सीएस की अध्यक्षता में पीएम के संबोधन में दिए गए सुझावों पर आवश्यक कार्रवाई को विचार विमर्श हुआ

मुख्य सचिव आनंद बर्धन की अध्यक्षता में सचिवालय सभागार में 25 वें उत्तराखंड राज्य स्थापना दिवस के शुभ अवसर पर आयोजित रजत जयंती समारोह में प्रधानमंत्री के संबोधन में सुझाए गए प्रमुख बिंदुओं पर आवश्यक कार्रवाई हेतु विचार- विमर्श किया गया।

विचार-विमर्श में सभी अधिकारियों से अगले 25 वर्षों में उत्तराखंड के लक्ष्यों और उसके अनुरूप रोडमैप बनाने तथा रजत जयंती व उसके उपलक्ष्य में नवंबर माह में आयोजित किए गए विभिन्न आयोजनों व कार्यक्रमों यथा प्रवासी सम्मेलन, युवा सम्मेलन, सांस्कृतिक उत्सव, राष्ट्रपति व प्रधानमंत्री के आगमन इत्यादि में सामने आए अनुभव, फीडबैक और सुझावों को साझा किया गया।

मुख्य सचिव ने सभी अधिकारियों को उक्त अवधि के सुझावों, प्रयासों और अनुभवों का डॉक्यूमेंटेशन तैयार करने के निर्देश दिए।

उन्होंने सचिव प्रोटोकॉल को उक्त सभी सुझावों को कंपाइल करते हुए उसकी सूची तैयार करने को निर्देशित किया।

मुख्य सचिव ने निर्देशित किया कि प्रधानमंत्री द्वारा राज्य के सर्वांगीण विकास से संबंधित जो भी बिंदु सुझाए हैं उनका भी डॉक्यूमेंटेशन करें ताकि राज्य के समेकित विकास एवं नीति निर्माण में उन बिंदुओं को शामिल किया जा सके।

ज्ञातव्य है कि प्रधानमंत्री ने उत्तराखंड के समेकित विकास के लिए महत्वपूर्ण बिंदु सुझाए।

प्रधानमंत्री द्वारा उत्तराखंड को स्पिरिचुअल कैपिटल ऑफ द वर्ल्ड के रूप में स्थापित करते हुए उसे ग्लोबल नेटवर्क से जोड़ने, उत्तराखंड की प्रत्येक विधानसभा में योग केंद्र, आयुर्वेदिक केंद्र, नेचुरोपैथी संस्थान, होमस्टे इत्यादि से युक्त एक कंप्लीट पैकेज तैयार करने, हर वाइब्रेंट विलेज खुद में एक छोटा पर्यटन केंद्र बन सके इसके लिए होम स्टे, स्थानीय भोजन और संस्कृति को बढ़ावा मिले ऐसे प्रयास करने को कहा।

प्रधानमंत्री ने उत्तराखंड के स्थानीय मेलों और पर्वों को वर्ल्ड मैप पर लाने के लिए वन डिस्ट्रिक्ट, वन मेला जैसा अभियान चलाने को कहा। उन्होंने राज्य के पहाड़ी जनपदों को हार्टिकल्चर सेंटर बनाने पर फोकस करने, ब्लू बेरी, कीवी, हर्बल मेडिसिन प्लांट जैसी भविष्य की खेती तथा फूड प्रोसेसिंग, हस्तशिल्प, ऑर्गेनिक प्रोडक्ट इन सबके लिए एमएसएमईएस को नए सिरे से सशक्त बनाने पर बल देने को कहा।

प्रधानमंत्री ने तीर्थाटन, बारहमासी पर्यटन, ईको टूरिज्म, एडवेंचर टूरिज्म की संभावनाओं को और व्यापक और प्रबंधनीय तरीके से संपादित करने, राज्य को वेडिंग डेस्टिनेशन के रूप में कन्वर्ट करने के लिए पांच से सात बड़े डेस्टिनेशन तैयार करके उन्हें विकसित करने की बात कही। उन्होंने उत्तराखंड के जीआई टैग प्राप्त कृषि उत्पादों तथा प्रोडक्ट को देश के घर-घर पहुंचाने का भी आह्वान किया।

प्रधानमंत्री ने हाउस ऑफ हिमालयाज ब्रांड के तहत ग्लोबल मार्किट में उत्पादों को प्रतिस्पर्धा बनाने तथा उनके डिलीवरी मैकेनिज्म पर बेहतर तरीके से कार्य करने को भी कहा।

इस अवसर पर बैठक में प्रमुख सचिव आर के सुधांशु, एल एल फैनई व आर मीनाक्षी सुंदरम, विशेष प्रमुख सचिव रंजीत सिन्हा सहित विभिन्न सचिव व अपर सचिव उपस्थित थे।

सीएम धामी ने पीएम के सुझावों पर कार्ययोजना तैयार करने के दिए निर्देश

उत्तराखण्ड राज्य स्थापना के रजत जयंती समारोह में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा दिए गए सुझावों को राज्य सरकार ने आगामी 25 वर्षों के विकास रोडमैप की आधारशिला मानते हुए, उन पर प्रक्रिया प्रारंभ कर दी है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने संबंधित विभागों के अधिकारियों को प्रधानमंत्री के सुझावों के अनुरूप ठोस कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा दिए गए विचार उत्तराखण्ड के सर्वांगीण विकास का स्पष्ट मार्गदर्शन करते हैं। उन्होंने कहा कि राज्य की आत्मा अध्यात्म, पर्यटन और प्राकृतिक संपदा में निहित है, उत्तराखण्ड को “स्पिरिचुअल कैपिटल ऑफ द वर्ल्ड” बनाया जा सकता है।

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि राज्य के प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में योग केंद्र, आयुर्वेद केंद्र, नेचुरोपैथी संस्थान और होम-स्टे को मिलाकर एक संपूर्ण पर्यटन एवं वेलनेस पैकेज तैयार किया जाए।

प्रत्येक वाइब्रेंट विलेज को छोटे पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित किया जाए, जहाँ स्थानीय भोजन, संस्कृति और हस्तशिल्प को बढ़ावा दिया जा सके।

राज्य के स्थानीय मेलों और पर्वों को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने के लिए “वन डिस्ट्रिक्ट वन फेस्टिवल” अभियान शुरू किया जाए।

पहाड़ी जिलों को हॉर्टिकल्चर हब के रूप में विकसित किया जाए, जहाँ ब्लूबेरी, कीवी, हर्बल और औषधीय पौधों की खेती को प्रोत्साहित किया जाए।

फूड प्रोसेसिंग, हस्तशिल्प और ऑर्गेनिक उत्पादों से जुड़े एमएसएमई को सशक्त बनाकर स्थानीय रोजगार के नए अवसर सृजित किए जाएं।

तीर्थाटन, इको-टूरिज्म, एडवेंचर टूरिज्म और बारहमासी पर्यटन को समेकित विकास नीति के तहत आगे बढ़ाया जाए। उत्तराखण्ड को वेडिंग डेस्टिनेशन के रूप में विश्व स्तर पर स्थापित करने हेतु 5-7 प्रमुख स्थलों को विकसित करने की रूपरेखा बनाई जाए।

जीआई टैग प्राप्त उत्पादों और “हाउस ऑफ हिमालयाज” ब्रांड के तहत राज्य के उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुँचाने की ठोस रणनीति बनाई जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री का विज़न 2047 के ‘विकसित भारत’ के अनुरूप है, और उत्तराखण्ड इस दिशा में अग्रणी राज्य बनने की क्षमता रखता है। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि सभी विभाग आपसी समन्वय से विस्तृत रोडमैप और टाइमलाइन आधारित एक्शन प्लान तैयार करें, ताकि इन सुझावों को धरातल पर उतारा जा सके।

सीएम धामी ने 13 जिलों के उत्कृष्ट होम स्टे संचालकों को पुरस्कृत किया

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोमवार को हिमालयन सांस्कृतिक केन्द्र, गढ़ी कैण्ट, देहरादून में पर्यटन विभाग द्वारा आयोजित उत्तराखण्ड @25 रोमांच, अध्यात्म और अनोखी संस्कृति का उत्सव कार्यक्रम में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने नीति में आयोजित होने वाले अल्ट्रा मैराथन रेस के लोगो का अनावरण एवं पर्यटन विभाग द्वारा तैयार की गई थ्रोन आफ द गॉड्स कॉफी टेबल बुक का विमोचन किया।

मुख्यमंत्री ने फोटो प्रदर्शनी प्रतियोगिता के विजेताओं को पुरस्कार प्रदान कर उन्हें सम्मानित किया। उन्होंने 13 जिलों के उत्कृष्ट होम स्टे संचालकों को भी पुरस्कार वितरित किए। उन्होंने राज्यभर के एस्ट्रो टूर गाइड एवं टूर मैनेजर को सम्मानित किया। मुख्यमंत्री ने काला नाग चोटी का सफल आरोहण करने वाले पर्यटन विभाग की ओर से चयनित पर्वतारोहियों और आईटीबीपी के 13 सदस्यीय दल को भी सम्मानित किया।

मुख्यमंत्री ने सभी विभागों, अधिकारियों, कर्मचारियों का धन्यवाद करते हुए कहा कि सभी लोगों की कड़ी मेहनत से प्रदेशभर में रजत जयंती पर्व के सभी कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हुए। उन्होंने कहा 25 वर्ष पूर्व राज्य निर्माण के बाद इस नवोदित राज्य ने तेजी से उन्नति की है। यह तरक्की आंदोलनकारियों की तपस्या का परिणाम है।

मुख्यमंत्री ने कहा राज्य सरकार, प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में प्रदेश के सर्वांगीण विकास के लिए कार्य कर रही है। राज्य में पर्यटन, शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल औऱ कनेक्टिविटी सहित सभी प्रमुख क्षेत्रों में इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत किया जा रहा है। उन्होंने कहा जहाँ कभी सड़कें बनना मुश्किल था, आज उस स्थान पर ऑल-वेदर रोड का निर्माण किया जा रहा है। जहाँ कभी संचार एक सपना हुआ करता था, वहाँ अब डिजिटल उत्तराखंड आकार ले रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा गांव घरों में स्टार्टअप्स और स्वरोजगार के काम प्रारंभ किए जा रहे हैं। प्रदेश में पर्यटन विभाग की अनेक योजनाओं से लोगों को आगे बढ़ाया जा रहा है। वीर चंद्र सिंह गढ़वाली पर्यटन स्वरोजगार योजना और दीनदयाल उपाध्याय गृह आवास (होमस्टे) योजना से हजारों युवाओं को आत्मनिर्भर बनने में सहायता प्राप्त हुई है। पर्यटन एवं आतिथ्य कौशल विकास कार्यक्रमों के माध्यम से 8,000 से अधिक युवक-युवतियों को प्रशिक्षित प्रदान किया गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा टूर गाइड, नैचुरलिस्ट, टूर मैनेजर, स्ट्रीट फूड वेंडर जैसे क्षेत्रों में प्रशिक्षण से युवाओं को रोजगार के अवसर मिल रहे हैं। नई पर्यटन नीति बनने के बाद राज्य में 207 से अधिक निवेशकों की ₹ 5,500 करोड़ से अधिक की परियोजनाएँ प्रगति पर हैं। शीतकालीन पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए शीतकालीन चारधाम यात्रा और उच्च हिमालयी क्षेत्रों, जादूंग, दारमा घाटी, पंचाचुली बेस कैम्प में भी गतिविधियाँ प्रारंभ की गई हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा उत्तराखंड, तीर्थाटन के साथ एडवेंचर टूरिज्म का भी केंद्र बन रहा है। चमोली से टिहरी झील तक, मसूरी से मुनस्यारी तक, प्रत्येक घाटी में रोमांच का नया संसार बस रहा है। पैराग्लाइडिंग, ट्रेकिंग, रिवर राफ्टिंग, माउंटेन बाइकिंग जैसे रोमांचक खेलों को बढ़ावा देकर युवाओं के लिए साहसिक खेलों के क्षेत्र में नए अवसर खोले गए हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि एस्ट्रो टूरिज्म, वेड-इन-उत्तराखंड और स्पिरिचुअल डेस्टिनेशन डेवलपमेंट राज्य के पर्यटन को नई दिशा दे रही हैं। उन्होंने कहा रविवार को प्रधानमंत्री ने कहा उत्तराखंड की शक्ति इसकी आध्यात्मिक शक्ति है। केदारनाथ, बदरीनाथ, गंगोत्री, यमुनोत्री, हरिद्वार, ऋषिकेश आदि धार्मिक स्थान उत्तराखंड के साथ भारत की आस्था और ऊर्जा के भी केंद्र भी हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा राज्य में एक जनपद, दो उत्पाद योजना, हाउस ऑफ हिमालयाज ब्रांड, स्टेट मिलेट मिशन, फार्म मशीनरी बैंक, एप्पल मिशन, नई पर्यटन नीति, नई फिल्म नीति, होम स्टे, वेड इन उत्तराखंड और सौर स्वरोजगार योजना जैसी पहलों के माध्यम से प्रदेश की स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल रही है। बीते साढ़े चार वर्षों में प्रदेश ने कई उल्लेखनीय उपलब्धियाँ हासिल की हैं, जिनकी गूंज आज पूरे देश में सुनाई दे रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा पर्यटन के क्षेत्र में राज्य में हो रही निरंतर प्रगति को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सराहा गया है। वर्ष 2023 और 2024 में जखोल, हर्षिल, सुपी और गुंजी जैसे गाँवों को सर्वश्रेष्ठ पर्यटन ग्राम के रूप में चयनित किया गया। वर्ष 2024-25 में इंटरनेशनल सेंटर फॉर रिस्पांसिबल टूरिज्म द्वारा, स्किल डेवलपमेंट इन रिस्पांसिबल टूरिज्म श्रेणी में उत्तराखंड को विशेष सम्मान प्राप्त किया गया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने के लिए उत्तराखंड को आगामी 25 वर्षों का रोडमैप तय करना होगा। मुख्यमंत्री ने कहा हर उत्तराखंडी अपने-अपने क्षेत्र में पूरी निष्ठा, समर्पण और ईमानदारी के साथ योगदान देगा तो उत्तराखंड को एक विकसित, आत्मनिर्भर और समृद्ध राज्य अवश्य बनेगा।

जनपद स्तर पर सर्वश्रेष्ठ होमस्टे में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले अल्मोड़ा जिले से हरेंद्र सिंह बिष्ट, बागेश्वर से मोहन चंद्र कांडपाल, चमोली से सरिता देवी, देहरादून से नीलम चौहान, हरिद्वार से सुनीता सिंह, चंपावत से नीरज जोशी, रुद्रप्रयाग से कैलाश पुष्पवाण, पौड़ी से त्रिभुवन उनियाल, पिथौरागढ़ से मथुरा दत्त कालोनी, नैनीताल से उमंग वासुदेव, टिहरी से जितेंद्र सिंह, उत्तरकाशी से अखिल पंत, उधम सिंह नगर से दीपक चतुर्वेदी हैं।

इस अवसर विधायक खजान दास सविता कपूर, बीकेटीसी के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी, सचिव धीराज सिंह गर्ब्याल, अपर सचिव अभिषेक रुहेला एवं अन्य लोग मौजूद रहे।

पिथौरागढ़ के नैनी सैनी हवाई अड्डे के अधिग्रहण को एमओयू पीएम की मौजूदगी में हुए हस्ताक्षर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिति में आज भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण और उत्तराखंड सरकार के बीच पिथौरागढ़ स्थित नैनी सैनी हवाई अड्डे के अधिग्रहण के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए। यह ऐतिहासिक समझौता उत्तराखंड के पर्वतीय अंचल में सुगम, सुरक्षित और टिकाऊ हवाई संपर्क की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

नैनी सैनी हवाई अड्डे का कुल क्षेत्रफल लगभग 70 एकड़ है। यहां का टर्मिनल भवन व्यस्त समय में 40 यात्रियों को सेवा प्रदान करने में सक्षम है। साथ ही, एप्रन एक समय में दो विमानों (कोड-2बी) को समायोजित करने की सुविधा से सुसज्जित है।

इस अधिग्रहण से हवाई अड्डे के मौजूदा बुनियादी ढांचे का उन्नयन, परिचालन मानकों का सुव्यवस्थित प्रबंधन, तथा उत्तराखंड की क्षेत्रीय कनेक्टिविटी में उल्लेखनीय सुधार होगा।
नैनी सैनी हवाई अड्डे का विकास प्रदेश की स्थानीय कला, सांस्कृतिक विरासत और पर्यटन क्षेत्र को नया प्रोत्साहन देगा। इससे व्यापार, तीर्थ पर्यटन, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और आतिथ्य क्षेत्र में नए अवसर खुलेंगे तथा स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए आयाम सृजित होंगे।

इस पहल से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सुगम्य और टिकाऊ विमानन अवसंरचना के दृष्टिकोण को बल मिलेगा और इस रणनीतिक हिमालयी क्षेत्र में आपदा-प्रतिक्रिया क्षमताओं को भी सुदृढ़ किया जा सकेगा।

यह समझौता उत्तराखंड को विकास की नई ऊँचाइयों की ओर अग्रसर करने में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर सिद्ध होगा।

उत्तराखंड रजतोत्सवः पीएम मोदी ने एफआरआई से जारी किया विशेष डाक टिकट

उत्तराखंड राज्य स्थापना की रजत जयंती समारोह के अवसर पर आज देहरादून आगमन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उत्तराखंड डाक परिमंडल द्वारा राज्य के प्रमुख तीर्थ स्थलों एवं सांस्कृतिक प्रतीकों पर आधारित विशेष डाक टिकट श्रृंखला का विमोचन किया। इस विशेष डाक टिकट श्रृंखला के माध्यम से देवभूमि उत्तराखंड की धार्मिक, सांस्कृतिक और प्राकृतिक धरोहर को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान प्रदान की गई है।

कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अंतर्गत राज्य के 28,000 से अधिक किसानों के बैंक खातों में ₹62 करोड़ से अधिक की राशि प्रत्यक्ष लाभ अंतरण के माध्यम से जारी की। इस पहल से राज्य के किसानों को प्राकृतिक आपदाओं एवं फसल क्षति से सुरक्षा का लाभ प्राप्त होगा।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ओंकारेश्वर मंदिर, उखीमठ पर आधारित एक विशेष प्रतीक चिन्ह भेंट किया।

पीएम मोदी 9 नवंबर को उत्तराखंड राज्य की रजत जयंती कार्यक्रम में करेंगे भागीदारी

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 9 नवम्बर को उत्तराखंड राज्य गठन की रजत जयंती पर एफआरआई देहरादून में आयोजित समारोह में बतौर मुख्य अतिथि भाग लेंगे। इस अवसर पर प्रधानमंत्री एक स्मारक डाक टिकट जारी करेंगे तथा समारोह में उपस्थित जनसमूह को संबोधित करेंगे।

राज्य स्थापना की 25वीं वर्षगांठ के इस अवसर पर प्रधानमंत्री ₹8260 करोड़ रुपये से अधिक की विभिन्न विकास परियोजनाओं का उद्घाटन एवं शिलान्यास करेंगे। ये परियोजनाएं पेयजल, सिंचाई, तकनीकी शिक्षा, ऊर्जा, शहरी विकास, खेल और कौशल विकास जैसे प्रमुख क्षेत्रों से संबंधित हैं।

प्रधानमंत्री जिन परियोजनाओं का उद्घाटन करेंगे, उनमें अमृत योजना के अंतर्गत देहरादून जलापूर्ति कवरेज, पिथौरागढ़ में विद्युत सबस्टेशन, सरकारी भवनों में सौर ऊर्जा संयंत्र, तथा हल्द्वानी स्टेडियम (नैनीताल) में एस्ट्रोटर्फ हॉकी मैदान प्रमुख हैं।

इसके साथ ही प्रधानमंत्री दो महत्वपूर्ण पेयजल परियोजनाओं-सोंग बांध पेयजल परियोजना (देहरादून) और जमरानी बहुउद्देशीय बांध परियोजना (नैनीताल) का शिलान्यास करेंगे। सोंग बांध परियोजना देहरादून को प्रतिदिन 150 एमएलडी पेयजल उपलब्ध कराएगी, जबकि जमरानी परियोजना सिंचाई, पेयजल आपूर्ति और बिजली उत्पादन में सहायक होगी।

इसके अतिरिक्त जिन अन्य परियोजनाओं का शिलान्यास किया जाएगा, उनमें चंपावत में महिला खेल महाविद्यालय की स्थापना, नैनीताल में अत्याधुनिक डेयरी संयंत्र, तथा विद्युत सबस्टेशन परियोजनाएं शामिल हैं।

माध्यमिक विद्यालयों के विद्यार्थियों को निःशुल्क पाठ्य पुस्तक प्रदान करने को स्वीकृत हुई 54.72 करोड की धनराशि

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सार्वजनिक उपक्रमों/निगमों/निकायों में कार्यरत संस्थाएं, जहां सातवां वेतनमान लागू है, के नियमित कार्मिकों को राजकीय कार्मिकों की भांति दिनांक 01.07.2025 से मूल वेतन में अनुमन्य महंगाई भत्ते की वर्तमान दर 55 प्रतिशत से बढ़ाकर 58 प्रतिशत किये जाने का अनुमोदन प्रदान किया है।

मुख्यमंत्री ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में राजकीय एवं अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में कक्षा 9 से 12 तक सामान्य व पिछड़ी जाति, अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के छात्र-छात्राओं को निःशुल्क पाठ्य पुस्तक प्रदान किये जाने हेतु ₹ 54.72 करोड़ की धनराशि अवमुक्त किये जाने का अनुमोदन प्रदान किया है।

मुख्यमंत्री द्वारा उच्च शिक्षा विभाग के अन्तर्गत 21 अशासकीय महाविद्यालयों में कार्यरत कार्मिकों को चालू वित्तीय वर्ष 2025-26 के अन्तिम 04 माहों के वेतन आदि के भुगतान हेतु ₹ 57.14 करोड़ की धनराशि अवमुक्त किये जाने का अनुमोदन प्रदान किया गया है।

मुख्यमंत्री ने मां नन्दा राजजात यात्रा के कार्यों/योजनाओं को स्वीकृत किये जाने हेतु राज्य योजना के अन्तर्गत जनपद चमोली के विधानसभा क्षेत्र थराली में मां नन्दा राजजात यात्रा के अन्तर्गत देवाल मुन्दोली वाण मोटर मार्ग सं० 90 में हाट मिक्स द्वारा सतह सुधार एवं सुदृढीकरण कार्य हेतु 32.69 करोड तथा विकासखण्ड थराली में ग्वालदम-नन्दकेसरी राज्य मार्ग सं0 91 का डी०बी०एम०/बी०सी० द्वारा डामरीकरण एवं सुधारीकरण कार्य हेतु 15.06 करोड़ की धनराशि स्वीकृत किये जाने का अनुमोदन प्रदान किया है।

मुख्यमंत्री ने प्रदान की विभिन्न योजनाओं के लिए 276.25 करोड की वित्तीय स्वीकृति
मुख्यमंत्री ने नाबार्ड वित्त पोषण से सम्बन्धित विभिन्न जनपदों के अन्तर्गत सिंचाई विभाग की विभिन्न 13 योजनाओं की लागत ₹ 30.54 करोड, विभिन्न जनपदों के अन्तर्गत सिंचाई विभाग की विभिन्न 16 योजनाओं की लागत ₹ 39.05 करोड, विभिन्न जनपदों के अन्तर्गत सिंचाई विभाग की विभिन्न 13 योजनाओं की लागत ₹ 25.76 करोड तथा विभिन्न जनपदों के अन्तर्गत लोक निर्माण विभाग की विभिन्न 31 परियोजनाओं की लागत 175.61 करोड़ की योजना (नाबार्ड वित्त पोषण हेतु) स्वीकृत किये जाने का अनुमोदन प्रदान किया है।

मुख्यमंत्री ने राज्य योजना के अन्तर्गत जनपद चंपावत के विधान सभा क्षेत्र चंपावत में पोथ-कोटकेन्द्री-सेलागड मोटर मार्ग के क्षीणा नामक स्थान से सिद्धबाबा मंदिर होते हुए मंगोटी तक मोटर मार्ग के नव निर्माण कार्य हेतु 20 लाख, जनपद नैनीताल की विधानसभा क्षेत्र नैनीताल में राज्य योजना के अन्तर्गत गर्जिया (घुघुतियाधार) बेतालघाट-खैरना-सुयालबाडी-ओडाखान-पसियापानी-भटूलिया-मुक्तेश्वर मोटर मार्ग (राज्य मार्ग सं० 62) के कि०मी० 58 है०मी० 4-6 में पूर्व निर्मित क्लास बी लोडिंग सेतु के स्थान पर क्लास ए लोडिंग (डबल लेन) सेतु के प्रथम चरण के निर्माण कार्य हेतु ₹ 3.26 लाख, मानसखण्ड (राज्य योजना) के अन्तर्गत जनपद बागेश्वर के विधानसभा क्षेत्र बागेश्वर में कोसी-हवालबाग-मनान-सोमेश्वर-कौसानी-गरुड़-बैजनाथ मोटर मार्ग के बागेश्वर भूभाग का 1.50 लेन मार्ग का सुधारीकरण कार्य हेतु ₹ 4.34 करोड़, जनपद पिथौरागढ में रालम से रालम ग्लेशियर ट्रैक रूट का निर्माण किये जाने हेतु 38.76 लाख तथा जनपद चम्पावत में तामली मोटर मार्ग से राजकीय इण्टर कालेज मंच में स्थायी हैलीपैड तथा सड़क के निर्माण हेतु 33.04 लाख की धनराशि स्वीकृत किये जाने का अनुमोदन प्रदान किया है।

उत्तराखंड रजतोत्सव वर्षः देशभर के संतों ने धामी सरकार के विकास कार्यो व सांस्कृतिक संरक्षण की सराहना की

उत्तराखंड की रजत जयंती वर्ष के अवसर पर आज मुख्यमंत्री आवास आध्यात्मिक ऊर्जा और सांस्कृतिक सौहार्द का केंद्र बन गया, जब देशभर के प्रमुख संतों एवं धर्माचार्यों ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से भेंट कर राज्य की प्रगति, सांस्कृतिक संरक्षण और अध्यात्मिक समृद्धि के प्रति उनके प्रयासों की सराहना की।

संत समाज ने प्रदेश के लिए सकारात्मक बदलाव, विरासत संरक्षण और धार्मिक-सांस्कृतिक मानकों को सुदृढ़ करने वाले निर्णयों की प्रशंसा करते हुए मुख्यमंत्री को आशीर्वाद प्रदान किया और उन्हें “देवभूमि का धर्म-संरक्षक” बताया। संतों ने कहा कि मुख्यमंत्री धामी के नेतृत्व में उत्तराखंड आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और विकास की नई ऊँचाइयों की ओर अग्रसर है।


मुख्यमंत्री आवास में आध्यात्मिक संगम में आचार्य महामंडलेश्वर कैलाशानंद गिरी महाराज, जूनापीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि, परमार्थ निकेतन ऋषिकेश के अध्यक्ष पूज्य स्वामी चिदानंद सरस्वती, अखाड़ा परिषद अध्यक्ष स्वामी रविंद्रपुरी महाराज, बागेश्वर धाम पीठाधीश्वर पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री, पतंजलि योगपीठ के आचार्य बालकृष्ण, प्रसिद्ध आध्यात्मिक वक्ता जया किशोरी, चिंतक और लेखक डॉ. कुमार विश्वास सहित अनेकों प्रतिष्ठित संत-महात्मा एवं धर्माचार्य भेंट करने वाले प्रमुख संत-महात्माओं में शामिल रहे।

सभी संतों ने मुख्यमंत्री को रजत जयंती वर्ष की शुभकामनाएँ देते हुए राज्य के सांस्कृतिक सम्मान और अध्यात्मिक धरोहर संरक्षण को लेकर उनके समर्पण की सराहना की।

संत समाज ने की सीएम धामी की प्रशंसा
संतों ने कहा कि “मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उत्तराखंड की सांस्कृतिक पहचान, आध्यात्मिक परंपरा और सामाजिक समरसता को मजबूत करने वाला नेतृत्व प्रदान किया है। उनके प्रयासों से देवभूमि की मूल आत्मा और सनातन विरासत सुरक्षित और सुदृढ़ हुई है।”

उन्होंने राज्य सरकार की उन नीतियों की भी सराहना की जिनसे सामाजिक-सांस्कृतिक अनुशासन, धार्मिक स्थलों का संरक्षण, आध्यात्मिक पर्यटन विकास तथा परंपरा-संरक्षण को नया आयाम मिला है।

कुम्भ-2027 को भव्य, दिव्य और विश्व-स्तरीय आयोजन के रूप में स्थापित करने के लिए संत समाज तथा सरकार मिलकर कार्य करेंगे
संत समाज ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को आशीर्वाद देते हुए कहा कि हरिद्वार कुम्भ-2027 को भव्य, दिव्य और विश्व-स्तरीय आयोजन के रूप में स्थापित करने के लिए वे सरकार के साथ कंधे-से-कंधा मिलाकर कार्य करेंगे। संतों ने कहा कि कुम्भ केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि सनातन परंपरा, भारतीय संस्कृति और वैश्विक आध्यात्मिक चेतना का महासंगम है, जिसे ऐतिहासिक स्वरूप देना हम सबकी सामूहिक ज़िम्मेदारी है।


संतों ने यह भी कहा कि कुम्भ की तैयारी के लिए राज्य सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयास सराहनीय हैं। यातायात, अधोसंरचना, घाटों का सौंदर्यीकरण, सुरक्षा व्यवस्थाएँ, स्वच्छता और तीर्थ विकास जैसे क्षेत्रों में जो योजनाएँ बन रही हैं, वे आने वाले वर्षों में हरिद्वार को विश्व आध्यात्मिक धरोहर केंद्र के रूप में और अधिक प्रतिष्ठित करेंगी।

उन्होंने मुख्यमंत्री धामी के नेतृत्व की प्रशंसा करते हुए कहा कि
“देवभूमि उत्तराखंड को कुम्भ-2027 में एक नए आयाम तक पहुँचाने की जो दूरदृष्टि मुख्यमंत्री ने प्रस्तुत की है, वह प्रेरणादायक है। सरकार द्वारा किए जा रहे त्वरित निर्णय, पारदर्शिता और धार्मिक परंपराओं के प्रति सम्मान से हमें पूर्ण विश्वास है कि यह कुम्भ इतिहास में अपना स्वर्णिम अध्याय लिखेगा।”

संत समाज ने आश्वस्त किया कि
“हम सभी संत-महात्मा, अखाड़े और धर्म संस्थान एक परिवार की तरह एकजुट होकर कुम्भ की सफलता के लिए निरंतर योगदान देंगे। कुम्भ के आयोजन में चाहे आध्यात्मिक मार्गदर्शन हो या जन-आस्था का प्रबंधन, हर मोर्चे पर हमारा सहयोग निरंतर रहेगा।”

सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक विकास का केंद्र बन रहा उत्तराखंड
संत समाज ने यह भी कहा कि उत्तराखंड आज तेजी से वैश्विक आध्यात्मिक केंद्र और शांति-स्थल के रूप में उभर रहा है, जिसका श्रेय राज्य सरकार की सांस्कृतिक दृष्टि और दूरदर्शी नेतृत्व को है।

कार्यक्रम में उपस्थित सभी संतों और आध्यात्मिक गुरुओं ने प्रदेश वासियों के लिए मंगलकामनाएं व्यक्त कीं और उत्तराखंड की रजत जयंती को आध्यात्मिक रूप से ऐतिहासिक बनाने के लिए मुख्यमंत्री को आशीर्वाद दिया।

उत्तराखंड रजत जयंती पर सीएम ने विधानसभा विशेष सत्र में दिया ऐतिहासिक संबोधन

उत्तराखंड राज्य स्थापना की रजत जयंती के अवसर पर विधानसभा के विशेष सत्र में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने विस्तृत और ऐतिहासिक संबोधन में राज्य की 25 वर्ष की विकास यात्रा, उपलब्धियों और आगामी संकल्पों का विस्तार से उल्लेख किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड राज्य की स्थापना कोई आकस्मिक घटना नहीं थी, बल्कि यह वर्षों के लंबे संघर्ष, असीम त्याग और हजारों आंदोलनकारियों के बलिदान का परिणाम है। उन्होंने राज्य निर्माण में अपने प्राणों की आहुति देने वाले सभी हुतात्माओं, आंदोलनकारियों और पूर्व प्रधानमंत्रियों, मुख्यमंत्रियों तथा जनप्रतिनिधियों को श्रद्धापूर्वक नमन किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के दूरदर्शी नेतृत्व में उत्तराखंड आज विभिन्न क्षेत्रों में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल है। राज्य की अर्थव्यवस्था का आकार 26 गुना और प्रति व्यक्ति आय में 18 गुना वृद्धि हुई है। नीति आयोग के सतत विकास लक्ष्य सूचकांक में उत्तराखंड को देश में प्रथम स्थान प्राप्त हुआ है, जबकि किसानों की आय वृद्धि दर में भी राज्य ने राष्ट्रीय स्तर पर शीर्ष स्थान हासिल किया है।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा पिछले वर्षों में 30 से अधिक नई नीतियाँ लागू की गई हैं जिनसे उद्योग, पर्यटन, कृषि, शिक्षा, स्वास्थ्य और महिला सशक्तिकरण जैसे क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में 3.56 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश समझौते हुए, जिनमें से 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक के प्रस्ताव धरातल पर उतारे जा चुके हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने समान नागरिक संहिता (न्ब्ब्) कानून लागू कर समानता, न्याय और महिला सशक्तिकरण की दिशा में ऐतिहासिक कदम उठाया है। साथ ही, राज्य में भू-कानून, धर्मांतरण विरोधी कानून, दंगारोधी कानून और नकल विरोधी कानून जैसे कड़े कदम उठाकर पारदर्शी व जवाबदेह शासन की मिसाल पेश की गई है।

उन्होंने बताया कि राज्य में 26 हजार से अधिक युवाओं को पारदर्शी प्रक्रिया के माध्यम से सरकारी नौकरियों में अवसर दिए गए हैं, जबकि 1 लाख 65 हजार से अधिक महिलाएं “लखपति दीदी” बन चुकी हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य आंदोलनकारियों के सम्मान के लिए आरक्षण, पेंशन और पहचान पत्र जैसी व्यवस्थाओं को सशक्त बनाया गया है।

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड “विकसित भारत के लिए विकसित उत्तराखंड” के संकल्प के साथ प्रधानमंत्री मोदी जी के “2047 तक विकसित राष्ट्र” के लक्ष्य की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि प्रदेश की सवा करोड़ जनता के सहयोग से उत्तराखंड आने वाले वर्षों में देश का श्रेष्ठ राज्य बनेगा।
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन के अंत में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के गीत की प्रेरक पंक्तियों के साथ अपनी बात समाप्त की-
“पतवार चलाते जाएंगे, मंज़िल आएगी… आएगी।”

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने उत्तराखंड रजतोत्सव के क्रम में विधानसभा के विशेष सत्र में संबोधन दिया

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने उत्तराखंड राज्य स्थापना, रजतोत्सव के अवसर पर आयोजित, उत्तराखंड विधानसभा के विशेष सत्र को संबोधित किया।

राष्ट्रपति ने इस ऐतिहासिक अवसर के लिए उत्तराखंड विधान सभा के पूर्व और वर्तमान सदस्यों तथा सभी राज्यवासियों को बधाई देते हुए कहा कि, अटल बिहारी वाजपेयी के प्रधानमंत्री कार्यकाल में, यहां के जनमानस की आकांक्षा के अनुरूप, बेहतर प्रशासन और संतुलित विकास की दृष्टि से, नवंबर, 2000 में इस राज्य की स्थापना की गई। विगत पचीस वर्षों की यात्रा के दौरान उत्तराखंड के लोगों ने विकास के प्रभावशाली लक्ष्य हासिल किए हैं। पर्यावरण, ऊर्जा, पर्यटन, स्वास्थ्य-सेवा और शिक्षा के क्षेत्रों में राज्य ने सराहनीय प्रगति की है। इसी तरह डिजिटल और फिजिकल कनेक्टिविटी तथा इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलमेंट के क्षेत्रों में भी विकास हुआ है।

राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि विकास के समग्र प्रयासों के बल पर राज्य में मानव विकास सूचकांक के मानकों पर सुधार हुआ है। राज्य में साक्षरता बढ़ी है, महिलाओं की शिक्षा में विस्तार हुआ है, मातृ एवं शिशु-मृत्यु-दर में कमी आई है, राज्य में स्वास्थ्य- सेवाओं को सुलभ बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं।

राष्ट्रपति ने राज्य में महिला सशक्तिकरण की दिशा में किए जा रहे प्रयासों की विशेष सराहना करते हुए कहा कि, इससे राज्य में सुशीला बलूनी, बछेन्द्री पाल, गौरा देवी, राधा भट्ट और वंदना कटारिया जैसी असाधारण महिलाओं की गौरवशाली परंपरा आगे बढ़ेगी। इसी तरह श्रीमती ऋतु खंडूरी भूषण को राज्य की पहली महिला विधान सभा अध्यक्ष नियुक्त करके उत्तराखंड विधान सभा ने अपना गौरव बढ़ाया है। उन्होंने कहा वे सभी हितधारकों के सक्रिय प्रयास से उत्तराखंड विधान सभा में महिलाओं की संख्या में बढ़ोत्तरी होते देखना चाहेंगी।

राष्ट्रपति ने अपने संबोधन में कहा कि उत्तराखंड की इस देव-भूमि से अध्यात्म और शौर्य की परम्पराएं प्रवाहित होती रही हैं। कुमांऊ रेजीमेंट और गढ़वाल रेजीमेंट के नाम से ही यहां की शौर्य परंपरा का परिचय मिलता है। यहां के युवाओं में भारतीय सेना के जरिए मातृ-भूमि की रक्षा करने के प्रति उत्साह दिखाई देता है। उत्तराखंड की यह शौर्य परंपरा सभी देशवासियों के लिए गर्व की बात है। उन्होंने कहा कि भारत की लोकतांत्रिक परंपरा को शक्ति प्रदान करने में भी उत्तराखंड के अनेक जन-सेवकों ने महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

राष्ट्रपति ने कहा कि हमारे संविधान निर्माताओं ने ’नागरिकों के लिए एक समान सिविल संहिता’ के निर्माण के लिए संविधान के अनुच्छेद 44 के तहत प्रावधान किया था। संविधान निर्माताओं की इसी भावना के अनुरूप अब उत्तराखंड विधानसभा ने समान नागरिक संहिता विधेयक लागू कर दिया है, जिसकी वो सराहना करती हैं। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड विधान सभा में 550 से अधिक विधेयक पारित किए गए हैं। उन विधेयकों में उत्तराखंड लोकायुक्त विधेयक, उत्तराखंड जमींदारी विनाश एवं भूमि व्यवस्था विधेयक तथा नकल विरोधी विधेयक शामिल हैं। इससे पारदर्शिता, नैतिकता और सामाजिक न्याय की भावना मजबूत हुई है।

राष्ट्रपति ने कहा कि विधान सभाएं हमारी संसदीय प्रणाली का प्रमुख स्तम्भ हैं। बाबासाहब अंबेडकर ने कहा था कि संविधान निर्माताओं ने संसदीय प्रणाली को अपनाकर निरंतर उत्तरदायित्व को अधिक महत्व दिया था। जनता के प्रति निरंतर उत्तरदाई बने रहना संसदीय प्रणाली की शक्ति भी है और चुनौती भी। विधायक-गण, जनता और शासन के बीच की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी हैं। जमीनी स्तर पर क्षेत्र की जनता से जुड़कर उनकी सेवा करने का अवसर मिलना बड़े सौभाग्य की बात है।

राष्ट्रपति ने अपना अनुभव साझा करते हुए कहा कि एक विधायक के रूप उन्हें भी नौ वर्ष जन-सेवा का अवसर मिला है। इसलिए वो अपने अनुभव से कह सकती हैं कि यदि विधायक सेवा-भाव से निरंतर जनता की समस्याओं के समाधान तथा उनके कल्याण में सक्रिय रहेंगे तो जनता और जन-प्रतिनिधि के बीच विश्वास का बंधन अटूट बना रहेगा। उन्होंने अपील करते हुए कहा कि विकास तथा जन-कल्याण के कार्यों को सभी लोग पूरी निष्ठा के साथ आगे बढ़ाएं। ऐसे कार्य दलगत राजनीति से ऊपर होते हैं। सबको समाज के वंचित वर्गों के कल्याण एवं विकास पर विशेष संवेदनशीलता के साथ कार्य करने की जरूरत है।

राष्ट्रपति ने कहा कि उन्हें यह जानकर प्रसन्नता हो रही है कि उत्तराखंड विधान सभा में इस वर्ष राष्ट्रीय ई-विधान एप्लीकेशन की व्यवस्था का शुभारंभ हुआ है, इसके माध्यम से दो सत्रों का संचालन किया जा चुका है। इस एप्लीकेशन के जरिये सभी विधायक-गण, संसद तथा अन्य विधान-सभाओं एवं विधान परिषदों के बेस्ट प्रैक्टिस को अपना सकते हैं।

संबोधन में अंत में राष्ट्रपति ने कहा कि उत्तराखंड में अनुपम प्राकृतिक संपदा और सौन्दर्य विद्यमान हैं। प्रकृति के इन उपहारों का संरक्षण करते हुए, राज्य को विकास के मार्ग पर आगे ले जाना है। उत्तराखंड की 25 वर्ष की विकास-यात्रा, विधायकों के योगदान से ही संभव हो पाई है। उन्होंने उम्मीद व्यक्त करते हुए कहा कि आगे भी सभी विधायक जन-आकांक्षाओं को अभिव्यक्ति देते रहेंगे।
’राष्ट्र सर्वाेपरि’ की भावना के साथ राज्य तथा देश को विकास-पथ पर तेजी से आगे ले जाने की जरूरत है। उन्होंने अपने संबोधन का समापन उत्तराखंड के सभी निवासियों को भविष्य की मंगलकामना देने के साथ की।

राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि) ने अपने अभिभाषण में प्रदेश की 25 वर्ष की विकास यात्रा को रेखांकित करते हुए कहा कि यह कालखण्ड उत्तराखण्ड के लिए आर्थिक समृद्धि, सुशासन, सामाजिक न्याय, महिला सशक्तिकरण और आधारभूत संरचना निर्माण का स्वर्णिम दौर रहा है। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड “समृद्ध एवं सशक्त उत्तराखण्ड” की दिशा में निरंतर अग्रसर है।

राज्यपाल ने राष्ट्रपति का विशेष आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके सानिध्य एवं मार्गदर्शन से प्रदेशवासियों को नई प्रेरणा मिली है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति महोदया का देवभूमि उत्तराखण्ड के प्रति स्नेह और संवेदना हम सभी के लिए गौरव का विषय है।

राज्यपाल ने अपने अभिभाषण में कहा कि इस विशेष सत्र के माध्यम से राज्य की अब तक की विकास यात्रा पर चर्चा की जाएगी और आगामी वर्षों के लिए नए विकास रोडमैप का निर्माण किया जाएगा। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह सत्र उत्तराखण्ड के उज्ज्वल भविष्य की मजबूत नींव रखेगा। उन्होंने कहा कि “विकसित उत्तराखण्ड” का अर्थ केवल आर्थिक प्रगति नहीं, बल्कि समावेशी और चहुँमुखी विकास से है, जहां “प्रकृति और प्रगति दोनों साथ चलें।” उन्होंने प्रदेश के लिए “समृद्ध गाँव, सशक्त युवा, सशक्त नारी और सुरक्षित पर्यावरण” का मंत्र दिया।

राज्यपाल ने कहा कि आने वाले 25 वर्षों में उत्तराखण्ड को आध्यात्मिकता, शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यटन, जैविक कृषि और हरित ऊर्जा के आदर्श राज्य के रूप में विकसित किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि पलायन रोकने, स्थानीय उत्पादों को वैश्विक पहचान देने और पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक तकनीक से जोड़ने की दिशा में ठोस कदम उठाए जा रहे हैं।

उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सामूहिक प्रयासों से उत्तराखण्ड “विकसित भारत 2047” के लक्ष्य में अग्रणी भूमिका निभाएगा। उन्होंने सभी जनप्रतिनिधियों से आग्रह किया कि वे एकजुट होकर प्रदेश के हर नागरिक के जीवन में समृद्धि और सम्मान सुनिश्चित करें।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने स्वागत भाषण में कहा कि उत्तराखंड राज्य स्थापना के रजतोत्सव पर आयोजित इस विशेष सत्र में माननीय राष्ट्रपति का मार्गदर्शन हम सबको प्राप्त हो रहा है। इसके लिए उन्होंने राष्ट्रपति का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति का सम्पूर्ण जीवन संघर्ष, समर्पण और राष्ट्र सेवा का अनुपम उदाहरण है। उनके व्यक्तित्व में मातृत्व की ममता, सेवा का संकल्प और राष्ट्र के प्रति अटूट समर्पण का अद्भुत संगम निहित है। उन्होंने सदैव अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति के कल्याण को प्राथमिकता देते हुए समाज के वंचित, शोषित एवं पिछड़े वर्गों के सशक्तिकरण हेतु कार्य किया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने निजी जीवन में अत्यंत विषम परिस्थितियों का सामना करते हुए भी हमेशा राष्ट्र सर्वाेपरि की भावना से कार्य करते हुए समाज जीवन में अपना योगदान दिया। झारखंड की राज्यपाल के रूप में भगवान बिरसा मुंडा के आदर्शों का अनुसरण करते हुए उन्होंने जनजातीय समाज के उत्थान में अविस्मरणीय भूमिका निभाई। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह दूसरा मौका है कि जब उत्तराखंड की विधानसभा में हमारे देश के राष्ट्रपति का अभिभाषण हो रहा है, इससे पूर्व 18 मई 2015 को पूर्व राष्ट्रपति स्वर्गीय प्रणव मुखर्जी ने विधानसभा को संबोधित किया था।

मुख्यमंत्री ने कहा कि देश की प्रथम नागरिक के रूप में राष्ट्रपति द्वारा उत्तराखंड की विधानसभा में दिया जाने वाला ऐतिहासिक अभिभाषण हमारे राज्य के इतिहास में स्वर्णाक्षरों में अंकित किया जाएगा। उनके प्रेरणादायी शब्द आने वाले 25 वर्षों तक उत्तराखंड की प्रगति के लिए हमारा मार्गदर्शन करते रहेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड 9 नवंबर को अपनी स्थापना के 25 वर्ष पूर्ण करने जा रहा है। यह ऐतिहासिक अवसर प्रत्येक उत्तराखंडवासी के लिए आत्मगौरव का क्षण होने के साथ ही अत्यंत भावनात्मक क्षण भी है। उत्तराखण्ड राज्य हमारी उन असंख्य माताओं, बहनों, युवाओं और जननायकों के अदम्य साहस और संघर्ष का प्रतीक है, जिनके तप, त्याग और बलिदान के बल पर ये गौरवशाली राज्य अस्तित्व में आया। मुख्यमंत्री ने सभी ज्ञात-अज्ञात राज्य आंदोलनकारियों को श्रद्धापूर्वक नमन करते हुए कहा कि अमर आंदोलनकारियों के बलिदान को उत्तराखंड का कोई भी नागरिक कभी नहीं भुला सकता।

मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि राष्ट्रपति के आशीर्वाद, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और उत्तराखंड की जनता के सहयोग से हम उत्तराखंड को एक सशक्त, समृद्ध और आत्मनिर्भर राज्य के रूप में स्थापित करने के अपने विकल्प रहित संकल्प में अवश्य सफल होंगे।

विधानसभा अध्यक्ष ऋतु भूषण खंडूडी ने स्वागत संबोधन में कहा कि हम सौभाग्यशाली हैं कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु राज्य स्थापना दिवस पर आयोजित विधानसभा के विशेष सत्र को संबोधित कर रही हैं। प्रदेश की विधानसभा के लिए भी यह गर्व का क्षण है। उन्होंने कहा कि भारतीय राजनीति के अजातशत्रु स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेई जी के निर्णय से नवंबर 2000 में अस्तित्व में आने के बाद उत्तराखंड विधानसभा की पहली बैठक 12 जनवरी 2001 के दिन आयोजित की गई। तब से अब तक भारतीय लोकतंत्र के उच्च सिद्धांतों और परम्पराओं पर चलते हुए, उत्तराखंड विधानसभा ने कई महत्वपूर्ण आयाम स्थापित किए हैं।

विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि राज्य आंदोलनकारियों का बलिदान हमें, उत्तराखंड के सर्वांगीण विकास के लिए चेष्टावान बनाए रखेगा। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड राज्य निर्माण में मातृशक्ति ने अहम भूमिका निभाई है। उत्तराखंड की महिलाओं ने पर्यावरण संरक्षण, खेती-बाड़ी, समाज सुधार से लेकर राज्य निर्माण आंदोलन में तक सक्रिय भूमिका निभाई है। राष्ट्रपति के संबोधन से उत्तराखंड की मातृशक्ति गौरवांवित हुई है। उन्होंने कहा कि 25 वर्षों के कालखंड में उत्तराखंड विधानसभा ने महिला आरक्षण विधेयक सहित पांच सौ से अधिक विधेयक पारित किए हैं। वर्ष 2001 में अंतिम विधानसभा से लेकर वर्तमान विधानसभा के सदस्यों ने तक महत्वपूर्ण अवसरों पर दलगत राजनीति से उठकर, प्रदेश के सामने उपस्थित चुनौतियों का सफलतापूर्वक सम्मान करते हुए, अपने ज्ञान, विवेक और परिश्रम से आम जनता की आशा, आकांक्षाओं को मूर्त रूप दिया है। इससे प्रदेश में संसदीय लोकतंत्र की नींव भी मजबूत हुई है।

विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि जनभावना के अनुरूप प्रदेश के पर्वतीय क्षेत्र में समुचित विकास सुनिश्चित करने के लिए भराडीसैंण – गैरसैंण को ग्रीष्मकालीन राजधानी घोषित किया गया है, अब वहां भी एक विधानसभा भवन संचालित किया जा रहा है। उत्तराखंड विधानसभा ने ग्रीन इनिसिटेव के तहत अब पेपरलेस विधायिका की ओर कदम बढ़ दिए हैं। देहरादून के साथ ही भराडीसैंण विधानसभा परिसर में भी नेशनल ई विधान एप्लकेशन लागू किया गया है। विधानसभा में ई लाइब्रेरी भी स्थापित की गई है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश के विकास में शोध के महत्व पर जोर देते हैं, इसके लिए भराड़ीसैंण विधानसभा के अंतर्गत, पूर्व राष्ट्रपति डॉ प्रवण मुखर्जी द्वारा स्वीकृत इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ पार्लियामेंट्री स्टडीज, रिसर्च एंड ट्रेनिंग शुरू किया गया है। जिसे विधायी और संसदीय कार्य के साथ ही पॉलिसी प्लानिंग में उच्च कोटि के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में विकसित किया जा रहा है। उन्होंने उम्मीद व्यक्त करते हुए कहा कि राष्ट्रपति के संबोधन से सब में नई ऊर्जा का संचार होगा, जिससे उत्तराखंड वासी वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल की दिशा में संकल्पित होकर कार्य कर सकेंगे।

इस मौके पर नेता विपक्ष यशपाल आर्य ने राष्ट्रपति का स्वागत करते हुए कहा कि उत्तराखंड सभी मानकों में विशिष्ट प्रदेश है, उत्तराखंड की सीमाएं तिब्बत और नेपाल से मिलती हैं इस तरह ये हिमालयी राज्य देश की रक्षा में अडिग खड़ा है। उन्होंने कहा कि प्रकृति ने इस राज्य को परोपकारी हिमालय से निकलने वाली सदानीरा नदियां दी है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की महिलाओं ने हमेशा राज्य के जल, जंगल, जमीन को बचाने के लिए संघर्ष किया है। विश्व प्रसिद्ध चिपको आंदोलन इसका उदाहरण है। उन्होंने उम्मीद जताई कि राष्ट्रपति के संबोधन से सदस्यों को नई ऊर्जा और दिशा प्राप्त होगी।