मुख्यमंत्री ने सरकार के तीन वर्ष पूरे होने पर उपब्धियां बताई

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने राज्य सरकार के तीन वर्ष पूरे होने के अवसर पर सहयोग के लिए प्रदेशवासियों का आभार व्यक्त किया है। अपने संदेश में मुख्यमंत्री ने राज्य आंदोलनकारियों और मातृशक्ति को नमन किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि तीन साल पहले आप सभी के आशीर्वाद से जब हमने सरकार सम्भाली, यहाँ के नीति निर्माण में उत्तराखण्ड राज्य की मूल भावना का अभाव था। हमने आते ही दूरस्थ पर्वतीय क्षेत्रों के विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता पर रखा। हाल ही में गैरसैंण में आयोजित विधानसभा सत्र राज्य के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में लिखा जायेगा। गैरसैंण को उत्तराखण्ड की ग्रीष्मकालीन राजधानी बनाने का निर्णय राज्य आंदोलनकारियों, माताओं-बहनों को समर्पित है।
हमने प्रदेश की महान जनता से कुछ वायदे किए थे। मैं आज पूरे विश्वास के साथ कह सकता हूँ कि हमने इन तीन साल में ही 70 फीसदी वायदे पूरे कर दिए हैं। हम अपने सभी वायदों को पूरा करने के लिए दृढ़ संकल्पित हैं। हम काम में विश्वास करते हैं। हमारी सरकार के ये तीन साल, विकास के तीन साल रहे। हमारा ध्येय वाक्य रहा है, बातें कम -काम ज्यादा।
माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के मार्गदर्शन और केंद्र सरकार के सहयोग से हमारी सरकार के तीन साल में बहुत से ऐसे काम हुए हैं, जो कि पहले मुमकिन नहीं लग रहे थे। डबल इंजन का असर साफ-साफ देखा जा सकता है। केंद्र सरकार द्वारा लगभग एक लाख करोड़ रूपए की विभिन्न परियोजनाएं प्रदेश के लिए स्वीकृत हुई हैं। इनमें बहुत सी योजनाओं पर तेजी से काम भी चल रहा है। इनमें ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना, चारधाम सड़क परियोजना ऑल वेदर रोड़, केदारनाथ धाम पुनर्निर्माण, भारतमाला परियाजना, जमरानी बहुद्देशीय परियोजना, नमामि गंगे, देहरादून स्मार्ट सिटी आदि प्रमुख हैं।
पर्वतीय राज्य की अवधारणा से बने उत्तराखण्ड में पहली बार किसी सरकार ने पलायन को रोकने पर ही नहीं बल्कि रिवर्स पलायन पर सुनियोजित तरीके से काम शुरू किया है। एमएसएमई के केंद्र में पर्वतीय क्षेत्रों को रखा गया है। ग्रामीण विकास और पलायन आयोग का गठन किया गया। सीमांत तहसीलों के लिए मुख्यमंत्री सीमांत क्षेत्र विकास योजना शुरू की है। राजकीय स्कूलों में वर्चुअल क्लासेज शुरू की गई हैं। पर्वतीय क्षेत्रों में डाक्टरों की संख्या पहले से दोगुनी की गई। टेलीमेडिसीन और टेलीरेडियोलोजी भी फायदेमंद साबित हो रही हैं। ग्राम स्तर पर स्वास्थ्य उपकेंद्रों का हैल्थ एंड वैलनैस सेंटर के रूप अग्रेडेशन कर रहे हैं। सभी 670 न्याय पंचायतों में क्लस्टर आधारित एप्रोच पर ग्रोथ सेंटर बनाए जा रहे हैं। इससे ग्रामीण आर्थिकी मजबूत होगी। किसानों और महिला स्वयं सहायता समूहों को ब्याज रहित ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है। होम स्टे की कन्सेप्ट को बहुप्रचारित किया जा रहा है। 13 डिस्ट्रिक्ट-13 डेस्टीनेशन से नए पर्यटन केंद्रों का विकास हो रहा है। जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए 3900 जैविक क्लस्टरों में काम शुरू किया गया है। सौर ऊर्जा और पिरूल ऊर्जा नीति, ग्रामीण युवाओं की आजीविका में सहायक होगी। सड़क, रेल व एयर कनेक्टीवीटी में विस्तार किया जा रहा है। आल वेदर रोड़, भारतमाला परियोजना, ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना गेम चेंजर बनने जा रही हैं। एयर कनेक्टीवीटी पर विशेष जोर दिया गया है। 2022 तक सभी गांवों को सड़क से जोड़ने का लक्ष्य रखा है। सौभाग्य योजना से घर-घर बिजली पहुंचा दी गई है। प्रदेश के 15.09 लाख परिवारां को ‘‘हर घर को नल से जल’’ दिलाने की योजना शुरू की है। तीन वर्षों में ये लक्ष्य हासिल कर लिया जाएगा। जल संरक्षण और जल संवर्धन पर काफी काम शुरू किया गया है। ग्रेविटी वाली पेयजल योजनाओं पर हमारा फोकस है। हाल ही में उत्तराखण्ड वाटर मैनेजमेंट प्रोजेक्ट को भारत सरकार द्वारा सैद्धांतिक सहमति दी गई है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले तीन वर्षों में उत्तराखण्ड ने विभिन्न क्षेत्रों में बेहतर प्रदर्शन किया है। राष्ट्रीय फलक पर उत्तराखण्ड अपनी पहचान बनाने में कामयाब रहा है। तीन वर्षों में मिले पुरस्कार इस बात की पुष्टि करते हैं। हमारी सरकार ने राज्य में निवेश लाने के लिए पूरा होमवर्क करते हुए गम्भीरता से काम किया। राज्य गठन के बाद पहली बार बड़े स्तर पर इन्वेस्टर्स समिट का आयोजन किया गय खुद प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने इसका उद्घाटन किया और स्पिरिचुएल इको जोन की कन्सेप्ट सामने रखी। पर्वतीय क्षेत्रों में निवेश के लिए पर्यटन, आयुष व वेलनेस, आईटी, सौर ऊर्जा सहित सर्विस सेक्टर पर विशेष फोकस किया गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले तीन वर्ष में हमारी सरकार ने राज्य हित को देखते हुए अनेक साहसिक निर्णय लिए हैं। देवस्थानम चारधाम बोर्ड का गठन और ट्रांसफर एक्ट सहित महत्वपूर्ण संस्थागत सुधार किए गए हैं। सुशासन और भ्रष्टाचार पर जीरो टाॅलरेंस हमारी नीति का प्रमुख आधार रहे हैं। हमने भ्रष्टाचाार और माफिया तत्वों को सत्ता के करीब भी नहीं फटकने दिया है। इन तीन वर्षों में राज्य के विकास की न सिर्फ दिशा तय हुई है बल्कि काम भी दिखने लगा है। हमने समाज के हर तबके का भी ध्यान रखा है। विकास का लाभ अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति तक पहुंचाने का ईमानदारी से पूरा प्रयास किया है।
हमारे गांव फिर से समृद्धि के केंद्र बनें, इसके लिए हम दिन-रात काम कर रहे हैं। हमें आप सभी का भी मार्गदर्शन और सहयोग चाहिए। मैं आपको विश्वास दिलाता हूं कि आने वाले दो साल में उत्तराखण्ड में आप गैरसैण भावना को साकार होता देखेंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान में पूरा विश्व कोरोना वायरस से संघर्ष कर रहा है। उत्तराखंड को कोरोना के प्रभाव से मुक्त रखने के लिए हर आवश्यक कदम उठाए गए हैं। कोरोना से घबराने की जरूरत नहीं है, बस सतर्कता बरतें। सरकार द्वारा जारी दिशानिर्देशों का पालन करें।

विपिन कैंथोला के स्वागत में उमड़े भाजपा कार्यकर्ता

भारतीय जनता पार्टी कोटद्वार मंडल के कार्यकर्ताओं ने विपिन कैंथोला को प्रदेश प्रवक्ता बनाये जाने और उनके प्रथम बार कोटद्वार आने पर स्वागत किया। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने कहा कि अब कोटद्वार का प्रतिनिधित्व भाजपा प्रदेश संगठन में भी होगा।
स्वागत कार्यक्रम में गौ सेवा आयोग के उपाध्यक्ष राजेंद्र अंथवाल ने कहा कि विपिन कैंथोला के प्रदेश प्रवक्ता बनने पर सभी कार्यकर्ता खुद को गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं। भाजपा नगर अध्यक्ष सुनील गोयल ने कहा कि विपिन कैंथोला के प्रदेश प्रवक्ता बनने से सभी कार्यकर्ताओं को सम्मान मिला है इसके लिए कार्यकर्ताओं ने प्रदेश नेतृत्व का आभार भी जताया। प्रदेश प्रवक्ता बनाये जाने विपिन कैंथोला ने कहा कि संगठन ने जो विश्वास उन पर जताया है, वह उस पर खरा उतरने का प्रयास करेंगे। उन्होंने कहा कि संगठन की हर कार्यकर्ता पर नजर है। जो अच्छा काम कर रहा है यह न सोचे कि उसे दायित्व नही मिला। समय आने पर कल्पना से अधिक भाजपा संगठन ही कार्यकर्ता को सम्मान देता है। इस दौरान उन्होंने सभी का आभार जताते हुए कहा कि केन्द्र और राज्य सरकार की योजनाओं का अधिक से अधिक लोगों को लाभ मिले, यह भाजपा कार्यकर्ता का दायित्व है। इसके लिए सभी को अपने स्तर से प्रयास करने चाहिये।
इस अवसर पर जिला मंत्री मंजू जखमोला, नगर मंडल उपाध्यक्ष पंकज भाटिया, धर्मवीर गुसाईं, मनोज बिष्ट, अभिलाषा भारद्वाज, अनिता आर्य, लता बलूनी, पूर्व नगरपालिका अध्यक्ष शशी नैनवाल, मुन्ना लाल मिश्रा, सेवक राम, देवेंद्र कैंथोला, सुरेंद्र बिजलवान, अंकित शर्मा, अमिताभ अग्रवाल, कुलदीप रावत, पार्षद सौरभ नौडियाल आदि कार्यकर्ता बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

कुशल कार्यशैली से कैंथोला ने पाया मुकाम, बने प्रदेश प्रवक्ता

भारतीय जनता पार्टी ने मीडिया से संबंधित अहम दायित्वो की घोषणा की है। जिनमे प्रदेश की नई टीम में भाजपा प्रदेश प्रवक्ता जैसे अहम पद पर युवा नेता बिपिन कैंथोला को जिम्मेदारी दी गईं। बताते चले कि बिपिन कैंथोला ने अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से राजनीतिक पारी की शुरुआत की। कई जिम्मेदारी का निर्वहन करते हुए उन्होंने युवा मोर्चा में जिले से लेकर प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर पर कार्य किया। युवा मोर्चा राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य और जम्मू कश्मीर जैसे संवेदनशील प्रदेश में सह प्रभारी बनकर बिपिन कैंथोला ने अपने कुशल रणनीति का परिचय दिया।

वही भाजपा के राष्ट्रीय मीडिया समन्यवक व राज्यसभा सांसद अनिल बलूनी के साथ लंबे समय से जुड़े हुए है। उत्तराखंड में अनिल बलूनी के बेहद करीबीयो में बिपिन की गिनती होती है। ऐसा देखा जाता है कि बलूनी की गैरमौजूदगी में उनके जनहित कार्यो में सक्रिय रहते हैं।

उत्तराखंड में जश्न का माहौल, मुख्यमंत्री के कार्यो की हो रही प्रशंसा

गैरसैंण को ग्रीष्मकालीन राजधानी घोषित करने के बाद मुख्यमंत्री ने एक ओर मास्टर स्ट्रोक से विपक्ष को धराशायी कर दिया। सरकार ने सत्र को आगे बढ़ाते हुए भराड़ीसैंण में 26 मार्च को बजट पास करवाने का निर्णय लिया है।
कार्य मंत्रणा समिति की बैठक में सात मार्च तक सदन को जारी रखने का फैसला लिया गया, लेकिन इस दौरान बजट पर सामान्य चर्चा सात मार्च को ही होगी। बजट पास कराने के लिए इसी सत्र में सदन 25 से 27 मार्च तक भराड़ीसैंण में ही चलेगा। 25 मार्च को विभागों के बजट पर चर्चा होगी। विपक्ष के कटौती प्रस्ताव इसी दिन स्वीकार किए जाएंगे। 26 मार्च को विभागों के बजट पर चर्चा होने के बाद उन्हें स्वीकृत किया जाएगा।
इससे पहले कार्यमंत्रणा समिति ने सात मार्च तक बजट पारित करने का फैसला किया था। इस पर विपक्ष ने खासा हो हल्ला मचाया था और बजट सत्र बढ़ाने की मांग की थी। इसके बाद इस पर भी विचार हुआ कि होली के बाद दो दिन का सत्र देहरादून में आयोजित कर लिया जाए। लेकिन इसमें तकनीकी अड़चन रही। सरकार बजट पास कराए बिना सत्र को समाप्त नहीं कर सकती थी। देहरादून में बजट पास कराने का मतलब होता कि सरकार को भराड़ीसैंण का सत्र समाप्त करना पड़ता और देहरादून में अलग से सत्र आयोजित करना पड़ता। कार्य संचालन नियमावली में स्थान और समय दोनों को लेकर सत्र की घोषणा की व्यवस्था है।

भराड़ीसैंण में जश्न का माहौल
मौसम की आंखमिचैली के बीच सरकार पर ग्रीष्मकालीन राजधानी का जश्न हावी रहा। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के साथ विधानसभा अध्यक्ष प्रेम चंद अग्रवाल समेत भाजपा विधायकों ने जमकर गुलाल खेला। ढोल व दमाऊ की थाप पर जमकर नाच किया। इस दौरान स्थानीय लोग बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। वहीं, गैरसैंण के आसपास की महिलाओं ने झोड़ा चांचरी नृत्य से अपनी खुशी का इजहार किया। तो विधायकों ने स्थानीय लोगों के साथ ढोल की थाप पर पांव थिरकाए। इन सब से दूर रहे विपक्ष ने सदन में प्रश्न काल नहीं चलने दिया और सरकार को नियमों व परंपराओं में बांधे रखने की कोशिश की।
मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने बुधवार देर शाम ग्रीष्मकालीन राजधानी की घोषणा की थी, जिसका असर पूरे उत्तराखंड में देखने को मिल रहा है। आंदोलनकारियों की गैर मौजूदगी में जगह-जगह चेकिंग से भी लोगों को रियायत मिली। भराड़ीसैंण के विधानमंडल भवन के सामने ढोल दमाऊ की थाप के बीच जश्न का माहौल बन गया। गैरसैंण के आसपास गांव गवाड़ तल्ला, सिलंगी, सिमटी समेत अन्य गांवों से आई महिलाएं जश्न में शामिल हुई।
मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत यहां पहुंचे तो जोश और उत्साह बढ़ गया। महिलाओं ने मुख्यमंत्री व भाजपा विधायकों का स्वागत किया। विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल, प्रदेश अध्यक्ष बंशीधर भगत का भी इसी तरह स्वागत हुआ। उत्साह का आलम ये रहा कि नेता फूल मालाओं से लदे सदन में पहुंच गए।
इसके उलट विपक्ष खामोश, जश्न से दूर रहते हुए बैकफुट पर दिखाई दिया।

सत्ता पक्ष के सदस्यों ने मेजें थपथपा कर किया सम्मान
सत्र शुरू होने के कुछ देर बाद नेता सदन त्रिवेंद्र सिंह रावत सदन में पहुंचे तो सत्ता पक्ष के विधायकों ने मेजें थपथपा कर उनका सम्मान किया। सामान्य रूप से नेता सदन के पहुंचने को सत्ता पक्ष के विधायक खामोशी से स्वीकार करते रहे हैं। मुख्यमंत्री भी कुछ समय तक ही सदन में रहे।

जनभावनाओं का मुख्यमंत्री ने किया सम्मान, गैरसैंण ग्रीष्मकालीन राजधानी घोषित

उत्तराखंड बजट सत्र के दौरान मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने एक बड़ी घोषणा की। लंबे समय से चले आ रहे कयासों के बीच मुख्यमंत्री ने गैरसैंण को उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी घोषित कर दिया।
मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने एक ही मास्टर स्ट्रोक से विपक्ष को चारो खाने चित कर दिया। इस घोषणा के साथ ही प्रदेश में अब दो राजधानियां हो जाएंगी।
मुख्यमंत्री के इस कार्ड की भनक सरकार ने भराड़ीसैंण में पहुंचे विपक्ष को और अन्य आंदोलनकारी संगठनों तक को नहीं लगने दी। बीते दिनों ही कैबिनेट में इस पर चर्चा हुई थी, लेकिन मंत्रियों को साफ हिदायत दे दी गई थी कि किसी को इसकी भनक नहीं लगने दी जाए। सदन में घोषणा होने के साथ ही गैरसैंण में जश्न का माहौल शुरू हो गया। सत्ता पक्ष के विधायक लोगों से फूल मालाएं स्वीकार करते हुए दिखाई दिए।
वहीं, गैरसैंण को ग्रीष्मकालीन राजधानी बनाने का भाजपा का यह चुनावी संकल्प था। उसने चुनाव संकल्प पत्र में इस मुद्दे को शामिल किया था। आम तौर पर सत्तारूढ़ दल के लिए चैथा साल चुनावी घोषणाओं को पूरा करने का साल होता है। प्रदेश में भाजपा सरकार तीन साल पूरे होने जा रहे हैं। इससे पहले ही सरकार ने यह एतिहासिक फैसला लिया है।
उत्तराखंड में राजधानी का मुद्दा जनभावनाओं से जुड़ा है। राज्य गठन के बाद से ही प्रदेश में पहाड़ की राजधानी पहाड़ में बनाए जाने को लेकर आवाज उठती रही हैं। राज्य आंदोलन के समय से ही गैरसैंण को जनाकांक्षाओं की राजधानी का प्रतीक माना गया है। यही वजह है कि कांग्रेस और भाजपा की सरकारें गैरसैंण को खारिज नहीं कर पाई।
वहीं, पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने जब गैरसैंण में विधानमंडल भवन बनाया तब उन पर भी राजधानी घोषित करने का दबाव बना था। लेकिन उन्होंने घोषणा नहीं की। राजनीतिक आंदोलन से जुड़ा एक वर्ग गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाए जाने की वकालत करता है।

प्रदेश की 70 फीसदी जनता गैरसैंण में स्थायी राजधानी चाहती है। राज्य गठन से पहले यूपी की मुलायम सरकार की गठित कौशिक समिति ने अपनी रिपोर्ट में यह कहा था। वही उक्रांद ने 27 साल पहले गैरसैंण में राजधानी का शिलान्यास किया था।
बजट सत्र शुरू होने से पहले ही बदरीनाथ और कर्णप्रयाग के विधायकों ने गैरसैंण को ग्रीष्मकालीन राजधानी बनाए जाने के संकेत दे दिए थे। उन्होंने मुख्यमंत्री से अनुरोध किया था कि पार्टी ने अपने संकल्प पत्र में इस संकल्प को शामिल किया है। सरकार गठन के तीन साल हो चुके हैं। अब घोषणा का समय आ गया है। मुख्यमंत्री ने उन्हें आश्वस्त किया था।
मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि भाजपा ने अपने संकल्प पत्र में गैरसैंण को ग्रीष्मकालीन राजधानी घोषित करने का संकल्प लिया था। इस संकल्प को आज पूरा कर दिया गया है। समय के साथ गैरसैंण में बुनियादी ढांचे का विकास होगा और ये राजधानी के रूप में विकसित होगी।
बदरीनाथ विधायक महेंद्र भट्ट ने कहा कि मुख्यमंत्री और भाजपा संगठन का आभारी हूं कि उन्होंने पहाड़ की जनाकांक्षाओं के प्रतीक गैरसैंण को ग्रीष्मकालीन राजधानी घोषित किया है। इससे पहाड़ के विकास को मजबूती मिलेगी।
उधर, गैरसैंण को ग्रीष्मकालीन राजधानी बनाने पर भाजपाइयों ने आतिशबाजी कर जश्न मनाया। बुधवार को भाजपा महानगर कार्यालय में मेयर सुनील उनियाल गामा, वरिष्ठ राज्य आंदोलनकारी सुशीला बलूनी समेत पार्टी कार्यकर्ताओं ने एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर खुशी मनाई।
वरिष्ठ राज्य आंदोलनकारी सुशीला बलूनी ने कहा कि सरकार का निर्णय बेहद सराहनीय है। सरकार का यह निर्णय शहीद आंदोलनकारियों के लिए सच्ची श्रद्धांजलि है। मेयर सुनील उनियाल गामा ने कहा कि मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने गैरसैंण को ग्रीष्मकालीन राजधानी घोषित कर प्रदेशवासियों को बड़ा तोहफा दिया है। भाजपा ने इसे अपने चुनावी घोषणापत्र में भी शामिल किया था। जिसे आज पूरा कर लिया है।

त्रिवेन्द्र के बजट में राजस्व बढ़ाने का संकल्प दिखा

उत्तराखंड में करीब 53 हजार करोड़ से अधिक का बजट पेश करते हुए मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने प्रदेश में विकास की बुनियाद को मजबूत करने और रोजगार को बढ़ाने का इरादा जताया। सरकार का ध्यान कुंभ मेले के आयोजन पर भी गया। 2021 में होने वाले हरिद्वार महाकुंभ को प्रदेश सरकार भव्य और ग्रीन कुंभ परिकल्पना के आधार पर आयोजित करेगी। इस परिकल्पना को पंख देने के लिए सरकार ने बजट में 1205 करोड़ रुपये खर्च करना तय किया है। महाकुंभ में श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए 450 करोड़ के स्थायी और एक हजार रुपये के अस्थायी कार्य किए जाएंगे। सरकार की कोशिश है कि महाकुंभ में आने वाले श्रद्धालु चारधाम की यात्रा भी कर पाए। इसके लिए चारधाम और ऑलवेदर रोड को महाकुंभ से पहले पूरा करने का सरकार ने लक्ष्य निर्धारित किया है। कुंभ के लिए सरकार अलग से सुरक्षा व्यवस्था के तहत 60.12 करोड़ रुपये भी खर्च करेगी।

विकासपरक बजट पेश करते हुए बतौर वित्त मंत्री सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने एक ही मास्टर स्ट्रोक से विपक्ष को चारो खाने चित कर दिया। मुख्यमंत्री ने बजट पेश करने के तुरंत बाद सदन में गैरसैंण को ग्रीष्मकालीन राजधानी घोषित कर दिया। इसके साथ ही अब प्रदेश में दो राजधानी होंगी।
बजट में सरकार ने बेहतर रोड कनेक्टिविटी को प्राथमिकता दी है। 2020-21 में सड़कों और पुलों की मरम्मत के लिए 300 करोड़ रुपये रखे हैं। पिछले बजट में कुल 180 करोड़ का प्रावधान था। सीमा के 150 से अधिक जनसंख्या वाले गांवों को सड़कों से जोड़ा जाएगा। मार्च 2020 तक 67 गांवों को ग्रामीण मोटरमार्गों से जोड़ा जाएगा। बुनियादी ढांचे पर जोर देते हुए लोक निर्माण विभाग के लिए 2055 करोड़ का बजट रखा है। सड़क निर्माण में तेजी लाने के लिए प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना में 1072 करोड़ की व्यवस्था की है। ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेलवे लाइन के लिए सरकार ने 70 करोड़ रखे हैं।
सरकार रोजगार के मुद्दे पर भी संभली है। मुख्यमंत्री ने उत्तराखंड युवा आयोग के गठन की घोषणा की। सहायक अध्यापक एलटी संवर्ग और प्रवक्ता संवर्ग में 3063 पदों 2020-21 में तैनाती की जाएगी। महिला सशक्तीकरण एवं बाल विभाग में 1224 नई भर्ती होंगी। इसके साथ ही नया हुनर सीखने वालों के लिए एक नई योजना मुख्यमंत्री शिक्षुता योजना शुरू करने का एलान बजट में किया गया। प्रदेश में 2022 तक सभी डिग्री कालेजों के पास अपना भवन होगा। सरकार ने वित्तीय वर्ष 2020-21 के लिए 78 करोड़ का बजट प्रस्तावित किया है। रूसा योजना एवं राज्य योजना के तहत यह बजट प्रस्तावित किया है।

प्रदेश के सात लाख से ज्यादा लोगों को 1165 करोड़ की योजनाओं से पीने का साफ पानी मिल सकेगा। जल जीवन मिशन, अर्द्धनगरीय क्षेत्रों के लिए पेयजल कार्यक्रम और नाबार्ड पोषित योजनाओं के लिए बजट प्रावधान किए गए हैं। रोडवेज बसों में सफर पहले की तुलना में और अधिक सुहाना होगा। इसके लिए वित्तीय वर्ष 2020-21 में 110 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। बजट में सरकार की ओर से परिवहन सेवाओं को बेहतर बनाने के साथ ही परिवहन निगम को वित्तीय संकट से उबारने के लिए कई कदम उठाए गए हैं। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, सांसद, विधायक, स्कूली छात्राएं, मान्यता प्राप्त पत्रकार, दिव्यांग परिवहन निगम बसों में मुफ्त यात्रा कर सकें, इसके लिए बजट में 24 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
जौलीग्रांट एयरपोर्ट पर यात्रियों को विश्वस्तरीय सुविधाएं मिलें। इसके लिए वित्तीय वर्ष 2020-21 में 295 करोड़ रुपये के बजट का प्रावधान किया गया है। सरकार की ओर से बजट जारी होने के साथ ही भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू की जाएगी ताकि एयरपोर्ट का विस्तार किया जा सके। बजट में देहरादून-श्रीनगर-टिहरी, हल्द्वानी-अल्मोड़ा- पिथौरागढ़ध्धारचूला के लिए हेली सेवाएं शुरू करने का प्रावधान किया गया है।
संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम के प्रोजेक्ट सिक्योर हिमालय के तहत गंगोत्री नेशनल पार्क में देश का पहला ‘स्नो लेपर्ड कंजर्वेशन सेंटर’ का निर्माण किया जाएगा। वित्तीय वर्ष 2020-21 में कैंपा योजना के तहत 215 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। बजट वृक्षारोपण व वर्षा जल संरक्षण योजनाओं के लिए होगा। इसके अलावा पर्यावरण निदेशालय के गठन व विशेषज्ञों की नियुक्ति के लिए 12.93 करोड़ रुपये के बजट का प्रावधान किया है।

प्रदेश सरकार की ओर से निराश्रित वृद्धजनों को आरामदायक जीवन देने के लिए वृद्धाश्रम खोले जाएंगे। वरिष्ठ नागरिकों के कल्याण के लिए राष्ट्रीय कार्ययोजना के तहत सरकार ने अलग से बजट का प्राविधान किया है। इस बजट से प्रत्येक जिले में वृद्धाश्रम तैयार किए जाएंगे। यहां वृद्ध लोगों के रहने, खाने-पीने व मनोरंजन की समुचित व्यवस्थाएं की जाएंगी। सरकार ने वित्तीय वर्ष 2020-21 में हर जरूरतमंद वृद्ध, दिव्यांग, विधवा, किसान, निराश्रित परित्यक्त महिलाओं को पेंशन का लाभ पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। इसमें 4 लाख 75 हजार वृद्धजनों, 78 हजार दिव्यांगों, 1 लाख 78 हजार विधवा, 30 हजार किसानों और 5500 निराश्रित परित्यक्त महिलाओं को पेंशन से जोड़ा जाएगा। इसके लिए 1048 करोड़ रुपये की धनराशि बजट में प्रस्तावित की है।प्रदेश सरकार ने बजट में गन्ना किसानों की होली खुशनुमा करने का प्रयास किया है। किसानों को बकाया गन्ना भुगतान के लिए बजट में 240 करोड़ रुपये का प्रस्ताव किया गया है। इसके साथ ही सरकारी, सहकारी और निजी चीनी मिलों को विभिन्न तरह के लोन की सुविधा भी दी गई है। ताकि, किसानों को बकाया और वर्तमान भुगतान त्वरित किया जा सके।
प्रदेश सरकार ने वित्तीय वर्ष 2020-21 में स्मार्ट सिटी के लिए 123 करोड़ रुपये का बजट रखा है। जिससे स्मार्ट सिटी के काम होंगे। वहीं अब तक देहरादून स्मार्ट सिटी लि. को लेकर एक हजार करोड़ से अधिक के वर्कआर्डर जारी हो चुके हैं। अब स्मार्ट सिटी का दायरा 10 से बढ़कर 100 वार्डों तक हो गया है।

उत्तराखंड में फल-सब्जी पर नहीं लगेगा मंडी शुल्क

उत्तराखंड में त्रिवेंद्र सरकार ने किसानों की आय दोगुनी करने के लिए केंद्र के फार्मूले को अपनाया है। प्रदेश में लागू उत्तराखंड कृषि उत्पादन मंडी विकास एवं विनियमन अधिनियम को खत्म कर इसकी जगह केंद्र का मॉडल एक्ट (कृषि उपज एवं पशुधन विपणन अधिनियम) को लागू किया है। मंत्रिमंडल ने इसकी मंजूरी दे दी है।
केंद्र ने किसानों की आय बढ़ानेे के लिए कृषि उत्पादों का व्यापार खुला करने के लिए मॉडल एक्ट को लागू किया है। अब किसानों को मंडियों में कृषि उत्पाद लाने की अनिवार्यता नहीं रहेगी। किसान अपने उत्पाद को उचित दामों पर मंडी से बाहर कहीं भी बेच सकेंगे। मंडी समिति की ओर से फल-सब्जी व अन्य कृषि उत्पादों के कारोबार पर शुल्क नहीं लिया जाएगा।
वर्तमान में लागू उत्तराखंड कृषि उत्पादन मंडी विकास एवं विनियमन अधिनियम (एपीएमसी) में यह व्यवस्था है कि मंडी समिति के अधीन आने वाले क्षेत्रों में फल-सब्जी के कारोबार पर एक प्रतिशत मंडी शुल्क लिया जाता है। लाइसेंस के बिना कोई भी आढ़ती कृषि उत्पादों का कारोबार नहीं कर सकता है। मॉडल एक्ट में बिना लाइसेंस के भी आढ़ती किसानों का उत्पाद खरीद सकते हैं।

कांट्रेक्ट फार्मिंग से बंजर होने से बचेगी कृषि भूमि
उत्तराखंड के किसान अब कांट्रेक्ट फार्मिंग (अनुबंध खेती) कर सकेंगे। मंत्रिमंडल ने कांट्रेक्ट फार्मिंग एक्ट 2018 को राज्य में लागू करने की मंजूरी दे दी है। इससे कृषि क्षेत्र में काम करने वाली कंपनियां अपनी जरूरत के अनुसार किसानों से खेती के लिए कांट्रेक्ट कर सकते हैं।


कर्नाटक और मैसूर की तर्ज पर राज्य में कांट्रेक्ट फार्मिंग को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने एक्ट बनाया है। इस एक्ट के आधार पर प्रदेश में अनुबंध खेती की मंजूरी दे दी है। इस एक्ट के लागू होने से जिन किसानों के काफी कृषि भूमि है और वे बुढ़ापे में खेेतीबाड़ी नहीं कर सकते हैं। ऐसे किसान अपनी कृषि भूमि को कांट्रेक्ट फार्मिंग के लिए कंपनी को लीज पर दे सकते हैं। किसान के हितों को सुरक्षित करने के लिए सरकार ने एक्ट में व्यवस्था की है। जिससे लीज पर दी जाने वाली जमीन को न तो ट्रांसफर किया जाएगा और न ही उस पर कोई कब्जा कर सकता है।

राज्य में तीन लाख हेक्टेयर भूमि बंजर
कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार राज्य में करीब सात लाख हेक्टेयर भूमि पर खेती होती है। जिसमें रबी और खरीफ फसलें उगाई जाती है। लगभग तीन लाख हेक्टेयर कृषि भूमि बंजर हो चुकी है। जंगली जानवरों और बंदरों की समस्या, सिंचाई का अभाव से किसान खेती छोड़ रहे हैं। राज्य गठन के बाद प्रदेश में लगभग 17 प्रतिशत कृषि योग्य भूमि का क्षेत्रफल कम हुआ है।

त्रिवेन्द्र सरकार ने दी राहत, अब सीधे करा सकेंगे प्राइवेट अस्पताल में इलाज

उत्तराखंड सरकार ने राज्य अटल आयुष्मान योजना का दायरा बढ़ा दिया है। प्रदेश के चार लाख सरकारी कर्मचारियों को इस योजना के अधीन लाया गया है। मामूली शुल्क देकर सरकार कर्मचारी, पेंशनर और उनके परिजन असीमित धनराशि के मेडिकल कवर के दायरे में आएंगे। यही नहीं, अन्य गोल्डन कार्ड धारक भी देश में कहीं भी पांच लाख रुपये तक का निशुल्क कैशलेस इलाज करा सकेंगे।
मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की अध्यक्षता में शुक्रवार को मंत्रिमंडल की बैठक में 14 प्रस्तावों को मंजूरी मिली। सूत्रों के अनुसार आयुष्मान योजना के तहत सरकारी अस्पताल से रेफर करवाने की व्यवस्था में व्यापक बदलाव किया गया है। अब मरीज सरकारी और गैर सरकारी मेडिकल कॉलेजों के साथ एनएबीएच (नेशनल एक्रिडेशन बोर्ड फॉर हास्पिटल्स एंड हेल्थ केयर) से मान्य अस्पतालों में सीधे जाकर इलाज करवा सकेगा। अटल आयुष्मान उत्तराखंड योजना के लिए कर्मचारियों के अंश को एक समान कर दिया गया है।
ओपीडी का नकद भुगतान, आईपीडी कैशलेस
त्रिवेंद्र सरकार ने प्रदेश के तीन लाख कर्मचारियों, पेंशनरों और उनके आश्रितों को अटल आयुष्मान योजना अनलिमिटेड कैशलेस इलाज की सुविधा दे दी है। ओपीडी इलाज के खर्च का कर्मचारियों को नकद भुगतान किया जाएगा। वहीं आईपीडी इलाज में कैशलेस की सुविधा मिलेगी। एक अप्रैल से कर्मचारियों के लिए यह स्कीम शुरू होगी। कर्मचारियों, पेंशनरों व उनके आश्रितों के लिए 15 लाख गोल्डन कार्ड बनाए जाएंगे।
अटल आयुष्मान योजना में अनलिमिटेड कैशलेस इलाज के लिए कर्मचारियों व पेंशनरों को प्रतिमाह के हिसाब से प्रीमियम देना होगा। इसके लिए सरकार ने पे स्केल के आधार पर केंद्रीय हेल्थ स्कीम (सीजीएचएस) की तरह प्रीमियम की दरें निर्धारित की है। पेंशनरों के लिए वन टाइम प्रीमियम जमा करने का विकल्प भी दिया है।
कर्मचारियों व पेंशनरों के गोल्डन कार्ड आल इंडिया पोर्टेबिलिटी होने से देश के किसी भी पंजीकृत अस्पताल में इलाज की सुविधा मिलेगी। इसके लिए रेफर की शर्त नहीं रहेगी। ओपीडी में इलाज कराने के लिए कर्मचारियों को पैसा देना पड़ेगा। मेडिकल बिल विभाग से मंजूर कराने के बाद राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण की ओर से कर्मचारियों को भुगतान किया जाएगा।
निगम और बोर्ड कर्मचारियों को भी मिलेगा लाभ
सरकारी क्षेत्र के निगम व बोर्डों में कार्यरत 40 हजार से अधिक कर्मचारियों को भी कैशलेस इलाज की सुविधा मिलेगी। पहले निगम व बोर्ड को प्रस्ताव पारित कर सरकार को भेजना होगा। लंबे समय से निगम के कर्मचारी राजकीय सेवा के कर्मचारियों की तर्ज पर कैशलेस की सुविधा देने की मांग कर रहे थे।
मेडिकल कालेज और एनएएचबी मान्य प्राप्त अस्पतालों में रेफर व्यवस्था खत्म
केंद्र व राज्य सरकार की अटल आयुष्मान योजना को मर्ज किया है। प्रदेश के सरकारी व प्राइवेट मेडिकल कालेजों के साथ राष्ट्रीय हेल्थ एवं केयर बोर्ड से मान्यता प्राप्त अस्पतालों में गोल्डन कार्ड मरीज सीधे इलाज करा सकते हैं। इसके लिए उन्हें रेफर होने की शर्त नहीं रहेगी। प्रदेश के गोल्डन कार्ड केंद्र योजना से जुड़ जाने से देश के किसी भी पंजीकृत अस्पताल में पांच लाख तक सीमा तक इलाज करा सकेंगे।

श्रेणी के अनुसार कर्मचारियों और पेंशनरों का प्रतिमाह अशंदान
स्तर अंशदान रुपये में
1 से 5 स्तर (चतुर्थ श्रेणी) 250
6 स्तर (तृतीय श्रेणी) 450
6 से 11 श्रेणी(द्वितीय श्रेणी) 650
12 से श्रेणी से ऊपर (अधिकारी) 1000

जनपदों की कम उपलब्धि पर ठोस कार्य योजना बनाने के दिये निर्देश

सचिवालय सभागार में पंचायती राज मंत्री अरविन्द पाण्डेय की अध्यक्षता में पंचायती राज विभाग की समीक्षा बैठक संपन्न हुई। बैठक में अधिकारियों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि वित्तीय वर्ष की समाप्ति को देखते हुए जिन जनपदों की उपलब्धि कम है वह ठोस रणनीति के तहत तेज गति से कार्य कर लक्ष्य को पूरा करें। उन्होंने कहा कि कार्यों के प्रति लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि यदि लक्ष्य पूरा करने में कोई समस्या हो तो उच्चाधिकारियों अथवा उनके संज्ञान में लाये ताकि उसका निराकरण किया जा सके। उन्होंने सभी अधिकारियों से 15 मार्च तक लक्ष्य पूरा करने के निर्देश दिए तथा 15 मार्च को पुनः समीक्षा बैठक बुलाने के निर्देश सचिव पंचायती राज हरबंस सिंह चुघ को दिए तथा अधिकारियों से पूर्ण प्रगति के साथ आगामी बैठक में स्वयं प्रतिभाग करने के निर्देश दिए।
उन्हांने पंचायती विभाग की जनपदों में अवस्थित संपत्तियों का ब्यौरा भी एक सप्ताह में निदेशालय को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए तथा सम्पत्ति से होने वाली आय का भी ब्यौरा भेजने के निर्देश दिए। उनका कहना था कि पंचायती विभाग की लाखों की संपत्ति जनपदों में है किन्तु उसकी विभाग द्वारा पर्याप्त देखरेख के अभाव में अपेक्षाकृत कम आय हो रही है।
उन्होंने ग्राम्य पंचायती के सुदृढ़ीकरण हेतु ग्राम पंचायत अधिकारियों के पद आवश्यकतानुसार बढ़ाने के लिए नियमावली तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने निदेशक एच.सी.सेमवाल को निर्देशित किया कि नियमावली में पहाड़ों में भौगोलिक परिस्थिति के अनुरूप पदों को आवश्यकतानुसार बढ़ाने तथा मैदानी क्षेत्रों में जनसंख्या के आधार पर गा्रम पंचायत राज अधिकारी के पदों को बढ़ाने के प्रस्ताव को नियमावली में लाया जाए। उन्होंने प्रशिक्षण की आवश्यकता पर बल देते हुए प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाने के निर्देश दिए तथा गांव पंचायतों में चल रहे विभिन्न विभागों के निर्माण कार्यों में दोहरापन (डुप्लीकेसी) रोकने के लिए पंचायती राज विभाग द्वारा अनापत्ति प्रमाण पत्र लेने की संभावनाओं पर भी विस्तार से चर्चा की।
उन्होंने जिला पंचायत अधिकारियों से अपने-अपने क्षेत्र के अंतर्गत ग्राम पंचायत डेवलपमेंट प्लान तथा लोकल गवरमेंट निर्देशिनी समयबद्व कार्यक्रम में तैयार करने के निर्देश दिए। पंचायती राज मंत्री ने ग्राम पंचायत में संचालित कार्यक्रमों में शत् प्रतिशत भुगतान डी.बी.टी. प्रणाली से करने के निर्देश दिए। कैबिनेट मंत्री द्वारा पंचायत भवन के निर्माण, मरम्मत, कॉमन सर्विस सेंटर की वित्तीय एवं भौतिक समीक्षा की गई। उन्होंने 14वें वित्त आयोग के अंतर्गत वर्ष 2017-18 से अबतक वर्षवार वित्तीय एवं भौतिक प्रगति की समीक्षा जनपदों के जिला पंचायत अधिकारियों से जनपदवार की। उन्होंने जनपदों में अबतक प्रिआ सॉफ्ट प्रणाली से की जा रही ग्राम पंचायतवार कार्यवाही की समीक्षा भी की। मंत्री ने सी.एम. डैशबोर्ड एवं सी.एम. हैल्पलाईन की अद्यतन प्रगति की भी जनपदवार समीक्षा की।

भाजपा की टीम में विधानसभा चुनाव की दिखी झलक

भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बंशीधर भगत ने अपनी टीम का एलान कर दिया है। भगत की टीम में उनके और प्रदेश संगठन महामंत्री समेत कुल 28 पदाधिकारी हैं। उनकी टीम में 26 नए पदाधिकारी शामिल हुए हैं। इनमें आठ प्रदेश उपाध्यक्ष, दो प्रदेश महामंत्री, एक कोषाध्यक्ष, आठ प्रदेश मंत्री, एक कार्यालय सचिव और छह प्रदेश प्रवक्ता शामिल हैं। तीन विधायकों को भगत की टीम में जगह मिली है। प्रदेश सरकार के किसी भी दायित्वधारी को टीम में शामिल नहीं किया गया है। 16 पदाधिकारियों की दोबारा टीम में जगह मिली है।
इन्हें मिली जिम्मेदारी
प्रदेश उपाध्यक्षः खजान दास (विधायक), पुष्कर सिंह धामी (विधायक), अनिल गोयल, राजकुमारी गिरी, कुसुम कंडवाल, देवेंद्र भसीन, खिलेंद्र चैधरी
प्रदेश महामंत्रीः अजय कुमार (प्रदेश संगठन महामंत्री), राजेंद्र भंडारी व कुलदीप कुमार
कोषाध्यक्षः पुनीत मित्तल
प्रदेश मंत्रीः बलबीर घुनियाल, पुष्कर सिंह काला, आशीष गुप्ता, राजेंद्र बिष्ट, आदित्य चैहान, नीरू देवी, मधु भट्ट, किरण देवी
प्रदेश कार्यालय सचिवः कौस्तुभानंद जोशी
प्रदेश प्रवक्ताः सुरेश जोशी, विनय रूहेला, विनय गोयल, नवीन ठाकुर, प्रकाश रावत, विनोद सुयाल
क्षेत्रीय असंतुलन
प्रदेश कांग्रेस कमेटी की तुलना में प्रदेश भाजपा की टीम बहुत छोटी है। लेकिन टीम में वरिष्ठता, अनुभव, जातीय व क्षेत्रीय समीकरणों को ध्यान में रखकर चेहरों को जगह दी गई है। टीम में तीन महिला नेताओं को दायित्व सौंपा गया है। हालांकि क्षेत्रीय संतुलन के हिसाब से उसमें अभी विस्तार की गुंजाइश है। प्रदेश पदाधिकारियों की सूची में हरिद्वार, उत्तरकाशी व रुद्रप्रयाग जिले को प्रतिनिधित्व नहीं मिला है।
मोर्चों की कमान
भाजपा युवा मोर्चाः कुंदन लटवाल (अध्यक्ष पद पर बरकरार)(अल्मोड़ा)
भाजपा महिला मोर्चाः ऋतु खंडूड़ी, विधायक यमकेश्वर (जनरल बीसी खंडूड़ी की सुपुत्री)(पौड़ी)
अनुसूचित जाति मोचाः अंबादत्त आर्य (नैनीताल)
अनुसूचित जनजाति मोचाः राकेश राणा (ऊधमसिंह नगर)
किसान मोर्चाः अनिल चैहान (यूएस नगर)
पुराने नेताओं को जीवित करेंगे
वहीं अब इसके बाद भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बंशीधर भगत का नया अभियान पार्टी के पुराने और उदासीन नेताओं को एक्टिव करने का होगा। यह अभियान वे छह अप्रैल से शुरू करेंगे।
इस अभियान के दौरान वे पुराने नेताओं के पास जाएंगे और उनसे सांगठनिक गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभाने की अपील करेंगे। उनके पास पुराने खांटी नेताओं को संगठन की जिम्मेदारी देने का एक प्लान भी है। इस अभियान में पार्टी के सभी पदाधिकारियों की भूमिका तय होगी।
संगठन की कमान संभालने के बाद से ही भगत पूरे प्रदेश के दौरा कर रहे हैं। भ्रमण के दौरान उन्हें यह महसूस हुआ कि पार्टी के पुराने और अनुभवी नेता किसी न किसी कारण से उदासीन हैं। वे भाजपा की विचारधारा से गहरे तक तो जुड़े हैं लेकिन पार्टी की गतिविधियों में शामिल नहीं हो रहे हैं। हालांकि सांगठनिक और चुनावी रणनीति के लिहाज से वे 2022 के विधानसभा चुनाव के लिए काफी अहम हो सकते हैं।
प्रदेश की तकरीबन हर विधानसभा का दौरा पूरा करने के बाद भगत ने अब पुराने व उदासीन नेताओं के दरवाजे पर दस्तक देने का फैसला किया है। भगत छह अप्रैल से इस अभियान की शुरुआत करेंगे।
उनके नेतृत्व पार्टी के पदाधिकारियों की टीम फील्ड में उतरेगी और पुराने नेताओं और कार्यकर्ताओं से संपर्क साधेगी। उनकी कुशलक्षेम भी लेगी। अभियान के दौरान वरिष्ठ नेताओं को सम्मानित भी किया जाएगा। उनसे नियमित मुलाकातों के भी कार्यक्रम बनेंगे, जिससे वे खुद को अलग थलग महसूस न करें और खुद को हर क्षण पार्टी से जुड़ा हुआ महसूस करें।