डिजिटल उत्तराखंड की दिशा में बड़ा कदम, सीएम धामी ने क्रिएटर्स मीट 2025 में रखी नई दृष्टि

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने देहरादून में आयोजित “उत्तराखंड क्रिएटर्स मीट–2025” में बतौर मुख्य अतिथि प्रतिभाग किया। कार्यक्रम में विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स से जुड़े अनेक कंटेंट क्रिएटर्स, डिजिटल उद्यमी, व्लॉगर्स तथा युवा इंफ्लुएंसर्स ने प्रतिभाग किया ।

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने अनेक सोशल मीडिया क्रिएटर्स से अनौपचारिक संवाद किया तथा उनके प्रश्नों का उत्तर दिया। युवा कंटेंट क्रिएटर्स के साथ हुए इस संवाद को मुख्यमंत्री ने “युवा सोच और डिजिटल ऊर्जा का संगम” बताया।

*विकसित भारत—श्रेष्ठ भारत में उत्तराखंड की भूमिका पर मुख्यमंत्री का दृष्टिकोण*

एक युवा सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘विकसित भारत–श्रेष्ठ भारत @2047’ दृष्टिकोण में उत्तराखंड की भूमिका के बारे में प्रश्न किया। इसका उत्तर देते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि विकसित भारत का आधार तभी सुदृढ़ होगा जब देश और राज्य का हर ब्लॉक, हर तहसील, हर जिला और हर गांव सशक्त होगा। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड सरकार इस दिशा में निरंतर कार्य कर रही है—चाहे वह बुनियादी ढांचा हो, पर्यटन, महिला सशक्तीकरण, शिक्षा, स्वास्थ्य या उद्यमिता—सभी क्षेत्रों में तेज़ प्रगति की जा रही है।

*भ्रष्टाचार के मुद्दे पर मुख्यमंत्री का स्पष्ट रुख*

एक अन्य क्रिएटर द्वारा भ्रष्टाचार से जुड़े प्रश्न पूछे जाने पर मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने भ्रष्टाचार के खिलाफ ज़ीरो टॉलरेंस नीति अपनाई है। उन्होंने बताया कि अब तक 200 से अधिक अधिकारियों एवं कर्मचारियों पर कार्रवाई की जा चुकी है। उन्होंने कहा कि राज्य में पारदर्शिता, दक्षता और जवाबदेही को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है और “भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई आगे भी पूरी दृढ़ता से जारी रहेगी।”

*राज्य में हो रहे विकासात्मक प्रयासों का उल्लेख*

मुख्यमंत्री धामी ने बताया कि राज्य की सामूहिक प्रगति के लिए अनेक क्षेत्रों में महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। उन्होंने कहा कि राज्य की GSDP को दोगुना करने के लक्ष्य पूरा हो चुका है | हेली कनेक्टिविटी को बड़े स्तर पर विस्तार दिया जा रहा है, जिससे पर्वतीय क्षेत्रों में आवागमन आसान हुआ है, उत्तराखंड में औद्योगिक क्रांति और निवेश वातावरण को सुदृढ़ बनाने के लिए बड़े पैमाने पर प्रयास किए जा रहे हैं | ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट और श्रृंखलाबद्ध रोड शो के माध्यम से निवेशकों का भरोसा बढ़ा है
अब तक 3.56 लाख करोड़ से अधिक के MOU साइन किए जा चुके हैं और 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश की ग्राउंडिंग हो चुकी है| राज्य में पर्यटकों की संख्या हर वर्ष नया रिकॉर्ड बना रही है,सरकार के प्रयासों से शीतकालीन यात्रा के भी अत्यंत सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं

*महिला सशक्तीकरण पर मुख्यमंत्री का संदेश*

राज्य में महिलाओं की भूमिका पर पूछे गए प्रश्न के उत्तर में मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड की मातृशक्ति ने स्वरोज़गार, स्थानीय उत्पादों, हस्तशिल्प, स्वयं सहायता समूहों और पारंपरिक कौशल के क्षेत्र में पूरे देश के सामने उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किए हैं। उन्होंने कहा कि राज्य की महिलाओं द्वारा बनाए जाने वाले स्थानीय उत्पादों की गुणवत्ता और शुद्धता इतनी उत्कृष्ट है कि वे कई मल्टीनेशनल कंपनियों के उत्पादों से भी बेहतर हैं। सरकार महिलाओं के आर्थिक सशक्तीकरण तथा उनकी उद्यमशीलता को और मजबूत करने के लिए लगातार नई योजनाओं पर कार्य कर रही है।

*राज्य की सोशल मीडिया नीति पर मुख्यमंत्री का दृष्टिकोण*

राज्य की आगामी सोशल मीडिया नीति से जुड़े प्रश्न के उत्तर में मुख्यमंत्री ने कहा कि अगले वर्ष तक उत्तराखंड सरकार की नई सोशल मीडिया नीति लागू कर दी जाएगी। उन्होंने बताया कि यह नीति डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सूचनाओं के बेहतर प्रसारण, सरकारी योजनाओं के प्रभावी संप्रेषण तथा राज्य के युवाओं और क्रिएटर्स को अधिक अवसर उपलब्ध कराने पर केंद्रित होगी।
उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य है कि क्रिएटर कम्युनिटी को प्रोत्साहित किया जाए और डिजिटल माध्यमों के जरिए राज्य की संस्कृति, पर्यटन, उद्यमिता एवं उपलब्धियों को राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर अधिक प्रभावी रूप से प्रस्तुत किया जाए।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सोशल मीडिया आज सूचना, संवाद और जनभागीदारी का सबसे सशक्त माध्यम बन चुका है। उन्होंने कहा कि आज किसी भी घटना की जानकारी कुछ ही सेकंड में लाखों–करोड़ों लोगों तक पहुँच जाती है और सोशल मीडिया ने आम नागरिक की आवाज को एक व्यापक मंच प्रदान किया है।

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि डिजिटल युग में सोशल मीडिया केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक पहलू को प्रभावित करने वाला एक प्रभावशाली मंच बन गया है। उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि इन्फ्लुएंसर्स की भूमिका अब केवल कंटेंट क्रिएशन तक सीमित नहीं है, बल्कि वे सामाजिक परिवर्तन लाने वाले सोशल चेंज मेकर्स के रूप में महत्त्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।

उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया की शक्ति के कारण ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को शासन व्यवस्था का अभिन्न हिस्सा बना दिया है। मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री की प्रेरणा से राज्य सरकार भी डिजिटल उत्तराखंड के निर्माण हेतु संकल्पबद्ध है। शासन को अधिक पारदर्शी व उत्तरदायी बनाने के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल व्यापक स्तर पर किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज मुख्यमंत्री कार्यालय सहित विभिन्न विभाग सोशल मीडिया के माध्यम से जनता से सीधे संवाद कर रहे हैं। पहले शिकायत दर्ज कराने के लिए कार्यालयों में बार-बार जाना पड़ता था, जबकि अब एक ट्वीट या संदेश के माध्यम से तत्काल सुनवाई और समाधान संभव हो पाया है। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया ने सरकार और जनता के बीच एक मजबूत सेतु का निर्माण किया है, जिससे प्रशासन और अधिक संवेदनशील और जवाबदेह हुआ है।

मुख्यमंत्री ने यह भी उल्लेख किया कि सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव के साथ इसके दुरुपयोग के मामले भी सामने आते हैं। उन्होंने कहा कि कुछ लोग सोशल मीडिया का प्रयोग गलत अफवाहें फैलाने, सामाजिक सौहार्द को प्रभावित करने और जनहितकारी योजनाओं के बारे में भ्रम उत्पन्न करने के लिए करते हैं। उन्होंने सभी कंटेंट क्रिएटर्स से आग्रह किया कि किसी भी भ्रामक या तथ्यहीन सामग्री का न केवल फैक्ट-चेक करें, बल्कि उसके सही तथ्यों को लोगों तक पहुँचाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएँ।

मुख्यमंत्री ने कहा कि कई नकारात्मक कंटेंट क्रिएटर्स अधिक व्यूज और फॉलोअर्स पाने की होड़ में समाज, धर्म, सरकार या प्रदेश की छवि को नुक़सान पहुँचाने वाली सामग्री प्रस्तुत करते हैं। उन्होंने कहा कि प्रसिद्धि की इस प्रतिस्पर्धा में नैतिक जिम्मेदारी और सामाजिक कर्तव्य को ध्यान में रखना आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि कंटेंट क्रिएटर्स राज्य के विकास में भी बड़ा योगदान दे सकते हैं। उत्तराखंड के पर्यटन स्थलों, स्थानीय उत्पादों, हस्तशिल्प, सांस्कृतिक धरोहर और समाज की उपलब्धियों पर आधारित सकारात्मक सामग्री न केवल राज्य की छवि को मजबूत करेगी, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी लाभ पहुँचाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी स्थानीय कारीगर या उत्पाद की एक सकारात्मक कहानी उसे राष्ट्रीय पहचान दिला सकती है।

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि यदि किसी भी समस्या, शिकायत या जनहित से संबंधित जानकारी की जानकारी क्रिएटर्स को मिलती है, तो वे इसे तुरंत सरकार तक पहुँचाएँ। उन्होंने आश्वासन दिया कि ऐसी प्रत्येक जानकारी पर तत्काल कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि क्रिएटर्स की जागरूकता और रचनात्मकता शासन-प्रशासन को और अधिक प्रभावी और संवेदनशील बनाने में सहायक सिद्ध हो सकती है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार उत्तराखंड को देश का सर्वोत्तम राज्य बनाने के अपने “विकल्प रहित संकल्प” के मंत्र के साथ निरंतर कार्य कर रही है और उन्हें विश्वास है कि इस संकल्प को साकार करने में क्रिएटर समुदाय भी महत्वपूर्ण योगदान देगा।

कार्यक्रम में प्रमुख सचिव आर. मीनाक्षी सुंदरम, महानिदेशक सूचना बंशीधर तिवारी, जागर गायक प्रीतम भरतवाण, तथा देश–प्रदेश भर से आए सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर एवं क्रिएटर्स उपस्थित रहे।

उत्तराखंड में पहली बार, विज्ञान को नई दिशा देने वाली पहलें, विज्ञान रेडियो को स्वीकृति

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखण्ड विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में लगातार नई ऊँचाइयाँ छू रहा है। उत्तराखण्ड विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (UCOST) के महानिदेशक डॉ. दुर्गेश पंत ने बताया कि राज्य में पहली बार शुरू की गई अनेक पहलें विज्ञान को जन-जन तक पहुँचाने में ऐतिहासिक सिद्ध हो रही हैं।

विज्ञान रेडियो 88.8 MHz की स्वीकृति

राज्य में पहली बार विज्ञान रेडियो 88.8 MHz को स्वीकृति मिली है। यह पहल विज्ञान को सरल, रोचक और जनहितकारी स्वरूप में प्रत्येक घर तक पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

She for STEM’ कार्यक्रम का शुभारंभ

महिलाओं और छात्राओं को STEM क्षेत्रों में प्रेरित करने हेतु पहली बार She for STEM कार्यक्रम प्रारम्भ किया गया, जिसके माध्यम से हजारों छात्राओं को मार्गदर्शन एवं प्रशिक्षण मिल रहा है।

राज्य के सभी 13 जनपदों में पहली बार एक-एक मोबाइल विज्ञान प्रयोगशाला Lab on Wheels संचालित होने लगी है, जिससे दूरस्थ क्षेत्रों के विद्यार्थियों को आधुनिक प्रयोगात्मक शिक्षा उपलब्ध हो रही है।

60 पेटेंट सूचना केंद्रों की स्थापना
राज्य के महाविद्यालयों, विश्वविद्यालयों और विभिन्न संस्थानों में पहली बार 60 पेटेंट सूचना केंद्र स्थापित किए गए हैं, जो नवाचार, शोध एवं स्टार्टअप इकोसिस्टम को मजबूत कर रहे हैं।

पहली बार राज्य के सभी जनपदों और ब्लॉकों में साइंस एंड टेक्नोलॉजी प्रीमियर लीग आयोजित की जा रही है, जिसमें हजारों छात्र शामिल होकर विज्ञान के प्रति प्रतिस्पर्धात्मक और रचनात्मक दृष्टिकोण विकसित कर रहे हैं।

उत्तराखण्ड में विज्ञान और नवाचार को जनआंदोलन बनाने का हमारा संकल्प अब साकार रूप ले रहा है। UCOST द्वारा पहली बार शुरू की गई ये पहलें न सिर्फ हमारे युवाओं को नई दिशा दे रही हैं, बल्कि विकसित उत्तराखण्ड @2027 और विकसित भारत @2047 के संकल्प को भी मजबूती प्रदान कर रही हैं। हम चाहते हैं कि विज्ञान की रोशनी हर गांव, हर स्कूल और हर घर तक पहुँचे। हमारी सरकार युवा वैज्ञानिकों, शोधार्थियों, स्टार्टअप्स और विशेष रूप से बेटियों को STEM क्षेत्रों में अग्रसर करने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उत्तराखण्ड आने वाले समय में विज्ञान एवं तकनीक के क्षेत्र में देश का प्रेरक राज्य होगा।
पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री

सीएम ने जनरल रावत के अदम्य साहस, नेतृत्व क्षमता और राष्ट्र के प्रति उनके सर्वोच्च समर्पण का स्मरण किया

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आज देहरादून के कनक चौक स्थित पार्क में भारत के प्रथम चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ स्व. जनरल बिपिन रावत की चतुर्थ पुण्यतिथि पर उनकी प्रतिमा पर पुष्पचक्र अर्पित कर श्रद्धांजलि दी।

मुख्यमंत्री ने जनरल रावत के अदम्य साहस, नेतृत्व क्षमता और राष्ट्र के प्रति उनके सर्वोच्च समर्पण को स्मरण करते हुए उन्हें उत्तराखंड एवं देश का गौरव बताया। उन्होंने कहा कि जनरल बिपिन रावत का जीवन देशभक्ति, अनुशासन और कर्तव्यनिष्ठा की प्रेरणादायक मिसाल है, जो आने वाली पीढ़ियों को सदैव राष्ट्रसेवा के लिए प्रेरित करता रहेगा। मुख्यमंत्री ने उपस्थित जनप्रतिनिधियों, सैनिकों एवं नागरिकों के साथ दो मिनट का मौन रखकर दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की और शहीदों के सम्मान में राज्य सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई।

इस अवसर पर सैनिक कल्याण मंत्री गणेश जोशी, विधायक खजान दास और सविता कपूर भी मौजूद थे।

उत्तराखंड में संस्कृत शिक्षा को बढ़ावा देने हेतु कई छात्रवृत्ति व प्रोत्साहन योजनाएँ संचालितः धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी आज हरिद्वार में आयोजित अंतरराष्ट्रीय संस्कृत सम्मेलन में सम्मिलित हुए। इस अवसर पर उन्होंने संस्कृत भाषा के उत्थान एवं विकास हेतु एक उच्च स्तरीय आयोग के गठन की घोषणा की।

कार्यक्रम में उपस्थित अतिथियों और विद्वानों को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि “भारतीय ज्ञान परंपरा- वैश्विक ज्ञान के विकास में संस्कृत का योगदान” जैसे महत्वपूर्ण विषय पर आयोजित यह सम्मेलन भारतीय सभ्यता की गौरवमयी जड़ों को विश्व पटल पर मजबूती से प्रस्तुत करता है। उन्होंने विश्वविद्यालय परिवार का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस दो दिवसीय सम्मेलन में भारत सहित विभिन्न देशों के विद्वानों द्वारा संस्कृत की समृद्ध ज्ञान-परंपरा पर गहन विचार-विमर्श किया जाएगा, जो एक प्रेरणादायी पहल है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि उनके लिए संस्कृत भाषा हमेशा से प्रेरणा का विषय रही है। उन्होंने विद्यालयी शिक्षा के दौरान कक्षा 9 तक संस्कृत का अध्ययन किया और उस दौरान सीखे गए श्लोक, व्याकरण एवं भाषा की मधुरता आज भी स्मरण में है। उन्होंने कहा कि संस्कृत केवल भाषा नहीं बल्कि संस्कृति, परंपरा, ज्ञान और विज्ञान का आधार है, जिसने प्राचीन मानव सभ्यताओं के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

मुख्यमंत्री ने उल्लेख किया कि विश्व की अनेकों भाषाओं की जड़ें संस्कृत से जुड़ी हुई हैं। वेद, पुराण, उपनिषद, आयुर्वेद, योग, दर्शन, गणित, साहित्य, विज्ञान और खगोलशास्त्र जैसे सभी प्राचीन ग्रंथ संस्कृत में रचे गए, जिसने भारत की वैचारिक धरोहर को समृद्ध किया।

मुख्यमंत्री ने 18वीं और 19वीं शताब्दी में यूरोपीय विद्वानों द्वारा संस्कृत साहित्य में बढ़ती रुचि का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि तक्षशिला, नालंदा, विक्रमशिला और वल्लभी जैसे विश्वविद्यालयों ने संस्कृत आधारित ज्ञान को विश्व में प्रसारित किया, जहाँ से चरक, सुश्रुत, आर्यभट्ट, भास्कराचार्य, चाणक्य, ब्रह्मगुप्त और पाणिनि जैसे महान विद्वानों ने जन्म लिया। संस्कृत केवल विज्ञान की भाषा नहीं, बल्कि नीति, मानवीय मूल्यों और वैश्विक बंधुत्व का संदेश देने वाली भाषा है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में संस्कृत भाषा के प्रचार-प्रसार हेतु कई सार्थक प्रयास जारी हैं। नई शिक्षा नीति में संस्कृत को आधुनिक और व्यवहारिक भाषा के रूप में स्थापित करने पर विशेष बल दिया गया है। ई-संस्कृत शिक्षण प्लेटफॉर्म, मोबाइल एप्स, ऑनलाइन साहित्य उपलब्धता जैसी पहलों से संस्कृत को नई पीढ़ी तक सरल रूप में पहुंचाया जा रहा है। कर्नाटक के मट्टूर गांव का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि संस्कृत आज भी दैनिक जीवन की भाषा बन सकती है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा हाल ही में लोकसभा की कार्यवाही के संस्कृत अनुवाद की पहल भी इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि देवभूमि उत्तराखंड सदियों से संस्कृत का केंद्र रहा है। राज्य में संस्कृत को द्वितीय राजभाषा का दर्जा प्रदान करना इसी विरासत का सम्मान है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार विद्यालयों में संस्कृत शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए सतत प्रयासरत है।

मुख्यमंत्री ने राज्य सरकार की प्रमुख योजनाओं का उल्लेख करते हुए बताया कि गार्गी संस्कृत बालिका छात्रवृत्ति योजना के माध्यम से संस्कृत विद्यालयों में अध्ययनरत छात्राओं को प्रति माह 251 रुपये की छात्रवृत्ति प्रदान की जा रही है। डॉ. भीमराव अंबेडकर एससी/एसटी छात्रवृत्ति योजना के अंतर्गत संस्कृत विषय के एससी/एसटी विद्यार्थियों को समान आर्थिक सहायता दी जा रही है। संस्कृत छात्र प्रतिभा सम्मान योजना के तहत हाईस्कूल और इंटरमीडिएट में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को 5100, 4100 और 3100 रुपए की पुरस्कार राशि दी जा रही है। इसके साथ ही उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय और रघुनाथकीर्ति केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के स्नातक व स्नातकोत्तर विद्यार्थियों को भी सम्मानित किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि उत्तराखंड संस्कृत अकादमी द्वारा अखिल भारतीय शोध सम्मेलन, वेद सम्मेलन, ज्योतिष सम्मेलन, संस्कृत शिक्षक कौशल विकास कार्यशालाएँ एवं छात्र प्रतियोगिताओं जैसे विभिन्न कार्यक्रमों का लगातार आयोजन किया जा रहा है।

उन्होंने यह भी कहा कि राज्य सरकार ने प्रत्येक जनपद में आदर्श संस्कृत ग्राम स्थापित करने का संकल्प लिया है, जिससे देववाणी संस्कृत को जन-जन तक पहुंचाने के प्रयास और मजबूत होंगे। साथ ही संस्कृत विद्यार्थियों के लिए सरकारी सहायता, शोध कार्यों में सहयोग और रोजगार के अवसर बढ़ाने पर भी कार्य किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड की पावन भूमि, जिसने वेदों और ऋषि-मुनियों के ज्ञान को जन्म दिया, वहाँ संस्कृत को समृद्ध करना हमारा कर्तव्य है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि एक दिन संस्कृत केवल पूजा-पाठ की भाषा न रहकर आम बोलचाल की भाषा के रूप में भी स्थापित होगी।

कार्यक्रम में पूर्व मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल, विधायक आदेश चौहान, प्रदीप बत्रा, प्रदेश उपाध्यक्ष स्वामी यतीश्वरानंद, विदेश सचिव (भारत सरकार) मीना मल्होत्रा, सचिव संस्कृत उत्तराखंड दीपक गैरोला, संस्कृत विश्वविद्यालय कुलपति दिनेश चंद्र शास्त्री, जिलाधिकारी मयूर दीक्षित, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक प्रमेन्द्र सिंह डोभाल सहित विभिन्न देशों से आए वक्ता एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।

नजरियाः पीएम मोदी ने मन की बात में की उत्तराखंड में शीतकालीन पर्यटन की ब्रॉडिंग

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को प्रसारित ‘मन की बात’ कार्यक्रम में उत्तराखंड के प्रति अपने विशेष स्नेह को प्रकट करते हुए राज्य में विंटर टूरिज्म, साहसिक खेलों, वेडिंग डेस्टिनेशन की संभावनाओं का उल्लेख करते हुए, देशवासियों से सर्दियों के सीजन में हिमालय की वादियों का अनुभव लेने की अपील की है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री उत्तराखंड टूरिज्म के सबसे बड़े ब्रांड एम्बेस्डर हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘मन की बात” कार्यक्रम में करीब ढाई मिनट उत्तराखंड को समर्पित किए। उन्होंने कहा कि इन दिनों उत्तराखंड का विंटर टूरिज्म लोगों को खूब लुभा रहा है। सर्दियों के मौसम में औली, मुनस्यारी, दयारा, चोपता जैसी जगहें लोकप्रिय हो रही हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि कुछ सप्ताह पहले ही पिथौरागढ़ में साढ़े 14 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित आदि कैलाश में राज्य की पहली हाई ऑल्टीट्यूट अल्ट्रा रन मैराथन आयोजित की गई, जिसमें देशभर के 18 राज्यों से 750 से अधिक एथिलीट ने भाग लिया। 60 किमी लंबी आदि कैलाश परिक्रमा रन का प्रारंभ कड़कड़ाती ठंड में सुबह पांच बजे हुआ, इतनी ठंड के बावजूद प्रतिभागियों का उत्साद देखते ही बनता था। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि तीन साल पहले तक आदि कैलाश की यात्रा पर प्रतिवर्ष मात्र दो हजार लोग ही आते थे, अब यह संख्या 30 हजार तक पहुंच गई है।

प्रधानमंत्री ने उत्तराखंड में शीतकालीन पर्यटन की प्रशंसा करते हुए कहा कि कुछ ही हफ्तों में उत्तराखंड विंटर गेम्स का भी आयोजन करने जा रहा है, जिसमें प्रतिभाग करने के लिए देशभर के खिलाड़ी, एडवेंचर प्रेमी और खेलों से जुड़े लोग उत्साहित हैं। उन्होंने उत्तराखंड में बढ़ती पर्यटन आधारभूत सुविधाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि उत्तराखंड ने विंटर टूरिज्म को बढावा देने के लिए कनेक्टिविटी और इंफ्रास्ट्रक्चर पर विशेष तौर पर फोकस किया है। इसी क्रम में राज्य सरकार ने होम स्टे के लिए नई पॉलिसी भी बना दी है। प्रधानमंत्री मोदी ने उत्तराखंड में डेस्टिनेशन वेडिंग की ब्रांडिंग करते हुए कहा कि सर्दियों की सुनहरी धूप और पहाड़ों से उतरते कोहरे के बीच, उत्तराखंड वेडिंग डेस्टिनेशन के रूप में भी लोकप्रिय हो रहा है। खासकर गंगा जी के किनारे अब खूब डेस्टिनेशन वेडिंग हो रही हैं। प्रधानमंत्री ने देशवासियों से अपील करते हुए कहा कि यदि वो, सर्दियों में कहीं जाने का विचार कर रहे हैं तो हिमालय की वादियों को अपने विकल्प के रूप में जरूर शामिल करें, हिमालय की वादियां आपको जीवनभर साथ चलने वाली अनुभूतियों से भर देंगी।

पीएम के दौरे से बढ़ा पर्यटन
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का उत्तराखंड आगमन हर बार, यहां के पर्यटन को नई गति प्रदान कर जाता है। प्रधानमंत्री मोदी इससे पहले श्री केदारनाथ, श्री बद्रीनाथ, आदि कैलाश और जागेश्वर धाम की यात्रा पर आ चुके हैं, जिसके बाद इन तीर्थ स्थलों पर आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या कई गुना बढ़ चुकी है। इसी तरह प्रधानमंत्री गत वर्ष उत्तराखंड में शीतकालीन पर्यटन का शुभारंभ करने उत्तरकाशी के मुखबा गांव में पहुंचे, इसके बाद से पूरी हर्षिल घाटी में पर्यटन गतिविधियों में तेजी नजर आ रही है। जिससे स्थानीय स्तर पर आजीविका के नए अवसर विकसित हो रहे हैं।

धामी सरकार के कार्यों पर पीएम की मुहर

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी राज्य में विंटर टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए विशेष प्रयास कर रहे हैं। इसी क्रम में गत वर्ष से सरकार शीतकालीन यात्रा भी संचालित कर रही है। सरकार राज्य में वेडिंग डेस्टिनेशन को भी बढ़ावा दे रही है, अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्य सरकार के प्रयासों की तारीफ करते हुए, एक तरह से धामी सरकार के कार्यों पर अपनी सकारात्मक मुहर लगा दी है।

देवभूमि उत्तराखंड के सतत विकास और संभावनाओं को विश्व पटल पर रेखांकित करने के लिए समस्त प्रदेशवासी प्रधानमंत्री के आभारी हैं। प्रदेश सरकार प्रधानमंत्री के संकल्प के अनुसार उत्तराखंड को प्राकृतिक, आध्यात्मिक और साहसिक पर्यटन के मानचित्र पर उभारने के लिए संकल्पित होकर काम कर रही है।
पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री

उत्तराखंडः गन्ना किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम, गन्ना मूल्य में ऐतिहासिक वृद्धि

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पेराई सत्र 2025 व 26 के लिए उत्तराखण्ड राज्य की चीनी मिलों द्वारा क्रय किए जाने वाले गन्ने के राज्य परामर्शित मूल्य में वृद्धि को स्वीकृति प्रदान कर दी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड सरकार का लक्ष्य किसानों के आर्थिक सशक्तिकरण को गति देना है और यह सुनिश्चित करना है कि गन्ना किसानों को उनकी उपज का पूर्ण और उचित मूल्य समय पर प्राप्त हो। इसी उद्देश्य के तहत वर्ष 2024व 25 की तुलना में इस वर्ष गन्ना मूल्य में उल्लेखनीय बढ़ोतरी की गई है।

गत पेराई सत्र 2024 व 25 में अगेती प्रजाति का राज्य परामर्शित मूल्य ₹375 प्रति कुंतल तथा सामान्य प्रजाति का मूल्य ₹365 प्रति कुंतल निर्धारित था। मुख्यमंत्री धामी ने बताया कि नए पेराई सत्र 2025 व 26 के लिए इन मूल्यों में वृद्धि करते हुए अगेती प्रजाति का मूल्य ₹405 प्रति कुंतल तथा सामान्य प्रजाति का मूल्य ₹395 प्रति कुंतल निर्धारित किया गया है।

मुख्यमंत्री धामी ने यह भी कहा कि मूल्य निर्धारण की संपूर्ण प्रक्रिया में सहकारी, सार्वजनिक एवं निजी क्षेत्र की चीनी मिलों, गन्ना विकास एवं चीनी उद्योग विभाग, किसान संगठनों तथा संबंधित हितधारकों के साथ विस्तृत विमर्श किया गया। इसके साथ ही केन्द्र सरकार द्वारा निर्धारित एफ.आर.पी., उत्तर प्रदेश में प्रभावी गन्ना मूल्य तथा राज्य की भौगोलिक एवं कृषि परिस्थितियों का समुचित विश्लेषण कर संतुलित निर्णय लिया गया है।

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि राज्य सरकार प्रत्येक निर्णय में किसान हित को सर्वाेच्च प्राथमिकता देती है। गन्ना किसानों की आय बढ़ाना, उनकी उपज का उचित सम्मान सुनिश्चित करना तथा उन्हें सुविधाजनक, पारदर्शी और समयबद्ध भुगतान उपलब्ध कराना राज्य सरकार का दायित्व है। उन्होंने संबंधित विभागों को निर्देश दिए कि क्रय केंद्रों पर किसी प्रकार की असुविधा न हो और भुगतान बिना देरी के सुनिश्चित किया जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पेराई सत्र 2025 व 26 के लिए घोषित यह बढ़ा हुआ मूल्य न केवल गन्ना किसानों को राहत देगा, बल्कि राज्य की कृषि अर्थव्यवस्था को भी मजबूती प्रदान करेगा तथा गन्ना उत्पादन को प्रोत्साहन देने में सहायक सिद्ध होगा।

कुंभ के आयोजन के लिए गंगा किनारे पहली बार बैठक की गई, सीएम रहे मौजूद

हरिद्वार में होने वाले 2027 के कुंभ के भव्य आयोजन के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आज हरिद्वार में गंगा किनारे सभी 13 अखाड़ों के आचार्यों एवं संतगणों के साथ बैठक की। कुंभ के भव्य आयोजन के लिए पहली बार गंगा तट पर बैठक का आयोजन किया गया। बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने 2027 कुंभ स्नान की महत्वपूर्ण तिथियों की घोषणा भी की। उन्होंने 14 जनवरी 2027 को मकर संक्रांति, 06 फरवरी 2027 को मौनी अमावस्या, 11 फरवरी 2027 को वसंत पंचमी, 20 फरवरी 2027 को माघ पूर्णिमा, 06 मार्च 2027 को महाशिवरात्रि (अमृत स्नान), 08 मार्च 2027 को फाल्गुन अमावस्या (अमृत स्नान), 07 अप्रैल 2027 को नव संवत्सर (नव वर्ष), 14 अप्रैल 2027 को मेष संक्रांति (अमृत स्नान), 15 अप्रैल 2027 को श्रीराम नवमी तथा 20 अप्रैल 2027 को चौत्र पूर्णिमा के स्नान की तिथियों की घोषणा की।

मुख्यमंत्री ने कुंभ के सफल आयोजन के लिए अखाड़ों के आचार्यों से सुझाव एवं मार्गदर्शन लिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि कुंभ से जुड़े सभी निर्णयों में संतगणों की परम्पराओं, आवश्यकताओं एवं सुविधाओं को सर्वाेच्च प्राथमिकता दी जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह उनका सौभाग्य है कि कुंभ के सुव्यवस्थित और भव्य आयोजन के लिए उन्हें संतगणों का आशीर्वाद और मार्गदर्शन प्राप्त हो रहा है। उन्होंने कहा कि संतों की प्रेरणा, सुझाव और आशीर्वाद के बिना इस महायोजना की पूर्णता की कल्पना भी संभव नहीं है। हमारा प्रयास है कि सभी के अमूल्य सुझावों से कुंभ 2027 की तैयारियों को और अधिक व्यापक, सुव्यवस्थित और संत समाज की अपेक्षाओं के अनुरूप बनाया जा सके।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आप सभी जानते हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देवभूमि उत्तराखंड को विश्व की आध्यात्मिक राजधानी के रूप में स्थापित करने का आह्वान किया है। इसी संकल्प को आगे बढ़ाते हुए राज्य सरकार कुंभ 2027 को भव्य, दिव्य और ऐतिहासिक बनाने के लिए पूर्ण प्रतिबद्धता के साथ निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2021 में आयोजित कुंभ कोरोना महामारी के प्रकोप के कारण केवल अल्प अवधि के लिए आयोजित किया गया था और शाही स्नान भी प्रतीकात्मक रूप से ही संपन्न हुआ था, लेकिन वर्ष 2027 में होने वाला हरिद्वार कुंभ कई दृष्टियों से ऐतिहासिक और विशेष महत्व का होगा। इस बार आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या 2010 और 2021 के कुंभ की तुलना में कई गुना अधिक होने की संभावना है। राज्य सरकार ने हरिद्वार कुंभ 2027 को दिव्य, भव्य और सुरक्षित बनाने के लिए अभी से व्यापक स्तर पर तैयारियाँ प्रारंभ कर दी हैं। श्रद्धालुओं और साधु-संतों की सुरक्षा के लिए राज्य और केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों के साथ पूर्ण समन्वय स्थापित किया गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पुलिस, एनडीआरएफ, पीएसी, स्वास्थ्य विभाग और फायर विभाग सहित सभी संबंधित विभाग सुरक्षा के हर पहलू को ध्यान में रखते हुए सभी संभव उपाय सुनिश्चित करेंगे। कुंभ के दौरान पूर्व में घटित दुर्घटनाओं को ध्यान में रखते हुए भीड़ नियंत्रण, यातायात प्रबंधन और आकस्मिक आपात स्थिति की तैयारी पहले से ही प्रारंभ कर दी गई है। पूर्व में आयोजित कुंभ मेलों को सफलतापूर्वक संपन्न कराने वाले अधिकारियों का भी पूर्ण सहयोग लिया जाएगा, ताकि हर प्रक्रिया सुचारू और व्यवस्थित रूप से संचालित हो सके। कुंभ के दौरान नगर और घाट क्षेत्रों की स्वच्छता के लिए विशेष टीमों का गठन कर कचरा प्रबंधन, जल निकासी और पर्यावरण संरक्षण पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

अखाड़ों के आचार्य एवं संतगणों द्वारा संस्कृति के संरक्षण के लिए प्रदेश में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा उठाए गए कदमों की सराहना की गई। उन्होंने कहा कि भव्य एवं दिव्य कुंभ के आयोजन के लिए संत समाज द्वारा राज्य सरकार को पूर्ण सहयोग दिया जाएगा। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने अखाड़ों के आचार्यों एवं संतगणों के साथ भोजन भी किया।

इस दौरान महंत रविन्द्र पुरी महाराज श्री पंचायती निरंजनी अखाड़ा, महंत कौशल गिरी महाराज-श्री पंचायती आनंद अखाड़ा, महंत हरिगिरी महाराज-श्री पंचदशनाम जूना भैरव अखाड़ा, डॉ. साधनानन्द जी महाराज-श्री पंचअग्नि अखाड़ा, महंत सत्यगिरि महाराज-श्री पंचदशनाम आवाहन अखाड़ा, महंत सत्यम गिरी महाराज-श्री पंचायती अटल अखाड़ा, महंत मुरली दास महाराज-श्री पंच निर्वाणी अनी अखाड़ा, महंत वैष्णव दास महाराज-श्री पंच दिगम्बर अनी अखाड़ा, महंत राजेन्द्र दास महाराज-श्री पंच निर्माेही अनी अखाड़ा, महंत दुर्गादास महाराज-श्री पंचायती बड़ा उदासीन अखाड़ा, महंत भगतराम दास महाराज-श्री पंचायती नया उदासीन अखाड़ा, महंत जसविंदर महाराज-श्री पंचायती निर्मल अखाड़ा, सांसद राज्यसभा कल्पना सैनी, विधायक हरिद्वार मदन कौशिक, विधायक रानीपुर आदेश चौहान, विधायक रुड़की प्रदीप बत्रा, महापौर नगर निगम हरिद्वार किरन जैसल, महापौर नगर निगम रुड़की अनीता देवी अग्रवाल, प्रदेश उपाध्यक्ष भाजपा/पूर्व मंत्री स्वामी यतीश्वरानन्द, आयुक्त गढ़वाल मंडल विनय शंकर पाण्डेय, आईजी गढ़वाल राजीव स्वरूप, मेलाधिकारी सोनिका, जिलाधिकारी हरिद्वार मयूर दीक्षित, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक प्रमेंद्र सिंह डोभाल, मुख्य विकास अधिकारी ललित नारायण मिश्रा मौजूद थे।

बिल लाओ इनाम पाओं योजना के विजेताओं को सीएम धामी से मिला पुरस्कार, खिले चेहरे

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्य सेवक सदन में आयोजित कार्यक्रम में ’’बिल लाओ-इनाम पाओ’’ योजना के विजेताओं को पुरस्कार वितरित किए। एक सितंबर 2022 से 31 मार्च 2024 के बीच संचालित इस योजना के तहत कुल 1888 उपभोक्ताओं ने पुरस्कार जीते हैं। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने विजेताओं को बधाई देते हुए कहा कि योजना में प्रतिभाग करने वाले सभी लोगों ने राज्य के राजस्व संग्रहण को एक नई चेतना, एक नया दृष्टिकोण और एक नई ऊर्जा प्रदान की है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2022 में शुरु “बिल लाओ-इनाम पाओ” योजना राज्य सरकार का एक एक नवाचार था, जिसके द्वारा सरकार ने जनभागीदारी को राजस्व संग्रहण से जोड़ने का प्रयास किया। आज तीन वर्षों में “बिल लाओ-इनाम पाओ” योजना ने लोगों के बीच जागरुकता पैदा करने में कामयाबी हासिल की है। मुख्यमंत्री ने कहा कि योजना से जनता में ये समझ बनी है कि प्रदेश के विकास में प्रत्येक बिल एक योगदान है। योजना आज जहां एक ओर उपभोक्ता जागरूकता का सशक्त माध्यम बनी है, वहीं उपभोक्ता एवं व्यापारी वर्ग के बीच साझा जिम्मेदारी का प्रतीक भी बनकर उभरी है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि पिछले 11 वर्षों में व्यापार, उद्यम, क्रिएटिविटी को साथ लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश ने एक नया विश्वास पैदा करने का प्रयास किया है। प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व वाली डबल इंजन की सरकार में व्यापारियों को ’’प्रोत्साहन’’ और ’’प्रॉफिट’’ के साथ ही ’’प्रोटेक्शन’’ भी मिला है। राज्य सरकार भी इसी क्रम में “ईज ऑफ डूइंग बिजनेस” और “व्यापार सुधार कार्य योजना” के माध्यम से राज्य में निवेश और उद्यमिता के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करने का प्रयास कर रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने राज्य में ’’राजकोषीय अनुशासन’’ को मजबूती से स्थापित किया है। इसी का परिणाम है कि राज्य ’’राजकोषीय घाटे को निर्धारित सीमा के भीतर रखने में सफल’’ रहा है। इस प्रयास को राष्ट्रीय स्तर पर भी सराहना मिली है, हाल ही में जारी ’’अरुण जेटली नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फाइनेंशियल मैनेजमेंट’’ की रिपोर्ट में उत्तराखंड को ’’देश के सर्वश्रेष्ठ वित्तीय प्रबंधन वाले राज्यों’’ में स्थान दिया गया है। इसके साथ ही ’’सतत विकास लक्ष्यों’’ के राष्ट्रीय सूचकांक में भी ’’उत्तराखंड पूरे देश में शीर्ष स्थान’’ पर है।

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि जब जनता सरकार पर भरोसा करती है, और सरकार भी जनता के साथ पारदर्शी तरीके से व्यवहार करती है तो विकास की गति अपने आप कई गुना बढ़ जाती है। यही कारण है कि राज्य सरकार ने वित्तीय प्रबंधन के क्षेत्र में नवाचारों के अधिकतम प्रयोग पर बल दिया है।

मुख्यमंत्री ने सभी से अपील करते हुए कहा कि सभी लोग प्रत्येक खरीददारी पर बिल मांगकर लेनदेन की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने और राज्य के विकास में अपनी सक्रिय भागीदारी निभाने में सहयोग प्रदान करें।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रमुख सचिव आरके सुधांशु ने कहा कि योजना के तहत 90 हजार उपभोक्ताओं ने 270 करोड़ रुपए मूल्य के 6.5 लाख बिलों के साथ प्रतिभाग किया।

आयुक्त कर सोनिका ने बताया कि योजना के तहत कुल 1888 लोगों को पुरस्कार प्रदान किए गए। इसके अलावा 17 माह तक 1500 प्रति माह मासिक पुरस्कार भी प्रदान किए गए।

इस मौके पर विधायक सरिता कपूर, प्रमुख सचिव आरके सुधांशु, आयुक्त कर सोनिका, अपर आयुक्त अनिल सिंह सहित अन्य अधिकारी शामिल हुए।

पुरस्कारों का विवरण
02 ईवी कार, 16 मारुति ऑल्टो के- 10 कार, 20 ईवी स्कूटर, 50 बाइक, 100 लैपटॉप, 200 स्मार्ट टीवी, 500 टैबलेट, 1000 माइकोवेब

सीएम धामी ने प्रदेशवासियों को दी बड़ी राहत, राज्य में अगले एक वर्ष तक नहीं बढ़ेगी वाहन फिटनेस फीस

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर राज्य सरकार ने उत्तराखंड के वाहन स्वामियों को महत्वपूर्ण राहत प्रदान करते हुए पुराने (15 वर्ष) कमर्शियल वाहनों की फिटनेस फीस में वृद्धि को आगामी 21 नवम्बर 2026 तक स्थगित कर दिया है। इस संबंध में परिवहन विभाग द्वारा अधिसूचना जारी कर दी गई है। अधिसूचना सचिव परिवहन बृजेश कुमार संत द्वारा जारी की गई।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा हाल ही में 15 वर्ष पुराने कमर्शियल वाहनों की फिटनेस फीस में 10 गुना तक की वृद्धि की गई थी। प्रदेश की जनभावनाओं को देखते हुए राज्य सरकार ने यह निर्णय लिया है कि उत्तराखंड के वाहन स्वामियों पर इसका तात्कालिक बोझ नहीं डाला जाएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड सरकार आमजन के हितों को सर्वाेपरि रखते हुए ऐसे निर्णय ले रही है, जिनसे जनता पर अनावश्यक आर्थिक बोझ न पड़े। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार हमेशा जनता-जनार्दन की अपेक्षाओं के अनुरूप कार्य करती रहेगी।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि “हमारी सरकार का संकल्प जनता को राहत देना और जनहित में त्वरित निर्णय लेना है। हाल ही में केंद्र सरकार द्वारा कमर्शियल वाहनों की फिटनेस फीस में की गई वृद्धि को देखते हुए हमने इसे उत्तराखंड में एक वर्ष के लिए स्थगित कर दिया है। इस अवधि में पूर्व निर्धारित फीस ही लागू रहेगी। हम नहीं चाहते कि प्रदेश के वाहन स्वामियों और परिवहन कारोबार से जुड़े लोगों पर अचानक अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़े। आने वाले समय में केंद्र सरकार द्वारा किये जाने वाले पुनरीक्षण के अनुसार ही राज्य में नई दरें लागू की जाएंगी।”

मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि “हमारी सरकार जनता के लिए संवेदनशील है। गरीब, मध्यम वर्ग, टैक्सी व ट्रांसपोर्ट व्यवसाय से जुड़े हजारों लोगों का हित सुरक्षित रखना हमारी प्राथमिकता है। जनहित के निर्णयों में हम किसी भी प्रकार की देरी नहीं होने देंगे।”

उत्तराखंड में संविधान दिवस पर सभी शिक्षण संस्थानों में सामूहिक वंदे मातरम गायन का आयोजन

‘संविधान दिवस’ के अवसर पर प्रदेश के सभी राजकीय एवं निजी शिक्षण संस्थानों में राष्ट्र गीत ‘वन्दे मातरम्’ का सामुहिक गायन किया जायेगा। जिसमें 20 लाख से अधिक छात्र-छात्राएं प्रतिभाग करेंगे। शिक्षण संस्थानों में आयोजित होने वाले सामुहिक गायन कार्यक्रम में प्रदेश के राज्यपाल व मुख्यमंत्री सहित सभी महानुभाव व जनप्रतिनिधि भी उपस्थित रहेंगे। कार्यक्रम के सफल संचालन को लेकर सम्बंधित विभागों के विभागीय अधिकारियों को निर्देश दे दिये गये हैं।

सूबे विद्यालयी शिक्षा मंत्री डाॅ. धन सिंह रावत ने आज सचिवालय स्थित एफआरडीसी सभागार में विद्यालयी शिक्षा, उच्च शिक्षा, संस्कृत शिक्षा एवं चिकित्सा शिक्षा विभागों की संयुक्त समीक्षा बैठक ली। जिसमें उन्होंने विभागीय अधिकारियों को प्रदेशभर समस्त राजकीय एवं निजी शिक्षण संस्थानों, तकनीकी संस्थानों, चिकित्सा शिक्षा संस्थानों, व्यावसायिक पाठ्यक्रम संचालित करने वाले संस्थानों सहित प्रशिक्षण संस्थानों में आगामी 26 नवम्बर को ‘संविधान दिवस’ को वृहद स्तर पर मनाने के निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि इस महत्पूर्ण अवसर पर 20 लाख से अधिक छात्र-छात्राएं, एनएसएस, स्काउट्स एंड गाइड व एनसीसी गाइड प्रातः 9ः30 बजे एक साथ राष्ट्र गीत ‘वन्दे मातरम्’ का सामुहिक गायन करेंगे। डाॅ. रावत ने कहा कि प्राथमिक विद्यालयों से लेकर महाविद्यालयों में आयोजित होने वाले सामुहिक गायन कार्यक्रम में प्रदेश के राज्यपाल व मुख्यमंत्री भी प्रतिभाग करेंगे। इसके अलावा उक्त कार्यक्रम में स्वाधीनता सेनानी पद्मश्री सम्मान से सम्मानित गणमान्य व्यक्तियों सहित जिलों के प्रभारी मंत्रियों, सांसदों, विधायकों, सरकार में दर्जा राज्य मंत्रियों, नगर निगमों के महापौरों, जिला पंचायत अध्यक्षों, नगर निकायों के अध्यक्षों, ब्लाॅक प्रमुखों, जिला पंचायत व क्षेत्र पंचायत सदस्यों, ग्राम प्रधानों सहित स्थानीय जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति सुनिश्चित करने के निर्देश विभागीय अधिकारियों को दिये गये हैं। इसके अतिरिक्त डाॅ. रावत ने विभागीय अधिकारियों को ‘वन्दे मातरम्’ के सामुहिक गायन कार्यक्रम की वीडियो रिकार्डिंग के साथ ही फोटोग्राफी अनिवार्य रूप से करने के निर्देश दिये, जिनको जियोटैग भी किया जायेगा। उन्होंने आयोजन संबंधी उत्कृष्ट वीडियो, फोटो व विशिष्ट उपलब्धि को www.vandemataram150.in वेबसाइट व अन्य सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर अपलोड़ करने के निर्देश भी अधिकारियों को दिये। कार्यक्रम के सफल संचालन के लिये उन्होंने सम्बंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों को ब्लाॅक व जिला स्तर पर नोडल अधिकारियों की नियुक्ति कर आवश्यक समन्वय स्थापित के निर्देश भी बैठक में दिये। उन्होंने कहा कि इस कार्यक्रम का मकसद युवा पीढ़ी में भारतीय संविधान व राष्ट्रगीत के प्रति सम्मान और राष्ट्रभावना को मजबूत करना है, साथ ही राष्ट्रप्रेम, राष्ट्रभक्ति, राष्ट्रीय प्रतिबद्धता व राष्ट्रीय एकता की भावना को भी विकसित करना है।

बैठक में सचिव उच्च एवं तकनीकी शिक्षा डाॅ. रणजीत सिन्हा, सचिव संस्कृत शिक्षा दीपक गैरोला, संयुक्त सचिव उच्च शिक्षा विक्रम यादव, निदेशक उच्च शिक्षा वी.एन. खाली, निदेशक चिकित्सा शिक्षा डाॅ. अजय आर्य, निदेशक माध्यमिक शिक्षा डाॅ. मुकुल कुमार सती, निदेशक प्राथमिक शिक्षा अजय कुमार नौडियाल, निदेशक संस्कृत शिक्षा कंचन देवराड़ी सहित अन्य विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।