इसरो ने पीएसएलवी के जरिये लांच किये 31 उपग्रह

भारत ने 12 जनवरी को अंतरिक्ष के क्षेत्र में इतिहास रच दिया है। सुबह नौ बजकर अठ्ाइस मिनट पर इसरो ने श्रीहरिकोटा से 31 उपग्रहों की लॉन्च किया। इसी के साथ ही इसरो के उपग्रहों का शतक पूरा हो गया है। शुक्रवार को लॉन्च उपग्रहों में से एक काफी खास है, जिससे पड़ोसी देश पाकिस्तान भी सावधान है। ये उपग्रह है कार्टोसैट-2, जिसे आई इन द स्काई भी कहा जा रहा है।

क्यों घबरा रहे हैं चीन और पाकिस्तान?

इस उपग्रह के जरिए धरती की तस्वीरें ली जा सकती हैं। बॉर्डर पर आतंकियों की गतिविधियों पर नजर रखने में भारत को आसानी होगी। यह एक अर्थ इमेजिंग सैटेलाइट है जो कि दुश्मन पर नजर रखने के काम आएगा। इस उपग्रह की मदद से हम बॉर्डर पार भी पाकिस्तान और चीन की गतिविधियों पर नजर रख सकते हैं।

आपको बता दें कि इसरो ने शुक्रवार सुबह नौ बजकर अठ्ाइस मिनट पर पीएसएलवी के जरिए एक साथ 31 उपग्रह को लॉन्च किया। भेजे गए कुल 31 उपग्रहों में से तीन भारतीय हैं और 28 छह देशों से हैंरू कनाडा, फिनलैंड, फ्रांस, दक्षिण कोरिया, ब्रिटेन और अमेरिका भी शामिल हैं।

इसलिए भी है खास

पृथ्वी अवलोकन के लिए 710 किलोग्राम का कार्टोसेट-2 सीरीज मिशन का प्राथमिक उपग्रह है। इसके साथ सह यात्री उपग्रह भी है जिसमें 100 किलोग्राम का माइक्रो और 10 किलोग्राम का नैनो उपग्रह भी शामिल हैं। कुल 28 अंतरराष्ट्रीय सह-यात्री उपग्रहों में से 19 अमेरिका, पांच दक्षिण कोरिया और एक-एक कनाडा, फ्रांस, ब्रिटेन और फिनलैंड के हैं।

बौखलाया पाकिस्तान

भारत की इस उपलब्धि पर पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय की ओर से कहा गया है कि भारत जिन उपग्रहों का प्रक्षेपण कर रहा है, उससे वह दोहरी नीति अपना रहा है। इन उपग्रहों का इस्तेमाल नागरिक और सैन्य उद्देश्य में किया जा सकता है। इसलिए यह जरूरी है कि इनका इस्तेमाल सैन्य क्षमताओं के लिए ना किया जाए, अगर ऐसा होता है कि इसका क्षेत्र पर गलत प्रभाव पड़ेगा।

साल की पहली अंतरिक्ष परियोजना

31 अगस्त 2017 इसी तरह का एक प्रक्षेपास्त्र पृथ्वी की निम्न कक्षा में देश के आठवें नेविगेशन उपग्रह को वितरित करने में असफल रहा था। पीएसएलवी-सी40 वर्ष 2018 की पहली अंतरिक्ष परियोजना है। अन्नादुरई ने कहा, पीएसएलवी अपने 39वें परियोजना (पीएसएलवी-सी 39) तक बहुत सफल रहा था, पीएसएलवी-सी 39 हमारे लिए एक बहुत बड़ा झटका था क्योंकि हीट शील्ड अलग नहीं हो पाए थे।

हनीप्रीत पर नहीं हुये आरोप तय, कारण चार्जशीट का एक हजार पेज होना

जेल में बंद राम रहीम की सबसे खास राजदार हनीप्रीत के गुनाहों की फेहरिस्त एक हजार से ज्यादा पन्नों में चार्जशीट की शक्ल में दर्ज है। गुरुवार को उसी एक हजार पन्नों की चार्जशीट के चलते हनीप्रीत पर आरोप तय नहीं हो पाए।

गौरतलब है इस पूरे मामले में हनीप्रीत के साथ अब तक 15 लोग गिरफ्तार हो चुके हैं। गुरुवार को इन लोगों को सेशन जज नीरजा कुलवंत कंसल की अदालत में पेश किया गया, लेकिन इन्हीं में से एक आरोपी प्रदीप कुमार की तरफ से दलील दी गई कि उसको अभी तक अदालत की तरफ से पूरी चार्जशीट की कॉपी नहीं मिली है।

राजस्थान से गिरफ्तार किए गए प्रदीप के मुताबिक उसे सिर्फ 175 पन्ने मिले हैं जो कि आरोप तय करने और बहस करने के लिए पूरे नहीं है। पहले पूरी चार्जशीट सीट पढ़ी जाएगी। उसके बाद ही इस पर बहस की जा सकती है कि आरोपियों पर क्या चार्ज लगे हैं।

गौरतलब है कि हनीप्रीत के खिलाफ एफआईआर नंबर 345 में आईपीसी की धारा 121, 121ए, 216, 145, 150, 151, 152, 153 और 120बी के तहत मामले दर्ज हैं। साथ ही हनीप्रीत साध्वी यौन शोषण मामले में डेरा प्रमुख गुरमीत राम रहीम को दोषी करार दिए जाने के बाद पंचकूला में हिंसा भड़काने और देशद्रोह मामले की आरोपी है।

अदालत में गुरुवार की सुनवाई के दौरान आरोप तय नहीं हो पाए। इस मामले में बहस और अगली सुनवाई अब आगामी 21 फरवरी को होगी।

सुप्रीम कोर्ट में पहली बार वकील से सीधे जज बनेंगी इंदु

उत्तराखंड हाईकोर्ट के मुख्य न्यायधीश केएम जोसेफ व वरिष्ठ अधिवक्ता इंदू मल्होत्रा को सुप्रीम कोर्ट कोलेजियम ने सुप्रीम कोर्ट का जज बनाने की सिफारिश की है।

सुप्रीम कोर्ट कोलेजियम ने सरकार से इन दोनों ही लोगों को सुप्रीम कोर्ट का जज बनाने की सिफारिश की है। इंदू मल्होत्रा को 2007 में वरिष्ठ वकील का दर्जा दिया गया था। वे सुप्रीम कोर्ट में अभी तक नियुक्त हुईं सातवीं महिला जज होंगी। अभी फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में आर. भानुमति अकेली महिला जज हैं। स्वतंत्रता के बाद से अभी तक सुप्रीम कोर्ट में सिर्फ छह महिला जज हुई हैं।

जस्टिस केएम जोसेफ फिलहाल उत्तराखंड हाईकोर्ट के जज हैं। वे उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन का आदेश रद करने वाली पीठ में शामिल थे। उसके बाद उनके स्थानांतरण की चर्चाएं रहीं लेकिन उत्तराखंड से उनका स्थानांतरण नहीं हुआ।

कोलेजियम ने इसके अलावा इलाहाबाद हाईकोर्ट के अतिरिक्त जज जस्टिस शिव कुमार सिंह को स्थाई करने की सिफारिश की है। हालांकि कोलेजियम के समक्ष इलाहाबाद हाईकोर्ट के कुल 11 अतिरिक्त जजों को स्थाई करने का प्रस्ताव था, लेकिन शिव कुमार सिंह का कार्यकाल समाप्त हो रहा था। इसलिए फिलहाल उनके बारे में सिफारिश की गई है। बाकी प्रस्तावों पर कोलीजियम बाद में विचार करेगी।

सुप्रीम कोर्ट में महिला जज

सुप्रीम कोर्ट 1950 में बना उसके 39 साल बाद 1989 में एम फातिमा बीवी सुप्रीम कोर्ट की पहली महिला जज नियुक्त हुईं। फातिमा बीवी केरल हाईकोर्ट से सेवानिवृत होने के बाद सुप्रीम कोर्ट में जज नियुक्त हुईं थी। वे 29 अप्रैल 1992 को सुप्रीम कोर्ट से सेवानिवृत हुईं। बाद में वे तमिलनाडु की राज्यपाल भी नियुक्त हुईं।

सुप्रीम कोर्ट में दूसरी महिला जज सुजाता वी मनोहर हुईं जिन्होंने जज के रूप में अपने कैरियर की शुरूआत बाम्बे हाईकोर्ट जज से की थी। वे सुप्रीम कोर्ट में 8 नवंबर 1994 से 27 अगस्त 1999 तक न्यायाधीश रहीं। जस्टिस सुजाता मनोहर के सेवानिवृत होने के करीब पांच महीने बाद जस्टिस रूमा पाल सुप्रीमकोर्ट की जज बनीं। जस्टिस पाल सबसे लंबे समय तक रहीं। वे 28 जनवरी 2000 से लेकर 2 जून 2006 तक सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश रहीं। उनके बाद चार साल तक सुप्रीम कोर्ट मे कोई महिला जज नहीं रही।

चार साल बाद झारखंड हाईकोर्ट की तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश जस्टिस ज्ञान सुधा मिश्रा सुप्रीम कोर्ट की न्यायाधीश नियुक्त हुईं। जस्टिस मिश्रा 30 अप्रैल 2010 को सुप्रीम कोर्ट जज बनी और 27 अप्रैल 2014 को सेवानिवृत हुईं। इसी दौरान जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई सुप्रीम कोर्ट की जज बनीं। जस्टिस देसाई 13 सितंबर 2011 से लेकर 29 अक्टूबर 2014 तक सुप्रीम कोर्ट जज रहीं। इस दौरान पहली बार सुप्रीम कोर्ट में एक साथ दो महिला जज रहीं।

जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की सेवानिवृति के करीब दो महीने पहले सुप्रीम कोर्ट की वर्तमान महिला जज आर. भानुमति सुप्रीम कोर्ट जज नियुक्त हुईं। जस्टिस भानुमति 13 अगस्त 2014 को सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश नियुक्त हुईं वे 19 जुलाई 2020 को सेवानिवृत होंगी। सुप्रीम कोर्ट के 67 सालों के इतिहास में सिर्फ दो बार एक साथ दो महिला जज रहीं।

अब उत्तराखंड बोर्ड की राह पर चले मदरसे

उत्तराखंड मदरसा बोर्ड ने अहम निर्णय लेते हुये यह फैसला लिया है कि मदरसों में दसवीं और बारहवीं की परीक्षायें उत्तराखंड बोर्ड पैटर्न की तर्ज पर होंगी। अब यह कहा जा सकता है कि मदरसे भी सरकारी व निजी स्कूलों की राह पर चलेंगे।

उत्तराखंड मदरसा बोर्ड कार्यालय में हुई बैठक में मदरसों की बोर्ड परीक्षा को सरल बनाने पर चर्चा की गई। लंबे विचार-विमर्श के बाद सदस्यों ने उत्तराखंड के मदरसों की परीक्षाओं में भी उत्तराखंड बोर्ड के समान परीक्षा पैटर्न लागू करने का फैसला लिया। बोर्ड के डिप्टी रजिस्ट्रार अहमद अखलाक अंसारी ने बताया कि मदरसों में बोर्ड की परीक्षा का पैटर्न बहुत जटिल था। इसके कारण बच्चों को कई तरह की परेशानियां भी होती थीं।

इसलिए बोर्ड ने पैटर्न को सरल बनाने का निर्णय लिया। उन्होंने मदरसों के पुराने पैटर्न का जिक्र करते हुए बताया कि 10वीं कक्षा में 10, जबकि 12वीं में नौ पेपर होते थे। लेकिन अब उत्तराखंड बोर्ड की भांति 10वीं में छह और 12वीं में पांच ही परीक्षा होंगीं। इसके अलावा अभी तक मदरसों में 10वीं की परीक्षा में एक हजार अंकों से मूल्यांकन होता था। लेकिन, अब 10वीं में पांच सौ और 12वीं बोर्ड की परीक्षा में छह सौ अंकों से मूल्यांकन होगा। बताया कि इस दिशा में अन्य संभावनाओं पर भी विचार किया जा रहा है। जल्द ही कुछ निर्णय भी लिए जा सकते हैं।

रूड़की के छह साल के मासूम को एचआईवी

छह साल के एक बच्चे में एचआईवी पॉजीटिव होने के पता चला है। बच्चा थैलीसीमिया से पीड़ित बताया जा रहा है। बच्चे के पिता का कहना है कि संक्रमित खून चढ़ाने की वजह से एचआईवी हुआ है। इस मामले में बच्चे के पिता ने ज्वाइंट मजिस्ट्रेट से की है। जेएम ने सिविल अस्पताल के सीएमएस को मामले की जांच के निर्देश दिए हैं। बच्चे को छह बार सिविल अस्पताल रुड़की से और 48 बार हरियाणा के कैथल में रक्त चढ़ाया जा चुका है।

जिला कैथल, हरियाणा निवासी एक व्यक्ति ने बताया कि उसके छह वर्षीय बच्चे को थैलीसीमिया है। 28 अगस्त 2017 से उसके बच्चे का उपचार सिविल अस्पताल रुड़की में चल रहा है। 28 अगस्त से अब तक उसके बच्चे को छह बार खून चढ़ाया जा चुका है। जबकि इससे पहले कैथल में उसका उपचार चल रहा था। वहां पर 48 बार बच्चे को खून चढ़ा है।

सिविल अस्पताल रुड़की में तीन दिन पहले उसके बच्चे की खून की जांच की गई थी। जांच में उसके बच्चे के खून में एचआइवी पॉजिटिव पाया गया है। बच्चे के पिता ने आशंका जताई है कि उसके बच्चे को किसी ऐसे व्यक्ति का खून चढ़ा है, जो एचआइवी पॉजिटिव होगा। इसी कारण उसके बच्चे को भी एचआइवी हो गया है। पीड़ित बच्चे के पिता ने मामले की शिकायत ज्वाइंट मजिस्ट्रेट नितिका खंडेलवाल से की है। ज्वाइंट मजिस्ट्रेट नितिका खंडेलवाल ने सिविल अस्पताल के सीएमएस डॉ. एके मिश्रा को जांच के निर्देश दिए हैं।

वहीं सिविल अस्पताल रुड़की के सीएमएस डॉ. एके मिश्रा ने बताया कि थैलीसीमिया से पीड़ित बच्चे में एचआइवी पॉजिटिव की बात सामने आई है। अस्पताल में बच्चे का उपचार पिछले चार माह से चल रहा है। अस्पताल के ब्लड बैंक से वही रक्त मरीज को चढ़ाया जाता है जिसकी सभी जांचें सही हो।

भाजपा विधायक ने तोड़ा नियम, शादी कार्ड पर छपवाया उत्तराखंड शासन का लोगो

भाजपा विधायक ने किसी बात की परवाह न करते हुये शादी के कार्ड पर शासन का लोगो छपवा लिया। इस संबंध में जब उनसे पूछा गया तो वह बेहिचक बोले कि उन्होंने कोई नियम नहीं तोड़ा है, बल्कि इससे तो अच्छा संदेश जायेगा।

उत्तराखंड के जिला हरिद्वार के ज्वालापुर विधायक सुरेश राठौर ने अपनी गोद ली हुयी बेटी की शादी कार्ड पर उत्तराखंड शासन का लोगो तक छपवा लिया है। जैसे ही कार्ड बंटने लगे, तो यह बात सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गयी। सोशल मीडिया पर तरह-तरह के कमेंट्स आने लगे। लोगों ने अपने-अपने विचार रखे।

गौरतलब है कि शासन का लोगों केवल शासकीय कार्यों हेतु ही प्रयोग में लाया जा सकता है, निजी तौर पर इसका प्रयोग करना एक तरह से नियम तोड़ना ही है, लेकिन भाजपा विधायक ने मनमर्जी के चलते लोगो को ही शादी कार्ड पर छपवा दिया।

विधायक सुरेश राठौर का कहना है कि मैनें किसी भी नियम का उल्लंघन नहीं किया है। यह मेरी गोद ली हुई बेटी है। एक्सीडेंट में इसके माता-पिता की मौत हो गई थी। इसके बाद से ही मेरी पत्नी और मैं इसका भरण-पोषण कर रह हैं।

शादी का भी पूरा खर्चा हम ही उठा रहे हैं। कार्ड पर लोगो छपवाने का मतलब कानून का उल्लंघन करना नहीं है। इससे पार्टी का अच्छा संदेश जाएगा कि भाजपा गरीब परिवारों और जरूरतमंदों के लिए हमेशा तत्पर रहती है।

अनियंत्रित ट्रक ने लिया पांच वाहन को चपेट में, दो की मौत

ऋषिकेश रेलवे स्टेशन से पुराने बस अड्डे की ओर जाने वाली रोड़ पर मंगलवार को सड़क दुर्घटना हो गयी। दुर्घटना में स्कूटी सवार एक मजदूर व कार चालक की मौके पर मौत हो गयी। वहीं सूमो सवार छह अन्य घायल हो गये। ट्रक चालक मौके से फरार होने में सफल रहा। वहीं देर रात ट्रक चालक के खिलाफ मुकादमा दर्ज कर लिया गया है।
मंगलवार का दिन तीर्थनगरी के लिये बड़ा दुखहारी रहा। बेकाबू ट्रक ने पांच वाहनों को अपनी चपेट में ले लिया। आलम यह रहा कि ऑल्टो कार बुरी तरह से कुचल कर सिमट गयी। वहंी सूमो तो 90 डिग्री का कोण बनाते हुये आगे के दौ टायरों पर खड़ी हो गयी। वहीं मौके पर दूसरी तरफ से आ रहे स्कूटी सवार भी इनके बीच में समा गये। स्कूटी भी पिचक कर खिलौना बन गयी। वहीं एक और बाइक सवार ने मौके पर ब्रेक लगाकर खुद को किसी तरह बचा लिया।
घटना उस वक्त की जब नगर में नो एंट्री व जीरो जोन का समय होता है। ऐसे में पुलिस अधिकारियों पर भी सवाल उठना लाजिमी है। आखिर कार कैसे नो एंट्री के समय ये माल वाहक ट्रक नगर के बीच से होकर जा रहे थे।
दुर्घटना में कुंदन (25 वर्ष) निवासी शांति नगर ऋषिकेश, मूल निवासी बिहार व रामस्वरूप (58 वर्ष) पुत्र हरि सिंह रावत निवासी इंदिरा नगर ऋषिकेश की मौके पर ही मौत हो गई। अन्य लोगों में राधेश्याम (40 वर्ष) पुत्र धर्मपाल निवासी सुंजडू, मुजफ्फरनगर, सतीश (40 वर्ष) पुत्र सज्जन प्रजापति निवासी भरत विहार ऋषिकेश, जुनवरी देवी (45 वर्ष) पत्नी महेंद्र सिंह निवासी नीरगड्डू तपोवन टिहरी गढ़वाल, हरिनारायण (70 वर्ष) पुत्र सुधांशु निवासी मायाकुंड ऋषिकेश, शिशुपाल (24 वर्ष) पुत्र महेंद्र निवासी नीरगड्डू टिहरी गढ़वाल को राजकीय चिकित्सालय में भर्ती कराया गया जहां देर रात सभी घायलों को हायर सेंटर रेफर कर दिया गया।
गौरतलब है कि रेलवे रोड से हीरालाल मार्ग की ओर ढलान पर आ रहे सीमेंट से लदे एक ट्रक के ब्रेक फेल हो गए। तेज ढलान होने के कारण चालक ट्रक पर नियंत्रण खो बैठा। रेलवे स्टेशन की ओर से आने वाली यह सड़क आगे चलकर पुराने रोडवेज अड्डे पर मिलती है और यहां से दायीं ओर और बायीं ओर के लिए सड़कें कटती है। जबकि सामने पुराना रोडवेज अड्डे की दीवार है। तिराहे के पास अनियंत्रित ट्रक ने अपने आगे चल रही एक ऑल्टो कार को टक्कर मारते हुए घसीट दिया। जिससे ऑल्टो कार अपने आगे चल रहे टाटा सूमो वाहन से जा टकराई और टाटा सूमो अपने आगे चल रहे एक अन्य ट्रक से जा भिड़ा। इतना ही नहीं सबसे आगे चल रहा ट्रक भी मोड़ नहीं काट पाया और सामने पुराना रोडवेज बस अड्डे की बाउंड्री के बाहर लगे विद्युत ट्रांसफार्मर से जा भिड़ा। इस बीच एक स्कूटी सवार भी इन वाहनों के बीच बुरी तरह कुचल गया। सीमेंट लदे ट्रक की गति इतनी तेज थी कि दोनों ट्रकों के बीच में जो भी वाहन आए उनके परखच्चे उड़ गए। भीषण दुर्घटना के बाद मौके पर लोगों की भीड़ जाम हो गई। स्थानीय लोगों ने पुलिस की मदद से घायलों को वाहनों से बाहर निकाला। जिन्हें 108 आपात सेवा की मदद से राजकीय चिकित्सालय पहुंचाया गया।

चौथी गोली का सबूत नहीं मिला, अब नहीं होगी दोबारा जांच

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद सभी जरूरी कागजातों की जांच करने वाले वकील अमरेंद्र सरन ने कोर्ट में जानकारी देते हुये बताया कि महात्मा गांधी की हत्या मामले में अब दोबारा से जांच नहीं की जायेगी। उन्होंने कहा कि बापू की हत्या करने में नाथूराम गोडसे के अलावा किसी और के होने के सबूत नहीं मिले है।

उन्होंने कोर्ट को जानकारी देकर कहा कि जिस फॉर बुलेट थ्योरी की बात होती है उसका भी कोई सबूत नहीं है। बता दें कि पंकज फडनीस की एक थ्योरी थी कि गांधी की हत्या चार गोलियां मार कर हुई थी।

उल्लेखनीय है कि सु्प्रीम कोर्ट ने इस मामले में पूर्व अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल और सीनियर वकील अमरेन्द्र शरण को न्याय मित्र नियुक्त किया था। इस याचिका में गांधी हत्याकांड में ‘तीन बुलेट की कहानी’ पर प्रश्न चिह्न लगाने के साथ यह सवाल भी उठाया गया था कि क्या नाथूराम गोडसे के अलावा किसी अन्य व्यक्ति ने चौथी बुलेट भी दागी थी?

इस हत्याकांड में अदालत ने 10 फरवरी, 1949 को गोडसे और आप्टे को मौत की सजा सुनाई थी। वहीं विनायक दामोदर सावरकर को साक्ष्यों की कमी के कारण संदेह का लाभ दे दिया गया था। पूर्वी पंजाब हाई कोर्ट द्वारा 21 जून, 1949 को गोडसे और आप्टे की मौत की सजा की पुष्टि के बाद दोनों को 15 नवंबर, 1949 को अंबाला जेल में फांसी दे दी गयी थी।

क्या महात्मा गांधी का कोई दूसरा हत्यारा भी था? वैसे पुलिस तो इस कहानी पर भरोसा करती है कि गांधी पर तीन गोलियां चलाई गई थीं, लेकिन क्या चौथी गोली भी थी जिसे नाथूराम गोडसे के अलावा किसी और ने चलाया था? ऐसे कई सवालों को लेकर उच्चतम न्यायालय में दायर एक याचिका पर 6 अक्टूबर को सुनवाई हुई थी।

उर्दू में दर्ज एफआईआर में है पूरी वारदात का जिक्र

30 जनवरी 1948 को दिल्ली के बिड़ला हाउस में महात्मा गांधी की हत्या हुई थी, बापू की हत्या की एफआईआर उसी दिन यानी 30 जनवरी को दिल्ली के तुगलक रोड थाने में दर्ज की गई थी। एफआईआर उर्दू में लिखी गई थी जिसमें पूरी वारदात के बारे में बताया गया था।

शनि के उदय होते ही किसे मिलेगा लाभ और किसे हानि?

न्याय के देवता शनि महाराज को उनके पिता सूर्य ने बीते पांच दिसंबर को 34 दिनों के लिये डूबा दिया था। जो सात जनवरी की शाम पांच बजकर चालीस मिनट पर उदय हो गये है। उदय भी उन्हीं के पिता सूर्य ने किया। शनि धनु राशि में डूबे थे।

शनि अपनी सम राशि में उदय हुए हैं इसलिए नुकसान कम करेंगे। शनि गुरु के धनु राशि में है। शनि हानिकारक कम हुआ है। आलस्य नहीं आएगा। सारे एग्जाम अच्छे होंगे। अच्छे नंबर आएंगे।
साढ़े साती वालों को परेशानी बढ़ेगी। फिलहाल शनि की साढ़ेसाती वृश्चिक, धनु और मकर राशिवाले पर है और इन राशि के लोग बहुत परेशान हैं। वृष, कन्या और मकर राशिवाले पर भी शनि का संकट है। पढ़ाई, नौकरी, व्यापार नहीं चल रहा है। कर्ज चढ़ा है, क्लेश और बीमारी बढ़ी है। लोहे के कढ़ाई का दान करने और चना गुड़ बांटने से कुछ राहत मिलेगी।

शनि की महादशा और दशा वालों को राहत नहीं मिलेगी। ऐसे में उन्हें शनिदेव पर गुलाब की माला चढ़ानी होगी और साथ ही सरसों के तेल का दीपक भी जलाना होगा। काले वस्त्र बांटने होंगे।

शनि महाराज के कारण चार राशियों को मिलेगा लाभ-
1. कर्क राशि के लिए यह अच्छा समय होगा। हर कार्य आसानी से संपन्न होंगे। आर्थिक समस्याएं दूर होंगी।
2. तुला राशि इन्हें भाग्यवर्धक यात्रा होगी। समाज में मान सम्घ्मान बढ़ेगा। परिवार का सहयोग प्राप्त होगा। साथ ही आर्थिक लाभ होगा।
3. कुंभ राशि वाले जातकों को आमदनी के स्रोत में वृद्धि होगी। व्यसाय में बड़ी सफलता का योग बन रहा है। रुका हुआ धन वापस मिलेगा।
4. मीन राशि वालों को धन-दौलत का लाभ तो होगा पर कुछ रुकावटें भी आ सकती हैं। हालांकि प्रयास करने पर आर्थिक लाभ कमाने में सफल रहेंगे।