रूरल बिजनेस इन्क्यूबेटर्स योजना ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करने वाला-सीएम

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उत्तराखंड उद्यमिता समिट के आयोजन को राज्य में ग्रामीण क्षेत्रों के उद्यमियों के लिए लाभदायक बताते हुए कहा कि इससे ग्रामीण क्षेत्रों के व्यवसायियों को विभिन्न क्षेत्रों में सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाओं के बारे में जानकारी मिल सकेगी। ग्रामीण उद्यमियों हेतु आयोजित “गुल्लक“ नामक यह कार्यक्रम, देशभर में अपनी तरह का पहला कार्यक्रम है जिसमें निवेशक ग्रामीण उद्यमियों के साथ सीधे संवाद कर उनके उद्यमों में निवेश कर सकेंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में उद्यमिता विकास को गति प्रदान करने के लिए हमारी सरकार द्वारा विगत वर्ष “रूरल बिजनेस इनक्यूबेटर्स“ की स्थापना जनपद अल्मोड़ा के हवालबाग में और जनपद पौड़ी के कोटद्वार में की गई। वर्तमान में इन “रूरल बिजनेस इनक्यूबेटर्स“ के माध्यम से ग्रामीण उद्यमियों को विभिन्न प्रकार की सेवाएं प्रदान की जा रही हैं। इनक्यूबेटर्स के अच्छे परिणामों को देखते हुए इस योजना को हब एवं स्पॉक मॉडल के अंतर्गत राज्य के अन्य 11 जनपदों में क्रियाशील किए जाने हेतु “रूरल बिजनेस इन्क्यूबेटर“ के स्पॉक स्थापित किए जाएंगे। इन इनक्यूबेटर्स के माध्यम से हमारे उद्यमियों को नए अवसर प्राप्त हो सकेंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री के कर्मशील नेतृत्व में देश निरंतर प्रगति कर रहा है, उद्योग जगत भी इससे अछूता नहीं है। हमारी यह पहल प्रधानमंत्री के वोकल फॉर लोकल की अवधारणा को मजबूती प्रदान करेगा तथा इससे विकास के नये रास्ते तय होंगे तथा आत्मनिर्भर भारत की दिशा में भी यह निर्णायक पहल होगी। उन्होंने कहा कि पिछली बार जब वे हवाल बाग में निवेशकों से मिले थे उस समय की निवेश की यह धनराशि आज 7 करोड़ से 20 करोड़ हो गयी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में उद्यमिता के क्षेत्र में कार्य करने वालों का जज्बा उन्होंने देखा है उनका आत्म विश्वास अन्य युवाओं के लिये भी प्रेरणा का कार्य करेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री के कुशल नेतृत्व में देश का मान व सम्मान बढ़ा है। इसका प्रतिफल है कि जी 20 देशों की अध्यक्षता भारत को मिली है। इसकी दो महत्वपूर्ण बैठकें उत्तराखण्ड में भी होनी हैं यह हमारे लिये भी सम्मान की बात है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी के कुशल मार्ग दर्शन में देश ने कोरोना महामारी का सफलता से सामना ही नहीं किया इसकी तीन वैक्सीन तैयार कर देश के नागरिकों को निःशुल्क उपलब्ध करायी तथा कई देशों को भी वैक्सीन उपलब्ध करायी, यही नहीं कोरोना काल से अब तक देश के 80 करोड़ लोगों को निशुल्क खाद्यान्न उपलब्ध कराया जा रहा है। देश में 40 प्रतिशत डिजिटल ट्रांजेक्शन लोकल फॉल ग्लोबल की दिशा में देश के बढ़ते कदम हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हम सबका यह प्रयास होना चाहिए कि जो जिस क्षेत्र में कार्य कर रहा है उसे बेहतर ढंग से करे तथा अपने अनुभवों को साझा करें। समाज के अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुंचे यह हमारा दायित्व होना चाहिए। ग्रामीण उद्यमिता के विकास से हमारे युवा स्वरोजगार से जुड़ेंगे तथा नौकरी पाने के बजाय नौकरी देने वाले बनेंगे। ग्रामीण उद्यमियों के उत्पादों के विपणन की बेहतर व्यवस्था पर हमारा ध्यान है। आज देश में आयात को निर्यात में बदलने की प्रक्रिया की शुरुआत हो रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में पलायन की समस्या से निजात पाने के लिए विशेष रूप से कार्य कर रही है। राज्य के नागरिकों को अपने स्थान पर रहकर ही स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराने हेतु सरकार द्वारा राज्य के सुदूर क्षेत्रों में विभिन्न प्रकार की केंद्र पोषित, राज्य पोषित और वाह्य सहायतित स्वरोजगार परक योजनाओं का संचालन किया जा रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में होने वाले व्यवसाय में महिलाओं की सहभागिता अधिक रहती है, इसको ध्यान में रखते हुए हमारी सरकार स्वरोजगार के क्षेत्र में महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए विशेष रूप से प्रयास कर रही है। हमने 1.25 लाख बहनों को लखपति दीदी बनाने की योजना बनाई है, उन्हें भी उद्यमिता से जोड़ने के प्रयास किये जा रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज से भारत सरकार के निर्देशन में आगामी एक माह तक “मिशन अंत्योदय सर्वे“ मोबाइल ऐप के माध्यम से किया जाना सुनिश्चित हुआ है। इस सर्वे में सामुदायिक काडर की महिलाओं द्वारा आर्थिक विकास, गांवों की आधारभूत संरचना, सेवाओं और सामाजिक न्याय से संबंधित विषयों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह सर्वे गुणवत्तापूर्ण रूप से संपन्न होने के साथ राज्य के सर्वांगीण विकास में इस सर्वे का लाभ प्राप्त हो सकेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार राज्य के चहुंमुखी विकास हेतु प्रधानमंत्री की मंशा के अनुरूप वर्ष 2025 तक उत्तराखण्ड को देश का सर्वश्रेष्ठ राज्य बनाने के अपने “विकल्प रहित संकल्प“ को ध्यान में रखकर निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने उत्तराखण्ड के विभिन्न क्षेत्रों से आए सभी युवा उद्यमियों का आह्वान किया कि राज्य सरकार के संकल्प को पूर्ण करने में वे भी सहयोगी बनें।
इस अवसर पर ग्राम्य विकास मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा एक अभिनव पहल करते हुये राज्य में रूरल बिजनेस इन्क्यूबेटर्स योजना प्रारम्भ की गयी, जिसमें दो इन्क्यूबेटर्स कमशः जनपद अल्मोड़ा व पौड़ी में स्थापित किये गये। इन इन्क्यूबेटरों के माध्यम से ग्रामीण उद्यमियों को उनके नये उद्यम स्थापना तथा स्थापित उद्यमों के विस्तारीकरण हेतु विभिन्न प्रकार के तकनीकी सहायता, मेन्टरशिप सहयोग, विधिक सहयोग, विपणन सहयोग आदि प्रदान किया जा रहा है। जहा पर दक्ष मानव संसाधन ग्रामीण उद्यमिता को बढ़ावा देने हेतु भावी ग्रामीण उद्यमियों को तैयार करने में मदद कर रहा है। गत एक वर्ष में लगभग 500 से अधिक इन्क्यूबेटीज़ द्वारा इन्क्यूबेटर्स के माध्यम से लाभ प्राप्त कर अपने उद्यमों की स्थापना अथवा उद्यम विस्तार में सहायता प्राप्त की गयी है। उन्होंने कहा कि “गुल्लक कार्यक्रम“ राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में उद्यमिता को विकसित करने के लिये सरकार की एक अनूठी पहल है। ग्रामीण उद्यमियों हेतु अयोजित किये जाने वाला यह कार्यक्रम, देशभर में पहला प्रयास है, जहा ग्रामीण उद्यमी अपने व्यवसाय को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से अपने आइडिया/बिजनेस निवेशकों के सम्मुख प्रस्तुत कर रहे हैं। इस मंच से उद्यमियों को अपने व्यवसाय का विस्तार करने में मदद मिलेगी।
मंत्री ने कहा कि ग्राम्य विकास विभाग द्वारा मिशन अन्त्योदय सर्वे का शुभारम्भ भी किया जा रहा है, भारत सरकार के निर्देशानुसार एक माह के अन्दर उक्त सर्वे कार्य पूर्ण किया जायेगा जिसमें गाँवों में उपलब्ध आधारभूत संरचना, सेवाओं, आर्थिक विकास एवं सामाजिक न्याय से सम्बन्धित विषयों पर सूचना का एकत्रीकरण किया जायेगा।
इस अवसर पर पूर्व सांसद तरुण विजय, सचिव बी.वी.आर.सी पुरूषोत्तम, आयुक्त ग्राम्य विकास आनन्द स्वरूप, अपर सचिव ग्राम्य विकास नितिका खंडेलवाल सहित अन्य अधिकारी उद्यमी तथा निवेशक उपस्थित रहे।

नाबार्ड ने राज्य के लिए संभावित ऋण प्रतिशत में 6.22 प्रतिशत की वृद्धि की

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंगलवार को सुभाष रोड, देहरादून स्थित एक होटल में नाबार्ड द्वारा आयोजित स्टेट क्रेडिट सेमिनार 2023-24 में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर उन्होंने नाबार्ड द्वारा तैयार किये गये स्टेट फोकस पेपर 2023-24 का विमोचन किया। नाबार्ड द्वारा वर्ष 2023-24 हेतु उत्तराखण्ड राज्य के लिए प्राथमिकता क्षेत्र में 30301 करोड़ रूपये की ऋण संभाव्यता का आंकलन किया गया है। जो विगत वर्ष की तुलना में 6.22 प्रतिशत अधिक है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने नाबार्ड का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उत्तराखण्ड में कृषि, बागवानी तथा लघु और मध्यम क्षेत्र के उद्योगों के विकास हेतु इस वर्ष करीब तीस हजार करोड़ रूपये से अधिक की ऋण योजना तैयार की है। जो पिछले साल की तुलना में 6.22 प्रतिशत अधिक है। यह हमारे किसानों, बागवानी तथा छोटे-छोटे उद्योगों में लगे लोगों की आजीविका बढ़ाने में कारगर साबित होगा। उन्होंने कहा कि इस ऋण व्यवस्था की सही प्रकार से निगरानी एवं पारदर्शिता की आवश्यकता होगी, ताकि जरूरतमंद लोगों को ऋण लेने में कोई परेशानी न हो। आम जन योजनाओं का पूरा लाभ ले सकें। ऋण को सही, जरूरतमंद और योग्य लोगों तक सरलता से पहुंचाने में सबसे बड़ी भूमिका बैंकों की है। बैंकों को ध्यान देना होगा कि जरूरतमंद और योग्य लोगों को ऋण सम्बन्धित औपचारिकताओं के लिए अनावश्यक न भटकना पड़े। इसके लिए बैंकों को मिशन मोड पर काम करना होगा। नाबार्ड की इस ऋण योजना के आवंटन के लिए प्रत्येक बैंक ब्रांच को एक निश्चित टारगेट के साथ काम करना होगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि ग्रामीण इलाकों में निवेश और लोन के द्वारा ही विकास और उन्नति संभव है। यह हमारे रिवर्स पलायन मिशन के लिए भी आवश्यक है। सरकार ग्रामीण इलाकों में आधारभूत सुविधाओं, सड़क, कनेक्टिविटी को मजबूत करने के लिए लगातार काम कर रही है। इसके लिए नाबार्ड का भी लगातार सहयोग मिलता रहता है। पिछले वर्ष ही नाबार्ड ने उत्तराखण्ड को दस हजार करोड़ रूपये की 4515 परियोजनाओं की मंजूरी दी। इसके लिए उन्होंने नाबार्ड का आभार भी व्यक्त किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार राज्य के इंफ्रास्टक्चर को मजबूत और आधुनिकतम बनाने पर लगातार कार्य कर रही है, ताकि राज्य के शहरी इलाकों के साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में भी निवेश बढ़े। उन्होंने कहा कि रूद्रप्रयाग, बागेश्वर और टिहरी ऋण की कमी वाले तीन जिलों में ऋण आवंटन बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जाय।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बैंको के अलावा राज्य सरकार आम लोगों के लिए भी सब्सिडी, क्रेडिट लिंक्ड योजनाओं और ब्याज अनुदान जैसे योजनाओं को लागू कर रही है। जिसके अंतर्गत वीर चन्द्र सिंह गढ़वाली पर्यटन स्वरोजगार योजना, दीनदयाल उपाध्याय सहकारिता किसान कल्याण योजना, मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजनाएं संचालित की जा रही हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड के विभिन्न जनपदों की भौगोलिक परिस्थितियां अलग-अलग है। भौगोलिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए भी योजनाओं का सही क्रियान्वयन करना होगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत द्वारा अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर जो भी प्रस्ताव रखे जाते हैं, उन पर गम्भीरता से फैसले भी लिये जाते हैं। उन्होंने कहा कि भारत इस वर्ष जी 20 शिखर सम्मेलन की अध्यक्षता कर रहा है। यह देश के लिए ‘लोकल फॉर ग्लोबल’ को बढ़ावा देने का अच्छा अवसर है। जी 20 की 02 महत्वपूर्ण बैठकें उत्तराखण्ड में भी प्रस्तावित हैं। भारत के प्रस्ताव पर संयुक्त राष्ट्र महासभा ने वर्ष 2023 को अन्तरराष्ट्रीय मिलेट वर्ष भी घोषित किया है। इससे हमारे मोटे अनाजों को तेजी से बढ़ावा मिलेगा। भारत सरकार द्वारा मण्डुवा को न्यूनतम समर्थन मूल्य पर क्रय करने की स्वीकृति प्रदान करने पर उन्होंने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी का आभार व्यक्त किया।
नाबार्ड द्वारा आयोजित स्टेट क्रेडिट सेमिनार में जानकारी दी गई कि नाबार्ड ने महिलाओं को सशक्त बनाने तथा उनके लिए सतत आजीविका सृजित करने के 91 लघु उद्यमिता विकास कार्यक्रम व 23 आजीविका उद्यमिता विकास कार्यक्रम के माध्यम से 5280 स्वयं सहायता समूह/जेएलजी को प्रशिक्षित कर उन्हें अपना व्यवसाय करने के लिए प्रेरित किया। नाबार्ड राज्य में एफपीओ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है अभी तक कुल 132 एफपीओ (31 सेंट्रल सेक्टर स्कीम सहित) बनाए गये हैं।
इस अवसर पर कृषि मंत्री गणेश जोशी, सहकारिता मंत्री डॉ. धन सिंह रावत, अपर मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन, नाबार्ड के प्रभारी अधिकारी डॉ. सुमन कुमार, क्षेत्रीय निदेशक आरबीआई लता विश्वनाथ, जनरल मैनेजर सुनील कौशिक, डीजीएम निर्मल कुमार, एसएलबीसी के संयोजक नरेन्द्र रावत, सचिव आर. मीनाक्षी सुंदरम, बीवीआरसी पुरूषोत्तम, दिलीप जावलकर एवं विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्ष उपस्थित रहे।

मुख्य सचिव ने पर्यटन गतिविधियों को बढ़ाने पर दिया जोर

मुख्य सचिव डॉ. एस.एस. संधु ने मंगलवार को सचिवालय में पर्यटन विभाग के साथ पर्यटन के क्षेत्र में प्रदेश में भावी संभावनाओं पर विस्तृत चर्चा की। मुख्य सचिव ने सचिव पर्यटन को पर्यटन प्रदेश में आर्थिकी और रोजगार का महत्त्वपूर्ण साधन है। चारधाम यात्रा के साथ ही प्रदेश के पर्यटक स्थल इसमें महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में सप्ताहांत में पूरे सालभर अधिकतम पर्यटक दिल्ली एनसीआर से आते हैं, और दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेस-वे बन जाने के बाद जब दिल्ली-एनसीआर के पर्यटकों की संख्या बढ़ेगी, उसके लिए हमें अभी से तैयारियां शुरू करनी होंगी।
मुख्य सचिव ने कहा कि इसके लिए हमें पर्यटकों को नए पर्यटक स्थल और नए साहसिक खेलों को शामिल करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि देश-विदेश में अभी पर्यटन के क्षेत्र में क्या-क्या नया हो रहा है, और उन में से उत्तराखण्ड में क्या-क्या किया जा सकता है, इसकी एक लिस्ट तैयार की जाए। प्रदेश में पर्यटन की दृष्टि से यहां की भौगोलिक एवं प्राकृतिक स्थिति के अनुसार पर्यटन गतिविधियों की 02 कैटेगरी तैयार किए जाने के निर्देश दिए, जिसमें कैटेगरी ‘ए‘ में ऐसी गतिविधियों को रखने के निर्देश दिए जिन्हें तुरन्त शुरू किया जा सकता है एवं कैटेगरी ‘बी‘ में ऐसे गतिविधियां रखी जाएं जिन्हें शुरू किए जाने के लिए पहले कई प्रकार के कार्य किए जाने हैं। प्रदेश में हाई-एंड टूरिस्म को बढ़ावा देने के लिए सम्भावनाएं तलाशी जाएं। फाईव स्टार होटल और रिजॉर्ट्स के क्षेत्र में प्राईवेट क्षेत्र को आकृषित किए जाने के लिए कार्य किया जाए। प्रदेश के शुद्ध वातावरण में ऐस्ट्रॉ विलेज की भी काफी सम्भावनाएं हैं। प्रदेश भर में इसके लिए 5, 10 जगहें चिन्हित कर इसे शीघ्र शुरू किया जाना चाहिए।
मुख्य सचिव ने कहा कि वाटर स्पोर्ट्स में प्रदेश में अत्यधिक सम्भावनाएं हैं। दिल्ली एनसीआर से अधिकतर पर्यटक राफ्टिंग एवं क्याकिंग आदि साहसिक खेलों के कारण वर्षभर उत्तराखण्ड आते हैं। टिहरी झील में वाटर बाईकिंग, पैरासेलिंग, आदि को तुरन्त शामिल किया जा सकता है। बंजी जम्पिंग, रॉक क्लाइम्बिंग, वाईल्ड लाईफ सफारी, पैरा ग्लाईडिंग आदि जैसी तुरन्त शुरू की जा सकने वाली गतिविधियों को तुरन्त शुरू कर लिया जाए। इसके लिए प्राईवेट क्षेत्र से आने वाले लोगों को इंटरेस्ट सबवेंशन देकर बढ़ावा दिया जाए। उन्होंने कहा कि प्रदेश की खूबसूरती को दिखाने के लिए हैलीकॉप्टर, हॉट एयर बलून आदि से प्रदेश के विभिन्न खूबसूरत पर्यटन स्थलों की एरियल व्यू की व्यवस्था की जा सकती है। इसके लिए ऋषिकेश हरिद्वार जैसी जगह पर लंडन आई ( स्वदकवद म्लम ) जैसी संरचनाओं पर भी विचार किया जाना चाहिए। उन्होंने पर्यटन विभाग को बड़े शहरों में 5 से 10 जगहों पर स्केटिंग रिंग, आईस हॉकी, लाईट एंड साउंड शॉ आदि के लिए व्यवस्थाएं किए जाने के भी निर्देश दिए।
मुख्य सचिव ने कहा कि इन गतिविधियों के शुरू होने के लिए प्रशिक्षित लोगों की भी आवश्यकता होगी। इसके लिए पर्यटन विभाग को प्रशिक्षण कार्यक्रमों को भी संचालित करना चाहिए। उन्होंने कहा कि पर्यटकों को प्रदेश में होने वाली समस्त पर्यटन गतिविधियों की जानकारी एक जगह मिल सके इसके लिए पोर्टल को लगातार अपडेट किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि पर्यटन को बढ़ावा दिए जाने के लिए बजट की कमी नहीं होने दी जाएगी। यदि पॉलिसी में कुछ परिवर्तन करने की आवश्यकता होगी, वह भी किया जाएगा, ताकि प्रदेश में पर्यटन को बढ़ावा मिले और यहां के युवाओं को रोजगार मिले।
इस अवसर पर सचिव पर्यटन सचिन कुर्वे सहित अन्य विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।

चिंतन शिविर के संकल्पों को लेकर शहरी विकास विभाग की भावी योजनाएं तैयार-अग्रवाल

शहरी विकास मंत्री डॉ प्रेमचन्द अग्रवाल ने बताया कि केन्द्र सरकार की ’स्पेशल असिस्टेन्ट टू स्टेट फॉर कैपिटल इन्वेस्टमेन्ट’ योजना के अन्तर्गत उत्तराखण्ड राज्य का चयन किया गया है। योजना में लगभग 100 करोड रुपए का अनुदान केन्द्र सरकार द्वारा राज्य सरकार को अर्बन रिफॉर्म हेतु दिया जाना है। राज्य ने योजना के अन्तर्गत छः घटकों की अनुपालन आख्या का प्रस्तुतीकरण भारत सरकार को प्रस्तुत किया गया। जिसके उपरान्त ही राज्य सरकार को अनुदान हेतु पात्रता प्राप्त हुई हैं।
मंत्री ने बताया कि राज्य में स्वच्छ भारत मिशन शहरी के अंतर्गत ठोस अपशिष्ट प्रबंधन मद में 91 निकायों हेतु 64 परियोजनाए भारत सरकार से स्वीकृत करा ली गई है। जिनमें से 89 निकायों हेतु 62 परियोजनाओं की धनराशि रु० 71.63 करोड़ (35 प्रतिशत) वी०जी०एफ० के रूप में प्राप्त की गई है तथा शेष 65 प्रतिशत रु० 221.31 करोड़ राज्य सरकार व स्थानीय निकायों द्वारा वहन की जायेगी। बताया कि राज्य के शहरी क्षेत्रों में 1535.50 मी०टन ठोस अपशिष्ट प्रति दिन उत्पन्न होता है। जिसमें से 1062.07 मी०टन अर्थात 69 प्रतिशत का प्रसंस्करण (प्रोसेसिंग) प्रतिदिन किया जाता है। इस हेतु 38 मटीरियल रिकवरी फेसिलिटी केन्द्रों, 60 अपशिष्ट कॉम्पेक्टर तथा 855 कम्पोस्ट पिट निकायों में संचालित है। उदहारण के तौर पर दूरस्थ पालिका जोशीमठ द्वारा 1200 टन अजैविक कूड़े का विक्रय कर लगभग 79 लाख की आय अर्जित की गई है। लीगेसी वेस्ट निस्तारण हेतु 07 नगर निगमों की रु० 80.00 करोड़ की परियोजनाएं भारत सरकार द्वारा स्वीकृत की गई है तथा प्रथम किस्त रु० 29.00 करोड राज्य को अवमुक्त किया गया है।
मंत्री ने बताया कि शहरी विकास विभाग के एक वरिष्ठ प्रतिनिधि मण्डल द्वारा जर्मनी में रिसाइकलिंग एवं वेस्ट टू एनर्जी, ई०पी०आर० आदि के क्षेत्र में किये जा रहे नवाचारों का एक सप्ताह का अध्ययन किया गया तथा जी0आई0जेड के तकनीकि सहयोग से इन नवाचारों को राज्यों में क्रियान्वित किये जाने का प्रयास किया जायेगा। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन योजना अंतर्गत 2993 महिला स्वयं सहायता समूहों एवं 73 क्षेत्र स्तरीय संघ का गठन किया गया, विपणन हेतु नगर पालिका परिषद चम्पावत, टनकपुर तथा नगर निगम रुद्रपुर में नगर आजीविका केन्द्रों (सी०एल०सी०) को स्वीकृत किया गया है। 20870 फेरी व्यवसायियों को सर्वेक्षण कर पेंडिंग सेटिफिकेट एवं पहचान पत्र उपलब्ध कराया गया है। निकायों में फेरी व्यवसायियों को सुव्यवचित करने हेतु कुल 333 वेंडिंग जोनों का चिन्हिकरण किया गया है, महिला फेरी व्यवसायियों हेतु नगर निगम हरिद्वार में पिंक वेंडिंग जोन, तथा नगर निगम में देहरादून में स्मार्ट वेंडिंग जोन की स्थापना की गई है। 7422 शहरी गरीबों को स्वरोजगार हेतु बैको के माध्यम से 103 करोड़ का ऋण की स्वीकृति तथा रू0 448 करोड़ का व्याज सब्सिडी अनुदान निर्गत किया गया है।
मंत्री ने कहा कि डे०एन०यू०एल०एम० योजना के अंतर्गत शहरी बेघरों हेतु आश्रय (एस0यू0एच0) के अन्तर्गत 801 आश्रितों की क्षमता के 14 रैन बसेरो का संचालन निराश्रित बेघरों हेतु किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अटल नवीकरण और शहरी परिवर्तन मिशन (अमृत) अंतर्गत 151 स्वीकृत परियोजनाओं में से वर्तमान तक रू0 339.45 करोड़ की 117 योजनाएं पूर्ण की जा चुकी है, 34 योजनाएं रू0 253.52 करोड़ की गतिमान है जिन्हे मार्च 2023 तक पूर्ण किया जाना लक्षित है। योजना अन्तर्गत भारत सरकार द्वारा रू0 593.02 के सापेक्ष रू0 591.02 करोड़ (केन्द्राश व राज्यांश को जोड़कर) अवमुक्त किये जा चुके है। 66203 उपभोक्ताओं को ष्पेयजल कनेक्शनष् तथा 67219 सीवरेज कनेक्शन उपभोगक्ताओं को दिया गया है। निकाय अंतर्गत 82337 सोडियम लाईटों को एल०ई०डी० लाईट में परिवर्तित किया गया। उन्होंने बताया कि अटल नवीकरण और शहरी परिवर्तन मिशन 2.0 (अमृत 2.0) के अंतर्गत पूर्व चयनित 7 अमृत नगरों में सीवर/सैप्टेज निस्तारण तथा प्रदेश के सभी नगरों में जल संयोजन दिया जाना निर्धारित है। 111 शहरों (102 स्थानीय निकाय तथा 09 कन्टेनमेंट बोर्ड) हेतु केन्द्रांश 582.00 करोड़ तथा राज्यांश रू0 64.66 करोड़, कुल 646.66 करोड़ की धनराशि निर्धारित की गई है, प्रथम चरण हेतु किस्त रू0 233.74 करोड, केन्द्रांश तथा राज्यांश रू0 25.97 कुल 259.71 करोड़ के सापेक्ष केन्द्रांश (20ः) धनराशि रू0 42. 08 अवमुक्त कर दी गयी है। योजना के अन्तर्गत कुल 65915 जल संयोजन दिया जाना प्रस्तावित है। शास्त्रीनगर वार्ड (देहरादून) को 24ग्7 किया जायेगा।
मंत्री ने बताया कि वित्तीय सुदृढीकरण-राज्य में म्युनिसिपल एकॉउटिंग मैनुवल, 2021 तैयार कर लागू कर दिया गया है एवं सम्बन्धित अधिनियमों में संशोधन कर दिया गया है। सिंगल एन्ट्री सिस्टम से डबल एन्ट्री एकॉउंटिंग सिस्टम सभी नगर निकायों में लागू किया जा रहा है। म्युनिसिपल एकॉउटिंग मैनुवल को लागू करने हेतु म्युनिसिपल एकॉउटिंग सॉफ्टवेयर तैयार किया जा रहा है। म्युनिसिपल एकॉउटिंग ऑडिट रूल्स तैयार किये जा रहे है। इसके अतिरिक्त 08 नगर निगमों में सैल्फ एस्सेमेन्ट लागू है एवं 68 निकायों के सम्पत्ति रजिस्टर को डिजिटाईज किया जा चुका है। 07 अमृत शहरों हेतु क्रेडिट रेटिंग की जा रही है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री आवास योजना सबके लिए आवास (शहरी) प्रधानमंत्री आवास योजना के लाभार्थी आधारित निर्माण घटक अंतर्गत 22175 आवासों की स्वीकृति भारत सरकार से प्राप्त की गई है, जिनमें में 6175 आवासों का निर्माण पूर्ण कर लिया गया है तथा 8000 आवासों से अधिक पर कार्य प्रगति पर हैं। अफडेबल रेंटल हाउसिंग काम्पलेक्स शहरी गरीबों हेतु प्रदेश में 600 से अधिक आवासों को चयनित किया गया। लालकूओं में 100 आवास व देहरादून में 70 आवास आवंटित किया गया, भागीदारी में किफायती आवास घटक अंतर्गत 13 आवासीय कालोनियों में 14500 आवासों का शिलान्यास व वर्तमान में कार्य प्रगति पर है। प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के ए०एच०पी० घटक में भारत सरकार से 21 योजनाओं (17304 आवास) की स्वीकृति कराकर 464 आवासों का कब्जा लाभार्थियों को दिया जा चुका है। शेष समस्त आवास वर्ष 2024 तक पूर्ण कर कब्जा दिया जाना प्रस्तावित है। लाभार्थियों के आवास की बुकिंग आवंटन एवं लॉटरी हेतु ऑनलाईन पोर्टल शुरू किया गया है तथा इसके माध्यम से आवास की बुकिंग सुविधा प्रदान की गयी है। उन्होंने कहा कि राज्य अवस्थापना निधि में राज्य सेक्टर के अंतर्गत समस्त निकायों में ओपन जिम पार्क निर्माण हेतु नगर निगमों को रू0 3.00 लाख नगर पालिका परिषद को रु0 2.00 लाख तथा नगर पंचायतों को रू0 1.50 लाख अवमुक्त किये गये।

’आवास विभाग की उपलब्धियां/भावी योजनाएं’
1. समस्त विकास प्राधिकरणों के कार्यों (मानचित्र स्वीकृति, प्रशासनिक कार्य, सूचना का अधिकार शिकायतों का निस्तारण) ईज एप के माध्यम से ऑनलाईन किया गया है। 2. एकल आवासीय एवं गैर एकल आवासीय मानचित्रों की स्वीकृति हेतु समय-सीमा क्रमशरू 15 एवं 30 दिवसों का निर्धारण।
3. मानचित्र स्वीकृति हेतु अनापत्ति प्रक्रिया का सरलीकरण/समय-सीमा निर्धारण एवं डीम्ड अनापत्ति व्यवस्था की गयी है।
4. भवन निर्माण विकास उपविधि (बिल्डिंग बॉयलाज) में मार्ग, ऊंचाई, एफ०ए०आर० आदि मानकों का शिथिलीकरण किया गया है।
5. सीएससी के माध्यम से मानचित्र जमा किये जाने की सुविधा प्रदान की गयी है।
6. भू-उपयोग परिवर्तन की प्रक्रिया का सरलीकरण एवं प्रतिनिधायन, 4000 से 10000 वर्गमीटर तक प्राधिकरण स्तर पर 10000 से 50000 वर्गमीटर तक उड़ा स्तर पर भू-उपयोग परिवर्तन संभव है।
7. भू-उपयोग परिवर्तन की शुल्क की पूर्व दरों 100 से 150 प्रतिशत को घटाकर 10 से 15 प्रतिशत किया गया है।
8. सभी नगर निकायों की मास्टर प्लान बनाये जाने की प्रक्रिया प्रारम्भ कर दी गयी है।
9. पार्किंग परियोजना हेतु सभी जिलाधिकारियों एवं प्राधिकरणों के मध्य सामंजस्य स्थापित करते हुए राज्य के 158 स्थानों पर पार्किंग, जिसमें सरफेस पार्किंग की 51, मल्टीलेवल कार पार्किंग की 87, ऑटोमेटेड कार पार्किंग की 09 तथा टनल पार्किंग हेतु 11 स्थान चिन्हित किये गये हैं, जिसमें 91 स्थानों हेतु डी०पी०आर० तैयार कर ली गयी है, जिसमें 33 परियोजनाओं में रू0 5286.07 लाख की धनराशि स्वीकृत कर कार्य प्रारम्भ कर दिया गया है।
10. शहरी क्षेत्रों में टी०डी०आर० (ज्तंदेमिततंइसम क्मअमसवचउमदज त्पहीजे) नीति अधिसूचित की गयी है।
11. मुख्य यातायात मार्गों एवं मेट्रो परियोजनाओं में प्रस्तावित स्टेशनों के समीप नियोजित विकास हेतु टी०ओ०डी० नीति अधिसूचित की गयी है।
12. मेट्रो रेल परियोजना हेतु डी०पी०आर० राज्य सरकार स्तर से अनुमोदित करते हुए भारत सरकार को प्रेषित की गयी है। भारत सरकार स्तर पर स्वीकृति की प्रक्रिया गतिमान है।
13. आमजन की सुविधाएं हेतु भू-सम्पदा नियामक प्राधिकरण (रेरा) में अनुमोदित किया गया है।
14. शहरों के विसंकुलन कम करने हेतु उत्तराखण्ड आवास एवं विकास परिषद् द्वारा निजी सहभागिता से छोटे टाउनशिप परियोजना हेतु प्रस्ताव आमंत्रित किये गये है।
15. नये शहरों की स्थापना हेतु मुख्य सचिव, उत्तराखण्ड शासन की अध्यक्षता में टॉस्क फोर्स का गठन किया गया है। राज्य के सभी जिलों में नये शहरों की संभावना हेतु अन्तर विभागीय समिति का गठन कर प्रारम्भिक सर्वे कराया गया है, जिसमें 23 शहरों का स्थलीय परीक्षण पूर्ण कर लिया गया है।

सही पैरवी ना करने वाले विधि अधिकारियों पर गिरी गाज

उत्तराखण्ड शासन द्वारा उच्च न्यायालय, नैनीताल उत्तराखण्ड के समक्ष राज्य की ओर से पैरवी/बहस करने के लिए उत्तराखण्ड राज्य की ओर से विभिन्न पदों पर आबद्ध विधि अधिकारियों के कार्यों की समीक्षा एवं सम्यक् विचारोपरांत पद से हटाया गया है। हटाए गए विधि अधिकारियों में अपर मुख्य स्थायी अधिवक्ता अनिल कुमार बिष्ट, अपर मुख्य स्थायी अधिवक्ता अंजली भार्गव, स्थायी अधिवक्ता एन.पी.शाह, ब्रीफ होल्डर इंदु शर्मा, दीपक चुफाल, पंकज नेगी एवं हर्षित लखेड़ा शामिल है।

सीएम से मिलकर महिलाएं बोली, सरकारी नौकरियों में महिला आरक्षण ऐतिहासिक फैसला

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से महादेवी कन्या पाठशाला कालेज सोसाइटी के तत्वाधान में संस्था के अन्तर्गत संचालित समस्त संस्थाओं की प्रबन्ध समिति के पदाधिकारियों एवं शिक्षिकाओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने भेंट की। उन्होंने उत्तराखंड की सरकारी नौकरियों में राज्य की महिलाओं के लिए 30 प्रतिशत आरक्षण का विधेयक उत्तराखंड विधानसभा से पारित करवाने के लिए अभिनंदन पत्र सौंप कर मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया।

महादेवी कन्या पाठशाला कालेज के सचिव जितेन्द्र सिंह नेगी ने कहा कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में उत्तराखंड सरकार ने राज्य में सरकारी नौकरियों को 30 प्रतिशत आरक्षण देकर एक ऐतिहासिक निर्णय लिया है। इससे महिला सशक्तीकरण एवं महिला उत्थान का भी मार्ग प्रशस्त हुआ है।

इस अवसर पर महादेवी कन्या पाठशाला कालेज के प्रतिनिधिमण्डल में शासक सभा के सदस्य व पूर्व राज्य आंदोलनकारी रवीन्द्र जुगरान, प्रबन्ध समिति के पदाधिकारी प्रवीण कुमार जैन, शोभित मांगलिक, कुलदीप नेगी, महादेवी इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नालाजी की उपनिदेशिक गीता चौहान, विभागाध्यक्षा डा. भावना सिंधवानी, वन्दना चौधरी, सुमित कौर शक्ति सिंह बड़वाल, सुषमा गोयल, वरिष्ठ प्रवक्ता डा० सीमा रस्तोगी सम्मिलित थे।

आईएएस अधिकारियों को पूरी प्रशासनिक नेतृत्व क्षमता से कार्य करना होगा-मुख्यमंत्री

उत्तराखण्ड को 2025 तक देश का अग्रणी राज्य बनाने के लिए सभी आई.ए.एस. अधिकारियों को पूरी प्रशासनिक नेतृत्व क्षमता से कार्य करना होगा। राज्य के समग्र विकास एवं जन समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए सरलीकरण, समाधान एवं निस्तारण के मंत्र के साथ आगे बढ़ना है। यह बात मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को सचिवालय में एडमिनिस्ट्रेटिव ऑफिसर्स कांफ्रेंस के शुभारंभ के दौरान कही। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के समग्र विकास के लिए मसूरी में आयोजित चिंतन शिविर में जो सुझाव सामने आये हैं, उन सभी सुझावों को धरातल पर लाया जाए। जन समस्याओं के समाधान के लिए प्रक्रियाओं के सरलीकरण पर विशेष ध्यान दिया जाए। यह सुनिश्चित किया जाए कि अपने कार्यों के लिए आम जन को अनावश्यक रूप से दफ्तरों में न आना पड़ें। फाईल सिस्टम को ऑनलाईन लाने पर फोकस किया जाए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह सुनिश्चित किया जाए कि शासन स्तर पर फाइलें अनावश्यक रूप से लम्बित न हों। जो फाइलें रूकी हैं, उनका दुबारा परीक्षण करवाया जाए। अनावश्यक रूप से फाइलें लंबित होने पर संबंधित अधिकारी एवं कर्मचारी की जिम्मेदारी तय की जाए। जनपदों में जिलाधिकारी एवं मुख्य विकास अधिकारी की सरकारी योजनाओं को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका होती है। यह सुनिश्चित किया जाए कि समाज के अंतिम पंक्ति पर खड़े लोगों को केन्द्र एवं राज्य सरकार की योजनाओं का पूरा लाभ मिले। सभी जनपदों के तहसील दिवस और बीडीसी की बैठकें नियमित रूप से की जाए। अधिकारियों का जन सामान्य के साथ अच्छा व्यवहार होना जरूरी है। उन्होंने कहा कि सुशासन दिवस पर ग्राम चौपाल का आयोजन किया जायेगा, इसमें सभी आई.ए.एस अधिकारी अलग-अलग क्षेत्रों में ग्राम चौपालों में प्रतिभाग करें। मुख्यमंत्री ने कहा कि कुछ जनपदों में जिलाधिकारियों द्वारा अपने कार्यों के साथ ही अतिरिक्त समय में जन सेवा के कार्य किये जा रहे हैं, यह सराहनीय प्रयास है। उन्होंने कहा कि अधिकारी अपने प्रशासनिक कार्यों के अलावा जिस क्षेत्र में दक्ष हैं, अगर अपनी दक्षता से जन सेवा कर रहे हैं, तो यह राज्य हित में एक अच्छा प्रयास है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि 2023 में भारत में जी-20 शिखर सम्मेलन होगा। जी-20 से दो दल उत्तराखण्ड भी आयेंगे। इस दौरान हम उत्तराखण्ड के स्थानीय उत्पादों, हस्तशिल्प एवं अन्य क्षेत्रों में क्या कर सकते हैं, इस कांफ्रेंस में इस पर व्यापक चर्चा की जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि आजादी का अमृत काल शुरू हो चुका है, इस अवधि में राज्य में क्या महत्वपूर्ण कार्य हो सकते हैं, इस पर भी मंथन किया जाए। उन्होंने कहा कि समय प्रबंधन पर भी विशेष ध्यान दिया जाए।
मुख्य सचिव डॉ. एस.एस. संधु ने कहा कि आईएएस वीक का मूल मंत्र एक दूसरे को जानना है। इससे एक दूसरे के साथ रहने से जो बॉन्डिंग होती है, यह हमारी कार्यकुशलत बढ़ा देती है। इससे धीरे -धीरे हमारी ऑफिसियल वर्किंग में बहुत सुधार आता है। मुख्य सचिव ने कहा कि अपने कार्यालय में फैमिलियर माहौल बनाने से भी कुशलता बढ़ती है। जिलों में तैनात अधिकारियों से उन्होंने कहा कि जनपद की सड़क, बिजली, पानी की समस्या या आमजन की किसी भी प्रकार की समस्याओं को सुनने के लिए हम कितने संवेदनशील हैं, इससे बहुत फर्क पड़ता है। समस्याओं को दूर करने के लिए समस्याओं को समझना जरूरी है और उसके लिए अधिकारी के मन में आमजन के प्रति संवेदनशील होना जरूरी है। आप उनकी समस्याओं को समझ जाएंगे, और साथ ही यह भी समझ जाएंगे कि इनकी समस्याओं को हल करना आपकी जिम्मेदारी है, तो उस समस्या को हल करने का रास्ता आप निकाल ही लेंगे।
मुख्य सचिव ने कहा कि हमें हमेशा सकारात्मक रहना है। यह हम सभी के लिए, हमारी सर्विस लाईफ और पर्सनल लाईफ दोनों के लिए बेहतर है। उन्होंने कहा कि नियम काम को आसान बनाने के लिए बने हैं। इंटरप्रिटेशन की बात है, कई अधिकारी कर्मचारी नियमों की इस प्रकार व्याख्या करते हैं कि रूल्स में यह नहीं लिखा कि यह हो सकता है, परंतु इसमें व्याख्या इस प्रकार भी तो सकती है कि यह कहां लिखा है कि आप यह नहीं कर सकते हैं। अधिकारी सकारात्मक होगा तो यह कहेगा कि आमजन के लिए लाभप्रद है, और इस काम के लिए रोका नहीं गया है तो किया जा सकता है। हमें सकारात्मक सोच रखनी है। मुख्य सचिव ने कहा कि आपको यदि कोई दिक्कत आती है तो आपके पास वरिष्ठ अधिकारी हैं, आपको लगता है कि इस मामले ने आपको कौन अधिकारी गाइड कर सकता है, उन्हें लेटर लिखने से पहले फोन लगाकर बात कर लें। मैं हमेशा आप लोगों के लिए उपलब्ध हूं।
मुख्य सचिव ने कहा कि हमारे प्रदेश में फूलों, फलों और सब्जी उत्पादन में बहुत अधिक सम्भावनाएं हैं। इससे हजारों लोगों को रोजगार मिल सकता है। उन्होंने कहा कि हमारे प्रदेश में पॉलीहाऊस की बहुत अधिक मांग है, जिला प्लान से हम बहुत कम दे रहे हैं। उन्होंने जिलाधिकारियों को 31 मार्च 2023 तक पॉलीहाऊस 100 प्रतिशत सैचुरेशन करने की बात कही। उन्होंने रिवर्स माईग्रेशन को रोकने के लिए ओल्ड एज लोगों से बात करके उन्हें शामिल करते हुए, उनकी आवश्यकताओं को जानकर उनके लिए सुविधाएं उपलब्ध कराकर रिवर्स माईग्रेशन को रोक सकते हैं।
मुख्य सचिव ने कहा कि हमें अपना दृष्टिकोण सकारात्मक रख कर संवेदनशील रहना है और करियर की शुरूआत में आईएएस ज्वाईन करते समय कुछ कर दिखाने का हम सपना देखते हैं, उसे मरने नहीं देना है। बहुत से ऑफिसर सर्विस ज्वाईन करने के बाद सोचते हैं कि नौकरी में आ गए अब सब खत्म, ये एंड नहीं है, ये बिगिनिंग है।
इस अवसर पर अपर मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन, प्रमुख सचिव आर.के. सुधांशु, एल. फैनई, सचिव आर.मीनाक्षी सुंदरम, शैलेश बगोली एवं अन्य आई.ए.एस अधिकारी उपस्थित रहे।

धामी ने सुप्रीम कोर्ट के निर्णय की सराहना की

उत्तराखंड विधानसभा सचिवालय से बर्खास्त किए गए कर्मचारियों के बर्खास्तगी के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने भी मुहर लगा दी। कोर्ट ने कर्मचारियों की विशेष याचिका को निरस्त कर दिया। विधानसभा भर्ती प्रकरण में सुप्रीम कोर्ट ने भी कर्मचारियों को हटाए जाने के फैसले को सही माना है। दरअसल, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस प्रकरण में पहल करते हुए विधानसभा अध्यक्ष से जांच का अनुरोध किया था जिसके बाद मामले में जांच कमेटी गठित की गई थी। इस जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट में 2016 के बाद लगे कर्मचारियों की नियुक्ति को अवैध पाते हुए इनकी बर्खास्तगी की सिफारिश की थी।
उत्तराखंड विधानसभा में अवैध नियुक्तियों को लेकर पिछले दिनों जमकर हंगामा बरपा। ऐसे में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बगैर देर किए इस मामले में विधानसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर पूरे मामले की जांच का अनुरोध किया था। इसके बाद ही विधानसभा अध्यक्ष ने रिटायर्ड आईएएस डीके कोटिया की अध्यक्षता में एक तीन सदस्यीय कमेटी गठित की थी। इस कमेटी ने वर्ष 2016 के बाद लगे सभी कर्मचारियों की नियुक्तियों को अवैध मानते हुए इन्हें हटाने की सिफारिश की थी जिस पर इन सभी को हटा भी दिया गया।
जांच समिति के फैसले के विरुद्ध कर्मचारी हाइकोर्ट की सिंगल बेंच में गए। हाइकोर्ट ने कमेटी के फैसले को स्टे कर दिया। हालांकि बाद में डबल बेंच ने कमेटी के निर्णय को सही ठहराते हुए कर्मचारियों को हटाने के फैसले को सही ठहराया। इस फैसले के विरुद्ध कर्मचारियों ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की लेकिन आज सुप्रीम कोर्ट ने भी हाइकोर्ट के निर्णय को बरकरार रखा है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा इस मामले में जो पहल की गई थी वो आज अपने मुकाम तक पहुँच गई। बता दें कि इससे पहले नैनीताल हाईकोर्ट ने भी विधानसभा कर्मचारियों को बर्खास्त करने के विधानसभा सचिवालय के आदेश को सही ठहराया था।
वहीं, सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी भूषण ने कहा कि कोर्ट का यह फैसला उत्तराखंड के युवाओं की जीत है। उन्होंने कहा कि मैंने पहले भी कहा था कि कठोर निर्णय है, लेकिन युवाओं की भलाई के लिए मैं ये निर्णय लेने से पीछे नहीं हटूंगी। उन्होंने इस फैसले के लिए सुप्रीम कोर्ट का आभार जताया।

सीएम ने की थी पहल
विधानसभा में बैकडोर एंट्री पर लगे कर्मचारियों को हटाने की कार्रवाई सीएम पुष्कर सिंह धामी की पहल के बाद हुई थी। कार्रवाई के लिए उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर अनुरोध किया था। जांच के बाद कर्मियों को हटाने की फाइल आते ही उन्होंने अनुमोदन दे दिया था।

228 कर्मियों को किया था बर्खास्त
विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूरी भूषण ने पूर्व प्रमुख सचिव डीके कोटिया की अध्यक्षता में बनाई समिति की सिफारिशों के आधार पर 228 कर्मचारियों को बर्खास्त किया था।

राज्य में औद्योगिक संस्थानों को हर प्रकार की सुविधा देने के किये जा रहे प्रयास-सीएम

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि उत्तराखण्ड में औद्योगिक विकास के लिए राज्य सरकार द्वारा औद्योगिक नीति में उद्योगपतियों के सुझावों को भी शामिल किया गया है। सरकार का प्रयास है कि राज्य में अधिक से अधिक निवेश हो तथा पूर्व से स्थापित उद्योगों को और बेहतर सुविधाएं उपलब्ध हो। गुरूवार को मुख्यमंत्री आवास स्थित मुख्य सेवक सदन में एग्रो फूड प्रोसेसिंग कॉन्क्लेव 2022 में कृषि, उद्यान, फूड प्रोसेसिंग से जुड़े देश एवं विदेश के उद्योगपतियों के साथ राज्य में निवेश की संभावनाओं पर चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में लॉजिस्टिक पॉलिसी शुरू की जा रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड की भूमि संस्कृति और आध्यात्म का केंद्र है। प्राकृतिक सौंदर्य एवं बेहतर मानव संसाधन दोनों उत्तराखण्ड के पास हैं। राज्य में औद्योगिक संस्थानों को हर प्रकार सुविधा देने के प्रयास किये जा रहे हैं। राज्य में हवाई, रेल एवं संड़क कनेक्टिविटी का तेजी से विस्तार हो रहा है। इसके लिए औद्योगिक संस्थानों के प्रतिनिधियों से समय-समय पर संवाद स्थापित किये गये हैं। राज्य में औद्योगिक विकास के लिए जो महत्वपूर्ण सुझाव मिले हैं, उन्हें राज्य की औद्योगिक नीति में शामिल किया गया है। इस कॉन्क्लेव को “एडवांटेज उत्तराखण्ड“ हेतु समर्पित किया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड के ग्रामीण क्षेत्रों में भी लघु उद्योगों के लिए अनेक संभावनाएं हैं। राज्य में बागवानी, जैविक खेती, औषधीय व सुगंधित पौधों की खेती के क्षेत्र में अनेक संभावनाएं हैं। राज्य में फार्मास्युटिकल उद्योग, ऑटोमोबाइल उद्योग, खाद्य प्रसंस्करण उद्योग आज अच्छा कारोबार कर रहा है। राज्य ने हाल ही में इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर, एक फार्मास्युटिकल पार्क और एक अरोमा पार्क स्थापित किया है।
कृषि मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि देश के विकास में कृषि का बहुत बड़ा योगदान है। उत्तराखण्ड में जैविक एवं प्राकृतिक खेती को अधिक बढ़ावा दिया जा रहा है। उद्योगों के विकास के लिए राज्य में विभिन्न अनुमतियों के लिए सिंगल विंडो सिस्टम लागू है। 11 फसलों को जी.आई. टैग किया जा रहा है। कीवी, सेब एवं मोटे अनाजों के उत्पादन को बढ़ाने के लिए अनेक प्रयास किये जा रहे हैं।
पशुपालन मंत्री सौरभ बहुगुणा ने कहा कि राज्य के पर्वतीय क्षेत्रों में आजीविका का सबसे बड़ा संसाधन पशुपालन, दुग्ध एवं इससे संबंधित उत्पाद हैं। उन्होंने कहा कि राज्य में डेयरी उत्पादों के प्रोडक्शन के साथ ही उनकी मार्केटिंग पर भी ध्यान दिया जा रहा है। दुग्ध एवं उनसे संबंधित उत्पादों के क्षेत्र में राज्य में अनेक संभावनाएं हैं। उत्तराखण्ड में प्रतिभाओं की कमी नहीं हैं, इन प्रतिभाओं को उजागर करने की दिशा में ध्यान देने की जरूरत है। इसमें औद्योगिक संस्थानों की बड़ी भूमिका हो सकती है।
मुख्य सचिव डॉ. एस.एस. संधू ने कहा कि राज्य में औद्योगिक विकास के लिए औद्योगिक संस्थानों को हर संभव सुविधा देने के प्रयास किये गये हैं। राज्य में निवेशकों को लाईजन ऑफिसर की जरूरत होगी तो, उपलब्ध कराये जायेंगे। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड में सड़क कनेक्टिविटी का तेजी से विस्तार हो रहा है। अवस्थापना विकास पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। औद्योगिक शांति में उत्तराखण्ड अग्रणी राज्य है। राज्य में औद्योगिक विकास की अनेक संभावनाएं हैं। राज्य में निवेश से निवेशकों को भी फायदा होगा एवं स्थानीय लोगों के रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।
सचिव आर. मीनाक्षी सुंदरम ने कहा कि राज्य में दो मेगा फूड प्रोसेसिंग पार्क हैं। काशीपुर में अरोमा पार्क भी बनाया गया है। कीवी के उत्पादन में राज्य में अच्छा कार्य हो रहा है। हर्बल उत्पादों एवं डेयरी के विकास में भी राज्य में अनेक संभावनाएं हैं।
सचिव डॉ. पंकज कुमार पाण्डेय ने लॉजिस्टिक नीति, र्स्टाटअप नीति, नई औद्योगिक नीति, सर्विस सेक्टर नीति सहित राज्य सरकार द्वारा औद्योगिक विकास से संबंधित विभिन्न प्रयासों की जानकारी दी।
सचिव बी.वी.आर.सी पुरूषोत्तम ने सभी निवेशकों का स्वागत करते हुए कहा एग्रीकल्चर, हॉर्टिकल्चर एवं डेयरी पर आधारित इस कॉन्क्लेव में इन क्षेत्रों से जुड़े निवेशकों को आमंत्रित किया गया है। इन क्षेत्रों में राज्य में कार्य करने के लिए अनेक संभावनाएं हैं।
पतंजलि ग्रुप के एमडी आचार्य बालकृष्ण ने कहा कि कृषि एवं उद्यान के क्षेत्र में उत्तराखण्ड में अनेक संभावनाएं हैं। राज्य में 4 तरह के एग्रो क्लाइमेटिक जोन हैं। भारत का पहली फूड प्रोसेसिंग यूनिट उत्तराखण्ड में स्थापित हुई। एरोमैटिक एवं मेडिसनल क्षेत्र में राज्य में काफी संभावनाएं हैं। उन्होंने कहा कि राज्य बद्री गाय के दूध, घी एवं एन्य उत्पादों को और अधिक प्रमोट करना होगा। राज्य की औषधीय गुणों वाली दालों की ब्रांडिंग पर भी ध्यान देना होगा।
इस अवसर पर विभिन्न औद्योगिक संस्थानों के प्रतिनिधियों ने अपने सुझाव दिये।

धामी सरकार जिम कार्बेट पार्क को विश्व पटल पर लाने के लिए तैयार कर रही कार्ययोजना

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में सचिवालय में आयोजित उत्तराखण्ड राज्य वन्यजीव बोर्ड की 18वीं बैठक में निर्णय लिया गया कि प्रदेश में मानव वन्यजीव संघर्ष में किसी व्यक्ति की मृत्यु होने पर उनके परिवार को देय अनुग्रह राशि 4 लाख रूपये से बढ़ाकर 6 लाख रूपये दी जायेगी। गंभीर रूप से घायल होने पर अनुग्रह राशि 50 हजार रूपये से बढ़ाकर 1 लाख रूपये दी जायेगी। मानव वन्यजीव संघर्ष में क्षतिपूर्ति के लिए 2 करोड़ रूपये का कॉरपस फण्ड बनाया जायेगा। शिवालिक एलीफेन्ट रिजर्व की पुर्नस्थापना के प्रस्ताव को अनुमोदित किया गया।
राज्य वन्यजीव बोर्ड की बैठक में निर्णय लिया गया कि प्रदेश में जिम कार्बेट ट्रेल की स्थापना की जायेगी। जिम कार्बेट से जुड़े स्थानों को विश्व पर्यटन मानचित्र में लाने के लिए पर्यटन विभाग के सहयोग से एक कार्ययोजना बनाई जायेगी। इसमें जिम कार्बेट से जुड़े विभिन्न स्थानों पर पट्टिका का निर्माण, ट्रैक मार्गों का जीर्णाेधार किया जायेगा एवं होम स्टे को बढ़ावा दिया जायेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि ये कार्य चरणबद्ध तरीके से शुरू किये जाएं। राजाजी टाइगर रिजर्व के अन्तर्गत स्थित चौरासी कुटिया का अन्तरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार विकास किया जायेगा। यह क्षेत्र पर्यटन की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। पर्यटन विभाग के सहयोग से यह कार्य किया जायेगा। मुख्यमंत्री की घोषणा के क्रम में जन सुविधा एवं पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए विधानसभा पुरोला के विकासखण्ड मोरी में धौला से वरी सेवा डोखरी 12.9 किमी मोटर मार्ग एवं दुगड्डा ब्लॉक के पुलिण्डा-तच्छाली-स्यालिंगा 5 किमी मोटर मार्ग का निर्माण किया जायेगा। योग एवं पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से रामबाड़ा में संग्रहालय एवं छोटी लिनचोली में चिन्तन स्थल के निर्माण किया जायेगा।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अधिकारियों को निर्देश दिये कि मानव वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिए और प्रभावी प्रयासों की जरूरत है। इसके लिए वन विभाग एवं प्रशासन को सामंजस्य से कार्य करना होगा। मानव वन्यजीव संघर्ष की घटना की सूचना प्राप्त होते ही संबंधितों को अनुग्रह राशि 15 दिन के अन्दर प्राप्त हो जाए। यह सुनिश्चित किया जाए कि किसी को अनावश्यक कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें। उन्होंने कहा कि बुग्यालों के संरक्षण की दिशा में भी विशेष ध्यान दिया जाए। बंदरों से फसलों को होने वाली क्षति को रोकने के लिए प्रभावी प्रयासों की जरूरत है, इसके समाधान के लिए एक व्यापक कार्ययोजना बनाई जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि वनों के संरक्षण एवं मानव वन्य जीव संघर्ष को कम करने के लिए वन विभाग के अधिकारी जन सहयोग भी लें, जन भागीदारी एवं जन सहयोग से अनेक समस्याओं का समाधान हो सकता है। उन्होंने बायो फेंसिंग पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिये।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हमें इकोलॉजी और इकोनॉमी में संतुलन बनाकर आगे बढ़ना है। पर्यावरण संतुलन के साथ ही विकास पर ध्यान दिया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री ने पर्यावरण संरक्षण के लिए मिशन लाइफ का जो मंत्र दिया है, उनका अनुसरण कर हमें आगे बढ़ना है। जल संरक्षण पर विशेष ध्यान दिया जाए। जलवायु परिवर्तन के शमन की दिशा में हमें प्रभावी प्रयास करने होंगे। उन्होंने कहा कि आज बैठक में जो निर्णय लिये गये हैं, अगली बैठक में इन निर्णयों पर कार्य प्रगति की पूरा ब्योरा प्रस्तुत किया जाए।
वन मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि जंगलों को बचाने के लिए जन सहयोग बहुत जरूरी है। वनों से लोगों की आजीविका बढ़ाने की दिशा में और प्रयासों की जरूरत है। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड वन सम्पदाओं वाला राज्य है। पर्यावरण संरक्षण के लिए उत्तराखण्ड की जिम्मेदार और बढ़ जाती है। प्रदेश में पिछले 5 सालों में हिम तेन्दुओं की संख्या 86 से बढ़कर 121 हो गई है।
बैठक में विधायक रेनू बिष्ट, राम सिंह कैड़ा, अनिल नौटियाल, मुख्य सचिव डॉ. एस.एस.संधु, प्रमुख सचिव आर.के सुधांशु, प्रमुख वन संरक्षक विनोद कुमार सिंघल, मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक उत्तराखण्ड डॉ. समीर सिन्हा, एडीजी वी. मुरूगेशन एवं उत्तराखण्ड राज्य वन्यजीव बोर्ड के अन्य सदस्यगण उपस्थित रहे।