फीस वृद्धि वापस होने से होगा छात्रों को फायदा

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कहा कि प्रदेश के निजी मेडिकल संस्थानों से हुयी वार्ता के बाद उनके द्वारा फीस वृद्धि का निर्णय वापस ले लिया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि निजी मेडिकल संस्थानों के प्रतिनिधियों द्वारा पूर्व में उनसे भेंट कर अवगत कराया था कि उन्हें संस्थानों की अवस्थापना सुविधाओं आदि के विकास के लिये बड़ी धनराशि व्यय करनी पडती है। इसके लिये उनके द्वारा मेडिकल छात्रों की फीस में वृद्धि का अनुरोध किया गया था।

मुख्यमंत्री ने कहा कि मेडिकल संस्थानों द्वारा फीस में कई गुना वृद्धि किये जाने तथा कई अभिभावकों द्वारा उन्हें फीस वृद्धि के संबंध में अवगत कराये जाने पर मेडिकल छात्रों के हित में संस्थानों को फीस वृद्धि वापस लेने को निर्देशित किया गया। जिस पर उनके द्वारा फीस वृद्धि वापस लेने का निर्णय लिया गया है। मुख्यमंत्री ने प्रदेश में मेडिकल संस्थानों द्वारा फीस वृद्धि वापस लिया जाना मेडिकल छात्रों के हित में एक महत्वपूर्ण फैसला बताया। उन्होंने कहा कि इससे मेडिकल के छात्रों को फायदा होगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में किसी को भी मनमानी नही करने दी जायेगी। यदि कोई मनमानी करेगा तो उसके विरूद्ध कड़ी कार्यवाही की जायेगी। मेडिकल कॉलेज के छात्रों की सुविधा का पूरा ध्यान रखा जायेगा।

एनसीईआरटी की पुस्तकों को प्रदेश के विद्यालयों में लागू करने के निर्णय के संबंध में निजी स्कूल प्रबंधकों के असंतोष के संबंध में मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र ने कहा कि इस संबंध में जायज बातों को सुना जायेगा।

डाटकाली टनल में दिखेगी उत्तराखंड की संस्कृति

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण द्वारा देहरादून में निर्माणाधीन अजबपुर, आईएसबीटी के फ्लाई ओवर तथा डाटकाली टनल का निरीक्षण किया। मुख्यमंत्री ने कार्यदायी संस्था को निर्देष दिये कि निर्माण कार्य निर्धारित समयावधि के अन्दर पूर्ण कर लिया जाए। उन्होंने कहा कि समयबद्धता एवं गुणवत्ता का विषेष ध्यान रखा जाए। कार्य की गुणवत्ता में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाष्त नहीं की जायेगी।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने कार्यदायी संस्था को अजबपुर के फ्लाई ओवर का कार्य जुलाई 2018 तक पूर्ण करने के निर्देश दिये। कार्यदायी संस्था द्वारा अजबपुर फ्लाई ओवर के ऊपर विद्युत लाईन के होने के कारण कार्य में परेषानी होने के बारे में मुख्यमंत्री को अवगत कराया। मुख्यमंत्री ने इस सम्बंध में सचिव ऊर्जा को आवष्यक कार्यवाही के निर्देष दिए।
आईएसबीटी के फ्लाई ओवर के निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री ने एनएचएआई के अधिकारियों को निर्देष दिये कि जन-सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए कार्य में तेजी लायी जाए। उन्होंने कहा कि जो भी फ्लाई ओवर बनाये जा रहे हैं, उनके दोनो तरफ सौन्दर्यीकरण कार्य भी किया जाए। इस अवसर पर उन्होंने मोहकमपुर के फ्लाई ओवर की कार्यप्रगति की जानकारी भी ली। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य स्थापना दिवस से पूर्व दोनों फ्लाई ओवर का निर्माण कार्य पूरा कर लिया जाए। उन्होंने कहा कि इनका निर्माण कार्य पूरा होने के बाद लोगों को चौराहों पर लगने वाले जाम से निजात मिलेगी।

इसके उपरान्त मुख्यमंत्री ने डाटकाली टनल का भी निरीक्षण किया। उन्होंने कहा कि टनल का निर्माण कार्य एक वर्ष के अन्दर पूर्ण कर लिया जाए। निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री ने कार्यदायी संस्था को निर्देष दिये कि टनल के प्रवेष द्वारो की दीवारों पर इस तरह सौन्दर्यीकरण किया जाए कि उत्तराखण्ड की सांस्कृतिक विषेषताओं की झलक एक साथ पर्यटकों को दिखाई दे। देवभूमि एवं वीरभूमि उत्तराखण्ड की संस्कृति की झलक दिखाने के लिए आधुनिक तकनीक का प्रयोग किया जाए।

राज्य में तो विरोध करने की परंपरा सी बन गयीः त्रिवेन्द्र

इन दिनों मेडिकल कोर्स की फीस को लेकर भारी विरोध देखने को मिल रहा है। जिस पर प्रदेश के मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने चुप्पी तोड़ी है। उन्होंने सरकार का इस संबंध में रूख बयां करते हुये कहा कि प्राइवेट निवेशक कॉलेज निर्माण से लेकर अन्य खर्चों की भरपाई स्वयं उठाते है। इसके लिये सरकार की ओर से उन्हें कोई अनुदान नहीं दिया जाता है। तो ऐसे में हम उन्हें हतोत्साहित नहीं कर सकते है। प्रदेश में कई ऐसे अभिभावक है, तो इन फीस को भरने में सक्षम है, तो निवेशकों को हतोत्साहित नहीं करना चाहिए।

सरकार ने हाल ही में हुए बजट सत्र में उत्तराखंड अनुदानित निजी व्यावसायिक शिक्षण संस्थाओं (प्रवेश तथा शुल्क निर्धारण विनियम) (संशोधन) विधेयक-2018 पारित किया है। इस संशोधित विधेयक में निजी मेडिकल कॉलेजों को फीस निर्धारण का अधिकार दिया गया है। इससे पहले निजी मेडिकल कॉलेजों के लिए फीस का निर्धारण हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में गठित प्रवेश एवं शुल्क नियामक समिति के जिम्मे था। अब विधेयक के एक्ट का स्वरूप लेते ही निजी मेडिकल कॉलेजों में फीस वृद्धि का रास्ता भी तकरीबन साफ हो गया है। निजी मेडिकल कॉलेजों ने फीस वृद्धि की कसरत शुरू कर दी है। प्रदेश में इसका विरोध भी शुरू हो गया है। इस संबंध में बुधवार को मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने साफगोई के साथ सरकार का पक्ष रक्षा।

उन्होंने कहा कि अगर प्रदेश में ऐसे बच्चे या अभिभावक आते हैं जो खर्च कर सकते हैं तो उन्हें लगता है कि निजी मेडिकल कॉलेजों के क्षेत्रों में पूंजी निवेशकों को रोकना नहीं चाहिए। प्रदेश में तमाम निजी कालेज हैं और कई निवेशक निजी कॉलेज खोलने के लिए आवेदन कर रहे हैं। अगर हम इन्हें रोकते हैं तो राज्य का अहित होता है। प्रदेश में इस मसले पर चल रहे विरोध पर मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में विरोध हर चीज का होता है चाहे अच्छा किया जाए या बुरा। विरोध करना राज्य की परंपरा सी बन गई है।

जानिए आखिर कैसे दो गुने आकार के साथ बढ़ेगी अर्थव्यवस्था

वित्त मंत्रालय ने सोमवार को कहा है कि भारतीय अर्थव्यवस्था 2025 तक दोगुनी हो जाएगी. मंत्रालय के मुताबिक 2025 तक इकोनॉमी पांच हजार अरब डॉलर की हो जाएगी।

वित्त मंत्रालय ने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था 2025 तक दोगुनी होगी। यह तेज रफ्तार से बढ़ते हुए 5,000 अरब डॉलर तक पहुंच जाएगी। मंत्रालय ने इसके साथ ही कहा कि भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा तय मुद्रास्फीति के लक्ष्य को लेकर कोई खतरा नहीं है।

आर्थिक मामलों के सचिव सुभाष चंद्र गर्ग ने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था सात से आठ फीसदी की दर से बढ़ने के प्रति अग्रसर है। स्टार्टअप, एमएसएमई और बुनियादी ढांचे के निवेश पर ध्यान दिए जाने से इकोनॉमी की रफ्तार और भी बढ़ेगी। इसमें लगातार तेजी आ सकती है।

गर्ग भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) के एक कार्यक्रम में बोल रहे थे। इसमें उन्होंने कहा कि मुझे लगता है कि अगर अगले 7-8 सालों के भीतर वस्तुओं और सेवाओं का उत्पादन बढ़ता है और मांग का सृजन होता है, तो हम 2025 तक अर्थव्यवस्था के आकार को 5,000 अरब डॉलर तक पहुंचा सकेंगे। यह एक उचित लक्ष्य है।

बता दें कि फिलहाल भारत के सकल घरेलू उत्पाद का आकार 2,500 अरब डॉलर का है। यह दुनिया की 6वीं छठी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। मुद्रास्फीति को लेकर गर्ग ने कहा कि यह काफी हद तक रिजर्व बैंक के लक्ष्य चार प्रतिशत (दो प्रतिशत ऊपर या नीचे) के दायरे में है।

थोक मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति फरवरी में सात महीने के निचले स्तर 2.48 फीसदी पर आ गई है। उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति फरवरी में चार महीने के निचले स्तर 4.44 प्रतिशत पर रही है। रिजर्व बैंक ने अपनी फरवरी की मौद्रिक समीक्षा में नीतिगत दरों में बदलाव नहीं किया था।

अब गाड़ियों में बीएस-6 पेट्रोल डलेगा, फायदे जानने के लिए अधिक पढ़े

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से देश के 13 मेट्रो शहरों में माह अप्रैल 2019 से बीएस-6 फ्यूल उपलब्ध कराने पर विचार करने को कहा है। इससे पहले भी बीएस-6 पेट्रोल-डीजल उपलब्ध करवाने के बारे में कहा गया है।

आखिर ये बीएस-6 क्या है?
बीएस का अर्थ भारत स्टेज है और यह वायु प्रदूषण फैलाने वाले मोटर गाड़ियों सहित सभी इंजन वाले उपकरणों के लिए मानक है। बताया जा रहा है कि बीएस-6 ग्रेड के ईंधन से प्रदूषण में कमी होगी।

बीएस-6 नियम आने से कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी। बीएस-6 फ्यूल आने से पर्टिकुलेट मैटर में इनकी 20 से 40 एमजीसीएम तक ही हिस्सेदारी रहेगी।

जानकारी के अनुसार बीएस-6 फ्यूल से सल्फर की मात्रा बीएस-4 से 5 गुना तक कम होगी। यह काफी क्लीन फ्यूल होता है। इस फ्यूल के इस्तेमाल से सड़कों पर चल रही पुरानी गाड़ियों में भी फैल रहा प्रदूषण कम होगा। बीएस-6 गाड़ियों में भी एडवांस एमिशन कंट्रोल सिस्टम फिट होगा। हालांकि इसके लिए गाड़ियों के ईंजन को भी इसके अनुसार ही होना चाहिए।

क्या हैं बीएस (भारत चरण) के नॉर्म्स
वायु प्रदूषण फैलाने वाले मोटर गाड़ियों सहित सभी इंजन वाले उपकरणों के लिए भारत चरण उत्सर्जन मानक (बीएस) की शुरुआत केंद्र सरकार ने वर्ष 2000 में की थी। इसके विभिन्न मानदंडों को समय और मानकों के अनुसार, पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन के मंत्रालय के तहत आने वाले केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर लाया जाता है। भारत चरण (बीएस) मानदंड यूरोपीय नियमों पर आधारित हैं।

कितना महंगा होगा
वर्ष 2020 की डेडलाइन के मुताबिक ज्यादा स्वच्छ पेट्रोल-डीजल बनाने के लिए ऑयल रिफाइनरियों को 28000 करोड़ रुपए का निवेश करना होगा। हालांकि, फ्यूल कितना महंगा होगा या नहीं होगा। यह उस वक्त क्रूड (कच्चा तेल) की कीमतों पर निर्भर करेगा। आम आदमी पर सीधा असर ये होगा कि अब उन्हें किसी भी कंपनी का एंट्री मॉडल पहले की तुलना में महंगा मिलेगा।
वहीं स्वास्थ्य के तौर पर ये गाड़ियां पहले की अपेक्षा बेहतर साबित होंगी। हालांकि सरकार का लक्ष्य बीएस-6 मॉडल को देश में लागू करवाना है, जिसमें अभी वक्त लगेगा।

किसानों की आय बढ़ाने के लिये स्थानीय उत्पादों को दे बढ़ावा

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने विकासखण्ड कर्णप्रयाग के कालेश्वर में हिमालयन एक्शन रिसर्च सेन्टर (हार्क) एवं यू-कॉस्ट के संयुक्त तत्वावधान में हिमालय जंगली उत्पादों के मूल्य सवंर्धन से बने उच्च उत्पाद के ब्रॉन्ड ‘‘माउन्टेन बीम‘‘ का शुभांरभ किया। इस दौरान उन्होंने हार्क संस्थान के कोल्ड स्टोर, नये उत्पादों के रिसर्च यूनिट एवं खाद्य प्रसंस्करण यूनिट का अवलोकन भी किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हार्क संस्था ने तीन उत्पादों से कार्य शुरू किया था और आज संस्था द्वारा 30 से अधिक उत्पाद तैयार किये जा रहे है। उन्होंने कहा कि परम्परागत कार्यो के साथ प्राकृतिक उत्पादों को उपयोगी बनाकर उनका मूल्य संवर्धन करना जरूरी है। किसानों की आय में वृद्वि करने के लिए स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने के साथ ही उसकी ब्रान्डिंग और प्रोसेसिंग पर ध्यान देना होगा। उन्होंने कहा कि स्थानीय लोगों में व्यावसायिक सोच विकसित करना जरूरी है। राज्य सरकार द्वारा न्याय पंचायतों को ग्रोथ सेन्टर के रूप में विकसित करने की योजना बनायी जा रही है। इन ग्रोथ सेन्टरों में स्थानीय उत्पादों को बढावा दिया जायेगा तथा अधिक से अधिक महिला स्वयं सहायता समूहों को इससे जोडा जायेगा। उन्होंने कहा कि प्रदेश के समग्र विकास के लिए महिला सशक्तिकरण जरूरी है। उन्होंने हार्क संस्था में कार्य करने वाली सभी महिलाओं को उत्तम प्रोसेसिंग एवं ब्रान्डिंग हेतु आवश्यक प्रशिक्षण देनेे को कहा, जिससे उच्च गुणवत्ता के उत्पाद तैयार कर राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर अच्छा मूल्य मिल सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के विकास के लिए हमें अपने अधिकार एवं कर्मो के प्रति सजग रहना होगा।

त्रिवेन्द्र ने कहा कि जैविक उत्पादों की मांग तेजी से बढ रही है। जैविक उत्पादों को तैयार कर हम अच्छी आजीविका अर्जित कर सकते है। उन्होंने कहा कि बाजार की डिमांड को देखते हुए किनवा एवं शहद की अच्छी तरह से प्रोसेसिंग और ब्रान्डिंग कर आजीविका में वृद्वि की जा सकती है। शहद के उत्पादन को बढाने के लिए पर्वतीय क्षेत्रों में सहकारी संस्थाऐं बनायी जायेंगी। उन्होंने हार्क संस्था द्वारा तैयार किये गये उत्पादों की सराहना करते हुए कहा कि जंगली फलों की सही ढंग से प्रोसेसिंग कर उत्तम उत्पाद तैयार किये जा रहे है, जिससे स्थानीय महिला स्वयं सहायता समूहों को स्वरोजगार के अवसर भी मिल रहे है। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने उत्कृष्ट कार्य करने वाली महिलाओं को सम्मानित किया तथा हार्क संस्था द्वारा तैयार किये 14 उत्पादों की मॉउन्टेन वैन को हरी झण्डी दिखाकर देहरादून में मार्केटिंग के लिए रवाना किया।

हार्क संस्था विगत 30 वर्षो से हिमालय क्षेत्र के सीमांत किसानों के साथ आजीविका से संबधित गतिविधियों में कार्य कर रही है, जिसमें बागवानी, कृषि एवं सहकारिता उत्पादों को तैयार किया जा रहा है। महिला सहकारिता का गठन हार्क ने 10 वर्ष पूर्व कालेश्वर में किया था, जिसमें वर्तमान में दो हजार महिलाएं जुडी है। हार्क संस्था द्वारा दो ब्रान्डों में 30 से अधिक उत्पाद तैयार किये जा रहे है।

त्रिवेन्द्र सरकार के बजट में आम नागरिकों को राहत

वित्तीय वर्ष 2018-19 का बजट पेश हो गया। मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने इस बजट को करमुक्त रख जहां आम नागरिको को राहत दी है तो वहीं सरकारी कामकाज में पारदर्शिता लाने, बुनियादी सेवाओं के विस्तार एवं गुणवत्ता, किसानों से लेकर युवाओं और शहरों से लेकर गांवों तक आम नागरिक से जोड़ने के लिये भाजपा और केंद्र सरकार के एजेंडे को आगे किया है।

विधानसभा सत्र के तीसरे दिन गुरुवार शाम वित्त मंत्री प्रकाश पंत ने दूसरा बजट सदन में पेश किया। पिछले बजट की तुलना में नए वित्तीय वर्ष 2018-19 में 14.08 फीसद ज्यादा बजट प्रावधान किया गया है।

त्रिवेंद्र सरकार के दूसरे बजट में भी मोदी फेक्ट नजर आ रहा है। बजट में प्रधानमंत्री के मूल मंत्र रिफॉर्म, परफॉर्म और ट्रांसफॉर्म का उल्लेख करते हुए राज्य सरकार की ओर से अपने एक साल के कार्यकाल में सरकारी तंत्र की कार्यप्रणाली, सरकारी खरीद में पारदर्शिता, जन सेवाओं की गुणवत्ता, केंद्रपोषित योजनाओं का अधिक लाभ लेने की रणनीति को नए वित्तीय वर्ष में आगे बढ़ाने का संकल्प लिया गया है।

सड़कों-पुलों को दी वरियता

शहरों में निर्माणाधीन राष्ट्रीय राजमार्ग हों, रेलवे ओवरब्रिज, टनल या पुल, इन सभी को समय पर पूरा करने पर जोर है तो गांवों में अवस्थापना विकास को सरकार ने अपने एजेंडे की शीर्ष प्राथमिकताओं में शामिल किया है।

बजट के तहत राज्य में एक लाख युवाओं को रोजगार व कौशल विकास प्रशिक्षण दिया जायेगा। राज्य के प्रत्येक जिले में ट्रॉमा सेंटर, इंटेसिव केयर यूनिट और ब्लड बैंक, राज्य के बेस चिकित्सालयों के लिए पहली बार पूंजीगत मद में 20 करोड़ रूपये, किसानों की आमदनी दोगुनी करने की मुहिम के तहत माइक्रो प्लानिंग शुरू, कृषि व औद्यानिक समेत विभिन्न महकमों के कार्यों को संयोजित कर किसानों को राहत, आर्गेनिक हर्बल स्टेट बनाने को 1500 करोड़ की योजना को मंजूरी, 300 अतिरिक्त फार्म मशीनरी बैंकों की होगी स्थापना, राज्य में 9.12 लाख जोतों के लिए मृदा स्वास्थ्य कार्ड जारी करने का लक्ष्य, 2019 तक चयनित 1374 ग्राम पंचायतों को गरीबी मुक्त करेंगे घोषित, जन शिकायतों के लिए हेल्पलाइन नंबर 1905 शुरू, 14947 आंगनबाड़ी केंद्रों व 5120 मिनी आंगनबाड़ी केंद्रों में प्री स्कूल किट व मेडिसिन किट और कार्यकर्ताओं को ड्रेस, प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना में 75000 परिवारों की गर्भवती व धात्री महिलाओं को प्रति महिला 5000 रुपये, गंगा गाय महिला डेरी योजना में 2000 महिला दुग्ध उत्पादकों को मिलेगा लाभ, 2020 तक सड़क दुर्घटनाओं में 50 फीसद कमी लाने का लक्ष्य रखा गया है।

बजट में हरिद्वार, देहरादून व ऊधमसिंहनगर के परिवहन निगम डिपो की सभी बसों को दो साल में सीएनजी से करेंगे संचालित, 2020 तक केंद्र की उज्ज्वला योजना के दायरे से बाहर सभी परिवारों को निश्शुल्क गैस सुविधा, राज्य के सभी जिलों की रिसोर्स एटलस बनाने की प्रक्रिया होगी तेज, 2020 तक सभी सरकारी योजनाओं को डीबीटी से करेंगे संचालित, उद्यमिता विकास को 600 करोड़ की बाह्य सहायतित योजना को मंजूरी, आगे बढ़ेंगे कदम, डाट काली मंदिर के समीप डबल लेन टनल का निर्माण नए वित्तीय वर्ष में होगा पूर्ण, देश का सबसे लंबा 440 मीटर मोटर झूला पुल डोबरा-चांटी अगले वित्तीय वर्ष में होगा पूरा, 2020 तक सभी महिला मंगल दल व युवक मंगल दल लेंगे आपदा प्रबंधन प्रशिक्षण, 250 से अधिक आबादी के गांव सड़क से जुड़ेंगे, मेट्रो रेल निर्माण के तहत 86 करोड़ का प्रावधान, आशा कार्यकर्ताओं व एएनएम के लिए दुर्घटना बीमा योजना होगी शुरू, प्रत्येक जिले में बंधुआ पुनर्वास निधि की स्थापना, आम आदमी बीमा योजना में 11.37 करोड़ का प्रावधान, किसानों को सस्ता ऋण देने की दीनदयाल उपाध्याय सहकारिता किसान कल्याण योजना को 30 करोड़, नैनीताल झील के पुनर्जीवीकरण को पांच करोड़ की व्यवस्था की है।

बजट में राज्य की नदियों व झीलों के पुनर्जीवीकरण कार्यों के लिए धन, पर्वतीय क्षेत्रेां में उद्यमिता प्रोत्साहन व पलायन रोकने को ग्रोथ सेंटर स्थापना को 15 करोड़, एमएसएमई के तहत बाह्य सहायितत परियोजनाओं के लिए 30 करोड़, क्षेत्रीय संपर्क योजना के लिए 10 करोड़, ऋषिकेश में यात्रियों के रजिस्ट्रेशन ऑफिस कम ट्रांजिस्ट कैंप के निर्माण को सात करोड़, पर्यटन विभाग की होम स्टे योजना को 15 करोड़, अल्मोड़ा मेडिकल कॉलेज को जल्द शुरू करने का लक्ष्य रखा है।

योगी सरकार कर रही बीएसपी के वोट बैंक में सेंध लगाने की तैयारी

फूलपुर और गोरखपुर उपचुनाव में हार और सपा-बसपा के बीच बढ़ती दोस्ती को सियासी मात देने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने महादलित का मास्टर कार्ड खेला है। योगी ने विधानसभा के बजट सेशन में कहा कि जरूरत पड़ने पर महादलित और अति पिछड़ों को आरक्षण देने पर विचार किया जा सकता है। साफ है कि योगी आदित्यनाथ ने इस चाल से बीएसपी के वोट बैंक में सेंध लगाने की तैयारी कर दी है।

उपचुनाव में बीजेपी के बिगड़े समीकरण के मद्देनजर योगी आदित्यनाथ ने एक बार फिर गैर यादव ओबीसी और गैर जाटव दलित को साधने की कवायद की है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस कार्ड के जरिए सपा-बसपा की बढ़ती नजदीकियों के चलते एकजुट हो रहे दलित-पिछड़ों के वोटबैंक में सेंधमारी की तैयारी की है। गुरुवार को विधानसभा के बजट अभिभाषण में योगी आदित्यनाथ ने सूबे के अतिपिछड़ों और महादलितों को अलग से आरक्षण देने पर विचार करने की बात कही है।

गौरतलब है कि बिहार में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने लालू यादव के दलित वोटबैंक में इसी फॉर्मूले से सेंध लगाई थी और अपना वोट बैंक तैयार किया था। इसी का नतीजा है कि वे मौजूदा दौर में बिहार की सत्ता में काबिज हैं।

मोदी सरकार पूरे देश में एक ही राशन कार्ड करने करने जा रही

मोदी सरकार एक ऐसी व्यवस्था करने शुरू करने जा रही है, जिसके बूते आप देशभर में एक ही राशन कार्ड का इस्तेमाल कर सकेंगे। साथ ही इससे गलत तरीके से राशन कार्ड बनने पर रोक लग सकेगी।

मोदी सरकार चाहती है कि आधार कार्ड की तर्ज पर हर एक राशन कार्ड को एक विशिष्ट (यूनिक) पहचान नंबर दिया जाए। इससे फर्जी राशन कार्ड बनाना काफी मुश्किल हो जाएगा। इसके साथ ही सरकार ऐसी व्यवस्था करेगी, जिसमें एक ऑनलाइन एकीकृत (इंटेग्रेटेड) सिस्टम बनाया जाएगा। इस सिस्टम में राशन कार्ड का डेटा स्टोर होगा।

इसके बन जाने के बाद अगर देश में कहीं भी कोई अगर फर्जी राशन कार्ड बनवाने की कोशिश करेगा, तो इस सिस्टम के जरिये से पता चल जाएगा। इसके बाद अगर कोई नया राशन कार्ड बनवाने जाता है, तो वह ऐसा कर नहीं पाएगा।

अगले महीने से शुरू होगा काम

इस ऑनलाइन सिस्टम का एक बड़ा फायदा यह भी होगा कि कोई भी लाभार्थी देश के किसी हिस्से में और किसी भी राशन की दुकान पर सब्सिडी वाला अनाज ले सकेंगे। इस व्यवस्था पर अगले महीने से काम शुरू होगा।

इसका सीधा फायदा उन लोगों को मिलेगा, जो अपने राज्य से दूसरे राज्य में नौकरी की खातिर पलायन कर चुके हैं। मौजूदा समय में लाभार्थी अपने गांव या आसपास की राशन की दुकान से सब्सिडी वाला अनाज खरीदते हैं। मगर, एक बार यह ऑनलाइन नेटवर्क तैयार हो गया, तो दूसरे राज्यों में नौकरी के सिलसिले में गए लोगों को कहीं से भी राशन लेने की सुविधा मिल जाएगी. इससे काफी बड़े स्तर पर लोगों को फायदा मिल सकेगा।

मौजूदा समय में देश के सिर्फ चार राज्यों में ही यह सुविधा है, जहां कि एक राज्य के लाभार्थी दूसरे राज्य के राशन की दुकान से अनाज खरीद सकते हैं। यह राज्य हैं, राजस्थान, हरियाणा, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना।

क्या वाकई विश्व की सबसे बड़ी स्वास्थ्य योजना है आयुष्मान भारत

नेशनल हेल्थ प्रोटेक्शन स्कीम यानी आयुष्मान भारत को केंद्रीय कैबिनेट ने मंजूदी दे दी है। इस योजना को मोदी केयर भी कहा जाता है। विदित हो कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इस महत्वाकांक्षी योजना की घोषण इस साल के बजट में वित्त मंत्री अरूण जेटली ने की थी।

कैबिनेट ने नेशनल हेल्थ मिशन को जारी रखने पर भी सहमति दी है। यह योजना 31 मार्च 2020 तक चलेगी और केंद्र सरकार इसके लिए 85,217 करोड़ रुपये खर्च करेगी।
इस योजना के तहत हर परिवार को पांच लाख रुपये तक का हेल्थ इंश्योरेंस मिलेगा। इसमें परिवार के सदस्यों की संख्या पर कोई रोक नहीं है। इस योजना के तहत कौन से परिवार आएंगे, इसका फैसला आर्थिक आधार पर होगा। इस योजना के दायरे में आने वाले परिवारों को सरकारी और चुने हुए प्राइवेट अस्पतालों में इलाज की सुविधा मिलेगी। जो परिवार इस योजना के तहत आएंगे उन्हें इलाज की सुविधा देश भर में कहीं भी मिल सकेगी।

क्या है आयुष्मान भारत योजना

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने इस साल पेश किए गए बजट में दुनिया की सबसे बड़ी स्वास्थ्य योजना आयुष्मान भारत का ऐलान किया था। उन्होंने कहा था कि इसके तहत करीब 10 करोड़ परिवारों को सालाना पांच लाख रुपये का मेडिकल कवर भी दिया जाएगा। साथ ही इस योजना का लाभ देश की 40 फीसदी आबादी यानी 50 करोड़ लोगों को मिलेगा। इसमें निजी क्षेत्र की कंपनियां भी भाग ले सकेंगी।

जेटली ने कहा था कि भारत को स्वस्थ भारत बनाया जाएगा, इसके लिए देशभर में 1.5 लाख स्वास्थ्य केंद्र खोले जाएंगे। इन स्वास्थ्य केंद्रों के खोले जाने का फायदा आम लोगों को फौरी तौर पर होगा, क्योंकि उन्हें आम बीमारियों के इलाज के लिए दूर नहीं जाना होगा और पास के इन केंद्रों से इलाज करा सकेंगे। साथ ही आरोग्य से जुड़ी सुविधाएं भी मुहैया कराई जाएंगी।

शुरुआती इलाज में मिलेगा फायदा

आम लोगों को पांच लाख रुपये की बीमा का फायदा तब मिलेगा जब बीमारी बड़ी या फिर गंभीर होने की स्थिति में वह हॉस्पिटल में भर्ती होगा, लेकिन स्वास्थ्य केंद्रों का फायदा छोटे और बड़े हर तरह के बीमार लोगों को तुरंत मिलेगा।

नई योजना के तहत हर तीन संसदीय क्षेत्र या फिर एक राज्य में कम से कम एक मेडिकल कॉलेज खोले जाएंगे। फिलहाल देश में निजी और सरकारी दोनों मेडिकल कॉलेजों से हर साल 67 हजार एमबीबीएस और 31 हजार पोस्ट ग्रेजुएट डॉक्टर पास होकर निकलते हैं। ऐसे में कई नए मेडिकल कॉलेज खुलने से डॉक्टरों की कमी दूर होगी और लोगों के इलाज के लिए पर्याप्त डॉक्टर सुलभ हो सकेंगे।