अब बच्ची से रेप करने पर रेपिस्ट को मिलेगी फांसी

भारत सरकार मासूम बेटियों के साथ दुष्कर्म के मामले में पीड़ितों को त्वरित न्याय दिलाने और दोषियों को कठोर दंड दिलाने के लिये अध्यादेश लाने जा रही है। इस अध्यादेश के तहत 12 साल से कम उम्र की बच्चियों के साथ दुष्कर्म करने वालों को फांसी की सजा का प्रावधान किया गया है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में ‘क्रिमिनल लॉ (अमेंडमेंट) ऑर्डिनेंस, 2018’ को मंजूरी दे दी गई। जिसके तहत फांसी का प्रावधान किया गया हैं। यह अध्यादेश राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने और गजट में अधिसूचना जारी होने के बाद कानून के तौर पर लागू हो जाएगा।

यह अध्यादेश लागू होने पर दुष्कर्म के मामलों में न्यूनतम सात साल के सश्रम कारावास को बढ़ाकर 10 वर्ष किया गया है। अधिकतम इसे आजीवन भी किया जा सकेगा। वहीं 16 साल से कम उम्र की लड़कियों के साथ दुष्कर्म के दोषियों को न्यूनतम 20 साल की सजा का प्रावधान है। 12 साल से कम उम्र की बच्चियों से दुष्कर्म करने वालों को मृत्युदंड मिलेगा। अध्यादेश के तहत दो माह में पूरी करनी होगी दुष्कर्म कांड की जांच। दो माह के अंदर ट्रायल पूरा करना होगा। 16 साल से कम उम्र की लड़कियों से दुष्कर्म के आरोपी को नहीं मिल सकेंगी अग्रिम जमानत।

स्थानीय लोगों की आपदा प्रबंधन में अहम भूमिकाः सीएम

राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की बैठक की अध्यक्षता करते हुये मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत बोले कि सभी जिलाधिकारियों को वर्षाकाल से पूर्व आपदा से निपटने के लिये पांच-पांच करोड़ रूपये दे दिये जाये। उन्होंने कहा कि स्थानीय लोगों की आपदा प्रबंधन में अहम भूमिका रहती है। स्थानीय लोगों को आपदा से निपटने को प्रशिक्षण दिया जाये।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन महिला मंगल दलों एवं युवा मंगल दलों को आपदा से राहत व बचाव की ट्रेनिंग दी गई हैं, उन्हें समय-समय पर पुनः प्रशिक्षित किया जाए। स्थानीय स्तर पर आपदा राहत एवं बचाव के लिए आवश्यक उपकरणों की पूर्ण व्यवस्था की जाए। उन्होंने कहा कि इंसीडेंट रिस्पांस सिस्टम (आईआरएस) को और अधिक सुदृढ़ बनाया जाए। अर्ली वार्निग सिस्टम को और अधिक मजबूत करने की जरूरत है।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने आपदा की दृष्टि से अति संवेदनशील स्थलों पर विशेष सुरक्षा बरतने के निर्देश दिये। उन्होंने भूकम्प की दृष्टि से अति संवेदनशील संस्थानों को चिन्हित करने एवं उससे बचाव के लिए प्रभावी उपाय तलाशने को कहा। उन्होंने कहा कि दूरस्थ क्षेत्रों में संचार सुविधा को बढ़ाने के लिए बैलून तकनीक विकसित की जाए। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से रात्रि के समय आपदा राहत एवं बचाव के लिए की जा रही तैयारियों की जानकारी प्राप्त की।

मुख्यमंत्री श्री त्रिवेन्द्र ने बैठक के दौरान उत्तराखण्ड राज्य आपदा प्रबन्धन प्राधिकरण की वेबसाइट व लोगो का विमोचन किया तथा आईआरएस से संबंधित मोबाईल एप्लीकेशन को लॉच किया। इसके अलावा उन्होंने सैन्डई रूपरेखा, आईआरएस के कॉफी टेबल बुक, युवक एवं महिला मंगल दल प्रशिक्षण, एनडीएम के सहयोग से संचालित आपदा सुरक्षा मित्र योजना एवं आईआरएस चेकलिस्ट पुस्तिकाओं का विमोचन भी किया। मुख्यमंत्री ने राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के लोगो के डिजाइन के लिए कंपीटिशन जीतने वाले नरेन्द्र तोमर को 25 हजार रूपये की धनराशि एवं प्रमाण पत्र प्रदान किया। आपदा में सर्च एवं रेसक्यू में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले युवाओं को सम्मानित भी किया गया।

चीन सीमा को जाने वाला गंगोरी बेली ब्रिज तैयार

भारत-चीन सीमा को जोड़ने वाला गंगोत्री हाइवें पर बना गंगोरी बेली ब्रिज तनकर तैयार हो गया है। सीमा सड़क संगठन के चीफ इंजीनियर वीएसएम एएस राठौर ने पुल का उद्घाटन किया।

उन्होंने बताया कि 1.3 करोड़ रुपये की लागत से 190 फीट लंबे इस बेली ब्रिज को बीआरओ के जवानों ने सात दिन में तैयार किया है। पुल की भार क्षमता 18 टन से बढ़कर 40 टन होगी। तय समय से पहले पुल का निर्माण होने पर जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने बीआरओ की टीम को बधाई दी।

विदित हो कि एक अप्रैल को भारत-चीन सीमा पर स्थित गंगोत्री धाम व भटवाड़ी ब्लाक के 42 गांवों को जोड़ने वाला असी गंगा नदी पर बना गंगोरी बेली ब्रिज टूट गया था। ब्रिज बीआरओ ने आठ जनवरी 2018 में बनाया था, लेकिन उसकी भार क्षमता सिर्फ 18 टन थी। बीती एक अप्रैल को एक रेत से भरे डंफर के भार से ही पुल टूट गया था।

इसके बाद वैकल्पिक व्यवस्था के लिए बीआरओ ने असी गंगा नदी में ह्यूम पाइप डालकर मार्ग तैयार किया। ताकि वाहनों की आवाजाही सुचारु रहे। बरसात से पहले नया पुल तैयार करने के दबाव के बीच बीआरओ ने इस टूटे पुल को हटाने और नया पुल बनाने की योजना तैयार की। इसके लिए पठानकोट, चंडीगढ़, भारत-चीन सीमा के रिमझिम बॉर्डर, जोशीमठ और ऋषिकेश से सामान एकत्र किया गया। 12 अप्रैल तक सामान एकत्र होने के बाद 13 अप्रैल से बीआरओ के जवानों ने ब्रिज को जोड़ने का कार्य शुरू किया। ब्रिज के निर्माण में बीआरओ ने आर्मी से भी तकनीकी सहयोग लिया।

सीएम त्रिवेन्द्र को मिलेगा राष्ट्रपति के हाथों पुरस्कार

सूचना प्रसारण मंत्रालय भारत सरकार द्वारा द मोस्ट फिल्म फ्रेंडली स्टेट अवॉर्ड के अंतर्गत उत्तराखंड को स्पेशल मेंशन सार्टिफिकेट फॉर फिल्म फ्रेंडली इनवायरमेंट पुरस्कार के लिए चयनित किया गया है। उत्तराखण्ड राज्य को यह पुरस्कार राज्य में फिल्म शूटिंगों के लिए निर्माता/निर्देषकों के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करने के प्रयासों के लिए दिया गया है।

चूंकि उत्तराखण्ड अभी नया राज्य है और वहां पर चुनौतियां भी काफी है, इसके बावजूद उत्तराखण्ड राज्य सरकार द्वारा किये गये सकारात्मक प्रयासों की सराहना राष्ट्रीय स्तर पर की गई है। प्रतिवर्ष दिये जाने वाले इस पुरस्कार के लिए सभी राज्यों से आवेदन आमंत्रित किये जाते है। जिसके बाद पुरस्कार चयन हेतु गठित समिति द्वारा पुरस्कार के लिए राज्यों का चयन किया जाता है। इस वर्ष इस चयन समिति के अध्यक्ष प्रसिद्ध फिल्म निर्माता/निर्देषक रमेश सिप्पी थे। पुरस्कारों की घोषणा सिप्पी द्वारा की गई। यह पुरस्कार आगामी 03 मई, 2018 को भारत के राष्ट्रपति द्वारा नई दिल्ली में प्रदान किये जायेंगे।

उत्तराखण्ड फिल्म विकास परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ.पंकज कुमार पाण्डेय ने कहा कि प्रदेष के मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत के नेतृत्व में परिषद के कार्यों में तेजी लायी गयी है। ज्ञातव्य है कि उत्तराखण्ड फिल्म विकास परिषद के अध्यक्ष मुख्यमंत्री स्वयं है। डॉ.पाण्डेय ने बताया कि परिषद के माध्यम से फिल्म निर्माताओं को अधिक से अधिक सुविधा मिले, इसके लिए पूरे प्रयास किये गये है।

मुख्यमंत्री की घोषणा के क्रम में प्रदेष में निर्मित होने वाली फिल्मों की शूटिंग में शुल्क को समाप्त किया गया है। इससे भी प्रदेष में फिल्म निर्माता एवं निर्देषकों को शूटिंग के प्रति रूझान बढ़ा है। डॉ.पाण्डेय ने कहा कि राष्ट्रीय स्तर के इस पुरस्कार के लिए उत्तराखण्ड राज्य का चयन हम सभी के लिए गौरव की बात है। परिषद का गठन वर्ष 2015 में ही हुआ है और अपने इस अल्प कार्यकाल में देष के अन्य राज्यों को पीछे छोड़ते हुए उत्तराखण्ड राज्य का इस पुरस्कार के लिए चयन हुआ है।

उल्लेखनीय है कि सूचना प्रसारण मंत्रालय भारत सरकार द्वारा प्रतिवर्ष द मोस्ट फिल्म फ्रेंडली स्टेट अवॉर्ड का आयोजन किया जाता है, जिसमें इस वर्ष 16 राज्यों ने प्रतिभाग किया था।

सस्ता उपचार देगा ऋषिकेश एम्सः चौबे

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान पहुंचे केंद्रीय स्वास्थ्य राज्यमंत्री अश्विनी चौबे ने कहा राष्ट्रीय आरोग्य निधि में एम्स ऋषिकेश को शामिल किया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों के साथ बैठक और परिसर का मुआयना करने के बाद पत्रकारों से बातचीत की।

वार्ता के दौरान उन्होंने बताया कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने छह एम्स बनाने की योजना बनाई थी। जिसमें सबसे अच्छी प्रगति ऋषिकेश एम्स की है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय इस एम्स को राष्ट्रीय आरोग्य निधि में शामिल करने जा रहा है। इस नीति से गरीबों को सस्ता उपचार मिलेगा। उन्होंने कहा कि एम्स विस्तारीकरण के लिए 200 एकड़ और रैनबसेरे के लिए 100 एकड़ भूमि की मांग राज्य सरकार से की है। इस कार्य को गति दी जाएगी। यहां आइडीपीएल की खाली भूमि पर भी विचार होगा। सरकार यहां सीआरसी खर्चे रैनबसेरे का निर्माण कराएगी।

केंद्रीय स्वास्थ्य राज्यमंत्री ने कहा कि आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत सरकार 1300 करोड़ का हेल्थ पैकेज देगी। बीते वित्तीय वर्ष में उत्तराखंड को स्टेट प्लान के तहत 368 लाख रुपया दिया गया है। यहां 323 स्वास्थ्य केंद्रों को अपग्रेड कर इसी वर्ष वेलनेस सेंटर में तब्दील किया जा रहा है। जिसमें एनएचएम से 90 प्रतिशत बजट दिया जाएगा।

उन्होंने बताया कि आयुष्मान भारत योजना ने वर्ष 2022 तक कुल आबादी के 40 प्रतिशत लोगों को लाभान्वित किया जाएगा। जिसमें स्वास्थ्य सुरक्षा योजना शामिल है। पांच वर्ष में इस योजना से डेढ़ लाख हेल्थ सेंटर को 1300 करोड़ की लागत से मॉडल बनाए जाने का प्रावधान है। कहा कि टीबी के मरीजों को नमो केयर के रूप में प्रतिमाह 500 रुपया दिया जा रहा है।

राज्य सरकार के लेटलतीफी पर हाईकोर्ट ने जताई नाराजगी

हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को 23 अप्रैल तक निकायों के परिसीमन की जानकारी राज्य निर्वाचन आयोग को देने के आदेश दिए है। अगली सुनवाई 24 अप्रैल की नियत की है।

इस मामले में सुनवाई न्यायाधीश न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया की एकलपीठ में हुई। निर्वाचन आयोग के अधिवक्ता संजय भट्ट ने बताया कि कोर्ट ने परिसीमन, आरक्षण निर्धारण, मतदाता सूची आदि की मौजूदा स्थिति के अनुसार चुनाव कराने व बेवजह चुनाव न टालने को कहा है।

सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि सरकार चुनाव को पूरी तरह तैयार है। 12 मई को चुनाव कार्यक्रम आयोग को सौंप दिया जाएगा। इससे पहले परिसीमन, आरक्षण निर्धारण व अन्य कार्य पूरे कर लिए जाएंगे।

यहां बता दें कि राज्य में निकाय चुनाव की अधिसूचना जारी ना करने पर चुनाव आयोग द्वारा हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की गई। जिसमें कहा है कि तीन मई से पहले राज्य में निकाय कराना संवैधानिक बाध्यता है, इसलिये राज्य सरकार को निर्देश दिये जाएं कि चुनाव की अधिसूचना जारी की जाए।

राज्य में चुनाव की अधिसूचना जारी करने का अधिकार राज्य सरकार को है। राज्य सरकार ने चुनाव आयोग की इस याचिका का जवाब दाखिल किया था। हाईकोर्ट ने सरकार से 23 अप्रैल तक चुनाव को लेकर अंतिम रिपोर्ट भी दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।

इस ऐप के जरिए केदारनाथ की जानकारी मिल सकेगी

अब देश के विभिन्न प्रांतो से आने वाले श्रद्धालुओं को अपनी ही भाषा में केदारनाथ मंदिर व उसके आसपास की जानकारी प्राप्त हो सकेगी। इसके लिए जिला प्रशासन स्तर पर एक मोबाइल एप तैयार किया जा रहा है। इसको श्री केदारनाथ मंदिर के कपाट खुलने तक पूरा कर लिया जाएगा।

भविष्य में केदारपुरी के स्वरूप की जानकारी देने के लिए एक प्रतिकृति तैयार कर केदारनाथ में रखने की भी है। मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह ने कहा कि चारधाम यात्रा की तैयारियां तकरीबन पूरी हैं। इस बार सरकार की मंशा देशभर से आने वाले तीर्थयात्रियों को उनकी भाषा में ही केदारनाथ के संबंध में जानकारी देने की है। उन्होंने कहा कि यदि यह प्रयोग सफल रहा तो निकट भविष्य में इसमें अन्य धाम व तीर्थ स्थलों को भी जोड़ा जाएगा।

उन्होंने कहा कि इसके अलावा केदारनाथ में लेजर शो के जरिये केदारनाथ की कहानी प्रदर्शित की जाएगी। इतना ही नहीं, आपदा के बाद अब तक केदारनाथ पुनर्निर्माण के कार्यो के संबंध में भी जानकारी दी जाएगी। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि अभी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के केदारनाथ आने के संबंध में कोई सूचना नहीं मिली है।

मुख्य सचिव ने उत्तरकाशी के गंगोरी में हाल ही में टूटे पुल के संबंध मे कहा कि बीआरओ के अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि इस जगह ऐसी व्यवस्था की जाएगी। जिससे वाहनों के आवागमन में अव्यवस्था न हो। इसके अलावा पुलिस की व्यवस्था भी रहेगी, ताकि ओवरलोडेड ट्रक न जा सकें।

जंगलों के संरक्षण व संवर्धन में कार्यशाला की महत्वपूर्ण भूमिका

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने 10वीं जापान इंटरनेशनल कोऑपरेशन ऐसोसिएशन (जायका) राष्ट्रीय कार्यशाला का विधिवत शुभारम्भ किया। मुख्यमंत्री ने अखरोट की बागवानी एवं अवनत वनों के सुधारीकरण पर पुस्तिकाओं का विमोचन भी किया।

10वीं जापान इंटरनेशनल कोऑपरेशन ऐसोसिएशन (जायका) राष्ट्रीय कार्यशाला के आयोजन पर 13 राज्यों के प्रतिनिधियों तथा भारत सरकार के अधिकारियों को बधाई व शुभकामनाएं देते हुए मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि जंगलो के संरक्षण व संर्वद्धन में कार्यशाला व प्रशिक्षण की महत्वपूर्ण भूमिका है। कार्यशाला मंे साझा किए गए अनुभव व ज्ञान से विभागीय प्रगति के लिए काम किए जाते है। कार्यशाला के माध्यम से जंगलों की गतिविधियों के संचालन व संरक्षण में सहायता मिलती है।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि राज्य में लगभग 11000 वन पंचायतें है। जायका द्वारा भी वन पंचायतों को वित्तीय सहायता दी जाती है। राज्य में भूमि क्षरण की समस्या अधिक है क्योंकि राज्य का हिमालयी क्षेत्र दलदली है। जापान इंटरनेशनल कोऑपरेशन ऐसोसिएशन (जायका) द्वारा दी जा रही तकनीकी सहयोग से भूक्षरण रोकने में सहायता मिलेगी। जायका की योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन द्वारा वन सरंक्षण, भू-क्षरण रोकने तथा मिटटी की गुणवत्ता में सुधार व मिट्टी में खनिजो की कमी को पूरा किया जा सकेगा।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि राज्य में वनाग्नि की समस्या को रोकने के लिए जागरूकता व सामाजिक सहभागिता को बढ़ाना होगा। स्कूली छात्र-छात्राओं में वनों के प्रति अपनत्व व दायित्व बोध पैदा करना होगा। सिविक सेन्स की तरह ही बच्चों में स्कूली जीवन से ही जंगलों के प्रति उत्तरदायित्व की भावना विकसित करनी होगी। वन अधिकारियों को स्कूलों में जाकर बच्चों से वनों के महत्व व सरंक्षण पर चर्चा करनी चाहिए।

शांति की तलाश में तीर्थनगरी पहुंची लोस अध्यक्ष

लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन अपने दिन दिवसीय प्रवास पर उत्तराखंड में है। बुधवार को तीर्थनगरी स्थित परमार्थ निकेतन में भागवत कथा में पहुंची सुमित्रा महाजन ने यहां से अपना पुराना नाता बताया। उन्होंने कहा कि आत्म शांति की अनुभूति के लिये वह गंगा के पावन तट का रूख करती है। यहां स्वयं को जानने में मदद मिलती है।

एक सवाल के जवाब में लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन बोली, मेरी नजर में आध्यात्म और राजनीति एक ही है। यदि हम आध्यात्मिक यात्रा पर भी होते हैं, तो मन में राजनीतिक बातें चलती ही रहती है। परमार्थ निकेतन में लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि माँ गंगा की निर्मल लहरें मन को शान्ति, शीतलता और पवित्रता प्रदान करती हैं। कहा कि, उत्तराखंड से उनका पुराना लगाव है, जब भी समय मिलता है वह गंगा के तट पर शांति के लिए जरूर पहुंचती हैं। इस बार मैं लंबे समय बाद यहां भागवत कथा में शामिल होने आई हूं। कुछ दिन शांति से ऐसे माहौल में बैठना भी जरूरी होता है।

परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती ने मुलाकात कर वर्तमान में नारियों की दशा और उनके विरूद्ध बढ़ते अपराधों की ओर लोकसभा अध्यक्ष का ध्यान आकर्षित किया। साथ ही स्वच्छ भारत अभियान में नारियों की भूमिका, योग को समष्टि में समर्पित करना, महिला सशक्तीकरण, नदियों की स्वच्छता, पर्यावरण एवं जल संरक्षण जैसे अनेक सामाजिक विषयों पर चर्चा की।

इससे पूर्व लोकसभा अध्यक्ष सुमित्र महाजन का जौलीग्रांट एयरपोर्ट पर पूर्व मुख्यमंत्री व सांसद डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक व विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल ने स्वागत किया। सांसद डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक ने इस दौरान लोकसभा अध्यक्ष सुमित्र महाजन को मां नंदा राजजात यात्रा पर लिखी अपनी पुस्तक भेंट की। लोकसभा अध्यक्ष ने इसके लिए डॉ. निशंक का आभार व्यक्त किया।

तेल उत्पादक देशों को खरीददार देशों का भी ख्याल रखना होगा

ऊर्जा क्षेत्र के सबसे बड़े अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन इंटरनेशनल इनर्जी फोरम-16 (आईईएफ-16) का उद्घाटन करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि अगर समाज के सभी वर्ग को किफायती दरों पर ऊर्जा नहीं उपलब्ध कराया गया, तो तेल उत्पादक देशों का ही घाटा होगा। मोदी जब यह बात कह रहे थे तब उनके आस-पास ओपेक (तेल उत्पादक देशों के संगठन) के महत्वपूर्ण सदस्य सउदी अरब, इरान, नाइजीरिया, कतर के मंत्री बैठे थे। उन्होंने यह भी कहा कि अगले 25 वर्षो तक भारत में ऊर्जा की मांग में सालाना 4.2 फीसद की बढ़ोतरी होगी जो विश्व में और कहीं नहीं होगी।

आईईएफ में वैसे तो 72 देश सदस्य हैं, लेकिन इस बैठक में 92 देशों के सदस्य हिस्सा ले रहे हैं। मोदी ने अपने उद्घाटन भाषण में जहां ऊर्जा क्षेत्र में भारत की बढ़ती अहमियत को मजबूती से रेखांकित किया। वहीं तेल उत्पादक देशों को साफ तौर पर संकेत दिया कि अब तेल खरीददार देशों के हितों का भी ख्याल रखना होगा। सिर्फ तेल उत्पादक देशों के हितों से यह बाजार नहीं चलेगा।

प्रधानमंत्री ने कहा कि, बहुत दिनों से तेल कीमतों में उतार-चढ़ाव चल रहा है। अब हमें कीमत ज्यादा समझदारी से तय करनी होगी जो उत्पादकों के साथ ही ग्राहकों के हितों में हो। ऐसा होने पर ही हम समूचे मानव समाज की ऊर्जा जरुरत को पूरा कर सकेंगे। पूर्व में जब भी तेल कीमतों को बाहरी दबाव बना कर बदला गया है तब यह उत्पादकों के लिए भी उल्टा साबित हुआ है। पीएम मोदी ने देश की ऊर्जा सुरक्षा को संरक्षित रखने के लिए चार सूत्रीय मंत्र भी दिया।

भारत अभी कच्चे तेल का सबसे बड़े खरीददार देशों में है। यहां अभी भी कुल खपत का 80 फीसद से ज्यादा आयात होता है। यह एक वजह है कि तमाम बड़े तेल उत्पादक देश भारत में उम्मीद खोज रहे हैं। तकरीबन चार वर्षो तक क्रूड की कीमतों में नरमी के बाद अभी यह 71 डॉलर प्रति बैरल को पार कर गया है। दो साल पहले यह 42 डॉलर था। इसका असर यह हुआ है कि भारत में अभी पेट्रोल व डीजल की कीमतें पिछले चार वर्षो के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है। नई दिल्ली में पेट्रोल 73.98 रुपये प्रति लीटर व डीजल 64.96 रुपये है। इसके लिए उत्पाद शुल्क में भारी वृद्धि भी जिम्मेदार है। जिसे घटाने के लिए सरकार अभी तैयार नहीं दिखती है। यह एक वजह है कि मोदी तेल उत्पादक देशों को भारत में तेल व गैस की बढ़ती मांग का हवाला दे रहे हैं। अगर कीमतें ज्यादा बढ़ेंगी तो इनकी खपत भारत में कम हो सकती है जिसका खामियाजा तेल उत्पादक देशों की मांग पर पड़ेगा।