ब्लू व्हेल का दिखा असर, नहीं ले जा सकेंगे स्कूलों में स्मार्ट फोन

आज के दौर में क्या बच्चे और क्या बड़े। सभी ऑनलाइन गेम से अछूते नहीं है और फिर ऐसे में आया ऑनलाइन गेम ब्लू व्हेल। बच्चों और किशोरों को खुदकुशी के लिए उकसाने वाले ऑनलाइन गेम ब्लू व्हेल के खतरे के मद्देनजर केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने स्कूलों में इंटरनेट और इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स के उपयोग के लिए नये दिशा-निर्देश जारी किए हैं, जिसमें बोर्ड की तरफ सेे स्कूलों को यह साफ तौर पर निर्देश दिया गया है कि स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों स्मार्टफोन, टैबलेट, आई पैड, लैपटॉप जैसे इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस बिना इजाजत स्कूल में नहीं ला सकेंगे। साथ ही उन्होंने कहा कि बच्चों द्वारा इस्तेमाल कर रहे कंप्यूटर्स को ऐसे जगह रखा जाए जहां से उस पर नजर रखा जा सके। इसके साथ ही स्कूल को यह भी निर्देश दिया गया है कि छात्रों को इंटरनेट के इस्तेमाल करने पर सुरक्षा और प्रभाव के बारे में बताया जाए। इंटरनेट के इस्तेमाल करने पर डिजिटल निगरानी की व्यवस्था हो। बच्चों को केवल पहले से चयन किए हुए वेबसाइट तक पहुंचने की अनुमति देना होगा। उन्होंने कहा कि ब्लू व्हेल ही नहीं, बल्कि सभी जानलेवा वेबसाइट्स पर भी रोक लगनी चाहिए। सीबीएसई के परिपत्र में कहा गया है कि यह सूचित किया जाता है कि दृश्य या श्रव्य सामग्री को संग्रहित, रिकॉर्ड या प्ले कर सकने में समक्ष स्मार्ट मोबाइल फोन, टैबलेट, आई पैड, लैपटॉप जैसे इलेक्ट्रॉनिक संचार उपकरणों को स्कूल या स्कूल बसों में बिना अनुमति के नहीं लाया जाए। स्कूल में प्राचार्य और स्कूल बसों में परिवहन प्रभारी इस बात का ध्यान रखें कि मोबाइल फोन नहीं लाया जा सके।

तो क्या एक साल पहले ही हो जाएंगे लोकसभा चुनाव

यूं तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक लंबे समय से राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनावों को लोकसभा चुनाव के साथ कराने की वकालत करते रहे हैं। ऐसी अटकलें हैं कि अपनी दलील को अमली जामा पहनाने के लिए पीएम नरेंद्र मोदी की केंद्र सरकार 2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव करीब एक साल पहले ही कराने पर विचार कर रही है। इसके पीछे का गणित कुछ यह है कि बीजेपी की कोशिश है, साढ़े तीन सालों के दौरान किए गए कामों को लेकर जनता के बीच जाएं और उनसे वोट मांगे। बजाय इसके कि वह 20 महीना और इंतजार करें और रोजगारी और किसानों की समस्या हल करने में अपनी असफलता को और उजागर होने दें। केंद्र सरकार को यह भी पता है कि विपक्ष मौजूदा समय में बेहद कमजोर है, लेकिन उसे यह भी साफ दिख रहा है कि विपक्षी दल कांग्रेस अभी भी देश के कुछ हिस्सों में प्रभावी है। दूसरा यह कि हाल ही में मध्य प्रदेश में संपन्न हुए स्थानीय निकाय चुनावों में कांग्रेस की स्थिति में जिस तरह सुधार हुआ है। साथ ही पश्चिम बंगाल के निकाय चुनाव में तृणमूल कांग्रेस ने जिस तरह भारी जीत दर्ज की है।वह निश्चित तौर पर बीजेपी के लिए चिंता का सबब होगा। कहीं न कहीं बीजेपी यह भी जानती है कि मध्यप्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़ और गुजरात में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों में उसे सत्ता-विरोधी माहौल का सामना करना होगा। ऐसे में अगर पूर्व के चुनावों के मुकाबले पार्टी की सीटों में कमी आती है। तो इसका सीधा असर 2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव पर भी पड़ेगा।
बीजेपी को यह भी याद रखना होगा कि जनता अक्सर सत्तारूढ़ दल के प्रदर्शन से असंतुष्ट होकर उनके खिलाफ मतदान करती रही है। भले विपक्ष कमजोर हो। मगर, इसी साल गोवा और मणिपुर में हुए विधानसभा चुनाव में ऐसा देखने को मिला। जहां कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी. यह अलग बात है कि विधायकों को अपने पाले में शामिल करने में सफल रही बीजेपी ने गोवा और मणिपुर में सरकार बनाई, लेकिन इस सच्चाई को नहीं झूठलाया जा सकता कि बीजेपी के प्रति असंतुष्टि की भावना है।

चीन की धमकियों से इस छोटे देश को नहीं पड़ा कोई फर्क

हर किसी देश पर अपनी दादागिरी दिखाने वाले चीन को इस बार एक छोटे से देश बोत्सवाना ने करारा जवाब दिया है। बोत्सवाना के राष्ट्रपति इयान खामा ने चीन को दो टूक कहा है कि उनका देश चीन का गुलाम नहीं है। विश्व में हीरों की खानों के लिए मशहूर बोत्सवाना चीन की बार-बार की धौंस से तंग आकर इयान खामा ने कहा कि हम चीन की धमकियों से डरते नहीं हैं और बोत्सवाना चीन की कॉलोनी नहीं है।
दरअसल चीन आध्यात्मिक गुरु दलाई लामा के प्रस्तावित दौरे के लेकर बोत्सवाना को राजनीतिक और कूटनीतिक परिणाम भुगतने की धमकी दे रहा था। दलाई लामा 17-19 अगस्त तक बोत्सवाना की राजधानी गेबोरोनी के दौरे पर जाने वाले थे। दलाई लामा का ये दौरा निजी बताया गया। इसके बावजूद चीन इस दौरे का विरोध कर रहा था।
हालांकि दलाई लामा का ये दौरा बाद में रद्द हो गया। जिसके बाद चीन ने कहा है कि उसके बोत्सवाना के साथ संबंध बेहतर तरीके से आगे बढ़ते रहेंगे। वह बोत्सवाना के साथ अपने संबंधों को अधिक महत्व देता है। दलाई लामा ने थकावट की वजह से बोत्सवाना का दौरा रद्द किया।
आंतरिक मामलों में चीन के दखल को देख इयान खामा बौखला़ गए। उन्होंने कहा कि उनका देश चीन का गुलाम नहीं है। बोत्सवाना गार्जियन को दिये इंटरव्यू में राष्ट्रपति इयान खामा ने कहा कि उन्होंने तरह-तरह की धमकियां दी। चीन अपना राजदूत वापस बुला लेगा, दोनों देश के बीच रिश्ते खराब हो जाएंगे। चीन दूसरे अफ्रीकी देशों की मदद से बोत्सवाना को अलग-थलग कर देगा। दलाई लामा पर खामा ने कहा कि हम उम्मीद करते हैं कि उनकी सेहत जल्द ठीक होगी और फिर उनका बोत्सवाना में स्वागत है, वे यहां आएं और घूमें।

कॉल ड्रॉप हुयी तो उपभोक्ता कंपनी पर लगा सकता है जुर्माना

भारत में हर व्यक्ति के पास दो मोबाइल फोन है। नेटवर्क की समस्या से जुझ रहे उपभोक्ता कॉल ड्रॉप होने और नेटवर्क परेशानी के चलते दो फोन रख रहा है। पिछले कुछ समय से कॉल ड्रॉप की ज्यादा शिकायतें दर्ज हो रही है। कंपनी ज्यादा मुनाफा कमाने के चक्कर में उपभोक्ताओं की कॉल ड्रॉप कर रही है। जिससे ग्राहकों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
लेकिन अब ट्राई ने अधिक कॉल ड्रॉप होने पर टेलीकॉम कंपनियों पर 10 लाख रुपए तक का जुर्माना लगाने का प्रावधान रखा है। कॉल ड्रॉप प्रतिशत को अब पूरे सर्किल के औसत के बजाय मोबाइल टावर के स्तर पर मापा जाएगा। ट्राई की ओर से मोबाइल कॉल की गुणवत्ता के बारे में निर्धारित नए नियमों में ये कड़ी शर्तें लादी गई हैं। ये नियम एक अक्टूबर से लागू होंगे।
टेलीकॉम रेग्युलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (ट्राई) के चेयरमैन आरएस शर्मा ने कहा, हमने 1-5 लाख रुपए तक के वित्तीय दंड का प्रावधान किया है। नेटवर्क के प्रदर्शन के आधार पर यह ग्रेडवार जुर्माने की व्यवस्था है।
ट्राई के प्रभारी सचिव एसके गुप्ता ने कहा, यदि कोई ऑपरेटर लगातार दूसरी तिमाही में कॉल ड्रॉप के बेंचमार्क को पूरा करने में विफल रहता है तो उस पर डेढ़ गुना और यदि तीसरी तिमाही में भी विफल रहता है तो तीन गुना जुर्माना लगेगा। लेकिन किसी भी स्थिति में जुर्माना 10 लाख रुपए से ज्यादा नहीं होगा। अब तक के नियमों में किसी सर्किल में निर्धारित से ज्यादा कॉल ड्रॉप होने पर प्रति तिमाही एक लाख रुपए के जुर्माने का प्रावधान है।

पीओके में युवाओं ने मांगी आजादी, कहा हिंदुस्तान जिंदाबाद

पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) में आजादी को लेकर पिछले काफी समय से मांग की जा रही है। पाकिस्तान से आजादी के लिए जनदाली में जम्मू-कश्मीर राष्ट्रीय छात्र संघ द्वारा विशाल रैली आयोजित की गई। जिसमें पाक के खिलाफ आजादी के नारे लगाए गए। वहां के स्थानीय नेता लीकांत खान ने कहा कि पाकिस्तान इस क्षेत्र में अशांति फैलाने के लिये अपने आतंकवादियों को यहां भेजता है। कई सालों से पीओके में लगातार आजादी की मांग उठ रही है।
आलम यह है कि इस साल मई के महीने में भी पीओके के हजीरा स्थित डिग्री कॉलेज में छात्रों ने पाकिस्तान के खिलाफ आवाज बुलंद की थी। जिसमें छात्रों ने पाक के खिलाफ जमकर नारेबाजी कर प्रदर्शन किया था। डिग्री कॉलेज के छात्रों का कहना था कि आजादी हमारा हक है और हम इसको हासिल करके रहेंगे। सिंध प्रांत में भी पाकिस्तान के खिलाफ स्थानीय लोग अपनी आवाज बुलंद करते रहे हैं. वहीं पाकिस्तान इन आवाजों को दबाने की भरसक कोशिश करता रहा है। पाकिस्तान आर्मी स्थानीय लोगों पर जुल्म ढाती रही है। हाल के दिनों चीन-पाक आर्थिक गलियारे को लेकर भी लोगों में आक्रोश का माहौल है।

अवैध कब्जा ही असली मुद्दा
दूसरी ओर भारत हमेशा से यह कहता रहा है कि पीओके और गिलगित-बाल्टिस्तान पर पाकिस्तान का कब्जा अवैध है और उसे खाली करना होगा। भारत का कहना है कि अगर भारत और पाकिस्तान के बीच जम्मू और कश्मीर को लेकर कोई विवाद है तो वह सिर्फ पाकिस्तान की तरफ से पीओके और गिलगित-बाल्टिस्तान पर अवैध कब्जा है।

मीरवाइज ने फिर उगला घाटी में जहर, दस आंतकी पैदा होने का किया दावा!

हुर्रियत कांफ्रैंस (एम) चेयरमैन मीरवाइज उमर फारुख के बयान ने एकबार फिर से घाटी में हलचल पैदा कर दी है। मीरवाइज ने कहा कि दिल्ली में बैठी सरकार को लगता है कि हथियार के बल पर जम्मू-कश्मीर में शांति स्थापित की जा सकती है लेकिन मैं उनको कहना चाहूंगा किए अगर आप एक आतंकी को मारोगे तो दस आतंकी पैदा होंगे।
मीरवाइज उमर फारुख को पिछले 57 दिनों से अपने घर में नजरबंद किया गया था। नजरबंद से छूटते ही मीरवाइज उमर फारुख जामिया मस्जिद पहुंचे और भीड़ को संबोधित किया। मीरवाइज ने कहा कि पिछले 70 साल से कश्मीर की यही परंपरा रही है। कश्मीर में लोग पैदा होते हैं और उन्हें मालूम होता है कि यह विवादित क्षेत्र है। इसी सोच के साथ वे युवा होते हैं और एक दिन मारे जाते हैं। यह लड़ाई अनवरत जारी है।
मीरवाइज ने कहाकि कश्मीर के युवा और छात्र आए दिन स्कूल और कॉलेज में प्रदर्शन करते हैं जिसकी वजह से बार-बार घाटी बंद का ऐलान होता है। इससे साफ पता चलता है कि कश्मीर के लोग क्या चाहते हैं। मीडिया पर निशाना साधते हुए मीरवाइज ने कहा कि मीडिया में कश्मीर और कश्मीर के लोगों को लेकर गलत प्रचार किया जा रहा है। ऐसा करने से सरकार को कुछ हासिल होने वाला नहीं है।

ऋषिकेश के अत्रि चेतन की पेंटिग देखने को उमड़ रहा अमृतसर

‘अननोन्स‘ कला ग्रुप के तत्तवावधान में अमृतसर के इण्डियन एकेडमी ऑफ फाईन आर्ट्स के कला दीर्घा में ‘अननोन्स-2‘ के नाम से पाँच दिवसीय कला प्रदर्षनी का शुभारम्भ किया गया। प्रदर्षनी का उद्घाटन राजिद्र मोहन सिंह चिन्ना (अध्यक्ष, इण्डियन एकेडमी ऑफ फाईन आर्ट्स, अमृतसर, पंजाब) ने किया।
कला प्रदर्षनी में ‘अननोन्स‘ कला ग्रुप के 13 सदस्यों ने कला के विभिन्न विधाओं पेन्टिंग, प्रिंट मेकिंग, मूर्तिकला, इनस्टालेषन तथा फोटोग्राफी के रूप में अपनी कला का प्रदर्षन कर दर्षकों की प्रषंसा बटोरी। ये सभी 13 कलाकार भारत के उत्तराखण्ड, उत्तर प्रदेष, दिल्ली, उड़ीसा, राजस्थान, पष्चिम बंगाल राज्य से सम्बन्ध रखते हैं तथा इनकी कला की उच्च प्रोफेषनल षिक्षा हिन्दुस्तान के महत्वपूर्ण कला महाविद्यालयों से हुई है। कला प्रदर्शनी में प्रतिभाग कर रहे ऋषिकेष (उत्तराखण्ड) के कलाकार अत्रि चेतन ने माध्यमिक तक का षिक्षा ग्रहण करने के बाद उड़ीसा के बालासोर कॉलेज ऑफ आर्ट एण्ड क्राफ्ट से कला की उच्च षिक्षा की शुरुआत की। बालासोर में रहते हुए ‘अननोन‘ कला ग्रुप की नींव रखते हुए प्रथम बार उड़ीसा की राजधानी भूनेष्वर में कला प्रदर्षनी का एक बृहद आयोजन किया। वर्तमान समय में अत्रि पष्चिम बंगाल के शान्ति निकेतन में ग्रैफिक आर्ट में एमएफए की षिक्षा ग्रहण कर रहे हैं उनके द्वारा आयोजित यह दूसरी प्रदर्षनी है जो ‘अननोन्स-2‘ के नाम से पंजाब में आयोजित की गई है।
प्रदर्षनी देखने के बाद चिन्ना ने प्रसन्नता ज़ाहिर करते हुए कहा कि ये सारे 13 कलाकार, कला के विद्यार्थी हैं परन्तु काम और आयोजन दोनों ही किसी प्रोफेषनल की भाँति किया गया है। आने वाले दिनों में इन यंग आर्टिस्ट की कला अपना एक अलग मुकाम बनाएंगी। उन्होंने अत्रि चेतन के प्रयासों की प्रशंसा भी की।

अत्रि चेतन

आपकों बता दें कि अत्रि मूलरूप में प्रिट मेकिंग के चित्रकार हैं परन्तु वाटर कलर विधा तथा फोटोग्राफी में भी उनको महारथ हासिल हैं। इनके वाटर कलर तथा ग्रैफिक चित्र दिल्ली, पंजाब, तमिलनाडु, उड़ीसा, पष्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेष, उत्तराखण्ड, हरियाणा तथा कर्नाटक के अतिरिक्त विदेषों में रूस, इटली, हंगरी, कनाडा, हांगकांग में प्रदर्षित हो चुके हैं। पहली बार अत्रि ने अमृतसर में अपनी फोटोग्राफी को प्रदर्षित किया है। ये बताना अति आवष्यक है कि इस चित्रकार ने पुरानी साईकिलों को ही अपना मूल विषय भी चुना। यदा-कदा सामाजिक जीवन को भी अपनी तूलिका तथा प्रिट मेकिंग के द्वारा जीवंत किया है। अत्रि चेतन ने बताया कि प्रदर्षनी दर्षकों के अवलोकन के लिए 24 अगस्त 2017 तक चलेगी।

खुशखबरीः कैलाश मानसरोवर यात्रा एक बार फिर से शुरु

कैलाश मानसरोवर यात्रियों के लिए खुशखबरी है। बादल फटने और रास्ते अवरुद्ध होने के चलते कैलाश मानसरोवर यात्रियों को अपनी यात्रा पूरी न होने की शंका थी। तीन दिनों से रुकी कैलाश मानसरोवर यात्रा एक बार फिर से शुरु हो गई। आज 13वें दल के सदस्यों को गुंजी से धारचूला और पिथौरागढ़ नैनी-सैनी हवाई पट्टी मे सेना के हैलीकाप्टर द्वारा पहुंचाया गया।
जिलाधिकारी पिथौरागढ़ का कहना है कि 13वां दल जो यात्रा पूरी करके लौट गया था उसके यात्रियों को आज गुंजी से धारचूला और 15 यात्रियों को पिथौरागढ़ नैनी-सैनी पहुचाया गया है। 14वां और 15वां दल इस समय कैलाश की परिक्रमा कर रहा है। वही 16वां दल सिर्खा से वापस धारचूला पहुंचाया गया है। जिसे हैलीकाप्टर द्वारा गुंजी ले जाया जायेगा। वही 17वां जत्था आज दिल्ली से यात्रा के लिसे रवाना हुआ है। इन यात्रा दलों को हैलीकाप्टर से पहुंचाया जायेगा।
इस बीच प्रशासन ध्वस्त हुये रास्तो को ठीक करने मे लगा हुआ है। प्रशासन का दावा है कि जल्द ही पूरी व्यास घाटी के टूटे रास्ते ठीक हो जायेगे।

मानकों के विपरीत शिक्षण संस्थाओं के दस्तावेजों पर उत्तराखंड में शिक्षक कर रहे नौकरी!

उत्तराखंड के चर्चित शिक्षक भर्ती घोटाले की जांच कर रही एसआइटी ने पौड़ी जिले के तकरीबन एक हजार शिक्षकों के मूल शैक्षणिक प्रमाण पत्रों को कब्जे में ले लिया है। एसआइटी अब इन प्रमाण पत्रों की सत्यता की जांच करने के साथ फर्जी प्रमाण पत्रों पर नौकरी पाने वाले अन्य शिक्षकों पर भी शिकंजा कसेगी।
उत्तराखंड में शिक्षक भर्ती में हुए घोटाले की जांच में जुटी एसआइटी फर्जीवाड़ा करने वालों के खिलाफ दस्तावेजी साक्ष्य जुटाने में लगी है। इसी क्रम में एसआइटी ने पौड़ी के एक हजार शिक्षकों के दस्तावेज कब्जे में लेकर पड़ताल शुरू कर दी है। दरअसल, प्रदेश के शासकीय और अशासकीय स्कूलों में बड़ी संख्या में ऐसे अभ्यर्थी शिक्षक की नौकरी पाने में कामयाब रहे, जिनके शैक्षिक प्रमाण पत्र या तो पूरी तरह फर्जी थे या सूबे में उनकी मान्यता ही नहीं थी। मामला प्रकाश में आने पर विभागीय स्तर से हुई जांच के पहले चरण में ऐसे 41 शिक्षक पकड़े गए थे। तभी से यह आशंका जताई जा रही थी कि फर्जी या अमान्य प्रमाण पत्रों पर नौकरी पाने वाले शिक्षकों की संख्या पांच हजार के करीब हो सकती है। एसआइटी ऐसे ही शिक्षकों के प्रमाण पत्रों को कब्जे में लेने की कार्रवाई कर रही है। सूत्रों की मानें तो अकेले पौड़ी जिले में ही एक हजार शिक्षकों के शैक्षिक प्रमाण पत्रों को कब्जे में ले लिया गया है। एसआइटी अब इन प्रमाण पत्रों की वास्तविकता व सत्यता की बारीकी से जांच करेगी।

गैर राज्यों के हैं अधिकांश प्रमाण पत्र
अब तक की जांच में सामने आया है कि आरोपी शिक्षकों ने उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, राजस्थान और बिहार आदि राज्यों से बनवाए गए फर्जी प्रमाण पत्रों पर नौकरी हासिल कर ली थी। इनमें कई ऐसे भी हैं जो मानकों के विपरीत भारतीय शिक्षा परिषद लखनऊ, ¨हदी साहित्य सम्मेलन, महिला ग्राम विद्यापीठ प्रयाग (उप्र) जैसे शिक्षण संस्थानों की डिग्री पर नौकरी कर रहे थे।

पौड़ी जिले से कब्जे में लिए गए प्रमाण पत्रों का सत्यापन कराया जाएगा। सत्यापन में संबंधित बोर्ड या संस्थान प्राप्त होने वाली रिपोर्ट के आधार पर आगे कदम उठाए जाएंगे।
श्वेता चौबे, एएसपी सीबीसीआईडी/एसआईटी, प्रभारी

भ्रष्टाचार आयोग का गठन लोकायुक्त नही बनाये जाने की तरफ कर रहा इशाराः हरीश रावत

देहरादून पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने भ्रष्टाचार के मुद्दे पर सीएम त्रिवेंद्र रावत पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि यदि भ्रष्टाचार को समाप्त करने के लिए वह प्रभावी कदम उठाते हैं तो वह सरकार के हर कदम का स्वागत करेंगे।
एक बयान में पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत के भ्रष्टाचार आयोग की घोषणा पर कड़ी टिप्पणी व्यक्त की। उन्होंने कहा कि लगता है कि मुख्यमंत्री की लोकायुक्त व कड़ा कानून लाने में रुची नही है। फिर भी यदि भ्रष्टाचार को जड़मूल से समाप्त करने के लिए उच्च न्यायालय के कार्यरत न्यायधीश के अध्यक्षता में कोई आयोग सहित प्रभावी कदम उठाते है तो मैं उसका स्वागत करता हूं। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य निर्माण से आज तक के सभी भ्रष्टाचार संबंधित आरोपों के सभी मामले व भविष्य में भी भ्रष्टाचार रुक सके इसका प्रभावी प्राविधान हो तो वह राज्य सरकार का इस मुद्दे पर समर्थन करेंगे। उन्होने कहा कि लगता है कि लोकायुक्त बनाए जाने पर राज्य सरकार गंभीर नही है। उन्होने राज्य के उद्योगो के लिए दिए गए जीएसटी पैकेज को देर से उठाया गया कदम बताया। कहा कि उनकी सरकार ने जीएसटी कांउसिल में लगातार राज्य को दस वर्ष के लिए इस छूट की पैरवी की थी। यह उस समय की गई हमारी पहल का भी नतीजा है।