सीएम ने समाज कल्याण के लाभार्थियों के खातों में 140 करोड़ 26 लाख 97 हजार रुपये की राशि ऑनलाइन की जारी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने समाज कल्याण विभाग के अंतर्गत चलाई जा रही विभिन्न पेंशन योजनाओं के लाभार्थियों के बैंक खातों में डी.बी.टी. प्रणाली के माध्यम से दिसंबर माह की पेंशन किश्त का भुगतान किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने 09 लाख 43 हजार 964 लाभार्थियों के खातों में कुल 140 करोड़ 26 लाख 97 हजार रुपये की राशि ऑनलाइन जारी की।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार समाज के कमजोर वर्गों, वृद्धजनों, विधवाओं, दिव्यांगजनों एवं निराश्रितों के सामाजिक एवं आर्थिक सशक्तीकरण के लिए निरंतर प्रयासरत है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में पारदर्शी शासन व्यवस्था को मजबूत करने के लिए सभी प्रकार के भुगतान अब डी.बी.टी. प्रणाली से सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में किए जा रहे हैं, जिससे समयबद्धता और पारदर्शिता सुनिश्चित हुई है।

मुख्यमंत्री ने समाज कल्याण विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिये कि वृद्धावस्था पेंशन के लिए 60 साल की आयु होते ही राज्य के जो लोग पात्रता की श्रेणी में आ रहे हों, उनका 59 साल की आयु से ही चिन्हीकरण कर लिया जाय, ताकि पात्रता की श्रेणी में आने पर उन्हें शीघ्र पेंशन का भुगतान किया जा उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य है कि समाज के प्रत्येक पात्र लाभार्थी को किसी भी प्रकार की कठिनाई के बिना योजनाओं का लाभ मिले। उन्होंने निर्देश दिए कि पेंशन योजनाओं के अंतर्गत कोई भी पात्र व्यक्ति वंचित न रहे, इसके लिए नियमित सत्यापन एवं निगरानी की प्रक्रिया को और अधिक सुदृढ़ किया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार जनहित की योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए पूर्ण रूप से प्रतिबद्ध है।

इस असवर पर निदेशक समाज कल्याण डॉ. संदीप तिवारी, अपर सचिव प्रकाश चन्द्र एवं समाज कल्याण विभाग के अधिकारी उपस्थित थे।

परिवार रजिस्टर में अनियमितता पर धामी सरकार ने दिए प्रदेशव्यापी जांच के निर्देश

देहरादून। उत्तराखंड में परिवार रजिस्टर में सामने आ रही गंभीर अनियमितताओं को लेकर माननीय मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में आज एक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई। बैठक में राज्य स्तर पर व्यापक, निष्पक्ष एवं समयबद्ध जांच तथा दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई के स्पष्ट निर्देश दिए गए।

मुख्यमंत्री ने निर्देशित किया कि प्रदेश के सभी जिलों में उपलब्ध परिवार/कुटुंब रजिस्टरों की प्रतियां तत्काल संबंधित जिलाधिकारी (DM) के पास सुरक्षित रखी जाएं, जिससे अभिलेखों में किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ की संभावना समाप्त हो। साथ ही, परिवार रजिस्टरों की गहन जांच CDO/ADM स्तर पर कराए जाने का निर्णय लिया गया।
बैठक में यह भी तय किया गया कि जांच का दायरा वर्ष 2003 से अब तक रखा जाएगा, ताकि पूर्व वर्षों में हुई संभावित अनियमितताओं की भी पहचान हो सके। फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नाम दर्ज कराने वालों के विरुद्ध नियमानुसार विभागीय व कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

मुख्यमंत्री ने अवगत कराया कि परिवार रजिस्टर का पंजीकरण एवं प्रतिलिपि सेवाएं पंचायत राज (कुटुंब रजिस्टरों का अनुरक्षण) नियमावली, 1970 के अंतर्गत संचालित होती हैं। नियमों के अनुसार ग्रामीण क्षेत्रों में निवास करने वाले प्रत्येक परिवार का नाम परिवार/कुटुंब रजिस्टर में दर्ज होना अनिवार्य है। वर्तमान प्रविष्टियों के शुद्धिकरण तथा नए नामों को जोड़ने की प्रक्रिया का प्रावधान भी नियमावली में निहित है, जिसे अब और अधिक सख़्त व पारदर्शी बनाए जाने की तैयारी है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि परिवार रजिस्टर में नाम दर्ज करने का अधिकार सहायक विकास अधिकारी (पंचायत) को प्राप्त है, जबकि अपील का अधिकार उप जिलाधिकारी (SDM) के पास निहित है। वर्तमान में परिवार रजिस्टर से संबंधित सेवाएं अपणी सरकार पोर्टल के माध्यम से भी उपलब्ध कराई जा रही हैं।
बैठक में यह तथ्य भी सामने आया कि बीते वर्षों में राज्य की सीमा से लगे मैदानी जनपदों के ग्रामीण क्षेत्रों में अनधिकृत बसावट के आधार पर परिवार रजिस्टर में नाम दर्ज होने से जनसांख्यिकीय संतुलन प्रभावित होने की आशंका रही है। इसी पृष्ठभूमि में सरकार द्वारा परिवार रजिस्टर से संबंधित नियमावली में आवश्यक संशोधन की आवश्यकता महसूस की गई है।
पंचायती राज विभाग द्वारा प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2025 में परिवार रजिस्टर से जुड़ी सेवाओं हेतु प्रदेशभर में बड़ी संख्या में आवेदन प्राप्त हुए। 01 अप्रैल से 31 दिसंबर 2025 के बीच नए परिवार जोड़ने के लिए 2,66,294 आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें से 2,60,337 आवेदन स्वीकृत तथा 5,429 आवेदन नियमों के उल्लंघन एवं अपूर्ण दस्तावेजों के कारण निरस्त किए गए। विशेषज्ञों के अनुसार निरस्त आवेदनों की संख्या फर्जी प्रविष्टियों की आशंका की ओर संकेत करती है, जिसके दृष्टिगत प्रक्रिया को और अधिक सुदृढ़ करने का निर्णय लिया गया है।

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि सीमावर्ती जिलों सहित प्रदेश के सभी जिलों में समान रूप से जांच की जाए, ताकि किसी भी क्षेत्र में भेदभाव या ढिलाई न हो। भविष्य में परिवार रजिस्टर में नाम दर्ज किए जाने की प्रक्रिया को स्पष्ट नीति के अंतर्गत नियंत्रित कर कैबिनेट में प्रस्तुत किए जाने का भी निर्णय लिया गया।

मुख्यमंत्री ने दो टूक कहा कि सरकारी अभिलेखों से खिलवाड़ किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

इस उच्चस्तरीय बैठक में सचिव गृह शैलेश बगौली, डीजीपी दीपम सेठ, डीजीपी इंटेलिजेंस अभिनव कुमार, विशेष सचिव पंचायती राज डॉ. पराग धकाते तथा निदेशक पंचायती राज निधि यादव उपस्थित रहे।

अंकिता मामले में पुख्ता साक्ष्य प्रस्तुत करने वालों को सरकार देगी सुरक्षा, सभी जांच के लिए तैयार : सुबोध उनियाल

कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल ने अंकिता प्रकरण विवाद पर स्पष्ट किया कि आरोप लगाने वाले या अन्य व्यक्ति, विश्वसनीय साक्ष्य प्रस्तुत करें, सरकार किसी भी जांच के लिए तैयार। उन्होंने कहा, सुप्रीम कोर्ट, एसआईटी जांच को सही मानते हुए, सीबीआई जांच से इनकार कर चुकी है। लिहाजा सिर्फ अपुष्ट आरोप के आधार पर कार्रवाई हुई तो सजायाफ्ता दोषियों को कानूनी फायदा पहुंच सकता है।

पार्टी मुख्यालय में पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए, उनियाल ने कहा, बेटी के साथ हुई इस घटना से समूची देवभूमि दुखी थी। मामले को संवेदनशीलता और गंभीरता से लेते हुए, धामी सरकार ने तत्काल महिला डीआईजी के नेतृत्व में एसआईटी गठित की और आरोपियों को गिरफ्तार किया। सभी फोरेंसिक और व्यवहारिक सबूतों को एकत्र किया गया और न्यायालय में मजबूती से पैरवी की गई। पीड़ित परिवार की सहमति से की गई इस तरह कार्रवाई की गई कि आरोपियों को जमानत तक नहीं लेने दी गई। इस सबके आधार पर दोषियों को उम्रकैद की सजा दी गई है।

जहां तक सवाल है, सीबीआई जांच का तो, सरकार किसी भी जांच से गुरेज नहीं है, लेकिन विश्वसनीय साक्ष्य सामने तो आएं। उन्होंने आग्रह किया कि सोशल मीडिया में आरोप लगाने वाले व्यक्तियों से भी में विशेष अनुरोध है कि वे सामने आकर, साक्ष्य प्रस्तुत करें। सरकार उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी लेगी, और उनके ही नहीं किसी अन्य पक्ष के पास भी कोई पुख्ता साक्ष्य हैं तो जांच एजेंसी को सौंपे। यदि उनमें थोड़ी सी भी सच्चाई पाई गई तो उसमें बड़ी से बड़ी जांच के लिए सरकार तैयार है।

पत्रकारों द्वारा पूछे गए एक सवाल का जवाब देते हुए उन्होंने कहा, प्रकरण की विवेचना के बाद जब एक पक्ष सीबीआई जांच की संस्तुति के लिए न्यायालय पहुंचा था। तो ट्रायल कोर्ट, उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय ने भी एसआईटी द्वारा की गई कार्यवाही को सही और सक्षम मानते हुए किसी अन्य जांच से इनकार कर दिया था। तीनो न्यायालयो ने माना कि किसी भी वीआईपी को बचाने का कोई प्रयास नही किया गया है और विवेचना में कोई वीआईपी होना पाया भी नहीं गया। उपरोक्त केस की पैरवी ट्रायल कोर्ट में मृतिका के परिजनों की इच्छानुसार नियुक्त विशेष अभियोजन अधिकारी द्वारा की गई थी व उनके द्वारा वीआईपी व विवेचना के सम्बन्ध में कोई आपत्ति नही की गई थी।

इसी तरह क्राइम सीन पर बुल्डोजर चलाने के आरोप पर स्पष्ट किया कि कोर्ट ने भी माना, मृतका के कमरे की तोड़ फोड़ से पूर्व ही एफएसएल टीम द्वारा सभी साक्ष्य इकट्ठा कर लिये थे। लिहाजा कहीं कहीं एक खास नजरिया स्थापित करने की दृष्टि से भी यह दुष्प्रचारित किया जा रहा है। वहीं विवेचना के दौरान कई बार आम जन से अपील की गई थी कि किसी के पास इस प्रकरण के सम्बन्ध में साक्ष्य हों तो उपलब्ध करायें और किसी के भी द्वारा कोई साक्ष्य नहीं दिये गये थे।

उन्होंने वर्तमान में सीबीआई जांच की मांग को लेकर उन्होंने पुनः स्पष्ट किया कि पुख्ता सबूत सामने आने पर सरकार किसी भी जांच के लिए तैयार है। लेकिन उससे पहले इस तरह का निर्णय, सजायाफ्ताओं को फायदा पहुंचा सकता है। क्योंकि आरोप लगाने वाले सोशल मीडिया ऑडियो वीडियो में दुखद मौत के कारण को लेकर दोहरी बयानबाजी की गई है, उसकी न्यायालय में प्रस्तुति, अभियुक्तों की जमानत का रास्ता भी खोल सकती है। लिहाजा कहीं न कहीं अन्य पक्षों द्वारा जा रही इस तरह की कोशिशें दोषियों को लाभ पहुंचाने की साजिश का हिस्सा भी हो सकता है।वर्तमान में वायरल रिकार्डिंग में कोई समय और तिथि स्पष्ट नहीं है।
इसमें व्यक्ति द्वारा अंकिता की सुसाइड की बात कहना अभियुक्त को फायदा पंहुचाने की नीयत से कहा गया, ऐसा प्रतीत होता है। क्योकि अपराधी पूर्व में हत्या के आरोप मे सजा पा चुके हैं। मामला अभी अपील पर है, इस प्रकार के तथ्य लाना अभियुक्तों को फायदा पंहुचा सकता है।

जो फिलहाल रिकार्डिंग सामने आई है उसके किसी सुनियोजित तरीके से किए जाने की आशंका है और इसको जानबूझकर लीक करने की योजना मालूम पड़ती है। रिकार्डिंग में बिना किसी साक्ष्य के एक-दो लोगों का नाम बार-बार लिया जाना उन्हे व्यक्तिगत क्षति पंहुचाने का आशय प्रतीत होता है।

लिहाजा सरकार का मानना है कि यह बहुत ही संवेदनशील मामला है। इसलिए जब तक आरोप लगाने वाले व्यक्ति, कोई विश्वसनीय सबूत प्रस्तुत नहीं करते हैं तब तक जल्दबाजी में कुछ भी निर्णय करना, पूरी कानूनी प्रक्रिया को कमजोर कर सकता है।

पत्रकार वार्ता में प्रदेश महामंत्री कुंदन परिहार, प्रदेश मीडिया प्रभारी मनवीर सिंह चौहान, सह मीडिया प्रभारी राजेंद्र नेगी, प्रदेश प्रवक्ता कमलेश रमन भी मौजूद रही।

प्रशासन को ग्रामीणों के द्वार पर भेजकर जन-समस्याओं के निस्तारण एवं सरकारी योजनाओं से लाभान्वित करने की मुहिम की मौके पर जाकर की पड़ताल

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने ‘जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार’ अभियान के क्रियान्वयन की जमीनी पड़ताल के लिए आज देहरादून जिले के अंतर्गत रायपुर ब्लॉक के खैरीमान सिंह में आयोजित न्याय पंचायत स्तरीय शिविर का निरीक्षण किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने ‘प्रशासन गांव की ओर’ कार्यक्रम के तहत आयोजित बहुद्देश्यीय शिविर में जन-समस्याओं के निस्तारण की स्थिति की जानकारी ली और अभियान के संबंध में फीडबैक प्राप्त किया।

मुख्यमंत्री ने शिविर में विभिन्न विभागों द्वारा लगाए गए स्टॉलों का भी निरीक्षण किया और सरकार की जन-कल्याणकारी योजनाओं एवं सेवाओं से ग्रामीणों को लाभान्वित करने के लिए मौके पर की गई व्यवस्थाओं को परखा। इस अवसर पर 102 दिव्यांगों एवं वृद्धजनों को सहायक उपकरण भी वितरित किए गए।

मुख्यमंत्री धामी ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि जन-समस्याओं का त्वरित, पारदर्शी एवं संतोषजनक समाधान सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि ‘जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार’ अभियान का उद्देश्य अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति तक सरकारी योजनाओं और सेवाओं की पहुँच सुनिश्चित करना है, इसलिए इस अभियान को पूरी संवेदनशीलता, जिम्मेदारी और प्रभावशीलता के साथ संचालित किया जाना जरूरी है।

इस अवसर पर विधायक उमेश शर्मा, ब्लॉक प्रमुख सरोजिनी जवाड़ी, जिला पंचायत सदस्य वीर सिंह चौहान एवं अन्य जनप्रतिनिधियों सहित मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह, एसडीएम हरि गिरि, परियोजना निदेशक विक्रम सिंह, जिला विकास अधिकारी सुनील कुमार तथा विभिन्न विभागों के जिला स्तरीय अधिकारी भी उपस्थित रहे।

ऑडियो साक्ष्य आधार पर डीएम ने की पटवारी के निलम्बन की कार्रवाई, तहसीलदार को सौंपी प्रकरण की विस्तृत जांच

लाखामण्डल क्षेत्र में अवैध वसूली की शिकायत पर जिलाधिकारी सविन बंसल ने कड़ी कार्रवाई करते हुए राजस्व उप निरीक्षक (पटवारी) जयलाल शर्मा को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। निलंबन अवधि में उन्हें तहसील कालसी स्थित रजिस्ट्रार कानूनगो कार्यालय में संबद्ध किया गया है।
लाखामण्डल, चकराता, देहरादून निवासियों द्वारा जिलाधिकारी को शपथ पत्र के साथ के साथ अपने संयुक्त शिकायती पत्र में ऑडियो साक्ष्य (पेनड्राइव) भी संलग्न किया गया था।  जिसमें आरोप लगाया गया कि जयलाल शर्मा द्वारा क्षेत्र में तैनाती के बाद छोटे से बड़े दस्तावेज तैयार करने, फर्जी विक्रय पत्र, दाखिल-खारिज आदि कार्यों के नाम पर किसानों, काश्तकारों तथा अनुसूचित जनजाति एवं अनुसूचित जाति के गरीब लोगों से खुलेआम नकद एवं ऑनलाइन माध्यम से अवैध धनराशि वसूली जा रही थी।
जिलाधिकारी द्वारा प्रकरण की कराई गई प्रारंभिक जांच में आरोप गंभीर प्रकृति के पाए गए, जिसके दृष्टिगत निष्पक्ष एवं पारदर्शी जांच आवश्यक मानी गई। उत्तराखण्ड राज्य कर्मचारी आचरण नियमावली, 2002 के उल्लंघन के प्रथम दृष्टया आधार पर जिलाधिकारी द्वारा जयलाल शर्मा को तत्काल प्रभाव से निलंबित किए जाने के आदेश दिए गए।
निलंबन अवधि में संबंधित कर्मचारी को वित्तीय नियम संग्रह, खण्ड-2, भाग-2 से 4 के मूल नियम-53 के अंतर्गत अर्द्ध औसत वेतन के समतुल्य जीवन निर्वाह भत्ता देय होगा। इसके साथ ही नियमानुसार महंगाई भत्ता भी अनुमन्य होगा, बशर्ते संबंधित कर्मचारी द्वारा यह प्रमाणपत्र प्रस्तुत किया जाए कि वह इस अवधि में किसी अन्य सेवा, व्यवसाय अथवा व्यापार में संलग्न नहीं है। प्रकरण की विस्तृत जांच हेतु तहसीलदार विकासनगर को जांच अधिकारी नामित किया गया है। उन्हें निर्देशित किया गया है कि एक माह के भीतर जांच पूर्ण कर अपनी आख्या जिलाधिकारी को प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।  जिलाधिकारी के अनुमोदन उपरांत उप जिलाधिकारी मुख्यालय द्वारा निलंबन आदेश विधिवत जारी कर दिए गए हैं।
जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया है कि भ्रष्टाचार एवं अवैध वसूली के मामलों में शून्य सहिष्णुता नीति अपनाई जा रही है तथा दोषी पाए जाने वाले किसी भी अधिकारी या कर्मचारी के विरुद्ध कठोरतम कार्रवाई की जाएगी।

मुख्यमंत्री आवास परिसर के उद्यान में 17 प्रजातियों के चार हजार ट्यूलिप उगाने की मुहिम का किया शुभारंभ

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्यमंत्री आवास परिसर के उद्यान में 17 प्रजातियों के ट्यूलिप उगाने की मुहिम का शुभारंभ करते हुए सपरिवार ट्यूलिप के बल्ब रोपे। मुख्यमंत्री आवास परिसर के उद्यान में इस बार ट्यूलिप के चार हजार बल्ब रोपे जा रहे हैं। जिनमें लेक पर्पल तथा बाईकलर प्रजाति के खास रंगत वाले ट्यूलिप भी शामिल हैं। मुख्यमंत्री ने उद्यान विभाग को ट्यूलिप के व्यवसायिक उत्पादन की कार्ययोजना बनाने के निर्देश देते हुए पुष्प उत्पादन एवं बागवानी के क्षेत्र में नवाचार पर जोर दिया।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने ट्यूलिप उत्पादन के बारे में उद्यान प्रभारी दीपक पुरोहित से विस्तार से जानकारी लेने के साथ ही परिसर में मशरूम उत्पादन, मौनपालन सहित बागवानी से जुड़े विभिन्न कार्यों की जानकारी भी ली।

नववर्ष पर मुख्यमंत्री धामी ने रोडवेज की 100 नई बसों को दिखाई हरी झंडी

नववर्ष के अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उत्तराखंड परिवहन निगम के बेड़े में 100 नई बसें शामिल की गई है। मुख्यमंत्री कैम्प कार्यालय से पसे फ्लैग ऑफ किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने 10 ए.सी. एवं 2 स्लीपर अनुबंधित बसों को भी जनता को समर्पित किया। साथ ही उन्होंने परिवहन निगम की स्मारिका “अनवरत” एवं सड़क सुरक्षा पर आधारित कैलेंडर का विमोचन किया तथा कठिन परिस्थितियों में कर्तव्यनिष्ठा और ईमानदारी से कार्य करने वाले कर्मठ कर्मचारियों को सम्मानित किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि अत्याधुनिक तकनीक से सुसज्जित ये नई बसें राज्य के सार्वजनिक परिवहन तंत्र को सशक्त बनाएंगी। इससे यात्रियों को सुरक्षित, सुविधाजनक और किफायती यात्रा सुविधा मिलेगी तथा राज्य की आर्थिक, सामाजिक और पर्यटन गतिविधियों को भी नई गति प्राप्त होगी। उन्होंने कहा कि दुर्गम और पर्वतीय भौगोलिक परिस्थितियों वाले उत्तराखंड में एक सुदृढ़ परिवहन व्यवस्था नागरिक सुविधा के साथ-साथ आर्थिक विकास के लिए भी अत्यंत आवश्यक है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार परिवहन निगम को मजबूत बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। अब तक 13 से अधिक नए बस अड्डों और कार्यशालाओं का निर्माण पूर्ण किया जा चुका है, जबकि 14 अन्य स्थानों पर कार्य प्रगति पर है, जिनमें 4 आईएसबीटी भी शामिल हैं। शीघ्र ही निगम के बेड़े में इलेक्ट्रिक बसों को भी सम्मिलित किया जाएगा।

उन्होंने बताया कि निगम की बसों में जीपीएस, सीसीटीवी कैमरे, ई-टिकटिंग, फ्लीट मॉनिटरिंग एवं समयबद्ध मेंटेनेंस जैसी आधुनिक सुविधाएं सुनिश्चित की जा रही हैं, जिससे यात्रियों के साथ-साथ कर्मचारियों की सुरक्षा भी सुदृढ़ होगी। सरकार ने निगम कर्मियों के हितों को ध्यान में रखते हुए डीए वृद्धि, सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों का क्रियान्वयन एवं नई भर्तियों के माध्यम से मैनपावर की कमी को दूर करने का कार्य किया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार परिवहन निगम को “सेवा का माध्यम” मानते हुए इसे आधुनिक, आत्मनिर्भर और जनोन्मुखी बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। पारदर्शी नीतियों और जवाबदेही के बल पर उत्तराखंड निरंतर प्रगति के पथ पर अग्रसर है।

इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी, सुबोध उनियाल, राज्यसभा सांसद नरेश बंसल, विधायक खजानदास, उमेश शर्मा काऊ, सविता कपूर, एमडी परिवहन निगम एवं अपर सचिव रीना जोशी तथा परिवहन विभाग के अधिकारी उपस्थित रहे।

राज्य सरकार पूर्व सैनिक सम्मान, पुनर्वास एवं कल्याण के लिए निरंतर संवेदनशील एवं सक्रिय: धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने नव वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित पूर्व सैनिक मिलन कार्यक्रम में प्रतिभाग किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड सैनिकों और पूर्व सैनिकों की वीर भूमि है और राज्य सरकार उनके सम्मान, पुनर्वास एवं कल्याण के लिए निरंतर संवेदनशील एवं सक्रिय है। उन्होंने कहा कि सैनिक पुत्र होने की वजह से उन्होंने सेना के अनुशासन, त्याग और देशभक्ति को करीब से देखा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि वे सैनिकों से संबंधित हर कार्यक्रम में जाने का प्रयास करते हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी हर महत्वपूर्ण अवसर पर सैनिकों के बीच जरूर जाते हैं। सैनिकों एवं पूर्व सैनिकों के कल्याण के लिए लिए प्रधानमंत्री ने अनेक ऐतिहासिक निर्णय लिये हैं। प्रधानमंत्री के नेतृत्व में सशस्त्र बलों के आधुनिकीकरण, सीमावर्ती क्षेत्रों के तीव्र विकास, सैनिकों के लिए आधुनिक उपकरणों, आवास एवं कल्याण सुविधाओं में लगातार वृद्धि की गई है, जिससे सक्रिय सैनिकों के साथ-साथ पूर्व सैनिक समुदाय का मनोबल और गौरव भी और अधिक बढ़ा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार राज्य में शहीद आश्रितों, पूर्व सैनिकों और सेवा निवृत्त सैन्य कर्मियों के लिए विविध कल्याणकारी योजनाएँ संचालित कर रही है।

सैनिक कल्याण मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि सैनिक और पूर्व सैनिक देश की शान हैं, जिनके त्याग, बलिदान और अनुशासन के कारण आज भारत सुरक्षित और सशक्त है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य सरकार सैनिकों, पूर्व सैनिकों और उनके आश्रितों के कल्याण के लिए निरंतर ठोस कदम उठा रही है। राज्य सरकार द्वारा सैनिकों को मिलने वाली पुरस्कार एवं सम्मान राशि में कई गुना वृद्धि की गई है, जिससे शहीदों और वीर सैनिकों के सम्मान को और अधिक गरिमा मिली है। उन्होंने कहा कि सीमा पर देश की रक्षा करते हुए वीरगति को प्राप्त होने वाले जवानों के परिजनों को सरकारी नौकरी प्रदान करने का संवेदनशील और ऐतिहासिक निर्णय धामी सरकार ने लिया है। उन्होंने कहा कि अब तक 28 शहीद सैनिकों के परिजनों को सरकारी सेवा में रोजगार प्रदान किया जा चुका है, जो सरकार की सैनिक परिवारों के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

इस अवसर सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारी लेफ्टिनेंट जनरल एके सिंह, ब्रिगेडियर केजी बहल, मेजर जनरल सम्मी सबरवाल, ले.जनरल अश्वनी कुमार, मेजर जनरल ओपी राणा, ब्रिगेडियर जेएनएस बिष्ट, मेजर जनरल देवेश अग्निहोत्री, मेजर जनरल ओपी सोनी, मेजर जनरल आनंद रावत सहित पूर्व सैनिक उपस्थित रहे।

सीएम धामी ने 215 उपनिरीक्षकों को नियुक्ति पत्र किए प्रदान

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्य सेवक सदन में 215 उपनिरीक्षकों को नियुक्ति पत्र प्रदान किये। जिसमें 104 उप-निरीक्षक, 88 गुल्मनायक (पी.ए.सी) एवं 23 अग्निशमन द्वितीय अधिकारी शामिल हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में कानून-व्यवस्था, जनसुरक्षा तथा आपदा प्रबंधन प्रणाली को और अधिक सशक्त बनाने में पुलिस की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। उन्होंने नवनियुक्त उप निरीक्षकों से कहा कि अब तक की उनकी परीक्षा केवल शुरुआत थी, असली परीक्षा अब शुरू हो रही है। उन्हें अब प्रदेश की सुरक्षा, कानून व्यवस्था, आपदा प्रबंधन एवं अग्निशमन जैसे महत्वपूर्ण दायित्वों का निर्वहन पूरी निष्ठा, अनुशासन और समर्पण के साथ करना होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड दो अंतरराष्ट्रीय एवं दो आंतरिक सीमाओं से लगा राज्य है। राज्य में शांति एवं सुव्यवस्था बनाए रखने के साथ-साथ नशा, साइबर क्राइम, महिला अपराध, यातायात, आपदा प्रबंधन, चारधाम एवं कांवड़ यात्रा जैसे अनेक मोर्चों पर पुलिस की प्रभावी भूमिका होती है।

मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘स्मार्ट पुलिस’ के विजन का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य सरकार पुलिस बल को आधुनिक तकनीक, अत्याधुनिक उपकरणों और उत्कृष्ट प्रशिक्षण से परिपूर्ण करने के लिए कृतसंकल्प है। बीते तीन वर्षों में पुलिस कर्मियों के आवास के लिए लगभग 500 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं तथा कैशलैस स्वास्थ्य सुविधा की व्यवस्था की गई है। उन्होंने कहा कि पुलिस कर्मियों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर सुरक्षा एवं डेटा एनालिटिक्स जैसी उन्नत तकनीकों में प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है। महिला सुरक्षा को लेकर उत्तराखंड पुलिस के प्रदर्शन की सराहना करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य ने महिला अपराधों के निस्तारण में राष्ट्रीय औसत से दोगुनी सफलता प्राप्त की है तथा गृह मंत्रालय की रिपोर्ट अनुसार पोक्सो एवं महिला अपराधों के मामलों के निस्तारण में देश में पाँचवाँ स्थान प्राप्त किया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए देश का सबसे सख्त नकल विरोधी कानून लागू किया है। इसके परिणामस्वरूप बीते चार वर्षों में 26 हजार से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरी मिली है। राज्य में सभी परीक्षाएँ पूरी तरह पारदर्शी एवं निष्पक्ष तरीके से आयोजित की जा रही हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि नवनियुक्त कार्मिक अपने कर्तव्यों का निर्वहन ईमानदारी, निष्ठा और समर्पण के साथ करेंगे तथा राज्य की शांति, सुरक्षा और जनता के विश्वास को और अधिक मजबूत बनाएँगे।

इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी, राज्यसभा सांसद नरेश बंसल, विधायक खजानदास, उमेश शर्मा काऊ, सचिव गृह शैलेश बगोली, पुलिस महानिदेशक दीपम सेठ, अपर पुलिस महानिदेशक डॉ. वी. मुरूगेशन, ए.पी अंशुमान, आईजी योगेन्द्र सिंह रावत एवं पुलिस के अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

सुरंग में फंसे मजदूरों की सूचना पर सीएम ने ली जानकारी

चमोली जनपद के पीपलकोटी स्थित निर्माणाधीन टीएचडीसी विष्णुगाड-पीपलकोटी जल विद्युत परियोजना की टीबीएम साइट पर मंगलवार को शिफ्ट परिवर्तन के दौरान सुरंग के भीतर मजदूरों को लाने-ले जाने वाली दो लोको ट्रेनों की आपस में टक्कर हो गई, घटना के समय 109 श्रमिक सुरंग के भीतर मौजूद थे।

घटना की जानकारी प्राप्त होते ही मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जिलाधिकारी चमोली से दूरभाष पर वार्ता कर घटना की पूरी जानकारी ली और सभी घायलों को बेहतर चिकित्सीय सुविधा उपलब्ध कराने और आवश्यकतानुसार उच्च चिकित्सालयों में रेफर करने के निर्देश दिए।

हादसे की सूचना मिलते ही जिलाधिकारी चमोली गौरव कुमार एवं पुलिस अधीक्षक सुरजीत सिंह पंवार तत्काल जिला अस्पताल गोपेश्वर पहुंचे तथा वहां भर्ती घायलों से मिलकर उनका कुशलक्षेम जाना और चिकित्सकों को घायलों के समुचित एवं बेहतर उपचार के निर्देश दिए।

जिलाधिकारी चमोली गौरव कुमार ने जानकारी दी कि 70 श्रमिकों को उपचार के लिए जिला चिकित्सालय गोपेश्वर लाया गया, जिसमें से 66 का प्राथमिक उपचार कर उन्हें घर भेज दिया गया है 04 श्रमिकों को जिला चिकित्सालय में एडमिट किया गया है। पीपलकोटी विवेकानंद चिकित्सालय में 18 श्रमिकों का प्राथमिक उपचार कर घर भेज दिया गया है। 21 श्रमिकों को को कोई चोट नहीं लगी है, वे घटना स्थल से ही घर चले गए थे।