सरकारी स्कूलों में मूलभूत सुविधायें विकसित करने पर जोर

मुख्य सचिव डॉ. एस.एस. संधु ने गुरुवार को शिक्षा विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक की। बैठक के दौरान मुख्य सचिव ने कहा कि शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार लाए जाने के लिए विभिन्न स्तरों में कार्य किए जाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि सर्वप्रथम मूलभूत सुविधाओं के विकास की दिशा में कार्य किया जाए।
मुख्य सचिव ने कहा कि स्कूलों में आवश्यकता के अनुरूप कक्षा कक्षों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। साथ ही स्कूलों में स्मार्ट क्लास, लाइब्रेरी, खेल मैदान और कंप्यूटर आदि भी उपलब्ध कराए जाएं। उन्होंने कहा कि प्रदेशभर से ऐसे स्कूलों को विकसित किए जाने हेतु साइट स्पेसिफिक प्लान बनाया जाए।
मुख्य सचिव ने कहा कि इसके लिए बजट की चिंता न की जाए। एक अच्छे प्रोजेक्ट के लिए किसी भी प्रकार से बजट की कमी नहीं होने दी जाएगी।
इस अवसर पर सचिव रविनाथ रमन, अपर सचिव योगेन्द्र यादव, महानिदेशक विद्यालयी शिक्षा बंशीधर तिवारी सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

सीएम ने परीक्षा पर चर्चा कार्यक्रम में बच्चों से किया संवाद, बढ़ाया हौसला

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने जनपद भ्रमण के दौरान थारू राजकीय इंटर कॉलेज पहुंचकर परीक्षा पे चर्चा कार्यक्रम में प्रतिभाग किया। सीएम धामी ने कॉलेज पहुंच कर अपनी पुरानी यादें ताजा की। गौरतलब है कि मुख्यमंत्री इस विद्यालय के छात्र रहे हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने विद्यार्थियों के बीच पहुंचकर अपने विद्यार्थी जीवन के अनुभव साझा करते हुए कहा कि वे जमीन पर बैठकर पढ़ाई करते थे और लिखने के लिए तख्ती का उपयोग किया करते थे। उन्होंने कहा कि उनके आगे बढ़ने में विद्यालय का बहुत बड़ा योगदान है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एग्जाम के दौरान उत्पन्न होने वाले तनाव, जिज्ञासा आदि पर मार्गदर्शन किया है, धामी ने कहा कि तनाव से दूर रहने हेतु एक्जाम वारियर परीक्षा पे चर्चा पुस्तक को अवश्य पढ़ना चाहिए।
बालिका अष्टवी राज ने प्रश्न पूछा कि जैसे परीक्षा की घड़ी नजदीक आती जा रही है, वैसे-वैसे घबराहट बढ़ती जा रही, किस प्रकार टाइम मैनेजमेंट करें कि सारे सब्जेक्ट कवर हो जाएं, इस पर मुख्यमंत्री ने कहा कि परीक्षा से घबराने की जरूरत नहीं है, कठिन लगने वाले सब्जेक्ट को अधिक समय दीजिए, शिक्षकों, दोस्तों के साथ टॉपिक एवं विषय पर विस्तार से चर्चा कीजिए। उन्होंने कहा कि मैं भी सामान्य छात्र रहा हूं, हमें किसी भी सब्जेक्ट को कठिन नहीं मानना चाहिए बल्कि एक पाठ के बाद दूसरे पाठ को इस प्रकार लेना चाहिए कि कुछ अच्छा और नया सीखने के लिए मिलेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि व्यक्ति स्वयं के लिए सबसे अच्छा टाइम मैनेजर होता है, अपनी आवश्यकता के अनुसार टाइम मैनेज करना चाहिए और प्रातःकाल जरूर उठना चाहिए तथा दिनचर्या में व्यायाम एवं खेलों को भी शामिल करना चाहिए।
मोहम्मद रेहान ने प्रश्न पूछा कि बारहवीं के बाद क्या विकल्प चुनना चाहिए, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि सभी विद्यार्थियों को यह जरूर सोचना चाहिए कि हमें किस क्षेत्र में आगे बढ़ना है, क्या करना है। धामी ने कहा कि हमें अपनी रूचि के अनुसार करियर का विकल्प चुनना चाहिए। उन्होंने कहा कि हमारे गुरु एवं अभिभावक कैरियर चुनने के लिए गाइड कर सकते हैं परंतु कैरियर का चुनाव हमें अपनी रूचि के अनुसार ही करना चाहिए।
मोहम्मद आरिफ ने प्रश्न किया कि एग्जाम के नजदीक आने पर प्रेशर एवं डिप्रेशन बढ़ता जा रहा है, पढ़ाई कैसे की जाए, इस पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि “मन के जीते जीत है, मन के हारे हार“। धामी ने कहा कि एग्जाम से डरने की जरूरत नहीं है, एग्जाम युद्ध का मैदान नहीं है और प्रश्न सिलेबस के बाहर से भी आने वाले नहीं है अर्थात प्रश्न सिलेबस से ही पूछे जाएंगे, श्री धामी ने कहा कि टाइम का ही मैनेजमेंट करना है और पूरी निष्ठा ईमानदारी एवं लगन से पढ़ाई करने के साथ-साथ व्यायाम एवं खेलकूद को भी समय देना चाहिए। प्रेरणा ने प्रश्न पूछा कि पहले और अब की पढ़ाई में क्या परिवर्तन दिखाई दे रहा है, इस पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि अंतर इतना है कि पहले तख्ती पर पढ़ाई लिखाई होती थी और टाट एवं चटाई पर बैठकर पढ़ाई करते थे। उन्होंने कहा कि साइंस एंड टेक्नोलॉजी तेजी से आगे बढ़ रही है तकनीकी ज्ञान वर्तमान के बच्चों को ज्यादा है।
प्रियांशी ने पूछा कि नकारात्मक विचारों से कैसे बचा जाए, मुख्यमंत्री ने कहा कि व्यक्ति को सकारात्मक सोच रखनी चाहिए क्योंकि सोच से ही विचार उत्पन्न होते हैं, उन्होंने कहा कि मन में सकारात्मक सोच, उत्साह एवं उमंग होनी चाहिए। हमारे मन में उत्साह होगा तो हमारे अंदर ऊर्जा आएगी और खराब सोच भूल जाएंगे। धामी ने कहा कि अपनी सोच के दायरे को कुआ की तरह सीमित न रखते हुए विशाल महासागरों की तरह बढ़ाना होगा, स्वामी विवेकानंद ने भी कहा है कि मनुष्य अनंत शक्ति एवं ऊर्जा का भंडार है।
आरिश ने प्रश्न पूछा कि स्पोर्ट्स के क्षेत्र में कौन-कौन सी योजनाएं हैं जिससे आगे बढ़ा जा सकता है, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि सरकार नई स्पोर्ट्स नीति लेकर आई है जिसमें प्रावधान किया गया है कि यदि कोई खेल क्षेत्र में अच्छा प्रदर्शन करता है तो उसके बाहर आने जाने, रहने, खाने के साथ ही नौकरी की भी व्यवस्था की जा रही है। उन्होंने कहा कि नौकरियों में खेल कोटा शुरू कर रहे हैं।
अनमोल प्रजापति ने प्रश्न किया कि अपनी घबराहट एवं झिझक को कैसे दूर कर सकते हैं, इस पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि हमें अपने सोचने का नजरिया बदलना चाहिए, उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि यदि आप किसी सभा में बोल रहे हैं तो यह सब मन से निकाल देना चाहिए कि कोई भी व्यक्ति हमसे ज्यादा विद्वान इस सभा में उपस्थित है, क्योंकि उस समय सभी विद्वान सिर्फ और सिर्फ आपको सुन रहे होते हैं, आपको सकारात्मक विचारों के साथ अपनी बात को रखते रहना चाहिए। श्री धामी ने कहा कि मन में नकारात्मक सोच नहीं रहनी चाहिए और मोरल हाई रखना चाहिए, झिझक स्वतः ही दूर हो जाएगी।
अंजू गंगवार ने प्रश्न पूछा कि पॉलिटिक्स में कैसे आगे बढ़ा जाए, इस पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उदाहरण देते हुए कहा कि जितने भी लोग देश दुनिया में इतिहास में अपना नाम दर्ज कराया है उनका शुरुआती जीवन में कुछ बनने के लिए नहीं सोचा होगा, मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारा लक्ष्य होना चाहिए कि “मुझे कुछ बनने के लिए नहीं बल्कि कुछ करने के लिए बनना है“। मुख्यमंत्री ने कहा कि राजनीति ही नहीं अपितु अपनी रूचि के अनुसार चुने गए कार्य क्षेत्र में पूरी ईमानदारी निष्ठा एवं लगन, समय बाध्यता के साथ कार्य करोगे तो निश्चित ही उस क्षेत्र के लीडर कहलाओगे। इसके साथ ही रिजवान अहमद ने एनसीसी, राहुल बडोनी ने इंग्लिश मीडियम आदि के बारे में प्रश्न पूछा, जिनका जवाब भी मुख्यमंत्री ने दिया।
मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर ऑडिटोरियम को आधुनिक बनाने, मुख्य भवन की मरम्मत कराने तथा फील्ड-खेल मैदान का सौंदर्यीकरण कराने की घोषणा की।
इस दौरान जिलाधिकारी युगल किशोर पंत, एसएसपी मंजूनाथ टीसी, मुख्य विकास अधिकारी विशाल मिश्रा, मुख्य शिक्षा अधिकारी आरसी आर्य सहित विद्यार्थी तथा शिक्षक आदि उपस्थित रहे।

200 विद्यालयों में नये सत्र से शुरू होंगे सात व्यावसायिक पाठ्यक्रम

सूबे में शिक्षा के डिजिटलाइजेशन को लेकर राज्य सरकार लगातार प्रयासरत है। इसी क्रम में वर्ष 2023-24 तक सूबे के 1124 स्कूलों में स्मार्ट क्लासेज तैयार कर बच्चों को हाईब्रिड माध्यम से पढ़ाया जायेगा। इसके लिये शिक्षा विभाग ने समग्र शिक्षा के अंतर्गत आईसीटी परियोजना के तहत विद्यालयों का चयन किया है। इसके साथ ही राज्यभर के 200 अन्य विद्यालयों में व्यावसायिक पाठ्यक्रम भी शुरू किये जायेंगे। समग्र शिक्षा के अंतर्गत बीआरपीध्सीआरपी सहित राज्य व जिला स्तर पर रिक्त सभी पदों को प्रतिनियुक्ति एवं आउटसोर्स के माध्यम से मार्च 2023 से पहले भरने का निर्णय लिया गया है।
शिक्षा मंत्री डॉ0 धन सिंह रावत ने आज विद्यालयी शिक्षा महानिदेशालय में समग्र शिक्षा की समीक्षा बैठक ली। डॉ0 रावत ने बताया कि सूबे के 1124 स्कूलों में स्मार्ट क्लासेज के माध्यम से पढ़ाई कराई जायेगी, जिसके लिये शीघ्र ही सभी स्कूलों में स्मार्ट क्लासेज तैयार करने के निर्देश विभागीय अधिकारियों को दिये हैं। उन्होंने बताया कि वर्तमान में प्रदेशभर में चयनित 840 स्कूलों में से 500 विद्यालयों में वुर्चअल क्लासेज चलाई जा रही है, जबकि शेष 340 स्कूलों में भी वर्चुअल क्लासेज शीघ्र ही शुरू कर दी जायेगी। इसी प्रकार वर्ष 2023-24 के अंतर्गत सूबे के कक्षा-01 से कक्षा-12 तक के 1124 विद्यालयों में स्मार्ट क्लासेज स्थापित की जायेगी, जिसकी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। शिक्षा मंत्री डॉ0 रावत ने बताया कि सूबे के 200 स्कूलों में नये शैक्षिक सत्र से कृषि, ऑटोमोटिव, आईटी, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं हार्डवेयर, ब्यूटी एंड वेलनेस, टूरिज्म एंड हॉसपिटालिटी तथा पलम्बर सहित सात व्यावसायिक कोर्स संचालित किये जायेंगे, जबकि इससे पूर्व भी 200 विद्यालयों में आठ व्यावसायिक कार्यक्रम संचालित किये जा रहे हैं, जिसमें 18 हजार 300 बच्चों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है। विद्यालयी शिक्षा मंत्री डॉ0 रावत ने समग्र शिक्षा के अंतर्गत राज्य व जिला स्तर पर लम्बे समय से रिक्त चल रहे विभिन्न श्रेणी के पदों को न भरे जाने पर नाराजगी जताते हुये अधिकारियों को जमकर फटकार लगाई। उन्होंने कहा कि बीआरपीध्सीआरपी के 955 पदों सहित अन्य सभी रिक्त पदों को मार्च 2023 से पूर्व प्रतिनियुक्ति एवं आउटसोर्स के माध्यम से भरने के निर्देश विभागीय अधिकारियों को दिये।
बैठक में सचिव विद्यालयी शिक्षा रविनाथ रमन, अपर सचिव योगेन्द्र यादव, महानिदेशक विद्यालयी शिक्षा बंशीधर तिवारी, निदेशक माध्यमिक शिक्षा सीमा जौनसारी, निदेशक प्राथमिक शिक्षा वंदना गर्ब्याल, एपीडी समग्र शिक्षा डॉ0 मुकुल सती, संयुक्त निदेशक एस.बी.जोशी सहित अन्य विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।

भाजपा पर आरोप लगा रही कांग्रेस को सता रहा अब डर

इंसाफ की लड़ाई में सीएम पुष्कर सिंह धामी युवाओं के साथ खड़े नजर आ रहे हैं। जिस तरह से पेपर लीक प्रकरण में कार्रवाई हो रही है। उससे सरकार यह संदेश देने में सफल हो गई है कि दल के हों या विपक्षी भ्रष्टाचारियों की एक ही जगह जेल है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी साफ कह चुके हैं कि हमारी सरकार नकल माफियाओं के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति को अपनाकर कार्यरत है, नकल में जो भी संलिप्त पाया जाएगा उसके विरुद्ध कठोरतम कार्रवाई की जाएगी। प्रदेश के युवाओं के साथ किसी भी प्रकार से अन्याय न हो इसके लिए पूर्ण पारदर्शिता के साथ परीक्षाओं का आयोजन सुनिश्चित किया जाएगा।
आपको बता दें कि उत्तराखंड लोक सेवा आयोग की सहायक अभियंता (एई) और अवर अभियंता (जेई) की लिखित भर्ती परीक्षा का प्रश्नपत्र लीक करने के मामले में दो भाजपा नेताओं की भूमिका सामने आई थी। दोनों भाजपा नेताओं के बाद अब देहात के कांग्रेस से जुड़े नेताओं के नाम भी सामने आने की चर्चाएं जोरों पर हैं। वहीं, गठजोड़ का कनेक्शन भी खंगाला जा रहा है। एसआईटी के अधिकारी ज्यादा कुछ बोलने से कतरा रहे हैं। एई-जेई के पेपर लीक प्रकरण में पूर्व भाजपा मंडल अध्यक्ष संजय धारीवाल, भाजपा नेता नितिन चैहान की भूमिका सामने आने के बाद एसआईटी ने मुकदमा दर्ज कराया था। भाजपा नेता नितिन चैहान को गिरफ्तार कर लिया गया था, जबकि एक अभी हत्थे नहीं चढ़ पाया।
पेपर लीक कांड में भाजपा नेताओं के नाम सामने आने से पार्टी की भी किरकिरी हुई है। वहीं, एसआईटी जैसे-जैसे जांच कर आगे बढ़ रही, वैसे-वैसे चैंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। दोनों परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लीक मामले में भाजपा नेता संजय धारीवाल की भूमिका रही है। उसकी पहचान एजेंट के रूप में की जाती है।
अब भाजपा के बाद मामले में देहात क्षेत्र के कुछ कांग्रेस नेताओं के नाम भी चर्चा में हैं। बहरहाल, अभी एसआईटी विवेचना में साक्ष्य एकत्र कर आगे बढ़ रही है। जांच में आगे कई बड़े नाम खुलकर सामने आ सकते हैं, लेकिन अभी एसआईटी से जुड़े आलाअधिकारी कुछ खुलकर बोलने से बचते नजर आ रहे हैं।

केन्द्रीय शिक्षा मंत्री से मिले कैबिनेट मंत्री डॉ0 धन सिंह रावत

कैबिनेट मंत्री डॉ0 धन सिंह रावत ने सोमवार हो नई दिल्ली में केन्द्रीय शिक्षा एव कौशल विकास मंत्री धर्मेंद प्रधान से मुलाकात की। इस दौरान डॉ0 रावत ने केन्द्रीय शिक्षा मंत्री से केन्द्रीय गढ़वाल विश्वविद्यालय श्रीनगर में स्थाई कुलसचिव नियुक्त करने तथा कर्मचारियों की समस्याओं को लेकर विस्तृत चर्चा की। इसके साथ ही डॉ0 रावत ने एनआईटी श्रीनगर गढ़वाल के फेज-2 के निर्माण कार्यों के लिये धनराशि स्वीकृत करने तथा एनआईटी में भी स्थाई कुलसचिव तैनाता करने की मांग की।

सूबे के शिक्षा एवं स्वास्थ्य मंत्री डॉ0 धन सिंह रावत ने सोमवार को केन्द्रीय शिक्षा एवं कौशल विकास मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान से उनके कार्यालय में मुलाकात की। डॉ0 रावत ने बताया कि उन्होंने केन्द्रीय गढ़वाल विश्वविद्यालय श्रीनगर में स्थाई कुलसचिव की तैनाती करने, लम्बे समय से विभिन्न संकायों में फैक्लटी के रिक्त पदों को भरने तथा शिक्षणेत्तर कार्मिकों की विभिन्न समस्याओं के समाधान की मांग रखी। मुलाकात के दौरान डॉ0 रावत ने एनआईटी श्रीनगर के द्वितीय चरण के कार्यों के लिये शीघ्र धनराशि जारी करने तथा सुमाड़ी में निर्माण कार्य शुरू कराने की मांग भी केन्द्रीय मंत्री के समक्ष रखी।
डॉ0 रावत ने बताया कि केन्द्रीय शिक्षा एवं कौशल विकास मंत्री ने दोनों ही संस्थानों की समस्याओं को गंभीरता से लेते हुये शीघ्र निराकरण का आश्वासन दिया है। अपने दिल्ली भ्रमण के दौरान शिक्षा एवं स्वास्थ्य मंत्री डॉ0 रावत ने एनसीईआरटी नई दिल्ली के विद्या समीक्षा केन्द्र का भ्रमण कर उसके संचालन एवं मॉनिटिरिंग संबंधी जानकारियां हासिल की। उन्होंने एनसीईआरटी के अधिकारियों से शिक्षा व्यवस्था में सुधार एवं शिक्षा की गुणवत्ता में विद्या समीक्षा केन्द्र की भूमिका के बारे में भी चर्चा की।

डॉ0 रावत ने कहा कि उत्तराखंड में भी केन्द्र सरकार द्वारा विद्या समीक्षा केन्द्र स्थापित करने की स्वीकृति दी गई है, जिसकी स्थापना का कार्य शुरू कर दिया गया है, इससे पूर्व विभागीय अधिकारियों की टीम द्वारा गुजरात व केरल के विद्या समीक्षा केन्द्रों का अध्ययन भी किया जा चुका है।

इस दौरान प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष महेन्द्र भट्ट तथा पौड़ी के पूर्व विधायक मुकेश कोली भी मौजूद रहे।

पाठ्यक्रम में शामिल की जायेगी हमारी विरासत पुस्तक-शिक्षा मंत्री

स्कूलों में बच्चों के भारी-भरकम बस्तों का बोझ कम करने के लिये राज्य में संचालित सभी शिक्षा बोर्ड के साथ विचार-विमार्श कर कोई तरीका निकाला जायेगा, जिससे बच्चों के बस्ते का बोझ कम किया जा सके। इसी के साथ स्कूली बच्चों का तनाव कम करने के उद्देश्य से माह में एक दिन बैग फ्री डे निर्धारित करते हुये उनसे स्कूलों में अन्य गतिविधियां कराई जा सकती है।
यह बात शिक्षा मंत्री डॉ0 धन सिंह रावत ने आज देहरादून के एक निजी होटल में उत्तराखंड अकादमिक शोध एवं प्रशिक्षण निदेशालय एवं एससीईआरटी द्वारा आयोजितएनईपी-2020 के क्रियान्वयन एवं शैक्षणिक गुणवत्ता संवर्द्धन विषय पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला में बतौर मुख्य अतिथि कही। डॉ0 रावत ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में स्कूली बच्चों के बस्तों का बोझ उनके वजन से भी ज्यादा बढ़ गया है, जिसको कम करना उनके सर्वांगीण विकास के लिये आवश्यक हो गया है। उन्होंने कहा कि राज्य में संचालित सभी शिक्षा बोर्डों के अधिकारियों एवं शिक्षाविदों के साथ विचार-विमर्श कर बच्चों के बस्ते का बोझ कम करने का कोई नया तरीका निकालना होगा। इसके लिये चाहे बच्चों के पाठ्यक्रम को त्रिमासिक एवं अर्द्धवार्षिक के हिसाब से बांटते हुये पाठ्य पुस्तकों एवं नोट बुक्स का चयन भी किया जा सकता है। शिक्षा मंत्री ने कहा कि बच्चे कई बार लगातार पढ़ाई से ऊब जाते हैं जिससे वह तनाव में आ जाते हैं। उनकी इस समस्या को दूर करने के लिये माह में एक दिन को बैग फ्री डे निर्धारित करते हुये उस दिन बच्चों से केवल खेल-कूद, वाद-विवाद प्रतियोगिता, कृषि कार्य, सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ ही अन्य कौशल विकास से संबंधी गतिविधियां कराई जा सकती है। उन्होंने कार्यशाला में मौजूद विभागीय अधिकारियों से राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अंतर्गत भारतीय ज्ञान परम्परा पर आधारित विषयों को पाठ्यक्रम में शामिल करने तथा हमारी विरासत पुस्तक नाम से एक पाठ्य पुस्तक तैयार करने को कहा ताकि बच्चों को अपने जनपद, राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर की विरासत एवं इतिहास पुरूषों के बारे में जानकारी मिल सके। उन्होंने कार्यशाला में आये उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान, गुजरात, विद्या भारती एवं नेफा नई दिल्ली से आये शिक्षा अधिकारियों एवं विषय विशेषज्ञों का स्वागत करते हुये उनके राज्य में एनईपी पर किये गये कार्यों के प्रस्तुतिकरण के लिये आभार जताया। डॉ0 रावत ने कहा कि एनईपी के अंतर्गत किये गये कार्यों के साथ करने से सभी राज्यों को एक-दूसरे से कुछ नया सीखने को मिलेगा। शिक्षा मंत्री ने कहा कि निकट भविष्य में राज्य में संचालित विभिन्न बोर्डों के साथ टीचिंग शेयरिंग को लेकर अनुबंध किया जायेगा ताकि अच्छे शिक्षकों को एक-दूसरे बोर्ड के स्कूलों में शिक्षण कार्य के लिये बुलाया जा सकेगा, जिसका फायदा छात्र-छात्राओं को मिलेगा। कार्यशाला में शिक्षा मंत्री ने कहा कि प्रदेश के स्कूलों में 220 दिन अनिवार्य रूप से पठन-पाठन किया जायेगा, इसके लिये उन्होंने अधिकारियों को नवीन शैक्षिणिक सत्र शुरू होने से पूर्व पूरी कार्ययोजना तैयार कर शैक्षिक कैलेंडर बनाने के निर्देश दिये। साथ ही उन्होंने भविष्य में स्कूली बच्चों को जुलूस-प्रदर्शनों एवं विभाग से इतर अन्य गतिविधियों में शामिल ने किये जाने के निर्देश दिये।
कार्यशाला में सचिव विद्यालयी शिक्षा रविनाथ रमन ने कहा कि राज्य में एनईपी-2020 को लेकर जनपदों में भी कार्याशालाओं का आयोजन किया जायेगा। उन्होंने कहा कि राज्य के 4500 से अधिक प्री-प्राइमरी पाठशालाओ एवं आंगनबाडी केन्द्रों में एनईपी लागू कर ली गई है, अन्य कक्षाओं में भी धीरे-धीरे इसे लागू किया जायेगा।
कार्यशाला में गुजरात से आये आसिफ सामंत एवं कल्पेश कुमार द्वारा नवाचार के अंतर्गत सूचना और तकनीकी का समन्वयन विषय पर प्रस्तुतिकरण दिया। जिसमें बताया गया कि गुजरात में विद्यार्थियों तथा शिक्षकों की ऑनलाइन उपस्थिति, छात्रों का ऑनलाइन मूल्यांकन एवं प्रत्येक छात्र की यूनिक पहचान संख्या के द्वारा ऑन लाइन अनुश्रवण किया जाता है। इसी क्रम में एनसीईआरटी नई दिल्ली से प्रो0 इन्द्राणी भादुडी ने ग्रेड थ्री से कक्षा-12 तक बच्चों का समग्र मूल्यांकन पर प्रस्तुतिकरण दिया। जिसमें उन्होंने बताया कि बच्चों का सम्पूर्ण मूल्यांकन 360 डिग्री प्रगति कार्ड तैयार कर अभिभावक, छात्र तथा शिक्षकों के लिये शैक्षणिक प्रगति के साथ ही उनके स्वास्थ्य, अभिरूचि मूल्यों तथा जिज्ञासों का आंकलन किया जाता है।
कार्यशाला में विधायक लैंसडाउन दीलीप रावत, सचिव विद्यालयी शिक्षा रविनाथ रमन, महानिदेशक विद्यालयी शिक्षा बंशीधर तिवारी, निदेशक माध्यमिक शिक्षा एवं सीमैट सीमा जौनसारी, निदेशक प्राथमिक शिक्षा वंदना गर्ब्याल, अपर निदेशक राम कृष्ण उनियाल, अपर निदेशक माध्यमिक गढ़वाल महावीर सिंह बिष्ट, विरेन्द्र सिंह रावत, एस0पी0 खाली, डॉ0 आर0डी0 शर्मा, अजय नौडियाल, संयुक्त निदेशक दिनेश चन्द्र गौड़ सहित डायट के प्रधानाचार्य, जिला शिक्षा अधिकारी एवं खंड शिक्षाधिकारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन डॉ0 मोहन सिंह बिष्ट ने किया।

विश्वविद्यालयों में छात्रों के प्रवेश, परीक्षा, परिणाम, चुनाव व दीक्षांत में होगी एकरूपता

सूबे में बेहतर शैक्षिक वातावरण विकसित करने के उद्देश्य से सभी राजकीय विश्वविद्यालयों में एक जैसा शैक्षणिक कैलेंडर लागू किया जायेगा। जिसके अंतर्गत विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों में छात्रों के लिये एक प्रवेश, एक परीक्षा, एक परिणाम, एक चुनाव एवं एक दीक्षांत समारोह की थीम पर कार्य करते हुये एकरूपता लाई जायेगी। जिससे छात्र-छात्राओं का समय बचने के साथ ही अन्यत्र संस्थानों में प्रवेश लेने के लिये सहूलियत रहेगी। इसके अलावा उच्च शिक्षा में गुणात्मक सुधार लाने के लिये सभी शिक्षण संस्थानों को नैक मूल्यांकन कराना अनिवार्य होगा, इसके लिये कार्यशालाओं के माध्यम ये प्रशिक्षण की व्यवस्था भी की गई है।

सूबे के उच्च शिक्षा मंत्री डॉ0 धन सिंह रावत ने आज सचिवालय स्थित डीएमएमसी सभागार में उच्च शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक ली, जिसमें निदेशक उच्च शिक्षा के साथ ही प्रदेश के सभी राजकीय विश्वविद्यालयों के कुलपति, कुलसचिव एवं परीक्षा नियंत्रक उपस्थित रहे। बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि राज्य में समयबद्ध एवं गुणवत्तपरक शैक्षणिक वातावरण तैयार करने के लिये सभी विश्वविद्यालयों में प्रवेश की तिथि, परीक्षा एवं परीक्षा परिणाम, छात्र संघ चुनाव व दीक्षांत समारोह के लिये समान एकेडमिक कैलेंडर लागू किया जायेगा। इसके लिये सभी विश्वविद्यालयों के कुलपति आपस में बैठकर दो सप्ताह में शैक्षणिक कैलेंडर का ड्राफ्ट तैयार करेंगे, जिसको अगली बैठक में अंतिम रूप देते हुये स्वीकृति हेतु शासन को भेजा जायेगा। उन्होंने कहा कि अक्सर देखने में आया है कि विश्वविद्यालयों में प्रवेश की प्रक्रिया से लेकर परीक्षा के आयोजन का कार्य महीनों चलता रहा है जिससे छात्र-छात्राओं की परीक्षाएं समय पर नहीं हो पाती है तथा परिणाम घोषित करने में भी देरी होती है। इन्हीं बातों को ध्यान में रखते हुये पूरे प्रदेश में समान शैक्षणिक कैलेंडर लागूकर एकरूपता लाना आवश्यक हो गया है। डॉ0 रावत ने कहा कि सभी विश्वविद्यालयों को अपने संबद्ध महाविद्यालयों में 180 दिवस अनिवार्य रूप से कक्षाएं संचालित करनी होगी, छात्र-छात्राओं को पुस्तकालयों में बैठकर अध्ययन करने के लिये प्रेरित करना होगा तथा परीक्षा में बैठने के लिये पूर्व से निर्धारित 75 फीसदी उपस्थित को अनिवार्य रूप से लागू किया जायेगा। विभागीय मंत्री ने कहा कि उच्च शिक्षा को गुणवत्ता एवं रोजगारपरक बनाने के लिये विश्वविद्यालयों एवं सभी महाविद्यालयों को नैक मूल्यांकन कराना आवश्यक है, इसके लिये प्रदेशभर में आधा दर्जन कार्यशालाओं का आयोजन भी किया जा रहा है। डॉ0 रावत ने कहा कि सभी विश्वविद्यालयों में दीक्षांत समारोह की समान वेशभूषा व दीक्षा शपथ एकसमान होगी। एक जैसी दीक्षा शपथ के लिये संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो0 देवेन्द्र शास्त्री की अध्यक्षता में एक समिति गठित की गई है जो दीक्षा शपथ का ड्राफ्ट व वेशभूषा तय कर शासन को उपलब्ध करायेंगे।

बैठक में सचिव उच्च शिक्षा ने कहा कि नवीन शैक्षिक सत्र से सभी विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों में छात्र-छात्राओं के प्रवेश समर्थ पोर्टल से अनिवार्य रूप से किये जायेंगे। एकेडमिक गतिविधियों के साथ ही शोध कार्यों एवं कौशल विकास संबंधी पाठ्यक्रमों को वरियता दी जायेगी।
बैठक में सचिव उच्च शिक्षा शैलेश बगोली, सचिव संस्कृत शिक्षा चन्द्रेश यादव, निदेशक उच्च शिक्षा प्रो0 जगदीश प्रसाद, सलाहकार रूसा प्रो0 एम0एस0एम0 रावत समस्त राजकीय विश्वविद्यालयों के कुलपति, कुलसचिव एवं परीक्षा नियंत्रक सहित विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।

बाल युवा समागम को सीएम ने किया संबोधित

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोमवार को सचिवालय से उत्तराखण्ड विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान केन्द्र (यूसर्क) द्वारा आयोजित ‘द्वितीय बाल-युवा समागम’ कार्यक्रम में वर्चुअल प्रतिभाग किया। मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों में वैज्ञानिक अभिरुचि के विकास के लिए यूसर्क द्वारा किए जा रहे प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि यूसर्क द्वारा राज्य के छात्र-छात्राओं को वैज्ञानिक व तकनीकी क्षेत्रों में एक उत्कृष्ट मंच प्रदान किया जा रहा है, जिससे राज्य के विद्यार्थियों को राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी क्षमताओं को प्रदर्शित करने का मौका मिल रहा है। विद्यार्थियों को विज्ञान प्रदर्शनियों तथा स्किल डेवलपमेंट जैसे कार्यक्रमों से जोड़ कर उनके सर्वांगीण विकास को पूर्णता प्रदान करने के प्रयासों को भी मुख्यमंत्री ने सराहनीय पहल बताया। उन्होंने कहा कि निश्चित रूप से ये प्रयास, राज्य सरकार के ’’आत्मनिर्भर युवा- आत्मनिर्भर भारत’’ के संकल्प को पूर्ण करने में भी सहायक सिद्ध होंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में संपूर्ण विश्व भारत की युवा शक्ति के सामर्थ्य से लाभान्वित होना चाहता है। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में देश को मिली राष्ट्रीय शिक्षा नीति ने हमारे युवाओं के लिए विशेष अवसरों का सृजन किया है। नई शिक्षा नीति हमारे युवा वर्ग के विकास के लिए नए अवसरों का सृजन कर रही है। उत्तराखण्ड देश का पहला राज्य है जिसने नई शिक्षा नीति को प्रभावकारी ढंग से लागू करने का कार्य किया है। राज्य सरकार राज्य के विद्यार्थियों की अभिरुचि के अनुरूप हर संभव सहायता प्रदान करने के लिए विस्तृत योजना पर कार्य कर रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड के युवा विभिन्न क्षेत्रों में कार्य कर अपनी प्रतिभा के बल पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश व प्रदेश का नाम रोशन कर रहे हैं तथा खेल, वैज्ञानिक अनुसंधान, कला और संस्कृति के क्षेत्र में उत्तराखण्ड का गौरव बढ़ा रहे हैं। उन्होंने कहा कि आज इस अवसर पर ’’स्टेम लैब’’ का उद्घाटन भी किया गया है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि हमारे विद्यार्थियों को इस लैब के माध्यम से विज्ञान और अनुसंधान के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने के बेहतर अवसर उपलब्ध होंगे।
इस अवसर पर वर्चुअल माध्यम से कैबिनेट मंत्री डॉ. धन सिंह रावत, टिहरी विधायक किशोर उपाध्याय, यूसर्क निदेशक डा. अनिता रावत, मुख्य शिक्षा अधिकारी टिहरी ललित मोहन चमोला, प्राचार्य डायट श्री देवेन्द्र सिंह भण्डारी, कार्यक्रम समन्वयक एवं संचालक डॉ. ओमप्रकाश नौटियाल उपस्थित थे।

छात्रों से संवाद में बोले सीएम, सफलता के लिए संयम, नियम और अनुशासित जीवन जरूरी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि सफलता के लिए संयम, नियम और अनुशासित जीवन जरूरी है। मुख्यमंत्री ने गुरूवार को राजीव गांधी नवोदय विद्यालय ननूरखेड़ा में विद्यार्थियों के साथ परीक्षा पर चर्चा कार्यक्रम में छात्रों से संवाद किया। उन्होंने छात्रों को उत्तराखण्ड एवं देश का भविष्य निर्माता बताते हुए उन्हें परीक्षा की तैयारियों के लिये ज्ञानवर्धक सलाह देकर उनकी शंकाओं का समाधान किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने पेंटिंग प्रतियोगिता के प्रतिभागी छात्रों को पुरस्कार भी प्रदान किये।
मुख्यमंत्री ने कहा कि छात्रों के साथ इस आयोजन में शामिल होकर वे स्वयं को और अधिक ऊर्जा से भरा हुआ अनुभव कर रहे हैं। बच्चों की परीक्षाएं आने वाली हैं और उनके साथ इस विषय पर संवाद करना भी एक सुखद अनुभव है। इससे उन्हें अपने स्कूल के दिनों का भी स्मरण करने का अवसर मिला है। उन्होंने कहा कि उनके एक शिक्षक ने बचपन में उन्हें विद्यार्थी के पांच मुख्य गुणों के बारे में एक श्लोक के माध्यम से बताया था कि उसमें कौवे की तरह जानने की चेष्टा, बगुले की तरह ध्यान लगाने की क्षमता, श्वान निद्रा और अल्पाहारी और गृहत्यागी गुण पांच गुण होने चाहिये।
मुख्यमंत्री ने कहा कि परीक्षाओं में थोड़ा तनाव होना स्वाभाविक बात है, परन्तु जब यह तनाव बहुत अधिक बढ़ जाता है तो न केवल परीक्षा के परिणाम में इसका विपरीत असर पड़ता है बल्कि मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर भी गंभीर प्रभाव पड़ता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने कुछ समय पहले पूर्व राष्ट्रपति, भारत रत्न स्व. एपीजे अब्दुल कलाम की जीवनी पर आधारित किताब “अग्नि की उड़ान“ पढ़ी। इस किताब से वे अत्यंत प्रभावित हुए, क्योंकि यह किताब हमें बताती है कि सफलता, परिश्रम के साथ-साथ व्यक्ति की सकारात्मक सोच पर निर्भर करती है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आप लोग डा. कलाम या हमारे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सहित अनेक महान लोगों की जब जीवनी पढ़ेंगे, तब पाएंगे कि उनमें एक बात समान है और वो है सकारात्मक सोच। जब मेहनत के साथ सकारात्मक सोच का मिश्रण हो जाता है तो व्यक्ति को सफल होने से कोई नहीं रोक सकता। मुख्यमंत्री ने कहा कि छात्रों को भी ऐसी किताबें पढ़नी चाहिये। परीक्षा की तैयारियों से संबंधित प्रधानमंत्री जी ने भी एक किताब लिखी है, इसका नाम है “एग्जाम वॉरियर्स“ यह किताब अत्यंत ही रूचिपूर्ण और ज्ञानवर्धक है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अभी कुछ दिन पूर्व जहां एक ओर हमने वीर बाल दिवस मनाकर गुरू गोविंद सिंह के महान सपूतों का स्मरण किया, वहीं दूसरी ओर हमने चिर युवा सन्यासी स्वामी विवेकानंद का जन्मदिवस भी युवा दिवस के रूप में मनाया। स्वामी विवेकानंद का उनके जीवन में बहुत अधिक प्रभाव रहा है। जब अपने स्कूल के दिनों में उन्होंने उनकी यह उक्ति उठो, जागो और लक्ष्य तक पहुंचे बिना रूको मत पढ़ी तभी ठान लिया था कि जीवन में जिस भी क्षेत्र में जाउंगा, अपना 100 प्रतिशत योगदान देने का प्रयास करूंगा। उन्होंने छात्रों का आह्वान किया कि आप लोग भी जिस क्षेत्र में जाएं उस क्षेत्र में अपना 100 प्रतिशत योगदान देकर उस क्षेत्र के नेता अर्थात लीडर बनें। जैसे आप खेल के क्षेत्र में जाएं तो सचिन तेंदुलकर की भांति खेल के लीडर बने। आप गायक बनें तो लता मंगेशकर और मोहम्मद रफी जैसे महान गायक बनें और यदि आप लोग राजनीति में आए तो नरेन्द्र मोदी की भांति विश्व के सर्वाधिक लोकप्रिय नेता बनें।
मुख्यमंत्री ने छात्रों से कहा कि आप सबने इस कार्यक्रम के माध्यम से बहुत सारी पेंटिंग भी बनाई हैं। जिनमें पर्यावरण संरक्षण सहित अन्य बहुत से समाजोपयोगी विषयों को समाहित किया है। इसके लिये उन्होंने सभी के प्रयासों की सराहना भी की। मुख्यमंत्री ने छात्रों का आहवान किया कि सभी छात्र कड़े अनुशासन, सही समय प्रबंधन और अपने माता-पिता एवं गुरूजनों के आशीर्वाद से जिस भी क्षेत्र में जाए, अपने परिवार, राज्य और देश का नाम रोशन करें।
मुख्यमंत्री ने छात्रों को प्रेरित करने के लिये ‘‘मंजिल ही जीवन का किस्सा है राही बन उस तक जाना है सफलता-असफलता जीवन का हिस्सा है इनसे घबराना कैसा है उठो, जागो और संघर्ष करों यही तो बस जीवन कहता है’’ कविता भी सुनाई।
संवाद के दौरान छात्रा कु. शैलजा कुकरेती, छात्रा कु. खुशी, पूजा, निशा गुप्ता रानी, छात्र रामकरण, युवराज आदि द्वारा परीक्षा की तैयारियों एवं मुख्यमंत्री से बचपन में परीक्षाओं की तैयारी से संबंधित प्रश्नों के उत्तर में मुख्यमंत्री ने कहा कि परीक्षा के समय कुछ तनाव सभी को रहता है किंतु पहले के और अबके समय में बड़ा अंतर है। आज पूरी दुनिया आपके मोबाइल में सिमटी है। पहले संसाधनों का अभाव था, उनकी प्राइमरी शिक्षा स्लेट, दफ्ती, दवात और टाट पट्टी में बैठकर हुई। 3-4 कि.मी. पैदल चलकर स्कूल जाना पड़ता था। उन्होंने छात्रों से कहा कि वे अपनी सोच सकारात्मक रखें, आप जैसा बनना चाहेंगे वही बनेंगे। आज हमारे साथ हमारे अभिभावक के रूप में प्रधानमंत्री जैसा व्यक्तित्व है जो परीक्षा के समय छात्रों से चर्चा कर उनका मार्ग दर्शन कर रहे हैं।
इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री डॉ. धन सिंह रावत, सचिव रविनाथ रमन ने भी छात्रों को संबोधित किया। महानिदेशक विद्यालयी शिक्षा बंशीधर तिवारी ने सभी का आभार व्यक्त किया तथा सभी छात्रों को आने वाली परीक्षाओं की सफलता के लिये शुभकामना दी।

परीक्षा पर चर्चा कार्यक्रम का लाइव प्रसारण करेगा शिक्षा विभाग

शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने मीडिया सेंटर, सचिवालय में मीडिया से वार्ता करते हुए कहा कि 27 जनवरी 2023 को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी तालकटोरा स्टेडियम, नई दिल्ली से छात्रों से ‘परीक्षा पर चर्चा’ कार्यक्रम के माध्यम से संवाद करेंगे। इस कार्यक्रम का लाइव प्रसारण 9 से 12वीं कक्षा तक के सभी विद्यार्थी, शिक्षक एवं विद्यार्थियों के अभिभावक देख सकें। इसके लिए सभी विद्यालयों में आवश्यक व्यवस्थाएं की जा रही हैं। कार्यक्रम में राजकीय, राजकीय सहायता प्राप्त एवं निजी विद्यालयों के छात्र भी जुड़ेगे। परीक्षा पर चर्चा कार्यक्रम में प्रधानमंत्री से संवाद के लिए उत्तराखण्ड से 2 बच्चों का नामांकन हुआ है।
शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने कहा कि ‘परीक्षा पर चर्चा’ कार्यक्रम में राज्यपाल एवं मुख्यमंत्री भी जुड़ेंगें। मंत्रीगण, सांसदगण, विधायकगण, राज्य के पद्म पुरस्कार प्राप्तकर्ता, शिक्षा, कला एवं संस्कृति से जुड़े महानुभाव एवं नगर निगमों, नगर पालिकाओं एवं नगर पंचायतों के जनप्रतिनिधि भी राज्य के विभिन्न क्षेत्रों से इस कार्यक्रम में जुड़ेंगे। राज्य के 65464 शासकीय, अशासकीय एवं निजी विद्यालयों में यह कार्यक्रम संचालित होगा।
शिक्षा मंत्री ने कहा कि राज्य में ‘परीक्षा पर चर्चा’ कार्यक्रम के व्यापक प्रचार-प्रसार के दृष्टिगत दिनांक 20 से 23 जनवरी 2023 तक परीक्षा में चर्चा के थीम से सम्बन्धित कला/पेंटिंग प्रतियोगिता राज्य के 95 विकासखण्ड एवं 8 नगर निगमों में स्थित विद्यालयों में आयोजित की जायेगी। इस प्रतियोगिता में शीर्ष 10 स्थान प्राप्त करने वालों को पुरस्कार दिये जायेंगे। 25 प्रतिभागियों को पारितोषिक एवं सभी प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र प्रदान किये जायेंगे। इस कार्यक्रम में छात्रों के लिए जो थीम रखी गई है उनमें अपने स्वतंत्रता सैनानियों को जाने। हमारी संस्कृति ही शान है। मेरी किताब मेरी प्रेरणा। भविष्य की पीढ़ियों के लिए पर्यावरण सुरक्षा। मेरा जीवन मेरा स्वास्थ्य। मेरा स्टार्टअप सपना। सीमाओं के बिना शिक्षा। विद्यालयों में सीखने के लिए खिलौने और खेल है। शिक्षकों के लिए जो थीम रखी गई है उनमें हमारी विरासत। सीखने के लिए समर्थ वातावरण। कौशल के लिए शिक्षा। पाठ्यक्रम का कम भार और परीक्षा के लिए कोई भय नहीं। भविष्य में शिक्षा की चुनौतियाँ शामिल हैं। अभिभावकों के लिए थीम मेरा बच्चा मेरा शिक्षक । प्रौढ शिक्षा रू सभी को साक्षर बनायें। सीखना और एक साथ बढ़ना है। इस वर्ष इस कार्यक्रम में 81315 शिक्षक, छात्र एवं अभिभावकों की थीम प्राप्त हुई हैं।
इस अवसर पर सचिव शिक्षा रविनाथ रमन एवं शिक्षा महानिदेशक बंशीधर तिवारी उपस्थित रहे।