ग्रीष्मकालीन अवकाश हुआ समाप्त, शुरू हुई आनलाइन पढ़ाई


देहरादून। प्रदेश में ग्रीष्मकालीन अवकाश के बाद आज से विद्यालयों में ऑनलाइन पढ़ाई शुरू हो गई है। इस संबंध में शासन की ओर से महानिदेशक विद्यालयी शिक्षा को आदेश जारी किए गए हैं।

बता दें कि बीती 8 मई से कोविड 19 संक्रमण की दूसरी लहर की रोकथाम के दृष्टिगत प्रदेश में संचालित समस्त शासकीय, अशासकीय, निजी विद्यालय (बोर्डिंग) स्कूलों में 30 जून 2021 तक ग्रीष्मकालीन अवकाश घोषित किया गया था। ऑनलाइन बच्चों को पढ़ाने वाले शिक्षकों को पढ़ाई का रिकॉर्ड रखना होगा। मुख्य शिक्षा अधिकारी देहरादून आशा रानी पैन्यूली ने कहा कि शिक्षकों के रिकॉर्ड रखने से अंदाजा लगाया जा सकेगा कि शिक्षकों की ओर से कितना प्रतिशत पाठ्यक्रम पढ़ाया गया है। इस संबंध में जिले के सभी शिक्षकों को सूचित किया जा चुका है।

ऑनलाइन पढ़ाई के पक्ष में बोलते हुए दून के अभिभावकों ने कहा कि अभी बच्चों को स्कूल भेजना सुरक्षित नहीं है। बिना वैक्सीनेशन के बच्चों को स्कूल भेजना उनकी जिंदगी से खिलवाड़ करने जैसा होगा। ऐसे में पहले सरकार को बच्चों के लिए टीके की व्यवस्था करनी होगी। तब तक ऑनलाइन शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने पर सरकार को ध्यान देना होगा।

स्पीकर अग्रवाल ने अटल उत्कृष्ट विद्यालय छिद्दरवाला का किया नामांकरण उद्धाटन


राजकीय इंटर कॉलेज छिदरवाला अब अटल उत्कृष्ट विद्यालय के नाम से जाना जाएगा। स्पीकर प्रेम चंद अग्रवाल ने इस विद्यालय भवन के नामकरण का उद्घाटन किया।

स्पीकर ने कहा कि राज्य में अंग्रेजी और हिंदी माध्यम से 190 अटल उत्कृष्ट विद्यालयो का आज विधिवत उद्घाटन हुआ है। जिसमें ऋषिकेश विधानसभा में राजकीय इंटर कॉलेज छिदरवाला को चयनित किया गया। उन्होंने कहा है कि पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न स्वर्गीय अटल बिहारी बाजपेयी के नाम से इस विद्यालय का नामकरण कर सरकार ने सराहनीय कार्य किया है ।उन्होंने कहा है कि आधुनिक युग में अंग्रेजी एवं हिंदी माध्यम से शिक्षा को बढ़ावा देने की दृष्टि से सीबीएसई पैटर्न पर प्रदेश के लिए तमाम 190 विद्यालय संचालित किए जाएंगे। जिससे छात्रों को आगे बढ़ने के अवसर प्राप्त होंगे।

उद्घाटन समारोह के अवसर पर स्पीकर ने कहा कि उत्तराखंड प्रदेश के प्रत्येक विकासखंड में दो विद्यालयों को अटल उत्कृष्ट विद्यालय के रूप में चयनित किया गया है। जिससे भारतीय संस्कृति पर आधारित अंग्रेजी और हिंदी माध्यम की शिक्षा मिलेगी श्री अग्रवाल ने कहा है कि सूचना एवं तकनीकी युग में आधुनिक शिक्षा का अत्यंत महत्व है इसलिए इन विद्यालयों में उस प्रकार की शिक्षा दी जाएगी जिससे छात्रों को प्रतिपदा के युग में आगे बढ़ने में सोहलिया तक होगी।

इससे पूर्व कार्यक्रम का शुभारंभ पौधारोपण कर किया गया। मौके पर डोईवाला के ब्लॉक प्रमुख भगवान सिंह पोखरियाल, पूर्व जिला पंचायत सदस्य देवेंद्र नेगी, विद्यालय के प्रधानाचार्य योगेंद्र सिंह रावत, खंड शिक्षा अधिकारी उमा देवी, जिला पंचायत सदस्य रीना रागड, क्षेत्र पंचायत सदस्य अमर खत्री, पंकज किशोर, प्रधान संगठन के जिलाध्यक्ष सोबन केन्तुरा, प्रधान भगवान सिंह महर, प्रधान चमन पोखरियाल, विमला नैथानी, प्रधान कमलजीत कौर, हरीश कालुड़ा, अनीता राणा, सम्मा पवार, एसएन बहुगुणा, पितांबर पैन्यूली, भूपेंद्र रावत, चंद्रवीर धर्म सिंह आदि उपस्थित थे।

यौगिक आहार ही है वास्तविक जीवनशैलीः डॉ अर्पिता नेगी

श्री देव सुमन विश्वविद्यालय के योग विज्ञान के द्वारा आयोजित साप्ताहिक योग व्याख्यान माला में मुख्य वक्ता ऋषिकेश कैंपस की डॉ अर्पिता नेगी ने अपना संबोधन दिया। उन्होंने कहा कि यौगिक आहार के समग्र प्रभाव पर विस्तार से चर्चा की। डॉ अर्पिता ने बताया कि यौगिक आहार ही वास्तविक जीवनशैली है। जिसे आज डब्ल्यूएचओ भी स्वीकार करता है, साथ ही उन्होंने यौगिक आहार के उपनिषदीय स्वरूप में तैत्तिरीय, मैत्रेयी आदि उपनिषदों में आहार के स्वरूप को समझाया। उन्होंने यौगिक आहार और आयुर्वेदीय आहार को एक दूसरे का पूरक बताते हुए इसे स्वस्थ जीवन का आधार कहा।

बता दें कि ऑनलाइन चल रहे व्याख्यान में कुलपति प्रो. पीपी ध्यानी, परिसर निदेशक प्रो पंकज पंत, योग विभाग के समन्वयक प्रो. अजय उनियाल के साथ समस्त योग विभाग के प्राध्यापक जेपी कंसवाल, वीणा रयाल, चन्द्रेश्वरी नेगी व हिमानी नौटियाल, आशा, मयंक रैवानी, अंशुमन, निशा आदि ने प्रतिभाग किया।

सरकार ने इंटरमीडिएट की परीक्षा निरस्त करने का लिया फैसला


मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत की सहमति के पश्चात् शिक्षा मंत्री अरविन्द पाण्डे ने कोविड-19 के दृष्टिगत प्रदेश में भी इण्टरमीडिएट परीक्षा निरस्त करने की घोषणा की है। इस सम्बन्ध में बुधवार को सचिवालय में शिक्षा मंत्री अरविन्द पाण्डे की अध्यक्षता में बैठक भी आयोजित हुई। बैठक में मुख्य सचिव ओम प्रकाश, सचिव शिक्षा आर मीनाक्षी सुन्दरम, महानिदेशक शिक्षा विनय शंकर पाण्डे सहित शिक्षा विभाग के अधिकारी उपस्थित थे।

बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि प्रदेश में भारत सरकार एवं सीबीएसई बोर्ड द्वारा राष्ट्रहित में लिये गये निर्णय एवं दिशा निर्देशों के अनुसार प्रदेश में इण्टरमीडिएट परीक्षा को निरस्त किया जायेगा। शिक्षा मंत्री ने कहा कि इण्टरमीडिएट में किसी भी छात्र को अनुतीर्ण नही किया जायेगा। इस सम्बन्ध में सीबीएसई बोर्ड के मानको एवं निर्णय के अनुसार प्रदेश में भी तदनुसार कार्ययोजना तैयार करने के भी उन्होंने निर्देश दिये तथा सीबीएसई द्वारा अपनायी गई प्रक्रिया का अनुपालन किये जाने की बात कही।

बैठक के पश्चात् मीडिया से वार्ता करते हुए शिक्षा मंत्री अरविन्द पाण्डे ने बताया कि देश में कोरोना के हालात देखते हुए केन्द्र सरकार एवं सीबीएसई बोर्ड ने छात्रो, शिक्षकों एवं अभिभावकों एवं राष्ट्रहित में इण्टरमीडिएट परीक्षा को निरस्त करने का निर्णय लिया गया है उसका वे स्वागत करते हैं। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत द्वारा दिये गये निर्देशों के क्रम में वे प्रदेश में इण्टरमीडिएट परीक्षा निरस्त करने की घोषणा करते हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार का यह निर्णय कोविड 19 के दृष्टिगत प्रदेश, छात्रों शिक्षकों एवं अविभावकों के व्यापक हित में लिया गया है।

बच्चों की पढ़ाई के लिए ड्रिम्स संस्था ने बनाया ड्रिम्स ज्ञान स्टेशन ऐप

देहरादून । कोरोना काल में ऑनलाइन शिक्षा बड़ा विकल्प बन कर सामने आया है। आज बड़ी सँख्या में छात्र-छात्राएं, व विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवा ऑनलाइन माध्यम से ही पढ़ाई कर रहे हैं। आने वाला समय अब घर बैठे ऑनलाइन शिक्षा है। जिसको देखते हुए DREAMS संस्था ने बच्चों की पढ़ाई के लिए एक ऍप बनाई है । जिसका नाम DREAMS GYAN STATION है। जिसमें बच्चे घर बैठे पढ़ाई कर सकते हैं। DREAMS संस्था के सचिव दीपक नौटियाल ने बताया कि यह एप्प काफी सारी खूबियों वाला है। 7 खूबियों वाले इस एप्प से ऑनलाइन पढ़ाई काफी आसान हो जाएगी। दीपक नौटियाल ने बताया इस एप में निम्नलिखित सुविधाएं उपलब्ध है।
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1- डायरेक्ट लाइव क्लास
2- होम वर्क की विशेष सुविधा
3- ऐसाइनमेंट प्रैक्टिस
4- ऑनलाइन टेस्ट
5- चैप्टर समन्धित विडिओ
6- नोट्स
7- पेरेंट्स – टीचर कांफ्रेंसिंग
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बच्चों को रजिस्टर कराइये… सीमित सीटों के लिए ही बैच….
App का लिंक……

https://play.google.com/store/apps/details?id=com.dreamsflutter.in
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DREAMS संस्था के सचिव दीपक नौटियाल ने बताया कि आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों के लिए ऑनलाइन शिक्षा में विशेष छूट दी गई है। वर्तमान में जो मासिक (प्रत्येक महीने) का फीस चार्ट जारी किया गया है वह कुछ इस तरह है।

1 से 5 तक……500
6 से 8 तक……800
9 से 10 तक…..1000
11 से 12 तक….1500

DREAMS संस्था के सचिव दीपक नौटियाल ने बताया कि Computer course हेतु 500 रूपए प्रति माह फीस का निर्धारण किया गया है। जिसमें ADCA (12 माह) DCA (6 माह ) का कोर्स है। इसमें भी आर्थिक रूप से कमजोर 10 बच्चों को प्रति वर्ष एक बैच फ्री बनाया जायेगा जिसमें FBP (Future Beneficiary Program) के अंतर्गत कक्षा 6 से 8 तक के बच्चों को रजिस्टर किया जायेगा और उनके बेसिक कांसेप्ट पर काम किया जायेगा। इनका बैच ABCD (Arbitrary Basic Concept Development) के नाम से होगा।

आपको बता दें कि बड़ी सँख्या में छात्र-छात्राओं ने रजिस्ट्रेशन कर पढ़ाई भी शुरू कर दी है। एप्प से उन्हें पढ़ाई काफी आसान लग रही है। अविभावकों ने भी इस एप्प की तारीफ की है।

एम्स में आयोजित वेबिनार में बच्चों के बढ़ते मोटापे पर चिंता व्यक्त की गई

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान में आयोजित राष्ट्रीय वेबिनार में बच्चों में बढ़ते मोटापे की वृद्धि को रोकने के लिए जंक फूड पैकेजों में चीनी, नमक व वसा के चेतावनी लेवल को दर्शाने की आवश्यकता पर जोर दिया गया।

निदेशक प्रोफेसर रविकांत ने कहा कि इस मामले में ठोस नीति बनाने की नितांत आवश्यकता है। एम्स ऋषिकेश ने वेबिनार के माध्यम से पैकेज फूड्स में चीनी, नमक और वसा के चेतावनी लेवल को दर्शाने के लिए जनजागरुकता मुहिम की शुरुआत की है। विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों में होने वाली मोटापे की वृद्धि स्वास्थ्य की दृष्टि से खतरनाक है। राष्ट्रीय स्तर के इस वेबीनार में देश के विभिन्न मेडिकल संस्थानों के स्वास्थ्य विशेषज्ञों और चिकित्सकों ने प्रतिभाग किया। उन्होंने बताया कि जंक फूड में चीनी, नमक और वसा पर चेतावनी लेबल और इनकी मात्रा का उल्लेख होने से भारत में बच्चों में बढ़ती मोटापे की वृद्धि को रोका जा सकता है। संस्थान के डीन एकेडमिक प्रोफेसर मनोज गुप्ता ने कहा कि चिकित्सक होने के नाते हम सभी को इस समस्या को समझना होगा। इस स्थिति को रोकने के लिए अकेले बच्चे या उनके परिवार वाले ही नहीं बल्कि नीति निर्माताओं, खाद्य उद्योग और चिकित्सकों का सामुहिक कर्तव्य है।

क्लिनिकल एपिडेमियोलॉजी, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ बिलियरी साइंसेज के प्रोफेसर उमेश कपिल का कहना है कि जंक फूड वाले पैकेजों में भारत को नमक, चीनी और संतृप्त वसा के लिए स्पष्ट कट ऑफ स्थापित करने की आवश्यकता है। डब्ल्यूएचओ ने फ्रंट ऑफ पैकेजिंग लेबलिंग (एफओपीएल) को एक नीति के रूप में पहचाना है। इस नीति के लागू होने से बच्चों और उपभोक्ताओं को सूचना के साथ स्वस्थ भोजन का विकल्प चयन करने में मदद मिलेगी। एम्स ऋषिकेश में इस प्रोजेक्ट का संचालन कम्यूनिटी एवं फेमिली मेडिसिन विभाग के एसोशिएट प्रोफेसर डा. प्रदीप अग्रवाल कर रहे हैं।

प्रदेश में स्टाफ नर्स की भर्ती परीक्षा सीएम के निर्देश पर हुई स्थगित

मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने कोविड की स्थिति में अभ्यर्थियो की सुरक्षा व सुविधा हेतु चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा चिकित्सा शिक्षा विभाग के अन्तर्गत 28 मई को होने जा रही स्टाफ नर्स की सीधी भर्ती परीक्षा को प्रदेश के दो जनपदों की बजाय सभी जनपदों में आयोजित करने के निर्देश दिये हैं।

बोर्ड द्वारा इसकी व्यवस्था करने के लिए अतिरिक्त समय देने का अनुरोध करने पर मुख्यमंत्री ने उक्त परीक्षा को स्थगित कर मध्य जून तक आयोजित करने के निर्देश दिये हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान कोविड-19 संक्रमण की स्थिति में अभ्यर्थियो को आने जाने में असुविधा न हो, आवास की परेशानी ना हो और एक साथ अधिक भीङ न हो, इसलिए यह परीक्षा सभी जनपदों में करायी जाए , साथ ही यह भी निर्देश दिये की सभी जनपदों में परीक्षा को ले कर तैयारी शीघ्र पूरी कर ली जायें।

बीएससी, एमएससी सहित नेट की तैयारी कर रहे विद्यार्थी डा. खाती की पुस्तक ने भी कीजिए ज्ञान अर्जित

राजकीय महाविद्यालय ऋषिकेश (श्रीदेव सुमन विश्वविद्यालय कैंपस) के रसायन विभाग में कार्यरत प्रोफेसर डा. पूरन सिंह खाती की पुस्तक Pollutant Dynamics in some of the lakes of Nainital ऐसे युवाओं को समर्पित है, जो वर्तमान में नेट, सेट तथा पीएचडी की प्रवेश परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं। इसके अलावा ‘जल’ विषय पर जो पीएचडी करने की चाह रखते है, उनके लिए वह वरदान का कार्य करेगी। यही नहीं डा. खाती की इस पुस्तक से बीएससी तथा एमएससी के विद्यार्थियों को भी उचित लाभ मिलेगा।

डा. पूरन सिंह खाती ने इस पुस्तक को बहुत ही सरल और सहज भाषा में लिखा है इसमें उनके शोध कार्य सम्मिलित है। बतौर डा. खाती बताते हैं कि यह पुस्तक में जल से संबंधित सभी जानकारियां है, इसे विद्यार्थी गूगल पर भी सर्च कर पढ़ सकते है।

इस किताब में डॉक्टर खाती डॉक्टर खाती ने विशेष रुप से उन झीलों का वर्णन किया है। नैनीताल, भीमताल, नौकुचियाताल, खुरपा ताल तथा सात ताल इन पांच लेखों में डॉक्टर खाती ने अपना शोध कार्य किया है। आपको बता दें कि डॉक्टर खाती ने अपना शोध कार्य सुपरवाइजर प्रोफेसर एस पीएस मेहता डीएसबी केंपस नैनीताल कुमाऊं यूनिवर्सिटी नैनीताल के निर्देशन में किया है।
डॉक्टर खाती ने वाटर से संबंधित कार्य आईआईटी रुड़की, नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ हाइड्रोलॉजी, गोविंद बल्लभ पंत यूनिवर्सिटी पंतनगर तथा डब्ल्यूटीए नोएडा तथा डीएसबी परिसर नैनीताल मैं किया है।

एम्स ऋषिकेश में नर्सिंग अफसरों के लिए एक दिवसीय पेपर लेखन कार्यशाला आयोजित

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान ऋषिकेश में नर्सिंग अफसरों को रिसर्च के क्षेत्र में कार्य करने के लिए पेपर लेखन कार्यशाला का आयोजन किया गया। जिसमें उन्हें रिसर्च पेपर तैयार करने के तौर-तरीके बताए गए।

गौरतलब है कि एम्स संस्थान की ओर से नर्सिंग के क्षेत्र में रिसर्च गतिविधियों को आगे बढ़ाने के लिए सततरूप से कार्य किया जा रहा है, जिससे नर्सिंग ऑफिसरों के अनुभव व अनुसंधान से मरीजों को उपचार में अधिकाधिक लाभ मिल सके। इसके लिए नर्सिग ऑफिसरों को अनुसंधान के क्षेत्र में आगे बढ़ने के अवसर प्रदान करने के लिए प्रशिक्षण कार्यशालाओं का आयोजन किया जा रहा है। हाल ही में संपन्न हुई तीन दिवसीय कार्यशाला में विशेषज्ञों ने नर्सिंग ऑफिसर्स को रिसर्च से संबंधित विषयों, अनुभव व अन्य महत्वपूर्ण बिंदुओं का प्रशिक्षण दिया था। जिसके लिए संस्थान के 1000 नर्सिंग ऑफिसरों ने अपना पंजीकरण कराया है। जिन्हें प्रत्येक माह 40-40 के बैच में रिसर्च के क्षेत्र में कार्य करने के लिए प्रशिक्षित किया जाएगा।
इसी क्रम में संस्थान में एक दिवसीय रिसर्च पेपर लेखन प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित की गई। जिसमें एम्स निदेशक प्रो. रविकांत ने कार्यशाला में शामिल होने वाले प्रतिभागी नर्सिंग ऑफिसरों को रिसर्च के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। निदेशक एम्स प्रो. रवि कांत ने कहा ​कि नर्सिंग से जुड़े लोग अधिक समय तक मरीजों के बीच होते हैं, लिहाजा नर्सिंग के क्षेत्र में रिसर्च व उनके अनुभव से मरीजों को और बेहतर चिकित्सा सेवा मिल सकेगी। इसके लिए नर्सिंग ऑफिसरों को अनुसंधान के लिए आगे आना होगा।

डीन एकेडमिक प्रोफेसर मनोज गुप्ता, डीन रिसर्च प्रो. वर्तिका सक्सेना व प्रिंसिपल कॉलेज ऑफ नर्सिंग डा. वसंथा कल्याणी ने अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए इस तरह की कार्यशालाओं की प्रशंसा की। कार्यशाला की समन्वयक रूपिंदर देओल ने बताया ​कि कार्यशाला के लिए संस्थान के लगभग 1000 नर्सिंग ऑफिसरों ने रजिस्ट्रेशन कराया है, जिन्हें आने वाले महीनों में अगल अगल बैच में प्रशिक्षित किया जाएगा। साथ ही उम्मीद जताई कि कार्यशाला के बाद अधिकाधिक संख्या में नर्सिंग ऑफिसर शोध के लिए प्रेरित होंगे और अपने रिसर्च पेपर्स पब्लिश कराएंगे। कार्यशाला में सभी नर्सिंग फैकल्टी ने बतौर प्रशिक्षक प्रतिभाग किया।

एम्स ऋषिकेशः नर्सिंग क्षेत्र के लिए प्रशिक्षण कार्यशाला का हुआ शुभारंभ


अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान ऋषिकेश में तीन दिवसीय रिसर्च मैथेडोलॉजी बायो स्टेटिसटिक्स और एविडेंस बेस्ड मेडिसिन विषय पर प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन हुआ। जिसमें संस्थान के नर्सिंग ऑफिसरों, असिस्टेंड नर्सिंग सुपरिटेंडेंट व विभाग से जुड़े अन्य लोगों ने प्रतिभाग किया।

एडवासं सेंटर ऑफ कंटिन्यूअस प्रोफेशनल डेवलपमेंट सीपीडी विभाग व कॉलेज ऑफ नर्सिंग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित कार्यशाला में एम्स निदेशक प्रो. रविकांत ने कहा कि यह प्रशिक्षण नर्सिंग के क्षेत्र में अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए बेहद जरुरी है। जिसका उद्देश्य नर्सेस को अधिक से अधिक रिसर्च के लिए प्रेरित करना है। बताया कि एम्स संस्थान द्वारा शुरू किया गया यह ट्रेनिंग प्रोग्राम नर्सिंग प्रैक्टिस, नर्सिंग एजुकेशन और नर्सिंग एडमिनिस्ट्रेशन में बहुत लाभकारी साबित होगा।

डीन एकेडमिक प्रो. मनोज गुप्ता ने कहा कि रिसर्च केवल चिकित्सकों के लिए ही नहीं बल्कि नर्सिंग ऑफिसरों के लिए भी जरुरी है। उन्होंने कहा कि नर्सेस मरीजों को अधिक समय देते हैं, ऐसे में वह ​अधिक समय तक उनके बीच काम करके पेशेंट को और बेहतर सेवाएं दे सकते हैं।
डीन रिसर्च प्रो. वर्तिका सक्सेना ने नर्सिंग ऑफिसर्स के लिए शुरू किए गए इस कोर्स को महत्वपूर्ण बताया और इस पहल के लिए आयोजकर्ता विभागों को बधाई भी दी। प्राचार्य कॉलेज ऑफ नर्सिंग डा. वसंथा कल्याणी ने कहा कि संस्थान नर्सिंग के क्षेत्र में बेहतर कार्य करने में जुटा हुआ है, जिससे मरीजों को और अच्छी नर्सिंग केयर मिल सके।

प्रशिक्षण कार्यशाला की समन्वयक रूपेंद्र देयोल ने उम्मीद जताई कि इस प्रशिक्षण कार्यशाला में शामिल होने वाले नर्सिंग ऑफसर्स जल्द ही अपना रिसर्च प्रोजेक्ट संस्थान के रिसर्च सेल में पंजीकृत कराएंगे। उन्होंने कहा कि यह अनुसंधान अनुभव तक ही सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसका उपयोग मरीजों की बेहतर सेवा के लिए भी किया जाना चाहिए।
उन्होंने बताया कि अनुसंधान को बढ़ावा देने वाले इस ट्रेनिंग प्रोग्राम के लिए अब तक एम्स संस्थान के 1000 नर्सिंग ऑफिसरों ने अपना पंजीकरण कराया है। जिन्हें प्रतिमाह 40-40 नर्सिंग ऑफिसर्स के बैच में रिसर्च ट्रेनिंग दी जाएगी। जो कि आने वाले समय में नियमिततौर पर जारी रहेगी।
कार्यशाला में प्रशिक्षक जेवियर बैल्सिआल, प्रसूना जैली, डा. राजेश कुमार, मलार कोडी, रूचिका रानी, राखी मिश्रा डा. राकेश शर्मा, कल्पना ठाकुर, नीतू कटारिया आदि ने प्रतिभागियों को प्रशिक्षण दिया। इस अवसर पर मेडिकल सुपरिटेंडेंट प्रो. बीके बस्तिया, नर्सिंग प्रभारी डा. प्रदीप अग्रवाल, नर्सिंग सुपरिटेंडेंट मनीष शर्मा समेत सभी नर्सिग फैकल्टी मौजूद थे।