प्राथमिकता के आधार पर सुरंग में फंसे लोगों को निकालना होगाः सीएम

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी उत्तरकाशी के सिलक्यारा के पास सुरंग में हुए भू धसाव की घटना का स्थलीय निरीक्षण पहुंचे। इस दौरान उन्होंने सिलक्यारा टनल में फंसे श्रमिकों को निकालने के लिए जारी बचाव एवं राहत कार्यों का जायजा लिया। मुख्यमंत्री ने स्वयं टनल में जाकर राहत एवं बचाव कार्यों की स्थिति को जाना।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने स्थलीय निरीक्षण के दौरान अधिकारियों को राहत एवं बचाव कार्य में और अधिक तेजी लाने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि सुरंग में फंसे मजदूरों को जल्द सुरक्षित निकालना सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकता है, जिसके लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने राहत और बचाव अभियान में जुटे अधिकारियों और विभिन्न एजेंसियों को परस्पर बेहतर समन्वय और तत्परता के साथ राहत और बचाव कार्य उच्च दक्षता और पूरी क्षमता के साथ चलाने के निर्देश देते हुए कहा कि अभियान के लिए बाहर से जिस तरह के संसाधनों व तकनीकी सहायता की आवश्यकता होगी उसे सरकार यथाशीघ्र उपलब्ध कराएगी। उन्होंने कहा किसी भी स्तर पर कोई भी आवश्यकता होने पर शीघ्र शासन को सूचित किया जाए।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि राहत और बचाव कार्यों के लिए सभी संभव विकल्पों पर विचार किया जा रहा है। बचाव कार्य के लिए बड़े व्यास के ह्यूम पाइप हरिद्वार और देहरादून से भेजे जाने की व्यवस्था कर दी गई है। मुख्यमंत्री ने भरोसा जताया की ईश्वर की कृपा और बचाव अभियान में जुटे लोगों के अथक प्रयासों के चलते सुरंग के अंदर फंसे मजदूरों को जल्द सुरक्षित निकाल लिया जाएगा।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फोन के माध्यम से टनल में फंसे श्रमिकों की स्थिति, राहत एवं बचाव कार्यों के संबंध में विस्तृत जानकारी ली। उन्होंने बताया प्रधानमंत्री ने इस दुर्घटना से निपटने हेतु हर संभव मदद का आश्वासन दिया है। साथ ही हर स्थिति पर नजर बनाए रखने के निर्देश भी दिए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा केंद्रीय एजेंसियों को भी राहत और बचाव कार्यों में सहयोग करने हेतु निर्देशित किया गया है।
जिलाधिकारी अभिषेक रूहेला, पुलिस अधीक्षक अर्पण यदुवंशी, एनएचआईडीसीएल तथा अन्य एजेंसी के अधिकारियों ने राहत एवं बचाव कार्यों की जानकारी देते हुए बताया कि टनल में फंसे श्रमिकों को निकालने के लिए मलवा हटाने का कार्य निरंतर जारी है, मलवा हटाने के लिए हैवी एक्सकैवेटर मशीनों को जुटाया गया है। दरकते मलबे को थाने के लिए मशीनों से शार्टक्रीटिंग की जा रही है। टनल में फंसे मजदूरों से पाइप के जरिये संदेशों का आदान प्रदान किया गया है। पाइपलाइन के जरिए ऑक्सीजन की आपूर्ति की जा रही है। इसी पाइपलाइन के जरिए रात में चने के पैकेट कंप्रेसर के जरिए दबाव बनाकर टनल में फंसे श्रमिकों तक भेजे गए हैं।
मुख्यमंत्री के साथ घटना स्थल पर पहुंचे गढ़वाल मंडल के आयुक्त विनय शंकर पांडे ने भी राहत और बचाव कार्यों को लेकर अधिकारियों को जरूरी निर्देश दिए। इस दौरान विभिन्न विशेषज्ञ एवं रेस्क्यू अभियान में जुटे दस्तों के प्रमुख मौजूद रहे।
यमुनोत्री क्षेत्र के विधायक संजय डोभाल, ब्लॉक प्रमुख डुंडा शैलेन्द्र कोहली, भाजपा जिलाध्यक्ष सत्येंद्र राणा और राष्ट्रीय मंत्री स्वराज विद्वान भी इस दौरान साथ रहे।

राष्ट्र निर्माण और समाज निर्माण में अपनी सकारात्मक भूमिका निभाये छात्र-राष्ट्रपति

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु द्वारा हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय (श्रीनगर) के 11वें दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में प्रतिभाग करते हुए कुल 59 दीक्षार्थियों को स्वर्ण पदक प्रदान किए।
राष्ट्रपति ने उपाधि और मेडल प्राप्त करने वाले सभी दीक्षार्थियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि उनको राष्ट्र निर्माण और समाज निर्माण में अपनी सकारात्मक भूमिका का निर्वहन करना है। उन्होंने सभी विद्यार्थियों और संस्थान से प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष जुड़े हुए शिक्षकों से अपेक्षा की कि वे शिक्षा को समाज से जोड़ने का काम करें जिससे समाज के अंतिम छोर पर बैठा व्यक्ति भी विकास की मुख्यधारा में शामिल हो सके। दीक्षार्थियों को उपाधि प्रदान करते समय महामहिम राष्ट्रपति ने सभी दीक्षार्थियों को तीन प्रतिज्ञा लेने का आह्वान किया। उन्होंने प्रतिज्ञा दिलाई की जीवन में जिनकी बदौलत आप आगे बढ़े हैं उनका उनके योगदान को नहीं भूलना चाहिए। दूसरा, अपने नैतिक मूल्यों से कभी भी समझौता नहीं करना चाहिए। तीसरा जो भी जीवन में शिक्षा प्राप्त की है उसमें समाज का बड़ा योगदान होता है, इसलिए विकास की मुख्यधारा से जो लोग अभी तक वंचित है उनको भी विकास की मुख्यधारा में शामिल करने में अपना सहयोग प्रदान करें। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड ने हमेशा ही शिक्षा और ज्ञान को अधिक महत्व दिया है।
राष्ट्रपति ने इस दौरान अपने संबोधन में उत्तराखंड को ज्ञान, विज्ञान, विवेकवान और शौर्य की भूमि बताते हुए कहा कि इस देवभूमि से अनेक प्रेरणास्रोत व्यक्तित्व ने जन्म लिया है जिन्होंने देश-दुनिया का मार्गदर्शन किया। उन्होंने सृष्टि लखेड़ा द्वारा निर्मित एक था गांव डॉक्युमेंट्री को नेशनल सिनेमा अवार्ड प्राप्त करने की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि साहित्य के क्षेत्र में भी यहां की अनेक विभूतियों ने हिंदी साहित्य को गौरवान्वित किया है। जिसमें सुमित्रानंदन पंत, मंगेश डबराल, शिवानी, भक्तदर्शन आदि लोगों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है।
राष्ट्रपति ने भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक यात्रा में भी उत्तराखंड के योगदान की सराहना की। उन्होंने उत्तराखंड की पर्यावरणीय सेवा और यहां के स्वच्छ जल स्रोत जो मैदानी क्षेत्र के मानव और वन्यजीव सहित वनस्पतियों को जीवन प्रदान करते हैं का महत्व भी बताया। राष्ट्रपति ने स्थानीय सरकार द्वारा रोजगार और स्वरोजगार के क्षेत्र में किये जा रहे प्रयासों की भी सराहना की।
राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि) ने उपाधि और मेडल प्राप्त करने वाले छात्रों को बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए कहा कि आज से वे अपने जीवन के आगे की और बहुत महत्वपूर्ण यात्रा की एक शुरूआत कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि दीक्षांत पढ़ाई का अंत नहीं है बल्कि सतत शैक्षणिक जीवन की यात्रा का एक पड़ाव है। शिक्षा एक अंतहीन यात्रा के समान है जो जीवन पर्यंत चलती रहती है आप अपना लक्ष्य महान रखिए उमंग, उत्साह और ऊर्जा के स्रोतों से हमेशा जुड़े रहिए और कभी हार मत मानिए सफलता आपको अवश्य मिलेगी।
राज्यपाल ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि आप ऐसे समय में समाज में अपना योगदान देने जा रहे हैं जब हम आजादी के अमृत काल में विकसित भारत, आत्मनिर्भर भारत और विश्वगुरु भारत बनने के महान संकल्प के साथ आगे बढ़ रहे हैं। हमारा लक्ष्य वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने का है, जिसको प्राप्त करने में आप सभी की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में राज्य सरकार हमारे सभी राजकीय विश्वविद्यालयों में नवाचार और तकनीक के संगम को बढ़ावा देने के साथ-साथ पारदर्शी एवं भ्रष्टाचार मुक्त तंत्र विकसित कर रही है। जिसके लिए वे बधाई के पात्र हैं। हमारे सभी विश्वविद्यालयों में शिक्षण प्रशिक्षण एवं शोध परियोजनाओं पर तेजी से कार्य हो रहा है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के निर्देशन में विश्वविद्यालयों महाविद्यालयों शिक्षण एवं शोध संस्थानों में अतुलनीय कार्य हो रहा है।
विश्वविद्यालय के निर्माण में स्वर्गीय हेमवती नंदन बहुगुणा के योगदान को याद करते हुए उन्होंने कहा कि श्रीनगर की यह धरती एक ऐतिहासिक धरती रही है। यहाँ देवताओं के पवित्र मंदिर है, वीरों की महान गाथाएँ हैं तो साथ ही वर्तमान सदी में यह नगर विद्युत परियोजनाओं के एक बड़े केंद्र होने के साथ साथ एनआईटी और अर्ध सैनिक बलों के प्रशिक्षण का प्रमुख केंद्र भी है। एक प्रकार से श्रीनगर गढ़वाल उत्तराखण्ड की प्रगति का एक आधार केंद्र बन गया है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सभी को हेमवती नंदन गढ़वाल विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह और विश्वविद्यालय के स्वर्ण जयंती वर्ष की शुभकामनाएं दी। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड में ज्ञान की अविरल गंगा को प्रवाहित करने वाले इस संस्थान में उपस्थित होकर वे स्वयं को गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं। उन्होंने हिमालय पुत्र स्व. हेमवती नंदन बहुगुणा का स्मरण करते हुए कहा कि यह विश्वविद्यालय उनकी विकासवादी सोच का परिणाम है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस वर्ष दीक्षांत समारोह की थीम ’’सशक्त महिला, समृद्ध भारत’’ रखी गई है। जिसका स्पष्ट उदाहरण आज इस दीक्षांत समारोह की मुख्य अतिथि राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु जी हैं। उनका जीवन, शुरुआती संघर्ष, समृद्ध सेवा और अनुकरणीय सफलता प्रत्येक भारतीय को प्रेरित करता है। उनका जीवन हम सभी के लिए प्रेरणादायक है। मुख्यमंत्री ने राष्ट्रपति की जीवटता और समर्पण शक्ति को नमन करते हुए कहा कि, वे सही अर्थों में महिला सशक्तिकरण का प्रतीक हैं।
मुख्यमंत्री ने सभी विद्यार्थियों से कहा कि कभी भी जीवन में तनाव न लें। उन्होंने कहा कि जब भी युवाओं के साथ उन्हें संवाद करने का अवसर मिलता है, तो वे राज्य सरकार के ‘’सर्वश्रेष्ठ उत्तराखण्ड‘’ निर्माण के अपने ’‘विकल्प रहित संकल्प‘’ को दोहराते हैं। सभी को सर्वश्रेष्ठ उत्तराखण्ड के निर्माण में अपनी सहभागिता सुनिश्चित करनी है। आगामी वर्षों में उत्तराखंड देश का सबसे समृद्धशाली और सशक्त राज्य हो, इस भावना के साथ हम सभी को साथ मिलकर कार्य करने की आवश्यकता है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि सबके सहयोग से उत्तराखण्ड हर क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल होगा।
इस दौरान दीक्षांत समारोह में विधायक देवप्रयाग विनोद कंडारी व विधायक पौड़ी राजकुमार पोरी, कुलाधिपति गढ़वाल विश्वविद्यालय डॉ. योगेंद्र नारायण, कुलपति प्रो. अन्नपूर्णा नौटियाल सहित उपाधि प्राप्त करने वाले शिक्षार्थी, उनके अभिभावक हेमवती नंदन गढ़वाल विश्वविद्यालय के शिक्षकगण तथा जनमानस उपस्थित रहा।

उत्तराखंड के कोटद्वार से आनंद विहार टर्मिनल तक जाएगी नई रेल सेवा, केंद्रीय मंत्री ने दिखाई हरी झंडी

कोटद्वार और आनंद विहार टर्मिनल के मध्य नई रेल सेवा की शुरुआत केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव और सांसद अनिल बलूनी द्वारा दिल्ली से शनिवार को सायं पांच बजे इसे हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी देहरादून से वर्चुअली इस बहुप्रतीक्षित रेल सेवा के शुभारंभ के साक्षी बने।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कोटद्वार आनन्द विहार दिल्ली के मध्य संचालित हो रही ट्रेन के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव का आभार व्यक्त किया। उन्होंने इसके लिए पौड़ी से सांसद एवं पूर्व मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत, राज्यसभा सांसद अनिल बलूनी और कोटद्वार से विधायक ऋतु खंडूरी के प्रयासों की भी सराहना की।

मुख्यमंत्री ने कहा कि लंबे समय से कोटद्वार और दिल्ली के बीच ट्रेन के संचालन की मांग चल रही थी, अब कोटद्वार से दिल्ली बस के साथ ट्रेन से भी सुगम यात्रा हो सकेगी। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव से इस ट्रेन का नाम वीर चंद्र सिंह गढ़वाली जी के नाम पर रखने पर विचार करने का भी अनुरोध किया ताकि आम जन इस ट्रेन के साथ अपना और अधिक जुड़ाव महसूस कर सकें।

उन्होंने कहा कि बीते नौ वर्षों में देश में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में रेलवे के क्षेत्र में “अभूतपूर्व स्पीड“ से व “अभूतपूर्व स्केल“ से कार्य किया जा रहा है। प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में हम भारतीय रेल के स्वर्णिम युग की ओर बढ़ रहे हैं। पिछले 9 वर्षों में प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में भारतीय रेलवे को नए भारत की आकांक्षाओं तथा आत्मनिर्भर भारत की अपेक्षाओं को पूरा करने के लिए तैयार किया जा रहा है। 2014 के बाद से भारतीय रेल एक नए रूप में हमारे सम्मुख है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज जहां एक ओर ब्रॉड गेज रेल लाइनों से मानव रहित रेल क्रॉसिंग को ख़त्म करके भारतीय रेलवे को पहले से कहीं अधिक सुरक्षित बनाया गया है। वहीं दूसरी ओर आज भारतीय रेलवे की रफ्तार भी पहले से कहीं अधिक बढ़ चुकी है। आत्मनिर्भरता और आधुनिकता के प्रतीक चिन्ह के रूप में वंदे भारत जैसी मेड इन इंडिया ट्रेनें रेल नेटवर्क का हिस्सा बन रही हैं। वर्तमान में देश के अछूते हिस्सों को रेल नेटवर्क से जोड़ने का काम भी तेजी से चल रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और केंद्र सरकार के सहयोग से उत्तराखंड में बहुत से ऐसे काम हुए हैं, जो कि पहले मुमकिन नहीं लग रहे थे। आज प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में उत्तराखंड में ऋषिकेश से कर्णप्रयाग तक रेल लाइन निर्माण से पहाड़ तक रेल पहुंचाने का सपना सच होने जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के स्पष्ट विजन के कारण ही आज ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन पर द्रुत गति से कार्य चल रहा है। अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत उत्तराखंड के तीन रेलवे स्टेशनों का पुनर्विकास किया जा रहा है। इसके साथ ही देहरादून से आनन्द विहार के बीच इसी वर्ष वन्दे भारत ट्रेन का संचालन होना हमारे लिए बड़ी उपलब्धि है। आज हमारी डबल इंजन की सरकार समाज के अंतिम छोर में खड़े व्यक्ति को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए तमाम योजनाओं को धरातल पर उतारने का कार्य कर रही है। हम उत्तराखंड को श्रेष्ठ राज्य बनाने के अपने “विकल्प रहित संकल्प“ के मंत्र को लेकर लगातार आगे बढ़ रहे हैं। मुख्यमंत्री ने सभी से उत्तराखंड निर्माण के लिए सहयोग और समर्थन की भी अपेक्षा की।

इस अवसर पर सांसद डॉ.रमेश पोखरियाल निशंक, मेयर सुनील उनियाल गामा, विधायक खजान दास, विधायक विनोद चमोली, अपर मुख्य सचिव राधा रतूड़ी, पुलिस महानिदेशक अशोक कुमार आदि उपस्थित थे।

डेंगू को लेकर स्वास्थ्य सचिव ने अस्पतालों में दिये अतिरिक्त बैड बढाने के दिये निर्देश, सफाई व्यवस्थाओं को दुरूस्त रखें अस्पताल

हरिद्वार। डेंगू को लेकर स्वास्थ्य सचिव डॉ आर राजेश कुमार का अभियान लगातार जारी है। आज स्वास्थ्य सचिव का काफिला हरिद्वार जनपद पहुंचा। जहां स्वास्थ्य सचिव ने जिला अस्पताल, जिला महिला अस्पताल और उपजिला मेला अस्पताल का औचक निरीक्षण किया। उन्होंने जनपद में डेंगू रोकथाम अभियान का जायजा लिया। निरीक्षण में खामियों पर स्वास्थ्य सचिव ने अधिकारियों को फटकार लगाते हुए व्यवस्थायें जल्द दुरूरत करने के निर्देश दिये। अस्पतालों में सफाई व्यवस्थाओं पर भी सचिव स्वास्थ्य ने कडी नाराजगी जाहिर की।

वहीं सचिव, चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण डॉ. आर राजेश कुमार ने अस्पतालों में डेंगू मरीजों और उनके परिजनों से बातचीत की और व्यवस्थाएं परखीं। डॉ आर राजेश कुमार ने सभी चिकित्सालयों में डेंगू मरीजों के लिए अतिरिक्त बैड की व्यवस्था रखने, आइसोलेशन वार्ड बनाने तथा त्वरित उपचार उपलब्ध कराने के निर्देश अधिकारियों को दिए। इसके बाद स्वास्थ्य सचिव ने जिला महिला चिकित्सालय के एम0सी0एच0 विंग का निरीक्षण किया और एक माह के अंदर कार्य पूर्ण करने के निर्देश कार्यदायी संस्था को दिये। ताकि जनता को इसका लाभ जल्द से जल्द मिलने लगे। इसके साथ ही उन्होंने उपजिला मेला चिकित्सालय के जिरियाट्रिक वार्ड का भी निरीक्षण किया।

स्वास्थ्य सचिव ने किया मेडिकल कॉलेज का निरीक्षण
सचिव, चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण डॉ. आर राजेश कुमार ने हरिद्वार जनपद में निर्माणाधीन मेडिकल कॉलेज का भी निरीक्षण भी किया। निरीक्षण के बाद स्वास्थ्य सचिव डॉ आर0 राजेश कुमार ने कहा यह कॉलेज भविष्य में हरिद्वार के लिये वरदान साबित होगा। मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि मेडिकल कॉलेज के बनने के बाद जहां स्वास्थ्य सुविधाओं में ईजाफा होगा। वहीं मेडिकल की शिक्षा ग्रहण करने वाले छात्र-छात्राओं के लिए अवसर बढ जायेंगे। उन्होंने कहा मेडिकल कॉलेज के खुलने से आस-पास के स्थानीय लोगों के लिए कई तरह के रोजगार के अवसर भी बढेंगे।

आपको बता दें कि यह मेडिकल कॉलेज लगभग 67 एकड मंे फैला हुआ है। इस मेडिकल के निर्माण की लगात लगभग 538 करोड़ रूपये है। जिसमें से लगभग 309 करोड रूपये सरकार द्वारा इसके निर्माण के लिए जारी किये जा चुके हैं। 2024 के अंत तक यह मेडिकल कॉलेज बनकर तैयार हो जायेगा। निरीक्षण के दौरान सी0एम0ओ0 डॉ मनीष दत्त, मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ रंजीत सिंह रैना, ए0सी0एम0ओ0 डॉ आर0के0 सिंह, डॉ गुरनाम सिंह, मलेरिया अधिकारी सी0एम0 कंसवाल, डॉ तरुण, डॉ पंकज सिंह, डॉ अजय कुमार, सहित जनपद के अन्य अधिकारी मौजूद थे।

सीएम ने मसूरी मे शहीद आंदोलनकारियों के परिवारजनों को किया सम्मानित

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मसूरी में शहीद स्मारक पर पुष्पचक्र अर्पित कर शहीद राज्य आन्दोलनकारियों को श्रद्धांजलि दी। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने मसूरी में शहीद राज्य आन्दोलनकारियों के परिवारजनों को सम्मानित भी किया। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड राज्य आन्दोनकारियों ने जिस उद्देश्य से अलग राज्य की मांग की थी, उसके अनुरूप ही राज्य को आगे बढ़ाने के लिए सरकार निरन्तर कार्य कर रही है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि मसूरी शहीद स्थल पर शेड का निर्माण किया जायेगा।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि राज्य आन्दोलनकारियों के चिन्हित प्रमाण पत्र बनाने के लिए 06 माह का अतिरिक्त समय दिया गया था। बहुत जिलों में इस पर कार्य हुआ। इसके लिए ऐसी व्यवस्था की गई है कि इसका दुबारा आंकलन कर व्यवस्था को आगे बढ़ाया जाय। जनपद देहरादून में चिन्ह्ति सभी 4164 राज्य आन्दोलनकारियों को पहचान पत्र निर्गत किये गये है। राज्य आन्दोलनकारियों को उत्तराखण्ड परिवहन निगम की बसों में निःशुल्क परिवहन सुविधा प्रदान किये जाने की व्यवस्था की गयी है। राज्य आन्दोलनकारियों के अधिकतम दो बच्चों को राजकीय विद्यालयों और महाविद्यालयों में निःशुल्क शिक्षा सुविधा प्रदान की गयी है। उत्तराखण्ड राज्य आन्दोलनकारियों के आश्रितों को पेंशन सुविधा प्रदान की गई है। शहीद आन्दोलनकारी के पिता को और पिता के जीवित न होने पर माता को और आश्रित को प्रतिमाह पेंशन की सुविधा प्रदान की गयी है। राज्य आन्दोलन के दौरान 172 घायल राज्य आन्दोलनकारियों को 06 हजार रूपये प्रतिमाह तथा 2414 सक्रिय राज्य आन्दोलनकारियों को 4500 रूपये प्रतिमाह पेंशन प्रदान की जा रही है। 06 घायल एवं 26 सक्रिय राज्य आन्दोलनकारियों के आश्रितों को भी प्रतिमाह पेंशन प्रदान की जा रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि 02 सितम्बर 1994 में मसूरी गोलीकांड की घटना हमेशा हमारे स्मरण में रहेगी। पुलिस की तानाशाही एवं हटधर्मिता को सबने देखा, जो उस समय की सरकार ने योजनाबद्ध तरीके से करवाया। इस गोलीकाण्ड में हमारे 06 आन्दोलनकारी शहीद हो गये और दर्जनों घायल हो गये। उत्तराखण्ड राज्य निर्माण में हमारी मातृशक्ति की महत्वपूर्ण भूमिका रही। राज्य आन्दोलनकारियों के सपनों को पूरा करने के लिए हम सबको प्रदेश के विकास में मिलकर योगदान देना होगा। उन्होंने कहा कि स्कूलों एवं सड़कों का नाम संबंधित क्षेत्रों के शहीद राज्य आन्दोलनकारियों के नाम पर करने की दिशा में सरकार लगातार कार्य कर रही है।
इस अवसर पर केन्द्रीय रक्षा एवं पर्यटन राज्य मंत्री अजय भट्ट, पूर्व विधायक जोत सिंह गुनसोला, मसूरी नगर पालिका परिषद् के अध्यक्ष अनुज गुप्ता, मसूरी नगर पालिका परिषद् के पूर्व अध्यक्ष मन्नू मल, सिद्धार्थ अग्रवाल, मोहन पेटवाल आदि मौजूद थे।

मुख्यमंत्री ने किया कोटद्वार के आपदाग्रस्त क्षेत्र का स्थलीय निरीक्षण

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा स्थानीय विधायक कोटद्वार तथा विधानसभा अध्यक्ष रितु खंडूरी के साथ कोटद्वार में आपदाग्रस्त क्षेत्र का स्थलीय निरीक्षण किया गया।

गाड़ीघाटी में कुंभीचौड-रतनपुर को जाने वाले एप्रोच मार्ग पर तेजी से कार्य करने को कहा तथा मालन नदी पर हल्दूखाता- किशनपुर -सिगड्डी मार्ग का स्थलीय निरीक्षण करते हुए संबंधित अधिकारियों को तत्काल कनेक्टिविटी को बहाल करने के निर्देश दिए। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को विभिन्न स्थानों पर बाधित हुई सड़क कनेक्टिविटी को युद्ध स्तर पर बहाल करने को कहा। विभिन्न स्थानों पर आपदा से प्रभावित हुए लोगों को तत्काल राहत पहुंचाने के भी निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जलभराव वाले क्षेत्रों में पानी की निकासी को दुरुस्त करें तथा वहां पर आवश्यकता के अनुसार फागिंग -चूना छिड़काव करवाना सुनिश्चित करें। उन्होंने विभिन्न क्षेत्रों में आपदा से हुई विभिन्न प्रकार की क्षति का व्यापक रूप से आकलन करने के भी निर्देश दिए।

इस दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारा पहला प्रयास है कि राज्य में मानसूनी बरसात से जो चीजें अस्त व्यस्त हुई है उनको सामान्य करना है तथा जो लोग आपदा से प्रभावित हुए हैं उनको प्राथमिक रूप से उनकी आवश्यकता के अनुरूप त्वरित सहायता और राहत प्रदान की जाय। तत्पश्चात विभिन्न क्षेत्रों में आपदा से हुई क्षति का त्वरित आकलन करते हुए इसके त्वरित सुधारीकरण के कदम उठाए जाने की बात कही।

इस दौरान मुख्यमंत्री के साथ निरीक्षण कर रही विधानसभा अध्यक्ष रितु खंडूरी ने कहा कि मुख्यमंत्री द्वारा आज स्वयं आपदाग्रस्त क्षेत्रों का दौरा किया गया है और शीघ्रता से सामान्य स्थिति बहाल करने के अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने इसके लिए मुख्यमंत्री जी को धन्यवाद दिया।

इस दौरान जिलाधिकारी गढ़वाल डॉ. आशीष चौहान, अपर पुलिस अधीक्षक कोटद्वार शेखर सुयाल, उप जिला अधिकारी प्रमोद कुमार सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी और कार्मिक उपस्थित थे।

मुख्य सचिव ने बद्रीनाथ मास्टर प्लान व केदारनाथ पुनर्निर्माण कार्यों की समीक्षा की

मुख्य सचिव डॉ. एस.एस. संधु ने सचिवालय स्थित अपने सभागार में बद्रीनाथ मास्टर प्लान एवं केदारनाथ पुनर्निर्माण कार्यों की समीक्षा की। मुख्य सचिव ने संबंधित विभागों के अधिकारियों सहित बद्रीनाथ एवं केदारनाथ में कार्य कर रहे ठेकेदारों के साथ प्रत्येक कार्य के सम्बन्ध में विस्तार से चर्चा की।
मुख्य सचिव ने कार्यों के पूर्ण होने की तिथि निर्धारित करते हुए समय सीमा में कार्यों को पूर्ण किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि भौगोलिक परिस्थितियों एवं मौसम के खराब होने के कारण कार्य किया जाना आसान नहीं है, परन्तु जो काम किए जा सकते हैं उन्हें जरूर किया जाए। उन्होंने कहा कि जो भवन तैयार हो गए हैं उनके भीतर जो भी कार्य होने हैं उन्हें समय से शुरू कर दिया जाए। अत्यधिक ठंड के कारण श्रमिकों को कार्य करने में समस्या हो रही होगी, इसके लिए अलाव एवं हीटर की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
मुख्य सचिव ने कहा कि सितम्बर माह के पहले सप्ताह के उपरान्त चिनूक हेलीकॉप्टर भी उपलब्ध हो जाएगा, जो भी भारी निर्माण सामग्री चिनूक के माध्यम से पहुंचायी जानी है उसके लिए अभी से पूर्ण तैयारियां सुनिश्चित कर ली जाएं। उन्होंने कार्यों की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दिए जाने के भी निर्देश दिए।
इस अवसर पर सचिव सचिन कुर्वे एवं डॉ. पंकज कुमार पाण्डेय सहित वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से चमोली एवं रूद्रप्रयाग जनपद के जिलाधिकारी उपस्थित थे।

सीएम के निर्देश पर अपर मुख्य सचिव ने समस्त कार्यदायी संस्थाओं की बैठक ली

चमोली जैसे हादसों की पुनरावृत्ति ना हो इसके लिए प्रदेश में कार्यरत समस्त कार्यदायी संस्थाओं की एक उच्च स्तरीय बैठक मुख्यमंत्री के निर्देश पर अपर मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने सचिवालय में ली। बैठक में यह तथ्य संज्ञान में आया कि कार्यदायी संस्थाएं इलैक्ट्रिकल वर्क को सिविल वर्क के साथ जोड़ देती हैं। जबकि कार्यदायी संस्थाओं के पास इलैक्ट्रिकल वर्क के लिए पृथक से इंजीनियर उपलब्ध रहते हैं। एक ही एस्टीमेट बनाने तथा एक साथ कार्य कराने से इलेक्ट्रिकल वर्क के लिए अच्छे से कार्य करने तथा सुरक्षा के मानकों का पालन करने में समझौते की स्थिति आती है। सिविल कॉन्ट्रैक्टर्स ही इलेक्ट्रिकल कार्य को करवाते है। बैठक में इस व्यवस्था में परिवर्तन लाने के लिए समस्त कार्यदायी संस्थाओं से सुझाव लिये गए।
कार्यदायी संस्थाओं से सुरक्षा मानकों पर चर्चा करते हुए एसीएस राधा रतूड़ी ने सख्त हिदायत दी कि सुरक्षा मानकों के लिए उच्चतम स्तर के मानदंड हैं, उन मानदण्डों के अनुसार ही उपकरणों का प्रयोग किया जाना चाहिए। एसीएस ने कड़े निर्देश दिए कि प्रोजेक्ट या कार्य पूर्ण होने के उपरान्त भी सुरक्षा मानक निर्धारित मानदण्डों के अनुरूप बने रहने चाहिए। उन्होंने निर्देश दिए कि वर्तमान में कार्यरत मजदूरों के अलावा उस भवन, प्रोजेक्ट या मशीनरी में कार्य पूर्ण होने के बाद लगाये जाने वाले श्रमिकों या कार्मिकों को उचित प्रशिक्षण दिया जाना तथा सुरक्षा मानकों का समय समय पर परीक्षण करवाया जाना आवश्यक है। बैठक में इसे सुनिश्चित किये जाने का निर्णय लिया गया।
बैठक में यह तथ्य भी संज्ञान में आया कि सिविल और इलैक्ट्रिकल वर्क का एक ही एस्टीमेट बन जाने से इलैक्ट्रिकल कॉन्ट्रेक्टर्स जो छोटे ठेकेदार है या अपने क्षेत्रों के विशेषज्ञ है, उनके कार्य से वंचित होने की भी समस्या आती है। इस व्यवस्था में परिवर्तन से उनकी दक्षताओं का उपयोग भी इलैक्ट्रिकल कार्यों में किया जा सकेगा। एसीएस श्रीमती राधा रतूड़ी ने कहा कि जल्द से जल्द प्रदेश में कार्यदायी संस्थाओं के लिए सिविल वर्क एवं इलैक्ट्रिकल वर्क के लिए स्पष्ट अलग अलग व्यवस्था, सुरक्षा मानकों के लिए उच्चतम स्तर के मानदण्डों का पालन, मजदूरों व कार्मिकों के प्रशिक्षण एवं सुरक्षा मानकों के परीक्षण से सम्बन्धित नई नीति तैयार करते हुए उसे समस्त कार्यदायी संस्थाओं पर लागू किया जाने का उच्च स्तरीय निर्णय लिया जाएगा।
बैठक में सचिव वी षणमुगम, अपर सचिव जगदीश कांडपाल तथा विभिन्न कार्यदायी संस्थाओं के प्रतिनिधि मौजूद रहे।

चमोली में हादसे की मजिस्ट्रीयल जांच हुई सार्वजनिक, आप भी जानिए…

उत्तराखंड के चमोली शहर में नमामि गंगे परियोजना हादसे की मजिस्ट्रीयल जांच रिपोर्ट शुक्रवार को जिला मजिस्ट्रेट को सौंपी गई थी। इसके बाद आज जांच रिपोर्ट के निष्कर्ष को सार्वजनिक किया गया। इस मजिस्ट्रीयल जांच में एसटीपी संचालन में कई खामियां पायी गई हैं।

इसके लिए प्लांट के संचालन के लिए जिम्मेदार फर्म ज्वांइट वेंचर के जयभूषण मलिक कंस्ट्रक्शन पटियाला और कांफिडेंट इंजीनियरिंग इंडिया प्रा.लि. कोयम्बटूर को दोषी मानते हुए इसका अनुबंध निरस्त करते हुए इसे प्रदेश भर में ब्लैक लिस्ट किये जाने की संस्तुति की गई है। साथ ही अन्य संस्तुतियां भी जांच रिपोर्ट में की गई हैं।

चमोली शहर में नमामि गंगे परियोजना के एसटीपी में बीती 19 जुलाई को करंट दौड़ने से 16 लोगों की मौत हुई थी और 12 लोग घायल हो गये थे। इस घटना की मजिस्ट्रीयल जांच अपर जिलाधिकारी चमोली को सौंपी गई थी। शुक्रवार को लगभग पौने दो सौ पेज की जांच रिपोर्ट जांच अधिकारी अपर जिलाधिकारी डा. अभिषेक त्रिपाठी ने डीएम को सौंपी।

जांच रिपोर्ट का संक्षिप्त विवरण जिला सूचना अधिकारी कार्यालय के माध्यम से आज जारी किया गया। इसमें दुर्घटना का विश्लेषण, संभावित कारण और निष्कर्ष में उल्लेख किया गया है कि एसटीपी की विद्युत व्यवस्था के लिए किये गये अनुबंध, विद्युत सुरक्षा के मानकों के अनुरूप न होना पाया गया है। इसमें यह भी कहा गया है कि परिसर में अर्थिंग मानकों के अनुसार नहीं की गई थी, जिससे करंट लोहे से बने स्ट्रक्चर में फैल गया। एसटीपी तक पहुंच वाले मार्ग का संकरा होना भी इस घटना के लिए जिम्मेदार माना गया है। अनुबंध फर्म की ओर से किये गये कार्यों के अनुश्रवण और समीक्षा का अभाव, विद्युत विभाग और जल संस्थान के कार्मिकों के मध्य आपसी सामंजस्य का अभाव भी जांच में पाया गया है।

दुर्घटना के लिए जिम्मेदार प्रतिष्ठान, विभाग और कार्मिक-

मजिस्ट्रीयल जांच में ज्वाइंट वेंचर के जयभूषण मलिक कंस्ट्रक्शन पटियाला और कांफिडेंट इंजीनियरिंग इंडिया प्रा.लि. कोयम्बटूर के साथ उत्तराखंड पेयजल निगम/जल संस्थान के मध्य हुए अनुबंध का भी उल्लंघन पाया गया है। विभाग के साथ फर्म की ओर से किये अनुबंध के अनुरूप कार्मिकों की भी तैनाती नहीं की गई थी। दिल्ली निवासी एक्सिस पावर कंट्रोल्स के डायरेक्टर भाष्कर महाजन का ज्वाइंट एडवेंचर फर्म का अधिकृत कार्मिक न होने के बाद भी कार्य करना पाया गया। एसटीपी के रखरखाव और संचालन के लिए फर्म की ओर से जल संस्थान को दिए गये बिलों में भी संदिग्धता पायी गई है।

मजिस्ट्रीयल जांच में दी गई संस्तुति-

चमोली हादसे के जांच अधिकारी अपर जिलाधिकारी चमोली डा. अभिषेक त्रिपाठी ने अपनी जांच में जो संस्तुति दी है उसके अनुसार नमामि गंगे कार्यक्रम के अंतर्गत ज्वांइट वेंचर के जयभूषण मलिक कंस्ट्रक्शन पटियाला और कांफिडेंट इंजीनियरिंग इंडिया प्रा.लि. कोयम्बटूर के अनुबंध को निरस्त करने, फर्मों को उत्तराखंड राज्य, भाष्कर महाजन की फर्म एक्सिस पावर कंट्रोल्स दिल्ली को उत्तराखंड में ब्लैक लिस्ट करने के साथ ही तीनों फर्मों को को पूरे भारत वर्ष में ब्लैक लिस्ट किये जाने की संस्तुति की गई है।

ज्वाइंट एडवेंचर फर्म की ओर से उत्तराखंड पेयजल निगम को दी गई 110.75 बैंक गारंटी को जब्त करने, एसटीपी में घटित 19 जुलाई की घटना के लिए मुख्य जिम्मेदार ज्वाइंट वैंचर के विरुद्ध विधि अनुकूल दंडात्मक कार्रवाई, संबंधित विभागीय कार्मिकों/अधिकारियों जो ज्वाइंट वेंचर फर्म के साथ शर्तों की अनुपालन करवाने में असफल रहे और नियमित निरीक्षण तथा अनुश्रवण करने में असफल रहे उनके विरुद्ध विभागीय कार्रवाई करने की भी संस्तुति जांच रिपोर्ट में दी गई है। साथ प्रदेश भर के सभी एसटीपी और अन्य ऐसे प्लांट जहां पर विद्युत सुरक्षा में चूक होने की संभावना हो का विद्युत सुरक्षा का आडिट कराये जाने की संस्तुति की गई है। ताकि भविष्य में ऐसी घटना की पुनरावृत्ति न हो के साथ ही अन्य संस्तुति भी दी गई है।

फिल्म पहाड़ी रत्न श्रीदेव सुमन का प्रोमो हुआ लांच, सीएम ने दी बधाई

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने नई दिल्ली में उत्तराखण्डी फीचर फिल्म पहाड़ी रत्न श्रीदेव सुमन का प्रोमो तथा पोस्टर का विमोचन किया।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने महान क्रांतिकारी श्री देव सुमन की पुण्य तिथि पर उनका स्मरण करते हुए कहा कि लोग श्रीदेव सुमन के जीवन एवं कार्यों पर आधारित इस फिल्म के माध्यम से श्रीदेव सुमन को अनुभव करेंगे। इस फिल्म के निर्माण के लिए कार्य कर रहे सभी कलाकारों की इसमें भूमिका अहम होगी। श्रीदेव सुमन द्वारा समाज के लिए दिया गया योगदान हम सभी को प्रेरणा देता रहेगा। उन्होंने हमेशा अन्याय के विरुद्ध आवाज उठाई और तानाशाही के खिलाफ जन-आंदोलन चलाए। अनेक अमानवीय यातनाओं को झेला लेकिन सच्चाई के मार्ग से विचलित नहीं हुए। मुख्यमंत्री ने कहा कि श्रीदेव सुमन केवल एक जननायक ही नहीं थे, बल्कि उनके भीतर एक अटल देशभक्ति थी। वे एक क्रांतिकारी, बुद्धिजीवी, रचनाकार, पत्रकार एवं दूरदृष्टि की सोच रखने वाले महापुरुष थे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जब भारत में अंग्रेजों के विरुद्ध आंदोलन चल रहा था तभी एक आंदोलन टिहरी प्रजामण्डल के द्वारा चलाया जा रहा था, जिसका नेतृत्व श्रीदेव सुमन कर रहे थे। इस लड़ाई को लड़ते-लड़ते उन्होंने कई बार शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन किए, बहुत प्रताड़ना सहनी पड़ी, कई बार आमरण अनशन भी किया। उन्होंने भारत छोड़ो आंदोलन में बढ़-चढ़ कर भाग लिया और वर्षों तक जेल में रहे, जेल में उनके ऊपर अनेक अमानवीय अत्याचार हुए। इसके बावजूद भी सुमन जी का संघर्ष जारी रहा उन्होंने 3 मई 1944 को अपना ऐतिहासिक अनशन शुरू किया और 25 जुलाई 1944 के शाम को उन्होंने प्राणोत्सर्ग कर दिया। सुमन जी की शहादत स्वाधीनता सेनानियों के लिए प्रेरणा स्रोत बन गई। मातृभूमि के लिए स्वयं को आहूत कर श्रीदेव सुमन जी ने पूरे राष्ट्र में क्रांति की अलख जगा दी। सुमन जी के विचार जितने उस वक्त प्रासांगिक थे, उतने ही आज भी हैं। वे सदैव एक प्रेरणापुंज की तरह हमारे हृदय में जीवित रहेंगे।
मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर प्रवासी उत्तराखण्ड वासियों को संबोधित करते हुए कहा कि उत्तराखण्ड का नैसर्गिक सौंदर्य फिल्मकारों को देवभूमि उत्तराखण्ड के लिए आकर्षण का केन्द्र बना है। राज्य में फिल्मांकन के लिए क्षेत्रीय फिल्मों को विशेष प्रोत्साहन दिया जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में केदारपुरी का भव्य पुनर्निर्माण का कार्य हो रहा है। बद्रीनाथ में भी मास्टर प्लान के तहत तेजी से कार्य हो रहे हैं। चारधाम यात्रा में श्रद्धालुओं की संख्या में हर साल वृद्धि हो रही है। कांवड़ यात्रा में भी इस वर्ष चार करोड़ से अधिक शिवभक्त देवभूमि उत्तराखण्ड आये और सकुशल कांवड़ यात्रा सम्पन्न हुई।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय निवेशकों को राज्य में आकर्षित करने के उद्देश्य से दिसम्बर 2023 में देहरादून में “वैश्विक निवेशक सम्मेलन-2023“ आयोजित किया जाना प्रस्तावित है। इसमें प्रधानमंत्री को उत्तराखण्ड निवेशक सम्मेलन में बतौर मुख्य अतिथि आमंत्रित किया गया है। राज्य में निवेशकों के लिए निवेश के लिए राज्य सरकार द्वारा हर संभव मदद दी जा रही है। कृषि और उद्यान के क्षेत्र में भी राज्य में तेजी से कार्य हो रहे हैं। एप्पल, कीवी, तेजपत्ता और तिमुर मिशन पर तेजी से कार्य हो रहे हैं। औषधीय पौधों की खेती पर भी तेजी से कार्य किये जा रहे हैं, ये पर्वतीय क्षेत्रों से पलायन को रोकने में भी मददगार होंगे। उत्तराखण्ड देश का पहला ऐसा राज्य है, जिसने समान नागरिक संहिता को लागू करने की दिशा में पहल की है। राज्य में भर्ती परीक्षाएं पूरी पारदर्शिता के साथ हों, इसके लिए सख्त नकल विरोधी कानून लागू किया गया है।

इस अवसर पर उत्तराखण्डी फीचर फिल्म के निर्माता बिक्रम नेगी, फिल्म निर्देशक, ब्रिज रावत, इस फिल्म में संगीत देने वाले श्रवण भारद्वाज व सुमित गुसाईं, गीत देने वाले पदम गुसाई व बृज मोहन शर्मा वेदवाल, पटकथा व संवाद लिखने वाले देवी प्रसाद सेमवाल, छायांकन देने वाले राजेन्द्र सिंह, नृत्य निर्देशक अरविन्द नेगी, शोध संकलन-कथा सार देने वाले डा.एम आर सकलानी, एसोसिएट डायरेक्टर, राजेन्द्र नेगी, कार्यकारी निर्माता, राजेश मालगुड़ी, प्रेमा नेगी पहाड़ी एवं अन्य गणमान्य उपस्थित थे।