गंगा और उसकी सहायक नदियों की स्वच्छता पर विशेष ध्यान देने की जरूरत

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने बुधवार को सचिवालय में कानपुर में प्रस्तावित प्रथम नेशनल गंगा काउंसिल की बैठक से संबंधित राज्य से जुड़े विषयों के संबंध में संबंधित अधिकारियों के साथ चर्चा की। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिये कि प्रदेश में नमामि गंगे के तहत संचालित अवशेष कार्यों में तेजी लाई जाए। गंगा एवं उसकी सहायक नदियों पर स्वच्छता का विशेष ध्यान रखा जाय। कार्यों में तेजी लाई जाए।

नालों के टेपिंग की समुचित व्यवस्था की जाय। गंगा के किनारे पौधरोपण के लिए औषधीय पौधों को प्राथमिकता दी जाए। गंगा के किनारे अतिक्रमण वाले स्थानों को चिन्हित किया जाए। जगजीतपुर, सराय एवं ऋषिकेश में एस.टी.पी से कितनी हेक्टेयर भूमि सिंचित होगी, इसका पूरा आकलन किया जाय। सिंगल यूज प्लास्टिक मुक्त उत्तराखण्ड बनाने के लिए व्यापक स्तर पर जन जागरूकता अभियान चलाया जाए।

बैठक में जानकारी दी गई कि नमामि गंगे के तहत 21 में से 10 योजनाएं पूर्ण हो चुकी हैं, जबकि 11 गतिमान हैं। 34 एसटीपी में से 21 पूर्ण हो चुके हैं, जबकि 13 पर कार्य गतिमान है। जगजीनपुर, सराय एवं ऋषिकेश के एसटीपी से 1017 हेक्टेयर कृषि भूमि सिंचित होगी। गंगा के किनारे बसे 15 नगरों से प्रतिदिन औसतन 371 मीट्रिक टन कूड़ा उठाया जा रहा है।

प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना से धनराशि स्वीकृत कराने का सीएम ने किया केंद्रीय मंत्री से अनुरोध

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने नई दिल्ली में केंद्रीय कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्री डा. महेन्द्र नाथ पाण्डेय से भेंट कर ‘प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना 2.0’ में उत्तराखण्ड के लिए 38 करोड़ 99 लाख रूपए की राशि स्वीकृत करने का अनुरोध किया है। मुख्यमंत्री ने केंद्रीय मंत्री को बताया कि भारत सरकार द्वारा राज्य में 48 हजार युवाओं को कौशल विकास के लिए प्रशिक्षित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। इसके सापेक्ष 74 करोड़ रूपए की राशि उपलब्ध कराई जानी प्रस्तावित थी। इसमें से 35 करोड़ 01 लाख रूपए की राशि भारत सरकार द्वारा अवमुक्त की जा चुकी है। अवशेष धनराशि 38 करोड़ 99 लाख रूपए की मांग भारत सरकार को प्रेषित की जा चुकी है।

मुख्यमंत्री ने केंद्रीय मंत्री को अवगत कराया कि केंद्र पोषित ‘प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना 2.0’’ के माध्यम से राज्य के बेरोजगार युवाओं को 62 जॉब रोल में 300 से 900 घण्टों के रोजगारपरक अल्पावधि प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। योजना के तहत 23,615 युवाओं को प्रशिक्षित किया जा चुका है। जिसमें से 18395 युवाओं को सर्टिफाई किया जा चुका है। उक्त के अतिरिक्त उत्तराखण्ड कौशल विकास मिशन द्वारा वर्तमान में 35 हजार युवाओं को विभिन्न सेक्टर व जॉब रोल्स में प्रशिक्षित किए जाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसमें प्रशिक्षण कार्यक्रम प्रारम्भ किए जा चुके हैं। योजना की समाप्ति तिथि 31 मार्च 2020 तक निर्धारित लक्ष्य पूरा कर लिया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने केंद्रीय मंत्री से योजना के अंतर्गत उत्तराखण्ड के लिए प्रस्तावित धनराशि 74 करोड़ रूपए में से अवशेष 38 करोड़ 99 लाख रूपए की धनराशि स्वीकृत किए जाने का अनुरोध किया।

वृद्धावस्था पेंशन में चयन प्रक्रिया गलत होने से साढ़े दस लाख की वित्तीय हानि

भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (कैग) ने समाज कल्याण विभाग की करोड़ों रूपए की वित्तीय गड़बड़ी का खुलासा किया है। कैग के अनुसार विभाग ने वृद्धावस्था पेंशन योजना की चयन प्रक्रिया में कई गलतियां की है। इससे साढ़े 10 लाख रूपए की वित्तीय हानि हुई है।

कैग ने राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम (एनएसएपी) के डेटा बेस की जांच में पाया कि 1,17,454 लाभार्थियों में से केवल 49,924 के मामलों में ही बीपीएल पहचान संख्या अंकित थी। शेष 67,530 लाभार्थियों ने बीपीएल पहचान संख्या नहीं दी। इनमें से 8,134 लाभार्थियों के अभिलेखों की जांच में 76 प्रतिशत यानी 6184 ऐसे लोगों को भी पेंशन बांट दी गई, जो बीपीएल की श्रेणी में नहीं थे। इससे विभाग को 7.25 करोड़ की चपत लगी। 614 प्रकरणों में विभाग ने 17 लाख रुपये अधिक भुगतान किया, जबिक 85 लाभार्थियों को डबल पेंशन देकर 21 लाख रुपये की वित्तीय हानि की।

लाभार्थियों के गलत आकलन से विभाग पर 87.89 करोड़ का अतिरिक्त बोझ पड़ा। वर्ष 2015-16 से 2017-18 के दौरान सरकार ने 7,65,599 लाभार्थियों के लिए 235.08 करोड़ की मांग की। इसके सापेक्ष उसे 180.48 करोड़ रुपये मिले। लेकिन विभाग ने 6,46,687 लाभार्थियों को 268.37 करोड़ वितरित किए। इसके चलते राज्य सरकार पर 87.89 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ा। ऐसा 33.29 करोड़ रुपये केंद्र से कम मांग के कारण हुआ।

विभाग में पेंशन भुगतान के लिए 12.36 करोड़ रुपये की धनराशि दी गई थी। ये धनराशि न तो बांटी गई न सरकार को समर्पित की गई। इसमें राज्यांश 11.08 करोड़ रुपये और केंद्राश 1.28 रुपये था। कैग को विभाग ने जवाब नहीं दिया कि पांच जिला कोषागारों में यह धनराशि क्यों पड़ी रही।

कैग ने पाया कि वर्ष 2017-18 में चमोली, रुद्रप्रयाग, देहरादून, हरिद्वार, नैनीताल, अल्मोड़ा, बागेश्वर, चंपावत और यूएस नगर में 34,551 लाभार्थियों को धन की कमी के चलते 15.25 करोड़ रुपये की बकाया पेंशन का भुगतान नहीं किया गया। वर्ष 2016 में 6,703 बुजुर्गों की पेंशन रोक दी गई। आधार कार्ड की अवधि बढ़ाए जाने के बावजूद बकाया पेंशन 7.79 करोड़ का भुगतान नहीं किया गया।

ये कमियां भी आईं सामने
1. पेंशन मामलों के अनुश्रवण व मूल्यांकन के लिए राज्य और जिलास्तर पर समितियां नहीं बनाई गई। राज्य स्तरीय समिति मुख्य अधिकारी की अध्यक्षता में गठित होनी है, जबकि जिला पंचायत अध्यक्ष की अध्यक्षता में जिलास्तरीय समिति का गठन होना था। लेकिन लेखा अवधि में ये दोनों समितियां नहीं बनीं।
2. कैग ने पाया कि विकास खंड, जनपद, नगर पालिका स्तर पर शिकायत निवारण प्रणाली का गठन नहीं किया गया। जबकि एनएसएपी के इसे लेकर दिशा-निर्देश हैं।
3. एनएसएपी की गाइडलाइन के हिसाब से विभाग में सोशल ऑडिट की भी व्यवस्था नहीं थी। कैग ने भौतिक सत्यापन की भी कमी पकड़ी।

हवा में चलने वाली मेरी बाइक प्रधानमंत्री के स्वच्छ भारत अभियान का हिस्साः अद्वैत क्षेत्री

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत से गुरूवार को हर्रावाला के छठवीं कक्षा के छात्र अद्वैत क्षेत्री ने भेंट की। अद्वैत ने बताया कि उन्होंने हवा से चलने वाली बाइक बनाई है। इस बाइक को बनाने में उन्हें डेढ़ साल का समय लगा। इससे वायु, ध्वनि और मृदा से संबंधित कोई प्रदूषण नहीं होता है। यह बाइक वे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को समर्पित करना चाहते हैं।

अद्वैत ने कहा कि प्रधानमंत्री के स्वच्छ भारत अभियान में यह उनका छोटा सा योगदान है। अद्वैत ने कहा कि वे भविष्य में एस्ट्रोनॉटिक्स के क्षेत्र में कार्य करना चाहते हैं। यह बाइक उन्होंने गुब्बारे से प्रभावित होकर बनाई है। उन्होंने कहा कि यह विचार मेरे मन में तब आया जब गुब्बारा कम प्रेशर से इधर से उधर उड़ सकता है, तो अधिक प्रेशर से एयर से चलने वाली बाइक बनाई जा सकती है। उन्होंने इस बाइक मॉडल को देखने के लिए मुख्यमंत्री को आमंत्रित किया है।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने अद्वैत को इस मॉडल को बनाने पर बधाई देते हुए उनका आमंत्रण स्वीकार किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड में अनेक प्रतिभाशाली बच्चे हैं। हमारा प्रयास है कि ऐसे बच्चों को आगे भी इसी तरह के इनोवेटिव कार्यों के लिए अलग फंड की व्यवस्था की जाय। उन्होंने कहा कि केन्द्रीय स्तर पर इस बाइक मॉडल का प्रस्तुतीकरण कराया जायेगा। इस अवसर पर अद्वैत के पिता आदेश क्षेत्री एवं माता अमृता क्षेत्री भी उपस्थित रहीं।

बेकार तेल अब फेंके नही, घर में बुलाएं और बनाए बायोडीजल

भारतीय पेट्रोलियम संस्थान (आइआइपी) को बड़ी सफलता मिली है। आइआइपी ने इस्तेमाल किए गए खाद्य तेल से बायोडीजल बनाया शुरू कर दिया है। सुभाष रोड स्थित एक होटल में खाद तेल से बायोडीजल बनने की प्रक्रिया को प्रदर्शित किया गया। वहीं पहली रिपर्पज यूज्ड कुकिंग आयल (रुको) एक्सप्रेस को झडी दिखाकर आइआइपी में लगाए गए प्लाट के लिए रवाना भी किया गया।
आइआइपी, खाद्य सुरक्षा विभाग और गति फाउंडेशन की ओर से आयोजित कार्यक्रम में रुको एक्सप्रेस को हरी झडी दिखाकर खाद्य सुरक्षा आयुक्त डॉ. पंकज पाडेय और आइआइपी के निदेशक डॉ. अंजन रे ने रवाना किया। आइआइपी में इस्तेमाल खाद्य तेल से बायोफ्यूल बनाने के लिए 50 लीटर का प्लाट लगा हुआ है, जहां शहर भर से इस्तेमाल खाद्य तेल को बायोफ्यूल में तब्दील किया जा सकेगा। यहां पर कोई आमजन भी 20 रुपये प्रति लीटर की दर से अपने घर में इस्तेमाल खाद्य तेल बेच सकता है। खाद्य सुरक्षा आयुक्त डॉ. पंकज पाडेय ने कहा कि खाद्य तेल का जितनी बार इस्तेमाल किया जाता है, वह स्वास्थ्य के लिए उतना ही खतरनाक होता जाता है और इससे कैंसर जैसे गंभीर रोगों को भी खतरा बना रहता है।
50 लीटर तक के इस्तेमाल खाद्य तेल से बॉयोफ्यूल बनाने का प्लाट एक ट्रक में लगाया जा सकता है। खाद्य सुरक्षा विभाग दून के व्यापारियों के लिए संपर्क नंबर जारी करेगा, जिस पर कॉल करके इस मोबाइल प्लांट को अपने कार्यस्थल पर ही बुलाकर बायोफ्यूल पैदा कर सकते हैं। अक्सर व्यापारियों को इस्तेमाल खाद्य तेल फेंकना पड़ता है। लेकिन इस तेल से बायोफ्यूल बनने से व्यापारियों को लाभ पहुंचेगा। भारतीय पेट्रोलियम संस्थान के निदेशक डॉ. रंजन रे ने बताया कि तीन बार इस्तेमाल हो चुके खाद्य तेल से बायो डीजल भी बनाया जा सकता है और जेट फ्यूल भी। आइआइपी का उद्देश्य है कि देश के कम से कम 10 प्रतिशत गावों में इस्तेमाल किए जा चुके खाद्य तेल से बायोडीजल बनाने का प्लाट लगाया जाए। आइआइपी 20 रुपये प्रति लीटर के हिसाब से इस्तेमाल तेल खरीदेगा। इस तेल का 90 प्रतिशत हिस्सा बायोडीजल बनाया जा सकेगा। आइआइपी के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. नीरज आत्रे ने इस मौके पर तेल से बायोडीजल बनाने का प्रयोग करके भी दिखाया।
फाउंडेशन के अनूप नौटियाल ने बताया कि हर व्यक्ति एक महीने में लगभग डेढ़ लीटर खाद्य तेल इस्तेमाल करता है। वर्ष 2017 में देश में कुल 2,300 करोड़ टन इस्तेमाल किया गया था और 2030 तक इसके 3,400 टन प्रतिवर्ष पहुंचने की संभावना है। हर व्यक्ति के हिस्से का इस्तेमाल खाद्य तेल जमा किया जाए तो देश बायो डीजल के उत्पादन में काफी हद तक आत्मनिर्भर हो जाएगा।

प्रकृति संरक्षण में सहायक है नमामि गंगेः किंग कार्ल-16 गुस्ताफ

बृहस्पतिवार को स्वीडन के किंग कार्ल-16 गुस्ताफ, क्वीन सिल्विया, मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत, केंद्रीय मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत व उत्तराखण्ड के पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने हरिद्वार के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट का उद्घाटन किया। बता दें कि सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट नमामि गंगे के अंतर्गत 14 एमएलडी क्षमता का है तथा इसकी लागत 41.40 करोड़ रूपए है।

किंग कार्ल 16 गुस्ताफ ने कहा कि उन्हें यहां आकर बहुत ही प्रसन्नता हो रही है। भारत एवं भारत के लोगों में बहुत सी सम्भावनाएं हैं। उन्होंने गंगा नदी के संरक्षण एवं संवर्द्धन के लिये किये जा रहे प्रयासों को सराहनीय बताते हुए नमामि गंगे प्रोजेक्ट की सफलता की कामना की। उन्होंने आशा व्यक्त की कि भारत में प्रकृति और वन्यजीवन के संरक्षण के लिए किये जा रहे प्रयासों से प्रकृति के संरक्षण में सहायता मिलेगी।

गंगा की निर्मलता के लिए गम्भीरता से प्रयास किए जा रहे हैं
मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने स्वीडन के किंग कार्ल 16 गुस्ताफ का उत्तराखण्ड आगमन पर स्वागत एवं अभिनन्दन करते हुए कहा कि वर्ष 2014 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा गंगा की निर्मलता एवं अविरलता के क्षेत्र में ठोस पहल हुई। उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार जलीय जीवों के लिए गम्भीरता से प्रयास कर रही है, जिसके अच्छे परिणाम देखने को मिल रहे हैं।

रसायनों के प्रयोग को कम करने की आवश्यकता
मुख्यमंत्री ने कहा कि इतने कम समय में गंगा की निर्मलता के लिए सराहनीय कार्य हुए हैं। खेतों में प्रयोग किए जाने वाले रसायन का गंगा के प्रदूषण में महत्वपूर्ण भाग है, जिसे रोकने की जरूरत है। गंगा की निर्मलता को बनाये रखने के लिए औद्योगिक कचरे के उपचार की नितान्त आवश्यकता है। साथ ही, कृषि में इस्तेमाल होने वाले रसायनों के प्रयोग को अत्यधित न्यून करने की आवश्यकता है।

मुख्यमंत्री ने अपने आस-पास के नदी-नालों को स्वच्छ रखने में आमजन के सहयोग की अपील करते हुए कहा कि हमें सिंगल यूज प्लास्टिक के प्रयोग को बंद करके अपने प्रदेश के साथ ही देश को स्वच्छ बनाने में अपना सहयोग देना चाहिए।

उत्तराखण्ड में सीवेज ट्रीटमेंट प्लान के 34 प्रोजेक्ट्स में 23 प्रोजेक्ट्स पूर्ण
केन्द्रीय मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने स्वीडन के किंग कार्ल 16 गुस्ताफ एवं क्वीन सिल्वा का देवभूमि उत्तराखण्ड में स्वागत करते हुए कहा कि यह देवभूमि विश्व प्रसिद्ध पावन नदी गंगा का उद्गम स्थल भी है। उन्होंने कहा कि गंगा नदी भारत के 32 प्रतिशत भूभाग को सिंचित करती है और भारत की लगभग 42 प्रतिशत जनसंख्या को आजीविका का साधन उपलब्ध कराती है।

केन्द्रीय मंत्री शेखावत ने कहा कि गंगा नदी के संरक्षण के साथ ही स्वच्छ एवं अविरल बनाये रखने के लिए भारत सरकार द्वारा नमामि गंगे प्रोजेक्ट शुरू किया गया है। इस अभियान के अच्छे परिणाम देखने को मिल रहे हैं। पृथ्वी की ईकोलॉजी एवं स्वस्थ नागरिक जीवन के लिए प्रोपर वेस्ट मैनेजमेंट की बहुत ही आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड में सीवेज ट्रीटमेंट प्लान के 34 प्रोजेक्ट्स शुरू किए गए हैं, जिनमें से 23 प्रोजेक्ट्स पूर्ण हो चुके हैं।

इससे पूर्व स्वीडन के किंग कार्ल-16 गुस्ताफ, क्वीन सिल्विया का जौलीग्रान्ट एयरपोर्ट, देहरादून पहुंचने पर राज्य के प्रोटोकॉल मंत्री धनसिंह रावत ने स्वागत किया। यहां से किंग कार्ल-16 गुस्ताफ और क्वीन सिल्विया ऋषिकेश गए जहां उन्होंने प्रसिद्ध रामझूला पुल, गंगा माता मंदिर व स्नान घाट का भ्रमण किया एवं पूजा अर्चना भी की।

पलायन रोकने को हो चुका सर्वे, भविष्य की कार्ययोजना भी तैयार

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने गुरूवार को मुख्यमंत्री आवास में ग्राम्य विकास एवं पलायन आयोग उत्तराखण्ड द्वारा जनपद पिथौरागढ़ का विशलेषण कर पलायन को कम करने से सम्बन्धित रिपोर्ट का विमोचन किया। इस रिपोर्ट में जनपद पिथौरागढ़ के ग्रामीण क्षेत्रों में सामाजिक-आर्थिक विकास को सुदृढ़ करने एवं पलायन के कम करने के उपायों पर सुझाव दिये गये हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि पलायन को रोकने के लिए जिन जनपदों का सर्वे हो चुका है। उन जनपदों के भविष्य की कार्ययोजना भी तैयार किया जाए। पलायन को किस प्रकार नियंत्रित कर रिवर्स माईग्रेशन की संभावनाओं के लिए सुनियोजित आधार तैयार किये जाएं।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि आयोग द्वारा जनपदवार किये जा रहे विशलेषण एवं अर्थव्यवस्था, आजीविका सुधार तथा स्वरोजगार सृजन के अवसरों से सम्बन्धित सुझाव निश्चित रूप से सराहनीय प्रयास है। उन्होंने कहा कि पलायन प्रभावित जनपदों के विकास हेतु विभिन्न विभागों को संयुक्त कार्ययोजना तैयार करने पर भी ध्यान देना होगा। उन्होंने कहा कि पर्वतीय क्षेत्रों से पलायन को रोकने के लिए इन क्षेत्रों को किस प्रकार विकसित किया जा सकता है इस पर भी गहन अध्ययन किया जाए। उन्होंने कहा कि पर्वतीय क्षेत्रों से पलायन को रोकने व रिवर्स माइग्रेशन के लिए विशेषज्ञों व विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्य करने वाले बुद्धिजीवी वर्ग से भी सुझाव लिये जाने चाहिए।

ग्राम्य विकास एवं पलायन आयोग के उपाध्यक्ष एसएस नेगी ने कहा कि सामाजिक-आर्थिक विकास को सुदृढ़ करने व पलायन को कम करने के लिए राज्य के विभिन्न जनपदों के ग्रामीण क्षेत्रों में जाकर विशेषज्ञों व स्थानीय लोगों के साथ विचार विमर्श किया गया। विभिन्न विश्वविद्यालयों व संस्थानों पर्वतीय क्षेत्रों से पलायन पर अंकुश लगाने के लिए विषय विशेषज्ञों व छात्रों के भी सुझाव लिये गये। शासन स्तर पर भी बैठकें आयोजित की गई।

हरियाणा में आयोजित अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव में सीएम त्रिवेन्द्र ने किया प्रतिभाग

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कुरूक्षेत्र, हरियाणा में आयोजित चौथे अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव में अंतरराष्ट्रीय गीता सेमिनार में सम्बोधित करते हुए कहा कि गीता विश्व को निष्काम कर्म का संदेश देती है। जीवन का लक्ष्य भौतिक संसाधनों की प्राप्ति नहीं बल्कि सुख प्राप्ति है। यही कारण है कि अब इनकम इंडेक्स के साथ ही हैप्पीनेस इन्डेक्स की बात की जाने लगी है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव के आयोजन के लिए बधाई देते हुए कहा कि गंगा के साथ ही गीता और उपनिषद जैसे ग्रन्थों से हमारी पहचान है। इनमें सच्चे सुख का सार मौजूद है। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड के गांव-गांव में पांडवों की स्मृतियां विद्यमान हैं। यहां शुभ अवसरों पर पांडवों से जुड़े चक्रव्यूह आदि का मंचन होता है। पांडव नृत्य अकल्पनीय होते हैं। उत्तराखण्ड में लाखा मण्डल पांडवों से जुड़ा स्थान है।

इससे पूर्व, मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने हरियाणा के राज्यपाल सत्यदेव नारायण आर्य व मुख्यमंत्री मनोहर लाल के साथ उत्तराखंड पैवेलियन और प्रथम गुरु नानक देव के 550वें प्रकाशोत्सव की प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव का आयोजन हरियाणा सरकार द्वारा किया जा रहा है। उत्तराखण्ड इसमें पार्टनर स्टेट के रूप में प्रतिभाग कर रहा है।

इस अवसर पर शिक्षामंत्री हरियाणा कंवरपाल गुर्जर, गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद महाराज, हिमाचल प्रदेश के विधानसभा अध्यक्ष राजीव बिंदल, जिम्बाब्वे के हाई कमिश्नर, नेपाल के डिप्टी हाई कमिश्नर आदि उपस्थित थे।

ऋषिकेश नगर निगम के एक वर्ष पर संकल्प से शिखर की ओर शीर्षक पुस्तक का सीएम ने किया विमोचन

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत सोमवार को श्रीभरत मन्दिर इण्टर कॉलेज, ऋषिकेश में नगर निगम ऋषिकेश के एक वर्ष का कार्यकाल पूर्ण होने के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में शामिल हुए। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने नगर निगम ऋषिकेश के अन्तर्गत लगभग 3 करोड़ 80 लाख रूपये की विभिन्न योजनाओं का लोकार्पण एवं शिलान्यास किया। मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने खाण्ड गांव बाईपास रोड एवं कृष्णा नगर कालोनी को नगर निगम ऋषिकेश में शामिल किये जाने, भरत मन्दिर इण्टर कॉलेज को फर्नीचर के लिए 10 लाख रूपये प्रदान करने। ऋषिकेश में लोक निर्माण विभाग के भवन का पुनरूद्धार कर एक अतिथि गृह बनाये जाने की घोषणा की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने नगर निगम ऋषिकेश के लिए 10 कूड़ा निस्तारण वाहनों को हरी झण्डी दिखाकर रवाना किया एवं नगर निगम की विकास पुस्तिका ‘संकल्प से शिखर की ओर’ का विमोचन भी किया।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि ऋषिकेश नगर निगम में पिछले एक साल में विकास के अनेक कार्य हुए। 2021 में हरिद्वार में भव्य महाकुंभ का आयोजन किया जायेगा। इस महाकुंभ में करोड़ों की संख्या में श्रद्धालु आयेंगे। इस दृष्टि से हमें सुनियोजित तरीके व तेजी से कार्य करने होंगे। ऋषिकेश में जो सीवरेज ओर पाईपलाईन का कार्य चल रहा है, उनमें और तेजी लाने के निर्देश उन्होंने दिये। विश्व में देवभूमि के रूप में उत्तराखण्ड की पहचान है। सरकार का प्रयास है कि धार्मिक स्थलों का नियोजित विकास हो। उत्तराखण्ड चारधाम यात्रा में श्रद्धालुओं की संख्या में तेजी से वृद्धि हो रही है। इस वर्ष 36 लाख 50 हजार से अधिक श्रद्धालु चारधाम यात्रा पर आये। मुख्यमंत्री ने कहा कि श्रद्धालुओं को सुविधायुक्त तथा सुरक्षित कराना राज्य सरकार की जिम्मेदारी है।

उन्होंने कहा कि धार्मिक स्थलों के सुनियोजित विकास के लिए चारधाम श्राइन बोर्ड का गठन किया जा रहा है। यह श्राइन बोर्ड हमारी भविष्य की जरूरत है। इससे सभी के हितों को संरक्षित रखने का प्रयास किया जायेगा। देश के अनेक बड़े मन्दिरों के लिए श्राइन बोर्ड की व्यवस्था है। राज्य में श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के दृष्टिगत चारधाम श्राइन बोर्ड का गठन राज्य सरकार का अहम सुधारवादी कदम है। ऋषिकेश में स्वछता, सीवरेज, पेयजल व अन्य कार्यो के लिए 2100 करोड़ रूपये की योजना बनायी गई है। हमारा प्रयास है कि आगामी कुम्भ स्वच्छ एवं ग्रीन कुंभ के रूप में आयोजित है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के स्वच्छ भारत के संकल्प को पूरा करने के लिए स्वच्छता में सबको अपना योगदान देना होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में 24 हजार खाली पदों पर नियुक्ति प्रक्रिया गतिमान है। युवा सरकारी सेवाओं में जाने के लिए पूरी लगन से पढ़ाई करें।

मेयर ऋषिकेश अनिता ममगाईं ने कहा कि पिछले एक साल में नगर निगम ऋषिकेश के विकास के लिए हर संभव प्रयास किये गये हैं। स्वच्छता, पथ प्रकाश, सीवरेज, पेयजल एवं निर्माण कार्यों पर विशेष ध्यान दिया गया है। पिछले एक साल में 09 करोड़ से अधिक के कार्य किये गये एवं 07 करोड़ के कार्य प्रगति पर हैं।

हर हाल में निर्धारित अवधि में पूर्ण हो सूर्यधार झील का निर्माण

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने निर्माणाधीन सूर्यधार झील का आकस्मिक निरीक्षण किया। उन्होंने अधिकारियों को काम में तेजी लाने के निर्देश देते हुए कहा कि गुणवत्ता का खास ध्यान रखा जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि हर हाल में निर्धारित अवधि में सूर्यधार झील का काम पूरा कर लिया जाए।

डोईवाला विकासखण्ड के 29 गांवों को पीने व सिंचाई के लिए ग्रेविटी आधारित जलापूर्ति होगी। परियोजना की लागत 50 करोङ रूपए आंकलित की गई है पर सम्भावना है कि लगभग 30 करोड़ रूपए में परियोजना पूरी हो जाएगी। इसकी डिजाईन इस तरह की है कि इसमें सिल्ट की समस्या नहीं आएगी। क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियाँ बढने से रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे।