सीएस ने यूकॉस्ट और विज्ञान तथा प्रौद्योगिकी विभाग को इस दिशा में कारगर पहल सुनिश्चित करने के निर्देश दिए

मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने कहा कि उत्तराखंड में स्थित राष्ट्रीय महत्व के वैज्ञानिक संस्थानों का राज्य के हित में अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करने के लिए लगातार संवाद, बेहतर समन्वय व सतत सहयोग की व्यवस्था हेतु एक सुव्यवस्थित व सुसंगठित प्लेटफॉर्म तैयार किया जाएगा।

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने दून पुस्तकालय एवं शोध केन्द्र के सभागार में आयोजित एक कार्यक्रम में आगामी 12 से 14 नवंबर तक विज्ञान धाम में प्रस्तावित छठे देहरादून इंटरनेशनल साईंस एंड टेक्नोलॉजी फेस्टीवल के पोस्टर एवं ब्रोशर का विमोचन करते हुए यह विचार व्यक्त किए। मुख्य सचिव ने प्रस्तावित फेस्टीवल हेतु आयोजकों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि विज्ञान और टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में नित नई प्रगति होने से बहुत तेजी से बदलाव हो रहे हैं। समाज और विशेषकर युवा पीढी को विज्ञान एवं टेक्नोलॉजी से जोड़ने और इस क्षेत्र में आगे बढने के लिए प्रेरित करने में इस तरह के आयोजन महत्वपूर्ण सिद्ध होते हैं।

मुख्य सचिव ने कहा कि टेक्नोलॉजी की जननी मौलिक विज्ञान के क्षेत्र में अनुसंधान एवं विकास को बढावा देने पर विशेष ध्यान दिया जाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि हिमालयी राज्य होने के नाते उत्तराखंड के लिए विज्ञान एवं टेक्नोलॉजी अत्यधिक आवश्यक व महत्वपूर्ण है। देहरादून एवं उत्तराखंड में राष्ट्रीय स्तर के कई वैज्ञानिक एवं शैक्षिक संस्थान मौजूद हैं, जिनका राज्य के हित में समय-समय पर विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग लिया जाता है। उत्तराखंड के हित में सभी महत्वपूर्ण संस्थानों का अधिकतम सहयोग व बेहतर समन्वय सुनिश्चित करने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। मुख्य सचिव ने यूकॉस्ट और विज्ञान तथा प्रौद्योगिकी विभाग को इस दिशा में कारगर पहल सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए।

इस अवसर पर सचिव उत्तराखंड शासन डॉ. आर. राजेश कुमार, चन्द्रेश यादव, दीपेन्द्र चौधरी, हेस्को के संस्थापक पद्मभूषण अनिल जोशी, उत्तराखंड पेट्रोलियम विश्वविद्यालय के वीसी राम शर्मा, यूकॉस्ट के संयुक्त निदेशक डीपी उनियाल आदि ने विचार रखे। कार्यक्रम का संचालन कुंवर राज अस्थाना ने किया।

सीएस बोले, राज्य में ईएसआईसी के अस्पताल खोलने कोे मानकों में ढील देने का प्रस्ताव तैयार कर क्षेत्रीय परिषद को भेजेंगे

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने उद्योगों से जुड़े प्रकरणों का तत्परता से निस्तारण सुनिश्चित करने के निर्देश देते हुए कहा है कि राज्य में उद्योगों को समुचित सुविधाएं एवं बेहतर माहौल उपलब्ध कराने के लिए शासन प्रतिबद्ध है। मुख्य सचिव ने अधिकारियों को उद्योगों व उद्यमियों से संबंधित मामलों पर विचार-विमर्श के लिए राज्य एवं जिला स्तरीय उद्योग मित्र समितियों की बैठकें नियमित रूप से आयोजित करने की हिदायत देते हुए कहा है कि तात्कालिक महत्व के मामलों में इन समितियों की बैठकों की प्रतीक्षा न कर तुरंत कार्रवाई सुनिश्चित की जाय।

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने सचिवालय में राज्य स्तरीय उद्योग मित्र समिति की प्राधिकृत समिति की बैठक की अध्यक्षता करते हुए यह निर्देश दिए। मुख्य सचिव ने बैठक में राज्य के उद्यमियों एवं उद्योग संगठनों के प्रतिनिधियों द्वारा प्रस्तुत मामलों को विस्तार से सुनने के साथ ही उद्योगों से संबंधित अनेक महत्वपूर्ण प्रकरणों पर विस्तार से विचार-विमर्श कर संबंधित विभागों के अधिकारियों को त्वरित समाधान करने के निर्देश दिए। मुख्य सचिव ने कहा कि उद्यमियों के साथ सचिव वित्त द्वारा जीएसटी की नई व्यवस्था से संबंधित प्रकरणों को लेकर बैठक कर समस्याओं एवं शंकाओं का समुचित समाधान किया जाएगा। उन्होंने कहा कि राज्य में ईएसआईसी के अस्पताल खोले जाने के मानकों में ढील देने का प्रस्ताव तैयार कर क्षेत्रीय परिषद को भेजा जाएगा। उन्होंने देहरादून जनपद में ईएसआईसी अस्पताल के लिए आवश्यक भूमि की व्यवस्था के संबंध में भी अधिकारियों को निर्देश दिए।

मुख्य सचिव ने कहा कि राज्य में उद्योगों की स्थापना व संचालन के लिए बेहतर माहौल उपलब्ध कराने के साथ ही औद्योगिक आस्थानों में समुचित सुविधाएं उपलब्ध कराने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। मुख्य सचिव ने संबंधित विभागों और संगठनों को उद्योगों के लिए सभी आवश्यक अवस्थापना सुविधाएं उपलब्ध कराने, बिजली की पर्याप्त व निर्बाध आपूर्ति करने तथा लॉजिस्टिक की बेहतर सुविधाएं देने के लिए भी कारगर कदम उठाने के निर्देश देते हुए कहा कि उद्यमियों द्वारा उठाए जाने वाले मुद्दों का समय से समाधान सुनिश्चित किया जाय।

बैठक में सचिव दिलीप जावलकर, शैलेश बगोली, विनय शंकर पाण्डेय, अपर सचिव विनीत कुमार सहित अनेक वरिष्ठ अधिकारी गण एवं उद्योग संगठनों केे प्रतिनिधिगण व अनेक उद्यमी उपस्थित रहे।

उत्तराखंडः मेडिकल कॉलेज और अस्पतालों में राज्यव्यापी फायर सेफ्टी ऑडिट अभियान होगा शुरू

उत्तराखंड सरकार ने राज्यभर के सभी सरकारी और निजी अस्पतालों में सुरक्षा और फायर सेफ्टी को लेकर सख्त कदम उठाने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत के निर्देशों पर सचिवालय में महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता सचिव चिकित्सा स्वास्थ्य व परिवार कल्याण एवं चिकित्सा शिक्षा डॉ. आर. राजेश कुमार ने की।

बैठक में यह निर्देश दिया गया कि राज्य के सभी सरकारी और निजी मेडिकल कॉलेजों एवं अस्पतालों में फायर सुरक्षा प्रणाली को मजबूत किया जाएगा, हर महीने ड्रिल प्रैक्टिस आयोजित की जाएगी और समय-समय पर सुरक्षा ऑडिट किया जाएगा। सचिव ने स्पष्ट किया कि अस्पतालों में किसी भी प्रकार की लापरवाही किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी, और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। सचिवालय में हुई समीक्षा बैठक में निदेशक चिकित्सा शिक्षा डॉ अजय आर्य, प्राचार्य दून मेडिकल कॉलेज गीता जैन, उपसचिव जसंविदर कौर, सीएमएस दून मेडिकल कॉलेज डॉ आर एस बिष्ट सहित यूपीआरएल (न्.च्.त्.स्.) के प्रतिनिधि सहित संबंधित अधिकारी मौजूद रहे।

दून मेडिकल कॉलेज में फायर सेफ्टी को लेकर सचिव ने दिए सख्त निर्देश
सचिव स्वास्थ्य डॉ आर राजेश कुमार ने फायर सेफ्टी से जुड़ी कार्यदायी संस्था को निर्देश दिया कि अग्नि संकटी से संबंधित अनापत्ति प्रमाण पत्र (छव्ब्) शीघ्र उपलब्ध कराना सुनिश्चित किया जाए। इस संदर्भ में सचिव ने अग्निशमन विभाग से भी आवश्यक कार्रवाई करने का मौखिक अनुरोध किया। सचिव स्वास्थ्य डॉ आर राजेश कुमार ने यह भी निर्देश दिया कि स्प्रिंकलर, मोटर्स एवं अन्य फायर सेफ्टी उपकरणों की जांच कर उनका डेमो कराया जाए, ताकि किसी आपात स्थिति में तत्परता सुनिश्चित हो सके। इसके अलावा उन्होंने निदेशक, चिकित्सा शिक्षा को आदेशित किया कि प्रदेश के सभी मेडिकल कॉलेजों में प्रत्येक माह फायर मॉक ड्रिल कराई जाए। राजकीय दून मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य को निर्देश दिए गए कि कार्यदायी संस्था के साथ नियमित रूप से प्रतिमाह बैठक की जाए। कार्यदायी संस्था ने बैठक में जानकारी दी कि ओटी बिल्डिंग की फायर एनओसी 30 अक्टूबर 2025 तक और सीएसएसडी विभाग की एनओसी 30 नवम्बर 2025 तक हस्तांतरित कर दी जाएगी।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का बयान
राज्य के सभी सरकारी और निजी मेडिकल कॉलेजों एवं अस्पतालों में फायर सुरक्षा प्रणाली को मजबूत किया जाएगा। अस्पतालों में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करना अनिवार्य है। हमारी प्राथमिकता मरीजों और अस्पताल स्टाफ की सुरक्षा है। राज्य सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि उत्तराखंड के सभी अस्पताल सुरक्षा मानकों के अनुरूप संचालित हों। किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

स्वास्थ्य सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार का बयान
मुख्यमंत्री के निर्देशन में राज्यभर के सरकारी और निजी अस्पतालों में सुरक्षा जांच और फायर ड्रिल अभियान को तेज किया जाएगा। हमारी टीम नियमित निरीक्षण कर सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित करेगी। हमने सभी जिला अधिकारियों और अस्पताल प्रबंधन को निर्देश दिए हैं कि वे हर अस्पताल में फायर सिस्टम की मजबूती, इमरजेंसी ड्रिल और सुरक्षा ऑडिट सुनिश्चित करें। किसी भी प्रकार की लापरवाही पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। हमारा उद्देश्य है कि उत्तराखंड के अस्पताल पूर्णतरू सुरक्षित और आपातकाल के लिए तैयार रहें।

राज्यव्यापी फायर सेफ्टी अभियान की रूपरेखा
फायर अलार्म और स्प्रिंकलर सिस्टम की जांच सभी अस्पतालों में। महीने में कम से कम एक बार ड्रिल प्रैक्टिस आयोजित करना और स्टाफ को प्रशिक्षित करना। समय-समय पर सुरक्षा ऑडिट और रिकॉर्डिंग। लापरवाही या मानकों के उल्लंघन पर कड़ी कार्रवाई, जिसमें प्रशासनिक और कानूनी कदम शामिल हैं। यह अभियान राज्य सरकार की ओर से मरीजों और अस्पताल स्टाफ की सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में एक निर्णायक कदम है।

अस्पतालों के लिए सख्त संदेश
उत्तराखंड सरकार ने स्पष्ट किया है कि अस्पतालों में सुरक्षा और आपातकालीन तैयारी को लेकर किसी भी स्तर की ढील बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अस्पताल प्रबंधन को समय पर रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी और सभी सुरक्षा मानकों का पालन करना अनिवार्य होगा।

इस पहल के माध्यम से राज्य सरकार ने एक बार फिर यह संदेश दिया है कि मरीजों की जान और अस्पताल स्टाफ की सुरक्षा सर्वाेपरि है। राज्यभर में चलाया जा रहा फायर सेफ्टी ऑडिट अभियान अस्पतालों की सुरक्षा को मजबूत करने और आपातकालीन तैयारियों को सुनिश्चित करने के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा।

उत्तराखंडः बद्रीनाथ में तीर्थयात्रियों का आंकड़ा 14.53 लाख के पार

सुप्रसिद्ध बद्रीनाथ धाम की यात्रा को लेकर भी श्रद्धालुओं में भारी उत्साह बना हुआ है। तीर्थयात्रियों की बढ़ती संख्या ने पिछले वर्ष का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। बुधवार तक कुल 14 लाख 53 हजार 827 तीर्थयात्री भगवान बद्रीविशाल के दर्शन को पहुंच चुके हैं, जबकि कपाट बंद होने में अभी डेढ़ माह का समय शेष है। बीते वर्ष 2024 में पूरे यात्रा काल में कुल 14 लाख 35 हजार 341 श्रद्धालु बद्रीनाथ धाम की यात्रा पर पहुंचे थे।

धामी सरकार के कुशल यात्रा प्रबंधन के चलते चारधाम यात्रा कीर्तिमान स्थापित कर रही है। शासन-प्रशासन ने खराब मौसम को यात्रियों की राह में रोड़ा नहीं बनने दिया। मौसम के मिजाज को देखते हुए सभी यात्रा रूटों और पड़ावों में चाक चौबंद व्यवस्थाएं की गई हैं। यात्रा मार्ग पर वाहनों का आवागमन सुचारू बना रहे, इसके लिए संवेदनशील स्थानों पर सड़कों को तुरंत खुलवाने के लिए विशेष टीम की तैनाती के साथ ही जेसीबी की व्यवस्था की गई है। धामों में यात्रियों को ठहराने की पर्याप्त व्यवस्था की गई है। यात्रा मार्ग में यात्रियों को तत्काल मदद पहुंचाने के लिए एसडीआरएफ जवानों की तैनाती है। अब बर्फवारी के चलते ठंड बढ़ने पर अलाव की भी व्यवस्था कर दी गई है।

सरकार की ओर से किए गए इन पुख्ता इंतजामों के चलते श्रद्धालु पूरी निश्चिन्तता के साथ चारधाम यात्रा पर पहुंच रहे हैं। केदारनाथ के साथ ही बद्रीनाथ धाम में भी पिछले वर्ष की तुलना में यात्रियों की बढ़ती संख्या ने नया रिकॉर्ड बनाया है। बुधवार को 5042 यात्रियों ने भगवान बद्रीविशाल के दर्शन किए। जैसे जैसे कपाटबंदी की तिथि करीब आ रही है, यात्रियों की संख्या भी बढ़ती जा रही है। बता दें धाम के कपाट आगामी 25 नवंबर को शीतकाल के लिए बंद कर दिए जाएंगे।

आज बंद होंगे हेमकुंड साहिब के कपाट
चमोली जिले में स्थित श्री हेमकुंड साहिब के कपाट कल 10 अक्टूबर को शीतकाल के लिए बंद कर दिए जाएंगे। बेहतर यात्रा प्रबंधन के चलते हेमकुंड साहिब यात्रियों की संख्या भी हर वर्ष नया रिकॉर्ड बना रही है। इस वर्ष यहां बुधवार तक दो लाख 71 हजार 367 श्रद्धालु दर्शन कर चुके हैं, जो अब तक की रिकॉर्ड संख्या है।

समुद्रतल से करीब 15 हजार 230 फीट की ऊंचाई पर स्थित हेमकुंट साहिब की यात्रा अत्यंत कठिन और चुनौतीपूर्ण है, इसके बावजूद यहां हर वर्ष यात्रियों की संख्या बढ़ती जा रही है। वर्ष 2024 में एक लाख 83 हजार 722 तीर्थयात्री हेमकुंट पहुंचे थे जबकि इस यात्राकाल में बीते दिवस बुधवार तक दो लाख 71 हजार 367 श्रद्धालु पहुंच चुके हैं।

चारधाम यात्रा-कब बंद होंगे कपाट
गंगोत्री 22 अक्टूबर
यमुनोत्री 23 अक्टूबर
केदारनाथ 23 अक्टूबर
बद्रीनाथ 25 नवंबर

केदारनाथ में श्रद्धालुओं की संख्या 16.56 लाख के पार

चारधाम यात्रा फिर रफ्तार पकड़ गई है। बारिश और बर्फबारी के बावजूद यात्रियों में भारी उत्साह बना हुआ है। केदारनाथ यात्रा ने नया रिकॉर्ड बनाया है। आज बुधवार को यहां श्रद्धालुओं की संख्या 16 लाख 52 हजार के पार पहुंच गई, जबकि अभी धाम कपाट बंद होने में 14 दिन का समय बचा है। वर्ष 2024 में पूरे यात्रा काल में 16 लाख 52 हजार 76 यात्री केदार दर्शन के लिए पहुंचे थे।

बुधवार को केदारनाथ धाम में 5614 श्रद्धालुओं ने दर्शन किए। केदार धाम के कपाट आगामी 23 अक्टूबर को भैया दूज के अवसर पर बंद होंगे। अभी यात्रा 15 दिन और चलेगी। इस प्रकार यहां यात्रियों की संख्या ने नया रिकॉर्ड बनाया है। बद्रीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री धाम में भी अब यात्रियों की संख्या बढ़ी है। प्रदेश सरकार की ओर से श्रद्धालुओं के उत्साह को देखते हुए सुरक्षित यात्रा के लिए पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। यात्रा मार्ग में सुरक्षा जवानों की तैनाती की गई है। यात्रा मार्ग पर यातायात सुचारू बना रहे, इसके लिए भूस्खलन की दृष्टि से संवेदनशील स्थानों पर मलबे की सफाई के लिए जेसीबी की व्यवस्था की गई है।

बता दें कि इस वर्ष 30 अप्रैल को गंगोत्री एवं यमुनोत्री धाम के कपाट खुलने के साथ ही चारधाम यात्रा का आगाज हो गया था। इसके बाद दो मई को केदारनाथ और चार मई को बद्रीनाथ धाम के कपाट आम श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ खोल दिए गए थे। मानसून सीजन में अतिवृष्टि, बादल फटने और भूस्खलन की घटनाओं के चलते चारधाम यात्रा बुरी तरह प्रभावित हुई है। प्रकृति की विनाशलीला में गंगोत्री धाम का महत्वपूर्ण पड़ाव धराली बुरी तरह तबाह हो गया। मार्ग बुरी तरह तहस-नहस हो जाने से गंगोत्री और यमुनोत्री धाम की यात्रा को रोकना पड़ा था।

बारिश थमने पर भी यहां यात्रा को बहाल करना बड़ी चुनौती था, लेकिन शासन-प्रशासन की टीमों ने युद्धस्तर पर कार्य कर आम जनजीवन की बहाली के साथ ही यात्रा मार्गों को सुचारू किया। दोनों धामों की यात्रा भी सुरक्षा इंतजामों के साथ शुरू हो गई। प्रशासन की ओर से यात्रियों को अभी भी एहतियात बरतने की सलाह दी गई है। यात्रियों को बार-बार आगाह किया गया है कि मौसम खराब होने पर यात्रा करने से बचें। यदि यात्रा मार्ग में हैं, तो सुरक्षित स्थान पर शरण लें।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने चारधाम यात्रा से जुड़े सभी जिलाधिकारियों से कहा है कि श्रद्धालुओं और स्थानीय नागरिकों की सुरक्षा सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकता है। सभी यात्रा मार्गों पर आवश्यक यात्री सुविधाओं और सुरक्षा से जुड़ी सभी व्यवस्थाओं का पूरा ध्यान रखा जाए। सभी जिम्मेदार अधिकारियों को अलर्ट मोड पर रखा जाए। आपातकालीन स्थिति में बिना किसी देरी के राहत और बचाव कार्य शुरू कर दिया जाए।

धामी सरकार के सख्त निर्देश पर प्रतिबंधित कफ सिरप पर बड़ी कार्रवाई, दून में सात मेडिकल स्टोर्स का लाइसेंस निरस्त

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखंड सरकार ने बच्चों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए राज्यभर में अवैध, असुरक्षित और निम्न गुणवत्ता वाली कफ सिरप दवाओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है। खाद्य संरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) की टीमें प्रदेश के हर जिले में सक्रिय हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत के मार्गदर्शन में शुरू यह अभियान अब तक की सबसे व्यापक कार्रवाई के रूप में सामने आया है। स्वास्थ्य सचिव व आयुक्त डॉ. आर. राजेश कुमार और अपर आयुक्त व ड्रग कंट्रोलर ताजबर सिंह जग्गी की देखरेख में पूरे प्रदेश में दवा विक्रेताओं, थोक आपूर्तिकर्ताओं और मेडिकल स्टोरों पर औचक निरीक्षण चल रहा है।

देहरादून में सबसे बड़ी छापेमारी

आज एफडीए की टीम ने देहरादून में बड़े पैमाने पर छापेमारी की। आयुक्त, खाद्य संरक्षा एवं औषधि प्रशासन के निर्देश पर औषधि निरीक्षक मानेंद्र सिंह राणा के नेतृत्व में टीम ने चकराता रोड, किशन नगर चौक, बल्लूपुर चौक, कांवली रोड, बल्लीपुर चौक और प्रेमनगर क्षेत्रों में मेडिकल स्टोरों का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण में बच्चों को दी जाने वाली खांसी और सर्दी-जुकाम की दवाओं के क्रय-विक्रय पर तत्काल रोक लगाई गई। जिन दुकानों में यह दवाएं भंडारित थीं, उन्हें मौके पर सील कर दिया गया। विक्रेताओं को निर्देशित किया गया कि इन औषधियों का विक्रय अगली सूचना तक न करें। निरीक्षण के दौरान यह भी पाया गया कि कई विक्रेताओं ने स्वयं संज्ञान लेकर इन दवाओं को पहले ही दुकान से हटा दिया था। टीम ने मौके पर 11 सिरप के नमूने जांच के लिए लिए। जांच में Coldrif, Respifresh-TR और Relife जैसे सिरप किसी भी मेडिकल स्टोर में उपलब्ध नहीं पाए गए।

उधम सिंह नगर में 40 नमूनों की जांच हेतु भेजे

प्रदेश में बच्चों के लिए बनाए गए खांसी के सिरप पर कार्रवाई के तहत उधम सिंह नगर जनपद में औषधि विभाग की टीम ने अभियान तेज कर दिया है। वरिष्ठ औषधि निरीक्षक नीरज कुमार और औषधि निरीक्षक निधि शर्मा के नेतृत्व में जिले के विभिन्न क्षेत्रों से कुल 10 पेडियाट्रिक कफ सिरप के नमूने जांच हेतु लिए गए हैं। इन सिरप में Dextromethorphan Hydrobromide, Chlorpheniramine Maleate और Phenylepherine Hydrochloride जैसे तत्व पाए गए हैं। अब तक जिले से कुल 40 कफ सिरप नमूने फॉर्म-17 में लेकर विश्लेषण के लिए प्रयोगशाला भेजे जा चुके हैं।

हरिद्वार व रुड़की में भी सख्त कार्रवाई, 15 नमूने जांच हेतु भेजे

इसी क्रम में हरिद्वार जनपद में भी औषधि विभाग ने अभियान को और तेज किया है। अपर आयुक्त के निर्देशों पर रुड़की के एयरन हॉस्पिटल, विनय विशाल हॉस्पिटल तथा हरिद्वार के मेट्रो हॉस्पिटल से कुल 15 कफ सिरप के नमूने परीक्षण हेतु लिए गए हैं। औषधि निरीक्षक अनीता भारती के नेतृत्व में हुई इस कार्रवाई के दौरान संबंधित प्रतिष्ठानों से लिए गए नमूनों को विश्लेषण के लिए भेज दिया गया है। विभागीय आंकड़ों के अनुसार, हरिद्वार जिले से अब तक कुल 39 नमूने जांच हेतु लिए जा चुके हैं।

हल्द्वानी में सरकारी अस्पताल से लिए गए नमूने

नैनीताल जनपद के हल्द्वानी में भी एफडीए की कार्रवाई जारी रही। Soban Singh Jeena Base Hospital की ड्रग स्टोर से तीन कफ सिरप के नमूने जांच के लिए लिए गए। सभी नमूनों को गुणवत्ता परीक्षण हेतु औषधि विश्लेषणशाला, देहरादून भेजा गया है।

कोटद्वार में ‘Respifresh TR’ सिरप का स्टॉक सीज

पौड़ी जिले के कोटद्वार में एफडीए टीम ने कल रात से छापेमारी अभियान चलाया, जो आज भी जारी रहा। कार्रवाई के दौरान जानलेवा घोषित Respifresh TR कफ सिरप का स्टॉक कई मेडिकल स्टोरों से सीज किया गया। आज भी टीम ने विभिन्न प्रतिष्ठानों से तीन नए नमूने परीक्षण के लिए लिए हैं।

चौखुटिया-चांदीखेत में भी सख्त कार्रवाई

अल्मोड़ा जिले के चौखुटिया और चांदीखेत में आज एफडीए की टीम ने छह मेडिकल स्टोरों पर छापेमारी की। निरीक्षण के दौरान Respifresh TR सिरप (Batch No. R01GL2523) की 12 बोतलें जब्त की गईं। यह सिरप पहले ही एनएसक्यू (Non-Suitable Quality) घोषित किया जा चुका है। टीम ने चार कफ सिरप के नमूने जांच हेतु एकत्र किए।

रुद्रप्रयाग में 4 नमूने लिए गए, सैंपल भेजे जांच को

रुद्रप्रयाग जनपद के तिलवाड़ा क्षेत्र में औषधि निरीक्षकों की टीम ने रिटेल और थोक प्रतिष्ठानों का निरीक्षण कर चार नमूने कफ सिरप के लिए संकलित किए। दवाओं की गुणवत्ता जांच प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

उत्तरकाशी में चार सिरपों पर प्रतिबंध

जनपद उत्तरकाशी में औषधि निरीक्षक मोहम्मद ताजिम के नेतृत्व में छापेमारी की गई। टीम ने बच्चों में प्रयुक्त चार प्रकार के कफ सिरपों के नमूने लिए और देहरादून की प्रयोगशाला को भेजे। औषधि निरीक्षक ने सभी मेडिकल स्टोर संचालकों को चेतावनी दी कि निम्नलिखित सिरप किसी भी हालत में न रखें और न बेचें — Dextromethorphan Hydrobromide Syrup (KL-25/148), Coldrif (SR-13), Respifresh TR (R01GL2523) और Relife (LSL25160)। साथ ही निर्देश दिए गए कि 5 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को कफ सिरप बिल्कुल न दिया जाए और वयस्कों को भी केवल डॉक्टर की सलाह पर ही दवाएं दी जाएं।

अब तक 148 नमूने जांच के लिए भेजे गए

प्रदेशभर में जारी छापेमारी के दौरान अब तक 148 नमूने जांच के लिए भेजे गये। इसके साथ ही आज देहरादून में 11, कोटद्वार में 3, हल्द्वानी में 3, अल्मोड़ा में 4, रुद्रप्रयाग में 4 और उत्तरकाशी में 4 नमूने लिए गए हैं। अभियान के दौरान दर्जनों प्रतिष्ठानों को नोटिस जारी किया गया है और कई स्थानों पर संदिग्ध स्टॉक जब्त कर सीलिंग की कार्रवाई की गई है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का बयान

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा बच्चों के स्वास्थ्य से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। हमारी सरकार हर उस तत्व के खिलाफ सख्त है जो बच्चों की जान से खिलवाड़ करने की कोशिश करेगा। दवाओं की गुणवत्ता और सुरक्षा पर किसी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी। यह कार्रवाई बच्चों के जीवन की सुरक्षा के लिए सरकार की प्रतिबद्धता का प्रतीक है।

स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत का बयान

स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने कहा एफडीए की कार्रवाई यह संदेश दे रही है कि उत्तराखंड में बच्चों की सेहत सर्वोच्च प्राथमिकता है। जनता से अपील है कि बिना डॉक्टर की सलाह के कोई भी सिरप या दवा बच्चों को न दें। राज्य सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि केवल प्रमाणित और सुरक्षित औषधियां ही जनता तक पहुंचें।

स्वास्थ्य सचिव व आयुक्त डॉ. आर. राजेश कुमार का बयान

स्वास्थ्य सचिव एवं आयुक्त डॉ. आर. राजेश कुमार ने कहा राज्यभर में एफडीए की टीमें सक्रिय हैं। जिन सिरपों को जांच के लिए भेजा गया है, उनकी रिपोर्ट आने के बाद दोषियों पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। सभी जिलों में मेडिकल स्टोरों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि संदिग्ध बैच नंबर की औषधियां तुरंत हटाई जाएं।

ड्रग कंट्रोलर ताजबर सिंह जग्गी का बयान

अपर आयुक्त और ड्रग कंट्रोलर ताजबर सिंह जग्गी ने कहा एफडीए का अभियान निरंतर जारी रहेगा। पिछले चार दिनों में 27 नमूने जांच हेतु लिए जा चुके हैं और कई प्रतिष्ठानों को नोटिस जारी किए गए हैं। विभाग की टीमें दिन-रात फील्ड में सक्रिय हैं। हमारा लक्ष्य है कि किसी भी असुरक्षित औषधि को बाजार से पूरी तरह समाप्त किया जाए।

एफडीए की जनता से अपील

एफडीए ने प्रदेशवासियों से अपील की है कि यदि किसी मेडिकल स्टोर या वितरक के पास उपरोक्त प्रतिबंधित सिरप पाया जाए तो तुरंत स्थानीय औषधि निरीक्षक या एफडीए कार्यालय को सूचित करें। विभाग ने स्पष्ट किया है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद दोषी पाए जाने वाले प्रतिष्ठानों के खिलाफ लाइसेंस निरस्तीकरण, जुर्माना और अन्य कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखंड सरकार ने बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर जो निर्णायक कदम उठाया है, वह प्रदेश में स्वास्थ्य सुरक्षा की नई मिसाल है। औषधि विभाग की यह मुहिम न सिर्फ संदिग्ध औषधियों पर रोक लगाने में अहम भूमिका निभा रही है, बल्कि यह संदेश भी दे रही है कि धामी सरकार बच्चों की सुरक्षा और जनस्वास्थ्य के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
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सीएम ने प्रदान की विभिन्न विकास योजनाओं के लिए 14.62 करोड़ की वित्तीय स्वीकृति

मुख्यमंत्री ने राज्य योजना के अन्तर्गत जनपद नैनीताल के विधानसभा क्षेत्र नैनीताल के विकासखण्ड बेतालघाट में दूनीखाल से रातीधाट (पाडली) तक मोटर मार्ग के निर्माण किये जाने हेतु ₹ 9.81 करोड़ की धनराशि स्वीकृत किये जाने का अनुमोदन प्रदान किया है।

मुख्यमंत्री ने एसडीआरएफ में विभिन्न आपदा प्रबन्धन सम्बन्धी सूचनाओं के आदान-प्रदान हेतु एसडीआरएफ वाहिनी कन्ट्रोल रूम को कमाण्ड एंड कंट्रोल सेंटर के रूप में स्थापित किये जाने तथा आधुनिक तकनीकों के साथ उच्चीकृत किये जाने हेतु ₹ 25 लाख राज्य आपदा मोचन निधि के क्षमता विकास से स्वीकृत किये जाने हेतु अनुमोदन प्रदान किया है।

मुख्यमंत्री ने जनपद पिथौरागढ़ के अन्तर्गत तहसील थल के कार्यालय भवन निर्माण हेतु ₹4.56 करोड की धनराशि स्वीकृत किये जाने का अनुमोदन प्रदान किया है।

मुख्यमंत्री ने किया राज्य आन्दोलनकारी आश्रित पेंशन अनुमन्य किये जाने का अनुमोदन
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्य आन्दोलनकारी स्व० धर्मानन्द बमराडा की आश्रित पत्नी सीता देवी, निवासी ओम विहार, अजबपुर कला देहरादून को उनके पति की मृत्यु की तिथि दिनांक 10.07.2023 के उपरान्त अनुमन्य की गयी ₹ 4500.00 प्रतिमाह पेंशन को समायोजित करते हुए उन्हें ₹ 6000.00 प्रतिमाह राज्य आन्दोलनकारी आश्रित पेंशन प्रदान किये जाने का अनुमोदन प्रदान किया है।

उत्तराखंड में आपदा राहत कार्यों के लिए आगे आया लार्सन एंड टुब्रो, दिए पांच करोड़

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से नई दिल्ली में लार्सन एंड टुब्रो के प्रतिनिधिमंडल ने शिष्टाचार भेंट की। इस अवसर पर प्रतिनिधिमंडल ने प्रदेश में हाल ही में हुई प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित लोगों की सहायता एवं राहत-पुनर्वास कार्यों में सहयोग हेतु ₹5 करोड़ (पांच करोड़ रुपये) की सहायता राशि मुख्यमंत्री राहत कोष में प्रदान की।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने एल.एंड.टी. के इस सराहनीय सहयोग के लिए कंपनी के प्रतिनिधियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि संकट की घड़ी में कॉर्पाेरेट सेक्टर का यह योगदान राज्य सरकार के लिए बड़ी सहायता साबित होगा। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार लगातार आपदा प्रभावित क्षेत्रों में राहत, पुनर्वास एवं पुनर्निर्माण के कार्यों को प्राथमिकता के साथ कर रही है। ऐसे में निजी क्षेत्र की सहभागिता से इन कार्यों में और तेजी आएगी तथा प्रभावित लोगों को शीघ्र राहत पहुंचाई जा सकेगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड एक आपदा संवेदनशील राज्य है, जहां भौगोलिक परिस्थितियों के कारण समय-समय पर प्राकृतिक आपदाओं का सामना करना पड़ता है। राज्य सरकार ने आपदा प्रबंधन को सुदृढ़ बनाने और राहत तंत्र को और अधिक सक्षम करने के लिए कई ठोस कदम उठाए हैं।

इस अवसर पर एल.एंड.टी. समूह के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

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उत्तराखंड में सात जल विद्युत परियोजनाओं के विकास व निर्माण को केंद्रीय मंत्री से मांगा समर्थन

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने नई दिल्ली में केंद्रीय वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव से भेंट कर उत्तराखंड में सात जल विद्युत परियोजनाओं (कुल क्षमता 647 मेगावाट) के विकास एवं निर्माण की स्वीकृति हेतु समर्थन मांगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य गंगा और उसकी सहायक नदियों की निर्मलता, अविरलता तथा पर्यावरण संरक्षण के प्रति पूर्ण प्रतिबद्ध है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि खेलों से युवाओं को रोजगारपरक अवसर उपलब्ध कराने हेतु हल्द्वानी में खेल विश्वविद्यालय स्थापित करने का निर्णय लिया गया है। इसके लिए गौलापार क्षेत्र में लगभग 12.317 हेक्टेयर वन भूमि हस्तांतरित करने का प्रस्ताव वन विभाग को भेजा गया है। मुख्यमंत्री ने केंद्रीय मंत्री से संबंधित अधिकारियों को इस भूमि स्थानांतरण हेतु आवश्यक कार्रवाई का निर्देश देने का अनुरोध किया।

केंद्रीय मंत्री ने सैद्धांतिक सहमति देते हुए हर संभव सहयोग के प्रति आश्वस्त किया।

इस अवसर पर सचिव पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन भारत सरकार तन्मय कुमार, उत्तराखण्ड के प्रमुख सचिव आर. मीनाक्षी सुंदरम, विशेष सचिव डॉ. पराग मधुकर धकाते, स्थानिक आयुक्त अजय मिश्रा मौजूद थे।

प्रदेशभर में स्किल गैप असेसमेंट कराया जाएः बर्द्धन

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने सचिवालय में कौशल विकास एवं सेवायोजन विभाग की समीक्षा की। मुख्य सचिव ने कहा कि प्रदेश के युवाओं को प्रदेश के भीतर एवं अन्य राज्यों सहित भारत के बाहर विदेशों में नौकरी के अवसर नौकरी दिलाने की दिशा में काम किए जाने की जरूरत है। उन्होंने इसके लिए ओवरसीज एंप्लॉयमेंट सेल और पैनलबद्ध भर्ती एजेंसियों के माध्यम से विदेशों में नौकरी के अवसर उपलब्ध कराए जाएं।

मुख्य सचिव ने कहा कि प्रदेशभर में स्किल गैप असेसमेंट करा लिया जाए। उन्होंने अपने प्रशिक्षण कार्यक्रमों में नर्सिंग का टूर गाइड्स एवं पर्यटन की बढ़ती संभावनाओं को देखते हुए वाइल्ड लाइफ गाइड प्रशिक्षण को भी शामिल किया जाए। इसके लिए विभाग को युवाओं को प्रशिक्षण उपलब्ध कराने के साथ ही हैंड होल्डिंग किए जाने की आवश्यकता है।

मुख्य सचिव ने कहा कि विदेशों में नौकरी की संभावनाओं को देखते हुए युवाओं को अपेक्षित प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जाए। उन्होंने कहा कि युवाओं की हैंड होल्डिंग के साथ ही इच्छुक अभ्यर्थियों को इंटेंसिव ट्रेनिंग भी कराई जा सकती है। उन्होंने कहा कि विदेश में जॉब के लिए जाने वाले अभ्यर्थियों को विदेशी भाषाओं व्यावहारिक बातचीत का प्रशिक्षण भी अनिवार्य रूप से कराया जाए ताकि विदेशों में सामान्य बोलचाल की समस्या उत्पन्न न हो। मुख्य सचिव ने कहा कि विभाग द्वारा विदेशों में नौकरी के अवसर का भी लक्ष्य निर्धारित किया जा सकता है, ताकि अधिक से अधिक लोग इसका लाभ उठा सकें।

सचिव सी. रविशंकर ने बताया कि विभाग द्वारा ओवरसीज एम्प्लॉयमेंट सेल का गठन कर लिया गया है। अभी तक 63 युवाओं को जापान और सऊदी अरेबिया में प्रशिक्षण और रोजगार प्रदान किया गया है। उन्होंने कहा कि सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के माध्यम से 351 युवाओं को प्रशिक्षण उपलब्ध कराया गया है, जिसमें से 315 को प्लेसमेंट मिल गया है। सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में वर्तमान में 169 युवाओं को प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

इस अवसर पर सचिव सी रविशंकर सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

सप्ताह में तीन बार चलेगी देहरादून से टनकपुर जाने वाली वीकली ट्रेन, केंद्रीय रेल मंत्री ने दी सहमति

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने नई दिल्ली में केन्द्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव से भेंट कर उत्तराखण्ड में रेल अवसंरचना के विकास पर चर्चा की। इस दौरान मुख्यमंत्री ने देहरादून एवं हरिद्वार रेलवे स्टेशनों को आदर्श रेलवे स्टेशन के रूप में विकसित किए जाने के लिए दोनों रेलवे स्टेशनों के विस्तार/सुदृढ़ीकरण के साथ ही हरिद्वार-देहरादून रेल लाइन दोहरीकरण का कार्य केन्द्र सरकार द्वारा पूर्ण व्ययभार वहन करते हुए पूर्ण कराने का अनुरोध किया। केंद्रीय मंत्री ने हरिद्वार व देहरादून रेलवे स्टेशनों को आदर्श रेलवे स्टेशन के रूप में विकसित किये जाने पर सहमति देते हुए कहा कि हरिद्वार-देहरादून रेल लाइन दोहरीकरण के कार्य का पूर्ण व्ययभार केन्द्र सरकार द्वारा किये जाने के संबंध में परीक्षण कर उचित निर्णय लिया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने टनकपुर-बागेश्वर रेल परियोजना में संरेखण में अल्मोड़ा और सोमेश्वर क्षेत्रों को भी जोड़ने की संभावनाओं पर विचार करने और टनल के साथ-साथ सड़क का प्रावधान करने का अनुरोध केन्द्रीय रेल मंत्री से किया। रेल मंत्री ने कहा कि इस पर विचार किया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने ऋषिकेश के पुराने रेलवे स्टेशन को पूर्णतः बंद करते हुए इस भूमि के सभी अधिकार राज्य सरकार को हस्तांतरित किए जाने के लिए भी केन्द्रीय रेल मंत्री से अनुरोध किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि पुराने रेलवे स्टेशन के बंद होने के कारण यदि योग नगरी रेलवे स्टेशन पर सुव्यवस्थित संचालन के लिए अतिरिक्त भूमि की आवश्यकता होगी तो राज्य सरकार इस पर सकारात्मक विचार एवं सहयोग करेगी। रेल मंत्री ने इस पर अपनी सैद्धांतिक सहमति दी।

केन्द्रीय रेल मंत्री ने मुख्यमंत्री के अनुरोध पर देहरादून-टनकपुर वीकली ट्रेन को सप्ताह में तीन बार किये जाने पर भी सहमति दी।

प्रतिबंधित कफ सिरप के खिलाफ शिशु रोग अस्पतालों के मेडिकल स्टोरों का औचक निरीक्षण

केंद्र सरकार द्वारा बच्चों के लिए प्रतिबंधित कफ सिरप को लेकर जारी गाइडलाइन के सख्त अनुपालन हेतु उत्तराखंड सरकार ने कार्रवाई तेज कर दी है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत के दिशा-निर्देशों में खाद्य सरंक्षा व औषधि प्रशासन विभाग की टीमें प्रदेशभर में औचक निरीक्षण अभियान चला रही हैं। इसी क्रम में देहरादून क्षेत्र में औषधि विभाग ने कई मेडिकल स्टोरों और शिशु रोग अस्पतालों के मेडिकल स्टोरों का निरीक्षण किया, जहां से पेडियाट्रिक कफ सिरप के नमूने जब्त कर परीक्षण के लिए राज्य औषधि प्रयोगशाला भेजे गए हैं। स्वास्थ्य सचिव एवं आयुक्त डॉ. आर. राजेश कुमार के निर्देशों में यह सघन अभियान लगातार सभी जनपदों में जारी है। विभाग का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी मेडिकल स्टोर या अस्पताल में प्रतिबंधित, असुरक्षित या बिना अनुमति वाली औषधियाँ न बेची जाएं और बच्चों की सेहत के साथ किसी भी प्रकार का जोखिम न उठाया जाए।

देहरादून क्षेत्र में औचक निरीक्षण अभियान
स्वास्थ्य सचिव एवं आयुक्त डॉ. आर. राजेश कुमार से प्राप्त आदेशों तथा अपर आयुक्त एफडीए व ड्रग कंट्रोलर ताजबर सिंह जग्गी के दिशा-निर्देशों के अनुसार औषधि विभाग की टीम ने आज देहरादून क्षेत्र में स्थित मेडिकल स्टोरों एवं शिशु रोग (Paediatric) अस्पतालों के मेडिकल स्टोरों का औचक निरीक्षण किया। अपर आयुक्त एफडीए व ड्रग कंट्रोलर ताजबर सिंह जग्गी ने कहा निरीक्षण के दौरान कई मेडिकल स्टोरों में Dextromethorphan Hydrobromide, Chlorpheniramine Maleate एवं Phenylephrine Hydrochloride युक्त पेडियाट्रिक कफ सीरप्स का भंडारण पाया गया। इन औषधियों को नियमानुसार सीज़ (जब्त) करने की कार्यवाही की गई। साथ ही, कुल 06 पेडियाट्रिक कफ सीरप्स के नमूने फॉर्म-17 में परीक्षण हेतु एकत्रित किए गए हैं। नमूने अब राज्य औषधि परीक्षण प्रयोगशाला को भेजे जाएंगे, जहाँ उनकी गुणवत्ता और वैधता का परीक्षण किया जाएगा।

नियमों के पालन को लेकर विभाग सख्त
अपर आयुक्त एफडीए व ड्रग कंट्रोलर ताजबर सिंह जग्गी ने कहा निरीक्षण के दौरान यह भी पाया गया कि किसी भी मेडिकल स्टोर पर Coldrif, Respifresh TR, Relife कफ सिरप उपलब्ध नहीं थी। विभाग ने स्पष्ट किया कि निरीक्षण का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि प्रदेश में केवल अनुमोदित, सुरक्षित और चिकित्सकीय रूप से स्वीकृत औषधियाँ ही उपलब्ध हों। विभाग ने सभी औषधि विक्रेताओं को चेतावनी दी है कि यदि किसी भी स्टोर पर बिना अनुमति या प्रतिबंधित औषधियां पाई जाती हैं, तो उनके विरुद्ध खाद्य, औषधि एवं प्रसाधन अधिनियम, 1940 तथा संबंधित नियमों के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

सरकार की प्रतिबद्धता, जनस्वास्थ्य सर्वोपरि- पुष्कर सिंह धामी
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा है कि सरकार की प्राथमिकता प्रदेशवासियों को सुरक्षित, गुणवत्तापूर्ण और प्रमाणित औषधियाँ उपलब्ध कराना है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि औषधि विक्रेताओं और अस्पतालों में नियमित निरीक्षण और सैंपलिंग प्रक्रिया को और तेज किया जाए।

लापरवाही या नियम उल्लंघन बर्दाश्त नहीं- डॉ. धन सिंह रावत
स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने कहा कि औषधि विभाग का यह अभियान जनस्वास्थ्य की रक्षा के लिए अत्यंत आवश्यक कदम है। किसी भी स्तर पर लापरवाही या नियम उल्लंघन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। विभाग ने आम जनता से भी अपील की है कि वे किसी भी संदिग्ध या बिना लेबल औषधि की जानकारी निकटतम औषधि निरीक्षक या विभागीय हेल्पलाइन को दें, ताकि त्वरित कार्रवाई की जा सके।

निरीक्षण टीम और नेतृत्व
इस निरीक्षण अभियान का नेतृत्व उप औषधि नियंत्रक हेमंत सिंह नेगी ने किया। उनके साथ
सहायक औषधि नियंत्रक सुधीर सिंह, औषधि निरीक्षक मानेंद्र सिंह राणा, औषधि निरीक्षक श्रीमती निधि रतूड़ी, तथा औषधि निरीक्षक विनोद जगूड़ी टीम में सम्मिलित रहे। टीम ने कहा कि यह अभियान आगे भी जारी रहेगा और सभी जिलों में मेडिकल स्टोरों की निरंतर निगरानी की जाएगी ताकि आमजन तक केवल सुरक्षित और मानक औषधियां ही पहुँच सकें।