सांसद बलूनी की पहल ला रही है रंग, कैंसर अस्पताल की होगी स्थापना

उत्तराखंड से राज्यसभा सांसद और भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय मीडिया प्रमुख अनिल बलूनी के प्रयासों से उत्तराखंड में टाटा कैंसर अस्पताल की स्थापना चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ रही है। प्रमाणिक कार्यशैली में विश्वास करने वाले बलूनी उत्तराखंड को शीघ्र ही स्वास्थ्य के क्षेत्र में बड़ी सौगात देने वाले हैं। इस संबंध में आज एटॉमिक एनर्जी के मंत्री डॉक्टर जितेंद्र सिंह के अध्यक्षता में नई दिल्ली में एक बैठक आयोजित हुई।
टाटा कैंसर अस्पताल प्रबंधन तेजी से उत्तराखंड में कैंसर अस्पताल की स्थापना के लिए कार्य कर रहा है। उनके अधिकारियों के दौरे जारी हैं। राज्य सरकार के साथ निरंतर उनका समन्वय चल रहा है। आज केंद्रीय परमाणु ऊर्जा मंत्री डॉ जितेंद्र सिंह की अध्यक्षता में टाटा कैंसर इंस्टीट्यूट के निदेशक डॉ राजेंद्र अच्युत बड़वे, उपनिदेशक डॉ पंकज चतुर्वेदी, उत्तराखंड शासन के प्रमुख सचिव स्वास्थ्य अमित नेगी, चिकित्सा शिक्षा के महानिदेशक रविशंकर और उत्तराखंड कैंसर हॉस्पिटल के डॉक्टर उपस्थित थे।
सांसद अनिल बलूनी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के यशस्वी कार्यकाल में पूरे देश में हर क्षेत्र में नए आयाम जुड़े हैं। इससे उत्तराखंड भी अछूता नहीं है। गत 7 वर्षों में उत्तराखंड में आम जनता अपने आसपास बदलते हुए उत्तराखंड को और विकास की हर दृष्टि में बढ़ते उत्तराखंड को अनुभव कर कर रही है। सांसद बलूनी ने कहा कि वह निजी तौर पर जानते हैं कि भले ही कैंसर के क्षेत्र में विज्ञान में बहुत तरक्की कर ली है, अनेक रोगों पर विजय हासिल कर ली है, पर आज भी कैंसर समाज में मानसिक तनाव और भय की दृष्टि से देखा जाता है। ऐसे में राज्य में टाटा कैंसर इंस्टिट्यूट की स्थापना से हम राज्य की जनता को सस्ता और उच्च कोटि का प्रमाणिक उपचार तो देंगे ही, साथ ही समय पर जांच कराने से रोगी शीघ्र स्वस्थ भी हो सकेगा।

टिहरी विस्थापित प्रत्येक परिवार को मिलेगा 74.4 लाख का मुआवजा

प्रदेश के पर्यटन, सिंचाई, लोक निर्माण, धर्मस्व एवं संस्कृति मंत्री सतपाल महाराज के अथक प्रयासों से आखिरकार 20 वर्ष बाद टिहरी बांध परियोजना से प्रभावित 415 विस्थापित परिवारों को न्याय मिलना संभव हो पाया है।

टिहरी बांध परियोजना से प्रभावित 415 विस्थापित परिवारों के पुनर्वास संबंधी समस्याओं के निराकरण हेतु 22 जनवरी 2021 को प्रदेश के पर्यटन, सिंचाई, लोक निर्माण, धर्मस्व एवं संस्कृति मंत्री सतपाल महाराज ने टिहरी के जनप्रतिनियों और राज्य सरकार के अधिकारियों को साथ लेकर नई दिल्ली में केंद्रीय ऊर्जा मंत्री राजकुमार सिंह के साथ एक बैठक की थी। बैठक में सतपाल महाराज के साथ टिहरी सांसद माला राज्य लक्ष्मी शाह, विधायक धन सिंह नेगी, घनसाली विधायक शक्ति लाल शाह, प्रताप नगर विधायक विजय सिंह पवार सहित अनेक विभागीय अधिकारी मौजूद थे।

केंद्रीय ऊर्जा मंत्री राजकुमार सिंह के साथ हुई उस ऐतिहासिक बैठक में तय किया गया था कि टिहरी बांध परियोजना से प्रभावित 415 विस्थापित परिवारों के पुनर्वास संबंधी समस्याओं का समाधान न्यायालय की परिधि से बाहर किया जाएगा।

पर्यटन, सिंचाई, लोक निर्माण, धर्मस्व एवं संस्कृति मंत्री सतपाल महाराज की देखरेख में टिहरी बांध विस्थापित 415 परिवारों को न्याय दिलाने के लिए लगातार चल रहे प्रयासों के तहत जनवरी से मैराथन बैठकों का दौर जारी रहा। जनवरी से अब तक टीएचडीसी अधिकारियों, सचिव सिंचाई उत्तराखंड और जिलाधिकारी टिहरी के बीच हुई अनेक बैठकों का परिणाम यह रहा कि टीएचडीसी ने उत्तराखंड सरकार को एक अंडरटेकिंग दी है। जिसमें कहा गया है कि वह संपार्श्विक क्षति नीति 2013 के तहत गठित तकनीकी समिति की संरचना के लिए उत्तराखंड सरकार द्वारा संशोधित आदेश जारी होने के बाद माननीय उच्च न्यायालय उत्तराखंड में दायर अपनी रिट याचिका को वापस ले लेंगा।

साथ ही टिहरी बांध परियोजना प्रभावित 415 परिवारों के पुनर्वास को लेकर प्रदेश सरकार की ओर से जो मुआवजा राशि तय की गई है वह प्रभावित क्षेत्र के तत्समय बाजारी दरों, सोलेशशियम, एक्सग्रेशिया, ब्याज और विकास लागत को जोड़कर प्रति परिवार 74.4 लाख रूपये आंकी गई है। टीएचडीसी और उत्तराखंड सरकार दोनों की सहमति से तय हुआ है कि बांध प्रभावित 415 परिवारों के पुनर्वास हेतु 74.4 लाख का मुआवजा प्रति परिवार के अनुसार दिया जाएगा।

इस समझौते के तहत रौलाकोट गांव के पुनर्वास के बारे में भी तय हुआ है कि ग्राम रौलाकोट के विस्थापन हेतु पुनर्वास निदेशालय के पास लगभग 70 एकड़ भूमि रोशनाबाद, रायवाला, घमंडपुर, आदि गांव में उपलब्ध है जो कि पहले टिहरी बांध प्रभावित लोगों के पुनर्वास के लिए अधिग्रहित की गई थी। इसके अलावा लगभग 20 एकड़ भूमि विभिन्न स्थानों पर टीएचडीसी के स्वामित्व में है। क्योंकि उक्त भूमि को विकसित करने की आवश्यकता है इसलिए टीएचडीसी 10.5 करोड़ की राशि इसके लिए वहन करेगा।

कुल मिलाकर प्रदेश के कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज के अथक प्रयासों से 20 वर्षों के लम्बे इन्तजार के बाद अब कहीं जाकर टिहरी बांध परियोजना प्रभावित 415 परिवारों की पुनर्वास संबंधित समस्याओं को लेकर एक बड़ी सफलता मिलती दिखाई दे रही है।

नेता प्रतिपक्ष ने भाजपा के राहत पैकेज पर उठाये सवाल

उत्तराखंड के चुनावी मौसम में सत्ता और विपक्ष में जुबानी जंग जारी है। सत्ता पक्ष जहां बड़े-बड़े पैकेज की घोषणा कर जनता को अपनी तरफ कर लुभाने का प्रयास कर रहा है। वहीं विपक्ष इन राहत पैकेजों पर सवाल खड़े कर रहा है। नेता प्रतिपक्ष प्रीतम सिंह ने हमला बोलते हुए कहा कि चुनावी साल में ही भाजपा को राहत पैकेजों की याद क्यों आई है। सरकार करोड़ों के पैकेज की घोषणा कर बातें बड़ी-बड़ी कर रही है लेकिन धरातल पर यह पैकेज मिल किसको रहा है इसका उसे कुछ अता-पता नहीं है।

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि पिछले एक साल में उत्तराखंड ही नहीं देश की जनता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के द्वारा किए गए पैकेज की बड़ी घोषणा को दूरबीन से ढूंढ रही है। वैसे ही उसे अब धामी सरकार के पैकेज को भी उसी दूरबीन से ही ढूंढना होगा। एक तरफ सरकार अपने पैकेज में महिला स्वयंसेवी समूह को आर्थिक रूप से मजबूत करने की बात कर रही है और दूसरी तरफ उन्ही से उनका स्वरोजगार छीनने की कोशिश कर रही है। विपक्ष के विरोध के बाद सरकार ने टेक होम राशन में ई टेंडर की निविदा निरस्त की। नेता प्रतिपक्ष ने कहा यह जुमलेबाजो की सरकार है और इन्हें जुमलेबाजी में महारत हासिल है।

2017 के विधानसभा चुनाव के समय प्रधानमंत्री मोदी ने उत्तराखंड की जनता से बड़े-बड़े वायदे किए थे लेकिन उन वादों का क्या हुआ उस पर राज्य सरकार बात करने से भी कतरा रही है। एक बार फिर चुनाव से पहले वही वायदे शुरू कर दिए गए हैं। भाजपा आलाकमान द्वारा चुनाव से पहले तीन मुख्यमंत्री बदलने से यह साफ हो चुका है कि उनको भी पता चल चुका है कि चार साल में कुछ काम नहीं हुआ है। उत्तराखंड की जनता परिवर्तन का मन बना चुकी है। प्रीतम बोले मैं स्पष्ट रूप से कहना चाहता हूं कि मुख्यमंत्री बदलने से कुछ होने वाला नहीं है 2022 में प्रचंड बहुमत से कांग्रेस सत्ता में आएगी और 2017 से बंद पड़े डब्बे इंजन को चालू कर विकास की गाड़ी को फिर पटरी पर दौड़ायेगी।

11 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित है इंजीनियरिंग का नायाब नमूना गरतांग गली की सीढ़ियां

भारत-तिब्बत व्यापार की गवाह रही उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले की नेलांग घाटी में स्थित ऐतिहासिक गरतांग गली की सीढ़ियों का देश-विदेश के पर्यटक दीदार करने लगे हैं। गरतांग गली की सीढ़ियों का पुनर्निर्माण कार्य जुलाई माह में पूरा किया जा चुका है। इसके बाद से ही ऐसे में रोमांचकारी जगहों पर जाने के शौकीन पर्यटकों के लिए यह जगह एक शानदार विकल्प है।

गरतांग गली की करीब 150 मीटर लंबी सीढ़ियां अब नए रंग में नजर आने लगी हैं। करीब 11 हजार फीट की ऊंचाई पर बनी गरतांग गली की सीढ़ियां इंजीनियरिंग का नायाब नमूना है। इंसान की ऐसी कारीगरी और हिम्मत की मिसाल देश के किसी भी अन्य हिस्से में देखने के लिए नहीं मिलेगी।

1962 भारत-चीन युद्ध के बाद इस लकड़ी की सीढ़ीनुमा पुल को बंद कर दिया गया था, अब करीब 59 सालों बाद वह दोबारा पर्यटकों के लिए खोला गया है। कोरोना गाइडलाइन और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए एक बार में दस ही लोगों को पुल में भेजा जा रहा है। पेशावर से आए पठानों ने 150 साल पहले इस पुल का निर्माण किया था। आजादी से पहले तिब्बत के साथ व्यापार के लिए उत्तकाशी में नेलांग वैली होते हुए तिब्बत ट्रैक बनाया गया था। यह ट्रैक भैरोंघाटी के नजदीक खड़ी चट्टान वाले हिस्से में लोहे की रॉड गाड़कर और उसके ऊपर लकड़ी बिछाकर रास्ता तैयार किया था। इसके जरिए ऊन, चमड़े से बने कपड़े और नमक लेकर तिब्बत से उत्तरकाशी के बाड़ाहाट पहुंचाया जाता था। इस पुल से नेलांग घाटी का रोमांचक दृश्य दिखाई देता है। यह क्षेत्र वनस्पति और वन्यजीवों के लिहाज से काफी समृद्ध है और यहां दुर्लभ पशु जैसे हिम तेंदुआ और ब्लू शीप यानी भरल रहते हैं।

सामरिक दृष्टि से संवेदनशील है नेलांग घाटी
नेलांग घाटी सामरिक दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्र है। गरतांग गली भैरव घाटी से नेलांग को जोड़ने वाले पैदल मार्ग पर जाड़ गंगा घाटी में मौजूद है। उत्तरकाशी जिले की नेलांग घाटी चीन सीमा से लगी है। सीमा पर भारत की सुमला, मंडी, नीला पानी, त्रिपानी, पीडीए और जादूंग अंतिम चौकियां हैं।

वहीं, सतपाल महाराज पर्यटन मंत्री उत्तराखंड कहा ने भारत सरकार ने पर्यटकों की आवाजाही पर लगाई थी रोक। वर्ष 1962 में भारत-चीन युद्ध के बाद बने हालात को ध्यान में रखते हुए भारत सरकार ने उत्तरकाशी के इनर लाइन क्षेत्र में पर्यटकों की आवाजाही पर प्रतिबंध लगा दिया था। यहां के ग्रामीणों को एक निश्चित प्रक्रिया पूरी करने के बाद साल में एक ही बार पूजा अर्चना के लिए इजाजत दी जाती रही है। इसके बाद देश भर के पर्यटकों के लिए साल 2015 से नेलांग घाटी तक जाने के लिए गृह मंत्रालय भारत सरकार की ओर से इजाजत दी गई।

पर्यटन सचिव ने बताया कि दिलीप जावलकर उत्तराखंड धरोहर संरक्षण के लिए सरकार प्रतिबद्ध है। इसके तहत नेलांग घाटी में स्थित ऐतिहासिक गरतांग गली की सीढ़ियों का 64 लाख रुपये की लागत से पुनर्निर्माण कार्य पूरा करने के बाद पर्यटकों के लिए खोल दिया गया है। गरतांग गली के खुलने के बाद स्थानीय लोगों और साहसिक पर्यटन से जुड़े लोगों को फायदा मिल रहा है। ट्रैकिंग के शौकीनों के लिए यह एक मुख्य केंद्र बन रहा है।

वहीं, मयूर दीक्षित, जिलाधिकारी, उत्तरकाशी ने कहा के पुनर्निर्माण कार्यों में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। पुरानी शैली में पुननिर्माण कार्यों को जुलाई माह में पूरा कर लिया गया था। कोरोना नियमों और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए एक बार में दस पर्यटकों को ही प्रवेश दिया जा रहा है।

नेलांग घाटी के आसपास-हर्षिल
हर्षिल, हिमालय की तराई में बसा एक गांव, जो अपनी प्राकृतिक सुंदरता से पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करता है। यहां से गंगोत्री की दूरी मात्र 21 किलो मीटर ही बचती है, जो कि हिन्दुओं के प्रमुख धार्मिक स्थलों में से एक है। गंगोत्री तक रास्ता अपने आप में इतना मनमोहक है कि एक बार से आपका मन नहीं भरेगा।

केदारताल
केदारताल उत्तराखंड में सबसे खूबसूरत झीलों में से एक ताल है। यह गंगोत्री से 18 किमी की दूरी पर स्थित, गढ़वाल हिमालय में दूर केदार ताल निश्चित रूप से साहसिक और प्रकृति प्रेमियों के लिए एक आदर्श स्थान है। केदारताल से केदारगंगा निकलती है जो भागीरथी की एक सहायक नदी है।

खटीमा पहुंचे सीएम ने लोगों की समस्याएं सुनी, मौके पर ही किया समाधान

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने विधानसभा क्षेत्र खटीमा में पहुंचकर कार्यकर्ता बैठक एवं जनमिलन समारोह में शिरकत की। उन्होने लोगों का अभिनन्दन स्वीकार करते हुए धन्यवाद ज्ञापित किया। उन्होने कहा कि आप सबके प्रेम से मुझे जो जिम्मेदारी संगठन ने दी है उसे मै पूरी निष्ठा से निभाउंगा व जो समय प्रदेश की सेवा करने का मुझे मिला है उसमें अधिक से अधिक कार्यों को सम्पन्न किया जायेगा। उन्होने कहा कि उत्तराखण्ड को एक मॉडल प्रदेश बनाने में सरकार लगातार कार्य कर रही है। उन्होने कहा कि सरकार द्वारा बेरोजगारी, पलायन, रिक्त पदों की भर्ती प्रक्रिया, स्वरोजगार के क्षेत्र में युवाओं व महिलाओं को जोड़ने का कार्य भी किया जा रहा है। उन्होने कहा कि सरकार द्वारा विभिन्न विभागों में 24 हजार रिक्त पदों पर भर्ती प्रक्रिया प्रारम्भ कर दी गई है एवं सरकारी नौकरी के क्षेत्र में ही नही बल्कि बङे स्तर पर सरकार विभिन्न क्षेत्रों में लाखों लोगों को स्वरोजगार से जोड़ने का भी प्रयास कर रही है, सरकार की मंशा है कि प्रदेश के युवा एवं महिलाऐं रोजगार मांगने वाले नही बल्कि रोजगार देने वाले बने। उन्होने जनता की समस्याओं को सुना व समस्याओं के निस्तारण हेतु सम्बन्धित अधिकारियों को निर्देश दिये। उन्होने कहा कि इस हेतु सम्बन्धित अधिकारियों को निर्देश दिये गये है कि बैंको से मिलने वाला ऋण की प्रक्रिया को सरल करते हुए शिविरों के माध्यम से जरूरतमन्दों को शिविर में ही ऋण स्वीकृत किया जाना सुनिश्चित करें। उन्होने कहा कि राष्ट्रीय आजीविका मिशन के तहत स्वयं सहायता समूह के माध्यम से माताओं-बहनों द्वारा उत्पादित वस्तुओं को बड़े पैमाने पर बाजार में स्थान दिलाने हेतु सरकार लागातार प्रयास कर रही है ताकि माताऐं-बहने आत्मनिर्भर बन सके। उन्होने कहा कि कोविड-19 के संक्रमण से हुए नुकसान से स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को उबारने हेतु 119 करोड़ की सहायता राशि दी जा रही है। प्रदेश में कोविड काल में प्रतियोगी परीक्षाऐं न होने के कारण सरकार ने युवाओं को सरकारी नौकरी की भर्ती में एक साल आयु की छूट दी है। उन्होने कहा कि लोक सेवा आयोग की तैयारी कर रहे युवाओं को प्री-एग्जाम उत्तीर्ण करने पर आगे तैयारी हेतु 50-50 हजार की सहायता धनराशि सरकार द्वारा दी जायेगी व ऐसे व्यक्ति जिन्होने एमबीबीएस की परीक्षा उत्तीर्ण कर इण्ट्रेशिप कर रहे डॉक्टरों को 17 हजार की धनराशि प्रदान की जायेगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आगामी 3 वर्षों तक किसी भी मलिन बस्तियों में रहने वाले व्यक्तियों को तब तक नही हटाया जायेगा जब तक उनके आवास हेतु आवश्यक कार्यवाही न हो। उन्होने कहा कि सरकार लागातार आमजन के हित व प्रदेश के चहुमुखी विकास हेतु कार्य करना चाहती है जिसके लिए सम्बन्धित अधिकारियों को निर्देश दिये गये है कि तहसील दिवस/बहुउद्देशीय शिविर के माध्यम से आमजन मानस की समस्याओं का निस्तारण करना सुनिश्चित करें। उन्होने कहा कि समस्या ब्लॉक स्तर, तहसील स्तर या जनपद स्तर की हो उनका उसी स्तर पर निस्तारण करना सुनिश्चित करें उन्होने कहा कि यदि कोई भी शिकायत अनावश्यक शासन स्तर पर पहुंची तो उसका उत्तरदायी सम्बन्धित अधिकारी की तय की जायेगी। सरकार की नो पेंडेंसी के तर्ज पर कर रही है। सरकार द्वारा पर्यटन व सांस्कृतिक के क्षेत्र को उबारने के लिए दो सौ करोड़ की धनराशि अर्थिक सहायता के रूप में दी जायेगी। उन्होने कहा कि आशाओं के हित में भी सरकार कार्य कर रही है व इस रक्षाबन्धन पर्व पर आशा व आगनबाड़ी कार्यकत्रियों को 1-1 हजार रूपये की धनराशि उपहार के रूप में दी जायेगी। उन्होने कहा कि कोविड-19 महामारी के दौरान जिन बच्चों के अभिभावक/संरक्षक की मृत्यु हुई है उन बच्चों की देखभाल का जिम्मा सरकार ने लिया है जिसके अन्तर्गत 21 वर्ष की आयु तक प्रत्येक बच्चे को प्रतिमाह 3 हजार रूपये की धनराशि दी जायेगी। उन्होने कहा कि अभी तक 23 सौ बच्चों का पंजीकरण हो चुका है जिनको योजना से जोड़ा जा चुका है। उन्होने कहा कि बच्चों की देखभाल मेरे द्वारा मामा के रूप में किया जायेगा। उन्होने कहा कि सरकार दो बच्चों के जन्म पर महालक्ष्मी योजना के तहत उन माताओं को महालक्ष्मी किट दी जा रही है इसके अन्तर्गत 50 हजार माताओं को इसका लाभ दिया जायेगा। उन्होने कहा कि आज हम देश के प्रधानमंत्री के नेतृत्व में अनेक लड़ाई लड़ रहे है जिसमें लगातार प्रधानमंत्री एक कर्मयोगी, राजश्री पुरूष के रूप में कार्य कर रहे है। उन्होने कहा कि आज भारत सबसे ज्यादा वैक्सीन लगाने, मुफ्त राशन देने वाला पहला देश है। उन्होने कहा कि उत्तराखण्ड सरकार ने स्वास्थ्य सम्बन्धी 200 से अधिक जांचे निःशुल्क करने का निर्णय लिया है ताकि उत्तराखण्ड का कोई भी भाई बहन उपचार से वंचित न रहे। उन्होने कहा कि सरकार द्वारा किसानों के हित में बड़े-बड़े कार्य किये जा रहे है। सरकार का एजेण्डा सिर्फ चुनाव जीतना नही बल्कि उत्तराखण्ड का समग्र विकास है, आने वाले दिनो में उत्तराखण्ड देश का सर्वश्रेष्ठ राज्य बनेगा। उन्होने कहा कि हम जनता की भावनाओं के साथ है और आम जनता की भावनाओं को खुशी में बदलना चाहते है। उन्होने सम्बन्धित सभी अधिकारियों को निर्देश दिये कि विकास कार्यों से सम्बन्धित टेण्डर प्रक्रिया 15 सितम्बर 2021 से पहले पूर्ण करना सुनिश्चित करें ताकि वर्षा काल समाप्त होते ही विकास कार्य शीघ्र प्रारम्भ किया जा सके। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने अनेक घोषणाऐं की।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री द्वारा कई घोषणायें की गई, जिनमें खटीमा चौराहे से थारू विकास भवन तक सड़क चौड़ीकरण व प्रकाश व्यवस्था की जायेगी, दीनदयाल पार्क का सौंदर्यीकरण किया जायेगा, मेलाघाट रोड, पीलीभीत रोड, रूद्रपुर रोड एवं टनकपुर रोड के दोनो तरफ फुटपाथ पर टाईल्स निर्माण किया जायेगा, नगर क्षेत्र खटीमा में एक पुस्तकालय का निर्माण किया जायेगा, नगर एवं समीपवर्ती क्षेत्र स्ट्रीट लाईट के कार्य किये जाऐंगें। शहर अन्तर्गत मुख्यमार्गों की सभी दीवारों पर वॉल पेन्टिग की जायेगी, नगर अन्तर्गत ओरना मिन्टर प्लांट लगाये जायेगें, विधानसभा क्षेत्र खटीमा में संचालित आश्रम पद्धति विद्यालय की चाहर दीवारी का निर्माण किया जायेगा, नगर क्षेत्र खटीमा के नाला में वेण्डर जोन का निर्माण किया जायेगा। नगर क्षेत्र खटीमा में जगह-जगह शौचालयों का निर्माण किया जायेगा, खटीमा नगर क्षेत्र में डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन व सोलिड वेस्ट मैनेजमैन्ट का कार्य किया जायेगा, भारामल बाबा मन्दिर का सौन्दर्यीकरण व विकास कार्य किया जायेगा, संजय पार्क के मेलाघाट रोड का उच्चीकरण, भारत-नेपाल के बार्डर पर आकर्षण व भव्य द्वार का निर्माण, शारदा नदी के किनारे वनभूमि पर पार्क का निर्माण, खटीमा में पुरानी तहसील पर राजस्व निरीक्षक/उपनिरीक्षक हेतु शासकीय कार्यालय का निर्माण, खटीमा के नालों को कवर कर आवागमन वेण्डर जोन आदि का निर्माण, नगर क्षेत्र में जल भराव समस्या के सम्बन्ध में जल निकासी की समुचित व्यवस्था, मण्डी समिति का विस्तारीकरण के कार्य की घोषणाएं की गई।
इस अवसर पर विधायक डा0 प्रेम सिंह राणा, जिलाध्यक्ष शिव अरोरा, उपाध्यक्ष किसान आयोग राजपाल सिंह, आईजी अजय रौतेला, जिलाधिकारी रंजना राजगुरू, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक दलीप सिंह कुंवर, मुख्य विकास अधिकारी आशीष भटगई उपस्थित थे।

18 प्लस का शत-प्रतिशत टीकाकरण करने वाला पहला जिला बना बागेश्वर

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सीएम आवास में मीडिया से अनौपचारिक बातचीत करते हुए बताया कि जनपद बागेश्वर एवं जनपद पौड़ी के विकास खण्ड खिर्सू द्वारा 18 वर्ष से अधिक आयु के समस्त नागरिकों का प्रथम डोज कोविड-19 टीकाकरण शत-प्रतिशत किया जा चुका है। जनपद बागेश्वर एवं विकास खण्ड खिर्सू को 18 वर्ष से अधिक आयु के नागरिकों हेतु दिया गया लक्ष्य (2011 सेन्सस के सापेक्ष 2021 की सम्भावित जनसंख्या) क्रमशः 172210 एवं 29374 है। जिसके सापेक्ष दिनांक 12 अगस्त, 2021 तक जनपद बागेश्वर एवं विकास खण्ड खिर्सू द्वारा क्रमशः 176776 एवं 37789 लाभार्थियों का प्रथम डोज़ टीकाकरण किया जा चुका है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में देश में दुनिया का सबसे बडा कोविड टीकाकरण अभियान चल रहा है। प्रधानमंत्री जी का उत्तराखण्ड को विशेष सहयोग मिला है। इस महीने अभी तक 17 लाख डोज मिल चुकी हैं। हम दिसम्बर अंत तक उत्तराखंड मे शतप्रतिशत वैक्सीनैशन कर दिया जाएगा।
भारत सरकार के मार्ग दर्शन में 16 जनवरी 2021 से सफलता पूर्वक कोविड-19 टीकाकरण अभियान आयोजित कर रहा है। टीकाकरण अभियान को बढ़ावा देने के लिए लगातार राज्य, जिला और ब्लॉक स्तर पर आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। दिनांक 17 अगस्त 2021 के कोविड-19 टीकाकरण कवरेज के अनुसार 45 वर्ष और उससे अधिक के लाभार्थियों के टीकाकरण की प्रथम खुराक 2326374 (83 प्रतिशत) एवं द्वितीय खुराक 1336923 (48 प्रतिशत) तथा 18 से 44 वर्ष के नागरिकों के टीकाकरण की प्रथम खुराक 3027666 (61 प्रतिशत) एवं द्वितीय खुराक 211958 (4 प्रतिशत) है।
राज्य में आतिथि तक कोविड-19 टीकाकरण अभियान के अन्तर्गत कुल 7435124 खुराक दी जा चुकी हैं। जिसमें प्रथम खुराक 5661943 (73 प्रतिशत) एवं द्वितीय खुराक 1773181 (23 प्रतिशत) हैं।
मुख्यमंत्री द्वारा जनपद बागेश्वर एवं विकास खण्ड खिर्सू को जनपदो से प्राप्त सूचना अनुसार राज्य में कोविड-19 टीकाकरण शत-प्रतिशत पूर्ण करने वाले प्रथम जनपद एवं विकास खण्ड के रूप में प्रमाणित किया गया एवं उपरोक्त उपलब्धियों की सराहना की गयी। इसी के क्रम में उक्त अभियान में जनपद बागेश्वर के जिला अधिकारी (विनीत कुमार मीणा), मुख्य चिकित्सा अधिकारी (डॉ सुनीता टम्टा), जिला प्रतिरक्षण अधिकारी (डॉ प्रमोद सिंह जंगपांगी) एवं स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों, कार्मिकों तथा जनपद पौडी के जिला अधिकारी (डॉ० के. विजय कुमार जोगडण्डे), मुख्य चिकित्सा अधिकारी (डॉ मनोज शर्मा). जिला प्रतिरक्षण अधिकारी (डॉ गम्भीर सिंह तालियान) एवं स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों, कार्मिकों को बधाई दी। इस अवसर पर स्वास्थ्य मंत्री डॉ धन सिंह रावत भी उपस्थित थे।

केन्द्रीय और राज्य की पेयजल योजनाओं का लोगों का लाभ दिलाने का निर्देश

पेयजल मंत्री बिशन सिंह चुफाल द्वारा बुधवार को सचिवालय में जल जीवन मिशन की समीक्षा वीडियो कॉन्फ्रेन्सिंग के माध्यम से की गयी। समीक्षा बैठक में राज्य स्तर से सचिव, पेयजल एवं स्वच्छता मिशन निदेशक, अपर सचिव, जल जीवन मिशन, प्रबन्ध निदेशक, उत्तराखण्ड पेयजल निगम मुख्य महाप्रबन्धक, उत्तराखण्ड जल संस्थान, मुख्य अभियन्ता, राज्य जल एवं स्वच्छता मिशन एवं अन्य अधिकारियों द्वारा प्रतिभाग किया गया। जनपदों से जिलाधिकारियों, मुख्य विकास अधिकारियों, पेयजल संस्थाओं के अधिशासी अभियन्ताओं एवं अन्य अधिकारियों द्वारा प्रतिभाग किया गया।
जल जीवन मिशन के अन्तर्गत आतिथि तक कुल 15.18 लाख परिवारों के सापेक्ष 6.82 लाख परिवारों को पेयजल संयोजन प्रदान किया जा चुका है। ग्रामीण क्षेत्रों के 96 प्रतिशत विद्यालयों एवं 91 प्रतिशत आंगनबाड़ियों को पेयजल से आच्छादित किया जा चुका है।
पेयजल मंत्री द्वारा समस्त जिलाधिकारियों एवं उपस्थित अन्य अधिकारियों को जल जीवन मिशन के कार्यों को समयबद्ध रूप से गुणवत्ता एवं मानकों के अनुरूप कार्याे को सम्पादित करने हेतु निर्देशित किया गया। उनके द्वारा यह भी निर्देशित किया गया कि ऐसी योजनायें जिनमें पेयजल की उपलब्धता मानकों से कम है के प्राक्कलन प्राथमिकता पर तैयार कर स्वीकृत करवाये जाये। जनपदों में अवस्थित विद्यालयों, आश्रम शालाओं, आंगनबाडी, प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र, पंचायत घर आदि सार्वजनिक भवनों को दिनांक 2 अक्टूबर, 2021 तक पेयजल से आच्छादित किये जाने हेतु निर्देशित किया गया।
इसके अतिरिक्त नाबार्ड कार्यक्रम में स्वीकृत तथा दीर्घकाल से अपूर्ण पेयजल योजनाओं को पूर्ण करते हुए विगत दो माह में जनता को निम्न पेयजल योजनाओं में पेयजल उपलब्ध कराया गया।

1. जनपद रूद्रप्रयाग के अन्तर्गत जवाड़ी रौठिया ग्राम समूह पेयजल योजना अनु. लागत रू0 1599.74 लाख की स्वीकृति वर्ष 2006 में राज्य सेक्टर ग्रामीण में दी गयी थी, वन भूमि की स्वीकृति लम्बित होने तथा स्थानीय विवाद के कारण योजना के कार्य वर्ष 2012 में प्रारम्भ हो सके थे। तत्पश्चात पाईप सामग्री की दरों में वृद्धि होने के कारण योजना की पुनरीक्षित लागत रू० 2539.53 लाख नाबार्ड कार्यक्रम में वर्ष 2018 में स्वीकृति प्रदान की गयी। योजना का स्रोत लस्तरगाड़ नदी से प्रमुख ग्रामों की दूरी लगभग 55 किमी0 है। योजना में 18 राजस्व ग्रामों की 52 बस्तियां सम्मिलित हैं तथा 10276 आबादी को लाभान्वित किया जाना प्रस्तावित है। वर्तमान में 9 ग्रामों की 24 बस्तियों को पेयजल सुचारू रूप से उपलब्ध हो गया है तथा 850 परिवारों को पेयजल उपलब्ध कराया जा चुका है।

2. जनपद पौड़ी के अन्तर्गत विकासखण्ड कल्जीखाल की डांडा नागराजा पम्पिंग पेयजल योजना अनु. लागत रू० 2648.49 लाख की स्वीकृति वर्ष 2012 में एनआरडीडब्लूपी, नाबार्ड कार्यक्रम में दी गयी थी, उक्त योजना में 72 राजस्व गांवों के 112 बस्तियाँ सम्मिलित हैं। योजना में समय-समय पर विद्युत व्यवधान एवं गंगा नदी में देवप्रयाग के समीप निर्मित इनटेकवैल में नदी में अत्यधिक सिल्ट आने के कारण पम्पिंग बाधित होने से उक्त योजना में सुचारू रूप से पेयजल उपलब्ध नहीं हो रहा था। वर्तमान में गुरुत्व स्रोत रांधीगाड़ से प्राप्त हो रहे 250 एलपीएम डिस्चार्ज को बढ़ाकर 600 एलपीएम किया गया, जिस कारण वर्तमान में पर्याप्त पम्पिंग करते हुए 70 ग्रामों को पेयजल आपूर्ति उपलब्ध कराया जा रहा है, जिसमें से 2 ग्रामों में नई सड़क निर्माण होने के कारण क्षतिग्रस्त पाईप लाईन को ठीक कराया जा रहा है।

3. जनपद टिहरी गढ़वाल के अन्तर्गत अकरी बारजूला ग्राम समूह पम्पिंग पेयजल योजना स्वीकृत लागत रू० 4770.17 लाख नाबार्ड कार्यक्रम में वर्ष 2015 में स्वीकृत की गयी थी। उक्त योजना में 42 राजस्व ग्रामों की 105 बस्तियों को पेयजल उपलब्ध कराने हेतु योजना वर्ष 2020 में पूर्ण की गयी, विगत कुछ वर्षाे में क्षेत्र के अन्तर्गत निर्माण कार्यों के चलते एवं पर्वतीय क्षेत्रों में बादल फटने, दैवीय आपदा के कारण अलकनन्दा नदी में दिनांक 18.06.2021 को आयी बाढ़ के कारण अत्यधिक सिल्ट आने के कारण इन्टेक वैल से रॉ वाटर पम्पिंग को बार-बार बन्द करना पड़ रहा है, जिससे योजना पर सुचारू रूप से पेयजल की आपूर्ति नहीं हो पाती है। वर्षा ऋतु में अलकनन्दा नदी में सिल्ट की अधिकता को देखते हुये योजना के समीप चन्द्रभागा गदेरे से अल्प समय में वैकल्पिक स्रोत से ट्रीटमेन्ट प्लान्ट तक रॉ वाटर की व्यवस्था की गयी है, जिससे योजना में सम्मिलित सभी ग्रामों में पेयजल उपलब्ध हो रहा है।

राज्य के 7 लाख 54 हजार 984 लाभार्थियों को 118 करोड़ 35 लाख रूपए का राहत पैकेज

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उत्तराखण्ड राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़े महिला स्वयं सहायता समूहों के साथ वर्चुअल संवाद में कोरोना काल में प्रभावित महिला स्वयं सहायता समूहों और राज्य सरकार की स्वरोजगार योजनाओं से जुड़े लाभार्थियों के लिए 118 करोड़ 35 लाख रूपए के राहत पैकेज की घोषणा की। इससे राज्य में 7 लाख 54 हजार 984 लोग लाभान्वित होंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड में विभिन्न स्वयं सहायता समूहों द्वारा सराहनीय कार्य किया जा रहा है। राज्य की अर्थव्यवस्था में इनका काफी योगदान रहा है। कोविड महामारी के दृष्टिगत इनके क्रियाकलापों में प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। इन स्वयं सहायता समूहों में मुख्यतः राज्य की महिलाएं कार्य करती हैं, जो कि पहाड़ की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। कोविड महामारी के कारण इन महिला स्वयं सहायता समूहों और राज्य सरकार की स्वरोजगार योजनाओं के लाभार्थियों के व्यवसाय पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। इन्हें राहत देने के लिए इस पैकेज का निर्णय लिया गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस पैकेज के अंतर्गत उत्तराखण्ड राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन एवं आई.एल.एस.पी. के अन्तर्गत गठित 30,365 समूहों को उनके द्वारा लिए ऋण पर 24.82 करोड़ रूपये की ब्याज प्रतिपूर्ति राज्य सरकार द्वारा की जाएगी।
उत्तराखण्ड राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के अन्तर्गत गठित 159 सी.एल.एफ. को प्रति सी.एल.एफ. 5.00 लाख रूपये का एक मुश्त अनुदान दिया जायेगा। जिसकी अनुमानित लागत रू0 7.95 करोड़ होगी।
उत्तराखण्ड राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन एवं आई.एल.एस.पी. के अन्तर्गत गठित सक्रिय स्वयं सहायता समूहों को स्वावलंबन हेतु 6 माह के लिये आर्थिक सहायता भी प्रदान की जायेगी। जिसमें कुल 42989 समूहों को 2000 रूपये प्रतिमाह की दर से कुल 51.59 करोड़ रूपये की सहायता दी जाएगी।
मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना में लाभार्थियों को 5 हजार रूपए प्रतिमाह की दर से 6 माह के लिए लिए गए ऋण पर ब्याज प्रतिपूर्ति दी जाएगी। इस पर कुल लागत 9 करोड़ रूपए आएगी।
मुख्यमंत्री सौर स्वरोजगार योजना के ऋण खाता धारकों को 6 माह के लिए ब्याज प्रतिपूर्ति सहायता उपलब्ध कराई जायेगी। इसकी अनुमानित लागत एक करोड़ रूपये है।
युवा कल्याण एवं प्रान्तीय विकास दल के युवक मंगल दल और महिला मंगल दलों को स्वावलम्बन हेतु 6 माह के लिए आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी। इसमें 20 हजार समूहों को 2 हजार रूपए प्रति माह की दर से आर्थिक सहायता दी जाएगी। जिस पर कुल 24 करोड़ रूपए का व्यय होगा।

आत्मनिर्भर भारत में महिला स्वयं सहायता समूहों का महत्वपूर्ण योगदान
मुख्यमंत्री ने वर्चुअल माध्यम से प्रदेश के सभी 13 जनपदों एवं 95 ब्लॉक से जुड़े स्वयं सहायता समूहों से वर्चुअल संवाद करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री के आत्मनिर्भर भारत के सपने को पूरा करने के की दिशा में देश तेजी से आगे बढ़ रहा है। महिला स्वयं सहायता समूहों का इसमें महत्पूर्ण योगदान है। राज्य के विकास में मातृ शक्ति जिस मनोयोग से कार्य कर रही है, यह सबके लिए प्रेरणा है। ऊर्जा एवं उत्साह का संचार इसी तरह बना रहे। हमारी मातृ शक्ति पर बड़ी जिम्मेदारी होती है।

रोजगार और स्वरोजगार सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकता
मुख्यमंत्री ने कहा कि मुख्य सेवक की शपथ लेते ही उन्होंने प्रदेश के युवाओं एवं मातृ शक्ति को रोजगार एवं स्वरोजगार से जोड़ने के प्रयास शुरू कर दिये हैं। राज्य में अनेक सरकारी पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। सभी विभागों को स्वरोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए निर्देश दिये गये हैं। जिसकी लगातार मॉनिटरिंग भी की जा रही है। राज्य सरकार का प्रयास है कि समाज के अन्तिम पंक्ति के लोगों तक योजनाओं का लाभ पहुंचे। सरकार जनता के साथ साझीदार के रूप में कार्य कर रही है।

प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में पिछले सात वर्षों में राज्य में अभूतपूर्व कार्य
मुख्यमंत्री ने कहा कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में पिछले सात सालों में केन्द्र सरकार से राज्य को हर क्षेत्र में भरपूर सहयोग मिला है। सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा, पेयजल एवं केन्द्र सरकार द्वारा चलाई जा रही अनेक जन कल्याणकारी योजनाओं से प्रदेश को मदद मिली है। केन्द्र सरकार की सभी योजनाओं को विभिन्न माध्यमों से जन-जन तक पहुंचाया जा रहा है। विश्व की सबसे बड़ी स्वास्थ्य योजना आयुष्मान भारत योजना वरदान साबित हुई है। केन्द्र सरकार के सहयोग से राज्य में रेल एवं सड़क कनेक्टिविटी में अनेक नये आयाम स्थापित हुए।

ग्राम्य विकास मंत्री स्वामी यतीश्वरानन्द ने कहा कि स्वयं सहायता समूहों द्वारा राज्य में सराहनीय कार्य किया जा रहा है। इनके लिए उत्पादों की बिक्री के लिए उचित व्यवस्था हो। अधिकारियों द्वारा समूहों के बीच जाकर उनकी समस्याएं सुनी जाय और उनका समाधान किया जाय। अपने घर से कार्य कर आजीवका को बढ़ाने के लिए स्वरोजगार अच्छा माध्यम है।

13 जनपदों के महिला स्वयं सहायता समूहों ने मुख्यमंत्री से साझा किया अनुभव
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने सभी जनपदों के महिला स्वयं सहायता समूहों से बातचीत की। उन्होंने महिला स्वयं सहायता समूहों के कार्यों और उन्हें आ रही परेशानियों के बारे में जानकारी ली। साथ ही राज्य सरकार को और क्या सुधार करने चाहिए, इस पर महिला स्वयं सहायता समूहों के सुझाव भी प्राप्त किए। अधिकांश ने अपने व्यवसाय को आगे बढ़ाने के लिए और अधिक उन्नत मशीनें उपलब्ध करवाए जाने और उत्पादों की मार्केटिंग की व्यवस्था सुनिश्चित किए जाने का आग्रह किया।
अल्मोड़ा की भगवती स्वयं सहायता समूह की माया देवी ने कहा कि उन्होंने बकरीपालन के लिए 21 हजार रूपये का लोन लिया था। अभी तक वह 42 हजार रूपये की बकरी बेच चुकी हैं। अभी उनके पास 38 बकरियां हैं। उनके समूह में 7 सदस्य ये कार्य कर रहे हैं।
बागेश्वर की आशा देवी ने कहा उनके क्लस्टर द्वारा सिलाई-बुनाई का कार्य किया जा रहा है। आर्डर पर सरकारी स्कूलों के बच्चों के लिए ड्रेस बनाई जा रही है। कलस्टर में 266 महिलाएं जुड़ी हैं। एक महिला प्रतिमाह 8 से 10 हजार रूपये कमा रही है।
चमोली जनपद के जोशीमठ की नर्मदा देवी ने कहा कि उनके तपोभूमि क्लस्टर द्वारा पंचबद्री के लिए प्रसाद बनाया जा रहा है। जिसकी ऑनलाईन बिक्री भी की जा रही है।
चम्पावत में प्रगति संगठन द्वारा लोहे की कड़ाई बनाई जा रही है। लोहाघाट में इसके लिए ग्रोथ सेंटर बनाया गया है। इस कार्य से 40 महिलाएं जुड़ी हैं।
देहरादून के डोईवाला विकासखण्ड की रीना रावत ने कहा कि उनके समूह द्वारा मशरूम उत्पादन एवं फूड प्रोसेसिंग का कार्य किया जा रहा है। जिससे अच्छा फायदा हो रहा है।
बहादराबाद, हरिद्वार की पूनम शर्मा ने कहा कि उनके समूह द्वारा हरिद्वार के विभिन्न मंदिरों के लिए प्रसाद बनाया जा रहा है।
नैनीताल की मुमताज ने कहा कि उनके क्लस्टर में अनेक ऑर्गेनिक उत्पाद बनाये जा रहे हैं। इससे 1500 महिलाएं जुड़ी हैं।
पौड़ी की बबीता ने कहा कि उनके उमंग कलस्टर द्वारा मंडवे के बिस्कुट, लड्डू बनाये जा रहे हैं, ये उत्पाद आंगनबाड़ी केन्द्रों को सप्लाई किये जा रहे हैं।
ऊखीमठ, रूद्रप्रयाग की सरिता देवी ने कहा कि उनके दुर्गा स्वयं सहायता समूह द्वारा श्री केदारनाथ मंदिर के लिए प्रसाद एवं दुग्ध आधारित उत्पाद तैयार किये जा रहे हैं।
टिहरी से कुंजापुरी क्लस्टर से जुड़ी नीलम देवी ने कहा कि स्थानीय दालों, अचार एवं मसालों का कार्य किया जा रहा है। उनके क्लस्टर से 365 महिलाएं जुड़ी हैं।
खटीमा, ऊधमसिंह नगर की शिक्षा देवी ने कहा कि उनके समूह द्वारा मुर्गी पालन, बकरी पालन, मत्स्य पालन एवं सब्जी उत्पादन से संबंधित कार्य किये जा रहे हैं। हिमाद्री एवं सरस मार्केट के माध्यम से उत्पादों की बिक्री की जा रही है।
चिन्यालीसौड़, उत्तरकाशी की रीना रमोला ने कहा कि उनके अपर्णा स्वयं सहायता समूह द्वारा एल.ई.डी पर आधारित अनेक उत्पाद बनाये जा रहे हैं।
पिथौरागढ़ में राखी बृजवाल एवं विमला देवी ने बताया कि नारी शक्ति समूह द्वारा बेकरी से संबंधित उत्पाद बनाये जा रहे हैं।

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने महिला स्वयं सहायता समूहों की सक्सेस स्टोरी पर आधारित ग्राम्य विकास विभाग की पुस्तक का भी विमोचन किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने प्रत्येक जनपद के चयनित महिला स्वयं सहायता समूहों को सम्मानित भी किया। उन्होंने भारत सरकार द्वारा पुरस्कृत गौरा स्वयं सहायता समूह को एक लाख रूपए राशि का चेक, प्रमाण पत्र और स्मृति चिन्ह प्रदान किया। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर ऊधमसिंह नगर जिले नारी शक्ति क्लस्टर की श्रीमती चन्द्रमणि दास को सम्मानित किया। दिनांक 12 अगस्त को चन्द्रमणि को प्रधानमंत्री ने वर्चुअल संवाद का अवसर प्राप्त हुआ था।

इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी, विधायक खजान दास, कुंवर प्रणव चौंपियन, राजेश शुक्ला, अपर मुख्य सचिव मनीषा पंवार, आनन्द बर्द्धन, सचिव एस. ए. मुरूगेशन एवं प्रदेश के विभिन्न जनपदों से आयी महिला स्वयं समूहों की महिलाएं उपस्थित थे।

51 प्रतिशत मतों का लक्ष्य लेकर विस चुनाव में कूद रही भाजपा

भाजपा प्रदेश मुख्यालय में प्रदेश उपाध्यक्ष अनिल गोयल ने प्रेस वार्ता में बताया कि 14 जिलों में 252 मंडलों और 70 विधानसभाओं में बूत समिति सत्यापन कार्यशाला पूर्ण हो चुकी है, इसके अलावा 11 हजार 235 बूथों पर सत्यापन कार्यक्रम वाली टीम के प्रशिक्षण भी पूरा हो गया है। अनिल गोयल ने बताया कि मुख्यमंत्री दो बूथों को मजबूत बनाने के लिए प्रवास करेंगे। यह अभियान 18 से 30 अगस्त चलेगा।
प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारियों के लिए संगठन स्तर पर पार्टी को मजबूत बनाने के उद्​देश्य से बूथ समिति सत्यापन अभियान पर पुरजोर तरीके प्रत्येक पदाधिकारी, मंत्रीगण और कार्यकर्ता लगा हुआ है। उन्होंने बताया कि पार्टी ने पदाधिकारियों को बूथ को मजबूत करने के लिए आवश्यक दिशा निर्देश दिए।
अनिल गोयल ने बताया कि बूथ समिति सत्यापन में धार्मिक संस्थान, एनजीओ अलग-अलग वर्ग के सामाजिक संगठनों का समावेश बूथ को मजबूत करने के लिए किया जाएगा। हमारे बूथ का कार्य धरातल पर दिखे इसके लिए सशक्त टोली का निर्माण भी किया है हमारा लक्ष्य 2022 में 51 प्रतिशत मत हासिल करना है प्रत्येक कार्यकर्ता के लिए जिम्मेदारियां निर्धारित की गई है उन्होंने बताया कि विश्व की सबसे पार्टी होने के नाते भी हमने कोरोना काल में सभी राजनीतिक कार्य छोड़कर सेवा ही संगठन के माध्यम से जनहित की प्राथमिकताओं को देखते हुए अपने कार्यकर्ताओं को हर घर तक सेवा के कार्यों में जोड़े रखा।
कार्यक्रम का संचालन प्रदेश मीडिया प्रभारी मनवीर सिंह चौहान के माध्यम से किया गया। इस प्रेस वार्ता के कार्यक्रम में बूथ समिति सत्यापन के प्रदेश संयोजक प्रदेश महामंत्री राजेंद्र भंडारी, प्रदेश सोशल मीडिया प्रदेश सह मीडिया प्रभारी कमलेश उनियाल, संजीव वर्मा, प्रदेश मीडिया विभाग प्रमुख राजीव तलवार व गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

एक्शन में धामी सरकार-समूह ग के 1500 पदों पर फिर निकलने जा रही भर्तियां

उत्तराखंड में विभिन्न विभागों के 1500 से अधिक समूह ग पदों पर भर्तियां होंगी। उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग ने इसकी तैयारी पूरी कर ली है। इसके लिए इसी सप्ताह भर्तियों का विज्ञापन प्रकाशित कर दिया जाएगा।
पिछले दो माह के भीतर अधीनस्थ सेवा चयन आयोग ने अलग-अलग विभागों के करीब ढाई हजार समूह ग के पदों पर भर्तियां निकाली हैं। इनकी आवेदन प्रक्रिया चल रही है। कुछ की आवेदन प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। इस बीच विभागों से धड़ाधड़ सिफारिश (अधियाचन) आ रहे हैं।
आयोग ने इनमें से आईटीआई धारकों के लिए कर्मशाला अनुदेशक, ड्राईवर, फॉरेस्ट गार्ड और कृषि विभाग में उद्यान पर्यवेक्षक व सहायक कृषि अधिकारी की भर्तियों का नोटिफिकेशन तैयार कर लिया है। आयोग के सचिव संतोष बडोनी ने बताया कि इन सभी पदों के लिए सप्ताहभर के भीतर ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।

इन पदों पर होगी भर्तियां
कर्मशाला अनुदेशक-120 पद
ड्राईवर-150 पद
फॉरेस्ट गार्ड-890 पद
कृषि उद्यान पर्यवेक्षक, सहायक कृषि अधिकारी-300 पद

500 से अधिक पदों के लिए अलग से भर्ती
आयोग के पास तमाम अधियाचन ऐसे आए हैं, जिनमें अलग-अलग विभागों में बेहद कम संख्या के पद हैं। पदवार भर्तियां निकालने में मुश्किल है। इसलिए आयोग ने सरकार से अपील की है कि बायलॉज में संशोधन किया जाए ताकि इन सभी पदों के लिए अलग से एक विज्ञापन प्रकाशित कर एक सामान्य अध्ययन की परीक्षा कराकर भर्ती की जा सके। आयोग सचिव संतोष बडोनी के मुताबिक, इन पदों की संख्या करीब 500 है।

प्रश्नों के चैलेंज, आयोग के लिए बन रहे मुसीबत
विभिन्न भर्ती परीक्षाओं में आंसर की जारी करने के बाद आयोग उम्मीदवारों को प्रश्नों को चैलेंज करने का मौका देता है। चूंकि, इसका कोई शुल्क नहीं है, इसलिए यह चैलेंज बड़ी संख्या में आ रहे हैं। उम्मीदवार जरा सा संदेह होने पर भी सीधे आयोग को अपनी चुनौती भेज रहे हैं। जबकि देश में तमाम ऐसी परीक्षाएं होती हैं, जिनमें सवाल को चैलेंज करने पर शुल्क देना होता है। चैलेंज सही होने पर यह शुल्क लौटा दिया जाता है। इसी तर्ज पर अब भर्ती परीक्षाओं की आंसर की चैलेंज करने पर आयोग भी शुल्क लगाने पर विचार कर रहा है।