तीन जिला आबकारी अधिकारी निलंबित

आबकारी मंत्री प्रकाश पंत ने शराब की दुकानों से हो रही राजस्व की हानि के लिये तीन अधिकारियों को जिम्मेदार ठहराया है। पंत ने इन तीनों आबकारी अधिकारियों को निलंबित करने के निर्देश अपर मुख्य सचिव डा. रणबीर सिंह को दिए है।

पंत के निर्देश पर अपर मुख्य सचिव डा. रणबीर सिंह ने जिला आबकारी अधिकारी देहरादून मनोज कुमार उपाध्याय, जिला आबकारी अधिकारी हरिद्वार प्रशांत कुमार व जिला आबकारी अधिकारी चंपावत राजेंद्र लाल को निलंबित कर आबकारी आयुक्त कार्यालय से संबद्ध कर दिया है। साथ ही शासन ने नई तैनाती तक तीनों जिलों के अपर जिला अधिकारी को अतिरिक्त रूप से यह जिम्मेदारी दी है। सरकार ने उक्त मामले की विस्तृत जांच कराने का निर्णय भी लिया।

प्रदेश में वित्तीय वर्ष 2017-18 के लाइसेंस समाप्त होने के बाद शासन ने इन जिलों में एक माह के लिए शराब की दुकानों के लाइसेंस जारी किए थे। हर जिले के लिए बकायदा राजस्व लक्ष्य भी तय किया गया। इन दुकानों के आवंटन के बाद ये तथ्य सामने आए कि इनमें से कई दुकानें निर्धारित से कम कीमत पर आवंटित की गई। इससे विभाग को करोड़ों रुपये के राजस्व की हानि हुई।

कुछ दिनों पहले आबकारी मंत्री प्रकाश पंत ने निर्धारित से कम कीमतों पर दुकानों का आवंटन व इससे राजस्व में हुए नुकसान पर गहरी नाराजगी जताते हुए अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई थी। अब शासन ने देहरादून, हरिद्वार और चंपावत जिलों में हुए नुकसान को देखते हुए तीनों जिलों के जिला आबकारी अधिकारियों को निलंबित कर दिया है। इन्हें निलंबन के दौरान आधा वेतन दिया जाएगा। इन्हें आरोप पत्र अलग से दिए जाएंगे।

शासन ने इन अधिकारियों के निलंबन के बाद देहरादून में एडीएम प्रशासन अरविंद कुमार पांडेय, हरिद्वार में एडीएम वित्त ललित नारायण मिश्र और चंपावत में एडीएम प्रशासन एवं वित्त हेमंत कुमार वर्मा को संबंधित जिलों के जिला आबकारी अधिकारी का दायित्व सौंपा गया है। आबकारी मंत्री प्रकाश पंत ने बताया कि अपर मुख्य सचिव आबकारी को इस पूरे मामले की विस्तृत जांच के आदेश दे दिए गए हैं, जांच अधिकारी वे ही नियुक्त करेंगे।

ग्रोथ सेंटरों से पहाड़ों में प्रति व्यक्ति आए बढ़ेगीः त्रिवेन्द्र

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने ‘‘ग्रोथ सेन्टर्स’’ के लिये एक नीति बनाने के निर्देश दिये हैं। मुख्यमंत्री ने कहा है कि सरकार यह वर्ष रोजगार वर्ष के रूप में मना रही है। रोजगार के अवसर सृजित करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि ग्रोथ सेन्टर्स पलायन रोकने और ग्रामीण क्षेत्रों के सर्व समावेशी विकास में बड़ी भूमिका निभाएंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि ग्रोथ सेन्टरों द्वारा पहाड़ो में प्रति व्यक्ति आय में सुधार होगा तथा क्षेत्रीय विषमताएं कम होंगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों के आर्थिक विकास के लिये सभी 670 न्याय पंचायतों को ग्रोथ सेन्टर्स से आच्छादित किया जायेगा। यह ग्रोथ सेंटर बहुउद्देशीय आर्थिक गतिविधियों के केन्द्र होंगे। इसके लिये इस वर्ष बजट में एमएसएमई विभाग हेतु 15 करोड़ रूपये की व्यवस्था भी की गई है।

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिये कि सभी विभाग यथा कृषि, उद्यान, डेरी, पशुपालन, आयुष, एमएसएमई आदि अपनी गतिविधियों के अनुसार प्रदेश में ग्रोथ सेन्टर एक्टिविटी चयनित कर लें।
मुख्यमंत्री ने सभी विभागों को निर्देश दिये कि पॉलिसी की प्रतीक्षा किये बिना वे अपनी प्रारंभिक तैयारियां पूर्ण कर लें। उन्होंने कहा कि ग्रोथ सेन्टर्स की स्थापना ‘आउटकम’ बेस्ड होनी चाहिए। ग्रोथ सेन्टर्स के लाभ को देखने के लिये ‘इण्डिकेटर्स’ भी बनाये जायें।

प्रमुख सचिव मनीषा पंवार ने बताया कि ग्रोथ सेन्टर्स को लेकर हुई प्रारम्भिक बैठकों में प्रसंस्करण, निर्माण और सेवा क्षेत्रों में गतिविधियां चिन्हित करने का निर्णय लिया गया है। हर ग्रोथ सेन्टर में एक लीड एक्टिविटी (प्रमुख गतिविधि) को चिन्हित कर उसके अनुरूप उत्पादन एवं विपणन ‘चेन’ को प्रोत्साहित किया जायेगा।

अपना प्रभाव दिखाते तो लाखों की नौकरी करता बेटाः प्रेमचंद

उत्तराखंड विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल के बेटे अपूर्व अग्रवाल को उत्तराखंड पूर्व सैनिक कल्याण निगम (उपनल) से जलसंस्थान में सहायक अभियंता के पद तैनाती मिली थी। यह मामला प्रकाश में आने के बाद काफी बड़ा मसला खड़ा हो गया था। राज्य के विभिन्न जगहों पर प्रदर्शन व विस अध्यक्ष के पुतले तक आग के हवाले किये जा रहे थे। इस बीच विवाद को बढ़ता देख विधानसभा अध्यक्ष के बेटे अपूर्व अग्रवाल ने इस्तीफा दे दिया है। विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल ने जानकारी देते हुये बताया कि उनके बेटे ने इस पद से इस्तीफा दे दिया है और अब इस विषय को यहीं समाप्त किया जाए।

पत्रकारों से बातचीत में विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल इस पूरे प्रकरण पर व्यथित नजर आए। उन्होंने कहा कि उनका बेटा अपूर्व उपनल में सहायक अभियंता के पद पर 11 माह के लिए अस्थायी नियुक्ति हुआ था। उनके बेटे ने इसके लिए निर्धारित प्रक्रिया के तहत आवेदन किया गया था। इस नियुक्ति में उनकी कोई भूमिका नहीं थी। इसके लिए उन्होंने अपने प्रभाव का इस्तेमाल नहीं किया। यदि वे अपने प्रभाव का इस्तेमाल करते तो उनका बेटा दो-तीन लाख की नौकरी करता, न कि 15 हजार रुपये की अस्थायी नौकरी। उनके बेटे की यदि अपनी योग्यता व मेहनत के बूते नौकरी लगी है, इसके बाद भी ऐसी बातें कही जा रही हैं, इसका उन्हें कष्ट है।

उन्होंने कहा कि मेेरे राजनीतिक जीवन में अभी तक आरोप नहीं लगे हैं। वे राज्य आंदोलन समेत तमाम मांगों को लेकर संघर्षरत रहे हैं। उनकी छवि व संवैधानिक पद पर उनकी मर्यादा को तार-तार करने का प्रयास किया गया। उन्होंने कहा कि अब उनके बेटे ने इस्तीफा दे दिया है तो इस प्रकरण को यहीं समाप्त किया जाए।

जनता की खुशहाली के लिये एकजुट होंगे भारत और नेपाल

भारत और नेपाल एक दूसरे के नागरिकों की खुशहाली और गरीबी दूर करने के लिये एकजुट होकर कार्य करेंगे। कृषि क्षेत्र में यह कार्य सार्थक सिद्ध होगा। यह बात नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने पंतनगर विवि में कार्यक्रम के दौरान कही।

पंतनगर एयरपोट पर पहुंचने पर नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली का राज्यपाल केके पॉल व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने बुके देकर स्वागत किया। परंपरागत कुमाऊं के रीति रिवाज के तहत प्रधानमंत्री केपीएस ओली का स्वागत किया गया। प्रधानमंत्री के सम्मान में कलाकारों ने छोलिया नृत्य एयरपोर्ट पर प्रस्तुत किया। इसके उनका काफिला पंतनगर विवि के लिए रवाना हो गया।

ओली अपनी धर्मपत्नी राधिका शाक्य और नेपाल के 33 सदस्यीय दल के साथ उत्तराखंड दौरे पर आए हुए हैं। उनकी इस यात्रा का मकसद दोनों देशों के बीच कृषि तकनीक के आदान-प्रदान को बढ़ाना है। रविवार को गोविंद बल्लभ पंत कृषि विवि, पंतनगर के गांधी हॉल में राज्यपाल केके पाल ने उन्हें विज्ञान वारिधि की मानद उपाधि से सम्मानित किया।

समारोह को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ओली ने कहा कि हमारी धार्मिक आस्थाएं एक-दूसरे के साथ हैं। नेपाल की जनता भी भारत के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलना चाहती है। पीएम ओली ने कहा कि नेपाल की दो तिहाई जनसंख्या कृषि पर निर्भर है, लेकिन आधुनिकीकरण एवं यांत्रिकीकरण में काफी पीछे हैं। हमारे दो कृषि विवि हैं, लेकिन वे अभी प्रारंभिक अवस्था में हैं। उन्हें मजबूती प्रदान करने के लिए पंतनगर विवि का सहयोग लिया जाएगा।

जीबी पंत कृषि विवि के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि यहां बहुत कुछ सीखने को है। बोले, विवि ने जो सम्मान उनको दिया, वह उनके लिए नई प्रेरणा का काम करेगा। उन्होंने कहा कि भारत ने जो पहल की है, नेपाल उसमें अपना पूरा योगदान देगा। इससे पहले ओली ने विवि के ब्रीडर सीड्स प्रोसेसिंग यूनिट और बीज अनुसंधान केंद्र का निरीक्षण किया।

राज्यपाल डॉ. केके पॉल ने कहा कि नेपाल एवं उत्तराखंड इतिहास, संस्कृति, व्यापार के साथ-साथ अन्य बहुत सी समानताएं रखते हैं। चुनौतियां भी एक जैसी हैं तथा दोनों मिलकर अपने लोगों की बेहतरी, वातावरण सुरक्षा एवं प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा के लिए काम कर सकते हैं। उन्होंने नेपाल एवं उत्तराखंड की समान परिस्थितियों को देखते आपसी सहयोग के पांच बिंदुओं का उल्लेख किया।

हमने पारदर्शी आबकारी नीति लागू कीः त्रिवेन्द्र

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने एक बयान में कहा है कि शराब बिक्री के बारे में जो अफवाहें फैलाई जा रही है, वह निराधार है। मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि हमारी सरकार ने एक पारदर्षी आबकारी नीति लागू की है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 में पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार एफएल-5एम/डीएस के नाम से एक पॉलिसी लाई थी। जिसके अंतर्गत मॉल/डिपार्टमेंटल स्टोर में 02 लाख रूपए का शुल्क देकर लाइसेंसधारियों को विदेषी शराब बेचने का अधिकार दिया गया था। हमारी सरकार ने इस पॉलिसी के दुरूपयोग को रोकने हेतु नए कदम उठाए हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि नए प्रावधानों के तहत मॉल/डिपार्टमेंटल स्टोर का लाइसेंस शुल्क 02 लाख से 05 लाख कर दिया गया है। साथ ही ये प्रावधान भी किया गया है कि यह लाइसेंस तब दिया जाएगा, जब उस स्टोर का सालाना टर्नओवर 50 लाख रुपये से अधिक हो। इससे वास्तविक डिपार्टमेंटल स्टोर ही उक्त अनुज्ञापन प्राप्त कर सकेंगे।

सीएम ने मीडिया व जनता से अपील की है कि इस मुद्दे पर भ्रामक खबरों या दुष्प्रचार से बचें। एफएल-5एम/डीएस पॉलिसी में किए गए संषोधन परचून किराना स्टोर में शराब बेचने के लिए नहीं है बल्कि पहले से चली आ रही पॉलिसी का दुरूपयोग रोकने का एक ईमानदार एवं पारदर्षी कदम है।

सरकार शराब को बढ़ावा देने के पक्ष में नहीं है, बल्कि इसके लिए बनाये नियमों का पारदर्षी तरीके से लागू करने का प्रयास कर रही है।

ऋषिकेश एम्स में रोबोटिक सर्जरी से दो का सफल ऑपरेशन

ऋषिकेश स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान में इन दिनों रोबोटिक सर्जरी का लाभ कई मरीजों को मिल रहा है। इस सर्जरी के जरिये एक महिला का मूत्राशय में रसौली व एक व्यक्ति में पाए गये कैंसर का सफल ऑपरेशन किया गया। यह ऑपरेशन यूरोलॉजी विभाग के डॉक्टर्स की देखरेख में सम्पन्न हुआ।

संस्थान के निदेशक प्रोफेसर रविकांत गुप्ता ने बताया कि इस सर्जरी का सर्वाधिक उपयोग किडनी व मूत्राशय संबंधी बीमारियों के ऑपरेशन में किया जाता है। यूरोलॉजी के विभागाध्यक्ष डाक्टर अंकुर मित्तल व सुनील कुमार ने 65 वर्ष की एक महिला जो ब्लैडर कैंसर की समस्या से जुझ रही थी। उनका ऑपरेशन रोबोटिक सर्जरी के जरिए सफल रहा। इस ऑपरेशन में कैंसर से ग्रस्त मूत्राशय को निकालकर कृत्रिम मूत्राशय बनाया गया। उन्होंने बताया कि पूर्व में चीरा लगाकर ऑपरेशन किये जाते थे।

विदित हो कि मूत्राशय कैंसर धूम्रपान, विकिरण, रसायनिक कारणों, रंजक, रबड़, पेंट आदि के निर्माण में प्रयोग में लाये जाने वाले रसायन से होता है।

दूसरा सफल ऑपरेशन में एक व्यक्ति की किडनी में कैंसर था। रोबोटिक सर्जरी के जरिये रसौली को निकाल दिया गया और किडनी को बचा लिया गया। जबकि, पूर्व में किडनी को ही निकाल दिया जाता था।

निकाय चुनावः फिर से आमंत्रित होंगी आपत्ति, होगी सुनवाई

अब ऋषिकेश और कोटद्वार का नगर निगम बनना बिल्कुल तय है। अब इन पर आपत्ति आमंत्रित की जायेगी। इसके बाद अंतिम अधिसूचना जारी हो जायेगी। राज्य के शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक ने इस बात की पुष्टि की है।

राज्य सरकार ने 24 निकायों के सीमा विस्तार और गठन से संबंधित अनंतिम अधिसूचना जारी कर दी है। इसमें पांच नगर निगम व 19 नगर निकाय शामिल हैं। शासन की ओर से किए गए सीमा विस्तार पर हाईकोर्ट के निर्देश के बाद राज्य सरकार ने 24 निकायों के सीमा विस्तार व गठन को लेकर नए सिरे से आपत्तियां आमंत्रित की थीं। इन निकायों में नगर निगम देहरादून, काशीपुर, हरिद्वार, हल्द्वानी व रुद्रपुर, नगर पालिका परिषद कोटद्वार व ऋषिकेश (पूर्व में नगर निगम के रूप में उच्चीकृत), नगर पालिका परिषद भवाली, अल्मोड़ा, बागेश्वर, टनकपुर, विकासनगर, डोईवाला, पिथौरागढ़, किच्छा, चंबा, खटीमा, नगर पंचायत भीमताल, लंबगांव, चिन्यानौला (रानीखेत), नंदप्रयाग, तिलवाड़ा, चमियाला व सेलाकुई शामिल थे। इन सभी स्थानों से मिली आपत्तियों को सुनने और इनका निस्तारण करने के बाद शासन को रिपोर्ट भेजी गई थी। इनका शासन में परीक्षण चल रहा था। इस मामले में कोर्ट में 11 अप्रैल को सुनवाई होनी है।

सरकार ने अपनी तैयारियों को पुख्ता रूप देते हुए गुरुवार देर शाम इसकी अनंतिम अधिसूचना जारी कर दी है। अब इस अधिसूचना पर भी आपत्तियां मांगी जाएंगी। माना जा रहा है कि इनके निस्तारण में कम से कम तीन से चार दिन का समय लगेगा। इसमें बाद अंतिम अधिसूचना जारी की जाएगी।

शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक ने इसकी पुष्टि की है। उन्होंने कहा कि अनंतिम अधिसूचना से संबंधित पत्रवली पर उन्होंने हस्ताक्षर कर दिए हैं। उन्होंने कहा कि चुनावांे को लेकर सरकार दस मई तक अपनी ओर से सारी तैयारियां पूरी कर लेगी।

यूपी में 500 एकड़ भूमि पर बनेगी नई अयोध्या

उत्तर प्रदेश सरकार अयोध्या में भगवान राम की 100 मीटर ऊंची प्रतिमा की योजना बनाने और यहां नई अयोध्या बसाने की तैयारी में जुटी हुयी है।

योगी आदित्यनाथ सरकार की योजना अयोध्या में नई अयोध्या टाउनशिप बसाने की है। यह टाउनशिप करीब 500 एकड़ जमीन में फैली होगी और इसके निर्माण पर करीब 350 करोड़ रुपये खर्च होने की संभावना है।

उत्तर प्रदेश सरकार ने अनौपचारिक तौर से इस प्रोजेक्ट के लिए अपना काम शुरू कर दिया है, हालांकि औपचारिक तौर पर महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट को क्षेत्रीय स्तर पर सहमति मिलने के बाद इसे राज्य सरकार के पास भेजा जाएगा। अयोध्या फैजाबाद डेवलपमेंट अथॉरिटी की ओर से अनुमति मिलने के बाद यह योजना आगे बढ़ेगी।

कार्यकारी इंजीनियर मनोज कुमार मिश्रा ने बताया कि नई अयोध्या टाउनशिप की योजना को लेकर प्रारंभिक सहमति हाल ही में कमिश्नर और जिलाधिकारी की बैठक में मिल गई थी। अब इस प्रस्ताव को अथॉरिटी के पास भेजा जाना है जो 13 अप्रैल को होने वाली बैठक में फैसला ले सकती है, इसके बाद इसे राज्य सरकार के पास भेजा जाएगा।

सरयू नदी के दाईं ओर बनेगा टाउनशिप

नई अयोध्या टाउनशिप को कई चरणों में सरयू नदी के दाईं तरफ बसाया जाएगा। जो 500 एकड़ के दायरे में फैला होगा। निर्माण के पहले चरण में 100 एकड़ में टाउनशिप बनाई जाएगी जिस पर 110 करोड़ का खर्च आने की संभावना है। इस खर्च में जमीन की कीमत भी शामिल है जिसकी अनुमानित कीमत लगभग 70 करोड़ आंकी जा रही है।

इस प्रोजेक्ट के शुरू के बाद टाउनशिप के पहले चरण का निर्माण पूरा होने में 12 से 18 महीने का वक्त लगेगा। अथॉरिटी प्रोजेक्ट के लिए लोन लेने की योजना बना रही है।

नई अयोध्या टाउनशिप लखनऊ-गोरखपुर हाईवे पर माझा बरहटा और जयसिंह मऊ गांव के पास बसाया जाएगा। इस टाउनशिप में आवासीय क्षेत्रों के अलावा मंदिर, सार्वजनिक कार्यस्थल, पार्क, होटल और शॉपिंग गलियारे होंगे ही, साथ में विश्व स्तर के पेयजल और सीवर सुविधाएं भी होंगी।

इससे पहले योगी राज में राज्य सरकार ने अयोध्या में भगवान राम की 100 मीटर ऊंची प्रतिमा बनाने का प्रस्ताव रखा है जिसके निर्माण पर 330 करोड़ रुपये का खर्चा आएगा। सरकार ने इस प्रोजेक्ट के लिए निजी कंपनियों से भी निवेश करने का अनुरोध किया है।

संतुलन खो एमआई-17 हुआ क्षतिग्रस्त

केदारनाथ में सेना का एक एम-17 हेलीकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इस हादसे में पायलट समेत चार लोग घायल हो गए। लैंडिंग के वक्त हेलीकॉप्टर क्रैश हुआ। बताया जा रहा है कि पायलट निर्माणाधीन पुल के लोहे को बचाने में संतुलन खो बैठा और हेलीकॉप्टर क्रैश हो गया।

भारतीय वायुसेना के इस हेलीकॉप्टर में निर्माण कार्यों से जुड़ा मैटेरियल भरा हुआ था। गुप्तकाशी से ये हेलीकॉप्टर केदारनाथ जा रहा था, जहां निर्माण के लिए सामान पहुंचाना था। हादसे से हेलीकॉप्टर बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया और उससे धुंआ निकलने लगा। समय रहते लोगों को बाहर निकाल लिया गया।

बता दें कि केदारनाथ आपदा के दौरान 2013 में भी एक एमआई-17 हेलीकॉप्टर क्रैश हुआ था। उस वक्त हादसे में आठ लोगों की जान चली गई थी। भारतीय वायुसेना ने कहा कि एमआई-17 केदारनाथ में दुर्घटनाग्रस्त हो गया है। इसमें सवार सभी पैसेंजर्स सुरक्षित हैं। हादसे की जांच की जा रही है।

कई मुस्लिम भाई भी राम मंदिर के पक्ष मेंः श्रीश्री

आर्ट ऑफ लिविंग के प्रणेता श्रीश्री रविशंकर ने कहा कि राम मंदिर निर्माण के लिये आपसी सौहार्द की आवश्यकता है। क्योंकि राम जन्मभूमि से देश के करोड़ों लोंगो की आस्था जुड़ी हुयी है। उन्होंने बताया कि मुस्लिम समुदाय के कई लोग भी यही चाहते है कि अयोध्या की राम जन्म भूमि पर प्रभु राम का ही मंदिर बने।

तीन दिवसीय प्रवास पर शुक्रवार को तीर्थनगरी पहुंचे श्रीश्री रविशंकर ने यहां सत्संग में कहा कि अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि में मंदिर बनाने का वे लोग विरोध कर रहे हैं, जिनका अस्तित्व ही संघर्ष करना है। राम जन्मभूमि मामले का मध्यस्थता के जरिये समाधान निकालने को लेकर चर्चा में आए श्रीश्री रविशंकर ने तीर्थनगरी में शीशमझाड़ी गंगा तट पर स्थित गंगाश्रय आश्रम में अनुयायियों की जिज्ञासा को दूर किया।

श्रीश्री ने बताया कि एक संत रामचंद्र दास उनके पास आए और बोले पिछले 30 वर्ष से वह राम मंदिर निर्माण की प्रतीक्षा कर रहे हैं। कई मुस्लिम भाई, उनकी संस्था के युवा और इमाम भी राम जन्मभूमि मामले में उनसे मिले। सभी से उन्होंने स्पष्ट कहा कि आपसी सौहार्द से ही राम जन्मभूमि में मंदिर का निर्माण होगा। क्यों कि सौ करोड़ लोगों की आस्था राम मंदिर से जुड़ी है।