हॉस्टल बंद से बाहरी राज्यों के स्टूडेंट की बड़ी मुश्किलें

बनारस हिंदू विश्वविद्यालय परिसर में बढ़ती छेड़खानी की घटनाओं के खिलाफ विवाद जारी है। सुरक्षा की मांग कर रही छात्राओं के विरोध प्रदर्शन से शुरू हुआ बवाल थमने का नाम ही नहीं ले रहा। वहीं, प्रदर्शन के चलते पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है। छात्र-छात्राओं को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। स्टूडेंट्स की मुसीबतें बढ़ती जा रही हैं। कुछ विभाग में सेमेस्टर परीक्षाएं कैंसिल हो गई हैं।
परीक्षाएं हुई कैंसिल, हॉस्टल बंद होने से दिक्कत
बीएचयू में हो रहे बवाल के कारण सेमेस्टर परीक्षाएं आगे के लिए टाल दी गई है। सोमवार से कुछ सब्जेक्ट की परीक्षाएं होनी थी लेकिन अवकाश कर दिए जाने के कारण परीक्षाएं लंबित कर दी गई। अब छात्र-छात्राओं को नई तारीख का इंतजार करना है। वहीं स्टूडेंट्स को रविवार को हॉस्टल छोड़ने का नोटिस दे दिया गया, जिसके चलते स्टूडेंट्स को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
वाराणसी के बाहर के स्टूडेंट सबसे ज्यादा परेशान
प्रदर्शन के कारण वाराणसी के बाहर के स्टूडेंट सबसे ज्यादा परेशान है। अचानक से हॉस्टल बंद कर देने का नोटिस जारी कर दिया गया। उन्हें हॉस्टल खाली करने के लिए मजबूर किया गया। ऐसे में आनन-फानन सारा इंतजाम करना मुश्किलें पैदा करने वाला है। वाराणसी के बाहर की छात्राएं अचानक हॉस्टल छोड़ने के नोटिस से ज्यादा परेशान हैं। एक तरफ तो सुरक्षा की चिंता वहीं दूसरी ओर पैसों के आभाव में घर जाना उनकी दिक्कतें बढ़ाने वाला है। हॉस्टल में बिजली-पानी सप्लाई काट दी गई है।
मध्य प्रदेश, ओडिशा, झारखंड, तमिलनाडु जैसे राज्यों के स्टूडेंट लौटे
हॉस्टल छोड़ने के नोटिस के बाद मध्य प्रदेश, ओडिशा, झारखंड, तमिलनाडु जैसे राज्यों के स्टूडेंट लौटना पड़ा। बता दें कि विश्वविद्यालय के छात्रावास में करीब 25 हजार स्टूडेंट रहते हैं।
ऐसे शुरू हुआ विरोध प्रदर्शन
विरोध प्रदर्शन की शुरुआत गुरूवार (21 सितंबर) से हुई। ऐसा तब हुआ आर्ट्स डिपार्टमेंट की एक छात्रा अपने हॉस्टल लौट रही थी। उसी वक्त मोटरसाइकिल सवार तीन लोगों ने कथित तौर पर उसका उत्पीड़न किया। छात्रा के मुताबिक, जब उसने उन लोगों का विरोध किया, तो तीन लोगों ने उसके साथ गाली-गलौज की और उसके बाद भाग गए। छात्राओं ने आरोप लगाया कि घटनास्थल से तकरीबन 100 मीटर की दूरी पर मौजूद सुरक्षा गार्डों ने उन लोगों को रोकने के लिए कुछ भी नहीं किया।
लगातार छेड़खानी का आरोप
बीएचयू की छात्राओं ने लगातार छेड़खानी का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि उन्हें कैंपस में लगातार ही छेड़खानी का सामना करना पड़ता है। विश्वविद्यालय प्रशासन असामाजिक तत्वों को रोकने के लिए कोई कार्रवाई नहीं कर रहा है।

हनीप्रीत बाबा से चाहती थी बच्चा

राम रहीम और हनीप्रीत को लेकर एक बेहद चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। डेरे के एक पूर्व सेवादार ने सनसनीखेज खुलासा किया है कि राम रहीम अपनी हनीप्रीत से एक बच्चा चाहता था, जिसे वो डेरे प्रमुख बनाए। पूर्व सेवादार गुरदास सिंह तूर का आरोप है कि ये आइडिया खुद हनीप्रीत का था। वो नहीं चाहती थी कि राम रहीम के बाद डेरा का उतना बड़ा साम्राज्य उसके बेटे जसमीत सिंह इंसां को मिले।
गुरदास सिंह तूर के मुताबिक, राम रहीम के बाद डेरे में हनीप्रीत का दबदबा नंबर दो जैसा बन चुका था, इसलिए वो चाहती थी कि राम रहीम और उसका कोई बच्चा हो तो वही डेरे का मुखिया बने। राम रहीम भी इसके लिए राजी था और चाहता था कि बच्चे के पिता का नाम दुनिया की नजरों में विश्वास गुप्ता ही रहे, लेकिन उनकी चाल भांप कर विश्वास ने पहले ही तलाक लेकर इनके अरमानों पर पानी फेर दिया।
वहीं, इस मामले का एक और चश्मदीद सामने आया है, जो उस रात का गवाह है, जब शादी के बाद पहली बार हनी बाबा की गुफा में गई थी। राम रहीम के ड्राइवर रहे खट्टा सिंह के बेटे गुरदास सिंह हनीप्रीत और बाबा के रिश्तों के एक अहम चश्मदीद हैं। राम रहीम ने ही हनीप्रीत की शादी करवाई। उसके फौरन बाद एक रात हनीप्रीत को अपनी गुफा में रहने के लिए बुला लिया। गुरदास उस रात गुफा के बाहर तैनात था। गुरदास सिंह को उस रोज पहली बार शक हुआ था कि राम रहीम हनीप्रीत के साथ कुछ गलत करने जा रहा है। अगली सुबह हनीप्रीत बाबा की गुफा से रोती हुई बाहर निकली थी। उन दिनों खुद हनीप्रीत के दादा डेरे के खजांची हुआ करते थे। हनीप्रीत सीधे दादा के पास गई। उसकी ये हालत देख कर उसके दादा ने डेरे में काफी हंगामा किया। राम रहीम के खिलाफ खुल कर बोलने लगे, लेकिन उन्हें चुप करा दिया गया।
इस घटना के फौरन बाद हनीप्रीत डेरा छोड़ कर अपने घर फतेहाबाद के लिए निकल गई, लेकिन बाबा के कुछ गुर्गों ने हनीप्रीत का पीछा किया और हथियारों के दम पर उसे रास्ते में ही एक ढाबे से उठा कर डेरे पर वापस ले आए। ऐसा कहा जाता है कि उस दिन हनीप्रीत ने कसम खाई थी कि वो बाबा को बर्बाद करके दम लेगी। गुरदास को अब लगता है कि राम रहीम की तबाही के पीछे शायद हनीप्रीत की वो कसम ही है।

400 साल तक चल सकता है मानव शरीर

योगगुरू बाबा रामदेव अपने बयानों को लेकर हमेशा सुर्खियों में रहते है। इस बार भी उन्होंने मानव जीवन को लेकर एक बड़ा बयान तक दे डाला है। बाबा के अनुसार मानव का जीवन कुछ इस तरह बना हुआ है कि वह 400 साल तक जीवित रह सकता है, परंतु वर्तमान में मनुष्य की जीवनशैली ठीक प्रकार से न होने के कारण वह रोगग्रस्त हो जाता है। जिस कारण वह अपना जीवन छोटा कर बैठता है और ऊपर से नशीली चीजों के सेवन आदि से भी वह अपनी आयु कम कर लेता है।
योगगुरु रामदेव ने मानव जीवन को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि मानव शरीर इस तरह बना है कि 400 साल तक चल सकता है, लेकिन खराब जीवनशैली के चलते यह बीमारी का शिकार हो जाता है और इसका समय से पहले ही अंत हो जाता है। उन्होंने लोगों से कहा कि वे स्वस्थ भोजन और व्यायाम अपनाकर खुद को बीमारियों और दवाओं से मुक्त रखें।
रामदेव ने 12वें नेशनल क्वालिटी कान्क्लेव में कहा, ‘मानव शरीर ऐसे बना है कि वह 400 वर्ष चले, लेकिन हम अधिक भोजन और बदतर जीवनशैली से अपने ही शरीर पर अत्याचार करते हैं। हम उच्च रक्तचाप, दिल की बीमारी समेत अन्य बीमारियों को निमंत्रण देते हैं। ये हमारी जिंदगी को कम कर देते हैं और चिकित्सकों व दवाओं पर निर्भर बना देता है।’
योगगुरु रामदेव ने यह भी बताया कि एक व्यक्ति स्वस्थ रहने के लिए किस तरह से अपनी दिनचर्या और खाने की आदतों पर नियंत्रण रख सकता है। उन्होंने दावा किया कि भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने ऐसा करके अपना वजन 38 किलोग्राम कम किया। उन्होंने कहा कि पौष्टिक आहार और योग करके 400 साल तक जीवित रहा जा सकता है।

हाईकोर्ट ने की याचिका खारिज, की उर्दू मोअल्लिम डिग्री अघोषित

उत्तराखंड में अब शिक्षक पद पर नियुक्ति के लिए उर्दू मोअल्लिम डिग्री अयोग्य घोषित हो गई है। राज्य में समकक्ष परीक्षा पास और उर्दू विषय में डिग्री के बिना प्राथमिक सहायक अध्यापक नहीं बन सकते। शिक्षक बनने के टीईटी जरूरी है।
आपको बता दें कि उधमसिंहनगर जिले के मो हफीज व अन्य ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर सहायक अध्यापक के पदों पर आवेदन निरस्त करने को चुनौती दी। इनका कहना था कि वह उर्दू मोअल्लिम पास हैं जो बीटीसी के समकक्ष मानी जाती है। उत्तर प्रदेश में भी यही नियम लागू है तो एकलपीठ ने याचिका स्वीकार कर इन अभ्यर्थियों को भर्ती प्रक्रिया में शामिल करने का आदेश पारित कर दिया। फैसले के खिलाफ सरकार ने विशेष अपील दायर की। सरकार की ओर से मुख्य स्थाई अधिवक्ता परेश त्रिपाठी ने बताया कि 2012 की निवमावली के अनुसार यह डिग्री पद के योग्य नहीं है। उत्तराखंड में उर्दू मुख्य विषय के साथ स्नातक, दो साल का बीटीसी व टीईटी के बाद ही शिक्षक बन सकते हैं। उर्दू मोअल्लिम एक साल का है और राज्य में समकक्ष डिग्री को नौकरी के लिए अयोग्य घोषित किया जा चुका है, ऐसे में आवेदक पात्र नही है।
मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति केएम जोसफ व न्यायमूर्ति आलोक सिंह की खंडपीठ ने सरकार की दलीलें स्वीकार कर अभ्यर्थियों की याचिका को खारिज कर दिया।

गौरक्षकों की गुंडागर्दी रोके राज्य सरकार

गौ रक्षकों की गुंडागर्दी को रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने सीधे तौर पर राज्यों को जिम्मेदार ठहराया है और कहा कि राज्य सरकारें इसे रोके। कोर्ट ने कहा कि कानून और व्यवस्था का मामला पूरी तरह राज्य का विषय है। कोर्ट को केंद्र सरकार से इस बारे में नीति बनाने के लिए नहीं कहना चाहिए।
शीर्ष कोर्ट ने कहा कि इस बारे में सीधे तौर पर राज्यों के लिए आदेश पारित किए जाएंगे। कोर्ट का कहना है कि हमारे आदेश प्राथमिकता के आधार पर होंगे। गौ रक्षकों की गुंडागर्दी के शिकार लोगों को मुआवजा देने के मामले को अलग से डील किया जाना चाहिए।
कोर्ट ने सभी राज्यों को टास्क फोर्स के गठन पर अपनी रिपोर्ट सबमिट करने को कहा है। मामले पर अगली सुनवाई 30 अक्टूबर को होगी।
कोर्ट मे दिया था नोडल ऑफिसर नियुक्त करने का आदेश
बता दें कि पिछली सुनवाई पर सुप्रीम कोर्ट ने देशभर में बढ़ते कथित गौरक्षकों के तांडव पर रोक लगाने के लिए हर जिले में सीनियर पुलिस ऑफिसर तैनात करने का आदेश दिया था। ताकि इस तरह की हिंसा की घटनाओं को रोकने और इसे अंजाम देने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए कदम उठाएं।
शीर्ष अदालत ने राज्यों को एक सप्ताह में अपना टास्क फोर्स बनाने के लिए कहा था, जिसमें वरिष्ठ पुलिसकर्मियों को नोडल अधिकारी के रूप में रखा जाएगा।

2022 तक देश के हर परिवार के पास अपनी छत

रोहिंग्या मसले पर गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि म्यांमार से आए ये रोहिंग्या रिफ्यूजी नहीं हैं। रोहिंग्या रिफ्यूजी के तौर पर भारत नहीं आए हैं। दिल्ली में एनएचआरसी के कार्यक्रम में गृहमंत्री बोले कि रोहिंग्या समुदाय के लोगों से भारत की सुरक्षा को खतरा है।
राजनाथ ने कहा कि यदि भारत रोहिंग्या को डिपोर्ट करता है तो उसपर लोगों को आपत्ति क्यों है। जबकि बर्मा उन्हें लेने के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि भारत ने यूएन रिफ्यूजी कन्वेंशन साइन नहीं किया है। राजनाथ ने कहा कि भारत के अंदर जो भी रिसोर्स है उस पर हर भारतीय का अधिकार है। दूसरों के मानवाधिकार की चिंता करने से पहले अपने मानवाधिकारों की बात करनी चाहिए।
गृहमंत्री ने कार्यक्रम में कहा कि मोदी सरकार ने गुड गवर्नेंस की नीति अपनाई है, हम उस पर डटे हुए हैं। उन्होंने कहा कि पहले कोयला खदानों को लेकर पारदर्शिता नहीं थी, हमारी सरकार इसको लेकर पूरी तरह पारदर्शी है।
राजनाथ ने कहा कि आज जो लोग ह्यूमन राईट की बात करते हैं, वो एनिमल राइट की बात करते हैं, भारत युगों-युगों से इन सभी राईट को बात करता है। गृहमंत्री ने कहा कि भारत में ह्यूमन राईट शांति और कल्याण से निकले है, वही वेस्टर्न ह्यूमन राईट संघर्ष से निकले हैं।
जीएसटी पर राजनाथ बोले कि जीएसटी से कुछ समय के लिए लोगों को परेशानी हो सकती है, पर आने वाले समय मे इसका फायदा सबको होगा। 2022 तक देश के हर परिवार के पास अपना एक मकान हो जो गुड़ गवर्नेंस का ही पार्ट है।

डेरे की जमीन में 600 कंकाल

डेरा सच्चा सौदा की चेयरपर्सन विपश्यना इंसा और वाइस प्रेसिडेंट डॉ. पीआर नैन से हरियाणा पुलिस की एसआईटी लगातार पूछताछ कर रही है। पुलिस जांच में पता लगा है कि डेरा सच्चा सौदा के सिरसा मुख्यालय की जमीन और खेतों में करीब 600 लोगों की हड्डियां और कंकाल मौजूद हैं। पीआर नैन ने भी पूछताछ के दौरान ये बात स्वीकार की है।
पीआर नैन ने पुलिस को दलील दी है कि डेरा अनुयायियों का ऐसा विश्वास है कि मौत के बाद यदि उनकी अस्थियां डेरे की जमीन में दबा दी जाएंगी, तो उन्हें मोक्ष मिलेगा। इसी वजह से डेरे की जमीन में करीब 600 लोगों की अस्थियां और कंकाल हैं। हालांकि, पुलिस इस एंगल पर भी जांच कर रही है कि लोगों को मारकर खेतों में उनकी लाशें दबा दी गई हैं।
डेरे के कुछ पूर्व सेवादारों ने आरोप लगाया था कि डेरा या राम रहीम के खिलाफ बोलने वाले लोगों की हत्या करके उनकी लाश खेतों में दफना दी जाती थीं। उसके उपर पेड़ लगा दिए जाते थे, ताकि किसी को इसके बारे में पता न चल सके। उनका कहना था कि राज फाश होने के डर से डेरे में इन जगहों पर खुदाई करने या पेड़ काटने तक की मनाही थी।
इससे पहले एसआईटी ने विपश्यना इंसा से करीब सवा तीन घंटे तक गहन पूछताछ की थी। डीएसपी कुलदीप बैनीवाल ने उससे 100 से ज्यादा सवाल किए, लेकिन वह उसके जवाब से संतुष्ट नहीं हुए हैं। इसलिए उससे दोबारा पूछताछ की तैयारी की जा रही है। वहीं डेरा के वाइस प्रेसिडेंट डॉ. पीआर नैन और विपश्यना के जवाब में विरोधाभास देखने को मिल रहा है।
पुलिस का कहना है कि यदि इन दोनों ने संतोषजनक जवाब नहीं दिया, तो इनको गिरफ्तार भी किया जा सकता है। दोनों ने पंचकूला में हुई हिंसा को लेकर अलग-अलग बातें कही है। पीआर नैन पर हिंसा कराने के लिए 5 करोड़ की फंडिंग का आरोप है। इन पैसों से पंचकूला डेरा प्रभारी चामकुमार सिंह ने गुंडों को हिंसा के लिए तैयार किया था। चामकुमार हिरासत में है।

रिहायशी इलाकों में घुसा टुटे बांध का पानी

बिहार में भागलपुर के कहलगांव में 40 साल पहले शुरू हुए बटेश्वर स्थान गंगा पंप नहर परियोजना के ऊपर एक बार फिर ग्रहण लग गया। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार बुधवार को इस परियोजना का उद्घाटन करने वाले थे, लेकिन उससे पहले ही मंगलवार की दोपहर को गंगा पंप नहर का बांध टूट गया, जिसकी वजह से कहलगांव में कई रिहायशी इलाकों में नहर का पानी घुस गया।
इस बांध के टूटने की वजह से इसके उद्घाटन को फिलहाल टाल दिया गया है। घटना की जानकारी मिलने के बाद भागलपुर के डीएम और एसएसपी तुरंत घटनास्थल पर पहुंचे। नहर का बांध टूटने की वजह से कहलगांव इलाके में अफरा-तफरी का माहौल है और लोग डरे-सहमे है। नहर का बांध टूटने की वजह से एनटीपीसी परियोजना जो कि कहलगांव में चल रही है, उसके रिहायशी इलाकों में पानी घुस गया है।
सूत्रों के मुताबिक, दो दिन पूर्व भी ट्रायल के लिए जब नहर में पानी छोड़ा गया था तो कई जगह पर बांध में लीकेज देखने को मिला। जिसकी वजह से परियोजना से जुड़े लोग और अभियंताओं में हाहाकार मच गया था। इस परियोजना में काम कर रहे अभियंताओं ने बांध में लीकेज की समस्या को ठीक करने की कोशिश की मगर ऐसा लगता है। इससे कोई सफलता हासिल नहीं हुई और इसकी वजह से मंगलवार को दोपहर को उद्घाटन से पहले ही नहर का यह बांध टूट गया।
गौरतलब है कि इस परियोजना से बिहार समय से झारखंड को भी इसका पूरा फायदा मिलने वाला था। मगर नहर का बांध टूट जाने की वजह से एक बार फिर से इस परियोजना की शुरुआत में देरी हो गई है। वहीं सीएम नीतीश कुमार ने भी अब अपना दौरा टाल दिया है।

यूपी में नहीं थम रहे रेल हादसे

देश में होते रेल हादसों के बाद केंद्र सरकार ने रेल मंत्री जरूर बदल दिया है लेकिन रेल पटरी पर आने का नाम नहीं ले रही है। ताजा मामले में मंगलवार को यूपी के सीतापुर में 54322 बालामऊ-बुढवल पैसेंजर ट्रेन पटरी से उतरने का मामला सामने आया है। यह ट्रेन बुढवल से चलकर बालामऊ जा रही थी। ट्रेन डिरेल की घटना शहर के बस स्टॉप के करीब पुलिस लाइन रेलवे क्रासिंग पर हुई।
यह ट्रेन सीतापुर कैंट स्टेशन से चलकर कुछ ही दूर पर पहुंची थी। तभी पुलिस लाइन रेलवे क्रासिंग पार करते समय ट्रेन के इंजन के दो पहिये पटरी से उतर गये। इंजन के पहिये पटरी से उतरते ही उसमें सवार यात्रियों में हड़कंप मच गया। हालांकि गनीमत यह रही कि हादसे में सभी यात्री सुरक्षित हैं। ट्रेन डिरेल होने की सूचना मिलते ही रेलवे के आला अधिकारियों ने मौके पर पहुंच कर जांच पड़ताल शुरू कर दी। ट्रेन डिरेल की घटना रेलवे क्रासिंग पर होने के चलते लखीमपुर-सीतापुर सड़क यातायात बाधित हो गया और रेलवे क्रासिंग पर लम्बा जाम लग गया। रेलवे और पुलिस के अधिकारियों ने मौके पर स्थिति को नियंत्रण में लिया और यातायात फिर से बहाल किया गया।
रेलवे अधिकारियों के मुलाबित ट्रैक की क्लिप और तकनीकी मरम्मत करने के बाद रूट पर फिर से संचालन शुरू कराया गया। सीतापुर में कचहरी हॉल्ट पर ट्रैक के परीक्षण के दौरान एक मालगाड़ी के भी 2 डिब्बे पटरी से उतर गए।
बीते दिनों खतौली में हुए बड़े रेल हादसे के बाद भी ट्रेनों का पटरियों से उतरना जारी है। मुजफ्फरनगर के खतौती में ट्रेन हादसे में 23 लोगों की जान चली गए थी। औरेया में भी कैफियत एक्सप्रेस भी कुछ दिन पहले डिरेल हो गई थी, जिसमें करीब 21 यात्री घायल हुए थे।

हनीप्रीत नेपाल में ही, पेट्रोल पंप में देखी गयी

रेप आरोपी राम रहीम की मुंह बोली बेटी हनीप्रीत के खिलाफ पंचकूला में केस दर्ज किया गया है। 25 अगस्त को पंचकूला में हुई हिंसा के दौरान दंगे भड़काने के आरोप में मामला दर्ज किया गया है। आईजी लॉ एंड आर्डर एएस चावला ने इसकी पुष्टि की है। वहीं, सूत्रों द्वारा पता चला है कि हनीप्रीत नेपाल में ही छिपी हुई है। उसे नेपाल के महेंद्र नगर और विराट नगर में देखा गया है।
हरियाणा पुलिस सूत्रों का कहना है कि हनीप्रीत नेपाल के महेंद्र नगर में छिपी हुई है। उसे तीन लोगों के साथ देखा गया है। वह वहां पिछले एक सप्ताह से रुकी हुई है। नेपाल नंबर की गाड़ी में विराट नगर स्थित एक पेट्रोल पर भी देखा गया है उसे अपना हुलिया बदल लिया है, ताकि उसकी पहचान न हो पाए। उसकी खोज के लिए पुलिस की 10 टीम बनाई गई हैं।
इसके साथ ही पुलिस यूपी और बिहार से जुड़े भारत-नेपाल बॉर्डर पर भी पूछताछ कर रही है। पुलिस नेपाल बॉर्डर के रिकॉर्ड रजिस्टर भी खंगाल रही है। बताया जा रहा है कि हनीप्रीत नेपाल की सीमा में एक मर्सीडीज कार से दाखिल हुई थी। पुलिस को उस गाड़ी की जानकारी किसी भी रजिस्टर से नहीं मिली है। शक है कि वह बॉर्डर पर गाड़ी छोड़कर नेपाल में दाखिल हुई है। हनीप्रीत ने पुलिस और जांच एजेंसियों से बचने के लिए गाड़ी को बॉर्डर पर छोड़ा होगा। पुलिस हनीप्रीत के नेपाल जाने में मदद करने वाले शख्स की भी तलाश कर रही है। हनीप्रीत को नेपाल के पोखरा में देखे जाने की सूचना मिली थी। जब तक पुलिस वहां पहुंचती वह फरार हो चुकी थी। पुलिस टीम पूछताछ के लिए काडमांडू स्थित इमिग्रेशन विभाग के ऑफिस भी गई थी।