अधिष्ठात्री मायादेवी मंदिर में पूजा के बाद मुख्यमंत्री ने पवित्र छड़ी यात्रा को रवाना किया

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने हरिद्वार में पंचदशनाम जूना अखाड़े की राज्य के चारधाम व अन्य तीर्थो की यात्रा पर जाने वाली पवित्र छड़ी यात्रा को रवाना किया। मौके पर सीएम ने मायादेवी मन्दिर परिसर से अधिष्ठात्री मायादेवी, छड़ी एवं भैरव देवता की पूजा अर्चना, आरती एवं परिक्रमा भी की। यात्रा पूरे प्रदेश का भ्रमण करने के पश्चात 12 अक्टूबर को वापस हरिद्वार पहुंचेगी।

सीएम त्रिवेन्द्र ने कहा कि इस छड़ी यात्रा के शुभारम्भ से उत्तराखण्ड में धार्मिक पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने इस यात्रा को आस्था एवं विश्वास से जुड़ा विषय बताते हुए कहा कि इससे समाज में सौहार्दता भी बढ़ेगी। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आम जनमानस इस छड़ी यात्रा के अवसर पर पवित्र छड़ी का पूजन कर पुण्य के भागी बनेंगे। उन्होंने कोविड-19 के दृष्टिगत छड़ी यात्रा के संचालन के दौरान आवश्यक एहतियात बरतने की भी अपेक्षा आयोजको से की।

जूना अखाड़ा के संरक्षक महंत स्वामी हरिगिरि ने बताया कि यह पवित्र यात्रा 17 सितम्बर की रात्रि को ऋषिकेश में विश्राम के बाद 18 सितम्बर को ऋषिकेश से देहरादून, मसूरी, लाखामण्डल होते हुये बड़कोट पहुंचेगी। 19 सितम्बर को बड़कोट से जानकी चट्टी होते हुये यमुनोत्री पहुंचेगी तथा उत्तरकाशी में रात्रि विश्राम के बाद 20 सितम्बर को उत्तरकाशी से गंगोत्री धाम पहुंच जायेगी। पवित्र छड़ी यात्रा में जूना अखाड़ा के राष्ट्रीय सभापति महंत प्रेम गिरि, महंत शिखर गिरि, महंत रणवीर गिरि, सचिव महंत महेश पुरी आदि शामिल रहेंगे। जूना अखाड़ा के संरक्षक महंत स्वामी हरिगिरि ने कहा कि छड़ी यात्रा प्रारम्भ करके मुख्यमंत्री ने एक बड़ी परम्परा का शुभारम्भ किया है। इससे पूर्व अधिष्ठात्री मायादेवी मन्दिर परिसर पहुंचने पर मुख्यमंत्री का भव्य स्वागत किया गया।
इस अवसर पर शहरी विकास, आवास मंत्री मदन कौशिक, मेला अधिकारी दीपक रावत, जिलाधिकारी सी रविशंकर, आईजी संजय गुंजयाल, महंत केदार पुरी, सभापति महंत सोहन गिरि, महंत पृथ्वी गिरि, महंत शिवानन्द सरस्वती, सचिव महंत महेश पुरी, शैलेन्द्र गिरि आदि उपस्थित थे।

पीएम मोदी पर आधारित पुस्तक का सीएम ने किया विमोचन
मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने भाजपा महानगर कार्यालय में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के जन्म दिवस के अवसर पर पुस्तक का विमोचन किया। उन्होंने प्रधानमंत्री के स्वस्थ एवं सुदीर्घ जीवन की कामना की। कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश ने पूरे विश्व में ख्याति प्राप्त की। इस अवसर पर देश में कार्यकर्ताओं द्वारा रक्तदान, प्लाज्मा डोनेट एवं अस्पतालों में फल वितरण के कार्य किये जा रहे हैं। यह सप्ताह सेवा सप्ताह के रूप में मनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि एक कर्मयोगी जिन्होंने अपने जीवन का एक-एक क्षण देश को समर्पित किया है। उनके जन्म दिवस पर पार्टी के कार्यकर्ताओं द्वारा जन सहयोग कर सराहनीय कार्य किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि कोविड-19 के दौरान कार्यकर्ताओं, स्वयंसेवी संस्थाओं ने भी लोगों का सहयोग किया है। कोविड से बचाव का सबसे अच्छा तरीका फिजिकल डिस्टेंस और मास्क का उपयोग है। राज्य में कोविड की टेस्टिंग बढ़ाई गई है। मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि कल राज्य में भाजपा सरकार के साढ़े तीन वर्ष पूरे हो रहे हैं। इन तीन वर्षों में जनता से किये गये वायदों को पूरा करने के लिए प्रयासरत हैं। इस दौरान राज्य सरकार पर कोई भ्रष्टाचार का आरोप नहीं लगा है।

विस सत्र को लेकर सीएम और स्पीकर ने किया निरीक्षण
23 सितंबर से प्रारंभ होने वाले विधानसभा सत्र को लेकर गुरूवार को सचिवालय स्थित विश्वकर्मा भवन के वीर चंद्र सिंह गढ़वाली सभागार का मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत एवं विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल ने निरीक्षण किया।

अब अपणि सरकार पोर्टल से ई-डिस्ट्रिक्ट सेवाएं उपलब्ध होंगी

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने जनता के लिए ‘अपणि सरकार’ पोर्टल बनाने के निर्देश दिये। अब सभी ई-डिस्ट्रक्ट की सेवाएं ‘अपणि सरकार’ पोर्टल के माध्यम से उपलब्ध कराई जायेंगी। यह पोर्टल आईटीडीए एवं एनआईसी के सहयोग से विकसित किया जायेगा। सचिवालय में सेवा का अधिकार एवं ई-डिस्ट्रिक पोर्टल की प्रगति की समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिये कि सेवा के अधिकार के अन्तर्गत सभी 243 नोटिफाईड सेवाओं को तीन माह के अन्दर ऑनलाईन किया जाय। जिससे जनता घर बैठे ही इन सेवाओं का लाभ उठा सके।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने निर्देश दिये कि सभी विभागों के विभागाध्यक्षों को इसके लिए नोडल ऑफिसर बनाया जाय। सेवा के अधिकार आयोग के मुख्य आयुक्त की अध्यक्षता में नोडल अधिकारियों की विभागवार बैठक होगी। सेवा के अधिकार के अन्तर्गत सभी नोटिफाईड सेवाओं की मुख्य सचिव की अध्यक्षता में प्रतिमाह एवं मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में प्रति दो माह में प्रगति की समीक्षा होगी। दोनों मण्डलों के कमिश्नर भी 15 दिन में अपने मंडलों के जिलाधिकारियों के साथ वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से सेवा का अधिकार एवं ई-डिस्ट्रिक की समीक्षा करेंगे।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि जो सेवाएं अभी अधिसूचित नहीं हैं, उन सेवाओं को भी सेवा के अधिकार अधिनियम में शामिल किया जाय। अधिकारी यह सुनिश्चित करें कि यदि किसी प्रमाण पत्र या अन्य दस्तावेज में जो आपत्तियां हैं, उनका उल्लेख एक बार में ही हो जाय। जिससे जनता के समय की बचत भी होगी और अनावश्यक परेशानी भी न हो। नोटिफाईड सेवाओं को ऑनलाईन करने के लिए विभागवार लक्ष्य निर्धारित किया जाय। अधिक उपयोग में आने वाली सेवाओं को ऑनलाईन करने के लिए पहले प्राथमिकता दी जाये। सेवा के अधिकार अधिनियम के तहत सेवाओं को समय पर डिलीवर न करने वाले विभागों और अधिकारियों को चिन्हित किया जाय। सेवा के अधिकार कार्यालय में मोनेटरिंग डैशबोर्ड बनाया जाय। कोविड-19 के दृष्टिगत अधिक से अधिक नागरिक सेवाएं ऑनलाईन माध्यम से उपलब्ध कराई जाय।

योग विषय पर लिखी मनोज श्रीवास्तव की पुस्तक को सीएम ने किया लांच

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने मुख्यमंत्री आवास में सूचना विभाग में कार्यरत सहायक निदेशक मनोज श्रीवास्तव द्वारा लिखित पुस्तक ‘‘राजयोग में साइलेंस की शक्ति और डिप्रेशन से मुक्ति’’ का लोकार्पण किया। योग विषय पर लिखी गई पुस्तक को आधुनिक, समसायिक समय मे अत्यंत उपयोगी बताते हुये मुख्यमंत्री ने कहा कि योग आज की आवश्यकता की मांग है।

इस पुस्तक के लेखक मनोज श्रीवास्तव ने बताया कि मुंबई की डॉ. शिप्रा मिश्रा के सहयोग से लिखी गई। इस पुस्तक में कोरोना काल में बढ़ती मानसिक समस्याओं का व्यावहारिक समाधान प्रस्तुत किया गया है। योग पर आधारित इस पुस्तक में बताया गया है कि भाग-दौड़ के जीवन में हमने कभी भी रुककर, अपने मन या आत्मा में झांकने का प्रयास नही किया है। मन या आत्मा पर ध्यान न देने के कारण हम अंदर से खालीपन, अकेलापन का शिकार हो गये है। इससे हम भय, चिंता, निराशा और हताशा का जीवन जी रहें है।

पुस्तक से हमें लीडरशिप क्वालिटी, मेंटल इमोशनल आर्ट की जानकारी मिलती है, यह हमारे जीवन के लिए एक गाईड है, जिसके माध्यम से हम जीवन मूल्यों और सिद्धान्तों को ग्रहण कर सकते हैं। भावनात्मक प्रबन्धन के लिए ईमोशनल कोसेंट और आध्यात्मिक जीवन के लिए स्प्रीचुअल कोसेंट की विस्तार से चर्चा की गयी है। पुस्तक के विभिन्न अध्यायों में नींद की समस्या का समाधान, विजन और गोल में अन्तर, अवचेतन मन की शक्ति को डिप्रेशन के प्रमुख समाधान के रूप में प्रस्तुत किया गया है।

त्रिवेंद्र सरकार कर रही कोरोना संक्रमण पर वार

चीन की लैब से जन्मे कोरोना वायरस ने आज संपूर्ण विश्व को अपनी चपेट में ले रखा है। भारत में ताजा आंकड़ों के अनुसार, अब तक 49,30,236 लोग संक्रमित हो चुके है, जबकि 38,59,399 मरीज कोरोना से जंग जीत चुके है। वहीं, 80,776 ने संघर्ष करते हुए कोरोना से जंग हार ली। उत्तराखंड में नजर डालें तो यहां अब तक एक्टिव केस मात्र 5445 हैं, जो अन्य राज्यों की तुलना में काफी कम हैं। मगर, इन आंकड़ों से संतुष्ट होने के बजाए इसे रोकना एक चुनौती है और इस चुनौती को उत्तराखंड की त्रिवेन्द्र सरकार ने स्वीकार किया है। त्रिवेंद्र सिंह रावत की सरकार लगातार इस मामले में अपनी पैनी नजर बनाए हुए है। इसके लिए राज्य सरकार ने 104 हेल्पलाइन नंबर भी जारी किया है। यहीं नहीं, शुरूआत से ही रावत सरकार ने एक्टिव केस को बढ़ने से रोकने को लेकर कई महत्वपूर्ण कदम उठाए, इनमें राज्य की सीमाओं पर पुलिस की चैकसी है।

कोरोना संक्रमण और लाॅकडाउन के चलते राज्य के ज्यादातर नागरिकों की आर्थिक स्थिति गड़बड़ा गई है, ऐसे में कोरोना टेस्ट शुल्क व्यय करना भी इन नागरिकों के लिए काफी मुश्किल था। इस मुश्किल दौर में त्रिवेंद्र सरकार ने एक बहुत बड़ा राहत पहुंचाने वाला फैसला लिया। निजी अस्पतालों में अटल आयुष्मान योजना के तहत कोरोना का ईलाज किया जायेगा। यह अन्य रोगों की भांति निःशुल्क होगा। वहीं इस फैसले के अलावा भी प्रदेश के निजी अस्पतालों में केंद्र की ओर से तय दरों का 80 प्रतिशत उपचार शुल्क लिया जाएगा। इसमें 1200 और 2000 रुपये पीपीई किट का खर्च और बिस्तर, भोजन, निगरानी, नर्सिंग देखभाल, डॉक्टरों का परामर्श, कोविड जांच ऑक्सीजन समेत अन्य सुविधाएं भी शामिल हैं।

लोगों में कोरोना के प्रति जागरूकता लाने के लिए त्रिवेंद्र सरकार ने राज्य की पुलिस को सख्त निर्देश दिए हैं। राज्य में बिना मास्क आवागमन करने वाले लोगों पर पुलिस चालानी कार्रवाई कर मास्क उपलब्ध करवा रही है, तो वहीं, सोशल डिस्टेंस का पालन कराने में भी मित्र पुलिस अहम रोल अदा कर रही है। स्वयं मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत और उनका मंत्रिमंडल भी इस नियम को फाॅलो कर रहा है।

एक्टिव केस को बढ़ने से रोकने के लिए सरकार ने अब अहम निर्णय लिया है, इसके चलते नेगेटिव रिपोर्ट के बिना कोई भी राज्य की सीमा पर प्रवेश नहीं कर सकेगा। चार दिन की नेगेटिव रिपोर्ट लेकर आने वालों को क्वांरटीन नहीं होना होगा। रिपोर्ट न होने पर कोविड लोड शहरों से आने वालों को सात दिन संस्थागत क्वारंटीन जबकि अन्य शहरों से आने वालों को 14 दिन के लिए होम क्वारंटीन होना होगा।

इसके अलावा सरकार ने सावन मास की कांवड़ यात्रा को स्थगित किया लेकिन आस्था से कोई समझौता ना करते हुए गंगाजल को अन्य शहरों में उपलब्ध कराया। इससे कोरोना के मामले में बढ़ोतरी होने से बड़ी कामयाब मिली। इसके अलावा त्रिवेंद्र सरकार ने 21 सितंबर से कक्षा नौ और 12वीं तक के छात्रों के लिए खुलने जा रहे स्कूलों पर भी रोक लगा दी है। राज्य सरकार का यह निर्णय कोरोना के मामले को रोकने में महत्वपूर्ण निर्णय साबित हो रहा है। सरकार के इस निर्णय से न सिर्फ अभिभावक बल्कि विशेषज्ञों ने भी सराहा है।

शासन के बड़े अधिकारियों की मानें तो सरकार ने कोरोना की रोकथाम के लिए जिस प्रकार से कार्य किया है वह अन्य राज्यों की तुलना में इक्कीस साबित हुआ है। कोविड सेन्टर के लिए सरकार ने प्राईवेट सेन्टर बनाये है जिनमें कई होटल भी शामिल है। जिससे लोगों को बड़ी राहत मिल रही है। शुरुआत दौर में सरकार को थोड़ा कठिनाई जरुर हुई लेकिन मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र रावत की इच्छा शक्ति से इस ओर कामयाबी मिली है। निरन्तर जिलाधिकारियों और शासन के उच्च स्तर के अधिकारियों से संवाद और निर्देशन मुख्यमंत्री की कार्यकुशलता को दर्शाता है।

कुंभ मेला के कार्यों को टाईमबाउंड तरीके से पूरा करने के निर्देश

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने सीएम आवास में वरिष्ठ अधिकारियों के साथ कुम्भ मेला 2021 की तैयारियों की समीक्षा की। मुख्यमंत्री ने कहा कि कुम्भ मेले के स्वरूप के बारे में अखाड़ा परिषद के संत महात्माओं के मार्गदर्शन में कोविड-19 की उस समय की परिस्थिति के अनुसार निर्णय लिया जाएगा।

संतों के आशीर्वाद से इस आयोजन को सभी धार्मिक परम्पराओं का पालन करते हुए बेहतर तरीके से सम्पन्न किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कुम्भ मेले के कार्यों को टाईमबाउंड तरीके से पूरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर और सुविधाओं की पुख्ता व्यवस्थाएं सुनिश्चित कर ली जाएं। तैयारियों में कोविड-19 की उस समय की सम्भावित परिस्थितियों का भी ध्यान रखा जाए। जहां जरूरी हो, अन्य राज्यों से भी आवश्यक सहयोग के लिये संबंधित अधिकारियों से सम्पर्क कर समन्वय किया जाए। मेलाधिकारी दीपक रावत ने कुम्भ मेला क्षेत्र में सड़क, घाट, पार्किंग, शौचालय, सोलिड वेस्ट मैनेजमेंट, स्वास्थ्य सुविधाएं आदि की जानकारी दी। आईजी कुम्भ मेला संजय गुन्ज्याल ने क्राउड मैनेजमेंट और ट्रेफिक प्लान पर प्रस्तुतिकरण दिया।

उद्यमिता, नवाचार एवं स्टार्टअप को बढ़ावा देने के लिए राज्य में यह नई पहल

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत की अध्यक्षता में सचिवालय में ‘मुख्यमंत्री सलाहकार समूह’ की प्रथम बैठक आयोजित की गई। राज्य में नवाचार और उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए उत्तराखण्ड सरकार ने ‘‘स्टार्टअप, नवाचार और उद्यमिता पर मुख्यमंत्री सलाहकार समूह’’ स्थापित किया है। राज्य में स्टार्टअप ईकोसिस्टम विकसित करने के लिए इस समूह द्वारा नवाचार और उद्यमिता के लिए राज्य में एक अनुकूल पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने, अनुसंधान और नये उत्पादों, सेवाओं, व्यापार मॉडल के विकास को प्रोत्साहित करने, उपयुक्त पॉलिसी योजनाओं और आवश्यक समर्थन प्रणाली को विकसित करने हेतु परामर्श देना है। इसके अलावा पाठ्यक्रम, मॉड्यूल प्रशिक्षण, कार्यशालाओं और क्षमता निर्माण कार्यक्रमों में नवाचार और उद्यमशीलता के बारे में जागरूकता, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय निकायों और एजेंसियों के साथ आवश्यक साझेदारी हेतु सलाह देना है। बनाए गए ‘मुख्यमंत्री सलाहकार समूह’ में 07 सरकारी एवं 06 गैर सरकारी सदस्य शामिल हैं।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कहा कि आत्मनिर्भरता के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा लोकल के लिए वोकल बनने की जो बात कही गई यह उस दिशा में प्रयास है। उद्यमिता, नवाचार एवं स्टार्टअप को बढ़ावा देने के लिए राज्य में यह नई पहल की जा रही है। जिसमें सरकारी के साथ ही विभिन्न क्षेत्रों के गैर सरकारी विशेषज्ञों को शामिल किया गया है। इन विशेषज्ञों की सलाह से राज्य के औद्योगिक विकास एवं हिमालयी उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए विशेष प्रयास किये जायेंगे। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड विविध जैव विविधताओं वाला राज्य है, यहां कि जैव विविधता का फायदा लेते हुए इस दिशा में अनेक कार्य हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड जैसे नवोदित राज्य में औद्योगिक विकास की बहुत संभावनाएं हैं। राज्य में इन्वेस्टर समिट के दौरान सवा लाख करोड़ के एमओयू हस्ताक्षरित किये गये। जिसमें से 25 हजार करोड़ के कार्यों की ग्राउंडिंग हो चुकी है। मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि कोविड 19 के जिस दौर से हम गुजर रहे हैं, उससे औद्योगिक गतिविधियां जरूर प्रभावित हुई हैं। इस दौर दिक्कतें भी आई हैं और नई संभावनाएं भी विकसित हुई हैं। उन्होंने कहा कि इस समूह के विशेषज्ञों द्वारा उत्तराखण्ड में मेडिकल एवं मेंटल हेल्थ को लेकर क्या कार्य हो सकते हैं, इस पर जरूर सुझाव दें। उन्होंने कहा कि ग्रुप के सभी सदस्यों के सुझावों पर गम्भीरता से कार्य किया जायेगा।

वीडियो कांफ्रेंस से विशेषज्ञों के सुझाव
वीडियो कांफ्रेंस से कोविड-19 के कारण उत्पन्न हुई चुनौतियों और अवसरों, नवाचार और उद्यामिता को बढ़ावा देने के लिए नई पहलों पर चर्चा की गई। इंडियन एंजल नेटवर्क के फाउण्डर डॉ. सौरभ श्रीवास्तव ने सुझाव दिया कि राज्य में उद्यमिता के विकास के लिए जो भी योजना बने राज्य की भौगोलिक परिस्थितियों के हिसाब से बने। स्टार्टअप के तहत जॉब क्रियेशन पर विशेष ध्यान दिया जाय। उत्तराखण्ड के उत्पादों की अलग ब्रांडिंग हो, वैल्यू एडिशन पर विशेष ध्यान दिया जाय। नैना लाल किदवई ने कहा कि रूरल टूरिज्म एवं होम स्टे को बढ़ावा दिया जाय। एग्रो प्रोसेसिंग एवं फोरेस्टरी सेक्टर में अनेक कार्य किये जा सकते हैं। विनीत नायर ने कहा कि मेंटल हेल्थ के क्षेत्र में अनेक कार्य हो सकते हैं। हमें सबसे पहले बच्चों के मेंटल हेल्थ पर फोकस करना होगा। स्टार्टअप का भविष्य साइंस और तकनीक पर आधारित है। इस दिशा में पर्वतीय क्षेत्रों में विशेष ध्यान देने की जरूरत है। रमन रॉय ने कहा कि लाईवलीहुड बिजनेस पर ध्यान देने की जरूरत है। राज्य बिजनेस के कल्चर को प्रमोट करने की जरूरत है। विभिन्न सेक्टर में कार्य करने के लिए प्रत्येक सेक्टर के लिए सेंटर ऑफ एक्सीलेंस बनाने होंगे। संजीव बिखचंदानी ने कहा कि राज्य में कुछ बड़े उद्योग स्थापित करने होंगे। ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के तहत अनेक कार्य किये जा सकते हैं।

पौड़ी में युवाओं के सामूहिक प्रयासों की सीएम त्रिवेंद्र ने की तारीफ, कहा लोगों को प्रेरणा लेने की जरूरत

सीएम त्रिवेंद्र रावत ने घंडियाल में टीएनवीएसई ग्रुप द्वारा उत्पादित पहाड़ी उत्पादों के प्लांटेशन एवं पायलेट प्रोजेक्ट का निरीक्षण किया। निशुल्क स्वास्थ्य शिविरों को लेकर समाजसेवी राकेश बिजल्वाण की सराहना की।

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि उत्तराखंड में अनेक नौजवान कठिन परिस्थितियों के कारण घर की ओर वापस लौटे हैं। युवाओं को स्वरोजगार के लिए पर्याप्त अवसर मिले, इसके लिए राज्य में मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना शुरू की गई है। इस योजना में लगभग सभी प्रकार के कार्यों को शामिल किया गया है। पौड़ी में युवाओं द्वारा सामूहिक प्रयासों से सराहनीय कार्य किया जा रहा है। अन्य लोगों को भी इससे प्रेरणा लेकर कार्य करने होंगे।

स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार निरंतर प्रयासरत है। देवभूमि उत्तराखंड में स्वरोजगार की अपार संभावनाएं भी हैं। उत्तराखंड विभिन्न प्रकार की जैव विविधता वाला राज्य है। हिमालय की जड़ी बूटियों के उत्पादों से हम हिमालयी ब्रांडो की मार्केटिंग कर सकते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने राज्य में ग्रोथ सेंटर की शुरुआत की है, प्रदेश में 100 से अधिक ग्रोथ सेंटर प्रारंभ हो चुके हैं। सभी न्याय पंचायतों में एक-एक ग्रोथ सेंटर बनाए जा रहे हैं। सभी ग्रोथ सेंटरों का कॉन्सेप्ट अलग होगा।

फ्रीजर वैन को सीएम ने दिखाई हरी झंडी, रवाना

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कल्जीखाल विख के घण्डियाल में टीएनवी एस ई ग्रुप के द्वारा की जा रही खेती का स्थलीय निरीक्षण किया, उन्होंने काश्तकारों की मेहनत की सराहना की। इस मौके पर मुख्यमंत्री द्वारा क्षेत्र के उत्पादों को बाजार तक पंहुचाने हेतु एक फ्रीजर वैन को भी हरी झंडी दिखाई। रतनपुर घण्डियाल में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र ने टीएनवी ग्रुप के दिनेश रावत, धीरेंद्र रावत, परम जय, मानंजय व सहयोगियों के प्रयासों की सराहना की। इससे पूर्व सीएम ने यहां पर हो रही खेती व बागवानी का निरीक्षण भी किया।

समाजसेवी राकेश बिजल्वाण की सीएम ने की सराहना

मुख्यमंत्री ने विचार एक नई सोच के सम्पादक व चैखम्बा ग्रुप के राकेश बिजल्वाण की सराहना की। कहा कि पलायन एक चिंतन समूह के रतन सिंह असवाल, राकेश बिजल्वाण, गणेश काला के अतिरिक्त राज्यमंत्री दर्जा प्राप्त अतर सिंह असवाल, वेद प्रकाश वर्मा, जिलाधिकारी धीरज गब्र्याल, एसपी कोटद्वार पीके रॉय, सीओ कोटद्वार अनिल जोशी आदि मौजूद रहे। कार्यकम का संचालन राजकीय शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष जयदीप रावत द्वारा किया गया।

एयर मार्शल ने मुख्यमंत्री से किया चैखुटिया में एयरपोर्ट के लिए भूमि उपलब्ध कराने का अनुरोध

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत से एयर मार्शल राजेश कुमार एवीएसएम वीएम एडीसी एओसी-इन-सी, सेंट्रल एयर कमांड आईएएफ ने मुलाकात की। उन्होंने सामरिक महत्व के दृष्टिगत उत्तराखण्ड के पर्वतीय क्षेत्रों में एयर फोर्स की गतिविधियों के क्रियान्वयन हेतु एयर डिफेन्स राडार तथा एडवांस लैंडिंग ग्राउंड की स्थापना आदि हेतु भूमि की व्यवस्था के संबंध में मुख्यमंत्री से वार्ता की।

मुख्यमंत्री ने एयर मार्शल की अपेक्षानुसार उत्तराखण्ड में एयरफोर्स की गतिविधियों के संचालन हेतु भूमि की उपलब्धता के लिये एयर फोर्स एवं शासन स्तर पर नोडल अधिकारी नामित करने के निर्देश दिये। ये अधिकारी संयुक्त रूप से आवश्यकतानुसार भूमि चिन्हीकरण आदि के संबंध में त्वरित कार्यवाही सुनिश्चित करेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड सैनिक बाहुल्य प्रदेश है सेना को सम्मान देना यहां के निवासियों की परम्परा रही है। सैन्य गतिविधियों के लिये भूमि की उपलब्धता के लिये राज्य वासियों का सदैव सहयोगात्मक रवैया रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि पंतनगर एयर पोर्ट को ग्रीन फील्ड एयर पोर्ट तथा जौलीग्रांट को अंतरराष्ट्रीय स्तर की सुविधाओं से युक्त बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पूर्व में भी चैखुटिया में एयर पोर्ट के निर्माण हेतु सैन्य अधिकारियों द्वारा इस स्थान को उपयुक्त बताया गया था। उन्होंने कहा कि राज्य में एयर फोर्स को उसकी गतिविधियों के संचालन हेतु भूमि की व्यवस्था प्राथमिकता के आधार पर सुनिश्चित की जायेगी।

एयर मार्शल राजेश कुमार एवीएसएम वीएम एडीसी एओसी-इन-सी, सेंट्रल एयर कमांड आईएएफ ने मुख्यमंत्री से पंतनगर, जौलीग्रान्ट तथा पिथौरागढ़ हवाई अड्डे के विस्तार के साथ ही चैखुटिया में एयर पोर्ट हेतु भूमि उपलब्ध कराने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि देश के उत्तर पूर्व क्षेत्र की भांति, उत्तराखण्ड के जनपद चमोली, पिथौरागढ़ तथा उत्तरकाशी क्षेत्र में राडार की स्थापना हेतु भूमि की उपलब्धता होने से सुविधा रहेगी। उन्होंने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में उत्तराखण्ड जैसे सीमांत क्षेत्र में उपयुक्त स्थलों पर राडार एवं एयर स्ट्रिप की सुविधा जरूरी है। उन्होंने उत्तराखण्ड में एयर फोर्स की गतिविधियों के लिये दिये जा रहे सहयोग के लिये मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया।

अन्य आध्यात्मिक स्थलों को भी बदरीनाथ के मास्टर प्लान में शामिल किया जाएः मोदी

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के समक्ष वीडियो कांफ्रेंसिग द्वारा श्री बदरीनाथ धाम के मास्टर प्लान पर प्रस्तुतीकरण दिया गया। साथ ही श्री केदारनाथ धाम के पुनर्निर्माण कार्यों की प्रगति की भी जानकारी दी गई। इस अवसर पर मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत, पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज, मुख्य सचिव ओमप्रकाश, सचिव दिलीप जावलकर आदि उपस्थित थे।

प्रधानमंत्री ने निर्देश दिये कि श्री बदरीनाथ धाम के मास्टर प्लान में इस बात का विशेष ध्यान रखा जाए कि वहां का पौराणिक और आध्यात्मिक महत्व बना रहे। मिनी स्मार्ट, स्पिरीचुअल सिटी के रूप में विकसित किया जाए। होम स्टे भी विकसित जा सकते हैं। निकटवर्ती अन्य आध्यात्मिक स्थलों को भी इससे जोङा जाए। बदरीनाथ धाम के प्रवेश स्थल पर विशेष लाइटिंग की व्यवस्था हो जो आध्यात्मिक वातावरण के अनुरूप हो। बद्रीनाथ का मास्टर प्लान का स्वरूप पर्यटन पर आधारित न हो बल्कि पूर्ण रूप से अधात्मिक हो। प्रधानमंत्री ने केदारनाथ धाम के पुनर्निर्माण कार्यों की भी समीक्षा की।

बदरीनाथ व केदारनाथ धाम में स्थानीय लोगों को मिल रहा सहयोग
मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कहा कि बदरीनाथ धाम व केदारनाथ धाम के विकास कार्यों में स्थानीय लोगों का सहयोग मिल रहा है। निकटवर्ती गांवों में होम स्टे पर काम किया जा रहा है। सरस्वती व अलकनंदा के संगम स्थल केशवप्रयाग को भी विकसित किया जा सकता है। बदरीनाथ धाम में व्यास व गणेश गुफा का विशेष महत्व है। इनके पौराणिक महत्व की जानकारी भी श्रद्धालुओं को मिलनी चाहिए। बदरीनाथ धाम के मास्टर प्लान पर काम करने में भूमि की समस्या नहीं होगी। केदारनाथ की तरह बद्रीनाथ में भी 12 महीने कार्य किए जाएंगे।

पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने कहा कि ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना और चारधाम राजमार्ग परियोजना पर तेजी से काम चल रहा है। इससे श्रद्धालुओं के लिए चारधाम यात्रा काफी सुविधाजनक हो जाएगी।

बदरीनाथ धाम के मास्टर प्लान पर प्रस्तुतीकरण में बताया गया कि इसमें 85 हैक्टेयर क्षेत्र लिया गया है। देवदर्शिनी स्थल विकसित किया जाएगा। एक संग्रहालय व आर्ट गैलेरी भी बनाई जाएगी। दृश्य एवं श्रव्य माध्यम से दशावतार के बारे में जानकारी दी जाएगी। बदरीनाथ मास्टर प्लान को 2025 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। मास्टर प्लान को पर्वतीय परिवेश के अनुकूल बनाया गया है।

मुख्य सचिव ओमप्रकाश ने केदारनाथ धाम के पुनर्निर्माण कार्यों की प्रगति की भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि शंकराचार्य के समाधि स्थल का काम तेजी से चल रहा है। सरस्वती घाट पर आस्था पथ का काम पूरा हो गया है। दो ध्यान गुफाओं का काम इस माह के अंत तक पूर्ण हो जाएगा। ब्रह्म कमल की नर्सरी के लिए स्थान चिन्हित कर लिया गया है। नर्सरी के लिए बीज एकत्रीकरण का कार्य किया जा रहा है। ब्रिज का पुनर्निर्माण कर लिया गया है।

पौधों का सर्वाईवल रेट बढ़ाने पर दिया जाए ध्यानः त्रिवेन्द्र

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत की अध्यक्षता में सचिवालय में उत्तराखण्ड कैम्पा की बैठक हुयी। मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि वनों के विकास के लिए पौधारोपण के साथ-साथ उनकी सुरक्षा पर भी ध्यान दिए जाने की आवश्यकता है। पौधों का सर्वाईवल रेट बढ़ाने के लिए लगातार मॉनिटरिंग की जानी चाहिए। इसके लिए अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वन विभाग रोजगार सृजन के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। उन्होंने कहा कि कोविड-19 के दृष्टि गांवों को लौटे प्रदेशवासियों को रोजगार उपलब्ध कराने हेतु जल संरक्षण, पौधारोपण, नर्सरी विकास एवं वन सम्पत्ति की सुरक्षा के क्षेत्र में रोजगार सृजित किए जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि अपने प्रदेश को वापस लौटे लोगों को रोजगार की आवश्यकता है। राज्य सरकार द्वारा लगभग 10 हजार लोगों को ऊर्जा विभाग के माध्यम से 25 वॉट के सोलर प्लांट्स के माध्यम से रोजगार उपलब्ध कराया जा रहा है। वन विभाग द्वारा भी कम से कम 10 हजार लोगों को रोजगार देने के प्रयास किए जाएं। इससे हमारे गांव एवं हमारे वन दोनों लाभान्वित होंगे।

मुख्यमंत्री ने बुग्यालों के संवर्द्धन के लिए कॉयर नेट और पिरूल चेकडैम के साथ ही भीमल के इस्तेमाल पर ध्यान देने की बात कही। उन्होंने कहा कि वन्य पशुओं से सुरक्षा के लिए सोलर फेंसिंग बहुत ही कारगर है परन्तु सोलर फेंसिंग की सुरक्षा के लिए लोगों को भी जागरूक किए जाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि मानव वन्यजीव संघर्ष रोकथाम के लिए विशेष प्रयास किए जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि जल संवर्धन हेतु वन विभाग द्वारा किए जा रहे प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि जल संवर्धन हेतु चेकडैम, चालखाल एवं ट्रेंच निर्माण के अच्छे परिणाम रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमालयन दिवस के अवसर पर प्रदेश के स्कूल एवं कॉलेजों को 10 हजार पर्यावरण एवं प्रकृति के प्रति जागरूकता के लिए 10-10 हजार रूपए की राशि उपलब्ध कराई जा सकती है। इससे स्कूल एवं कॉलेज के माध्यम से प्रकृति के प्रति जनजागरूकता फैलायी जा सकेगी।

वन मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत ने कहा कि वन विभाग द्वारा वनों के संरक्षण एवं संवर्धन हेतु लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। श्रम विभाग द्वारा लगभग 10 हजार लोगों को भीमल के लिए प्रशिक्षण दिया गया था। इन प्रशिक्षित लोगों का प्रयोग बुग्यालों के संवर्धन हेतु कॉयर नेट और पिरूल चेकडैम आदि के निर्माण के लिए किया जा सकता है।