सीएम ने प्रेमनगर अस्पताल पहुंचे, स्टाफ में मचा हड़कंप

देहरादून।
शुक्रवार सायं को मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने राजकीय संयुक्त चिकित्सालय, प्रेमनगर का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने अस्पताल में भर्ती मरीजों से बातचीत की और उनका हालचाल जाना। रावत ने अस्पताल की पंजिकाएं भी चेक की। उन्होंने व्यवस्थाओं का जायजा लिया और सफाई को लेकर नाराजगी जाहिर की। अधिकारियों को आवश्यक सुधार करने के भी निर्देश दिये। सीएम के अचानक अस्पताल में पहु़ंचने से स्टाफ मे हड़कंप मचा रहा। इस अवसर पर विधायक गणेश जोशी भी मौजूद थे।

दिव्यांगजनों के कल्याण के लिए गम्भीरता से प्रयास करने होंगे: टीएस आर

दयाशंकर पाण्डेय।
प्रदेश के मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने शुक्रवार को देहरादून के झाझरा स्थित विज्ञान धाम में आर्थोटिक एवं प्रोस्थैटिक एसोशियेसन ऑफ इण्डिया के द्वारा आयोजित 3 दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन मिडकॉन 2017 का दीप प्रज्ज्वलित कर शुभारम्भ किया। देश के विभिन्न भागों से आए प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कहा कि दिव्यांगजनों के लिये कार्य करना हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए। यह संवेदनाओं से जुड़ा हुआ सवाल है। दिव्यांगजनों को वरीयता मिलनी चाहिए। दिव्यांगजनों के कल्याण के लिये गम्भीरता से कार्य किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी भी देश की प्रगति देश में हो रहे शोध कार्यों पर निर्भर करती है। यह शोध कार्य नहीं रूकने चाहिए। हमारे देश का आयुर्विज्ञान उच्चकोटि का था परन्तु कालान्तर में हम इसमें पिछड़ गए। हमें इस ओर प्रयास करने होंगे। राज्य के उत्पाद एवं औषधीय पौधे बेहतरीन किस्म के हैं इन पर शोध कार्य होते रहने चाहिए। मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने यूकास्ट के महानिदेशक डॉ. राजेन्द्र डोभाल के दिव्यांगों हेतु किये जा रहे प्रयासों के लिये सराहना करते हुए कहा कि राज्य सरकार द्वारा दिव्योंगों के सहयोग हेतु हर सम्भव प्रयास किये जाएंगे। कार्यक्रम के दौरान बताया गया कि प्रोस्थैटिक एवं आर्थोटिक्स चिकित्सा विज्ञान की वह शाखा है जिसमें दिव्यांगजन के शारीरिक पुनर्वास को सुनिश्चित किया जाता है। अतः यह शारीरिक पुनर्वास के क्षेत्र में आधुनिक उपचार के नये आयाम हैं, जो आर्थोपिडिक एवं न्यूरोमस्क्यूलर विकारों एवं कमियों के साथसाथ जन्मजात, विकृतियों और दुर्घटना में अंग विच्छेद के पुनर्वास में अग्रणी एवं महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इस क्षेत्र में रोबोटिक्स एक अभूतपूर्व कदम है जो निश्चित रूप से आने वाले समय में इस क्षेत्र में एक क्रांति को जन्म देगा एवं दिव्यांग जन के जीवन को सरल एवं सुगम बनाने में सहायक सिद्ध होगा। मौके पर विधायक गणेश जोशी, सहदेव सिंह पुण्डीर, अध्यक्ष नीरज सक्सेना, सचिव डॉ. ए. पात्रा आदि उपस्थित थे।

आधार के बिना भी मिलेगा मध्याहन भोजन का लाभ

नई दिल्ली।
शून्यकाल के दौरान यह आश्वासन मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने दिया। उन्होंने कहा कि कोई भी लाभार्थी आधार कार्ड के अभाव में मध्याह्न भोजन की सुविधा से वंचित नहीं होगा। सभी लाभार्थियों को यह सुविधा मिलेगी और जिन विद्यार्थियों के पास आधार कार्ड नहीं है उन्हें यह मुहैया कराया जाएगा।
जावड़ेकर ने यह आश्वासन कांग्रेस के मोतीलाल वोरा द्वारा मध्याह्न भोजन योजना के लाभ के लिए आधार कार्ड को अनिवार्य बनाने संबंधी मुद्दा उठाए जाने पर दिया। वोरा ने कहा था कि सरकार ने मध्याह्न भोजन योजना के लिए आधार को अनिवार्य बना दिया है, जिससे लगता है कि सरकार विद्यार्थियों को मध्याह्न भोजन की सुविधा नहीं देना चाहती।
वोरा ने कहा कि मध्याह्न भोजन योजना इसलिए शुरू की गई थी कि अधिक से अधिक संख्या में विद्यार्थी पढ़ने के लिए स्कूल आएं। इस योजना के तहत करीब 12 करोड़ विद्यार्थी लाभान्वित हो रहे हैं। पहले राजग ने आधार का विरोध किया था लेकिन अब उसने मध्याह्न भोजन योजना के लिए आधार को अनिवार्य बना दिया है। वोरा ने कहा कि यह कदम उठाने से पहले सरकार को पता लगाना चाहिए था कि आधार वाले बच्चों की संख्या कितनी है। वोरा ने आरोप लगाया कि ऐसा लगता है कि सरकार विद्यार्थियों को मध्याह्न भोजन की सुविधा नहीं देना चाहती।
जावड़ेकर ने इस आरोप को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि सभी लाभार्थियों को मध्याह्न भोजन मिलेगा। मैं इस सदन को बताना चाहता हूं कि कोई भी विद्यार्थी मध्याह्न भोजन योजना से वंचित नहीं रह पाएगा। सभी को इसका लाभ मिलेगा और जिन बच्चों के पास आधार कार्ड नहीं है, उन्हें आधार कार्ड मुहैया कराया जाएगा।
मानव संसाधन विकास मंत्री ने कहा कि मध्याह्न भोजन योजना के कई लाभार्थियों के पास आधार कार्ड है और जिन लाभार्थियों के पास यह कार्ड नहीं है उन्हें 12 अंकों वाली विशिष्ट पहचान संख्या मुहैया कराई जाएगी। उन्होंने स्पष्ट कहा कि जहां आधार के लिए सुविधा नहीं हो सकती वहां राज्य सरकारें विद्यार्थियों को विशिष्ट नंबर मुहैया कराएंगी। जावड़ेकर ने कहा कि आधार कार्ड को मध्याह्न भोजन योजना से जोड़ने पर इस योजना के दुरूपयोग के मामलों में कमी आई है।

झोपड़-पट्टी वालों के नाम खरीद लिया करोड़ो का सोना

नई दिल्ली।
केंद्र सरकार द्वारा आठ नवंबर को नोटबंदी की घोषणा के बाद कोलकाता में करोड़ों का सोना झोपड़-पट्टी वालों के नाम पर खरीदा गया। यह खुलासा तब हुआ जब आयकर विभाग के अधिकारी सोने के खरीदारों की जांच के लिए उनके घर गए।
कोलकाता की प्रसिद्ध जौहरी दुकान ‘सेन्को गोल्ड लिमिटेड’ ने आठ नवंबर की रात करोड़ों का सोना बेचा। सोना खरीदने वाले इन ग्राहकों के जो नाम, पते और नंबर आयकर विभाग को दिए गए। उनमें लगभग सभी दक्षिणी कोलकाता स्थित झोपड़-पट्टी में रहने वाले लोग थे। जो घरों में काम करते हैं या फल, सब्जी बेचकर बमुश्किल रोजर्मरा की सुविधा जुटा पाते हैं। आयकर विभाग के अधिकारियों का कहना है कि इन लोगों के मोबाइल नंबर तो सही हैं लेकिन इन्हें देखकर नहीं लगता कि इन्होंने खरीदारी की होगी। मामले की जांच जारी है।
जांच में सेन्को गोल्ड ने माना कि आठ नवंबर को देशभर में उसके 79 दुकानों से 8500 बार खरीदारी हुई। सभी खरीदारों ने दो लाख से कम मूल्य के सोने की खरीद की जिसके लिए पैन नंबर देना अनिवार्य नहीं है। जब आयकर विभाग ने सेन्को गोल्ड से इन खरीदारों के नाम मांगे तो उन्होंने चार हजार लोगों के नाम और मोबाइल नंबर दिए। इनमें से कई लोगों ने पहली बार सोना खरीदा था।

आयकर विभाग मान रहा गड़बड़ी
आयकर विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, खरीदारों के नाम और फोन नंबर तो एक ही थे लेकिन निश्चित तौर इन्होंने आठ नवंबर को खरीदारी नहीं की है। बेनामी संपत्ति कानून के तहत इनके ऊपर कारवाई भी की जा सकती है और साबित होने पर इन्हें सात साल की सजा और संपत्ति के बाजार भाव का 25 फीसदी जुर्माना लग सकता है।

जानकारियां चुराने की आशंका
हालांकि आयकर विभाग झोपड़-पट्टी वालों पर अभी कोई कारवाई करने से बच रहा है। अधिकारी ने कहा, इन लोगों की जानकारियां चुराकर इन्हें शिकार बनाया गया है इसलिए हम इन पर अभी कोई कारवाई नहीं कर रहे। आयकर विभाग के मुताबिक सेन्को गोल्ड 140 या इससे अधिक लोगों की पहचान छिपा रहा है। कंपनी के खिलाफ कारवाई शुरू कर दी गई है। एक अन्य अधिकारी ने कहा, कंपनी को वास्तविक खरीदारों का नाम बताना ही होगा। इसमें अभी तीन हफ्ते लग सकते हैं।

अफवाहों पर लगी रोक, बाजार में नही आएंगे पांच और दस हजार के नोट

नई दिल्ली।
कई दिनों से बाजार में खबरे चल रही थीं कि सरकार 5000 और 10,000 रुपये का नया नोट लाने वाली है। लेकिन आज सरकार ने इन अफवाहों पर लगाम लगाते हुए कहा है कि वह 5000 और 10000 का करेंसी नोट लाने की कोई योजना नहीं बना रही है।
इस मामले पर लोकसभा में लिखित में जवाब देते हुए वित्त राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि इस बारे में आरबीआई से सलाह ली गई है और विचार के बाद पाया गया कि 5000 और 10000 के नए नोट छापने की कोई जरूरत नहीं है। 2000 का नोट बड़ी करेंसी के लिए पर्याप्त है। वित्त राज्य मंत्री उस सवाल का जवाब दे रहे थे कि क्या नोटों की छपाई का खर्च घटाने के लिए अब सरकार 5 हजार और 10 हजार के नोट भी लाने की योजना बना रही है।
सरकार ने साफ किया है कि 5 हजार और 10 हजार का नोट फिलहात तो लाने की कोई योजना नहीं है। सरकार ने ये ऐलान शायद पिछले कई दिनों से बाजार और सोशल मीडिया पर चल रही खबरों के मद्देनजर किया होगा जिसमें दावा किया जा रहा था कि 2 हजार का नोट लाने के बाद अब सरकार की 5 हजार और 10 हजार जैसे बड़े करेंसी नोट लाने की भी योजना है।
केंद्र सरकार ने पिछले साल 8 नवंबर को नोटबंदी के ऐलान के साथ ही 500 और 1000 के पुराने नोटों को बंद करने का ऐलान कर दिया था और इसकी जगह 500 और 2000 रुपये का नया नोट जारी किया था। हालांकि काला धन रोकने की सरकार की मुहिम में 2000 का नोट लाने के औचित्य पर विपक्षी पार्टियों और राजनीतिक दलों ने विरोध किया और कहा कि इससे ब्लैकमनी बढ़ेगी।
आर्थिक मामलों के सचिव शशिकांत दास ने पिछले महीने कहा था कि सरकार की 1000 रुपये के नोट को फिर से लाने की कोई योजना नहीं है।

स्वास्थ्य मंत्री ने फ्लीट से हटाई एम्बुलेंस

लखनऊ।
उत्तर प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह ने शुक्रवार को अपनी फ्लीट में चल रही एम्बुलेंस को लौटा दिया। इसके बाद उन्होंने कहा कि यह सुविधा आम लोगों के लिए है।
दरअसल, सिद्धार्थ नाथ सिंह लखनऊ से सड़क मार्ग से इलाहाबाद जा रहे थे। रास्ते में उनकी नज़र अपनी फ्लीट पर पड़ी। उसमे दो एम्बुलेंस भी चल रही थीं। दोनों में डॉक्टरों और स्टाफ के साथ सभी जीवन रक्षक उपकरण भी थे। उन्होंने तुरंत फ्लीट रुकवाई और दोनों एम्बुलेंस को वापस भेजने के निर्देश देते हुए कहा कि ये सुविधा आमजन के लिए है। इसको ऐसे व्यर्थ में नहीं लगाया जाना चाहिए।
स्वास्थ्य मंत्री के इस आदेश के बाद वहां से दोनों एम्बुलेंस और डॉक्टर वापस लौट आये। मंत्री जी का काफिला आगे चला गया। स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह ने ये जानकारी खुद ट्वीट करके दी।

गैंगरेप पीड़िता पर एसिड अटैक की घटना से योगी पहुंचे अस्पताल

लखनऊ।
रायबरेली से लखनऊ आ रही गैंगरेप पीड़िता पर ट्रेन में एसिड अटैक किया गया, जिसके बाद उसे लखनऊ के केजीएमयू अस्पताल में भर्ती कराया गया है। प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार सुबह अस्पताल का दौरा किया और पीड़िता से मुलाकात की।
सीएम आदित्यनाथ और कैबिनेट मंत्री रीता बहुगुणा जोशी केजीएमयू के गांधी वार्ड पहुंचे। गैंगरेप पीड़िता का हाल पूछने के बाद सीएम ने एक लाख रुपये की आर्थिक मदद भी की। आदित्यनाथ ने पीड़िता का मुफ्त में इलाज कराने के साथ-साथ पूरे परिवार को सुरक्षा दिए जाने का आदेश दिया। सीएम तकरीबन दस मिनट तक गांधी वार्ड में रुके।
गैंगरेप पीडि़ता पर हुए एसिड अटैक मामले में पुलिस जांच के आदेश दे दिए गए हैं। एसएसपी लखनऊ ने जानकारी देते हुए बताया कि इस मामले में दो आरोपियों को रायबरेली के ऊंचाहार से गिरफ्तार भी किया गया है। बता दें कि मुख्यमंत्री बनने के बाद योगी आदित्यनाथ पूरे एक्शन में हैं। वे आज लखनऊ के केजीएमयू अस्पताल में सुविधाओं का जायजा लेने पहुंचे थे। वहीं, इससे पहले वे गुरुवार को हजरतगंज थाने भी गए थे।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 26 मार्च को गोरखपुर में योगिराज बाबा गंभीरनाथ की शताब्दी पुण्यतिथि समारोह में शामिल होने जाएंगे। यह समारोह गोरखनाथ मंदिर में सुबह 11 बजे होगा। मुख्यमंत्री लखनऊ से 25 मार्च की दोपहर में ही गोरखपुर के लिए रवाना हो जाएंगे। बता दें कि मुख्यमंत्री बनने के बाद योगी आदित्यनाथ की गोरखपुर की यह पहली यात्रा है।

शहीदों को नमन कर सीएम ने दी श्रद्धांजली

भारतेन्दु शंकर पाण्डेय।
अमर शहीद भगतसिंह, सुखदेव व राजगुरू की शहादत दिवस पर गांधी पार्क में आयोजित श्रद्धांजलि कार्यक्रम में मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने द्वीप प्रज्जवलित कर आजादी के शहीदों को श्रद्धांजलि दी। वीर सावरकर युवा संगठन द्वारा आयोजित कार्यक्रम में शहीदों को नमन करते हुए मुख्यमंत्री रावत ने कहा कि देश को आजादी दिलाने में शहीद भगतसिंह, सुखदेव, राजगुरू की महत्वपूर्ण भूमिका थी। उनकी शहादत ने उस दौर के युवाओं में इन्कलाब की भावना भर दी। वीर सावरकर ने सेल्युलर जेल में देश की आजादी के लिए कड़ी यातनाएं सहीं। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि तथाकथित 300 साल की गुलामी का समय गुलामी का नहीं बल्कि देश की आजादी के लिए संघर्ष का काल था। इन तीन सौ वर्षों में एक भी दिन ऐसा नहीं था जब देश के लोगों ने आजादी की आवाज बुलंद नहीं की हो। हमें इतिहास में 1857 का गदर पढ़ाया जाता रहा जबकि यह हमारा प्रथम स्वतंत्रता संग्राम था। मुख्यमंत्री ने कहा कि आजादी के लिए हंसते हंसते अपने प्राण न्यौछावर करने वाले युवाओं की शहादत को अपने दिलों में याद रखना है। आज जरूरत देश के लिए मरने की बजाय देश के लिए कुछ करने की है। वीर सावरकर युवा संगठन द्वारा आयोजित कार्यक्रम में 2100 दीप प्रज्ज्वलित कर शहीदों को श्रद्धांजलि दी गई।

एंटी रोमियो टीम को देखकर भाग रहे प्रेमी

उत्तर प्रदेश।
योगी सरकार में महिला सुरक्षा के लिए गुरुवार को एंटी रोमियो टीम ने प्रदेश के तमाम शहरों में अभियान चलाया। इस दौरान कई लड़कों को पकड़ा। फर्रुखाबाद में भी अभियान चलाकर युवाओं को चेक किया। छात्राओं के कॉलेजों में पास पुलिस की विशेष नजर रही। पुलिस को चेकिंग में एक युवक के हाथ में आई लव यू लिखा मिला। इस पर युवक की क्लास लगाई गई और हिदायत देकर छोड़ा।
सीओ सिटी और शहर कोतवाल के नेतृत्व में पुलिस टीम सड़कों पर उतरी। टीम बद्री विशाल डिग्री कालेज पर पहुंची तो यहां पेपर चलने के कारण टीम को लौटना पड़ा। इसके बाद टीम ने रेलवे रोड पर एसबीआई के बाहर खड़े युवाओं को चेक किया और हिदायत दी कि बेवजह न खड़े हो। यहां से आगे बढ़कर टीम एक सिनेमा हाल के बाहर पहुंची तो युवक पुलिस को देखकर भाग खड़े हुए।
पुलिस ने तीन युवकों को दौड़ाकर अपनी गिनरानी में लिया। पुलिस ने जब इनकी तलाशी ली तो एक युवक के हाथ में आईलवयू लिखा होने पर पुलिस ने युवक को हिदायत देकर छोड़ दिया। टीम ने लोहाई रोड, साहबगंज रोड, पक्कापुल, सेठ गली, क्षेत्र समेत आधा दर्जन प्रमुख स्थानों पर चेकिंग की। होटलों और पान की दुकान के बाहर खड़े युवाओं को चेक कर यहां से भगा दिया।
सीओ सिटी ने बताया कि शहर में इस तरह का अभियान रोज चलेगा। यदि किसी युवक ने छेड़छाड़ या छींटाकशी करने की कोशिश की तो इसमें कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि युवाओं के शहर के मुख्य स्थानों पर एक साथ खड़े न हो खासतौर पर छात्राओं के निकट।

योगी ने यूपी के थानों में विजिटर रुम बनाने के निर्देश दिए

लखनऊ।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ योगी गुरुवार सुबह 11:25 बजे पर यूपी की राजधानी लखनऊ की हजरतगंज कोतवाली पहुंचे। यहां उन्होंने पीड़ितों की मूलभूत समस्याओं के साथ पुलिस विभाग में व्यवस्थाओं में कमियों की जानकारी ली। उन्होंने मुकदमों को लिखे जाने और उनके निस्तारण में कितना समय लगता है, इस बाबत वहां काम करने वाले मुंशियों और सिपाहियों से पूछा।
वहीं, विभाग बंटने के बाद पहले दिन यूपी सरकार के मंत्री भी सक्रिय दिखे। पर्यावरण मंत्री उपेंद्र तिवारी ने अपने विधानभवन स्थित कमरे में बैठने से पहले वहां खुद झाड़ू लगा कर साफ-सफाई की। मंत्री को ऐसा करते देख कर वहां से गुजरने वाले एक बारगी तो ठिठक गए।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ थाने में तकरीबन आधे घंटे तक रुके और 11:55 बजे वापस लौटे। मुख्यमंत्री आदित्य नाथ के दौरे के समय डीजीपी जावीद अहमद के अलावा वहां पर अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे। मुख्यमंत्री ने इस बाबत डीजीपी से भी बात की। इसके बाद वह अन्य मुख्य कार्यालयों में भी गये।

मुख्यमंत्री पहले, बाद में पुलिस अधिकारी पहुंचे
हजरतगंज कोतवाली में मुख्यमंत्री आदित्यनाथ पहले पहुंच गए। बाद में वरिष्ठ अधिकारी धीरे-धीरे वहां पहुंचते रहे।

सभी थानों पर बनेगे विजिटर रूम
मुख्यमंत्री के निर्देश पर सभी थानों पर पीड़ितों के लिए विजिटर रूम बनाये जायेंगे। इनकी जिम्मेदारी एक एसआई और एक महिला कांस्टेबल संभालेंगी।