भारी को देखते हुए सभी अधिकारी 24 घंटे एक्टिव मोड में रहेः मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने देहरादून, सचिवालय स्थित आपदा कन्ट्रोल रूम में औचक निरीक्षण कर, प्रदेश भर में जारी बारिश की स्थिति का जायजा लिया।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि आपदा प्रबंधन विभाग में जिन भी अधिकारियों की ड्यूटी लगी है। उनकी भूमिका ऐसे समय में अत्यधिक महत्वपूर्ण है। उन्होने कहा सभी अधिकारी 24 घंटे एक्टिव मोड में रहे। सभी जिलों के साथ परस्पर समन्वय एवं संवाद कायम कर काम करें। उन्होंने कहा आपदा काल के दौरान लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर कठोर कार्रवाई की जायेगी।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेश भर में नदियों के वर्तमान जलस्तर के बारे में जानकारी ली। उन्होंने कहा जो नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। वहां के प्रशासन को अलर्ट किया जाए एवं नदी के आसपास रहने वाले लोगों को अति शीघ्र सुरक्षित स्थानों में भेजा जाए।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेश भर में सड़कों की स्थिति सहित चार धाम यात्रा एवं कांवड़ यात्रा के संचालन के बारे में जानकारी प्राप्त की। उन्होंने कहा बाधित सड़कों को तुरंत खोला जाए। जिन स्थानों पर पर्यटक फंसे हैं, उन्हें निकालकर सुरक्षित स्थानों पर भेजा जाए।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जिलाधिकारी पिथौरागढ़ से फ़ोन में वार्ता कर दारमा, व्यास सहित अन्य घाटियों की स्थिति के बारे में जानकारी प्राप्त की। मुख्यमंत्री ने जिलाधिकारी चमोली से फोन में वार्ता कर मलारी में हुए भूस्खलन, के बारे में जानकारी प्राप्त की। मुख्यमंत्री ने जिलाधिकारी हरिद्वार एवं उत्तरकाशी से दूरभाष के माध्यम से संबंधित जिलों में बारिश से हुए नुकसान के बारे में जानकारी ली। मुख्यमंत्री धामी ने सभी जिला अधिकारियों को निर्देशित करते हुए कहा कि जिन भी स्थानों में लोग फंसे हैं उन्हें अति शीघ्र निकालने की व्यवस्था की जाए साथ ही उनके रहने खाने की पर्याप्त व्यवस्था हो। जिला स्तर पर कोई भी कमी होने पर तुरंत शासन को सूचित किया जाए।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि आपदा की दृष्टि से संवेदनशील जनपदों में विशेष सावधानियां सुनिश्चित करने हेतु निर्देश जारी किये जाए। साथ ही उन जनपदों की लगातार मॉनिटरिंग हो।

प्रदेश के प्रत्येक बच्चे को कैरियर के सम्बन्ध में परामर्श देने के निर्देश-मुख्य सचिव

मुख्य सचिव डॉ. एस.एस. संधु ने बुधवार को सचिवालय में शिक्षा विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक कर प्रदेश के सरकारी स्कूलों में कैरियर काउंसलिंग की व्यवस्था शुरू किए जाने के निर्देश दिए। मुख्य सचिव ने कहा कि प्रदेश के प्रत्येक बच्चे को कैरियर के सम्बन्ध में परामर्श दिया जाए।
मुख्य सचिव ने कहा कि प्रदेश के प्रत्येक बच्चे की काउंसिलिंग सुनिश्चित हो सके इसके लिए प्रोफेशनल कैरियर काउंसलर की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। इसके लिए बच्चों में रुचि और कौशल को जांचने हेतु परीक्षा और उसके परिणाम के उपरांत परामर्श उपलब्ध करवाया जा सके। उन्होंने कहा कि यह परामर्श भौतिक रूप से, दूरस्थ क्षेत्रों में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम या किसी एक कॉमन सेंटर में बच्चों को बुलाकर किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि 8वीं कक्षा से ऊपर सभी बच्चों को इसका लाभ मिलना सुनिश्चित किया जाए।
मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि प्रदेश को आवासीय विद्यालयों से संतृप्त किया जाए। उन्होंने कहा कि छात्रावासों को विद्यालयों के भाग के रूप में ही तैयार किया जाए। उन्होंने कहा कि ऐसे दूरस्थ क्षेत्र जहां सड़कों एवं आधारभूत सुविधाओं की कमी के कारण उत्कृष्ट विद्यालय में शामिल नहीं किया जा सकता, ऐसे स्कूलों के पास लगे कस्बों और छोटे शहरों में आवासीय विद्यालय तैयार किए जाएं। इससे इन दूरस्थ क्षेत्रों के बच्चे भी हॉस्टल में रहकर गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त कर सकेंगे। उन्होंने कहा कि इसके लिए बजट की कमी नहीं होने दी जाएगी।
मुख्य सचिव ने प्रदेश के प्रत्येक जनपद में 2, 3 मॉडल लैब भी तैयार किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इन मॉडल लैब को टॉप क्लास का बनाया जाना है। उन्होंने कहा कि छात्रों को रोस्टर के आधार पर इन प्रयोगशालाओं में भेजा जाए। प्रत्येक छात्र को प्रयोगात्मक कार्य करने का अवसर प्रदान किया जाए। उन्होंने कहा कि यह प्रयोगशालाएं आसपास के स्कूलों के सभी बच्चे प्रयोग कर सकें, इसके लिए कौन से स्कूल को किस प्रयोगशाला में जाना है इसका रोस्टर भी तैयार किया जाए।
इस अवसर पर सचिव रविनाथ रमन एवं महानिदेशक शिक्षा बंशीधर तिवारी सहित अन्य उच्चाधिकारी उपस्थित रहे।

हर्बल टूरिज्म पार्क योजना को धरातल पर उतारन के निर्देश

मुख्य सचिव डॉ. एस.एस. संधु ने मंगलवार को सचिवालय में प्रदेश में जड़ी-बूटी के विकास के सम्बन्ध में बैठक ली। मुख्य सचिव ने कहा कि प्रदेश में जड़ी-बूटी और इस क्षेत्र में रोजगार की सम्भावनाओं को देखते हुए, जड़ी-बूटी उत्पादन और प्रसंस्करण को बढ़ावा दिए जाने की आवश्यकता है।
मुख्य सचिव ने कहा कि वन पंचायतों के लिए शीघ्र ही योजना तैयार की जाए। जड़ी-बूटी की दिशा में जो वन पंचायतें पहले से कार्य कर रही हैं, उन्हें इस योजना में अवश्य शामिल किया जाए। उन्होंने योजना के लिए नियम व शर्तों को सरल बनाए जाने के भी निर्देश दिए। कहा कि किसी भी योजना को सफल बनाने के लिए उसके नियमों को सरल रखा जाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि हर्बल टूरिज्म पार्क योजना भी शीघ्र शुरू की जाए। योजनाओं को चरणबद्ध तरीके से शुरू किया जा सकता है। जो वन पंचायतें अच्छा कार्य करेंगी, उनको अधिक क्षेत्रफल में कार्य दिया जा सकता है।
मुख्य सचिव ने वन विभाग को लीसा के सम्बन्ध में प्रदेश की नियमावली को भी अपडेट किए जाने के निर्देश दिए। कहा कि लीसा (रेजिन) के उत्पादन में पुराने जमाने की तकनीक प्रयोग की जा रही है।
इस अवसर पर प्रमुख वन संरक्षक अनूप मलिक एवं सचिव दीपेन्द्र कुमार चौधरी सहित जड़ी-बूटी शोध संस्थान के अधिकारी भी उपस्थित रहे।

केदारनाथ पुनर्निर्माण कार्यों को समय से पूरा करने के निर्देश

मुख्य सचिव डॉ. एस.एस. संधु ने मंगलवार को सचिवालय में केदारनाथ पुनर्निर्माण कार्यों की समीक्षा की। मुख्य सचिव ने अधिकारियों को सभी कार्य निर्धारित समय सीमा में पूर्ण करने के निर्देश दिए।
मुख्य सचिव ने कहा कि कार्य समय से पूर्ण हो इसके लिये अधिक से अधिक श्रमिकों की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। रात्रि शिफ्ट में भी कार्य किए जाएँ। निर्माण सामग्री की उपलब्धता भी सुनिश्चित की जाए। मुख्य सचिव ने अल्टरनेटिव ट्रेक रूट के शीघ्र निर्माण के लिए वन विभाग एवं लोक निर्माण विभाग को मिलकर तेज़ी से कार्य करने के निर्देश दिए।
मुख्य सचिव ने लिंचोली का भी मास्टर प्लान शीघ्र तैयार किए जाने के निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि सभी कार्य समय पर पूर्ण हो सके इसके लिए साप्ताहिक समय सीमा निर्धारित की जाए। उन्होंने केदारनाथ के साथ ही बद्रीनाथ में बन रहे अस्पतालों के उपकरण आदि खरीदने के लिये भी शीघ्र प्रक्रिया शुरू किए जाने के निर्देश दिए।
बैठक के दौरान बताया गया कि संगम घाट का कार्य 18 अगस्त तक पूर्ण कर लिया जाएगा। इसके साथ ही, एलिवेटेड ब्रिज का कार्य 31 दिसम्बर तक पूर्ण कर लिया जाएगा। बताया गया कि सिविक एमेनिटी बिल्डिंग 30 नवम्बर तक पूर्ण कर ली जाएगी।
इस अवसर पर ओएसडी भास्कर खुल्बे, प्रमुख सचिव आर.के. सुधांशु, सचिव सचिन कुर्वे एवं डॉ. पंकज कुमार पांडेय सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

अंतरराष्ट्रीय निवेशक सम्मेलन में आएंगें पीएम मोदी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से शिष्टाचार भेंट की। मुख्यमंत्री ने उत्तराखंड के विकास में प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन के लिए आभार व्यक्त करते हुए कहा कि आपके निर्देशन में उत्तराखण्ड राज्य ईज ऑफ डुईंग बिजनेस, निवेश प्रोत्साहन और स्टार्टअप क्षेत्र में निरंतर विकास कर रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय निवेशकों को राज्य में आकर्षित करने के उद्देश्य से दिसम्बर 2023 के द्वितीय सप्ताह में देहरादून में “वैश्विक निवेशक सम्मेलन-2023“ आयोजित किया जाना प्रस्तावित है मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रधानमंत्री को उत्तराखण्ड निवेशक सम्मेलन में बतौर मुख्य अतिथि आमन्त्रित करते हुए कहा कि उनके मार्गदर्शन में निवेशक सम्मेलन सफलतापूर्वक संपन्न होगा।
मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री को बाबा नीब करौरी का चित्र और उत्तराखंड का बासमती चावल भेंट किया।

किच्छा खटीमा रेलवे स्टेशन की लागत केंद्र से वहन करने का अनुरोध
मुख्यमंत्री ने कहा कि किच्छा खटीमा रेलवे स्टेशन प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत 1546 करोड़ है। राज्य की वित्तीय स्थिति को देखते हुये उन्होंने सम्पूर्ण लागत केन्द्र सरकार द्वारा वहन किये जाने का अनुरोध किया।

अमृतसर-कोलकाता इण्डस्ट्रीयल कॉरिडोर के अन्तर्गत सैद्धान्तिक रूप से सहमत इण्डस्ट्रीयल पार्क हेतु केन्द्र सरकार के अंश लगभग रू0 410 करोड़ को अवमुक्त किये जाने का अनुरोध भी मुख्यमंत्री ने किया।

बाह्य सहायतित परियोजनाओं की ऋण सीमा को पूर्ववत् रखे जाने का अनुरोध
मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री से बाह्य सहायतित परियोजनाओं की ऋण सीमा को पूर्ववत् रखे जाने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि भारत सरकार वित्त मंत्रालय द्वारा बाह्य सहायतित परियोजनाओं के अन्तर्गत वर्ष 2025-2026 तक के लिये ऋण सीमा को 12652 करोड़ रूपये तक सीमित कर दिया गया है। जिसके कारण राज्य के लिये महत्वपूर्ण नई परियोजनाओं के प्रस्तावों को बाह्य सहायतित परियोजनाओं के अन्तर्गत प्रस्तावित करना कठिन हो गया है।

जमरानी बांध बहुउद्देशीय परियोजना की वित्तीय स्वीकृति आर्थिक मामलों की कैबिनेट कमेटी से दिलाए जाने का किया आग्रह
मुख्यमंत्री ने कहा कि जमरानी बांध परियोजना के लिए वित्त मंत्रालय द्वारा दिनांक 07.03.2023 को आयोजित पब्लिक इन्वेस्टमेंट बोर्ड की बैठक में संस्तुति प्रदान की गई। जमरानी बांध बहुउद्देशीय परियोजना की वित्तीय स्वीकृति आर्थिक मामलों की कैबिनेट कमेटी द्वारा प्रदान की जानी है।
मुख्यमंत्री ने पूंजीगत निवेश हेतु राज्यों को विशेष सहायता के लिए वित्त मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा राज्य के पूंजीगत व्यय को 30 सितम्बर (6 माह की अवधि) तक 45 प्रतिशत अनिवार्य रूप से व्यय करने की शर्त में शिथिलता प्रदान करने का भी अनुरोध किया।

देहरादून के मुख्य रेलवे स्टेशन को हर्रावाला शिफ्ट करने की स्वीकृति दी जाए
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि देहरादून एवं ऋषिकेश में यातायात को सुव्यवस्थित करने हेतु देहरादून के मुख्य रेलवे स्टेशन को हर्रावाला शिफ्ट किया जाने एवं ऋषिकेश के अन्तर्गत पुराने रेलवे स्टेशन की भूमि राज्य सरकार को हस्तान्तरित किये जाने का प्रस्ताव को स्वीकृत करने का भी अनुरोध किया। मुख्यमंत्री ने केन्द्र सरकार से 1546 करोड़ की अनुमानित लागत के किच्छा खटीमा रेलवे स्टेशन, रेलवे प्रोजेक्ट के राज्य की वित्तीय सहायता प्रदान करने का अनुरोध प्रधानमंत्री से किया।

हरिद्वार में भारत सरकार के पीएसयू भेल के उपयोग में ना आ रही 457 एकड़ भूमि को राज्य सरकार को हस्तांतरित करने का अनुरोध
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि हरिद्वार के अन्तर्गत भारत सरकार पीएसयू भेल के पास लगभग 457 एकड़ भूमि वर्तमान में किसी उपयोग में नहीं लायी जा रही है। उन्होंने प्रधानमंत्री से हरिद्वार में औद्योगिकीकरण एवं शहरीकरण की सम्भावनाओं के दृष्टिगत् यह भूमि राज्य सरकार को हस्तान्तरित किये जाने का अनुरोध किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड को जीएसटी एरा के उपरान्त हिमाचल सहित औद्योगीकरण को बढ़ावा दिये जाने हेतु आईडीएस की स्कीम लॉच की गयी थी। जिसके लाभार्थियों की कैपिटल सब्सिडी अवमुक्त नहीं की गयी है। उन्होंने अनुरोध किया कि इस अति लोकप्रिय स्कीम (लगभग 1585 ईकाईयां, 1600 करोड़ की सब्सिडी एवं लगभग 7000 करोड़ का प्रत्यक्ष निवेश) को अगले 5 वर्षों हेतु पुनः लागू किया जाय।

मुख्यमंत्री ने महत्वपूर्ण इन्फ्रा प्रोजेक्ट देहरादून-टिहरी टनल परियोजना एवं पन्तनगर एयरपोर्ट का विस्तारीकरण के कार्यों में तेजी लाने के लिए भी प्रधानमंत्री से अनुरोध किया।

उत्तराखंड में गुड गवर्नेंस और विभिन्न विकास परियोजनाओं की दी जानकारी
मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर प्रधानमंत्री को अवगत कराया कि प्रधानमंत्री जी के निर्देश के क्रम में राज्य सरकार द्वारा सचिव मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में 4 सदस्य टीम द्वारा गुजरात के गुड गवर्नेंस मॉडल का अध्ययन किया गया। इससे प्रेरणा पाते हुये राज्य में गुजरात के स्वागत मॉडल की तरह सीएम शिकायत निवारण तंत्र को मजबूत किया गया। अब हर किसी शिकायत को एंड टू एंड डिजिटलीकरण किया गया है। जिससे हर शिकायत की मॉनिटरिंग मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा की जा रही है। शिकायतों के निवारण की गुणवत्ता को परखने हेतु स्वयं मुख्यमंत्री द्वारा 10 परिवादियों से सीधे वार्तालाप की जा रही है। इसी के तहत 1095 हेल्पलाइन के तहत 24 घंटे कॉल सेन्टर स्थापित किये गये है। हरियाणा की तर्ज पर राज्य सरकार द्वारा भी परिवार पहचान पत्र बनाया जा रहा है। उत्तराखण्ड का परिवार पहचान पत्र का डेटा डायनेमिक डेटा होगा, जो न केवल विभिन्न लाभपरक योजनाओं के लाभार्थियों को चयन करने में मदद करेगा बल्कि विभिन्न योजनाओं को निर्माण करने में सही सूचना उपलब्ध करायेगा। भारत सरकार की तर्ज पर राज्य सरकार द्वारा भी अनुपयोगी अधिनियमों को बदला जा रहा है। आतिथि तक लगभग 1250 ऐसे अधिनियमों का चिन्हित किया गया है एवं लगभग 250 अधिनियमों को सिंगल रिपीट एक्ट के माध्यम से विलोपित किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री जी द्वारा दिये गये संतृप्तीकरण के आदेश को अंगीकृत करते हुये राज्य सरकार द्वारा 7 फ्लैगशिप स्कीम का शत प्रतिशत लक्ष्य प्राप्त कर लिया गया है। 4 अन्य फ्लैगशिप स्कीम में 85 प्रतिशत से अधिक की प्रगति है। भारत सरकार एवं नीति आयोग की अपेक्षा के अनुसार बेहतर योजना संरचना, प्रभावी नीति निर्धारण, नवाचारों को प्रोत्साहन एवं अन्तर्विभागीय समन्वयन तथा विकास कार्यों के सटीक अनुश्रवण एवं गहन मूल्यांकन हेतु नीति आयोग, भारत सरकार की तर्ज पर राज्य में स्टेट इंस्टीट्यूट फॉर इंपावरिंग एंड ट्रांसफॉर्मिंग उत्तराखण्ड (सेतु) का गठन किया जा चुका है। राज्य सरकार द्वारा नागरिकों को बेहतर एवं सुविधायें देने हेतु प्रक्रियाओं का सरलीकरण किया जा रहा है। जिस हेतु गुड गवर्नेंस काउंसिल का गठन किया गया है। नीति आयोग, भारत सरकार द्वारा 6 आकांक्षी विकासखण्डों का चयन किया गया है। राज्य सरकार द्वारा अतिरिक्त रूप से अन्य 9 विकासखण्डों को सम्मिलित करते हुये कुल 15 आकांक्षी विकासखण्डों को चिन्हित करते हुये उनके विकास की कार्ययोजना तैयार की जा रही है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए लगातार प्रयास किये जा रहे हैं। लगभग 7000 करोड़ रूपये की हरिद्वार-ऋषिकेश पुर्नविकास महापरियोजना पर कार्य किया जा रहा है। सेंट्रल विस्टा की तर्ज पर नई एडमिन सिटी की स्थापना पीपीपी मोड पर की जा रही है, जिस पर लगभग 6000 करोड़ रूपये का निवेश होगा। गिफ्ट सिटी की तर्ज पर उधमसिंह नगर जिले में 3000 एकड़ का नया शहर (पंतनगर एयरपोर्ट से 15 मिनट की दूरी पर, जिसका अमृतसर-कोलकाता इंडस्ट्रियल कोरिडोर आर्थिक केन्द्र होगा।

केन्द्रीय वित्त मंत्री ने सीएम धामी को किया आश्वस्त, मिलेगा हर सहयोग

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने नई दिल्ली में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से भेंट कर उत्तराखंड राज्य से संबंधित विषयों पर चर्चा की। मुख्यमंत्री ने केंद्रीय मंत्री से सौंग बांध पेयजल परियोजना के लिए 1774 करोड़ की धनराशि का वित्त पोषण केन्द्र सरकार से विशेष सहायता के अन्तर्गत कराने का अनुरोध किया। मुख्यमंत्री ने केंद्रीय वित्त मंत्री से उत्तराखंड की विशेष परिस्थितियों और सीमित वित्तीय संसाधनों को देखते हुए बाह्य सहायतित परियोजनाओं की ऋण राशि पर लगाई गई सीलिंग को हटाए जाने का भी अनुरोध किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि देहरादून की बढ़ती हुई आबादी के कारण पेयजल की मांग निरन्तर तेजी से बढ़ती जा रही है। इसके दृष्टिगत व भविष्य में सतत पेयजल की सुविधा प्रदान करने के लिए गंगा नदी की सहायक नदी सौंग नदी पर सौंग बांध पेयजल परियोजना प्रस्तावित है। प्रस्तावित परियोजना की कुल लागत रु० 2021 करोड़ है परियोजना के निर्माण से 150 एम.एल.डी. पेयजल ‘गुरुत्व’ के माध्यम से देहरादून नगर व इसके उपनगरीय क्षेत्रों की लगभग 10 लाख आबादी को पेयजल उपलब्ध होगा। परियोजना के निर्माण उपरान्त पेयजल व्यवस्था की नलकूपों पर निर्भरता लगभग समाप्त हो जाएगी। इसके अतिरिक्त परियोजना के निर्माण से लगभग 3.50 कि0मी0 लम्बी झील का निर्माण होगा जोकि क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा देगा, जिससे रोजगार सृजन होगा एवं स्थानीय नागरिकों के आय में वृद्धि होगी। झील निर्माण से पर्यावरण को भी लाभ होगा।
इस परियोजना का एक अन्य मुख्य लाभ बाढ़ नियंत्रण है। परियोजना के निर्माण के फलस्वरूप देहरादून जनपद के 10 ग्रामों की लगभग 15000 आबादी को सौंग नदी में प्रतिवर्ष आने वाली बाढ़ से सुरक्षा प्रदान होगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि परियोजना से सम्बन्धित सभी आवश्यक तकनीकी, वन भूमि हस्तान्तरण स्टेज-1 एवं अन्य आवश्यक स्वीकृतियाँ सम्बन्धित विभागों व मंत्रालयों से प्राप्त की जा चुकी हैं। परियोजना से प्रभावित होने वाले कुटुम्बों के पुनर्वास एवं पुनर्व्यवस्थापन हेतु 247 करोड़ रुपए का व्ययभार राज्य सरकार द्वारा वहन किया जायेगा।
मुख्यमंत्री ने केंद्रीय वित्त मंत्री से राज्य सरकार की सीमित वित्तीय संसाधनों के दृष्टिगत परियोजना के लिए 1774 करोड़ रुपए की अवशेष धनराशि का वित्तपोषण भारत सरकार से विशेष सहायता के अन्तर्गत कराने का अनुरोध किया।
मुख्यमंत्री ने केंद्रीय वित्त मंत्री से उत्तराखंड की विशेष परिस्थितियों और सीमित वित्तीय संसाधनों को देखते हुए बाह्य सहायतित परियोजनाओं की ऋण राशि पर लगाई गई सीलिंग को हटाए जाने का भी अनुरोध किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि एडीबी के तहत देहरादून के मुख्य मार्गों में विद्युत लाईनों को भूमिगत करने के साथ ही राज्य की पारेषण प्रणाली के सुदृढ़ीकरण के कार्य, जिसमें विद्युत उपस्थानों एवं लाईनों का निर्माण कार्य सम्मिलित है का कार्य शीघ्र किया जाना है। मुख्यमंत्री ने आर्थिक कार्य विभाग, वित्त मंत्रालय, भारत सरकार से उपरोक्त योजना की स्वीकृति प्रदान कराए जाने का अनुरोध किया। इस पर केंद्रीय वित्त मंत्री ने पुनर्मूल्यांकन हेतु प्रस्ताव भेजने को कहा ताकि अग्रिम कार्यवाही की जा सके।
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को हर संभव सहयोग के प्रति आश्वस्त किया।

मुख्यमंत्री ने नई दिल्ली में की केंद्रीय पशुपालन मंत्री से मुलाकात

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने नई दिल्ली में केंद्रीय मत्स्य, पशुपालन एवं डेयरी मंत्री पुरुषोत्तम रूपाला से भेंट कर उत्तराखंड में पशुपालन और डेयरी से संबंधित विषयों पर चर्चा की। मुख्यमंत्री ने केंद्रीय मंत्री से नेशनल लाईव स्टॉक मिशन योजना के अन्तर्गत पशुधन बीमा की अवशेष धनराशि अवमुक्त करने और राज्य में संचालित सचल पशु चिकित्सा वाहन की सेवाएं शेष 35 विकासखण्डों में भी उपलब्ध कराए जाने का भी आग्रह किया।
मुख्यमंत्री ने उत्तराखंड के विकास में सहयोग के लिए आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उत्तराखण्ड राज्य में संचालित विभिन्न रोजगार योजनाओं में पशुपालन से सम्बन्धित योजनाओं का महत्वपूर्ण स्थान है। भारत सरकार द्वारा उत्तराखण्ड राज्य के सीमान्त पर्वतीय व मैदानी क्षेत्रों के पशुपालकों हेतु नेशनल लाईव स्टॉक मिशन योजना के अन्तर्गत पशुधन बीमा का संचालन किया जा रहा है। योजना के अन्तर्गत स्वीकृत 40 करोड़ रूपए के सापेक्ष वित्तीय वर्ष 2022-23 में 14 करोड़ 26 लाख 25 हजार रूपए की धनराशि प्राप्त हुई थी जिसमें केन्द्रांश रू0 8 करोड़ 67 लाख 66 हजार रूपए और राज्यांश 5 करोड़ 58 लाख 59 हजार रूपए था। योजना के अन्तर्गत राज्य में पशुधन बीमा के लक्ष्य के सापेक्ष कुल 1,45,451 पशुओं में बीमा किया जा चुका है। मुख्यमंत्री ने केंद्रीय मंत्री से स्वीकृत योजना के लक्ष्यों की प्राप्ति के लिये स्वीकृत बजट की शेष धनराशि उपलब्ध करवाने का अनुरोध किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत सरकार द्वारा उत्तराखण्ड राज्य में पशुपालक के द्वार पर आधुनिक तकनीकी की चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से 60 सचल पशुचिकित्सा वाहन संचालित किये जा रहे हैं। इनके माध्यम से 58392 पशुओं की चिकित्सा पशुपालको के द्वार की पर की गयी है। मुख्यमंत्री ने राज्य के शेष 35 विकासखण्डों में भी इसी प्रकार की सेवाओं के लिये 786.94 लाख रूपए धनराशि उपलब्ध कराने का अनुरोध किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि इसमें 764.246 लाख रूपए का केन्द्रांश और 22.694 लाख रूपए का राज्यांश रहेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के भेड़ बकरियों के स्वास्थ्य को सुनिश्चित करने के लिये भारत सरकार के सहयोग से पीपीआर उन्मुलन योजना संचालित की जा रही है। वर्ष 2030 तक पीपीआर मुक्त करने के महत्वाकांक्षी टीकाकरण योजना के लिये उत्तराखण्ड में 14 लाख डोज टीकों की आवश्यकता है।
केंद्रीय मंत्री पुरुषोत्तम रूपाला ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को हर सम्भव सहयोग के प्रति आश्वस्त किया।

श्रावण मास की नीलकंठ यात्रा को लेकर पुलिस अलर्ट, हुई बैठक

श्रावण मास की श्री नीलकंठ महादेव मंदिर यात्रा के दौरान पैदल मार्ग पर जंगली जानवरों का खतरा बना रहता है। जिसको देखते हुए पुलिस और प्रशासन ने शाम छह बजे से सुबह पांच बजे तक को बंद रखने का निर्णय लिया है। पैदल मार्ग का यह क्षेत्र राजाजी टाइगर रिजर्व वन क्षेत्र के अंतर्गत आता है।

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक पौड़ी गढ़वाल श्वेता चौबे ने कावड़ यात्रा के दौरान क्षेत्र में ट्रैफिक प्लान की जानकारी देते हुए बताया कि पैदल मार्ग पर पार्क प्रशासन को नियमित गश्त बढ़ाने के लिए कहा गया है। बैराज-चीला शक्ति नहर पर कावड़ यात्रियों के नहाने के कारण दुर्घटनाओं को रोकने के लिए फोर्स की तैनाती अलग से की जा रही है।

कांवड़ मेले के दौरान वाहनों के जाने का मार्ग
यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाये रखने हेतु श्री नीलकंठ महादेव मन्दिर जाने के लिए ऋषिकेश- मुनिकीरेती-गरुड़ चट्टी- पीपलकोटी- नीलकंठ मंदिर मार्ग को निर्धारित किया गया है।

कांवड़ मेले के दौरान वाहनों के जाने का मार्ग
मंदिर से वापसी में निकासी हेतु नीलकंठ – पीपलकोटी- गरुड़ चट्टी- बैराज बाईपास- पशुलोक बैराज- ऋषिकेश-हरिद्वार मार्ग निर्धारित किया गया है।

श्री नीलकंठ मन्दिर आने का पैदल मार्ग
मेले के सामान्य दिनों में रामझूला व जानकी पुल कांवड़ यात्रियों के लिये खुले रहेंगे। भीड़ की अधिकता होने पर यात्रियों के लिये ऋषिकेश- रामझूला- बागखाला- पुण्डरासू- नीलकंठ मन्दिर का मार्ग निर्धारित किया गया है।

पैदल वापसी का मार्ग
श्री नीलकंठ मन्दिर से वापस जाने हेतु श्री नीलकंठ मन्दिर- पुण्डरासू- बागखाला- जानकी पुल- ऋषिकेश मार्ग निर्धारित किया गया है।

वाहनों के अव्यवस्थित रूप से खड़े पाए जाने पर उन्हें हटाने के लिए क्रेन की व्यवस्था की गयी है। साथ ही नीलकंठ क्षेत्र में पार्किंग फुल होने की दशा में वाहनों को पीपल कोटी- दिउली मार्ग पर डायवर्ट कर पार्क कराया जाएगा। 15 से 17 जुलाई तक मेला क्षेत्र में भारी वाहनों के आवागमन पर रोक लगायी गयी है।

मेला क्षेत्र में 894 अधिकारी और कर्मचारी तैनात
सम्पूर्ण मेला क्षेत्र की सुरक्षा के दृष्टिगत कांवड़ मेले में लगा 894 अधिकारी और कर्मचारियों की तैनाती की गई है।

जनपद का कुल फोर्स- 551

अपर पुलिस अधीक्षक एक, क्षेत्राधिकारी दो, निरीक्षक पांच, थानाध्यक्ष 11, उप निरीक्षक 27, महिला उपनिरीक्षक आठ, अपर उप निरीक्षक 15, हेड कांस्टेबल 80, कांस्टेबल 91, महिला कांस्टेबल 20, होमगार्ड 207, पीआरडी 84,

बाहरी जनपद से प्राप्त कुल फोर्स- 300

अपर पुलिस अधीक्षक एक, क्षेत्राधिकारी पांच, निरीक्षक तीन, थानाध्यक्ष तीन, उप निरीक्षक सात, महिला उपनिरीक्षक छह, अपर उप निरीक्षक 156, महिला अपर उप निरीक्षक दो हेड कांस्टेबल 38, कांस्टेबल 52, महिला कांस्टेबल 27, एक कम्पनी, दो प्लाटून, दो सैक्शन पीएसी

रिजर्व कुल फोर्स

निरीक्षक तीन, थानाध्यक्ष तीन, उपनिरीक्षक चार, महिला उपनिरीक्षक एक, अपर उपनिरीक्षक 18, महिला अपर उप निरीक्षक एक, हेड कांस्टेबल तीन

74 सीसीटीवी कैमरा और तीन ड्रोन की निगरानी
बीते वर्ष की तुलना में इस वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के यहां पहुंचने की संभावना है। सुरक्षा की दृष्टि से पुलिस प्रशासन की ओर से इस बार यहां अतिरिक्त पुलिस फोर्स तैनात किया गया है। 74 सीसीटीवी कैमरा और तीन ड्रोन की निगरानी में मेला संचालित होगा। सुरक्षा व्यवस्था के तहत सम्पूर्ण मेला क्षेत्र को एक सुपर जोन, सात जोन व 23 सेक्टरों में विभाजित किया गया है।

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक पौड़ी श्वेता चौबे ने ड्यूटी पर लगे समस्त पुलिस बल को परमार्थ निकेतन में ब्रीफिंग ली। पुलिस कप्तान ने कहा कि इंटरनेट मीडिया और विभिन्न माध्यम से अफवाह फैलाने वालों पर कड़ी नजर रखी जाएगी और सख्त कार्रवाई होगी।

सभी अधिकारी और कर्मचारी अनुशासित और संयमित होकर अपनी ड्यूटी दें। उन्होंने बताया कि पौड़ी जनपद के सम्पूर्ण मेला क्षेत्र को एक सुपर जोन, सात जोन व 23 सेक्टरों में विभाजित किया गया है। प्रत्येक सुपर जोन में अपर पुलिस अधीक्षक स्तर के अधिकारी, जोन में पुलिस उपाधीक्षक स्तर के अधिकारी तथा सेक्टरों में निरीक्षक, थानाध्यक्ष, वरिष्ठ उपनिरीक्षक, उपनिरीक्षक एवं अपर उपनिरीक्षक स्तर के अधिकारियों को नियुक्त किया गया है।

उन्होंने बताया कि किसी भी आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए एसडीआरएफ की दो टीम, जल पुलिस,गोताखोर टीम, दो क्यूआरटी टीम, पीएससी फ्लड टीम के साथ-साथ आतंकी घटनाओं की रोकथाम हेतु एक टीम एंटी टेरेरिस्ट स्क्वाड को मेला क्षेत्र में चौबीस घण्टे के लिये एक्टिव रखा गया है।

बैठक में अपर पुलिस अधीक्षक कोटद्वार शेखर चंद्र सुयाल, अपर पुलिस अधीक्षक अनिल काला, सीओ श्रीनगर श्याम दत्त नौटियाल, सहायक सेनानायक एसडीआरएफ दीपक सिंह, पुलिस उपाधीक्षक सतर्कता अनिल मनराल, एसएस सामंत, सहायक सेनानायक पीटीसी सुनीता वर्मा, उप सेनानायक आइआरबी राजन सिंह आदि मौजूद रहे।

राजनाथ सिंह से मिले सीएम धामी, रखी ये मांग

उत्तराखंड के मुख्‍यमंत्री पुष्‍कर सिंह धामी ने आज नई दिल्ली में केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ स‍िंह से मुलाकात की। इस दौरान मुख्‍यमंत्री धामी ने रक्षा मंत्री से प्रदेश के विकास से संबंधित विभिन्न समसामयिक विषयों पर विस्तृत चर्चा की। इसके साथ ही रानीखेत और लैंसडाउन में छावनी बोर्डों को भंग करने और सैन्य स्टेशनों से बाहर के क्षेत्रों को राज्य प्रशासन को हस्तांतरित करने का अनुरोध किया।

मुख्‍यमंत्री धामी ने जनपद रूद्रप्रयाग में पूर्व सैनिकों और उनके आश्रितों के लिए ईसीएचएस केंद्र खोले जाने के लिए संस्तुति प्रदान करने के लिए आभार व्यक्त किया। साथ ही, रुद्रप्रयाग में सीएसडी कैन्टीन खोले जाने, जौलीग्रांट एयरपोर्ट के विस्तारीकरण के लिए एनआरटीओ की 4 एकड़ भूमि हस्तांतरित करने और राज्य सरकार को क्षेत्रीय संपर्क योजना की सेवाओं के संचालन के लिए जोशीमठ और धारचूला आर्मी हेलीपैड के उपयोग की अनुमति प्रदान करने के ल‍िए भी अनुरोध किया।

मुख्‍यमंत्री धामी ने बताया की केंद्रीय रक्षा मंत्री द्वारा प्रदेश को हर संभव सहयोग देने के आश्वासन द‍िया गया है।

राज्य सरकार भाषा संस्थान की स्वायत्तता को बरकरार रखते हुए इसके विकास के लिए करेगी हर संभव कार्य-मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को सर्वे चौक स्थित आई.आर.डी.टी. सभागार में आयोजित उत्तराखण्ड भाषा संस्थान द्वारा आयोजित साहित्य गौरव सम्मान समारोह तथा लोक भाषा सम्मेलन में 9 साहित्यकारों को उत्तराखण्ड गौरव सम्मान से सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि सम्मानित हुये साहित्यकार अपनी साहित्यिक कृतियों से हमारी लोक भाषा का मान सम्मान बढ़ाते रहेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि आगामी वर्षों में भाषा संस्थान अपनी साहित्यिक एवं भाषाई गतिविधियों को व्यापक स्तर प्रदान करेगा।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री द्वारा जिन साहित्यकारों को प्रतिष्ठित उत्तराखण्ड साहित्य गौरव सम्मान से सम्मानित किया गया उनमें संतोष कुमार निवारी को चन्द्रकुंवर बर्त्वाल पुरस्कार, अमृता पाण्डे को शैलेश मटियानी पुरस्कार, प्रकाश चन्द्र तिवारी को डॉ. पीताम्बर दत्त बड़थ्वाल पुरस्कार, दामोदर जोशी ‘देवांशु’ को भैरव दत्त धूलिया पुरस्कार, राजेन्द्र सिंह बोरा उर्फ त्रिभुवन गिरी को गुमानी पंत पुरस्कार, नरेन्द्र कठैत को भजन सिंह ‘सिंह’ पुरस्कार, महावीर रवांल्टा को गोविन्द चातक पुरस्कार, गुरूदीप को सरदार पूर्ण सिंह पुरस्कार एवं राजेश आनन्द ‘असीर’ को प्रो. उन्नवान चिश्ती पुरस्कार से सम्मानित किया गया। सभी सम्मानित साहित्यकारों को अंगवस्त्र, प्रशस्ति पत्र एवं 1 लाख की सम्मान राशि प्रदान की गई।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि ऐसे आयोजनों से प्रदेश में स्थानीय भाषाओं के साथ-साथ विभिन्न क्षेत्रों में बोली जाने वाली बोलियों व उनमें रचे जा रहे साहित्य को भी प्रोत्साहन मिलेगा। उन्होंने कहा कि देश के अनेक साहित्यकारों ने हिन्दी को विश्व पटल पर स्थापित करने में महान योगदान दिया है। हिंदी एक उदार, ग्रहणशील और सहिष्णु भाषा तो है ही, ये भारत की राष्ट्रीय चेतना की संवाहिका भी है। यह हमारी परंपराओं और हमारी विरासत का बोध कराने वाला एक सतत अनुष्ठान है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि हिन्दी का विकास किसी अन्य भाषा या बोली की कीमत पर नहीं हो रहा है बल्कि आज भारत की सारी भाषाएं एक साथ आगे बढ़ रही है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति में बच्चों को शुरूआती शिक्षा मातृभाषा में देने का प्राविधान किया गया है। इससे यह उम्मीद जगती हैं कि उत्तराखण्ड जैसे पर्वतीय प्रदेश में हिन्दी के साथ-साथ गढ़वाली, कुमाउनी, जौनसारी आदि बोलियों का भी विकास होगा। हमारे यहां गढ़वाली, कुमाउनी और जौनसारी बोलियां बोली जाती है परन्तु हमारे प्रदेश का हिन्दी के साथ गहरा लगाव है। उन्होंने इसे सुखद संयोग बताया कि साहित्य गौरव सम्मान पाने वाले साहित्यकारों में वे साहित्यकार भी शामिल हैं जो अनेक विशिष्ट बोलियों में रचना कर्म कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जो समाज अपनी भाषा और बोलियों का सम्मान नहीं करता वह अपनी प्रतिष्ठा गवां देता है। अपनी भाषा व बोलियों को बचाने और उन्हें बढ़ाने के कार्य में आम लोगों की व्यापक सहभागिता की जरूरत है। इस महत्वपूर्ण कार्य को हम सभी को अपने घर के भीतर से आरम्भ करना होगा। विशेष रूप से बच्चों के साथ संवाद करते समय अपनी मातृभाषा और आम बोलियों का प्रयोग किया जाना चाहिए। वे स्वयं अपने बच्चों को अपनी भाषा व बोली सिखाने का प्रयास कर रहे है। इसमें सभी को सामूहिक रूप से प्रयास करना होगा। हमारी वैचारिक निष्ठा हिन्दी के प्रति रही है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में इस दिशा में प्रभावी प्रयास किये जा रहे है। आज आधिकारिक मंचों से लेकर शिक्षा तक में हिंदी को अभूतपूर्व स्थान दिया जा रहा है। मेडिकल और इंजिनयरिंग जैसे विषयों की पढ़ाई अब हिंदी में होना कोई स्वप्न नहीं है जबकि कुछ वर्ष पूर्व तक ये महज एक कल्पना थी। हिंदी के गौरव को बनाए रखना हम सभी का दायित्व है विश्वास व्यक्त किया कि हमारी युवा पीढ़ी हिंदी को एक नवीन स्तर देने का कार्य करेगी। हिंदी के विकास के लिए जब हम सभी मिलकर कार्य करेंगे, तभी हिन्दी को अपेक्षित सम्मान प्राप्त होगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस कार्यक्रम के माध्यम से लोक भाषाओं पर विद्वान साहित्यकारों के मध्य विचार-विमर्श किया जाएगा। जिससे हिंदी व अन्य लोक भाषाओं का संरक्षण, विकास और उत्थान हो सके। यहां प्राप्त साहित्यकारों के महत्वपूर्ण सुझावों को संस्थान अपनी भविष्य की कार्ययोजना में अवश्य सम्मिलित करेगा। अपनी स्थापना के बाद से उत्तराखण्ड भाषा संस्थान ने कई महत्वपूर्ण कार्य किये हैं। अब सरकार ने हिन्दी अकादमी, पंजाबी अकादमी, उर्दू अकादमी और लोक भाषा बोली अकादमी को एक छत के नीचे लाते हुए उत्तराखण्ड भाषा संस्थान को पुर्नगठित किया है। हमारी सरकार भाषा संस्थान की स्वायत्तता को बरकरार रखते हुए इसके विकास के लिए हर संभव कार्य करेगी। उन्होंने साहित्यकारों, भाषाविदों, शोधार्थियों से अनुरोध किया कि वे भाषा संस्थान के साथ मिलकर भाषाई विकास के लिए कार्य करें और इस संस्थान को देश के प्रतिष्ठित संस्थान के तौर पर विकसित करने के लिए मिलकर प्रयास करें।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड शैक्षिक व सांस्कृतिक रूप से प्रबुद्ध लोगों की भूमि है इसी के अनुरूप हमारे भाषा संस्थान की पहचान भी पूरे देश में होनी चाहिए। इसके लिये सामूहिक सहयोग एवं प्रयासों की भी उन्होंने जरूरत बताई है। उन्होंने कहा कि हमने उत्तराखण्ड को देश के अग्रणी राज्यों में सम्मिलित करने के लिये विकल्प रहित संकल्प के साथ आगे बढ़ रहे है। सभी संचालित विकास योजनाओं का लाभ समय पर सभी को मिले इसका भी हमारा संकल्प है।
मुख्यमंत्री ने अन्तर्राष्ट्रीय हिन्दी विश्वविद्यालय वर्धा के पूर्व कुलपति प्रो. गिरीश्वर मिश्र द्वारा उत्तराखण्ड में समान नागरिक संहिता कानून बनाये जाने की दिशा में राज्य सरकार के सकारात्मक प्रयासों का उल्लेख करते हुए कहा कि उत्तराखण्ड सम्पूर्ण देश को शुद्ध जल, हवा व पर्यावरण प्रदान करने वाला प्रदेश है। यह ऋषियों मुनियों, तपस्वियों, महान साहित्यकारों व प्रबुद्धजनों की भूमि रही है। ऋषियों मुनियों द्वारा मंत्रो व ऋचाओं के जो शब्द यहां रचे गये वे कभी समाप्त नहीं होते। उन्ही की ऊर्जा का प्रतिफल है कि हमने इस दिशा में पहल की है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि समान नागरिक संहिता के लिये हमने 12 फरवरी, 2022 को जनता से वादा किया था कि हम समान नागरिक संहिता लायेंगे। उत्तराखण्ड देवभूमि है, गंगा-यमुना का प्रदेश है, वनों पर्वतों से आच्छादित है। दो-दो अंतरराष्ट्रीय सीमा से लगा है। धर्म, अध्यात्म एवं संस्कृति का केन्द्र है। राज्य में कोई भी किसी पंथ, समुदाय, धर्म, जाति का हो सबके लिये एक समान कानून हो, इसके प्रयास किये गये है। उन्होंने कहा कि संविधान निर्माताओं में विद्धान लोग थे उन्होंने इसमें इसका प्राविधान किया है। उत्तराखण्ड की जनता ने किसी राजनैतिक दल को लगातार दूसरी बार सरकार बनाने का अवसर प्रदान कर, इस पर 2022 में अपनी मुहर लगाई। समान नागरिक संहिता लागू करने के लिये गठित समिति द्वारा डेढ़ साल में 02 लाख से भी ज्यादा लोगों के सुझाव, विचार लिये। सभी संगठनों, संस्थाओं, स्टेट होल्डरों से वार्ताकर इसका ड्राफ्ट लगभग तैयार किया जा रहा है। हमें जैसे ही यह ड्राफ्ट मिलेगा उसे देवभूमि में लागू करने का कार्य करेंगे। देश में एक विधान एक निशान एक प्रधान के साथ एक कानून की दिशा में हम आगे बढेंगे। इस दिशा में देश के अन्य राज्य भी आगे आयेंगे।
मुख्यमंत्री ोंने कहा कि स्वामी दयानन्द सरस्वती ने हिंदी की महानता से प्रभावित होकर कहा था कि हिंदी के द्वारा सारे भारत को एक सूत्र में पिरोया जा सकता है। एक भाषा के लिए लोकप्रियता और स्वीकारिता का इस से बड़ा मापक क्या होगा कि, भारत जैसे विशाल देश में अनेकों क्षेत्रीय भाषाएं और बोलियां होने के बावजूद हिन्दी किसी सदानीरा नदी की भांति स्वछंदता से प्रवाहित होती है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि देश की विभिन्न भाषाओं के साथ सामंजस्य बिठा लेने की जितनी प्रबल शक्ति हिंदी में है उतनी किसी दूसरी भाषा में नहीं है। आज विश्व, हिंदी के सामर्थ को, इसके महात्म्य को पहचान रहा है और दुनिया के 100 से अधिक देशों में हिन्दी की स्वरलहरियां गूंज रही हैं। वर्ष 1977 में संयुक्त राष्ट्र संघ के अधिवेशन में जब भारत रत्न स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी जी ने हिंदी में भाषण दिया था तो वो हम सभी के लिए एक ऐतिहासिक क्षण था।
मुख्यमंत्री ने अटल की कविता ‘गूंजी हिन्दी विश्व में, स्वप्न हुआ साकार, राष्ट्र संघ के मंच से, हिन्दी का जयकार का उल्लेख कर कहा कि अटल जी हिंदी के बड़े उपासक थे और उन्होंने आजीवन इस भाषा की सेवा करने, इसको समृद्ध बनाने का प्रयास किया। आज हमें गर्व है कि उस महान हुतात्मा के दिखाए मार्ग पर प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में आगे बढ़ कर, हिंदी का वैश्विक प्रचार-प्रसार किया जा रहा है। वर्तमान में हमारे प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी विश्व भर में हिन्दी का माथा ऊँचा कर रहे हैं। भारत रत्न आदरणीय श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी के बाद प्रधानमंत्री श्री मोदी जी ही दूसरे ऐसे नेता हैं जो वैश्विक संस्थाओं को हिन्दी में सम्बोधित करते हैं।

संविधान की आठवीं सूची में राज्य की समृद्ध भाषा बोलियों को स्थान मिले इसके भी किये जायेंगे प्रयास-भाषा मंत्री
इस अवसर पर भाषा विभाग के मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि साहित्य सृजन, समृद्ध लोक संस्कृति उत्तराखण्ड की परम्परा है। इस धरती ने साहित्यकारों को साहित्य सृजन की प्रेरणा देने का कार्य किया है। यहां का शांत एवं आध्यात्मिक वातावरण साहित्य एवं शिक्षा के लिये अनुकूल रहा है। राज्य में लोक भाषाओं को बढावा देने के लिये स्कूलों में इसे अनिवार्य किया गया है। उन्होंने कहा कि बढ़ते शहरीकरण के इस दौर में लोगों को अपनी मातृभाषा के प्रति लगाव कुछ कम हुआ है। इसमें इस लगाव को बढावा देने के प्रयास करने होंगे। यह हम सभी के सामूहिक प्रयासों से ही संभव हो सकेगा। उन्होंने कहा कि संविधान की आठवीं सूची में राज्य की समृद्ध भाषा बोलियों को स्थान मिले इसके भी प्रयास किये जायेंगे। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड भाषा संस्थान नये प्रयोग एवं सुधारात्मक प्रयासों से विभिन्न भाषाओं के साहित्यकारों को आगे बढ़ाने का प्रयास करेगा। उन्होंने कहा कि अपनी भाषा बोली व संस्कृति को जिन्दा रखना बडी बात है।

उत्तराखण्ड साहित्य गौरव सम्मान भाषा एवं साहित्य सृजन को बढ़ावा देने की दिशा में है बड़ी पहल-प्रो. गिरीश्वर मिश्र
अन्तर्राष्ट्रीय हिन्दी विश्वविद्यालय वर्धा के पूर्व कुलपति प्रो. गिरीश्वर मिश्र ने कहा कि भाषा के कारण ही हमारा अस्तित्व है। भाषा का हमारे जीवन में दखल रहता है।जीवन का स्पंदन है भाषा। उन्होंने कहा कि आज के दौर में भाषा के प्रति जो गम्भीरता हमारे व्यवहार में होनी चाहिए, उसमें कमी आ रही है। हमें इस दिशा में सोचना होगा। उन्होंने उत्तराखण्ड साहित्य गौरव सम्मान की पहल की सराहना करते हुये इसे भाषा एवं साहित्य सृजन को बढ़ावा देने की दिशा में बडी पहल बताया। उन्होंने कहा कि हमारे मनीषियों ने किसी भी शुभ कार्य में मंगलाचरण की परम्परा को प्रमुखता दी है, इस प्रकार सबके मंगल की कामना हमारी परम्परा है। भाषा जोड़ने का कार्य तो करती ही है, अनेकता में एकता के भाव को भी इससे बढ़ावा मिलता है। भाषा मन, विचार और कर्म को एक साथ चलाने का भी माध्यम है। प्रो. मिश्र ने उत्तराखण्ड में समान नागरिक संहिता कानून बनाए जाने के लिये मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के प्रयासों की सराहना करते हुये इसे सबको साथ लेकर चलने की पहल बताया।

मनुष्य और जीवों में शब्द का ही अंतर है। मनुष्य अकेली प्रजाति है जो कल्पना कर सकती है-अनिल रतूड़ी
साहित्यकार एवं पूर्व पुलिस महानिदेशक अनिल रतूड़ी ने इस अवसर पर भाषा साहित्य एवं संस्कृति के ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक पहलुओं पर विचार व्यक्त करते हुये कहा कि शब्द को ब्रह्म तथा ओम् शब्द को सृष्टि के अन्धकार दूर करने वाला बताया गया है। शब्द से ही साहित्य और भाषा का विकास हुआ है। मनुष्य और जीवों में शब्द का ही अंतर है। मनुष्य अकेली प्रजाति है जो कल्पना कर सकती है। उन्होंने कहा कि कुमाऊँ एवं गढवाल राजवंशो द्वारा अपने शासनकाल में कुमाऊं एवं गढवाली को अपनी राजभाषा बनाया गया था। इसके कई प्रमाण मिलते हैं। उन्होंने अपनी भाषा, बोली और संस्कृति को बढावा देने के प्रयासों की भी जरूरत बतायी। इससे राज्य निर्माण की अवधारणा साकार होने के साथ ही सांस्कृतिक मूल्यों के बेहतर संरक्षण में भी मदद मिलेगी।

उत्तराखण्ड भाषा संस्थान की निदेशक स्वाति एस. भदौरिया ने कहा कि उत्तराखंड भाषा संस्थान राज्य सरकार का एक ऐसा प्रयास है जिसके माध्यम से उत्तराखंड में भाषाओं के संरक्षण, उनके विस्तार और प्रोत्साहन संबंधी कार्यों को संपादित किया जा रहा है। अपने स्थापना के बाद से भाषा संस्थान ने विभिन्न शोध परियोजनाओं, भाषा एवं साहित्यिक संगोष्ठियों तथा सम्मान कार्यक्रमों के माध्यम से साहित्यकारों और जनसामान्य तक पहुंचने का प्रयास किया है।
उत्तराखंड राज्य अनेक भाषाओं, उपभाषाओं और बोलियों का प्रयोग करने वाला ऐसा क्षेत्र है जहां विपुल मात्रा में साहित्य रचा गया है और वर्तमान में भी रखा जा रहा है। उपर्युक्त के दृष्टिगत भाषा संस्थान सरकार की नीतियों के अनुरूप विभिन्न भाषाओं, उपभाषाओं और बोलियों के साहित्य को प्रोत्साहित करने के लिए सतत रूप से प्रयासरत है। इस अवसर पर विधायक खजान दास ने भी अपने विचार रखे।
कार्यक्रम में विधायक मोहन सिंह बिष्ट, प्रमोद नैनवाल, सचिव भाषा विनोद प्रसाद रतूड़ी सहित बडी संख्या में साहित्यकार एवं गणमान्य लोग उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन साहित्यकार गणेश खुगशाल गणी ने किया।