बिना विधानसभा वाला केंद्र शासित राज्य बना लद्दाख

भारत सरकार ने ऐतिहासिक कदम उठाकर जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने का ऐलान कर दिया है। राष्ट्रपति के आदेश पर अनुच्छेद 370 को जम्मू-कश्मीर से हटा दिया गया है। इसी के साथ जम्मू और कश्मीर राज्य को दो हिस्सों में बांट दिया गया है। जम्मू-कश्मीर एक अलग केंद्र शासित प्रदेश होगा, जबकि लद्दाख को अलग से केंद्र शासित प्रदेश का दर्जा दिया गया है।

गौरतलब है कि पिछले 70 सालों से लद्दाख के लोग केंद्र शासित प्रदेश के दर्जे की मांग करते रहे थे। लद्दाख को अलग से केंद्र शासित प्रदेश का दर्जा दिया गया है, मगर, यहां विधानसभा नहीं होगी। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि वहां के लोग काफी लंबे समय से इसे अलग केंद्र शासित प्रदेश के रूप में मान्यता दिए जाने की मांग कर रहे थे।

लद्दाख की खुबियां
लद्दाख बेहद खूबसूरत है और हर साल देशभर से हजारों लोग यहां पहुंचते हैं। इसे ठंडा मरूस्थल भी कहते हैं। खासतौर पर मोटरसाइकिलों पर सवार युवा यहां के स्पेशल टूर बनाते हैं। यह उत्तर में कराकोरम पर्वत और दक्षिण में हिमालय पर्वत के बीच स्थित है। लद्दाख के उत्तर में पड़ोसी देश चीन और पूर्व में चीन के कब्जे वाले तिब्बत की सीमाएं मिलती हैं। यह सीमावर्ती इलाका है और इस दृष्टि से इसका सामरिक महत्व भी खास है। लद्दाख समुद्र तल से 9842 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। लद्दाख की राजधानी और प्रमुख शहर लेह है। लेह के उत्तर में कराकोरम दर्रा है।

हंस फाउंडेशन के संस्थापक के जन्मदिन पर सीएम ने की शिरकत, बोले फाउंडेशन का प्रयास प्रत्येक रूप में सराहनीय

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने रविवार को नन्दा की चौकी, प्रेमनगर, देहरादून स्थित एक स्थानीय होटल में हंस फाउंडेशन के संस्थापक भोले महाराज के जन्मोत्सव कार्यक्रम में शिरकत की, उन्होंने हंस फाउंडेशन की ओर से समाज हित के कार्यों के लिए प्रदान की गई एम्बुलेन्स व स्कूल बस को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। हंस फाउण्डेशन की ओर से उत्तराखण्ड के 03 जनपदों के लिए एम्बुलेन्स व विद्यालय रथ योजना के तहत उत्तराखण्ड के 09 स्कूलों के लिए बसें प्रदान की गई।

उत्तरकाशी जनपद के मोरी ब्लॉक के 20 गांवों के 556 परिवारों को हंस ऊर्जा के तहत सोलर लाईट वितरण, ऋषिकेश के गंगा तटों पर प्रथम जल एम्बुलेन्स का अवतरण, प्रदेश की विभिन्न बालिका स्कूलों में छात्रावासों में सैनिटरी नैपकिन वेंडिंग व डिस्पोजल मशीनों का शुभारम्भ एवं शिक्षा अभियान के तहत संचालित होने वाले उत्तराखण्ड के स्कूलों में स्कूल यूनिफार्म, पठन-पाठन सामग्री, कम्प्यूटर लैब, साइंस लैब का वितरण किया गया।

भोले महाराज को जन्मदिवस की बधाई व शुभकामना देते हुए मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि हंस फाउंडेशन ने आज देश के सबसे बड़े ट्रस्ट व दाता के रूप में अपनी पहचान बनाई है। स्वास्थ्य, शिक्षा, संस्कृति सहित सभी क्षेत्रों में हंस फाउंडेशन का महत्वपूर्ण योगदान है। फाउंडेशन के प्रयास प्रत्येक रूप में सराहनीय है। उनके द्वारा असीम सेवाएं राज्य व राज्य से बाहर दी जा रही है। माता मंगला देवी की ओर से गरीब व वंचित वर्ग की सहायता हेतु विभिन्न सेवा कार्य किए जा रहे है। इन प्रयासों को निश्चित रूप से सराहा जाना चाहिए।

एक लाख कर्मचारियों को मिली राहत, नए आदेश जारी

हाल ही में शासन ने सीधी भर्ती और पदोन्नति पाने वाले कर्मचारियों के न्यूनतम वेतन में अंतर को समाप्त करने के संबंध में जो आदेश किया था, उसका लाभ अब प्रदेश के एक लाख कर्मचारियों को मिलने जा रहा है।
दरअसल, छठे वेतन आयोग की सिफारिशें लागू होने के बाद सीधी भर्ती और पदोन्नति के पदों पर न्यूनतम वेतन निर्धारण में विसंगति पैदा हो गई थी। इसके संबंध में शिक्षा विभाग ने शासन से स्पष्टीकरण मांगा था, जिस पर शासनादेश जारी किया गया। कर्मचारी संगठनों ने जब खोज खबर की तो खुलासा हुआ कि इसका फायदा प्रदेश के समस्त कर्मचारियों को मिलेगा। राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के मुख्य संयोजक ठाकुर प्रहलाद सिंह ने कहा कि इससे कर्मचारियों और शिक्षकों को 1000 रुपये से लेकर पांच हजार रुपये तक का वित्तीय लाभ मिलेगा।
प्रदेश में छठे वेतन आयोग की सिफारिशें लागू होने के बाद सीधी भर्ती और पदोन्नत कर्मचारियों के न्यूनतम वेतन में असमानता की विसंगति पैदा हो गई थी। पदोन्नति के बाद कर्मचारियों को समान पद पर सीधी भर्ती से कम न्यूनतम वेतन निर्धारित हुआ। इसे लेकर पदोन्नति पाने वाले शिक्षक व कर्मचारी सरकार से लगातार विसंगति दूर करने की मांग कर रहे थे।
अब नए शासनादेश से पदोन्नति के बाद कर्मचारी का न्यूनतम वेतन सीधी भर्ती से आए कर्मचारी के बराबर होगा। प्रदेश सरकार के तकरीबन सभी विभागों में इसी तरह की विसंगति है। इनमें प्रमुख विभाग वन, मत्स्य, कृषि, उद्यान, ग्राम्य विकास, गन्ना, आबकारी, परिवहन, सहकारिता, वाणिज्य कर, ग्रामीण अभियंत्रण, राजस्व, खाद्य आपूर्ति, मनोरंजन कर समेत कई अन्य विभागों के कर्मचारी लाभान्वित होंगे।
राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद ने आशंका जताई कि विभागों के अध्यक्ष शासनादेश को शिक्षा विभाग तक सीमित करके कर्मचारियों को उनके लाभ से वंचित कर देना चाहते हैं। लेकिन परिषद चुप नहीं बैठेगी। शनिवार को परिषद की बैठक में तय हुआ कि कोई विभागाध्यक्ष शासनादेश को लागू करने में हीलाहवाली करेगा तो परिषद उसका घेराव करेगी। बैठक में प्रदीप कोहली, नंद किशोर त्रिपाठी, शक्ति प्रसाद भट्ट, राकेश प्रसाद ममगाईं, गुड्डी मटूड़ा, विजया जोशी, एनएस कुंद्रा, सुभाष शर्मा समेत कई अन्य पदाधिकारी उपस्थित थे।

दो बच्चे पैदा होने पर उचित समयान्तर के लिए जागरूकता अभियान जरूरी

मंगलवार को मुख्यमंत्री आवास में मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत एवं महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास मंत्री भारत सरकार स्मृति जुबिन ईरानी ने अधिकारियों के साथ महिला सशक्तिकरण, बाल विकास तथा तथा पोषण अभियान के संबंध में बैठक ली।

केन्द्रीय मंत्री स्मृति जुबिन ईरानी ने कहा कि पोषण योजना, आगंनबाड़ी केन्द्रों में पेयजल व्यवस्था व टॉयलेट की सुविधाओं पर विशेष ध्यान दिया जाय। अतिकुपोषित व कुपोषित बच्चों को उचित पौष्टाहार प्राप्त हो, जिससे वे सामान्य श्रेणी में आ सके। पौष्टिक आहार के लिए कलेण्डर बनाया जाय व इसे जनप्रतिनिधियों के साथ शेयर किया जाये। एनीमिया को रोकने के लिए टी-3 रणनीति पर ध्यान दिये जाने पर जोर दिया गया। दो बच्चों के पैदा होने के उचित समयान्तर हो इस दिशा में जागरूकता अभियान चलाया जाना जरूरी है, ताकि बच्चों का मानसिक व शारीरिक विकास सही हो।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि जिन जनपदों में बाल लिंगानुपात कम है अधिकारी ऐसे जनपदों का भ्रमण कर और बैठक कर लिंगानुपात कम होने के कारणों का पता लगायें। बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान के तहत राज्य व जिला स्तरीय समितियों की बैठक समय-समय पर आयोजित की जाय।

बैठक में जानकारी दी गई कि प्रदेश में चार वन स्टॉप स्टॉप सेंटर बन चुके हैं, शेष 09 सेंटर भी 15 अगस्त से पूर्व शुरू किये जायेंगे। स्पान्सर स्कीम के तहत लाभार्थियों को अधिक से अधिक लाभ मिल सके, इसके लिए ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों में वार्षिक आय की सीमा बढ़ाने का अनुरोध किया गया। स्वधार गृह योजना के तहत मानसिक विक्षिप्त महिलाओं को आच्छादित करने का भी अनुरोध किया गया।

बौखलाएं नेता, कहा-जम्मू कश्मीर सियासी मसला, मिलिट्री सोल्यूशन नहीं

जम्मू कश्मीर में सुरक्षा बलों की 100 अतिरिक्त कंपनियों की तैनाती के आदेश की सूचना फैलने के बाद राजनीति गरमा गई है। क्षेत्रीय राजनीतिक दल केंद्र को गलत ठहरा रहे हैं। वहीं भाजपा का कहना है कि क्षेत्रीय दलों के नेता अफवाह फैला कर लोगों में खौफ पैदा कर रहे हैं। अतिरिक्त कंपनियों की तैनाती को जनता 370 और 35-ए हटाने की प्रक्रिया से जोड़कर असमंजस में है।
पूर्व मुख्यमंत्री और पीडीपी की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने कहा कि यह कदम ठीक नहीं है। इससे लोगों के दिलों में शक पैदा हो रहा है। जम्मू कश्मीर सियासी मसला है। इसका सियासी तौर पर हल निकाला जाना चाहिए। इसका मिलिट्री सोल्यूशन नहीं है। जब तक जम्मू-कश्मीर के लोगों और पाकिस्तान को बातचीत में शामिल नहीं किया जाएगा, तब तक इसका हल संभव नहीं है। कुलगाम में दिए इस बयान से पूर्व महबूबा ने अपने ट्विटर पर लिखा कि घाटी में अतिरिक्त 10 हजार सैनिकों को तैनात करने के केंद्र के फैसले ने लोगों में भय पैदा की है। केंद्र सरकार को अपनी नीति पर पुनर्विचार और सुधार करना होगा।

इस बीच पीपुल्स कांफ्रेंस के सज्जाद गनी लोन ने कहा कि जब से 100 अतिरिक्त कंपनियों का आदेश वायरल हुआ है, तब से लोगों में खौफ सा पैदा हो गया है। अटकलें लगाई जा रहे हैं कि कहीं जो विशेष दर्जा उन्हें प्राप्त है, कहीं उसके साथ छेड़छाड़ की कोई साजिश तो नहीं है। लेकिन इससे कुछ नहीं होगा। हिंदुस्तान के जो दुश्मन हैं, उनको तो फायदा होगा, लेकिन जिन लोगों ने संविधान के तहत शपथ ली है और जो मुख्यधारा के राजनीतिक दल हैं, उनकी साख को नष्ट करेगा। सज्जाद ने कहा कि ऐसा माहौल बन गया है कि सारे हिंदुस्तान के लोग कश्मीरियों पर हावी होना चाहते हैं। लेकिन जो ग्रेट नेशन होते हैं, वहां ऐसा तरीका नहीं होता है।
अवामी नेशनल कांफ्रेंस के अध्यक्ष मुजफ्फर अहमद शाह ने कहा कि अतिरिक्त जवानों की तैनाती एक चिंता का विषय जरूर है, लेकिन 1953 से हम तैनाती देखते आए हैं। उनसे कुछ नहीं हुआ। शाह ने कश्मीर घाटी में अतिरिक्त सुरक्षाबलों की तैनाती को अनुच्छेद 370 और 35-ए के हटाये जाने की ओर इशारा करते हुए कहा कि ऐसे हटाने का प्रयास गुंडागर्दी होगा। अगर केंद्र इस राज्य की विशेष पहचान को कानूनी तौर पर हटाने की कोशिश करेगी तो वह असफल रहेगी।

राज्य के 208 लोगों को मुख्यमंत्री ने सौंपे 148.85 मेगावाट की परियोजना के आवंटन पत्र

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने शुक्रवार को मुख्यमंत्री आवास स्थित जनता मिलन हॉल में राज्य के 208 स्थानीय उद्यमियों को 600 करोड़ की 148.85 मेगावाट की सौर ऊर्जा परियोजनाओं के आंवटन पत्र वितरित किये। उन्होंने कहा कि शीघ्र ही 200 करोड़ की 52 मेगावाट की अन्य परियोजनायें भी स्थानीय विकासकर्ताओं को आवंटित की जायेगी। मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने सौर ऊर्जा पर्यावरण के अनुकूल है। इस प्रकार वे हरित ऊर्जा को बढ़ावा देने वाले भी बने हैं, उन्होंने कहा कि इन योजनाओं से प्रति उद्यमी को औसतन 66.5 लाख की वार्षिक आय होगी, जबकि लगभग 850 लोगों को रोजगार उपलब्ध होगा।

उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष आयोजित इन्वेस्टर्स समिट में सौर ऊर्जा परियोजनाओं के प्रति लोगों में उत्साह देखा गया था। राज्य में निवेश को बढ़ावा देने के लिये इन्वेस्टर्स समिट से पूर्व एक माह में 5 कैबिनेट बैठकें आयोजित कर 5 नीतियों में संशोधन के साथ ही 10 उद्योगों के अनुकूल नीतियाँ बनायी गई, जिसके सार्थक परिणाम आने लगे हैं। इसके तहत अब तक राज्य में लगभग 16,000 करोड़ से अधिक निवेश प्राप्त हुआ है। मुख्यमंत्री ने कहा कि वैकल्पिक ऊर्जा के विकास से हम राज्य की ऊर्जा जरूरतों को पूरा कर सकेंगे। अभी राज्य को 1000 करोड़ की बिजली क्रय करनी पड़ रही है। राज्य में पिरूल से ऊर्जा उत्पादन की दिशा में कार्य शुरू हो गया है। इस दिशा में 21 विकासकर्ताओं को योजनायें आवंटित की जा चुकी हैं।

मुख्यमंत्री ने सौर ऊर्जा की परियोजनाओं के क्रियान्वयन में बड़ी संख्या में महिलाओं की भागीदारी को भी सुखद बताया है। उनका कहना है कि हमारी शिक्षित महिलाओं का आर्थिक रूप से मजबूत होना राज्य व समाज के हित में है। राज्य की महिलाओं की भागीदारी हर क्षेत्र में हो इसके प्रयास किये जा रहे हैं।

आवंटित की गई सौर ऊर्जा परियोजनाओं के सम्बन्ध में सचिव ऊर्जा राधिका झा ने बताया कि राज्य सरकार द्वारा उत्तराखण्ड सौर ऊर्जा नीति को संशोधित कर 05 मेगावॉट क्षमता के सोलर पावर प्लान्ट्स की स्थापना, प्रदेश के पर्वतीय क्षेत्रों में प्रदेश के मूलध्स्थायी निवासियों हेतु ही आरक्षित कर दी गयी थी। साथ ही पारम्परिक एवं नवीकरणीय तरीकों से ऊर्जा उत्पादन को उद्योग की श्रेणी में सम्मिलित करते हुये, इन परियोजनाओं के लिये उत्तराखण्ड सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग की श्रेणी में सम्मिलित करते हुये इन परियोजनाओं के लिये उत्तराखण्ड सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग नीति-2015 में प्रदत्त समस्त सुविधाएं भी अनुमन्य की गयी थी। उन्होंने बताया कि इस नीति के तहत आमंत्रित निविदा के सापेक्ष उक्त 208 अभ्यर्थियों को चयनित किया गया है।

इस अवसर पर जिन उद्यमियों को परियोजना आवंटन पत्र वितरित किये गये उनमें सीमा कौशिक पेटवाल, स्वपनिल जोशी, प्रियंका चौहान, पारूल गोयल, नीलम रावत, नीता कुमारी, स्वाति गुप्ता, विक्रम सिंह, महेश चन्द्र काण्डपाल, बसन्त बल्लभ कोठियाल, कैलाश चन्द्र भट्ट, जयराज सिंह परमार, प्रशान्त गंगवार सहित अन्य लोग शामिल रहे।

भारत की तीनों सेंनाएं आज हर मोर्चें पर अग्रिम स्थिति मेंः त्रिवेन्द्र

शौर्य दिवस के अवसर देहरादून के गांधी पार्क में मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कारगिल शहीद स्मारक पर पुष्प चक्र अर्पित कर कारगिल शहीदों को श्रद्धा सुमन अर्पित किए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि देश की रक्षा के लिए हमारे जवानों ने हमेशा अदम्य साहस का परिचय दिया। उत्तराखण्ड के जवानों ने देश की रक्षा के लिए सभी युद्धों में अपना सर्वोच्च बलिदान दिया। भारत की थल सेना, वायु सेना व नौसेना आज हर मोर्चे पर अग्रिम स्थिति में है। देश को सुरक्षित रखने के लिए शास्त्रों का ज्ञान होना चाहिए वहीं देश की सीमाएं सुरक्षित रखने के लिए शस्त्रों से भी मजबूत होना जरूरी है।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि सैनिकों व पूर्व सैनिकों की समस्याओं के समाधान के लिए प्रदेश स्तर पर अपर मुख्य सचिव नोडल आफिसर होंगे। सैनिकों के लिए सचिवालय प्रवेश हेतु उनका सेना का पहचान पत्र मान्य होगा। उन्हें सचिवालय प्रवेश हेतु अलग से लाईन में खड़ा नहीं होना पड़ेगा। प्रत्येक जनपद में सैनिकों व पूर्व सैनिकों की समस्याओं के समाधान के लिए अपर जिलाधिकारी को नोडल अधिकारी बनाया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री हेल्पलाईन नम्बर 1905 पर कोई भी व्यक्ति अपनी शिकायत दर्ज करा सकता है, जब तक शिकायतकर्ता संतुष्ट न हो तब तक शिकायत का निस्तारण नहीं माना जायेगा। सीएम हेल्पलाईन नम्बर की प्रत्येक माह मुख्य सचिव समीक्षा करते हैं। समय-समय पर मुख्यमंत्री स्वयं इसकी समीक्षा करेंगे।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उत्तराखण्ड में सैन्य धाम को पांचवें धाम की संज्ञा दी। उन्होंने कहा कि देहरादून में एक विशाल एवं भव्य शौर्य स्थल बनाया जायेगा। इस शौर्य स्थल में देश की रक्षा के लिए अपना बलिदान देने वाले सैनिकों का नाम होगा। यह शौर्य स्थल आधुनिक होगा व यहां पर अनेक प्रकार की सुविधाएं उपलब्ध होंगी। शौर्य स्थल के लिए देहरादून में भूमि चिन्हित कर ली गई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार सैनिकों व पूर्व सैनिकों को हर संभव मदद करेगी। इस अवसर पर मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने पदक विजेता सैन्य अधिकारियों, सैनिकों, सैनिकों के परिवारजनों व वीरनारियों को सम्मानित भी किया।

वायरल वीडियो के पीछे की कहानी, क्या इसमें सच्चाई है!

सोशल मीडिया में मुख्यमंत्री का एक वीडियो बहुत तेजी से वायरल हुआ। इस वीडियो में मुख्यमंत्री यह कहते दिख रहे हैं कि पीपल का पेड़ प्राणवायु छोड़ता है। ऐसे ही पशुओं में गाय एकमात्र ऐसा पशु है जो ऑक्सीजन छोड़ता है। यह भी कहा जाता है कि यदि किसी को सांस की तकलीफ है तो गाय की मालिश करने से यह तकलीफ दूर हो जाती है। वीडियों में कहा गया कि टीबी जैसी बीमारी भी गाय के संपर्क में आने से दूर हो जाती है। गाय के गोबर और गौमूत्र में काफी ताकत है। शरीर के विभिन्न हिस्सों जैसे स्किन, हार्ट व किडनी आदि के लिए ये काफी फायदेमंद हैं।
सोशल मीडिया में इस वीडियो के वायरल होने के बाद इस पर तरह-तरह की टिप्पणियां की जा रही हैं। वहीं, मुख्यमंत्री कार्यालय का कहना है कि वीडियो को एडिटिंग करके वायरल किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने राष्ट्रीय चैनल पर प्रसारित हो रहे एक कार्यक्रम को देखकर और पर्वतीय क्षेत्रों में चलने वाली मान्यताओं के आधार पर कहा था, जिस पर विवाद जैसी कोई बात नही है।

चलिए हम मुख्यमंत्री के की बातों की पड़ताल करते है कि क्या ऐसा होता है या नही…

पीपल का पेड़ प्राणवायु छोड़ता है …
पीपल का पेड़ शुष्क वातावरण में पनपता है और इसके लिए उसकी देह में पर्याप्त तैयारियां हैं. पेड़-पौधों की सतह पर स्टोमेटा नामक नन्हे छिद्र होते हैं जिनसे गैसों और जल-वाष्प का लेन-देन होता है. सूखे गर्म माहौल में पेड़ का पानी न निचुड़ जाए, इसलिए पीपल दिन में अपेक्षाकृत अपने स्टोमेटा बन्द करके रखता है। इससे दिन में पानी की कमी से वह लड़ पाता है। बिल्कुल. लेकिन इसका नुकसान यह है कि फिर दिन में प्रकाश-संश्लेषण के लिए कार्बन डाई ऑक्साइड उसकी पत्तियों में कैसे प्रवेश करे? स्टोमेटा तो बन्द हैं. तो फिर प्रकाश-संश्लेषण कैसे हो? ग्लूकोज कैसे बने? तो पीपल व उसके जैसे कई पेड़-पौधे रात को अपने स्टोमेटा खोलते हैं और हवा से कार्बन-डायऑक्साइड बटोरते हैं. उससे मैलेट नामक एक रसायन बनाकर रख लेते हैं. ताकि फिर आगे दिन में जब सूरज चमके और प्रकाश मिले, तो प्रकाश-संश्लेषण में सीधे वायुमण्डलीय कार्बन डाई ऑक्साइड की जगह इस मैलेट का प्रयोग कर सकें। यानी पीपल का पेड़ रात को भी कार्बन डाई ऑक्साइड-शोषक है। इस लिए इसे अधिक आक्सीजन देने वाला पेड़ कहा जाता है।


इस लिंक को पढ़िए …http://dahd.nic.in/related-links/chapter-v-part-2
इस लिंक को पढ़िए …https://www.ncbi.nlm.nih.gov/pmc/articles/PMC4566776/

गाय एकमात्र ऐसा पशु है जो ऑक्सीजन छोड़ता है और गाय से जुड़े अन्य तथ्य…
वैज्ञानिक शोधों से पता चला है कि गाय में जितनी सकारात्मक ऊर्जा होती है उतनी किसी अन्य प्राणी में नहीं। गाय की पीठ पर रीढ़ की हड्डी में स्थित सूर्यकेतु स्नायु हानिकारक विकिरण को रोककर वातावरण को स्वच्छ बनाते हैं। यह पर्यावरण के लिए लाभदायक है। इसी लिए वैज्ञानिक कहते हैं कि गाय एकमात्र ऐसा प्राणी है, जो ऑक्सीजन ग्रहण करता है और ऑक्सीजन ही छोड़ता है, जबकि मनुष्य सहित सभी प्राणी ऑक्सीजन लेते और कार्बन डाई ऑक्साइड छोड़ते हैं। पेड़-पौधे इसका ठीक उल्टा करते हैं।

हमारे देश में धार्मिक मान्यताओं का विशेष महत्व हैं। जिसकी समय-समय पर वैज्ञानिकों और डाॅक्टरों ने भी पड़ताल की है। इस लिए शायद मुख्यमंत्री ने पीपल और गाय के मुद्दें पर सकारात्मक टिप्पणी की। मुख्यमंत्री कार्यालय की मानें तो मुख्यमंत्री की सकारात्मक टिप्पणी का कुछ लोगों ने जानबूझकर मजाक बनाने का कार्य किया है। उनका कहना है कि एक तरफ तो मीडिया उत्तराखंड को देवभूमि कहता है लेकिन जब हिन्दु संस्कृति और सभ्यता की बात की जाती है तो उसका मजाक बनाना शुरु कर दिया जाता है। बरहाल हमारी पड़ताल में मुख्यमंत्री ने वैज्ञानिक और धार्मिक मान्यताओं की ओर से मिले संकेतों पर ही बात कही है। अब आप लोगों को निर्धारण करना है कि धर्म और वैज्ञानिक सोच में किस तरह तालमेल बिठाया जाएं।

सीएम बोले, पर्वतीय क्षेत्रों में पलायन रोकने को आर्थिक स्थिति मजबूत करने के हो रहे प्रयास

मुख्यमंत्री आवास स्थित सभागार में राज्य के विभिन्न विभागों, निगमों व संस्थानों के दायित्वधारियों की बैठक आयोजित की गई। मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि प्रदेश के समग्र विकास के लिये राज्य सरकार की ओर से की गई पहल को धरातल पर लाने में सभी को सहयोगी बनना होगा। सरकार की ओर से जनहित के लिये जो कार्यक्रम व लक्ष्य तय किये हैं उनका लाभ आम जनता तक पहुंचे इसके लिये हमें समेकित प्रयास करने होंगे।

उन्होंने कहा कि राज्य के पर्वतीय क्षेत्रों से पलायन रोकने के साथ ही आर्थिक स्थिति की मजबूती के लिये कारगर प्रयास किये जा रहे हैं, इसके लिये पर्यटन के क्षेत्र को उद्योग का दर्जा देकर इसे आर्थिकी का मजबूत आधार बनाया जा रहा है। राज्य में सर्विस सेक्टर को बढ़ावा दिया जा रहा है। पर्यटन, वेलनेस योगा व छोटे-छोटे कुटी उद्योगों से राज्य की आय में वृद्धि के प्रयास किये जा रहे हैं। आज हमारी प्रति व्यक्ति आय 1.90 लाख है, जो राष्ट्रीय औसत 1.30 लाख से अधिक है। पर्वतीय क्षेत्रों के पिछडेपन को दूर करने के लिये जिलों में भी प्रति व्यक्ति आये को बढ़ाने के प्रयास किये जा रहे हैं ताकि पूरे राज्य में विकास को गति मिल सके।

– छोटे किसानों को एक लाख तथा समूहों को 5 लाख तक ब्याज मुक्त ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है। स्वरोजगार के प्रति अधिक से अधिक लोग प्रेरित हों इसके लिए एग्रोबेस उद्योगों व आजीविका मिशन को बढ़ावा दिया जा रहा है।

– राज्य की महिलायें विभिन्न स्वरोजगार की योजनाओं में भागीदारी निभा रही हैं। इस वर्ष महिलाओं ने केदारनाथ में 2 करोड़ का प्रसाद बिक्री किया। भोजन व्यवसाय में भी वे आगे आ रही हैं। ग्राम लाइट योजना भी महिला समूहों की आर्थिकी को मजबूत कर रही है।

– स्थानीय लोगों को विभिन्न कार्यों के ठेके के साथ ही छोटी ऊर्जा योजनायें आवंटित की गई हैं। कीड़ा जड़ी एवं नशामुक्त हेम्प की खेती के लाइसेंस दिये जा रहे हैं। इससे बंजर भूमि भी उपजाऊ होगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पांच बद्री, पांच केदार, पांच प्रयाग यात्रा को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। वर्तमान में पर्वतीय क्षेत्रों में 600 करोड़ के सोलर ऊर्जा प्रोजेक्ट स्थानीय लोगों को आवंटित किये गये हैं। पहाड़ों के अनुकूल उद्योगों की भी स्थापना की जा रही है। इससे उन क्षेत्रों में रोजगार सृजन के साथ ही पलायन को रोकने में मदद मिलेगी।

नेगी दा ने कहा, हिलटाॅप से किसानों को मिलेगा रोजगार

सरकार के लिए राहत की खबर है। हिलटाॅप शराब पर राज्य सरकार को अब लोक गायक नरेन्द्र सिंह नेगी का साथ मिल गया है। नरेन्द्र सिंह नेगी ने कहा है कि जब राज्य में शराब की बिक्री और खपत बहुत ज्यादा है तो शराब की फैक्ट्री पर बैन क्यों लगना चाहिए? इस बयान के बाद राजनीतिक अर्थ निकाले जाने लगे है। सरकार के समर्थन में बयान देने के बाद सरकार के फैसले और बुलंद होने का अनुमान लगाए जाने लगे है।
दरअसल, आज मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत लोक गायक नरेन्द्र सिंह नेगी के आवास पर पहंुचे। उन्होंने श्री नेगी को साहित्य अकादमी के द्वारा सर्वोच्च सम्मान दिये जाने के लिए नामित होने पर बधाई दी। इसके बाद कुछ पत्रकारों ने श्री नेगी से सवाल किए। जिसमें उन्होंने हिलटाॅप शराब की फैक्ट्री पर उनकी राय जानी। जिस पर लोक गायक नरेन्द्र सिंह नेगी ने खुलकर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि क्या आपको पता है कि हमारे यहां शराब की खपत और बिक्री कितनी बढ़ गई है। ऐसे में हम बाहरी राज्यों से शराब मगांकर पी रहे है। या तो सरकार शराब पर पूर्ण पांबदी लगा दे। नही तो शराब फैक्ट्री लगाने का विरोध नही होना चाहिए। उन्होंने कहा कि राज्य में शराब बनेगी तो किसानों और काश्तकारों को भी फायदा पहुंचेगा। माल्टा और अन्य पहाड़ी उत्पादों को अच्छा दाम मिलेगा। सरकार राजस्व भी कमायेगी और राज्य की शराब राज्य में ही बिकेगी। उन्होंने अप्रत्यक्ष कहा कि ऐसे में शराब का गुण कम से कम रोजगार देने के काम तो आयेगा। वरना सभी जानते है कि शराब स्वास्थ के लिए हानिकारक है।
इस बयान के बाद नेगी दा के लिए आम लोगों की सोच कितनी बदलती है। यह तो समय ही बतायेगा। लेकिन अपनी स्पष्ट बात रखकर श्री नेगी ने सरकार को अप्रत्यक्ष रुप से बड़ी राहत दे दी है। कुछ लोग श्री नेगी के बयान को सही भी ठहरा रहे है। लोगों का कहना है कि उत्तराखंड केवल शराब का कंज्यूमर ही बन गया है। ऐसे में शराब से रोजगार और राजस्व बढ़ता है तो दिक्कत कहां है। या तो सरकार शराब राज्य में शराब पर प्रतिबंध लगा दे। नही तो शराब पर राजनीति नही होनी चाहिए।

आप भी सुनिए श्री नरेन्द्र सिंह नेगी ने क्या कहा…