मई और जून माह का पीएमजीकेएवाई के तहत निशुल्क राशन केंद्र से उत्तराखंड को हुआ प्राप्त

प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (पीएमजीकेएवाई-3) के तीसरे फेज के अंतर्गत भारत सरकार द्वारा उत्तराखंड को दो माह (मई और जून) हेतु आवंटन प्राप्त हो गया है। इस आवंटन के साथ ही राज्य सरकार द्वारा मई माह का वितरण प्रारम्भ हो गया है, जबकि जून माह का अगले महीने किया जाएगा। इस योजना के अंतर्गत उत्तराखंड के राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना के अंतर्गत 13 लाख 84 हजार परिवारों के 61 लाख 94 हजार लोगों को निशुल्क राशन प्राप्त होगी। यह राशन प्रति यूनिट 5 किलो दी जाएगी, जिसमें 3 किलो गेहूं और 2 किलो चावल दिया जा रहा है।

खाद्य आयुक्त सुशील कुमार ने बताया कि राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना के अंतर्गत अंत्योदय परिवार (गुलाबी कार्ड) व प्राथमिक परिवार (सफेद कार्ड) अपने सरकारी सस्ते गल्ले की दुकान से राशन प्राप्त कर सकते हैं। इसके अलावा राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना एवं राज्य खाद्य योजना के अंतर्गत नियमित खाद्यान्न भी राज्य सरकार द्वारा वितरित किया जा रहा है।

खाद्य और नागरिक आपूर्ति आयुक्त सुशील कुमार ने बताया कि ऐसे प्रवासी जो अन्य राज्यों से उत्तराखंड में कार्य हेतु प्रवास कर रहे हैं और जिनका अपने राज्य में राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना का राशन कार्ड है वह भी “वन नेशन वन राशन कार्ड योजना” के अंतर्गत उत्तराखंड में राशन प्राप्त कर सकते हैं। इसके साथ ही उत्तराखंड के निवासी अगर अन्य राज्य में काम कर रहे हैं तो वह भी “वन नेशन वन राशन कार्ड” के माध्यम से अन्य राज्यों में लाभ प्राप्त कर सकते हैं।

कोविड डेथ को रोकने के लिए सबसे ज्यादा ध्यान देने की जरूरतः तीरथ सिंह रावत

मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने निर्देश दिये कि कोविड वैक्सीनैशन को और तेजी से करने के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाएं। उत्तराखंड में 18 वर्ष से 45 वर्ष तक की आयु के लोगों के लिये कोविड वैक्सीन आते ही इनके वैक्सीनैशन की प्रक्रिया को जल्द से जल्द शुरू किया जाए। इसके लिये पहली खेप आज उत्तराखंड पहुँच जाएगी।

प्रदेश में कोविड-19 की स्थिति और वैक्सीनैशन की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने कहा कि हमें कोविड डेथ को रोकने के लिए सबसे ज्यादा ध्यान देना होगा। कोविड संक्रमित तुरंत जरूरी दवाइयां लें, इसके लिये हमें मेडिकल किट उपलब्ध कराने के लिए विकेंद्रीकृत व्यवस्था की ओर जाना होगा। ’मुख्यमंत्री ने सभी जिला अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि विभिन्न समारोहों और आयोजनों में निर्धारित सीमा से अधिक संख्या में लोगों के शामिल होने पर सख्त एक्शन लिया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि कंटेनमेंट जोन पर विशेष फोकस किया जाए ताकि संक्रमण फैलने से रोका जा सके। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए हैं कि सेना के रिटायर्ड कर्मियों की भी मदद कोरोना के खिलाफ इस जंग में ली जाए।’

मुख्यमंत्री ने कहा कि वैक्सीनैशन सेंटरों में कोविड प्रोटोकॉल का ध्यान रखा जाए। जहाँ तक हो सके, बङी और खुली जगहों पर वैक्सीनैशन का प्रबंध किया जाए।मुख्यमंत्री ने कहा कि कालाबाजारी और ओवर रेटिंग करने वालों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाए। आक्सीजन के समुचित उपयोग की व्यवस्था सुनिश्चित करनी होगी। अस्पतालों में आक्सीजन उपयोग की लगातार आडिटिंग की जाए। निर्माणाधीन आक्सीजन प्लांट का काम तेजी से पूरा किया जाए। आक्सीजन प्लांटों में बिजली की निर्बाध आपूर्ति हो।

मुख्य सचिव ओमप्रकाश ने कहा कि आगामी दिनों के लिए जरूरी आक्सीजन का आंकलन करते हुए उसी के अनुरूप आवश्यक संख्या में टैंकरों की व्यवस्था सुनिश्चित करनी है। इसके साथ ही कोरोना के बदलते स्ट्रेन को देखते हुए आगे की तैयारियां भी की जाएँ।

सचिव स्वास्थ्य अमित नेगी ने कहा कि प्रदेश में रेमडेसिविर की पर्याप्त उपलब्धता है। इसके लिए पूरी प्रक्रिया भी निर्धारित की गई है। कोविड की चेन को ब्रेक करने पर फोकस किया जा रहा है। जो भी टेस्ट कराने आता है, उसे तुरंत मेडिकल किट दी जा रही है। डीजीपी अशोक कुमार ने बताया कि पुलिस द्वारा थाना स्तर पर मिशन हौंसला शुरू किया गया है। इसमें आकस्मिक स्थिति में जरूरतमंदों तक दवाईयों की होम डिलीवरी, आक्सीजन सिलेंडर उपलब्ध कराना, कोविड संक्रमितों को घर पर भोजन पहुंचवाना, एम्बुलेंस उपलब्ध करवाई जा रही है।

सचिव डॉ पंकज कुमार पाण्डेय ने कोविड व वैक्सीनैशन की विस्तार से जानकारी दी। कोविड प्रबंधन के लिये नियुक्त किये गये विभिन्न नोडल अधिकारियों से भी जानकारी ली गयी।

वीडियो कांफ्रेंसिग में अपर मुख्य सचिव मनीषा पंवार सहित शासन के वरिष्ठ अधिकारी, मंडलायुक्त, जिलाधिकारी उपस्थित थे।

कोरोना मरीजों को कैशलेश उपचार न देने पर राज्य सरकार ने शुरू किया शिकंजा कसना

प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (पीएमजेएवाई), अटल आयुष्मान उत्तराखण्ड योजना (एएयूवाई) और स्टेट गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (एसजीएचएस) के अन्तर्गत सूचीबद्ध होने के बावजूद कोरोना मरीजों को निशुल्क (कैशलेस) उपचार न देने वाले अस्पतालों के खिलाफ राज्य सरकार ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। ऐसे ही एक निजी अस्पताल को राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण ने नोटिस जारी किया है। नोटिस में कोरोना मरीजों को निशुल्क (कैशलेस) उपचार न देने पर अस्पताल के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई किए जाने की चेतावनी दी गई है।

अरिहन्त एडवांस सर्जरी एण्ड फर्टिलिटी सेंटर शास्त्रीनगर देहरादून के चिकित्सक डा. अभिषेक जैन को राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण के निदेशक (हास्पिटल मैंनेजमेंट) डॉ. ए.के. गोयल की ओर से भेजे गए नोटिस में कहा गया है कि कई लोगों की ओर से शिकायत मिली है कि अरिहन्त एडवांस सर्जरी एण्ड फर्टिलिटी सेंटर सरकार की विभिन्न योजनाओं पीएमजेएवाई, एएयूवाई और एसजीएचएस में सूचीबद्ध् होने के बावजूद कोरोना के मरीजों को निशुल्क कैशलेस उपचार मुहैया नहीं करवा रहा है जबकि राज्य सरकार की ओर से स्पष्ट आदेश हैं कि इन योजनाओं के सूचीबद्ध अस्पतालों में कोरोना मरीजों का उपचार निशुल्क किया जाना है।

इतना ही नहीं राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण के अधिकारी जब इस सम्बंध में अस्पताल प्रबंधन से मोबाइल फोन पर सम्पर्क करते हैं तो कोई प्रतिउत्तर नहीं दिया जाता। पत्र में कहा गया है कि यदि अस्पताल ने आगे पीएमजेएवाई, एएयूवाई और एसजीएचएस योजनाओं के तहत कोरोना मरीजों को उपचार निशुल्क नहीं किया तो अस्पताल की सूचीबद्धता समाप्त करने के साथ ही अस्पताल के खिलाफ क्लीनिकल इस्टेबलिश्मेंट एक्ट के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी, जिसकी जिम्मेदारी अस्पताल प्रबंधन की होगी।

डीआरडीओ द्वारा बनाए जा रहे कोविड अस्पताल का सीएम तीरथ सिंह रावत ने किया निरीक्षण

मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने आज आईडीपीएल में डीआरडीओ की ओर से तैयार किए जा रहे 500 बेड के कोविड अस्पताल का निरीक्षण किया। मौके पर डीआरडीओ के अधिकारियों से निर्माण कार्यों की जानकारी हासिल की। मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने बताया कि 17 मई तक हॉस्पिटल तैयार कर लिया जाएगा। इसमें 120 आईसीयू बेड के अलावा ऑक्सीजन प्लांट भी होगा। योजना के अंतर्गत हल्द्वानी और ऋषिकेश में 500-500 बेड के अस्पताल का निर्माण हो रहा है।

इसके बाद मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने ऋषिकेश एम्स पहुँचकर यहां निदेशक प्रोफेसर रविकांत एवं उनकी टीम के साथ तैयारियों को लेकर बैठक की। उन्होंने अस्पताल में उपलब्ध ऑक्सीजन बेड, वेंटिलेटर आदि के बारे में जानकारी ली। कहा कि अस्पतालों को निर्देशित किया गया है कि वे 24 घंटे पहले अपनी ऑक्सीजन जरूरतों के लिए प्रशासन को अवगत कराएं ताकि अफरा तफरी की स्थिति न बने। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर कोविड महामारी से जंग में जुटे सभी डॉक्टरों व पैरामेडिकल स्टाफ का आभार भी जताया। मुख्यमंत्री को एम्स निदेशक ने बताया कि वर्तमान में अस्पताल में कम क्षमता के ऑक्सीजन प्लांट हैं जिसे बढ़ाने की आवश्यकता है। एम्स निदेशक ने कहा कि अस्पताल में 40 हजार लीटर के ऑक्सीजन प्लांट की आवश्यकता है जिस पर मुख्यमंत्री ने इस मामले में सकारात्मक कार्रवाई का भरोसा दिलाया। इस अवसर पर विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल, जिलाधिकारी डा. आशीष श्रीवास्तव, एसडीएम वरुण चैधरी, तहसीलदार अमृता शर्मा, नगर आयुक्त नरेन्द्र सिंह क्वीरियाल, हॉस्पिटल डिजाइनर ले कर्नल रमन त्यागी, सूबेदार मेजर सुभाष, निगम के जेई उपेन्द्र गोयल आदि मौजूद थे।

कोविड कर्फ्यू में बिना वजह घूम रहे 27 वाहन सीज

ऋषिकेश में कोविड कर्फ्यू का पालन करवाते हुए दोपहर दो बजे अनावश्यक घूमने वाले 27 वाहन को पुलिस ने सीज किया है।

कोतवाल रितेश शाह के मुताबिक, दोपहर दो बजे अनावश्यक रूप से घूमने वाली 27 गाड़ी, स्कूटी, मोटरसाइकिल चालकों के वाहनों को सीज किया गया है।

स्टेशन के शौचालय पर मृत मिला ग्रीफ का सिपाही

अपर पुलिस अधीक्षक जीआरपी मनोज कत्याल कोविड संक्रमण के विषय में सतर्कता से ड्यूटी करने पर पुराने स्टेशन का निरीक्षण करने पहुंचे। यहां स्टेशन के शौचालय पर ग्रीफ में पाईनियर के पद पर कार्यरत 47 वर्षीय मनोज डबराल मूर्छित हालत में गिरे हुए पाए गए। अपर पुलिस अधीक्षक जीआरपी उन्हें राजकीय चिकित्सालय पहुंचाया। यहां डॉक्टर ने उन्हें मृत बताया। इसके बाद मृतक के परिजनों को कोतवाली ऋषिकेश की सहायता से अंतिम संस्कार के लिए पीपीई किट उपलब्ध कराई गई। इसके अलावा मृतक का सारा सामान उनके परिजनों को सौंपा गया। मौके पर देहरादून से उप निरीक्षक अनिल कुमार प्रभारी एस.ओ जीआरपी हरिद्वार भी मौजूद रहे।

वहीं, अपर पुलिस अधीक्षक जीआरपी मनोज कत्याल को स्थानीय व्यक्ति ने सूचना देकर बताया कि जीआरपी चैकी से 200 मीटर दूर एक अधेड़ उम्र का व्यक्ति गंभीर अवस्था में बीमार पड़ा हुआ है। सूचना पाकर अपर पुलिस अधीक्षक मौके पर पहुंचे और 108 इमरजेंसी सेवा के जरिए राजकीय चिकित्सालय पहुंचाया। साथ ही ऑक्सीजन की व्यवस्था भी की गई। जहां डॉक्टर द्वारा बताया गया कि उक्त व्यक्ति का आक्सीजन लेवल बहुत कम है, समय पर अस्पताल पहुंचा पाने के बाद आक्सीजन सही हो सकी और व्यक्ति की जान बच गई। हालांकि अभी उक्त व्यक्ति की पहचान नहीं हो पाई है।

प्रतिबंध के बावजूद इन छह दुकानों को खोलने पर संचालक पर मुकदमा दर्ज

कोतवाली पुलिस ने कोविड कर्फ्यू के दौरान आपदा प्रबंधन अधिनियम के नियमों का उल्लंघन करते हुए, पूजा सामग्री, मोबाइल, बिस्तर, इजी डे, गाड़ियों की सजावट व मोटर रिपेयरिंग की दुकान खोलने पर छह संचालकों पर मुकदमा दर्ज किया है।

कोतवाल रितेश शाह ने बताया कि क्षेत्र में गश्त के दौरान छह दुकानें संचालित हो रही थी। उनके खिलाफ मुकदमें की कार्रवाई की गई है। उन्होंने बताया कि मुकदमा वंशिक मोबाइल रिपेयरिंग सेंटर के संचालक बलराम पुत्र रविन बैरागी निवासी मायाकुंड ऋषिकेश, निसार बिस्तर भंडार के संचालक निसार अहमद पुत्र मोहम्मद अनवर निवासी भरत मंदिर मार्ग ऋषिकेश, राम सिंह एंड संस के संचालक विजय कुमार पुत्र राम सिंह निवासी गली नंबर 7 प्रसाद हॉस्पिटल के सामने ऋषिकेश, इजी डे के संचालक मुकेश प्रसाद पुत्र रमेश चंद निवासी गली नंबर 14 आदर्श ग्राम ऋषिकेश, पूजा सीट कवर व कार श्रंगार के संचालक शेखर श्रीवास्तव पुत्र बलदेव श्रीवास्तव निवासी गली नंबर 2 गंगा नगर ऋषिकेश और आरके सुरी एंड कंपनी के संचालक प्रवीण कुमार पुत्र ब्रहम पाल निवासी गली नंबर 4 मॉडर्न स्कूल के पास ऋषिकेश के खिलाफ किया गया है।

सीएम ने विभिन्न विकास कार्यों के लिए धनराशि की स्वीकृति


मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने विभिन्न विकास कार्यों के लिए स्वीकृति प्रदान की हैं। राज्य योजना के तहत विधानसभा क्षेत्र देवप्रयाग के बरसोली से ग्वाण्ड कुण्ड भरपूरखाल बगडवालधार मोटर मार्ग का नवनिर्माण (द्वितीय चरण स्टेज 1) लागत 88.15 लाख रूपए की प्रशासकीय एवं वित्तीय स्वीकृति दी है।

देवप्रयाग विधानसभा क्षेत्र में ही विकासखण्ड कीर्तिनगर में सौडू जाखी ग्वाणा से ग्वाड ओला मोटर मार्ग के नवनिर्माण (द्वितीय चरण स्टेज 1) लागत 128.17 लाख रूपए की प्रशासकीय एवं वित्तीय स्वीकृति दी है।

विधानसभा क्षेत्र देवप्रयाग के जामणीखाल मार्ग के ग्राम भल्डियाना के प्राथमिक विद्यालय तक मोटर मार्ग निर्माण कार्य (प्रथम चरण) के लिए 19.84 लाख रूपए की प्रशासकीय एवं वित्तीय स्वीकृति दी है।

विधानसभा क्षेत्र देवप्रयाग के अंतर्गत क्वीली से मछियारी होते हुए नैखरी तक एवं विकासखण्ड कीर्तिनगर के अंतर्गत सुपाणा धारी मोटर मार्ग से भ्यूपाणी तक मोटर मार्ग का नवनिर्माण हेतु 244.27 लाख रूपए की प्रशासकीय एवं वित्तीय स्वीकृति दी है।

जनपद हरिद्वार के विधानसभा क्षेत्र खानपुर में विभिन्न 25 कार्यों के लिए 555.08 लाख रूपए की प्रशासकीय एवं वित्तीय स्वीकृति दी है।

विधानसभा क्षेत्र अल्मोड़ा के अंतर्गत शीतलाखेत से बोरा स्टेट होते हुए स्याहीदेवी मंदिर तक मोटर मार्ग का विस्तार किए जाने के लिए 85.08 लाख रूपए की प्रशासकीय एवं वित्तीय स्वीकृति दी है।

विधानसभा क्षेत्र लोहाघाट में लोहाघाट डिग्री कालेज से गंगनौला-नसखोला होते हुए पोखरीबोरा मोटरमार्ग का पुनः निर्माण एवं सुधार कार्य के लिए 128.58 लाख रूपए की प्रशासकीय एवं वित्तीय स्वीकृति दी है।

विधानसभा क्षेत्र धनोल्टी में साटागाड़ बैण्ड से फेडी किमोडी मोटर मार्ग का निर्माण के लिए 76.89 लाख रूपए की प्रशासकीय एवं वित्तीय स्वीकृति दी है।

कुमाऊं विश्वविद्यालय के कृष्णापुर स्थित सम्पत्ति में लाईटवेट स्ट्रक्चर, कक्षा-कक्ष, साईट डेवलपमेंट एवं पहुंच मार्ग के निर्माण के लिए 191.34 लाख रूपए की प्रशासकीय एवं वित्तीय स्वीकृति दी है।

विधानसभा क्षेत्र चकराता में पुरोडी-रावना-डामटा मोटर मार्ग के किमी 11 में ग्राम पाटी में पक्की नाली व स्कपर निर्माण कार्य के लिए 8.97 लाख रूपए की प्रशासकीय एवं वित्तीय स्वीकृति दी है।

इसी प्रकार जनपद अल्मोड़ा में विधानसभा चुनाव के बाद आचार संहिता समाप्त होने के बाद जिला योजना में प्राविधानित धनराशि के सापेक्ष 37.38 करोड़ रूपए की राशि अवमुक्त करने को भी स्वीकृति दी है।

पीएम मोदी के मार्गदर्शन में आपदा के बाद पुनर्निमाण के कार्य अब अंतिम चरण मेंः तीरथ सिहं रावत

मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत व केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की मौजूदगी में श्री केदारनाथ उत्थान ट्रस्ट व तेल एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय की पब्लिक सेक्टर कंपनियों के मध्य श्री बद्रीनाथ धाम को स्मार्ट स्प्रीचवल टाउन के रूप में विकसित करने को लेकर लगभग 100 करोड़ के कार्यों के समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर हुए। समझौता पत्र पर पेट्रोलियम मंत्रालय की ओर से सचिव तन्नू कपूर व उत्तराखंड की ओर से पर्यटन सचिव दिलीप जावलकर ने हस्ताक्षर किए।

सचिवालय में वर्चुअल रूप से आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की प्रेरणा व मार्गदर्शन में वर्ष 2013 में आई आपदा के बाद पुनर्निर्माण के कार्य शुरू हुए थे जो कि अब अपने अंतिम चरणों में हैं। इसी कड़ी में प्रधानमंत्री ने बदरीनाथ धाम के कायाकल्प का भी निर्णय लिया। यहां आगामी 100 वर्षों की आवश्यकताओं के मद्देनजर सुविधाओं का विकास कुल 85 हेक्टेयर भूमि में चरणबद्ध तरीके से कार्य किये जाने हैं। बदरीनाथ धाम में यात्रियों के लिए सुविधाएं बढ़ाने के विशेष प्रयास किये जा रहे हैं।

इसी के साथ यहां पर व्यास गुफा, गणेश गुफा व चरण पादुका आदि का भी पुनर्विकास किया जाना है। मुख्यमंत्री ने कहा कि बदरीनाथ धाम के विकास में तेल कंपनियों का योगदान सराहनीय है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का फोकस क्षेत्र में होमस्टे को बढ़ावा देने पर है ताकि श्रद्धालुओं को यहां आने पर सस्ती सुविधाएं उपलब्ध हो सकें। मुख्यमंत्री ने कहा कि आगामी तीन वर्षों में बदरीनाथ धाम के कायाकल्प के लिए सरकार प्रतिबद्ध है। उन्होंने बदरीनाथ धाम में किये जा रहे कार्यों के लिए विशेष तौर पर प्रधानमंत्री जी व पेट्रोलियम मंत्री का विशेष आभार जताया।

केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि उत्तराखण्ड के चार धामों का विशेष महत्त्व है। बदरीनाथ धाम के कायाकल्प को लेकर तेल कंपनियां प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में बदरीनाथ व केदारनाथ धामों की भांति ही उत्तरकाशी में गंगोत्री व यमनोत्री धामों के लिए भी कुछ कार्य कराए जाएंगे। उन्होंने कहा कि बदरीनाथ धाम को प्रधानमंत्री मोदी के विजन के अनुरूप स्मार्ट स्प्रीचवल टाउन के रूप में विकसित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यहां पर अलकनंदा नदी के तटबंध कार्यों के अलावा प्लाजा, जल निकासी, सीवेज, लाइट, सीसीटीवी, पीए सिस्टम, शौचालय, पुल आदि के सौंदर्यीकरण व पुनर्निर्माण के कार्य होने प्रस्तावित हैं।

प्रदेश के पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने कहा कि श्री बदरीनाथ धाम का धार्मिक के साथ ही आर्थिक महत्व भी है। यहां से हजारों लोगों को रोजगार भी मिलता है। उन्होंने कहा कि पुनर्निर्माण कार्यो के दौरान हमें इस बात का भी ध्यान रखना है कि यहां पर पर्यावरण को नुकसान न पहुँचे। प्रथम चरण में यहां पर अस्पताल के विस्तारीकरण का कार्य प्रस्तावित है। इसके अलावा रिवर फ्रंट डेवलपमेंट, तटबंधों में सुदृढ़ीकरण, लैंड सकेपिंग, भीड़ होने पर होल्डिंग एरिया, पुलों की रेट्रोफिटिंग आदि कार्य होने हैं। मौके पर मुख्य सचिव ओमप्रकाश भी उपस्थित थे।
इस अवसर पर पेट्रोलियम मंत्रालय की ओर से एक वीडियो भी दिखाया गया जिसमें यहां होने वाले विभिन्न कार्यों के बारे में बताया गया।

स्वास्थ्य समाचारः वायरल फीवर के लक्षण समझ हल्के में न लें लोग, अधिक पढ़ें…

यदि आपको बुखार और गले में खराश की शिकायत है तो, सतर्क रहें। इस तरह के लक्षणों को वायरल फीवर समझकर इसे हल्के में लेना आपके लिए घातक हो सकता है। वजह यह है कि यह कोरोना संक्रमण के प्रमुख लक्षणों में शामिल है। ऐसे में आपको तत्काल बिना विलंब किए कोविड जांच कराने की आवश्यकता है। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान एम्स ऋषिकेश ने 20 से 50 वर्ष आयुवर्ग के लोगों को खासतौर से यह सुझाव दिया है कि इन हालातों में वह ’वर्क फ्राॅम होम’ नीति को अपनाएं और सुरक्षित रहें।

कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर में कुछ लक्षण विशेषरूप से उभर कर आ रहे हैं। एम्स निदेशक प्रोफेसर रवि कांत ने बताया कि मरीज को स्वाद और गन्ध का पता नहीं चलने के अलावा बुखार, गले में खराश व दर्द होना भी कोविड के प्रमुख लक्षण हैं। उन्होंने बताया कि इस बार युवा वर्ग पर कोरोना का असर ज्यादा देखने को मिल रहा है। लिहाजा इससे बचने के लिए 20 से 50 वर्ष की उम्र के लोगों को खासतौर से सतर्क रहने की आवश्यकता है। सामुदायिक स्तर पर संक्रमण की दर कम करने के लिए जरूरी है कि लोग अपने घरों में ही रहें और बिना किसी ठोस वजह के घर से बाहर हरगिज नहीं निकलें।
एम्स निदेशक प्रो. रवि कांत ने बताया कि संक्रमण से बचाव के लिए कोविड वैक्सीन विशेष लाभकारी है। ​ऐसे में 45 वर्ष से अधिक उम्र के सभी लोग जल्द से जल्द व अनिवार्यरूप से कोविड वैक्सीन लगवाएं। उनका सुझाव है कि समय रहते वैक्सीन लग जाने से शरीर में वायरस का असर कम होगा और लोग सुरक्षित रहेंगे।

एम्स में कोविड स्क्रीनिंग ओपीडी के प्रभारी और सीएफएम विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डा. योगेश बहुरूपी का कहना है कि कोविड परीक्षण हेतु एम्स, ऋषिकेश पहुंचने वाले लोगों में बुखार और गले में खराश की शिकायत के मामले प्रमुखता से आ रहे हैं। इसके अलावा लोग यह भी शिकायत कर रहे हैं कि उन्हें स्वाद और गन्ध का पता नहीं चल रहा है। उन्होंने बताया कि मौसम बदलने के कारण कुछ लोग बुखार-खांसी को सामान्यरूप से ले रहे हैं। लेकिन कोविडकाल में ऐसा करना बिल्कुल सही नहीं है। लिहाजा ऐसे में इस तरह के मामलों को सामान्य रोग के लक्षण मानकर कोविड जांच न कराना घातक हो सकता है।
उन्होंने बताया कि इस प्रकार के कोई भी लक्षण होने पर मरीज को तत्काल कोविड जांच करानी चाहिए। उनके अनुसार अप्रैल महीने में एम्स की कोविड स्क्रीनिंग ओपीडी में 5,287 लोगों ने जांच हेतु कोविड सैंपल दिए थे। जिनमें अधिकांश लोग 20 से 50 आयुवर्ग के ही थे।

उन्होंने बताया कि कोविड के लक्षणों में इनके अलावा सांस लेने में तकलीफ, बुखार और खांसी के लक्षण वाले रोगी भी बड़ी संख्या में एम्स पहुंच रहे हैं। डा. योगेश बहुरूपी ने बताया कि 20 से 50 वर्ष की उम्र के ज्यादातर लोग नौकरी पेशा वाले हैं। जिन्हें आजीविका और रोजगार के लिए दैनिकरूप से घर से बाहर निकलना पड़ता है। उन्होंने सलाह दी है कि ऐसी स्थिति में बहुत जरूरी नहीं हो तो घर से बाहर नहीं निकला जाए।

20 से 50 आयुवर्ग के लोगों को नौकरी पेशे के लिए हररोज घर से बाहर निकलना पड़ता है। लिहाजा इस उम्र के लोगों में संक्रमण की ज्यादा शिकायत मिल रही है। इस मामले में एम्स ने सुझाव दिया है कि संक्रमण से बचाव के लिए इस उम्र के लोगों को ’वर्क फ्राॅम होम’ की नीति पर काम करने की आवश्यकता है। सीएफएम विभाग के डाॅ. योगेश बहुरूपी ने बताया कि कोरोना की दूसरी लहर का यह समय बेहद जोखिम वाला समय है। युवा वर्ग को उनकी सलाह दी कि बिना किसी ठोस वजह से घर से बाहर नहीं निकलें। जीवन को सुरक्षित रखने के लिए बहुत जरूरी है कि सब लोग घर में रहें और सुरक्षित रहें।