धामी नेतृत्व में उत्तराखण्ड विकास और निवेश का नया केंद्र बनकर उभराः राज्यपाल

राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि) एवं मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आईडीपीएल ग्राउंड, ऋषिकेश में आयोजित ‘सेवा, सुशासन एवं समर्पणरू जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार’ सेवा पखवाड़ा कार्यक्रम में प्रतिभाग करते हुए प्रदेशवासियों को संबोधित किया। इस अवसर पर राज्यपाल एवं मुख्यमंत्री ने देहरादून जनपद की ₹219 करोड़ से अधिक लागत की 51 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण एवं शिलान्यास किया।

राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि) ने कहा कि यह अभियान लोकसेवा, सुशासन और जनकल्याण के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता का सशक्त प्रतीक है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की वास्तविक सफलता तभी है, जब शासन की योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम छोर पर खड़े प्रत्येक नागरिक तक सम्मान, संवेदनशीलता, पारदर्शिता और समयबद्धता के साथ पहुँचे। राज्यपाल ने इस अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को मुख्यमंत्री के रूप में पांच वर्ष से अधिक समय तक दायित्व निभाने की उपलब्धि पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ दीं। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि जनता के विश्वास, लोकतांत्रिक स्थिरता और विकास की निरंतरता का प्रतीक है।

राज्यपाल ने कहा कि उत्तराखण्ड ने पिछले वर्षों में मुख्यमंत्री के नेतृत्व में अनेक ऐतिहासिक एवं दूरदर्शी निर्णय लिए हैं। समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने वाला उत्तराखण्ड देश का पहला राज्य बना, जिसने समानता, न्याय और सामाजिक समरसता की भावना को सुदृढ़ किया है। उन्होंने कहा कि युवाओं के हितों की रक्षा के लिए सशक्त नकल विरोधी कानून, जबरन धर्मांतरण और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुँचाने वालों के विरुद्ध कठोर कानूनी प्रावधान तथा प्रभावी भू-कानून जैसे निर्णय जनहित और सुशासन के प्रति राज्य की प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं। राज्यपाल ने कहा कि राज्य की विकास यात्रा में महिलाओं, युवाओं, किसानों और सीमांत क्षेत्रों के नागरिकों की सहभागिता अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने महिलाओं को सरकारी सेवाओं में 30 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण, स्वयं सहायता समूहों के सशक्तीकरण तथा ‘लखपति दीदी’ जैसी योजनाओं को महिला सशक्तीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।

राज्यपाल ने कहा कि केदारनाथ एवं बदरीनाथ धाम के पुनर्विकास कार्य, पर्यटन और होमस्टे योजना के विस्तार, ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट, जी-20 बैठकों, राष्ट्रीय खेलों तथा आधारभूत संरचना परियोजनाओं ने उत्तराखण्ड को विकास और निवेश के नए केंद्र के रूप में स्थापित किया है। उन्होंने युवाओं से स्टार्टअप और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) जैसे नवाचार आधारित क्षेत्रों में आगे बढ़ने का आह्वान किया। राज्यपाल ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा दिया गया ‘21वीं सदी का तीसरा दशक उत्तराखण्ड का दशक होगा’ का संदेश राज्य की क्षमता और संभावनाओं पर उनके विश्वास का परिचायक है। उन्होंने कहा कि सेवा, सुशासन और जनभागीदारी के माध्यम से इस संकल्प को साकार किया जा सकता है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि आज से पांच वर्ष पूर्व उन्हें देवभूमि उत्तराखण्ड की सेवा का अवसर प्राप्त हुआ था और यह यात्रा जनसेवा, सुशासन एवं समर्पण की भावना के साथ निरंतर आगे बढ़ रही है। उन्होंने इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त करते हुए प्रदेश की जनता का विश्वास, स्नेह एवं आशीर्वाद ही अपनी सबसे बड़ी शक्ति बताया। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार के लिए यह अवसर उत्सव का नहीं, बल्कि आत्ममंथन एवं जनसेवा के संकल्प को और अधिक मजबूत करने का है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य वर्ष 2035 तक उत्तराखण्ड को विकसित एवं श्रेष्ठ राज्य बनाना है। इसी उद्देश्य से प्रदेश में आधारभूत संरचना, शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, सड़क, कृषि, पर्यटन, उद्योग, निवेश, स्वरोजगार एवं सीमांत क्षेत्रों के विकास पर विशेष बल दिया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार युवाओं के लिए रोजगार एवं स्वरोजगार के नए अवसर सृजित कर रही है। नई स्टार्टअप नीति, एक जनपद-दो उत्पाद, होमस्टे योजना, सौर स्वरोजगार योजना सहित अनेक योजनाओं के माध्यम से युवाओं को आत्मनिर्भर बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मातृशक्ति के सशक्तिकरण के लिए सरकारी नौकरियों में 30 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण, नारी सशक्तिकरण योजना, मुख्यमंत्री महालक्ष्मी योजना तथा अन्य जनकल्याणकारी योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि लखपति दीदी योजना के अंतर्गत प्रदेश की 2 लाख 65 हजार से अधिक महिलाएं आत्मनिर्भर बन चुकी हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड में निवेश, पर्यटन और रोजगार के क्षेत्र में अभूतपूर्व प्रगति हुई है। ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के माध्यम से प्राप्त निवेश प्रस्तावों में से एक लाख करोड़ रुपये से अधिक का निवेश धरातल पर उतर चुका है। चारधाम यात्रा, शीतकालीन यात्रा, राष्ट्रीय खेलों एवं जी-20 बैठकों के सफल आयोजन से राज्य को नई पहचान मिली है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि डबल इंजन सरकार के प्रयासों से प्रदेश की अर्थव्यवस्था मजबूत हुई है। राज्य की जीएसडीपी में वृद्धि, प्रतिव्यक्ति आय में उल्लेखनीय बढ़ोतरी, एक लाख करोड़ रुपये से अधिक का बजट, नए उद्योगों की स्थापना तथा स्टार्टअप्स की बढ़ती संख्या उत्तराखण्ड की प्रगति का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि पर्यटन गतिविधियों के विस्तार से रिवर्स पलायन को भी गति मिली है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने अनेक ऐतिहासिक एवं साहसिक निर्णय लिए हैं। समान नागरिक संहिता लागू करने, सख्त नकल विरोधी कानून, धर्मांतरण विरोधी कानून, भ्रष्टाचार के विरुद्ध जीरो टॉलरेंस नीति तथा पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया के माध्यम से युवाओं को निष्पक्ष अवसर उपलब्ध कराए गए हैं। उन्होंने कहा कि पिछले पांच साल में 34 हजार से अधिक युवाओं को पारदर्शी तरीके से सरकारी सेवाओं में नियुक्ति दी जा चुकी है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल योजनाएं बनाना नहीं, बल्कि उनका लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना है। इसी भावना के साथ ‘जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार’ सेवा पखवाड़ा आयोजित किया जा रहा है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे जनता के बीच जाकर उनकी समस्याओं का त्वरित समाधान सुनिश्चित करें तथा प्रत्येक पात्र व्यक्ति तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाएं। मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों का आह्वान करते हुए कहा कि जनभागीदारी, सेवा और विकास के संकल्प के साथ उत्तराखण्ड को वर्ष 2035 तक विकसित एवं श्रेष्ठ राज्य बनाने के लक्ष्य को अवश्य प्राप्त किया जाएगा। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और प्रदेशवासियों के सहयोग से उत्तराखण्ड विकास के नए आयाम स्थापित करेगा।

इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री रेखा आर्य, डॉ धन सिंह रावत, खजान दास, भरत चौधरी, केंद्रीय राज्य मंत्री अजय टम्टा, पूर्व मुख्यमंत्री डॉ रमेश पोखरियाल निशंक, राज्यसभा सांसद नरेश बंसल, महेंद्र भट्ट, विधायक प्रेमचंद अग्रवाल, मुन्ना सिंह चौहान, बृज भूषण गैरोला, सुरेश गड़िया, सविता कपूर, दुर्गेश्वर लाल, विनोद चमोली, सहदेव सिंह पुंडीर, मेयर ऋषिकेश शंभू पासवान, मेयर देहरादून सौरभ थपलियाल, सचिव शैलेश बगौली, विनय शंकर पाण्डेय,महानिदेशक सूचना बंशीधर तिवारी, जिलाधिकारी देहरादून डॉ. आशीष चौहान एवं अन्य जनप्रतिनिधि और अधिकारीगण उपस्थित थे।

जनता ने विकास और सुशासन पर लगाई मोहर, देशभर में ट्रेंड करता रहा #DhamiKe5Saal

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखंड सरकार के पाँच वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर सोशल मीडिया पर #DhamiKe5Saal देश का नंबर-1 पॉलिटिकल ट्रेंड बन गया। एक्स (X) पर यह हैशटैग राष्ट्रीय स्तर पर शीर्ष स्थान पर पहुंचा, जो मुख्यमंत्री धामी के नेतृत्व, सरकार के कार्यों और जनता के व्यापक समर्थन को दर्शाता है।

पिछले पाँच वर्षों में उत्तराखंड ने कई ऐसे ऐतिहासिक निर्णय देखे, जिन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर भी नई पहचान बनाई। समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने वाला देश का पहला राज्य बनने से लेकर सख्त नकल विरोधी कानून, धर्मांतरण विरोधी कानून, सशक्त भू-कानून, मदरसा बोर्ड की समाप्ति तथा पारदर्शी भर्ती व्यवस्था जैसे निर्णयों ने उत्तराखंड को सुशासन का मॉडल बनाने की दिशा में नई मिसाल पेश की।

इसी अवधि में प्रदेश में चारधाम यात्रा, पर्यटन, सड़क, रेल और हवाई कनेक्टिविटी, निवेश, रोजगार, महिला सशक्तिकरण, सीमांत विकास तथा बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय प्रगति हुई। पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया के माध्यम से हजारों युवाओं को सरकारी सेवाओं में अवसर मिले, जबकि मातृशक्ति, किसानों, सैनिकों और गरीब कल्याण से जुड़ी अनेक योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू किया गया।

सोशल मीडिया पर #DhamiKe5Saal के नंबर-1 ट्रेंड बनने को राजनीतिक विश्लेषक केवल डिजिटल अभियान नहीं, बल्कि जनता के विश्वास और सहभागिता का प्रतीक मान रहे हैं। हजारों लोगों ने पोस्ट, वीडियो, ग्राफिक्स और संदेशों के माध्यम से मुख्यमंत्री धामी के नेतृत्व में हुए विकास कार्यों को साझा किया।

#DhamiKe5Saal का राष्ट्रीय स्तर पर शीर्ष ट्रेंड बनना इस बात का संकेत है कि उत्तराखंड की विकास यात्रा और सुशासन की चर्चा अब केवल प्रदेश तक सीमित नहीं, बल्कि पूरे देश में एक सकारात्मक उदाहरण के रूप में देखी जा रही है।

छत्तीसगढ़ के पत्रकारों को सीएम ने उत्तराखण्ड की सांस्कृतिक विरासत, तीव्र विकास, पर्यटन संभावनाओं एवं सुशासन मॉडल से कराया अवगत

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मुख्यमंत्री आवास में छत्तीसगढ़ से आए पत्रकारों के प्रतिनिधिमंडल ने शिष्टाचार भेंट की।

मुख्यमंत्री ने सभी पत्रकारों का देवभूमि उत्तराखण्ड आगमन पर हार्दिक स्वागत एवं अभिनन्दन करते हुए कहा कि उत्तराखण्ड केवल प्राकृतिक सौन्दर्य और आध्यात्मिक आस्था का केंद्र ही नहीं, बल्कि तीव्र गति से विकास के नए आयाम स्थापित करने वाला राज्य भी बन रहा है। उन्होंने कहा कि विभिन्न राज्यों के पत्रकारों का उत्तराखण्ड भ्रमण राज्य की सांस्कृतिक, सामाजिक, ऐतिहासिक एवं विकास यात्रा को समझने का एक महत्वपूर्ण अवसर है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, धार्मिक परम्पराओं, लोक संस्कृति तथा हिमालयी सभ्यता के कारण देश-विदेश में विशिष्ट पहचान रखता है। यहां स्थित चारधाम, पंचकेदार, पंचबदरी, पंचप्रयाग, हेमकुंड साहिब, पूर्णागिरि, जागेश्वर, आदि कैलाश एवं ओम पर्वत जैसे धार्मिक एवं आध्यात्मिक स्थल करोड़ों श्रद्धालुओं और पर्यटकों की आस्था के प्रमुख केंद्र हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में राज्य सरकार पर्यटन को आर्थिक विकास का प्रमुख आधार बनाकर कार्य कर रही है। धार्मिक पर्यटन के साथ-साथ साहसिक पर्यटन, ईको-टूरिज्म, वेलनेस टूरिज्म, ग्रामीण पर्यटन तथा होमस्टे आधारित पर्यटन को निरंतर प्रोत्साहित किया जा रहा है। पर्यटन स्थलों पर आधुनिक सुविधाओं का विस्तार, बेहतर कनेक्टिविटी तथा विश्वस्तरीय आधारभूत संरचना विकसित किए जाने के कारण उत्तराखण्ड में पर्यटकों की संख्या लगातार बढ़ रही है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की आदि कैलाश यात्रा के बाद सीमांत क्षेत्र के इस आध्यात्मिक स्थल को वैश्विक पहचान मिली है। इसके परिणामस्वरूप आदि कैलाश सहित सीमांत क्षेत्रों में पर्यटन गतिविधियों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले चार वर्षों में उत्तराखण्ड में 25 करोड़ से अधिक पर्यटक एवं श्रद्धालु पहुंचे हैं, जो राज्य की बढ़ती लोकप्रियता तथा पर्यटन क्षेत्र में विकसित हुई आधुनिक सुविधाओं का प्रमाण है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार उत्तराखण्ड को वर्षभर पर्यटन के रूप में विकसित करने की दिशा में कार्य कर रही है। विशेष रूप से शीतकालीन यात्रा को बढ़ावा देने के लिए व्यापक अभियान चलाया जा रहा है, जिससे चारधाम एवं अन्य धार्मिक स्थलों के आसपास स्थित शीतकालीन गद्दी स्थलों और स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिल रही है। इससे स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर भी सृजित हो रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बाबा केदार एवं भगवान बदरीविशाल की नगरी को विश्वस्तरीय सुविधाओं से युक्त बनाने के उद्देश्य से केदारनाथ एवं बदरीनाथ मास्टर प्लान के अंतर्गत व्यापक पुनर्विकास कार्य किए जा रहे हैं। इन परियोजनाओं के माध्यम से तीर्थयात्रियों को आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ ही धार्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण भी सुनिश्चित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के विशेष मार्गदर्शन में इन दोनों धामों में अभूतपूर्व विकास कार्य हुए हैं, जिससे श्रद्धालुओं की सुविधा और यात्रा अनुभव में उल्लेखनीय सुधार आया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में सड़क, रेल एवं हवाई संपर्क के क्षेत्र में तेजी से विस्तार हुआ है। दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेस-वे जैसी महत्वाकांक्षी परियोजनाओं के पूरा होने से उत्तराखण्ड तक पहुंच और अधिक सुगम होगी तथा पर्यटन और निवेश को नई गति मिलेगी। उन्होंने कहा कि राज्य में सड़क नेटवर्क का निरंतर विस्तार किया जा रहा है। साथ ही रेल सेवाओं एवं हवाई सेवाओं का भी लगातार विस्तार हो रहा है, जिससे देश के विभिन्न हिस्सों से आने वाले पर्यटकों को बेहतर और सुविधाजनक यात्रा उपलब्ध हो रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सीमांत क्षेत्रों के विकास पर राज्य सरकार विशेष ध्यान दे रही है। सड़क, पुल, स्वास्थ्य, शिक्षा, संचार, पेयजल एवं अन्य आधारभूत सुविधाओं का तेजी से विस्तार किया जा रहा है। सीमावर्ती क्षेत्रों में पर्यटन विकास के साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी सशक्त बनाया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड आज सुशासन, पारदर्शिता और जनकल्याण की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। निवेश, उद्योग, स्वरोजगार, महिला सशक्तीकरण, युवाओं के कौशल विकास, कृषि, बागवानी तथा ग्रामीण विकास के क्षेत्रों में अनेक महत्वपूर्ण पहल की गई हैं। राज्य सरकार विकास और विरासत के संतुलन के साथ उत्तराखण्ड को देश का अग्रणी राज्य बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पत्रकार लोकतंत्र का सशक्त स्तंभ हैं। उनके माध्यम से समाज तक सही और सकारात्मक जानकारी पहुंचती है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि छत्तीसगढ़ से आए पत्रकार उत्तराखण्ड की विकास यात्रा, पर्यटन संभावनाओं, सांस्कृतिक विरासत और जनकल्याणकारी पहलों को निकट से जानने के बाद अपने अनुभवों को व्यापक स्तर पर साझा करेंगे, जिससे देवभूमि उत्तराखण्ड की सकारात्मक छवि देशभर में और अधिक सुदृढ़ होगी।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पत्रकारों के माध्यम से समस्त छत्तीसगढ़वासियों को आगामी कुंभ में देवभूमि उत्तराखण्ड आने का सादर आमंत्रण भी दिया। उन्होंने कहा कि कुंभ भारतीय संस्कृति, सनातन परंपरा, आध्यात्मिक चेतना और सामाजिक समरसता का विराट पर्व है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि देशभर से आने वाले श्रद्धालुओं के साथ छत्तीसगढ़ के श्रद्धालु भी बड़ी संख्या में देवभूमि पहुंचकर इस दिव्य एवं भव्य आयोजन के साक्षी बनेंगे तथा उत्तराखण्ड के आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और प्राकृतिक वैभव का अनुभव करेंगे।

पत्रकार प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री का आत्मीय स्वागत एवं समय प्रदान करने के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने उत्तराखण्ड में हो रहे विकास कार्यों, बेहतर आधारभूत संरचना, पर्यटन क्षेत्र में हुए परिवर्तन तथा राज्य सरकार की जनहितकारी पहलों की सराहना की।

इस अवसर पर सचिव विनय शंकर पाण्डेय, अपर सचिव बंशीधर तिवारी, संयुक्त निदेशक के. एस. चौहान, छत्तीसगढ़ सूचना विभाग के संयुक्त निदेशक धनंजय राठौर तथा छत्तीसगढ़ से आए 20 से अधिक पत्रकार उपस्थित रहे।

लाइब्रेरी चौक से लाल टिब्बा तक प्रस्तावित स्टेशनों का सचिव आवास ने किया निरीक्षण, तकनीकी और पर्यावरणीय पहलुओं की हुई समीक्षा

पर्यटन नगरी मसूरी में लगातार बढ़ रही पर्यटकों की संख्या और बढ़ते यातायात दबाव को कम करने के उद्देश्य से प्रस्तावित मसूरी मेट्रो रोपवे परियोजना को आगे बढ़ाने की दिशा में सरकार ने तैयारियां तेज कर दी हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के दिशा-निर्देशों के क्रम में शुक्रवार को सचिव आवास डॉ. आर. राजेश कुमार ने उत्तराखंड मेट्रो रेल कॉर्पाेरेशन, जिला प्रशासन, नगर पालिका मसूरी तथा अन्य संबंधित विभागों के अधिकारियों के साथ प्रस्तावित रोपवे टर्मिनल स्टेशनों, और संबंधित भूमि का विस्तृत स्थलीय निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान परियोजना की तकनीकी व्यवहार्यता, पर्यावरणीय संतुलन और यातायात प्रबंधन से जुड़े विभिन्न पहलुओं की समीक्षा करते हुए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।

लाइब्रेरी चौक में रोपवे परियोजना को लेकर हुई चर्चा
सचिव आवास डॉ. आर. राजेश कुमार की अगुवाई में अधिकारियों की टीम मसूरी के लाइब्रेरी चौक पर एकत्रित हुई। इस दौरान संबंधित अधिकारियों ने उन्हें प्रस्तावित रोपवे परियोजना की विस्तृत जानकारी दी। अधिकारियों ने बताया कि प्रस्तावित रोपवे का मार्ग लाइब्रेरी चौक क्षेत्र से होकर गुजरेगा, जिसके मद्देनजर परियोजना से संबंधित आवश्यक भूमि और अन्य व्यवस्थाओं पर विचार-विमर्श किया गया। सचिव आवास ने मौके पर उपलब्ध भूमि की संभावनाओं का आकलन करते हुए आवश्यक निर्देश दिए। इस दौरान परियोजना के तकनीकी पहलुओं और भविष्य की आवश्यकताओं पर भी चर्चा हुई।

रोपवे टर्मिनल स्टेशन के संभावित स्थलों का किया निरीक्षण
इसके बाद सचिव आवास डॉ आर राजेश कुमार के नेतृत्व में टीम ने पिक्चर पैलेस (चिक चॉकलेट) तथा गढ़वाल मंडल विकास निगम (मॉल रोड) के निकट प्रस्तावित रोपवे टर्मिनल स्टेशन के संभावित स्थानों का निरीक्षण किया। अधिकारियों ने यात्रियों की आवाजाही, पहुंच मार्ग, सुरक्षा, तकनीकी व्यवहार्यता तथा यातायात प्रबंधन से जुड़े विभिन्न बिंदुओं पर विस्तार से विचार-विमर्श किया।

भनौत एस्टेट और लाल टिब्बा क्षेत्र का भी लिया जायजा
निरीक्षण के अगले चरण में अधिकारियों ने आईएनआई डिस्पेंसरी एवं भनौत एस्टेट क्षेत्र की प्रस्तावित भूमि का निरीक्षण किया। इसके बाद नहाटा एस्टेट (लाल टिब्बा) में प्रस्तावित अपर रोपवे टर्मिनल स्टेशन के आसपास स्थित चार दुकानों वाले क्षेत्र का भी बारीकी से निरीक्षण किया गया। इस दौरान स्थल की भौगोलिक स्थिति, निर्माण की व्यवहार्यता तथा भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए चर्चा की गई।

चार दुकान क्षेत्र में वैकल्पिक स्थान तलाशने के निर्देश
सचिव आवास डॉ. आर. राजेश कुमार ने निरीक्षण के दौरान पाया कि चिक चॉकलेट/चार दुकान क्षेत्र में प्रस्तावित स्टेशन के लिए उपलब्ध स्थान सीमित है और वहां की भौगोलिक परिस्थितियां भी चुनौतीपूर्ण हैं। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि स्टेशन के लिए अधिक सुरक्षित एवं उपयुक्त वैकल्पिक स्थान का चयन करते हुए भू-तकनीकी (जियो-टेक्निकल) अध्ययन के आधार पर नया प्रस्ताव तैयार किया जाए, ताकि भविष्य में किसी प्रकार की तकनीकी अथवा सुरक्षा संबंधी समस्या उत्पन्न न हो।

पर्यावरण संरक्षण और पर्यटन विकास के बीच रहेगा संतुलन
निरीक्षण के दौरान इस बात पर विशेष बल दिया गया कि परियोजना को विकसित करते समय मसूरी की प्राकृतिक सुंदरता, पर्यावरणीय संतुलन और ऐतिहासिक पहचान से किसी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि निर्माण कार्य के दौरान पर्यावरणीय मानकों का पूर्ण पालन सुनिश्चित किया जाए और परियोजना को पर्यटन हितैषी स्वरूप में विकसित किया जाए।

पर्यटकों और स्थानीय लोगों को मिलेगा सीधा लाभ
मसूरी मेट्रो रोपवे परियोजना के क्रियान्वयन से पर्यटन सीजन में लगने वाले लंबे जाम से राहत मिलने की उम्मीद है। इसके साथ ही स्थानीय नागरिकों और पर्यटकों को सुरक्षित, तेज, सुविधाजनक और पर्यावरण अनुकूल परिवहन सुविधा उपलब्ध होगी। परियोजना के पूरा होने से पर्यटन गतिविधियों को भी नई गति मिलने की संभावना है।

सचिव आवास की मौजूदगी में हुआ व्यापक निरीक्षण
सचिव आवास डॉ आर राजेश कुमार की मौजूदगी में अधिकारियों ने परियोजना के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा करते हुए स्थल की भौगोलिक परिस्थितियों और निर्माण संबंधी संभावनाओं का भी आकलन किया। निरीक्षण दल में उत्तराखंड मेट्रो रेल कॉर्पाेरेशन के प्रबंध निदेशक ब्रिजेश कुमार मिश्रा, उप जिलाधिकारी मसूरी राहुल आनंद, संयुक्त महाप्रबंधक (सिविल) जय नंदन सिन्हा, नगर पालिका मसूरी के अधिशासी अधिकारी गौरव भसीन, रेंज अधिकारी महेंद्र नेगी, प्रबंधक सिविल अभिषेक त्यागी, सेक्शन इंजीनियर सौरभ पटवाल, अशोक डोभाल, वरिष्ठ सर्वेयर कुंदन सिंह अधिकारी तथा वरिष्ठ सर्वेयर हरिओम सिंह सहित कई अधिकारी मौजूद रहे।

सचिव आवास डॉ. आर. राजेश कुमार का बयान
सचिव आवास डॉ. आर. राजेश कुमार ने कहा, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य सरकार उत्तराखंड में आधुनिक, सुरक्षित और पर्यावरण अनुकूल परिवहन व्यवस्था विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है। मसूरी मेट्रो रोपवे परियोजना पर्यटन नगरी में बढ़ते यातायात दबाव का दीर्घकालिक समाधान उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। हमारा प्रयास है कि परियोजना तकनीकी रूप से मजबूत, सुरक्षित और पर्यावरण के अनुकूल हो, ताकि स्थानीय लोगों और देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों को बेहतर आवागमन की सुविधा मिल सके तथा मसूरी की प्राकृतिक और ऐतिहासिक पहचान भी अक्षुण्ण बनी रहे।

सीएस ने सचिवालय में यूएनडीपी की भारत में डिप्टी रेजिडेंट रिप्रेजेंटेटिव ईजाबेल का किया स्वागत

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन से सचिवालय में संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) की भारत में डिप्टी रेजिडेंट रिप्रेजेंटेटिव ईजाबेल ने शिष्टाचार भेंट की। इस अवसर पर उत्तराखण्ड सरकार एवं यूएनडीपी के मध्य चल रहे विभिन्न कार्यक्रमों पर चर्चा हुयी।

मुख्य सचिव ने उत्तराखण्ड में ईजाबेल एवं उनकी टीम का स्वागत किया। कुछ विशेष क्षेत्रों की ओर ध्यान आकर्षित करते हुए मुख्य सचिव ने कहा कि स्किल एवं रोजगार, कार्बन क्रेडिट, डिजीटाईजेशन एवं ऑनलाईन सिस्टम का विकास एवं बच्चे के जन्म से ट्रेकिंग सिस्टम लागू करने के लिए यूएनडीपी द्वारा उनकी विशेषज्ञता का लाभ प्रदेश को हो सकता है। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड की साक्षरता दर बहुत अच्छी है, यहां युवाओं को कौशल विकास पर कार्य करने की आवश्यकता है। उन्होंने यूएनडीपी से प्रदेश में कौशल विकास के साथ आजीविका के क्षेत्र में कार्य किए जाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि उत्तरखण्ड में कौशल विकास एवं रोजगार पर विशेष फोकस किए जाने की आवश्यकता है।

मुख्य सचिव ने यूएनडीपी से कार्बन क्रेडिट के क्षेत्र में भी सहयोग किए जाने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड एक हिमालयी राज्य है, जिसमें 70 प्रतिशत फॉरेस्ट लैण्ड है। यह पर्यावरण की दृष्टि से काफी महत्त्वपूर्ण है। उन्होंने प्रदेश में डिजिटल और ऑनलाइन सिस्टम को बढ़ाने एवं बच्चे के जन्म से ही ट्रैकिंग सिस्टम लागू करने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। उन्होंने इन दोनों क्षेत्रों में यूएनडीपी से सहयोग की बात कही।

यूएनडीपी से सुश्री ईजाबेल ने बताया कि यूएनडीपी प्रदेश में सार्वजनिक नीति और सुशासन (सीपीपीजीजी) के साथ ही सतत् विकास लक्ष्य को तेजी से बढ़ाने की दिशा में कार्य कर रहा है। यूएनडीपी प्रदेश में सतत विकास लक्ष्य का स्थानीयकरण और एकीकरण, निगरानी और मूल्यांकन, सार्वजनिक नीति, उत्पादक अर्थव्यवस्था और उद्यमिता, आईटी और एमआईएस, संचार और क्षमता निर्माण के साथ ही सीएसआर और निजी क्षेत्र में तकनीकी सहयोग उपलब्ध करा रहा है। राज्य सरकार एवं यूएनडीपी के मध्य एक व्यापक समझौता ज्ञापन हुआ है, जो जलवायु परिवर्तन, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन, ऊर्जा, जैव विविधता संरक्षण, आपदा जोखिम में कमी और लचीलापन, आजीविका, कौशल विकास (जिसमें सर्कुलर इकोनॉमी भी शामिल है), सिस्टम को मज़बूत करना एवं ज्ञान प्रबंधन के क्षेत्र में तकनीकी सहायता उपलब्ध कराएगा।

इस अवसर पर प्रमुख सचिव आर. मीनाक्षी सुन्दरम, अपर सचिव नरेन्द्र सिंह भण्डारी, यूएनडीपी से सत्यन चौहान एवं प्रदीप मेहता भी उपस्थित थे।

नियुक्ति पत्र देकर सीएम धामी बोले, यह पत्र जनसेवा का संकल्प और सवा करोड़ राज्य की जनता के विश्वास का प्रतीक

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय स्थित मुख्य सेवक सदन में आयोजित कार्यक्रम में उत्तराखंड लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित पीसीएस मुख्य परीक्षा-2024 में चयनित 182 अभ्यर्थियों तथा कृषि एवं कृषक कल्याण विभाग में वैयक्तिक सहायक के पद पर चयनित 5 अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र प्रदान किए।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने सभी नवचयनित अभ्यर्थियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह नियुक्ति पत्र केवल सरकारी सेवा में प्रवेश का दस्तावेज नहीं, बल्कि सवा करोड़ उत्तराखंडवासियों के विश्वास, अपेक्षाओं और जनसेवा के संकल्प का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि अब प्रत्येक अधिकारी की पहचान उसके पद से नहीं, बल्कि उसकी कार्यशैली, संवेदनशीलता और जनसेवा के प्रति समर्पण से होगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड पीसीएस मुख्य परीक्षा-2024 के लिए लगभग डेढ़ लाख अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था तथा 71 हजार से अधिक अभ्यर्थी परीक्षा में सम्मिलित हुए, जिनमें से केवल 182 अभ्यर्थियों का चयन हुआ। उन्होंने कहा कि यह सफलता चयनित अभ्यर्थियों की प्रतिभा, कठिन परिश्रम, अनुशासन और दृढ़ संकल्प का परिणाम है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि लोकतंत्र में पद का अर्थ शासन करना नहीं, बल्कि जनता की सेवा करना है। राज्य सरकार सरलीकरण, समाधान, निस्तारीकरण एवं संतुष्टि के मंत्र के साथ कार्य कर रही है। उन्होंने नवचयनित अधिकारियों का आह्वान किया कि वे समाज के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति तक शासन की योजनाओं और सेवाओं का लाभ संवेदनशीलता एवं पारदर्शिता के साथ पहुंचाना सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि दूरस्थ क्षेत्रों से आने वाले प्रत्येक नागरिक को सरकारी कार्यालय में सम्मान, विश्वास और समयबद्ध समाधान का अनुभव होना चाहिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने भर्ती प्रक्रियाओं में पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए देश का सबसे कठोर नकल विरोधी कानून लागू किया। इसके परिणामस्वरूप भर्ती परीक्षाओं के प्रति युवाओं का विश्वास सुदृढ़ हुआ है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने बीते साढ़े चार वर्षों में 34 हजार से अधिक युवाओं को पूर्ण पारदर्शिता एवं निष्पक्षता के साथ सरकारी सेवाओं में नियुक्ति प्रदान की है। आज 187 और युवाओं के इस अभियान से जुड़ने के साथ राज्य सरकार की युवा हितैषी प्रतिबद्धता और अधिक मजबूत हुई है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य उत्तराखंड के प्रत्येक युवा को उसकी प्रतिभा और योग्यता के अनुरूप अवसर उपलब्ध कराना है, ताकि रोजगार की तलाश में युवाओं को राज्य से बाहर जाने के लिए विवश न होना पड़े। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार पहाड़ के पानी और पहाड़ की जवानी, दोनों को उत्तराखंड के विकास की सबसे बड़ी शक्ति बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बाबा केदार की पावन भूमि से 21वीं सदी के तीसरे दशक को उत्तराखंड का दशक बताया है। इस संकल्प को साकार करने में नवचयनित अधिकारियों की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। उन्होंने कहा कि सरकार नीतियां बनाती है, लेकिन उन्हें प्रभावी ढंग से धरातल पर उतारने का दायित्व अधिकारियों और कर्मचारियों का होता है। उन्होंने सभी अधिकारियों से विकसित उत्तराखंड के निर्माण के लिए पूर्ण निष्ठा, ईमानदारी और समर्पण के साथ कार्य करने का आह्वान किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि ईमानदारी और निष्पक्षता से कार्य करने वाले प्रत्येक अधिकारी एवं कर्मचारी के साथ राज्य सरकार पूरी मजबूती से खड़ी रहेगी। उन्होंने अधिकारियों से आह्वान किया कि वे किसी भी प्रकार के दबाव से मुक्त होकर संविधान, कानून और जनहित को सर्वाेच्च प्राथमिकता देते हुए अपने दायित्वों का निर्वहन करें।

इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी, डॉ. धन सिंह रावत, रामसिंह कैड़ा, विधायक सविता कपूर, गोरखा कल्याण परिषद की अध्यक्ष ज्योति कोटिया, प्रमुख सचिव आर.के. सुधांशु, सचिव शैलेश बगौली, दिलीप जावलकर, रविनाथ रमन, चंद्रेश कुमार, बृजेश कुमार संत, विनय शंकर पांडेय, एस.एन. पाण्डेय, डीजी होमगार्ड डॉ. पी. वी. के प्रसाद, डीजी अभिसूचना एवं सुरक्षा अभिनव कुमार, एडीजी डॉ. वी. मुरुगेशन, अपर सचिव नवनीत पाण्डेय एवं संबंधित विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।

आपदा प्रबंधन को जोखिम न्यूनीकरण, पूर्व तैयारी तथा तकनीक आधारित प्रबंधन पर विशेष बल देंः धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आईटी पार्क, देहरादून में आयोजित राज्य स्तरीय मानसून पूर्व मॉक ड्रिल में अधिकारियों को प्रभावी आपदा प्रबंधन के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड जैसे संवेदनशील राज्य में आपदा प्रबंधन केवल प्रशासनिक दायित्व नहीं, बल्कि सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि मानसून के दौरान संभावित आपदाओं से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए पूर्व तैयारी, त्वरित निर्णय, बेहतर समन्वय तथा आधुनिक तकनीकों का समुचित उपयोग अत्यंत आवश्यक है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य स्तरीय मॉक ड्रिल आपदा प्रबंधन तंत्र की क्षमता को और अधिक सुदृढ़ करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। यह केवल एक अभ्यास नहीं, बल्कि विभिन्न विभागों के बीच समन्वय, संचार व्यवस्था, संसाधनों की उपलब्धता तथा राहत एवं बचाव तंत्र की वास्तविक क्षमता का व्यापक परीक्षण है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि आपदा प्रबंधन को केवल राहत एवं बचाव तक सीमित न रखकर जोखिम न्यूनीकरण, पूर्व तैयारी तथा तकनीक आधारित प्रबंधन पर विशेष बल दिया जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में एआई आधारित अर्ली वार्निंग सिस्टम, डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम, ड्रोन सर्विलांस, जीआईएस मैपिंग, सैटेलाइट मॉनिटरिंग तथा डेटा आधारित जोखिम आकलन जैसी आधुनिक तकनीकों को आपदा प्रबंधन से जोड़ा जा रहा है, जिससे संभावित खतरों का समय रहते सटीक आकलन कर जन-धन की हानि को न्यूनतम किया जा सके।
उन्होंने कहा कि आपातकालीन परिस्थितियों में त्वरित राहत एवं बचाव सुनिश्चित करने के लिए रैपिड रिस्पॉन्स टीमों को सशक्त बनाया गया है तथा अर्ली वार्निंग सिस्टम को लगातार मजबूत किया जा रहा है, ताकि दूरस्थ एवं संवेदनशील क्षेत्रों तक समय पर चेतावनी पहुंचाई जा सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि जल स्रोत संरक्षण, ग्लेशियर अध्ययन, पौधारोपण, पर्यावरण संरक्षण तथा जन-जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र को सुरक्षित रखने की दिशा में निरंतर कार्य किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण ही आपदा जोखिम को कम करने का सबसे प्रभावी माध्यम है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में संचालित विभिन्न राहत एवं बचाव अभियानों ने वैज्ञानिक सोच, आधुनिक तकनीकों, त्वरित निर्णय क्षमता तथा टीमवर्क की उत्कृष्ट मिसाल प्रस्तुत की है। उन्होंने निर्देश दिए कि मॉक ड्रिल के दौरान प्राप्त अनुभवों एवं कमियों का गंभीरता से विश्लेषण किया जाए तथा सभी जनपद 72 घंटे के भीतर अपनी विस्तृत समीक्षा रिपोर्ट उत्तराखण्ड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण को उपलब्ध कराएं। उन्होंने कहा कि प्रत्येक नागरिक को आपदा सुरक्षा उपायों, आपातकालीन संपर्क नंबरों एवं प्राथमिक सावधानियों की जानकारी उपलब्ध कराने के लिए व्यापक जन-जागरूकता अभियान संचालित किए जाएं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य केवल आपदा के बाद राहत पहुंचाना नहीं, बल्कि आपदा जोखिम को न्यूनतम करना, जन-धन की सुरक्षा सुनिश्चित करना तथा उत्तराखण्ड को देश का सबसे सक्षम, तकनीक-सक्षम एवं जनभागीदारी आधारित आपदा प्रबंधन मॉडल बनाना है। उन्होंने सभी से पूर्व तैयारी, आधुनिक तकनीक, प्रभावी समन्वय एवं जनभागीदारी के बल पर उत्तराखण्ड को आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में देश का सर्वश्रेष्ठ राज्य बनाने के लिए कार्य करने का आह्वान किया।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने उत्तराखण्ड राज्य आपदा प्रबंधन योजना तथा राज्य के सभी 13 जनपदों की जिला आपदा प्रबंधन योजनाओं का विमोचन भी किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि एसडीएमपी राज्य स्तर पर आपदा जोखिम न्यूनीकरण, पूर्व तैयारी, पूर्व चेतावनी, राहत, बचाव, पुनर्वास एवं पुनर्निर्माण के लिए सभी विभागों की भूमिका, दायित्व एवं समन्वय व्यवस्था निर्धारित करती है। वहीं डीडीएमपी प्रत्येक जनपद की स्थानीय परिस्थितियों, संभावित आपदाओं, उपलब्ध संसाधनों एवं त्वरित कार्रवाई की विस्तृत कार्ययोजना उपलब्ध कराती है, जिससे आपदा की स्थिति में जिला प्रशासन प्रभावी एवं समन्वित ढंग से कार्य कर सके। आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के प्रावधानों के अनुरूप तैयार की गई ये योजनाएं राज्य एवं जनपद स्तर पर बेहतर समन्वय, आधुनिक तकनीक के उपयोग, प्रभावी पूर्व चेतावनी प्रणाली, समुदाय आधारित आपदा प्रबंधन तथा त्वरित एवं सुनियोजित आपदा प्रतिक्रिया सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण मार्गदर्शक दस्तावेज सिद्ध होंगी।

मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर एसडीआरएफ, एनडीआरएफ एवं अग्निशमन विभाग द्वारा लगाए गए आधुनिक राहत एवं बचाव उपकरणों की प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया। उन्हें उपकरणों के संचालन, उपयोगिता एवं आपदा के दौरान उनकी भूमिका की विस्तृत जानकारी दी गई। प्रदर्शनी में विशेष रूप से एनडीआरएफ द्वारा सीबीआरएनई (रासायनिक, जैविक, रेडियोलॉजिकल, परमाणु एवं विस्फोटक) आपदाओं में उपयोग किए जाने वाले अत्याधुनिक उपकरण आकर्षण का केंद्र रहे। इसके अतिरिक्त डीप डाइविंग सेट, नाइट विजन कैमरा, थर्मल इमेजिंग कैमरा, विभिन्न प्रकार के हाइड्रोलिक कटर, अंडरवाटर कम्युनिकेशन सिस्टम, अंडरवाटर ड्रोन तथा सोनार सिस्टम सहित अनेक आधुनिक उपकरणों का प्रदर्शन किया गया।

इस अवसर पर आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास मंत्री मदन कौशिक, आपदा प्रबंधन सलाहकार समिति के उपाध्यक्ष विनय रुहेला, लेफ्टिनेंट कर्नल (से.नि) रघुवीर सिंह भण्डारी, सचिव विनोद सुमन, गढ़वाल मंडल आयुक्त आनंद स्वरूप, आईजी अग्निशमन विम्मी सचदेव, अपर सचिव प्रकाश चंद्र, अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी एवं डीआईजी राजकुमार नेगी, संयुक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी दिनेश कुमार पुनेठा सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

यूजेवीएन की बैठक हुई संपन्न, विभिन्न प्रस्तावों को मिली मंजूरी, बजट भी हुआ पास

यूजेवीएन लिमिटेड के निदेशक मंडल की बैठक मुख्य सचिव, उत्तराखंड शासन एवं अध्यक्ष यूजेवीएन लिमिटेड आनंदवर्धन की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई। प्रबंध निदेशक के रूप में स्थायी पदभार ग्रहण करने के उपरांत अजय कुमार सिंह ने पहली बार निदेशक मंडल की बैठक में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर मुख्य सचिव एवं अध्यक्ष आनंदवर्धन सहित निदेशक मंडल के सभी सदस्यों ने उन्हें नई जिम्मेदारी के लिए शुभकामनाएं एवं बधाई दी।

बैठक में वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट को सर्वसम्मति से स्वीकृति प्रदान की गई। इसके साथ ही उपनल के माध्यम से कार्यरत कार्मिकों को उत्तराखंड सरकार के शासनादेश के अनुरूप ष्समान कार्य के लिए समान वेतनष् के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी गई।

राज्य की ऊर्जा अवसंरचना को सुदृढ़ बनाने की दिशा में निदेशक मंडल ने 81 मेगावाट क्षमता की आराकोट-त्यूणी जलविद्युत परियोजना तथा 600 मेगावाट क्षमता की इच्छाड़ी पंप्ड स्टोरेज परियोजना से संबंधित प्रथम चरण की सभी आवश्यक स्वीकृतियां शीघ्र प्राप्त करने के निर्देश संबंधित अधिकारियों को दिए।

बैठक में 300 मेगावाट क्षमता की लखवाड़ बहुद्देशीय परियोजना के शीयर ज़ोन उपचार से जुड़े अतिरिक्त कार्यों हेतु वित्तीय स्वीकृति भी प्रदान की गई। साथ ही उत्तराखंड सिंचाई विभाग से हस्तांतरित सौंग पंप्ड स्टोरेज परियोजना की सभी आवश्यक औपचारिक स्वीकृतियां संबंधित विभागों से शीघ्र प्राप्त करने के निर्देश भी दिए गए।

लखवाड़ बहुद्देशीय परियोजना की सुरक्षा को और अधिक सुदृढ़ करने के उद्देश्य से निदेशक मंडल ने केन्द्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल की तैनाती के प्रस्ताव को भी स्वीकृति प्रदान की।

बैठक में मुख्य सचिव, उत्तराखंड शासन एवं अध्यक्ष यूजेवीएन लिमिटेड आनंदवर्धन, प्रमुख सचिव ऊर्जा डॉ. आर. मीनाक्षीसुंदरम, स्वतंत्र निदेशक इंदू कुमार पाण्डे, बी.पी. पांडे, पराग गुप्ता, अपर सचिव वित्त गंगा प्रसाद, प्रबंध निदेशक अजय कुमार सिंह, निदेशक (परियोजनाएं) सुरेश चन्द्र बलूनी, अधिशासी निदेशक सुधाकर बडोनी, राजीव अग्रवाल, आशीष जैन, जी.एस. बुदियाल तथा यूपीसीएल के प्रबंध निदेशक पी.सी. ध्यानी सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

उत्तराखंड में अब विकसित भारत जी राम जी योजना हुई आरंभ

ग्रामीण विकास मंत्रालय, भारत सरकार के दिशा-निर्देशों के क्रम में राज्य में महात्मा गांधी नरेगा योजना के स्थान पर विकसित भारत – जी राम जी योजना दिनांक 1 जुलाई 2026 से प्रारम्भ कर दी गई है। योजनान्तर्गत अकुशल श्रमिकों को वित्तीय वर्ष में 125 दिन का श्रम रोजगार दिये जाने का प्राविधान है। योजनान्तर्गत 318 कार्य अनुमन्य कार्यों की सूची में सम्मिलित किये गये हैं जिसमें जल संरक्षण के 107, मुख्य ग्रामीण अवसंरचना के 88, ग्रामीण आजीविका के 86 एवं आपदा न्यूनीकरण के 37 कार्य हैं। भारत सरकार द्वारा दिनांक 1 जुलाई 2026 से राज्य हेतु रु. 300/- प्रतिदिन मजदूरी दर निर्धारित की गई है।

इस संबंध में सचिव ग्राम्य विकास श्री धीराज गर्ब्याल ने बताया कि प्रदेश में 91.57 प्रतिशत सक्रिय श्रमिकों की ई0-के0वाई0सी0 की जा चुकी है। शेष सभी जॉब कार्ड धारक परिवारों/श्रमिकों से अपेक्षा की जाती है कि वे सम्बन्धित ग्राम पंचायत/विकासखण्ड कार्यालय में एक सप्ताह के भीतर उपस्थित होकर ई0-के0वाई0सी0 करवा लें ताकि योजनान्तर्गत आसानी से अकुशल श्रम रोजगार प्राप्त हो सके। महात्मा गांधी नरेगान्तर्गत जिन सक्रिय श्रमिकों की ई0-के0वाई0सी0 की जा चुकी है उनके जॉब कार्ड विकसित भारत – जी राम जी योजनान्तर्गत ग्रामीण रोजगार गारंटी कार्ड बनने तक वैध रहेंगे।

उन्होंने बताया कि राज्य में महात्मा गांधी नरेगान्तर्गत वर्तमान में गतिमान कार्यों को विकसित भारत – जी राम जी योजना में अनुमन्य कार्यों के आधार पर समाहित किया जायेगा। इसके लिये समस्त ग्राम पंचायत प्रतिनिधियों के क्षमता विकास हेतु जनपद स्तर पर कार्यशाला का आयोजन किया जायेगा।

प्रदेश में प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के अन्तर्गत सर्वेक्षण सूची को दिया जा रहा अन्तिम रूप सचिव ग्राम्य विकास धीराज गर्ब्याल ने जानकारी दी है कि राज्य में ग्रामीण विकास मंत्रालय, भारत सरकार के निर्देशों के क्रम में समस्त ग्राम पंचायतों में प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के अन्तर्गत पीएमएवाई-जी 2.0 सर्वेक्षण सूची का अन्तिमीकरण किए जाने हेतु ग्राम सभा की खुली बैठकें आयोजित करायी जा रही है, जिसकी अन्तिम तिथि 10 जुलाई, 2026 ग्रामीण विकास मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा निर्धारित की गयी है। उक्त बैठकों में सर्वेक्षण में चिन्हित लाभार्थियों की पात्रता का निर्धारण सम्बन्धित ग्राम सभा द्वारा किया जा रहा है। साथ ही यदि ग्राम सभा की खुली बैठक में किसी पात्र व्यक्ति/परिवार के सर्वे से वंचित/छूटने का प्रकरण संज्ञान में आने पर विकासखण्ड स्तरीय अधिकारियों द्वारा वंचित/छूटे परिवारों की सूची जनपद को प्रेषित की जाएगी। जनपदों द्वारा उक्त सूची दिनांक 06 जुलाई, 2026 तक शासन को प्रेषित की जानी है, ताकि उक्त सूची ससमय आवश्यक कार्यवाही हेतु भारत सरकार को प्रेषित की जा सकें।

औचक निरीक्षण करने पहुंचे डीएम ने कोरोनेशन अस्पताल के वार्डों में गंदगी देख दिए सख्त कार्रवाई के निर्देश

जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने बुधवार की रात ठीक 8ः00 बजे जिला कोरोनेशन अस्पताल का औचक निरीक्षण किया। अचानक हुए इस निरीक्षण से अस्पताल प्रशासन में हड़कंप मच गया। निरीक्षण के दौरान अस्पताल में लापरवाही, गंदगी और घोर अनियमितताओं की परतें खुलती चली गईं, जिस पर नाराजगी जताते हुए जिलाधिकारी ने दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। उन्होंने मुख्य चिकित्सा अधिकारी (ब्डव्) और मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (ब्डै) की एक संयुक्त समिति गठित कर तत्काल रिपोर्ट तलब की है।

आईसीयू में उमस, रजिस्टर खाली और पीआरओ पर गिरी गाज
जिलाधिकारी जब सबसे पहले आईसीयू वार्ड में पहुंचे, तो वहां की स्थिति बेहद चौंकाने वाली थी। जीवन रक्षक माने जाने वाले आईसीयू में मानक के विपरीत एयर कंडीशन बंद पड़ा था, जिससे मरीज उमस और सफोकेशन (घूटन) से बेहाल थे। हैरान करने वाली बात यह रही कि अस्पताल के पीआरओ (च्त्व्) को कई बार कहने के बाद भी एसी चालू नहीं कराया गया, जिस पर डीएम ने पीआरओ के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई के निर्देश देते हुए सीएमएस से जवाब मांगा है। इसके अलावा, आईसीयू के स्टॉक रजिस्टर में 29 जून से दवाओं का कोई विवरण नहीं था और सिस्टर इंचार्ज आकस्मिक अवकाश पर पाई गईं। कार्मिकों के उपस्थिति रजिस्टर में भी भारी खामियां मिलीं।

गंभीर मरीज को अनावश्यक रेफर करने पर जताई नाराजगी
अस्पताल के बाल रोग कक्ष, पुरुष, महिला और सर्जरी वार्डों का हाल भी बदतर मिला। पुरुष वार्ड में लीवर की बीमारी से पीड़ित एक ऐसे मरीज को रेफर करने की तैयारी थी, जो अस्पताल में ही रिकवर हो सकता था। इस अनावश्यक रेफरल पर डीएम ने सख्त आपत्ति जताई। यही नहीं, मरीज को ओढ़ने के लिए फटी हुई कंबल दी गई थी, जिस पर अस्पताल मैटर्न से स्पष्टीकरण मांगते हुए सभी फटे कंबलों को तत्काल कंडम (नष्ट) करने का आदेश दिया गया।

अस्पताल की लिफ्ट में चारों तरफ पान की पीक और गंदगी पसरी थी, जबकि सुरक्षा के लिहाज से लिफ्ट में सीसीटीवी कैमरा तक नहीं लगा था। महिला शौचालय में पुरुष यूरिनल लगा देख जिलाधिकारी ने व्यवस्था पर भारी नाराजगी व्यक्त की।

लावारिस मरीज के लिए देवदूत बने जिलाधिकारी
सर्जरी वार्ड में जिलाधिकारी एक लावारिस मरीज के लिए साक्षात देवदूत बनकर पहुंचे। उस वक्त मरीज की हालत बेहद नाजुक थी और उसका शुगर लेवल 40 से भी कम हो चुका था, लेकिन उसकी सुध लेने वाला कोई नहीं था। मरीज के पास गंदगी का अंबार था और बासी खाने की प्लेटें छूटी हुई थीं। जिलाधिकारी की सक्रियता के चलते मरीज को तुरंत आपातकालीन चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई गई। प्रशासनिक अमले के पहुंचने की भनक लगते ही डीएम के आने से महज पांच मिनट पहले वार्ड में आनन-फानन में पोछा लगाया जा रहा था।

जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने सीएमओ और सीएमएस को संयुक्त रूप से अस्पताल की इन सभी परिलक्षित कमियों और व्यवस्थागत खामियों को तत्काल दूर करने के कड़े निर्देश जारी किए हैं, ताकि आम जनता को बेहतर और सम्मानजनक स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकें।

इस दौरान जिलाधिकारी ने वार्ड में मरीजों से बात करते हुए उनका हाल जाना और अस्पताल से मिल रही सुविधाओं का फीडबैक भी लिया। निरीक्षण के दौरान आकस्मिक चिकित्सा अधिकारी मनीष शर्मा सहित अस्पताल के अन्य चिकित्सा अधिकारी मौजूद थे।