टिहरी लेक डेवलपमेंट के लिए केंद्र ने दिए 1200 करोड़

केंद्र सरकार ने जमरानी बांध बहुद्देशीय परियोजना के लिए 2584 करोड़ रूपए, टिहरी लेक डेवलपमेंट के लिए 1200 करोड़ रूपए और देहरादून स्मार्ट सिटी के लिए 1400 करोड़ रूपए की राशि स्वीकृत की है। मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने इसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि ‘‘मैं प्रधानमंत्री का उत्तराखण्ड की जनता की ओर से हार्दिक आभार व्यक्त करता हूं। वे हमेशा उत्तराखण्ड की चिंता करते हैं। राज्य सरकार उनके विजन के अनुरूप प्रदेश के विकास के लिए तत्पर है। पहले ही ऑल वेदर रोड़ और ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना पर तेजी से काम चल रहा है। केंद्र सरकार के विशेष सहयोग से ये सभी योजनाएं उत्तराखण्ड के विकास में मील का पत्थर साबित होंगी।’’

मुख्यमंत्री ने कहा कि जमरानी बहुद्देशीय परियोजना तराई भाबर की लाइफ-लाईन है। अब इस महत्वपूर्ण परियोजना के काम में और तेजी आए, दशकों से लटकी पङी जमरानी बांध परियोजना को हकीकत बनाने के लिए हमारी सरकार ने गम्भीरता से कोशिश की। इसमें केन्द्र सरकार का भी पूरा सहयोग मिला जिसके लिए हम उनके आभारी हैं। 09 किलोमीटर लम्बे, 130 मीटर चौड़े और 485 मीटर ऊँचे इस बाँध के निर्माण से 14 मेगावाट विद्युत उत्पादन के साथ ही पेयजल व सिंचाई के लिए पानी भी उपलब्ध होगा। इस बांध के बनने से तराई- भाबर के क्षेत्रों हल्द्वानी, काठगोदाम, और उसके आस-पास के क्षेत्रों को ग्रेविटी वाटर उपलब्ध होगा। मुख्यतः उधमसिंहनगर जिले में सिंचाई की सुविधा मिलेगी। हल्द्वानी और उसके आस-पास के क्षेत्रों में नलकूपों का जल स्तर नीचे होने के कारण पानी की उपलब्धता में समस्या आ रही थी, इससे एक तो रिचार्ज बढ़ेगा, स्वच्छ पेयजल लोगों को उपलब्ध होगा एवं भूमि की सिंचाई के लिए पर्याप्त मात्रा में जल मिलेगा। आगामी 75 वर्षों के लिए 24 घण्टे उपभोक्ताओं को पानी उपलब्ध होगा। इस बांध से भविष्य में आवश्यकता पड़ने पर नैनीताल को भी पानी दिया जा सकता है। इस परियोजना का सबंधित क्षेत्रों के सामाजिक व आर्थिक जीवन पर अच्छा प्रभाव पड़ेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि टिहरी झील पर्यटन के एक महत्वपूर्ण गंतव्य के तौर पर उभर रहा है। इसमें देश-विदेश के पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करने की क्षमता है। यहां पर्यटन के विकास से क्षेत्र की आर्थिकी और मजबूत होगी। नई टिहरी क्षेत्र को पर्यटन क्षेत्र के रूप में विकसित करने के लिए सरकार प्रयासरत है। डोबरा-चांठी पुल के निर्माण के बाद टिहरी के दोनो ओर होटल, रिजोर्ट एवं शिक्षण संस्थान बनेंगे। इससे पर्यटकों को अधिक सुविधायें उपलब्ध हो सकेंगी। अगले आने वाले 10-15 वर्षो में टिहरी का एक नया स्वरूप सामने आयेगा जो निश्चित रूप से देश व दुनिया को अपने ओर आकर्षित करने में मददगार रहेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि स्मार्ट दून के लिए पिछले कुछ समय में बहुत तेजी से काम हुआ है। आने वाले समय में बदला हुआ दून दिखेगा। स्मार्ट दून की तरफ आगे बढ़ने में दून वासियों का भी पूरा सहयोग मिल रहा है। स्मार्ट सिटी में देहरादून 10 माह में 99 से 30 वीं रैंकिंग पर पहुंचा है। देहरादून में इंटीग्रेटेड कन्ट्रोल एंड कमांड सेंटर बनेगा। देहरादून के प्रमुख मार्गों पर अंडरग्राउन्ड केबलिंग की जाएगी। सरकारी भवनों पर सौर ऊर्जा का काम शुरू हो चुका है। धीरे धीरे हम ग्रीन एनर्जी की ओर बढ़ रहे हैं। सरकार, तकनीक के माध्यम से जनसुविधाओं में सुधार करने की कोशिश कर रही है।

सरकार की कोशिश ग्रामीण क्षेत्रों से पलायन रूकेः सीएम

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने रविवार को द्वारीखाल, पौड़ी गढ़वाल में राजकीय इण्टर कॉलेज देवीखेत के हीरक जयन्ती समारोह में प्रतिभाग किया। मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि इस क्षेत्र के स्वतंत्रता संग्राम सैनानियों के सम्मान में उनका स्मारक बनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार के तीन वर्ष पूर्ण होने वाले हैं। प्रदेश की जनता से हमने वायदा किया था कि हम राज्य के विकास एवं भ्रष्टाचार मुक्त सरकार चलायेंगे। पीएमजीएसवाई में सबसे अधिक दस अवार्ड उत्तराखण्ड को मिले हैं। गांवों को सड़को से जोड़ने के लिए राज्य सरकार ने गंभीरता से प्रयास किये। देश में सड़कों के ग्रामीण संयोजन में उत्तराखण्ड को देश में प्रथम स्थान मिला है। जन सहयोग एवं सरकार की मंशा से विकास में तेजी आती है।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि उत्तराखण्ड में 17 विद्यार्थियों पर औसतन एक अध्यापक है, देश में छात्र-शिक्षक अनुपात में सबसे अच्छी स्थिति उत्तराखण्ड की है। आज रोजगार परक एवं गुणवत्तायुक्त शिक्षा पर ध्यान देने की जरूरत है। दुनिया की डिमाण्ड के हिसाब से शिक्षा में गुणात्मक सुधार पर बल देना होगा। उत्तराखण्ड में लगभग एक हजार विद्यालय ऐसे हैं, जिनमें छात्र संख्या 10 से कम है। शिक्षा के स्तर को सुधारने के लिए कम छात्र संख्या वाले विद्यालयों को क्लब किया गया है।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि इन तीन वर्षो में राज्य सरकार की कोशिश रही है कि ग्रामीण क्षेत्रों से पलायन रूके। प्रदेश के सर्वांगीण विकास के लिए पर्वतीय क्षेत्रों पलायन रूकना जरूरी है। पर्वतीय क्षेत्रों में लोगों की आजीविका के साधन बढ़ाने के लिए राज्य सरकार प्रयासरत है। राज्य सरकार द्वारा किसानों को बिना ब्याज के एक लाख रूपये तक का ऋण तथा स्वयं सहायता समूहों को बिना ब्याज के 05 लाख रूपये का ऋण दिया जा रहा है। गौचर मेले में सात दिन में साढ़े छः करोड़ रूपये का कारोबार हुआ, जिसमें से 61 लाख का कारोबार स्थानीय महिलाओं ने किया। स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देना जरूरी है, इस दिशा में उत्तराखण्ड में महिला स्वयं सहायता समूह अच्छा कार्य कर रहे हैं।

पर्यटन विभाग में पंजीकृत होम स्टे की मार्केटिंग पर विशेष ध्यान रखेंः सीएम

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने सचिवालय में सिंचाई, शहरी विकास, पर्यटन, युवा कल्याण, परिवहन और आवास विभागों की समीक्षा की। उन्होंने निर्देश दिए हैं कि पार्किंग स्थलों के लिए एक स्टैंडर्ड मॉडल बनाया जाए। विभिन्न उद्देश्यों के लिए भवन-निर्माण का जरूरत के अनुसार हो। पर्यटन स्थलों, शहरी क्षेत्रों में बनाए जाने वाले शौचालयों की गुणवत्ता का निरीक्षण सुनिश्चित किया जाए। नगर पंचायत भवन निर्माण को प्राथमिकता दी जाए। साहसिक खेल निदेशालय की स्थापना जल्द से जल्द की जाए। इको टूरिज्म पॉलिसी बनाई जाए। अगले वर्ष वैलनेस समिट की तैयारी शुरू की जाए। पर्यटन विभाग में पंजीकृत होम स्टे की मार्केटिंग पर विशेष ध्यान दिए जाने की आवश्यकता है।

आवास विभाग की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के विभिन्न स्थानों पर स्वीकृत मल्टी-पार्किंग के लिए किसी विशेषज्ञ एजेंसी से एक समान मॉडल बनवा लिया जाए। इसमें इस बात का विशेष ध्यान रखा जाए कि पर्वतीय क्षेत्रों में पार्किंग स्थल विकसित करने में कंक्रीट का भारी भरकम स्ट्रक्चर न बनाया जाए। आधुनिक तकनीक का उपयोग किया जाए। जहां अधिक आवश्यकता न हो, वहां ओपन पार्किंग की व्यवस्था की जाए। बताया गया कि विभिन्न स्थानों के मास्टर प्लान बनाने की प्रक्रिया चल रही है।

कूड़ा निस्तारण में सेग्रीगेशन की प्रक्रिया को अपनाया जाए
शहरी विकास विभाग की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि शहरी क्षेत्रों के सभी शौचालयों की गुणवत्ता का निरीक्षण करवा लिया जाए। कूड़ा निस्तारण के लिए सेग्रीगेशन की व्यवस्था की जाए। जगह-जगह लगाए जाने वाले साईनेज में समरूपता हो। बताया गया कि नरेंद्र नगर में गंगा पथ पर मैरीन ड्राईव का निर्माण कुम्भ के तहत कराया जाएगा। पौड़ी में कूड़ा निस्तारण के लिए कार्यवाही गतिमान है। विद्युत शवदाह गृह चित्रशिला घाट, रानीबाग के लिए आंगणन प्रेषित किया गया है। मसूरी में भी वैंडर जोन बनाया जाएगा।

पुनर्जीवन अभियान के लिए जिलों में नदियां चिन्हित
सिंचाई विभाग की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने प्रत्येक जिले में एक-एक नदी के संरक्षण व संवर्धन के काम में तेजी लाई जाए। बूढ़ाकेदार में आस्था पथ निर्माण, सहसपुर में मालडूग जलाशय निर्माण व कपकोट में सरमूल सौधारा के विकास के लिए आवश्यक प्रक्रियाओं को जल्द पूरा किया जाए। बताया गया कि जनपद देहरादून में रिस्पना, अल्मोड़ा में कोसी, नैनीताल में शिप्रा, उधमसिंहनगर में कल्याणी, रूद्रप्रयाग में क्वाली-सौंदा, मरगांव-सेमल्ता, ढोढा-कोतली, चमोली में मोटूगांव, पौड़ी में लंगेरीगाड़ व सीलगाड़, हरिद्वार में पीलीनदी, उत्तरकाशी में कमलनदी, टिहरी में हेवल नदी, पिथौरागढ़ में गुर्जीगाड़, चम्पावत में गोडी नदी को चिन्हित किया गया है। गैरसैंण में झील निर्माण के लिए कार्य गतिमान है। बाढ़ सुरक्षा के कार्य नाबार्ड के तहत कराए जा रहे हैं। देहरादून, ऋषिकेश, हल्द्वानी, रूड़की, हरिद्वार व भगवानपुर में ड्रेनेज प्लान का प्रोक्योरमेंट रूल्स के तहत क्यू.सी.बी.एस. करा लिया गया है। नैनीताल झील के संरक्षण के लिए 3 करोड़ 17 लाख रूपए की राशि स्वीकृत की जा चुकी है।

इको टूरिज्म पॉलिसी बनाई जाएगी
पर्यटन विभाग की समीक्षा में मुख्यमंत्री ने कहा कि केदारनाथ में गौरीकुण्ड मंदिर के समीप कुण्ड निर्माण में उसके प्राचीन स्वरूप को बरकरार रखते हुए किया जाए। साहसिक खेल निदेशालय की स्थापना जल्द से जल्द की जाए। इको टूरिज्म पॉलिसी बनाई जाए। पर्यटन विभाग में पंजीकृत होम स्टे की मार्केटिंग पर विशेष ध्यान दिए जाने की आवश्यकता है। बताया गया कि प्रत्येक जनपद में एक-एक नए पर्यटन स्थल विकसित करने के लिए मास्टर प्लान के अनुसार डीपीआर बनाई जा रही है। टिहरी के कोटी कालोनी में साहसिक पर्यटन की गतिविधियां की जा रही हैं। पर्यटन विभाग के अंतर्गत अभी तक 1700 होम स्टे पंजीकृत किए जा चुके हैं जबकि 600 जल्द ही हो जाएंगे। पौड़ी में कण्डोलिया के सौंदर्यीकरण और श्रीनगर-पौड़ी, खिर्सू-लैंसडौन को टूरिस्ट सर्किट के रूप में विकसित करने के लिए आवश्यक धनराशि अवमुक्त की गई है।

एमडीडीए और रेलवे लैंड डेवलपमेंट प्राधिकरण के मध्य किया गया एमओयू

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत की उपस्थिति में मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण एवं रेलवे लैंड डेवेलपमेंट प्राधिकरण के मध्य देहरादून रेलवे स्टेशन पुनर्विकास परियोजना हेतु समझौता ज्ञापन हस्तारक्षित किया गया। एमडीडीए उपाध्यक्ष डॉ आशीष कुमार श्रीवास्तव एवं रेलवे लैंड डेवेलपमेंट प्राधिकरण के उपाध्यक्ष वेदप्रकाश ने उक्त समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कहा कि यह एक ऐतिहासिक पल है। यह पहला ऐसा पीपीपी मॉडल है जिसे देश में उदाहरण के तौर पर अपनाया जाएगा। मुख्यमंत्री ने आशा व्यक्त करते हुए कहा कि यह प्रोजेक्ट निर्धारित समय सीमा के अन्दर पूरा कर लिया जाएगा। उत्तराखण्ड में एक अच्छी परम्परा शुरू हो रही है। प्रदेश के विकास के लिए शुरू किए गए विभिन्न प्रोजेक्ट्स अपनी निर्धारित समय सीमा से पूर्व ही पूर्ण किए गए हैं। इससे जहां एक ओर प्रोजेक्ट की उपयोगिता बनी रहती है, वहीं दूसरी ओर प्रोजेक्ट्स में आर्थिक रूप से बचत भी होती है।

एमडीडीए उपाध्यक्ष डॉ आशीष कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि अब देहरादून रेलवे स्टेशन के पुनर्विकास के कार्य को प्रारंभ कर दिया जाएगा। परियोजना के लिए फीजिबिलिटी स्टडी, डिटेलड मास्टर प्लानिंग, अर्बन प्लानिंग व डीपीआर इत्यादि से संबंधित कार्य कर लिया गया है। लगभग 507 करोड़ रूपए की अनुमानित लागत से निर्मित होने वाले इस प्रोजेक्ट को तीन वर्षों में पूर्ण कर लिया जाएगा। रेलवे स्टेशन का निर्माण उत्तराखण्ड की वास्तुकला के आधार पर किया जाएगा। इसमें बजट एवं स्टार होटल, कमर्शियल स्पेस, पार्किंग, किड्स जोन, दिव्यांग लोगों के लिए विशेष प्रोविजन, रेलवे स्टेशन हेतु मेन रोड पर मुख्य द्वार का निर्माण, ओल्ड टेहरी की तर्ज पर क्लॉक टावर का निर्माण, पैदल यात्री प्लाजा, अंडर पास, यातायात के सुगम प्रबंधन एवं यात्रियों की सुविधाओं हेतु रेलवे स्टेशन पर आवागमन हेतु दूसरे छोर (भण्डारी बाग) की ओर से भी द्वार बनाया जाएगा, स्टेशन पर आने एवं निकासी के लिए पृथक व्यवस्था की जायेगी।

पलायन रोकने को हो चुका सर्वे, भविष्य की कार्ययोजना भी तैयार

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने गुरूवार को मुख्यमंत्री आवास में ग्राम्य विकास एवं पलायन आयोग उत्तराखण्ड द्वारा जनपद पिथौरागढ़ का विशलेषण कर पलायन को कम करने से सम्बन्धित रिपोर्ट का विमोचन किया। इस रिपोर्ट में जनपद पिथौरागढ़ के ग्रामीण क्षेत्रों में सामाजिक-आर्थिक विकास को सुदृढ़ करने एवं पलायन के कम करने के उपायों पर सुझाव दिये गये हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि पलायन को रोकने के लिए जिन जनपदों का सर्वे हो चुका है। उन जनपदों के भविष्य की कार्ययोजना भी तैयार किया जाए। पलायन को किस प्रकार नियंत्रित कर रिवर्स माईग्रेशन की संभावनाओं के लिए सुनियोजित आधार तैयार किये जाएं।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि आयोग द्वारा जनपदवार किये जा रहे विशलेषण एवं अर्थव्यवस्था, आजीविका सुधार तथा स्वरोजगार सृजन के अवसरों से सम्बन्धित सुझाव निश्चित रूप से सराहनीय प्रयास है। उन्होंने कहा कि पलायन प्रभावित जनपदों के विकास हेतु विभिन्न विभागों को संयुक्त कार्ययोजना तैयार करने पर भी ध्यान देना होगा। उन्होंने कहा कि पर्वतीय क्षेत्रों से पलायन को रोकने के लिए इन क्षेत्रों को किस प्रकार विकसित किया जा सकता है इस पर भी गहन अध्ययन किया जाए। उन्होंने कहा कि पर्वतीय क्षेत्रों से पलायन को रोकने व रिवर्स माइग्रेशन के लिए विशेषज्ञों व विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्य करने वाले बुद्धिजीवी वर्ग से भी सुझाव लिये जाने चाहिए।

ग्राम्य विकास एवं पलायन आयोग के उपाध्यक्ष एसएस नेगी ने कहा कि सामाजिक-आर्थिक विकास को सुदृढ़ करने व पलायन को कम करने के लिए राज्य के विभिन्न जनपदों के ग्रामीण क्षेत्रों में जाकर विशेषज्ञों व स्थानीय लोगों के साथ विचार विमर्श किया गया। विभिन्न विश्वविद्यालयों व संस्थानों पर्वतीय क्षेत्रों से पलायन पर अंकुश लगाने के लिए विषय विशेषज्ञों व छात्रों के भी सुझाव लिये गये। शासन स्तर पर भी बैठकें आयोजित की गई।

ओबीसी प्रमाण पत्र को हर तीन साल में नवीनीकरण को लेकर समाज कल्याण विभाग को मिले निर्देश

राज्य में ओबीसी (अन्य पिछड़ा वर्ग) के जाति प्रमाण पत्र के हर तीन साल में नवीनीकरण (रिन्यू) कराने की बाध्यता हटाने की तैयारी चल रही है। शासन स्तर पर इस प्रस्ताव पर मंथन शुरू हो गया है। इसके लिए समाज कल्याण विभाग को निर्देश मिले है कि वह प्रस्ताव बनाकर शासन को रिपोर्ट भेजे। मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह ने इसकी पुष्टि की है।
जानकारी के मुताबिक राज्य में पूर्व में ओबीसी जाति प्रमाण पत्र के नवीनीकरण की अवधि छह महीने थी। विजय बहुगुणा सरकार ने इस अवधि को बढ़ाकर तीन साल कर दिया था। मगर, अब जाति प्रमाण पत्र से समय सीमा हटाने की मांग हो रही है।

यह भी है वजह
ओबीसी जाति प्रमाण पत्र की तीन साल की बाध्यता के पीछे की सबसे प्रमुख वजह केंद्र व प्रदेश सरकार की छात्रवृत्ति व अन्य कल्याणकारी योजनाओं के लाभ और सरकार नौकरियों में आवेदन व साक्षात्कार से जुड़ी है। इस वर्ग से जुड़े लोगों का तर्क है कि प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी में जुटे अभ्यर्थी कई बार प्रमाणपत्र का समय पर नवीनीकरण कराना भूल जाते हैं।

इससे कई बार उनका चयन इस आधार पर लटक जाता है कि उन्होंने ओबीसी जाति प्रमाण पत्र को रिन्यू नहीं कराया। इसके अलावा यही समस्या अन्य योजनाओं में आ रही है। इस मामले में मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह का कहना है कि ओबीसी जाति प्रमाण पत्र की तीन साल की बाध्यता समाप्त करने के प्रस्ताव पर विचार किया जा रहा है। इसमें चूंकि क्रीमिलेयर की बात आती है। इसे देखना आवश्यक होता है। इसी वजह से इसमें रेगुलर इंटरवल पर सर्टिफिकेट बनवाने की जरूरत होती है। इस बारे में विचार हो रहा है। हम चाहते हैं कि कोई ऐसा हल निकले कि ओबीसी के अभ्यर्थियों को कम से कम परेशानी हो।

विश्व का पहला मुस्लिम योग साधना शिविर का हुआ शुभारंभ, मुस्लिम समुदाय के पुरूष और महिलाओं ने किया योग

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कोटद्वार वैदिक आश्रम गुरुकुल महाविद्यालय में मुस्लिम योग साधना शिविर का उद्घाटन किया। कोटद्वार के कण्वाश्रम स्थित वैदिक आश्रम गुरुकुल महाविद्यालय के स्वर्ण जयंती समारोह के अवसर पर पांच दिवसीय विश्व का प्रथम मुस्लिम योग साधना शिविर का आयोजन किया गया है। इसके विभिन्न देशों के 500 से अधिक मुस्लिम पुरूष व महिलाएं प्रतिभाग कर रही हैं।

कोटद्वार का नाम कण्वनगरी कोटद्वार रखा जाएगा
मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कहा कि कोटद्वार का नाम कण्वनगरी कोटद्वार रखा जाएगा। उन्होंने कलाल घाटी का नाम कण्वघाटी रखे जाने की मांग पर कोटद्वार नगर निगम को इसका प्रस्ताव भेजने को कहा।

मन, मस्तिष्क और विचारों को ऊंचा उठाता है योग
मुख्यमंत्री ने कहा कि योग हमारे मन, मस्तिष्क और विचारों को इतना ऊंचा उठा देता है कि हम सभी की चिंता करने लगते हैं। योग हमें विश्व कल्याण की ओर ले जाता है। शास्त्रों में लिखा है कि हर वनस्पति में कोई न कोई औषधीय तत्व होता है, हर मनुष्य में कोई ना कोई गुण होता है और हर अक्षर में मंत्र की शक्ति होती है। वनस्पतियों में औषधीय तत्वों को पहचानने की आवश्यकता है।

आज चिकित्सा व स्वास्थ्य से जुड़े संस्थानों में योग शिक्षकों की मांग हो रही है। योग हमारे ऋषि मुनियों की सैंकड़ों वर्षों की साधना का परिणाम है। सर्वे भवन्तु सुखिनः, सर्वे सन्तु निरामया की परिकल्पना भारतीय संस्कृति की देन है। सब को निरोग बनाने का काम भारत देश कर सकता है। प्रधानमंत्री जी के प्रयासों से 21 जून को विश्व योग दिवस के रूप से मनाया जाता है। योग को आज पूरी दुनिया अपना रही है। योग धर्म और पूजा पद्धति से हटकर है। ये सबको निरोग करने तथा सबको जोड़ने का माध्यम है।

देश के आइकोनिक डेस्टीनेशन में है कण्वाश्रम
मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार ने कोटद्वार के कण्वाश्रम को आईकोनिक डेस्टीनेशन में शामिल किया है। इससे यहां का विकास होगा और पर्यटन गतिविधियां बढेंगी। राज्य सरकार भी कण्वाश्रम के विकास के लिए तत्पर है।

आयुष मंत्री डा. हरक सिंह रावत ने मुस्लिम योग शिविर के लिए बधाई देते हुए कहा कि इस योग शिविर के माध्यम से पूरे विश्व में एक संदेश जाएगा। योग को धर्म से जोड़ना गलत है। यह विश्व कल्याण का मार्ग प्रशस्त करता है। योग सभी को जोड़ता है।

सीएम बोले, जिलों के प्रभारी सचिव 45 दिन में एक बार जरूर जाएं आदर्श गांव

सचिवालय में आयोजित बैठक में मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने उत्तराखण्ड में सांसद आदर्श ग्राम योजना की समीक्षा की। सांसद आदर्श ग्राम योजना में चयनित गांवों का आउटकम आधारित थर्ड पार्टी मूल्यांकन कराया जाए। जिलों के प्रभारी सचिव 45 दिन में एक बार आदर्श गांव में जाना सुनिश्चित करें। मुख्य विकास अधिकारी भी इन गांवों में जाकर विकास कार्यों का भौतिक निरीक्षण करें। इसके लिए भ्रमण कैलेण्डर बनाएं। सचिवालय में आदर्श सांसद ग्राम योजना की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने उक्त निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आदर्श गांवों के लोगों के जीवन में परिवर्तन दिखना चाहिए। स्थानीय लोगों को लगना चाहिए कि वहां काम हुए हैं। आदर्श गांवों का तुलनात्मक अध्ययन किया जाए कि पहले क्या स्थिति थी और अब क्या स्थिति है। वहां की खेती, पशुपालन, शिक्षा, स्वास्थ्य, प्रति व्यक्ति आय में क्या गुणात्मक सुधार हुए हैं। आदर्श गांव आत्मनिर्भर होने चाहिए, ग्रामीणों । इन गांवों की मासिक रिपोर्ट संबंधित सांसदों को भेजी जाए। चयनित गांवों को पॉलिथीन मुक्त बनाया जाए। कार्यों की समयावधि निश्चित की जाए।

बैठक में बताया गया कि सांसद आदर्श ग्राम योजना में तीन चरणों में कुल 15 चयनित ग्राम पंचायतों में 762 कार्य लिए गए। इनमें से 565 काम पूर्ण किए जा चुके हैं, 53 प्रगति पर हैं। प्रथम चरण में भगत सिंह कोश्यारी द्वारा चयनित गांव सरपुड़ा (जिला ऊधमसिहनगर) में कुल 70 कार्यों में से 69, मे.ज (से.नि.) भुवन चंद्र खण्डूड़ी द्वारा चयनित देवली भणीग्राम (जिला रूद्रप्रयाग) में 66 कार्यों में 52, डा.रमेश पोखरियाल निशंक द्वारा चयनित गोरधनपुर (जिला हरिद्वार) में 85 में से 80 कार्य, माला राज्य लक्ष्मी शाह द्वारा चयनित बौन (जिला उत्तरकाशी) में 59 में से 57 कार्य, अजय टम्टा द्वारा चयनित सूपी (जिला बागेश्वर) में 22 में से 21 कार्य, महेन्द्र सिंह माहरा द्वारा चयनित रौलमेल (जिला चम्पावत) में 59 में से 55 कार्य और राजबब्बर द्वारा चयनित लामबगड़ (जिला चमोली) में 17 में से 15 कार्य पूर्ण हो चुके हैं।

दूसरे चरण में प्रदीप टम्टा द्वारा चयनित बाछम (जिला बागेश्वर) में 17 में से 17 कार्य, तरूण विजय द्वारा चयनित तेवा (जिला टिहरी गढ़वाल) में 80 में से 59 कार्य, डा.रमेश पोखरियाल निशंक द्वारा चयनित जमालपुर कलान (जिला हरिद्वार) में 55 में से 41 कार्य, भगत सिंह कोश्यारी द्वारा चयनित लोहाली (जिला नैनीताल) में 50 में से 08, माला राज्य लक्ष्मी शाह द्वारा चयनित अटकफार्म (जिला देहरादून) में 39 में से 07 और अजय टम्टा द्वारा चयनित जुम्मा (जिला पिथौरागढ़) में 44 में से 41 कार्य पूर्ण किए जा चुके हैं। इसी प्रकार तृतीय चरण में अजय टम्टा द्वारा चयनित सल्ली (जिला चम्पावत) में 54 में से 44 कार्य पूर्ण किए जा चुके हैं। जबकि डा.रमेश पोखरियाल निशंक द्वारा चयनित खेड़ी सिकोहपुर (जिला हरिद्वार) में 45 कार्य लिए गए हैं।

सांसद आदर्श ग्राम योजना का 11 अक्टूबर 2014 को प्रारम्भ की गई थी। इसका उद्देश्य सांसद द्वारा चयनित ग्राम पंचायत में सभी केंद्र पोषितध्राज्य पोषित योजनाओं के अभिसरण (कन्वर्जेंस) के माध्यम से आधारभूत अवस्थापना सुविधाओं का विकास, सेवाओं की उपलब्धता और ग्राम पंचायत का सामाजिक, आर्थिक व पर्यावरणीय विकास द्वारा चयनित ग्राम पंचायत में विकास के अंतर की पूर्ति करते हुए आदर्श ग्राम बनाना है।

देश व समाज में सकारात्मक परिवर्तन युवाओं से ही सम्भवः राजनाथ

राज्य स्थापना दिवस पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने प्रदेश वासियों को बधाई देते हुए कहा कि उत्तराखण्ड से उनका हमेशा भावनात्मक लगाव रहा है। जब उत्तराखण्ड का निर्माण हुआ था वे ही संयुक्त उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री थे। बड़ी खुशी की बात है कि उत्तराखण्ड तेजी से आगे बढ़ रहा है। राज्य ने राष्ट्रीय स्तर अपनी विशेष पहचान बनाई है। उत्तराखण्ड 20 वें वर्ष में प्रवेश कर गया है। यह ऐसी अवस्था होती है जब सब कुछ कर गुजरने की ललक होती है, साथ ही जोखिम भी उठाने का भाव होता है।

रक्षा मंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड भारत की देवभूमि है। पूरी दुनिया में इसे सम्मान प्राप्त है। प्रधानमंत्री ने कहा है कि यहां का हर गांव सैन्यधाम है। उत्तराखण्ड की शिक्षण संस्थानों मं देश भर के छात्र-छात्राएं पढ़न आते हैं। इसे देश का विद्याधाम भी कहा जा सकता है। यहां के शिक्षण संस्थान लघु भारत का रूप हैं।

रक्षा मंत्री राजनाथ ने कहा कि भारत ही एक ऐसा देश है जहां संस्कृति एक-दूसरे को जोड़ती है। सच्चे मायनों में राष्ट्र की संज्ञा, भारत को ही दी जा सकती है क्योंकि यही एक ऐसा देश है जिसने अपनी सांस्कृतिक पहचान सदियों से बनाए रखी है। यहां की विविधता में एकता अद्भुत है।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने राज्य आंदोलन के शहीदों का स्मरण करते हुए कहा कि सरकार प्रदेश के संतुलित विकास के लिए लगातार प्रयासरत है। इस दौरान उन्होंने विभिन्न घोषणाएं की।
1. आंगनवाडी केंद्रों पर 3 से 6 वर्ष के बच्चों के लिए सप्ताह में 4 दिन दूध, 2 दिन अंडा व केला उपलब्ध होगा।
2. राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के समान ही मुख्यमंत्री राज्य कृषि विकास परियोजना लागू होगी।
3. वृद्धावस्था, विकलांगता, विधवा पेंशन में 200 रुपए की वृद्धि की जाएगी, 1 जनवरी 2020 से लागू होगी।
4. उपनल, पीआरडी कर्मचारियों का मानदेय बढ़ाकर 500 रुपए प्रतिदिन किया जाएगा, यह भी 1 जनवरी 2020 से लागू होगा।
5. इको टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए नीति बनाई जाएगी।
6. सीमांत क्षेत्रों के विकास के लिए सीमांत तहसीलों में मुख्यमंत्री सीमांत क्षेत्र विकास योजना लाई जाएगी। इससे पहाड़ों और दूरस्थ क्षेत्रों से पलायन रुक सकेगा, रोजगार के अवसर पैदा होंगे। इसका सुझाव सैनिक सम्मेलन में प्राप्त हुआ था।
7. कामकाजी महिलाओं के बच्चों की देखभाल के लिए सेलाकुईं व रुद्रपुर में महिला हॉस्टल का निर्माण किया जाएगा।
9. राज्य में पशुओं का बीमा कराये जाने हेतु बीमा धनराशि की गैप फंडिंग की भरपाई राज्य सरकार द्वारा की जाएगी।
10. ग्रामीण क्षेत्रों के लिए सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट योजना बनाई जाएगी।
11. राज्य में दीनदयाल उपाध्याय एकीकृत भूकंप सुरक्षा कार्यक्रम का क्रियान्वयन किया जाएगा।
12. प्राथमिक स्कूलों में बच्चों को सप्ताह में एक दिन फोर्टिफाइट मीठा दूध उपलब्ध कराया जाएगा।
13. सभी जनपदों में आधुनिक विधि से सर्वेक्षण कर भू बंदोबस्त किया जाएगा। पहले पौड़ी गढ़वाल और अल्मोड़ा जिलों में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में किया जाएगा।
14. मिशन इन्द्रधनुष के तहत चिन्हित अति संवेदनशील क्लटरों में स्वास्थ्य से इतर अन्य सुविधाएं भी उपलब्ध कराने के लिए सभी जनपदों में सर्व उत्थान सर्व समृद्धि अभियान चलाया जाएगा।
15. लोक कलाकारों के मानदेय को 400 रूपए से बढ़ाकर 600 रूपए और टीम लीडर का मानदेय 500 से बढ़ाकर 700 रूपए किया जाएगा।

कार्यक्रम में सूचना विभाग द्वारा प्रकाशित विकास पुस्तिका और बीस सूत्री कार्यक्रम की प्रगति रिपोर्ट 2018-19 का विमोचन किया गया।

राज्य में कंटेंट क्रियेशन वर्किंग ग्रुप का गठन जल्दः त्रिवेन्द्र

राज्य स्थापना सप्ताह के तहत मसूरी में आयोजित फिल्म कान्क्लेव में मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने हिन्दी, गढ़वाली एवं कुमांऊनी फिल्मों को अनुदान राशि के रूप में चेक वितरित किये। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने गढ़वाली फिल्म हैलो यूके के निर्माता मनीष वर्मा, बौडिगी गंगा के निर्माता अनिरूद्ध गुप्ता, भुली ए भुली के निर्माता ज्योति खन्ना, कुमाऊंनी फिल्म गोपी भिना की निर्माता मीनाक्षी भट्ट व उत्तराखण्ड में फिल्मायी गई हिन्दी फिल्म साइलेंट हिरोज के निर्माता कमल वीरानी, महेश भट्ट को अनुदान राशि के चेक भेंट किये। मनीष वर्मा के प्रतिनिधि के तौर पर आरके वर्मा और प्रदीप भण्डारी ने चेक प्राप्त किया।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि फिल्म कॉन्क्लेव में जो भी सुझाव प्राप्त हुए हैं, उन पर शीघ्र अमल किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में कंटेंट क्रियेशन वर्किंग ग्रुप का गठन किया जाएगा। फिल्म सिटी स्थापना की दिशा में ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। प्रशिक्षण संस्थान की स्थापना की दिशा में भी विचार किया जा रहा है। राज्य में फिल्म नीति को और अधिक प्रभावी बनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि एक फिल्म डायरेक्टरी का भी प्रकाशन किया जायेगा, जिसमें टैक्नीशियन, कलाकार तथा लोकेशन आदि के सम्बन्ध में जानकारी मिल सकेगी। जिससे फिल्म निर्माताओं को राज्य में उपलब्ध संसाधनों के विषय में जानकारी प्राप्त हो सकेगी।