महिलायें शी-बॉक्स के जरिये कर सकेंगी यौन उत्पीड़न की शिकायत

अब केंद्रीय महिला कर्मचारी ऑफिसों में यौन उत्पीड़न की शिकायत शी-बॉक्स के जरिए कर सकेंगी। इसके लिये केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने केंद्र सरकार में काम कर रही महिला कर्मचारियों के लिए ऑनलाइन प्लैटफॉर्म शी-बॉक्स लॉन्च किया है।

महिला और बाल विकास मंत्री मेनका गांधी ने कहा है कि शी-बॉक्स फिलहाल केंद्र सरकार की कर्मचारियों के लिए है। बाद में इसका विस्तार किया जाएगा और इसमें प्राइवेट सेक्टर को भी शामिल किया जाएगा। ऑफिस और कामकाज की जगह पर होने वाले उत्पीड़न की प्रकृति के लिए राष्ट्रीय स्तर का सर्वे कराने की बात भी मेनका गांधी ने कही है।

शी-बॉक्स का मतलब है सेक्सुअल हैरसमेंट इलेक्ट्रॉनिक बॉक्स। इसमें आई कोई भी शिकायत सीधे संबंधित मंत्रालय, विभाग की इंटरनल कंप्लेन कमेटी के पास भेज दिया जाएगा, जिसके पास इसकी जांच का अधिकार होगा। इंटरनल कंप्लेन कमेटी नियमों के मुताबिक कार्रवाई करेगी और शिकायत की स्थिति भी पीड़ित को बताती रहेगी।

अभी केंद्र सरकार में करीब 30.87 लाख कर्मचारी हैं। फिलहाल केंद्र सरकार की कर्मचारियों के लिए हैं जिसमें करीब 10.93 प्रतिशत महिला हैं। मेनका गांधी के मुताबिक पोर्टल में कैसी हरकतें यौन उत्पीड़न मानी जाएंगी यह भी बताया गया है। फर्जी शिकायतें ना आएं इस पर भी ध्यान दिया जाएगा।

आज के दिन भी पाक ने किया सीजफायर, बीएसएफ ने नहीं खिलाई मिठाई

पाकिस्तान ने गणतंत्र दिवस के दिन भी सीज फायर कर सारे हदें पार कर दी है। शुक्रवार को पाकिस्तान की ओर से जम्मू के नौशेरा के रजौरी में सीजफायर का उल्लंघन किया। सीमा पर घुसपैठ कराने में नाकाम रहने से पाकिस्तान बौखलाया हुआ और सीमा पर गोलीबारी कर रहा है।

पिछले कुछ दिनों में भारतीय सुरक्षा बलों ने कई पाकिस्तानी घुसपैठियों को ढेर किया है। ये भारत में आतंकी वारदात को अंजाम देने के लिए घुसपैठ की कोशिश कर रहे थे। वहीं, पाकिस्तान की हरकतों की वजह से गणतंत्र दिवस के अवसर पर बॉर्डर सिक्युरिटी फोर्स (बीएसएफ) ने पाकिस्तानी रेंजर्स को मिठाई तक नहीं खिलाई। अभी तक सीमा पर हर गणतंत्र दिवस पर बीएसएफ के जवान पाकिस्तानी रेंजर्स को मिठाई खिलाते रहे हैं।

बताया जा रहा है कि सीमा पर पाकिस्तान द्वारा की जा रही गोलीबारी और तनाव के चलते बीएसएफ ने यह फैसला लिया। हालांकि बीएसएफ ने सीमा पर बांग्लादेश के बॉर्डर गार्ड्स के जवानों को मिठाई खिलाकर गणतंत्र दिवस का जश्न मनाया। बीएसएफ के जवानों ने पश्चिम बंगाल से सटी फुलबारी पोस्ट पर बांग्लादेश बॉर्डर गार्ड्स के जवानों को मिठाई खिलाई।

इससे पहले गुरुवार को सीमा पर तनाव को कम करने के लिए पाकिस्तान रेंजर्स और बॉर्डर सिक्युरिटी फोर्स (बीएसएफ) के बीच फ्लैग मीटिंग हुई थी। यह फ्लैग मीटिंग पाकिस्तान की अपील पर सुचेतगढ़ इलाके में अंतरराष्ट्रीय सीमा पर हुई थी, जिसमें बीएसफ और पाकिस्तानी रेंजर्स के सेक्टर कमांडर स्तर के अधिकारी शामिल हुए थे। हालांकि पाकिस्तान पर इस फ्लैग मीटिंग का कोई असर नहीं हुआ और उसने 24 घंटे के अंदर ही गणतंत्र दिवस के असवर पर अपना रंग दिखा दिया।

मोदी के दावोस भाषण को चीन ने सराहा

विश्व आर्थिक मंच (डब्ल्यूईएफ) के सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषण का कायल प्रतिद्वंद्वी देश चीन भी हुआ है। चीन ने मोदी के भाषण की सराहना करते हुये आतंकवाद, जलवायु परिवर्तन और संरक्षणवाद को दुनिया की तीन सबसे बड़ी चुनौती माना है और यही बात पीएम मोदी ने भी अपने भाषण के दौरान कही।

मोदी के दावोस के भाषण की सराहना कर चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता हुआ चुनयिंग ने कहा कि हमने नरेंद्र मोदी का संरक्षणवाद के खिलाफ दिया भाषण सुना। ये बयान दर्शाता है कि मौजूदा वक्त में ग्लोबलाइजेश दुनिया का ट्रेंड बन गया है। इससे विकासशील देशों समेत सभी देशों को लाभ पहुंचता है। संरक्षणवाद के खिलाफ लड़ने और ग्लोबलाइजेशन को बढ़ावा देने में भारत और चीन के बीच काफी समानता है।

प्रधानमंत्री मोदी के बयान का समर्थन करते हुए चीनी विदेश मंत्रालय ने भारत समेत दुनिया के सभी देशों के साथ समन्वय बढ़ाने का आह्वान किया है। साथ ही दुनिया की आर्थिक ग्रोथ बढ़ाने के लिए आर्थिक ग्लोबलाइजेशन को बढ़ावा देने की बात कही। पीएम मोदी ने कहा था, ग्लोबलाइजेशन अपने नाम के विपरीत सिकुड़ता चला जा रहा है। मैं यह देखता हूं कि बहुत से समाज और देश ज्यादा से ज्यादा आत्मकेंद्रित होते जा रहे हैं।

इधर दावोस में विश्व आर्थिक मंच सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषण को भारतीय जनता पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने सभी भारतीयों के लिए गर्व का विषय करार दिया है। अमित शाह ने श्रृंखलाबद्ध ट्वीट करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने दावोस में भारत की ताकत और उम्मीदों को दुनिया के समक्ष बिल्कुल सही तरीके से पेश किया है। उन्होंने इस बात को भी शानदार तरीके से रखा कि कैसे भारतीय संस्कृति लोगों को जोड़ने में विश्वास रखती है न कि लोगों को विभाजित करने में। अमित शाह ने कहा, हजारों साल पहले लिखे गए हमारे शास्त्रों में वसुधैव कुटुम्बकम का जिक्र है। हम सभी हमारे साझा भाग्य से जुड़े हुए हैं।

जलवायु परिवर्तन पर अमित शाह ने इसे बहुत बड़ी वैश्विक चुनौती बताया। मोदी के नेतृत्व में भारत ने इस संबंध में न सिर्फ महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया है बल्कि उसे हासिल करने के लिए अभूतपूर्व कदम भी उठा रहा है। शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने हर वैश्विक मंच से आतंकवाद के खिलाफ आवाज बुलंद की है। डडब्ल्यूईएफ में भी उन्होंने दुनिया से आतंकवाद को परास्त करने के लिए एकजुट होने का आह्वान किया।

इस नियम को फॉलो करने से ही कमा सकेंगे यूटयूब से पैसा

यू-टयूब से पैसा कमाना अब और मुश्किल होने जा रहा है। कंपनी ने अपने पार्टनर प्रोग्राम को अपडेट किया है। इसके मुताबिक अब चैनल या क्रिएटर को पैसा कमाने के लिए ज्यादा सब्सक्राइबर्स चाहिए होंगे। अब उन्हीं चैनलों को विज्ञापन मिल सकेंगे जिनके पास कम से कम 1000 सब्सक्राइबर्स हों और 12 महीने में कम से कम 4,000 घंटे वीडियो चैनल पर देखें गए हों।

बता दें इससे पहले कंपनी ने मिनिमम व्यूज 10 हजार रखा था, यानी अब तक 10 हजार व्यूज पूरे होने पर विज्ञापन मिलते थे। यूट्यूब ने अपने ब्लॉग पोस्ट में कहा है कि 20 फरवरी अंतिम तारीख होगी। यानी जिस चैनल के वीडियो को 4 हजार घंटे के व्यूज नहीं मिलेंगे और 1,000 सब्सक्राइबर्स पूरे नहीं होंगे उन्हें 20 फरवरी के बाद से विज्ञापन नहीं मिलेंगे।

यूट्यूब ने ये कदम लोगल पॉल की हालिया घटना के बाद उठाया है। कुछ समय पहले यू-ट्यूबर और क्रिएटर लोगन पॉल ने एक सुसाइड वीडियो पोस्ट कर दिया था, जिसमें डिस्टर्ब करने वाले कंटेट थे। इस वीडियो में जापान के एक फॉरेस्ट में डेड बॉडी दिखाई गई थी।

हजारों लोग यूट्यूब के पार्टनर प्रोग्राम के जरिए हर साल ढेरों पैसे कमाते हैं, लेकिन यूट्यूब के इस नए नियम के बाद काफी क्रिएटर्स को पैसे कमाने में दिक्कत होगी। साथ ही नए क्रिएटर्स को भी अपना चैनल शुरू करने के लिए मशक्कत करनी पड़ेगी।

यूट्यूब के मुताबिक, कंपनी ने ये प्रतिबंध इसलिए लगाया है ताकी कंपनी क्रिएटर्स पर निगरानी रख सके, कि क्या क्रिएटर्स कंपनी के गाइडलाइन को फॉलो करते हैं या नहीं?

जीएसटी दर घटने से आम जनता को मिली राहत

जीएसटी परिषद की बैठक में आम आदमी को राहत मिली है। गुरुवार को हुई बैठक में 29 चीजों और 53 सेवाओं पर जीएसटी को घटाकर शून्य फीसदी कर दिया है। जिन उत्पादों पर जीएसटी कम किया गया है, उनमें ज्यादा हैंडीक्राफ्ट के उत्पाद शामिल हैं। इसके साथ ही परिषद ने 39 चीजों पर जीएसटी कम करके 5 फीसदी और 12 फीसदी कर दिया है।

फिलहाल जीएसटी रिटर्न भरने के लिए फॉर्म का सरलीकरण करने को लेकर कोई फैसला नहीं हुआ है। इसके बारे में 10 दिन बाद वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से फिर से बैठक होगी। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने बताया कि बैठक में रिटर्न फाइल को सरल करने पर चर्चा हुई और नंदन नीलेकणि और सुशील मोदी ने इस पर विस्तृत प्रस्तुति भी दी है।

यह हुए अहम फैसले

जीएसटी परिषद की बैठक में 29 सामान और 53 सेवाओं पर से स्वीकार किया गया। बोतलबंद पानी पर जीएसटी 18 से 12 फीसदी कर दी गई है। इसके अलावा 40 हैंडीक्राफ्ट वस्तुओं की कीमत तय की जाएगी। जिन वस्तुओं और सेवाओं को जीएसटी में राहत दी गई है, उनके नए रेट 25 जनवरी से जीएसटी के नए रेट लागू हो जाएंगे। इसके अलावा एक फरवरी से ई-वे बिल भी लागू हो जाएगा।

पेट्रोलियम पदार्थों पर होगा फैसला

बैठक के बाद वित्त मंत्री अरुण जेटली ने बताया कि गुरुवार की बैठक में पेट्रोलियम पदार्थों को जीएसटी में लाने पर बात नहीं हो सकी। हालांकि, उन्होंने कहा कि जीएसटी परिषद की अगली मीटिंग में पेट्रोलियम पदार्थों के साथ ही दूसरे पदार्थों पर भी चर्चा होने की उम्मीद है। इन्हें जीएसटी के दायरे में लाने पर बात की जाएगी। पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। पेट्रोल की कीमत फिर 80 रुपये के करीब पहुंच गई है। वहीं, कई राज्यों में डीजल 65 का आंकड़ा पार कर चुका है।

आम लोगों के लिए एक और राहत संभव

इसके अलावा रियल इस्टेट को जीएसटी के तहत लाने पर भी कोई फैसला इस बैठक में नहीं हो सका। हालांकि इस पर चर्चा जरूर हुई है। रियल इस्टेट के जीएसटी के दायरे में आने से आम लोगों को स्टांप ड्यूटी समेत कई चीजों पर होने वाले खर्च से निजात मिल सकती है। ऐसी उम्मीद जताई जा रही थी कि इस बैठक में जीएसटी परिषद रियल इस्टेट को जीएसटी के दायरे में ला सकती है। इसकी वजह यह थी कि समय-समय पर वित्त मंत्री अरुण जेटली समेत सरकार के कई नेता रियल इस्टेट को जीएसटी के तहत लाने की बात कई बार कह चुके हैं।

चावल व गेंहू के अलावा अन्य फसलों पर सरकार देगी खरीद की गांरटी

सरकार ने कृषि की ओर कदम बढ़ाते हुये आगामी वित्त वर्ष के आम बजट में कुछ कारगर पहल किये जाने की संभावना जताई है। जिसके तहत सरकार गेहूं और चावल को छोड़ अन्य सभी फसलों की खरीद की गारंटी देने की योजना बना रही है।

योजना के तहत राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों को गेहूं व चावल को छोड़कर सभी फसलों की न्यूनतम गारंटी देनी होगी। आम बजट में इस पर प्रावधान किये जाने की संभावना है। दरअसल, सरकार दो दर्जन से अधिक फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) घोषित करती है, लेकिन गेहूं व चावल को छोड़ बाकी फसलों की खरीद आमतौर पर नहीं होती है। छिटपुट राज्यों में कुछ-कुछ फसलों की खरीद कर ली जाती है। हालांकि, गेहूं व चावल की खरीद की शत प्रतिशत गारंटी नहीं होती है।

गेहूं व चावल की सरकारी खरीद पंजाब, हरियाणा, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और आंध्र प्रदेश में की जाती है। बाकी राज्यों में छिटपुट तौर पर थोड़ी बहुत होती है। इनके अलावा ढेर सारी फसलें होती हैं, जो किसानों की आमदनी को प्रभावित करती हैं। इसे लेकर किसानों की मुश्किलें लगातार बढ़ रही हैं। जिन फसलों की एमएसपी घोषित भी होती है, लेकिन उनकी खरीद नहीं होती है। इससे किसानों को घाटा उठाना पड़ता है। किसानों की यह मांग लंबे समय से होती आ रही है कि उनकी उपज की खरीद की गारंटी होनी चाहिए।

कृषि मंत्रालय ने आम बजट के लिए इस आशय का एक विस्तृत प्रस्ताव तैयार किया है। इसमें जिंस बाजार के उतार-चढ़ाव के बावजूद किसानों को नुकसान से बचाने की रणनीति तैयार की गई है। इसके मुताबिक राज्यों को इन फसलों के मूल्य कम होने की दशा में उपज की खरीद का पूरा हक होगा, जिसके लिए केंद्र भरपाई की गारंटी देगा। किसानों को बाजार मूल्य में उतार चढ़ाव के जोखिम से बचाने की रणनीति तैयार की गई है।

योजना का उद्देश्य खरीद लागत, भंडारण, विक्रय लागत, पूंजी पर ब्याज और अन्य आकस्मिक खर्च को कवर करते हुए खरीद और विक्रय मूल्य के अंतर में अगर घाटा हुआ तो केंद्र सरकार भरपाई करेगी। यह विशेष प्रावधान मध्य प्रदेश सरकार की शुरु की गई भावांतर योजना से मिलती जुलती होगी। घाटे के इस अंतर का 40 से 50 फीसद केंद्र सरकार देगी, जबकि बाकी राज्य सरकारों को वहन करना होगा। खरीद किये जाने वाली जिंसों की बिक्री का पूरा दायित्व राज्य सरकारों का होगा।

इजरायली पीएम से मोदी बोले, मेरे दोस्त भारत में आपका स्वागत है

इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू भारत दौरे पर पहुंच गए हैं। दिल्ली में पीएम नरेंद्र मोदी ने इस ऐतिहासिक यात्रा पर उनका स्वागत किया है। भारत यात्रा के दौरान नेतन्याहू कड़ी सुरक्षा घेरे के बीच रहेंगे।

तीन मूर्ति स्मारक पर बेंजामिन नेतन्याहू ने भारतीय सेना के जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित की। उनके साथ पीएम मोदी और सारा नेतन्याहू भी मौजूद रहे। दरअसल, तीन मूर्ति स्मारक का इजरायल से गहरा संबंध है। यही वजह है कि इसका नाम बदलकर तीन मूर्ति हाइफा चौक कर दिया गया है।

पीएम नरेंद्र मोदी ने तीन मूर्ति हाइफा चौक पर विजिटर्स बुक में लिखा कि तीन मूर्ति चौक के नाम के साथ हाइफा जोड़ना एक ऐतिहासिक घटना है। इजराइल के पीएम नेतन्याहू ने कहा कि हम अपने बहादुर जवानों के प्रति अपनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। भारत के स्वार्थरहित बलिदान की भावना को सलाम करते हैं। पहले और दूसरे विश्व युद्ध के इतिहास की किताब का एक पन्ना 100 साल पहले लिखा गया था, जब हाइफा युद्ध में भारतीय जवानों ने बलिदान दिया था। यह प्रथम विश्व युद्ध के खत्म होने की 100वीं वर्षगांठ है। दोनों विश्व युद्ध के इतिहास की किताब में ऐसे कई सुनहरे पन्ने हैं, जिनमें भारत के बहादुरों के त्याग की कहानियां लिखी हैं।

पीएम नरेंद्र मोदी ने ट्वीट कर नेतन्याहू का स्वागत किया। पीएम मोदी ने ट्वीट में लिखा, मेरे दोस्त पीएम नेतन्याहू भारत में आपका स्वागत है। आपकी भारत यात्रा ऐतिहासिक और विशेष है। ये दोनों देशों के रिश्तों को और मजबूत करेगी।

क्यों बदला गया चौक का नाम

हाइफा की लड़ाई 23 सितंबर 1918 को लड़ी गई थी। इस वक्त देश में अंग्रेजों का राज था और अंग्रजों ने जोधपुर, हैदराबाद, मैसूर रियासत की सेना को हाइफा पर कब्जा करने के आदेश दिए और उसके बाद भारतीय सैनिकों ने हाइफा में तुर्की की सेना का सामना किया।

यह लड़ाई उस वक्त हुई, जब जर्मनी के साथ संबद्ध शक्तियों और तुर्क साम्राज्य के बीच एक के बाद एक लड़ाई हो रही थी, जिसे सिनाई और फिलिस्तीन अभियान कहा जाता था।

इसरो ने पीएसएलवी के जरिये लांच किये 31 उपग्रह

भारत ने 12 जनवरी को अंतरिक्ष के क्षेत्र में इतिहास रच दिया है। सुबह नौ बजकर अठ्ाइस मिनट पर इसरो ने श्रीहरिकोटा से 31 उपग्रहों की लॉन्च किया। इसी के साथ ही इसरो के उपग्रहों का शतक पूरा हो गया है। शुक्रवार को लॉन्च उपग्रहों में से एक काफी खास है, जिससे पड़ोसी देश पाकिस्तान भी सावधान है। ये उपग्रह है कार्टोसैट-2, जिसे आई इन द स्काई भी कहा जा रहा है।

क्यों घबरा रहे हैं चीन और पाकिस्तान?

इस उपग्रह के जरिए धरती की तस्वीरें ली जा सकती हैं। बॉर्डर पर आतंकियों की गतिविधियों पर नजर रखने में भारत को आसानी होगी। यह एक अर्थ इमेजिंग सैटेलाइट है जो कि दुश्मन पर नजर रखने के काम आएगा। इस उपग्रह की मदद से हम बॉर्डर पार भी पाकिस्तान और चीन की गतिविधियों पर नजर रख सकते हैं।

आपको बता दें कि इसरो ने शुक्रवार सुबह नौ बजकर अठ्ाइस मिनट पर पीएसएलवी के जरिए एक साथ 31 उपग्रह को लॉन्च किया। भेजे गए कुल 31 उपग्रहों में से तीन भारतीय हैं और 28 छह देशों से हैंरू कनाडा, फिनलैंड, फ्रांस, दक्षिण कोरिया, ब्रिटेन और अमेरिका भी शामिल हैं।

इसलिए भी है खास

पृथ्वी अवलोकन के लिए 710 किलोग्राम का कार्टोसेट-2 सीरीज मिशन का प्राथमिक उपग्रह है। इसके साथ सह यात्री उपग्रह भी है जिसमें 100 किलोग्राम का माइक्रो और 10 किलोग्राम का नैनो उपग्रह भी शामिल हैं। कुल 28 अंतरराष्ट्रीय सह-यात्री उपग्रहों में से 19 अमेरिका, पांच दक्षिण कोरिया और एक-एक कनाडा, फ्रांस, ब्रिटेन और फिनलैंड के हैं।

बौखलाया पाकिस्तान

भारत की इस उपलब्धि पर पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय की ओर से कहा गया है कि भारत जिन उपग्रहों का प्रक्षेपण कर रहा है, उससे वह दोहरी नीति अपना रहा है। इन उपग्रहों का इस्तेमाल नागरिक और सैन्य उद्देश्य में किया जा सकता है। इसलिए यह जरूरी है कि इनका इस्तेमाल सैन्य क्षमताओं के लिए ना किया जाए, अगर ऐसा होता है कि इसका क्षेत्र पर गलत प्रभाव पड़ेगा।

साल की पहली अंतरिक्ष परियोजना

31 अगस्त 2017 इसी तरह का एक प्रक्षेपास्त्र पृथ्वी की निम्न कक्षा में देश के आठवें नेविगेशन उपग्रह को वितरित करने में असफल रहा था। पीएसएलवी-सी40 वर्ष 2018 की पहली अंतरिक्ष परियोजना है। अन्नादुरई ने कहा, पीएसएलवी अपने 39वें परियोजना (पीएसएलवी-सी 39) तक बहुत सफल रहा था, पीएसएलवी-सी 39 हमारे लिए एक बहुत बड़ा झटका था क्योंकि हीट शील्ड अलग नहीं हो पाए थे।

हनीप्रीत पर नहीं हुये आरोप तय, कारण चार्जशीट का एक हजार पेज होना

जेल में बंद राम रहीम की सबसे खास राजदार हनीप्रीत के गुनाहों की फेहरिस्त एक हजार से ज्यादा पन्नों में चार्जशीट की शक्ल में दर्ज है। गुरुवार को उसी एक हजार पन्नों की चार्जशीट के चलते हनीप्रीत पर आरोप तय नहीं हो पाए।

गौरतलब है इस पूरे मामले में हनीप्रीत के साथ अब तक 15 लोग गिरफ्तार हो चुके हैं। गुरुवार को इन लोगों को सेशन जज नीरजा कुलवंत कंसल की अदालत में पेश किया गया, लेकिन इन्हीं में से एक आरोपी प्रदीप कुमार की तरफ से दलील दी गई कि उसको अभी तक अदालत की तरफ से पूरी चार्जशीट की कॉपी नहीं मिली है।

राजस्थान से गिरफ्तार किए गए प्रदीप के मुताबिक उसे सिर्फ 175 पन्ने मिले हैं जो कि आरोप तय करने और बहस करने के लिए पूरे नहीं है। पहले पूरी चार्जशीट सीट पढ़ी जाएगी। उसके बाद ही इस पर बहस की जा सकती है कि आरोपियों पर क्या चार्ज लगे हैं।

गौरतलब है कि हनीप्रीत के खिलाफ एफआईआर नंबर 345 में आईपीसी की धारा 121, 121ए, 216, 145, 150, 151, 152, 153 और 120बी के तहत मामले दर्ज हैं। साथ ही हनीप्रीत साध्वी यौन शोषण मामले में डेरा प्रमुख गुरमीत राम रहीम को दोषी करार दिए जाने के बाद पंचकूला में हिंसा भड़काने और देशद्रोह मामले की आरोपी है।

अदालत में गुरुवार की सुनवाई के दौरान आरोप तय नहीं हो पाए। इस मामले में बहस और अगली सुनवाई अब आगामी 21 फरवरी को होगी।

सुप्रीम कोर्ट में पहली बार वकील से सीधे जज बनेंगी इंदु

उत्तराखंड हाईकोर्ट के मुख्य न्यायधीश केएम जोसेफ व वरिष्ठ अधिवक्ता इंदू मल्होत्रा को सुप्रीम कोर्ट कोलेजियम ने सुप्रीम कोर्ट का जज बनाने की सिफारिश की है।

सुप्रीम कोर्ट कोलेजियम ने सरकार से इन दोनों ही लोगों को सुप्रीम कोर्ट का जज बनाने की सिफारिश की है। इंदू मल्होत्रा को 2007 में वरिष्ठ वकील का दर्जा दिया गया था। वे सुप्रीम कोर्ट में अभी तक नियुक्त हुईं सातवीं महिला जज होंगी। अभी फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में आर. भानुमति अकेली महिला जज हैं। स्वतंत्रता के बाद से अभी तक सुप्रीम कोर्ट में सिर्फ छह महिला जज हुई हैं।

जस्टिस केएम जोसेफ फिलहाल उत्तराखंड हाईकोर्ट के जज हैं। वे उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन का आदेश रद करने वाली पीठ में शामिल थे। उसके बाद उनके स्थानांतरण की चर्चाएं रहीं लेकिन उत्तराखंड से उनका स्थानांतरण नहीं हुआ।

कोलेजियम ने इसके अलावा इलाहाबाद हाईकोर्ट के अतिरिक्त जज जस्टिस शिव कुमार सिंह को स्थाई करने की सिफारिश की है। हालांकि कोलेजियम के समक्ष इलाहाबाद हाईकोर्ट के कुल 11 अतिरिक्त जजों को स्थाई करने का प्रस्ताव था, लेकिन शिव कुमार सिंह का कार्यकाल समाप्त हो रहा था। इसलिए फिलहाल उनके बारे में सिफारिश की गई है। बाकी प्रस्तावों पर कोलीजियम बाद में विचार करेगी।

सुप्रीम कोर्ट में महिला जज

सुप्रीम कोर्ट 1950 में बना उसके 39 साल बाद 1989 में एम फातिमा बीवी सुप्रीम कोर्ट की पहली महिला जज नियुक्त हुईं। फातिमा बीवी केरल हाईकोर्ट से सेवानिवृत होने के बाद सुप्रीम कोर्ट में जज नियुक्त हुईं थी। वे 29 अप्रैल 1992 को सुप्रीम कोर्ट से सेवानिवृत हुईं। बाद में वे तमिलनाडु की राज्यपाल भी नियुक्त हुईं।

सुप्रीम कोर्ट में दूसरी महिला जज सुजाता वी मनोहर हुईं जिन्होंने जज के रूप में अपने कैरियर की शुरूआत बाम्बे हाईकोर्ट जज से की थी। वे सुप्रीम कोर्ट में 8 नवंबर 1994 से 27 अगस्त 1999 तक न्यायाधीश रहीं। जस्टिस सुजाता मनोहर के सेवानिवृत होने के करीब पांच महीने बाद जस्टिस रूमा पाल सुप्रीमकोर्ट की जज बनीं। जस्टिस पाल सबसे लंबे समय तक रहीं। वे 28 जनवरी 2000 से लेकर 2 जून 2006 तक सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश रहीं। उनके बाद चार साल तक सुप्रीम कोर्ट मे कोई महिला जज नहीं रही।

चार साल बाद झारखंड हाईकोर्ट की तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश जस्टिस ज्ञान सुधा मिश्रा सुप्रीम कोर्ट की न्यायाधीश नियुक्त हुईं। जस्टिस मिश्रा 30 अप्रैल 2010 को सुप्रीम कोर्ट जज बनी और 27 अप्रैल 2014 को सेवानिवृत हुईं। इसी दौरान जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई सुप्रीम कोर्ट की जज बनीं। जस्टिस देसाई 13 सितंबर 2011 से लेकर 29 अक्टूबर 2014 तक सुप्रीम कोर्ट जज रहीं। इस दौरान पहली बार सुप्रीम कोर्ट में एक साथ दो महिला जज रहीं।

जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की सेवानिवृति के करीब दो महीने पहले सुप्रीम कोर्ट की वर्तमान महिला जज आर. भानुमति सुप्रीम कोर्ट जज नियुक्त हुईं। जस्टिस भानुमति 13 अगस्त 2014 को सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश नियुक्त हुईं वे 19 जुलाई 2020 को सेवानिवृत होंगी। सुप्रीम कोर्ट के 67 सालों के इतिहास में सिर्फ दो बार एक साथ दो महिला जज रहीं।