पंतनगर विश्वविद्यालय परंपरा, आधुनिकता और अनुसंधान का त्रिवेणी संगमः शिवराज चौहान

पंडित गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, पंतनगर में आयोजित दो दिवसीय पूर्व छात्र सम्मेलन का शुभारंभ केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी तथा कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया।

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि वे हरित क्रांति की पावन भूमि पंतनगर में आकर धन्य हुए हैं। उन्होंने कहा कि पंतनगर विश्वविद्यालय भारतीय कृषि के इतिहास का गौरवशाली केंद्र है, जिसने देश को वैज्ञानिक, नीति-निर्माता, कृषि उद्यमी तथा उत्कृष्ट मानव संसाधन प्रदान कर कृषि एवं ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा दी है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन तथा मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखंड देश ही नहीं, बल्कि विश्व की आध्यात्मिक राजधानी बनने की ओर अग्रसर है।

चौहान ने पंतनगर विश्वविद्यालय को परंपरा, आधुनिकता और अनुसंधान का त्रिवेणी संगम बताते हुए कहा कि देश आज लगभग 377 मिलियन टन खाद्यान्न उत्पादन कर रहा है। देश के अन्न भंडार पूरी तरह भरे हुए हैं तथा चावल उत्पादन में भारत, चीन को पीछे छोड़कर विश्व में प्रथम स्थान पर पहुंच चुका है। उन्होंने कहा कि गेहूं का उत्पादन भी अधिशेष है तथा भारतीय गेहूं एवं बासमती चावल की मांग विश्वभर में लगातार बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि इस उपलब्धि में पंतनगर विश्वविद्यालय का योगदान अतुलनीय है और इसलिए वे इस पावन भूमि को बार-बार नमन करते हैं।

केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि कृषि मंत्री के रूप में धरातल से जुड़े रहना अत्यंत आवश्यक है और उन्हें सौभाग्य प्राप्त हुआ कि उन्होंने पंतनगर में विद्यार्थियों एवं विशेषज्ञों के साथ संवाद किया। उन्होंने कहा कि उन्होंने केवल विद्यार्थियों से नहीं, बल्कि भारतीय कृषि के भविष्य से संवाद किया है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यहां से शिक्षा प्राप्त करने वाले विद्यार्थी देश और दुनिया में भारत का नाम रोशन करेंगे।

उन्होंने कहा कि वे पंतनगर सिखाने नहीं, बल्कि सीखने आए हैं। पंतनगर विश्वविद्यालय ने केवल डिग्रियां नहीं बांटीं, बल्कि देश को वैज्ञानिक, नीति-निर्माता, उद्योग जगत के नेतृत्वकर्ता तथा कृषि उद्यमी दिए हैं, जिन्होंने भारतीय कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

केंद्रीय मंत्री चौहान ने कहा कि वर्तमान समय में भारतीय कृषि जलवायु परिवर्तन जैसी गंभीर चुनौतियों का सामना कर रही है। बढ़ता तापमान, गिरता भूजल स्तर, बदलता मौसम, मिट्टी का बिगड़ता स्वास्थ्य तथा रासायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध प्रयोग जैसी समस्याओं का समाधान वैज्ञानिक अनुसंधान और नवाचार से ही संभव है। उन्होंने कहा कि उत्पादन के क्षेत्र में देश ने नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं, लेकिन भविष्य की चुनौतियों का समाधान खोजने में कृषि वैज्ञानिकों और विश्वविद्यालयों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होगी।

केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में कृषि उत्पादों से संबंधित जितने भी अंतरराष्ट्रीय समझौते किए गए हैं, वे किसानों और राष्ट्रहित को सर्वाेच्च प्राथमिकता में रखकर किए गए हैं। उन्होंने दोहराया कि विकसित भारत के निर्माण का संकल्प तभी साकार होगा, जब कृषि विकसित होगी और किसान समृद्ध होंगे।

पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए केन्द्रीय मंत्री चौहान ने कहा कि वे प्रतिदिन एक पौधा लगाते हैं। उन्होंने सभी से अपील की कि यदि प्रतिदिन पौधा लगाना संभव न हो, तो कम से कम अपने जन्मदिन पर अवश्य एक पौधा लगाएं, क्योंकि पर्यावरण संरक्षण समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पारंपरिक फसलों के संरक्षण पर बल देते हुए फल एवं विविध कृषि उत्पादों के उत्पादन को बढ़ावा देने की आवश्यकता बताई। साथ ही उन्होंने कृषि उत्पादन से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए विश्वविद्यालय के पूर्व छात्रों एवं विशेषज्ञों की समिति बनाकर ठोस सुझाव देने का आह्वान किया, ताकि उन पर गंभीरता से विचार किया जा सके।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि विकसित उत्तराखंड के निर्माण में विश्वविद्यालयों के पूर्व छात्रों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने पूर्व छात्रों से आह्वान किया कि वे अपने ज्ञान, अनुभव और विशेषज्ञता को राज्य के विकास से जोड़ते हुए कृषि, अनुसंधान, नवाचार, स्टार्टअप और युवाओं के मार्गदर्शन में सक्रिय योगदान दें।

मुख्यमंत्री ने गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, पंतनगर में आयोजित पूर्व छात्र कार्यशाला ब्रेन 3.0 (बूस्टिंग रिसर्च, एकेडमिक, इनोवेशन एंड नेटवर्किंग) को संबोधित करते हुए कहा कि विकसित उत्तराखंड के निर्माण में विश्वविद्यालयों के पूर्व छात्रों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि पंतनगर विश्वविद्यालय केवल एक शिक्षण संस्थान नहीं, बल्कि भारत की हरित क्रांति का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है। इस विश्वविद्यालय ने देश को ऐसे वैज्ञानिक, प्रशासक, उद्यमी और कृषि विशेषज्ञ दिए हैं, जिन्होंने राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है। उन्होंने कहा कि ष्ब्रेन 3.0ष् केवल एक कार्यशाला नहीं, बल्कि ज्ञान, अनुभव, नवाचार और भविष्य की संभावनाओं को जोड़ने वाला प्रभावी मंच है।
उन्होंने कहा कि किसी भी संस्थान की वास्तविक पहचान उसकी इमारतों से नहीं, बल्कि वहां से निकले विद्यार्थियों की उपलब्धियों से होती है। पूर्व छात्र विश्वविद्यालय की सबसे बड़ी शक्ति और उसकी गौरवशाली परंपरा के सशक्त प्रतिनिधि हैं। उन्होंने कहा कि जीवन में सफलता प्राप्त करना महत्वपूर्ण है, लेकिन उससे भी अधिक महत्वपूर्ण है उस सफलता और अनुभव को समाज तथा आने वाली पीढ़ियों के साथ साझा करना।

मुख्यमंत्री ने पूर्व छात्रों से युवाओं के लिए मेंटरशिप कार्यक्रम चलाने, अनुसंधान कार्यों में सहयोग देने, नवाचार और स्टार्टअप संस्कृति को बढ़ावा देने तथा शिक्षा जगत और उद्योगों के बीच मजबूत सेतु बनने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि आज का युवा केवल रोजगार खोजने वाला नहीं, बल्कि नवाचार और उद्यमिता के माध्यम से परिवर्तन का नेतृत्व करने वाला युवा है। ऐसे में अनुभवी पूर्व छात्रों का मार्गदर्शन युवाओं को नई दिशा और नई ऊंचाइयां प्रदान कर सकता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान समय कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), ड्रोन तकनीक, डेटा एनालिटिक्स, जैव प्रौद्योगिकी और डिजिटल कृषि जैसी आधुनिक तकनीकों का युग है। इन क्षेत्रों में तेजी से हो रहे बदलावों के अनुरूप विश्वविद्यालयों और पूर्व छात्रों को भी अपनी भूमिका और अधिक प्रभावी बनानी होगी।

उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की पर्वतीय कृषि आज छोटे एवं बिखरे खेतों, जंगली जानवरों से फसलों को होने वाले नुकसान, युवाओं के पलायन, सीमित बाजार पहुंच तथा जलवायु परिवर्तन जैसी अनेक चुनौतियों का सामना कर रही है। इन समस्याओं का समाधान केवल सरकारी योजनाओं से नहीं, बल्कि ज्ञान, अनुसंधान, नवाचार और सामूहिक सहभागिता से संभव है। उन्होंने पूर्व छात्रों से आधुनिक कृषि तकनीकों, जैविक एवं प्राकृतिक खेती, कृषि प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन, डिजिटल मार्केटिंग तथा कृषि उद्यमिता के क्षेत्र में किसानों और युवाओं का मार्गदर्शन करने का आह्वान किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में उत्तराखंड समग्र एवं संतुलित विकास की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। राज्य सरकार का लक्ष्य केवल आर्थिक विकास नहीं, बल्कि ऐसा समावेशी विकास है, जिसमें गांव, गरीब, किसान, महिलाएं और युवा सभी समान रूप से सहभागी बनें। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार नई स्टार्टअप नीति, कौशल विकास कार्यक्रमों और नवाचार आधारित पहलों के माध्यम से युवाओं को आगे बढ़ने के अवसर प्रदान कर रही है। विशेष रूप से कृषि, बागवानी, खाद्य प्रसंस्करण, जैविक खेती, ड्रोन तकनीक और कृषि आधारित स्टार्टअप के क्षेत्र में अपार संभावनाएं मौजूद हैं। युवाओं को स्थानीय समस्याओं के समाधान खोजकर अपने नवाचारों को वैश्विक मंच तक पहुंचाना चाहिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ष्विकल्प रहित संकल्पष् के मंत्र के साथ विकसित उत्तराखंड के निर्माण के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि पंतनगर विश्वविद्यालय और उसके पूर्व छात्रों का सहयोग इस अभियान को और अधिक गति देगा।

उन्होंने पूर्व छात्रों से आग्रह किया कि वे उत्तराखंड को केवल अपनी जन्मभूमि या कर्मभूमि के रूप में न देखें, बल्कि उसके विकास के प्रति अपनी जिम्मेदारी भी समझें और जहां भी कार्यरत हों, अपने ज्ञान एवं अनुभव का एक हिस्सा उत्तराखंड के विकास के लिए अवश्य समर्पित करें।

मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि पंतनगर विश्वविद्यालय का पूर्व छात्र परिवार आने वाले वर्षों में न केवल विश्वविद्यालय के विकास, बल्कि उत्तराखंड और राष्ट्र निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

इससे पहले, केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान तथा मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पंतनगर संग्रहालय एवं स्वयं सहायता समूह की महिलाओं द्वारा लगाए गए स्टॉलों का निरीक्षण किया तथा कृषि विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों से संवाद किया। उन्होंने विद्यार्थियों के साथ धान की फसल की रोपाई भी की। केंद्रीय कृषि मंत्री चौहान ने पंतनगर विश्वविद्यालय परिसर में पौधरोपण भी किया।

कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने हरित क्रांति की जननी पंतनगर विश्वविद्यालय में उपस्थित सभी अतिथियों एवं पूर्व छात्रों का स्वागत एवं अभिनंदन करते हुए कहा कि राज्य गठन के बाद हमारी कृषि भूमि अवश्य कम हुई है, लेकिन कृषि उत्पादन में 3 लाख टन की वृद्धि हुई है। उन्होंने कहा कि माननीय मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में प्रदेश का चहुंमुखी विकास हो रहा है। उन्होंने पंतनगर विश्वविद्यालय को हेरिटेज विश्वविद्यालय घोषित किए जाने का अनुरोध किया।

पंतनगर विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. एस. के. कश्यप ने सभी अतिथियों का स्वागत एवं अभिनंदन किया। कार्यक्रम में सांसद अजय भट्ट, विधायक शिव अरोरा, त्रिलोक सिंह चीमा, बंशीधर भगत, दर्जा मंत्री अनिल कपूर डब्बू, हुकम सिंह कुंवर, रणजीत सिंह नामधारी, सचिव डॉ. एस. एन. पांडे, जिलाधिकारी नितिन सिंह भदौरिया, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अजय गणपति, कुलसचिव दीपा विनय सहित अनेक अधिकारी एवं पूर्व छात्र उपस्थित रहे।

किसान हमारे अन्नदाता और असली नायक हैं: धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कृषि एवम् प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, पंतनगर में 119 वें अखिल भारतीय किसान मेला एवं कृषि उद्योग प्रदर्शनी का शुभारम्भ किया। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने प्रगतिशील किसानों को सम्मानित किया व विश्विद्यालय साहित्य का विमोचन भी किया।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि हमारे लिए हर्ष का विषय है कि पंतनगर विश्वविद्यालय में 119वे कृषि मेले का आयोजन किया जा रहा है। इस प्रकार के मेले आयोजन कृषकों के लिए अति महत्वपूर्ण होते हैं, नवाचारों की जानकारियां मिलती है व वैज्ञानिकों से सीधे संवाद का अवसर मिलता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि किसान बन्धु हमारे अन्नदाता है व हमारे असली नायक हैं। किसानों की मेहनत व समर्पण से ही हमे अन्न मिल रहा है और देश आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा प्रधानमंत्री के विकसित भारत संकल्पना में किसान की महत्वपूर्ण भूमिका है। कृषकों के मेहनत व समर्पण से ही गांव, क्षेत्र और देश का विकास होता है।

मुख्यमंत्री ने कहा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा देश के 10 करोड़ से अधिक किसानों को किसान सम्मान निधि का लाभ दिया जा रहा है। शुक्रवार को प्रधानमंत्री ने किसान सम्मान निधि की 22 वीं किस्त जारी की है। प्रदेश के 09 लाख से अधिक किसानों को किसान सम्मान निधि का लाभ प्राप्त हो रहा है। उन्होंने कहा कि कृषि को जंगली जानवरों से बचाव के लिए घेरबाड़ हेतु केंद्र द्वारा हमें प्रथम किस्त के रूप में 25 करोड़ की धनराशि जारी की गई है।

मुख्यमंत्री ने कहा प्रधानमंत्री, अन्नदाताओं के जीवन को बेहतर बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कहा किसानों को फसल बीमा योजना, मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना, किसान मानधन योजना, बागवानी विकास योजना, कृषि यंत्र अनुदान योजना, बूंद बूंद सिंचाई योजना जैसी योजनाएं के माध्यम से किसानों को सशक्त किया जा रहा है। किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए किसान क्रैडिट कार्ड के सीमा 03 लाख से बढ़ाकर 05 लाख कर दी गई है।

मुख्यमंत्री ने कहा भारत सरकार द्वारा किसानों के लिए 14 हजार करोड़ लागत की 07 नई परियोजनाएं लागू की गई हैं। प्रदेश सरकार द्वारा किसानों को 03 लाख तक ऋण का बिना ब्याज के उपलब्ध कराया जा रहा है। उन्होंने कहा किसानों की आय बढ़ाने हेतु पॉलीहाउस लगाने हेतु 200 करोड़ की धनराशि रखी गई है,अभी तक 115 करोड़ की लागत से 350 पॉलीहाउस स्थापित किए जा चुके हैं।

मुख्यमंत्री के कहा प्रदेश में भौगोलिक परिस्थितियाँ अलग अलग है। इसलिए, भौगौलिक स्थितियों को देखते हुए क्षेत्र विशेष के लिए योजनाऐं चलाई जा रही हैं।उन्होंने कहा 1200 करोड़ के लागत से नई सेब नीति लागू की गई है, कृषकों के हित में कई नई नीतियां लागू की गई है तथा कई योजनाओं में 80 प्रतिशत तक राज्य सहायता दी जा रही है। उन्होंने कहा प्रदेश में 07 एरोमा वैली विकसित किये जा रहे हैं। ड्रेगन फ्रूट की मांग बढ़ रही है इसलिए ड्रेगन फ्रूट को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा प्रदेश में फलों के उत्पादन में ढ़ाई प्रतिशत तक वृद्धि हुई है तथा मशरूम का उत्पादन 27 हजार मीट्रिक टन हो गया है व मशरूम उत्पादन में हम देश में पांचवें स्थान पर आ गए हैं। उन्होंने कहा प्रदेश में मौन पालन शहद उत्पादन की अपार संभावनाएं हैं,राज्य में 33 सौ मीट्रिक टन शहद उत्पादन हो रहा है और हम देश में 08 वे स्थान पर आ गए हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सत्र में 01 लाख 11 हजार करोड़ का बजट पारित किया गया है, जिसमें कृषि,उद्यान, एरोमैटिक, मत्स्य, मौन पालन,शोध आदि में धनराशि प्राविधान की गई है। डबल इंजन सरकार ने किसानों के हितों को सर्वोपरि रखा है और सरकार, कृषकों का कंधे से कंधा मिलाकर साथ देगी। उन्होंने कृषकों से जागरूक होकर नई कृषि तकनीकि अपनाकर लाभ उठाने की अपील की। उन्होंने कहा हम सब मिलकर प्रदेश व देश को आगे बढ़ाने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाये।

कुलपति पंतनगर विश्वविद्यालय डॉ मनमोहन सिंह चौहान ने विश्वविद्यालय परिवार व कृषकों को ओर से सभी अतिथियों का स्वागत व अभिनंदन किया। उन्होंने कहा विश्वविद्यालय 119 वें कृषि मेले का आयोजन कर रहा है, यह हमारे लिए गौरव की बात है। उन्होंने कहा कि मेले में 350 से अधिक स्टॉल लगे हैं। प्रतिदिन लगभग 20 हजार लोग मेले में प्रतिभाग कर रहे हैं। उन्होंने विश्वविद्यालय द्वारा किए जा रहे कार्यों, क्रियाकलापों की विस्तृत जानकारियां दी।

कार्यक्रम में जिला पंचायत अध्यक्ष अजय मौर्य, विधायक तिलक राज बेहड, मेयर विकास शर्मा, दर्जा मंत्री अनिल कपूर डब्बू, फरजाना बेगम, पूर्व विधायक राजेश शुक्ला,पूर्व दर्जा मंत्री राजेश कुमार, जिलाधिकारी नितिन सिंह भदौरिया, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अजय गणपति, एवं अन्य लोग मौजूद रहे।

कृषि मेले किसानों, वैज्ञानिकों और उद्यमियों के बीच नवाचार व ज्ञान के प्रसारित करने का माध्यमः धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पंतनगर विश्वविद्यालय में आयोजित 118वे अखिल भारतीय किसान मेले एवं कृषि उद्योग प्रदर्शनी में प्रतिभाग किया। मुख्यमंत्री ने पंतनगर विश्वविद्यालय द्वारा उत्पादित नवीन दलहनी प्रजातियों का लोकार्पण व पंतनगर प्रवाह नामक पुस्तक का विमोचन किया।

मेले में आयोजित रजत जयंती राज्य स्थापना गोष्ठी एवं संवाद कार्यक्रम में संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि इस वर्ष के किसान मेले और कृषि प्रदर्शनी में 400 से अधिक स्टॉल लगाए गए हैं, जिनमें से 200 से अधिक स्टॉल देश के विभिन्न राज्यों से आए कृषि क्षेत्र से जुड़े उद्योगों, स्टार्टअप्स और उद्यमियों द्वारा लगाए गए हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन मात्र कृषि उत्पादों और यंत्रों के प्रदर्शन तक सीमित नहीं होते, बल्कि ये किसानों, वैज्ञानिकों और उद्यमियों के बीच ज्ञान, अनुभव और नवाचार के आदान-प्रदान का महत्वपूर्ण माध्यम भी होते हैं। इस प्रकार के कृषि मेलों के माध्यम से जहां एक ओर हमारे किसान भाई एक ही स्थान पर नवीनतम कृषि तकनीकों, उन्नत बीजों, आधुनिक यंत्रों और नई शोधों की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं, वहीं उन्हें विशेषज्ञों के अनुभवों से सीखने और अपने अनुभव साझा करने का अवसर भी मिलता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि मुझे पूर्ण विश्वास है कि इस मेले में प्रदर्शित की जा रही आधुनिक तकनीकों और नवाचारों के माध्यम से हमारे किसान भाई पारंपरिक तरीकों के साथ-साथ नई वैज्ञानिक विधियों को अपनाकर अपनी खेती को और भी अधिक उत्पादक, टिकाऊ और लाभकारी बना पाएंगे। उन्होंने कहा कि जिससे न केवल उनकी आय में वृद्धि होगी, बल्कि प्रदेश की कृषि व्यवस्था भी सशक्त और समृद्ध बनेगी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के दूरदर्शी नेतृत्व में आज भारत विकसित राष्ट्र के संकल्प को साकार करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। इसी संकल्प के साथ केंद्र सरकार द्वारा हमारे अन्नदाताओं की आय को दोगुना करने हेतु निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि आज, देशभर के 11 करोड़ किसानों को प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के माध्यम से आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है, जिसके अंतर्गत उत्तराखंड के भी लगभग 9 लाख के करीब अन्नदाताओं को प्रतिवर्ष 6 हजार रुपए सहायता राशि प्रदान की जा रही है। आज जहां एक ओर सभी प्रमुख फसलों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (डैच्) में अभूतपूर्व वृद्धि कर किसानों को उनकी फसल का उचित मूल्य प्रदान किया जा रहा है। वहीं, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के माध्यम से किसान को प्राकृतिक आपदाओं, फसल रोगों और कीटों से होने वाले नुकसान हेतु सुरक्षा कवच भी प्रदान किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना के द्वारा खेतों की मिट्टी की वैज्ञानिक जांच कर किसानों को पोषक तत्वों की कमी और आवश्यक उर्वरकों की जानकारी भी दी जा रही है, जिससे उनकी उपज की गुणवत्ता और भूमि की उर्वरता दोनों में सुधार हो रहा है, और इसके साथ ही, किसान मानधन योजना, मिलेट मिशन, बागवानी विकास मिशन, कृषि यंत्र सब्सिडी, बूंदबूंद सिंचाई योजना, डिजिटल कृषि मिशन जैसी अनेकों योजनाओं द्वारा किसानों को लाभ पहुंचाने के प्रयास भी किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस वर्ष के बजट में कृषि को विकास का प्रमुख इंजन मानते हुए जहां एक ओर किसान क्रेडिट कार्ड की लिमिट को 3 लाख रुपये से बढाकर 5 लाख रुपये करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया गया है, वहीं प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित करने के साथ-साथ सिंचाई और कृषि तकनीकों के विकास पर भी विशेष फोकस किया गया है। उन्होंने कहा कि आदरणीय प्रधानमंत्री जी ने देश के अन्नदाताओं को बड़ी सौगात देते हुए 24 हजार करोड़ रुपये की पीएम धन धान्य कृषि योजना और दलहन उत्पादन को बढ़ावा देने हेतु लगभग 11 हजार 500 करोड़ रुपये की लगात के दलहन उत्पादकता मिशन का शुभारंभ किया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व और मार्गदर्शन में हमारी राज्य सरकार भी प्रदेश के किसानों के उत्थान एवं समृद्धि हेतु संकल्पित होकर निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि हम एक ओर जहां प्रदेश में किसानों को तीन लाख रुपए तक का ऋण बिना ब्याज के उपलब्ध करा रहे हैं, वहीं कृषि उपकरण खरीदने हेतु फार्म मशीनरी बैंक योजना के माध्यम से 80 प्रतिशत तक की सब्सिडी भी प्रदान कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि हमने किसानों के हित में नहरों से सिंचाई को पूरी तरह मुफ्त करने का काम किया है। साथ ही, हमने किसानों की आय बढ़ाने के लिए पॉलीहाउस के निर्माण हेतु 200 करोड़ रूपए की राशि का प्रावधान भी किया है। जिसके अंतर्गत अब तक राज्य में लगभग 115 करोड़ रुपए की सहायता से करीब 350 पॉलीहाउस स्थापित किए जा चुके हैं। इतना ही नहीं, हम जहां एक ओर गेहूं खरीद पर किसानों को 20 रूपए प्रति क्विंटल का बोनस प्रदान रहे हैं, वहीं हमने गन्ने के रेट में भी 20 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोत्तरी की है। उन्होंने कहा कि हमने उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में वर्षा आधारित खेती को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए लगभग 1,000 करोड़ रुपये की लागत से उत्तराखंड क्लाइमेट रिस्पॉन्सिव रेन-फेड फार्मिंग प्रोजेक्ट भी स्वीकृत किया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार सब्जियों की तरह ही फलों के उत्पादन को बढ़ाने के लिए भी विभिन्न स्तरों पर काम कर रही है। हाल ही में हमारी सरकार ने 1200 करोड़ रुपये की लागत से नई सेब नीति, कीवी नीति, स्टेट मिलेट मिशन और ड्रैगन फ्रूट नीति जैसी कई महत्वपूर्ण योजनाओं को लागू किया है। उन्होंने कहा कि इन नीतियों के तहत बागवानी को प्रोत्साहन देने के लिए किसानों को 80 प्रतिशत तक सब्सिडी प्रदान की जा रही है। हम किसानों की उपज की गुणवत्ता को बढ़ाने के लिए ग्रेडिंग सॉर्टिंग यूनिट के निर्माण के लिए भी अनुदान प्रदान कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि आज इस अवसर पर मैं, आप सभी कृषि वैज्ञानिकों से आग्रह करना चाहता हूँ कि आप हमारी पारंपरिक कृषि व्यवस्था पर भी अनुसंधान करें, और जानें कि हमारे पूर्वजों ने हजारों वर्षों से अपनी कृषि सभ्यता को कैसे संरक्षित रखा, अपनी धरती की उर्वरकता को कैसे बनाए रखा और उत्पादन की गुणवत्ता को भी निरंतर सुनिश्चित किया। उन्होंने वैज्ञानिकों से आग्रह करते हुए कहा कि आप लोग अपने शोध कार्य और नवीनतम तकनीकी ज्ञान को शीघ्रता से किसानों तक पहुँचाएँ, ताकि ये ज्ञान उनके उत्पादन और आय में वृद्धि का माध्यम बन सके और हमारी कृषि अर्थव्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाया जा सके।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज के इस अवसर पर हम किसानों की प्रगति पर चर्चा करने के साथ-साथ प्रदेश में नकल विरोधी कानून और समान नागरिक संहिता पर संवाद करने के लिए भी एकत्रित हुए हैं। उक्त दोनों विषयों पर जीबी पन्त कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय की छात्रा पूजा जोशी ने समान नागरिक संहिता, नीति शर्मा ने किसान मेले की प्रगति एवं छात्र निधि अवस्थी ने नकल विरोध कानून पर अपने विचार साझा किए जबकि समृद्धि किसान उत्पादक संगठन की सीमा रानी ने अपने सफल खेती के अनुभव साझा किए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार ने राज्य में समान नागरिक संहिता को लागू कर सभी नागरिकों के लिए एक समान कानून और अधिकार स्थापित करने की दिशा में ऐतिहासिक कदम उठाया है। उन्होंने कहा कि हमने अनुभव किया कि समाज में कुछ समुदायों के लिए अलग-अलग व्यक्तिगत कानूनों के कारण भेदभाव, असमानता और अन्याय की स्थिति बनी हुई है। समान नागरिक संहिता का उद्देश्य इन्हीं भेदभावों को समाप्त कर राज्य के सभी नागरिकों के लिए एक समान कानूनी व्यवस्था सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि यूसीसी के लागू होने से न केवल राज्य से सभी नागरिकों को समान अधिकार प्राप्त हुए हैं, बल्कि प्रदेश में महिला सशक्तिकरण को भी बल मिला है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि मैं,यह भी स्पष्ट करना चाहता हूं कि समान नागरिक संहिता किसी धर्म या पंथ के खिलाफ नहीं, बल्कि समाज की कुप्रथाओं को मिटाकर सभी नागरिकों के बीच समानता से समरसता स्थापित करने का एक संवैधानिक उपाय है। परन्तु ये देश का दुर्भाग्य रहा कि स्वतंत्रता के पश्चात कई दशकों तक देश में एक ऐसी पार्टी का शासन रहा जिसने अपने वोट बैंक के चक्कर में यूसीसी को लागू नहीं होने दिया। जबकि विश्व के प्रमुख मुस्लिम देशों सहित दुनिया के सभी सभ्य देशों में पहले से ही समान नागरिक संहिता लागू है। उन्होंने कहा कि हम भली-भांति जानते थे कि भारत में सर्वप्रथम यूसीसी लागू करने का मार्ग सरल नहीं होगा परंतु जब नीयत साफ हो और जनभावना साथ हो, तो कोई भी बदलाव असंभव नहीं रहता। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार देवभूमि उत्तराखंड के सांस्कृतिक मूल्यों और डेमोग्राफी को संरक्षित रखने के प्रति भी पूर्ण रूप से संकल्पबद्ध होकर काम कर रही है।

कुलपति डॉ मनमोहन सिंह चौहान ने यूसीसी व नकल विरोधी कानून लागू करने के लिए मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि माननीय मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन व निर्देशन में विश्वविद्यालय शोध व प्रगति के मार्ग पर अग्रसर है। उन्होंने कहा कि माननीय मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में पूरे प्रदेश में इंटिग्रेटेड फार्मिंग पर कार्य किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि आज प्रदेश की प्रति व्यक्ति आय बढ़कर 2 लाख 61 हजार हो गई है जो 26 प्रतिशत ग्रोथ रेट पर है। उन्होंने बताया कि मेले में 507 स्टॉल लगाए गए हैं व अभी तक लगभग 20 हजार किसानों द्वारा प्रतिभाग किया गया है।

कार्यक्रम में विधायक शिव अरोरा, त्रिलोक सिंह चीमा, सुरेश गाड़िया, पूर्व विधायक राजेश शुक्ला, जिलाधिकारी नितिन सिंह भदौरिया, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक मणिकांत मिश्रा सभी जिला स्तरीय अधिकारी मौजूद थे।

जानें, धामी कैबिनेट किन मुद्दों पर लगाई मुहर

विधानसभा में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में कैबिनेट की महत्वपूर्ण बैठक संम्पन हुई। इस बैठक में जनहित से जुड़े कई मुद्दों पर मुहर लगी।
पंतनगर विश्वविद्यालय को केन्द्रिय दर्जा देने के लिए प्रस्ताव केन्द्र को भेजा जायेगा। इससे सम्बन्धित सम्पत्ति के सम्बन्ध में मुख्य सचिव की अघ्यक्षता में समिति बनाई जायेगी।
समस्त स्थानीय निकाय में दोहरी लेखा प्रणाली लागू करने के लिए उत्तराखण्ड मैनुअल एकाउटिंग में संशोधन किया जायेगा।
उत्तर प्रदेश राज्य सेतु निगम को कार्यदायी सस्था के रूप में चयनित किया जायेगा।
उत्तराखण्ड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, उच्च न्यायलय विधिक सेवा समिति, तहसील विधिक सेवा समिति, स्थायी लोक अदालत एवं वैकल्पिक विवाद समाधान के लिए केन्द्रीय कर्मचारी सेवा नियमावली प्रख्यापित किया गया।
उत्तराखण्ड भू सम्पदा (विनियमन तथा विकास) (सामान्य) नियमावली 2017 को प्रख्यापित किया गया।
स्वामित्व योजना के कार्याे को त्वरित गति से करने के लिए उत्तराखण्ड आबादी सर्वेक्षण और संक्रिया नियमावली 2020 के नियम 14(5) और 18(2) में संशोधन किये जाने के लिए और उत्तराखण्ड आबादी सर्वेक्षण और संक्रिया नियमावली 2021 बनाई जायेगी।
केदारनाथ एवं बद्रीनाथ के पुर्ननिमाण हेतु बड़ी एजेन्सी चयन कर कार्य कराने की अनुमति दी जायेगी।
खनन सम्बन्धी मामले का सरलीकरण कर स्व मूल्यांकन सम्बन्धी मामले में शासन की जगह निदेशालय स्तर पर निर्णय लिया जायेगा।
जल जीवन मिशन के अन्तर्गत तकनीकी परीक्षण के बाद दो से पॉच करोड के कार्य कराने हेतु जिलाधिकारियों को अधिकार दिया गया।
सभी अर्बीटेशन सम्बन्धी मामले के निपटारे के लिए उच्च न्यायलय के सेवा निवृत्त न्यायधीश की अघ्यक्षता में तीन सदस्य समिति के माध्यम से निर्णय किया जायेगा।