गंगा का जलस्तर बढ़ने से टापू पर फंसे पांच, पुलिस ने निकाला

लक्ष्मणझूला थानाध्यक्ष राकेन्द्र सिंह कठैत को पुलिस कंट्रोल रूम से सूचना मिली कि नीलकंठ बाइपास मार्ग पर स्थित गोवा बीच पर अचानक पानी आ जाने के कारण दो विदेशी नागरिकों सहित 5 लोग टापू पर फंस गए हैं। सूचना प्रसारित होते ही आनन-फानन में थाना लक्ष्मण झूला व जल पुलिस के जवान मौके के लिए रवाना हो गए। गोवा बीच पर दो विदेशी नागरिकों सहित 5 लोग फंसे हुए थे। इन्हें जल पुलिस व स्थानीय पुलिस ने डेढ़ घंटे तक रेस्क्यू अभियान चलाकर बड़ी मुश्किल से बाहर निकाला। थानाध्यक्ष ने सभी को चेतावनी देकर छोड़ा। थानाध्यक्ष राकेन्द्र सिंह कठैत ने इनकी पहचान लिलिया निवासी यूक्रेन, मेल निवासी फ्रांस, हेमलता पुत्री मोहन निवासी उत्तम नगर नई दिल्ली, विकास शर्मा पुत्र जगमोहन शर्मा और आकाश शर्मा पुत्र चंद्रशेखर शर्मा दोनों निवासी गंगानगर ऋषिकेश के रूप में कराई।

गांव में शराब बनाई तो 10 हजार रूपए का लगेगा जुर्माना

ऋषिकेश की ग्राम सभा गुमानीवाला क्षेत्र में शराब बनाई और बेची तो दस हजार रूपए के जुमाने के साथ सामाजिक बहिष्कार किया जाएगा। यह निर्णय ग्राम सभा की आम सभा की बैठक में लिया गया।

गुमानीवाला की ग्राम प्रधान दीपिका व्यास की अध्यक्षता और ग्राम विकास अधिकारी जगेंद्र राणा के संचालन में आहूत की गई बैठक में शराब जैसी कुरीतियों को रोकने के लिए इसे एक अच्छी पहल बताया गया। गांव की पिंकी गुसाईं ने मांग रखी कि गांव में शराब पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगना चाहिए। उन्होंने बताया कि शराब ने कई परिवार बर्बाद कर दिए हैं। नौनिहालों का भी जीवन बर्बाद हो रहा है। इसके बाद ग्रामीणों ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया कि जो व्यक्ति गांव में शराब बनाएगा और बेचेगा उस पर पंचायत की ओर से 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा और ऐसे व्यक्ति का सामाजिक बहिष्कार भी किया जाएगा।

इस अवसर पर विभिन्न विभागों को प्रस्ताव भेजे गए। इसमें वृद्धा पेंशन के 45, विधवा पेंशन के 17, विकलांग के 11 लोगों के प्रस्ताव समाज कल्याण विभाग को भेजे गये। पंचायत सदस्य राजेश व्यास ने प्रस्ताव रखा कि गुमानीवाला ग्राम पंचायत में सम्मिलित राजस्व गांव बीबीवाला का नाम बदल कर शहीद हमीर पोखरियाल के नाम पर हमीरपुर रखा जाए। साथ ही प्रस्ताव संख्या 06 में राजेश व्यास ने प्रस्ताव रखा कि कांजी हाउस की तीन बीघा जमीन पर 16 बेड वाला हॉस्पिटल बनाया जाए।

चारों धामों को श्राइन बोर्ड से जोड़ने पर गाडू घड़ा का होगा विरोध

राज्य सरकार के राज्य के चारों धामों को श्राइन बोर्ड (देवस्थानम अधिनियम) से जोड़ने के फैसले का देवभूमि तीर्थ पुरोहित हक हकूकधारी का विरोध करेगी। तीर्थ पुरोहितों ने बैठक कर गाडू घड़ा यात्रा का पूर्ण रूप से विरोध दर्ज करने का निर्णय लिया है।

रविवार को हरिद्वार रोड स्थित भगवान भवन आश्रम में देवभूमि तीर्थ पुरोहित हक हकूक धारी महापंचायत की बैठक आयोजित की गई। बैठक में महा पंचायत के अध्यक्ष कृष्णकांत कोठियाल ने कहा कि गाडू घड़ा यात्रा के आयोजन का पंचायत पूर्ण रूप से विरोध करेगी। इसके अलावा बैठक में निर्णय लिया गया कि फरवरी के प्रथम सप्ताह में देश के प्रमुख संतों के सानिध्य में अखिल भारतीय स्तर का कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। संयोजक सुरेश सेमवाल ने बताया कि फरवरी के प्रथम सप्ताह में देवस्थानम अधिनियम के विरोध में अखिल भारतीय महापंचायत का आयोजन हरिद्वार में किया जाएगा। इसके अलावा महापंचायत का प्रतिनिधिमंडल प्रयागराज में देश के चारों पीठों के शंकराचार्य, अखाड़ा परिषद, भारत साधु समाज के अलावा अन्य सभी धार्मिक संगठनों के लोगों से मिलेगा। बैठक में महापंचायत के महामंत्री हरीश डिमरी, महेश सेमवाल, आलोक सेमवाल, जगमोहन उनियाल, विनोद शुक्ला, उमेश सती, सतेंद्र सेमवाल, डा. बृजेश सती आदि मौजूद रहे।

7 जनवरी को देहरादून में रहेगा रुट डायवर्ट, जानकारी रखें और असुविधा से बचे

उत्तराखंड विधानसभा के सात जनवरी को होने वाले विशेष सत्र की तैयारियां शुरू हो गई हैं। इस कड़ी में सोमवार को कार्यमंत्रणा समिति की बैठक बुलाई गई है। विशेष सत्र में अनुसूचित जाति और जनजाति के लिए अगले 10 साल तक आरक्षण बढ़ाने के केंद्र सरकार के निर्णय के मद्देनजर अनुसमर्थन प्रस्ताव पारित किया जाएगा। केंद्र सरकार द्वारा संविधान में दी गई व्यवस्था के अनुसार अनुसूचित जाति और जनजाति के लिए अगले 10 साल के लिए आरक्षण की अवधि को बढ़ाया गया है। अब राष्ट्रपति से इसे अनुमोदन मिलना है। इससे पहले सभी राज्यों की विधानसभाओं में यह प्रस्ताव पारित कराया जाना जरूरी है। इसी के दृष्टिगत उत्तराखंड विधानसभा का भी विशेष सत्र सात जनवरी को आहूत किया गया है। राजभवन की मंजूरी के बाद विशेष सत्र की अधिसूचना जारी की जा चुकी है।
अब सत्र की तैयारियां शुरू हो गई हैं। इस कड़ी में सोमवार को विधानसभा की कार्यमंत्रणा समिति की बैठक बुलाई गई है। विधानसभा अध्यक्ष प्रेेमचंद अग्रवाल ने बताया कि कार्यमंत्रणा में सत्र के सफल संचालन के लिए विधिवत कार्यक्रम की रूपरेखा तय की जाएगी। सात जनवरी को होने वाले एकदिवसीय विधानसभा विशेष सत्र के लिए पुलिस ने कमर कस ली है। सत्र के दौरान यातायात व्यवस्था को बनाए रखने के लिए पुलिस ने रूट प्लान जारी कर दिया है। इसके साथ ही धरना-प्रदर्शन को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था को लेकर प्रगति विहार, शास्त्री नगर, बाईपास और डिफेंस कॉलोनी पर बैरियर स्थापित किए गए हैं।
रूट प्लान देखकर निकले
सभी भारी वाहनों को कारगी चैक व डोईवाला से दूधली रोड की ओर डायवर्ट किया जाएगा।
देहरादून से हरिद्वार, ऋषिकेश, टिहरी, चमोली जाने वाले वाहन ईसी रोड से नेहरू कॉलोनी, फव्वारा चैक से छह नंबर पुलिया से रायपुर थानो होते हुए जाएंगे।
धर्मपुर चैक से आइएसबीटी की ओर जाने वाला यातायात माता मंदिर रोड होते हुए पुरानी बाईपास चैकी से आइएसबीटी की ओर जाएगा।
मोहकमपुर की ओर से मसूरी जाने वाले वाहन जोगीवाला, रिंग रोड, लाडपुर, सहस्रधारा क्रॉसिंग, आइटी पार्क से मसूरी मार्ग की ओर जाएगा।
मोहकमपुर से देहरादून शहर की ओर आने वाले वाहन जोगीवाला, छह नंबर पुलिया, नेहरू कॉलोनी, आराघर, ईसी रोड होते हुए देहरादून आएंगे।
प्रत्येक संभावित जुलूस अनुमति प्राप्त करने के बाद केवल बन्नू स्कूल से निकलेंगे और इनके वाहन भी बन्नू स्कूल में पार्क किए जाएंगे।
डोईवाला से देहरादून की ओर आने वाली सिटी बसें जोगीवाला से डायवर्ट की जाएंगी जो कि कैलाश अस्पताल से यू-टर्न लेंगी।
डिफेंस कॉलोनी जाने वाले व्यावसायिक वाहनों को नेहरू कॉलोनी थाना कट से पुरानी चैकी बाईपास की ओर डायवर्ट किया जाएगा। स्थानीय निवासियों के व्यक्तिगत वाहनों को विशेष परिस्थितियों मे ही डायवर्ट किया जाएगा।
आइएसबीटी से ऋषिकेश, हरिद्वार की ओर जाने वाले समस्त भारी वाहन, परिवहन निगम की रोडवेज बसें कारगी चैक से दूधली होते हुए भेजी जाएंगी।
सामान्य स्थिति में व्यक्तिगत वाहनों को डायवर्ट नहीं किया जाएगा, लेकिन व्यावसायिक वाहनों को लगातार डायवर्ट किया जाएगा। वे किसी भी दशा में विधानसभा की ओर नही जाएंगे।

मुख्यमंत्री से मिलेगे मीट व्यवसाई, रखेंगे अपनी बात

मीट व्यापारियों को नगर निगम की ओर से 31 दिसंबर तक का अल्टीमेटम मिला है। नगर आयुक्त ने साफ कहा कि बिना लाइसेंस के निगम में मीट व्यवसाय नहीं होने दिया जाएगा। वहीं, 31 दिसंबर से पूर्व जनप्रतिनिधियों के नेतृत्व में मीट व्यापारियों का दल मुख्यमंत्री के समक्ष अपनी समस्या रखेगा।

बृहस्पतिवार को मुख्य नगर आयुक्त नरेन्द्र सिंह क्वींरियाल के पार्षद कक्ष में पार्षदों के नेतृत्व में मीट व्यापारियों का एक दल मिला। पार्षद मनीष शर्मा ने कहा कि मीट व्यापारियों को हटाने से पहले इन्हें व्यवसाय की व्यवस्था की जाए। इससे इनके परिवार का भरण पोषण सुचारू रूप से चल सके। इस पर एमएनए नरेन्द्र सिंह क्वींरियाल ने मीट व्यापारियों को 31 दिसंबर तक का अल्टीमेटम दिया है। उन्होंने कहा कि नगर निगम में बिना लाइसेंस मीट का व्यवसाय नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने 31 दिसंबर तक अपनी व्यवस्था अन्य जगह करने का समय दिया है।

वहीं, पार्षद मनीष मिश्रा ने कहा कि वह मीट व्यापारियों के साथ 31 दिसंबर से पहले मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत से मुलाकात करेंगे। उन्होंने कहा कि सीएम ने निकाय चुनाव के वक्त निगम में शामिल नए ग्रामीणों क्षेत्रों को टैक्स से मुक्त किए जाने का वायदा किया था, तो मीट व्यापारियों को भी राहत दी जाए। नगर आयुक्त से मुलाकात करने वालों में पार्षद जगत सिंह नेगी, राजेन्द्र बिष्ट, देवेन्द्र प्रजापति, विजेन्द्र मोगा, भगवान सिंह, मीट व्यापारी चांदवीर, यासीन कुरैशी, सुरेन्द्र, बाबू खान, नदीम, जीशान, याशीन, नोबीन, जीशान, फईम, भूरा, हरि, राजेश उनियाल, सौराज बिष्ट, रामपाल, आशू, मोहनलाल, प्रदीप कुमार आदि शामिल रहे।

चारधाम सहित हिमालयी क्षेत्रों में बर्फबारी से एक बार फिर ठंड बढ़ी

उत्तराखंड में मौसम के मिजाज में कोई बदलाव नहीं देखने को मिला है। प्रदेश के ज्यादातर इलाकों में एक बार फिर से हिमपात होने से ठंड में एकाएक बढ़ोत्तरी हुई है। चार धाम के साथ ही उच्च हिमालयी क्षेत्रों में हिमपात से कड़ाके की ठंड जारी है। प्रदेश के आठ शहरों में न्यूनतम तापमान पांच डिग्री सेल्सियस से भी कम है। इतना ही नहीं अधिकतम तापमान भी सामान्य से पांच से सात डिग्री सेल्सियस कम बना हुआ है। देहरादून स्थित राज्य मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार शनिवार को प्रदेश के ऊंचाई वाले इलाकों में बारिश और बर्फबारी के आसार हैं, वहीं निचले इलाकों में बादल छाए रहेंगे और हल्की बूंदाबांदी भी संभव है।
उत्तराखंड में शीतलहर का असर बना हुआ हैं। मसूरी, चमोली के जोशीमठ और कुमाऊं के चम्पावत में पारा तीन डिग्री सेल्सियस से भी कम है। शीतलहर के असर को देखते हुए हरिद्वार और नैनीताल में शुक्रवार को एक से बारहवीं तक के स्कूलों में अवकाश रहा। वहीं देहरादून में स्कूलों के समय में बदलाव किया गया है। राज्य मौसम विज्ञान केंद्र के निदेशक बिक्रम सिंह ने बताया कि रविवार तक प्रदेश में पश्चिमी विक्षोभ (वेस्टर्न डिस्टरबेंस) का प्रभाव बना रहेगा। बताया कि इस दौरान उत्तरकाशी, चमोली, रुद्रप्रयाग व पिथौरागढ़ जिले के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बारिश व बर्फबारी हो सकती है।
गंगा घाटी में भारी हिमपात से ठंड का कहर अपने चरम पर है। हाल ये है कि भीषण ठंड के कारण झाला से लेकर गंगोत्री तक कई झरने और नाले जम चुके हैं। गंगोत्री में भागीरथी (गंगा) के जिस हिस्से में बहाव कम है वहां भी पानी बर्फ बन चुका है। शीतलहर के कारण हर्षिल घाटी और गंगोत्री में पेयजल संकट गहरा गया है। लोग पानी का इंतजाम बर्फ गलाकर कर रहे हैं। गंगोत्री में इन दिनों 55 और भैरवघाटी में 40 लोग रह रहे हैं। ठंड के कहर का सबसे अधिक असर 2500 मीटर से अधिक ऊंचाई वाले इलाकों में है। जिला मुख्यालय उत्तरकाशी से 65 किमी दूर गंगोत्री की ओर सुक्की टॉप गांव से लेकर गंगोत्री तक अपनी सुंदरता बिखेरने वाले 40 से अधिक झरने व नाले जम चुके हैं। हर्षिल घाटी के आठ गांवों के अलावा गंगोत्री को पेयजल आपूर्ति करने वाले पेयजल स्रोत जम गए हैं।
हर्षिल के लोगों का कहना है कि हर्षिल घाटी में पाइपों के अंदर पानी जम चुका है। ऐसे में लोगों को पीने के पानी के लिए बर्फ पिघलानी पड़ रही है। झाला और धराली के बीच जो छोटी नदियां गंगा में मिलती हैं, उनका पानी भी मुहाने पर जम चुका है। शीतलहर के कहर से बर्फ बने नाले और झरने पर्यटकों को रोमांचित कर रहे हैं। लेकिन, स्थानीय लोगों के लिए के लिए यह किसी सजा से भी कम नहीं है।

शीतलहर की चपेट में उत्तर भारत, कई जिलों में ठंड से मौत की खबर

पहाड़ों में लगातार हो रही बर्फबारी के चलते उत्तरी भारत शीतलहर की चपेट में है। ठंड से अब तक देशभर के विभिन्न जिलों में 25 लोगों की जान चली गई।
इनमें चंदौली में 6, हमीरपुर में 4, बांदा, बलिया व गाजीपुर में 2-2, वाराणसी, भदोही, जौनपुर, आजमगढ़, मऊ, चित्रकूट, महोबा, फतेहपुर व हाथरस में एक-एक की मौत हुई है। प्रदेश में बागपत में न्यूनतम तापमान 4.9, मुजफ्फनरगर में 5 और सहारनपुर 6 व वाराणसी में 8.4 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया।
फिलहाल ठंड से राहत के कोई आसार नहीं नजर आ रहे हैं। पूर्वांचल में बीते 24 घंटे में 15 लोगों की जान चली गई। चंदौली जिले में मजनू (5), इंद्रनाथ सिंह चैहान (62), लक्ष्मण यादव (65), रज्जन मौर्या (60), रामवृक्ष मौर्य (60) और वीरेंद्र माली (55) की ठंड से मौत हो गई।
गाजीपुर में चमेला देवी (68) व रेखा (6) और बलिया में शिव शंकर यादव उर्फ पेटू (70), उपेंद्र यादव (48) की मौत हुई है। इसके अलावा वाराणसी में सिताबुन (75), भदोही में राजनारायण गुप्ता उर्फ नबी (53), जौनपुर में सालिक राम (50) और आजमगढ़ में बालचंद (58) तथा मऊ में एक अज्ञात वृद्ध की भी मौत हो गई।
बुंदेलखंड के महोबा में रूपरानी (70), हमीरपुर में समर (7), गजराज यादव (75), फूलमती (85) व सुखदेई सिंह (90) की भी ठंड से जान चली गई। चित्रकूट में जगदीश प्रसाद, बांदा में दुर्गेश लोध (38) और झंडू (90) की मौत हुई है। उधर, फतेहपुर जिले के असोथर क्षेत्र के बेसढ़ी गांव निवासी सेवानिवृत्त शिक्षक राजविभीषण राजपूत व हाथरस में अलीगढ़ रोड स्थित गांव तमनागढ़ी में एक बुजुर्ग की ठंड से मौत हो गई।
पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होते ही बृहस्पतिवार को पहाड़ों पर फिर बर्फबारी का दौर शुरू हो गया जिससे उत्तर भारत में ठंड का प्रकोप बढ़ गया। उत्तराखंड के केदारनाथ, बदरीनाथ, तुंगनाथ, हेमकुंड साहिब, मद्महेश्वर समेत ऊंचाई वाले स्थानों व हिमाचल के रोहतांग और किन्नौर में हिमपात हुआ है। वहीं जम्मू लगातार तीसरे दिन धुंध की चपेट में रहा, शुक्रवार को जम्मू-कश्मीर में कई जगहों पर हल्की बर्फबारी या बारिश होने की संभावना है।
उत्तराखंड के केदारनाथ धाम में बृहस्पतिवार दोपहर 12 बजे के बाद से हल्की बर्फबारी शुरू हो गई थी, जो शाम तक जारी रही। यहां पहले से छह फुट से अधिक बर्फ मौजूद है। उधर, चमोली जिले में 12-13 दिसंबर को हुई बर्फबारी के चलते अभी भी करीब 90 गांवों में विद्युत आपूर्ति ठप पड़ी है। वहीं सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) ने बृहस्पतिवार को नीती और माणा घाटियों को जोड़ने वाली सड़कों को वाहनों की आवाजाही के लिए सुचारु कर दिया है।
हिमाचल में ताजा बर्फबारी के चलते प्रशासन ने सैलानियों को सोलंगनाला जाने से रोक दिया है। रोहतांग दर्रा के साथ कुल्लू, लाहौल और किन्नौर की ऊंची पहाड़ियों में बृहस्पतिवार को रुक-रुककर बर्फबारी का दौर जारी रहा। खराब मौसम की वजह से गगल हवाई अड्डे में जहाज भी नहीं उतर पाए। वहीं हिमाचल में इस बार भी व्हाइट क्रिसमस की उम्मीद टूट गई है। मौसम विज्ञान केंद्र शिमला ने 22 से 25 दिसंबर तक पूरे प्रदेश में मौसम साफ रहने का पूर्वानुमान जताया है।
रिलकोट में बर्फबारी में फंसे जवान-पोर्टर सुरक्षित निकाले जाएंगेरू मुनस्यारी के रिलकोट में बर्फबारी के बीच फंसे आईटीबीपी के आठ जवानों और सात पोर्टरों को सुरक्षित निकालने की कोशिश शुरू हो गई हैं। आईटीबीपी ने रेलकोट में हैलीपेड तैयार कर लिया है। साथ ही एयरफोर्स अधिकारियों से फंसे जवानों और पोर्टरों को निकालने के लिए पत्र लिखा गया है।

सीमांत राज्यों में पलायन बड़ी चिंताः नीति आयोग

सचिवालय स्थित वीर चंद सिंह गढ़वाली सभागार में नीति आयोग के सदस्य रमेश चंद और कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल की उपस्थिति में प्रदेश के पर्वतीय क्षेत्रों से पलायन की समस्या पर चिन्तन विषयक बैठक सम्पन्न हुई।
सदस्य नीति आयोग रमेश चंद द्वारा उत्तराखण्ड के विभिन्न क्षेत्रों से पलायन पर चिन्ता व्यक्त करते हुए विशेषकर अभाव के कारण हो रहे पलायन को रोकने के लिए कारगर रणनीति बनाने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि सीमान्त क्षेत्र में जनसंख्या निर्वात नहीं होना चाहिये क्योंकि ये आबाद गांव सच्चे ‘‘सीमा प्रहरी’’ का कार्य करते हैं। राज्य में कृषि के प्रति घटते रूझान पर चिन्ता व्यक्त करते हुए उन्होंने सुझाव दिया गया कि ‘‘लैण्ड लीजिंग’’ कानून में परिवर्तन करके कान्ट्रेक्ट फार्मिंग को बढ़ावा दिया जाना होगा ताकि परती जमीन का उपयोग हो सके। पर्वतीय क्षेत्रों में सेटेलाइट सिटीज को विकसित करने का सुझाव भी दिया गया। उन्होंने समान परिस्थिति के पड़ोसी हिमाचल राज्य की रणनीति का भी अनुभव शामिल करने का अधिकारियों को सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड के सीमान्त क्षेत्रों से पलायन होना चिन्ता का विषय है। पलायन से गांव में रह रहे अन्य लोगों में भी असुरक्षा का वातावरण होता है जिससे गांव के अस्तित्व को भी खतरा हो जाता है।
कृषि मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि विकास के साथ-साथ पलायन सभी राज्यों में हुआ है, परन्तु उत्तराखण्ड सीमान्त क्षेत्र से जुड़ा होने के कारण यहां गांव खाली होना चिन्ता की बात है। कृषि मंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड की 90 प्रतिशत कृषि वर्षा पर निर्भर है तथा भौगोलिक परिस्थिति के कारण यहां विभिन्न योजनाओं में संचालित अवस्थापना निर्माण कार्यों में लागत अधिक आती है। उन्होंने कहा कि पलायन यहां की गंभीर समस्या है, इसीलिए भारत सरकार से हिमालयी राज्यों हेतु पृथक नीति बनाने का आग्रह किया गया तथा आपदा के मानकों को भौगोलिक स्थिति के अनुरूप सुसंगत करने का अनुरोध किया गया।
बैठक के प्रारम्भ में प्रभारी मुख्य सचिव/अपर मुख्य सचिव ओम प्रकाश ने कहा कि राज्य का लगभग 70 प्रतिशत भूभाग वन क्षेत्र है तथा कृषि जोत छोटी एवं वर्षा पर आधारित है। मैदानी क्षेत्रों की अपेक्षा कृषि भूमि की उत्पादकता कम है। उन्होंने सदस्य नीति आयोग का ध्यान आकृष्ट करते हुए गांव के आस-पास छोटे कस्बों को विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि भारत सरकार द्वारा विभिन्न योजनाओं में मिलने वाली धनराशि यहां के भौगोलिक परिस्थिति के अनुरूप कम है। उन्होंने गांववासी के कस्बों की ओर रूझान देखते हुए वहां पर्यटन, लघु उद्योगों तथा स्थानीय उत्पादों के व्यवसाय को प्रोत्साहित करने हेतु अधिक से अधिक सहायता की अपेक्षा की, तथा स्थानीय उत्पादों को मूल्यवर्धित रूप देने हेतु तकनीकि एवं ब्रांडिंग के सहयोग हेतु केन्द्रीय सहायता बढ़ाने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार द्वारा विभिन्न स्थानों में वैलनेस सेन्टर स्थापना की भी योजना है। उन्होंने वन औषधि पौध विकास एवं वैलनेस सेन्टर स्थापना गतिविधियों को प्रोत्साहन देने हेतु केन्द्र से सहयोग का अनुरोध किया। अपर मुख्य सचिव ओम प्रकाश ने राज्य की स्थिति का चित्रण करते हुए अवगत कराया कि सरकार द्वारा संचालित योजनाओं के समेकन से ही पलायन की समस्या का निराकरण किया जा सकता है।
बैठक में पलायन आयोग के उपाध्यक्ष एस.एस.नेगी द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों से पलायन की प्रकृति, परिमाण तथा अन्य पहलुओं पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए महत्वपूर्ण सुझाव भी दिये। सचिव, नियोजन अमित नेगी द्वारा सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए राज्य के महत्वपूर्ण आकड़े प्रस्तुत किये गये। अपर मुख्य सचिव द्वारा संक्षेप में राज्य की स्थिति का चित्रण करते हुए अवगत कराया कि सभी कार्यक्रमोंध्क्रियाकलापों के समेकन से ही पलायन की समस्या का सम्यक् निराकरण हो सकेगा।
बैठक में नीति आयोग के सलाहकार जितेन्द्र कुमार और संयुक्त सलाहकार मानस चैधरी ने भी प्रतिभाग किया। बैठक का संचालन अपर सचिव ग्राम्य विकास योगेन्द्र यादव द्वारा किया गया।

बिना मिलीभगत के संभव नही ई-वे बिल का 8500 करोड़ का फर्जीवाड़ा

जीएसटी में पंजीयन और ई-वे बिल की आसान प्रक्रिया का फायदा उठाकर उत्तराखंड में 8500 करोड़ रुपये मूल्य के फर्जी ई-वे बिल बनाने का मामला सोमवार को सामने आया। मात्र दो माह के अंतराल में यह बिल बनाए गए और इसके लिए प्रदेश में 70 फर्जी फर्मों को कागजों में उत्तराखंड में संचालित दिखाया गया। दो माह की मशक्कत के बाद पकड़ में आए इस मामले का खुलासा राज्य कर विभाग ने सोमवार को किया।
सोमवार को सचिवालय में आयोजित प्रेस वार्ता में राज्य कर आयुक्त सौजन्या ने बताया कि विभाग को इस बड़े फर्जीवाड़े की भनक करीब दो माह पूर्व लगी। जीएसटी में पंजीयन और ई-वे बिल के सरल तरीका का फायदा उठाकर 70 फर्जी फर्मों को उत्तराखंड के भिन्न हिस्सों में किराए पर लिए भवनों में दिखाया गया।
इन फर्मों में से 26 ने चप्पल की बिक्री अन्य राज्यों आंध्र प्रदेश, राजस्थान, तमिलनाडु और महाराष्ट्र में दिखाई। इसी के आधार पर 34 फर्मों ने 8500 करोड़ रुपये मूल्य के 12204 ई-वे बिल ऑनलाइन जनरेट किए। इसके जरिए करीब 1200 करोड़ रुपये से लेकर 8500 करोड़ रुपये तक का मूल्य वर्धन उत्पादों में दिखाया।
बड़ी संख्या में भारी मूल्य के ई-वे बिल सामने आने पर राज्य कर विभाग के अधिकारियों को शक हुआ और इसकी जांच की गई। राज्य कर विभाग की 55 टीमों ने ऊधम सिंह नगर और देहरादून में 70 फर्मों के ठिकानों पर दबिश दी। इन फर्मों ने उत्तराखंड में किराए के स्थानों से कारोबार किया जाना दिखाया था। छापेमारी में एक भी किरायानामा सही नहीं पाया गया और न ही कहीं उत्पादन होता मिला। साफ था कि सिर्फ कागजों में ही यह व्यापार किया जा रहा था।
सौजन्या के मुताबिक 80 लोगों ने 21 मोबाइल नंबर और ई मेल आईडी का उपयोग कर दो-दो की साझेदारी में 70 फर्म पंजीकृत कीं। पंजीयन लेते समय सभी साझीदारों ने स्वयं को हरियाणा या दिल्ली का रहने वाला बताया और उत्तराखंड में किराए पर व्यापार स्थल को दिखाते हुए पंजीयन हासिल किया। पंजीयन लेते समय बिजली के बिलों और किराएनामे का उपयोग किया गया और यह सब फर्जी पाया गया। इसमें करीब 1455 करोड़ रुपये के कर अपवंचन का मामला बन रहा है।
12 उपायुक्त, 55 अपर आयुक्त, 55 स्टेट टैक्स अधिकारी और 55 स्टेट टैक्स अधिकारी इस मुहिम में शामिल हैं। इसके अलावा मुख्यालय के दस अधिकारियों की कोर टीम भी इसमें शामिल रही। ये सभी अधिकारी पिछले 15 दिन से जांच में जुटे हुए थे। राज्य कर आयुक्त सौजन्या के मुताबिक जांच अभी जारी है। इन अधिकारियों ने सोमवार को करीब 55 स्थानों पर अलग-अलग छापेमारी की। राज्य कर आयुक्त, सौजन्या ने बताया कि इस तरह के फर्जी मामलों के लिए उत्तराखंड को किसी भी तरह से सेफ हेवन नहीं बनने दिया जाएगा। इस तरह के फर्जीवाड़ों की रोकथाम के लिए राज्य कर विभाग लगातार काम करता रहेगा।

वृद्धावस्था पेंशन में चयन प्रक्रिया गलत होने से साढ़े दस लाख की वित्तीय हानि

भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (कैग) ने समाज कल्याण विभाग की करोड़ों रूपए की वित्तीय गड़बड़ी का खुलासा किया है। कैग के अनुसार विभाग ने वृद्धावस्था पेंशन योजना की चयन प्रक्रिया में कई गलतियां की है। इससे साढ़े 10 लाख रूपए की वित्तीय हानि हुई है।

कैग ने राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम (एनएसएपी) के डेटा बेस की जांच में पाया कि 1,17,454 लाभार्थियों में से केवल 49,924 के मामलों में ही बीपीएल पहचान संख्या अंकित थी। शेष 67,530 लाभार्थियों ने बीपीएल पहचान संख्या नहीं दी। इनमें से 8,134 लाभार्थियों के अभिलेखों की जांच में 76 प्रतिशत यानी 6184 ऐसे लोगों को भी पेंशन बांट दी गई, जो बीपीएल की श्रेणी में नहीं थे। इससे विभाग को 7.25 करोड़ की चपत लगी। 614 प्रकरणों में विभाग ने 17 लाख रुपये अधिक भुगतान किया, जबिक 85 लाभार्थियों को डबल पेंशन देकर 21 लाख रुपये की वित्तीय हानि की।

लाभार्थियों के गलत आकलन से विभाग पर 87.89 करोड़ का अतिरिक्त बोझ पड़ा। वर्ष 2015-16 से 2017-18 के दौरान सरकार ने 7,65,599 लाभार्थियों के लिए 235.08 करोड़ की मांग की। इसके सापेक्ष उसे 180.48 करोड़ रुपये मिले। लेकिन विभाग ने 6,46,687 लाभार्थियों को 268.37 करोड़ वितरित किए। इसके चलते राज्य सरकार पर 87.89 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ा। ऐसा 33.29 करोड़ रुपये केंद्र से कम मांग के कारण हुआ।

विभाग में पेंशन भुगतान के लिए 12.36 करोड़ रुपये की धनराशि दी गई थी। ये धनराशि न तो बांटी गई न सरकार को समर्पित की गई। इसमें राज्यांश 11.08 करोड़ रुपये और केंद्राश 1.28 रुपये था। कैग को विभाग ने जवाब नहीं दिया कि पांच जिला कोषागारों में यह धनराशि क्यों पड़ी रही।

कैग ने पाया कि वर्ष 2017-18 में चमोली, रुद्रप्रयाग, देहरादून, हरिद्वार, नैनीताल, अल्मोड़ा, बागेश्वर, चंपावत और यूएस नगर में 34,551 लाभार्थियों को धन की कमी के चलते 15.25 करोड़ रुपये की बकाया पेंशन का भुगतान नहीं किया गया। वर्ष 2016 में 6,703 बुजुर्गों की पेंशन रोक दी गई। आधार कार्ड की अवधि बढ़ाए जाने के बावजूद बकाया पेंशन 7.79 करोड़ का भुगतान नहीं किया गया।

ये कमियां भी आईं सामने
1. पेंशन मामलों के अनुश्रवण व मूल्यांकन के लिए राज्य और जिलास्तर पर समितियां नहीं बनाई गई। राज्य स्तरीय समिति मुख्य अधिकारी की अध्यक्षता में गठित होनी है, जबकि जिला पंचायत अध्यक्ष की अध्यक्षता में जिलास्तरीय समिति का गठन होना था। लेकिन लेखा अवधि में ये दोनों समितियां नहीं बनीं।
2. कैग ने पाया कि विकास खंड, जनपद, नगर पालिका स्तर पर शिकायत निवारण प्रणाली का गठन नहीं किया गया। जबकि एनएसएपी के इसे लेकर दिशा-निर्देश हैं।
3. एनएसएपी की गाइडलाइन के हिसाब से विभाग में सोशल ऑडिट की भी व्यवस्था नहीं थी। कैग ने भौतिक सत्यापन की भी कमी पकड़ी।