अमेरिका से लौटी महिला की संदिग्ध मौत, प्रशासन ने सैपल लिए

कोरोना वायरस के प्रकोप के बीच छह मार्च को अमेरिका से उत्तराखंड लौटी एक महिला की खांसी और गले में खरास की शिकायत के बाद मौत होने की खबर मिली है। कोरोना से मौत की आशंका में स्वास्थ्य विभाग की टीम ने महिला के शव से सैंपल लेकर जांच को भेज दिया है। साथ ही महिला के परिजनों और किरायेदारों को क्वारंटीन कर दिया गया है। आसपास के इलाके को सेनिटाइज कर स्वास्थ्य विभाग पूरा एहतियात बरत रहा है।
बतातें चले कि शिवालिकनगर निवासी दंपती छह मार्च को अमेरिका से लौटे थे। बताया जाता है कि 56 वर्षीय महिला चार पांच दिन तक तो ठीक रही, लेकिन इसके बाद गले में खरास, जुकाम आदि की शिकायत होने लगी। 13 मार्च को भेल के अस्पताल में डॉक्टरों से दवा ली थी। चार दिन से महिला की तबीयत ज्यादा बिगड़ने लगी। रविवार सुबह महिला के पति उन्हें दिखाने के लिए भेल अस्पताल लेकर जाने लगे, लेकिन रास्ते में ही महिला ने दम तोड़ दिया। विदेश से लौटकर महिला की मौत की सूचना आसपास के क्षेत्र में आग की तरह फैल गई। शिवालिकनगर पालिका के चेयरमैन राजीव शर्मा ने इसकी जानकारी जिलाधिकारी को दी। जिलाधिकारी सी रविशंकर के निर्देश पर सीएमओ डॉ. सरोज नैथानी टीम के साथ पहुंचीं।
विशेषज्ञों ने मृतक महिला के शव से सैंपल लिया। इसके अलावा पूर्व में हुई जांचों की रिपोर्ट भी देखी। सीएमओ ने बताया कि महिला को शुगर था और किडनी की भी समस्या थी। सीएमओ ने बिना पोस्टमार्टम कराए महिला के शव का अंतिम संस्कार कराने की अनुमति दी। सीएमओ का कहना है कि सैंपल हल्द्वानी भेजा जा रहा है। सैंपल की रिपोर्ट आने के बाद कुछ स्पष्ट हो पायेगा।

मुनिकीरेती पुलिस ने बिना वीजा और पासपोर्ट 18 साल से रह रहे विदेशी को पकड़ा

बिना पासपोर्ट और वीजा के पिछले 18 वर्षों से एक विदेशी नागरिक साधुवेश में तीर्थनगरी में डेरा डाले हुए है। कई साल से अवैध निवास कर रहे विदेशी नागरिक के बारे में पुलिस और एलआईयू को शुक्रवार को पता चल पाया। पुलिस सूचना मिलने के बाद मुनिकीरेती क्षेत्र स्थित नावघाट पहुंची। जब नागरिक से उसके वैध दस्तावेज मांगे गए तो उसने काफी देर तक एलआईयू टीम को प्रवचन के झांसे में उलझाए रखा। आखिरकार स्वीकार किया कि उसके पास कोई पासपोर्ट, वीजा या निवास का कोई वैध दस्तावेज नहीं है।
अवैध रूप से निवास कर रहा जर्मन नागरिक जर्गेन रुडोल्फ 1981 में भारत आया था। इस दौरान पिछले 38 साल से वह महाराष्ट्र सहित दक्षिण भारत के विभिन्न शहरों में रहा। पिछले 18 साल से वह ऋषिकेश क्षेत्र में स्थान बदल-बदल कर रह रहा है। फिलहाल उसका मौजूदा ठिकाना मुनिकीरेती स्थित नावघाट बना हुआ है। वह गंगा किनारे बने सीढ़ी पर टेंट डालकर रह रहा है। अवैध तरीके से रहने की सूचना मिलने के बाद करीब 12 बजे मुनिकीरेती पुलिस और एलआईयू की सब इंस्पेक्टर उमा चैहान अपनी टीम के साथ पूछताछ को पहुंचे। पूछताछ के दौरान जर्गेन रुडोल्फ ने पहले तो आनाकानी की। बाद में अपना मूल निवास भी बताने से इनकार कर दिया।
बाद में उसने कुछ दस्तावेज दिखाए जिसके मुताबिक वह जर्मन नागरिक है, और 1981 में भारत आ गया था। तब से वह गेरुआ वस्त्र पहने पिछले 18 सालों से तीर्थनगरी में अलग-अलग स्थानों पर रह रहा है। एलआईयू एसआई उमा चैहान के मुताबिक अवैध निवास कर रहे जर्मन नागरिक की सूचना संबंधित एंबेसी को दी जाएगी। फिलहाल अभी मामले की पड़ताल की जा रही है। वहीं थाना अध्यक्ष मुनिकीरेती आरके सकलानी का कहना है कि विदेशी नागरिक के अवैध प्रवास संबंधी मामले की गहन छानबीन हो रही है। दस्तावेजों की पड़ताल के बाद कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
वहीं, विदेशी जर्गन रुडोल्फ का कहना है कि उसके पास वीजा, पासपोर्ट सहित सभी वैध दस्तावेज थे। कई साल पहले कुछ बदमाशों ने रुपयों के लालच में सारे दस्तावेज फाड़कर फेंक दिए। उनके पास पैसे भी नहीं हैं। जर्मन एंबेसी में एक बार मदद की गुहार लगाई थी। इसके बावजूद एंबेसी के लोग सहयोग नहीं कर रहे हैं। रुडोल्फ का कहना है कि अब उसने भारतीय संस्कृति को आत्मसात कर लिया है। उसका नया नाम आशाराम गिरि है। पूरा विश्व मेरा कुटुंब है। परिवार में कोई नहीं है। मां गंगा ही मेरी सबसे बड़ी शुभचिंतक है।

आखिर किसका था दबाव, पुलिस ने 30 घंटे तक जहरीली शराब का मामला दबाए रखा!

जहरीली शराब कांड के सामन के आने के बाद पता चला कि 30 घंटे तक घटना में पर्दा डाले रखने वाली पुलिस ने गुरुवार सुबह से शुक्रवार दोपहर तक हुई चार मौतों को डेंगू का प्रकोप बताकर पिंड छुड़ाना चाहा था। यही नहीं, इन चारों शवों का पोस्टमार्टम कराने की पुलिस ने जहमत भी नहीं उठाई। ऐसे में मृतकों के परिवारजन शवों का अंतिम संस्कार भी कर चुके थे। जब मामला बिगड़ा तो पुलिस को होश आया और आनन-फानन में दो शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। हैरत की बात है कि राजभवन, मुख्यमंत्री आवास, सचिवालय, जिलाधिकारी आवास व एसएसपी आवास के महज एक किमी के दायरे एवं विधायक आवास से महज 20 मीटर दूर पथरिया पीर इलाके में जहरीली शराब से मौत का कहर बरपा। लेकिन पुलिस शुक्रवार दोपहर तक इस मामले को डेंगू की आड़ में ‘दफन’ करने की कोशिशों में जुटी रही।
यहां तक की जहरीली शराब से चार मौत की सूचना के बाद भी पुलिस ने शवों का पोस्टमार्टम कराना जरूरी नहीं समझा। पीड़ित परिवारों का कहना था कि गुरुवार रात ही तीन मौतों की सूचना विधायक गणेश जोशी और संबंधित पुलिस अधिकारियों को दे दी गई थी, लेकिन पुलिस ने कोई जरूरी कदम नहीं उठाए। आरोप हैं कि जांच करने के बजाय पुलिस पीड़ित परिवारों पर दबाव बनाकर दावा करती रही कि डॉक्टरों ने मौत की वजह डेंगू बताई है। मामले में पुलिस न केवल सवालों में है बल्कि उसकी भूमिका भी संदेह के घेरे में है। पथरिया पीर इलाके में जो कुछ हुआ, वह तंत्र की भूमिका को कठघरे खड़ा कर रहा है। हैरानी यह कि थाने की पुलिस ही नहीं बल्कि जनप्रतिनिधि भी मामले को दबाने की जुगत भिड़ाते रहे।
शहर के बीचों-बीच हुए इस घटनाक्रम के 30 घंटे बाद भी सरकार पूरी तरह अनजान रही। शुक्रवार शाम विधायक के आवास पर हंगामे की सूचना पर सरकार को मामले की भनक लगी और शाम सात बजे अफसरों से रिपोर्ट मांगी गई। छह मौत की जानकारी के बाद सरकार हरकत में आई। पथरिया पीर कांड ने सरकार से लेकर प्रशासनिक तंत्र को हिलाकर रख दिया। इसके गुनाहगार कौन थे, इन्हें पनाह कौन दे रहा था, यह सामने आना अभी बाकी है। इस बीच, सरकार ने फौरी कार्रवाई करते हुए शहर कोतवाल शिशुपाल सिंह नेगी, धारा चैकी इंचार्ज कुलवंत सिंह, आबकारी आयुक्त सुशील कुमार ने दो आबकारी निरीक्षकों शुजात हसन व मनोज फत्र्याल को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। घटना के बाद आक्रोशित लोगों ने कोतवाली पुलिस पर गंभीर आरोप लगाया था कि इलाके में अवैध तरीके से शराब बेचे जाने की एक नहीं कई बार शिकायत की गई थी,। एसएसपी अरुण मोहन जोशी ने बताया कि इस प्रकरण में सीओ सिटी की तहरीर पर अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। पुलिस की भूमिका की जांच एसपी देहात प्रमेंद्र डोबाल को सौंपी गई है। यह भी देखा जा रहा है कि शराब कहां से आती थी और कैसे बेची जाती थी? क्या वाकई में इलाकाई पुलिस को इस बात की जानकारी थी। इसके लिए इलाके के सीसीटीवी फुटेज से लेकर कॉल डिटेल रिकार्ड तक चेक किए जाएंगे। जो भी दोषी होगा, वह किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा।
वहीं, मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने देहरादून के नेशविला रोड में जहरीली शराब के सेवन से हुई जनहानि पर दुख प्रकट किया है। उन्होंने घटना की मजिस्ट्रीयल जांच के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने इस प्रकरण को अत्यंत गंभीर बताते हुए कहा कि सुनिश्चित किया जाएगा कि दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा मिले। उन्होंने कहा कि मुख्य सचिव, डीजीपी व आबकारी आयुक्त को इस मामले में दोषी पाए जाने वालों पर शीघ्र कारवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। मुख्यमंत्री ने महानिदेशक स्वास्थ्य व सीएमओ देहरादून को चिकित्सालयों में भर्ती लोगों को उचित चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के लिए भी निर्देशित किया है।

क्या हकीकत में देश की सबसे बड़ी एफआइआर उत्तराखंड में लिखी जा रही? जानिए…

कहा जा रहा है कि देश की सबसे बड़ी एफआइआर अपने राज्य में दर्ज होने जा रही है। अभी तक पांच दिन में 43 पेज की लिखत-पढ़त हो चुकी है। जबकि अभी 11 पेज और लिखा जाना बाकी है। इन पेजों के लेखाजोखा में पुलिस के भी पसीने छूट रहे हैं। इसके पीछे का कारण स्वास्थ्य विभाग है। जिसने आयुष्मान योजना में हुए घोटाले की जांच रिपोर्ट ही पुलिस को एफआइआर के रूप में दे दी है। वहीं एसएसपी ऊधमसिंहनगर बरिंदरजीत सिंह का इस बारे में कहना है कि देश की सबसे बड़ी एफआइआर है, ऐसा कहना संभव नहीं है। इसका कोई रिकॉर्ड नहीं है। एफआइआर लंबी है, इसलिए समय अधिक लग रहा है। विवेचक को विवेचना करने में ज्यादा दिक्कतों का सामना नहीं करना पड़ेगा। तथ्यों के आधार पर विवेचना की जाएगी।
आपको बता दें कि स्वास्थ्य विभाग की टीम ने अटल आयुष्मान योजना के तहत एमपी मेमोरियल अस्पताल और देवकी नंदन अस्पताल में भारी अनियमितताएं पकड़ी थीं। जांच में सामने आया कि अस्पताल के संचालक नियमों के खिलाफ मरीजों के फर्जी इलाज के बिलों का क्लेम वसूल रहे हैं। एमपी अस्पताल में मरीजों के डिस्चार्ज होने के बाद भी उनको कई-कई दिनों तक अस्पताल में भर्ती दिखाया गया। इसके अलावा आइसीयू में भी क्षमता से ज्यादा रोगियों का इलाज होना बताया गया। मामले की पूरी जांच के बाद स्वास्थ्य विभाग ने पूरी जांच रिपोर्ट ही पुलिस को एफआइआर दर्ज करने के लिए दे दी। स्वास्थ्य विभाग की जांच ही पुलिस के गले की फांस बनी हुई है। यदि स्वास्थ्य विभाग की तरफ से जांच का निष्कर्ष निकालकर दिया गया होता तो पुलिस को इतनी दिक्कतें नहीं झेलनी पड़तीं। हालांकि बांसफोड़ान पुलिस चैकी में देवकी नंदन अस्पताल संचालक पुनीत बंसल के खिलाफ 22 पेज की एफआइआर लिखी जा चुकी है। जबकि अभी एमपी मेमोरियल अस्पताल के खिलाफ एफआइआर दर्ज करने का सिलसिला जारी है।
एफआइआर को लिखने में लिपिक के सामने सबसे बड़ी दिक्कत भाषाएं बनी हुई हैं। स्वास्थ्य विभाग के द्वारा एफआइआर लिखने को दी गई जांच रिपोर्ट हिंदी-अंग्रेजी और गणित की भाषा में है। जिससे एक पेज लिखने में घंटों का समय लग रहा है। हालांकि मैनुअली लिखे जाने के साथ ही एफआइआर को साथ ही साथ पुलिस के सॉफ्टवेयर सीसीटीएनएस दर्ज किया जा रहा है। कटोराताल पुलिस चैकी में एमपी मेमोरियल अस्पताल के खिलाफ लिखी जा रही एफआइआर में अभी तक आठ रिफिल लग चुके हैं। जबकि अभी तीन-चार रिफिल और खर्च हो सकते हैं। इतना ही नहीं एफआइआर को लिखने में लिपिक को प्रतिदिन 14 घंटे का समय देना पड़ रहा है। जिसके बाद अन्य काम किए जा रहे हैं।

संकटमोचक को विदाई देने पहुंचे दिग्गज भाजपा नेता

पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली आज अपने अनंत सफर पर रवाना हो गए। पूरे राजकीय सम्मान के साथ उनके शव का अंतिम संस्कार किया गया। भाजपा के संकटमोचक को अंतिम विदाई देने के लिए उप राष्ट्रपति वेंकैया नायडू, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला, गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण सहित कई राज्यों के मुख्यमंत्री, योग गुरु बाबा रामदेव और विपक्ष के कई दिग्गज नेता भी पहुचे। सभी ने नम आंखों से जेटली को विदाई दी। विदेश यात्रा पर होने की वजह से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अरुण जेटली के अंतिम संस्कार में शामिल नहीं हो पाए। हालांकि उन्होंने शोकाकुल परिवार से फोन पर बात की थी। बहरीन में अपना दुख व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा था कि मैं यहां इतनी दूर हूं और मेरा दोस्त अरुण चला गया।
भाजपा मुख्यालय में दी श्रद्धांजलि
इससे पहले दिवंगत नेता अरुण जेटली का पार्थिव शरीर भाजपा मुख्यालय लाया गया जहां केंद्रीय मंत्री अमित शाह, राजनाथ सिंह और वरिष्ठ पार्टी नेताओं तथा कार्यकर्ताओं ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। भाजपा के कार्यकारी अध्यक्ष जेपी नड्डा, केंद्रीय मंत्री हर्षवर्धन, प्रकाश जावड़ेकर, पीयूष गोयल, अनुराग ठाकुर और आप के राज्यसभा सदस्य संजय सिंह ने भी जेटली को श्रद्धांजलि अर्पित की। जेटली के पार्थिव शरीर को तिरंगे में लपेटकर उनके कैलाश कॉलोनी स्थित आवास से दीन दयाल उपाध्याय स्थित भाजपा मुख्यालय लाया गया। भाजपा मुख्यालय के बाहर पार्टी कार्यकर्ता अपने नेता को अंतिम श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए कतार में खड़े थे और ‘जब तक सूरज चांद रहेगा जेटली तेरा नाम रहेगा’ तथा ‘जेटली जी अमर रहें’ जैसे नारे लगा रहे थे।

जेटली के परिवार से की बात
प्रधानमंत्री ने यूएई से ही जेटली की पत्नी संगीता और बेटे रोहन से बात की और उन्हें सांत्वना दी। इस दौरान जेटली के परिवार ने उनसे विदेश दौरा रद्द नहीं करने को कहा। दिल्ली विश्वविद्यालय से छात्र नेता के रूप में राजनीतिक कॅरियर की शुरुआत करने वाले जेटली सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील भी थे। वह अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में भी केंद्रीय मंत्री रहे थे। उनकी गिनती देश के बेहतरीन वकीलों के तौर पर होती रही। 80 के दशक में ही जेटली ने सुप्रीम कोर्ट और देश के कई हाई कोर्ट में महत्वपूर्ण केस लड़े। 1990 में उन्हें दिल्ली हाई कोर्ट ने सीनियर वकील का दर्जा दिया। वीपी सिंह सरकार में वह अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल का पद संभाला था।

विदेश में की घोटालों की पड़ताल
पिछले बीस वर्षों के दौरान जेटली ने वाणिज्य, सूचना प्रसारण, कानून, कंपनी मामले, वित्त, रक्षा जैसे कई महत्वपूर्ण मंत्रालय संभाले। चाहे 1989 में बोफोर्स घोटाले की विदेशों में जाकर पड़ताल करनी हो, 2002 में गुजरात दंगों के बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी का साथ देना हो या फिर 2009 से 2014 के दौरान राज्यसभा में बतौर नेता विपक्ष मनमोहन सिंह सरकार के भ्रष्टाचार के मामलों को उजागर करना, वे हर बार नई ऊर्जा और रणनीति के साथ भाजपा की राजनीति को नई धार प्रदान करते नजर आते। इस साल मई में जेटली ने पीएम मोदी को पत्र लिखकर स्वास्थ्य कारणों से नई सरकार में कोई जिम्मेदारी लेने से इनकार कर दिया था।

अरुण जेटली की मौत का सच
पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली लंबे समय से चली आ रही गंभीर बीमारियों को हर बार मात देते थे। मधुमेह, मोटापा, गुर्दा, कैंसर, पेट और फेफड़े से जुड़े रोगों का उन्होंने डटकर सामना किया। निधन से पहले 12 घंटे के भीतर दो बार हार्ट अटैक भी आया। आंतों में रक्तस्त्राव होने के बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। वर्ष 2014 में जेटली ने एम्स में गैस्ट्रो यानि पेट से जुड़ा एक ऑपरेशन कराया था। जिसके बाद उनका वजन भी काफी कम हुआ था। चूंकि वह मधुमेह रोग से लंबे समय से ग्रस्त थे।
ऑपरेशन के बाद से डॉक्टरों ने स्वास्थ्य को लेकर उन्हें खास सतर्कता बरतने की सलाह दी थी, जिसके बाद सुबह से लेकर रात तक जेटली संतुलित आहार का सेवन करते थे। सात्विक भोजन के लिए उनका टिफन बाकायदा घर से बनकर वित्त मंत्रालय और सदन तक आता था। हालांकि वर्ष 2017 में उन्हें किडनी (गुर्दे) से जुड़ी तकलीफ शुरू हो गई। कई बार डायलिसिस के बाद वर्ष 2018 में एम्स में किडनी प्रत्यारोपण कराया। प्रत्यारोपण के करीब छह माह तक जेटली काफी स्वस्थ्य रहे। हालांकि डॉक्टरों ने आइसोलेशन में ही रहने की सलाह दी थी लेकिन फिर भी वह जरूरतमंद लोगों को पूरा वक्त देते थे। दिसंबर 2018 में उनकी तबियत में गिरावट आई।
जांच करने पर फेफड़े में एक प्रकार के कैंसर की पुष्टि हुई। इसके बाद जनवरी में न्यूयॉर्क के डॉक्टरों से ऑपरेशन भी कराया। इस ऑपरेशन के बाद से जेटली का स्वास्थ्य लगातार गिरता चला गया। वे पहले से काफी कमजोर हो गए थे। बीते 9 अगस्त को उन्हें सांस लेने में तकलीफ और फेफड़ों में पानी भरने की शिकायत हुई थी जिसके बाद से एम्स में भर्ती थे।

पाकिस्तान की ओर से सीजफायर के जवाब में देहरादून का लाल शहीद

देहरादून का जवान बेटा संदीप थापा शनिवार को पाकिस्तान की ओर से किए गए सीजफायर के जवाब में शहीद हो गए। वह 3-5 गोरखा राइफल में लांस नायक के पद पर तैनात थे। मुख्यमंत्री, विधानसभा अध्यक्ष सहित तमाम लोगों ने उनकी शहादत को नमन कर अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की है।

शनिवार सुबह साढ़े छह बजे जम्मू कश्मीर में राजौरी जिले के नौशेरा सेक्टर में भारी शेलिंग की गई। जिसका जवाब देते हुए लांस नायक संदीप थापा घायल हो गए। घायल जवान को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया था। जहां उपचार के दौरान वह शहीद हो गए। रविवार की सुबह 11 बजे सैन्य सम्मान के साथ उनके पार्थिव शरीर को हवाई सेवा से जॉलीग्रांट एयपोर्ट लाया जाएगा। जहां से उनका पार्थिव शरीर घर पहुंचेगा। रविवार को पूरे सैन्य सम्मान के साथ उन्हें प्रेमनगर स्थित घाट पर अंतिम विदाई दी जाएगी।

2004 में हुए सेना में शामिल
शहीद संदीप थापा 33 वर्ष के थे। वर्ष 2004 में वह भारतीय सेना में शामिल हुए थे। जून माह में वह आखिरी बार अपने घर आए थे। जिसके बाद से उनके परिवार का उनसे कोई संपर्क नहीं हुआ। वर्ष 2012 में उनका विवाह दुधली डोईवाला निवासी निशा थापा के साथ हुआ था।

परिवार का रो-रोकर बुरा हाल
उनका तीन साल का छोटा बेटा भी है। संदीप थापा के छोटे भाई नवीन थापा भी उक्त बटालियन में राजौरी में तैनात हैं। दोपहर करीब ढाई बजे परिजनों को लांस नायक संदीप के शहीद होने की सूचना मिली। जिसके बाद से परिवार में कोहराम मचा हुआ है। मां राधा देवी, पत्नी निशा और बहन अनिता का रो-रो कर बुरा हाल है।

मुख्यमंत्री और विस अध्यक्ष ने शहादत पर किया नमन
संदीप की शहादत की सूचना मिलने के बाद सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने ट्वीट कर कहा श्कि सीमा पर पाकिस्तान की गोलीबारी में उत्तराखंड के सपूत संदीप थापा देश के लिए कुर्बान हुए हैं। मैं लांस नायक थापा की शहादत को कोटि कोटि नमन करता हूं। उनके परिजनों को सांत्वना प्रदान करने की प्रार्थना करते हुए, विश्वास दिलाता हूं हम सब हर समय शहीद के परिजनों के साथ खड़े रहेंगे। विधानसभा अध्यक्ष ने संदीप थापा की शहादत पर गहरा शोक व्यक्त किया है। उन्होंने जवान को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए शहीद के परिजनों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की है। समूचा राष्ट्र संदीप थापा के प्रति कृतज्ञ रहेगा। शहीद के इस बलिदान को प्रदेश और देश के लोग हमेशा याद रखेंगे।

डायलिसिस यूनिट पावर सप्लाई बंद, मरीज की मौत

हरिद्वार के मेला अस्पताल में डायलिसिस यूनिट में अचानक पॉवर सप्लाई बंद होने से किडनी की बीमारी से पीड़ित दस मरीजों की हालत बिगड़ गई। गंभीर हाल में एक मरीज को जौलीग्रांट रेफर किया गया जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
घटना के बाद मरीजों के तीमारदारों ने हंगामा खड़ा कर दिया। मौके पर पहुंची मेयर अनीता शर्मा ने अस्पताल की व्यवस्थाओं पर नाराजगी जताई। बताया जा रहा है कि पीपीपी मोड पर चल रही यूनिट बिना एमडी डॉक्टर और नेफ्रोलॉजिस्ट के चलाई जा रही थी। मेला अस्पताल में अप्रैल में डायलिसिस यूनिट शुरू की गई थी। शनिवार की दोपहर को यूनिट की दस मशीनों पर किडनी के मरीजों की डायलिसिस की जा रही थी। अस्पताल क्षेत्र की बिजली आपूर्ति बाधित होने के बाद जेनरेटर चलाया गया।
करीब दो बजे अचानक से तकनीकी खराबी के कारण जनरेटर बंद हो गया और मशीन बैकअप पर चलने लगी। कुछ ही मिनटों पर मशीन का अलार्म बजने लगा। देखते ही देखते दस मिनट में ही बैकअप समाप्त होने लगा। यूनिट के डॉक्टर, तकनीशियनों और नर्स ने डायलिसिस मशीन के पंप चलाकर बाहर निकले ब्लड को बमुश्किल से शरीर के अंदर पहुंचाया। सभी दस मरीजों की हालत बिगड़ने लगी। एक मरीज की हालत ज्यादा खराब होने पर उन्हें जौलीग्रांट रेफर कर दिया। सूत्रों की मानें तो मरीज विजय शर्मा (62) की मेला अस्पताल में ही मौत हो गई थी।
पीपीपी मोड पर यूनिट चला रहे चंडीगढ़ की संस्था राही केयर प्राइवेट लिमिटेड के मालिक डॉ. शौर्य पयाल का कहना है कि यूनिट में उनकी तरफ से सभी व्यवस्थाएं उपलब्ध हैं। पॉवर सप्लाई प्रभावित होने से यह समस्या खड़ी हुई। उन्होंने एक मरीज की मौत की पुष्टि तो की लेकिन कहा कि यह मौत यूनिट में नहीं हुई है।
सीएमओ प्रेमलाल का कहना है कि विजय शर्मा दस साल से किडनी की बीमारी से पीड़ित थे। कार्डियकअरेस्ट से उनकी मौत हुई है। उनका कहना है कि यूनिट में जो कमियां हैं उनको दूर कराया जाएगा। पाॅवर सप्लाई के पर्याप्त इंतजाम किए जाएंगे।

कालसी मार्ग पर कार खाई गिरी, हरियाणा के पर्यटकों की मौत

चकराता घूमने जा रहे हरियाणा के पर्यटकों की कार कालसी से पांच किमी आगे चामड़खील नामक जगह पर अनियंत्रित होकर खाई में गिर गई। हादसे में कार सवार सभी 5 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई।
पुलिस के अनुसार, घटना देर रात की बताई जा रही है। जिसका पता स्थानीय पुलिस-प्रशासन को रविवार सुबह चला। मौके पर पहुंचे तहसीलदार केडी जोशी और थानाध्यक्ष कालसी के नेतृत्व में शवों को खाई से बाहर निकालने के लिए रेस्क्यू चल रहा है। पुलिस प्रशासन की टीम स्थानीय लोगों की मदद से खाई में फंसे शवों को बाहर निकालने के लिए सुबह से जुटी है। मृतकों की शिनाख्त अभी नहीं हो पाई। बताया जा रहा पांचों लोग हरियाणा के निवासी है। तहसीलदार ने कहा शवों को बाहर निकालने के बाद ही मृतकों की सही पहचान का पता चल सकेगा।

’’चैंपियन के जवाब देने पर कार्रवाई करने का’’ नया बयान आने से भाजपा की फजीहत

उत्तराखंड भाजपा ने खानपुर विधायक कुंवर प्रणव चैंपियन के निष्कासन के संबंध में अपने ही प्रभारी का बयान पलट दिया है। पार्टी ने कहा कि चैंपियन को अभी निष्कासित नहीं किया गया है, बल्कि उन्हें निष्कासन का नोटिस दिया गया है। उन्हें 10 दिन में नोटिस का जवाब देना है।
जवाब प्राप्त होने के बाद केंद्रीय नेतृत्व कार्रवाई तय करेगा। पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और प्रभारी श्याम जाजू ने बृहस्पतिवार को कहा था कि उन्होंने केंद्रीय नेतृत्व से चैंपियन के निष्कासन की सिफारिश की थी, जिसे मान लिया गया। उन्होंने दावा किया था कि चैंपियन को निष्कासित कर दिया गया है। हालांकि पार्टी ने अपना बयान बदला है। लेकिन कई बड़े नेता दबी जुबान से चैंपियन की पार्टी से बर्खास्तगी तय मान रहे हैं।
शुक्रवार को भाजपा के प्रदेश मीडिया प्रमुख डॉ. देवेंद्र भसीन ने प्रदेश पार्टी कार्यालय में पत्रकारों से बातचीत में चैंपियन के निष्कासन से इनकार किया। उन्होंने दोहराया कि चैंपियन के नए वीडियो के संबंध में पार्टी ने उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया।

जवाब मिलने के बाद संगठन लेगा निर्णय
नोटिस में उनसे पूछा गया है कि वीडियो के संदर्भ में क्यों न पार्टी से निष्कासित कर दिया जाए। नोटिस का जवाब देने के लिए उन्हें 10 दिन का समय दिया गया है। जवाब प्राप्त होने या न प्राप्त होने की दशा में संगठन अपना निर्णय लेगा। कार्रवाई की जो भी स्थिति बनेगी, उसे केंद्रीय नेतृत्व को संस्तुति भेजेगा। विधायक चैंपियन का तीन माह का निलंबन अनिश्चितकाल के लिए कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष व प्रदेश प्रभारी श्याम जाजू ने भी अपने स्तर पर प्रकरण का संज्ञान लेते हुए केंद्रीय नेतृत्व से विधायक चैंपियन के निष्कासन की सिफारिश की है। किसी विधायक या सांसद को पार्टी से निष्कासित करने का अंतिम अधिकार केंद्रीय नेतृत्व को है। इसीलिए पार्टी केंद्रीय नेतृत्व से कार्रवाई की सिफारिश करेगी।

चैंपियन का निष्कासन तय …
सूत्रों की मानें तो भाजपा से चैंपियन का निष्कासन तय है। यही वजह है कि भाजपा के प्रदेश प्रभारी श्याम जाजू ने उनके निष्कासन की घोषणा करने में कोई संकोच नहीं किया। लेकिन संगठन स्तर पर किसी जनप्रतिनिधि के निष्कासन की एक प्रक्रिया है। पार्टी अपनी इस संविधानिक प्रक्रिया से बंधी है। इसके अनुसार, किसी सांसद या विधायक के खिलाफ कार्रवाई करने से पहले पार्टी को उसे 10 दिन का नोटिस देना आवश्यक है। जवाब प्राप्त होने के बाद पार्टी एक्शन ले सकती है।

भाजपा ने निष्कासन की प्रक्रिया शुरू कर दी है। उन्हें समय दिया गया है। उन्हें जवाब देना है। लेकिन ये स्पष्ट है कि इस तरह की भाषा बोलने वाले और उत्तराखंड को गाली देने वाले के लिए भाजपा में कोई जगह नहीं है।
– अनिल बलूनी, राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी व राज्यसभा सांसद