वर्ल्ड आयुर्वेद कांग्रेस एवं आरोग्य एक्सपो में 12 तरह की ओपीडी, तैनात रहेंगे विशेषज्ञ चिकित्सक

आयुर्वेद के परंपरागत ज्ञान को समझने-जानने के अलावा इसके उपचार की सुविधा भी एक ही जगह पर मिले, तो इससे बेहतर और क्या हो सकता है। वर्ल्ड आयुर्वेद कांग्रेस एवं आरोग्य एक्सपो-2024 में ऐसा ही मौका उपलब्ध हो रहा है। विश्व स्तरीय इस कार्यक्रम में विषय विशेषज्ञ आयुर्वेद के हर एक पहलू पर बात करेंगे, तो विशेषज्ञ चिकित्सक डेलीगेट्स के साथ ही सामान्य लोगों को भी इसका उपचार उपलब्ध कराएंगे। इसके लिए 12 तरह की ओपीडी पूरे समय एक्टिव रहेंगी। हर एक ओपीडी में दो-दो विशेषज्ञ चिकित्सक तैनात रहेंगे, जिनसे परामर्श भी मिलेगा और उपचार भी।

परेड ग्राउंड देहरादून में यह कार्यक्रम 12 दिसंबर से शुरू होने जा रहा है, जो कि 15 दिसंबर तक चलेगा। आयुर्वेद का विश्व स्तरीय यह कार्यक्रम पहली बार उत्तराखंड में हो रहा है। वर्ष 2002 से इस तरह के कार्यक्रम की शुरुआत हुई है। पिछले वर्ष गोवा को इस कार्यक्रम की मेजबानी मिली थी। उत्तराखंड इस आयोजन के लिए उत्साहित है और तैयारियों पर पूरा जोर है। वैसे भी, आयुर्वेद के लिहाज से उत्तराखंड की समृद्ध विरासत रही है। इसलिए यहां से इस कार्यक्रम के संदेश देश-दुनिया में प्रभावी ढंग से जाने तय माने जा रहे है।

अपर सचिव आयुष डॉ विजय कुमार जोगदंडे के अनुसार कार्यक्रम स्थल पर 12 ओपीडी सक्रिय रहेंगी। इसके लिए तैयारियां चल रही हैं। हर ओपीडी में दो-दो विशेषज्ञ चिकित्सकों की ड्यूटी लगाई जा रही है। मकसद ये ही है कि कार्यक्रम का हिस्सा बनने वालों को आयुर्वेद का ज्ञान भी मिले, साथ ही उनके रोगों का निदान भी परंपरागत चिकित्सा से संभव हो पाए।

ये होंगी ओपीडी, जहां मिलेगा परामर्श और उपचार

1-मर्म चिकित्सा (अस्थि संधि एव मर्म आघात चिकित्सा हेतु)
2-नाड़ी परीक्षा
3-क्षार सूत्र, अग्निकर्म एवं रक्तमोक्षण
4-नेत्र, शिरो, नासा एवं कर्ण रोग चिकित्सा
5-पंचकर्म चिकित्सा
6-स्त्री एवं प्रसूति रोग चिकित्सा
7-बाल रोग चिकित्सा
8-वृद्धजन रोग एवं मानस रोग चिकित्सा
9-स्वस्थवृत्त एवं अष्टांग योग चिकित्सा
10-किचन फार्मेसी एवं अरोमा थेरेपी
11-प्राकृतिक चिकित्सा
12-होम्योपैथी चिकित्सा
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विश्व आयुर्वेद कांग्रेस और आरोग्य एक्सपो-2024 परंपरागत आयुर्वेद चिकित्सा को समझने और जानने के लिए एक बेहतरीन अवसर है। देवभूमि में आयुर्वेद के विभिन्न पहलुओं पर विचार मंथन निश्चित तौर पर सभी के लिए उपयोगी साबित होगा। इसके अलावा, निशुल्क स्वास्थ्य शिविर में विशेषज्ञ डॉक्टरों के अनुभव का लाभ भी लोगों को मिलेगा।
– पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री 

अंतर्राष्ट्रीय प्रवासी उत्तराखंडी सम्मेलन के आयोजन की जिम्मेदारी को एक सप्ताह में एक्शन प्लान तय करने के निर्देश

सीएस राधा रतूड़ी ने 12 जनवरी 2025 को देहरादून में प्रस्तावित अन्तर्राष्ट्रीय प्रवासी उत्तराखण्डी सम्मेलन के आयोजन के दौरान विभिन्न सत्रों की जिम्मेदारी सम्बन्धित सचिवों को देते हुए एक सप्ताह में कार्ययोजना तय करने के निर्देश दिए हैं। मुख्य सचिव ने अन्तर्राष्ट्रीय प्रवासी उत्तराखण्डी सम्मेलन के दौरान आयोजित होने वाले सत्रों में राज्य में विभिन्न क्षेत्रों जैसे मैन्युफेक्चरिंग, पावर जनरेशन, स्टार्ट-अप आदि में निवेश के सम्भावनाओं पर चर्चा करवाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने विशेषकर पर्यटन, कृषि, बागवानी, ग्राम्य विकास, उच्च शिक्षा, स्किल डेवलपमेण्ट, हेल्थ केयर, आयुष, योगा आदि पर विचार मंथन करवाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने इन सत्रों में विषय विशेषज्ञों एवं अधिकारियों के साथ ही अतिथि प्रवासियों को भी वक्ताओं के रूप में शामिल करने के निर्देश दिए हैं।

सचिवालय में आयोजित बैठक में मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने प्रस्तावित अन्तर्राष्ट्रीय प्रवासी उत्तराखण्डी सम्मेलन के आयोजन के दौरान राज्य की लोक संस्कृति, खानपान, स्थानीय हस्तशिल्प, उत्पादों के बेहतरीन प्रदर्शन के निर्देश दिए हैं। मुख्य सचिव ने सम्मेलन के दौरान आयोजित किए जाने वाले प्रत्येक सत्र हेतु सम्बन्धित विभाग के सचिव को नोडल अधिकारी बनाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने जिलाधिकारी एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक देहरादून को सम्मेलन के आयोजन के दौरान शहर एवं आयोजन स्थल की स्वच्छता, पार्किंग व्यवस्था, विदेश से आने वाले प्रवासी अतिथियों के स्वागत-सत्कार हेतु सम्पर्क अधिकारियों, परिवहन, प्रोटोकॉल, रहने, ट्रैफिक की पुख्ता व्यवस्था हेतु निर्देश दिए हैं।

बैठक में अपर मुख्य सचिव आनंद बर्धन, प्रमुख सचिव आर के सुधांशु, सचिव मीनाक्षी सुन्दरम, सचिन कुर्वे, विनोद कुमार सुमन सहित सभी विभागों के सचिव, अपर सचिव एवं सम्बन्धित विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।

उत्तराखंड आवास विकास परिषद 15 आवासीय परियोजनाओं पर कर रहा है काम

सर के ऊपर पक्की छत का सपना, हर कोई देखता है। पर जमीन से लेकर निर्माण की लागत के कारण लाखों लोग इस सपने को पूरा करने से वंचित रह जाते हैं। उत्तराखंड आवास विकास परिषद और एमडीडीए इसी क्रम में निर्बल आय वर्ग वाले परिवारों के लिए करीब 16 हजार किफायती घरों का निर्माण कर रहे हैं।

उत्तराखंड आवास विकास परिषद राज्य बनने के बाद पहली बार अपनी आवासीय परियोजनाओं पर काम कर रहा है। परिषद 15 परियोजनाएं निजी निवेशकों के साथ तैयार कर रहा है, जिसमें कुल 12,856 आवास शामिल हैं। जबकि शेष पांच संबंधित विकास प्राधिकरणों द्वारा विकसित की जा रही हैं, प्राधिकरणों के जरिए कुल 3104 आवास तैयार किये जा रहे हैं। अपर आयुक्त आवास पीसी दुम्का के मुताबिक अब तक निजी भागीदारी के साथ 1760 घर बनाते हुए लाभार्थियों को सौंपे जा चुके हैं, जबकि 14635 आवासों का आबंटन भी किया जा चुका है। शेष सभी परियोजनाओं को मार्च 2025 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

लाभार्थी को ढाई लाख में मिलता है घर
योजना के तहत निजी निवेशक छह लाख रुपए की लागत से दो कमरे, किचन और शौचालय जैसी सुविधाओं से युक्त घर तैयार करता है, जिसमें से उन्हें केद्र और राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं से साढ़े तीन लाख रुपए मिलते हैं, इस तरह लाभार्थी को महज ढाई लाख रुपए की लागत में आसान होम लोन के जरिए घर मिल जाता है। इसमें जमीन सहित निर्माण का समस्त खर्च निजी निवेशक द्वारा उठाया जाता है। योजना के तहत तीन लाख रुपए से कम सालाना आय वर्ग वाले आवासहीन परिवार पात्र होते हैं। साथ ही पात्र परिवार का 15 जून 2015 से पहले उत्तराखंड का निवासी होना भी जरूरी है।

एमडीडीए की तीन परियोजनाएं
योजना के तहत मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) ट्रांसपोर्ट नगर में 224, तरला आमवाला में 240 फ्लैट वाली परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं, जबकि धौलास में 240 फ्लैट मार्च 2025 तक तैयार हो जाएंगे। एमडीडीए उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी के मुताबिक परियोजना के लिए लाभार्थियों का चयन पारदर्शिता के साथ किया गया है। तय समय में सभी को फ्लैट की चाबी सौंप दी जाएगी।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने अंत्योदय के लक्ष्य को केंद्रित करते हुए, पीएम आवास योजना लागू की है। इसके तहत आवासहीन परिवारों को पक्का घर बनाकर दिया जा रहा है। उत्तराखंड में आवास विकास प्राधिकरण ने इस लक्ष्य को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री

देहरादून में 12 से 15 दिसंबर के बीच होगा नेशनल आरोग्य एक्सपोः 2024

देहरादून में 12 से 15 दिसंबर के बीच होने जा रहे 10वें विश्व आयुर्वेद कांग्रेस और आरोग्य एक्सपो- 2024 में 40 से अधिक देशों के विशेषज्ञों सहित छह हजार से अधिक डेलीगेट्स शामिल होंगे। आयोजन में आयुर्वेद, योग, यूनानी, सिद्धा और होम्योपैथी जैसी परंपरागत चिकित्सा पद्धतियों को लोकप्रिय बनाने पर विचार विमर्श किया जाएगा।

हिमालय और गंगा दृ यमुना जैसी सदानीरा नदियों के चलते उत्तराखंड हमेशा से योग साधकों के साथ ही आयुर्वेद व अन्य परंपरागत चिकित्सा पद़धतियों के शोधार्थियों के लिए अहम पड़ाव रहा है। अब इसी क्रम में उत्तराखंड में 12 से 15 दिसंबर के बीच वर्ल्ड आयुर्वेद फाउंडेशन की ओर से ‘10वां विश्व आयुर्वेद कांग्रेस और आरोग्य एक्सपो- 2024’ का आयोजन किया जा रहा है। इस आयोजन को 40 देशों के 20 अंतराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त स्पीकर के साथ ही विभिन्न सत्रों में 150 से अधिक वक्ता संबोधित करेंगे। आयोजन में छह हजार से अधिक डेलीगेट्स के सामने परंपरागत चिकित्सा पद्धतियों पर आधारित 900 से अधिक पेपर प्रस्तुत किए जाएंगे। इसके साथ ही आयुर्वेद, यूनानी, सिद्धा और होम्योपैथी में निवेश और व्यापार को बढ़ावा देने के लिए, आयुष ड्रग्स निर्माता के साथ ही बॉयर सेलर मीट का भी आयोजन किया जाएगा। अपर सचिव विजय जोगदंडे ने बताया कि आयुष मंत्रालय के सहयोग से देहरादून के परेड ग्राउंड में होने जा रहे इस एक्सपो में आम लोगों के लिए फ्री आयुष क्लीनिक का आयोजन किया जाएगा, जिसमें डायबिटीज, महिला और बाल स्वास्थ्य, वृद्धावस्था, न्यूरोलॉजी, आंकोलॉजी, प्रिवेंटिव कार्डियोलॉजी पर निशुल्क परामर्श दिया जाएगा। यह आयोजन एक तरह से आयुर्वेद, योग, यूनानी, सिद्धा और होम्योपैथी का समग्र मेला साबित होगा। जिसमें प्रदेशभर से तीन लाख लोगों के सामने होने की उम्मीद है।
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देहरादून में 10वां विश्व आयुर्वेद कांग्रेस और आरोग्य एक्सपो- 2024 का आयोजन किया जाना पूरे उत्तराखंड के लिए गौरव की बात है। इस आयोजन के जरिए, प्रदेश के आयुष और अन्य परंपरागत दवा निर्माताओं को खासकर लाभ होगा। साथ ही प्रदेश में परंपरागत चिकित्सा के जरिए भी जागरूकता पैदा होगी।
– पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री

50वां खलंगा मेला स्मारिका पुस्तक का सीएम ने किया विमोचन

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सागरताल नालापानी, देहरादून में बलभद्र खलंगा विकास समिति द्वारा आयोजित ‘50वाँ खलंगा मेला’ में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने खलंगा मेला आयोजन समिति को 5 लाख रुपए दिए जाने की घोषणा की। ‘50वाँ खलंगा मेला स्मारिका’ का विमोचन भी मुख्यमंत्री द्वारा किया गया।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने संबोधन में कहा कि खलंगा मेला पूर्वजों की वीरता और अदम्य साहस को स्मरण करने का अवसर है। उन्होंने महान सपूत सेनानायक कुंवर बलभद्र थापा और उनके वीर साथियों, वीरांगनाओं को भी नमन किया। उन्होंने कहा खलंगा की वीरभूमि में वर्ष 1814 के एंग्लो-गोरखा युद्ध में सेनानायक कुंवर बलभद्र थापा और उनके वीर सैनिकों ने मातृभूमि की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति दी थी। इस युद्ध में कुंवर बलभद्र थापा और उनके वीर सैनिकों ने ब्रिटिश सैनिकों की विशाल सेना का सामना करते हुए अपनी वीरता और रणनीतिक कौशल से ब्रिटिश सेना को खदेड़ दिया था।

मुख्यमंत्री ने कहा कि ये युद्ध हमारे वीर गोरखा योद्धाओं के अदम्य साहस और मातृभूमि के प्रति उनके असीम प्रेम का प्रतीक है, जो हमेशा हमें देशभक्ति की प्रेरणा देता रहेगा। खलंगा की गाथा हमारे वीर पूर्वजों के अप्रतिम साहस का एवं हमारी गौरवशाली विरासत का प्रतीक है। उन्होंने कहा ये मेला हमारी समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं को सहेजते हुए उसे अगली पीढ़ी तक पहुंचाने का भी एक माध्यम है। हमारे देश की ऐतिहासिक धरोहरें हमारे गौरवमयी अतीत की पहचान होने के साथ हमारे संस्कृति रूपी वट वृक्ष की मजबूत जड़ें भी हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हमारी संस्कृति को मजबूत करने का कार्य पूरे देश में किया जा रहा है। प्रधानमंत्री के नेतृत्व में विकास के साथ विरासत को भी आगे बढ़ाया जा रहा है। खलंगा युद्ध स्मारक को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के संरक्षण में रखना, इसका बड़ा उदाहरण है। उन्होंने कहा राज्य सरकार गोरखा समाज के उत्थान के प्रति पूर्णतः प्रतिबद्ध है और उनके विकास व कल्याण के लिए निरंतर प्रयासरत है। निश्चित ही ऐसे आयोजनों से नई पीढ़ी को इन गोरखा समाज की परंपराओं को संजोए रखने तथा अपने पूर्वजों की वीरता और बलिदान को याद रखने में सहायक सिद्ध होंगे।

इस अवसर पर विधायक उमेश शर्मा काऊ, बलभद्र ख़लंगा विकास समिति के अध्यक्ष कर्नल विक्रम सिंह थापा, कुलदीप बुटोला, विश्वास डाबर, विजय बलूनी, पदम सिंह, ब्रिगेडियर राम सिंह थापा एंव लोग मौजूद रहे।

सिल्क्यारा विजय अभियान पुस्तक का राज्यपाल सहित सीएम ने किया विमोचन

राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि) एवं मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गुरुवार को दून विश्वविद्यालय, देहरादून में आयोजित ‘सिलक्यारा विजय अभियान’ प्रथम वर्षगाँठ एवं 19वाँ राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी सम्मेलन-2024 में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर उन्होंने सिल्क्यारा विजय अभियान पुस्तक एंव अन्य पुस्तकों का विमोचन किया। उन्होंने सिल्क्यारा रेस्क्यू अभियान पर बनी लघु फिल्म का अवलोकन भी किया।

राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह ने कहा कि यह अभियान राज्य आपदा प्रबंधन क्षमता का उत्कृष्ट उदाहरण है। विश्व के पर्वतीय देशों के लिए यह उदाहरण है कि किस प्रकार से सिलक्यारा टनल में फँसने के बाद किस प्रकार 41 श्रमिकों को बचाव कार्य सफलतापूर्वक पूर्ण किया गया। यह धैर्य, लीडरशिप, कॉर्डिनेशन और अपने संकल्प को पूरा करने का बहुत बड़ा उदाहरण है। पूरे विश्व ने देखा है कि किस 17 देशों के एक्सपर्ट्स 41 फँसे हुए श्रमिकों को सुरक्षित बाहर निकालने का कार्य जिसमे एक भी श्रमिक को खरोंच तक नहीं आई। उन्होंने कहा कि इस विजय अभियान का डॉक्यूमेंटेशन किया जाना भी एक ऐतिहासिक कार्य है। यह एक बहुत बड़ी उपलब्धि थी। राज्यपाल ने कहा कि भारतीयों के अंदर जो क्षमता है, जिसे पूरी दुनिया ने कोविड के दौरान भी देखा था। इसके बाद सिलक्यारा टनल में फंसे श्रमिकों का बचाव कार्य भी इसका एक और उदाहरण है।

राज्यपाल ने कहा कि प्रदेश को ईश्वर ने बहुत से प्राकृतिक संसाधनों से नवाजा है। अब इनके संरक्षण की जिम्मेदारी भी हमारी है। उन्होंने कहा कि राजभवन में वाटर हार्वेस्टिंग पर कार्य किया जा रहा है, जिसके अच्छे परिणाम दिख रहे हैं। उन्होंने आम जन से अपने आस-पास नौले धारों और प्राकृतिक जल स्रोतों के संरक्षण का आह्वान किया। राज्यपाल ने कहा कि हमें स्थानीय समुदायों की भागीदारी को भी प्रोत्साहित करना है जल प्रबंधन में ग्राम पंचायतों और नागरिक संगठनों को महत्वपूर्ण भूमिका निभानी होगी।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हमसे आग्रह किया है कि पर्यावरण की रक्षा करते हुए उन्होंने कहा कि एक पेड़ माँ के नाम लगाकर इस आंदोलन को आगे बढ़ाने में अपना योगदान दें। उन्होंने कहा कि माताओं, बहनों में कुछ भी कर गुजरने की एक अद्भुत क्षमता है। हमें अपनी बहनों को आगे बढ़ाने में उनका साथ देना है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बीते वर्ष सिलक्यारा के सफल बचाव अभियान ने आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में एक नया अध्याय लिखा था। उन्होंने कहा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और सहयोग से 17 दिनों के अथक प्रयासों से सिलक्यारा टनल में फंसे हुए 41 श्रमिकों को सुरक्षित बचाया गया था। उन्होंने कहा पूरा विश्व और देश के लोग सिल्क्यारा के लिए दुवा कर रहा था। जो अभियान सामूहिक समर्पण और तकनीकी दक्षता की अनुपम मिसाल बना। जिसे अब आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर अध्ययन और शोध का विषय भी माना जा रहा है। उन्होंने सिल्क्यारा के सफल रेस्क्यू के एक वर्ष होने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी सम्मेलन बीते 19 वर्षों से प्रदेश में विज्ञान एवं नवाचार को प्रोत्साहित करने के साथ युवा वैज्ञानिकों को प्रेरित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। ये सम्मेलन शोध पत्रों के प्रस्तुतीकरण, सामाजिक महत्व के शोध, नवाचार और नीतिनिर्धारण जैसे गंभीर विषयों पर चिंतन का मंच भी है। हर वर्ष सम्मेलन में राज्य से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा होती है, पिछले तीन वर्षों में हमने ग्रामीण विज्ञान, भारतीय ज्ञान-विज्ञान परंपरा और आपदा प्रबंधन जैसे विषयों पर नवाचार और शोध को प्रोत्साहित किया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस वर्ष सम्मेलन में उत्तराखण्ड में जल एवं प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण जैसे प्रासंगिक और महत्वपूर्ण विषय पर चर्चा होगी, जो जलवायु परिवर्तन और बढ़ती हुए जनसंख्या को देखते हुए अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा हमारा राज्य जल संपदा को संजोए हुए है। उन्होंने कहा इस सम्मेलन में राज्य और देशभर से आए वैज्ञानिकों व शोधकर्ताओं द्वारा जल स्रोतों के संरक्षण और संवर्धन जैसे विषयों पर भी गहन मंथन होगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि विज्ञान के क्षेत्र में भारत दशकों से नित नए कीर्तिमान स्थापित करता रहा है। कोरोना वैक्सीन से ब्रह्माण्ड के अबूझ रहस्यों तक, हम भारतीय विज्ञान को नए स्तर पर ले जाने का कार्य निरंतर कर रहे हैं। भारत ने समय समय पर अपनी वैज्ञानिक और बौद्धिक संपदा को सिद्ध करके दिखाया है। भारत के महान खगोलशास्त्री आर्यभट्ट, आचार्य कणाद, आचार्य नागार्जुन, महर्षि सुश्रुत जैसे अनेक लोग, भारत के वो वैज्ञानिक स्तंभ हैं, जिनके सिद्धांतों पर आज का आधुनिक विज्ञान स्थापित है। दुनिया को ज्ञान, विज्ञान और शिक्षा देने का काम भारत ने किया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में विज्ञान और प्रौद्योगिकी क्षेत्र में अनेकों कार्य हुए हैं। आज भारत में गुड गवर्नेंस के लिए विज्ञान और तकनीकी का व्यापक उपयोग हो रहा है। प्रधानमंत्री की प्रेरणा से हम उत्तराखण्ड में भी नई प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए कार्य कर रहे हैं। देहरादून में देश की पांचवीं साइंस सिटी का निर्माण तेजी से हो रहा है। प्रदेश के प्रत्येक जनपद में साइंस और इनोवेशन सेंटर, लैब्स ऑन व्हील्स, और ैज्म्ड लैब्स के माध्यम से विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार के क्षेत्र में विश्व स्तरीय इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि विकसित भारत की परिकल्पना में महिलाओं की अहम भूमिका है। मुख्यमंत्री ने सभी विश्वविद्यालयों और संस्थाओं से बालिकाओं को साइंस और टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में आगे बढ़ने हेतु विशेष प्रोत्साहित करने का आग्रह किया। मुख्यमंत्री ने कहा सरकार, राज्य की भौगोलिक विशेषताओं को ध्यान में रखते हुए पर्यटन, कृषि और पर्यावरण के लिए उन्नत तकनीकों का उपयोग सुनिश्चित कर रही है। हमारा प्रयास है कि विज्ञान और प्रौद्योगिकी के माध्यम से आम लोगों के जीवन स्तर को बेहतर बनाया जाए। उन्होंने कहा इस सम्मेलन के सभी सत्रों में मिले सुझावों को प्रदेश सरकार अमल में लाकर प्रदेश के समग्र विकास को गति प्रदान करेगी।

इस अवसर पर सचिव नितेश झा, महानिदेशक यूकॉस्ट प्रो. दुर्गेश पंत, कुलपति डॉ. सुरेखा डंगवाल, डॉ विनोद एवं विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ और वैज्ञानिक उपस्थित रहे।

सीएम ने सुनी पीएम के मन की बात का 116वां संस्करण

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हाथीबड़कला में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मन की बात का 116वां संस्करण सुना। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री का मन की बात कार्यक्रम हमेशा प्रेरणादायक होता है। देश के सामूहिक प्रयासों, युवा सपनों और नागरिकों की आकांक्षाओं की बात को प्रधानमंत्री सबसे साझा कर, बेहतर कार्यों के लिए देशवासियों को प्रेरित करते हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री ने युवाओं को एनसीसी से जोड़ने के लिए आग्रह किया है। एनसीसी युवाओं में अनुशासन, नेतृत्व और सेवा की भावना पैदा करती है । उन्होंने प्रदेश के युवाओं से अपील की है कि वे एनसीसी से अवश्य जुड़े। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा चलाया गया ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान अब अन्य देशों में भी फैल रहा है, यह हमारे लिए गर्व का विषय है। उत्तराखण्ड में भी इस अभियान के तहत व्यापक स्तर पर वृक्षारोपण किया गया है।

इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री डा. प्रेमचंद अग्रवाल, गणेश जोशी, सुबोध उनियाल, राज्यसभा सांसद एवं भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष महेन्द्र भट्ट, लोकसभा सांसद माला राज्यलक्ष्मी शाह, विधायक खजान दास, उमेश शर्मा काऊ, सहदेव सिंह पुण्डीर, सविता कपूर एवं अन्य जन प्रतिनिधि उपस्थित थे।

राज्य में निवेश को बढ़ावा देने को 30 नई नीतियां बनाई गईं हैः धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने दून विश्वविद्यालय में कौशल विकास एवं रोजगार कॉन्क्लेव में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर जनरेशन इंडिया और उत्तराखण्ड सरकार के बीच एमओयू भी किया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह कॉन्क्लेव हमारे युवाओं के कौशल विकास के क्षेत्र में नई संभावनाओं के द्वार खोलने की दिशा में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभायेगा। यह कॉन्क्लेव युवाओं को उनकी क्षमता के अनुरूप सशक्त बनाने में सहायक सिद्ध होगी और उन्हें आत्मनिर्भर बनने हेतु प्रेरित भी करेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के सकल घरेलू उत्पाद को दुगना करने के लक्ष्य को लेकर सरकार कार्य कर रही है। दो साल में राज्य के सकल घरेलू उत्पाद में 1.3 गुना वृद्धि हुई है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में निवेश को बढ़ावा देने के लिए अनेक प्रयास किये गये हैं। राज्य में विभिन्न क्षेत्रों के लिए 30 नई नीतियां बनाई हैं। उत्तराखण्ड राज्य के युवाओं को रोजगार देने में भी अग्रणी राज्य बनकर उभरा है। राज्य में एक साल में बेरोजगारी दर में 4.4 प्रतिशत की कमी आई है। राज्य की प्रति व्यक्ति आय भी तेजी से बढ़ी है। नीति आयोग द्वारा जारी सतत विकास के लक्ष्यों की रैकिंग में राज्य को प्रथम स्थान प्राप्त हुआ है। मुख्यमंत्री ने कहा कि अगले पांच वर्षों में हम राज्य की जीएसडीपी को दोगुना करने के साथ-साथ कौशल विकास और रोजगार सृजन में भी उल्लेखनीय कार्य करेंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत विश्व का सबसे युवा देश है, जहां 65 प्रतिशत जनसंख्या 35 वर्ष से कम आयु की है। यदि इस ऊर्जा को सही दिशा और मार्गदर्शन प्रदान किया जाए, तो हमारा देश न केवल एक आर्थिक महाशक्ति के रूप में उभरेगा, बल्कि एक सशक्त और समृद्ध समाज की नींव भी रख सकेगा। यही कारण है प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने 2015 में ही स्किल इंडिया अभियान की शुरुआत की। इस पहल का मुख्य उद्देश्य हमारे युवाओं को उनकी रुचि और क्षमताओं के अनुसार उत्कृष्ट और व्यावसायिक रूप से उपयोगी प्रशिक्षण प्रदान करना था। यह अभियान न केवल युवाओं को रोजगार के अवसर बढ़ा रहा है, बल्कि आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार के मार्गदर्शन और सहयोग से हमारी सरकार भी राज्य में युवा शक्ति को प्राथमिकता देते हुए पूर्ण प्रतिबद्धता के साथ इस संबंध में निरंतर कार्य कर रही है। कौशल विकास को राज्य के प्रमुख एजेंडे में शामिल करते हुए कई योजनाओं और नीतियों को लागू किया गया है। मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना के माध्यम से युवाओं को उद्यमिता के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। मुख्यमंत्री कौशल विकास योजना के तहत हजारों युवाओं को रोजगारोन्मुखी प्रशिक्षण दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज का रोजगार परिदृश्य तेज़ी से बदल रहा है, तकनीकी नवाचार और वैश्विक परिवर्तन के कारण रोजगार के नए अवसर उत्पन्न हो रहे हैं। इसके लिए हमें अपने युवाओं को “फ्यूचर-रेडी“ बनाना होगा। इस दिशा में युवाओं को “डिमांड बेस्ड स्किल ट्रेनिंग“ देने के लिए विभिन्न उद्योगों और कॉरपोरेट संस्थानों के साथ समझौते किए गये हैं। राज्य के 13 आई.टी.आई. संस्थानों में दीर्घकालिक पाठ्यक्रमों के साथ-साथ 20 अल्पकालिक पाठ्यक्रमों का प्रशिक्षण प्रदान किये जा रहे हैं। साथ ही, आई.टी.आई. काशीपुर में इलेक्ट्रिकल क्षेत्र में एक “सेंटर ऑफ एक्सीलेंस“ स्थापित किया गया है। फिलिप्स के सहयोग से आई.टी.आई. हरिद्वार में मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र के लिए एक “सेंटर ऑफ एक्सीलेंस“ स्थापित किया गया है। अशोक लेलैंड कंपनी के साथ भी एक एमओयू पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसके तहत अशोक लेलैंड प्रत्येक वर्ष हमारे एक हजार युवाओं को अपने प्लांट में इंटर्नशिप और रोजगार प्रदान करेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार द्वारा विदेशी प्लेसमेंट नीति के तहत राज्य के युवाओं को विदेशी भाषाओं सहित विभिन्न कौशलों में प्रशिक्षण प्रदान करने की व्यवस्था की जा रही है, ताकि हमारे युवा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा कर सकें और बेहतर रोजगार के अवसर प्राप्त कर सकें। इसके पहले चरण में 23 युवाओं को जापान भेजा है। 25 युवाओं को जर्मनी और ब्रिटेन में नर्सिंग क्षेत्र हेतु भेजने की योजना बनाई जा रही है। उन्होंने कहा कि इस कॉन्क्लेव में विभिन्न सत्रों के माध्यम से राज्य के प्रमुख ग्रोथ ड्राइवर्स, जैसे आयुष, वेलनेस, पर्यटन, बागवानी एवं खाद्य प्रसंस्करण, वन आधारित आजीविका, डिजिटल मार्केटिंग, ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था, अक्षय ऊर्जा आदि पर चर्चा से जो विचार और सुझाव प्राप्त होंगे। वे राज्य में युवाओं के कौशल विकास के लिए तैयार की जाने वाली नीतियों के लिए अत्यधिक लाभकारी सिद्ध होंगे।

कौशल विकास मंत्री सौरभ बहुगुणा ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा युवाओं के कौशल विकास की दिशा में निरंतर कार्य किये जा रहे हैं। औद्योगिक संस्थानों की मांग के अनुसार युवाओं के कौशल विकास पर ध्यान दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड में प्रतिभाओं की कमी नहीं है। इन प्रतिभाओं को आगे लाने के लिए लगातार प्रयास किये जा रहे हैं। युवाओं और महिलाओं के कौशल विकास के लिए लघु अवधि के कोर्स भी नियमित कराये जा रहे हैं।

इस अवसर पर उपाध्यक्ष अवस्थापना परिषद विश्वास डाबर, मुख्य सचिव राधा रतूड़ी, उपाध्यक्ष सेतु आयोग राजशेखर जोशी, प्रमुख सचिव आर. के सुधांशु, नीति आयोग में राज्य से नोडल अधिकारी सोनिया पंत, सचिव आर. मीनाक्षी सुंदरम, शैलेश बगोली, कुलपति दून विश्वविद्यालय प्रो. सुरेखा डंगवाल, अपर सचिव विजय जोगदण्डे, एसीईओ सीपीपीजीजी डॉ. मनोज पंत, अपर सचिव मनमोहन मैनाली उपस्थित थे।

प्रधानमंत्री मोदी के रिड्यूस, रियूज और रिसाइकल के सिद्धांत को सीएम धामी ने बढ़ाया आगे

प्लास्टिक कूड़ा प्रबंधन, हमारे शहरी जीवन के सामने एक चुनौती बनकर उभर रहा है। ऐसे में ऋषिकेश नगर निगम ने प्लास्टिक कूड़े का प्रबंधन कर नगर निकायों के सामने उदाहरण पेश किया है। नगर निगम प्लास्टिक कूड़े को ना सिर्फ सफलता पूर्वक एकत्रित कर रहा है, बल्कि इसे रीसाइकिल के जरिए फिर कई तरह से इस्तेमाल भी कर रहा है।

तीर्थनगरी के साथ ही राफ्टिंग-कैम्पिंग का प्रमुख केंद्र होने के कारण ऋषिकेश में वर्षभर श्रद्धालुओं और पयर्टकों की भीड़ भाड़ लगी रहती है। इस कारण यहां प्लास्टिक कूड़ा का प्रबंधन चुनौतीपूर्ण काम है। नगर आयुक्त शैलेंद्र सिंह नेगी की पहल पर इसके लिए ऋषिकेश नगर निगम ने सबसे पहले आईएसबीटी, त्रिवेणी घाट और वीरभद्र में प्लास्टिक बैंक की स्थापना की, प्लास्टिक बैंक के बॉक्स बनाने के लिए पुरानी प्लास्टिक बोतलों को ही इस्तेमाल किया गया। जिसमें लोग खुद खाली बोतलें या अन्य प्लास्टिक कचरा डालते हैं, इन प्लास्टिक बैंक से अब तक करीब 400 किलो तक प्लास्टिक रीसायकल हो चुका है। इस प्रयोग की सफलता को देखते हुए नगर निगम अब नटराज, ट्रांजिट कैंप, रेलवे स्टेशन में भी प्लास्टिक बैंक स्थापित करने जा रहा है।

वेस्ट टू वंडर पार्क

ऋषिकेश नगर निगम ने परिसर में प्लास्टिक वेस्ट से ‘वेस्ट टू वंडर’ पार्क भी तैयार किया है, जिसमें पुराने टायर, खराब हो चुकी स्ट्रीट लाइट, साइकिल- स्कूटर जैसे सामान से बच्चों के झूले और सजावटी सामान तैयार किए गए हैं। साथ ही नगर निगम रीसायकल प्लास्टिक से बैंच, ट्री कार्ड, प्लास्टिक बैंक बॉक्स भी तैयार कर रहा है।

महिला समूहों को जोड़ा अभियान से

ऋषिकेश नगर निगम में डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन, के बावजूद पहले यूजर चार्ज, महज तीन लाख महीने तक ही जमा हो पाता था, लेकिन अब नगर निगम ने यूजर चार्ज वसूलने का काम, महिला स्वयं सहायता समूहों (त्रिवेणी सेना) को दे दिया है, जिसके बाद नगर निगम का कलेक्शन 13 लाख के पार चला गया है। इसमें से नगर निगम महिला समूहों को 25 प्रतिशत लाभांश देता है। इस तरह करीब 250 महिलाओं को प्रत्यक्ष तौर पर रोजगार मिला है।

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सभी निकायों को प्लास्टिक कूड़ा निस्तारण की ठोस व्यवस्था के निर्देश दिए गए हैं। इस दिशा में निकायों के स्तर पर कई नवीन प्रयास किए जा रहे हैं, कुछ जगह क्यूआर कोड के जरिए भी प्लास्टिक की वापसी की जा रही है। सरकार इस दिशा में बेहतर काम करने वाले निकायों को पुरस्कृत भी कर रही है।
– पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री

राज्य स्थापना दिवस पर सीएम ने शहीदों को दी श्रद्धांजलि

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर कचहरी देहरादून में शहीद स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित कर उत्तराखंड राज्य आंदोलन के शहीदों को श्रद्धांजलि दी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज उत्तराखंड राज्य रजत जयंती वर्ष में प्रवेश कर गया है। हमारे राज्य आंदोलनकारियों द्वारा राज्य निर्माण के लिए किए गए संघर्षों के परिणामस्वरूप ही उत्तराखण्ड राज्य का गठन हुआ। मुख्यमंत्री ने पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल बिहारी वाजपेयी का भी इस अवसर पर स्मरण किया जिन्होंने उत्तराखंड राज्य की नींव रखी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य आंदोलनकारियों के सपनों के अनुरूप राज्य को प्रगति के पथ पर अग्रसर करने के लिए राज्य सरकार द्वारा निरंतर कार्य किए जा रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में इस दशक को उत्तराखंड का दशक बनाने के लिए हर क्षेत्र में तेजी से कार्य हो रहे हैं।

इस अवसर पर राज्यसभा सांसद एवं भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट और विधायक खजान दास भी उपस्थित थे।