कुंभ के तहत आस्था पथ के पुनरोद्धार एवं बाढ़ सुरक्षा निर्माण का कार्य शुरु

आस्था पथ के पुनरोद्धार एवं बाढ़ सुरक्षा निर्माण के साथ ही गंगा की जलधारा को मोड़ने का काम शुरू कर दिया गया है। सिंचाई विभाग के अनुसार, 40 से 50 प्रतिशत गंगा का पानी डार्यवट करने के बाद ही आस्था पथ के पुररोद्धार एवं बाढ़ सुरक्षा के कार्य शुरू हो पाएंगे।
आस्था पथ के पुनरोद्धार एवं बाढ़ सुरक्षा निर्माण के कार्य कुंभ शुरू होने से पहले पूरे किए जाने हैं। लेकिन गंगा का जलस्तर कम नहीं होने की वजह से सिंचाई विभाग काम शुरू नहीं कर पा रहा है। कार्यदायी संस्था सिंचाई विभाग के सहायक अभियंता अनुभव नौटियाल ने बताया कि क्यू-नेट चैनल बनाकर गंगा की धारा को मोड़ने का कार्य शुरू कर दिया गया है। इसके लिए करीब छह पोकलैंड को काम पर लगाया गया है। उन्होंने बताया कि इस काम के लिए बाकायदा वन विभाग और मेला अधिकारी की परमिशन ली गई है। उन्होंने बताया कि गंगा का 40 से 50 प्रतिशत पानी इस चैनल की ओर डायर्वट किया जाएगा, इसके बाद आस्था पथ के पुनरोद्धार एवं बाढ़ सुरक्षा निर्माण का काम शुरू किया जाएगा। महाकुंभ-2021 के तहत 1157.65 लाख की लागत से आस्थापथ के पुनरोद्धार एवं बाढ़ सुरक्षा निर्माण का काम किया जाना है। इसके तहत 2013 की आपदा में क्षतिग्रस्त हुए आस्थापथ के सीसी ब्लाक का निर्माण, नए ब्लाक का निर्माण और जो ब्लाक पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो चुके हैं, उन्हें तोड़कर नए ब्लाक लगाए जाने हैं।
वहीं, सिंचाई विभाग के सहायक अभियंता अनुभव नौटियाल ने बताया कि गंगा डायवर्जन के दौरान त्रिवेणीघाट पर गंगा अविरल बहती रहेगी। एक दिन पहले बृहस्पतिवार को गंगा का जलस्तर घटने से घाट पर पानी कम हो गया था। लेकिन फिर से जेसीबी लगाकर धारा को पुनरू घाट की तरफ मोड़ दिया गया। इसके अलावा गंगा की धारा को क्यू-नेट चैलन की ओर मोड़ने के दौरान भी गंगा की धारा को त्रिवेणीघाट पर अविरल रखा जाएगा। ताकि स्ननार्थियों को कोई दिक्कत न हो।

आबकारी विभाग में पारदर्शिता लाने के लिए ऑनलाइन प्रक्रिया शुरु

उत्तराखंड में अब बार का लाइसेंस लेना और भी आसान हो गया है। शासन ने आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली में सुधार और पारदर्शिता लाने के लिए पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन करने के शासनादेश जारी कर दिए हैं। इससे पहले गुरुवार को इसको लेकर निर्देश जारी किए गए थे। बार लाइसेंस के लिए एक ओर जहां शर्तों का सरलीकरण किया गया है तो वहीं दूसरी ओर आवेदक के ऑनलाइन आवेदन करने के 35 दिन के भीतर आवेदन को निस्तारित किया जाना है।
राज्य में अब बार लाइसेंस के लिये औपचारिकताएं पूरी होने के लिए सालों इंतजार नहीं करना पड़ेगा। 35 दिन के अंदर सभी औपचारिकताएं पूरी होने पर आबकारी विभाग को लाइसेंस देना ही होगा। इसके साथ ही इस पूरी व्यवस्था के लिए हर अधिकारी के स्तर पर ऑनलाइन रिपोर्ट लगाने की समय सीमा निर्धारित है। अब बिना आबकारी कार्यालय जाए लाइसेंस लिया जा सकता है।
वहीं, एक दिवसीय बार लाइसेंस की व्यवस्था भी पूरी तरह से ऑनलाइन कर दी गई है। पंजीकृत आवेदक को आवेदन करने के दो घंटे के अंदर लाइसेंस ऑनलाइन मिल जाएंगे। इस व्यवस्था से जहां आबकारी विभाग को भी राजस्व मिलने के साथ ही लाइसेंस बनाने की प्रक्रिया सरल होने के साथ ही पारदर्शी भी होगी।

मेयर अनिता ने निगम अफसरों के साथ किया गंगा अवलोकन केंद्र का स्थलीय निरीक्षण

मेयर अनिता ममगाईं की अगुवाई ने नगर निगम की टीम ने आज त्रिवेणी घाट परिसर पर बनने वाले गंगा अवलोकन केंद्र का स्थलीय निरीक्षण किया।

मेयर अनिता ममगाईं ने बताया कि गंगा अवलोकन केंद्र का प्रोजेक्ट निगम द्वारा तैयार कर लिया गया है। जल्द ही इसको लेकर नमामि गंगे को डीपीआर बनाकर भेजी जाएगी। नमामि गंगे द्वारा प्रस्तावित गंगा अवलोकन केंद्र का निर्माण उत्तराखंड की सबसे खूबसूरत शहरों में से एक ऋषिकेश में कराया जाएगा। मेयर के अनुसार, गंगा अवलोकन केंद्र में श्रद्धालुओं एवं पर्यटकों को गंगा के उद्गम स्थल से लेकर गंगासागर तक की महत्वपूर्ण जानकारियां दी जायेंगी।

निरीक्षण के दौरान मुख्य नगर आयुक्त नरेंद्र सिंह क्वींरियाल, सहायक नगर आयुक्त विनोद लाल, नमामि गंगे से मॉनिटरिंग एंड इवैल्यूएशन ऑफिसर रोहित जयाड़ा, पार्षद मनीष बनवाल, व्यापारी व भाजपा नेता पवन शर्मा, राजपाल ठाकुर, पंकज शर्मा आदि मौजूद रहे।

अब स्वच्छता की ओर बढ़ेगा तीर्थनगरी का हर कदम

अब तीर्थनगरी की दीवारें स्वच्छता का संदेश देती नजर आएंगी। इसके अलावा राज्य की हर संस्कृति को भी पर्यटकों से रूबरू कराएंगी।

नगर पालिका से अपग्रेड होकर नगर निगम बनने के बाद पिछले दो वर्षों में देवभूमि तेजी के साथ बदलाव के दौर से गुजर रही है। शहर को सजाने संवारने की कवायद में निगम प्रशासन लगातार जुटा हुआ है। मेयर अनिता ममगाई ने बताया कि नगर निगम का लक्ष्य हर कदम स्वच्छता की ओर है। शहर को संवारने के लिए खूबसूरत पेंटिग की मदद ली जा रही है। इस योजना के तहत शहर के महत्वपूर्ण स्थलों पर पेंटिग बनाई जा रही है। यहां जल्द ही दीवारें आपको बोलती नजर आएंगी। शहर के महत्वपूर्ण स्थानों की दीवारें एक नई कहानी और अपील करती नजर आयेंगी। पेंटिंग में कई विविधताएं होगी जिसमें हर पेंटिंग में उत्तराखंड की संस्कृति के रंग दिखाई देंगे।

गैरसैंण को राजधानी बनाकर सीएम त्रिवेंद्र ने बातें कम काम ज्यादा… को किया सार्थक

देहरादून। गैरसैंण राज्य निर्माण के शहीदों और आन्दोलनकारियों की भावनाओं का प्रतीक है। पहाड़ की राजधानी पहाड में जैसे नारे अब सार्थक होते जा रहे हैं। जी हां और ये सपना एक राज्य आन्दोलनकारी ही पूरा कर सकता था, जो मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने किया। राज्य आन्दोलन में अग्रणी भूमिका निभाने वाले सीएम त्रिवेन्द्र का गैरसैंण को लेकर भावनात्मक लगाव किसी से छुपा नहीं है। उत्तराखंड में त्रिवेन्द्र सिंह रावत पहले ऐसे सीएम हैं जो लगातार गैरसैंण जाकर अपने इस लगाव के साथ काम करते भी दिखाई देते हैं। सीएम त्रिवेन्द्र ने गैरसैंण के विकास की इबारत लिखने में केवल बाते हीं नहीं की बल्कि धरातल पर भी इसे उतराने में पूरी शिद्दत से काम किए हैं।

इसकी पहली झलक मार्च माह में सीएम त्रिवेन्द्र ने विधानसभा सत्र के दौरान गैरसैंण मे ही दिखा दी थी। जब किसी को अपेक्षा नहीं थी कि गैरसैंण ग्रीष्मकालीन राजधानी को लेकर फैसला इस सत्र में होगा लेकिन दृढनिश्चियी सीएम ने वो फैसला गैरसैंण के हित में और उत्तराखंड के हित में ले लिया जिसकों लेने में बाकी मुख्यमंत्रियों ने कभी हिम्मत तक नहीं दिखाई। हां दिखावा जरूर करते रहे लेकिन त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने दिखा दिया था की वो केवल बातें नहीं करते बल्कि उसे पूरा करने की हिम्मत भी रखते हैं। गैरसैंण को ग्रीष्मकालीन राजधानी बनाने की घोषणा के दौरान ही सीएम की आखों से बहे आंसूओं ने साफ बता दिया था की मुख्यमंत्री के लिए गैरसैंण सियासी मुद्दा नहीं बल्कि भावनाओं से जुड़ा और उनके दिल से जुडा मुद्दा है। उसी दिन लग गया था कि शहीदों के सपनों को पूरा करने में सीएम त्रिवेन्द्र कोई कसर नहीं छोडेंगे।

साफ है गैरसैंण पर फैसला लेते हुए सीएम कभी भी एक सीएम की तरह नहीं बल्कि राज्य के लिए आन्दोलन करने वाले एक आन्दोलनकारी, राज्य आन्दोलन के लिए शहीद होने वालों के परिवार के सदस्य की तरह उनके सपनों को अपना सपना बनाते हुए उसे पूरा करने की सोच के साथ काम करते रहे हैं। इसलिए राज्य के मुद्दों के लिए उनकी टीस और भावनाएं ठीक उसी तरह हैं जैसी एक राज्य आन्दोलनकारी के मन की टीस। यही वजह है कि सीएम ने गैरसैंण में ही घर बनाने का फैसला भी किया है।

सीएम ने किया लच्छीवाला नेचर पार्क रिडेवलपमेंट कार्यों का स्थलीय निरीक्षण

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने डोईवाला क्षेत्र का भ्रमण कर विभिन्न विकास योजनाओं की प्रगति का जायजा लिया। मुख्यमंत्री ने लच्छीवाला नेचर पार्क के रिडवलपमेंट कार्यों का निरीक्षण करते हुए इसे प्रकृति से जुडा अपनी विशिष्टता वाला नेचर पार्क बनाने के निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक वातावरण एवं जलश्रोत से परिपूर्ण यह स्थल सभी आयु वर्ग के लोगों को प्राकृतिक सौन्दर्य की अनुमति कराने में मददगार होगा। उन्होंने कहा कि इसके सौन्दर्यीकरण आदि के लिये 5 करोड़ की धनराशि की व्यवस्था की गई है। शीघ्र यह नेचर पार्क अपने भव्य स्वरूप में देश के पर्यटकों के सामने आये इसके लिए पार्क के अधीन विकसित की जाने वाले सभी गतिविधियों को भव्यता के साथ अन्तिम रूप दिया जाय।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह पार्क बच्चों के लिये प्रकृति से जुड़ने में भी मददगार होगा। उन्होंने कहा कि पार्क के अन्दर विकसित की जाने वाली नेचर ट्रेल, केनोपी वाक, मल्टीमीडिया फाउन्टेन पार्क देश की अपनी तरह की होगी। चिल्ड्रन जिम, टाय ट्रेन, म्यूजियम पार्क, हर्बल एवं एरोमेटिक गार्डन आदि गतिविधियां लोगो के आकर्षण का केन्द्र बनेगी। पार्क के रिडेवलपमेंट के सम्बन्ध में मुख्यमंत्री को कन्जरवेटर शिवालिक एवं निदेशक देहरादून जू पी पात्रो ने विस्तृत रूप से अवगत कराया।

इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने डोईवाला में निर्मित होने वाले तहसील भवन एवं डोईवाला, डिग्री कॉलेज परिसर में निर्मित किये जा रहे गल्र्स हास्टल का भी निरीक्षण किया। उन्होंने निर्माण कार्यो में गुणवत्ता का ध्यान रखते हुए इन्हें पर्वतीय शैली में निर्मित किये जाने की बात कही। उन्होंने 04 करोड़ की लागत से निर्मित होने वाले तहसील भवन को ग्रीन बिल्डिंग के रूप में भी विकसित करने को कहा।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री के विशेष सचिव डॉ. पराग मधुकर धकाते, जिलाधिकारी देहरादून आशीष श्रीवास्तव, अपर सचिव सुरेश चन्द्र जोशी आदि उपस्थित थे।

सीएम त्रिवेंद्र ने पर्वतारोहियों को प्रशस्ति पत्र देकर किया सम्मानित

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने आईटीबीपी सीमाद्वार परिसर में गंगोत्री-2 पर्वतारोहण एवं 6 पीक आरोहण फ्लैग इन सैरेमनी में प्रतिभाग किया। आईटीबीपी द्वारा सितम्बर माह में 06 अनाम चोटियों पर पर्वतारोहण हेतु दल भेजा गया जिसका नेतृत्व सैक्टर देहरादून आईटीबीपी की उपमहानिरीक्षक अर्पणा कुमार द्वारा किया गया। 08 सदस्यों के दल ने उत्तराखण्ड के उच्च हिमालय की 06 हजार मीटर से अधिक ऊंचाई वाली चोटियों का आरोहण किया। आईटीबीपी द्वारा एक और पर्वतारोहण अभियान उप सेनानी दीपेन्द्र मान के नेतृत्व में उत्तरकाशी से 21615 फीट की ऊंचाई पर गंगोत्री-2 चोटी का सफलतापूर्वक आरोहण कर तिरंगा फहराया। इस दल में 26 पर्वतारोही थे।

मुख्यमंत्री ने इन सभी पर्वतारोहियों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया। मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि आईटीबीपी के जवानों ने शौर्य, दृढ़ता एवं कर्मनिष्ठा का परिचय देते हए अपनी ड्यूटी के साथ पर्वतारोहण के क्षेत्र में नया रिकॉर्ड कायम किया है। आशा है कि चुनौतियों को स्वीकार करने वाले इन हिमवीरों ने आगे भी लक्ष्य तय किये होंगे। उन्होंने कहा कि आईटीबीपी और उत्तराखण्ड का गहरा रिश्ता है। अभी उत्तराखण्ड के 11 हजार लोग आईटीबीपी में सेवारत हैं एवं उत्तराखण्ड से 40 हजार लोग अपनी सेवाएं आईटीबीपी में दे चुके हैं। आईटीबीपी शौर्य एवं संवेदना का दूसरा नाम है। अपने परिवार से दूर रहकर हमारे जवान सीमान्त क्षेत्रों में सेवाएं देकर देश की रक्षा के लिए अपने शौर्य का परिचय दे रहे हैं। उत्तराखण्ड आपदा की दृष्टि से संवेदनशील राज्य है, आईटीबीपी ने आपदाओं के समय राज्य सरकार को पूरा सहयोग दिया है। दुर्गम क्षेत्रों में जाकर इन जवानों ने अपना लोहा मनवाया है।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार आईटीबीपी के साथ मजबूती के साथ खड़ी है। राज्य सरकार की ओर से आईटीबीपी को हर संभव सहयोग दिया जायेगा। आज उत्तराखण्ड विश्वभर में पर्यटन के क्षेत्र में आकर्षण का केन्द्र है। पर्यटन गतिविधियों में प्रदेश में चारधाम यात्रा, ईको टूरिज्म, ट्रेकिंग, एडवेंचर, विंटर स्पोर्ट्स शामिल हैं। 13 डिस्ट्रिक 13 न्यू डेस्टीनेशन पर राज्य सरकार कार्य कर रही है। उत्तराखण्ड शासन ने आईटीबीपी के साथ एक एमओयू हस्ताक्षरित किया है, जिसमें माँ गंगा के सौन्दर्यीकरण के साथ-साथ वाटर स्पोर्ट्स को बढ़ावा देने के लिए टिहरी बांध से में व्यावसायिक क्षमता, उत्कृष्ट कार्य, पर्यटन व स्वरोजगार बढ़ाने के लिए मिलकर कार्य करेंगे। टिहरी लेक में एडवेंचर की गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए आईटीबीपी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

इस अवसर पर आईटीबीपी के महानिरीक्षक उत्तरी सीमांत नीलाभ किशोर, उपमहानिरीक्षक कुंवर पाल सिंह, मंधीर एक्का, रणजीत सिंह, निम के कर्नल अमित बिष्ट आदि उपस्थित थे।

सिटी फारेस्ट को विकसित करने को सीएम ने साधना जयराज को किया सम्मानित

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने उत्तराखण्ड वन विभाग मुख्यालय में ई-ऑफिस कार्यप्रणाली का शुभारम्भ किया। उन्होंने घोषणा की कि चमोली एवं पिथौरागढ़ में भालुओं के लिए एक-एक रेस्क्यू सेंटर बनाया जायेगा। बंदरों के लिए चार रेस्क्यू सेंटर बनाने का प्रस्ताव भारत सरकार को भेजा गया है। झाझरा में ‘आनंद वन’ सिटी फॉरेस्ट को विकसित करने के लिए मुख्यमंत्री ने साधना जयराज को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया।
मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने वन विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिया कि ई-ऑफिस प्रणाली को जल्द ही जिला एवं क्षेत्रीय कार्यालयों में भी विस्तारित किया जाय। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कार्यों में तेजी और पारदर्शिता लाने के लिए डिजिटल इंडिया की जो शुरूआत की उसके बेहतर परिणाम आज सबके सम्मुख हैं। राज्य में ई-कैबिनेट की शुरूआत की गई। ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण को ई-विधानसभा बनाया जा रहा है। 37 ऑफिस, ई-ऑफिस प्रणाली से जुड़ चुके हैं। डिजिटल कार्यप्रणाली की ओर हम जितने तेजी से बढ़ेंगे, उतनी तेजी से जन समस्याओं का निदान होगा।

अगले वर्ष हरेला पर लगेंगे एक करोड़ पौधे
मुख्यमंत्री ने कहा कि अगले वर्ष हरेला पर्व पर एक करोड़ फलदार पौधे लगाये जायेंगे। इसके लिए वन विभाग द्वारा अभी से तैयारियां शुरू की जाय। ये फलदार पौधे जंगलों में भी लगाये जायेंगे, जिससे जंगली जानवर आबादी वाले क्षेत्रों में कम आयेंगे। जंगली जानवरों को आहार की उपलब्धता जंगलों में पूरी हो सके। राज्य में पिरूल पर जो कार्य हो रहा है, इसे और विस्तार देने की जरूरत है। पिरूल एकत्रीकरण पर राज्य सरकार द्वारा 02 रूपये प्रति किग्रा एवं विकासकर्ता द्वारा 1.5 रूपये प्रति किग्रा एकत्रकर्ता को दिया जा रहा है। इसका उपयोग ऊर्जा के लिए तो किया ही जायेगा, लेकिन इसका सबसे फायदा वन विभाग को होगा। वनाग्नि और जंगली जानवरों की क्षति को रोकने में यह नीति बहुत कारगर साबित होगी। स्थानीय स्तर पर गरीबों के लिए स्वरोजगार के लिए पिरूल एकत्रीकरण का कार्य एक अच्छा माध्यम बन रहा है।
मुख्य वन संरक्षक जयराज ने कहा कि ई-ऑफिस प्रणाली गुड-गवर्नेंस की दिशा में एक अच्छी पहल है। वन विभाग द्वारा इस प्रणाली को जिला, क्षेत्रीय कार्यालयों एवं वन पंचायतों तक विस्तारित किया जायेगा। कॉर्बेट नेशनल पार्क में ऑनलाईन बुकिंग शुरू की गई है, जिसके अच्छे परिणाम मिले हैं। वन विभाग द्वारा रिजॉर्ट्स में भी ऑनलाईन बुकिंग की प्रक्रिया शुरू करने के लिए प्रयास किये जा रहे हैं।
मौके पर मुख्यमंत्री के आईटी सलाहकार रविन्द्र दत्त, वन विभाग के सलाहकार ग्रामीण विकास एवं पलायन आयोग के उपाध्यक्ष डॉ. एसएस नेगी, अध्यक्ष वन पंचायत सलाहकार समिति वीरेन्द्र सिंह बिष्ट, पीसीसीएफ रंजना काला, विनोद कुमार सिंघल, मुख्य वन संरक्षक आईटी नरेश कुमार आदि उपस्थित रहे।

नैनीझील का जल होगा स्वच्छ और स्वस्थ, सीएम ने जल गुणवत्ता प्रणाली का किया लोकार्पण

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने एक दिवसीय नैनीताल भ्रमण के दौरान नैनीझील में एक करोड़ की लागत से यूएनडीपी के सहयोग से स्थापित दिव्य नैनीझील जल गुणवत्ता आंकलन प्रणाली का लोकार्पण किया।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि नैनीझील अपनी प्राकृतिक सुन्दरता के लिए दुनिया भर में जानी जाती है व सदैव से ही पर्यटकों को आकर्षित करती रही है। उन्होने कहा कि नैनीझील हमारी सांस्कृतिक विरासत का अभिन्न अंग है। उन्होंने जिला प्रशासन व यूएनडीपी को इस अभिनव पहल के लिए बधाई देते हुए सभी से नैनीझील को स्वस्थ व स्वच्छ रखने की अपील भी की। उन्होंने कहा कि जल गुणवत्ता प्रणाली जल संरक्षण के साथ ही जल की निर्मलता बनाये रखेगी। प्रदेश में जल संरक्षण एवं संवर्धन के लिए प्रदेश की नदियों, झीलों तालाबों और जलस्रोतों को पुर्नजीवित करने के लिए व्यापक जन अभियान शुरू किया गया है, जिसमें सफलता मिली है।

कहा कि उत्तराखण्ड पर्यटन प्रदेश है। यहां अतिथि देव भवः के साथ ही स्थानीय उत्पाद व स्थानीय भोजन को बढावा देना होगा। उन्होंने कहा कि प्रदेश मे होम स्टे को प्रोत्साहित किया जा रहा है। प्रदेश में 2200 होम स्टे संचालित है इनको और बढाया जायेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि नैनीताल में एसटीपी व पार्किग के निर्माण की स्वीकृति दे दी गई है। बलिया नाले पर अल्पकालीन व दीर्घकालीन दोनों योजनाओं पर कार्य किया जा रहा है। उन्होंने कहा रैमजे चिकित्सालय को पीपीपी मोड पर चलाये जाने हेतु शीघ्र विज्ञप्ति जारी की जायेगी ताकि यहां की जनता व आने वाले पर्यटकों को और बेहतर स्वास्थ्य सुविधायें मिल सके।

क्षेत्रीय विधायक संजीव आर्य ने जनपद आगमन पर मुख्यमंत्री का धन्यवाद अदा करते हुये जिला प्रशासन द्वारा किये जा रहे कार्यो की तारीफ की।

साथी ऐप को उत्तराखंड सरकार ने किया शुरू, पर्यटकों का बढ़ेगा भरोसा

केंद्र सरकार के सभी राज्यों द्वारा एक नई पहल के अंतर्गत साथी ऐप बनाया गया है जो आतिथ्य उद्योग के मूल्यांकन, जागरूकता और प्रशिक्षण प्रणाली के लिए है। इसी क्रम में साथी ऐप को प्रदेश सरकार ने भी शुरू किया है। जो पर्यटकों और हितधारकों के बीच भरोसा और विश्वास बनाये रखने पर केंद्रित है

यह पहल वर्तमान में होटल, रेस्तरां, बी2बी-होमस्टे पर लागू है। साथी ऐप को तीन चरणों में विभाजित किया गया हैं। कोविड 19 के दिशा-निर्देशों का सही तरीके से पालन करने के लिए सेल्फ सर्टिफिकेशन, क्षमता निर्माण, जो होटल व्यवसायी, रेस्तरां और अन्य लोगों की क्षमता बनाने में मदद करेगा। साइट मूल्यांकन, जो अंतराल की पहचान करने के लिए भूमि कार्यान्वयन पर जाँच करता है। अभी तक साथी ऐप में प्रदेश के 320 इकाइयों ने अपना पंजीकरण कराया है।

भारत सरकार द्वारा चलायी जा रही इस पहल के बारे में बात करते हुए, पर्यटन मंत्री, सतपाल महाराज ने कहा, ‘‘साथी कोविड-19 की चुनौतियों का सामना करने के लिए आतिथ्य उद्योग के साथ मदद और भागीदारी है। इस पहल के बारे में सबसे अच्छी बात यह है कि यह हमारे माननीय पीएम नरेंद्र मोदी की आत्म निर्भर भारत के विजन के साथ जुड़ा हुआ है। मैं उत्तराखंड के सभी संबंधित हितधारकों से अनुरोध करूंगा कि वे इस पहल में सक्रिय रूप से खुद को पंजीकृत करें और इसका पूरा लाभ उठाएं। उन्होंने कहा कि साथी को अधिक लोकप्रिय बनाने की आवश्यकता है इसके लिए यात्रा एग्रीगेटर जैसे मेकमाईट्रिप, गोआईबीबो के साथ जोड़ा जा सकता है, ताकि बड़ी संख्या में लोगों तक पहुंच बनायी जानी संभव हो सके।

सचिव पर्यटन, दिलीप जावलकर ने कहा, “साथी ऐप के माध्यम से संसाधनों का प्रचार-प्रसार होने से उत्तराखण्ड राज्य में पर्यटन को नया आयाम मिलेगा। साथी ऐप से पर्यटन उद्योग में हमारे हितधारकों को सशक्त बनाने के साथ ही स्वरोजगार के अवसर भी सुलभ होंगे।