अटैचमेंट को लेकर डीजीपी सख्त, मूल तैनाती के होंगे आदेश

उत्तराखंड के सभी पुलिसकर्मियों के पास एक माह के भीतर स्मार्ट कार्ड होंगे। इसके लिए डीजीपी ने विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं। सभी जिला प्रभारी और सेनानायक इस काम को अपने पर्यवेक्षण में करेंगे।
दरअसल, बीते 12 सालों से पुलिस के आईडी कार्ड का काम बेहद धीमा है। फील्ड में तैनात पुलिसकर्मियों के कार्ड दौरान नहीं बन पाए थे। इनकी संख्या तीन से चार के आसपास बताई जा रही है। आईकार्ड न होने से पुलिसकर्मियों को बाहरी जनपदों और राज्यों में दबिश देने में भी समस्या सामने आती थी। लेकिन, अब डीआईजी ने सभी के कार्ड बनाने के लिए एक माह का समय दिया है।

पुलिस में खत्म होगा अटैचमेंट का खेल
पहाड़ की ड्यूटी से बचने के लिए लंबे समय से अटैच चले आ रहे पुलिसकर्मियों को मूल तैनाती पर जाना ही होगा। इसके लिए पुलिस मुख्यालय ने अटैचमेंट वाले प्रकरणों की समीक्षा करानी शुरू कर दी है। वाजिब कारण वालों को छोड़कर सभी को पहाड़ चढ़ाने की तैयारी की जाएगी।
दरअसल, मैदान में समयावधि पूरी होने के बाद कर्मचारियों का पहाड़ पर ट्रांसफर किया जाता है। लेकिन, बहुत से कर्मचारी कई मजबूरियां बताकर विभिन्न दफ्तरों में अटैच हो जाते हैं। यह अटैचमेंट अग्रिम आदेशों या समस्या हल होने तक किया जाता है।
बावजूद, इसके तमाम कर्मचारी अब भी दफ्तरों से अटैच होकर मैदान में ड्यूटी कर रहे हैं। इस मामले में अब डीजीपी ने मुख्यालय में मौजूद कर्मचारियों का डाटा और उनके अटैचमेंट की स्थिति की समीक्षा करने के निर्देश दिए हैं। ताकि, इन कर्मचारियों को उनके मूल तैनाती स्थल पर भेजा जा सके।

आईजी ने भी दिए थे निर्देश
पिछले दिनों रेंज स्तर पर आईजी अभिनव कुमार ने भी अटैचमेंट की स्थिति साफ करने के निर्देश दिए थे। उन्होंने कई कर्मचारियों को उनके मूल तैनाती स्थल पर भेजने के निर्देश भी दिए थे। उन्होंने नाराजगी जताई थी कि बहुत से कर्मचारी सहूलियत का बेवजह फायदा उठा रहे हैं। उन्होंने कहा था कि अटैचमेंट एक सुविधा होती है, जिसका अनुचित लाभ लिया जाना गलत है।
डीजीपी अशोक कुमार ने कहा पहाड़ पर ट्रांसफर हुए लोगों को जल्द ही मूल तैनाती पर भेजा जाएगा। इसके लिए सभी को निर्देशित किया जा चुका है। इसके लिए समितियां भी काम कर रही है। ट्रांसफर, पोस्टिंग को लेकर वर्तमान में नौ समितियां हैं।

किसानों की हर मांग को गंभीरता से लेती है सरकार-मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत से सचिवालय में भारतीय किसान यूनियन के पदाधिकारियों ने भेंट की। उन्होंने किसानों की विभिन्न समस्याओं से मुख्यमंत्री को अवगत कराते हुए उनके निराकरण का अनुरोध किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार किसानों की समस्याओं के समाधान के प्रति प्रतिबद्ध है। प्रदेश सरकार द्वारा किसानों के हित में अनेक निर्णय लिये गये हैं। किसानों को 3 लाख रूपये तक का बिना ब्याज का ऋण उपलब्ध कराये जाने के साथ ही उत्पादों के क्रय की प्रभावी व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि किसान अपनी किसी भी समस्या के समाधान के लिये टोल फ्री नम्बर 1905 पर अपनी समस्यायें बतायें इससे उनकी समस्याओं का त्वरित समाधान होगा। उन्होंने कहा कि किसानों को बिजली, पानी सहित कृषि सम्बन्धी कार्यों में आवश्यक सहयोग के लिये सम्बन्धित अधिकारियों को निर्देश दिये गये हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों के हित में देहरादून में किसान भवन बनाया गया है। राज्य सरकार द्वारा गन्ना किसानों को सहकारी चीनी मिलों के स्तर पर लम्बित सौ प्रतिशत गन्ना मूल्य का भुगतान कर दिया गया है। धान मूल्य का भुगतान ऑनलाइन 24 घण्टे के अन्दर ही बिल प्राप्त होते ही आरटीजीएस के माध्यम से उनके खाते में जमा की जा रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह पहली बार हुआ है कि नये पैराई सत्र से पहले गन्ना किसानों को उनके गन्ना मूल्य का भुगतान किया गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा निजी क्षेत्र की इकबालपुर शुगर मिल जो बन्द हो गई थी जिससे 22,500 किसान जुड़े थे, राज्य सरकार ने इस मिल को 36 करोड़ की गारन्टी देकर खुलवाया है ताकि किसानों को उनके गन्ना मूल्य का भुगतान हो सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों के व्यापक हित में खाण्डसारी नीति बनाई गई है ताकि जो भी किसान खाण्डसारी उद्योग शुरू करना चाहे शुरू कर सकता है। मुख्यमंत्री ने किसानों को विश्वास दिलाया कि राज्य सरकार किसानों के हितों के प्रति प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री ने किसानों से किसान पेंशन निधि का लाभ लेने की भी अपेक्षा की। उन्होंने कहा कि प्रदेश में 60 साल से अधिक उम्र के लोगों को वृद्धावस्था पेंशन भी दी जा रही है। इस योजना का भी लाभ किसान भाई ले सकते हैं।
इस अवसर पर किसान यूनियन के प्रतिनिधियों द्वारा रखी गई समस्याओं में प्रत्येक जनपद में किसान भवन बनाये जाने, किसानों को पेंशन दिये जाने, निजी चीनी मिलों के स्तर पर किसानों को लम्बित गन्ना मूल्य का भुगतान किये जाने, धान क्रय केन्द्रों पर एवं मण्डियों में सुविधायें उपलब्ध कराये जाने से सम्बन्धित समस्यायें प्रमुख थी। किसानों का उत्पीड़न न हो इसकी व्यवस्था के निर्देश दिये जाने का भी अनुरोध उन्होंने मुख्यमंत्री से किया।
इस अवसर पर इस अवसर पर उच्च शिक्षा राज्य मंत्री, स्वतंत्र प्रभार डॉ धन सिंह रावत, भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष चैधरी संजीव तोमर, प्रदेश अध्यक्ष सोम दत्त शर्मा, इन्द्रजीत सिंह सांगवान, राममेहर तोमर, चैधरी सुदेश पाल सिंह, चैधरी राजीव मलिक, विकेरा बालियान, पवन त्यागी, अजय त्यागी, श्रवण त्यागी एवं जावेद अली आदि उपस्थित थे।

ऋषिकेश व्यापार महासंघ के सदस्यता अभियान में उत्साह का माहौल

नगर निगम ऋषिकेश के पहले व्यापार महासंघ ने नगर के व्यापारियों के साथ मिलकर ऋषिकेश में दून तिराहे से चन्द्रभागा पुल तक सदस्यता अभियान चलाया। मौके पर दर्जनों व्यापारियों को ऋषिकेश व्यापार महासंघ का सदस्य भी बनाया गया।
ऋषिकेश व्यापार महासंघ के संयोजक राजीव मोहन अग्रवाल ने कहा कि आज ऋषिकेश व्यापार महासंघ के बैनर तले के साथ सदस्यता अभियान चलाकर बड़ी संख्या में सदस्य बनाये। इस दौरान सदस्य बनने के लिये व्यापारियों में उत्साह देखने को मिला। उन्होंने कहा कि काफी समय से लोग एकाधिकार वाले व्यापारी नेताओं के मनमाने रवैयों से आजिज आ चुके थे, इसी लिये व्यापारी भाईयों ने बढ़-चढ़कर सदस्यता अभियान में भाग लिया।
सह संयोजक नवल कपूर ने कहा कि हमारा मकसद सभी व्यापारियों को समान अधिकार वाले व्यापार महासंघ का गठन करना था। जिसके चलते व्यापारी भाईयों के सहयोग से व्यापारियों का स्थानीय स्तर पर नगर निगम का पहला व्यापार महासंघ का गठन हुआ। जिसके सदस्यता अभियान व्यापारी भाईयों ने पूर्ण सहयोग कर सदस्य बनने व बनाने में मदद कर रहे हैं ।
सदस्यता अभियान में पूर्व व्यापार सभा अध्यक्ष सूरज गुल्हाटी, राजेन्द्र सेठी, मोटर पार्टस एसोसिएशन अध्यक्ष चन्द्रशेखर जैन, स्वर्ण कार संघ अध्यक्ष यशपाल पंवार, पार्षद अजीत सिंह गोल्डी, होटल एसोसिएशन अध्यक्ष मदन नागराज, महामंत्री अंशुल अरोड़ा, क्षेत्र रोड व्यापार संगठन अध्यक्ष राजेश भट्ट, स्वर्णकार संघ उपाध्यक्ष हितेन्द्र पंवार, बर्तन एसोसिएशन अध्यक्ष प्रवीन अग्रवाल, प्रचून व्यापर संघ अध्यक्ष गिरिराज गुप्ता, मेन बाजार व्यापार संघ महामंत्री ललित सक्सेना, स्वर्णकार संघ से विवेक वर्मा, नागेन्द्र सिंह, रमनप्रीत सिंह, हरीश दरगन, अतुल सरीन, अशोक नेगी, राजेश अरोड़ा, सरदार प्रीतपाल सिंह जस्सल, हरीश गावडी, विशाल अग्रवाल, संजय पंवार, प्रदीप कुमार, रमन अरोड़ा, रवि चैहान, राजपाल ठाकुर, सजल खुराना आदि मौजूद थे।

कृषि कानून किसानों के हित में लाई है केन्द्र सरकार-मुख्यमंत्री

कृषि कानून के विरोध में भारत बंद में विपक्षी दलों के शामिल होने पर मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने अपने चुनाव घोषणा पत्र में कृषि कानून बनाने का वादा किया था, लेकिन आज वह विरोध में उतर आई है। उन्होंने कांग्रेस पर दोगला होने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस खुद तो बर्बाद है ही, वह किसानों को भी बर्बाद करना चाहती है। उन्होंने किसानों को आश्वस्त किया कि सरकार उनके हितों के प्रति सौ फीसदी प्रतिबद्ध है। वे किसी भ्रम में न पड़े। कोई ऐसा काम न हो, जिससे राज्य के अमन को नुकसान पहुंचे।
मुख्यमंत्री बीजापुर अतिथि गृह में किसान आंदोलन पर प्रतिक्रिया दे रहे थे। उन्होंने कहा कि कृषि कानूनों को लेकर किसानों को भ्रमित किया जा रहा है। पंजाब की कांग्रेस सरकार ने आंदोलन को गलत दिशा में मोड़ने का प्रयास किया। कृषि कानून किसानों के हित में है। इसकी बहुत लंबे समय से डिमांड चल रही थी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रसिद्ध कृषि विज्ञानी रहे स्वामीनाथन की रिपोर्ट के आधार पर कृषि कानून है। कानून के तहत किसानों के लिए अनेक विकल्प खोल दिए गए हैं। पहले किसान मंडी मे खरीदारी करता था। आज ओपन मार्केट कर दिया। उन्होंने कहा कि किसानों के बीच यह भ्रम फैलाने की कोशिश की जा रही है कि एमएसपी समाप्त हो रहा है। एमएसपी समाप्त नहीं हो रहा है।
मुख्यमंत्री ने प्रदेश के किसानों से अपील की कि वे बिल्कुल भ्रमित न हों। उन्होंने विश्वास दिलाया कि भजापा आपके हितों की संरक्षक है। लेकिन कांग्रेस जो कृषि कानून के विरोध में खुलकर आ रही है, दोगली है। उसने  2019 के घोषणा पत्र में है साफ लिखा कि वह एपीएमसी एक्ट को निरस्त कर देगी। कृषि उत्पादों के व्यापार की व्यवस्था करेगी।
आज वही कांग्रेस और उस राज्य के मुख्यमंत्री स्वयं इस आंदोलन में कूद गए। उन्होंने इसे दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया। उन्होंने  कहा कि जिस तरह के नारे लगाए जा रहे हैं, ऐसा लगता है कि कुछ लोग देश की अखंडता और एकता को नुकसान पहुंचाना चाहते हैं।  हम इसकी तीव्र भर्त्सना करते हैं। मुख्यमंत्री ने पीएम मोदी के गुजरात के किसानों को दी गई सस्ती बिजली का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि किसानों को दोगली कांग्रेस से बचने की जरूरत है। 

पेराई सत्र से पहले किसानों को भुगतान
मुख्यमंत्री ने किसानों के हितों को लेकर राज्य सरकार के फैसलों की भी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि शायद पहली बार हुआ कि नए पेराई सत्र से पहले किसानों को उनकी फसल का पूरा भुगतान कर दिया गया। किसानों से धान की खरीदारी हो रही है। 24 घंटे में बिलों का भुगतान आरटीजीएस के माध्यम से हो रहा है। इकबालपुर निजी मिल को सरकार ने 36 करोड़ की गारंटी देकर 22 हजार से अधिक किसानों को राहत दी।

आईएमए का 11 नवंबर को ओपीडी बंद का ऐलान

आयुर्वेद डॉक्टरों को सर्जरी की अनुमति देने का निजी एलोपैथी डॉक्टरों ने विरोध किया है। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) ने सरकार के फैसले के विरोध में आठ नवंबर को सांकेतिक प्रदर्शन और 11 नवंबर को निजी अस्पतालों में ओपीडी बंद करने का ऐलान किया है।

आईएमए का कहना है कि आयुर्वेद को बढ़ावा देने और आयुष पद्धति से सर्जरी करने पर कोई विरोध नहीं है, लेकिन आयुष के नाम पर ऐलोपैथी चिकित्सा एनेस्थीसिया व दवाईयों का इस्तेमाल किया जाएगा। इस मिश्रित पैथी से इलाज करने से मरीजों की जान को खतरा होगा।

केंद्र सरकार ने आयुर्वेद अध्ययन के पाठ्यक्रम में सर्जिकल प्रक्रिया को भी जोड़ा है। इससे आयुष शिक्षा में पीजी व एमएस कोर्स करने वाले डॉक्टर हड्डी, ईएनटी, आंखों व दांतों की सर्जरी कर सकेंगे। ऐलोपैथी डॉक्टर इसी का विरोध कर रहे हैं। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के राष्ट्रीय वरिष्ठ उपाध्यक्ष डॉ.डीडी चैधरी का कहना है कि आठ नवंबर को सभी निजी ऐलोपैथी डॉक्टर अपने-अपने क्षेत्रों में सांकेतिक प्रदर्शन करेंगे। 11 नवंबर को सभी निजी अस्पतालों में ओपीडी बंद रहेगी। कोरोना महामारी के चलते इमरजेंसी सेवा ही उपलब्ध होगी।

आईएमए का कहना है कि आयुर्वेद को बढ़ावा देने और आयुष चिकित्सा पद्धति से सर्जरी करने का विरोध नहीं है, लेकिन पहले आयुष पद्धति में एनेस्थीसिया को विकसित करें। आयुष व मॉर्डन मेडिकल से गंभीर मरीज पर होने वाले रिएक्शन पर बिना रिसर्च किए सरकार ने सर्जरी की अनुमति दे दी। कहा कि यदि एलोपैथिक सर्जरी में मरीज को आयुष का लेप लगाया गया तो मरीज की मौत भी हो सकती है।

भारतीय चिकित्सा परिषद के अध्यक्ष डीके शर्मा ने कहा सरकार ने आयुष चिकित्सा को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। वर्तमान में सेवाएं दे रहे आयुष डॉक्टरों को सर्जरी करने की अनुमति नहीं है। सरकार ने आयुर्वेद शिक्षा के पाठ्यक्रम में सर्जिकल प्रक्रिया को शामिल किया है। पीजी व एमएस करने वाले नए आयुर्वेद डॉक्टरों को ही हड्डी, ईएनटी, आंख व दांतों की सर्जरी की अनुमति होगी। इस पर ऐलोपैथी डॉक्टरों को किसी तरह की दिक्कत नहीं होनी चाहिए। आयुर्वेद डॉक्टर भी ऐलोपैथी डॉक्टर की तरह साढ़े पांच साल कोर्स करके आता है।

गंगा स्नान को प्रशासन ’ना’, गाइडलाइन का पालन करे

हरिद्वार में 30 नवंबर के कार्तिक पूर्णिमा (पूर्णमासी) के गंगा स्नान को प्रशासन ने कोरोना संक्रमण को देखते हुए रद कर दिया है। बाहरी राज्यों से आने वाले तीर्थ यात्रियों के लिए 29 और 30 नवंबर को हरिद्वार जिले की सीमाएं सील रहेंगी। हरकी पैड़ी पर स्नान पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाया जाएगा। कार्तिक पूर्णिमा का गंगा स्नान रद्द होने के बाद हरकी पैड़ी पर कोई भी यात्री या फिर स्थानीय व्यक्ति स्नान को न पहुंच सके इसके लिए हरकी पैड़ी पर पुलिस का पहरा होगा। हरकी पैड़ी और आसपास के गंगा घाटों में पुलिसकर्मियों की ड्यूटी लगाई जाएगी। इसके लिए नगर कोतवाली पुलिस ने दो प्लाटून पीएसी के अलावा 20 दरोगा और 50 कांस्टबल की मांग की है।
हरिद्वार में 30 नंवबर को होने वाले कार्तिक पूणिमा के स्नान पर रद्द कर दिया गया है। साथ ही सीमाओं पर चैकसी बढ़ाने की तैयारी है। सीमाओं को सील किया जाएगा, ताकि कोई भी यात्री हरिद्वार में न आ सकें। स्थानीय लोगों के लिए भी हरकी पैड़ी पर प्रतिबंध किया गया है। उधर श्रीगंगा सभा और व्यापारी इसका विरोध कर चुके है। इनका कहना है कि हरकी पैड़ी को प्रतिबंध से मुक्त किया जाए। बीते बुधवार को प्रशासन के साथ हुई बैठक में व्यापारी और गंगा सभा के पदाधिकारियों ने अपनी नाराजगी जाहिर कर दी थी।
जिला प्रशासन के आदेशों के पालन के लिए पुलिस पूरी तरह तैयार हो गई है। हरकी पैड़ी पर स्नान के दिन पुलिस का पहरा रहेगा। हरकी पैड़ी, सीसीआर टॉवर समेत अन्य जगह बैरिकेडिंग भी की जाएगी। इसके लिए दो प्लाटून पीएसी के साथ ही 20 दरोगा और 50 पुलिसकर्मियों की मांग की है। यह पुलिसकर्मी स्नान के दिन ड्यूटी करेंगे। नगर कोतवाली प्रभारी अमरजीत सिंह ने बताया कि स्नान के रद्द होने के बाद पुलिसकर्मियों की अतिरिक्त ड्यूटी लगाई जाएगी। इसके लिए डिमांड भेज दी गई है।

अपने घरों में ही मां गंगा का स्मरण कर स्नान करें-अशोक कुमार
पुलिस महानिदेशक लाॅ एंड आर्डर उत्तराखंड अशोक कुमार ने कहा कोविड-19 के दृष्टिगत, 30 नवम्बर 2020 को कार्तिक पूर्णिमा के पावन पर्व पर सभी श्रद्धालुओं से विशेष अपील। उन्होंने कहा कृपया प्रशासन का सहयोग करें और कोरोना काल में अपने घरों में ही मां गंगा का स्मरण कर स्नान करें। आप सभी से अनुरोध है इस वर्ष 30 नवम्बर को कार्तिक पूर्णिमा पर्व पर स्नान करने हरिद्वार न आएं।

हादसे में मृतक बागड़ियों के परिजनों को आर्थिक मदद करने पर मेयर ने जताया सीएम का आभार

सड़क हादसे में मृतक आश्रितों को मेयर अनिता ममगाई ने आज सहायता राशि के चेक सौंपे। मेयर ने पीड़ित परिवारों के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त की।

मेयर अनिता ममगाईं ने मुख्यमंत्री राहत कोष के जरिए बागड़ी परिवारों को मिली साढे तीन लाख रुपये की धनराशि के चेक दिया।

गौरतलब है कि पिछले माह मध्य रात्रि को एक अनियंत्रित ट्रक देहरादून रोड स्थित बालाजी बगीचे के समीप सड़क किनारे रह रहे बागड़ियो को अपनी चपेट में ले लिया था। इस हादसे में तीन लोगों की दुखद मृत्यु हो गई थी जबकि एक व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हो गया था। मृतक परिवारों को सरकार की ओर से आर्थिक मदद दिलाई जाने के लिए मेयर अनिता ने मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपा था। जिसके बाद मुख्यमंत्री ने तत्काल आवश्यक कदम उठाते हुए मृतक आश्रितों के लिए एक -एक लाख व घायल के लिए 50 हजार रुपये की राहत राशि देने की घोषणा की थी।
मौके पर इस दौरान पार्षद अनिता रैना, पंकज शर्मा, अनिल ध्यानी, राजपाल ठाकुर, अनिकेत गुप्ता, जॉनी लांबा, नेहा नेगी, महेन्द्र वर्मा आदि मौजूद रहे।

सांई घाट पर पूजा करने पहुंची महिला गंगा की तेज धारा में बही

करवा चौथ पर तीर्थनगरी से बुरी खबर है। यहां के खतरनाक गंगा घाटों में से एक सांई घाट में करवा चौथ की पूजा करने पहुंची एक व्रती महिला डूब गई।
दरअसल शाम करीब साढ़े सात बजे करीब शांतिनगर जैन मंदिर के समीप रहने वाली महिला बाॅबी अपने पति के साथ सांई घाट पूजा की थाल लेकर पहुंची। गंगा में पति की दीर्घायु और मां के आशीर्वाद हेतु महिला अर्चना कर ही रही थी। तभी महिला का संतुलन अचानक बिगड़ गया और वह गंगा की तेज धारा की चपेट में आ गई। एकाएक महिला गंगा की धारा में बह गई। यह देख आसपास लोगों में हड़कंप मच गया। पुलिस सूचना पाकर पहुंची मगर, महिला का कुछ पता नहीं चल सका। चैकी इंचार्ज त्रिवेणी घाट उत्तम सिंह रमोला ने बताया कि सांई घाट पर आई महिला का अभी कुछ पता नहीं चल सका है।

हाईकोर्ट के फैसले पर हैरानी जताई, कहा-समीक्षा करेंगे, फिलहाल अन्य कोई नही की कोई टिप्पणी

-विपक्षी खेमे में फैसला आने के बाद बची खलबली

आखिरकार देश की सर्वोच्च अदालत में सत्य की जीत हुई। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के खिलाफ हाईकोर्ट के सीबीआई जांच कराने वाले आदेश ने हैरान जरूर किया था। मगर, सुप्रीम कोर्ट ने इस आदेश को रद्द करते हुए आश्चर्य जताया कि हाईकोर्ट ने ऐसा आदेश कैसे पारित किया? जबकि मुख्यमंत्री इस मामले में पक्षकार ही नहीं थे। उनके खिलाफ जांच की कोई मांग भी नहीं थी। सुप्रीम कोर्ट ने इसी बात को ध्यान में रखते हुए सीबीआई जांच के हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी है, साथ ही सभी पक्षकारों को नोटिस जारी किए हैं। इनका जवाब दाखिल करने का चार सप्ताह का समय भी दिया है।

एससी में सीएम के वकील ने कहा, बेवजह नाम घसीटा गया
सुप्रीम कोर्ट में हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के वकील ने कहा कि राज्य की जनता ने उन्हें चुना है, राजनीतिक लाभ के लिए विवाद में उनका नाम बेवजह डाला गया है। उन्होंने कोर्ट में यह भी तर्क दिया कि हाईकोर्ट में उमेश शर्मा ने सीबीआई जांच जैसा कोई मांग नहीं की थी। उमेश शर्मा की याचिका में सिर्फ उसके खिलाफ देहरादून में दर्ज एफआइआर को रद्द करने की मांग की गई थी। इसके विपरीत हाईकोर्ट ने न सिर्फ उमेश के खिलाफ दर्ज एफआइआर रद्द करने का आदेश सुनाया बल्कि मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के खिलाफ सीबीआई जांच करने का आदेश दे दिया। सीएम ने अपनी याचिका में लगाए गए आरोप को फर्जी और आधारहीन कहा।

मूल मुद्दा तो भटक गया…
दरअसल देहरादून के राजपुर थाने में पत्रकार उमेश शर्मा सहित अन्य के खिलाफ सेवानिवृत प्रोफेसर हरेंद्र सिंह रावत ने ब्लैकमेलिंग, दस्तावेजों की कूट रचना और गलत तरीके से बैंक खातों की जानकारी हासिल करने का मुकदमा दर्ज कराया था। उन्होंने आरोप लगाया था कि उमेश शर्मा ने सोशल मीडिया का दुरूपयोग किया और एक वीडियो डाली। इसमें प्रोफेसर रावत और उनकी पत्नी सविता रावत के खाते में नोटबंदी के दौरान झारखंड के अमृतेश चैहान की ओर से 25 लाख रुपये जमा करने की बात कही गई थी और यह रकम को त्रिवेंद्र सिंह रावत को देने को कहा गया था। इसके अलावा सविता रावत को मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की सगी बहन बताया गया था। प्रोफेसर हरेंद्र सिंह ने सभी तथ्यों को झूठा बताया था।
बड़ा सवाल तो यह है कि कैसे हम दूसरे अनजान व्यक्ति की बैंक संबंधी डिटेल प्राप्त कर सकते है? आयकर विभाग के अलावा यह जानकारी बैंक भी अन्य किसी को नही देता है। मसलन यदि कोई आपराधिक मामला है तो बैंक जांच के दौरान पुलिस अथवा जांच एजेंसी को जानकारी मुहैया कराता है। इस मामले में देखे तो तथाकथित पत्रकार ना तो जांच एजेंसी है ना ही अधिकृत व्यक्ति। ऐसे में बैंकों की भूमिका भी संदिग्ध हो जाती है। सेवानिवृत प्रोफेसर हरेंद्र सिंह रावत की शिकायत पर तो अभी तक कोर्ट के द्वारा कार्रवाई भी नही की गई है?

व्यक्ति एक दलीलें दो….
देश के जाने माने वकील कपिल सिब्बल भी गजब के आदमी निकले। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के स्टिंग मामले में इन्ही वकील साहब ने कोर्ट को उमेश कुमार को ब्लेकमेलर बताया है। जबकि इस मामले में वकील साहब तथाकथित पत्रकार को ईमानदार बता रहे है। अन्य राज्यों में लंबित मुकदमें को लेकर उन्हें झूठा फंसाने की बात कह रहे है। वकील साहब पहले तय कर ले कि आप किस केस में सच बोल रहे है और किस केस में झूठ?

केस को हाईप्रोफाइल बनाने और सुर्खियां बटोरने की कोशिश…
तथाकिथत पत्रकार उमेश जे कुमार की और से इस मामले को हाईप्रोफाइल बनाने और सुर्खियां बटोरने के लिए इस्तेमाल करना प्रतीत हो रहा है। जानकार बताते है कि अपनी गर्दन बचाने के लिए हाईकोर्ट में केस का रुख मोड़ा गया है। वहीं, राज्य सरकार की ओर से पेश हुए वकील जानेमाने वकील कपिल सिब्बल और चालाक पत्रकार की चालो में उलझ गये। जिससे केस ने दूसरा ही रुख मोड़ लिया।

कथित पत्रकार की सीबीआई जांच मांग जोर पकड़ने लगी
सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद सोशल मीडिया में कथित पत्रकार के खिलाफ सीबीआई जांच की मांग जोर पकड़ने लगी है। बेशुमार दौलत के मालिक और कथित तौर पर अन्य राज्यों में कई मुकदमों का सामना कर रहे पत्रकार को लेकर लोगों में नाराजगी दिखाई दे रही है। लोग ईमानदार मुख्यमंत्री पर लांछन लगाने को लेकर इसकी ही सीबीआई जांच कराने की मांग कर रहे है।

ट्रांसफार्मर से टकराकर आदमी ने तोड़ा दम, स्थानीय लोगों ने रेलवे के खिलाफ की नारेबाजी

25 अक्टूबर की रात 38 वर्षीय प्रदीप पाल पुत्र चंद्रभान की पुराना रेलवे स्टेशन के पास सड़क के बीचों बीच बने ट्रांसफार्मर से टकराकर मौत हो गई। प्रदीप पाल ढालवाला से काम कर अपने बनखंडी स्थित घर लौट रहे थे। घटना उक्त तिथि को रात्रि करीब नौ बजे के आसपास की है।

26 अक्टूबर को भाजपा नेता व पूर्व जिला भाजपा कार्यकारिणी सदस्य सुभाष पाल (मृतक का बड़ा भाई) ने कोतवाली पुलिस को तहरीर दी और रेलवे के तीन अधिकारियों अवर अभियंता, सहायक अभियंता और अधीक्षक अभियंता पर लापरवाही का आरोप लगाया है। उन्होंने तीनों अधिकारियों के खिलाफ हत्या के मामले में मुकदमा दर्ज करने की मांग की। वहीं इससे पूर्व दिनभर बनखंडी तथा स्थनीय लोगों ने मार्ग को बंद कर जाम लगाया और रेलवे प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। पीड़ित के परिवार को उचित मुआवजा देने की भी मांग की।

दरअसल ऋषिकेश रेलवे स्टेशन (पुराना) में रेलवे द्वारा नई सड़क का निर्माण कार्य किया जा रहा है। इस दौरान निर्माण कार्य पूरा भी नहीं हुआ है लेकिन पुराने रास्ते (सड़क) को समय-समय पर बैरीगेटिंग लगाकर बंद कर दिया जाता है। इस मार्ग पर हजारों वाहन दिन-रात सफर करते है। रेलवे द्वारा निर्माण कार्य पूरा भी नहीं हुआ है लेकिन सारा ट्रेफिक नए रास्ते (सड़क) में डाल दिया गया है। यहां सुरक्षा के कोई मानक नहीं अपनाये जा रहे है। इस सड़क पर लाईट आदि की भी कोई व्यवस्था नहीं है। सड़क के बीचों बीच बहुत बड़ा ट्रांसफार्मर भी है। बिना हटाये इस मार्ग पर ट्रेफिक डायवर्ट करना स्थानीय लोगों के लिए जानलेवा साबित हो रहा है। जबकि क्षेत्रीय लोगों ने रेलवे अधीक्षक को दुर्घटना की आंशका के चलते पूर्व में कई बार अवगत कराया है।