चंडीगढ़ में ली शंकराचार्य स्वामी माधवाश्रम महाराज ने अंतिम सांसे

उत्तराखंड क्षेत्र से शंकराचार्य के पद पर सुशोभित होने वाले पहले संन्यासी शंकराचार्य स्वामी माधवाश्रम जी महाराज ने शुक्रवार को चंडीगढ़ में अंतिम सांसे ली।
शंकराचार्य स्वामी माधवाश्रम महाराज भारत के बदरीनाथ तीर्थ के समीप जोशीमठ तीर्थ स्थित ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य थे। वर्ष 1993 से ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य पद पर आसीन माधवाश्रम महाराज ने शुक्रवार को चंडीगढ़ में देह त्याग दिया। महाराज लंबे समय से बीमार चल रहे थे। उनके पार्थिव शरीर को देर शाम तक ऋषिकेश स्थित दंडीबाड़ा आश्रम में लाया जाएगा। पार्थिव शरीर को ऋषिकेश स्थित दण्डीबाड़ा श्रीजनार्दन आश्रम में आम लोगों के दर्शनार्थ के लिए रखा जाएगा। इसके बाद विधि विधान के साथ आश्रम में जलसमाधि दी जाएगी। उनके अनुयायियों का तीर्थनगरी पहुंचने का क्रम शुरू हो गया है। स्वामी जी उत्तराखण्ड मूल से शंकराचार्य के पद पर सुशोभित होने वाले पहले संन्यासी थे। वे अखिल भारतीय धर्म संघ समेत विभिन्न धार्मिक संस्थाओं के अघ्यक्ष एवं सदस्य रहे।
गढ़वाल मंडल के रूद्रप्रयाग जिले में जन्में थे शंकराचार्य माधवाश्रम महाराज
स्वामी माधवाश्रम महाराज का जन्म उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले के अन्तर्गत बेंजी ग्राम में हुआ था। इनका मूल नाम केशवानन्द था। आरम्भिक विद्यालयी शिक्षा के पश्चात इन्होंने हरिद्वार, अम्बाला में सनातन धर्म संस्कृत कॉलेज, वृंदावन में बंशीवट में श्री प्रभुदत्त ब्रह्मचारी जी के आश्रम एवं वाराणसी समेत देश के विभिन्न स्थानों पर वेदों एवं धर्मशास्त्रों की दीक्षा ली। विवाह के उपरान्त कुछ वर्ष पश्चात इन्होंने संन्यास ग्रहण किया। इनकी विद्वता को देखते हुए धर्म संघ के तत्वाधान में धर्मसम्राट स्वामी करपात्री जी के आशीर्वाद से जगन्नाथ पुरीपीठ के तत्कालीन शंकराचार्य स्वामी निरंजनदेव तीर्थ जी ने इन्हें ज्योतिष्पीठ का शंकराचार्य नियुक्त किया। तब से वे इस परम्परा का बखूबी पालन कर रहे थे। स्वामी माधवाश्रम महाराज धर्मप्रचार एवं गौहत्या विरोधी विभिन्न आंदोलनों एवं संगठनों से जुड़े थे।

केदारनाथ निर्माण में मोदी का देश के उद्यमियों को निमंत्रण

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार को केदारनाथ धाम में केदारपुरी के पुनर्निर्माण से संबंधित पांच परियोजनाओं का शिलान्यास किया। इस अवसर पर राज्यपाल डॉ कृष्ण कान्त पाल और मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत भी उपस्थित थे। प्रधानमंत्री मोदी ने केदार मंदिर परिसर पहुंचने के मुख्य मार्ग के चौड़ीकरण और सौंदर्यीकरण कार्य, सरस्वती और मंदाकिनी नदियों के बाढ़ सुरक्षा और घाट निर्माण कार्य, तीर्थ पुरोहितों के लिए आवासीय भवनों के निर्माण कार्य तथा आदि शंकराचार्य के समाधि स्थल के पुनर्निर्माण कार्य का शिलान्यास किया। इस अवसर पर आयोजित समारोह में उपस्थित जन समुदाय को संबोधित करते हुए

प्रधानमंत्री ने कहा कि श्री केदारनाथ में प्रकृति और पर्यावरण के अनुकूल भव्य पुनर्निर्माण कार्य किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह पुनर्निर्माण कार्य एक निश्चित समयसीमा में तीर्थ क्षेत्र की गरिमा के अनुकूल, पुरोहितों और पंडितों की व्यवस्था और आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए किया जाएगा। प्रधानमंत्री ने पुनर्निर्माण कार्य के लिए देश की राज्य सरकारों को भी अपना योगदान देने के लिए कहा। उन्होंने आशा व्यक्त की कि औद्योगिक घराने सीएसआर के अंतर्गत पुर्ननिर्माण कार्य में योगदान देंगे। प्रधानमंत्री ने पर्यावरण के सभी नियमों का पालन करने की बात भी कही। उन्होंने कहा कि केदारपुरी में आधुनिक पुनर्निर्माण किया जाएगा, परंतु तीर्थ क्षेत्र की आत्मा और हिमालय की आध्यात्मिकता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। उत्तराखंड सरकार की सराहना करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने 6 महीने के अल्प समय में महत्वपूर्ण फैसले लिए हैं और विकास को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाने का संकल्प लिया है। प्रधानमंत्री ने हिमालयी राज्यों की विशिष्टता की सराहना करते हुए उत्तराखंड को 2022 तक ऑर्गेनिक स्टेट बनने का संकल्प लेने को कहा। उन्होंने कहा कि अभी दुनिया होलिस्टिक हेल्थ केयर की ओर चल रही है। ऐसे में केमिकल फर्टिलाइजर को अस्वीकार कर ऑर्गेनिक उत्पादों की दुनिया में उत्तराखंड अग्रणी भूमिका निभा सकता है। प्रधानमंत्री ने उत्तराखंड की स्वच्छता अभियान की भी सराहना करते हुए कहा कि उत्तराखंड देश में ग्रामीण क्षेत्रों में खुले में शौच से मुक्त करने वाला चौथा राज्य बन गया है। प्रधानमंत्री ने कहा कि देश में लगभग चार करोड़ परिवार ऐसे हैं जहां अभी तक बिजली नहीं पहुंची है। ऐसे लोगों के लिए प्रधानमंत्री सौभाग्य योजना लागू की गई है। उन्होंने आशा व्यक्त की उत्तराखंड सरकार प्रधानमंत्री सौभाग्य योजना को अपने राज्य में शीघ्र से शीघ्र पूरा करने का बीड़ा उठाएगी। उन्होंने कहा कि सभी हिमालयन राज्यों, सभी राज्यों के बीच विकास की दौड़ की एक स्वस्थ प्रतिस्पर्धा होनी चाहिए। प्रधानमंत्री ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार दोनों यह कार्य कर रहे हैं कि पहाड़ की जवानी और पहाड़ का पानी पहाड़ के काम आए। बाबा केदार के जयजयकारो के बीच प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गढ़वाली भाषा में अपना भाषण आरम्भ करते हुए बाबा केदारनाथ से देश, दुनिया व राज्य के लोगो के लिए खुशहाली की कामना की।

प्रधानमंत्री ने भव्य व आधुनिक केदारपुरी पुनर्निर्माण व विकास हेतु 5 प्रमुख योजनाओं का शिलान्यास किया। इनके अंतर्गत मंदिर परिसर की मुख्य सड़क का चौड़ीकरण किया जाएगा। इन कार्य में आरसीसी तथा आधुनिक तकनीकी का प्रयोग किया जाएगा। पुरोहितों हेतु थ्री इन वन आवासीय परिसरों का निर्माण किया जाएगा। जिसमें पुरोहितों की रहने की व्यवस्था के अतिरिक्त निचली मंजिल पर श्रद्धालुओं व यात्रियों तथा ऊपरी मंजिल पर उनके यजमानों व मेहमानों की व्यवस्था की जाएगी। आवासीय परिसरों में चौबीस घण्टे बिजली, पानी व स्वच्छता सुविधाओं की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाएगी। मंदिर परिसर में पोस्ट ऑफिस, टेलीफोन सुविधाओं तथा कम्युनिकेशन सुविधाओं की भी व्यवस्था की जाएगी। मन्दाकिनी और सरस्वती नदियों पर रिटेनिंग वॉल व घाटों का निर्माण किया जाएगा। आदि शंकराचार्य के समाधिस्थल का पुनर्निर्माण किया जाएगा। प्रधानमंत्री मोदी ने देश के अन्य राज्य सरकारों, सीएसआर के माध्यम से व्यापार जगत के उद्यमियों को निर्माण कार्य में सहयोग का निमंत्रण दिया। इस अवसर पर अपने सम्बोधन में मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कहा कि प्रधानमंत्री जी का बाबा केदार जी के आंगन में आने पर उत्तराखण्ड की ओर से हार्दिक अभिनन्दन व स्वागत है। प्रधानमंत्री द्वारा केदारनाथ मंदिर के कपाट खुलने तथा कपाट बन्द होने से पूर्व समाधि पूजा के समय लगभग 6 माह के भीतर दो बार दर्शन करने से पूरे विश्व में सुरक्षित व सुखमय केदारनाथ यात्रा का संदेश गया है। प्रधानमंत्री ने इस वर्ष दीपावली का पर्व सीमा पर तैनात हमारे वीर सैनिकों के साथ मनाया। सैनिकों की वीरभूमि उत्तराखण्ड के लिए यह सम्मान की बात है।

इससे पूर्व प्रधानमंत्री ने केदारनाथ मंदिर पहुंचकर गर्भगृह में सम्पूर्ण विधिविधान व मंत्रोचारण के साथ भगवान केदार का रूद्राभिषेक किया तथा मंदिर की परिक्रमा की। प्रधानमंत्री मोदी ने केदारनाथ मंदिर परिसर में लगभग डेढ़ घण्टे से अधिक समय व्यतीत किया। प्रधानमंत्री के समक्ष उत्तराखंड सरकार द्वारा तैयार किया केदारपुरी के पुनर्निर्माण पर एक 3डी प्रस्तुतीकरण भी दिया गया। प्रधानमंत्री मोदी को राज्यपाल डॉ. कृष्णकान्त पाल तथा मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने अंगवस्त्र तथा केदारनाथ मंदिर की अनुकृति भेंट की।

शाह-जादा को सत्ता का कानूनी सहारा, झंडा ऊंचा रहे हमारा

कांग्रेस बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह के बेटे जय शाह मामले में पीछे नहीं हटना चाहती है। कांग्रेस पार्टी के उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने एक बार फिर बीजेपी के अध्यक्ष अमित शाह और उनके बेटे जय शाह के ऊपर तंज कसा है।

राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि इस मामले में जय शाह को राज्य सरकार द्वारा मदद मिल रही है। राहुल के ट्विटर हैंडल ऑफ आरजी की तरफ से ट्वीट किया गया कि शाह-जादा को सत्ता का कानूनी सहारा! झंडा ऊंचा रहे हमारा!
वहीं पहले राहुल गांधी ने पॉपुलर तमिल फिल्म एक्टर धनुष का गाना व्हाई दिस कोलावेरी डी का सहारा लेकर अंग्रेजी में तंज कसा और उसके साथ ही हिंदी में कहा शाह-जादा को सत्ता का कानूनी सहारा, झंडा ऊंचा रहे हमारा।
इसके साथ-साथ राहुल गांधी ने अंग्रेजी में लिखा था कि स्टेट लीगल हेल्प फॉर शाह-जादा, व्हाई दिस व्हाई दिस कोलावेरी डी।

पुलिस कांस्टेबल की पूरी तैयारी थी राम रहीम को भगाने की

गुरमीत राम रहीम सिंह को दोषी करार दिए जाने के बाद कोर्ट से भगाने की साजिश रचने के आरोप में गिरफ्तार लाल सिंह को दो दिन की पुलिस रिमांड पर भेजा गया है। आरोप ये भी है कि लालचंद ही पुलिस के हर मूवमेंट की जानकारी गुरमीत के खास भक्तों तक पहुंचा रहा था। पूछताछ के दौरान उसने अपनी साजिश के बारे में अहम खुलासे किए हैं।
पंचकुला हिंसा की जांच कर रही एसआईटी का दावा है कि डेरामुखी राम रहीम को भगाने की जिम्मेदारी चंडीगढ़ पुलिस की इंटेलिजेंस विंग के कॉन्स्टेबल लालचंद ने ली थी। यह खुलासा पूछताछ के दौरान हुआ है। बता दें कि लालचंद को एसआईटी ने पूछताछ के लिए सेक्टर-26 स्थित क्राइम ब्रांच के ऑफिस में बुलाया था और फिर उसे गिरफ्तार कर लिया गया।
एसआईटी ने लालचंद को कोर्ट में पेश किया। जहां से पुलिस को दो दिन का रिमांड मिल गया। अब लगातार पुलिस उससे पूछताछ कर रही है। पुलिस उससे कई सवालों के जवाब पाना चाहती है।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, 25 अगस्त को फैसला आने के बाद जैसे ही गुरमीत को कोर्ट से बाहर लाया गया, लालचंद दूसरे पुलिसवालों से राम रहीम को बुलेटप्रूफ गाड़ी में बैठाने को कहने लगा, लेकिन पुलिसकर्मी तैयार नहीं हुए, फिर लालचंद ने प्लान-बी पर काम शुरू कर दिया।
प्लान-बी के मुताबिक गुरमीत राम रहीम की गाड़ी में कमांडो को बैठाना था, ये कमांडो उसका खास था। उसका जिम्मा गुरमीत को गनपॉइंट पर गाड़ी से उतारना था। उसके बाद उसे बुलेटप्रूफ गाड़ी से चंडीगढ़ में एंटर कराना था, लेकिन भागना हिमाचल की तरफ था।
इस दौरान लालचंद के पास वायरलेस सेट था। जिसमें सारे मैसेज फ्लैश हो रहे थे। तभी कोर्ट के बाहर उसने एक कमांडो को अफसरों से भिड़ने का इशारा किया। कमांडो ने वैसा ही किया, लेकिन इस दौरान भी लालचंद गुरमीत तक नहीं पहुंच पाया। यहां भी साजिश नाकाम रही तो उसने गुरमीत का पीछा किया।
लालचंद ने गुरमीत को छुड़ाने में एक आखिरी कोशिश और की। अपनी गाड़ी से गुरमीत को लेकर जा रही गाड़ी का पीछा कमांड तक किया। एक बुलेटप्रूफ गाड़ी साथ लगा दी, ताकि बीच में घेरकर उसे छुड़ाया जा सके। डेरामुखी के कमांडोज को पुलिस मूवमेंट का हर अपडेट मिला रहा था।
फैसले वाले दिन पुलिस ने तीन स्टेशनों पर वायरलेस सेट लगाए थे। लालचंद को फ्रीक्वेंसी पता थी, इसलिए हर सूचना गुरमीत की जैमर लगी गाड़ी में बैठे कमांडोज को वायरलेस सेट पर भी मिल रही थी।

कथा के श्रवण को दक्षिण भारत से पहुंचे हजारो लोग

तीर्थनगरी ऋषिकेश में सनातन धर्म के श्रुति धर्मगं्रथ उपनिषद कथा का भव्य शुभारंभ हुआ। कथा में दक्षिण भारत से हजारों लोंगों का दल यहां पहुंचा।
परमार्थ निकेतन गंगातट पर कथा का भव्य शुभारंभ आश्रम के महामंडलेश्वर स्वामी असंगानंद सरस्वती महाराज, आश्रम परमाध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती महाराज व दक्षिण भारत से आए कथा व्यास नेच्चुर वेंकटरमण ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया। इस अवसर पर आश्रम के महामंडलेश्वर स्वामी असंगानंद सरस्वती महाराज ने कहा कि आत्मा ही सबसे बड़ा तीर्थ है। आत्मा ही सत्य है। मन यदि स्वच्छ होगा तो आत्मा भी पवित्र होगी और जब आत्मा पवित्र होती है तब हम परमात्मा की प्राप्ति का लक्ष्य अतिशीघ्र हासिल कर लेते हैं। आश्रम परमाध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती महाराज ने कहा कि हिमालय की धरती आरण्यक संस्कृति है। इस धरती ने हमारी सभ्यता, संस्कृति एवं संस्कारों को जन्म दिया है। पूरे विश्व को वसुधैव कुटुंबकम का मंत्र दिया व सर्वे भवंतु सुखिनरू की संस्कृति दी। आज उसी धरती पर उपनिषदों के गहन ज्ञान की धारा प्रवाहित हो रही है। कथा व्यास नेच्चुर वेंकटरमण के सानिध्य में यह कथा सात दिनों तक आयोजित होगी। इस अवसर पर आश्रम परिवार ने कथा व्यास वेंकटरमण को शिवत्व का प्रतीक रुद्राक्ष का पौधा भी भेंट किया।

उत्तराखंड में 334 विद्यालय हो सकते है बंद

अब ऐसे विद्यालयों जिनकी छात्र संख्या दस या उससे भी कम है। सरकार उन्हें बंद करने का मन बना चुकी है। जी हां, जिले में प्राथमिक व जूनियर 334 विद्यालय ऐसे हैं, जहां पर छात्र संख्या दस से कम रह गई है, और ऐसे में सरकार इस पर जल्द फैसला लेगी।
प्राथमिक विद्यालयों में लगातार छात्रसंख्या घट रही है। कम संख्या वाले सबसे ज्यादा विद्यालय देवप्रयाग में 42 व सबसे कम प्रतापनगर में 26 हैं। इन विद्यालयों को नजदीकी विद्यालयों में समायोजित किया जाएगा। जिले में शून्य छात्र संख्या वाले करीब 80 विद्यालय पहले से ही बंद है। दस से कम छात्र संख्या वाले विद्यालयों की सूची तीन सौ से ऊपर है, लेकिन इसमें दूरी का भी ध्यान रखा गया है। बंद होने वाले विद्यालय की दूरी समायोजित होने विद्यालय से दूरी एक किमी रखी गई है ताकि बंद होने वाले विद्यालयों के छात्रों को दूसरे विद्यालय जाने में परेशानियों का सामना न करना पड़े। एक किमी दूरी वाले विद्यालयों को ही बंद किया जाता है तो फिर बंद होने वाले स्कूलों की संख्या कुछ कम हो जाएगी।

परमाणु हथियार रखने को पाक बना रहा सुरंग

कुछ दिन पहले ही संयुक्त राष्ट्र महासभा की बैठक में पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शाहिद खाकन अब्बासी ने कहा था कि भारत के कोल्ड वॉर का जवाब देने के लिए पाकिस्तान ने शॉर्ट रेंज के परमाणु हथियार विकसित कर लिए हैं। लेकिन अब खबर आ रही है कि पड़ोसी देश अपने परमाणु हथियारों का जखीरा रखने के लिए सुरंगों का निर्माण कर रहा है और ये सुरंगे दिल्ली से महज 750 किलोमीटर और अमृतसर से कुछ सौ किमी की दूरी पर स्थित हैं।
एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक अमृतसर के नजदीक पाकिस्तान के मियांवाली जिले में इन सुरंगों का निर्माण किया जा रहा है। ये भारत की राजधानी दिल्ली से महज 750 किमी तथा आर्थिक राजधानी मुंबई से 1500 किमी की दूरी पर स्थित हैं। टनल में संभावित हमले को देखते हुए परमाणु हथियारों को रखा जाएगा।

रिपोर्ट के अनुसार इन सुरंगों की लंबाई और चौड़ाई दस मीटर है। ये सुंरगें चौड़ी सड़कों से जुड़ी हुईं हैं और इनमें आने-जाने के अलग- अलग दरवाजे हैं। खुफिया जानकारी के अनुसार प्रत्येक टनल में 12 से 24 परमाणु हथियारों को रखा जा सकता है। एक रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि पाकिस्घ्तान 130-140 वॉरहेड के परमाणु शस्घ्त्रागार को तेजी से बढ़ा रहा है। साथ ही रिपोर्ट का कहना है कि पाक अपने शस्त्रागार को और मजबूत बना रहा है व अधिक साइटों पर इनकी तैनाती कर रहा है जिनके बारे में पता लगाना फिलहाल कठिन है।

त्रिवेंद्र सरकार दिव्यांगों की हर सम्भव मदद के लिए तैयार

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने एएनएम घोष ऑडिटोरियम ओएनजीसी में आईवीवाई मेमोरीयल इण्टीग्रेटिड एजुकेशन सोसायटी द्वारा आयोजित दिव्यांग विद्यार्थियों के उत्सव कार्यक्रम में प्रतिभाग किया। उत्तराखंड में प्रथम बार आयोजित दो दिवसीय दिव्यांग टैलेंट शो दिव्यांगोत्सव में कई स्कूलों और संस्थाओं के बच्चों ने प्रतिभाग किया। मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए कहा कि समय के साथ समाज एवं माता-पिता की दिव्यांगों के प्रति सोच बदली है। आधुनिकतम तकनीकी के प्रयोग और नवाचारों से दिव्यांग स्कूलों में अध्यापको ने बच्चों को हर खुशी देने का सराहनीय प्रयास किया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार दिव्यांगों की हर सम्भव मदद के लिए तैयार है। दिव्यांगों को बसों में आनेजाने के लिए सहायक की आवश्यकता न पड़े इसके लिए इसके लिए अधिकारियों को समाधान निकालने के निर्देश दिये गये हैं। राज्य में विभिन्न चयन संस्थाओं द्वारा आयोजित की जाने वाली प्रतियोगी परीक्षाओं में सम्मिलित होने वाले दिव्यांग अभ्यर्थियों हेतु सुविधा प्रदान किये जाने, परीक्षा केन्द्र बहुमंजिले भवन में होने की स्थिति में दिव्यांग अभ्यर्थियों को भवन के भूतल स्थित कक्ष में ही सीट आवंटित किये जाने एवं परीक्षा केन्द्र जनपद मुख्यालयों में रेलवे स्टेशन अथव बस स्टेशन के समीप बनाए जाने के आदेश जारी कर दिये गए हैं। आवश्यकतानुसार उनकी सुगमता हेतु रैम्प आदि की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी। दिव्यांगोत्सव में मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने विभिन्न स्कूलों से आये दिव्यांग छात्र-छात्राओं में, चित्रकला, संगीत, ग्रुप डांस एवं अन्य प्रतियोगिताओं में प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय स्थान प्राप्त करने वालों को पुरस्कृत भी किया। आई.आई.टी. रूडकी की अनुश्रुति संस्था को सर्वश्रेष्ठ संस्था का पुरस्कार मिला। इस अवसर पर एग्लो इंडियन विधायक जार्ज आईवन ग्रेगरी मैन एवं विभिन्न स्कूलों से आये दिव्यांग छात्रों के शिक्षक उपस्थित थे।

मनमोहन सरकार से दुगुना किया खर्च मगर नहीं रूकी घटनाएं

आतंकवाद के खिलाफ लड़ने को लेकर बड़ी-बड़ी बातें करने वाली केंद्र सरकार के तीन वर्षो के कार्यकाल में जम्मू एवं कश्मीर में आतंकी घटनाएं बढ़ी हैं। सूचना के अधिकार द्वारा गृह मंत्रालय से मांगी गई सूचना के मुताबिक, बीते तीन वर्षो में जम्मू एवं कश्मीर में 812 आतंकी घटनाएं हुईं, जिनमें 62 नागरिक और 183 भारतीय जवान शहीद हो गए।
बीती मनमोहन सरकार के आखिर के तीन वर्षो के कार्यकाल में कुल 705 आतंकी घटनाओं में 59 नागरिक एवं 105 जवान शहीद हुए थे।
अधिकारी ने बताया कि इसी दौरान मनमोहन सरकार के अंतिम तीन वर्ष में गृह मंत्रालय ने आतंकवाद से लड़ने के लिए तकरीबन 850 करोड़ रुपये जारी किए, जबकि मोदी सरकार के समय गृह मंत्रालय ने 1,890 करोड़ रुपये इस बाबत जारी किए।
गृह मंत्रालय के लोक सूचना अधिकारी ने जवाब में बताया, मई, 2011 से मई, 2014 के बीच में जम्मू एवं कश्मीर में 705 आतंकवादी घटनाएं हुईं, जिसमें 59 आम नागरिक मारे गए एवं 105 जवान शहीद हो गए, जबकि मोदी सरकार अर्थात मई, 2014 से मई, 2017 तक 812 आतंकवादी घटनाएं हुईं, जिनमें 62 नागरिक मारे गए एवं 183 जवान शहीद हो गए।
उत्तर प्रदेश के नोएडा निवासी आरटीआई कार्यकर्ता रंजन तोमर ने गृह मंत्रालय से हासिल सूचना के आधार पर बताया कि उन्होंने गृह मंत्रालय से चार सवाल पूछे थे। मोदी की सरकार के आने के तीन साल एवं उसके पहले मनमोहन सिंह सरकार के आखिरी तीन साल में जम्मू एवं कश्मीर में कितनी आतंकवादी गतिविधियां हुई एवं उनमें कितने आम नागरिक एवं कितने जवान शहीद हुए? उन्होंने कहा, तीसरा सवाल यह था कि इस दौरान आतंकवादी गतिविधियों को नियंत्रित करने के लिए गृह मंत्रालय ने मनमोहन सरकार के अंतिम तीन वर्ष में कितनी धनराशि जारी की एवं चौथा प्रश्न था कि मोदी सरकार ने प्रथम तीन वर्ष में कितनी धनराशि जारी की।
राजनाथ बोले, रोज मार रहे 5-6 आतंकी
इससे इतर केन्द्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में हर रोज पांच से छह आतंकवादी सुरक्षा बलों के हाथों मारे जा रहे हैं। एक कार्यक्रम में राजनाथ ने कहा कि सेना, अर्धसैनिक बलों और अन्य सुरक्षा एजेंसियों के अनवरत प्रयासों के चलते जम्मू-कश्मीर में हर दिन पांच-छह आतंकवादी मारे जा रहे हैं। मैं उनकी तारीफ करता हूं।

रेप माना जाएगा, नाबालिग पत्नी से संबंध बनाने पर

नाबालिग पत्नी से शारीरिक संबंध बनाने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने को बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि नाबालिग पत्नी से शारीरिक संबंध बनाना रेप का अपराध है। कोर्ट ने फैसले में कहा है कि सहमति से सेक्स करने की उम्र बनाने को कम नहीं किया जा सकता है। 15 से 18 साल की पत्नी से शारीरिक संबंध बनाना रेप की श्रेणी में आएगा। कोर्ट ने फैसले में कहा है कि पत्नी पुलिस के पास शिकायत कर सकती है। कोर्ट ने इस प्रावधान को पोक्सो के साथ जोड़ा है।
दरअसल आईपीसी 375 (2) कानून का यह अपवाद कहता है कि अगर कोई 15 से 18 साल की पत्नी से संबंध बनाता है तो उसे दुष्कर्म नहीं माना जाएगा। केन्द्र सरकार ने कोर्ट में कानून की तरफदारी करते हुए कहा कि संसद ने सामाजिक परिस्थितियों को देखते हुए इस कानून को नहीं छेड़ा। देश में आर्थिक रूप से पिछड़े समाज में आज भी बाल विवाह के मामले देखने को मिलते हैं।
बता दें कि देश में विवाह की उम्र महिलाओं के लिए 18 और पुरुषों के लिए 21 साल रखी गई है। इससे कम उम्र में हुई शादी को जुर्म माना गया है। इंडियन पीनल कोर्ड के तहत मामले में दो साल की सजा हो सकती है। बावजूद इसके देश के बड़े शहरों में बाल विवाह का आंकड़ा 0.7 फीसदी बढ़ा है, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में इसका ग्राफ 0.3 फीसदी घटा है।
डब्ल्यूसीडी मंत्रालय द्वारा दायर हलफनामे के अनुसार देश में साल 2014 से 16 के बीच 1785 मामले रजिस्टर हुए और 4,777 लोगों की गिरफ्तारी हुई। हालांकि इसमें सिर्फ 274 को ही अपराधी साबित किया जा सका।with a minor wife