डा. आरके गुप्ता को नशे की दवा देने पर मिली सजा

ऋषिकेश में मिर्गी का गारंटीड इलाज कराने के नाम मरीजों को नशे की दवायी देने के आरोप में मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी विवेक द्विवेदी की अदालत ने डा आरके गुप्ता समेत 15 लोगों को सजा सुनाई है।

सहायक अभियोजन अधिकारी यशदीप श्रीवास्तव ने अदालत को बताया कि डॉ. आरके गुप्ता का ऋषिकेश में नीरज क्लीनिक प्राईवेट लिमिटेड के नाम से अस्पताल है। जहां मिर्गी के रोगियों का शर्तिया इलाज का दावा किया जाता है। वर्ष 2004 में एक एनआरआइ ने शासन को शिकायत भेजी कि डॉ. गुप्ता आयुर्वेदिक दवाओं के नाम पर मरीजों को नशा देता हैं।

एनआरआइ ने विदेश में कराई गई दवाओं की जांच रिपोर्ट भी भेजी थी। इस पर शासन ने जांच के आदेश दिए। राज्य औषधि नियंत्रक की अगुआई में अस्पताल में छापे के दौरान प्रतिबंधित दवाएं मिली थीं, जिसके बाद डॉ. आरके गुप्ता को हिरासत में ले लिया गया। मगर, छापे की भनक लगने के बाद मौके पर जुटी भीड़ ने अस्पताल कर्मियों की मदद से डॉक्टर को छुड़ा लिया।

इधर, टीम मामले में मुकदमा दर्ज कराने ऋषिकेश कोतवाली पहुंची तो तत्कालीन नगर पालिका अध्यक्ष दीप शर्मा, पूर्व दायित्वधारी अनीता वशिष्ठ समेत कई सभासद और व्यापारी नेताओं की अगुआई में डेढ़-दो सौ लोगों की भीड़ कोतवाली पहुंच गई और हंगामा काटा कर दिया। मामले में डॉ. आरके गुप्ता समेत 15 लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया था।

सीजेएम कोर्ट में सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से कुल 15 गवाह पेश किए गए। अदालत ने गवाहों और सबूतों के आधार पर डॉ. आरके गुप्ता को पांच वर्ष सश्रम कैद और 21 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। वहीं अन्य 14 आरोपियों को एक-एक वर्ष सश्रम कैद की सजा सुनाई है। सजा सुनाए जाने के बाद आरके गुप्ता को सुद्धोवाला जिला कारागार भेज दिया गया, जबकि अन्य आरोपियों को जमानत दे दी गई।

भीड़ द्वारा छुड़ाए जाने के बाद फरार डॉ. आरके गुप्ता को 11 दिन बाद देहरादून के क्लेमेनटाउन इलाके से गिरफ्तार कर लिया गया था। इसके बाद वह करीब 27 माह तक जेल में रहा, बाद उसे जमानत मिल गई थी।

जहां आज तक कोई सीएम नहीं आया, वहां योगी जाएंगे

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री पद पर रहते हुए पूरे पांच साल तक नोएडा में कदम नहीं रखा। यूपी की सियासत में एक भ्रम है कि सत्ता में रहते हुए जिस सीएम के कदम नोएडा में पड़े हैं वो दोबारा से सत्ता में वापसी नहीं कर सके। अखिलेश से लेकर मायावती तक इसी भ्रम में पड़ी रही और नोएडा में मुख्यमंत्री रहते हुए कदम नहीं रखा, लेकिन उत्तर प्रदेश के मौजूदा सीएम योगी आदित्यनाथ ने इस अंधविश्वास को धता बताते हुए नोएडा आने का फैसला किया है।
योगी आदित्यनाथ 25 दिसंबर को नोएडा पहुंच रहे हैं। यहां वे मेट्रो को हरी झंडी दिखाएंगे। ये मेट्रो नोएडा के बोटेनिकल गार्डन से दिल्ली के कालका जी तक जाएगी। दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस नई मेट्रो लाइन के उद्घाटन समारोह में शामिल होंगे।

बता दें कि अखिलेश को उसी टोटके का डर से तमाम मुख्यमंत्री नोएडा आने से कतराते रहे। उन्होंने पांच साल तक सत्ता में रहते हुए एक बार भी नोएडा में कदम नहीं रखा। इसके बावजूद 2017 के विधानसभा चुनाव में वो अपनी सत्ता को बरकरार नहीं रख सके हैं।

मायावती 2007 से 2012 तक उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री रही हैं, लेकिन इन पांच सालों में मायावती ने नोएडा में कदम तक नहीं रखा। जबकि ग्रेटर नोएडा के दादरी के पास उनका पैतृक गांव है।
इसके बावजूद वे नहीं आई। इतना ही नहीं, उन्होंने अपने कार्यकाल में नोएडा को सजाने सँवारने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी। अंबेडकर पार्क से लेकर नोएडा एक्सप्रेस वे भी बनवाया। हालांकि, एक बार मायावती यहां आई थी, लेकिन उनकी सत्ता चली गई।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सीएम योगी आदित्यनाथ दोनों नोएडा आ रहे हैं। अब देखना होगा कि क्या यह अंधविश्वास महज एक भ्रम रह जाता है या सच साबित होगा।

शोध की जिम्मेदारी हमारे विश्वविद्यालयों की: त्रिवेन्द्र

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने सचिवालय में कृषि विभाग द्वारा आयोजित किसानों की आय दोगुना करने संबन्धी कार्यशाला का उद्घाटन किया। उद्यान और कृषि विभाग की मृदा स्वास्थ्य प्रयोगशालाओं के कार्यों का एकीकरण मुख्यमंत्री ने उद्यान और कृषि विभाग द्वारा अलग-अलग प्रदान किये जा रहे मृदा स्वास्थ्य कार्डों की व्यवस्था समाप्त करने के निर्देश देते हुए दोनों विभागों की प्रयोगशालाओं को एकीकृत रूप में कार्य करने को कहा।

अब किसान किसी भी लैब से कृषि अथवा औद्यौनिकी के लिये सॉयल हेल्थ कार्ड ले सकेंगे। वर्तमान में कृषि विभाग की प्रत्येक जनपद में एक सॉयल हेल्थ लैब है तथा उद्यान विभाग की दो प्रयोगशाला कुमाऊं मण्डल तथा गढवाल मण्डल में स्थापित है। अब कृषकों को कृषि अथवा औद्यौनिकी किसी भी कार्य हेतु सभी 15 प्रयोगशालाओं की सुविधा मिल सकेगी। अफसर फार्म और फार्मर तक पहुंचे। सीएम किसानों की आय दोगुनी करने संबन्धी कार्यशाला के आयोजन का स्वागत करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि तय समयसीमा के भीतर जनपद, ब्लॉक और न्याय पंचायत स्तर तक भी ऐसी गोष्ठियां आयोजित की जाय। कृषि और उद्यान विभाग के अधिकारी किसानों के साथ प्रतिमाह मीटिंग करें।

‘‘ऑफिस में बैठकर नही, खेतों तक जाकर खेती होगी। अफसर फार्म और फार्मर तक पहुंचें’’ मुख्यमंत्री ने कहा। मुख्यमंत्री ने नई तकनीकि को बढ़ावा देने के लिये विश्वविद्यालयों तथा कृषि विज्ञान केन्द्रों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया।

‘‘प्रयोग और शोध की जिम्मेदारी हमारे विश्वविद्यालयों की है’’ मुख्यमंत्री ने कहा। ऐसे निजी उच्च शिक्षण संस्थान जहां कृषि की पढ़ाई होती है उनका भी उपयोग किया जाय। आर्गेनिक खेती को बढावा दें। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड में दस विकासखण्डों को आर्गेनिक खेती के लिये चिन्हित किया गया है। आर्गेनिक खाद के उत्पादन के वर्तमान पारंपरिक तरीके में समय लगता है।

किसानों को नई तकनीकि और प्रक्रियाओं के प्रति प्रोत्साहित किया जाना चाहिये। प्रदेश के कृषि विश्वविद्यालयों और अनुसंधान केन्द्रों को इस दिशा में आगे आना चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘‘लैब’’ और ‘‘लैण्ड’’ दोनों के ही विशेषज्ञ कार्यशाला में बैठे हैं। किसानेां की आय दोगुना करना, उनकी आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाना, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को समृद्ध करने के लिये ठोस कार्ययोजना बनाकर मिशनरी भाव से काम करना होगा। सिर्फ योजनाएं बनाना काफी नहीं है। लोगों तक जाकर उनको जानकारी देना तथा उनकी मदद करना भी बहुत जरूरी है।

कृषि विभाग ने तैयार की है विस्तृत कार्ययोजना कार्यशाला के उद्घाटन सत्र में सचिव कृषि डी.सेंथिल पाण्डियन द्वारा एक प्रस्तुतिकरण दिया गया। पाण्डियन ने बताया कि कृषि और औद्यानिकी के क्षेत्र में सेक्टरवार विशेषज्ञ समितियों का गठन कर प्रारंभिक रोडमैप तैयार किया जा रहा है। इससे मधुमक्खी पालन, आर्गेनिक फार्मिंग, मृदा परीक्षण एवं प्रबंधन, कृषि विपणन, फलफूल, सब्जी, मशरूम उत्पादन, कोल्ड स्टोरेज चेन, पोस्ट हार्वेस्ट मैनेजमेंट, भेड़ एवं बकरी पालन, मत्स्य पालन आदि क्षेत्र सम्मिलित है।

अगले माह जनवरी से 2000 रूपये के कैशलेस पर नहीं देना होगा एक्स्ट्रा चार्ज

डेबिट कार्ड से किसी दुकान पर 2000 रुपये तक की खरीदारी करने पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) के तौर पर कोई एक्स्ट्रा चार्ज नहीं देना होगा। यह चार्ज केंद्र सरकार दो साल तक स्वयं ही वहन करेगी।

डिजिटल ट्रांजैक्शन को बढ़ावा देने के लिए सरकार की तरफ से उठाया जा रहा यह कदम अगले साल जनवरी से लागू होगा। केंद्रीय कैबिनेट की मीटिंग में केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने बताया कि यह व्यवस्था ठीक से लागू हो, इसके लिए एक कमेटी बनाई गई है। उन्होंने कहा कि देश में डिजिटल ट्रांजैक्शन में लगातार बढ़ोतरी हुई है। अप्रैल-सितंबर-2017 में केवल डेबिट कार्ड से दो लाख 18 हजार, 700 करोड़ का कैशलेस लेनदेन हुआ है।

अगर यही रफ्तार रही तो इस वित्त वर्ष के अंत तक यह चार लाख 37 हजार करोड़ का हो जाएगा। उन्होंने इसके साथ ही बताया कि सरकार देश केा एक ट्रिलियन इकोनॉमी बनाने के लिए लगातार नये प्रयास कर रही है और देश इसकी तरफ अग्रसर हो रहा है।

बता दें कि इससे पहले आरबीआई ने एमडीआर चार्जेज घटा दिए थे। इनको लेकर कारोबारियों ने आपत्ति जताई थी। कारोबारियों का कहना था कि इससे व्यापारियों का खर्च बढ़ेगा। इसको देखते हुए ही सरकार ने यह कदम उठाया है।

एमडीआर क्या है?

मर्चेंट डिस्काउंट रेट वह रेट है, जो बैंक किसी भी दुकानदार अथवा कारोबारी से कार्ड पेमेंट सेवा के लिए लेता है। ज्यादातर कारोबारी एमडीआर चार्जेज का भार ग्राहकों डालते हैं और बैंकों को दी जाने वाली फीस का अपनी जेब पर भार कम करने के लिए ग्राहकों से भी इसके बूते फीस वसूलते हैं।

तलाक, तलाक, तलाक पर होगी सजा, जाने कौन से है प्रावधान?

तीन तलाक को सुप्रीम कोर्ट से बैन किए जाने के बाद मोदी सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। तीन तलाक के खिलाफ सख्त कानून वाले बिल को कैबिनेट की मंजूरी शुक्रवार को मिल गई। इस बिल के तहत अगर कोई शख्स एक समय में अपनी पत्नी को तीन तलाक देता है, तो वह गैरजमानती अपराध माना जाएगा और उसे तीन साल की सजा भी हो सकती है।

बता दें कि मोदी सरकार ने इस बिल को लाने का तर्क दिया है कि सुप्रीम कोर्ट के बैन किए जाने के बाद भी लगातार तीन तलाक के मामले हो रहे हैं। कानून में तीन तलाक को लेकर सजा का कोई प्रावधान नहीं था। इसी के मद्देनजर केंद्र सरकार ने तीन तलाक के खिलाफ सख्त कानून बनाने की दिशा में कदम आगे बढ़ाया है।

मोदी सरकार द्वारा लाए जा रहे बिल के प्रारुप को सभी राज्य सरकारों भेजा गया था और राज्यों की राय मांगी गई थी। इसमें बीजेपी शासित ज्यादातर राज्यों ने इस पर मंजूरी दे दी है। इनमें असम, झारखंड, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, मणिपुर, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र सरकार ने मंजूरी दे दी हैं।

तीन तलाक के खिलाफ बिल में यह प्रावधान है कि एक वक्त में तीन तलाक (बोलकर, लिखकर या ईमेल, एसएमएस और व्हाट्सएप जैसे इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से) गैरकानूनी होगा।

दूसरा यह कि एक बार में तीन तलाक गैरकानूनी और शून्य होगा। ऐसा करने वाले पति को तीन साल के कारावास की सजा हो सकती है। यह गैर-जमानती और संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आएगा।

तीसरा यह कि ड्रॉफ्ट बिल के मुताबिक एक बार में तीन तलाक या तलाक ए बिद्दत पर लागू होगा और यह पीड़िता को अपने और नाबालिग बच्चों के लिए गुजारा भत्ता मांगने के लिए मजिस्ट्रेट से गुहार लगाने की शक्ति देगा।

चौथा यह कि पीड़ित महिला मजिस्ट्रेट से नाबालिग बच्चों के संरक्षण का भी अनुरोध कर सकती है। मजिस्ट्रेट इस मुद्दे पर अंतिम फैसला लेंगे।
यह प्रस्तावित कानून जम्मू-कश्मीर को छोड़कर पूरे देश में लागू होगा।

राहुल के नेतृत्व में कई दल आ सकते है करीब

राहुल गांधी के कांग्रेस अध्यक्ष पद की कमान संभालते ही अब चर्चा 2019 के लोकसभा चुनाव पर भी शुरू हो गई है। राहुल ने गुजरात में चुनाव प्रचार करने के बाद अध्यक्ष के तौर पर अपनी पहली प्रेस कॉन्फ्रेंस में भविष्य की रूपरेखा पर संक्षिप्त जानकारी दी। तो वहीं इससे पहले बिहार के पूर्व सीएम और आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद यादव भी राहुल को विपक्षी एकता के नेता के तौर स्वीकार्यता के संकेत दे चुके हैं।

ऐसे में अब राहुल की कोशिश भी बीजेपी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मजबूत होते जनाधार को विपक्षी एकता के साथ तोड़ने की रहेगी। 12 दिसम्बर को आरएसएस के गढ़ नागपुर में एक ऐसी कोशिश भी देखने को मिली। जहां राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी और कांग्रेस की दोस्ती एक बार फिर ट्रैक पर लौटती नजर आई।

किसानों की कर्जमाफी पर महाराष्ट्र की बीजेपी सरकार के खिलाफ नागपुर में दोनों दलों ने संयुक्त रूप से विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान महाराष्ट्र के पूर्व सीएम और कांग्रेस नेता अशोक चव्हाण ने बताया कि 2019 में कांग्रेस और एनसीपी मिलकर चुनाव लड़ने की घोषणा भी कर डाली।

आगामी लोकसभा चुनाव कांग्रेस के साथ गठबंधन पर एनसीपी नेता प्रफुल्ल पटेल ने कहा कि दोनों पार्टियों को यूनाइटेड रहना चाहिए और 2019 में उनकी सरकार आएगी। इस घोषणा के साथ ही एनसीपी ने बीजेपी के प्रति अपने सख्त तेवर भी दिखाने शुरू कर दिए हैं।

वहीं शरद पवार ने किसानों से राज्य सरकार के खिलाफ असहयोग आंदोलन शुरू करने का आह्वान किया और कहा कि सरकार जब तक किसानों का कर्ज माफ नहीं करती, तब तक किसान न तो बिजली का बिल भरें और न ही बैंकों का कर्ज चुकाएं।

यूपीए में सहयोगी रही एनसीपी ने अपना स्टैंड लगभग क्लीयर कर दिया है. लेकिन अब लेफ्ट समेत दूसरे विपक्षी दलों को साथ लाना राहुल की रणनीति का हिस्सा बन सकता है। यूपी में 2017 का विधानसभा चुनाव सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव की दोस्ती में लड़ने वाले राहुल के लिए उन्हें 2019 में साथ लाना आसान माना जा रहा है। वहीं दूसरी तरफ बसपा भी कांग्रेस को सरकार में समर्थन दे चुकी है।

वहीं बिहार, बंगाल और केरल की बात की जाए तो लालू कांग्रेस के सहयोग के साफ संकेत दे चुके हैं। केरल में बीजेपी ने ताकत फूंकी हुई है और आरएसएस नेताओं की हत्याओं को राष्ट्रव्यापी मुद्दा बनाया है। जिसने वहां सत्ताधारी लेफ्ट के लिए चुनौती खड़ी कर दी है। पहले भी कांग्रेस को लेफ्ट का समर्थन मिलता रहा है। ऐसे में राहुल वाम दलों को एकजुट लाकर भी बीजेपी के लिए कड़ी चुनौती पेश कर सकते हैं। पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी कांग्रेस के साथ आती-जाती रही हैं। ऐसे में राहुल उन्हें भी साधने को भरपूर कोशिश करेंगे।

राहुल के सामने जहां कांग्रेस संगठन को नया रूप देने और उसमें जान फूंकने का चौलेंज है, वहीं 2014 में पूर्ण बहुमत से सरकार बनाने वाले एनडीए और बीजेपी के खिलाफ विपक्षी खेमों को एकजुट करना भी उनके लिए बड़ा टास्क रहेगा।

केंद्र सरकार की योजना, राज्य की बड़ी झीलों पर लैंडिग हो सीप्लेन

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने केन्द्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी से भेंट कर चारधाम ऑल वैदर रोड की प्रगति पर चर्चा की। मुख्यमंत्री ने रामनगर-कर्णप्रयाग राज्य राजमार्ग सहित प्रदेश के कुछ राजमार्गों को राष्ट्रीय राजमार्ग में परिवर्तित करने का अनुरोध भी किया।
मुख्यमंत्री ने केंद्रीय मंत्री को अवगत कराया कि ऑल वैदर रोड के निर्माण कार्य प्रगति पर है। केन्द्र सरकार से संसाधनों के विकास के लिये धनराशि आदि के लिये पूर्ण सहयोग मिल रहा है। मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने गडकरी से उत्तराखण्ड में भी सीप्लेन योजना संचालित करने पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि राज्य में केन्द्र के सहयोग से टिहरी, नैनीताल की झीलों तथा प्रमुख नदियों में सीप्लेन योजना की शुरूआत की जा सकती है। इसके साथ ही भूमि अधिग्रहण में किसानों को मुआवजे पर मिलने वाले ब्याज पर भी सकारात्मक चर्चाएं हुई है। मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र की केन्द्रीय मंत्री जो कि जल संसाधन, नदी विकास मंत्री भी हैं, से राज्य में संचालित नमामि गंगे योजना के साथ लखवाडब्यासी सहित अन्य जल विद्युत परियोजनाओं पर भी चर्चा हुई है। मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि लखवाड़ब्यासी परियोजना, किसाऊ बांध परियोजना के लिए भी केन्द्र सरकार का सकारात्मक सहयोग मिल रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि केन्द्रीय मंत्री से वार्ता के दौरान उत्तराखण्ड की 33 जल विद्युत परियोजनाओं पर व्यापक चर्चा की गई। इस सम्बंध में ऊर्जा, जल संसाधन एवं वन मंत्रालय तीनों विभागों द्वारा मिलकर राज्य हित में सकारात्मक परिणाम देने का केन्द्रीय मंत्री द्वारा आश्वासन दिया गया। मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने अनुरोध किया कि आर्थिक मामलो की कैबिनेट कमेटी से लखवाड़ बहुउदेश्यीय परियोजना को शीघ्र सहमति प्रदान की जाय। उन्होंने कहा कि अलकनन्दा तथा भागीरथी नदियों पर 70 में से 33 जल विद्युत परियोजनाएं, जिनकी कुल क्षमता 4060 मेगावाट तथा लागत 41,000 करोड़ रूपये है, एन.जी.आर.बी.ए., ईकोसेंसटिव जोन तथा मा.उच्चतम न्यायालय के निर्देशो के क्रम में बन्द पड़ी है।
चमोली की 300 मेगावाट की बावला नन्दप्रयाग जल विद्युत परियोजना के सम्बन्ध में मुख्यमंत्री ने केन्द्रीय मंत्री को बताया कि इस परियोजना से संबंधित डीपीआर केन्द्रीय विद्युत प्राधिकरण के समक्ष अनुमोदन हेतु लम्बित है, क्योंकि जल संसाधन मंत्रालय द्वारा इन्वार्यमेन्टल फ्लों का अभी अध्ययन नहीं किया गया है। इस संबंध में आवश्यक कार्यवाही की अपेक्षा की। केन्द्रीय मंत्री गडकरी ने मुख्यमंत्री को राज्य की लम्बित परियोजनाओं के क्रियान्वयन में सहयोग का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार की योजना है कि उत्तराखण्ड समेत हिमालय क्षेत्र में जो बड़ी झीले हैं, वहां सीप्लेन की लैंडिंग की जाय। उन्होंने कहा है कि सीप्लेन एक फीट पानी तथा सड़क में भी उतर सकता है। आने वाले समय में यह बहुत सस्ता ट्रांसपोर्ट का माध्यम बनने जा रहा है। अमेरिका, कनाडा, जापान की तर्ज पर नागरिक उड्डयन मंत्रालय के सहयोग से इसके लिए नियम बनाये जा रहे है।

व्यभिचार के लिये सिर्फ पुरूषों को सजा देने वाले कानून की समीक्षा करेगा सुप्रीम कोर्ट

विवाहित महिला किसी गैर मर्द से शारीरिक संबंध बनाए तो सिर्फ उस मर्द को सजा क्यों? सुप्रीम कोर्ट इससे जुड़े कानून की समीक्षा करेगा। इस मसले पर दायर एक याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने इस केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा।

औरत को मुकदमे से छूट हासिल है
दरअसल, एडल्ट्री यानी व्यभिचार की परिभाषा तय करने वाली आईपीसी की धारा 497 में सिर्फ मर्द को सजा का प्रावधान है। किसी विवाहित महिला से उसके पति की मर्जी के बिना संबंध बनाने वाले मर्द को पांच साल तक की सजा हो सकती है, लेकिन महिला पर कोई कार्रवाई नहीं होती। याचिकाकर्ता ने इसे भेदभाव भरा कानून बताया है।
केरल के जोसफ शाइन की तरफ से दाखिल याचिका में कहा गया है कि 150 साल पुराना ये कानून मौजूदा दौर में बेमतलब है। ये उस समय का कानून है जब महिलाओं की स्थिति बहुत कमजोर थी। इसलिए, व्यभिचार के मामलों में उन्हें पीड़ित का दर्जा दे दिया गया।
चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली बेंच के सामने याचिकाकर्ता के वकील ने दलील दी कि आज औरतें पहले से मजबूत हैं। अगर वो अपनी इच्छा से दूसरे मर्द से संबंध बनाती हैं, तो मुकदमा सिर्फ उस मर्द पर नहीं चलना चाहिए। औरत को किसी भी कार्रवाई से छूट दे देना समानता के अधिकार के खिलाफ है।
बेंच ने इस दलील से सहमति जताते हुए कहा, आपराधिक कानून लिंग के आधार पर भेदभाव नहीं करता, लेकिन ये धारा एक अपवाद है। इस पर विचार की जरूरत है। कोर्ट ने ये भी कहा कि पति की मंजूरी से किसी और से संबंध बनाने पर इस धारा का लागू न होना भी दिखाता है कि औरत को एक संपत्ति की तरह लिया गया है।
पत्नी को शिकायत का अधिकार नहीं
याचिकाकर्ता ने बताया कि 1971 में लॉ कमीशन और 2003 में जस्टिस मलिमथ आयोग आईपीसी 497 में बदलाव की सिफारिश कर चुके हैं, लेकिन किसी भी सरकार ने कानून में संशोधन नहीं किया।
कोर्ट में ये सवाल भी उठा कि आईपीसी 497 के तहत पति तो अपनी पत्नी के व्यभिचार की शिकायत कर सकता है, लेकिन पति के ऐसे संबंधों की शिकायत पत्नी नहीं कर सकती। कोर्ट ने माना कि मौजूदा हालात में ये कानून न कहीं पुरुष से तो कहीं महिला से भेदभाव करता है।
इससे पहले 1954, 2004 और 2008 में आए फैसलों में सुप्रीम कोर्ट आईपीसी 497 में बदलाव की मांग को ठुकरा चुका है। ऐसे में नई याचिका पर पांच जजों की संविधान पीठ में सुनवाई हो सकती है।

भ्रष्टाचार के विरूद्ध जीरो टोलरेंस हर परिस्थिति में लागूः सीएम

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने भराड़ीसैंण विधानसभा परिसर में कहा कि स्थानान्तरण अधिनियम(ट्रांसफर एक्ट) को लाकर सरकार ने जनता की आशाओं को विश्वास में बदला है। इससे राज्य की सरकारी मशीनरी को एक नई ऊर्जा मिलेगी।
बहुत दिनों से तमाम कर्मचारी संगठनों द्वारा की जा रही पारदर्शी सुदृृढ़ स्थानान्तरण अधिनियम की मांग को सरकार ने पूरा किया है। अल्मोड़ा आवासीय विश्वविद्यालय विधेयक-2017 भी पारित किया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस विधानसभा सत्र में रूपये 3015 करोड का अनुपूरक बजट प्रस्तुत किया गया है। इसमें स्वच्छ भारत मिशन के लिए रू. 107 करोड का प्रावधान किया गया है। इसके साथ ही ग्रामीण खेलकूद को बढ़ावा देने के लिए रू. 08 करोड़, प्लास्टिक इंजीनियरिंग संस्थान (सीपैट) के लिए रू. 09 करोड़, आशा कार्यकत्रियों के लिए रू. 33 करोड़, औली में इंटरनेशनल स्कींइग प्रतियोगिता के लिए रू. 12 करोड़ एवं मुजफ्फरनगर-रूड़की रेल लाइन के लिए रू. 120 करोड़ की बजट व्यवस्था की गई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि जनवरी, 2018 से सीपैट की कक्षाएं संचालित होने लगेंगी। उत्तर प्रदेश के साथ प्रस्तावित जमरानी बांध एवं परिवहन विभाग से संबंधित एम.ओ.यू. तैयार कर लिया गया है, शीघ्र ही इस पर कार्यवाही की जायेगी। केदारनाथ उत्थान चौरिटेबिल ट्रस्ट का गठन और चतुर्थ वित्त आयोग की संस्तुति पर ग्राम पंचायतों को 2.5 प्रतिशत का अधिक अनुदान का निर्णय सरकार द्वारा लिया गया है। मुुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार श्री केदारनाथ के भव्यतम स्वरूप को स्थापित करने के लिए संकल्पबद्ध है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने श्री केदारनाथ पुनर्निर्माण के लिए सीएसआर में योगदान देने हेतु कॉरपोरेट घरानों का आह्वान किया है। ट्रस्ट के माध्यम से श्री केदारनाथ में अवस्थापना सुविधाओं के विकास में गति आयेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि चारधाम ऑल वेदर रोड के लिए मुआवजा वितरण कार्य सहित अन्य कार्य तेजी से किये जा रहे है। मुजफ्फरनगर-रूड़की रेलवे लाइन सरकार की प्राथमिकताओं में से एक है।
लोकायुक्त एक्ट पर मुख्यमंत्री ने कहा कि जनता की इच्छा और भावना के अनुरूप राज्य में भ्रष्टाचार को कोई स्थान नहीं मिलेगा। सरकार का भ्रष्टाचार के विरूद्ध जीरोटोलरेंस का सिद्धांत हर परिस्थिति में लागू किया जा रहा है। एन.एच.74 मुआवजा वितरण प्रकरण पर दोषी अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जा रही है। 10 लोगों को गिरफ्तार भी किया गया है। कोई कितना भी बड़ा हो उसे छोडा नहीं जायेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने नौ माह के कार्यकाल में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिये है। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के अन्तर्गत स्टेट कम्पोनेंट के तहत प्रशिक्षण केन्द्र प्रारम्भ करने वाला देश का पहला राज्य बन गया है। अभी तक दो प्रशिक्षण केन्द्र प्रारम्भ हो चुके है। सरकार का लक्ष्य है कि आने वाले वर्षों में एक लाख युवाओं को स्किल डेवलपमेंट की ट्रेनिंग दी जाए। किसानों की आय दोगुनी करने के उद्देश्य से कृषकों को दो प्रतिशत ब्याज पर एक लाख रुपये तक का ऋण उपलब्ध कराने हेतु दीन दयाल उपाध्याय किसान कल्याण योजना चालू की गई है। ग्रामीण विकास एवं पलायन आयोग का गठन करने के बाद पौड़ी को इसका मुख्यालय बनाया गया है। देहरादून की ऋषिपर्णा (रिस्पना) नदी एवं अल्मोडा की कोसी नदी के पुनर्जीवीकरण का अभियान शुरू किया गया है। रिस्पना नदी के लिए एक ही दिन में उद्गम से संगम तक पौधरोपण और साफ-सफाई अभियान का लक्ष्य रखा गया है।

बाबरी मस्जिद के विध्वंस की बरसी, मौलाना बोले दोबारा बने मस्जिद


बजरंग दल व विश्व हिंदू परिषद के कार्यकर्ताओं ने बाबरी विध्वंस की 25वीं बरसी को शौर्य दिवस के रूप में मनाया। इसके लिये उन्होंने जगह-जगह भारी संख्या में जुलुस भी निकाला। इस दौरान संस्कृत कॉलेज कैंपस से संगठन के कार्यकर्ता डीजे की धुन व ढोल नगाड़े लिये भी दिखाई दिये। डीजे पर प्रभु राम जी की सेना चली आदि भजनों पर कार्यकर्ता झुमते नजर आये।
सुरक्षा का लेकर अलर्ट था प्रशासन
बाबरी विध्वंस की 25 वीं बरसी पर बजरंग दल व विश्वहिंदू परिषद द्वारा आयोजित शौर्य दिवस व विशाल जुलूस को लेकर प्रशासन भी पूरी तरह से मुस्तैद था। शहर के विभिन्न चौक-चौराहों पर पुलिस बल की भारी तैनाती के साथ-साथ एहतियात के तौर पर एसएसबी के जवानों को भी तैनात किया गया था। जुलूस के साथ-साथ पुलिसकर्मी व एसएसबी के जवान भी चल रहे थे।

बरसी पर चस्पा मिले विवादित पोस्टर
बाबरी मस्जिद दोबारा तामीर करो। आल इंडिया इमाम कौंसिल शामली के नाम से चस्पा पोस्टर में लिखा कि बाबरी पर कोई समझौता नहीं, 25 साल से इंसाफ की मुंतजिर। दोबारा तामीर ही इंसाफ है। बाबरी के मुजरिमों पर कानूनी कार्रवाई की जाए। बताया गया कि एक संगठन के नाम से अब से पहले भी प्रधानमंत्री के बारे में अशोभनीय टिप्पणी वाले पोस्टर चस्पा हुए थे। सीओ कैराना राजेश तिवारी का कहना है कि विवादित पोस्टरों की जांच कराई जाएगी। दोषियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
वाम मोर्चा ने मनाया काला दिवस
बाबरी मस्जिद विध्वंस के विरोध में वाममोर्चा ने सयुंक्त रूप से काला दिवस मनाया। इस मौके पर वक्ताओं ने कहा कि भाजपा धर्म के नाम पर लोगों में नफरत फैला कर देश की एकता और अखंडता को तोड़ना चाहती है। गोरक्षा के नाम पर हत्या करने वालों पर कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। जिससे ऐसे लोगों का मनोबल बढ़ता जा रहा है। उन्होंने कहा कि गुजरात चुनाव में जनता के ज्वलंत मुद्दों से ध्यान हटाकर मंदिर तथा जनेऊ तक को मुख्य मुद्दा बनाया जा रहा है। भाजपा हिन्दुत्व के नाम पर सत्ता हाशिल करना चाहती है।
दोबारा बने बाबरी मस्जिद
ऑल इंडिया इमाम्स के पश्चिम उत्तर प्रदेश अध्यक्ष मौलाना शादाब ने कहा कि 6 दिसंबर 1992 में पांच सौ साल पुरानी बाबरी मस्जिद को शहीद कर दिया गया था। अभी तक उस जगह पर दोबारा मस्जिद की तामीर नहीं हुई है। यह मामला अदालत में विचाराधीन है और उम्मीद है कि इसमें सभी मुसलमानों की जीत मिलेगी। उन्होंने सभी मुसलमानों से गैर अदालत राय या बयानबाजी करने से मना किया।