31 मार्च की सुबह सात से सायं आठ बजे तक एक जिले से दूसरे जिले जाने की मिली छूट

प्रदेश के भीतर जो लोग एक जिले से दूसरे जिले में जाना चाहते हैं, वे लोग 31 मार्च को सुबह 7 बजे से सांय 8 बजे तक जा सकेंगे। मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने यह जानकारी देते हुए बताया कि केवल मंगलवार 31 मार्च के लिए ही यह अनुमति होगी। एक दिन का यह विंडो इसलिए दिया जा रहा है क्योंकि जगह-जगह से ऐसी बातें आ रही थी कि बहुत से लोग अपने काम से आए हुए थे और लॉकडाऊन के कारण अपने घर से बाहर फंसे हैं। बसों व टैक्सियों को सेनेटाइज करवाया जाना होगा। इसमें सोशल डिस्टेंसिंग का भी पालन किया जाना होगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सुबह सात से दोपहर एक बजे तक आवश्यक वस्तुओं की दुकानों को खोलने की व्यवस्था का अच्छा रेस्पोंस मिला है। इससे लोगों में घबराहट खत्म हुई है, भीङ भी नहीं हो रही। लोग भी अब समझने लगे हैं। इसलिए इसी व्यवस्था को जारी रखा जाएगा। उन्होंने बताया कि दिल्ली में जो उत्तराखंडवासी फंस गए हैं उनके लिए उत्तराखंड सदन ओपन कर दिया गया है। वहां उनके भोजन, मेडिकल आदि व्यवस्था है।

इसी प्रकार मुम्बई में भी उत्तराखंड भवन को लॉकडाऊन में फंसे उत्तराखंड के लोगों के लिए ओपन किया गया है। उन्होंने बताया कि हम दो तीन दिन में 500 चिकित्सकों की भर्ती करने जा रहे हैं। इससे हमारे यहाँ चिकित्सक पर्याप्त संख्या में हो जाएंगे। सीएम ने बताया कि पेंशनरों के लिए जीवन प्रमाण पत्र और वाहन चालकों के लिए ड्राइविंग लाइसेंस नवीनीकरण के लिए एक माह की छूट दी गई है।

असहाय की मदद को रायवाला पुलिस आई आगे, दिया तीन हफ्ते का राशन

थानाध्यक्ष रायवाला हेमंत खंडूरी ने बताया कि बीते गुरूवार की रात्रि छिद्दरवाला निवासी दीपक कुमार ने थाने पर फोन कर बताया कि उनका परिवार निर्धन है, पत्नी गर्भवती है और पिताजी भी आंखों से देख नहीं पाते है। उन्होंने बताया कि खाने के लिये भी कुछ नहीं है। इस पर थानाध्यक्ष ने वरिष्ठ उप निरीक्षक प्रेम सिंह नेगी को उक्त युवक के परिवार की मदद करने को कहा गया। इस पर एसएसआई ने रात्रि में ही दिए पते पर जाकर तीन सप्ताह का राशन उपलब्ध कराया।

राहगीरों को रोककर लंच पैकेट बांट रही रायवाला पुलिस
कोरोना वायरस की स्थिति में लॉक-डाऊन के दौरान थानाध्यक्ष रायवाला हेमंत खंडूरी के निर्देश पर राष्ट्रीय राजमार्ग से गुजरने वालों को लंच पैकेट व आवश्यक सामग्री वितरित की गयी। इसके अलावा थाने पर हाथ धुलवाकर व सेनेटाइज करवाकर खाना खिलाया गया। इसके बाद सभी को अपने-अपने गंतव्यों की ओर रवाना किया गया।

ऋषिकेश निगम ने एक-एक मीटर की दूरी पर मार्क लगाकर सोशल डिस्टेंसिंग कराई

कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने के उद्देश्य से चल रहे लॉकडाउन के दौरान नगर निगम प्रशासन ने संपूर्ण शहर को सैनिटाइजेशन करने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक रखी है। बृहस्पतिवार को भी दिनभर निगम के तमाम सफाईकर्मी नगर के विभिन्न क्षेत्रों में.स्चच्छता की मुहिम में जुटे रहे। इसके अलावा सोशल डिस्टेसिंग के लिए आवश्यक वस्तुओं की खरीदारी के समय दुकानों में उमड़ने वाली भीड़ को व्यवस्थित करने की दिशा में निगम प्रशासन ने समुचित उपाय किये। इस कड़ी में किराना व सब्जी की दुकानों में सोशल डिस्टेंसिंग के नियम का अनुपालन करने के लिए दुकान के बाहर कम से कम एक-एक मीटर की दूरी पर ग्राहकों के खड़े होने के लिए स्थान चिह्न्ति करवाया गया है। इसका बेहतर परिणाम भी वृहस्पतिवार को देखने को मिला और बुधवार के मुकाबले आज लोग अधिक सजग और जागरूक नजर आये।
नगर निगम महापौर अनिता ममगाई ने बताया कि लॉकडाउन के दौरान सुबह सात से 10 बजे तक दी जा रही ढील के दौरान किराना और फल-सब्जी की दुकानों में लोग झुंड बनाकर खड़े हो रहे थे। ऐसे में सोशल डिस्टेंसिंग नहीं हो पा रही, जो कि कोरोना की रोकथाम को आवश्यक है। भीड़ को व्यवस्थित करने और संक्रमण का फैलाव रोकने के मद्देनजर दुकानों के बाहर ग्राहकों के खड़े होने को एक-एक मीटर की दूरी पर जगह मार्क कराई गई थी। इस पर अमल भी शुरू हो गया। इसके सार्थक नतीजे देखने को मिल रहे हैं। महापौर ममगाई ने कोरोना संकट संकट की घड़ी में शहरवासियों से शासन प्रशासन के दिशा निर्देशों के अनुपालन की अपील भी की।

बिना शुल्क दिए किसी भी बैंक की किसी भी शाखा से निकाल सकते हैं पैसे

देश में कोरोना वायरस के संक्रमण के चलते वित्तमंत्री सीतारामन ने आज नागरिकों और व्यापार जगत को राहत देने वाले कई उपायों की घोषणा की, जिनमें नियमों का पालन करने और नियामक मापदंडों में ढील दी गई है। नई दिल्ली में आज मीडिया से बातचीत में वित्तमंत्री ने लोगों को बड़ी राहत देते हुए सरकार ने फैसला लिया है कि अगले तीन महीनों के दौरान लोग बिना शुल्क दिये किसी भी बैंक की किसी भी शाखा से अपने डेबिट कार्ड के द्वारा पैसा निकाल सकते हैं। सरकार ने न्यूनतम बकाया अनिवार्य राशि को भी रद्द कर दिया है।

माल वाहक विमानों के अलावा नही उड़ेगी कोई विमान
आज आधी रात से 31 मार्च तक कोई भी वाणिज्यिक विमान यात्रा संचालित नहीं की जा सकेगी। देश में कोरोना वायरस की महामारी के प्रकोप को देखते हुए यह कदम उठाया गया है, लेकिन ये पाबंदियां माल वाहक विमानों पर लागू नहीं होंगी।
भारत ने एक सप्ताह के लिए अंतर्राष्ट्रीय विमान सेवाओं पर भी रविवार से प्रतिबंध लगा दिया है। नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने कहा है कि ऑपरेटरों को अपने विमानों की समय सारिणी इस तरह से निर्धारित करनी होगी जिससे उनकी उड़ान रात ग्यारह बजकर 59 मिनट तक गन्तव्य हवाई अड्डे पर पहुंच जाएं।

मुख्यमंत्री ने दिलाया भरोसा, सरकार सबका रख रही है ध्यान, एडवायजरी का करें पालन

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह, पुलिस महानिदेशक अनिल रतूड़ी, सचिव वित्त अमित नेगी, स्वास्थ्य एवं गृह सचिव नितेश झा के साथ आपात बैठक ली। बैठक के दौरान निर्णय लिया गया कि जनता कर्फ्यू को 31 मार्च, 2020 तक जारी रखा जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि कोरोना वायरस अनुभवों और उसकी भयावहता को देखते हुए, आज राज्य सरकार ने निर्णय लिया है कि प्रदेश के अन्तर्गत हमारी अन्तर्राज्जीय परिवहन सेवा और राज्य के अन्तर्गत सार्वजनिक परिवहन सेवा को प्रतिबन्धित किया जा रहा है। दूसरी बात जो राज्य में हमारी आवश्यक सेवाएं हैं, चाहे स्वास्थ्य सम्बन्धी हों, खाद्य सम्बन्धी हों और अन्य जो भी अन्य आवश्यक सेवाएं हैं वो उपलब्ध रहेंगी, इनकी दुकानें खुली रहेंगी। सभी जिलाधिकारियों को स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार निर्णय लेने के लिए अधिकृत कर दिया गया है। सभी प्रदेशवासियों से यह भी अनुरोध है कि वो अपने शहर, अपने मुहल्लों को न छोड़ें। जो गांव के लोग हैं वो अपने गांव से बाहर न निकलें। जब बहुत जरूरी हो, तभी गांव से बाहर निकलें। आगामी 31 मार्च, 2020 तक के लिए यह निर्णय लिया गया है। इसका शासनादेश जारी कर दिया जाएगा।
मैं प्रदेशवासियों से यही कहना चाहूंगा कि हमारे पास कोरोना वायरस से लड़ने का सबसे ज्यादा समर्थ तरीका एक यही कि सामाजिक दूरी बनाए रखें। यही इसका सबसे बड़ा बचाव है। राज्य में सभी जगह प्रशासन पूरी तरह से अलर्ट में है। मुझे पूरा विश्वास है कि उत्तराखण्ड की जनता ने जिस प्रकार प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के आह्वान को स्वीकार किया, अपना समर्थन किया है, उसी प्रकार अपने देश के बचाव के लिए, अपने राज्य के बचाव के लिए, अपने घर-परिवार के बचाव के लिए वो निश्चित रूप से सरकार का सहयोग करेगी। जनता कर्फ्यू आज पूरी स्वेच्छा से देश में लागू हुआ, अब पूरे राज्य में कर्फ्यू केवल आवश्यक सेवाओं के लिए खुला रहेगा, अब पूरे राज्य में कर्फ्यू 31 मार्च तक लागू रहेगा।
हमारे राज्य में जितने भी रजिस्टर्ड मजदूर हैं, उनके खाते में एक हजार रूपये डालेंगे ताकि उनको खाद्यान्न की दिक्कत न रहे। मैं उन्हें आश्वासन देना चाहता हूं कोई भूखा न रहे सरकार इसकी व्यवस्था करेगी। सैनेटाईजेशन की कार्यवाही पूरे राज्य में गतिमान है। राज्य के संस्थान एवं सरकार इकाईयों ने व्यापक सैनेटाईजेशन का कार्य कर रही है। जनता से मैं यही कहना चाहूंगा कि सरकार विश्वभर के विशेषज्ञों की राय एवं अनुभवों के आधार पर निर्देश दे रही। आप उन परामर्शों को ध्यान से पढ़िए, अखबारों में, इलेक्ट्रोनिक मीडिया, स्वास्थ्य विभाग, एसडीआरएफ, आदि द्वारा जो भी समय-समय पर दिशा निर्देश दिए जा रहे हैं उनका पालन करें। मैं प्रदेशवासियों से कहना चाहता हूं जो भी सोशल मीडिया में एक्टिव रहते हैं, राज्य सरकार ने नोडल अधिकारी नामित किए हैं उनसे कहना चाहता हूं वही अधिकृत खबरें प्रकाशित करें। यदि कोई अफवाह फैलाने की कोशिश करते हैं, उनके साथ दंडात्मक कार्यवाही की जाएगी।

बहुमत का आंकड़ा दूर, कमलनाथ दे सकते है इस्तीफा

मध्यप्रदेश की सियासत के ताजा घटनाक्रम में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने स्वीकार कर लिया है कि अब उनकी सरकार सुरक्षित नहीं है। दिग्विजय सिंह ने कहा कि पैसे और सत्ता के दम पर बहुमत वाली सरकार को अल्पमत में लाया गया है। वहीं राज्य के सियासी गलियारों से खबर है कि कमलनाथ बहुमत परीक्षण से पहले ही इस्तीफा दे सकते हैं। यह संकट कांग्रेस छोड़ भाजपा में शामिल हुए ज्योतिरादित्य सिंधिया समर्थक कांग्रेस के सभी बागी 16 विधायकों के इस्तीफे मंजूर होने के बाद और पुख्ता हो गया है।
मध्यप्रदेश विधानसभा अध्यक्ष एनपी प्रजापति ने कल देर रात कांग्रेस के 16 बागी विधायकों के इस्तीफे मंजूर कर लिए। इन सभी विधायकों ने छह अन्य विधायकों के साथ 10 मार्च को अपना इस्तीफा दिया था लेकिन प्रजापति ने इनके इस्तीफों पर कोई फैसला नहीं लिया था। हालांकि उन्होंने छह अन्य के इस्तीफे मंजूर कर लिए थे। ये सभी 16 विधायक अभी बंगलूरू में ठहरे हुए हैं।
कांग्रेस के बागी 16 विधायकों के इस्तीफे मंजूर करने के बाद विधानसभा स्पीकर एनपी प्रजापति का दर्द छलक गया है। स्पीकर एनपी प्रजापति ने कहा कि वे दुखी हैं। कहा कि और उन्होंने भारी मन से ये इस्तीफे इसलिए स्वीकार किए क्योंकि बागी विधायक मेरे खिलाफ ही कोर्ट में खड़े हो गए… ये लोकतंत्र की बिडंबना है।
इससे पहले के घटनाक्रम में मध्यप्रदेश कांग्रेस विधायक दल ने कल को अपने सभी विधायकों को व्हिप जारी किया। इसमें कहा गया है कि वे सभी 20 मार्च को विधानसभा में मौजूद रहें और बहुमत परीक्षण के दौरान कमलनाथ सरकार के पक्ष में मतदान करें। वहीं दूसरी ओर, भाजपा ने भी अपने विधायकों को व्हिप जारी कर कमलनाथ सरकार के खिलाफ मतदान करने को कहा है।
जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस हेमंत गुप्ता की पीठ पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चैहान समेत अन्य भाजपा विधायकों की कमलनाथ सरकार के बहुमत परीक्षण की मांग वाली याचिकाओं पर दो दिन से सुनवाई कर रही थी। पीठ ने विधानसभा के स्पीकर को विशेष सत्र बुलाने और राज्य सरकार को सदन में अपना बहुमत साबित करने का निर्देश दिया।
पीठ ने विधायकों से अपना हाथ उठाकर मत प्रकट करने का निर्देश दिया। विधानसभा की पूरी कार्यवाही की वीडियो रिकॉर्डिंग का भी आदेश दिया गया है। पीठ ने यह भी साफ किया, विधानसभा सत्र बुलाने का एकमात्र एजेंडा बहुमत परीक्षण कराना होगा। संबंधित अथॉरिटी यह सुनिश्चित करेगी कि बहुमत परीक्षण के दौरान सदन में कानून व्यवस्था कायम रहे।

अपनों की सुरक्षा के लिए जनता कफ्र्यू में सहयोग देः मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान पर 22 मार्च को सुबह 7 बजे से सांय 9 बजे तक जनता कफ्र्यू में सहयोग देने के लिए आम जनता से अपील की है। उन्होंने कहा कि कोरोना वायरस से निपटने के लिए यह बहुत जरूरी है। हम अपने परिचितों से भी इसमें सहयोग के लिए आग्रह करें।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कोरोना वायरस से निपटने के लिए हम सभी प्रधानमंत्री के साथ हैं। प्रधानमंत्री के सभी दिशा निर्देशों का हम सभी अक्षरक्षः पालन करेंगे। भारत सरकार और राज्य सरकारों के समन्वित प्रयासों से देश को कोरोना से मुक्त करने में जरूर कामयाब होंगे। प्रधानमंत्री के नेतृत्व में केन्द्र सरकार ने जो सावधानियां बरतीं और समय से तैयारियां कीं, उसका परिणाम है कि अन्य देशों की तुलना में भारत में कोरोना नियंत्रित अवस्था में है।
मुख्यमंत्री ने कहा है कि कोरोना वायरस हमारे लिए एक नई चुनौती लेकर आया है। इस चुनौति से निपटने लिए सरकार पूरी तरह से तैयार है। हमारी स्वास्थ्य सेवाएं इससे लड़ने के लिए पूरी तरह से सक्षम है। आज हमें इससे घबराने की नहीं बल्कि थोड़ी सी सावधानी की जरूरत है। हम कुछ साधारण बातों का ध्यान रखकर इसे फैलने से रोकने में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं। हमने प्रदेश में इसके प्रभाव को रोकने के लिए बहुत से कदम उठाए हैं। कोरोना से निपटने के लिए हम पूरी तरह से सक्षम भी हैं और तैयार भी हैं। हमने अपने स्तर पर सारी तैयारी कर रखी है। बिजली, पानी, हेल्थ, सेनिटेशन, परिवहन जैसी आवश्यक सुविधाएं पहले की ही तरह उपलब्ध हैं। खाद्यान्न, तेल सब्जियाँ, फल, पेट्रोल, डीजल आदि रोजमर्रा की जरूरतों की सप्लाई में भी किसी तरह की कमी नहीं है। आगे भी सभी आवश्यक वस्तुओं और सेवाओं की आसानी से उपलब्धता सुनिश्चित की जाएंगी।
मुख्यमंत्री ने आम जनता से अपील की है कि ‘‘हमारे लिए आप सभी का सहयोग बहुत जरूरी है। हमें आपका केवल इतना सहयोग चाहिए कि घबराएं नहीं, केवल सावधान और सतर्क रहें। सरकार द्वारा जारी दिशा निर्देशों का पालन करें। कुछ समय के लिए भीड़भाड़ से बचें और सोशल डिस्टेंस बनाए रखें। अफवाहों पर ध्यान न दें और केवल सरकारी प्रामाणिक सूचनाओं पर विश्वास रखें। ’’

स्वास्थ्य विभाग ने प्रदेश में 337 आईसोलेशन बेड की व्यवस्था की

उत्तराखंड में कोरोना वायरस फस्र्ट स्टेज में है। सरकार कोशिश कर रही है कि वायरस को तीसरे व चैथे स्टेज तक पहुंचने से रोका जाए। इसके लिए सरकार हरसंभव कदम उठा रही है। स्वास्थ्य विभाग ने वायरस से बचने के लिए लोगों को सामाजिक दूरी बनाने की सलाह दी है। चीन सहित अन्य प्रभावित देशों से आए 712 लोगों को निगरानी में रखा गया है।
स्वास्थ्य निदेशालय में अपर सचिव एवं राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के मिशन निदेशक और स्वास्थ्य महानिदेशक डॉ. अमिता उप्रेती ने प्रेसवार्ता कर कोरोना वायरस को रोकने के लिए की गई व्यवस्थाओं के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि वायरस फैलने के चार स्टेज है। इसमें पहला प्रभावित देशों की यात्रा कर लौटे व्यक्ति में संक्रमण, दूसरा संक्रमित व्यक्ति से स्थानीय स्तर पर एक से दूसरे में फैलना, तीसरा कम्युनिटी में फैलना और चैथा एपिडेमिक (महामारी) की स्थिति है। स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि उत्तराखंड में अभी वायरस का संक्रमण फर्स्ट स्टेज में है।
प्रदेश में अब तक वायरस की जांच के लिए 78 सैंपल लिए भेजे गए। जिसमें 28 सैंपल निगेटिव और एक मामला पॉजिटिव पाया गया है। स्वास्थ्य विभाग ने सतर्क किया कि कोई भी व्यक्ति आईसोलेशन वार्ड में न जाएं। इससे वायरस फैलने का खतरा हो सकता है। इस मौके पर नोडल अधिकारी डॉ. पंकज सिंह, जनसंपर्क अधिकारी जेसी पांडेय भी मौजूद रहे।
वायरस को रोकने के लिए सरकार ने स्वास्थ्य विभाग को 60 करोड़ की राशि जारी कर दी है। इस धनराशि से दवाइयां, उपकरण के साथ ही प्रदेश भर में आईसोलेशन वार्डों की व्यवस्था की जाएगी। वहीं, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन ने भी मास्क, दवाइयों व अन्य चिकित्सा सुविधा के लिए बजट खुला रखा है।
स्वास्थ्य महानिदेशक डॉ. उप्रेती ने कहा कि वायरस को लेकर सोशल मीडिया पर भ्रांति न फैलाएं। प्रदेश में एक पॉजिटिव केस के अलावा कोई भी दूसरा मामला सामने नहीं आया है। विभाग की ओर से पूरी सतर्कता बरती जा रही है।
कोरोना वायरस से निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने प्रदेश में 337 आईसोलेशन बेड की व्यवस्था की है। दून और गांधी अस्पताल में आईसीयू बेड की संख्या बढ़ाई जा रही है। प्रदेश के अन्य क्षेत्रों में भी वेंटीलेटर और आईसीयू बेड बढ़ाए जाएंगे।

सराहनीय फैसलाः रेट लिस्ट लगाकर उचित मूल्य पर सेनेटाइजर और मास्क की बिक्री करने के निर्देश

उत्तराखंड में किसी भी मेडिकल स्टोर पर डॉक्टर के परामर्श के बिना खांसी जुकाम, बुखार व दर्द की दवाईयां नहीं दी जाएंगी। फूड सेफ्टी एंड ड्रग्स कमिश्नर डॉ.पंकज कुमार पांडेय ने इस संबंध में आदेश जारी कर दिए हैं। कैमिस्ट की दुकानों पर रेट लिस्ट लगाकर उचित मूल्य पर सेनेटाइजर व मास्क की बिक्री करने के निर्देश दिए गए।
फूड सेफ्टी ड्रग्स प्रशासन की ओर से जारी आदेश के अनुसार कोरोना वायरस पूरे विश्व में गंभीर खतरा बना हुआ है। प्रदेश सरकार ने वायरस को माहमारी रोग घोषित किया है। आदेश में कहा गया कि कोई भी कैमिस्ट बिना डॉक्टर के परामर्श के बिना किसी भी व्यक्ति को खांसी, जुकाम, बुखार व दर्द की दवाईयां न दें।
इसके लिए खांसी जुकाम से पीड़ित व्यक्ति को डॉक्टर की सलाह लेने की सलाह दी गई। प्रदेश के सभी ड्रग्स इंस्पेक्टरों को आदेशों का पालन करने के निर्देश दिए गए हैं। आम लोगों को कोरोना वायरस के प्रति जागरूक करने के लिए मेडिकल स्टोर में भी सेनेटाइजर व मास्क के रेट की लिस्ट लगाई जाए।
कोरोना के वायरस से बचने के लिए फिलहाल ठंडे खाद्य पदार्थों से परहेज करना फायदेमंद साबित हो सकता है। डॉक्टरों के अनुसार ठंडे खाद्य पदार्थों पर वायरस तेजी से पनपते और बढ़ते हैं। इसके अलावा इम्युनिटी पावर भी कमजोर होती है।
डॉक्टरों के अनुसार इन दिनों गर्म पानी पीना ज्यादा फायदेमंद रहता है। आइसक्रीम जैसे ठंडे खाद्य पदार्थ नुकसान पहुंचा सकते हैं। दरअसल इनसे सीधा नुकसान तो नहीं है, लेकिन ये शरीर को कमजोर कर सकते हैं। इम्युनिटी कम होने से वायरस बहुत तेजी से हमला करते हैं, जिससे रोग तेजी से फैलता है। ठंडा और बासी खाना तेजी से वायरस को बढ़ाता है।
वहीं, कोरोना के खतरे को देखते हुए बैंक कैशियर भी चिंता में हैं। दरअसल उन्हें नोट गिनने होते हैं, जो अनगिनत हाथों से होकर गुजरे होते हैं। ऐसे में उन्हें डर सता रहा है कि इससे वायरस का अटैक न हो जाए। डॉक्टरों के अनुसार नोट गिनते वक्त थूक लगाना नुकसान कर सकता है। नोट गिनने के बाद हाथों को लगातार सैनेटाइज करते रहे और हाथों को चेहरे पर लगाने से बचें।

मुख्यमंत्री ने स्वयं संज्ञान लेकर फसलों के नुकसान की रिपोर्ट देने के दिए निर्देश

उत्तराखंड में भारी वर्षा और ओलावृष्टि से फसलों को पहुंचे नुकसान को लेकर मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत बेहद गंभीर है। इसके तहत मुख्यमंत्री ने सभी जिलों के जिलाधिकारियों को फसल क्षति का आकलन कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि प्रभावित किसानों को आश्वासन देते हुए कहा है कि किसानों की हरसंभव मदद की जाएगी।
इन दिनों नियमित अंतराल में हो रही वर्षा और ओलावृष्टि रबी की फसल पर भारी पड़ रही है। विशेषकर मैदानी क्षेत्रों में रबी की मुख्य फसल गेहूं समेत अन्य फसलों को नुकसान पहुंचने से किसानों के माथों पर बल पड़े हैं। अब मुख्यमंत्री ने सभी जिलों के जिलाधिकारियों को ओलावृष्टि और भारी वर्षा से किसानों को हुए नुकसान का आकलन कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
मुख्यमंत्री के निर्देशों के बाद कृषि महकमा हरकत में आ गया है। सचिव कृषि आर.मीनाक्षी सुंदरम ने कृषि निदेशक को निर्देश दिए हैं कि वह भी अपने स्तर से फसलों को पहुंचे नुकसान का आकलन कराकर रिपोर्ट शासन को भेजना सुनिश्चित करें। उधर, कृषि निदेशक गौरीशंकर ने बताया कि सभी जिलों के मुख्य कृषि अधिकारियों को अपने-अपने जिलों में जल्द से जल्द सर्वे कर रिपोर्ट भेजने को कहा गया है, ताकि प्रभावित किसानों को क्षतिपूर्ति की जा सके। दूसरी तरफ, निदेशक हार्टिकल्चर मिशन संजय श्रीवास्तव ने बताया कि वर्षा और ओलावृष्टि से फल-सब्जियों को पहुंची क्षति का भी आकलन कराया जा रहा है।
किसानों का कहना है कि राज्य सरकार ने स्वयं इसका संज्ञान लिया है। यह राज्य के किसानों के लिए अच्छी खबर है। नही तो पहले हमें सरकार से मांग करनी पड़ती थी। किसानों ने मुख्यमंत्री का आभार जताया है कि उनकी समस्याओं का संज्ञान लेकर त्रिवेन्द्र सरकार समय-समय पर राहत देती आ रही है। गौरतलब है कि पहले भी किसानों की समस्याओं को लेकर राज्य सरकार ने किसानों के हितों को लेकर कई राहत देने वाले कार्य किये है। इस बार का बजट भी किसानों को ध्यान में रखकर बनाया गया है। वही गन्ना किसानों की समस्याओं को लेकर भुगतान के लिए अतिरिक्त धनराशि की व्यवस्था भी त्रिवेन्द्र सरकार ने की है।