत्तराखंड’ की दिशा में राज्य निरंतर आगे बढ़ रहा है। आने वाले वर्षों में हमारा लक्ष्य है कि हर गांव और हर व्यक्ति को समयबद्ध, सस्ती और प्रभावी स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जाएं। यह परिवर्तन केवल योजनाओं का नहीं, बल्कि संकल्प और प्रतिबद्धता का परिणाम है।

चिपको आंदोलन बना महिला शक्ति और पर्यावरण प्रेम का प्रतीकः धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उत्तराखंड राज्य स्थापना की रजत जयंती के शुभ अवसर पर रामनगर में राज्य स्तरीय जन वन महोत्सव का शुभारंभ किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वन्य जीवों का संरक्षण देवभूमि की संस्कृति का अभिन्न अंग है और प्रकृति का संरक्षण हमारे संस्कारों में समाहित है। उन्होंने कहा कि हमारे पूर्वजों ने मानव और प्रकृति के सहअस्तित्व की जो विचारधारा दी, वह आज भी हमारी जीवनशैली का आधार है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह जन वन महोत्सव जनता और जंगलों के बीच अटूट रिश्ते का प्रतीक है। यह हमें सिखाता है कि विकास तभी सार्थक है जब पारिस्थितिकी और आर्थिकी के बीच सामंजस्य बना रहे। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी को पर्यावरण के प्रति जागरूक करना और उसे अपने जीवन का हिस्सा बनाना समय की मांग है।

“चिपको आंदोलन” महिला शक्ति और पर्यावरण संरक्षण का प्रतीक – मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री धामी ने वर्ष 1973 के चमोली जिले में हुए चिपको आंदोलन का उल्लेख करते हुए कहा कि उत्तराखंड की महिलाओं ने पेड़ों से लिपटकर जो संदेश दिया था, उसने विश्वभर में पर्यावरण संरक्षण की नई दिशा दी। यह आंदोलन महिला सशक्तिकरण, सत्याग्रह और पर्यावरण प्रेम का प्रतीक बन गया।

प्रकृतिः संस्कृति एवं विकास का संतुलनः उत्तराखंड की पहचान
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य गठन के 25 वर्षों में उत्तराखंड ने प्रकृति, संस्कृति और विकास का संतुलन बनाए रखते हुए उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। उन्होंने कहा कि राज्य की हरियाली, समृद्ध जैव विविधता और वन्य जीव हमारे प्रदेश की पहचान हैं।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में राज्य सरकार इकोलॉजी, इकोनॉमी और टेक्नोलॉजी के संतुलन पर कार्य कर रही है। वन्य जीव संरक्षण के लिए प्रदेश में जीपीएस ट्रैकिंग, ड्रोन सर्विलांस, डॉग स्क्वॉड जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है।

इको-टूरिज्म और रोजगार सृजन पर दिया जा रहा है ध्यान
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में इको-टूरिज्म मॉडल पर तेजी से काम किया जा रहा है ताकि स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर मिलें और पर्यावरण को नुकसान न पहुंचे। उन्होंने कहा कि बिजरानी, गिरिजा और ढिकुली जोन को आधुनिक रूप में विकसित किया गया है, जिससे हजारों ग्रामीणों को प्रत्यक्ष रोजगार प्राप्त हुआ है।

उन्होंने कहा कि नेचर गाइड, ड्रोन पायलट, वाइल्डलाइफ फोटोग्राफर, वाइल्डलाइफ टूरिज्म आधारित कौशल को उद्यम के रूप में विकसित किया जा रहा है, जिससे युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में राज्य सरकार लगातार प्रयासरत है।

प्रकृति संरक्षण में बच्चों की भी हो भागीदारी
मुख्यमंत्री धामी ने नगर वन में विभिन्न विद्यालयों के बच्चों द्वारा तैयार की गई चित्रकला एवं कलाकृतियों का अवलोकन किया और उनकी रचनात्मकता की सराहना की। उन्होंने कहा कि बच्चों में पर्यावरण संरक्षण की भावना विकसित करना सबसे बड़ी पूंजी है।

मुख्यमंत्री ने की विकास संबंधी विभिन्न घोषणाएँ
मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर क्षेत्र के विकास हेतु कई घोषणाएँ की जिसमें ग्राम लेती-चोपड़ा को नए राजस्व ग्राम के रूप में विकसित कर पानी, बिजली, शिक्षा, सड़क और स्वास्थ्य की मूलभूत सुविधाएँ उपलब्ध कराए जाने, ग्राम भलौन में सिंचाई और पेयजल ट्यूबवेल की स्थापना, तुमड़िया रोड को मालधन से जोड़े जाने तथा पर्यटन सत्र 2025-26 में महिला जिप्सी चालकों के विशेष प्रशिक्षण के बाद शेष पंजीकरण पूर्ण किए जाने की घोषणा की। मुख्यमंत्री ने नगर वन में लाइट एंड साउंड शो शीघ्र प्रारंभ किये जाने, रामनगर में सामुदायिक सोवेनियर शॉप का निर्माण कर स्थानीय उत्पादों को प्रोत्साहन दिये जाने की भी घोषणा की।

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री द्वारा वन विभाग के विभिन्न प्रभागों, व महिला स्वयं सहायता समूह द्वारा लगाए गए स्टालों का भी निरीक्षण किया गया तथा एक पेड़ मां के नाम अभियान के तहत पौधा भी रोपित किया।

इस अवसर पर वन मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि राज्य सरकार वन एवं वन्य जीव संरक्षण के साथ स्थानीय आजीविका बढ़ाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने बताया कि वन विभाग के प्रयासों से प्रदेश में वन्य जीवों की संख्या में निरंतर वृद्धि हुई है।

प्रमुख सचिव वन आर.के. सुधांशु ने वन संरक्षण, मानव-वन्यजीव संघर्ष की रोकथाम और संरक्षण योजनाओं की जानकारी दी।

कार्यक्रम में विधायक दीवान सिंह बिष्ट, अध्यक्ष अनुसूचित जाति आयोग मुकेश कुमार, प्रमुख वन संरक्षक डॉ. समीर सिन्हा, मुख्य वन संरक्षक (कुमाऊं) डॉ. तेजस्विनी पाटिल, नगर पालिका अध्यक्ष हाजी मोहम्मद अकरम, क्षेत्र प्रमुख मंजू नेगी, जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. मंजूनाथ टीसी सहित बड़ी संख्या में स्थानीय जनप्रतिनिधि, अधिकारी, विद्यार्थी और नागरिक उपस्थित रहे।