एम्स ने किया टेलीमेडिसिन तकनीक पर करार

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान ऋषिकेश और अमेरिकी कंपनी इवोल्को के मध्य टेलीमेडिसिन तकनीक को लेकर करार हो गया है। अब मरीज घर बैठे भी एम्स के विशेषज्ञों से सलाह ले सकता है।
एम्स निदेशक प्रो. रविकांत ने बताया कि इवोल्को कंपनी कैलिफोर्निया में स्थापित है, जिसकी भारत में लखनऊ और बेंगलुरु में शाखाएं स्थापित हैं। कंपनी ने आर्टिफिसियल इंटेलिजेंस पर आधारित पेसेंट स्क्रीनिंग एंड टेलीमेडिसिन तकनीक को विकसित करने का कार्य किया है। उन्होंने बताया कि पर्वतीय इलाकों में रहने वाले लोगों को चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए एम्स संस्थान ने कंपनी के साथ करार किया है।
निदेशक ने बताया कि टेलीमेडिसिन तकनीक से दूर दराज के पहाड़ी क्षेत्रों के मरीज एम्स के विशेषज्ञ चिकित्सक से घर बैठे ही चिकित्सकीय सलाह प्राप्त कर सकेंगे। इससे पर्वतीय क्षेत्रों में निवास करने वाले लोगों को न सिर्फ शीघ्र चिकित्सकीय सहायता मिलेगी वरन वह अपने गांवों से सैकड़ों किलोमीटर की लंबी दूरी तय कर उपचार के लिए एम्स ऋषिकेश में आने की समस्या से निजात पा सकेंगे। इससे उनके समय और धन की मितव्ययता भी नहीं होगी। एम्स टेलीमेडिसिन यूनिट की नोडल ऑफिसर प्रो. वर्तिका सक्सेना ने बताया कि समझौता ज्ञापन पर एम्स की ओर से निदेशक प्रो. रवि कांत व इवोल्को कंपनी की ओर से वरिष्ठ उपाध्यक्ष डॉ. विनीत ध्यानी ने हस्ताक्षर किए।
गौरतलब है कि एम्स ऋषिकेश की स्थापना रोगियों को बेहतरीन स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए की गई है, जिसके तहत एम्स प्रशासन मरीजों को विश्वस्तरीय स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया कराने को सतत प्रयासरत है। इसी उद्देश्य से अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान ऋषिकेश में वर्ष 2018 के जून माह में टेलीमेडिसिन इकाई की स्थापना की गई, इकाई के माध्यम से दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों में स्थापित स्वास्थ्य केंद्रों में टेली परामर्श, टेली चिकित्सा सेवा व टेली चिकित्सा शिक्षा उपलब्ध कराई जा रही है। इस अवसर पर एम्स टेलीमेडिसिन यूनिट के सदस्य डॉ. योगेश बेहुरूपी, डॉ. मधुर उनियाल आदि उपस्थित थे।

बिजली चोरी व लाइन लास को कम करने के लिये सीएम ने बताई समेकित प्रयासों की जरूरत

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने प्रदेश में बिजली चोरी तथा लाइन लॉस को रोकने के लिये व्यापक जन-जागरूकता के प्रसार पर बल दिया है। गांधी जयंती के अवसर पर मुख्यमंत्री आवास स्थित जनता मिलन हॉल में ऊर्जा की बचत तथा राजस्व वृद्धि के लिये बिजली चोरी रोकने के लिये ऊर्जा गिरी अभियान का शुभारम्भ करते हुए मुख्यमंत्री ने बिजली चोरी रोकने के लिये किये जा रहे प्रयासों में तेजी लाने पर बल दिया। उन्होंने राज्य गठन के बाद राज्य में ए.टी.एण्ड सी. हानियॉ 52.98 प्रतिशत से वर्तमान में 16.52 के स्तर लाये जाने के साथ ही वितरण हानियाँ 29.52 प्रतिशत से 14.32 प्रतिशत के स्तर पर लाये जाने पर संतोष व्यक्त करते हुए इसे 13 प्रतिशत पर लाये जाने के निर्देश दिये।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार बिजली चोरी रोकने के लिये प्रतिबद्ध है, ऊर्जा निगमों के समस्त अधिकारियों एवं कर्मचारियों का दायित्व है कि बिजली चोरी रोके जाने हेतु समुचित उपाय सुनिश्चित करें जिससे कि ईमानदार उपभोक्ताओं पर उसका भार न पड़े। उन्होंने विद्युत चोरी पर प्रभावी कार्यवाही सुनिश्चित करने के लिये यू.पी.सी.एल. विजिलेंस सेल को मजबूती प्रदान करने के भी निर्देश दिये।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि ऐसे प्रयासों से ही समाज में जन जागरूकता का प्रचार होता है तथा इसका समाज मे व्यापक प्रभाव भी पड़ता है उन्होंने कहा कि ऐसे प्रयास प्रदेश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने तथा राजस्व वृद्धि में भी सहायक होते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज उत्तराखण्ड को लाइन लॉस व बिजली चोरी रोकने में गुजरात के बाद दूसरा नम्बर है। इस दिशा में हमें समेकित प्रयासों से देश में पहले नम्बर पर आने के प्रयास करने होंगे। मुख्यमंत्री ने स्वच्छता एवं वन टाइम यूज प्लास्टिक का उपयोग न करने के संबंध में प्रधानमंत्री की अपील को साकार करने में भी योगदान देने की अपील की, उन्होंने कहा कि हमें इसे अपने जीवन का हिस्सा बनाना होगा। स्वच्छता के प्रति जन-जागरूकता से हमने पर्यावरणीय मानकों में सुधार की शुरूआत की है।

अटल जी की देन है उत्तराखंडः टीएसआर

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने बुधवार को शहीद स्थल रामपुर तिराहा, मुजफ्फरनगर में शहीद स्मारक पर उत्तराखण्ड राज्य आन्दोलकारी शहीदों की पुण्य स्मृति में श्रद्धासुमन अर्पित किये।

उन्होंने कहा कि राज्य आन्दोलकारियों के संघर्ष व बलिदान के परिणाम स्वरूप ही उत्तराखण्ड का नये राज्य के रूप में निर्माण हुआ। 01 सितम्बर 1994 को खटीमा में पहली घटना घटी थी, जिसमें भवान सिंह, प्रताप सिंह, धर्माननन्द भट्ट, गोपीचन्द, परमजीत सिंह और रामपाल सिंह शहीद हुए थे। दूसरी घटना मसूरी की हुई जिसमें मदन मोहन मंगल, धनपत सिंह, बेलमती चौहान, हंसा धनई, बलवीर सिंह नेगी व पुलिस के सीओ ऊमाकांत त्रिपाठी शहीद हुए। जब हम राज्य आन्दोलन का जिक्र करते हैं तो 02 अक्टूबर का वह दृश्य याद आता है, जब राज्य निर्माण को लेकर आन्दोलनकारी दिल्ली जा रहे थे, तब सूर्य प्रकाश थपलियाल, राजेश लखेड़ा, रवीन्द्र रावत, राजेश नेगी, सतेन्द्र सिंह चौहान, गिरीश भद्री, अशोक कुमार, ओमपाल, अतुल त्यागी, रामगोपाल और पंकज त्यागी ने राज्य निर्माण के लिए अपना बलिदान दिया। इसके अलावा उत्तराखण्ड राज्य निर्माण के लिए अनेक युवक-युवतियों व माताओं ने अपना बलिदान दिया। इसके परिणाम स्वरूप 09 नवम्बर 2000 को उत्तराखण्ड राज्य का गठन हुआ।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड राज्य निर्माण की मांग पर्वतीय राज्य के रूप में बहुत पहले से हो रही थी। तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल ने उत्तराखण्ड को एक पर्वतीय राज्य के रूप में तोहफा दिया। उन्होंने उत्तराखण्ड को औद्योगिक पैकेज दिया तो नरेन्द्र मोदी ने उत्तराखण्ड में कनेक्टिविटी को बढ़ाने का कार्य कर रहे हैं। शहीद राज्य आन्दोलनकारियों के प्रति हमारी सच्ची श्रद्धांजलि यही होगी कि हम उनकी आकांक्षाओं के अनुरूप राज्य बनाएं।

महाकुंभ में भीड़ प्रबंधन की जो प्लानिंग हो, उसे कई बार परखा जाए

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने वर्ष 2021 में हरिद्वार में होने वाले महाकुम्भ की तैयारियों में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा है कि महाकुम्भ की व्यवस्थाएं, इसकी दिव्यता और भव्यता के अनुरूप हों। महाकुम्भ में देश-विदेश से आने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं के लिए हर आवश्यक सुविधा जुटाई जाए। सुरक्षा में किसी तरह की चूक की गुंजाईश नहीं रहनी चाहिए। इसके लिए भीड़ प्रबंधन की जो भी प्लानिंग की जाए, उसे बार-बार परख भी लिया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि वे स्वयं महाकुम्भ की तैयारियों पर नजर रख रहे हैं। समय-समय पर तैयारियों के स्थलीय निरीक्षण के साथ इसकी समीक्षा भी करते रहेंगे।

हरिद्वार महाकुम्भ 2021, दुनिया का सबसे बड़ा धार्मिक व आध्यात्मिक मेला होगा। वैश्विक स्तर के इस मेले में दुनिया भर के देशों से करोड़ों श्रद्धालु आएंगे। इसमें किसी भी स्तर पर कोई लापरवाही क्षम्य नहीं हो सकती है। मुख्यमंत्री ने शासन स्तर पर भी महाकुम्भ की तैयारियों की नियमित मॉनिटरिंग करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने, कुम्भ मेलाधिकारी को दैनिक तौर पर तैयारियों का स्थलीय निरीक्षण करने को कहा है। शासन स्तर से किसी भी तरह की आवश्यकता होने पर तत्काल अवगत कराया जाए। महाकुम्भ की तैयारियों में संत महात्माओं का मार्गदर्शन लेना सुनिश्चित किया जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा है कि स्थाई प्रकृति के काम अक्टूबर 2020 तक पूरे कर लिए जाएं। समयबद्धता और गुणवत्ता सुनिश्चित की जाए। इस वैश्विक मेले में बड़ी संख्या में आने वाले श्रद्धालु, राज्य के दूसरे पर्यटन स्थलों में भी जा सकते हैं, इसलिए कुम्भ मेले के दौरान लोगों को प्रदेश के पर्यटन स्थलों की जानकारी देने के लिए पर्यटन सूचना केंद्र स्थापित किए जाएं। तमाम तरह की सुविधाएं विकसित करने मे आधुनिकतम तकनीक का प्रयोग किया जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सुरक्षा व भीड़ प्रबंधन मे तैनात किए जाने वाले पुलिसकर्मियों का व्यवहार कुशल होना जरूरी है। सुरक्षा के लिए हर आवश्यक व्यवस्था समय से कर ली जाए। रेलवे व निकटवर्ती दूसरे राज्यों के अधिकारियों से समन्वय रखा जाए। स्नान घाटों सहित पूरे कुम्भ क्षेत्र में सफाई की पूरी व्यवस्था रहे। श्रद्धालुओं के लिए स्वास्थ्य, पेयजल, पार्किंग, आवास व शौचालय की सम्पूर्ण सुविधा रहनी चाहिए।

बिना मीटर के दर्जनभर लोगों को थमाया कनेक्शन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वाकांक्षी सौभाग्य योजना के नाम पर बिजली विभाग के अफसरों का फर्जीवाड़ा देखने को मिला है। कहीं फर्जी कनेक्शन से बिजली आपूर्ति की जा रही है तो कहीं पर दर्जन भर लोगों को कनेक्शन देकर मीटर ही नहीं लगवाए गए हैं। ये गड़बड़झाला फर्जीवाड़ा सब स्टेशन के क्षेत्र में जोरों पर चल रहा है। क्षेत्र के बिजली विभाग के एई को भनक ही नहीं है। हाल ही में यूपीसीएल के एमडी बीसीके मिश्रा ने हिदायत दी है कि बिजली मीटर लगाने के मानकों का उल्लंघन करने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। साथ ही मिलीभगत करने वाले विभागीय अफसरों के पेंच भी कसे जाएंगे। इसके लिए महीने की हर 10 तारीख को कनेक्शन और मीटरों का ब्योरा भी तलब किया जाएगा।

दूसरी तरफ मुनिकीरेती सब स्टेशन के अफसर एमडी की हिदायतों को ठेंगा दिखा रहे हैं। बड़ी बात यह है कि जो कनेक्शन बिजली पोल से 40 मीटर पर दिए जाने चाहिए वहां 200 मीटर की दूरी पर फर्जी मीटर लगावाकर रोशनी फैलाई जा रही है। ये नजारा शिवपुरी पेट्रोल पंप के पास गुज्जरों की बस्ती में देखा जा सकता है। कनेक्शनधारकों का कहना है कि बिजली विभाग के जेई मौका मुआयना करने आए थे। पिछले एक साल से कनेक्शन मिला हुआ है। उधर, मुनिकीरेती सब स्टेशन के एई सौरभ चमोली का कहना है कि मामला मेरे संज्ञान में ही नहीं है।

देहरादून होगा देश का ग्रेविटी आधारित पेयजल उपलब्ध कराने वाला पहला स्मार्ट शहर

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने शनिवार को मसूरी में आयोजित उत्तराखण्ड अर्बन ट्रांस्फोरमेशन समिट 2019 का शुभारम्भ किया। उन्होंने समिट में प्रतिभाग कर रहे केन्द्रीय शहरी विकास मंत्रालय के संयुक्त सचिव तथा स्मार्ट सिटी के मिशन डायरेक्टर के साथ ही देश के 12 प्रमुख स्मार्ट सिटी के सी.ई.ओ एवं स्मार्ट सिटी मिशन से जुड़ी कार्यदायी संस्थाओं के प्रमुखों का उत्तराखण्ड में स्वागत करते हुए कहा कि इस समिट में होने वाला मंथन स्मार्ट सिटी मिशन को गति प्रदान करेगा। इससे आपसी अनुभवों एवं ज्ञान का भी आदान प्रदान होगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि समिट में होने वाले आपसी विचार विमर्श एवं अनुभव स्मार्ट सिटी के कार्यों को नई दिशा प्रदान करने में मददगार रहेगा। देहरादून स्मार्ट सिटी का देश-भर में 99 से 32वें पायदान पर आने पर उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त की। देहरादून का स्मार्ट सिटी बनने में उन्होंने समेकित प्रयासों की भी जरूरत बतायी। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमें अपनी सोच भी स्मार्ट बनानी होगी। जब हमारी सोच अच्छी होगी तो उनके परिणाम भी अच्छे होंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आधुनिक तकनीकी का बेहतर इस्तेमाल कर ही बेहतर परिणाम प्राप्त किये जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि कोशी एवं रिस्पना में एक घंटे में लाखों वृक्षों का रोपण जन सहभागिता का अनूठा उदाहरण है। सौग बांध से देहरादून को ग्रेविटी आधारित पेयजल उपलब्ध कराये जाने की योजना भी शीघ्र धरातल पर उतरेगी। इसमें देहरादून को ग्रेविटी आधारित पेयजल उपलब्ध होने के साथ ही करोड़ों के बिजली व्यय की बचत होगी, भूजल स्तर में सुधार होगा तथा रिस्पना नदी को ऋषिपर्णा बनाने की भी राह प्रशस्त होगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड को पोलीथीन मुक्त प्रदेश बनाने की दिशा में हमारे प्रयास साकार होते दिखाई दे रहें हैं। देश में इसकी शुरूआत हो रही है तब हम इस दिशा में काफी आगे बढ़ चुके हैं। उन्होंने देहरादून शहर को पोलीथीन मुक्त बनने के लिए नगर निगम को 50 लाख रूपये देने की भी घोषणा की।

465 पेटी अंग्रेजी शराब के साथ दो युवक गिरफ्तार, कीमत 27 लाख रूपए

रायवाला पुलिस ने देहरादून से पहाड़ों में ट्रक से ले जाई जा रही 465 पेटी अंग्रेजी शराब के साथ दो लोगों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार शराब की कीमत करीब 27 लाख रुपए है।
थानाध्यक्ष रायवाला अमरजीत सिंह रावत ने आरोपियों की पहचान 28 वर्षीय नवीन कुमार पुत्र त्रिलोक राम निवासी गोरा पड़ाव थाना हल्द्वानी जिला नैनीताल और 19 वर्षीय चंदन सिंह बिष्ट पुत्र राम सिंह बिष्ट निवासी जैती पोस्ट जाख थाना लम्गड़ा जिला अल्मोड़ा के रूप मेें कराई।

थानाध्यक्ष ने बताया कि देहरादून के पथरिया पीर में जहरीली शराब के सेवन से हुई मौतों व त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में वोटरों को लुभाने के लिए अवैध रूप से तस्करी कर लाई जाने वाली शराब के खिलाफ विशेष रूप से अभियान चलाया जा रहा है। इसी बीच पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली कि देहरादून की तरफ से एक ट्रक में भारी मात्रा में शराब तस्करी के लिए लाई जा रही है। इसकी सप्लाई कोटद्वार के रास्ते पहाड़ में होनी है।

सूचना पाकर पुलिस टीम ने थाना रायवाला से आगे बैरियर लगाकर सघन चेकिंग की। कुछ ही देर में एक ट्रक देहरादून की तरफ से तेजी से आते दिखाई दिया, जिसे पुलिस ने बैरियर लगाकर बामुश्किल रोका।

थानाध्यक्ष ने बताया कि ट्रक नंबर यूके- 07-सीबी-6339 की तलाशी लेने पर ट्रक के अंदर 465 पेटियां अंग्रेजी शराब की बरामद हुई। उत्तराखंड ब्रांड की बरामद शराब की कीमत लगभग 27 लाख रुपये है। पुलिस टीम में उप निरीक्षक विक्रम सिंह नेगी, ताजवर सिंह, कांस्टेबल दिनेश महर, सचिन सैनी, प्रवीण सिंधू शामिल रहे।

कोई अधिवक्ता व बार हड़ताल का आह्वान करें, तो बार काउंसिल आफ इंडिया करे कार्रवाई

हरिद्वार, यूएस नगर और देहरादून में 34 साल से शनिवार को होने वाली वकीलों की हड़ताल और कार्य बहिष्कार को नैनीताल हाईकोर्ट ने असंवैधानिक घोषित किया है। कोर्ट ने यह फैसला एक जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया।

हाईकोर्ट ने साफ कहा कि कोई भी अधिवक्ता या बार काउंसिल हड़ताल करता या हड़ताल का आह्वान करता है तो बार काउंसिल ऑफ इंडिया उस पर कार्रवाई करे। कोर्ट ने कहा कि यदि अधिवक्ता हड़ताल पर जाएंगे तो इसे कोर्ट की अवमानना माना जाएगा।

कोर्ट ने कहा कि यदि अधिवक्ता न्यायिक कार्यों से विरत रहते हैं तो जिला जज इसकी रिपोर्ट हाईकोर्ट को करेंगे और हाईकोर्ट उस रिपोर्ट के आधार पर हड़तालियों के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई करेगा।

मुख्य न्यायाधीश रमेश रंगनाथन एवं न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। देहरादून निवासी ईश्वर शांडिल्य ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा था कि दून, हरिद्वार और ऊधमसिंह नगर में पिछले 34 वर्षों से शनिवार को अधिवक्ताओं की ओर से हड़ताल की जाती रही है।
इससे वादकारियों को न्याय से वंचित होना पड़ रहा है। याची ने हड़ताल को गैर कानूनी घोषित करने की मांग की थी। पक्षों की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट की खंडपीठ ने वादकारियों के हित में अहम फैसला सुनाया है।

कोर्ट ने कहा कि समस्त न्यायिक कार्य सुचारु रूप से चलते रहेंगे। कोई भी न्यायिक अधिकारी हड़ताल की वजह से मुकदमे की तारीख नहीं टालेगा। यदि हड़ताल की वजह से सुनवाई टली तो इसकी जवाबदेही न्यायिक अधिकारी की होगी।

कोर्ट ने सभी जिला पुलिस प्रमुखों को हड़ताल के समय न्यायालयों को सुरक्षा मुहैया कराने को कहा है ताकि न्यायिक कार्यों में किसी तरह का व्यवधान न हो सके। कोर्ट ने कहा कि यदि वकीलों को किसी भी न्यायिक अधिकारी से शिकायत है तो शिकायत पर हाईकोर्ट जांच करेगा और आरोप सही पाए जाने पर हाईकोर्ट संबंधित के खिलाफ कार्रवाई भी करेगा।

स्कूलों में दैनिक प्रार्थना में बच्चों को मौसमी बीमारियों से बचाव व उपचार की जानकारी देंः टीएसआर

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने एच-1 एन-1 इन्फ्लुएंजा के बारे में जागरूकता अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि मौसमी बीमारियों से बचाव व उपचार की तैयारियां पहले से ही कर ली जानी चाहिए। सर्दियों में फैलने वाले इस इन्फ्लुएंजा से बचाव की जानकारी अधिक से अधिक लोगां तक पहुंचाई जाए। विशेष रूप से स्कूलों में जाकर दैनिक प्रार्थना के समय बच्चों को इसके बारे में बताया जाए कि किन छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखने से इससे बचा जा सकता है। मुख्यमंत्री आवास में एच-1 एन-1 इन्फ्लुएंजा से बचाव व उपचार की तैयारियों पर स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा कर रहे थे। वीडियो कान्फ्रेंसिंग के माध्यम से सभी जिलाधिकारी व मुख्य स्वास्थ्य अधिकारी भी समीक्षा बैठक में उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि एच-1 एन-1 इन्फ्लुएंजा को लेकर आम लोगों में भय न हो, इसके लिए बीमारी और इससे बचाव के उपायों का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए। उपचार के लिए आवश्यक दवाईयां भी पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध रहे।

बैठक में बताया गया कि एच-1 एन-1 इन्फ्लुएंजा एक सामान्य किस्म का इन्फ्लुएंजा है। इससे घबराने जैसी कोई बात नहीं होती है। इसके मरीजों का बहुत कम प्रतिशत होता है जिन्हें कि भर्ती कराए जाने की जरूरत पड़ती है। इसमें सामान्य सर्दी, जुखाम जैसे लक्षण ही होते हैं। घर पर ही इसका उपचार हो जाता है। बाजार में इसकी दवा पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है। परंतु यह दवा केवल डाक्टर का पर्चा दिखाने पर ही दी जा सकती है। केवल डायबिटिज, दमा आदि के रोगियों व उम्रदराज लोगों को सावधानी बरतनी होती है। अधिक से अधिक तरल पदार्थ व पौष्टिक आहार लिया जाना चाहिएा। अगर किसी बच्चे में इसके लक्षण दिखें तो स्कूल नहीं भेजा जाना चाहिए। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने प्रदेश में जिला अस्पतालों, स्वास्थ्य केंद्रों की स्थिति की भी जानकारी ली।

जीएसटी की दरों में संसोधन से टूरिज्म और सर्विस बेस्ड इंडस्ट्री को बढ़ावा मिलेगाः सीएम

सीएम आवास में आयोजित प्रेसवार्ता को सम्बोधित करते हुए मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कहा कि हालही में केंद्र सरकार द्वारा इकोनॉमी में उठाए गए सुधारवादी कदमों से उत्तराखंड को भी बड़ा फायदा होगा। पिछले एक डेढ़ साल से उत्तराखंड में निवेश और उद्योगों को मजबूत करने के लिए की गई पहल को अब और मजबूती मिलेगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में निवेश को बढ़ावा देने के लिए हमने अनेक नई नीतियां बनाई हैं और अनेक नीतियों मे आवश्यक संशोधन किए हैं। सिंगल विंडो क्लीयरेंस सिस्टम को मजबूती दी है, निवेश के अनुकूल माहौल बनाया है। इन्वेस्टर्स समिट के बाद अब तक 17 हजार करोड़ रुपए का निवेश ग्राउंडेड हो चुका है। केंद्रीय वित्तमंत्री जी ने आर्थिक सुधारों की जो घोषणाएं की हैं, उसके बाद हमारे प्रयासों को और भी ज्यादा बल मिलने वाला है। इन घोषणाओं का सीधा फायदा उत्तराखंड के उद्योग जगत को मिलने वाला है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड एक पर्यटन राज्य है। हमने पर्यटन को बूस्ट करने के लिए नई पर्यटन नीति बनाई है। जीएसटी की दरों में संशोधन से टूरिज्म और सर्विस बेस्ड इंडस्ट्री को बढ़ावा मिलेगा। पहले 2500 से 7500 रुपये तक के होटल कमरों पर 18 प्रतिशत टैक्स लगता था, जिसे घटाकर 12 प्रतिशत किया गया है। इसी तरह 7500 से ऊपर के होटल कमरों पर पहले 28 प्रतिशत जीएसटी लगता था जिसे घटाकर 18 प्रतिशत किया गया है। एक हजार रुपये से कम के होटल कमरों पर 5 प्रतिशत तक जीएसटी लगता था, लेकिन अब कोई जीएसटी नहीं लगेगा। राज्य के होटल व्यावसायियों का कहना है इससे राज्य में होटल व्यवसाय में 15 से 20 प्रतिशत तक ग्रोथ होगी। इससे उत्तराखंड में हॉस्पिटैलिटी सेक्टर मजबूत होगा, ज्यादा पर्यटक आने से होटल व्यवसाय मजबूत होगा जो राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूती देगा, रोजगार की नई संभावनाएं पैदा करेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि भंडारण योग्य खाद्य पदार्थों पर भंडारण के समयानुसार छूट दी जाएगी, इससे उत्तराखंड में भी फूड प्रोसेसिंग इंडस्ट्री को छूट मिल सकेगी। यहां के उत्पादों को भंडारण की उचित व्यवस्था मिलेगी, उत्पादों की खपत बढ़ेगी तो स्थानीय काश्तकारों को फायदा मिलेगा। इलेक्ट्रिक वाहनों पर जीएसटी 12 प्रतिशत से घटकर 5 प्रतिशत हुआ है, राज्य सरकार ने इलेक्ट्रिक व्हीकल पॉलिसी लागू की है, जिसके तहत इलेक्ट्रिक वाहनों का प्रचलन बढ़ेगा, लोगों को रोजगार मिलेगा, इलेक्ट्रिक वाहनों से प्रदूषण पर नियंत्रण लगेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा दी जाने वाली राहत से उत्तराखंड में ऑटोमोबाइल, फार्मा, मैनुफैक्चरिंग सेक्टर के लिए भी यह एक बड़ा बूस्ट होगा। स्किल्ड मैनपावर, प्रभावी सिंगल विंडो सिस्टम, बेहतर कानून व्यवस्था, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र से निकटता आदि कारणों से उत्तराखण्ड को विशेष लाभ होगा।