राज्य के विकास के लिए हमें मिलकर कार्य करना हैः पॉल

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स्वतंत्रता दिवस की 69वीं वर्षगांठ के पावन अवसर पर उत्तराखण्ड के राज्यपाल डा. कृष्ण कांत पाल ने राजभवन में ध्वजारोहण करके राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे को सलामी दी। उन्होंने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी सहित देश को आजाद कराने वाले सभी स्वतंत्रता सेनानियों एवं वीर शहीदों के बलिदान को स्मरण कर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि दी।
आजादी के इस महान राष्ट्रीय पर्व के अवसर पर सभी को बधाई देते हुए राज्यपाल ने कहा कि हमे आजादी के महानायकों का कठिन संघर्ष और बलिदान याद रखते हुए आजादी को कायम रखने के लिए निरन्तर सजग व सकारात्मक सोच के साथ सक्रिय रहना होगा। उन्होंने कहा कि महात्मा गाँधी के स्वच्छ भारत के सपने को पूरा करने के लिए 2 वर्ष से जारी स्वच्छता अभियान को साकार करने के लिए सभी को अपना योगदान देना है। राज्यपाल ने राज्यगठन के आन्दोलनकारियों के संघर्ष व त्याग को याद करते हुए कहा कि राज्यगठन के लिए जिन आन्दोलनकारियों ने कठिन संघर्ष किया उनकी तथा जनभावनाओं के अनुरूप राज्य के विकास के लिए हमें मिलकर कार्य करना है। यह गर्व की बात है कि हमारा राज्य तेजी से प्रगति कर रहा है। जिसकी छवि देश के सबसे स्वच्छ, स्वस्थ, सुन्दर, समृ़द्ध तथा संभावनाओं के अवसरों से भरपूर राज्य के रूप में स्थापित करने के लिए सबकी समान भागीदारी भी जरूरी है। ध्वजारोहण के बाद आयोजित वृक्षारोपण कार्यक्रम में राज्यपाल द्वारा राजभवन परिसर में जिकोंबायलोबाज् के पौधे का रोपण किया गया जिसकी उम्र लगभग 1000 वर्ष मानी जाती है। ध्वजारोहण कार्यक्रम में पी.ए.सी. के जवानों द्वारा राष्ट्रीय ध्वज एवं राज्यपाल को सलामी दी गई। इस अवसर पर राज्यपाल के विशेष कार्याधिकारी एवं सचिव श्री अरूण ढौंडियाल, वित्त नियंत्रक के.सी.पाण्डे, परिसहाय डा० योगेन्द्र सिंह रावत, अनुज राठौर सहित राजभवन के सभी अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित थे।

उत्तराखण्ड शिल्प रत्न पुरस्कारों की धनराशि बढ़ाने के निर्देश

मुख्यमंत्री हरीश रावत ने उत्तराखण्ड शिल्प रत्न पुरस्कारों की धनराशि बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने अलग-अलग विधाओं के अधिक से अधिक शिल्पियों को इन पुरस्कारों से जोड़ने के भी निर्देश दिए हैं। उन्होंने सहकारिता एवं सूक्ष्म लघु एवं मध्यम उद्यम (एम.एस.एम.आई) प्रदेश में एक-एक पार्क विकसित करने तथा राज्य के प्रमुख स्थलों पर पुरस्कार प्राप्त करने वाले शिल्पियों के चित्र लगाने के भी निर्देश दिये है।
हरेला, झूमेलो एवं घी संग्राद महोत्सव के अवसर पर सोमवार को स्थानीय रेंजर मैदान में उत्तराखण्ड राज्य शिल्प रत्न पुरस्कार योजना के अन्तर्गत हथकरघा-बुनकरों, हस्तशिल्पों एवं लघु उद्यमियों को पुरस्कार वितरित करते हुए मुख्यमंत्री रावत ने कहा कि पुरस्कार पाने वाले शिल्पियों के प्रयास समाज को प्रेरणा देने का कार्य करेंगे। उन्हांेंने कहा कि हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत एवं विलुप्त हो रही कला, संगीत व शिल्प को नई पहचान मिले इसके लिए हरेला, झूमेलो, घी संग्राद महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। हमारे लोग अपनी जड़ों से जुड़ें रहे, हमारी संगठित पहचान बनी रहे इसके लिए हम सबको प्रयास करने होंगे।

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कहा कि पर्वतीय क्षेत्रों में हमारे शिल्पियों द्वारा बनाये गये पत्थरों के मकान एवं उन पर लकड़ी की नक्कासी बेमिशाल हैं। यह अनूठी भवन शैली इंजीनियर के लिये चुनौती है अपनी शिल्पकला को बढ़ावा देकर देश को उत्तराखण्डी भवन शैली देने का हमारा प्रयास होना चाहिए। उन्होंने कहा कि हमारे चारधाम में इड़ली, डोषा मिल सकता है तो देश व दुनिया में किसी उत्तराखण्डी व्यंजन की पहचान क्यों नहीं बन सकती है। मुरादाबाद के ब्रास के बर्तनों की तरह अल्मोड़ा के कॉपर व एपण के साथ ही यहाँ के शाल पिछौडे़ बेडशीट को क्यों पहचान नहीं मिल सकती। यदि हम इस दिशा में सोचे तथा प्रयास करें तो यह सब सम्भव हो सकता है। हमारे व्यंजनों में रोगों को दूर करने की क्षमता है, आवश्यकता है इन्हें अपनाने की, इनके उत्पादन पर ध्यान देने की। हम लोग जो गांव छोड़कर शहर में बस गये हैं, कम से कम अपने व्यंजनों को अपने भोजन का हिस्सा बनायें जब हम इन्हें अपनायेंगे तभी और लोगों से हम इसकी अपेक्षा कर सकते हैं। राज्य सरकार अपनी ओर से इस दिशा में पूरा प्रयास कर रही है। गरम पानी, पीपलकोटी सहित अन्य स्थलों पर ग्रामीण हाट बनाये जा रहे हैं महिला स्वयं सहायता समूहों को सामुहिक खेती के लिए प्रेरित किया जा रहा है इसके लिए अनुदान व्यवस्था की गई है। हमारा प्रयास बंजर खेतों को उपजाऊ बनाने व लोगों को खेती से जोड़ने का है। उन्होंने कहा कि विषम परिस्थितियों का सामना करने से ही रास्ते आसान होंगे।

मुख्यमंत्री रावत ने इस अवसर पर हथकरघा बुनकर के लिए भी श्रीमती विन्या देवी भटवाड़ी को प्रथम पुरस्कार के रूप में 15 हजार रूपये, श्रीमती बिमला शेरपुर (देहरादून) को द्वितीय पुरस्कार रूप में 10 हजार रूपये तथा श्रीमती आशा आर्य अल्मोड़ा व लीला देवी बागेश्वर को तृतीय पुरस्कार के रूप में 07 हजार रूपये की धनराशि व प्रशस्ति पत्र प्रदान किया। इसी प्रकार हस्तशिल्प के क्षेत्र में सितारगंज के परिमल मपंक्षी को प्रथम, डुडा के शोभाराम को द्वितीय व कु. आशा आर्य नैनीताल को तृतीय पुरस्कार प्रदान किये। जबकि लघु उद्यम के क्षेत्र में अशोक पुरी, उधमसिंहनगर को प्रथम, सफिउल्ला खां देहरादून को द्वितीय तथा हेमचंद पंत बागेश्वर को तृतीय पुरस्कार प्रदान किये।
मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर सहकारिता विभाग द्वारा तैयार किये गये सहकारिता को समर्पित गीत की सीडी भी रिलीज की। उन्होंने कहा कि सहकारिता एवं एमएसएमई आर्थिक विकास से सम्बन्धित योजनाओं के लिए ध्वजवाहक का कार्य करें, लघु उद्यमियों की सहायता करे, स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए मददगार बनें। कार्यक्रम में विधायक एवं सभा सचिव राजकुमार, अपर निदेशक सुधीर नौटियाल सहित सहकारिता व अन्य विभागों के अधिकारी उपस्थित थे।

राजकीय ठेकेदार महासंघ का धरना समाप्त

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ऋषिकेश।
राजकीय ठेकेदार महासंघ बडी निविदायें निरस्त करने एवं ई-टेण्डरिग के खिलाफ बीते एक सप्ताह से आंदोलनरत थे। मंगलवार को एसई एमसी पाण्डेय एवं अधीशासी अभियंता दीक्षांत गुप्ता धरनास्थल पहुंचे और दो निविदायें निरस्त करने के साथ योजना में बची धनराशि की निविदाये छोटे ठेकेदारों ए,बी व सी केटागिरी में लगाने का आश्वासन दिया। उन्होंने निविदाओं में अनावश्यक शर्ते भी नहीं लगाये जाने का भरोसा दिया। महासंघ अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह रावत ने मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई पर शासन का आभार जताया। इससे पहले कांग्रेस महासचिव राजपाल खरोला व सचिव जगमोहन कुडियाल भी आंदोलन को समर्थन देने धरनास्थल पहुंचे।

हक की मांग को लेकर तहसील में प्रदर्शन

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16 साल से कर रहे हैं भूमिधरी का अधिकार देने की मांग
25 जुलाई से अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हैं विस्थापित
ऋषिकेश।
मंगलवार को सैकड़ों की संख्या में टिहरी बांध प्रभावित पशुलोक धरना स्थल पर एकत्रित हुए और रैली के रूप में आईडीपीएल होकर तहसील पहुंचे। यहां विस्थापित समन्वय विकास समिति पशुलोक के अध्यक्ष हरि सिंह भंडारी ने कहा कि टिहरी जनपद के एक दर्जन गांवों के तीन हजार पुनर्वासित परिवार वर्ष 2000 में पशुलोक में बसाए गए थे, लेकिन 16 साल बाद भी विस्थापितों को भूमिधरी का अधिकार नहीं मिल पाया है। विस्थापित 25 जुलाई से पशुलोक में अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हैं, लेकिन उनकी सुध लेने वाला कोई नहीं है। सचिव जगदमा रतूड़ी ने कहा कि क्षेत्र को राजस्वग्राम का दर्जा नहीं मिलने से विस्थापित सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं उठा पा रहे हैं। प्रमाण-पत्र ना बनने से उनके बच्चों को रोजगार के लिए परेशानी उठानी पड़ रही है। उन्होंने सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगा जल्द से जल्द क्षेत्र को भूमिधरी का अधिकार देने की मांग की।

वनभूमि भी है भूमिधरी में रोड़ा
वनभूमि के चलते भी भूमिधरी का अधिकार मिलने में परेशानी आ रही है। पुनर्वास निदेशालय की लापरवाही एवं शासन की अनदेखी के चलते भूमिधरी का अधिकार नहीं मिल पाया है। जबकि 2005 में मुख्य संरक्षक वन ने पुनर्वास निदेशालय को शासन स्तर पर आदेश जारी करवाने को कहा था, लेकिन शासन की अनदेखी के चलते समस्या का निदान नहीं हो पाया है।

पट्टीदोगी के ग्रामीणों ने डीएफओ कार्यालय में डाला डेरा

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तैला तोंक और काटल तोंक में हाथियों के उत्पात से परेशान ग्रामीण

ऋषिकेश।
पट्टी दोगी के ग्रामीण नरेन्द्रनगर वन प्रभाग के डीएफओ दफ्तर पहुंचे। उन्होंने वन विभाग के खिलाफ प्रदर्शन कर नारेबाजी की। ग्रामीणों का आरोप है कि पिछले कई दिनों से हाथी मौजा तिमली के तैला तोंक और नाडूकाटल के काटल तोंक में आकर उत्पात मचा रहे हैं। वह फसल भी नष्ट कर रहे हैं। पूर्व जिला पंचायत सदस्य सरदार सिंह पुंडीर ने कहा कि शिवपुरी गंगा की तरफ से आने वाले हाथियों से रोकथाम के लिए नेशनल हाईवे के पास खाई खोदने के साथ बाड़ का निर्माण फौरी तौर पर किया जाए। घेराव करने वालों में जगदीश कुलियाल, चतर सिंह भंडारी, आनंद सिंह, महावीर सिंह, राजवीर सिंह, भगवान सिंह, सीएस भट्ट, शिव सिंह, एसएस भंडारी, मोहित,जगदीश सिंह, सुमन देवी सहित कई लोग मौजूद थे।

एक स्वर में रामायण पाठ करने वाले तीन छात्र पुरस्कृत

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ऋषिकेश।
श्री रामायण प्रचार समिति की ओर से मालवीय मार्ग पर स्थित तुलसी मंदिर में सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। जिसमें दर्शन महाविद्यालय की शिखा प्रतियोगिता में प्रथम आने वाले आशीष उनियाल, सौरभ डबराल और अमित भट्ट को अनुशासन एवं रामायण का पाठ एक स्वर में करने के लिए सम्मानित किया गया। इस अवसर पर पौधरोपण भी किया गया। जिसमें नगर पालिका चेयरमैन दीप शर्मा ने भाग लिया। कार्यक्रम के संयोजक रवि शास्त्री ने बताया कि आज महोत्सव का समापन होगा। आज तुलसी दास जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि देने के साथ ही हवन यज्ञ का आयोजन किया जाएगा। इस अवसर पर गोपालाचार्य शास्त्री, कृष्ण उनियाल, अशोक कुमार अरोड़ा, चन्द्रभान शर्मा, राजीव लोचन, जय स्वरूप बहुगुणा, मनमोहन शर्मा सहित कई लोग मौजूद रहे।

एनएसयूआई के कई पूर्व पदाधिकारियों ने एबीवीपी का दामन थामा

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शराब की राजनीति व फंड के नाम पर चंदा उगाही का लगाया आरोप
ऋषिकेश।
ऋषिकेश प्रेस क्लब सभागार में एनएसयूआई के दिग्गज छात्र नेता राजेन्द्र सिंह बिष्ट, वर्तमान छात्र संघ अध्यक्ष संदीप शर्मा, विपुल पोखरियाल, मयंक रवानी, अमित गांधी ने एबीवीपी की प्रेस कांफ्रेस में संगठन की सदस्यता ली। एबीवीपी छात्र नेताओं ने सभी का फूलमाला पहनाकर स्वागत किया। पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने एनएसयूआई नेताओं पर गंभीर आरोप लगाए। कहा कि एनएसयूआई सिर्फ शराब की राजनीति कर रही है। उन्होंने संगठन में कार्यकर्ताओं को उचित सम्मान नही मिलने पर भी रोष जताया। कहा कि एनएसयूआई के पास फंड मांगने के सिवाय कोई कार्य नहीं है। कहा, छात्र नेताओं में सबसे ज्यादा मुकदमें एनएसयूआई के छात्र नेताओं पर ही दर्ज हैं। बताया कि एबीवीपी के सिद्धांत ज्ञान, चरित्र और एकता से प्रेरणा लेकर उन्होंने संगठन की सदस्यता ली।
प्रदेश के राजनीतिक घटनाक्रम की तस्वीर भी छात्र संघ चुनाव में देखने को मिली। सीएम पर छोटी सोच रखने के आरोप भी लगे। तंज कसते हुए कहा कि ऐसे छात्र नेता किस काम के जो अपनी ही सरकार होने बावजूद महाविद्यालय की 200 मीटर सड़क तक स्वीकृत नही करा सके। इस मौके पर कौशल बिजल्वाण, संजीव चौधरी आदि समेत कई छात्रनेता मौजूद थे।

एबीवीपी को मजबूती मिली
लंबे समय ये हाशिये पर चल रही एबीवीपी में छात्र नेता राजेन्द्र सिंह बिष्ट, वर्तमान छात्र संघ अध्यक्ष संदीप शर्मा, विपुल पोखरियाल, मयंक रवानी, अमित गांधी के आने से उत्साह देखा जा रहा है। सूत्रों के अनुसार छात्र संघ चुनाव के बाद संगठन छात्र नेताओं को महत्वपूर्ण दायित्व भी सौंपने पर विचार कर रहा है।

तो शराब विरोधी अभियान क्या है
पुरानी कहावत है कि समय बुरा आये तो ऊंट पर बैठे व्यक्ति को कुता भी काट देता है। ऐसा ही हुआ जब प्रेस क्लब में पूर्व एनएसयूआई छात्र नेताओं ने स्वयं ही कह दिया कि एनएसयूआई शराब की राजनीति करती है। उन्होंने छात्र नेताओं की पोल खोल कर रख दी। अब बात निकली है तो दूर तक जायेगी ही।

खतरे में नैनीताल झील की प्राकृतिक सुदंरता

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नैनीताल। प्रयाग पाण्डे

नैनीताल – देश -दुनिया के सैलानियों के आकर्षण का केंद्र नैनीताल की खूबसूरत झील इस दौरान अपने इतिहास के सबसे कठिन दौर से गुजर रही है। मिट्टी-मलबा, कूड़ा-करटक भर जाने से पैदा हुए प्रदूषण के साथ जल स्तर में आई जबरदस्त गिरावट समेत अनेक समस्याओं से जूझ रही नैनी झील के किनारों को अब झील के रखवालों ने ही मिट्टी ,पत्थर और सीमेंट से पाटना शुरू कर दिया है। नैनीताल और आसपास के इलाकों को रोजी-रोटी ,पानी और पहचान देने वाली झील अब खुद यतीम हो गई है।
नैनीताल की झील की कुदरती बनावट में ही इसकी असल खूबसूरती छिपी है। दुर्भाग्य से झील के रखरखाव के लिए जिम्मेदार सरकारी महकमे ही इसकी प्राकृतिक शोभा को बदरंग करने पर आमादा हैं। मजेदार बात यह कि यह क्षरण एशियन विकास बैंक की माली मदद से धरोहरों के संरक्षण के नाम पर हो रहा है। उत्तराखण्ड के पर्यटन महकमे की हेरिटेज भवनों के संरक्षण की एक ऐसी ही योजना नैनी झील के क्षरण की सबब बन गई है।
उत्तराखण्ड के पर्यटन विभाग ने हेरिटेज भवनों को सहेजने के लिए योजना बनाई है। इस योजना के लिए एशियन विकास बैंक से बेहिसाब आर्थिक मदद ली जा रही है। योजना में नैनीताल को भी शामिल किया गया है। योजना के तहत “कल्चर हेरिटेज एंड अर्बन प्लेस मेकिंग इन नैनीताल” नाम से नैनीताल नगर में विभिन्न कामों के लिए तकरीबन अट्ठाइस करोड़ रूपए मंजूर हुए हैं। इन कामों का ठेका दिल्ली की “सिम्पलेक्स” नाम को दिया गया है।
धरोहरों को संरक्षित करने के नाम पर चल रही इस योजना के तहत इन दिनों नैनीताल की मालरोड में तालाब के किनारे स्थित दुर्गा साह नगर पालिका पुस्तकालय के जीर्णोद्धार का काम चल रहा है। ब्रिटिशकाल में बने बेहद हल्के पुस्तकालय शेड को संरक्षित करने के बहाने तालाब के एक बड़े हिस्से में पत्थरों की चौड़ी दीवार देकर उस हिस्से को मिट्टी-मलबे से पाटने का काम चल रहा है। झील के भीतर इस बेतुके एवं कुरूप निर्माण से झील की प्राकृतिक सुंदरता खतरे में है। निहायत गैर जरूरी और नासमझी भरे इस निर्माण से झील का भौगोलिक क्षेत्रफल और जल संग्रहण क्षमता दोनों का कम होना तय है।
दुर्गा साह नगर पालिका पुस्तकालय का यह शेड करीब एक सौ साल पहले बना था। शुरुआत में यह वाईडब्ल्यूसीए का बोट हाउस था। 1937 में नगर पालिका ने इस शेड को पुस्तकालय के लिए अधिगृहीत कर लिया। यह शेड तालाब के किनारे पत्थर के पिलरों के ऊपर टिका है। इसकी पर्दा दीवारें हल्के टिन से बनाई गई हैं। इस शेड के मूल ढांचे के रहते तालाब के भौगोलिक क्षेत्रफल और जल संग्रहण क्षमता पर कोई प्रतिकूल असर नहीं पड़ रहा था। इस शेड के नीचे बराबर पानी रहा करता था। पर अब एयर कंडीशन कमरों में बैठे योजनाकारों को इस शेड को संरक्षित करने के वास्ते तालाब के भीतर बदनुमा दीवार लगाने के अलावा और कोई तकनीक नहीं सूझ रही है।
वहीं, दूसरी ओर नैनीताल की झील की देख-रख और रखरखाव के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार लोक निर्माण विभाग ने तल्लीताल क्षेत्र में झील के भीतर एक पक्का कैचपिट बना डाला है। इससे तालाब का न केवल अंदरूनी क्षेत्रफल कम हुआ है, बल्कि जल संग्रहण क्षमता भी घट गई है। लोनिवि के अधिशासी अभियंता एस. के. गर्ग के मुताबिक यह कैचपिट झील में मलबा जाने से रोकने के लिए बनाया गया है। हकीकत यह है कि कैचपिट झील के मौजूद जल स्तर करीब पांच फिट में तालाब में बनाया गया। जबकि इस मौसम में तालाब का जल स्तर साढ़े नौ फिट होना चाहिए था। तालाब का अधिकतम जल स्तर बारह फिट तक रखे जाने की व्यवस्था है। भविष्य में झील में मानक के मुताबिक पानी भरा तो इस कैचपिट का डूबना तय है। ऐसी सूरत में इस कैचपिट की उपयोगिता क्या होगी, इसका जबाब इंजीनियरों के पास नहीं है। गौरतलब बात यह है कि उत्तराखण्ड उच्च न्यायालय ने जिले की सभी झीलों के तीस मीटर के दायरे में निर्माण कामों पर पाबंदी लगाने के आदेश दिए हैं।

एनजीटी के आदेश पर गंगा किनारे होगा सर्वे

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ऋषिकेश।
गंगा किनारे बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के लिए सर्वे कराने की तैयारी चल रही है। एनजीटी के आदेश पर सिंचाई विभाग बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के लिए मानक तय कर रहा है। जल्द ही इस ओर सर्वे का कार्य शुरू हो जायेगा।
डीएम टिहरी इन्दुधर बौडाई ने नगर पालिका मुनिकीरेती के बाढ़ परिक्षेत्र की बैठक आयोजित की। उन्होंने एनजीटी के गंगा किनारे निर्माण कार्याें के मानकों को देखते हुए बाढ़ प्रभावित क्षेत्र के सर्वे को लेकर संबंधित विभागों के अधिकारियों से चर्चा की। डीएम ने कहा कि गंगा के तटीय इलाको को चिन्हित किया जाना है। जहां पर बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है। सर्वे का कार्य एनआईएच करेगी। अभी यह सर्वे हरिद्वार में चल रहा है। मुनिकीरेती-ऋषिकेश में नोडल कमेटी सिंचाई विभाग को बनाया गया है। सर्वे रिपोर्ट के बाद ही गंगा किनारे भवन निर्माण के लिए नए मानक तैयार हो जाएंगे।

बेटे ने मां के साथ घूम रहे युवक की पिटाई कर डाली

ऋषिकेश।
आवास विकास क्षेत्र की एक महिला को अन्य युवक के साथ घूमना भारी पड़ गया। महिला के बेटे ने युवक की सड़क पर ही पिटाई कर डाली। मारपीट में घायल युवक जब अपना इलाज कराने सरकारी अस्पताल पहुंचा तो महिला की बहू ने अस्पताल में युवक के साथ मारपीट की।
पुलिस के अनुसार एक महिला ढालवाला क्षेत्र में एक युवक के साथ घूम रही थी, इसका पता महिला के बेटे को चला तो उसने मां के साथ घूम रहे युवक की जमकर धुनाई कर डाली। बचाव में युवक ने भी जबाबी हमला किया। मौके पर पहुंची पुलिस ने दोनों पक्षों को अस्पताल पहुंचाया। मारपीट में घायल दोनों युवकों को प्राथमिक उपचार दिया गया। इस दौरान महिला की बहू भी अस्पताल आ धमकी। उसने सास के साथ घूम रहे युवक को खरी-खोटी सुनाना शुरू कर दिया। मामला बढ़ने से बहू ने भी युवक पर हमला कर दिया।
अस्पताल में मौजूद पुलिस और अन्य लोगों ने बीच-बचाव किया। इस दौरान अस्पताल में इलाज करा रहे मरीजों में अफरा-तफरी मच गई। पुलिस के अनुसार तहरीर मिलने पर आगे की कार्रवायी की जायेगी।