सड़क दुर्घटना में रूड़की के दो युवकों की मौत

रूड़की से ऋषिकेश घूमने आए पांच युवकों में से दो युवकों की सड़क दुर्घटना में मौत हो गई, जबकि दो युवक की हालत स्थिर व एक की हालत नाजुक है।

बीते सोमवार को रूड़की से पांच युवक ऋषिकेश घूमने पहुंचे थे। रात को हरिद्वार लौटते समय उनकी कार श्यामपुर बाईपास मार्ग मंसा देवी के समीप एक पोल से टकराकर पेड़ को टक्कर मार दी।
दरअसल, मंगलवार की अलसुबह पुलिस कंट्रोल ऋषिकेश द्वारा मनसा देवी के पास एक्सीडेंट की सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची तो मौके पर आसपास के लोग खड़े थे। मालूम हुआ कि कार एक खंभे से टकराकर उसके बाद एक पेड़ से टकरा गई। घटना के वक्त कार तेज गति से चल रही थी। कार के अंदर पांच लोग सवार थे। जिनमें से तीन की हालत बहुत गंभीर थी। आगे बैठे दो लोगों को हल्की-फुल्की चोटें आई थी। जिनको 108 की मदद से ऋषिकेश सरकारी हॉस्पिटल भिजवाया गया। कार चालक द्वारा साइड में सड़क किनारे खड़ी एक्टिवा को भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया तथा बगल में लगी झोपड़ी के मेज व मिट्टी के घड़े आदि को नुकसान हुआ है।

कोतवाल रितेश शाह के अनुसार, दुर्घटना में कार की पिछली सीट पर बैठे अमित निवासी गणेशपुर रुड़की जनपद हरिद्वार, अवधेश पटेल निवासी सीबीआरआई रुड़की जनपद हरिद्वार की मौत हो गई। जबकि एम्स ऋषिकेश में भर्ती सोनू निवासी मोहनपुरा रुड़की जनपद हरिद्वार की हालत गंभीर बनी हुई है। वहीं, दुर्घटना में कार चला रहे रमेश सिंह पुत्र तेज नारायण निवासी 429 गली नंबर 10 रामनगर रुड़की हरिद्वार, प्रशांत कुमार पुत्र दया राम ठाकुर निवासी इ18 सीबीआरआई कॉलोनी रुड़की जनपद हरिद्वार को मामूली चोट आई। आगे बैठे दोनों लोग सेफ्टी बैलून खुलने के कारण बच गए। बताया कि मृतकों के परिजनों को सूचना भेज दी है।

न्यायालय के आदेश के बाद पुलिस को अब दर्ज करना पड़ेगा रेप के प्रयास का मुकदमा

बीते माह 10 नवंबर को तीर्थनगरी में टाॅयलेट करने गई एक महिला के साथ चार युवकों ने रेप की कोशिश की। मामले में पीड़ित पक्ष ने पुलिस को तहरीर दी और आरोपियों पर कानूनी कार्रवाई की मांग की, तो पुलिस ने मुकदमा दर्ज करने से इंकार कर दिया। कोतवाली से मायूसी मिलने के बाद पीड़ित पक्ष एसएसपी कार्यालय पर भी पहुंचा, मगर वहां भी सुनवाई नहीं हुई। थकहार पीड़ित पक्ष ने न्यायालय की शरण ली। जिस पर आज अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत ने सभी चारों आरोपियों के खिलाफ कोतवाली पुलिस को संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिए है।

क्या है मामला
अधिवक्ता अजय कथूरिया के अनुसार, बीते 10 नंवबर को तीर्थनगरी में एक महिला रात्रि करीब दस बजे टाॅयलेट करने बाहर बरामदे में बाथरूम गई। इसी बीच बदनीयत से अमनदीप, नवदीप, कमलदीप और राजेश कुमार ने महिला के ब्लाउज के अंदर हाथ डाल दिया और छातियों को दबाने लगे और लज्जा भंग करते हुए रेप की कोशिश की। साथ ही महिला को खींचकर बलपूर्वक ले जाने लगे। तभी महिला की साड़ी खुल गई और पेटीकोट फट गया।

इसी बीच चीख पुुकार मची तो महिला के पति, सास, बेटा और बेटी बाहर आए। तो आरोपियों ने सभी के साथ गाली गलौच भी की और मारपीट भी। मामले को लेकर पीड़ित पक्ष कोतवाली पहुंचा और आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की मांग करने लगा। मगर पुलिस ने लौटा दिया। एसएसपी कार्यालय से भी पीड़ितों को न्याय नहीं मिला तो पीड़ित पक्ष ने अधिवक्ता अजय कथूरिया की शरण ली। जिसकी बदौलत आज न्यायालय ने आरोपियों पर मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिए।

टापू में फंसे होने की सूचना से पुलिस प्रशासन में मचा हड़कंप, कड़ी मशक्कत के बाद बचाया

आज दोपहर करीब पौने दो बजे स्वामी नारायण घाट पर शाहजहांपुर के पांच लोग टहल रहे थे। वह इस दौरान गंगा के बीच बने टापू पर पहुंच गए। इसी बीच गंगा का जलस्तर बढ़ गया और चीफ पुकार मच गई। स्थानीय लोगों ने यह देख तुरंत पुलिस को सूचना दी। सूचना पाकर जल पुलिस के जवान अन्य फोर्स के साथ पहुंचे और काफी मशक्कत करने के बाद पांचों लोगों को सुरक्षित टापू से बाहर निकाला। इसके बाद पुलिसकर्मियों ने राहत की सांस ली।

एसएसआई रमेश सैनी ने सभी की पहचान विशाल शर्मा पुत्र जयचन्द्र शर्मा, विकास शर्मा पुत्र राम स्वरूप शर्मा, राकेश पुत्र अमर नाथ, आदित्य पुत्र एसके शर्मा और गोपाल पुत्र राम नरेश शर्मा के रूप में कराई है। बताया कि सभी एक ही परिवार के सदस्य हैं जिनका पता दुर्गा टाकीज शाहजहाँपुर है। रेस्क्यूू में कांस्टेबल सुभाष ध्यानी , बिदेश चैहान, गजपाल सिंह, गोताखोर पुष्कर रावत और पियूष चैहान शामिल रहे।

नरेंद्रनगर के समीप सड़क पर पलटा ट्रक, एक की मौत

ऋषिकेश से चंबा मोटर मार्ग यानी एनएच-94 पर एक ट्रक अचानक ब्रेक फेल होने से बीच सड़क पर पलट गया। ट्रक की चपेट में आकर कंडक्टर की मौत हो गयी है। राजकीय अस्पताल में कंडक्टर को पीएम के लिए भेजा गया है।

एसडीआरएफ इंस्पेक्टर कविंद्र सजवाण ने बताया कि घनसाली से ऋषिकेश आ रहा एक ट्रक औणी बैंड नरेंद्रनगर के समीप आज सुबह के वक्त सड़क पर पलट गया। जानकारी से मालूम हुआ कि ट्रक के ब्रेक फेल हो गए थे। इस कारण ट्रक अनियंत्रित होकर पलट गया। बताया कि 30 वर्षीय चालक कमल पुत्र डालचंद निवासी बिजनौर सुरक्षित है, मगर 25 वर्षीय कंडक्टर दीपक निवासी बिहार की ट्रक के नीचे आकर मौत हो गई। मृतक के शव को पोस्टमार्टम हेतु सरकारी अस्पताल ऋषिकेश ले भेजा गया है।

संकट के समय मदद मांगने गई पुलिस को आश्रम ने लौटाया बैरंग

मंगलवार को चैकी इंचार्ज कैलाश गेट विकेन्द्र कुमार पुलिसकर्मियों के साथ शीशमझाड़ी स्थित स्वामी स्वतंत्रतानंद आश्रम शिव शक्ति ट्रस्ट पहुंचे। यहां तीन घंटे तक पुलिसकर्मी आश्रम के कर्मचारियों को आवाज लगाते रहे। मगर, कोई नहीं पहुंचा। तीन घंटे बाद आश्रम के मैनेजर सतीश शर्मा बाहर आए। चैकी इंचार्ज ने पूछा कि क्या आप लॉकडाउन के चलते पीएसी के जवानों को अपने हॉल में ठहरा सकते हैं। इस पर मैनेजर ने साफ इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि पुलिस के ठहरने के लिए कोई व्यवस्था नहीं है। चैकी इंचार्ज ने बताया कि आश्रम धर्माथ कार्यों के लिए खोला गया है, यहां प्रतिवर्ष विदेशी नागरिक ठहरते हैं। संकट के समय में आश्रम के इस व्यवहार से नाराज उन्होंने कार्रवाई करने को कहा है। उन्होंने थानाध्यक्ष राम किशोर सकलानी को इसकी सूचना दी है।

रशियन नागरिकों ने बढ़ाई मुश्किल, एबेंसी से अनुमति मिलने के बाद पुलिस ने किया रवाना
रशियन एबेंसी से बिना अनुमति मिले मंगलवार को 52 नागरिक बस संख्या यूपी17एटी-2444 में सवार होकर दिल्ली एयरपोर्ट जा रहे थे। तभी पुलिस को सूचना मिली और कैलाश गेट पर बस को रोका गया। मौके पर एडिशनल एसपी उत्तम सिंह नेगी भी पहुंचे। उन्होंने बस चालक से अनुमति मांगी। मगर, वह रशियन एंबेसी का कोई अनुमति पत्र नहीं दिखा पाया। चालक ने स्थानीय प्रशासन के अनुमति वाला पत्र दिखाया। इसे पुलिस ने नहीं माना। एडिशनल एसपी ने सभी विदेशी नागरिकों को एक स्थानीय होटल में ठहराया। वहीं, दो घंटे के बाद रशियन एबेंसी से अनुमति मिलने के बाद इन्हें रवाना किया गया।

लॉकडाउन को गंभीर नही दिख रहे लोग, पुलिस कर रही कार्रवाई

कोतवाली पुलिस ने कोरोना वायरस संक्रमण के तहत जारी लॉकडाउन और उत्तराखंड शासन के आदेशों का उल्लंघन करने पर तीन लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। पुलिस ने तीनों को गिरफ्तार कर न्यायालय के समक्ष पेश किया गया। जहां से सभी को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है।
कोतवाल रितेश शाह ने अपील की है कि नगरवासी लॉकडाउन का उल्लंघन न करें। ऐसा करने पर कानूनी कार्रवाई करने को पुलिस बाध्य होगी। कोतवाल ने लॉकडाउन का उल्लंघन करने वाले तीन लोगों की पहचान 21 वर्षीय विशाल शर्मा पुत्र बालकिशन शर्मा निवासी बापू ग्राम गली ऋषिकेश, 23 वर्षीय दुर्गेश कुमार पुत्र बृजेश कुमार निवासी बाबा सदानंद मार्ग निकट मॉडर्न स्कूल ऋषिकेश और 22 वर्षीय रमन कुमार पुत्र स्व. राजवीर सिंह निवासी न्यू जाटव बस्ती ऋषिकेश के रूप में कराई है।

हरिद्वार से चली कार ने तीन चेक पोस्ट को झूठ बोलकर किया पार
मंगलवार को एक कार संख्या यूके11ए-4283 हरिद्वार से पौड़ी के लिए चली। कार में तीन लोग सवार थे। इस कार ने हरिद्वार जिले की सीमा को लांघकर, देहरादून जिले के थाना रायवाला, इसके बाद ऋषिकेश बैरियर को पार करके मुनिकीरेती पुलिस की सीमा में प्रवेश किया। इन तीनों जिले के बैरियर पर कार सवार युवकों को पुलिस ने नहीं पकड़ा। इसके बाद कार सवार युवक तपोवन बैरियर पहुंचे। यहां चैकी इंचार्ज विनोद कुमार ने कार चालक से पूछताछ की तो उसने अनुमति होना बताया। इस पर चैकी इंचार्ज ने अनुमति पत्र देखा तो वह फर्जी पाया गया। चैकी इंचार्ज ने मौके पर ही फटकार लगाई और कार को वापस भेज दिया।

अमेरिका से लौटी महिला की संदिग्ध मौत, प्रशासन ने सैपल लिए

कोरोना वायरस के प्रकोप के बीच छह मार्च को अमेरिका से उत्तराखंड लौटी एक महिला की खांसी और गले में खरास की शिकायत के बाद मौत होने की खबर मिली है। कोरोना से मौत की आशंका में स्वास्थ्य विभाग की टीम ने महिला के शव से सैंपल लेकर जांच को भेज दिया है। साथ ही महिला के परिजनों और किरायेदारों को क्वारंटीन कर दिया गया है। आसपास के इलाके को सेनिटाइज कर स्वास्थ्य विभाग पूरा एहतियात बरत रहा है।
बतातें चले कि शिवालिकनगर निवासी दंपती छह मार्च को अमेरिका से लौटे थे। बताया जाता है कि 56 वर्षीय महिला चार पांच दिन तक तो ठीक रही, लेकिन इसके बाद गले में खरास, जुकाम आदि की शिकायत होने लगी। 13 मार्च को भेल के अस्पताल में डॉक्टरों से दवा ली थी। चार दिन से महिला की तबीयत ज्यादा बिगड़ने लगी। रविवार सुबह महिला के पति उन्हें दिखाने के लिए भेल अस्पताल लेकर जाने लगे, लेकिन रास्ते में ही महिला ने दम तोड़ दिया। विदेश से लौटकर महिला की मौत की सूचना आसपास के क्षेत्र में आग की तरह फैल गई। शिवालिकनगर पालिका के चेयरमैन राजीव शर्मा ने इसकी जानकारी जिलाधिकारी को दी। जिलाधिकारी सी रविशंकर के निर्देश पर सीएमओ डॉ. सरोज नैथानी टीम के साथ पहुंचीं।
विशेषज्ञों ने मृतक महिला के शव से सैंपल लिया। इसके अलावा पूर्व में हुई जांचों की रिपोर्ट भी देखी। सीएमओ ने बताया कि महिला को शुगर था और किडनी की भी समस्या थी। सीएमओ ने बिना पोस्टमार्टम कराए महिला के शव का अंतिम संस्कार कराने की अनुमति दी। सीएमओ का कहना है कि सैंपल हल्द्वानी भेजा जा रहा है। सैंपल की रिपोर्ट आने के बाद कुछ स्पष्ट हो पायेगा।

मुनिकीरेती पुलिस ने बिना वीजा और पासपोर्ट 18 साल से रह रहे विदेशी को पकड़ा

बिना पासपोर्ट और वीजा के पिछले 18 वर्षों से एक विदेशी नागरिक साधुवेश में तीर्थनगरी में डेरा डाले हुए है। कई साल से अवैध निवास कर रहे विदेशी नागरिक के बारे में पुलिस और एलआईयू को शुक्रवार को पता चल पाया। पुलिस सूचना मिलने के बाद मुनिकीरेती क्षेत्र स्थित नावघाट पहुंची। जब नागरिक से उसके वैध दस्तावेज मांगे गए तो उसने काफी देर तक एलआईयू टीम को प्रवचन के झांसे में उलझाए रखा। आखिरकार स्वीकार किया कि उसके पास कोई पासपोर्ट, वीजा या निवास का कोई वैध दस्तावेज नहीं है।
अवैध रूप से निवास कर रहा जर्मन नागरिक जर्गेन रुडोल्फ 1981 में भारत आया था। इस दौरान पिछले 38 साल से वह महाराष्ट्र सहित दक्षिण भारत के विभिन्न शहरों में रहा। पिछले 18 साल से वह ऋषिकेश क्षेत्र में स्थान बदल-बदल कर रह रहा है। फिलहाल उसका मौजूदा ठिकाना मुनिकीरेती स्थित नावघाट बना हुआ है। वह गंगा किनारे बने सीढ़ी पर टेंट डालकर रह रहा है। अवैध तरीके से रहने की सूचना मिलने के बाद करीब 12 बजे मुनिकीरेती पुलिस और एलआईयू की सब इंस्पेक्टर उमा चैहान अपनी टीम के साथ पूछताछ को पहुंचे। पूछताछ के दौरान जर्गेन रुडोल्फ ने पहले तो आनाकानी की। बाद में अपना मूल निवास भी बताने से इनकार कर दिया।
बाद में उसने कुछ दस्तावेज दिखाए जिसके मुताबिक वह जर्मन नागरिक है, और 1981 में भारत आ गया था। तब से वह गेरुआ वस्त्र पहने पिछले 18 सालों से तीर्थनगरी में अलग-अलग स्थानों पर रह रहा है। एलआईयू एसआई उमा चैहान के मुताबिक अवैध निवास कर रहे जर्मन नागरिक की सूचना संबंधित एंबेसी को दी जाएगी। फिलहाल अभी मामले की पड़ताल की जा रही है। वहीं थाना अध्यक्ष मुनिकीरेती आरके सकलानी का कहना है कि विदेशी नागरिक के अवैध प्रवास संबंधी मामले की गहन छानबीन हो रही है। दस्तावेजों की पड़ताल के बाद कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
वहीं, विदेशी जर्गन रुडोल्फ का कहना है कि उसके पास वीजा, पासपोर्ट सहित सभी वैध दस्तावेज थे। कई साल पहले कुछ बदमाशों ने रुपयों के लालच में सारे दस्तावेज फाड़कर फेंक दिए। उनके पास पैसे भी नहीं हैं। जर्मन एंबेसी में एक बार मदद की गुहार लगाई थी। इसके बावजूद एंबेसी के लोग सहयोग नहीं कर रहे हैं। रुडोल्फ का कहना है कि अब उसने भारतीय संस्कृति को आत्मसात कर लिया है। उसका नया नाम आशाराम गिरि है। पूरा विश्व मेरा कुटुंब है। परिवार में कोई नहीं है। मां गंगा ही मेरी सबसे बड़ी शुभचिंतक है।

आखिर किसका था दबाव, पुलिस ने 30 घंटे तक जहरीली शराब का मामला दबाए रखा!

जहरीली शराब कांड के सामन के आने के बाद पता चला कि 30 घंटे तक घटना में पर्दा डाले रखने वाली पुलिस ने गुरुवार सुबह से शुक्रवार दोपहर तक हुई चार मौतों को डेंगू का प्रकोप बताकर पिंड छुड़ाना चाहा था। यही नहीं, इन चारों शवों का पोस्टमार्टम कराने की पुलिस ने जहमत भी नहीं उठाई। ऐसे में मृतकों के परिवारजन शवों का अंतिम संस्कार भी कर चुके थे। जब मामला बिगड़ा तो पुलिस को होश आया और आनन-फानन में दो शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। हैरत की बात है कि राजभवन, मुख्यमंत्री आवास, सचिवालय, जिलाधिकारी आवास व एसएसपी आवास के महज एक किमी के दायरे एवं विधायक आवास से महज 20 मीटर दूर पथरिया पीर इलाके में जहरीली शराब से मौत का कहर बरपा। लेकिन पुलिस शुक्रवार दोपहर तक इस मामले को डेंगू की आड़ में ‘दफन’ करने की कोशिशों में जुटी रही।
यहां तक की जहरीली शराब से चार मौत की सूचना के बाद भी पुलिस ने शवों का पोस्टमार्टम कराना जरूरी नहीं समझा। पीड़ित परिवारों का कहना था कि गुरुवार रात ही तीन मौतों की सूचना विधायक गणेश जोशी और संबंधित पुलिस अधिकारियों को दे दी गई थी, लेकिन पुलिस ने कोई जरूरी कदम नहीं उठाए। आरोप हैं कि जांच करने के बजाय पुलिस पीड़ित परिवारों पर दबाव बनाकर दावा करती रही कि डॉक्टरों ने मौत की वजह डेंगू बताई है। मामले में पुलिस न केवल सवालों में है बल्कि उसकी भूमिका भी संदेह के घेरे में है। पथरिया पीर इलाके में जो कुछ हुआ, वह तंत्र की भूमिका को कठघरे खड़ा कर रहा है। हैरानी यह कि थाने की पुलिस ही नहीं बल्कि जनप्रतिनिधि भी मामले को दबाने की जुगत भिड़ाते रहे।
शहर के बीचों-बीच हुए इस घटनाक्रम के 30 घंटे बाद भी सरकार पूरी तरह अनजान रही। शुक्रवार शाम विधायक के आवास पर हंगामे की सूचना पर सरकार को मामले की भनक लगी और शाम सात बजे अफसरों से रिपोर्ट मांगी गई। छह मौत की जानकारी के बाद सरकार हरकत में आई। पथरिया पीर कांड ने सरकार से लेकर प्रशासनिक तंत्र को हिलाकर रख दिया। इसके गुनाहगार कौन थे, इन्हें पनाह कौन दे रहा था, यह सामने आना अभी बाकी है। इस बीच, सरकार ने फौरी कार्रवाई करते हुए शहर कोतवाल शिशुपाल सिंह नेगी, धारा चैकी इंचार्ज कुलवंत सिंह, आबकारी आयुक्त सुशील कुमार ने दो आबकारी निरीक्षकों शुजात हसन व मनोज फत्र्याल को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। घटना के बाद आक्रोशित लोगों ने कोतवाली पुलिस पर गंभीर आरोप लगाया था कि इलाके में अवैध तरीके से शराब बेचे जाने की एक नहीं कई बार शिकायत की गई थी,। एसएसपी अरुण मोहन जोशी ने बताया कि इस प्रकरण में सीओ सिटी की तहरीर पर अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। पुलिस की भूमिका की जांच एसपी देहात प्रमेंद्र डोबाल को सौंपी गई है। यह भी देखा जा रहा है कि शराब कहां से आती थी और कैसे बेची जाती थी? क्या वाकई में इलाकाई पुलिस को इस बात की जानकारी थी। इसके लिए इलाके के सीसीटीवी फुटेज से लेकर कॉल डिटेल रिकार्ड तक चेक किए जाएंगे। जो भी दोषी होगा, वह किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा।
वहीं, मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने देहरादून के नेशविला रोड में जहरीली शराब के सेवन से हुई जनहानि पर दुख प्रकट किया है। उन्होंने घटना की मजिस्ट्रीयल जांच के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने इस प्रकरण को अत्यंत गंभीर बताते हुए कहा कि सुनिश्चित किया जाएगा कि दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा मिले। उन्होंने कहा कि मुख्य सचिव, डीजीपी व आबकारी आयुक्त को इस मामले में दोषी पाए जाने वालों पर शीघ्र कारवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। मुख्यमंत्री ने महानिदेशक स्वास्थ्य व सीएमओ देहरादून को चिकित्सालयों में भर्ती लोगों को उचित चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के लिए भी निर्देशित किया है।

क्या हकीकत में देश की सबसे बड़ी एफआइआर उत्तराखंड में लिखी जा रही? जानिए…

कहा जा रहा है कि देश की सबसे बड़ी एफआइआर अपने राज्य में दर्ज होने जा रही है। अभी तक पांच दिन में 43 पेज की लिखत-पढ़त हो चुकी है। जबकि अभी 11 पेज और लिखा जाना बाकी है। इन पेजों के लेखाजोखा में पुलिस के भी पसीने छूट रहे हैं। इसके पीछे का कारण स्वास्थ्य विभाग है। जिसने आयुष्मान योजना में हुए घोटाले की जांच रिपोर्ट ही पुलिस को एफआइआर के रूप में दे दी है। वहीं एसएसपी ऊधमसिंहनगर बरिंदरजीत सिंह का इस बारे में कहना है कि देश की सबसे बड़ी एफआइआर है, ऐसा कहना संभव नहीं है। इसका कोई रिकॉर्ड नहीं है। एफआइआर लंबी है, इसलिए समय अधिक लग रहा है। विवेचक को विवेचना करने में ज्यादा दिक्कतों का सामना नहीं करना पड़ेगा। तथ्यों के आधार पर विवेचना की जाएगी।
आपको बता दें कि स्वास्थ्य विभाग की टीम ने अटल आयुष्मान योजना के तहत एमपी मेमोरियल अस्पताल और देवकी नंदन अस्पताल में भारी अनियमितताएं पकड़ी थीं। जांच में सामने आया कि अस्पताल के संचालक नियमों के खिलाफ मरीजों के फर्जी इलाज के बिलों का क्लेम वसूल रहे हैं। एमपी अस्पताल में मरीजों के डिस्चार्ज होने के बाद भी उनको कई-कई दिनों तक अस्पताल में भर्ती दिखाया गया। इसके अलावा आइसीयू में भी क्षमता से ज्यादा रोगियों का इलाज होना बताया गया। मामले की पूरी जांच के बाद स्वास्थ्य विभाग ने पूरी जांच रिपोर्ट ही पुलिस को एफआइआर दर्ज करने के लिए दे दी। स्वास्थ्य विभाग की जांच ही पुलिस के गले की फांस बनी हुई है। यदि स्वास्थ्य विभाग की तरफ से जांच का निष्कर्ष निकालकर दिया गया होता तो पुलिस को इतनी दिक्कतें नहीं झेलनी पड़तीं। हालांकि बांसफोड़ान पुलिस चैकी में देवकी नंदन अस्पताल संचालक पुनीत बंसल के खिलाफ 22 पेज की एफआइआर लिखी जा चुकी है। जबकि अभी एमपी मेमोरियल अस्पताल के खिलाफ एफआइआर दर्ज करने का सिलसिला जारी है।
एफआइआर को लिखने में लिपिक के सामने सबसे बड़ी दिक्कत भाषाएं बनी हुई हैं। स्वास्थ्य विभाग के द्वारा एफआइआर लिखने को दी गई जांच रिपोर्ट हिंदी-अंग्रेजी और गणित की भाषा में है। जिससे एक पेज लिखने में घंटों का समय लग रहा है। हालांकि मैनुअली लिखे जाने के साथ ही एफआइआर को साथ ही साथ पुलिस के सॉफ्टवेयर सीसीटीएनएस दर्ज किया जा रहा है। कटोराताल पुलिस चैकी में एमपी मेमोरियल अस्पताल के खिलाफ लिखी जा रही एफआइआर में अभी तक आठ रिफिल लग चुके हैं। जबकि अभी तीन-चार रिफिल और खर्च हो सकते हैं। इतना ही नहीं एफआइआर को लिखने में लिपिक को प्रतिदिन 14 घंटे का समय देना पड़ रहा है। जिसके बाद अन्य काम किए जा रहे हैं।