मंत्रिमंडल की बैठकों को पेपरलेस बनाने का राज्य सरकार ने लिया निर्णय

राज्य सरकार द्वारा ई-गवर्नेंस की दिशा में प्रभावी पहल करते हुए मंत्रिमण्डल की बैठकों को धीरे-धीरे पेपरलेस किये जाने का निर्णय लिया गया है। इसके लिए, सोमवार को सचिवालय में ई-मंत्रिमण्डल से सम्बन्धित जानकारी सभी मंत्रीगणों को उपलब्ध कराने के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम को आयोजन किया गया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कहा कि नवम्बर माह में आयोजित होने वाली मंत्रिमण्डल की बैठक को ई-मंत्रिमण्डल के रूप में आयोजित किया जाएगा। इसके साथ ही, ई-मंत्रिमण्डल पोर्टल पर अब तक हुई मंत्रिमण्डल की बैठकों में लिये गये निर्णयों को भी अपलोड किया जायेगा।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कहा कि हम ग्रीन कैबिनेट की ओर बढ़ रहे हैं। यह ई-गवर्नेंस की दिशा में बढ़ाया गया एक बेहतर कदम है। इससे पेपर की बचत होगी और कम से कम पेपर के उपयोग से पर्यावरण को भी बचाने में सहायता मिलेगी। साथ ही निर्णयों के क्रियान्वयन में तेजी लाने के साथ ही पारदर्शिता भी आयेगी। इससे शासन की योजनाओं की जानकारी भी त्वरित रूप से आम जनता को उपलब्ध करायी जा सकेगी। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड की यह पहल अन्य राज्यों को भी पेपरलेस गवर्नेंस के लिए प्रेरित करेगी।

अपर मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने बताया कि ई-मंत्रिमण्डल की शुरूआत होने के उपरान्त मंत्रिमण्डल के कार्यों हेतु गोपन विभाग का पूर्णतः कम्पयूटराईजेशन किया जाना है। इससे सभी विभाग, मंत्रिमण्डल की बैठक सम्बन्धित कार्य हेतु, गोपन विभाग से सीधे जुड़ जाएंगे। साथ ही इससे मंत्रिमण्डल के निर्णयों के कार्यान्वयन का कागज रहित अनुश्रवण एवं समीक्षा की जा सकेगी।

अधिकांश हिस्सों में पूर्ण ग्रेविटी का जल मिले, इसके लिए राज्य सरकार प्रयासरत

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने रविवार को एटलांटिस क्लब पंडितवाडी, देहरादून मे इंडियन वाटर वर्क्स एसोसिएशन, देहरादून सेंटर द्वारा आयोजित एक दिवसीय सेमिनार का दीप प्रज्ज्वलित कर शुभारम्भ किया। मुख्यमंत्री ने सेमिनार से सम्बन्धित विभिन्न तकनीकी पहलुओं पर आधारित पुस्तिका का विमोचन भी किया। सेमिनार में देश के 12 राज्यों एवं विशेषज्ञों द्वारा प्रतिभाग किया गया। जल संरक्षण एवं स्वच्छता के विभिन्न पहलुओं पर इस सेमिनार में मंथन किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पांच सालों में हर घर में जल पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। हर घर तक शुद्ध जल पहुॅचें इसके लिए इंजीनियरों को मंथन करने की जरूरत है कि कैसे पानी की बचत हो और कैसे बेहतर इस्तेमाल किया जा सके। आज सेमिनार में विषय विशेषज्ञ एक दूसरे के साथ अपने अनुभवों को सांझा करेंगे। जिसके भविष्य में अच्छे परिणाम मिलेंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जल का कैसे बैहतर तरीके से संरक्षण और पूर्ति हो, इसके लिए लोगों में भी जागरूकता लाने की जरूरत है। जल संचय का सबसे अच्छा तरीका वर्षा जल का एकत्रीकरण है। रेन वाटर हार्वेस्टिंग पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है।

सीएम ने कहा कि राज्य सरकार का प्रयास है कि उत्तराखण्ड के अधिकांश हिस्सों में पूर्ण ग्रेविटी का जल मिल सके, इसके लिए सौंग, सूर्यधार व मलुढूंग बांध पर कार्य किया जा रहा है। सौंग बांध का कार्य शुरू होने से 350 दिनों में पूर्ण करने का लक्ष्य रखा गया है। सूर्यधार डेम पर कार्य प्रारम्भ हो गया है। इससे 29 गांवों को ग्रेविटी वाटर उपलब्ध होगा। पंचेश्वर बांध बनने से ऊधमसिंह नगर एवं चम्पावत के तराई क्षेत्र में ग्रेविटी का पेयजल उपलब्ध होगा।

हिन्डन एयरपोर्ट से मुख्यमंत्री ने किया गाजियाबाद से पिथौरागढ़ हवाई सेवा का शुभारंभ

उत्तराखण्ड के विभिन्न स्थानों को हवाई कनेक्टिविटी से जोड़ने के प्रयासों में एक और सफलता मिली है। गाजियाबाद स्थित हिंडन एयरपोर्ट से पिथौरागढ़ के लिए नियमित हवाई सेवा प्रारम्भ कर दी गई है। शुक्रवार को मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने हिन्डन एयरपोर्ट पर आयोजित संक्षिप्त कार्यक्रम में हिन्डन- पिथौरागढ़ -हिन्डन हवाई सेवा का औपचारिक शुभारम्भ किया।

हेरिटेज एविएशन कम्पनी का 9-सीटर विमान, सप्ताह में 6 दिन (गुरूवार को छोड़कर) उड़ान भरेगा। प्रतिदिन पिथौरागढ़ से सुबह 11.30 बजे प्रस्थान कर विमान 12.30 बजे हिंडन एयरपोर्ट पहुंचेगा। जबकि हिंडन एयरपोर्ट से अपराह्न 1 बजे प्रस्थान कर अपराह्न 2 बजे विमान पिथौरागढ़ पहुंचेगा।

गाजियाबाद से पिथौरागढ़ के लिए हवाई सेवा शुरू होने पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि इससे प्रदेश के पिथौरागढ़ के अलावा अल्मोड़ा, चम्पावत, बागेश्वर से देश की राजधानी तक पहुंचने में समय की काफी बचत होगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि दिल्ली से पिथौरागढ़ तक सड़क मार्ग से जाने में काफी समय लगता था, जो मंहगा भी था। इस हवाई सेवा के शुरू होने से जहां लोगों के समय की बचत होगी, वहीं आर्थिक दृष्टि से भी लोगों को फायदा होगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पिथौरागढ़, सीमान्त जनपद होने के कारण यह हवाई सेवा सामरिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। उत्तराखण्ड, आपदा की दृष्टि से संवेदनशील राज्य है। कई बार गम्भीर स्थिति होने के कारण मरीजों को हायर सेंटर रैफर करना होता है। कम समय में दूरस्थ क्षेत्रों से हायर सेंटर तक पहुंचाने के लिए पर्वतीय क्षेत्रों में हवाई सेवाएं बहुत जरूरी हैं। कैलाश मानसरोवर जाने वाले यात्रियों को भी इस हवाई सेवा से लाभ मिलेगा।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि पिथौरागढ़ में एक ट्यूलिप गार्डन बनाया जा रहा है। ट्यूलिप गार्डन बनाने का मुख्य उद्देश्य है कि राष्ट्रीय व अन्तरराष्ट्रीय पर्यटक यहां आयें और यहां के प्राकृतिक सौन्दर्य का आनन्द भी ले सकें। पर्वतारोहण के लिए पिथौरागढ़ आने वाले पर्यटकों को भी इस हवाई सेवा के शुभारम्भ होने से आसानी होगी।

उत्तराखण्ड में पिछले कुछ वर्षों से हवाई कनेक्टिविटी का विस्तार किया गया है। जौलीग्रांट एयरपोर्ट को अंतरराष्ट्रीय स्तर का बनाया जा रहा है। हाल ही में मुम्बई-देहरादून-वाराणसी हवाई सेवा शुरू की गई है। देहरादून को मुम्बई, वाराणसी, जम्मू, लखनऊ, हैदराबाद, पटना, रायपुर, बंगलौर, दिल्ली, कलकत्ता, अमृतसर, जयपुर गुवाहाटी सहित दर्जनों शहरों से जोड़ा जा चुका है। टिहरी झील में सी-प्लेन के लिए एमओयू किया जा चुका है। देहरादून से पंतनगर व पिथौरागढ़ के लिए भी हवाई सेवा संचालित की जा रही है।

बिजली चोरी व लाइन लास को कम करने के लिये सीएम ने बताई समेकित प्रयासों की जरूरत

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने प्रदेश में बिजली चोरी तथा लाइन लॉस को रोकने के लिये व्यापक जन-जागरूकता के प्रसार पर बल दिया है। गांधी जयंती के अवसर पर मुख्यमंत्री आवास स्थित जनता मिलन हॉल में ऊर्जा की बचत तथा राजस्व वृद्धि के लिये बिजली चोरी रोकने के लिये ऊर्जा गिरी अभियान का शुभारम्भ करते हुए मुख्यमंत्री ने बिजली चोरी रोकने के लिये किये जा रहे प्रयासों में तेजी लाने पर बल दिया। उन्होंने राज्य गठन के बाद राज्य में ए.टी.एण्ड सी. हानियॉ 52.98 प्रतिशत से वर्तमान में 16.52 के स्तर लाये जाने के साथ ही वितरण हानियाँ 29.52 प्रतिशत से 14.32 प्रतिशत के स्तर पर लाये जाने पर संतोष व्यक्त करते हुए इसे 13 प्रतिशत पर लाये जाने के निर्देश दिये।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार बिजली चोरी रोकने के लिये प्रतिबद्ध है, ऊर्जा निगमों के समस्त अधिकारियों एवं कर्मचारियों का दायित्व है कि बिजली चोरी रोके जाने हेतु समुचित उपाय सुनिश्चित करें जिससे कि ईमानदार उपभोक्ताओं पर उसका भार न पड़े। उन्होंने विद्युत चोरी पर प्रभावी कार्यवाही सुनिश्चित करने के लिये यू.पी.सी.एल. विजिलेंस सेल को मजबूती प्रदान करने के भी निर्देश दिये।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि ऐसे प्रयासों से ही समाज में जन जागरूकता का प्रचार होता है तथा इसका समाज मे व्यापक प्रभाव भी पड़ता है उन्होंने कहा कि ऐसे प्रयास प्रदेश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने तथा राजस्व वृद्धि में भी सहायक होते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज उत्तराखण्ड को लाइन लॉस व बिजली चोरी रोकने में गुजरात के बाद दूसरा नम्बर है। इस दिशा में हमें समेकित प्रयासों से देश में पहले नम्बर पर आने के प्रयास करने होंगे। मुख्यमंत्री ने स्वच्छता एवं वन टाइम यूज प्लास्टिक का उपयोग न करने के संबंध में प्रधानमंत्री की अपील को साकार करने में भी योगदान देने की अपील की, उन्होंने कहा कि हमें इसे अपने जीवन का हिस्सा बनाना होगा। स्वच्छता के प्रति जन-जागरूकता से हमने पर्यावरणीय मानकों में सुधार की शुरूआत की है।

अटल जी की देन है उत्तराखंडः टीएसआर

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने बुधवार को शहीद स्थल रामपुर तिराहा, मुजफ्फरनगर में शहीद स्मारक पर उत्तराखण्ड राज्य आन्दोलकारी शहीदों की पुण्य स्मृति में श्रद्धासुमन अर्पित किये।

उन्होंने कहा कि राज्य आन्दोलकारियों के संघर्ष व बलिदान के परिणाम स्वरूप ही उत्तराखण्ड का नये राज्य के रूप में निर्माण हुआ। 01 सितम्बर 1994 को खटीमा में पहली घटना घटी थी, जिसमें भवान सिंह, प्रताप सिंह, धर्माननन्द भट्ट, गोपीचन्द, परमजीत सिंह और रामपाल सिंह शहीद हुए थे। दूसरी घटना मसूरी की हुई जिसमें मदन मोहन मंगल, धनपत सिंह, बेलमती चौहान, हंसा धनई, बलवीर सिंह नेगी व पुलिस के सीओ ऊमाकांत त्रिपाठी शहीद हुए। जब हम राज्य आन्दोलन का जिक्र करते हैं तो 02 अक्टूबर का वह दृश्य याद आता है, जब राज्य निर्माण को लेकर आन्दोलनकारी दिल्ली जा रहे थे, तब सूर्य प्रकाश थपलियाल, राजेश लखेड़ा, रवीन्द्र रावत, राजेश नेगी, सतेन्द्र सिंह चौहान, गिरीश भद्री, अशोक कुमार, ओमपाल, अतुल त्यागी, रामगोपाल और पंकज त्यागी ने राज्य निर्माण के लिए अपना बलिदान दिया। इसके अलावा उत्तराखण्ड राज्य निर्माण के लिए अनेक युवक-युवतियों व माताओं ने अपना बलिदान दिया। इसके परिणाम स्वरूप 09 नवम्बर 2000 को उत्तराखण्ड राज्य का गठन हुआ।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड राज्य निर्माण की मांग पर्वतीय राज्य के रूप में बहुत पहले से हो रही थी। तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल ने उत्तराखण्ड को एक पर्वतीय राज्य के रूप में तोहफा दिया। उन्होंने उत्तराखण्ड को औद्योगिक पैकेज दिया तो नरेन्द्र मोदी ने उत्तराखण्ड में कनेक्टिविटी को बढ़ाने का कार्य कर रहे हैं। शहीद राज्य आन्दोलनकारियों के प्रति हमारी सच्ची श्रद्धांजलि यही होगी कि हम उनकी आकांक्षाओं के अनुरूप राज्य बनाएं।

देहरादून होगा देश का ग्रेविटी आधारित पेयजल उपलब्ध कराने वाला पहला स्मार्ट शहर

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने शनिवार को मसूरी में आयोजित उत्तराखण्ड अर्बन ट्रांस्फोरमेशन समिट 2019 का शुभारम्भ किया। उन्होंने समिट में प्रतिभाग कर रहे केन्द्रीय शहरी विकास मंत्रालय के संयुक्त सचिव तथा स्मार्ट सिटी के मिशन डायरेक्टर के साथ ही देश के 12 प्रमुख स्मार्ट सिटी के सी.ई.ओ एवं स्मार्ट सिटी मिशन से जुड़ी कार्यदायी संस्थाओं के प्रमुखों का उत्तराखण्ड में स्वागत करते हुए कहा कि इस समिट में होने वाला मंथन स्मार्ट सिटी मिशन को गति प्रदान करेगा। इससे आपसी अनुभवों एवं ज्ञान का भी आदान प्रदान होगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि समिट में होने वाले आपसी विचार विमर्श एवं अनुभव स्मार्ट सिटी के कार्यों को नई दिशा प्रदान करने में मददगार रहेगा। देहरादून स्मार्ट सिटी का देश-भर में 99 से 32वें पायदान पर आने पर उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त की। देहरादून का स्मार्ट सिटी बनने में उन्होंने समेकित प्रयासों की भी जरूरत बतायी। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमें अपनी सोच भी स्मार्ट बनानी होगी। जब हमारी सोच अच्छी होगी तो उनके परिणाम भी अच्छे होंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आधुनिक तकनीकी का बेहतर इस्तेमाल कर ही बेहतर परिणाम प्राप्त किये जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि कोशी एवं रिस्पना में एक घंटे में लाखों वृक्षों का रोपण जन सहभागिता का अनूठा उदाहरण है। सौग बांध से देहरादून को ग्रेविटी आधारित पेयजल उपलब्ध कराये जाने की योजना भी शीघ्र धरातल पर उतरेगी। इसमें देहरादून को ग्रेविटी आधारित पेयजल उपलब्ध होने के साथ ही करोड़ों के बिजली व्यय की बचत होगी, भूजल स्तर में सुधार होगा तथा रिस्पना नदी को ऋषिपर्णा बनाने की भी राह प्रशस्त होगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड को पोलीथीन मुक्त प्रदेश बनाने की दिशा में हमारे प्रयास साकार होते दिखाई दे रहें हैं। देश में इसकी शुरूआत हो रही है तब हम इस दिशा में काफी आगे बढ़ चुके हैं। उन्होंने देहरादून शहर को पोलीथीन मुक्त बनने के लिए नगर निगम को 50 लाख रूपये देने की भी घोषणा की।

उत्तरांचल पंजाबी महिला विंग के बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ अभियान की सीएम ने की प्रशंसा

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने मंगलवार को मुख्यमंत्री आवास में उत्तरांचल पंजाबी महिला विंग क्लब, ऋषिकेश द्वारा कन्या भ्रूण हत्या रोके जाने विषयक पोस्टर को लॉच किया। मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि उत्तरांचल पंजाबी महिला विंग क्लब द्वारा ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ अभियान में सहभाग किया जा रहा है, यह एक सराहनीय प्रयास है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने हरियाणा के पानीपत जिले से इस अभियान की शुरूआत की, जहां बेटियों की संख्या सबसे कम थी। उत्तराखण्ड में पिछले दो सालों में बाल लिंगानुपात 887 से बढ़कर 934 हुआ है। उन्होंने कहा कि जब कोई प्रयास अभियान का रूप लेता है और उसमें जनसहभागिता होती है, तो वह अभियान अवश्य सफल होता है। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड में पॉलिथीन मुक्ति के लिए जल्द ही व्यापक स्तर पर अभियान चलाया जायेगा। हरेला पर्व पर एक ही दिन में व्यापक स्तर पर वृक्षारोपण की योजना बनाई जा रही है। नदियों के पुनर्जीवीकरण की दिशा में राज्य सरकार कार्य कर रही है।

उत्तरांचल पंजाबी महिला विंग क्लब द्वारा ‘सेव गर्ल्स चाईल्ड’कार्यक्रम के तहत व्यापक स्तर पर जन जागरूकता अभियान चलाया जायेगा। इसके अलावा क्लब द्वारा समय-समय पर ब्लड डोनेशन शिविर, सिंगल यूज प्लास्टिक का बहिष्कार, अस्पतालों में फल वितरण, व बुजुर्गों से मिलकर उनकी समस्याओं के समाधान के लिए प्रयास किये जा रहे हैं।

इस अवसर पर विधायक हरवंश कपूर, उत्तरांचल पंजाबी महासभा से एसपी कोचर, हरीश नारंग, हरपाल सिंह सेठी, राजीव सच्चर, नीलम खुराना, पूजा नन्दा आदि उपस्थित रहे।

आरोपी चाहे धरती पर हो या आकाश में, हर हाल में गिरफ्तार करें पुलिसः टीएसआर

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने गृह, आबकारी व पुलिस विभाग के अधिकारियों को रविवार को तलब किया। उन्होंने अधिकारियों से पथरिया पीर, देहरादून की घटना व इसके बाद की गई कार्यवाही की विस्तार से जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस पूरे मामले में जिस व्यक्ति का मुख्य आदमी का नाम सामने आ रहा है, उसे जल्द से जल्द गिरफ्तार किया जाए। वह आदमी चाहे धरती पे हो, आसमान में हो या पाताल में हो, हर हाल में पकङा जाना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अगर किसी के संरक्षण की बात पाई जाती है, तो इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। पूरे घटनाक्रम की गहराई से जांच की जाए। उन्होंने सख्त नाराजगी जताते हुए कहा कि शहर के बीचों बीच कुछ चल रहा हो और हमारी एजेंसियों को पता न चले, कैसे हो सकता है। घटना के हर पहलू की बारीकी से जांच की जाए। इसमें जो भी दोषी या जिम्मेदार पाया जाएगा उस पर सख्त कार्यवाही की जाएगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पूरे प्रदेश में पुलिस व आबकारी विभाग अवैध शराब की छापेमारी के अभियान चलाए। इसमें जिन लोगों की भी मिलीभगत हो, उन्हें पकड़ा जाए और सख्त से सख्त एक्शन लिया जाए। मुख्यमंत्री ने महकमें के अधिकारियों से कहा कि अगर अवैध शराब का व्यापार करने वालों के खिलाफ कार्यवाही को और सख्त करने के लिए आबकारी एक्ट में किसी प्रकार के संशोधन की जरूरत हो तो उसका प्रस्ताव तैयार करें। अवैध शराब या नशे के व्यापार को रोकने में आम जनता का भी सहयोग लिया जाए। कहीं से भी इस प्रकार की कोई शिकायत आती है तो उसे पूरी गम्भीरता से लिया जाए।
बैठक में मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह, डीजी लाॅ एंड आर्डर अशोक कुमार, प्रमुख सचिव आनंदबर्द्धन, सचिव नितेश झा, आईजी गढ़वाल रेंज अजय रौतेला, आयुक्त आबकारी सुशील कुमार, जिलाधिकारी देहरादून सी.रविशंकर, एसएसपी अरूण मोहन जोशी मौजूद थे।

सतपाल और पांडेय ने क्यों की योगी सरकार की तारीफ, मानेंगे यूपी सरकार का फैसला!

उत्तर प्रदेश में लंबे समय से मंत्रियों का आयकर सरकार ही भर रही थी। इस पर अब योगी सरकार ने रोक लगाई है। उत्तराखंड चूंकि पहले उत्तर प्रदेश का ही अंग था इस कारण अविभाजित उत्तर प्रदेश से चली आ रही व्यवस्था यहां भी बदस्तूर जारी है। यानी मुख्यमंत्रियों व मंत्रियों का आयकर सरकार ही भर रही है। उत्तराखंड में मंत्रियों को वेतन भत्ते मिलाकर प्रतिमाह 4.40 लाख रुपये दिए जाते हैं। इनमें से 90 हजार रुपये केवल वेतन है। शेष अन्य भत्ते हैं। उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री और मंत्रियों के आयकर स्वयं भरने के निर्णय के बाद अब उत्तराखंड में भी इस दिशा में सकारात्मक पहल होती नजर आ रही है। त्रिवेंद्र सरकार के कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज और अरविंद पांडेय ने इसकी पैरवी की है।
कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज ने कहा कि मंत्रियों को सरकारी खजाने से नहीं, बल्कि अपना आयकर स्वयं भरना चाहिए। वह अपना आयकर स्वयं भरते हैं। वह इसका परीक्षण भी करेंगे। वहीं, कैबिनेट मंत्री अरविंद पांडेय ने कहा कि वह तो विधायक निधि के पक्ष में भी नहीं रहे हैं। इस कारण उनकी भावना को समझा जा सकता है। वहीं, उत्तर प्रदेश के मंत्रियों को 1.64 लाख रुपये प्रतिमाह वेतन भत्तों के रूप में दिए जाते हैं और उनका मूल वेतन 40 हजार रुपये हैं। इस लिहाज से उत्तराखंड के मंत्रियों का वेतन कहीं अधिक है। इसे देखते हुए प्रदेश में भी मुख्यमंत्रियों व मंत्रियों द्वारा आयकर भरने की मांग उठने लगी है। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत भी इसका परीक्षण करने की बात कर चुके हैं। अब दो मंत्रियों ने मंत्रियों के स्वयं आयकर भरने को लेकर उठ रही मांग के समर्थन में कदम आगे बढ़ाए हैं। कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज ने कहा कि वह अपना टैक्स स्वयं भरते हैं। मंत्रियों को सरकारी खजाने से नहीं बल्कि स्वयं टैक्स भरना चाहिए। बाकि वह मामले का अध्ययन करेंगे।

कूड़ाघर शिफ्टिंग को लेकर मेयर अनिता ने किया वन भूमि का निरीक्षण

नगर निगम की ओर से शहर के बीचोंबीच गोविंद नगर स्थित खाली भूखंड पर बना कूड़ाघर लालपानी ब्लॉक-ए में शिफ्ट करने की योजना बनाई जा रही है। यहां कूड़ा निस्तारण प्लांट भी लगाया जाएगा। मंगलवार को मेयर ने निगम, वन विभाग और पर्यावरण प्रभाव आंकलन (ईआईए) टीम के साथ लाल पानी ब्लॉक-ए में 10 हेक्टेयर भूमि का निरीक्षण किया। उन्होंने कहा कि लालपानी ब्लॉक-ए में शीघ्र ही कूड़ा निस्तारण प्लांट लगाया जाएगा और शहर के बीचोंबीच बना कूड़ाघर भी शिफ्ट किया जाएगा। इस दौरान टीम ने ध्वनि और पानी का सैंपल भी लिया। मेयर ने इसकी रिपोर्ट जल्द बनाकर देने को कहा। उन्होंने बताया कि रिपोर्ट के बाद ही एनवायरमेंट क्लीयरेंस की एनओसी मिल सकेगी।

पर्यावरण प्रभाव आंकलन के विशेषज्ञ रत्नेश कोठियाल ने बताया कि इसकी रिपोर्ट छह से सात माह के भीतर आएगी। उन्होंने मेयर को विश्वास दिलाया कि तीन दिन में टर्म आफ रिफरेंस की रिपोर्ट फाइनल कर दी जाएगी। तीन माह मॉनिटरिंग में लगते हैं और 20 सितंबर से हवा, पानी और जमीन के सैंपल भी लिए जाएंगे। दो माह का समय पब्लिक हेयरिंग में लगेगा। उसके बाद वन विभाग की क्लीयरेंस के बाद कूड़ा निस्तारण प्लांट और कूड़ाघर शिफ्ट कर दिया जाएगा। इस मौके पर वन अधिकारी राजेंद्र पाल नेगी, सहायक अभियंता आनंद सिंह मिश्रवाण आदि उपस्थित रहे।

कूड़ा निस्तारण को निगम में होगा प्रजेंटेशन
मेयर अनिता ममगाईं ने कहा कि निगम का उद्देश्य सिर्फ कूड़े को एक जगह से उठाकर दूसरी जगह रखना नहीं है। कूड़े का निस्तारण भी होगा। पूरे प्लांट की कैपिंग करवाकर वहां से किसी तरीके की कोई बदबू और बीमारी न फैले, इसका ख्याल रखा जाएगा। उन्होंने बताया कि जल्द ही निगम में कूड़ा निस्तारण करने वाली कंपनियों का प्रजेंटेशन करवाया जाएगा।