859 पोर्न साइट्स को तत्काल बंद करें केंद्र सरकारः हाईकोर्ट

अश्लील वीडियो देख बढ़ रही दुष्कर्म की घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिये न्यायालय ने केंद्र सरकार को 859 पोर्न साइट्स को बंद करने का आदेश दिया है। साथ ही इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर्स को भी केंद्र सरकार की सूची के अनुसार पोर्न साइट्स बंद करने को कहा है।

पिछले दिनों देहरादून के भाऊवाला स्थित बोर्डिंग स्कूल में दसवीं की छात्रा के साथ सामूहिक दुष्कर्म का सनसनीखेज मामला सामने आया था। इस मामले में पुलिस ने जांच पड़ताल की तो सामूहिक दुष्कर्म में चार नाबालिग छात्रों का भी नाम सामने आया। चारों ने पुलिस पूछताछ में स्वीकार किया कि पोर्न साइट देखने के बाद उन्होंने इस घटना को अंजाम दिया।

इस मामले का कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति राजीव शर्मा व न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी की खंडपीठ द्वारा स्वतरू संज्ञान लिया गया। गुरुवार को खंडपीठ ने मामले में सुनवाई करते हुए अहम दिशा-निर्देश जारी किए। कोर्ट ने केंद्र सरकार को 859 पोर्न साइट्स को बंद करने तथा इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडरों (आइएसपी) को भी केंद्र की सूची के आधार पर पॉर्न साइट्स नहीं चलाने के आदेश पारित किए।

कोर्ट ने केंद्र सरकार से यह बताने को कहा है कि 2014 में इस संबंध में जारी नोटिफिकेशन के अनुपालन में क्या कार्रवाई की गई। केंद्र को इस पर 11 अक्टूबर तक जवाब दाखिल करना होगा। कोर्ट ने इस मामले में अधिवक्ता अरविंद वशिष्ट को न्याय मित्र नियुक्त किया है।

हाईकोर्ट नैनीताल ने सीआरपीसी की धारा 438 को बनाया प्रभावी

नैनीताल हाईकोर्ट ने सीआरपीसी की धारा 438 को प्रभावी बनाते हुये आदेश दिया किया है। जिसके अनुसार राज्य की निचली अदालतें भी अब अग्रिम जमानत दे सकती है। विदित हो कि अभी तक मुकदमा दर्ज होने के बाद आरोपित को हाई कोर्ट से ही अंतरिम जमानत मिल पाती थी।

दरअसल, नोएडा निवासी व मूलरूप से किच्छा निवासी विष्णु सहाय व मोहन कुमार मित्तल ने हाई कोर्ट की एकलपीठ के दंड प्रक्रिया संहिता उत्तर प्रदेश संशोधन अधिनियम-1976 के तहत दिए गए आदेश को चुनौती देते हुए कहा था कि यह प्रावधान संविधान के अनुच्छेद-14, 19, 21, 22 का उल्लंघन है। अनुच्छेद 14 में समानता का अधिकार व 21 में जीवन और स्वतंत्रता का अधिकार प्रदत्त है। उत्तर प्रदेश अधिनियम संख्या-16 द्वारा भारतीय दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 438 को पुराना कानून मानते हुए निरस्त कर दिया गया था।

हाई कोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला देते हुए राज्य में भारतीय दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 438 प्रभावी कर दी है। इस आदेश के बाद राज्य की निचली अदालतों को भी अग्रिम जमानत देने का अधिकार मिल गया है। अभी तक मुकदमा दर्ज होने के बाद आरोपित को हाई कोर्ट से ही अंतरिम जमानत मिल पाती थी।

दरअसल, नोएडा निवासी व मूलरूप से किच्छा निवासी विष्णु सहाय व मोहन कुमार मित्तल ने हाई कोर्ट की एकलपीठ के दंड प्रक्रिया संहिता उत्तर प्रदेश संशोधन अधिनियम-1976 के तहत दिए गए आदेश को चुनौती देते हुए कहा था कि यह प्रावधान संविधान के अनुच्छेद-14, 19, 21, 22 का उल्लंघन है। अनुच्छेद 14 में समानता का अधिकार व 21 में जीवन और स्वतंत्रता का अधिकार प्रदत्त है। उत्तर प्रदेश अधिनियम संख्या-16 द्वारा भारतीय दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 438 को पुराना कानून मानते हुए निरस्त कर दिया गया था।

प्रदेश से बाहर भेजा जाएगा घुसपैठियों कोः सीएम

राज्य में घुसे बांग्लादेशी व रोहिंग्या घुसपैठियों को सरकार प्रदेश से बाहर भेजने के लिये तैयारी कर रही है। राज्य के सभी जिलों, तहसील स्तर पर इन्हें चिह्नीकरण करने की प्रक्रिया तेज हो चुकी है। मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने घुसपैठियों पर सख्त रूख अपनाया है। उन्होंने कहा कि कोई भी घुसपैठिया, चाहे वह बांग्लादेशी हो या रोहिंग्या, सबको प्रदेश की सीमाओं से बाहर भेजा जाएगा। हम उन्हें उत्तराखंड में बिल्कुल बर्दाश्त नहीं करेंगे। उत्तराखंड सामरिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण व संवेदनशील प्रदेश है। उन्होंने कहा कि जनता को भी कोई संदिग्ध व्यक्ति दिखे तो सरकार को सूचित करे। उन्होंने कहा कि सीएम एप, मेल व अन्य वेबसाइट के माध्यम से सरकार तक सूचना पहुंचायेे। सरकार एक-एक घुसपैठिये को यहां से बाहर करेगी।

प्रदेश में बीते कुछ महीनों से अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशियों व रोोहग्या की संख्या लगातार बढ़ रही है। इस संबंध में खुफिया एजेंसियां भी लगातार सरकार को इनपुट उपलब्ध कराती रही हैं। फिलहाल, इनके आने पर रोक लगाने के लिए अभी तक कोई ठोस कार्ययोजना नहीं बन पाई है लेकिन इन्हें बाहर निकालने की तैयारी जरूर शुरू हो चुकी है।

दरअसल, कुछ समय पूर्व विधायक खानपुर (हरिद्वार) कुंवर प्रणव चौंपियन ने एक सनसनीखेज बयान में कहा था कि रोोहग्या हरिद्वार तक पहुंच चुके हैं। उस समय मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने इस बात का समर्थन नहीं किया था। इसके बाद उन्होंने खुफिया एजेंसियों से इसका इनपुट लिया।

इस पर सरकार को प्रदेश में बाहर से आकर अवैध रूप से बसने वालों की जानकारी मिली। इसके बाद सरकार के निर्देश पर हरिद्वार के साथ ही तराई वाले जिलों में खुफिया एजेंसियों ने बस्तियों व झुग्गियों में बाहरी लोगों की जानकारी जुटानी शुरू की। इनकी संख्या देखकर खुफिया एजेंसियों के होश उड़ गए। इसके तुरंत बाद सभी जिलों में इनकी सूची बनाने के निर्देश जारी किए गए, जिस पर इन दिनों तेजी से काम चल रहा है। वहीं, सरकार ने अब आमजन का भी इसमें सहयोग लेने की बात कही है।

सरकार ने एनएच-74 के विस्तारीकरण को दी हरी झंड़ी

बुधवार को हुयी कैबिनेट बैठक में मंत्रीमंडल ने एनएच-74 के हरिद्वार-नगीना तक विस्तारीकरण को वन क्षेत्र की 847.98 करोड़ मूल्य की 64.74 हेक्टेयर भूमि नेशनल हाइवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया को मुफ्त देने पर मुहर लगाई है। इससे गढ़वाल को कुमाऊं से जोड़ने में मदद मिलेगी। वहीं यात्रियों का सफर भी सुरक्षित होगा और समय की बचत भी होगी।

वहीं राज्य में अब रात्रि पाली में भी महिला कार्मिक बेरोकटोक कार्य कर सकेंगी। उधर, मंत्रिमंडल ने अगले माह प्रस्तावित इन्वेस्टर्स समिट के दौरान पूंजी निवेशकों के लिए विभिन्न योजनाओं में गांव स्तर तक निवेश का रास्ता साफ करते हुए विभिन्न नियमावलियों को मंजूरी दी। सौर ऊर्जा नीति में संशोधन कर पांच मेगावाट तक सोलर प्रोजेक्ट राज्य के स्थायी निवासियों को आवंटित किए जाएंगे। इन्हें पर्वतीय क्षेत्रों में स्थापित किया जा सकेगा। वहीं नगर निगम सीमा में शामिल क्षेत्रों को कम भी किया जा सकेगा। इसके लिए मौजूदा अधिनियम में संशोधन विधेयक को स्वीकृति दी गई।

त्रिवेंद्र सिंह रावत मंत्रिमंडल की बुधवार को सचिवालय में दिनभर चली बैठक में 24 बिंदुओं पर चर्चा हुई। दो बिंदु स्थगित किए गए। विधानसभा सत्र की अधिसूचना जारी होने के चलते कैबिनेट फैसलों की ब्रीफिंग नहीं की गई। सूत्रों के मुताबिक कैबिनेट ने एक जनवरी, 2016 से पहले के पेंशनरों के लिए केंद्र सरकार की ओर से लागू पेंशन व्यवस्था को राज्य में लागू किए जाने को मंत्रिमंडल ने मंजूरी दी। इससे 1985, 1995, 2006 के पेंशनर्स और पारिवारिक पेंशनर्स की पेंशन में विसंगति दूर होगी। पेंशनर्स को कोई एरियर नहीं दिया जाएगा। शासनादेश जारी होने की तिथि से उक्त पेंशन व्यवस्था लागू मानी जाएगी।

कैबिनेट प्रमुख फैसले
-एक जनवरी, 2016 से पहले सेवानिवृत्त हुए कार्मिकों की पेंशन विसंगति खत्म, पेंशन में 300 से 1000 रुपये की वृद्धि

-इन्वेस्टर्स समिट में निवेशकों के लिए निवेश का रास्ता साफ, सौर ऊर्जा, आयुष समेत कई अहम नियमावलियां मंजूर

-महिला कार्मिकों को रात्रि पाली में काम करने की अनुमति, पहले लगा प्रतिबंध हटाया

-ग्रोथ सेंटर योजना के तहत राज्य की 670 न्याय पंचायत स्तर पर ग्रोथ सेंटर होंगे संचालित, एमएसएमई किसानों, बुनकरों को संगठित कर देगा प्रोत्साहन

-कीड़ा जड़ी दोहन और विपणन की नीति व प्रक्रिया को मंजूरी, जड़ी एकत्र करने वालों को कराना होगा पंजीकरण

-एनएच-74 के हरिद्वार-नगीना तक विस्तारीकरण को वन क्षेत्र की 847.98 करोड़ मूल्य की 64.74 हेक्टेयर भूमि नेशनल हाइवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया को मुफ्त देने पर मुहर

-प्राथमिक स्कूलों के बाद अब 30 से कम छात्रसंख्या वाले 34 सरकारी हाईस्कूल और इंटर को बंद करने का निर्णय

-उत्तराखंड सौर ऊर्जा नीति-2016 में संशोधन को मंजूरी, पांच मेगावाट तक प्रोजेक्ट राज्य के स्थायी निवासियों को आवंटित

-उत्तराखंड (उत्तरप्रदेश नगर निगम अधिनियम 1959) संशोधन अधिनियम, 2018 विधेयक को मंजूरी, नगर निगम की सीमा को अब घटा सकेगी सरकार

एनएच घोटाले में आइएएस अधिकारी पंकज कुमार व चंद्रेश यादव हुये सस्पेंड

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने जीरो टॉलरेंस को सर्वोच्च प्राथमिकता पर रखते हुए भ्रष्टाचार के आरोप में दो आइएएस अधिकारियों को निलंबित कर दिया है। सरकार के निर्देश पर शासन ने हरिद्वार-ऊधमसिंह नगर-बरेली (एनएच-74) चौड़ीकरण मुआवजा मामले में आइएएस अधिकारी व प्रभारी सचिव डॉ. पंकज कुमार पांडेय और अपर सचिव चंद्रेश यादव को निलंबित कर दिया है।

प्रभारी सचिव डॉ. पंकज कुमार पांडेय और अपर सचिव चंद्रेश कुमार यादव पर जिलाधिकारी ऊधमसिंह नगर के पद पर रहते हुए आर्बिट्रेटर की भूमिका निभाने के दौरान नियम विरुद्ध मुआवजा वितरित करने का आरोप है। दरअसल, राष्ट्रीय राजमार्ग 74 के चौड़ीकरण के लिए सरकार ने रुद्रपुर में सड़क के दोनों ओर की भूमि का अधिग्रहण किया था। इसके लिए भूस्वामियों को मुआवजा दिया गया। इस दौरान कई तरह की अनियमितताएं सामने आई थीं। इसमें कृषि भूमि को अकृषि दिखाकर अधिक मुआवजा बांटने व नियम विरुद्ध मुआवजा निर्धारण करना आदि शामिल थे। सरकार ने शुरुआती जांच के बाद बीते वर्ष मार्च में सात एसडीएम (एक सेवानिवृत्त) निलंबित कर दिए थे। मामले की विस्तृत जांच के लिए एसआइटी का गठन किया गया।

कुछ समय पूर्व एसआइटी ने अपनी रिपोर्ट में आइएएस अधिकारी डॉ. पंकज कुमार पांडेय और चंद्रेश यादव के आर्बिट्रेटर के रूप में लिए गए फैसलों पर सवाल उठाए थे। इस पर शासन ने दोनों अधिकारियों से इस मामले में स्पष्टीकरण तलब किया। दोनों अधिकारियों के अनुरोध पर दो बार जवाब लेने का समय बढ़ाया गया। इनके जवाब का परीक्षण करने के बाद शासन ने दोनों को निलंबित कर दिया है।

अपर मुख्य सचिव राधा रतूड़ी की ओर से जारी आदेशों में साफ किया गया है कि एसआइटी की विवेचनात्मक जांच आख्या के आधार पर दोनों अधिकारियों को निलंबित किया गया है। आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि दोनों अधिकारियों के विरुद्ध अनुशासनिक कार्यवाही के लिए आरोप पत्र जारी करने और जांच अधिकारी की नियुक्ति के लिए अलग से आदेश जारी किए जाएंगे।
मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह ने कहा कि शासन की मंशा स्पष्ट है। इन अधिकारियों के खिलाफ जांच में सामने आए तथ्यों पर स्पष्टीकरण लिया गया था। विचार विमर्श के बाद दोनों को निलंबित करने का निर्णय लिया गया है।

अब शासन इन दोनों अधिकारियों को अलग से आरोप पत्र जारी करेगा। इसमें उनसे एसआइटी की रिपोर्ट पर उठाए गए सवालों के जवाब लिए जाएंगे। इसके साथ ही एक जांच अधिकारी की भी नियुक्ति की जाएगी। यह जांच अधिकारी वरिष्ठ आइएएस अधिकारी होगा। अधिकारियों का जवाब मिलने के बाद जांच अधिकारी इसकी जांच करेंगे। आरोप पुष्ट होने पर कार्रवाई के लिए डीओपीटी और संघ लोक सेवा आयोग को पत्र भेजा जाएगा।

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत का कहना है कि भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की नीति पर सरकार कायम है। भ्रष्टाचार के मामलों में किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा। सरकार सबके खिलाफ समान रूप से कार्रवाई करेगी। इन दोनों अधिकारियों को भी प्रथम दृष्ट्या आरोप पुष्ट होने पर निलंबित किया गया है।

सहकारी विकास परियोजना से 50 हजार किसानों को होगा फायदा

किसानों की आय दोगुनी करने में समेकित सहकारी विकास परियोजना महत्वपूर्ण साबित होगी। इससे राज्य के 50 हजार किसानों को फायदा होगा। साथ ही ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने बताया कि राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम के सहयोग से 3632 करोड़ रूपये की समेकित सहकारी विकास परियोजना को प्रदेश में लाया जा रहा है। एनसीडीसी द्वारा वित पोषित इस योजना में 80 प्रतिशत ऋण के रूप में जबकि 20 प्रतिशत अनुदान के रूप में होगा। इसमें कॉपरेटिव व कार्पोरेट में समन्वय पर भी बल दिया जाएगा।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कहा कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए राज्य में जल्द ही राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (एनसीडीसी) द्वारा सहायतित राज्य समेकित सहकारी विकास परियोजना की शुरूआत की जायेगी। राज्य सरकार द्वारा राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम के सहयोग से 3632 करोड़ रूपये की समेकित सहकारी विकास परियोजना को प्रदेश में लाया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2022 तक किसानों की आय दुगुनी करने के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के लक्ष्य को पूर्ण करने में यह परियोजना महत्वपूर्ण साबित होगी। इस परियोजना को सफल बनाने में सहकारी, कृषि, उद्यान, मत्स्य, डेयरी व सम्बन्धित विभागों की अहम भूमिका होगी। इस परियोजना से प्रदेश के 50 हजार किसानों को फायदा होगा। इस परियोजना से कॉपरेटिव से कॉपरेटिव व कॉपरेटिव से कॉर्पोरेट के रास्ते खुलेंगे। इस परियोजना के लिए परियोजना निदेशालय बनाया जायेगा।

इस कार्यक्रम को आईसीडीपी योजना के तहत राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (एनसीडीसी) से वित्त पोषण में सहायता मिलेगी, जहां प्राविधानित राशि का 80 प्रतिशत ऋण एवं 20 प्रतिशत अनुदान के रूप में होगा। यह कार्यक्रम तीन चरणों में चलाया जायेगा। पहले चरण में बहुद्देशीय सहकारी समितियों एवं उनके जिलास्तरीय व शीर्ष निकाय, कृषि, उद्यान, जड़ी-बूटी, रेशम, सगंध पौध आदि का सहकारी सामूहिक खेती द्वारा वृहद उत्पादन, परिवहन, विपणन, दुग्ध विकास, पशुपालन व मतस्य पालन की विशेष त्रिस्तरीय सहकारी संस्थाओं की आवश्यकताओं को शामिल किया गया है।

आईसीडीपी के माध्यम से उत्तराखण्ड राज्य के विकास के कार्यक्रम की विशिष्टता के दृष्टिगत परियोजना इस प्रकार तैयार की गई है कि मूल्य श्रृंखला में ‘खेतों से लेकर बाजार तक’ चुनौतियों को पहचाना जा सके और उनका उचित निदान किया जा सके। किसानों की छोटी-छोटी जोत को शामिल कर संयुक्त सहकारी खेती के माध्यम से वृहद स्तर पर फसलों की खेती में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित किया जायेगा। सहकारी संस्थाओं एवं निगमित निकायों (कॉर्पोरेट) के संयुक्त उद्यम द्वारा उत्पाद का उचित मूल्य दिलाने, बाजार पहुंच में सक्षम होने व किसानों को फसल मूल्य अधिक प्राप्त होने में कारगर साबित होगी। इस परियोजना द्वारा शीर्ष निकायों यूसीएफ, यूसीबी, और नव निर्मित पीसीयू को संरचनात्मक व प्रभावी रूप से मजबूत करने की व्यवस्था की गई है।

शहीदों को सलाम कर मनाया स्वतंत्रता दिवस

देशभर में आज स्वतंत्रता दिवस धूमधाम से मनाया जा रहा है। देश के विभिन्न शिक्षण संस्थानों में महापुरूषों के नक्शे कदम पर चलने का संकल्प लिया जा रहा है। महापुरूषों की झांकी के माध्यम से देश के लिये मर मिटने वालों को नमन किया जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी लाल किले में तिरंगा फहराया। साथ ही देश की जनता को संबोधित किया।

पीएम ने कहा कि सभी भारतीयों को खाना, स्वास्थ्य, कनेक्टीविटी, कुशलता, स्वच्छता, सुरक्षा, जल मिले इसलिए वॉटर फॉर ऑल, सैनिटेशन फॉर ऑल, स्किल फॉर ऑल, हेल्थ पर ऑल, इंश्योरेंस फॉर ऑल, कनेक्टीविटी फॉर ऑल के मंत्र के साथ चलेंगे। उन्होंने आगे कहा कि देश में टैक्स न देने की हवा बनाई जा रही है, ईमानदार करदाताओं के टैक्स पर देश चलता है, डायरेक्ट टैक्स देने वालों की संख्या पौने सात करोड़ तक है।

प्रधानमंत्री बोले भारत को हमारे वैज्ञानिकों पर गर्व है, जो अपने शोध में उत्कृष्ट हैं और नवाचार में सबसे आगे हैं। आज मेरा सौभाग्य है कि इस पावन अवसर पर मुझे देश को एक और खुशखबरी देने का अवसर मिला है। साल 2022, यानि आजादी के 75वें वर्ष में और संभव हुआ तो उससे पहले ही, भारत अंतरिक्ष में तिरंगा लेकर जा रहा है। ऐसा करने वाल भारत चौथा देश बनेगा।

उन्होंने कहा, ‘मैं आज इस मंच से मेरी कुछ बहादुर बेटियों को खुशखबरी देना चाहता हूं। भारतीय सशक्त सेना में शॉर्ट सर्विस कमीशन के जरिए नियुक्त महिला अधिकारियों को पुरुष समकक्ष अधिकारियों की तरह पारदर्शी प्रक्रिया द्वारा स्थायी कमीशन देने की घोषणा करता हूं। अपनी उपलब्घ्धियों को गिनाते हुए उन्होंने कहा कि हमने ओबीसी आयोग को संवैधानिक दर्जा दिया, दिक्कतों के बावजूद जीएसटी लागू किया और सैनिकों के हित में वन रैंक वन पेंशन योजना लेकर आए। जन आरोग्घ्य योजना का ऐलान करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि आगामी 25 सितंबर से देश में यह योजना लागू कर दी जाएगी। महिलाओं की उपलब्धियां गिनाते हुए उन्होंने कहा कि खेत से लेकर खेल तक महिलाएं हमारा नाम ऊंचा कर रहीं हैं। प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन के अंत में जय हिंद, भारत माता की जय व वंदे मातरम् के नारे लगाए।

स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने परेड ग्राउंड में तिरंगा फहराया और प्रदेश वासियों को बधाई दी। इस इस दौरान सीएम ने कहा कि उत्तराखंड वीरभूमि है। यहां हर परिवार से औसतन एक व्यक्ति सेना या सुरक्षा बलों में हैं। उत्तराखंड में पहले से ही शहादत की परंपरा रही है। वहीं सीएम ने सरकार की उपलब्धियों को गिनाते हुए सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार ने भ्रष्टाचार के खिलाफ प्रभावी कदम उठाए हैं। लोगों की सोच और कार्य संस्कृति बदली है। जो उत्तराखंड के विकास को गति देगी।

मुख्यमंत्री ने परेड ग्राउंड में तिरंगा फहराया और प्रदेश वासियों को बधाई दी। सीएम ने कहा कि उत्तराखंड वीरभूमि है। यहां हर परिवार से औसतन एक व्यक्ति सेना या सुरक्षा बलों में हैं। उत्तराखंड में पहले से ही शहादत की परंपरा रही है। सीएम ने सरकार की उपलब्धियों को गिनाते हुए सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार ने भ्रष्टाचार के खिलाफ प्रभावी कदम उठाए हैं। लोगों की सोच और कार्य संस्कृति बदली है। जो उत्तराखंड के विकास को गति देगी। बताया कि राज्य की जीडीपी में छह प्रतिशत से ज्यादा वृद्धि हुई है और प्रति व्यक्ति आय 16 हजार से ज्यादा बढ़ गई है। उन्होंने कहा ग्रोथ सेंटर्स की स्थापना से गांवो में रोजगार बढ़ा है। अब तक 103 ग्रोथ सेंटर्स स्थापित किए जा चुके हैं। सरकार लगातार किसानों की आय को दोगुना करने के प्रयास कर रही है।

त्रिवेंद्र सरकार का अहम निर्णय, धर्मान्तरण पर होगी ये सजा

अब राज्य में जबरन धर्मान्तरण किया गया तो दंडात्मक कार्यवाही होगी। कैबिनेट ने इस नियमावली पर अपनी मोहर लगा दी है। त्रिवेंद्र सरकार की मौजूदगी में हुयी बुधवार को कैबिनेट की बैठक में धर्म स्वतंत्रता एक्ट पास किया गया। धर्म परिवर्तन के मामले में आरोपित व्यक्ति को दोषमुक्त साबित करने के लिए खुद प्रमाण देने होंगे।

त्रिवेंद्र सरकार ने बीते मार्च माह में गैरसैंण विधानसभा सत्र में उत्तराखंड धर्म स्वतंत्रता विधेयक को पारित कराने के बाद उसे एक्ट की शक्ल दी थी। अब उक्त एक्ट की नियमावली पर मंत्रिमंडल की मुहर लग गई। सचिवालय में बुधवार को मंत्रिमंडल के फैसलों को काबीना मंत्री प्रकाश पंत ने ब्रीफ किया। उन्होंने बताया कि धर्म स्वतंत्रता एक्ट की नियमावली बनने के बाद इसका क्रियान्वयन सुनिश्चित हो जाएगा। अब धर्म परिवर्तन के इच्छुक व्यक्ति को पहले अपने स्थायी निवास स्थल क्षेत्र के जिला मजिस्ट्रेट को पूर्व सूचना देनी होगी। जिला मजिस्ट्रेट ऐसी सूचनाओं की 15 दिन के भीतर जांच कराएगा।

सात दिन में होगी जांच

इस जांच में यह भी देखा जाएगा कि धर्म परिवर्तन जबरन, प्रलोभन, उत्पीडन या कपटपूर्ण अथवा विवाह के जरिये किया जा रहा है अथवा नहीं। बिना सूचना के किसी ने भी धर्म परिवर्तन किया तो ऐसे मामलों की जांच होगी। जिला मजिस्ट्रेट ऐसे मामलों में सात दिन के भीतर जांच कराएंगे। सरकार ने नियमावली में यह प्रावधान भी किया है कि प्रत्येक जिलाधिकारी को हर महीने की दस तारीख तक पिछले माह के दौरान ऐसे मामलों की रिपोर्ट सरकार को देनी होगी।

यह है सजा का प्रावधान

यदि धर्म परिवर्तन के उद्देश्य से विवाह किया गया तो उस धर्म परिवर्तन को अमान्य घोषित किया जाएगा। धर्म परिवर्तन के लिए जिला मजिस्ट्रेट या कार्यपालक मजिस्ट्रेट के समक्ष एक माह पहले शपथपत्र देना होगा। धर्म परिवर्तन के लिए समारोह की भी पूर्व सूचना देनी होगी। सूचना नहीं देने की स्थिति में इसे अमान्य करार दिया जाएगा। धर्म स्वतंत्रता कानून का उल्लंघन होने की स्थिति में तीन माह से एक वर्ष की सजा होगी। अनुसूचित जाति-जनजाति के मामले में यह छह माह से दो वर्ष होगी।
धर्म परिवर्तन के एवज में किसी तरह का दान या अंशदान लेन-देन का मामला सामने आया तो जांच के बाद ऐसी राशि जब्त की जाएगी। साथ ही इसके लिए दोषी संस्था, व्यक्ति अथवा पुजारी को दंडित किया जाएगा। जबरन धर्म परिवर्तन के मामले में जेल जाने का प्रावधान भी किया गया है।

आखिर मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह क्यों भड़क उठे? जाने क्या है सच

भोपालपानी बड़ासी पुल निर्माण कार्य को देखकर मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह को गुस्सा आ गया। उन्होंने निर्माणाधीन पुल की गुणवत्ता पर सवाल उठाते हुये विभागीय अधिकारियों को फटकार लगाई। साथ ही लोक निर्माण विभाग को तत्काल जांच के आदेश दिए।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने मंगलवार को देहरादून में रायपुर – थानौ मार्ग के मध्य निर्माणधीन सौंडा-सरौली, बडासी भोपालपानी (मत्स्य पालन) विभाग के समीप बन रहे पुल का काफी मौके पर स्थलीय निरीक्षण किया। भोपालपानी के पुल की सड़क खस्ता हालत के साथ पुल की दीवारें दीवारों में पड़ी दरारों को देखकर गुस्से में नजर आए। उन्होंने मौके पर मौजूद लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों व कार्यदायी संस्था के प्रतिनिधियों को कड़ी फटकार लगाई व प्रमुख अभियन्ता लोक निर्माण विभाग को मामले की तत्काल जांच के आदेश दिए।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से पूछा कि क्या उनके ऊपर निर्माण कार्य को शीघ्र समाप्त करने का कोई दवाब था। इस प्रकार की घटनाओं में संलिप्त अधिकारी, कार्मिक व ठेकेदार सख्त कार्यवाही से बच नही सकते। उन्होंने कहा कि निर्माण कार्यो में किसी भी प्रकार की लापरवाही व गुणवता में गिरावट बर्दाश्त नही की जाएगी। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने इस दौरान उपस्थित स्थानीय जनप्रतिनिधियों व लोगो से भी पुल व सड़कों की गुणवत्ता से संबंधित स्थिति की विस्तृत जानकारी ली। मालूम चला कि पुल के ऊपर सड़क के घटिया निर्माण कार्य को छिपाने के लिए कार्यदाई संस्था के ठेकेदार द्वारा जेसीबी से सड़क की खुदाई कर दी गई थी। जिसको देखकर मुख्यमंत्री भी गुस्से में नजर आए।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र रावत ने रायपुर-थानो मार्ग पर सौंडा सरौली पुल का भी विस्तृत स्थलीय निरीक्षण कर निर्माण कार्यो की अद्यतन जानकारी प्राप्त की। मुख्यमंत्री ने उपस्थित अधिकारियों को सौंडा सरौली पुल को समय पूरा करने तथा निर्माण कार्यो की गुणवता बनाए रखने के निर्देश भी दिए। अधिकारियों द्वारा बताया गया कि उक्त पुल का निर्माण कार्य आगामी 30 सितम्बर तक पूरा कर लिया जाएगा।

विद्यालय विशेष बच्चों के लिये अलग से हॉस्टल बनायें

शारीरिक व मानसिक रूप से विकलांग व विशेष आवश्यकता वालें बच्चों पर हाईकोर्ट नैनीताल ने आदेश पारित किया है। इस आदेश में इन बच्चों के लिये विद्यालय को विशेष सुविधायें मुहैया करायी जायेंगी। साथ ही विद्यालयों को अलग से शिक्षकों की नियुक्ति करने व अलग हॉस्टल बनाये जाने के आदेश दिए गये है।

वरिष्ठ न्यायाधीश न्यायमूर्ति राजीव शर्मा व न्यायमूर्ति लोकपाल सिंह की खंडपीठ ने कमल गुप्ता के पत्र पर स्वतः संज्ञान लेते हुए जनहित याचिका दायर की थी। याचिकाकर्ता ने पत्र में कहा था कि प्रदेश के विद्यालयों में दिव्यांगों व विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की शिक्षा के लिए कोई सुविधा नहीं है। जिस कारण उन्हें दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। संविधान के अनुच्छेद 21 ए में छह से 14 साल तक के बच्चों को निरूशुल्क व अनिवार्य शिक्षा की बात कही गई है। खंडपीठ ने पिछले दिनों मामले में सुनवाई पूरी कर फैसला सुरक्षित रख लिया था।

हाईकोर्ट ने जरूरतमंद बच्चों के लिए विशेष प्रशिक्षित शिक्षकों की नियुक्ति करने तथा बच्चों को हर माह एक हजार छात्रवृत्ति प्रदान करने के आदेश पारित किए हैं। आदेश में यह भी कहा है कि सरकार ऐसे बच्चों को शैक्षणिक सत्र से पहले यूनीफार्म, किताबें उपलब्ध कराई जाएं। राज्य सरकार विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के लिए एक साल के भीतर राज्य के चार जिलों में छात्रवास बनाए। जिन विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के अभिभावक उनकी जरूरतें पूरी नहीं कर सकते, ऐसे अभिभावकों की मदद सरकार करे। सरकार सरकारी, गैर सरकारी, सहायता प्राप्त व गैर सहायता प्राप्त विद्यालयों के दिव्यांग बच्चों को स्वतंत्र विचरण के लिए मुफ्त में ट्रांसपोर्ट सुविधा प्रदान करे।