सस्ती दरों को मिलेंगी कर्मचारियों को मिलेंगी रोजमर्रा की वस्तुएं

उत्तराखंड सरकार का सहकारिता विभाग राज्य के पांच लाख से अधिक कर्मचारियों को सीधा लाभ पहुंचाने जा रहा है। उत्तराखंड राज्य कर्मचारी कल्याण निगम को विभाग पुनर्जीवित करने जा रहा है। इसमें कर्मचारियों को रोजमर्रा में प्रयोग होने वाली वस्तुएं सस्ती दरों पर मिल सकेंगी। इस योजना का शुभारंभ जुुलाई माह में होगा। 

योजना के तहत उत्तराखंड राज्य कर्मचारी कल्याण निगम ने सृष्टि डिपार्टमेंटल स्टोर से एमओयू कर लिया है। अनुबंध की शर्तों के तहत राज्य कर्मचारियों, शिक्षकों, निकायों के कर्मचारियों को स्टोर में उपलब्ध छूट के अतिरिक्त न्यूनतम ढाई प्रतिशत से लेकर पांच प्रतिशत तक की छूट मिलेगी। इसके लिए कर्मचारियों को एक कार्ड जारी किया जाएगा। अभी यह फायदा कर्मचारियों को देहरादून में सृष्टि के डिपार्टमेंटल स्टोर से मिलेगी। अगस्त तक इस योजना को प्रदेश के अन्य जिलों में भी ले जाने की योजना है। श्रीनगर और हरिद्वार से बोर्ड ऑफ गर्वनर को भी प्रस्ताव मिल गए हैं। 
2400 से अधिक प्रोडेक्ट की रेंज सृष्टि डिपार्टमेंटल स्टोर के पास उपलब्ध है। इसमें ग्रोसरी से लेकर फैशन, किचन सहित अन्य सामान उपलब्ध हैं। अधिकारियों के मुताबिक सृष्टि का सेल आउटपुट करीब ढाई करोड़ रुपये प्रति माह है। 

17 प्रतिशत अधिकतम छूट सामान के खरीदने पर कर्मचारियों को मिलेगी। स्टोर को कहा गया है कि वह ढाई से पांच प्रतिशत तक की अतिरिक्त छूट उपलब्ध कराए। मतलब ये कि स्टोर अगर दस प्रतिशत की छूूट अपने ग्राहकों को दे रहा है तो वह कर्मचारियों को न्यूनतम 12.5 प्रतिशत की छूट देगा जो अधिकतम 17 प्रतिशत तक हो सकती है। 2015 में इस निगम का गठन किया गया था। उस समय अपर मुख्य सचिव इसके अध्यक्ष थे। तक से यह निगम बंद था। अब सहकारिता सचिव को इस निगम का अध्यक्ष और अन्य विभागों के सचिवों को सदस्य बनाया गया है। 

एनआईटी के स्थाई कैंपस के निर्माण से प्रदेश में क्वालिटी एजुकेशन को मिलेगा बढ़ावा

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने सुमाङी में एनआईटी के स्थाई केम्पस के लिए 909.85 करोङ रूपए की स्वीकृति पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री डा. रमेश पोखरियाल निशंक का आभार व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार अपने व्यय पर संस्थान के लिए बिजली व पानी की व्यवस्था करेगी और सङक का निर्माण करेगी। प्रदेशवासियों की लम्बे समय से चली आ रही मांग पूरी हुई है। एनआईटी के स्थाई कैम्पस के निर्माण से प्रदेश में क्वालिटी एजुकेशन को बढावा मिलेगा। साथ ही क्षेत्रवासियों की आर्थिकी भी मजबूत होगी।

उच्च शिक्षा राज्य मंत्री डा. धन सिंह रावत ने भी प्रसन्नता जताते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री डा.रमेश पोखरियाल निशंक और मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत का धन्यवाद करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री और वे स्वयं भी इसके लिए प्रयासरत थे और केंद्र सरकार से अनुरोध किया था। अब संस्थान के लिये धनराशि की मंजूरी से राज्य की बङी मांग पूरी हुई है। कुल 909.85 करोङ रूपए में से 78.81 करोङ रूपए वर्तमान के अस्थायी कैम्पस के सुदृढ़ीकरण के लिए स्वीकृत किए गए हैं।

प्रदेश के 05 विश्वविद्यालय एवं 104 महाविद्यालय ई-ग्रंथालय से जुडे़

सचिवालय में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने राज्य के शासकीय विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों के पुस्तकालयों में ‘‘ई-ग्रंथालय’’ का शुभारम्भ किया।
मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने बुधवार को सचिवालय से राज्य के शासकीय विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों के पुस्तकालयों में ‘‘ई-ग्रंथालय’’ का शुभारम्भ किया। प्रदेश के 05 विश्वविद्यालय एवं 104 महाविद्यालय ई-ग्रंथालय से जुड़ चुके हैं। ई-ग्रन्थालय से लाइब्रेरी का मैनेजमेंट सिस्टम डिजिटल प्रारूप पर होगा। इससे शिक्षकों, विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं को शिक्षण कार्य में काफी सुगमता होगी।

ई-ग्रन्थालय से 35 लाख पुस्तकें ऑनलाइन उपलब्ध
सभी विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों को एक पोर्टल से जोड़ा जा रहा है। यदि किसी विश्वविद्यालय या महाविद्यालय में कोई पुस्तक उपलब्ध न हो तो, इनके एक ही पोर्टल पर जुड़ने से ई-ग्रन्थालय के माध्यम से विद्यार्थियों सभी पुस्तकों का अध्ययन करने में सरलता रहेगी। ई-ग्रन्थालय के माध्यम से विद्यार्थियों को 35 लाख पुस्तकें उपलब्ध कराई गई हैं। जिससे ढाई लाख से अधिक छात्र-छात्राएं इससे जुड़ेंगे।

कृषि व बागवानी पर डाक्यूमेंट्री भी उपलब्ध हो
मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कहा कि इस शिक्षा सत्र में विद्यार्थियों के लिए ई-ग्रंथालय बड़ी सौगात है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिये कि ई-ग्रंथालय के माध्यम से प्रतियोगी परीक्षाओं की पिछले 10 वर्षों का क्वेशन बैंक भी उपलब्ध कराया जाय। जिससे उन्हें प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए अच्छा आधार मिल सके। यह समय विद्यार्थियों के लिए प्रतियोगी परीक्षाओं की दृष्टि से महत्वपूर्ण होता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि कृषि, बागवानी और अन्य क्षेत्रों की बच्चों को अच्छी जानकारी प्राप्त हो सके, इसके लिए डाक्यूमेंट्री बनाई जाय। मैदानी जनपदों में लोगों को कृषि एवं बागवानी की अच्छी जानकारी होती है, लेकिन पर्वतीय जनपदों में हमें इस दिशा में विशेष ध्यान देना होगा। प्रदेश में मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना प्रारम्भ की गई। इससे लोगों को कैसे अधिक से अधिक फायदा हो सकते है, इस पर भी और प्रयासों की जरूरत है।

तकनीक का अधिकतम उपयोग किया जाए
मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि इस समय पूरा विश्व कोविड-19 की महामारी के दौर से गुजर रहा है। हमें समय की मांग के अनुसार तकनीक को बढ़ावा देना होगा। आधुनिक तकनीक के माध्यम से हम आपसी दूरियों को कम कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि अधिकारियों द्वारा कोविड के दौरान तकनीक के अधिक से अधिक उपयोग करने का सराहनीय प्रयास किया गया है। ई-ग्रंथालय के शुभारम्भ से विद्यार्थियों को समग्र जानकारियां उपलब्ध होंगी। उन्होंने कहा कि इस दिशा में और क्या प्रयास हो सकते हैं, इस दिशा में विचार करने की जरूरत है।

राज्य का प्रत्येक कॉलेज ई-ग्रन्थालय से जुड़ा
उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने कहा कि उत्तराखण्ड देश का पहला राज्य है, जहां प्रत्येक कॉलेज को ई-ग्रंथालय से जोड़ा गया है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री जी की घोषणा एवं मार्गदर्शन में विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों को ई-ग्रंथालय से जोड़ा गया है। उन्होंने कहा कि यह प्रदेश के लिए गौरव की बात है कि यूजीसी की रैंकिंग के अनुसार उत्तराखण्ड के चार संस्थानों ने टॉप 100 में स्थान पाया है। उच्च शिक्षा के क्षेत्र में गुणात्मक सुधार के लिए सभी महाविद्यालयों में प्राचार्य के पद भरे गये हैं। विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों में 92 प्रतिशत फैकल्टी है। प्रदेश में 877 असिस्टेंट प्रोफेसर की भर्ती निकाली गई, जिसमें से 527 असिस्टेंट प्रोफेसर ज्वाइन कर चुके हैं, शेष पदों पर भर्ती प्रक्रिया गतिमान है। लॉकडाउन के दौरान विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों द्वारा आनलाईन शिक्षण का कार्य किया गया। इसके काफी सकारात्मक परिणाम रहे।

उत्तराखंड के विकास में एमएसएमई सेक्टर की महत्वपूर्ण भूमिकाः त्रिवेन्द्र

सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों में निवेश की सीमा में वृद्धि की गई है। अब संयंत्र व मशीनरी में एक करोड़ रूपए तक निवेश और पांच करोड़ रूपए तक टर्नओवर वाले उद्यम, सूक्ष्म उद्योग की श्रेणी में आएंगे। इसी प्रकार 10 करोड़ रूपए तक निवेश और 50 करोड़ रूपए तक टर्नओवर वाले उद्यम, लघु उद्यम की श्रेणी में आएंगे। जबकि 50 करोड़ रूपए तक निवेश और 250 करोड़ रूपए तक टर्नओवर वाले उद्यम, मध्यम उद्यम की श्रेणी में आएंगे। गौरतलब है कि आत्मनिर्भर पैकेज के तहत एमएसएमई सेक्टर के लिए केन्द्र सरकार द्वारा अनेक प्रावधान किए गए हैं। भारतीय उद्योग जगत अपना विस्तार कर सकें और आवश्यक सुविधाएं प्राप्त कर सकें, इसके लिए एमएसएमई सेक्टर का नया वर्गीकरण किया गया। इसमें निवेश की सीमा को बढ़ाया गया और टर्नओवर को भी इसके मानक के रूप में लिया गया है।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कहा कि उत्तराखंड के विकास में एमएसएमई सेक्टर की महत्वपूर्ण भूमिका है। रोजगार सृजन का प्रमुख स्त्रोत है। केन्द्र सरकार द्वारा एमएसएमई को नए तरीके से परिभाषित करने से राज्य के सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों को लाभ होगा जिसका सकारात्मक प्रभाव राज्य के विकास पर पड़ेगा।

नैनीताल, यूएसनगर और पिथौरागढ़ में कोविड-19 से बचाव को सीएम ने दी धनराशि

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कोविड-19 के दृष्टिगत जिलाधिकारी नैनीताल को 03 करोड, ऊधम सिंह नगर को 2.50 करोड़ तथा पिथौरागढ़ को 02 करोड़ की धनराशि मुख्यमंत्री राहत कोष से स्वीकृत की है। मुख्यमंत्री द्वारा इससे पूर्व भी इस महामारी की रोकथाम एवं बचाव के साथ ही क्वारंटीन सेन्टरों की व्यवस्थाओं में सुधार तथा पीड़ितों को आवश्यक स्वास्थ्य सुविधायें उपलब्ध कराये जाने हेतु जनपद नैनीताल एवं ऊधम सिंह नगर को 03-03 करोड़ तथा पिथौरागढ़ को 02 करोड़ की धनराशि प्रदान की जा चुकी है।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि आपसी सहयोग एवं समन्वय से हम इस वैश्विक आपदा का सामना कर सकते हैं। इसके लिये जन जागरूकता के साथ जन सहयोग भी जरूरी है। उन्होंने शारीरिक दूरी व मास्क के उपयोग को इस बीमारी से बचाव के लिये जरूरी बताया है, इसका पालन हम सबको करना चाहिए।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने सभी जिलाधिकारियों को उनके जनपद में बाहर से आने वाले लोगों की आवश्यक मदद करने एवं क्वारंटीन सेन्टरों की बेहतर व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिये हैं, ताकि यहां रह रहे लोगों को कोई कठिनाई न हो। उन्होंने कहा कि इसके लिये सभी जिलाधिकारियों को उनकी अपेक्षा अनुसार धनराशि की व्यवस्था की गई है। इसके लिये आगे भी धनराशि की कमी नहीं होने दी जायेगी।

मुख्यमंत्री ने कहा है कि स्वास्थ्य विभाग को इस महामारी से निपटने के लिये आवश्यक धनराशि उपलब्ध करायी जा रही है। इसके लिए 25 करोड़ की धनराशि स्वीकृत की गई थी जिसमें से 10 करोड़ पूर्व में स्वास्थ्य विभाग को उपलब्ध करायी जा चुकी है, जब कि अब अवशेष 15 करोड़ की धनराशि भी स्वास्थ्य विभाग को उपलब्ध करा दी गयी है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस वैश्विक आपदा के समय अपने गांव लौटे लोगों को आवश्यक सहयोग एवं सुविधा उपलब्ध कराने के लिये जिलाधिकारियों के माध्यम से पूर्व में सभी ग्राम प्रधानों को 10-10 हजार की धनराशि प्रदान की गई थी। प्रदेश में गांव हो या शहर कोविड- 19 की रोकथाम हेतु की जाने वाली व्यवस्थाओं एवं सुविधाओं पर पूरा ध्यान दिया जाए। उन्होंने कहा कि इस महामारी के पीड़ितों की हम मानवीय संवेदनाओं के साथ ही बेहतर सेवा कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि जनपदों में बाहर से आने वाले लोगों की उचित देखरेख एवं क्वारंटीन सेन्टरों की व्यवस्थाओं व सुविधाओं में कोई कमी न रहे।

15वें वित्त आयोग की 143.50 करोड़ रूपये की अनटाईड अनुदान धनराशि का सीएम ने किया हस्तांतरण

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने सोमवार को सचिवालय में डिजिटल माध्यम से त्रिस्तरीय पंचायतों (ग्राम पंचायत, क्षेत्र पंचायत एवं जिला पंचायत) को कुल 238.38 करोड़ रूपये की धनराशि का हस्तांतरण किया। जिसमें 15वें वित्त आयोग की प्रथम किश्त एवं राज्य वित्त आयोग की धनराशि का एक साथ डिजिटल हस्तांतरण किया गया। जिसमें उत्तराखण्ड की 7791 ग्राम पंचायतों, 95 क्षेत्र पंचायतों एवं 13 जिला पंचायतों के लिए 15 वें वित्त आयोग की 143.50 करोड़ रूपये की अनटाईड अनुदान धनराशि एवं राज्य वित्त आयोग की 94.88 करोड़ की धनराशि शामिल है।

डिजिटल इंडिया प्रोग्राम के तहत 15 वें वित्त आयोग एवं राज्य वित्त आयोग द्वारा पंचायतों हेतु संस्तुत अनुदानों को ऑनलाईन एक साथ डिजिटल हस्तान्तरण के माध्यम से संबंधित पंचायतों को हस्तान्तरित करने की शुरूआत की गई। इस महत्वाकांक्षी योजना के प्रथम चरण में 09 फरवरी 2020 को हरिद्वार में आयोजित जिला पंचायत अध्यक्षों-उपाध्यक्षों एवं क्षेत्र पंचायत प्रमुखों के अभिमुखीकरण कार्यक्रम में केन्द्रीय पंचायतीराज मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर एवं मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत द्वारा 14वें वित्त आयोग एवं राज्य वित्त आयोग की धनराशियों के एकमुश्त डिजिटल हस्तान्तरण की शुरूआत की गई।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कहा कि भारत सरकार द्वारा लागू मा. प्रधानमंत्री जी की महत्वाकांक्षी योजना डिजिटल इंडिया का प्रोग्राम का उद्देश्य सरकारी सेवाओं को उन्नत करना, सरकारी योजनाओं की जानकारी ऑनलाईन पंहुचाना एवं ई-गवर्नेंस को बढ़ावा देना है। प्रधानमंत्री द्वारा राष्ट्रीय पंचायत दिवस के अवसर पर 24 अप्रैल 2020 को ई-ग्राम स्वराज पोर्टल का शुभारम्भ किया गया। उन्होंने कहा कि इससे जहां एक ओर राजकीय कार्यों में पारदर्शिता बढ़ेगी वहीं पोर्टल के माध्यम से पंचायत को केन्द्रीय वित्त एवं राज्य वित्त व अन्य स्त्रोतों से प्राप्त धनराशि एवं पंचायत में कराये जा रहे विकास कार्यों की प्रगति के साथ-साथ अन्य जानकारी भी प्राप्त कर सकते हैं।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि पंचायतों को एक साथ धनराशि का डिजिटल हस्तान्तरण से पंचायतों को विकासपरक योजनाओं के साथ-साथ कोरोना वायरस महामारी से ग्रामवासियों केे बचाव हेतु आवश्यक उपायों और बाहर से आये नागरिकों को संस्थागत क्वारंटीन सबंधी व्यवस्था हेतु सामुदायिक भवनों की स्वच्छता, विद्युत व्यवस्था, पेयजल, सैनिटाइजेशन एवं अन्य आवश्यक कार्यों को पूर्ण करने में सहायता मिलेगी।

इस अवसर पर जानकारी दी गई कि वित्त विभाग के शासनादेश के अनुसार केन्द्रीय वित्त के संदर्भ में प्राथमिक अनुदान अनटाईड है, जिसका उपयोग स्थानीय निकायों द्वारा स्थान-विशिष्ट आवश्यकताओं के लिए किया जा सकता है। राज्य वित्त आयोग की अनुदान राशि से निर्वाचित जन प्रतिनिधियों का मानदेय पंचायतीराज विभाग द्वारा भुगतान किया जायेगा। अवशेष धनराशि में से 20 प्रतिशत धनराशि कोरोना महामारी के बचाव हेतु प्रचार-प्रसार, सेनेटाईजेशन व महामारी से सबंधित अन्य कार्यों पर व्यय की जायेगी। इसके अलावा जलापूर्ति व्यवस्था, सीवरेज ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, जल निकासी एवं स्वच्छता, सामुदायिक परिसम्पतियों के रख-रखाव, स्ट्रीट लाईट तथा आंगनबाड़ी भवनों का निर्माण-अतिरिक्त कक्षा कक्ष का निर्माण एवं सामुदायिक भवन निर्माण आदि विकास कार्य किये जायेंगे।

सरकार ने केवल नये पदों के सृजन पर रोक लगाई हैः मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कहा है कि प्रदेश में नई भर्तियों पर रोक नहीं लगायी गई है। केवल नये पदों के सृजन पर रोक लगाई गई है। पहले से सृजित पदों पर भर्ती पर रोक नहीं है। उन्होंने कहा कि इस सम्बन्ध में जारी शासनादेश में भी स्पष्ट किया गया है। इसके साथ ही चतुर्थ श्रेणी के पदों के साथ-साथ कतिपय विशिष्ट-तकनीकी कार्य हेतु सृजित वाहन चालक, माली, वायरमैन, इलेक्ट्रीशयन, प्लम्बर, मिस्त्री, लिफ्टमैन, ए.सी.-मैकेनिक एवं अन्य इसी प्रकार से रिक्त होने वाले पदों पर समस्त सेवायें अधिप्राप्ति नियमावली, 2017 के अध्याय-5 बाह्य स्त्रोत से सेवायें कराये जाने के अन्तर्गत नियम-61 से 64 तक स्थापित व्यवस्था के अनुरूप संविदा-आउटसोर्सिंग के आधार पर सम्पादित करवाया जानी है। चतुर्थ श्रेणी के पदों पर नई भर्ती पर सातवें वेतन आयोग द्वारा पूर्व में ही रोक लगाई हुई है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना प्रारम्भ की है। जिसके माध्यम से प्रदेश के युवा अपना काम शुरू कर सकते हैं। इसमें ऋण और अनुदान की व्यवस्था की गई है। इसमें ऑनलाइन भी आवेदन किया जा सकता है। अपने गांवों को वापस लौटे लोगों की आजीविका के लिए सरकार हर सम्भव प्रयास कर रही है। युवा अपनी ऊर्जा का उपयोग स्वरोजगार के लिए करें, सरकार हर कदम पर आप सभी के साथ है।
मुख्यमंत्री ने प्रदेश के युवाओं से स्वरोजगार की मुहिम से जुड़ने का आह्वान किया है। उन्होंने कहा के राज्य में बहुत से युवाओं ने बहुत अच्छा काम किया है। उन्होंने न केवल अपना व्यवसाय प्रारम्भ किया बल्कि बहुत से अन्य लोगों को भी रोजगार प्रदान किया। हम सब मिलकर सकारात्मक माहौल बनायें और अपनी देवभूमि में जन भागीदारी से एक नई स्फूर्ति का संचार करें।

ग्रीष्मकालीन राजधानी घोषित गैरसैण में स्थापित होगी ई-विधानसभा

भराड़ीसैण (गैरसैण) को प्रदेश की ग्रीष्मकालीन राजधानी घोषित किए जाने की अधिसूचना जारी कर दी गई है। मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने इस पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि भराड़ीसैण को आदर्श पर्वतीय राजधानी का रूप दिया जाएगा। आने वाले समय में भराड़ीसैण सबसे सुन्दर राजधानी के रूप में अपनी पहचान बनाएगी। भराड़ीसैण (गैरसैण) को ग्रीष्मकालीन राजधानी बनाने के लिए चार मार्च 2020 को की गई घोषणा सवा करोड़ उत्तराखंडवासियों की भावनाओं का सम्मान है। अब अधिसूचना लागू करने से भराड़ीसैण, गैरसैण आधिकारिक रूप से ग्रीष्मकालीन राजधानी हो गई है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि 2017 के विजन डाक्यूमेंट में गैरसैण को ग्रीष्मकालीन राजधानी बनाने की बात कही गई थी। क्षेत्र में बुनियादी ढांचे के विकास के लिए कार्ययोजना तैयार की जा रही है। इसमें प्लानर और विशेषज्ञों की राय भी ली जा रही है। भराड़ीसैण (गैरसैण) में राजधानी के अनुरूप वहां आवश्यक इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास किया जा रहा है। बड़े स्तर पर फाइलें न ले जानी पड़ी, इसके लिए ई-विधानसभा पर कार्य किया जा रहा है। इससे पेपरलैस कार्यसंस्कृति को बढ़ावा मिलेगा। पेयजल की सुचारू आपूर्ति के लिए रामगंगा पर चौरड़ा झील का निर्माण किया जा रहा है। इसके बनने के बाद भराड़ीसैण, गैरसैण और आसपास के क्षेत्र में ग्रेविटी पर जल उपलब्ध हो सकेगा।

गैरसैण की कनेक्टिविटी पर भी काम किया जा रहा है। भराड़ीसैण, गैरसैण को जोड़ने वाली सड़कों को आवश्यकतानुसार चौड़ा किया जाएगा। ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल प्रोजेक्ट पर तेजी से काम चल रहा है। इसके पूरा होने पर रेल गैरसैण के काफी निकट तक पहुंच जाएगी।

राहतः सीएम ने घोषणा कर धर्मशालाओं के बिजली बिल का फक्सड चार्ज हटाया

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने धर्मशालाओं को विद्युत के तीन माह के फिक्सड चार्ज से छूट देने की घोषणा की है। पूर्व में होटल, रैस्टोरेंट, ढाबा आदि को अप्रैल से जून तीन महीने के बिजली के फिक्सड चार्ज से छूट दी गई थी। धर्मशालाएं सम्मिलित नहीं थीं। सोमवार को मुख्यमंत्री ने धर्मशालाओ के फिक्सड चार्ज को भी माफ किए जाने की घोषणा करते हुए उन्हें बङी राहत दी है। इसके भार का वहन राज्य सरकार द्वारा किया जाएगा।

प्रशिक्षित शिक्षकों के जरिए स्कूलों के अध्यापकों को आपदा प्रबंधन की ट्रेनिंग दी जाएः त्रिवेन्द्र

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने शनिवार को आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की बैठक ली। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि आपदा प्रबंधन की दृष्टिगत युवाओं को प्रशिक्षण दिया जाय। ग्राम सभा में भी समय-समय पर लोगों को प्रशिक्षित किया जाए। स्कूलों में आपदा प्रबंधन से संबंधित सप्ताह में एक क्लास की व्यवस्था हो। उत्तराखंड की भौगोलिक परिस्थितियों के दृष्टिगत लोगों को आपदा प्रबंधन के लिए जागरूक करना जरूरी है। आगजनी घटनाओं एवं वर्षाकाल के लिए लोगों को प्रशिक्षित करना जरूरी है। आपदा की चुनौतियों का सामना करने के लिए समय-समय पर मॉक ड्रिल भी कराई जाए।

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र ने कहा कि आपदा प्रबंधन के लिए जो भी प्रशिक्षण दिए जा रहे हैं उनको और प्रभावी बनाने के लिए विशेषज्ञों की राय ली जाए जिन शिक्षकों को प्रशिक्षित किया गया है उनके माध्यम से सभी स्कूलों के अध्यापकों को भी ट्रेनिंग दी जाए आपदा प्रबंधन के दृष्टिगत संचार तंत्र को और अधिक मजबूत किया जाए।
मानसून के दृष्टिगत सभी तैयारियां पूरी कर ली जाय। आपदा की दृष्टि से संवेदनशील स्थानों का चिन्हीकरण किया जाय। आपदा रिस्पांस टाइम को कम से कम करने का प्रयास किया जाय। लोगों को कोविड 19 से बचाव के लिए विभिन्न माध्यमों से जागरूक किया जाय।

बैठक में उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा बताया गया कि मौसम से संबंधित सटीक जानकारियों के लिए मुक्तेश्वर एवं सुरकंडा में डॉप्लर रडार लगाने का कार्य चल रहा है। इस वर्ष 12321 युवक मंगल दल एवं 10908 युवक-युवतियों को आपदा प्रबंधन का प्रशिक्षण दिया गया। संचार तंत्र को सुदृढ़ करने के लिए तहसील स्तर पर 184 सेटेलाइट फोन उपलब्ध कराए गए हैं। 2012 से अब तक 27 आपदा से संवेदनशील ग्रामों के 699 परिवारों का पुनर्वास किया गया है। गढ़वाल मंडल में 84 एवं कुमाऊं मंडल में 100 भूकंप पूर्व चेतावनी तंत्र उपकरण स्थापित किए गए हैं। गंगा नदी पर कोटेश्वर से लेकर ऋषिकेश तक 8 संवेदनशील स्थानों पर बाढ़ चेतावनी तंत्र स्थापित किए गए हैं।

राज्य एवं जिला स्तर पर कार्मिकों को इंसीडेंट रिस्पांस सिस्टम का प्रशिक्षण दिया गया है। राज्य आपदा मोचन निधि के तहत प्रदेश के सभी जनपदों को कुल 98 करोड़ रुपए, चिकित्सा शिक्षा निदेशालय को 20 करोड़ रुपए, लोक निर्माण विभाग को 30 करोड़ रुपए, पेयजल संस्थान को 20 करोड़ रुपए एवं चिकित्सा स्वास्थ्य परिवार कल्याण विभाग को 16 करोड़ रुपए की धनराशि दी गई है।