सीएम का आग्रह रंग लाया, पीटी उषा ने प्रतीकों के लॉन्चिंग कार्यक्रम में दी जानकारी

38 वें राष्ट्रीय खेलों के शुभंकर समारोह की भव्यता के बीच योग और मलखंभ जैसे दो पारंपरिक खेल भी राष्ट्रीय खेल का हिस्सा बन गए। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के आग्रह को भारतीय ओलंपिक संघ ने स्वीकार कर लिया। रविवार को आयोजित भव्य शुभंकर समारोह में भारतीय ओलंपिक संघ की अध्यक्ष डॉ पीटी ऊषा ने इसकी जानकारी सार्वजनिक की। इस मौके पर मुख्यमंत्री ने 38 वें राष्ट्रीय खेलों के शुभंकर प्रतीक मौली, लोगो, जर्सी, एंथम और टैग लाइन को लॉन्च किया। राष्ट्रीय खेलों के लिए टैग लाइन संकल्प से शिखर तक घोषित की गई है।

महाराणा प्रताप स्पोर्ट्स कॉलेज, रायपुर, देहरादून में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने कहा कि आज का दिन उत्तराखंड के खेल इतिहास में एक ऐतिहासिक दिन है। उन्होंने राष्ट्रीय खेलों की मेजबानी का अवसर देने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संपूर्ण उत्तराखंड वासियों की ओर से धन्यवाद प्रकट किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय खेलों का सुंदर लोगो उत्तराखंड के विविध रंगों को पूरे देश के सामने प्रदर्शित करता है। यह एंथम, हमारी एकजुटता को प्रदर्शित करने के साथ खिलाड़ियों को और अधिक परिश्रम करने हेतु प्रेरित करता है। राष्ट्रीय खेलों का शुभंकर, मोनाल हमारे प्रदेश की विशिष्टता को प्रदर्शित करने के साथ युवा खिलाड़ियों को बड़े लक्ष्यों को सामने रखकर जी-तोड़ मेहनत करने हेतु भी प्रेरित करता है। और लोगो हमारे राज्य पक्षी मोनाल से प्रेरित है जो उत्तराखंड की प्राकृतिक सुंदरता और विविधता के रंगों को भारत के प्रत्येक कोने तक पहुँचाएगा। राष्ट्रीय खेलों की सुंदर मशाल प्रज्वलित की है वो देश में एकता और सामूहिक प्रयास के प्रतीक के रूप में राज्य भर की यात्रा करेगी और समाज में खेल भावना और खेल संस्कृति विकसित करने में सहायता करेगी।

बतौर मुख्य अतिथि, मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारा संकल्प, विकल्प रहित होना चाहिए। संकल्प से ही हम किसी भी लक्ष्य को प्राप्त कर सकते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा राज्य 38वें राष्ट्रीय खेलों के सफल आयोजन हेतु अब पूर्ण रूप से तैयार है। इस आयोजन के लिए राज्य सरकार ने अवस्थापना सुविधाओं में लगभग 500 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है, जिससे राज्य में कई नए खेल मैदानों का निर्माण, स्टेडियम और स्विमिंग पूलों का पुनर्निर्माण, वाटर स्पोर्ट्स के लिए इन्फ्रास्ट्रक्चर, साइकिलिंग ट्रैक, शूटिंग रेंज को विकसित किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार पर्वतीय क्षेत्रों में भी छोटे खेल स्टेडियमों का निर्माण कर रही है। जिससे स्थानीय खिलाड़ियों को भी अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर प्राप्त हो रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत को खेल महाशक्ति के रूप में स्थापित करने हेतु प्रत्येक स्तर पर अभिनव प्रयास किए गए हैं। फिट इंडिया, खेलो इंडिया योजना के साथ मजबूत स्पोर्ट्स इकोसिस्टम विकसित किया गया है। उन्होंने कहा राज्य सरकार, प्रदेश में खेल और खिलाड़ियों को लगातार प्रोत्साहित करने का काम कर रही है। प्रदेश में नई खेल नीति लागू कर राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पदक लाने वाले खिलाड़ियों को सरकारी नौकरी दी जा रही है।

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में खिलाड़ियों के लिए चार प्रतिशत आरक्षण पुनः लागू करने, प्रदेश के खिलाड़ियों को दी जाने वाली पुरस्कार राशि को दोगुना करने और खेल विश्वविद्यालय के निर्माण की बात को दोहराया। उन्होंने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि राष्ट्रीय खेलों में प्रतिभाग करने वाले देश के तमाम खिलाड़ी उत्तराखंड से अच्छा अनुभव लेकर जाएंगे।

इस मौके पर केंद्रीय खेल राज्यमंत्री रक्षा खडसे ने कहा कि देश के खिलाड़ी आज अंतराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं। उत्तराखंड के खिलाड़ी देश और प्रदेश का नाम रोशन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि खेल विकास में केंद्र सरकार उत्तराखंड को पूरी मदद देगी। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार का प्रयास है कि ओलंपिक का आयोजन भारत में कराया जाए। खेल मंत्री मनसुख मंडाविया का वीडियो संदेश भी इस मौके पर प्रसारित किया गया।

भारतीय ओलपिंक संघ की अध्यक्ष डा. पीटी ऊषा ने राष्ट्रीय खेलों की मेजबानी के लिए उत्तराखंड को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व की तारीफ करते हुए उम्मीद जताई कि खेलों के विकास में उत्तराखंड में बेहतर कार्य होगाा।

उत्तराखंड की खेल मंत्री रेखा आर्या ने कहा कि उत्तराखंड के रजत जयंती वर्ष में राष्ट्रीय खेलों का आयोजन बेहद उत्साहित करने वाला है।

कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज, विधायक उमेश शर्मा काऊ, सुनैना कुमारी, राज्य ओलंपिक संघ के अध्यक्ष महेश नेगी, विशेष प्रमुख सचिव खेल अमित सिन्हा, सचिव शैलेश बगोली, खेल निदेशक प्रशांत आर्य समेत तमाम गणमान्य लोग उपस्थित थे। संचालन आरजे काव्य ने किया।

आज के युवा हमारे लोक संगीत को पसंद करते हैं और आगे भी बढ़ा रहेः सीएम

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोशल बलूनी पब्लिक स्कूल, हरिद्वार बाईपास, देहरादून में चतुर्थ उत्तराखण्ड लोक विरासत कार्यक्रम में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर उन्होंने उत्तराखंड के स्थानीय उत्पादों पर आधारित स्टालों का भी अवलोकन किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड के कोने-कोने से लोक कलाकारों को एक मंच पर लाकर प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत को संजोने और उसे भावी पीढ़ी तक पहुँचाने की यह सराहनीय पहल है। उन्होंने उत्तराखंड लोक विरासत टीम के सभी सदस्यों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि हमारे उत्तराखंड के सभी लोक कलाकार अपनी मेहनत और लगन से उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का कार्य कर रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड की समृद्ध लोक संस्कृति बहुत विशाल और विशिष्ट है। लोक गायन, लोक संगीत और लोकनृत्य की अनेकों प्रकार की शैलियाँ और अनेकों प्रकार के वाद्य यंत्र हमारी लोक संस्कृति को और अधिक समृद्ध बनाते हैं। आज छोलिया नृत्य, झोड़ा, चांचरी, नेवली, पांडव नृत्य और मुखौटा नृत्य जैसे अनेकों लोकनृत्य हमारी सांस्कृतिक विरासत को संजोए हुए हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज के युवा हमारे लोक संगीत को पसंद करते हैं और उसे आगे बढ़ाने का भी कार्य कर रहे हैं। आजकल युवा अपना म्यूजिकल बैंड बनाकर उत्तराखंड के लोक-गीतों को नए कलेवर के साथ एक नई पहचान देने का भी कार्य कर रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में राज्य सरकार प्रदेश के चहुँमुखी विकास के साथ ही सांस्कृतिक विकास के लिए भी प्रतिबद्धता के साथ निरंतर कार्य कर रही है। सरकार द्वारा लोक भाषाओं व लोक साहित्य में कुमाऊंनी, गढ़वाली, जौनसारी सहित राज्य की अन्य बोलियों व उप-बोलियों में उत्कृष्ट साहित्य सेवा के लिए उत्तराखंड साहित्य गौरव सम्मान प्रदान किया जा रहा है। प्रदेश के विभिन्न धार्मिक एवं सांस्कृतिक स्थलों का पुनर्निर्माण करवाने के साथ ही सांस्कृतिक मेलों का आयोजन और अधिक भव्य रूप में किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश की विभिन्न स्थानीय भाषाओं में ग्रंथ प्रकाशन एवं फिल्म निर्माण के लिए आर्थिक सहायता भी प्रदान की जा रही है। हाल ही में हमारी पहली जौनसारी फीचर फिल्म रिलीज़ हुई है। उन्होंने कहा राज्य सरकार ने प्रदेश के सांस्कृतिक मूल्यों और डेमोग्राफी को संरक्षित रखने हेतु अतिक्रमण के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की है। प्रदेश में कड़ा धर्मांतरण विरोधी कानून भी लागू किया है। प्रदेश में ज़मीनें खरीदने वाले बाहरी लोगों की गहनता से जाँच की जा रही है। अगर कोई भी व्यक्ति नियमों का उल्लंघन करता हुआ पाया जाता है तो उसके भूखंड को सरकारी संपत्ति में निहित किया जाएगा। उन्होंने कहा राज्य सरकार जल्द ही सख्त भू-कानून लेकर आने वाली है।

इस अवसर पर लोकगायक नरेंद्र सिंह नेगी, पद्म प्रीतम भरतवाण, कमला देवी उत्तराखण्ड लोक विरासत ट्रस्ट के अध्यक्ष डॉ केपी जोशी, सुधीर नौटियाल एवं अन्य लोग उपस्थित रहे ।

विश्व आयुर्वेद कांग्रेस में सबसे ज्यादा 12 हजार डेलीगेट्स दून में पंजीकृत

चार दिन के विश्व आयुर्वेद कांग्रेस एवं आरोग्य एक्सपो के दसवें संस्करण में 12 हजार डेलीगेट्स के पहुंचने का आंकड़ा दर्ज हुआ है। इस विश्व स्तरीय आयोजन के इतिहास में डेलीगेट्स की यह अब तक की सबसे बड़ी संख्या है। इस लिहाज से उत्तराखंड ने एक बड़ी उपलब्धि हासिल कर ली है। इस आयोजन में 54 देशों की भागीदारी रही। 300 विदेशी डेलीगेट्स ने इस कार्यक्रम में भाग लेकर आयुष के प्रति अपना प्रेम प्रदर्शित किया।

पिछले वर्ष गोवा में आयोजित इस आयोजन के नौवें संस्करण में सबसे ज्यादा डेलीगेट्स पहुंचे थे। वहां पर 5102 डेलीगेट्स का पंजीकरण हुआ था। कोच्चि में आयोजित इस आयोजन के पहले संस्करण में 1800 डेलीगेट्स का ही पंजीकरण हुआ था। देहरादून उत्तराखंड में जब इस आयोजन का एलान हुआ, तब ही ये माना जा रहा था कि यहां रिकॉर्ड पंजीकरण हो सकते हैं। आयुष के लिहाज से सबसे समृद्ध राज्य होने को इसकी वजह माना जा रहा था। ये अनुमान सही साबित हुआ है। देश विदेश के डेलीगेट्स ने उत्तराखंड आने में खास दिलचस्पी दिखाकर पंजीकरण का नया रिकॉर्ड रच दिया है।

आयुष विभाग के अपर सचिव डॉ विजय जोगदंडे के अनुसार, इस आयोजन में कुल 12 हजार पंजीकरण हुए हैं। 54 देशों के 300 प्रतिनिधियों की भी आयोजन में भागीदारी हुई है। उन्होंने कहा कि इस दौरान आयुष पर गहन चर्चा के साथ ही नई संभावनाओं पर भी बात हुई है।

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विश्व आयुर्वेद कांग्रेस एवं आरोग्य एक्सपो 2024 के सफल आयोजन के लिए उत्तराखंड देश विदेश से आए डेलीगेट्स के प्रति आभारी है। आयुष भूमि उत्तराखंड में विचार विमर्श महत्वपूर्ण विचार विमर्श हुआ है, जिसके दूरगामी परिणाम सामने आएंगे। आयुष के विकास और इससे आम जन को लाभ पहुंचाने के लिए हम प्रतिबद्ध हैं।

पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री

गहन विमर्श से उपजा मौली, खिलाड़ियों के लिए होगा ज्यादा प्रेरक

उत्तराखंड में 38 वें राष्ट्रीय खेलों की तैयारी तेज हो गई है। राष्ट्रीय खेलों का शुभंकर प्रतीक ’मौली’ (मोनाल पक्षी) नए अवतार में नजर आएगा। यह खिलाड़ियों के नजरिए से ज्यादा आकर्षक और प्रेरक होगा। राष्ट्रीय खेल के लोगो को भी नए सिरे से डिजाइन किया गया है। जर्सी, टार्च, एंथम सभी में उत्तराखंड की छाप नजर आएगी।

दरअसल, 38वें राष्ट्रीय खेलों की मेजबानी उत्तराखंड को करीब आठ वर्ष पहले मिल गई थी। तब इसका शुभंकर प्रतीक और लोगो जारी किया गया था। इन खेलों के लिए उत्तराखंड के राज्य पक्षी मोनाल को शुभंकर प्रतीक बनाया गया था। मगर लंबे विमर्श के बाद यह महसूस किया गया कि शुभंकर प्रतीक को और आकर्षक बनाने की आवश्यकता है। ताकि शुंभकर प्रतीक खिलाड़ियों से ज्यादा कनेक्ट कर पाए। अब इन खेलों का शुभंकर प्रतीक मौली के रूप में सामने आ रहा है। इसी तरह, लोगों को भी नए सिरे से डिजाइन किया गया है। मकसद ये ही है कि नई स्थितियों के अनुरूप ये ज्यादा आकर्षक नजर आएं।

राष्ट्रीय खेल सचिवालय के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अमित सिन्हा के अनुसार-राष्ट्रीय खेलों की तैयारी तेजी से चल रही है। हम बेहतर आयोजन के लिए प्रतिबद्ध हैं। अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी प्रशांत आर्य के मुताबिक-बेहतर व्यवस्था बनाने के लिए जिस तरह की भी आवश्यकता है, उसके इंतजाम किए जा रहे हैं।

रविवार खास, शुभंकर, लोगो होंगे लांच

38वें राष्ट्रीय खेलों के लिहाज से रविवार यानी 15 दिसंबर का दिन काफी खास होने जा रहा है। रविवार को खेलों के शुभंकर प्रतीक, लोगो, टार्च, एंथम जर्सी लांच होंगे। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी लांचिंग कार्यक्रम में मुख्य अतिथि होंगे, जबकि केंद्रीय खेल राज्य मंत्री रक्षा खडसे और भारतीय ओलंपिक संघ की अध्यक्ष पीटी ऊषा की खास उपस्थिति होगी।

मशाल में गंगा, ब्रह्मकमल के दिखेंगे चिन्ह

राष्ट्रीय खेलों की मशाल में सदानीरा गंगा, राज्य पुष्प ब्रह्म कमल के चिन्ह दिखाई देंगे। इसे इसी हिसाब से डिजाइन किया गया है। इसके अलावा, उत्तराखंडी लोक कला ऐपण के भी दर्शन प्रचार सामग्री से लेकर अन्य जगहों पर प्रभावी ढंग से होंगे।

छह टन स्क्रैप से बना टाइगर खीचेंगा ध्यान

महाराणा प्रताप स्पोर्ट्स कॉलेज परिसर में राष्ट्रीय खेलों की तैयारी के बीच छह टन स्क्रैप से बना टाइगर भी अपनी ओर सभी का ध्यान खीचेंगा। यह पूरी तरह से स्क्रैप से तैयार किया गया है, जिसे बनाने में करीब 20 दिन लगे हैं।
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38वें राष्ट्रीय खेलों का आयोजन हमारे लिए सौभाग्य की बात है। उत्तराखंड के रजत जयंती वर्ष में खेलों के इतने बड़े आयोजन की मेजबानी के लिए हम उत्साहित है। इसके लिए हमारी पूरी तैयारी है। सभी के सहयोग से भव्य और बेहतर इंतजाम किए जाएंगे।
पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री

सराहनीयः नेशनल आयुष मिशन के तहत दो वर्ष के आंकड़े उत्साह से भरने वाले

नेशनल आयुष मिशन में उत्तराखंड की वर्तमान स्थिति उसकी प्रगति की कहानी को खुद बयां कर रही है। उत्तराखंड में हर महीने करीब तीन लाख लोग आयुष सेवा से लाभान्वित हो रहे हैं। पिछले 22 महीनों के आंकड़ों की बात करें, तो उत्तराखंड में 67 लाख से ज्यादा लोगों ने आयुष स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ उठाया है।

नेशनल आयुष मिशन केंद्रीय आयुष मंत्रालय की फ्लैगशिप योजना है। इसे दूरदराज के क्षेत्रों में प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा पहुंचाने के लक्ष्य के साथ डिजाइन किया गया है। उत्तराखंड जैसे विषम भौगोलिक परिस्थितियों वाले राज्य के लिए इस योजना की खास अहमियत मानी जा रही है। इस योजना में वर्ष 2023 से अब तक के जो उपलब्ध आंकड़े हैं, वह उत्तराखंड की प्रगति को सामने रख रहे हैं।

केंद्रीय आयुष मंत्रालय से मिली जानकारी के अनुसार-वर्ष 2023 में उत्तराखंड में 42 लाख 64 हजार लोगों ने आयुष सेवा का लाभ उठाया है। इस वर्ष अक्टूबर माह तक 24 लाख 56 हजार लोग इस सेवा से लाभान्वित हो चुके हैं। विश्व आयुर्वेद कांग्रेस एवं आरोग्य एक्सपो-2024 के दौरान उत्तराखंड की प्रगति की खास चर्चा हुई है। देहरादून आए केंद्रीय आयुष सचिव वैद्य राजेश कोटेचा ने उत्तराखंड की प्रगति को सराहा है। उनका कहना है कि नेशनल आयुष मिशन के तहत केंद्रीय आयुष मंत्रालय की कोशिश प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को घर-घर तक पहुंचाने की है। उत्तराखंड जैसे विषम भौगोलिक स्थितियों वाले राज्य में नेशनल आयुष मिशन की सफलता उत्साहित करने वाली है।

67 आरोग्य मंदिर (आयुष) का प्रमाणीकरण

नेशनल हेल्थ मिशन के तहत संचालित हो रहे आयुष्मान आरोग्य मंदिर (आयुष) उत्तराखंड में 300 हैं इनमें से डेढ़ सौ आरोग्य मंदिरों का नेशनल एग्रीडेशन बोर्ड फॉर हॉस्पिटल एंड हेल्थ केयर प्रोवाइडर (एनएबीएच) के स्तर पर प्रमाणीकरण किया जा चुका है। बाकी आरोग्य मंदिरों के प्रमाणीकरण की प्रक्रिया जारी है। उत्तराखंड में इस वक्त 50 बैड के पांच और दस बैड के दो आयुष हॉस्पिटल हैं। छह आयुष हॉस्पिटलों के निर्माण की प्रक्रिया चल रही है।
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नेशनल हेल्थ मिशन के तहत आम जन तक आयुष सेवाओं का लाभ पहुंचाने के लिए पूरी ताकत से काम किया जा रहा है। इस संबंध में केंद्र सरकार का भी पूरा सहयोग राज्य को मिल रहा है। मुझे विश्वास है कि नेशनल आयुष मिशन के तहत हम प्रदेश में अधिक से अधिक लोगों को स्थानीय स्तर पर बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने में सफल रहेंगे।
– पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री

राज्य सरकार ने शुरू की नई पहल, शीतकालीन चारधाम यात्राः सीएम

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि हमने 2022 में उत्तराखण्ड की देवतुल्य जनता के सामने संकल्प रखा कि नई सरकार का गठन होते ही राज्य में समान नागरिक संहिता लाने के लिए कार्यवाही शुरू करेंगे। इसके लिए कमेटी बनाई गई। कमेटी के रिपोर्ट सौंपने के बाद विधानसभा में विधेयक पारित कर इसे राष्ट्रपति को भेजा। राष्ट्रपति महोदय द्वारा भी इसके लिए मंजूरी दी जा चुकी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि समान नागरिक संहिता को लागू करने की दिशा में राज्य तेजी से आगे बढ़ा है, इसकी असली श्रेय की हकदार उत्तराखण्ड की देवतुल्य जनता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि शीतकाल में श्री केदारनाथ की ओंकारेश्वर मंदिर ऊखीमठ में, बदरीनाथ की पाण्डुकेश्वर और नर्सिंग मंदिर ज्योर्तिमठ में, यमुनोत्री की खरसाली और गंगोत्री की मुखवा में पूजा अर्चना होती है। राज्य सरकार द्वारा इन स्थलों पर शीतकाल यात्रा शुरू करने के साथ ही इनके आस-पास के पौराणिक स्थलों को विकसित किया जा रहा है। मानसखण्ड मंदिर माला मिशन के तहत भी प्रथम चरण में 16 मंदिर क्षेत्रों को विकसित किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड में निवेश बढ़ाने के लिए पिछले वर्ष राज्य में इन्वेस्टर समिट का आयोजन किया गया। जिसमें 3.56 लाख करोड़ से अधिक के एमओयू किये गये। इनकी ग्राउंडिंग भी तेजी से हो रही है। राज्य में निवेश अनुकूल वातावरण बनाने के लिए 30 से अधिक नीतियां बनाई गई हैं। अनेक नीतियों का सरलीकरण किया गया है। सिंगल विंडो सिस्टम के तहत अनुमतियां दी जा रही हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड राज्य स्थापना के रजतोत्सव वर्ष मे प्रवेश कर गया है। राज्य हर क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हो इसके लिए सरकार द्वारा हर संभव प्रयास किये जा रहे हैं। राज्य में आगामी 25 सालों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए विकास योजनाओं की प्लानिंग पर कार्य किया जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के 2047 तक विकसित भारत के संकल्प को पूर्ण करने में उत्तराखण्ड अपना महत्वपूर्ण योगदान देगा।

ऋषिकुल कॉलेज के उच्चीकरण की डीपीआर तैयार, गुरूकुल पर थोड़ा इंतजार

उत्तराखंड में सौ वर्ष पुराने दो आयुर्वेद कॉलेजों की जल्द ही कायाकल्प होगी। इसमें से एक ऋषिकुल कॉलेज के उच्चीकरण का मामला तेजी से आगे बढ़ रहा है। केंद्र सरकार को भेजने के लिए उत्तराखंड ने डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार कर ली है। केंद्र सरकार का रुख इस संबंध में बेहद सकारात्मक है। इसी तरह, सौ वर्ष पुराने गुरुकुल आयुर्वेद कॉलेज पर भी सरकार की नजर है। हालांकि अभी इसका विचार बेहद प्राथमिक स्तर पर है।

इन स्थितियों के बीच, वर्ल्ड आयुर्वेद कांग्रेस एवं एक्सपो-2024 का देहरादून में आयोजन उत्तराखंड के पक्ष में माहौल बनाने वाला साबित हो रहा है। सौ वर्ष पुराने आयुर्वेद कॉलेजों के उच्चीकरण की उत्तराखंड लगातार पैरवी कर रहा है। हालांकि उत्तराखंड ने ऋषिकुल कॉलेज को अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान बनाने का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा था। केंद्र ने उत्तराखंड से इसके स्थान पर उच्चीकरण का प्रस्ताव भेजने के लिए कहा था। उत्तराखंड के आयुष विभाग ने इस संबंध में आवश्यक कार्रवाई कर ली है। इस संबंध में लोक निर्माण विभाग ने उच्चीकरण से संबंधित डिटेल प्रोजेक्ट (डीपीआर) भी तैयार कर ली है। शासन स्तर जल्द ही इस पर निर्णय लिया जाना है। उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ एके त्रिपाठी के अनुसार-केंद्र के सकारात्मक रुख को देखते हुए पूरी उम्मीद है कि जल्द ही ऋषिकुल कॉलेज का उच्चीकरण हो जाएगा। दूसरी तरफ, केंद्रीय आयुष सचिव वैद्य राजेश कोटेचा का कहना है कि उत्तराखंड के प्रस्ताव पर कार्रवाई गतिमान है और मंत्रालय का रुख सकारात्मक है।

पूरे देश में दर्जन भर है ऐसे कॉलेजों की संख्या

आयुर्वेद के सौ वर्ष पुराने कॉलेज पूरे देश में दर्जन भर हैं। उत्तराखंड इस मामले में भाग्यशाली है कि उसके पास हरिद्वार में ऋषिकुल और गुरुकुल के रूप में दो ऐसे आयुर्वेद कॉलेज हैं, जो सौ वर्ष से ज्यादा पुराने हैं। इनमें भी ऋषिकुल कॉलेज सबसे ज्यादा पुराना है, जिसकी स्थापना वर्ष 1919 में हुई थी। बहुत कम लोग जानते हैं कि महामना मदन मोहन मालवीय ने इसकी स्थापना की थी। गुरुकुल कॉलेज की स्थापना वर्ष 1921 में स्वामी श्रद्धानंद ने की थी।

ऋषिकुल में सात मंजिला हॉस्पिटल का प्रस्ताव

उच्चीकरण के लिए जो विस्तृत रिपोर्ट तैयार की गई है, उसके ऋषिकुल में सात मंजिला हॉस्पिटल का प्रस्ताव रखा गया है। उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय के कुलपति डा एके त्रिपाठी के अनुसार-ऋषिकुल कॉलेज में मौजूद पुराने हॉस्पिटल को तोड़कर यह हॉस्पिटल बनाए जाने का प्रस्ताव किया गया है। ऋषिकुल कॉलेज के पास 25 एकड़ जमीन उपलब्ध है। वर्तमान में यहां पर 11 विषय में स्नातकोत्तर की पढ़ाई कराई जा रही है।

उत्तराखंड में आयुष से जुड़ी हर गतिविधि को बढ़ावा देने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है। केंद्र सरकार का भी इस संबंध में राज्य को पूर्ण सहयोग मिल रहा है। हम उम्मीद करते हैं कि आयुष के संबंध में उत्तराखंड के जो भी प्रस्ताव है, उन पर जल्द ही मुहर लग जाएगी।
– पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री

सीएम धामी ने टिहरी वॉटर स्पोर्ट्स कप के समापन पर पहुंच की कई घोषणाएं

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कोटी कॉलोनी, टिहरी गढ़वाल में 35वीं सीनियर राष्ट्रीय कैनो-स्प्रिंट चौंपियनशिप के तहत टिहरी वाटर स्पोर्ट्स कप 2024 के समापन समारोह में प्रतिभाग किया। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर मेडिकल कॉलेज नई टिहरी की सड़कों का हॉट मिक्सिंग का काम करने, नई टिहरी में मल्टी पार्किंग निर्माण कार्य करने, जिला मुख्यालय में खेल मैदान का निर्माण करने एवं टिहरी-चंबा क्षेत्र हेतु 50 साल के दृष्टिकोण से जायका से पेयजल पंपिंग योजना का निर्माण कार्य करने की घोषणा की।

मुख्यमंत्री ने केनोइंग प्रतियोगिता के ओवर ऑल चौंपियनशिप में प्रथम तथा पुरुष व महिला वर्ग में प्रथम एवं द्वितीय स्थान प्राप्त करने वाले विजेताओं को ट्रॉफी एवं मेडल पहनाकर सम्मानित भी किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह गर्व का विषय है कि टिहरी बांध जलाशय में तीसरे टिहरी वॉटर स्पोर्ट्स कप का सफल आयोजन हो रहा है। उन्होंने कहा टिहरी झील ऊर्जा उत्पादन, जल प्रबंधन के साथ पर्यटन एवं साहसिक खेलों की दृष्टि से भी हमारे प्रदेश की आर्थिकी एवं रोजगार को बढ़ाने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। सरकार का यह प्रयास है कि समय-समय पर यहां पर इस प्रकार के कार्यक्रम आयोजित होते रहे, ताकि साहसिक खेलों के साथ पर्यटन गतिविधियों को भी बढ़ावा मिल सके। इस तरह के आयोजनों से हमारी रोजगार और आर्थिकी को भी मजबूती मिलती है। आने वाले समय में 12 महीने इस तरह की प्रतियोगिताएं आयोजित होने से टिहरी क्षेत्र विकास के क्षेत्र में नए कीर्तिमान हासिल करेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि खेल, शारीरिक और मानसिक विकास के साथ खिलाड़ियों के अंदर अनुशासन की भावना का भी विकास करता है, खेल से संघर्ष शीलता जैसे गुण विकसित होते हैं। देश में खेलों को बढ़ावा देने के लिये प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में फिट इंडिया, खेलो इंडिया जैसे अनेकों कार्यक्रम शुरू किए गए जिसके माध्यम से देश में खेल संस्कृति को प्रोत्साहन मिला है। उन्होंने कहा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कुशल नेतृत्व में भारत आज खेल के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को छू रहा है। एवं राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी एक नई पहचान बना रहा है। राज्य सरकार भी प्रदेश के अंदर युवाओं को आगे बढ़ाने के लिए उनकी प्रतिभा को निखारने के लिए निरंतर प्रयासरत है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने खेल और खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से नई खेल नीति लागू की है। राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय पदक जीतने वाले खिलाड़ियों को आउट ऑफ टर्न नौकरी भी दी जा रही हैं। मुख्यमंत्री खेल विकास नीति, मुख्यमंत्री खिलाड़ी प्रोत्साहन योजना, मुख्यमंत्री उदीयमान खिलाड़ी योजना, खेल किट योजना आदि योजनाओं के माध्यम से खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करने का काम कर रहे हैं। उत्तराखंड खेल रत्न पुरस्कार एवं हिमालय खेल रत्न पुरस्कार के माध्यम से खिलाड़ियों को सम्मानित किया जा रहा है। राज्य में राजकीय सेवाओं में खिलाड़ियों के लिए 4 प्रतिशत का खेल कोटे को पुनः शुरू किया गया है, ताकि खिलाड़ियों के परिश्रम को उचित अवसर मिले और उनकी प्रतिभा के साथ न्याय हो सके।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में जल्द ही खेल विश्वविद्यालय बनने जा रहा है। इससे हमारे खिलाड़ियों को विश्व स्तरीय प्रशिक्षण एवं खेल सुविधाएं उपलब्ध हो सकेंगी। उन्होंने कहा उत्तराखंड को 38वें राष्ट्रीय खेलों की मेजबानी करने का गौरव प्राप्त हुआ है। जिसके लिए बुनियादी ढांचों का विकास किया जा रहा है। निश्चित ही देवभूमि अब खेल भूमि के रूप में भी जानी जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा 38वें राष्ट्रीय खेल ग्रीन गेम्स थीम पर आधारित होंगे। राज्य में आयोजित 38वें राष्ट्रीय खेल ऐतिहासिक होने के साथ विश्व स्तर पर राज्य को नई पहचान भी दिलाएंगे। उन्होंने कहा कि राज्य में जी-20 की तीन बैठके सफलतापूर्वक संपन्न हुई है, जिसमें से दो बैठके टिहरी में संपन्न हुई है।

इस अवसर पर विधायक टिहरी किशोर उपाध्याय, विधायक घनसाली शक्ति लाल शाह, जिला अध्यक्ष भाजपा राजेश नौटियाल, प्रदेश महामंत्री भाजपा आदित्य कोठारी, सीएमडी टीएचडीसी आर.के. विश्नोई, अध्यक्ष ओबीसी आयोग संजय नेगी, जिला पंचायत प्रशासक सोना सजवाण, सचिव ओलम्पिक एसोसिएसन ऑफ उत्तराखण्ड डी.के.सिंह, आईजी आईटीबीपी संजय गुंज्याल, निदेशक तकनीकी टीएचडीसी भूपेन्द्र गुप्ता, अधिशासी निदेशक टीएचडीसी एल.पी. जोशी, डीएम मयूर दीक्षित, एसएसपी आयुष अग्रवाल, एवं अन्य लोग मौजूद रहे।

सीएम ने लॉन बाल कैंप में खेल रहे खिलाड़ियों की हौसला अफजाई की

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने देहरादून के पवेलियन मैदान में चल रहे लॉन बाल कैंप का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने खिलाड़ियों और प्रशिक्षकों से मुलाकात कर उनकी हौसला अफजाई की। खिलाड़ियों का उत्साह बढ़ाते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने खुद भी मैदान पर उतरते हुए लॉन बॉल में हाथ आजमाया।

मुख्यमंत्री ने कैंप में मौजूद खिलाड़ियों, प्रशिक्षकों और अधिकारियों को आगामी 38वें राष्ट्रीय खेलों के लिए शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के खिलाड़ी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर राज्य का नाम रोशन कर रहे हैं और सरकार उनके हरसंभव सहयोग के लिए प्रतिबद्ध है।

मुख्यमंत्री ने खिलाड़ियों को मेहनत और अनुशासन के साथ खेल के प्रति समर्पित रहने को कहा।

इस अवसर पर विशेष प्रमुख सचिव खेल अमित सिन्हा, खेल निदेशक प्रशांत आर्य, धीरेंद्र पंवार सहित कई अधिकारी उपस्थित थे।

10वीं विश्व आयुर्वेद कांग्रेस एवं आरोग्य एक्सपो-2024 में मुख्यमंत्री ने दी जानकारी, बोले प्रथम योग नीति जल्द

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि प्रदेश सरकार देश की ’प्रथम योग नीति’ लागू करने की दिशा में कार्य कर रही है। योग नीति आयुर्वेद और योग को व्यापक स्तर पर साथ लाकर स्वास्थ्य के क्षेत्र में नई क्रांति लाने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

परेड ग्राउंड में आयोजित 10वीं विश्व आयुर्वेद कांग्रेस एवं आरोग्य एक्सपो-2024 को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने देहरादून में इस आयोजन के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ये हमारे लिए गर्व का विषय है कि हमारे प्रदेश में आयोजित हो रहे इस कार्यक्रम में 50 से अधिक देशों के प्रतिनिधि और 6000 से अधिक विशेषज्ञ भाग ले रहे हैं। एक्सपो में लगाए गए 250 से अधिक स्टॉल आयुर्वेद की वैश्विक स्तर पर स्वीकार्यता का प्रमाण दे रहे हैं।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि यह सम्मेलन आयुर्वेद के क्षेत्र में परस्पर ज्ञान साझा करने व विभिन्न शोध कार्यों को बढ़ावा देने के साथ-साथ सहयोग और व्यापार के नए अवसरों को बढ़ावा देगा। उन्होंने आयुष के क्षेत्र में प्रदेश सरकार द्वारा किए जा रहे कार्यों की जानकारी देते हुए बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन से राज्य सरकार भी प्रदेश में आयुर्वेद के प्रचार-प्रसार के लिए निरंतर कार्य कर रही है। वर्तमान में हमारे राज्य में आयुष आधारित 300 ’आयुष्मान आरोग्य केंद्रों’ का संचालन हो रहा है। ई-संजीवनी पोर्टल के माध्यम से 70 से अधिक विशेषज्ञों द्वारा आयुष परामर्श प्रदान किया जा रहा है। अब प्रत्येक जनपद में 50 बेड और 10 बेड वाले आयुष चिकित्सालयों की स्थापना की जा रही है। इसके अलावा सरकार प्रत्येक जनपद के एक गांव को मॉडल आयुष गांव के रूप में स्थापित कर आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों के उत्पादन को बढ़ावा देने का प्रयास कर रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार आयुष निर्माण, वेलनेस, शिक्षा, शोध और औषधीय पौधों के उत्पादन को गति प्रदान करने के लिए ’उत्तराखंड आयुष नीति’ लागू कर चुकी है। इसके साथ ही प्रदेश सरकार आगामी वर्षों में आयुष टेली-कंसल्टेशन प्रारम्भ करने के साथ-साथ 50 नए योग और वेलनेस केंद्र स्थापित करने हेतु प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है।

उत्तराखंड में अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान का प्रस्ताव
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि राज्य सरकार ने उत्तराखंड में अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान की स्थापना के लिए भारत सरकार के आयुष मंत्रालय से अनुरोध किया है, ये संस्थान आयुर्वेद शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र में मील का पत्थर साबित होगा। मुख्यमंत्री ने विशेषज्ञों से आह्वान करते हुए कहा कि हमारी जड़ी-बूटियों के हिंदी नामों के साथ ही अंग्रेजी नामों को भी प्रचारित किया जाए। इससे स्थानीय जड़ी बूटियों की वैश्विक बाजार तक पहुंच आसान हो सकेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि पहाड़ में हम ’किलमोड़े’ को जानते है लेकिन उसके अंग्रेजी नाम ’बेरीबेरीज’ को अधिकतर लोग नहीं जानते हैं जबकि इस नाम को पूरा विश्व जानता है और इससे दवाएं बनती हैं। इसलिए अंग्रेजी नाम भी प्रचारित किया जाना चाहिए।

उत्तराखंड आयुर्वेद की प्रज्ञा भूमि
मुख्यमंत्री ने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड प्राचीनकाल से ही आयुर्वेद और औषधीय संपदा की प्रज्ञा भूमि रही है। हमारे प्रदेश में पाए जाने वाली औषधीय जड़ी-बूटियों ने आयुर्वेद को आरोग्य के आधारभूत तत्व के रूप में स्थापित करने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद विश्व की एक ऐसी विशिष्ट चिकित्सा प्रणाली है जो प्राचीनकाल से ही मानव सभ्यता का आरोग्य सुनिश्चित करती आ रही है। आयुर्वेद मात्र जड़ी-बूटियों और औषधियों तक ही सीमित नहीं है बल्कि आयुर्वेद जीवन जीने की एक विशिष्ट कला है। ये हमें सही जीवन शैली के बारे में बताता है, इसका उद्देश्य रोगों को ठीक करना ही नहीं है बल्कि इसका अंतिम लक्ष्य रोग को होने ही न देना है। मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा संचालित ’राष्ट्रीय आयुष मिशन’ और ’प्रकृति परीक्षण अभियान’ जैसे विभिन्न कार्यक्रम आज शहरों से लेकर गांवों तक आरोग्य स्थापित करने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने एक्सपो का विधिवत शुभारंभ करने के बाद स्टॉल का भी निरीक्षण किया।

एक छत के नीचे मिलेगी आयुर्वेद की दवाएं
केंद्रीय आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) प्रताप राव जाधव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पिछले दस साल के दौरान आयुष के क्षेत्र में हुई पहलों से आयुष उत्पाद निर्माण में आठ गुना बढ़ोत्तरी हुई है। अब आयुष और हर्बल उत्पाद विश्व के 150 से अधिक देशों में निर्यात हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद भी अब आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस, मशीन लर्निंग उपकरणों के जैसी तकनीकी को अपना कर आगे बढ़ रहा है। केंद्रीय आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) प्रताप राव जाधव ने कहा कि भारत में लोग सामान्य तौर पर आयुर्वेद से उपचार पसंद करते हैं, लेकिन गांव देहात में तक डॉक्टर एलोपैथिक दवाओं का ज्यादा परामर्श देते हैं। ऐसा शायद इसलिए होता है क्योंकि आयुर्वेद की एक तो दवा कम है, फिर सारे रोगों की सारी दवाएं एक ही जगह पर मिलनी तकरीबन मुश्किल होती हैं। इसलिए केंद्र सरकार सभी जिला, तहसील और गांव स्तर पर एक ही छत के नीचे आयुर्वेद की सभी दवाएं उपलब्ध कराने के लिए आयुष औषधि केंद्रों की स्थापना करने का प्रयास कर रही है। ऐसा पहला केंद्र दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान में शुरू हो चुका है। देशभर में ऐसे केंद्र खुलने से आयुष चिकित्सक परामर्श में आसानी से दवा लिख सकेंगे। उन्होने कहा कि विश्व आयुर्वेद कांग्रेस नवीन विचारों, प्राचीन संस्कृति और नवाचारों का संगम साबित होगी। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि चार दिनों तक चलने वाले इस आयोजन के दौरान आस पास के हजारों लोग यहां स्टॉल का भ्रमण करेंगे। यह आयोजन व्यावसायिक अवसरों के लिए भी मंच प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद को बढ़ावा देने के लिए ही केंद्र सरकार ने देशभर में 29 अक्तूबर से प्रकृति परीक्षण अभियान शुरू किया है, जिसका शुभारंभ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के द्वारा किया गया।

भारत सरकार के आयुष मंत्रालय में सचिव वैद्य राजेश कोटेचा ने कहा कि विश्व आयुर्वेद सम्मेलन के आयोजन से आयुष पद्धति को वैश्विक स्तर पर पहचान बनाने में मदद तो मितती ही है, साथ ही आयोजन वाले क्षेत्र के आस पास इस सेक्टर की ग्रोथ भी बढ़ती है। उन्होंने इस आयोजन के लिए उत्तराखंड का आदर्श राज्य बताते हुए कहा कि आयुर्वेद की पुस्तकों में वर्णित कई जड़ी बूटियां हिमालय में मिलती हैं।

पीएम नरेंद्र मोदी ने भेजा संदेश
सम्मेलन में मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर भेजे गए संदेश को पढ़ा। उद्घाटन सत्र को राष्ट्रीय आयोजन सचिव, विज्ञान भारती डॉ. शिव कुमार शर्मा, दसवें विश्व आयुर्वेद कांग्रेस के चेयरपर्सन वैद्य पीएम वॉरियर, उत्तराखंड शासन में सचिव आयुष रविनाथ रमन ने भी संबोधित किया।

इस मौके पर प्रदेश के कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज, डा. प्रेमचंद अग्रवाल, डॉ. धन सिंह रावत, विधायक खजान दास, सविता कपूर, उमेश शर्मा काऊ, किशोर उपाध्याय, झांसी के सांसद अनुराग शर्मा, आचार्य बालकृष्ण प्रमुख तौर पर शामिल हुए।