पुलिसकर्मी को अवकाश में बढ़ोतरी कर रूद्रप्रयाग बना पहला जिला

रूद्रप्रयाग जिले के पुलिस कर्मियों के अच्छे संकेत मिले है। अब वह अपने और बच्चों के जन्मदिन व शादी की सालगिरह में शामिल हो सकेंगे। उन्हें इसके लिये अवकाश दिया जाएगा। यह कदम जिले की विषम भौगोलिक परिस्थितियों में पुलिस कर्मियों की अत्यधिक व्यस्तता को देखते हुए उठाया गया है। पुलिसकर्मियों अवकाश में बढ़ोतरी करने वाला रुद्रप्रयाग प्रदेश का पहला जिला बन गया है।

पुलिस अधीक्षक प्रह्लाद नारायण मीणा के अनुसार यह महसूस किया गया कि रुद्रप्रयाग जिले में तैनात पुलिसकर्मी ड्यूटी की व्यस्तताओं के चलते महत्वपूर्ण अवसरों, जैसे बच्चों के जन्मदिन, स्वयं अथवा माता-पिता की शादी की सालगिरह समेत अन्य जरूरी आयोजनों में शामिल नहीं हो पाते। नतीजा, अक्सर उन्हें परिजनों अथवा नाते-रिश्ते वालों के ताने सुनने को मिलते हैं और वह तनाव का शिकार हो जाते हैं। इससे उनकी कार्यक्षमता और अनुशासन पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।

मीणा ने बताया कि इस स्थिति से निपटने के लिए प्रधान लिपिक एसपी कार्यालय को जरूरी निर्देश दिए गए हैं। वह समस्त कार्मिकों से उनके बच्चों के जन्मदिन, स्वयं अथवा माता-पिता की शादी की सालगिरह समेत अन्य विवरण लेकर कार्यालय स्तर पर अवकाश स्वीकृत कराएंगे। प्रधान लिपिक व आशुलिपिक को यह भी निर्देश दिए गए हैं कि वे कार्मिकों के अवकाश आवेदन प्राप्त होते ही उन्हें स्वीकृति के लिए एसपी के समक्ष प्रस्तुत करें। बताया कि सभी प्रभारी समय से कार्मिकों के अवकाश आवेदन कार्यालय को उपलब्ध कराएंगे और पुलिस बल की उपलब्धता को ध्यान में रख रोटेशन में अवकाश स्वीकृति के लिए अग्रसारित करेंगे। ताकि राजकार्य प्रभावित न हो।

नरेन्द्र मोदी पर लगा साजिश का आरोप

विहिप के अध्यक्ष प्रवीण तोगड़िया ने एक बार फिर से अपने खिलाफ साजिश किए जाने का आरोप लगाया है। इस बार उन्होंने सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नाम लेकर उनपर हमला बोला है।

तोगड़िया ने अस्पताल से रिहा होने के बाद कहा कि अहमदाबाद पुलिस की क्राइम ब्रांच के जॉइंट कमिश्नर जेके भट्ट उनके खिलाफ हो रही साजिश में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ मिले हुए हैं। तोगड़िया का आरोप है कि पीएम और जेके भट्ट पिछले 15 दिनों से आपस में फोन से संपर्क में थे। विहिप नेता ने कहा है कि उनके दावे की पुष्टि के लिए जेके भट्ट के पिछले दो हफ्तों के फोन कॉल रिकॉर्ड खंगाले जाने चाहिए। तोगड़िया ने कहा कि भट्ट की इनकमिंग और आउटगोइंग कॉल की जांच होनी चाहिए। तोगड़िया ने अहमदाबाद पुलिस की क्राइम ब्रांच को कॉन्सपिरेसी ब्रांच करार दिया। उनका आरोप है कि क्राइम ब्रांच ने उनके बारे में चुनिंदा वीडियो टीवी चैनल्स को दिए। उन्होंने कहा कि वह क्राइम ब्रांच पर कानूनी कार्रवाई करेंगे।

संजय जोशी की सीडी का सच बताऊंगा

मोदी विरोधी माने जाने वाले बीजेपी नेता संजय जोशी की कथित सेक्स सीडी सामने आने के बाद उनका राजनीतिक करियर चौपट हो गया था। तोगड़िया ने इस मामले का भी जिक्र किया और कहा कि उन्हें सब मालूम है कि यह सीडी किसने और कहां पर बनाई थी। उन्होंने कहा है कि वह इस सीडी की जांच करने वालों में थे। वह आने वाले दिनों में इस सीडी के राज दुनिया के सामने रखेंगे। उन्होंने एक बार फिर से आरोप लगाया कि उन्हें और उनके करीबियों को जानबूझकर परेशान किया जा रहा है।

यह है पूरा मामला

राजस्थान की एक अदालत से गिरफ्तारी का वारंट सामने आने के बाद प्रवीण तोगड़िया रहस्यमयी अंदाज में गायब हो गए थे। वह करीब 11 घंटे बाद बेहोशी की हालत में मिले थे। उन्हें एक अस्पताल में भर्ती कराया गया था। अगले दिन अस्पताल से उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी और कहा था कि उनके एनकाउंटर की साजिश हो रही है। उन्होंने पीएम नरेंद्र मोदी और अहमदाबाद पुलिस पर अपने खिलाफ साजिश करने का आरोप लगाया।

सरकार पिछड़े जिलों को संवारने को कर सकती ये

केंद्रीय आम बजट में इन जिलों में विकास कार्यो में तेजी लाने के लिए खासी धनराशि आवंटित की जा सकती है। सरकार आम बजट 2018-19 में पिछड़े जिलों के संवारने के लिए कुछ नया कर सकती है।

नीति आयोग ने देशभर में 100 से अधिक पिछड़े जिलों के विकास की योजना तैयार की है। आयोग ने इन जिलों को एस्पिरेशनल डिस्ट्रिक्ट का नाम दिया है। इन जिलों के विकास के लिए आम बजट 2018-19 में मदद के विकल्पों पर विचार हो रहा है। इन जिलों के लिए बजट में आवंटित सहायता राशि को संबंधित राज्य सरकारों के माध्यम से खर्च किया जा सकता है। इनमें झारखंड, बिहार, छत्तीसगढ़ और उत्तर प्रदेश सहित कई प्रदेशों के पिछड़े जिले शामिल हैं। सूत्रों का कहना है कि इन जिलों के लिए खासी धनराशि आवंटित की जाएगी।

सूत्रों के अनुसार इन जिलों के विकास के लिए धनराशि देने के साथ-साथ डिस्ट्रिक्ट एक्शन प्लान भी बनाए जाएंगे। साथ ही सामाजिक-आर्थिक विकास के अलग-अलग पैमाने पर समयबद्ध लक्ष्य तय कर इनकी रैंकिंग की जाएगी। सरकार ने इन जिलों की स्थिति सुधारने के लिए केंद्रीय मंत्रालयों में तैनात अतिरिक्त और संयुक्त सचिव स्तर के अधिकारियों को प्रत्येक पिछड़े जिले का प्रभारी अधिकारी भी बनाया है। पिछड़े जिलों में वामपंथी अतिवाद से प्रभावित जिले भी शामिल हैं।

विकास की दृष्टि से पिछड़े ये जिले सरकार की प्राथमिकता में सबसे ऊपर हैं। इसका अंदाजा इस तथ्य से लगाया जा सकता है कि हाल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इन जिलों के जिलाधिकारियों के एक सम्मेलन को संबोधित किया। नीति आयोग की ओर से आयोजित किए गए दो दिवसीय सम्मेलन का थीम कान्फ्रेंस ऑन ट्रांसफॉर्मेशन ऑफ एस्पिरेशनल डिस्ट्रिक्ट्स रखा गया था। इसमें पिछड़े जिलों में स्वास्थ्य, पोषण और शिक्षा की स्थिति पर चर्चा कर विकास की रणनीति तैयार की गयी। सूत्रों ने कहा कि इस रणनीति को धरातल पर उतारने के लिए ही आम बजट में वित्तीय उपाय किए जाएंगे। बजट में आवंटित धनराशि का सही इस्तेमाल सुनिश्चित करने के लिए ही विकास के अलग-अलग मानकों पर इनकी रैंकिंग की जाएगी।

भारत के आक्रामक होने से पाक ने अमेरिका से दखल की लगाई गुहार

सीमा पर आतंकियों के खिलाफ भारतीय सेना की कार्रवाई से पाकिस्तान में हड़कंप मच गया है। पाकिस्तान ने अपनी नाराजगी जाहिर करने के लिए भारत के उप उच्चायुक्त को तलब किया था। साथ ही नेशनल असेंबली में भी भारत के रुख पर पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ने अमेरिका से दखल की गुहार लगाई है।

पाकिस्तानी रक्षा मंत्री खुर्रम दस्तगीर खान ने कहा है कि अमेरिका पाकिस्तान को आश्वस्त करने की कोशिश कर रहा है कि भारत उसके लिए खतरा नहीं है और इस्लामाबाद को नई दिल्ली के प्रति अपने रणनीतिक रूख में बदलाव लाना चाहिए।

यूएस से गलतफहमी हों दूर

रक्षा मंत्री ने यह भी कहा कि अमेरिका के साथ सौहार्दपूर्ण लेकिन पूरी तरह बिना छलावे की बातचीत की जरूरत है जिसमें हर चीज सामने हो. उन्होंने कहा कि इसका उद्देश्य इस्लामाबाद और वॉशिंगटन के बीच गलतफहमियों को दूर करना है।

डॉन अखबार ने खबर दी है कि नेशनल असेंबली में सोमवार को सरकार की विदेश नीति और पाकिस्तान की सुरक्षा स्थिति की जानकारी देते हुए उन्होंने दुख जताया कि नियंत्रण रेखा और अस्थायी सीमा पर भारत के आक्रामक रूख को अमेरिका तवज्जो नहीं दे रहा है।

रक्षा मंत्री ने कहा कि पाकिस्तान और अमेरिका के बीच मूल अंतर भारत के बारे में विचार को लेकर है। रक्षा मंत्री ने कहा, ‘वक्त आ गया है कि पाकिस्तान और अमेरिका के बीच सौहार्द्रपूर्ण लेकिन पूरी तरह से निष्कपट वार्ता हो और हर चीज वार्ता की मेज पर हो।’

भारत को बताया दुश्मन
खान ने कहा कि वॉशिंगटन पाकिस्तान को विश्वास दिलाने का प्रयास कर रहा है कि भारत खतरा नहीं है और इसलिए इस्लामाबाद को अपने रणनीतिक रूख में बदलाव करना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया, ‘लेकिन हकीकत हकीकत है, भारत की क्षमता और मंशा दोनों पाकिस्तान के प्रति शत्रुतापूर्ण हैं।’

खान ने आरोप लगाए कि भारत ने ‘पाकिस्तान की सीमा के साथ सेना, साजो-सामान और हथियार सब कुछ इकट्ठा कर रखा है।’ उन्होंने कहा कि नियंत्रण रेखा पर उल्लंघन और नागरिकों की हत्या के मामले में 2017 सबसे खतरनाक वर्ष रहा।

चीन ने सेना प्रमुख के बयान को बताया तनावपूर्ण

सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत के बयान से चीन बौखलाया हुआ है। बतौर चीन, जनरल का बयान दोनों देशों के बीच तनाव को और बढ़ाएगा। चीन ने आरोप लगाया कि ऐसे बयानों से सीमा पर हालात और तनावपूर्ण होंगे।

चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लू कांग ने जनरल बिपिन रावत के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि बीते एक साल में भारत और चीन के संबंधों में काफी उथल-पुथल रही है। पिछले साल भारत-चीन के रिश्तों ने कुछ उतार-चढ़ाव देखे, लेकिन पिछले साल सितंबर में ब्रिक्स सम्मेलन के इतर चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मुलाकात में रिश्तों को फिर से पटरी पर लाने के लिए उनमें आम राय बनी थी।

लू कांग ने कहा कि ऐसी बयानबाजी दोनों देशों के संबंधों को बेहतर करने के प्रयासों पर विपरीत असर डालेगी। इससे सीमा पर शांति बनाए रखने की प्रक्रिया पर भी असर पड़ सकता है। लू ने कहा कि चीन और भारत अहम पड़ोसी हैं। वे राष्ट्रीय विकास एवं उत्थान के निर्णायक चरण में हैं। दोनों देशों को सामरिक संवाद बढ़ाना चाहिए, सामरिक संदेह दूर करना चाहिए और सामरिक सहयोग संचालित करना चाहिए।

डोकलाम पर फिर चीन ने जताया अपना हक

प्रवक्ता ने कहा कि हम भारतीय पक्ष से अपील करते हैं कि वह दोनों नेताओं की ओर से बनी आम राय के बाद के कदमों पर काम करे ताकि सीमाई इलाकों में शांति एवं स्थिरता बनाए रखने के उपाय किए जा सकें और ऐसी चीजों से परहेज किया जाए, जिससे हालात जटिल होते हों। जरूरी मामलों को रचनात्मक तरीके से संभाला जाए और द्विपक्षीय संबंधों के निरंतर विकास को बढ़ावा दिया जाए। इससे समूचे क्षेत्र एवं भारतीय पक्ष के साझा हित सधेंगे। एक सवाल के जवाब में लू कांग ने जनरल बिपिन रावत के बयान का हवाला देते हुए कहा कि डोकलाम पर हमारा रुख साफ है। डोकलाम चीन का हिस्सा है और हमेशा चीन के अधिकार क्षेत्र में रहा है।

गौरतलब है, बिपिन रावत ने कहा था चीन मजबूत तो भारत भी कमजोर नहीं। भारत को पाकिस्तान के साथ लगती सीमा के साथ-साथ पूर्वी सीमा पर भी ध्यान देने की जरूरत है। भारत अपनी सीमा पर किसी भी देश को अतिक्रमण नहीं करने देगा। अब हालात 1962 जैसे नहीं है, हर क्षेत्र में भारतीय सेना की ताकत बढ़ी है। रावत ने यह भी कहा था कि वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के पास बीजिंग की ओर से दबाव बनाया जा रहा है।

चावल व गेंहू के अलावा अन्य फसलों पर सरकार देगी खरीद की गांरटी

सरकार ने कृषि की ओर कदम बढ़ाते हुये आगामी वित्त वर्ष के आम बजट में कुछ कारगर पहल किये जाने की संभावना जताई है। जिसके तहत सरकार गेहूं और चावल को छोड़ अन्य सभी फसलों की खरीद की गारंटी देने की योजना बना रही है।

योजना के तहत राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों को गेहूं व चावल को छोड़कर सभी फसलों की न्यूनतम गारंटी देनी होगी। आम बजट में इस पर प्रावधान किये जाने की संभावना है। दरअसल, सरकार दो दर्जन से अधिक फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) घोषित करती है, लेकिन गेहूं व चावल को छोड़ बाकी फसलों की खरीद आमतौर पर नहीं होती है। छिटपुट राज्यों में कुछ-कुछ फसलों की खरीद कर ली जाती है। हालांकि, गेहूं व चावल की खरीद की शत प्रतिशत गारंटी नहीं होती है।

गेहूं व चावल की सरकारी खरीद पंजाब, हरियाणा, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और आंध्र प्रदेश में की जाती है। बाकी राज्यों में छिटपुट तौर पर थोड़ी बहुत होती है। इनके अलावा ढेर सारी फसलें होती हैं, जो किसानों की आमदनी को प्रभावित करती हैं। इसे लेकर किसानों की मुश्किलें लगातार बढ़ रही हैं। जिन फसलों की एमएसपी घोषित भी होती है, लेकिन उनकी खरीद नहीं होती है। इससे किसानों को घाटा उठाना पड़ता है। किसानों की यह मांग लंबे समय से होती आ रही है कि उनकी उपज की खरीद की गारंटी होनी चाहिए।

कृषि मंत्रालय ने आम बजट के लिए इस आशय का एक विस्तृत प्रस्ताव तैयार किया है। इसमें जिंस बाजार के उतार-चढ़ाव के बावजूद किसानों को नुकसान से बचाने की रणनीति तैयार की गई है। इसके मुताबिक राज्यों को इन फसलों के मूल्य कम होने की दशा में उपज की खरीद का पूरा हक होगा, जिसके लिए केंद्र भरपाई की गारंटी देगा। किसानों को बाजार मूल्य में उतार चढ़ाव के जोखिम से बचाने की रणनीति तैयार की गई है।

योजना का उद्देश्य खरीद लागत, भंडारण, विक्रय लागत, पूंजी पर ब्याज और अन्य आकस्मिक खर्च को कवर करते हुए खरीद और विक्रय मूल्य के अंतर में अगर घाटा हुआ तो केंद्र सरकार भरपाई करेगी। यह विशेष प्रावधान मध्य प्रदेश सरकार की शुरु की गई भावांतर योजना से मिलती जुलती होगी। घाटे के इस अंतर का 40 से 50 फीसद केंद्र सरकार देगी, जबकि बाकी राज्य सरकारों को वहन करना होगा। खरीद किये जाने वाली जिंसों की बिक्री का पूरा दायित्व राज्य सरकारों का होगा।

सेना प्रमुख बोले, जम्मू में शांति को राजनीतिक हस्तक्षेप आवश्यक

एक साक्षात्कार में सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत ने स्पष्ट कहा है कि सैन्य ऑपरेशन के अलावा राजनीतिक पहल भी जम्मू कश्मीर में शांति व्यवस्था बनाने के लिये जरूरी है। उन्होंने कहा कि सेना आतंकवाद से निपटने को पूरी तरह तैयार है और वह अपना काम कर रही है, परंतु इसके अलावा राजनीतिक पहल से भी शांति कायम की जानी चाहिये।

रविवार को सेना प्रमुख ने कहा कि एक साल पहले जब उन्होंने पद संभाला था, उसकी तुलना में आज हालात बेहतर हुए हैं। उन्होंने साफ संकेत दिया कि सेना आतंकवाद से सख्ती से निपटने की अपनी नीति पर चलती रहेगी। जनरल रावत ने कहा कि राजनीतिक पहल और दूसरे सभी उपाय साथ-साथ चलने चाहिए। जब हम सभी मिलकर काम करेंगे तभी कश्मीर में शांति की स्थापना की जा सकती है। हमें राजनीतिक-सैन्य नजरिया अपनाने की जरूरत है।

पिछले साल अक्टूबर में सरकार ने आइबी के पूर्व प्रमुख दिनेश्वर शर्मा को जम्मू-कश्मीर में सभी पक्षों से बातचीत करने के लिए अपना वार्ताकार नियुक्त किया था। इस पर आर्मी चीफ ने कहा कि जब सरकार ने अपनी ओर से वार्ताकार नियुक्त किया था, तो इसका एक मकसद था। वह सरकार के प्रतिनिधि के तौर पर कश्मीर के लोगों तक अपनी बात पहुंचाएंगे। वे देखेंगे कि लोगों की शिकायतें क्या हैं, जिन्हें राजनीतिक स्तर से सुलझाया जा सकता है।

जनरल रावत ने कहा कि कश्मीर मसले को सुलझाने के प्रयासों में सेना केवल एक हिस्सा है। हमारा मकसद आतंकियों को रोकना और कट्टरपंथ के रास्ते जा रहे लोगों को बचाकर शांति के रास्ते पर लाना है। कुछ स्थानीय युवाओं को कट्टरता के रास्ते पर ले जाने की कोशिश हो रही है और वे आतंकी संगठनों में शामिल हो रहे हैं। इससे निपटने के लिए सेना आतंकी सगठनों पर दबाव बनाने की कोशिश कर रही है।

इजरायली पीएम से मोदी बोले, मेरे दोस्त भारत में आपका स्वागत है

इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू भारत दौरे पर पहुंच गए हैं। दिल्ली में पीएम नरेंद्र मोदी ने इस ऐतिहासिक यात्रा पर उनका स्वागत किया है। भारत यात्रा के दौरान नेतन्याहू कड़ी सुरक्षा घेरे के बीच रहेंगे।

तीन मूर्ति स्मारक पर बेंजामिन नेतन्याहू ने भारतीय सेना के जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित की। उनके साथ पीएम मोदी और सारा नेतन्याहू भी मौजूद रहे। दरअसल, तीन मूर्ति स्मारक का इजरायल से गहरा संबंध है। यही वजह है कि इसका नाम बदलकर तीन मूर्ति हाइफा चौक कर दिया गया है।

पीएम नरेंद्र मोदी ने तीन मूर्ति हाइफा चौक पर विजिटर्स बुक में लिखा कि तीन मूर्ति चौक के नाम के साथ हाइफा जोड़ना एक ऐतिहासिक घटना है। इजराइल के पीएम नेतन्याहू ने कहा कि हम अपने बहादुर जवानों के प्रति अपनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। भारत के स्वार्थरहित बलिदान की भावना को सलाम करते हैं। पहले और दूसरे विश्व युद्ध के इतिहास की किताब का एक पन्ना 100 साल पहले लिखा गया था, जब हाइफा युद्ध में भारतीय जवानों ने बलिदान दिया था। यह प्रथम विश्व युद्ध के खत्म होने की 100वीं वर्षगांठ है। दोनों विश्व युद्ध के इतिहास की किताब में ऐसे कई सुनहरे पन्ने हैं, जिनमें भारत के बहादुरों के त्याग की कहानियां लिखी हैं।

पीएम नरेंद्र मोदी ने ट्वीट कर नेतन्याहू का स्वागत किया। पीएम मोदी ने ट्वीट में लिखा, मेरे दोस्त पीएम नेतन्याहू भारत में आपका स्वागत है। आपकी भारत यात्रा ऐतिहासिक और विशेष है। ये दोनों देशों के रिश्तों को और मजबूत करेगी।

क्यों बदला गया चौक का नाम

हाइफा की लड़ाई 23 सितंबर 1918 को लड़ी गई थी। इस वक्त देश में अंग्रेजों का राज था और अंग्रजों ने जोधपुर, हैदराबाद, मैसूर रियासत की सेना को हाइफा पर कब्जा करने के आदेश दिए और उसके बाद भारतीय सैनिकों ने हाइफा में तुर्की की सेना का सामना किया।

यह लड़ाई उस वक्त हुई, जब जर्मनी के साथ संबद्ध शक्तियों और तुर्क साम्राज्य के बीच एक के बाद एक लड़ाई हो रही थी, जिसे सिनाई और फिलिस्तीन अभियान कहा जाता था।

जल्द हटेगा अंग्रेजों कानून, पटवारी के बजाए पुलिस संभालेगी कानून व्यवस्था

अब हाईकोर्ट के आदेश के बाद उत्तराखंड के लगभग बारह हजार गांवों में अंग्रेजों के बनाये कानून को दरकिनार करते हुये पर्वतीय जिलों में सभी जगह पुलिस थानों खोले जायेंगे।

दरअसल, अंग्रेजी हुकूमत के दौरान वर्ष 1816 में कुमाऊं के तत्कालीन ब्रिटिश कमिश्नर ने पटवारियों के 16 पद सृजित किए थे। इन्हें पुलिस, राजस्व संग्रह, भू अभिलेख का काम दिया गया था। साल 1874 में पटवारी पद का नोटिफिकेशन हुआ। रजवाड़ा होने की वजह से टिहरी, देहरादून, उत्तरकाशी में पटवारी नहीं रखे गए। साल 1916 में पटवारियों की नियमावली में अंतिम संशोधन हुआ। 1956 में टिहरी, उत्तरकाशी, देहरादून जिले के गांवों में भी पटवारियों को जिम्मेदारी दी गई।

वर्ष 2004 में नियमावली में संशोधन की मांग उठी तो 2008 में कमेटी का गठन किया गया और 2011 में रेवेन्यू पुलिस एक्ट अस्तित्व में आया। मगर गौर करने वाली बात यह कि रेवेन्यू पुलिस एक्ट बना तो दिया गया, लेकिन आज तक कैबिनेट के सामने पेश नहीं किया गया।

अंग्रेजों ने अपनी नीतियों के लिहाज से राजस्व वसूली और कानून व्यवस्था संभालने के लिए दुर्गम पर्वतीय क्षेत्रों में पटवारी पद सृजित किए थे। तब से लेकर आज तक पर्वतीय जिलों में इसके मुताबिक काम हो रहा है। इन जिलों में सिविल पुलिस नहीं है। हालांकि, उत्तराखंड राज्य बनने के बाद पटवारियों ने ब्रिटिश कमिश्नर की नियमावली में संशोधन की मांग उठाई, मगर उनकी आवाज दबकर रह गई।
कैबिनेट मंत्री एवं प्रवक्ता राज्य सरकार मदन कौशिक का कहना है कि पर्वतीय राज्यों में पुलिस थाने खोलने के संबंध में आए हाइकोर्ट के आदेश का अध्ययन किया जा रहा है। इसके बाद सरकार इस दिशा में आगे कदम बढ़ाएगी।

इस संबंध में एडीजी लॉ एंड आर्डर अशोक कुमार का कहना है कि पर्वतीय जिलों में पुलिस थाने खोलने के संबंध में हाइकोर्ट के आदेश को पढने के बाद आगे कदम उठाए जाएंगे।

पहली बार क्षेत्र में बॉलीवुड कलाकार देख उत्साहित हो रहे ग्रामीण

इन दिनों जौनसार बावर क्षेत्र में बॉलीवुड के कलाकार पहुंच रहे है। जिन्हें देखने के लिये ग्रामीण सुबह से ही एकत्र हो जाते है। दरअसल में वैराटखाई क्षेत्र में हिन्दी फिचर फिल्म राइफलमैन जसवंत सिंह रावत की शूटिंग शुरू हो गयी है। इस फिल्म के भारत-चीन युद्ध के दृश्यों को फिल्माने के लिये इस क्षेत्र को चुना गया है।
जौनसार-बावर के वैराटखाई क्षेत्र में हिंदी फिल्म राइफलमैन जसवंत सिंह रावत की शूटिंग शुरू हो गई है। क्षेत्र में पहली बार बॉलीवुड फिल्म की शूटिंग देखकर ग्रामीण खासे उत्साहित हैं। फिल्म की शूटिंग के लिए वैराटखाई पहुंच रहे बॉलीवुड कलाकारों को देखने के लिए लोगों की भीड़ उमड़ रही है। वैराटखाई में भारत-चीन युद्ध के कुछ दृश्यों का फिल्मांकन होना है।

जेएसआर प्रोडक्शन के बैनर तले बन रही इस फिल्म में संध्या इंटरप्राइजेज सहयोगी की भूमिका में है। अभिनेता गिरीश सचदेवा समेत फिल्म के अधिकांश कलाकार वैराटखाई पहुंच चुके हैं। सचदेवा दबंग-टू, रामलीला, जब तक है जान समेत 37 फिल्मों में अभिनय कर चुके हैं। राइफलमैन जसवंत सिंह रावत उनकी 38वीं फिल्म है। बता दें कि किसी बॉलीवुड फिल्म की शूटिंग के लिए पहली बार जौनसार-बावर के प्रमुख पर्यटन स्थल वैराटखाई का चयन किया गया।

फिल्म में वर्ष 1962 के भारत-चीन युद्ध के दृश्यों का फिल्मांकन किया जाना है। शूटिंग के लिए मुंबई से देहरादून पहुंचे बॉलीवुड कलाकार मुकेश तिवारी इन दिनों निर्माता तरुण रावत, क्रिएटिव प्रोड्यूसर सुमित अधलखा, कलाकार इश्तियाक खान, शिशिर तिवारी आदि यूनिट मेंबर के साथ वैराटखाई में हैं।

चाइना गेट, गंगाजल व गोलमाल जैसी सुपरहिट फिल्मों में अहम भूमिका निभाने वाले मुकेश तिवारी को देखने के लिए ग्रामीणों में खासा उत्साह है। ग्रामीणों का मानना है कि आगे भी क्षेत्र में यदि इसी तरह यहां फिल्मों की शूटिंग होती रही तो इससे पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा।