840 राजकीय विद्यालयों में हाइब्रिड मोड में संचालित वर्चुअल एवं स्मार्ट कक्षाओं का सीएम ने किया शुभारंभ

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राजीव गांधी नवोदय विद्यालय, ननूरखेड़ा (देहरादून) में आयोजित कार्यक्रम में प्रतिभाग करते हुए समग्र शिक्षा उत्तराखण्ड द्वारा विद्यालयी शिक्षा में आई.सी.टी. योजना के अंतर्गत 840 राजकीय विद्यालयों में हाइब्रिड मोड में संचालित वर्चुअल एवं स्मार्ट कक्षाओं के केन्द्रीयकृत स्टूडियो का शुभारंभ किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों से वर्चुअल माध्यम से संवाद भी किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में शिक्षा व्यवस्था को मजबूती प्रदान करने की इस ऐतिहासिक पहल के हम सभी साक्षी बन रहे हैं, जिससे प्रदेश के बच्चों का भविष्य उज्जवल होगा। उन्होंने कहा कि आधुनिक युग में शिक्षा केवल किताबों तक सीमित नहीं है, बल्कि डिजिटल तकनीक, वर्चुअल प्लेटफॉर्म और स्मार्ट कक्षाओं के माध्यम से अनेक संभावनाओं के द्वार खुल रहे हैं। इन नवाचारों के माध्यम से पाठ्यक्रम अधिक रोचक और सरल बन रहा है तथा दूरस्थ क्षेत्रों के विद्यार्थी भी विशेषज्ञों और शिक्षकों से सीधे संवाद कर पा रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश में 226 विद्यालयों को पीएम श्री विद्यालय के रूप में स्थापित किया गया है तथा 500 विद्यालयों में वर्चुअल कक्षाएं संचालित की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि अब विद्यार्थी ‘उत्तराखंड वर्चुअल लर्निंग एप्लीकेशन’ के माध्यम से घर बैठे आधुनिक एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त कर सकते हैं। इसके माध्यम से बच्चे स्वयं अपना मूल्यांकन भी कर सकेंगे। इस ऐप के जरिए विद्यार्थियों को देश और राज्य के जाने-माने शिक्षकों से सीखने का अवसर मिलेगा। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार दूरस्थ क्षेत्रों के विद्यार्थियों तक ऑनलाइन शिक्षा पहुँचाने के लिए 5-पीएम ई-विद्या चौनल भी संचालित कर रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में कक्षा 6 से 12 तक के मेधावी छात्र-छात्राओं को मुख्यमंत्री मेधावी छात्र प्रोत्साहन छात्रवृत्ति योजना के अंतर्गत लाभ दिया जा रहा है। राज्य के प्रत्येक विकासखंड के 10वीं एवं 12वीं के मेधावी छात्रों को भारत भ्रमण पर भेजा जा रहा है। राज्य के माध्यमिक विद्यालयों में 8 ट्रेडों में व्यावसायिक शिक्षा प्रारंभ की गई है, जिससे 42 हजार से अधिक विद्यार्थी लाभान्वित हो रहे हैं। राज्य में पहली बार 12वीं के व्यावसायिक छात्रों के लिए रोजगार मेलों का आयोजन किया गया, जिसके माध्यम से 146 विद्यार्थियों का चयन प्रतिष्ठित कंपनियों में हुआ है। इस पहल की सराहना केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने भी की है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड देश का पहला राज्य है, जहाँ बुनियादी शिक्षा के लिए राज्य पाठ्यचर्या रूपरेखा तैयार की गई है। विद्यालयों में ‘बस्तारहित दिवस’ को शामिल किया गया है। सरकार द्वारा स्थानीय भाषा एवं संस्कृति के संरक्षण हेतु गढ़वाली, कुमाऊँनी और जौनसारी भाषाओं में पुस्तकें तैयार की गई हैं। थारू, बोक्सा और रवांल्टी भाषाओं में शब्दकोश भी बनाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि ‘हमारी विरासत’ पुस्तक के माध्यम से कक्षा 6 से 8 तक के छात्रों को भारत की संस्कृति, लोक परंपरा और महान विभूतियों के बारे में अवगत कराया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 लागू की गई है। आईसीटी योजना के अंतर्गत विद्यार्थियों को डिजिटल शिक्षण संसाधनों और वर्चुअल कक्षाओं के माध्यम से आधुनिक शिक्षा से जोड़ा जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में उत्तराखंड राज्य ने देश में सर्वप्रथम राष्ट्रीय शिक्षा नीति लागू की। इसके अंतर्गत वर्ष 2022 में ‘बाल वाटिका’ की शुरुआत की गई है। गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए सभी सरकारी विद्यालयों में एन.सी.ई.आर.टी. की पाठ्यपुस्तकें अनिवार्य की गई हैं तथा राजकीय एवं सहायता प्राप्त विद्यालयों में कक्षा 1 से 12 तक के छात्रों को निःशुल्क पुस्तकें उपलब्ध कराई जा रही हैं।

इस अवसर पर शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत, विधायक उमेश शर्मा ‘काऊ’, अपर सचिव शिक्षा रंजना राजगुरु, महानिदेशक शिक्षा दीप्ति सिंह, शिक्षा विभाग के अन्य अधिकारी तथा वर्चुअल माध्यम से राज्यभर के विद्यालयों के विद्यार्थी एवं अन्य लोग उपस्थित रहे।

सीएम से मुलाकात कर परीक्षा जांच आयोग ने सौंपी अंतरिम रिपोर्ट

उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग द्वारा 21 सितंबर, 2025 को आयोजित प्रतियोगी परीक्षा में कथित अनियमितताओं की जांच हेतु राज्य सरकार द्वारा गठित एकल सदस्यीय जांच आयोग ने आज मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से भेंट कर अंतरिम रिपोर्ट प्रस्तुत की। आयोग की अध्यक्षता न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) यू.सी. ध्यानी द्वारा की गई।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि आयोग ने अल्प समय में अधिक से अधिक जनसुनवाई कर अभ्यर्थियों एवं संबंधित पक्षों से सुझाव प्राप्त करते हुए रिपोर्ट प्रस्तुत की है, जो सराहनीय है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार रिपोर्ट का परीक्षण कर अभ्यर्थियों के हित में निर्णय लेगी। उन्होंने बताया कि प्रकरण की सीबीआई जांच की संस्तुति की जा चुकी है, जिससे मामले की पूरी निष्पक्षता सुनिश्चित हो सके।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार परीक्षाओं की शुचिता, पारदर्शिता और विश्वसनीयता बनाये रखने के लिए पूर्णतः प्रतिबद्ध है। भविष्य में यह सुनिश्चित किया जाएगा कि किसी भी भर्ती परीक्षा में अनियमितता की कोई संभावना न रहे और अभ्यर्थियों तथा उनके अभिभावकों का विश्वास राज्य की परीक्षा प्रणाली पर बना रहे।

ग्राम सराय स्थित भूमि के क्रय में अनियमितताओं से संबंधित प्रकरण पर विभागीय जांच की प्रक्रिया प्रारंभ

नगर निगम, हरिद्वार द्वारा ग्राम सराय स्थित भूमि के क्रय में अनियमितताओं से संबंधित प्रकरण को लेकर उत्तराखण्ड शासन ने कार्रवाई की गति तेज कर दी है। शासन द्वारा इस पूरे प्रकरण में तीन अधिकारियों-तत्कालीन जिलाधिकारी कर्मेन्द्र सिंह, तत्कालीन नगर आयुक्त वरुण चौधरी तथा तत्कालीन उप जिलाधिकारी अजयवीर सिंह, (निलंबित) के विरुद्ध विभागीय जांच की प्रक्रिया प्रारंभ की गई है।

गृह विभाग से जारी आदेश के अनुसार, प्रथम दृष्टया संलिप्तता पाए जाने के आधार पर अजयवीर सिंह के विरुद्ध उत्तराखण्ड सरकारी सेवक (अनुशासन एवं अपील) नियमावली, 2003 (यथासंशोधित) के प्रावधानों के तहत अनुशासनात्मक कार्यवाही प्रचलित की गई है। उन्हें पूर्व में आरोप पत्र निर्गत करते हुए अपना पक्ष प्रस्तुत करने का अवसर दिया गया था, जिसके प्रत्युत्तर में उन्होंने दिनांक 16 सितम्बर, 2025 को अपना लिखित अभिकथन प्रस्तुत करते हुए सभी आरोपों को अस्वीकार किया।

शासन ने अब इस प्रकरण में निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने हेतु डॉ. आनन्द श्रीवास्तव (आई.ए.एस.), अपर सचिव, उत्तराखण्ड शासन को अजयवीर सिंह के विरुद्ध जांच अधिकारी नियुक्त किया है। उन्हें एक माह के भीतर जांच आख्या शासन को प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।

ज्ञातव्य है कि प्रकरण से संबंधित अन्य दो अधिकारियों-तत्कालीन जिलाधिकारी हरिद्वार कर्मेन्द्र सिंह और तत्कालीन नगर आयुक्त वरुण चौधरी के विरुद्ध चल रही विभागीय जांच के लिए शासन ने सचिन कुर्वे (आई.ए.एस.) को जांच अधिकारी नामित किया है।

राज्य सरकार भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के प्रति शून्य सहिष्णुता की नीति पर दृढ़ता से कार्य कर रही है। शासन व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना हमारी सर्वाेच्च प्राथमिकता है। किसी भी स्तर पर अनियमितता पाए जाने पर कठोरतम कार्रवाई की जाएगी, चाहे वह किसी भी स्तर का अधिकारी क्यों न हो।
– पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री

दून विवि में इंडियन एसोसिएशन ऑफ सोशल साइंस इंस्टीट्यूशंस के 24वें अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का हुआ शुभारंभ

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने दून विश्वविद्यालय, देहरादून में आयोजित इंडियन एसोसिएशन ऑफ सोशल साइंस इंस्टीट्यूशंस के 24वें अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का शुभारंभ किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इंडियन एसोसिएशन ऑफ सोशल साइंस इंस्टीट्यूशंस के वार्षिक अधिवेशन के विभिन्न सत्रों में सामाजिक कल्याण, अर्थशास्त्र, रोजगार, उद्योग, कृषि, तकनीकी, पर्यावरण और नगरीकरण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर देश-विदेश के प्रख्यात विद्वानों द्वारा सार्थक विचार-विमर्श किया जाएगा। इस चिंतन-मंथन से सामाजिक नीतियों के प्रभावी क्रियान्वयन एवं राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर जन-जन के कल्याण के लिए ठोस एवं व्यवहारिक उपायों का संकलन भी हो सकेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास’ के मूलमंत्र के साथ निरंतर कार्य कर रहा है। उनके प्रधान सेवक बनने के बाद पिछले 11 वर्षों में अनेक नीतियों एवं योजनाओं के माध्यम से प्रत्येक वर्ग के कल्याण की दिशा में संकल्पपूर्वक प्रयास किए गए हैं। अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति के कल्याण के लिए प्रारंभ की गई जन-धन योजना, उज्ज्वला योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना, आयुष्मान भारत योजना जैसी अनेक जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ देश के करोड़ों नागरिकों को प्राप्त हो रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सौर मिशन, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, ग्रीन हाइड्रोजन मिशन, स्वच्छ भारत मिशन, नमामि गंगे अभियान और प्लास्टिक मुक्त भारत अभियान जैसी योजनाएं पर्यावरण संरक्षण में अहम भूमिका निभा रही हैं। प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन एवं सहयोग से राज्य सरकार भी प्रदेश में सामाजिक न्याय की अवधारणा को मजबूत करने के साथ सतत विकास की दिशा में निरंतर कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि वृद्धावस्था पेंशन बढ़ाने के साथ ही पति-पत्नी दोनों को पेंशन देने तथा सभी पेंशन योजनाओं में त्रैमासिक के स्थान पर मासिक भुगतान की शुरुआत की गई है। राज्य सरकार ने प्रत्येक निर्णय में प्रदेश में सामाजिक न्याय स्थापित करने का कार्य किया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार वर्ष 2030 तक सतत विकास के लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए पूर्ण प्रतिबद्धता के साथ संकल्पित होकर कार्य कर रही है। राज्य में आर्थिक, सामाजिक और पर्यावरणीय स्थिरता बनाए रखते हुए सतत विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने के साथ-साथ एक सुरक्षित व न्यायपूर्ण व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। राज्य सरकार ने इकोनॉमी और इकोलॉजी के संतुलन को सुनिश्चित करने के लिए त्रि-स्तंभीय एवं नौ-सूत्रीय नीति की शुरुआत की है, जो सतत विकास के लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में गरीबी उन्मूलन, खाद्य सुरक्षा, पेयजल एवं स्वच्छता, जन्म के समय लिंगानुपात, स्वच्छ ऊर्जा, शहरी विकास, वित्तीय समावेशन और जलवायु परिवर्तन जैसे क्षेत्रों में निरंतर कार्य किए जा रहे हैं। सरकार मुख्यमंत्री महिला उद्यमिता प्रोत्साहन योजना, सौर ऊर्जा क्रांति अभियान, स्मार्ट सिटी मिशन और मुख्यमंत्री शहरी आजीविका योजना जैसी योजनाओं के माध्यम से इन क्षेत्रों को सशक्त बनाने का कार्य कर रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि नीति आयोग द्वारा सतत विकास के लक्ष्यों को प्राप्त करने में उत्तराखंड देश में प्रथम स्थान पर आया है। राज्य में जलवायु परिवर्तन, आपदा प्रबंधन, स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच, सतत कृषि और जल संसाधन प्रबंधन जैसी कई चुनौतियां हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने सामाजिक विकास के क्षेत्र में सामूहिक प्रयासों को सशक्त बनाने के लिए टाटा ट्रस्ट, नैस्कॉम और वाधवानी फाउंडेशन के साथ तीन अत्यंत महत्वपूर्ण समझौते किए हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि टाटा ट्रस्ट के सहयोग से राज्य में जल प्रबंधन, पोषण, टेलीमेडिसिन, ग्रामीण आजीविका और हरित ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में समग्र और सतत विकास को सशक्त किया जा रहा है, वहीं नैस्कॉम और वाधवानी फाउंडेशन के सहयोग से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा साइंस, साइबर सुरक्षा, पायथन, जनरेटिव एआई, कौशल विकास एवं स्वरोजगार जैसे क्षेत्रों में युवाओं को आवश्यक कौशल और ज्ञान प्रदान किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सभी नवाचारों के माध्यम से उत्तराखंड को सस्टेनेबल डेवलपमेंट के एक मॉडल स्टेट के रूप में स्थापित किया जा सकेगा।

इस अवसर पर नीति आयोग के सदस्य प्रो. रमेश चंद, कुलपति दून विश्वविद्यालय प्रो. सुरेखा डंगवाल, आईएएसएसआई के अध्यक्ष एवं नालंदा विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सचिन चतुर्वेदी, प्रो. आर.पी. ममगांई, प्रो. आई.सी. अवस्थी, प्रो. अलख शर्मा एवं विषय विशेषज्ञ उपस्थित थे।

सरकार का प्रयास कर्मचारियों को कठिन परिस्थितियों में उनके परिवार को हर संभव सुविधा उपलब्ध होः धामी

उपनल के माध्यम से सेवारत तीन कार्मिकों की दुर्घटना में मुत्यु होने के उपरान्त उनके आश्रितों को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सचिवालय में 50-50 लाख की सहायता राशि के चेक प्रदान किये। उपनल के माध्यम से विद्युत वितरण खण्ड, जसपुर में तैनात बृजेश कुमार की जनवरी 2025, ब्रिडकुल देहरादून में तैनात तसलीम की नवम्बर 2024 और विद्युत वितरण खण्ड हरिद्वार में तैनात संजीव कुमार की फरवरी 2025 में सड़क दुर्घटना में मृत्यु हो गई थी।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने निर्देश पर उत्तराखण्ड के सरकारी, अर्द्ध सरकारी और उपनल कर्मचारियों के हितों को ध्यान में रखते हुए कॉर्पाेरेट सैलरी पैकेज के तहत अनेक प्रकार की सुविधाएं और बीमा लाभ प्रदान करने के लिए राज्य सरकार और बैंकों के बीच एमओयू किया गया है। राज्य सरकार की इस महत्वपूर्ण पहल के अन्तर्गत कार्मिक की दुर्घटना में मृत्यु होने पर उनके परिजनों को सहायता राशि प्रदान की जा रही है। मुख्यमंत्री ने उपनल कर्मचारियों के लिए यह सुविधा प्रदान करने के लिए पंजाब नेशनल बैंक का आभार भी व्यक्त किया।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि कोई भी सहायता राशि मानव की कमी को तो पूर्ण नहीं कर सकती है, लेकिन कठिन समय में उनके परिवारजनों को आर्थिक संबल प्रदान करने में मदद करती है। सरकार का प्रयास है कि कर्मचारियों को सुरक्षित और सम्मानजनक कार्य वातावरण के साथ ही कठिन परिस्थितियों में उनके परिवार को हर संभव सुविधा उपलब्ध हो सके। उन्होंने कहा कि कॉर्पाेरेट सैलरी पैकेज के तहत राज्य में कर्मचारियों को बीमा और अन्य सुरक्षा प्रदान की जा रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में राज्य सरकार द्वारा अनेक नवाचार किए जा रहे हैं। कर्मचारियों के हितों में अनेक निर्णय लिए गए हैं।

इस अवसर पर प्रमुख सचिव आर.के.सुधांशु, सचिव दीपेन्द्र चौधरी, अपर सचिव मनमोहन मैनाली, मेजर जनरल शम्मी सबरवाल (से.नि.), एमडी उपनल जे.एन.एस. बिष्ट, पंजाब नेशनल बैंक के जोनल हेड अनुपम, डिप्टी जनरल मैनेजर अभिनंदन, एजीएम अजीत कुमार उपाध्याय मौजूद थे।

मुख्य सचिव की अध्यक्षता में यूपीसीएल की 125 वीं बोर्ड बैठक आयोजित हुई

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन की अध्यक्षता में सचिवालय में उत्तराखण्ड पावर कार्पाेरेशन लिमिटेड की 125वीं बोर्ड बैठक सम्पन्न हुयी। बैठक के दौरान मुख्य सचिव ने बोर्ड में सचिव वित्त को भी शामिल किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने टेक्निकल पृष्ठभूमि के व्यक्ति को भी बोर्ड में शामिल किए जाने की बात कही।

अगले वित्तीय वर्ष का बजट फरवरी-मार्च तक हो जाए बोर्ड से स्वीकृतः मुख्य सचिव
मुख्य सचिव ने कहा कि प्रोजेक्ट्स की लागत को कम किए जाने के लगातार प्रयास किए जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रोजेक्ट्स के लिए लिया जाना वाला ऋण जितना सस्ता हो, उतना अच्छा। इसके लिए वित्त उपलब्ध कराने वाली एजेन्सियों से लगातार सम्पर्क किया जाए। उन्होंने निर्देश दिए कि अगले वित्त वर्ष के बजट के लिए फरवरी-मार्च तक बोर्ड से संस्तुति अनिवार्य रूप से ले ली जाए।

तीनों कार्पाेरेशन में विजिलेंस मैकेनिज्म तैयार किए जाने के दिए निर्देश
मुख्य सचिव ने तीनों कार्पाेरेशन में विजिलेंस मैकेनिज्म तैयार किए जाने के भी निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि सचिव विजिलेंस के साथ बैठक कर तीनों कार्पाेरेशन्स में शीघ्र ही विजिलेंस मैकेनिज्म तैयार किया जाए। मुख्य सचिव ने यूपीसीएल को 1 जनवरी, 2026 से ईआरपी लागू किए जाने के भी निर्देश दिए हैं। उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि तीनों कार्पाेरेशन में त्रैमासिक प्रदर्शन की समीक्षा की जाए। उन्होंने कहा कि इससे अल्पकालिक लक्ष्यों पर कार्पाेरेशन की प्रगति का आंकलन एवं सुधार के क्षेत्रों को चिन्हित कर अगली तिमाही के लिए नए उद्देश्य निर्धारित किए जा सकेंगे।

मुख्य सचिव ने नई तकनीकों के इस्तेमाल पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि नई तकनीक का उपयोग करने से पहले एक दो स्थानों पर अनिवार्य रूप से प्रयोग कर लिया जाए, ताकि तकनीक के कम सफल होने या असफल होने पर उपयोग से हटाए जाने में अधिक नुकसान न हो। उन्होंने कहा कि सभी कार्पाेरेशन को पेशेवर दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता है। उन्होंने प्रोजेक्ट्स को शुरू करने से पहले उसका तकनीकी आर्थिक व्यवहार्यता (टेक्नो इकोनॉमिक फीजीबिलिटी) परीक्षण कराए जाने की बात भी कही।

इस अवसर पर प्रमुख सचिव आर. मीनाक्षी सुन्दरम, स्वतंत्र निदेशक (बोर्ड) पराग गुप्ता, बी.पी. पाण्डेय, अपर सचिव डॉ. अहमद इकबाल, एमडी यूपीसीएल अनिल यादव, एमडी यूजेवीएनएल संदीप सिंघल एवं एमडी पिटकुल पी.सी. ध्यानी सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
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सीएस ने किया एनआईसी उत्तराखण्ड की त्रैमासिक न्यूज़लेटर ‘द डिजिटल थ्रेड‘ का विमोचन

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने एन.आई.सी. उत्तराखण्ड की प्रथम त्रैमासिक न्यूज़लेटर ‘द डिजिटल थ्रेड‘ का विमोचन किया। इस अवसर पर मुख्य सचिव ने आशा व्यक्त की कि यह न्यूज़लेटर राज्य में सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में किए जा रहे नवाचारों, सफल परियोजनाओं, डिजिटल पहलों एवं एन.आई.सी. उत्तराखण्ड की प्रमुख गतिविधियों को व्यापक रूप से आम जनमानस तक से पहुंचाने का काम करेगा। उन्होंने कहा कि ‘द डिजिटल थ्रेड‘, शासन, तकनीक और नागरिकों के बीच सेतु का कार्य करेगा।

राज्य सूचना विज्ञान अधिकारी (एन.आई.सी.) संजय गुप्ता ने कहा कि एन.आई.सी. उत्तराखण्ड राज्य में डिजिटल इंडिया मिशन को सशक्त बनाने हेतु प्रतिबद्ध है, एवं निरंतर अपने उद्देश्यों की पूर्ति के लिए कार्य कर रहा है।

इस अवसर पर ए.एस.आई.ओ. (जिला) राजीव जोशी, संयुक्त निदेशक (आई.टी.) चंचल गोयल, संयुक्त निदेशक (आई.टी.) शिवानी गोठी, सयुंक्त निदेशक (आई.टी.) रोहित चंद्रा, उप निदेशक (आई.टी.) प्रीति जोशी एवं उप निदेशक (आई.टी.) अनुज धनगर भी उपस्थित रहे।

केंद्रीय वित्त मंत्री से पूंजीगत निवेश के लिए राज्यों को विशेष सहायता योजना के अंतर्गत स्वीकृति प्रदान करने का अनुरोध

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी नेे नई दिल्ली में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से भेंट कर राज्य से संबंधित विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत चर्चा की। मुख्यमंत्री ने वित्त मंत्री को जीएसटी सुधारों के सफल क्रियान्वयन के लिए शुभकामनाएं देते हुए वित्त मंत्रालय द्वारा उत्तराखंड राज्य को दिए गए सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड राज्य के शहरी क्षेत्रों में जनसंख्या का दबाव लगातार बढ़ रहा है। पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील एवं भारी वर्षा वाले प्रदेश में नगरीय जल निकासी प्रणाली के सुधार और अपग्रेडेशन की बहुत आवश्यकता है। इसके लिए राज्य के सर्वाधिक बारिश से प्रभावित 10 जिलों के लिए स्टॉर्म वाटर ड्रेनेज सिस्टम के उन्नयन और सुधार के लिए डीपीआर तैयार की गई हैं, जिनकी कुल अनुमानित लागत रुपये 8,589.47 करोड़ है। उन्होंने केंद्रीय वित्त मंत्री से इन परियोजनाओं को पूंजीगत निवेश के लिए राज्यों को विशेष सहायता योजना के अंतर्गत स्वीकृति प्रदान करने का अनुरोध किया।

मुख्यमंत्री ने केंद्रीय वित्त मंत्री से उत्तराखंड राज्य के बाह्य सहायतित परियोजनाओं की शीघ्र स्वीकृति का भी अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की ओर से प्रस्तुत तीन महत्वपूर्ण परियोजनाओं में से उत्तराखंड क्लाइमेट रिज़िलीअन्स डेवलपमेंट प्रोजेक्ट को स्वीकृति मिल चुकी है। इसी के साथ राज्य सरकार की ओर से सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन सुदृढ़ीकरण परियोजना के लिए 850 करोड़ रुपये और जलापूर्ति व्यवस्था को प्रभावी बनाने के लिए 800 करोड़ का प्रस्ताव भी केंद्र सरकार को भेजा गया है। मुख्यमंत्री ने केंद्रीय वित्त मंत्री से इन परियोजनाओं की शीघ्र स्वीकृति कराने का अनुरोध किया।

मुख्यमंत्री धामी ने केंद्रीय वित्त मंत्री से पूर्व में मिले आश्वासन के क्रम में उत्तराखंड को वित्तीय वर्ष 2023-24 से 2025-26 के बाह्य सहायतित परियोजनाओं की सीलिंग के अतिरिक्त 4 अन्य प्रमुख परियोजनाओं को भी शीघ्र स्वीकृति प्रदान करने का अनुरोध किया। इन परियोजनाओं में 2000 करोड़ की जल एवं स्वच्छता नगरीय अवसंरचना विकास परियोजना, 424 करोड़ रुपये की डीआरआईपी 3638 करोड़ रुपए की उत्तराखंड क्लाइमेट रेसिलिएंट इंट्रा स्टेट पॉवर ट्रांसमिशन सिस्टम डेवलपमेंट और 1566 करोड़ रुपये की उत्तराखंड पॉवर डिस्ट्रीब्यूशन रिलायबिलिटी इम्प्रूवमेंट प्रोजेक्ट शामिल है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि ये सभी परियोजनाएँ राज्य के बुनियादी ढांचे, जल संसाधन प्रबंधन, ऊर्जा और सार्वजनिक सर्विस डिलीवरी व्यवस्था को मजबूती प्रदान करेंगी।

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मुख्यमंत्री धामी को हर संभव सहयोग के प्रति आश्वस्त किया।

झुग्गियों के पुनर्विकास के लिए गठित जिला स्तरीय समितियों की बैठकों को आयोजित कर लिए जाएः धामी

मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने सचिवालय में प्रदेश में झुग्गी बस्तियों के पुनर्विकास से सम्बंधित बैठक ली। मुख्य सचिव ने अधिकारियों को झुग्गियों का पुनः सर्वे कराए जाने के निर्देश दिए हैं।

मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि वर्ष 2011-12 में किए गए सर्वे में चिन्हित श्रेणी 1 एवं श्रेणी 2 के पात्र लोगों का स्थानीय निकायों और जिलाधिकारियों की सहायता से अभियान चला कर विनियमित किया जाए। उन्होंने कहा कि झुग्गियों के पुनर्विकास के लिए गठित जिला स्तरीय समितियों की बैठकों को आयोजित कर लिए जाए। इसके उपरांत राज्य स्तरीय बैठक का भी शीघ्र आयोजन किया जाए।

मुख्य सचिव ने काठबंगला प्रोजेक्ट में निर्मित आवासों का आबंटन नवम्बर 2025 तक कर लिया जाए। उन्होंने सचिव शहरी विकास को इसकी निरन्तर मॉनिटरिंग किए जाने के भी निर्देश दिए। उन्होंने निर्देश दिए कि भूमि चिन्हीकरण, आबंटन के लिए नियम, आंकलन, पात्रता एवं डीपीआर तैयार किए जाने हेतु सचिव शहरी विकास, सचिव लोक निर्माण विभाग, एमडीडीए और नगर निगम संयुक्त बैठक लेकर निर्णय लें।

इस अवसर पर सचिव नितेश कुमार झा, उपाध्यक्ष एमडीडीए बंशीधर तिवारी, अपर सचिव गौरव कुमार सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

सीएस ने राजकीय महिला गृहों की महिलाओं द्वारा निर्मित उत्पादों की प्रदर्शनी का शुभारम्भ किया

मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन द्वारा सचिवालय परिसर में राजकीय बाल देखरेख संस्थाओं के बच्चों एवं राजकीय महिला गृहों की महिलाओं द्वारा निर्मित उत्पादों की प्रदर्शनी का शुभारम्भ किया गया। इस अवसर पर मुख्य सचिव ने राजकीय बाल देखरेख संस्थाओं में रहने वाले बच्चों के लिए कौशल विकास से जुड़े प्रशिक्षण की नियमित व स्थायी व्यवस्था किए जाने हेतु अधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा कि समाज की मुख्यधारा में लाने के लिए इन बच्चों को सशक्त व स्वावलंबी बनाने के कारगर प्रयास किए जांय।

दीपावली के उपलक्ष्य में ने महिला कल्याण विभाग द्वारा स्थापित आलम्बन आउटलेट सेन्टर के माध्यम से आयोजित इस प्रदर्शनी का दीप प्रज्वलित कर शुभारम्भ करते हुए मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने बच्चों एवं महिलाओं द्वारा निर्मित आकर्षक पेंटिग्स एवं विभिन्न उत्पादों की सराहना की। मुख्य सचिव ने महिला गृहों की संवासिनियों की प्रतिभा को निखारने के लिये व्यावसायिक प्रशिक्षण प्रदान करने तथा उत्पादों की गुणवत्ता संवर्द्धन की व्यवस्था किए जाने हेतु निर्देश दिये गये। मुख्य सचिव ने बाल देखरेख संस्थाओं में रहने वाले बच्चों की शिक्षा व प्रशिक्षण के लिये विशेष प्रयास करने हेतु भी निर्देशित किया गया।

महिला कल्याण विभाग द्वारा स्थापित आलम्बन आउटलेट सेन्टर के माध्यम से आयोजित यह प्रदर्शनी आगामी 17 अक्टूबर तक चलेगी। जिसमें राजकीय बाल देखरेख संस्थाओं के बच्चों एवं राजकीय महिला गृहों की महिलाओं द्वारा निर्मित उत्पादों यथा- मोमबत्ती, करवा, दिये, चित्रकला, तोड़न, भीमल पेटिंग एवं ऐंपण पेटिंग से बने अनेक उत्पादों को प्रदर्शन एवं बिक्री के लिए रखा गया है।

इस अवसर पर महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास के सचिव चन्द्रेश यादव, निदेशक बी.एल.राणा, मुख्य परिवीक्षा अधिकारी अंजना गुप्ता, राज्य नोडल अधिकारी आरती बलोदी, जिला परिवीक्षा अधिकारी, देहरादून मीना बिष्ट एवं कार्यक्रम प्रबंधक प्रीति उपाध्याय उपस्थित रहे।

औद्योगिक विकास और निवेश के क्षेत्र में उत्तराखंड देश का अग्रणी राज्य बनेगाः धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी आज नई दिल्ली में PHD चैम्बर ऑफ़ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के 120वें वार्षिक सत्र में सम्मिलित हुए |

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कार्यक्रम में उपस्थित उद्यमियों व विभिन्न औद्योगिक संस्थानों के प्रतिनिधिगणों का स्वागत करते हुए कहा कि PHD चैंबर ने बीते 120 वर्षों में देश की आर्थिक प्रगति, औद्योगिक विकास और उद्यमशीलता की भावना को सशक्त करने में जो भूमिका निभाई है वो अतुलनीय है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज हम इस महत्वपूर्ण सत्र में “भारत की एक विश्वसनीय वैश्विक साझेदार के रूप में उभरती भूमिका” और उसमें उत्तराखंड राज्य के योगदान जैसे विषय पर सार्थक विचार-विमर्श के लिए एकत्रित हुए हैं। हम सभी जानते हैं कि किसी भी देश की आर्थिक प्रगति में उद्योगों की अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका होती है। उद्योग न केवल रोजगार के अवसर उत्पन्न करते हैं, बल्कि समाज के प्रत्येक वर्ग के जीवन स्तर को सुधारने में भी अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जब देश के उद्योगपति, उद्यमी और नीति-निर्माता एक साथ राष्ट्र उत्थान पर चिंतन और मंथन के लिए जुटते हैं, तो उसका प्रभाव केवल उद्योग जगत तक ही सीमित नहीं रहता, बल्कि समाज के प्रत्येक वर्ग के कल्याण और राष्ट्र के समग्र विकास का मार्ग भी प्रशस्त करता है। यह कॉन्क्लेव केवल उद्योग जगत का सम्मेलन भर नहीं, बल्कि भारत की आर्थिक शक्ति, सांस्कृतिक चेतना और वैश्विक नेतृत्व की नई संभावनाओं के द्वार खोलने वाला एक सशक्त मंच है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में “रिफॉर्म, परफॉर्म और ट्रांसफॉर्म” की नीति ने भारत को एक नई दिशा प्रदान की है। आज भारत में न केवल निवेश के लिए अनुकूल वातावरण तैयार हुआ है, बल्कि इंफ्रास्ट्रक्चर, शिक्षा, स्वास्थ्य, महिला सशक्तिकरण और सामाजिक न्याय जैसे क्षेत्रों में भी व्यापक परिवर्तन आया है| मोदी देश के पहले प्रधानमंत्री हैं जिन्होंने भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का संकल्प लिया और इस संकल्प को साकार करने के लिए योजनाबद्ध तरीके से कार्य भी किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज ‘स्टार्टअप इंडिया’, ‘वोकल फॉर लोकल’, ‘मेक इन इंडिया’, ‘स्किल इंडिया’ और ‘डिजिटल इंडिया’ जैसी पहलों के माध्यम से देश आत्मनिर्भर बनने की दिशा में तीव्र गति से आगे बढ़ रहा है। यही नहीं, आज भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम खड़ा करने वाला देश बन चुका है। आज हमारे स्टार्टअप्स ग्लोबल इनोवेशन में अपनी पहचान बना रहे हैं, डिजिटल इंडिया ने आम नागरिक तक तकनीक को पहुँचाया है और आत्मनिर्भर भारत अभियान ने देश को उत्पादन और विनिर्माण का हब बनाने का मार्ग प्रशस्त किया है। आज विश्व के बड़े बड़े देश ये देखकर अचंभित हैं कि भारत में सब्जी की एक छोटी सी दुकान लगाने वाली महिला भी UPI के के माध्यम से मोबाइल से पेमेंट का लेनदेन कर रही है।आज देश के 55 करोड़ से अधिक लोग बैंकिंग व्यवस्था से जुड़ चुके हैं।चाहे कृषि उत्पादन हो, रक्षा का क्षेत्र हो, चिकित्सा, ऊर्जा, या विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी हो या फिर अंतरिक्ष अनुसंधान का क्षेत्र हो, भारत प्रत्येक क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनकर विकास और समृद्धि के नए-नए आयाम स्थापित कर रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज भारत दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है और आने वाले समय में तीसरे स्थान पर पहुँचने का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ रहा है। जो देश पहले भारत को केवल एक बड़े उपभोक्ता बाजार के रूप में देखा करते थे, आज वही देश भारत की प्रौद्योगिकी और नवाचार की क्षमता को चुनौती के रूप में देखने लगे हैं |क्योंकि भारत अब केवल सामान आयात करने वाला देश नहीं रहा, बल्कि निर्यात, विनिर्माण और तकनीकी विकास में विश्व का अग्रणी साझेदार बन रहा है। हमारी बढ़ती शक्ति से घबराकर कुछ देश हमारे बढ़ते कदमों को रोकने के असफल प्रयास भी कर रहे हैं। परन्तु भारत के उद्योग जगत के संकल्प, सामर्थ्य और नवाचार ने ये सिद्ध कर दिया है कि कोई भी शक्ति हमारे विकास के मार्ग में बाधा नहीं बन सकती। भारत के दो दिवसीय दौरे पर आए ब्रिटेन के प्रधानमंत्री श्री कीर स्टार्मर ने भी इस तथ्य को स्वीकार किया है कि “भारत 2028 तक विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में उभरेगा और आज के दौर में भारत वैश्विक निवेश के लिए सबसे भरोसेमंद और सुरक्षित गंतव्य बन चुका है।”

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज प्रधानमंत्री जी जहाँ एक ओर ‘स्वदेशी अपनाओ’ के मंत्र के साथ आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को सशक्त बना रहे हैं। वहीं नेक्स्ट जनरेशन जीएसटी सुधारों के माध्यम से नागरिकों को राहत प्रदान करने के साथ-साथ हमारे स्थानीय उद्योगों और व्यापारियों को भी एक नई ऊर्जा प्रदान कर रहे हैं। प्रधानमंत्री जी के दूरदर्शी नेतृत्व में हमारी सरकार भी उत्तराखंड में औद्योगिक विकास की दिशा में निरंतर कार्य कर रही है। हमारी सरकार ने राज्य में निवेश को बढ़ावा देने के लिए वर्ष 2023 में ग्लोबल इनवेस्टर्स समिट का आयोजन किया। हमारे लिए अत्यंत गर्व का विषय है कि हमें इस समिट के अंतर्गत प्राप्त हुए 3.56 लाख करोड़ रुपए से अधिक के निवेश समझौतों में से लगभग 1 लाख करोड़ रुपए के निवेश प्रस्तावों को धरातल पर उतारने में सफलता मिली है। हमने राज्य में निवेशक केंद्रित नीतियों, बुनियादी ढांचे, कुशल जनशक्ति और सुशासन के द्वारा स्वस्थ निवेश वातावरण की उपलब्धता सुनिश्चित की है। पहले राज्य में मैन्युफैक्चरिंग यूनिट लगाने के लिए अलग-अलग विभागों से विभिन्न प्रकार की स्वीकृतियां लेनी पड़ती थी जिसमें बहुत समय लगता था। इस समस्या के समाधान के लिए हमने जहां एक ओर उद्योगों की लाइसेंसिंग प्रोसेस को आसान बनाते हुए सिंगल विंडो सिस्टम की व्यवस्था में सुधार किया,वहीं औद्योगिक नीति, लॉजिस्टिक नीति, स्टार्टअप नीति और MSME नीति सहित 30 से अधिक नीतियां लाकर राज्य में उद्योगों को बेहतर माहौल उपलब्ध कराने का प्रयास भी किया।इसके साथ ही, विनिर्माण क्षेत्र में बड़े उद्यमों को प्रोत्साहित करने के लिए हमारी सरकार ने राज्य में मेगा इंडस्ट्रियल पॉलिसी भी लागू की है। इसके अलावा जहां हम स्टार्टअप को इनक्यूबेशन सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से 60 करोड़ रुपए की लागत से विश्वस्तरीय यू-हब की स्थापना कर रहे हैं, वहीं, उन्हें आसानी से फंड उपलब्ध कराने हेतु 200 करोड़ रुपए के वेंचर फंड की स्थापना भी की गई है। यही नहीं, राज्य में निवेश प्रोत्साहन के लिये यूके-स्पाईस नाम से निवेश प्रोत्साहन एजेंसी स्थापित कर निवेशकों को समर्पित “निवेश मित्र” की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हमने जहां एक ओर काशीपुर में अरोमा पार्क, सितारगंज में प्लास्टिक पार्क, काशीपुर में इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर, पंतनगर में मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक पार्क की स्थापना की है, वहीं, MSME क्षेत्र के उद्यमियों को प्लग एंड प्ले मॉडल पर उद्यम स्थापना हेतु SIDCUL द्वारा रुद्रपुर, सेलाकुई और हरिद्वार में कम लागत वाली फ्लैटेड फैक्ट्रियाँ भी तैयार की जा रही हैं। इतना ही नहीं, हम किच्छा फार्म में हजार एकड़ से अधिक भूमि पर एक स्मार्ट इंडस्ट्रियल टाउनशिप विकसित करने की दिशा में भी कार्य कर रहे हैं। इसके अतिरिक्त, हम औद्योगिक क्षेत्र में कार्य करने वाले लोगों को सुविधाजनक आवास सुलभ कराने हेतु “रेंट बेस्ड एकोमोडेशन” सुविधा भी विकसित कर रहे हैं। आज हमारी पहल “हाउस ऑफ हिमालयाज ब्रांड” राज्य के सभी आर्गेनिक उत्पादों को एक अम्ब्रेला के नीचे लाने में कारगर सिद्ध हो रही है।इसके अंतर्गत, राज्य के विभिन्न उत्पादों की जीआई टैगिंग कर विश्व स्तरीय पहचान दिलाने का कार्य किया जा रहा है। राज्य की महिला स्वयं सहायता समूह द्वारा बनाए गए उत्पाद वैश्विक पहचान बना रहे हैं | हमारी सरकार राज्य में मिनिमम गवर्नमेंट, मैक्सिमम गवर्नेंस की अवधारणा को मूर्त रूप देने का प्रयास कर रही है। हमने मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना के माध्यम से राज्य में 10 हजार से अधिक नए उद्यमियों को लाभान्वित किया गया है। आज हम प्रदेश में 260 से अधिक व्यावसायिक सेवाओं को पूर्णतः ऑनलाइन उपलब्ध करा रहे हैं। इससे उद्यमियों को विभिन्न विभागों के चक्कर लगाने की आवश्यकता नहीं रह गई है और व्यवस्था में पारदर्शिता तथा गति दोनों सुनिश्चित हुई है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे इन सभी प्रयासों का परिणाम है कि आज ईज ऑफ डूइंग बिजनेस में उत्तराखंड को एचीवर्स तथा स्टार्टअप रैंकिंग में लीडर्स की श्रेणी प्राप्त हुई है। हमारी सख्ती और पारदर्शिता का सीधा लाभ हमारे उद्यमियों को मिल रहा है और उन्हें योजनाओं की स्वीकृति, जमीन आवंटन, औद्योगिक लाइसेंस या अन्य व्यावसायिक गतिविधियों में अब अनावश्यक बाधा का सामना नहीं करना पड़ता। हम उत्तराखंड को देश के अग्रणी “इन्वेस्टमेंट फ्रेंडली स्टेट” के रूप में स्थापित कर देश का अग्रणी राज्य बनाने के अपने “विकल्प रहित संकल्प” को पूर्ण करने हेतु निरंतर कार्य कर रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि देहरादून में 28 से 30 नवंबर 2025 तक आपदा प्रबंधन पर विश्व शिखर सम्मेलन (WSDM) आयोजित होने वाला है, जिसमें वैश्विक नेता और विशेषज्ञ जलवायु परिवर्तन के प्रभावों पर चर्चा करेंगे। इस पहले WSDM प्री-समिट का उद्देश्य आपदाओं से निपटने के लिए नवाचार और सहयोग को बढ़ावा देना है।

हेमंत जैन अध्यक्ष PHDCCI, अनिल गुप्ता, राजीव जुनेजा उपाध्यक्ष PHDCCI, संजीव अग्रवाल पूर्व अध्यक्ष PHDCCI, विभिन्न औद्योगिक संस्थानों के प्रतिनिधि व उद्योगपति, यू कास्ट महानिदेशक दुर्गेश पंत उपस्थित रहे|