कोरोना से बचना है तो भीड़-भाड़ वाले स्थानों में जाने से बचें, जानिए क्यों है जरुरी

कोरोना वायरस आने के बाद सब एक दूसरे से उचित दुरी बना कर रख रहे है। लोगों से कहा जा रहा है कि दूर-दूर रहो. कम से कम एक या दो मीटर की दूरी। लेकिन अब एक अध्ययन में सामने आया है कि कोरोना से बचने के लिए दो मीटर की दूरी नाकाफी है. क्योंकि इंसान की लार की बूंदें कम गति वाली हवा में भी कुछ नहीं तो छह मीटर तक ट्रैवल तो करती ही हैं।
ये अध्ययन अमेरिकन इंस्टिट्यूट ऑफ फिजिक्स के तहत फिजिक्स ऑफ फ्लुइड्स जर्नल में प्रकाशित हुआ है। इसमें कहा गया है कि जब हवा की गति जीरो थी, तब लार की बूंदों ने दो मीटर से ज्यादा ट्रैवल नहीं किया। जो कि सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों के लिए एकदम सही है। लेकिन जब हवा चार किलोमीटर प्रति घंटे से लेकर 15 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलती है, तब ये बूंदें छह मीटर तक ट्रैवल कर लेती हैं।
लार की बूंदों पर ये स्टडी रिसर्चर्स तालिब डीबौक और दिमित्रिस ड्रक्कैकिस ने की है। ‘हिंदुस्तान टाइम्स’ के ई-मेल के जवाब में ड्रक्कैकिस ने लिखा है कि ‘चार किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार वाली हवा के एक झोंके से भी ये बूंदें पांच सेकंड्स के अंदर छह मीटर तक ट्रैवल कर जाती हैं। इसलिए दो मीटर की दूरी काफी नहीं है। भीड़ वाले इलाके काफी ज्यादा प्रभावित हो सकते हैं।’
लार की बूंदों पर स्टडी करने के लिए रिसर्चर्स ने कम्प्यूटेशनल फ्लुइड्स डायनेमिक्स का इस्तेमाल किया गया है। इस स्टडी में ये देखा गया कि खांसते हुए आदमी के मुंह से निकलने वाली लार की हर बूंद किस तरह मूव करती है। उमस का उस बूंद पर क्या प्रभाव होता है। बूंदों का आपस में और हवा के साथ कैसा बर्ताव रहता है, और किस तरह ये बूंदें लिक्विड से गैस बनकर हवा होती हैं।
स्टडी में रिसर्चर्स ने ये कहा है कि उन्होंने ये पता लगाने की पूरी कोशिश की है कि सर्दी और बसंत के मौसम का इन बूंदों पर क्या प्रभाव होता है। ड्रक्कैकिस कहते हैं, ‘हमें बूंदो के वाष्पीकरण को अभी और गहराई से समझना है। अलग-अलग वातावरण को लेकर भी स्टडी करनी है। काम अभी चल ही रहा है। इनडोर वातारवरण में बूंद का बर्ताव कैसा होगा, ये जानना बहुत जरूरी है।
वैज्ञानिक कह रहे हैं कि अभी अलग-अलग वातावरण के हिसाब से स्टडी करना बाकी है। लेकिन ये स्टडी सोशल डिस्टेंसिंग के सुझाव के लिहाज से समझना और होना बेहद जरूरी है।

आयुष रक्षा किट के लिए 2 करोड़ रुपए का बजट आवंटित

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत और आयुष मंत्री डॉ हरक सिंह रावत ने सचिवालय में आयुष रक्षा कार्यक्रम के अंतर्गत आयुष रक्षा किट के वितरण कार्यक्रम का शुभारंभ किया।
प्रथम चरण में आयुष रक्षा किट का वितरण सचिवालय, राजभवन, विधानसभा के अतिरिक्त आयुर्वेदिक चिकित्सालयों के माध्यम से राज्य के ऑरेंज जोन के जनपदों में सभी कोविड वाॅरियर्स, हाई रिस्क व्यक्तियों सहित जन सामान्य में किया जाएगा। इस आयुष किट का निर्माण ऋषिकुल फार्मेसी, हरिद्वार द्वारा किया जा रहा है, जिस हेतु राज्य सरकार द्वारा ऋषिकुल फार्मेसी को 5 लाख किट के निर्माण हेतु लगभग 2 करोड़ रुपए का बजट आवंटित किया गया है। प्रत्येक किट में एक व्यक्ति के लिए 15 दिनों के लिए गिलोय, वासा, त्रिकूट, तुलसी व मुलेठी से निर्मित आयुष रक्षा क्वाथ, संशमनी वटी व अश्वगंधा वटी रखी गई है।
इस अवसर पर कृषि मंत्री सुबोध उनियाल, मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह, सचिव अमित नेगी, अपर सचिव आयुष एवं आयुष शिक्षा आनंद स्वरूप, स्टेट लाइसेंसिंग अथॉरिटी (आयुर्वेद) डॉ वाईएस रावत, ऋषिकुल फार्मेसी अधीक्षक देवेंद्र सेमवाल, जिला आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी देहरादून सुरेश प्रसाद बडोनी, वरिष्ठ चिकित्सक जेएन नौटियाल आदि उपस्थित थे।

200 ट्रेनें 1 जून से भरेंगी रफ्तार, कराएं बुकिंग, जानिए कैसे

सरकार 1 जून से 200 नॉन एसी ट्रेनें चलाने जा रही है। इनकी बुकिंग 21 मई को सुबह 10 बजे से शुरू हो जाएगी। ये ट्रेनें 1 मई से चल रहीं श्रमिक स्पेशल ट्रेनों और 12 मई से चल रही स्पेशल एसी ट्रेनों से अलग हैं। इनमें बुकिंग और यात्रा को लेकर रेलवे ने नई गाइडलाइन जारी की है। रेलवे ने कहा है कि ये ट्रेनें मजदूरों के घर पहुंचाने के लिए चलाई जा रही श्रमिक ट्रेनों से अलग होंगी और इनमें बुकिंग ऑनलाइन ही करवाई जा सकेगी।

ध्यान रखने की बात जो आपके काम आएगी…
इन ट्रेनों में एक भी अनरिजर्व्ड कोच नहीं होगी।
जनरल बोगी में भी सभी यात्रियों को सीट उपलब्ध कराई जाएगी और उनसे टू एस क्लास का किराया लिया जाएगा।
आईआरसीटीसी की वेबसाइट या ऐप से ई-टिकट ही बुक किये जा सकेंगे। किसी भी रेलवे स्टेशन पर काउंटर टिकट नहीं बेचा जाएगा।
जिस डेट पर यात्रा करना चाहते हैं उससे अधिकतम 30 दिन पहले ही टिकट बुक कर सकते हैं।
टिकटों में दिव्यांगजनों और मरीजों को छूट दी जाएगी, इसके लिए कुछ कैटेगिरीज तय हैं।
तय सीमा तक आरएसी और वेट लिस्ट टिकटें भी बुक होंगी, लेकिन वेट लिस्ट वाले यात्रियों को स्टेशन में एंट्री नहीं मिलेगी।
इन ट्रेनों के लिए तत्काल या प्रिमियम तत्काल बुकिंग की सुविधा नहीं दी जाएगी।
यात्रियों को ट्रेन के तय समय से 90 मिनट पहले स्टेशन पहुंचना होगा।
जिन यात्रियों के पास कंफर्म्ड टिकट होगी, केवल उन्हें रेलवे स्टेशनों में घुसने दिया जाएगा।
बोर्डिंग से पहले यात्रियों की स्क्रीनिंग की जाएगी, केवल उन्हें ही स्टेशन के अंदर जाने दिया जाएगा जिनमें कोविड-19 के कोई लक्षण नहीं हैं।
यात्रा के दौरान सभी यात्रियों के लिए मास्क और फेस कवर अनिवार्य होगा।
ट्रेन में ब्लैंकेट, पर्दे और चादरें उपलब्ध नहीं कराई जाएंगी।
यात्रा पूरी होने के बाद यात्रियों को उस राज्य के हेल्थ प्रोटोकॉल का पालन करना होगा।
टिकट कैंसिलेशन के सामान्य नियम लागू रहेंगे।
स्क्रीनिंग के दौरान अगर किसी यात्री में बुखार, जुकाम या खांसी जैसे लक्षण मिलते हैं तो उसे यात्रा करने नहीं दिया जाएगा। इस स्थिति में उसकी टिकट कैंसिल करके रीफंड दिया जाएगा। इस स्थिति में उसके साथ यात्रा कर रहे लोग अगर यात्रा करना न चाहें, तो उनकी टिकट का भी पूरा रीफंड मिलेगा।
ट्रेनों में केटरिंग सुविधा नहीं होगी. कुछ ट्रेनों में पीने का पानी और खाने का सामान पेमेंट बेसिस पर दिया जाएगा।
इस बात पर जोर दिया जाएगा कि यात्री घर से अपना खाना लेकर आएं।
स्टेशन प्लेटफॉर्म्स पर लगने वाली दुकानें खुली रहेंगी। फूड प्लाजा में खाना पैक करके खरीदने की सुविधा होगी। वहां बैठकर खाने की मनाही रहेगी।

गांव में बनाये जा रहे क्वारेंटाईन सेंटरों की साफ-सफाई के लिए 5-5 हजार

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने वीडियो कान्फ्रेंसिंग के माध्यम से शासन के वरिष्ठ अधिकारियों और जिलाधिकारियों के साथ प्रदेश में कोविड-19 की स्थिति की समीक्षा की।
मुख्यमंत्री ने कहा कि होम क्वारेंटाईन का उल्लंघन करने वालों पर सख्त से सख्त कार्रवाई की जाए। ग्राम स्तर पर कार्यरत प्रधानों, आशा कार्यकत्रियों, आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों द्वारा की जाने वाली शिकायतों को गम्भीरता से लिया जाए। मुख्यमंत्री, वीडियो कान्फ्रेंसिंग के माध्यम से शासन के वरिष्ठ अधिकारियों और जिलाधिकारियों के साथ प्रदेश में कोविड-19 की स्थिति की समीक्षा कर रहे थे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि मास्क, सेनेटाईजेशन, फिजीकल डिस्टेंस आदि बातों को लेकर निरंतर लोगों को जागरूक किए जाने की जरूरत है। सामाजिक कार्यकर्ताओं, जनप्रतिनिधियों, मीडिया व समाज के अन्य प्रबुद्धजनों के साथ संवाद कायम रखें। जो लोग भी उत्तराखण्ड आना चाहते हैं, उन्हें लाया जाना है। बाहर से घर लौटने वाले लोगों को मनोवैज्ञानिक रूप से सशक्त भी रखना है और उन्हें व्यस्त भी रखना है। मुख्यमंत्री ने कहा कि गांवों में बनाए जा रहे क्वारेंटाईन सेंटरों की उचित साफ सफाई के लिए ग्राम स्वास्थ्य एवं स्वच्छता समितियों को एनएचएम से 5-5 हजार रूपए दिए जा रहे हैं।
प्रधान, ग्रामीण समाज का महत्वपूर्ण अंग होते हैं। इसे देखते हुए प्रधानों को जिम्मेदारी दी गई है। परंतु इसका मतलब ये नहीं है कि उन्हें अकेले इस काम को देखना है। ग्राम स्तर के प्रशासनिक कर्मचारियों को उनके नेतृत्व में काम करना है। प्रधानों का जो भी व्यय होता है, उसकी प्रतिपूर्ति प्राथमिकता से की जाए।
मुख्यमत्री ने कहा कि इन दिनों में पॉजिटिव केस पहले की अपेक्षा अधिक बढ़े है, परंतु हमारी तैयारी बेहतर है। पेशेन्ट केयर का हमारा रिकार्ड बेहतर रहा है। अभी तक बेहतर तरीके से जिम्मेदारी का निर्वहन किया है। अब नई चुनौती आई है। इस चुनौती पर व्यावहारिकता और कुशलता के साथ खरा उतरना है। कोरोना से लम्बी लड़ाई है। इसके लिए हमें मनोवैज्ञानिक रूप से भी तैयार रहना है। सामाजिक कार्यकर्ताओं का सहयोग लें। हर वार्ड में चार-पांच लोगों की एक टीम हो। लोगों की आजीविका के लिए भी योजनाओं पर काम करना है। किसानों को बीज उपलब्ध करवाए जाएं। इसी प्रकार केंद्र व राज्य सरकार ने जो योजनाएं घोषित की हैं, उनसे लोग, लाभान्वित हों, यह सुनिश्चित किया जाए।
मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह ने कहा कि जो भी लोग बाहर से अपने घरों को आ रहे हैं, उन पर सतत निगरानी रखनी है। इसमें जिलाधिकारी ग्रामीण स्तर के स्वास्थ्य कर्मियों का उपयोग करें। आने वाले प्रत्येक व्यक्ति की जरूरी जांच की जाएं। एक-एक केस को ट्रेस करना है। और उनका हेल्थ चैकअप किया जाए। बीआरटी को सक्रिय रखा जाए। कॉल सेंटर के माध्यम से भी आने वाले लोगों से लगातार सम्पर्क रखा जाता है। रेड जोन से आने वालों को इंन्स्टीट्यूशनल क्वारेंटाईन में रखा जाना है। अच्छी प्रतिष्ठा वाले एनजीओ का भी सहयोग लिया जा सकता है। जिस प्रकार गांवों में प्रधानों का सहयोग लिया जा रहा है, उसी प्रकार शहरी क्षेत्रों में स्थानीय निकायों को भी अधिकृत किया जाएगा। पार्षदों की इसमें महत्वपूर्ण भूमिका हो सकती है। डीजीपी अनिल कुमार रतूड़ी ने कहा कि क्वारेंटाईन का उल्लंघन करने वालों, सार्वजनिक स्थानों पर मास्क न पहनने वालों, सोशल डिस्टेंसिंग का पालन न करने वालों पर कार्रवाई की जानी है। हमें लोगों का समझाना भी है और जो न समझे उस पर कार्रवाई की जानी है।
सचिव स्वास्थ्य, नीतेश झा ने प्रदेश में कोविड-19 की अपडेटेड स्थिति की जानकारी देते हुए बताया कि बाहर से लोगों के आने के बाद पॉजिटिव केस बढ़ रहे हैं। अभी तक 120 पॉजिटिव केस हो चुके हैं, इनमें से 53 रिकवर हो चुके हैं। 66 एक्टीव केस हैं। अभी जितने भी केस हैं, उनमें कोई भी गम्भीर नहीं है। उन्होंने बताया कि हमारे पास आईसीयू बैड, वेंटिलेटर, पीपीई किट, एन 95 मास्क, अस्पताल/फेसिलिटी सेंटर की पर्याप्त संख्या में व्यवस्था है।
सचिव शैलेश बगोली ने बताया कि प्रदेश में वापस आने के लिए अभी तक 2 लाख 33 हजार से अधिक रजिस्ट्रेशन हो चुके हैं। लगभग 1 लाख 29 हजार लोग वापस आ चुके हैं। अभी तक 10 ट्रेनें आ चुकी हैं। और 2 ट्रेनें मार्ग में हैं। निर्धारित एसओपी के अनुसार सारी चेकिंग की प्रक्रिया की जाती है। जिलाधिकारियों को आने वाले लोगों का पूरा विवरण उपलब्ध करवाया जाता है।

सीएम त्रिवेन्द्र ने एसडीआरएफ द्वारा बनाया गया कोरोना वारियर एप्प का किया विमोचन

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने बुधवार को सचिवालय स्थित वीर चंद्र सिंह गढ़वाली सभागार में स्थित अंतर राज्यीय आवागमन हेतु बनाये गए राज्य स्तरीय कोविड कंट्रोल रूम का निरीक्षण किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने एसडीआरएफ द्वारा बनाई गई ट्रेनिंग एप्प ‘‘कोरोना वारियर’’ का विमोचन भी किया।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से विभिन्न बिन्दुओं पर जानकारी भी ली। अब तक राज्य में लाये गए प्रवासियों की संख्या तथा बाहर जाने वाले प्रवासियों के बारे में जानकारी। अभी तक सम्पादित बड़े अभियान एवं भविष्य के लिए कार्ययोजना, कंट्रोल रूम की कार्यप्रणाली, उपलब्धियां, समस्याएं तथा सुझाव, वेब लिंक के माध्यम से मॉनिटर की जा रही जानकारी भी मुख्यमंत्री ने समीक्षा के दौरान ली। इसके अलावा उन्होंने राज्य के विभिन्न्न विभागों को अभी एसडीआरएफ द्वारा दिए गए प्रशिक्षण, अंतर राज्यीय तथा अंतर जनपदीय परिवहन के बारे में भी जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि अन्य राज्यों के अधिकारियों से समन्वय स्थापित किया जाए कि उनके राज्यों से जो खाली वाहन उत्तराखण्ड आ रहे हैं उन वाहनों में उत्तराखण्ड के प्रवासियों को उत्तराखण्ड बार्डर तक लाया जाए।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने कंट्रोल रूम में अच्छा कार्य करने वाले कर्मियों का सम्मानित भी किया। जो कार्मिक सम्मानित किये गये उनमें एसडीआरएफ निरीक्षक वेद प्रकाश भट्ट, अनूप रमोला, उमराव सिंह, रेखा नेगी, अमन सिंह शामिल हैं।

कोविड-19 अथवा नोवेल कोरोना वायरस के दृष्टिगत वर्तमान तक एसडीआएफ द्वारा विभिन्न विभागों के 18 हजार से अधिक कर्मियों तथा जनमानस को कोरोना संक्रमण से बचाव सम्बंधी प्रशिक्षण दिया गया है। इसी क्रम में खेल- खेल में जागरूकता प्रदान करने वाली क्विज कराई जा रही है। इस एप्प के माध्यम से पुलिस, आंगनवाड़ी कार्यकर्त्री, आवश्यक सेवाओं के वाहन चालक, सफाई कर्मी आदि विभागों के कर्मचारियों एवं आम जनमानस द्वारा ज्ञान वर्धन किया जा सकता है।

होप पोर्टल समन्वय करने में अहम भूमिका निभाएगाः सीएम

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने बुधवार को सचिवालय में मंत्रिमंडल की उपस्थिति में होप पोर्टल का शुभारम्भ किया। इस पोर्टल का यू.आर.एल. होपडॉटयूकेडॉटजीओवीडॉटइन है। इस पोर्टल का मुख्य उद्देश्य कुशल और अकुशल युवाओं का डाटा बेस बनाना तथा डाटा बेस के आधार पर रोजगार-स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराना है। विदित है कि कुछ दिन पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत द्वारा मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना का शुभारम्भ किया गया था। इस योजना के साथ समन्वय करने में यह पोर्टल महत्वपूर्ण भूमिका निभायेगा।

होप पोर्टल के माध्यम से उत्तराखण्ड के ऐसे युवा जो विभिन्न राज्यों एवं उत्तराखण्ड में कुशल पेशेवर स्किल्ड प्रोफेशनल हैं तथा वर्तमान में किसी न किसी संस्थान में कार्य कर रहे हैं या जो उत्तराखण्ड में कौशल विकास विभाग के माध्यम से प्रशिक्षण लेना चाहते हैं, ऐसे युवाओं के लिए यह पोर्टल एक सेतु के रूप में कार्य करेगा। इस पोर्टल के डाटा बेस का उपयोग राज्य के समस्त विभाग तथा अन्य रोजगार प्रदाता युवाओं को स्वरोजगार-रोजगार से जोड़ने के लिए करेंगे।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत की प्रेरणा से इस पोर्टल का निर्माण आईटी विभाग, कौशल विकास विभाग, नियोजन विभाग एवं एनआईसी ने आपसी समन्वय से किया। इस पोर्टल की वेब होस्टिंग उत्तराखण्ड सरकार के आईटीडीए, आईटी पार्क स्थित डाटा सेंटर में की गई है। मुख्यमंत्री कार्यालय से मुख्यमंत्री के आईटी सलाहकार रवीन्द्र दत्त, सचिव आईटी आर.के सुधांशु, सचिव नियोजन अमित नेगी, सचिव कौशल विकास डॉ. रंजीत कुमार सिन्हा, निदेशक आईटीडीए अमित सिन्हा, एनआईसी के उप महानिदेशक के. नारायण, एनआईसी के तकनीकि निदेशक नरेन्द्र सिंह नेगी ने इस पोर्टल को बनाने में मुख्य भूमिका निभाई।

जुबिन नौटियाल का यह गीत है काफी चर्चा में, जिसे लिखा एसपी क्राइम देहरादून ने..

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने सोमवार को मुख्यमंत्री आवास में एसपी क्राइम देहरादून लोकजीत सिंह द्वारा लिखित गीत ’जज्बा‘ का विमोचन किया। यह गीत प्रसिद्ध गायक जुबिन नौटियाल ने गाया है, जबकि अक्षय एवं राहुल इस गीत के एडिटर हैं। कोविड-19 में उत्तराखंड पुलिस किस तरह लोगों को कोरोना से बचाव के लिए प्रयास कर रही है एवं जरूरतमंदो की हरसंभव सहयोग कर रही है। कोरोना संक्रमण में पुलिस रात-दिन अपनी ड्यूटी के फर्ज के साथ ही सेवा भाव से कार्य कर रही है, यह इस गीत के माध्यम से दिखाया गया है। गीत में प्रत्येक पुलिसकर्मी की फर्ज के प्रति प्रतिबद्धता को दिखाया गया है।

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र ने कहा कि उत्तराखंड पुलिस इस कठिन समय में अपनी ड्यूटी के साथ ही समाज सेवा भी पूरे मनोयोग से कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि कोरोना के इस संकट के समय में पुलिस, स्वास्थ्य एवं सफाई कर्मी अहम भूमिका निभा रहे हैं।

लॉकडाउन में भी पीएम-किसान योजना के लिए आवेदन करे!

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बताया कि केन्द्र सरकार ने मार्च से जारी लॉकडाउन के दौरान पीएम-किसान योजना के तहत 9.13 करोड़ किसानों को कुल 18,253 करोड़ रुपये की राशि भेजी है। पीएम किसान योजना के तहत सरकार पात्र किसानों को साल में तीन बराबर किस्त में 6,000 रुपये की राशि सीधे उनके बैंक खाते में भेजती है। लॉकडाउन की वजह से देश के गरीब किसानों की मुश्किलों को देखते हुए सरकार ने पीएम-किसान योजना के तहत चालू वित्त वर्ष की पहली किस्त को अप्रैल के पहले सप्ताह में ही भेजने का फैसला किया था। अगर आप किसान हैं और इस योजना के लिए रजिस्ट्रेशन करना चाहते हैं तो आपको बता दें कि ऐसा करना बहुत ही आसान है।

पीएम-किसान योजना के लिए ऐसे करे रजिस्ट्रेशन-
सबसे पहले पीएम-किसान की आधिकारिक वेबसाइट पर लॉग ऑन करिए।
वेबसाइट पर आपको फारमर्स काॅनर्स पर अपने माउस के कर्सर को ले जाना है।
ड्रॉप डाउन लिस्ट में आपको सबसे ऊपर न्यू फारमर्स कारनर्स का विकल्प मिलेगा।
इसके बाद आपको आधार कार्ड का नंबर एवं कैप्चा डालकर आगे बढ़ना होगा।
इसके बाद खुले पेज पर आपको जरूरी जानकारी डालकर रजिस्ट्रेशन करना होगा।
आप इस वेबसाइट के जरिए ही अपने आवेदन की स्थिति देख सकते हैं। साथ ही लाभार्थियों की सूची भी देख सकते हैं।
बतातें चले कि सीतारमण ने एक ट्वीट कर जानकारी दी, लॉकडाउन के दौरान मार्च, 2020 से अब तक सरकार ने 9.13 करोड़ किसानों को पीएम-किसान के तहत 18,253 करोड़ रुपये का भुगतान किया है। कुल 4,22,113 करोड़ रुपये का कृषि ऋण लेने वाले करीब तीन करोड़ किसानों ने लोन पर तीन माह के मोराटोरियम के विकल्प का फायदा उठाया है।

उत्तराखण्ड में कोरोना की डबलिंग रेट में लगातार हो रहा सुधार

मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह ने मीडिया ब्रीफिंग कर कोविड-19 के संबंध में अपडेटेड स्थिति की जानकारी दी। मुख्य सचिव ने कहा कि सरकार दूसरे राज्यों से उत्तराखण्ड लौटने के इच्छुक प्रवासियों को वापस लाने के लिए प्रतिबद्ध है। लगभग 1 लाख 64 हजार लोगों ने इसके लिए पंजीकरण कराया है। अभी तक 7300 लोगों को दूसरे राज्यों से लाया जा चुका है जबकि 8146 को राज्य के भीतर ही एक जिले से दूसरे जिले में भेजा गया है। जो भी उत्तराखण्ड लौटना चाहते हैं, उन्हें वापस लाया जाएगा। थोड़ा संयम और धैर्य रखने की जरूरत है। तमाम तरह की सावधानियां बरतनी होती है। इसलिए एक साथ इकट्ठा सबको नहीं लाया जा सकता है। स्वास्थ्य परीक्षण, वाहनों की व्यवस्था, रूकने की व्यवस्था आदि बातें देखनी होती हैं। सरकार इस काम में दिन रात लगी है। पूरा काम सुनियोजित तरीके से किया जाना है। हरियाणा से 1500 लोगों को निजी वाहन से आने की अनुमति दी गई है। यहां बसें भी भेजी जाएंगी। उदयपुर व जम्मू से 400-400 लोगों को लाने की व्यवस्था की जा रही है। गुजरात व महाराष्ट्र को सूचना दी गई है कि सूरत, अहमदाबाद व पुणे से लोगों को ट्रेन से लाया जाना है। हमारी रेल मंत्रालय से बात हो चुकी है। संबंधित राज्यों को भी रेल मंत्रालय से बात करनी है। उत्तराखण्ड के लोगों को ट्रेन से लाने में जो भी व्यय आएगा, उसका वहन उत्तराखण्ड सरकार द्वारा किया जाएगा। केरल के दो शहरों से भी लगभग 1000 लोगों को लाया जाना है। भारत सरकार द्वारा विदेशों से भारतीय नागरिकों को लाने की व्यवस्था की जा रही है। इनमें उत्तराखण्ड का व्यक्ति होने पर विदेश मंत्रालय द्वारा हमें अवगत कराया जाएगा। इसके लिए हमने एसओपी तैयार कर ली है।
मुख्य सचिव ने कहा कि पिछले दो दिन से प्रदेश में कोई भी कोरोना पॉजिटिव केस नहीं आया है। वर्तमान में कुल पॉजिटिव केस 61 हैं, इनमें से 39 रिकवर हो चुके हैं जबकि 21 एक्टीव केस हैं। इनमें भी सभी की स्थिति सामान्य है। एक महिला जिसकी मृत्यु हुई है, उन्हें काफी क्रिटीकल हालत में एम्स ऋषिकेश में लाया गया था, बाद में जांच में इन्हें कोरोना संक्रमित पाया गया। परंतु उनकी मृत्यु अन्य कारण से हुई है। अभी तक कुल 7784 टेस्ट की रिपोर्ट प्राप्त हुई है। इनमें से 7723 की रिपोर्ट नेगेटिव आई है। प्रदेश में कोरोना मामलों के दोगुने होने की दर में लगातार सुधार हो रहा है। आज के दिन हमारी डबलिंग रेट 47 दिन है। इस दृष्टि से हम देश के अग्रणी राज्यों में हैं। यहां के कुल कोराना पॉजिटिव मामलों में 85 प्रतिशत पुरूष हैं जबकि 15 प्रतिशत महिलाएं हैं। इसमें भी अधिकांश युवा हैं। इसलिए हमारे यहां रिकवर होने की अधिक सम्भावना है। देश में भेजे गए सेम्पल के सापेक्ष पॉजिटिव केस 3.86 प्रतिशत है जबकि राज्य में यह 0.78 प्रतिशत है। हमारी मृत्यु दर भी राष्ट्रीय औसत से लगभग आधी है। हालांकि ये मृत्यु भी प्रत्यक्ष रूप से कोरोना से नहीं हुई है। अभी तक प्रदेश में कोरोना को काफी हद तक नियंत्रित रखा गया है। हमारे यहां कान्टेक्ट ट्रेसिंग भी प्रभावी तौर पर की गई।
मुख्य सचिव ने बताया कि प्रदेश में 426 चिकित्सक ऐसे थे जिनका आयेग द्वारा वर्ष 2010 से 2015 के बीच चयन किया गया परंतु उन्होंने या तो जॉइन नहीं किया या परिवीक्षा अवधि पूरी नहीं की। ऐसे चिकित्सकों की सेवाएं समाप्त की गई हैं। अब हम इनकी जगह पर चिकित्सकों की नई भर्ती कर सकते हैं। हाल ही में 401 चिकित्सकों को नियुक्ति दी गई है। 467 पदों का अध्याचन भी चयन आयोग को भेजा जा रहा है। आयोग से चयन प्रक्रिया को जल्द पूरा करने का अनुरोध किया जाएगा। इसके अलावा कैबिनेट द्वारा 180 पदों को पुनर्जीवित किया गया था। इन पदों पर जल्द भर्ती कराई जाएगी।
मुख्य सचिव ने कहा कि अभी तक जनता ने पूरा सहयोग किया है। लॉकडाउन-3 में भी हमें जिम्मेवारी का परिचय देना है। मास्क, सेनेटाईजेशन और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करें। वर्तमान में दी गई शिथिलता चलती रहेगी। यदि अनुशासन बनाए रखा जाएगा तो और भी शिथिलता पर विचार किया जा सकता है। कोरोना संक्रमित होने पर घबराने की जरूरत नहीं है।
प्रदेश में औद्योगिक गतिविधियां भी शुरू की गई हैं। 4479 उद्योगों को ऑनलाईन अनुमति दी गई है। इन्होंने काम भी शुरू कर दिया है। इनमें 1 लाख 66 हजार श्रमिक, कार्मिक संलग्न हैं। सड़क, रेल, एयरपोर्ट, भवन निर्माण आदि काम शुरू होने जा रहे हैं। इनकी आवश्यकता को देखते हुए खनन का काम भी शुरू कर दिया गया है। जिलाधिकारियों को इसे प्राथमिकता से देखने को कहा गया है।
भवन निर्माण से जुड़े श्रमिकों को लॉकडाउन में राहत देने के लिए दो किश्तों में 1-1 हजार, कुल दो हजार रूपए उनके खातों में ट्रांसफर किए गए हैं। लगभग 1 लाख 98 हजार श्रमिक इससे लाभान्वित हुए हैं।
मुख्य सचिव ने कहा कि सोशल मीडिया में सरकार की तैयारियों के बारे में बहुत सी अफवाहें चलती रहती हैं। लोगों से अनुरोध है कि प्रामाणिक जानकारियों पर ही विश्वास करें। हम पूरी व्यवस्था कर रहे हैं।

फ्रंट लाइन वॉरियर्स पर भारतीय सेना ने हेलीकॉप्टर से बरसाए फूल

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान ऋषिकेश में आयोजित कार्यक्रम में रविवार को भारतीय सेना ने संस्थान के कोरोना फ्रंट लाइन वॉरियर्स को सम्मानित किया। इसी दौरान कोरोना वायरस कोविड19 संक्रमित मरीजों की चिकित्सकीय सेवा से जुड़े चिकित्सकों,नर्सिंग ऑफिसर्स व अन्य सहकर्मियों के सम्मान में आसमान से सेना के हेलीकॉप्टर से पुष्पवर्षा की गई।

रविवार को एम्स ऋषिकेश में भारतीय सेना की ओर से आयोजित कार्यक्रम में कोविड19 से ग्रसित मरीजों की चिकित्सा सेवा में दिन- रात जुटे कोरोना फ्रंट लाइन वॉरियर्स के सम्मान स्वरूप हेलीकॉप्टर से फूल बरसाए गए। निदेशक प्रो. रविकांत कहा कि संस्थान कोविड19 की जंग के लिए पूरी तरह से राज्य सरकार के साथ है।संस्थान इससे ग्रसित मरीजों को तत्परता के साथ चिकित्सकीय सेवाएं प्रदान करता रहेगा। इस अवसर पर सेना के रायवाला कैंट के कमांडर ब्रिगेडियर आकाश बजाज ने एम्स निदेशक को भारतीय सेना की ओर से स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया। उन्होंने डीन एकेडमिक प्रो. मनोज गुप्ता, वरिष्ठ सर्जन व आईबीसीसी प्रमुख प्रो. बीना रवि, डीन अस्पताल प्रशासन प्रो. यूबी मिश्रा आदि को सम्मानित किया।