उत्तराखंड में आपदा में मृतकों के आश्रितों को प्रधानमंत्री ने दी 2-2 लाख की आर्थिक मदद

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने जोशीमठ के रैणी क्षेत्र में ग्लेशियर टूटने से उत्पन्न हुई भीषण आपदा के तुरन्त बाद आपदा स्थल का निरीक्षण कर स्थिति का जायजा लिया। घटना स्थल से लौटने के बाद पत्रकारों से वार्ता करते हुए मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि जोशीमठ क्षेत्र में ग्लेशियर फटने की सूचना मिलते ही जिला प्रशासन एवं एसडीआरएफ की टीम राहत एवं बचाव कार्यों के लिए घटना स्थल पर पहुंची। मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि वे गढ़वाल कमिश्नर रविनाथ रमन एवं डीआईजी गढ़वाल नीरू गर्ग के साथ प्रभावित क्षेत्रों में पहुंचे। उन्होंने जिलाधिकारी चमोली से पूरी जानकारी ली। मुख्य सचिव ओम प्रकाश एवं सचिव आपदा प्रबंधन एस.ए.मुरूगेशन ने आपदा प्रबन्धन केन्द्र सचिवालय में मौजूद रहकर लगातार स्थिति पर नजर रखी तथा आवश्यक दिशा निर्देश भी जिलाधिकारियों को दिये।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस आपदा से रैणी के समीप स्थित ऋषिगंगा जलविद्युत परियोजना को भारी नुकसान के साथ ही तपोवन स्थित एनटीपीसी की विद्युत परियोजना का भी कुछ नुकसान हुआ है। उन्होंने बताया कि इस आपदा में प्रारम्भिक अनुमान के अनुसार लगभग 125 लोग लापता है। रैणी क्षेत्र के 5 लोगो की भी इसमें अपनी जान गवानी पडी है। अब तक सात लोगों के शव बरामद किये जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि मृतको के आश्रितों को तात्कालिक रूप में 4-4 लाख की आर्थिक सहायता मंजूर की गई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारा पहला उदेद्श्य जान माल की सुरक्षा का है। ऋषिगंगा व एनटीपीसी द्वारा उन्हे हुए नुकसान का आकलन किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने बताया कि इस क्षेत्र में एक बड़ा तथा 4 छोटे पुलों को नुकसान पहुंचा है। इससे प्रभावित लगभग 11 गांवों को आवश्यक सहायता आदि उपलब्ध कराने के लिये आर्मी हेलीपैड एवं एसडीआरएफ के जवानों के साथ ही आर्मी एवं राज्य सरकार के हेलीकाप्टरों की व्यवस्था के साथ ही आवश्यक चिकित्सा सुविधा के लिये डाक्टरो की भी व्यवस्था की गई है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि रैणी के निकट नीति घाटी को जोडने वाले जिन सड़कों एवं पुलों को हुए नुकसान से जिन गांवों का सड़क से सम्पर्क टूट गया है उनमें गहर, भंग्यूल, रैणी पल्ली, पैंग, लाता, सुराईथोटा, तोलमा, फगरासु आदि गांव शामिल है, तथा पुलों में रैणी मे जुगजू का झूला पुल, जुवाग्वाड-सतधार झूलापुल, भग्यूल-तपोवन झूलापुल तथा पैंग मुरण्डा पुल बह गया है। रैणी मे शिवजी व जुगजू मे मां भगवती मंदिर भी आपदा मे बह गए है।

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि अब स्थिति नियंत्रण में है, खतरे वाली बात नहीं है। विद्युत परियोजना की सुरंग में मलबा अंदर तक जमा है और सुरंग तक पहुंचना अत्यंत कठिन था। मशीन का सुरंग में जाना मुश्किल था, इसलिए आईटीबीपी के जवान रोप के सहारे वहां पहुंचे। सुरंग में 35-40 फीट गाद जमा है। 250 मीटर लंबी इस सुरंग में अपने हौसले के जरिये जवान 150 मीटर तक पहुंच चुके हैं।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि एनडीआरएपफ की टीम दिल्ली से आई है और कल और जवान आएंगे। आर्मी, पैरामिलिट्री फोर्स और हमारे डाॅक्टर आपदा स्थल पर तैनात किए गए हैं। ऐरियल सर्वे कर उन्होंने स्वयं स्थिति का जायजा लिया। किसी भी प्रकार की जरूरत पड़ने पर वहां आर्मी, वायुसेना और राज्य के हेलीकाॅप्टर तैनात कर दिए हैं। हमारी मेडिकल टीम हर परिस्थिति के लिए तैयार है और 90 जवानों को भी वहां पहुंचा दिया गया है।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को जब खबर लगी तो उन्होंने उनसे फोन पर बात कर चिंता व्यक्त की और कहा कि मदद की जरूरत पड़ने पर वे मदद के लिए तैयार हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने मृतक आश्रितो को 02-02 लाख रूपये की आर्थिक सहायता प्रदान करने की घोषणा भी की है। राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द के साथ ही गृहमंत्री अमित शाह, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपाणी, बिहार के मुख्यमंत्री नीतिश कुमार, सीडीएस जनरल विपिन रावत आदि ने भी हरसंभव सहयोग का आश्वासन दिया। आचार्य बालकृष्ण ने सहयोग का आश्वासन देते हुए कहा कि वे अनाथ बच्चों को गोद लेने के लिए तैयार हैं और हर स्थिति में सरकार के साथ हैं। शान्तिकुंज एवं विवेकानन्द अस्पताल पीपलकोटी ने भी सहयोग का आश्वासन दिया है।

मुख्यमंत्री ने इस भीषण आपदा से उत्पन्न स्थिति के सम्बन्ध में अफवाह फैलने से बचाने में योगदान देने के लिए मीडिया को भी धन्यवाद दिया। मुख्यमंत्री जी ने कहा कि हर जरूरत की पूर्ति करने की पूरी व्यवस्था हमारे पास है। हमारे पास रेस्क्यू टीम, मेडिकल, हेलीकाॅप्टर, एक्सपर्ट पर्याप्त मात्रा में है। सरकार का पूरा ध्यान जिनका जीवन बचा सकते हैं, उनकी ओर है। उन्होंने बताया कि रूद्रप्रयाग के करीब पानी स्वच्छ है। उन्होंने कहा कि आपदा की सूचना मिलते ही श्रीनगर जल विद्युत परियोजना के बांध से पानी खाली कर दिया गया था। साथ ही गंगा व अलकनंदा के किनारे तुरंत हाई अलर्ट जारी कर दिया गया था।

इससे पूर्व मुख्यमंत्री ने सचिवालय स्थित आपदा प्रबन्धन केन्द्र का भी निरीक्षण किया तथा शासन के उच्चाधिकारियों के साथ आपदा से उत्पन्न स्थिति पर विचार विमर्श किया। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिये कि आपदा प्रभावित क्षेत्र मंे राहत एवं बचाव कार्यो की निरन्तर निगरानी की जाय। उन्होंने कहा कि इसके लिये वांछित धनराशि की अविलम्ब व्यवस्था सुनिश्यित की जाय। बैठक में अपर मुख्य सचिव राधा रतूड़ी, सचिव अमित नेगी, एस.ए मुरूगेशन, आयुक्त गढ़वाल रविनाथ रमन, डीआइजी रिद्धिम अग्रवाल, महानिदेशक सूचना डाॅ. मेहरबान सिंह बिष्ट आदि उपस्थित थे।

जोशीमठ के रैणी क्षेत्र में आई इस भीषण आपदा में बचाव व राहत कार्यो के सम्बन्ध में आईटीबीपी के कमांडेंट शेंदिल कुमार ने बताया कि आईटीबी के 250 जवान रेस्क्यू स्थल पर पहुंच कर रेस्क्यू आॅपरेशन कर रहे हैं। जिसमें मेडिकल आॅफिसर सहित आठ आॅफिसर भी शामिल है। एनटीपीसी पाॅवर हाऊस के आस पास के ईलाके में कार्य कर रहे हैं। 10 से 15 लोग टनल में कहीं फंसे हैं, अभी अनुमान है कि ये लोग जिंदा है। इनको निकालने के प्रयास किये जा रहे हैं। गौचर में आईटीबीपी की आठवीं बटालियन की दो टीमें जिसमें 90 जवान हैं, घटना स्थल के लिए निकल चुके हैं। इसके अलावा गौचर एवं देहरादून में एक-एक कम्पनी आदेश की प्रतीक्षा कर रही है। उत्तरकाशी में मातली एवं महिडाण्डा में भी एक-एक कम्पनी इस टास्क के लिए तैयार है। इसके अलावा स्पेशलिस्ट माउंटयरिंग एवं स्कीइंग इंस्ट्टीयूट औली की दो टीमे तपोवन एरिया में पहुंच चुकी है।

सेना के कर्नल एस. शंकर ने बताया कि जोशीमठ से सेना के 40 जवानों का एक दल तपोवन पहुंच गया है। एक दल जोशीमठ में है। दो सैन्य दल औली से जोशीमठ के लिए रिलीफ आॅपरेशन के लिए आ चुके हैं। रूद्रप्रयाग में दो सैन्य दल तैयार रखे गये है। एक इंजिनियरिंग टास्क फोर्स जोशीमठ से तपोवन पहुंच गया है। 02 मेडिकल आॅफिसर एवं दो एम्बुलेंस तपोवन पहुंच चुके हैं। आर्मी का हैलीपैड सिविल एडमिनिस्ट्रेशन के लिए चालू है। कम्यूनिकेशन के लिए सिविल लाईन चालू है। बरेली से दो हैलीकाॅप्टर भी जोशीमठ पहुंच गये हैं।

त्रिवेन्द्र है तो मुमकिन हैः मुख्यमंत्री ने मौके पर जाकर संभाला मोर्चा तो सरकारी मशीनरी में हुआ ऊर्जा कां संचार

राजेंद्र जोशी (वरिष्ठ पत्रकार)
प्राकृतिक आपदाओं से लड़ा नहीं जा सकता है, लेकिन अगर समय रहते रेसक्यू आॅपरेशन चलाया जाये और जनहानि रोकने की दिशा में कार्य किया जाये तो बड़ी जनहानि को रोका जा सकता है। यह आज मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने साबित किया है। जैसे ही सुबह न्युज फ्लैश हुई कि चमोली जिले में प्राकृतिक आपदा के चलते अलकनन्दा नदी विकराल रुप धारण कर चुकी है, तुरन्त मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत हरकत में आ गये। उन्होंने तुरन्त अलकनन्दा नदी के पड़ाव के नदी किनारों को खाली कराने के आदेश दे दिये। मुख्यमंत्री के आदेश के बाद प्रशासन हरकत में आया और नदी किनारों को खाली कराने का कार्य शुरु हुआ।

मुख्यमंत्री केवल यहीं नहीं रुके। उन्होंने तुरन्त हैलीकाॅपटर से घटना स्थल का जायजा लेने की बात कही। जैसे ही यह न्युज फ्लैश हुई शासन से लेकर प्रशासन में हड़कप मच गया। सरकारी मशीनरी समझ गई कि आपदा के समय मुख्यमंत्री कोताही बर्दाश्त नहीं करेंगे। मुख्यमंत्री ने मुख्य सचिव को स्वयं राज्य आपदा परिचालन केन्द्र में बैठकर माॅनीटिरिंग करने के निर्देश दिये और स्वयं घटना स्थल के लिए रवाना हुए। हैलीकाॅप्टर में ही मुख्यमंत्री ने श्रीनगर बांध को खाली कराने और टिहरी बांध का पानी रोकने के निर्देश दिये। जिससे मैदानी इलाकों में पानी का प्रवाह कम हो जाये। मुख्यमंत्री ने त्वरित कार्यों को अजंाम देने के लिए अधिकारियों को अधिकर देते हुए जनहानि रोकने के लिए हर संभव उपाय करने को कहा। जिसके फलस्वरुप आज उत्तराखंड में बड़ी जनहानि रोकने में मदद मिली।

दूरदर्शी और प्रशासनिक सोच से मिली मदद
अलकनन्दा नदी के प्रवाह को समेटने के लिए टिहरी बांध में पानी रोकना और श्रीनगर बांध के पानी को छोड़ना एक दूरदर्शी सोच औश्र प्रशासनिक क्षमता को दर्शाता है। मुख्यमंत्री लगातार पानी के प्रवाह पर नजर रख रहे थे। ऐसे में उन्होंने यह निर्णय लेकर प्रशासनिक क्षमता को दर्शाया है। जिसकी आज पूरा देश का मीडिया प्रशंसा कर रहा है।

अफवाहों को रोकने में कामयाब रही सरकार
लोगों को पैनिक होने से बचाने के लिए सरकार एक तरफ राहत कार्य में जुटी रही। वहीं, मुख्यमंत्री सोशल मीडिया में लगातार अपने अकाउंट से लोगों को सही जानकारी देते रहे। उन्होंने लोगों से अफवाहों पर ध्यान ना देने की अपील की। लगातार उनके द्वारा संपर्क स्थापित किया जाता रहा। जिससे लोगों को भी पल-पल की सही और सटीक जानकारी मिलती रही।

लगातार 24 से 48 घंटे चलेगा राहत कार्य
मुख्यमंत्री जैसे ही आपदा स्थल का जायजा लेकर देहरादून पहंुचे। उन्होंने राज्य आपदा परिचालन केन्द्र का दौरा किया। वहां उन्होंने राहत कार्यों की जानकारी ली। लगातार अधिकारियों से बात कर रहे मुख्यमंत्री ने अपने अगले आदेशों तक राहत कार्य 24 से 48 घंटे चलाने के निर्देश दिये है। बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री ने रात को भी सेना और एनडीआरफ की मदद से एसडीआरएफ व स्थानीय प्रशासन को राहत कार्य करने को कहा है। उन्होंने कहा कि हमें अंतिम व्यक्ति तक को राहत देने की दिशा में कार्य करना है। ऐसे में हमें रेसक्यू आॅपरेशन में और तेजी लानी होगी।

संसाधनों की कमी नहीं
मुख्यमंत्री ने राहत कार्यों को लेकर साफ निर्देश दिये है कि संसाधनों की कोई कमी नहीं है। ऐसे में संासाधनों की कमी का हवाला देकर राहत कार्य बाधित नही होने चाहिए। उन्होंने बताया कि जरुरत महसूस हुई तो हैली सेवाओं के माध्यम से भी राहत कार्य किये जायेगे। रेसक्यू आॅपरेशन के दौरान मिल रहे लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा देने के लिए डाॅक्टरों के टीम भी मौके पर तैनात की गई है। गंभीर लोगों को हायर सेन्टर भेजा रहा है।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत लगातार नजर बनाये हुए है। उनका कहना है कि प्राकृतिक आपदाओं से लड़ा नही जा सकता है। लेकिन हम राहत कार्य में और तेजी लाकर लोगों की जान बचा सकते है। प्रधानमंत्री भी मुख्यमंत्री से लगातार अपडेट ले रहे है। उन्होंने भी मुख्यमंत्री को हर संभव मदद करने का आश्वासन दिया है।

परिवहन विभाग में भ्रष्टाचार का आरोप लगा धरने पर बैठा एक पक्ष की दूसरे पक्ष से हुई नोंकझोंक

परिवहन विभाग के ऋषिकेश कार्यालय में भ्रष्टाचार का आरोप लगा तथा दलाली प्रथा को बंद करने की मांग को लेकर एक पक्ष के दो लोग कार्यालय के बाहर ही धरने पर बैठे। मगर, वहां दूसरे पक्ष के चार लोग भी आ धमके और देखते ही देखते वहां दोनों पक्षों में नोंकझोंक हो गई। मौंके पर पुलिस पहुंची और दोनों पक्षों के छह लोगों को हिरासत में लिया। शाम को दूसरे पक्ष के चार लोगों को निजी मुचलके पर रिहा कर दिया गया, जबकि पहले पक्ष के दो लोगों ने निजी मुचलके पर हस्ताक्षर करने से इंकार कर दिया।

आज सुबह करीब दस बजे एआरटीओ कार्यालय के बाहर एक पक्ष के दो लोग संजीव पुत्र मेहर रावत निवासी गंगागनर और गौरव राजपूत पुत्र विजय राव निवासी ढालवाला धरने पर बैठे। उन्होंने कहा कि एआरटीओ कार्यालय में दलाली प्रथा बंद होनी चाहिए। साथ ही मोटर चालक स्कूल को एआरटीओ कार्यालय से संरक्षण प्राप्त है। तभी दूसरे पक्ष के चार लोग अमरजीत पुत्र जरनैल सिंह निवासी गोविंदनगर, उमेश चैहान पुत्र राम कुमार चैहान निवासी बनखंडी, प्यारेलाल जुगरान पुत्र पुरूषोत्तम निवासी सोमेश्वर नगर, विक्रांत पुत्र तरसेम वहां पहुंचे। दूसरे पक्ष को इन लोगों का कहना था कि धरने पर बैठे लोग एआरटीओ कार्यायल में आने वाले लोगों को धमका रहे हैं। काफी नोंकझोंक के बीच पुलिस भी पहुंची। सभी हंगामा कर रहे छह लोगों को कोतवाली लेकर आई। यहां चार को शांतिभंग में चालान कर रिहा कर दिया गया, जबकि संजीव और गौरव ने जमानत लेने से इंकार कर दिया।

दर्जाधारी राज्यमंत्री की सूचना पर गंगा पार फंसे बछड़े की बची जान

ऋषिकेश।त्रिवेणीघाट पर गंगा पार गाय का एक बछड़ा फंस गया। वन विभाग की क्विक रिस्पांस टीम रेस्क्यू में जुटी। काफी मशक्कत के बाद बछड़े को पानी से बचाकर सुरक्षित बाहर ले आए।
वन विभाग के मुताबिक आज गाय का एक बछड़ा भटककर गंगा के पार चला गया। वापस आते समय वह पानी से भरे एक गड्ढे में फंस गया। इसी बीच उसे पानी में फंसा देख पशु प्रेमी चारू कोठारी ने दर्जा धारी राज्य मंत्री पति भगतराम कोठारी सूचना दी।

कोठारी मौके पर पहुंचे और प्रभागीय वनाधिकारी देहरादून को सूचित किया। सूचना के करीब एक घंटे बाद देहरादून से वन विभाग की क्विक रिस्पांस टीम त्रिवेणीघाट पहुंची और राफ्ट लेकर गंगा पार गई। जहां पानी से भरे गड्ढे में फंसे गाय के बछड़े को निकालने के लिए रेस्क्यू शुरू किया।

वनक्षेत्राधिकारी महेंद्र सिंह रावत ने बताया कि करीब एक घंटे की मशक्कत के बाद क्विक रिस्पांस टीम बछड़े को सुरक्षित बाहर निकाल ले आयी। दर्जाधारी राज्य मंत्री और उनकी पत्नी ने रेस्क्यू टीम का आभार जताया व 5100 की प्रोत्साहन राशि प्रदान की। मौके पर रवि जोशी, जीत सिंह, अजय त्यागी मौजूद थे।

छह दिन से लापता नाबालिग को पुलिस ने ढूंढ़ निकाला

कोतवाली ऋषिकेश क्षेत्र में लापता हुए 10 वर्षीय बालक को पुलिस ने भरत विहार स्थित काली कमली के बगीचे से बरामद किया है, लापता युवक 28 जनवरी से गायब था।

कोतवाल रितेश शाह ने बताया कि हसमुद्दीन पुत्र इस्लाम निवासी ब्रह्मवाला, लोहिया नगर देहरादून ने बताया कि उनका 10 वर्षीय नाबालिग बेटा बीती 28 जनवरी की दोपहर तीन बजे से गायब है। जिसकी काफी तलाश की गई, मगर कोई सफलता हाथ नहीं लगी है। पुलिस ने टीम तैनात की और टीम को आज सफलता मिल गई है। कोतवाल रितेश ने बताया कि लापता बालक भरत विहार स्थित काली कमली के बगीचे से सकुशल बरामद किया गया है, तथा परिजनों के सुपुर्द कर दिया गया है।

जय जवान जय किसान के साथ कांग्रेस ने निकाली तिरंगा ट्रेक्टर यात्रा

केन्द्र सरकार द्वारा किसानों पर थोपे गये काले कानून के विरोध में व किसान आंदोलन के समर्थन में ऋषिकेश नगर में तिरंगा ट्रेक्टर यात्रा का आयोजन किस गया। जिसमें भारत माता की जय, जय जवान जय किसान व वादे मातरम के नारों के जयघोष के साथ इन्द्रमणी बडोनी चैक से शहर के मुख्य मार्गों से होते हुऐ परशुराम चैक पर समाप्त हुआ।

यात्रा का नेतृत्व कर रहे अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सदस्य जयेन्द्र रमोला ने कहा कि कड़कड़ाती सर्दी में दो महीने से अधिक हो गये किसानों को दिल्ली सीमा पर आंदोलन करते हुआ। परन्तु केन्द्र सरकार चुप्पी साधे बैठी है और आज इसी परिपेक्ष में दिल्ली में ट्रेक्टर मार्च निकाला जा रहा है हम उनको समर्थन देने दिल्ली नहीं पहुँचे सके इसलिये हमने आज किसानों के समर्थन में यह तिरंगा मार्च निकालने का काम किया है साथ ही सरकार को बताने का काम किया है कि वह किसानों को कमजोर ना समझे किसानों के समर्थक हर गली हर मुहल्ले व हर शहर गाँव में हैं जो हर वक्त किसानों के साथ खड़े हैं ।

दीपक जाटव ने कहा कि वह किसान जो हर व्यक्ति के पेट भरने का काम करता है आज उसे मजबूर होकर सडकों पर बैठना पड़ रहा है परन्तु ये केन्द्र सरकार के अड़ियल रवैये से कोई समाधान नहीं निकल रहा है, हम सभी किसानों को समर्थन करते हैं इसलिये आज शांति मार्च के रूप में तिरंगा ट्रेक्टर रैली का आयोजन किया गया।

मार्च में पूर्व मंत्री शूरवीर सिंह सजवाण, पार्षद मनीष शर्मा, विवेक तिवाड़ी, पार्षद देवेन्द्र प्रजापति, अजय धीमान, ब्लॉक कांग्रेस रायवाला अध्यक्ष बरफ सिंह पोखरियाल, आशा सिंह चैहान, ब्लॉक महिला कांग्रेस रायवाला अध्यक्ष अंशुल त्यागी, जिला महिला कांग्रेस उपाध्यक्ष दीपा चमोली, जिला महिला कांग्रेस महामंत्री अलका क्षेत्री, पूर्व सभासद रजनीश सेठी, अजय मनमीत, गौरव राणा, गौरव यादव, जितेन्द्र त्यागी, एकान्त गोयल, राजू गुप्ता, इमरान सैफी, रमेश गौंड, वीर बहादुर राजभर, वेद प्रकाश शर्मा, यश अरोड़ा, ललित सक्सेना, मनोज त्यागी, हिमांशु जाटव, राहुल पाण्डेय, आदि बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे।

दिल्ली के पांच युवकों का दल गंगा में टापू मे फंसा, जल पुलिस ने निकाला

जानकी झूला पुल के समीप गंगा नदी में बना टापू पांच लोगों के लिए मुसीबत का सबब बन बैठा।

दरअसल, दिल्ली शालीमार बाग निवासी पांच युवक जिनके नाम रोहन19 पुत्र मुन्ने लाल, अनुभव18 पुत्र मनीष कुमार, तुषार19 पुत्र कुलबहादुर सिंह, विशाल कुमार18 पुत्र नीरज कुमार और सागर कुमार20 पुत्र संजय कुमार आज घूमते हुए जानकी झूला पुल के समीप गंगा तट पहुंचे। यहां सभी फोटो खिंचवाने के लिए गंगा में बने टापू पर गए। इसी बीच गंगा का जलस्तर अचनाक बढ़ गया। सभी घबरा गए और चीख पुकार मौके पर पहुंची। तभी सूचना पाकर जल पुलिस व आपदा राहत दल 40 बटालियन के कर्मचारियों ने रेस्क्यू अभियान चलाया और कड़ी मशक्कत करने पर सभी को राफ्ट के माध्यम से सकुशल बाहर निकाला। तब जाकर सभी से राहत की सांस ली।

शाॅर्ट सर्किट से रानीपोखरी में चलती कार में लगी आग

दो युवकों को कार चलाना तब भारी पड़ गया, जब उसमें आग लग गई। दोनों युवक किसी तरह बच निकले, मगर कार बुरी तरह जल गई।

दरअसल, भोगपुर से थानों जाने वाले रास्ते में जाखन पुल से पहले दो युवक अंकित पुंडीर पुत्र रघुवीर और मोहन पुंडीर पुत्र कमल सिंह निवासी रानीपोखरी कार चलाना सीख रहे थे। तभी अचानक शाॅर्ट सर्किंट हुआ और कार में आग लग गई। कार की बड़ी-बड़ी लपटें देख मौके पर चीख पुकार मच गई। किसी तरह दोनों युवक कार से बाहर निकलने में सफल रहे। वहंी, घटनास्थल पर सूचना पाकर फायरकर्मी पहुंचे और किसी तरह आग पर काबू पाया। मगर, कार में आग के कारण काफी नुकसान हो चुका था।

ससुर पर लगा बहु को जान से मारने की धमकी, मारपीट व लूट का आरोप

ऋषिकेश में एक बहू ने अपने ही ससुर पर घर में घुसकर जान से मारने की धमकी देने, मारपीट तथा जेवरात लूटने का आरोप लगाया है। मामले को लेकर बहू ने कोतवाली पुलिस को तहरीर तक सौंपी है।

तहरीर के मुताबिक, आज गंगा विहार ऋषिकेश निवासी मंजू संगल पत्नी स्व. प्रवीण कुमार ने बताया कि दोपहर ढाई बजे के करीब पड़ोस में रहने वाले उनके ससुर रमेश चंद गांधी घर पहुंचे। शिकायतकर्ता की बहन ने घर का दरवाजा खोला। उन्होंने आरोप लगाया कि इसी बीच उनके भतीजे शुभम व यशी संगल ने जबरन घर में घुस आए। शिकायतकर्ता मंजू संगल ने ससुर रमेश पर जान से मारने की धमकी और भतीजों पर मारपीट करने का आरोप लगाया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि घटना के दौरान उनके गले से सोने की चेन भी लूट ली गई। शिकायतकर्ता महिला ने आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की मांग की।

गैस सिलेंडर में विस्फोट होने से मकान क्षतिग्रस्त, एक महिला भी चोटिल

गुमानीवाला के एक घर में बहुत दिनों से हो रही गैस लीकेज की समस्या आज विस्फोट के रूप में तब्दील हो गई। इसका नतीजा यह रहा कि मकान पूरा क्षतिग्रस्त हो गया और एक बुजुर्ग महिला को चोटें आई है। गमीमत रही कि घर के बच्चे अपनी माता के साथ नैनिहाल गए हुए थे। इससे बड़ा हादसा होने से टल गया।

दरअसल, गली नंबर 10, वार्ड नंबर 36 गुमानीवाला में आज करीब 12 बजे प्रदीप बिष्ट के मकान में गैस का दबाव बढ़ने से विस्फोट हो गया। इस कारण कीचन की सिंगल ईंट की दीवार ढल गई। इसके अलावा पूरे मकान में जगह-जगह दरारें आ गई। मकान पूरी तरह क्षतिग्रस्त होेने के अलावा घर में मौजूद प्रदीप बिष्ट की माता 70 वर्षीय शांतिदेवी को चोटें आईं है, उनके इमरजेंसी सेवा 108 के जरिए निजी अस्पताल में भेजा गया है।

पार्षद वीरेंद्र रमोला के अनुसार, प्रदीप बिष्ट के घर में गैस रिसाव की समस्या कई दिनों से हो रही थी। प्रदीप मजदूरी करते है, घटना के वक्त उनकी पत्नी अपने बच्चों के साथ मायके गई हुई थी। बताया कि सिलेंडर नहीं फटा है, इस कारण बड़ी दुर्घटना होने से टल गई है। बताया कि मकान की खिड़की, जगह-जगह दरारें और प्रदीप की माता को चोट आईं है। मौके पर पुलिस की टीम, गैस एजेंसी व फायर कर्मी भी मौजूद हैं।