प्रवासी सम्मेलन में बोले विशेषज्ञ, पर्यटन में नई उपलब्धियों के साथ आगे आ रहा उत्तराखंड

अंतरराष्ट्रीय प्रवासी उत्तराखंड सम्मेलन के द्वितीय सत्र में पर्यटन विशेषज्ञों और प्रवासी उत्तराखंडियों ने कहा कि पर्यटन के क्षेत्र में उत्तराखंड असीमित संभावनाओं से भरा हुआ है। कहा गया कि उत्तराखंड पर्यटन विकास के क्षेत्र में नित नई उपलब्धियों के साथ आगे आ रहा है।

उत्तराखंड सरकार के पर्यटन विभाग के अपर सचिव अभिषेक रोहेला ने दूसरे सत्र मेें चर्चा करते हुए सरकार की तमाम पर्यटन योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि कोविड-19 की महामारी के बावजूद उत्तराखंड पर्यटन विकास के क्षेत्र में लगातार आगे बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि चार धाम यात्रा में रिकार्ड संख्या में श्रद्धालु उमड़ रहे हैं। सरकार ने इस बार से शीतकालीन यात्रा भी शुरू की है, जिसके अच्छे परिणाम सामने आ रहे हैं। अपने संबोधन में उन्होंने साहसिक पर्यटन, पर्यटन सर्किट, होम स्टे, उत्तराखंड टूरिस्ट पालिसी का जिक्र किया और सरकार के स्तर पर किए जा रहे कार्यों की जानकारी दी।

ताज ग्रुप के आईएचसीएल के जीएम मनोज मिश्रा ने बताया कि उनके ग्रुप के 17 होटल इस वक्त उत्तराखंड में हैं और बहुत जल्द देहरादून का प्रोजेक्ट लेकर आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि उनका ग्रुप विरासत का सम्मान, सतत विकास के लिए सहभागिता, पर्यावरणीय हितों का ध्यान, स्थानीय निवासियों के लिए रोजगार के अवसर और कौशल विकास जैसे पहलुओं को ध्यान में रखकर काम कर रहा है।

स्टारकैप्स के मेंटर व एकेडमिक हेड अमिताभ पांडेय ने एस्ट्रो टूरिज्म पर बात की। उन्होंने कौसानी में नक्षत्र सभा की स्थापना से जुडे़ अनुभव साझा किए। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में पहुंचना आसान है। वनों की सघनता है। दूरस्थ में अति दर्शनीय स्थान है। ये सारे पहलु एस्टो टूरिज्म को बढ़ावा देने के मजबूत आधार हैं।

राजस एरो स्पोर्ट्स एंड एडवेंचर प्राइवेट लिमिटेड के सीईओ मनीष सैनी ने हेली सेवा के माध्यम से उत्तराखंड को जोड़ने पर विस्तार से बात की। उन्होंने बताया कि हिमालय दर्शन के माध्यम से हेली सेवा देने का अनुभव बहुत अच्छा रहा है। उन्होंने कहा कि हिमालय में कई ऐसी जगह है, जहां तक आप नहीं पहुंच सकते। ऐसी स्थिति में हेली सेवा कारगर साबित हो सकती है। उन्होेंने अपनी प्रस्तावित जायरो एक्सपडीसन का भी जिक्र किया और कहा कि बहुत जल्द इस पर काम शुरू किया जाएगा।

ईको ग्लैंपस कानाताल के फाउंडर व सीईओ संजीव शर्मा ने कहा कि पर्यावरण का ध्यान में रखते हुए ग्लैंपिंग पर्यटन का ऐसा माध्यम है, जिसके कई लाभ है। सीमित संसाधनों से स्थानीय लोगों के रोजगार के बडे़ जरिये इससे बनाए जा सकते हैं। उन्होंने अपनी संस्था के स्तर पर किए जा रहे कार्यों और उसमे महिलाओं की भागीदारी का खास तौर पर जिक्र किया।

जापान से आए प्रवासी उत्तराखंडी भुवन तिवारी ने बताया कि जापान में पर्यटन के क्षेत्र में भारत की 16 कंपनियां काम कर रही हैं, जिसका संचालन करने वाले 50 फीसदी उत्तराखंडी हैं। उन्होंने कहा कि जापान से आने वाले पर्यटक ज्यादातर हरिद्वार व ऋषिकेश ही आते हैं। उन्हें पहाड़ के अन्य स्थानों तक लाने के प्रयास होने चाहिए।

आयुर्वेद विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ एके त्रिपाठी ने कहा कि आयुष व वैलनेस पर देश दुनिया की कितनी रूचि है, इसका पता पिछले दिनों आयोजित वर्ल्ड आयुष कांग्रेस से चल सकता है। इस आयोजन में रिकार्ड रजिस्ट्रेशन हुए हैं। उन्होंने कहा कि वैलनेस का मतलब है कि किन नियमों का पालन करके स्वस्थ रहा जा सकता है। उन्होने कहा कि उत्तराखंड आयुष राज्य है। यहां पर दुर्लभतम मेडिकल प्लांट मौजूद हैं। इनके बेहतर उपयोग करके देश दुनिया में उत्तराखंड का नाम आगे बढ़ाने के लिए काम हो रहा है। उन्होंने कहा कि ऋषिकेश को वर्ल्ड कैपिटल योगा घोषित किया गया है। यह वर्ल्ड सिटी ऑफ वैलनेस भी है। उन्होंने आयुष व वैलनेस के संबंध में प्रदेश सरकार की तमाम योजनाओं का जिक्र करते हुए उनके बारे में विस्तार से बताया। पर्यटन विभाग की अधिकारी पूनम चंद्र ने आभार प्रकट किया। इस अवसर पर सचिव पर्यटन श्री सचिन कुर्वे भी मौजूद थे, इस मौके पर प्रवासी उत्तराखंडियों और मेहमानों का सम्मान किया गया। संचालन आरजे काव्य ने किया। संचालन आरजे काव्य ने किया।

अन्तर्राष्ट्रीय प्रवासी उत्तराखंडी सम्मेलन में दिग्गजों ने किया स्टार्टअप पर मंथन

अन्तर्राष्ट्रीय प्रवासी उत्तराखंडी सम्मेलन के प्रथम सत्र में विनिर्माण, ऊर्जा उत्पादन और स्टार्टअप में निवेश की संभावनाओं पर विचार विमर्श किया गया।

थाईलैंड से आए ब्रॉस्टेन ग्रुप के अध्यक्ष डॉ एके काला ने कहा कि 30 साल तक विदेश में काम करने के बाद अब वो भारत में अपनी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट खोलने की तैयारी कर रहे हैं, इसमें वो उत्तराखंड को प्राथमिकता देंगे। वो चाहते हैं कि उत्तराखंड में ऑयल एंड गैस सेक्टर के लिए उपकरण तैयार कर दुनिया भर में सप्लाई करें। डॉ एके काला ने कहा कि वो उत्तराखंड में पलायन से पूरी तरह खाली हो चुके गांवों को भी फिर आबाद करने के लिए काम करना चाहते हैं, इसके लिए किसी एक ऐसे गांव को गोद लेने का प्रस्ताव शासन को दे चुके हैं। साथ ही 70 साल से अधिक उम्र की जरूरतमंद महिलाओं को अपनी मां के समान मानते हुए, अपनी मां के नाम पर चला जा रहे भीमा केयर फाउंडेशन के जरिए मदद करेंगे।

हाउस ऑफ हिमालयाज की तारीफ

सिंगापुर से आई मंडला ग्लोबल की संस्थापक मीनाक्षी अरोड़ा डबराल ने कहा कि वो अपने ई कॉमर्स प्लेटफार्म पर उत्तराखंड की महिला उद्यमियों को अपने उत्पाद उपलब्ध कराने का प्रयास कर रही हैं। उन्होंने उत्तराखंड सरकार की ओर से तैयार किए गए हाउस ऑफ हिमालयाज ब्रांड की तारीफ करते हुए, कहा कि इसमें सभी उत्पाद उच्च गुणवत्ता के हैं। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड विश्व खाद्य श्रंखला में अहम भूमिका निभा सकता है। वो उत्तराखंड के जैविक उत्पादों की सप्लाई सिंगापुर में करती हैं।

मेक इन उत्तराखंड

उत्तराखंड में ही एआई आधारित स्टार्टअप संचालित करने वाले कुनाल उनियाल ने कहा कि वो लंदन से वापस आकर, उत्तराखंड से ही एआई आधारित शिपिंग ट्रांसपोर्ट स्टॉर्ट अप संचालित कर रहे हैं। इसके लिए कई निवेशक भी उत्तराखंड आए हैं, उन्होंने कहा कि हम मेक इंडिया, मेक इन उत्तराखंड के नारे पर चलते हुए काम कर रहे हैं।

गुनसोला हाइड्रो पावर जनरेशन के राजेश गुनसोला ने बताया कि वो टिहरी जिले के बूढ़ाकेदार में हाइड्रो प्रोजेक्ट संचालित कर रहे हैं, जिसमें 50 लोग रोजगार पा रहे हैं। अब वो विनयखाल में सोलर प्रोजेक्ट में भी शुरु करने जा रहे हैं। सोलर प्लांट के क्षेत्र में कंसलटेंट अमन जोशी ने कहा कि उत्तराखंड के पहाड़ सोलर ऊर्जा के लिए सर्वश्रेष्ठ हैं। यहां निवेश की अपार संभावनाएं हैं।

सत्र की अध्यक्षता करते हुए अपर सचिव ऊर्जा रंजना राजगुरु ने कहा कि प्रदेश सरकार ऊर्जा उत्पादन बढ़ाने के साथ ही निवेश के लिए कई प्रयास कर ही है। इसी क्रम में जल्द जियो थर्मल और ग्रीन हाइड्रोजन पॉलिसी भी तैयार हो रही है। सत्र का संचालन आयुक्त उद्योग प्रतीक जैन ने किया।

अंतरराष्ट्रीय प्रवासी उत्तराखंडी सम्मेलनः विभिन्न देशों में निवासरत उत्तराखंडियों के समागम में दिखा अपनी मिट्टी के प्रति अटूट प्रेम

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने देहरादून में अंतरराष्ट्रीय प्रवासी उत्तराखंडी सम्मेलन का शुभारंभ किया।

विभिन्न देशों में निवासरत उत्तराखंडियों के इस समागम में अपनी मूल जड़ों, विरासत और मातृभूमि के प्रति अटूट प्रेम और उत्साह की झलक दिखी।

मुख्यमंत्री ने उत्तराखंड के प्रवासियों को संबोधित करते हुए कहा कि तेजी से विकसित हो रहे उत्तराखंड में निवेश की व्यापक संभावना है। साहसिक पर्यटन, पावर जेनरेशन, एरोमेटिक, विनिर्माण, कृषि, उद्यान, हर्बल, आयुष एंड वैलनेस इत्यादि में निवेश की आभार संभावनाएं हैं। कहा कि हमने राज्य को निवेश डेस्टिनेशन के रूप में स्थापित करने के लिए नीतिगत और ढांचागत दोनों स्तर पर बड़े सुधार किए हैं। काम शुरू करने में आसानी हो इसके लिए नियमावली में उसी अनुरूप सुधार किए हैं। अपराधमुक्त और भयमुक्त समाज के लिए अनेक सख्त वैधानिक प्रावधान किए हैं।

सड़क, रेल, हवाई अड्डा, रोपवे, संचार नेटवर्क का बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया है, जिससे राज्य एक सुरक्षित, सुगम और आकर्षक निवेश स्थल के रूप में भी तेजी से उभर रहा है। नीति आयोग की रैंकिंग भी इसी और इशारा करती है।

मुख्यमंत्री ने आह्वान किया कि उत्तराखंड की पलायन जैसी विकट समस्या के समाधान के लिए अपनी मातृभूमि के किसी गांव – कस्बे को गोद लेते हुए उसको विकसित और संरक्षित करने का प्रण लें। उन्होंने कहा कि राज्य को आपकी योग्यता, अनुभव और तकनीकी ज्ञान की बहुत आवश्यकता है और राज्य की अपेक्षाओं और आकांक्षाओं को साकार करने में यह महत्वपूर्ण भी है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह सम्मेलन सांस्कृतिक और सामाजिक जुड़ाव का एक विशिष्ट महोत्सव भी है। हमारे प्रवासी उत्तराखंडी अपनी ईमानदारी, मेहनत और समर्पण के लिए देश-विदेश में सम्मान की दृष्टि से देखे जाते हैं। कहा कि जिस तरह से देश-विदेश में भारत का नाम आप लोग रोशन कर रहे हैं इसी तरह से अपनी मातृभूमि उत्तराखंड का नाम भी रोशन करें।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हमने प्रवासियों से बेहतर समन्वय और सहयोग प्रदान करने के लिए प्रवासी प्रकोष्ठ का भी गठन किया है। हम शीघ्र वेंचर फंड का भी प्रावधान करेंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2025 उत्तराखंड के इतिहास में एक मील का पत्थर साबित होने जा रहा है। इस वर्ष राज्य अपना रजतोत्सव मना रहा है। आगामी 28 जनवरी से राज्य राष्ट्रीय खेलों की मेजबानी के लिए तैयार है। इसी माह समान नागरिक संहिता कानून लागू करने जा रहे हैं। हाल ही में हमने शीतकालीन पर्यटन की शुरुआत भी की है। जो राज्य की आर्थिक के लिए गेम चेंजर साबित होगा।

उत्तराखंड के प्रवासियों ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि किस तरह से उन्होंने भी बचपन में यहां की पगडंडिया नापी है। तब के और आज के उत्तराखंड में बहुत बड़ा परिवर्तन आया है। तब हमने रोजगार की तलाश में विदेश का रुख किया था। कहा कि आज बदलते उत्तराखंड में युवाओं को काम करने के लिए बहुत संभावनाएं है। क्योंकि आज उत्तराखंड ने बहुत से क्षेत्रों में विकास के बड़े मानक तय किए हैं।

प्रवासी उत्तराखंडी गिरीश पंत, अनीता शर्मा, देव रतूड़ी, विनोद जेठुडी, ए. के. काला और शैलेश उप्रेती ने अंतर्राष्ट्रीय प्रवासी उत्तराखंडी सम्मेलन की पहल के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और उत्तराखंड सरकार की सराहना करते हुए कहा कि इससे उन्हें अपनी जड़ों से जुड़ने और अपनी माटी के लिए कुछ करने का अवसर मिला है। हम सभी अपने अनुभव, तकनीक और ज्ञान से राज्य सरकार के साथ मिलकर पलायन की इस समस्या का बेहतर समाधान कर सकते हैं। कहा कि हम सभी प्रवासियों को राज्य के दूरस्थ क्षेत्र का कोई- ना – कोई गांव जरूर गोद लेना चाहिए। अपना गांव तो गोद ले ही सकते हैं। गांव गोद नहीं ले सकते तो कम – से – कम किसी बच्चे को ही गोद लें।

बहुत से प्रवासियों ने अपनी मातृभाषा में संबोधन किया जिससे मातृभूमि के प्रति उनका गहरा नाता दिखा।

मुख्यमंत्री ने उत्तराखंड के विकास में अपना योगदान देने वाले तथा राज्य के गांव को गोद लेने वाले उत्तराखंड के प्रवासियों गिरीश पंत, अनीता शर्मा, देव रतूड़ी, विनोद जेठुडी, ए. के. काला और शैलेश उप्रेती को सम्मानित भी किया।

मुख्यमंत्री ने विभिन्न महिला स्वयं सहायता समूह द्वारा हाउस ऑफ हिमालयाज उत्तराखंड ब्रांड से विक्रय किए जाने वाले उत्पादों की प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया।

प्रवासी उत्तराखंडी सम्मेलन में कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल, विधायक टिहरी किशोर उपाध्याय, मुख्य सचिव राधा रतूड़ी, पुलिस महानिदेशक दीपम सेठ, अपर मुख्य सचिव आनंद वर्धन, पूर्व पुलिस महानिदेशक अनिल रतूड़ी, प्रमुख सचिव आर.के. सुधांशु, सचिव आर. मीनाक्षी सुंदरम, रंजीत कुमार सिन्हा, विनोद कुमार सुमन, दीपेंद्र चौधरी, आयुक्त गढ़वाल विनय शंकर पांडेय, डीजी सूचना बंशीधर तिवारी सहित संबंधित गणमान्य लोग उपस्थित थे।

सीएम धामी ने किया देहरादून-मसूरी ट्रैक मार्ग का पैदल निरीक्षण

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आज देहरादून से मसूरी ट्रैक रूट का पैदल निरीक्षण करते हुए इस मार्ग पर बेसिक सुविधाओं का अवलोकन किया।

उन्होंने एमडीडीए को निर्देश दिए कि ट्रैक के नैचुरल लुक को बरकरार रखते हुए इस मार्ग पर देश – विदेश से आने वाले ट्रैकर्स, टूरिस्ट और आम – जनमानस को बैठने, खाने – पीने, शौचालय इत्यादि की बेसिक सुविधाएं डेवलप की जाए। बेहतर स्वच्छता, रूट मार्गदर्शन हेतु आकर्षक साइनेज और रेलिंग लगाई जाए। इसके साथ ही सुरक्षा और आपातकालीन उपाय भी किए जाएं।

अवलोकन के दौरान उन्होंने सीनियर सिटीजन और पुराने ट्रैकर्स से भी बातचीत की तथा उनके द्वारा प्राप्त फीडबैक को भी रूट डेवलपमेंट में शामिल करने के अधिकारियों को निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में स्थित दूसरे ट्रैकिंग रूट को भी और बेहतर बनाया जाएगा जिससे देश- विदेश से आने वाले टूरिस्ट और ट्रैकर्स उत्तराखंड की नैसर्गिकता, सुंदरता और वसुधैव कुटुंबकम की संस्कृति का आनंद ले सके तथा यहां से अच्छे अनुभव लेकर जाएं।

इस अवसर पर महानिदेशक सूचना बंशीधर तिवारी, सदस्य सचिव प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड पराग धकाते सहित संबंधित अधिकारी उपस्थित थे।

अन्तर्राष्ट्रीय प्रवासी उत्तराखंडी सम्मेलन विशेषः गांव को गोद लें योजना के तहत विदेशों में रह रहे प्रवासियों ने चिन्हित किए गांव

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की पहल पर विदेशों में रहने वाले प्रवासियों के लिए चलाए जा रहे, गांव को गोद लें (एडोप्ट ए विलेज) कार्यक्रम में रुचि दिखाते हुए, कई प्रवासियों ने अपने लिए गांव चिन्हित कर लिए हैं। साथ ही राज्य सरकार के सामने चिन्हित गांवों के लिए विकास का रोडमैप भी प्रस्तुत किया है।

गांव को गोद लें (एडोप्ट ए विलेज) कार्यक्रम का विचार, गत 05 मार्च, को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा विभिन्न देशों में रहने वाले प्रवासी उत्तराखंडियों के साथ हुए संवाद में निकल कर आया। जिसमें मुख्यमंत्री ने प्रवासियों से राज्य में एक या एक से अधिक गाँवों को गोद लेने की अपील की। इसके बाद कई प्रवासियों ने गांव चिन्हित करते हुए, राज्य सरकार के सामने यहां किए जाने वाले कार्यां का रोडमैप प्रस्तुत किया है।

चीन निवासी देव रतूड़ी ने टिहरी जिले में सुनार गांव और कमैरा सौड़ गांव में सोलर लाइट लगाने, युवाओं को चीन की होटल इंडस्ट्री में रोजगार प्राप्त और शिक्षा के क्षेत्र में सहयोग करने की इच्छा जाहिर करते हुए, प्रोजेक्ट पर काम शुरू कर दिया है।

इसी तरह वर्तमान में अमेरिका में निवासरत उद्यमी शैलेश उप्रेती ने अल्मोड़ा जिले में स्थित मनान गांव में अपनी कंपनी का इंडिया कॉरपोरेट ऑफिस खोलने और एनर्जी स्टोरेज सेंटर खोलने की दिशा में काम प्रारंभ कर दिया है।

सीमांत गांव का चयन
वर्तमान में यूएई में निवासरत टिहरी जिले के मूल निवासी विनोद जेठूड़ी ने उत्तरकाशी जिले के सीमांत ओसला गांव में स्किल ट्रेनिंग और पिथौरागढ़ निवासी गिरीश पंत ने बजेट और बरसायत गांवों में शिक्षा, कम्प्यूटर एजूकेशन के साथ ही स्थानीय उतपादों का बढ़ावा देने की दिशा में काम करने की इच्छा जाहिर की है।

पौड़ी जिले के निवासी डॉ एके काला, थाईलैंड में उद्यमी हैं, उन्होंने पौड़ी जिले के किसी एक गांव के मेधावी छात्रों की शिक्षा में मदद करने की इच्छा जाहिर है। जबकि वर्तमान में ब्रिटेन में निवारसत, नैनीताल जिले की नीरू अधिकारी ने नौकुचियाल के निकट एक्वा टोक में किवी उत्पादन, ध्यान योग केंद्र की स्थापना के साथ ही देहरादून जिले के सभावाला गांव कौशल विकास का प्रशिक्षण देने की योजना प्रस्तुत की है।

क्या है गांव को गोद लें कार्यक्रम
योजना का उद्देश्य प्रवासी उत्तराखंडियों की विशेषज्ञता, अनुभव और वित्तीय सहायता से गांव का सर्वागींण विकास करना है। यह प्रक्रिया पूर्ण रूप से स्वैच्छिक है, प्रवासीजन अपने या किसी भी गांव का चयन इसके लिए कर सकते हैं। राज्य सरकार प्रवासियों के साथ चर्चा कर आपसी सहमति के आधार पर गांव के विकास के लिए आरम्भिक 2-3 वर्षों के लिए एक रोडमैप तैयार करती है। इसके लिए प्रवासियों एवं स्थानीय प्रशासन के मध्य एमओयू भी सम्पादित किया जाने का प्रावधान है। प्रवासियों द्वारा चिन्हित गांव में शिक्षा, इंटरनेट कनैक्टिविटी, छात्रवृत्ति, उद्यमिता और स्वरोजगार को बढ़ावा देने जैसे कार्य किए जा सकते हैं। निर्माण गतिविधियाँ केवल अपरिहार्य एवं आवश्यक परिस्थितियों में ही किए जाने का प्रावधान है। जिलाधिकारी चिन्हित गांव में चल रहे कार्यक्रमों की निगरानी करते हुए, इसे मॉडल गांव के तौर पर विकसित करेंगे।
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प्रवासी उत्तराखंडियों ने ‘गांव को गोद लें’, कार्यक्रम में रुचि दिखाते हुए, अपने प्रस्ताव सरकार के सामने प्रस्तुत किए हैं। चिन्हित गांवों के लिए प्रवासियों के सुझाव पर विस्तृत विकास योजना बनाई जा रही है। उक्त गांव, विकास के रोल मॉडल बनते हुए, दूसरे प्रवासियों के लिए भी प्रेरणा का काम करेंगे।
– पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री

12 जनवरी को देहरादून में होने जा रहा है प्रथम अंतर्राष्ट्रीय प्रवासी उत्तराखंडी सम्मेलन

उत्तराखंड सरकार द्वारा आयोजित किए जा रहे प्रथम अंतर्राष्ट्रीय प्रवासी उत्तराखंडी सम्मेलन में 17 देशों में रहने वाले उत्तराखंडी पहुंच रहे हें। अब तक 50 से अधिक जाने माने प्रवासी उत्तराखंडियों ने सम्मेलन के लिए अपना पंजीकरण करवा लिया है।

12 जनवरी को आयोजित होने वाले एक दिवसीय अन्तर्राष्ट्रीय प्रवासी उत्तराखंडी सम्मेलन का उद्घाटन मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी करेंगे। सम्मेलन में उत्तराखंड में निवेश की संभावना, हॉस्पेटिलिटी दृ वेलनेस, कौशल विकास, विदेश में रोजगार और उच्च शिक्षा के साथ ही उद्यान जड़ी- बूटी में संभावना विषय पर चार अलग अलग सत्रों में पैनल डिस्कशन भी किया जाएगा।

शामिल हो रहे हैं कई दिग्गज
इस सम्मेलन में विदेश में रहते हुए अलग -अलग क्षेत्रों में नाम कमाने वाले कई प्रवासी उत्तराखंडी शामिल हो रहे हैं। इसमें प्रवासी भारतीय सम्मान प्राप्त दुबई निवासी गिरीश चंद्र पंत के अलावा चीन से देव रतूड़ी, अमेरिका से डॉ अनिता शर्मा, जापान से भुवन तिवारी, सिंगापुर से सुनील थपलियाल, मीनाक्षी डबराल, थाईलैंड से डॉ एके काला जैसे नाम शामिल हैं। कई प्रवासी, इससे पहले भारत सरकार की ओर से भुवनेश्वर में आयोजित किए जा रहे प्रवासी भारतीय दिवस में भी शामिल होंगे। कार्यक्रम की विस्तृत जानकारी के लिए वेबसाइट https://pravasiuttarakhandi.uk.gov.in/en/program भी शुरू कर दी गई है।

मुख्यमंत्री धामी की पहल से हुई शुरुआत

विदेशों में रहने वाले प्रवासी उत्तराखंडियों को अपनी मिट्टी से जोड़ने की पहल खुद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने की। दरअसल, दिसंबर 2023 में आयोजित इन्वेस्टर समिट से पहले सीएम धामी विदेश दौरे पर गए थे, जहां प्रवासियों ने उनका उत्तराखंड की रीति परंपरा से स्वागत किया। इस दौरान तमाम सफल लोगों की मुख्यमंत्री से मुलाकात हुई। इसी के बाद मुख्यमंत्री ने ऐसे प्रवासियों के अनुभव का लाभ लेने के लिए, शासन में प्रवासी उत्तराखंडी सेल गठित किए जाने के साथ ही अंतरराष्ट्रीय प्रवासी उत्तराखंडी सम्मेलन भी आयोजित करने के निर्देश दिए। इसी क्रम में गत सात नवंबर को देहरादून में अपने देश के भीतर ही विभिन्न राज्यों में रहने वाले उत्तराखंडियों के बीच ऐसा ही एक सम्मेलन आयोजित किया जा चुका है।

विदेशों में रहने वाले उत्तराखंड के प्रवासी, हर क्षेत्र में नाम कमा रहे हैं। उनके पास ज्ञान, विज्ञान, तकनीकी, उद्यमशीलता का विपुल अनुभव है। सरकार चाहती है कि इस अनुभव से प्रवासीजन अपने प्रदेश और गांव का भी विकास करें। सरकार इस काम में हर संभव मदद देने को तैयार है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी लगातार प्रवासियों को अपने प्रदेशों के विकास में योगदान करने की प्रेरणा देते रहे हैं, जिसके सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं।
– पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री उत्तराखंड ।

मुख्यमंत्री धामी ने आवास परिसर में किया ट्यूलिप बल्ब का रोपण

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्यमंत्री आवास परिसर में अपने पारिवारिक सदस्यों संग विभिन्न प्रजातियों के ट्यूलिप बल्ब का रोपण किया।

इस दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान समय में फूलों की बहुत अधिक मांग बनी रहती है जिससे प्रदेश में भी पुष्प उत्पादन से स्वरोजगार अर्जित करने की बहुत अधिक संभावना है। अतः किसानों को परंपरागत खेती के साथ-साथ पुष्प उत्पादन की व्यावसायिक खेती के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।

इस दौरान मुख्यमंत्री आवास परिसर में उन्होंने विभिन्न बागवानी कार्यों का भी निरीक्षण किया तथा फूलों की विभिन्न प्रजातियों के कार्यों का अवलोकन कर ऐसे प्रयासों की सराहना की।

हमारे प्राचीन गुरुकुलों में भी संवाद और चर्चा को शिक्षा का आधार माना गयाः सीएम

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने दून विश्वविद्यालय, देहरादून में आयोजित गंग धारा-विचारों का अविरल प्रवाह कार्यक्रम में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर उन्होंने पहाड़ी उत्पादों पर आधारित स्टालों का अवलोकन किया।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कार्यक्रम हेतु आयोजकों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि इस प्रकार के आयोजन हमारी संस्कृति और परंपराओं को पोषित करने के साथ समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाते हैं। जिस प्रकार गंगा का प्रवाह अविरल है, उसी प्रकार हमारे विचारों का प्रवाह भी गतिमान रहता है। विचारों का प्रवाह हमें जीवन में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करता है। उन्होंने कहा विचारों का आदान-प्रदान सदैव हमारी परंपरा का हिस्सा रहा है। हमारे प्राचीन गुरुकुलों में भी संवाद और चर्चा को शिक्षा का आधार माना गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस कार्यक्रम में भारतीय संस्कृति पर हमें श्रद्धेय स्वामी अवधेशानंद गिरि जी महाराज का मार्गदर्शन प्राप्त होगा। इस दो दिवसीय व्याख्यान श्रृंखला के दौरान पलायन, शिक्षा, संस्कृति, पर्यावरण जैसे विषयों के साथ हिमालयी क्षेत्रों की धारण क्षमता पर भी विचार-विमर्श किया जाएगा। सभी विषय हमारे राज्य के साथ समस्त हिमालयी क्षेत्र के कल्याण के लिए महत्वपूर्ण हैं। मुख्यमंत्री ने कहा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं के संरक्षण और संवर्धन की दिशा में कार्य कर रहा है। लोकल फॉर वोकल, मेक इन इंडिया, मेड इन इंडिया और स्टार्टअप इंडिया के माध्यम से आत्मनिर्भर भारत के सपने को साकार किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में राज्य सरकार, राज्य में सांस्कृतिक परंपराओं को बढ़ावा देने, एवं समग्र विकास के लिए पूर्ण प्रतिबद्धता से कार्य कर रही है। राज्य सरकार दून विश्वविद्यालय में सेंटर फॉर हिंदू स्टडीज की स्थापना करने जा रही है। जहाँ हिंदू सभ्यता, दर्शन, इतिहास और सिद्धांतों पर गहन अध्ययन और शोध कार्य किया जाएगा। इकॉनमी और इकोलॉजी के समन्वय के साथ राज्य के सर्वांगीण विकास को आगे बढ़ाया जा रहा है। उत्तराखंड एकमात्र राज्य है जहां जीडीपी के साथ जीईपी को भी मापने का प्रयास किया गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि नीति आयोग द्वारा जारी सतत विकास के लक्ष्यों की सूची में उत्तराखंड देश में प्रथम स्थान पर रहा। राज्य सरकार स्टेट मिलेट मिशन, एप्पल मिशन, नई पर्यटन नीति, नई फिल्म नीति, जैसी अनेकों योजनाओं के माध्यम से स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान कर रही है। मुख्यमंत्री ने कहा उत्तराखंड सरकार ने देश में सबसे पहले समान नागरिक संहिता पर कार्य किया। जिसे जनवरी 2025 तक लागू कर दिया जाएगा। समान नागरिक संहिता के कई प्रावधानों का सरलीकरण किया जा रहा है। इसे समझने हेतु एप्लीकेशन भी तैयार किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने अतिक्रमण के खिलाफ कार्यवाही तेज की है। सख्त धर्मांतरण कानून, दंगा रोधी कानून एवं नकल विरोधी कानून भी लागू किया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा सरकार ने जो भी कार्रवाई की है, वो किसी धर्म या समुदाय विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि प्रदेश की सांस्कृतिक एकता और सामाजिक सद्भाव को बनाए रखने के उद्देश्य से की है।

इस अवसर पर आचार्य महामंडलेश्वर जूना अखाड़ा स्वामी अवधेशानंद गिरी जी महाराज, पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत, विधायक विनोद चमोली, कुलपति दून विश्वविधालय डॉ. सुरेखा डंगवाल, एंव अन्य लोग मौजूद रहे।

उत्तराखण्ड प्राचीन काल से रही है आयुर्वेद व प्रज्ञा की भूमिः सीएम

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उत्तराखण्ड को योग एवं आयुष की भूमि बताते हुए देहरादून में आयोजित होने वाली 10वीं विश्व आयुर्वेद कांग्रेस को आयुर्वेद के क्षेत्र में राज्य को नई पहचान दिलाने वाला प्रयास बताया है। उन्होंने कहा कि इस माह 12 से 15 दिसम्बर तक आयोजित होने वाले इस वैश्विक आयोजन में होने वाले चिंतन, मंथन एवं विचार विमर्श से निकलने वाला अमृत आयुर्वेद के क्षेत्र में भारत को ही नहीं विश्व को जगाने का कार्य करेगा। उन्होंने कहा कि कोरोना महामारी के दौर में आयुर्वेद एवं आयुष का प्रभाव लोगों ने देखा है। सोमवार को मीडिया सेन्टर सचिवालय में 10वें विश्व आयुर्वेद कांग्रेस के कर्टेन रेजर एवं प्रोग्राम गाइड का विमोचन करते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि यह आयोजन सर्वे सन्तु निरामयः का संदेश भी घर घर तक पहुंचाने में मददगार होगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड प्राचीन काल से आयुर्वेद व प्रज्ञा की भूमि रही है। हमारे ऋषि मुनियों एवं मनीषियों ने इस दिशा में व्यापक शोध कर हमें यह विधा प्रदान की है। हमारे राज्य की जलवायु औषधीय पादपों के सर्वथा अनुकूल है। आयुर्वेद का विषय राज्य के साथ हिमालय व वनों का भी है। हमारा राज्य हर क्षेत्र में अग्रणी बनें आगे बढ़े इस दिशा में हम प्रयासरत है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर अपने संदेश में कहा था कि उत्तराखण्ड में विकास का यज्ञ चल रहा है। प्रधानमंत्री का मार्गदर्शन राज्य के विकास के प्रति हमें सतत प्रयत्नशील रहने की प्रेरणा देता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमने राज्य हित में अनेक निर्णय लिये है। राज्य में कठोर नकल विरोधी कानून बनाया गया है, समान नागरिक संहिता लागू करने की दिशा में प्रयास जारी है। राज्य के समग्र विकास में हमारे प्रयासों को नीति आयोग द्वारा भी सराहा गया है। इसी का परिणाम है कि सतत विकास लक्ष्यों की प्राप्ति में राज्य को प्रथम स्थान प्राप्त हुआ है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड अपनी प्राकृतिक संपदा, औषधीय पौधों और शांत हिमालयीय वातावरण के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है। इस वैश्विक आयुर्वेद कांग्रेस में 58 देशों से 300 से अधिक अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधि प्रतिभाग कर रहे हैं। जबकि देश भर के 6500 प्रतिनिधियों और 2 लाख आगंतुकों के साथ यह आयोजन ज्ञान और सहयोग का अद्वितीय मंच बनेगा। उत्तराखण्ड का पवेलियन-प्रदेश के 8 विभागों आयुर्वेदिक, होम्योपैथी, स्वास्थ्य, कौशल विकास, पर्यटन, उद्योग, उद्यान, ग्राम्य विकास के स्टॉल समेकित रूप से उत्तराखण्ड को आयुर्वेद और वेलनेस पर्यटन के प्रमुख केन्द्र के रूप में बढ़ावा देने में सहायक होंगे। यह आयुर्वेद के फायदों और आधुनिक तकनीक के साथ इसके एकीकरण के प्रति जागरूकता फैलायेगा तथा आयुर्वेद के क्षेत्र में ज्ञान साझा करने, शोध सहयोग और व्यापार के अवसरों को बढ़ावा देगा। उत्तराखण्ड और भारत में आयुष क्षेत्र के विकास और प्रगति में योगदान देने में भी यह आयोजन मददगार रहेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में आयुष नीति के माध्यम से आयुष निर्माण, वेलनेस, शिक्षा, कृषि सेक्टर को गति प्रदान की जा रही है। देश की प्रथम योग नीति निर्माण का कार्य भी प्रगति पर है। जबकि राज्य में 03 नये 50 शैय्या युक्त आयुष चिकित्सालयों का निर्माण कार्य टिहरी /कोटद्वार/टनकपुर में किया जा रहा है। राज्य में आयुष आधारित 300 आयुष्मान आरोग्य मंदिरों की स्थापना पूर्ण की जा चुकी है। सभी आयुष अस्पतालों में टेलीमेडिसिन/पंचकर्म/ मर्म चिकित्सा इत्यादि सुविधाएं प्रदान की जा रही हैं। राज्य के 150 से अधिक आयुष चिकित्सालय छ।ठभ् ।बबतमकपजंजपवद प्राप्त कर चुके है।
इस अवसर पर मुख्य सचिव राधा रतूडी, सचिव रविनाथ रमन ने भी अपने विचार रखे। 10वें विश्व आयुर्वेद कांग्रेस के ट्रस्टी श्री रजनीश पौराणिक द्वारा कार्यक्रम की विस्तृत जानकारी प्रदान की गई। कार्यक्रम का संचालन निदेशक आयुष विजय जोगदंडे ने किया।

होमगार्ड्स विभाग के राजपत्रित एवं अराजपत्रित अधिकारियों एवं कर्मचारियों को प्रत्येक 3 वर्ष में दिये जाने वाला वर्दी भत्ता होगा प्रतिवर्ष

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने ननूरखेड़ा, देहरादून में होमगार्ड्स स्थापना दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में रैतिक परेड का निरीक्षण किया। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर होमगार्ड्स जवानों के मेधावी बच्चों को छात्रवृत्ति की धनराशि के चेक भी प्रदान किये। होमगार्ड्स एवं नागरिक सुरक्षा विभाग की स्मारिका 2024 और विभागीय कलेण्डर 2025 का भी मुख्यमंत्री ने किया विमोचन। इस अवसर पर उन्होंने घोषणा की कि 9 हजार फीट से अधिक ऊंचाई पर ड्यूटीरत होमगार्ड्स स्वयंसेवकों को पुलिस कार्मिकों एवं एस०डी०आर०एफ० की भांति प्रति जवान को 200 रू. प्रतिदिन अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि दी जायेगी। एस०डी०आर०एफ० जवानों के साथ प्रशिक्षित होमगार्ड्स को तैनाती होने पर 100 रुपए प्रति जवान को प्रतिदिन प्रोत्साहन राशि अनुमन्य की जाएगी। होमगार्ड्स विभाग के राजपत्रित एवं अराजपत्रित अधिकारियों एवं कर्मचारियों को प्रत्येक 3 वर्ष में दिये जाने वाले वर्दी भत्ता को प्रतिवर्ष किया जाएगा। 60 वर्ष की अधिवर्षता आयु पूर्ण करने वाले प्रत्येक होमगार्ड्स को होमगार्ड्स कल्याण कोष से दी जाने वाली अनुग्रह राशि में 50 हजार रुपए की बढ़ोत्तरी की जाएगी।

मुख्यमंत्री ने सभी जवानों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि राष्ट्र सेवा का अद्वितीय उदाहरण अगर कहीं स्पष्ट देखने को मिलता है तो वह जवानों के मध्य आकर देखने को मिलता है। होमगार्ड्स संगठन राज्य में सामाजिक सुरक्षा और व्यवस्था नियंत्रण के लिए सक्रिय रूप से काम करता है। हर स्थिति में अपने दायित्वों को पूरा करने के लिए तत्पर रहते हैं। होमगार्ड्स जवान कानून – व्यवस्था को बनाए रखने, यातायात नियंत्रित करने, चारधाम यात्रा, कुम्भ मेला एवं कांवड़ यात्रा जैसे धार्मिक आयोजनों में भी अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। प्राकृतिक आपदाओं के समय भी आवश्यकता पड़ने पर हमेशा तैयार रहते हैं। हमारे ये जवान “जहां कम वहां हम“ की भावना से कार्य करते हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे इन जवानों के हौसले और समर्पण को सम्मान देते हुए राज्य सरकार ने उनके कल्याण और संगठन के उत्थान के लिए अनेक निर्णय लिए हैं। प्रेमनगर, देहरादून में एक अत्याधुनिक इंडोर फायरिंग रेंज का निर्माण किया जा रहा है, जो हमारे होमगार्ड्स को शस्त्र प्रशिक्षण में लाभ पहुंचाएगी। होमगार्ड्स के लिए सेना के जवानों की तर्ज पर सीएसडी कैंटीन की सुविधा भी प्रारंभ की है। होमगार्ड्स जवानों को 12 आकस्मिक अवकाश देने का निर्णय भी हमारी सरकार द्वारा ही लिया गया है। महिला होमगार्ड्स को प्रसूति अवकाश प्रदान करने का ऐतिहासिक निर्णय भी हमारी सरकार ने ही लिया। प्रदेश के 9 स्थानों पर कंपनी कार्यालय-ट्रांजिट कैंप और इमरजेंसी सर्च एवं रेस्क्यू सेंटर स्थापित करने की योजना बनाई गई है। 13 करोड़ से अधिक की वित्तीय स्वीकृति से इन केंद्रों का निर्माण हो रहा है, ये केंद्र उत्तराखंड को आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में मजबूत करेंगे।

इस अवसर पर विधायक उमेश शर्मा काऊ, खजान दास, पूर्व मेयर सुनील उनियाल गामा, अनिता ममगाईं, सचिव शैलेश बगोली, डीजीपी दीपम सेठ, कमांडेंट जनरल होमगार्ड पी.वी.के. प्रसाद, मुख्य राज्य सूचना आयुक्त विवेक शर्मा एवं अन्य अधिकारी उपस्थित थे।