सुप्रीम कोर्ट का फैसला सर्वमान्य-मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड

अयोध्या में राम मंदिर-बाबरी मस्जिद विवाद के समझौते के लिए शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड ने सुप्रीम कोर्ट में मसौदा पेश किया है। शिया वक्फ बोर्ड के मसौदे के मुताबिक विवादित जगह पर राम मंदिर बनाई जाए और मस्जिद को लखनऊ में बने, जिसका का नाम मस्जिद-ए-अमन रखा जाए। शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड के इस मसौदा से मुस्लिम पक्षकार सहमत नहीं हैं।
मुस्लिम पक्षकार ने कहा कि शिया वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष वसीम रिजवी भ्रष्टाचार के आरोपों से बरी होने और निजी फायदे के लिए राममंदिर का राग अलाप रहे हैं। शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड के इस मसौदा पर रजा पद ने मुस्लिम पक्षकारों से बात की। मुस्लिम पक्षकारों का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला ही आदर्श फैसला होगा। इसके अलावा कोई और बात करना निराधार है।
इस मसौदे को कानूनी मान्यता नहीं-खालिक
अयोध्या मामले में अपीलकर्ता मौलाना महफुजुर्ह रहमान के नामित खालिक अहमद खान ने कहा- ये मसौदे वसीम रिजवी की अपनी राय है, जिसकी कोई कानूनी मान्यता नहीं है। मुस्लिम पक्षकारों की एक राय शुरू से सुप्रीम कोर्ट का फैसला ही इस मसले का हल है।
खालिक ने कहा कि राम मंदिर बनाई जाए हमें कोई हर्ज नहीं है, लेकिन वो अपनी जगह बनाई जाए न की बाबरी मस्जिद की जगह पर, जैसा कि वसीम रिजवी कह रहे हैं कि मस्जिद कहीं और बनेगी तो वह बाबरी मस्जिद का रिप्लेसमेंट नहीं हो सकता है।
अयोध्या मामले में मुस्लिम पक्षकार हासिम अंसारी के बेटे इकबाल अंसारी ने कहा- वसीम रिजवी के राय से शिया वक्फ बोर्ड और शिया समुदाय ही सहमत नहीं है। वसीम रिजवी भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे हुए हैं, उससे बचने के लिए राममंदिर की बात कर रहे हैं। इकबाल कहते हैं कि अयोध्या मामले में वसीम रिजवी का कोई सीधा जुड़ाव नहीं है। ऐसे में वसीम रिजवी की बातें कोई अहमियत नहीं रखती है।
इकबाल ने कहा कि वसीम रिजवी बीजेपी का दिल जीतने के लिए सारे जतन कर रहे हैं। उनका कहना है- मामला सुप्रीम कोर्ट में है और कोर्ट के जरिए ही फैसला होगा।

निजी मुफीद के लिए है ये मसौदा
मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सदस्य मौलाना खालिद रशीद फिरंगी महली ने कहा कि शिया वक्फ बोर्ड के मसौदे की कोई अहमियत नहीं है। हाईकोर्ट ने 1947 में फैसला करके साफ कर दिया है कि बाबरी मस्जिद शिया वक्फ बोर्ड का नहीं बल्कि सुन्नी वक्फ बोर्ड का है।
फिरंगी महली का कहना है कि मामला सुप्रीम कोर्ट में फाइनल दौर में है। वसीम रिजवी अपने निजी फायदे कि लिए मामले में कन्फ्यूजन पैदा कर रहे हैं। वो सुप्रीम कोर्ट में अपील कर्ता भी नहीं है और न ही उससे जुड़ सकते हैं, वो सिर्फ मीडिया में बने रहने के लिए ये सब कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने साफ कर दिया है कि सुप्रीम कोर्ट का जो भी फैसला होगा वो मान्य होगा। इससे दोनों समुदाय के पक्षकारों को माननी चाहिए। सुप्रीमकोर्ट के फैसला के बाद हमेशा के लिए इस मसले का हल हो जाएगा और इस मुद्दे पर हमेंशा के लिए सियासत भी खत्म हो जाएगी।

नेपाल चीन की डील हुयी खत्म, भारत को मिल सकता है मौका

नेपाल ने चीन को बड़ा झटका देते हुये बुधी गंडाकी नदी पर बनाए जा रहे हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट के चीनी कंपनी के साथ कॉन्ट्रैक्ट को रद्द कर दिया है। नेपाल के उपप्रधानमंत्री कमल थापा ने मंगलवार को ट्वीट कर इस बात की जानकारी दी। खबर है कि अब ये कॉन्ट्रैक्ट किसी भारतीय कंपनी को मिल सकता है।

कमल थापा ने ट्वीट किया, कैबिनेट ने गेचोउबा ग्रुप के साथ बुधी गंडाकी नदी पर बनने वाले हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट को रद्द कर दिया है। हालांकि, जब चीन की ओर से इस पर कोई टिप्पणी करने को कहा गया तो चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि उन्हें इस बारे में अभी कोई ठोस जानकारी नहीं है, नेपाल और चीन के संबंध काफी अच्छे हैं।
ये प्रोजेक्ट भारतीय कंपनी एनएचपीसी को मिल सकता है। बता दें कि जब नेपाल सरकार ने चीनी कंपनी के साथ इस प्रोजेक्ट को लेकर डील की थी, उसी के बाद ही चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के वन बेल्ट वन रोड के समर्थन की बात कही थी।

चीन के सिल्क रूट पर संकट, पाकिस्तान में आतंक का साया-इंडोनेशिया में शुरू ही नहीं हुआ काम

आपको बता दें कि पूर्व की प्रचंड सरकार के द्वारा यह प्रोजेक्ट चीन की गेचोउबा ग्रुप को दिया था। उस दौरान ऐसा आरोप लगाया गया था कि इस प्रोजेक्ट की बोली की प्रक्रिया सही तरीके से नहीं की गई और ऐसे ही चीनी कंपनी को प्रोजेक्ट सौंप दिया गया। यह प्रोजेक्ट नेपाल की राजधानी काठमांडू से 50 किलोमीटर की दूरी पर है। इससे करीब 1200 मेगावाट की बिजली उत्पन्न होने की उम्मीद है।

गौरतलब है कि नेपाल का बॉर्डर भारत और चीन की सीमा से लगता है। इस लिहाज से भारत और चीन के बीच नेपाल का रोल काफी अहम हो जाता है। हाल ही में डोकलाम विवाद के दौरान नेपाली पीएम शेरबहादुर देउबा ने भारत का दौरा किया था। जिस पर चीन ने भारत को आंखें दिखाई थीं।

चीन की ओर से कहा गया था कि भारत आर्थिक मदद की बदौलत नेपाल को रिझाने और वहां चीन के प्रभाव को कम करने का सपना न देखे। चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स ने अपने लेख में भारत को चेतावनी दी है कि अगर चीन भी ऐसा करने लगा तो भारत को मुंह की खानी पड़ेगी।

जानिए एक नवंबर को कितने राज्यों का है स्थापना दिवस

पांच राज्यों मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, केरल, हरियाणा और कर्नाटक का स्थापना दिवस आज यानी एक नवंबर को है। आज ही दिन इन पांचों राज्यों की आधारशिला रखी गई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इन सभी राज्यों के लोगों को स्थापना दिवस की बधाई दी है।
प्रधानमंत्री ने ट्वीट किया, राज्य के स्थापना दिवस के अवसर पर मध्यप्रदेश के निवासियों के लिए शुभकामनाएं, जिन्होंने देश के विकास में उल्लेखनीय योगदान दिया है। एक अन्य ट्वीट में उन्होंने राज्य के स्थापना दिवस पर छत्तीसगढ़ के निवासियों को बधाई दी और उन्होंने यह भी कामना की कि राज्य विकास की नई ऊंचाइयों को छूए।
प्रधानमंत्री ने लिखा, विकास के पथ पर तेजी से अग्रसर और जय जवान, जय किसान की भावना को साकार करने वाले हरियाणा के लोगों को स्थापना दिवस की ढेरों बधाई।
प्रधानमंत्री ने आगे लिखा, हरियाणा के लोगों को स्थापना दिवस पर ढेरों बधाई, जो विकास के मार्ग और जय जवान, जय किसान का अनुसरण कर रहे हैं।
पीएम ने कन्नड़ राज्योत्सव पर कर्नाटक के लोगों को भी बधाई दी। उन्होंने ट्वीट किया, कर्नाटक के लोगों को कन्नड़ राज्योत्सव पर मेरी शुभकामनाएं। हमें कर्नाटक की समृद्ध संस्कृति पर गर्व है। मैं राज्य की प्रगति के लिए प्रार्थना करता हूं।
प्रधानमंत्री मोदी ने केरल के लोगों को स्थापना दिवस पर शुभकामनाएं दी और कहा, सभी मलयालियों को शुभकामनाएं। मैं आने वाले वर्षों में राज्य की शांति, प्रगति और समृद्धि के लिए प्रार्थना करता हूं।

एक बार फिर पाकिस्तान की मदद करने की तैयारी में चीन

भारत और चीन के रिश्ते पिछले कुछ समय से अच्छे नहीं रहे हैं, लेकिन अब लगता है कि ये रिश्ते और भी बिगड़ सकते हैं। चीन ने एक बार फिर जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर को बचाने की पुख्ता तैयारी कर ली है। चीन अपनी ताकत का इस्तेमाल कर अजहर को ग्लोबल आतंकी घोषित होने से बचाएगा और अपने दोस्त पाकिस्तान का साथ देगा।

अंग्रेजी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक, अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस समेत कई देशों ने मसूद अजहर पर बैन की मांग की है और प्रस्ताव पेश किया है, लेकिन चीन पिछले कुछ समय से अपनी वीटो पावर का इस्तेमाल कर उसे बचाने में जुटा था।

बीते जनवरी में चीन ने प्रस्ताव के खिलाफ वीटो पेश किया था, बाद में इसकी समय सीमा को बढ़ाया गया। अब इसी सप्ताह गुरुवार को इस वीटो की मियाद खत्म हो रही है।

नियमों के अनुसार, अब इस मियाद को और आगे नहीं बढ़ाया जा सकता है। यानि अब चीन इस प्रस्ताव को पूरी तरह से खारिज करेगा, जिससे मसूद अजहर को ग्लोबल आतंकी घोषित करवाने की भारत की कोशिशों पर पानी फिर सकता है। गौरतलब है कि चीन सयुंक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का स्थाई सदस्य है।

भारत ने लगातार चीन के सामने इस बात को रखा है कि मसूद अजहर भारत में कई हमलों को करवाने में शामिल रहा है। इसमें पठानकोट एयरबेस पर हुआ हमला भी शामिल है, लेकिन चीन ने लगातार कहा है कि अजहर के खिलाफ सबूत नहीं है। गौरतलब है कि चीन पहले भी कई मौकों पर पाकिस्तान की मदद करता हुआ नजर आया है।

जानिए किन छोटी-छोटी बातों के ध्यान रखने से शनि की साढ़ेसाती से बचा जा सकता है

न्याय के देवता शनि ने 26 अक्टूबर को धनु राशि में प्रवेश किया है, शनि यहां पर 23 जनवरी 2020 तक रहेगा। इसके पहले यह वक्री होने के कारण वृश्चिक राशि में था। अब शनि लंबे समय तक धनु राशि में बने रहेंगे। अलग-अलग राशियों पर इस राशि परिवर्तन का प्रभाव भी अलग ही पड़ने वाला है। कुछ राशियों की साढ़साती खत्म हो रही है तो कुछ की शुरू. हम आपको बताएंगे कि कहां आप लाभ उठा सकते हैं और कहां आपको बेहद सावधान रहना होगा। साथ ही किन उपायों से शनि के प्रकोप से बच सकते हैं।
तुला राशि की साढ़ेसाती समाप्त हो जायेगी। मकर राशि पर साढ़ेसाती का पहला चरण शुरू हो जाएगा।
वृश्चिक राशि पर साढ़ेसाती जारी रहेगी। धनु राशि पर साढ़ेसाती का मध्य रहेगा।
वृश्चिक राशि से साढ़ेसाती उतरती शुरू हो जायेगी। मेष राशि और सिंह राशि से ढैया उतर जायेगी।

मेष राशि के लिए शनि मध्यम रहेगा, नौकरी और धन के मामले में आपको खूब सफलताएं देगा लेकिन हड्डियों, पेट और मूत्र विकार की समस्या पर विशेष ध्यान देना जरूरी है। नियमित रूप से शनि मंत्र का जाप करने से लाभ होगा।
वृष राशि के लिए भी शनि का प्रभाव मध्यम ही रहेगा। शनि संपत्ति और वाहन का सुख देगा लेकिन दांपत्य जीवन में मतभेद बढ़ेगा। आंखों और वाणी की समस्या पर ध्यान दें।
मिथुन राशि के लोगों को शनि शुरुआत में बाधाएं देगा और बाद में लाभ। कड़ी मेहनत और संघर्ष करना पड़ सकता है। वैवाहिक जीवन के तालमेल पर ध्यान देना जरूरी है।
कर्क राशि वालों को शनि की कृपा मिलती रहेगी। विवाह, संतान और आर्थिक मामलों में सफलता मिलेगी। नौकरी में सफलता के योग हैं लेकिन विवाह में देरी हो सकती है।
सिंह राशि वालों को थोड़ी मानसिक चिंताएं हो सकती हैं लेकिन समाधान भी मिलेगा। चोट-चपेट और हड्डियों की समस्या से सावधान रहें।
कन्या राशि वाले लोगों को शनि कृपा से रिश्ते, नौकरी, कारोबार में सफलता मिलेगी। पुरानी समस्याएं दूर होंगी, नए लोग जीवन में जुड़ेंगे। बेवजह के मुकदमे और वाद-विवाद से बचें।
तुला राशि पर शनि की कृपा रहेगी। जीवन की तमाम रुकावटें दूर होंगी। संतान और करियर के मामले में लाभ होगा लेकिन बड़े अवसरों को हाथ से बिल्कुल न जाने दें।
वृश्चिक राशि वालों की शनि परीक्षा ले सकते हैं। नौकरी में समस्याएं और पद-प्रतिष्ठा पर आंच आ सकती है। ऐसे में सेहत पर ध्यान दें और अपयश से बचें।
धनु राशि वालों को यश और धन मिलेगा, लेकिन भागदौड़ काफी ज्यादा होगी। शनि आपका स्थान परिवर्तन भी जरूर कराएंगे। प्रेम और विवाह के मामलों में सावधान रहें।
मकर राशि को शुभ फल मिलेगा। आपके जीवन में बड़े बदलाव की शुरुआत होगी। शनि के कारण संपत्ति, धन और बेहतरीन करियर मिलेगा। जोड़ों के दर्द और वाणी पर विशेष ध्यान दें।
कुम्भ राशि वालों को शनि धन भी देगा और समस्याओं से राहत भी। करियर में आप बुलंदियों पर पहुंचेंगे, अचानक संपत्ति और वाहन का लाभ भी मिल सकता है।
मीन राशि वाले करियर के मामले में लाभ उठाएंगे, कई बड़े अवसर मिलेंगे। अतिविश्वास से बचें और बुजुर्गों की सलाह मानें. आगे जानिए कैसे शनि के प्रकोप से बच सकते हैं।
कुछ छोटी-छोटी बातों का ख्याल रखने से शनि की साढ़ेसाती या ढैया के बुरे परिणामों से बचा जा सकता हैं। जल्दी सोने और जल्दी उठने की आदत डालें और मांस-मदिरा से परहेज करें। नाखून और बालों की सफाई पर विशेष ध्यान दें। रोज सुबह और शाम से समय शनि मन्त्र का जाप करें। शनिवार को पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं। एक लोहे का छल्ला बाएं हाथ की मध्यमा अंगुली में पहनें। अपनी आय का कुछ हिस्सा जरूर दान करते रहें।

हूबहू सौ व पचास के नकली नोट देख रह गयी पुलिस दंग

महाराष्ट्र पुलिस ने मध्य प्रदेश के पुलिस के साथ मिलकर बीड शहर मे एक ऐसे कारखाने का भंडाफोड़ किया है जहां 100 और 50 रुपये के नोट छापने का अवैध धंधा चल रहा था। प्राप्त जानकारी के अनुसार बीड शहर में कई महीने से 100 और 50 रुपये के हुबहु नोट छापने का काम चल रहा था। जाली नोट छापने के लिए पेपर औरंगाबाद से लाया जा रहा था।

सैयद शुकूर शब्बीर नामक आरोपी को हिरासत में लिया गया है। पुलिस के मुताबिक बीड शहर के पेठ बीड थाना क्षेत्र के गांधी नगर में एक व्यक्ति 50 व 100 रुपये मूल्य की नकली नोट अवैध रूप से छपा रहा है, ऐसी जानकारी मध्य प्रदेश पुलिस मिली। उन्होंने तत्काल बीड पुलिस से संपर्क कर इसकी सूचना दी। इस मामले को गंभीरता से लेते हुए पुलिस अधीक्षक जी. श्रीधर इनके निर्देश पर पेठ बीड थाने के पुलिस निरीक्षक अनिल जाधव ने शेख शकूर के मकान पर छापा मारकर नकली नोट छापने की किताबें व डेढ़ लाख रुपए मूल्य के 50 व 100 के के नोट जब्त किए। पुलिस ने शेख शकूर को गिरफ्तार कर लिया है। शेख शकूर से किस-किस के संबंध हैं, पुलिस जांच में जुट गई है।

शेख शकूर बीड तहसील के नालवंडी गांव का रहने वाला है। दो साल पहले उसे एक अपने रिश्तेदार की लड़की के साथ जबरन बलात्कार के मामले में अरेस्ट किया गया था। वह औरंगाबाद के हर्सूल जेल में सजा काट रहा था। उसी दौरान शकूर की मुलाकात एक कैदी से हुई जो नकली नोट छापने के मामले में सजा काट रहा था। शकूर जब जेल से रिहा हुआ तो वह भी नकली नोट बनाने का कारोबार करने लगा। केवल आठवीं पास शकूर की करतूत से दोनों राज्यों की पुलिस सन्न रह गई है।

एक सप्ताह के भीतर मोदी ने किया दूसरी बार उत्तराखंड दौरा

प्रधानमंत्री नरेंन्द्र मोदी ने पहाड़ों की रानी मंसूरी पहुंच कर देश की सर्वोच्च प्रशासनिक सेवा के 369 प्रशिक्षुओं से मुलाकात कर संवाद कायम किया। गौरतलब है कि प्रधानमंत्री मोदी दो दिन के दौरे पर मंसूरी में आए है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सात दिन के भीतर दूसरी दफा उत्तराखंड आए। इसी माह बीती 20 अक्टूबर को केदारनाथ में उन्होंने आपदा से प्रभावित क्षेत्र में नई केदारपुरी के कार्यों का शिलान्यास किया था। इस बार मोदी दो दिनी दौरे पर गुरुवार को मसूरी स्थित एलबीएसएनएए पहुंचे हैं।

मोदी इस दौरान अकादमी में छह माह के 92वें फाउंडेशन कोर्स में प्रशिक्षण ले रहे 369 प्रशिक्षु आइएएस, आइपीएस एवं आइआरएस के साथ ही अपना अधिकतर वक्त बिताएंगे। गुरुवार दोपहर करीब दो बजे उन्होंने अकादमी पहुंचते ही सबसे पहले पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री एवं लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की मूर्तियों पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। इसके बाद उन्होंने पौधारोपण किया। परिसर में ही अकादमी के फैकल्टी सदस्यों और प्रशिक्षु अधिकारियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ फोटो खिंचवाए।

जाने, गूगल किसकी जयंती मना रहा है?

उत्तराखंड के नैन सिंह को गूगल ने श्रद्धांजलि दी है। गूगल ने डूडल के जरिये उनके कार्य को सराह रहा है। रायल ज्योग्रेफिकल सोसायटी एवं सर्वे ऑफ इंडिया के लिए पं. नैन सिंह रावत भीष्म पितामह के रूप में माने जाते हैं। कहते हैं नैन सिंह रावत ही दुनिया के पहले शख्स थे जिन्होंने लहासा की समुद्र तल से ऊंचाई कितनी है, बताई। उन्होंने अक्षांश और देशांतर क्या हैं, बताया। इस दौरान करीब 800 किमी तक पैदल यात्रा की और दुनिया को ये भी बताया कि ब्रह्मपुत्र और स्वांग एक ही नदी है।

भारत चीन सीमा पर स्थित मुनस्यारी तहसील के अंतिम गांव मिलम निवासी पं. नैन सिंह का जन्म 21 अक्टूबर 1830 को अमर सिंह मिलव्वाल के घर हुआ था। यह परिवार सामान्य परिवार था। अलबत्ता नैन सिंह के दादा धाम सिंह रावत को कुमाऊं के राजा दीप चंद ने 1735 में गोलमा और कोटल गांव जागीर में बख्शे थे। पं. नैन सिंह रावत की शिक्षा प्राथमिक स्तर तक ही हुई थी। बाद में इसी विद्यालय में वह शिक्षक हो गए थे। शिक्षक बनने पर उन्हें लोगों ने पंडित की उपाधि दे दी। उन्हें इसी नाम से जाना जाता है। इनके चचेरे भाई स्व. किशन सिंह रावत भी शिक्षक थे। दोनों भाइयों को पंडित की उपाधि मिली थी।
पं. नैन सिंह रावत ने अपने जीवन में उपलब्धि वर्ष 1955-56 से प्रारंभ की। लाघ -इट-वाइट बंधुओं के साथ दुभाषिए तथा सर्वेक्षक के रूप में तुर्किस्तान की यात्रा कर चुके थे। तिब्बती भाषा का ज्ञान और इनकी कार्यकुशलता से प्रभावित जर्मन बंधु इन्हें अपने साथ यूरोप ले जाना चाहते थे। नैन सिंह रावत रावलपिंडी तक तो पहुंचे परंतु अपनी माटी की याद आते ही वापस लौट आए। वर्ष 1863 में उन्हें देहरादून बुलाया, जहां पर सुपरिडेंटेंट कर्नल जेटी वाकर द्वारा ग्रेट ट्रिग्नोमेट्रिक सर्वे में एक अन्वेषक के रूप में की गई और उन्हें भारतीय सीमा के बाहरी क्षेत्रों में कार्य करने के लिए टापोग्राफिकल आवजर्वेशन का प्रशिक्षण दिया गया।
भ्रमण करने का था शौक
बिट्रिश भारत के दौरान अंग्रेजों ने गुप्त रूप से तिब्बत और रूस के दक्षिणी भाग का सर्वेक्षण की योजना बनाई। इस कार्य के लिए अंग्रेजों को पं. नैन सिंह रावत का नाम सुझाया। अंग्रेजों ने उन्हें नाप जोख का कार्य सौंपा। उन्हें ब्रह्मपुत्र घाटी से लेकर यारकंद इलाके तक की नाप जोख करनी थी। इस कार्य के लिए उनके भाई किशन सिंह रावत और पांच लोग शामिल किए गए। यह कार्य गुप्त होने से नाप जोख खुले आम नहीं कर सकते थे।

पंडित नैन सिंह द्वारा वर्ष 1865 से 1885 के मध्य लिखे गए यात्रा वर्णन में हिमालय तिब्बत तथा मध्य एशिया की तत्कालीन भाषा के साथ अनेक एशिसाई समाजों की दुलर्भ झलक मिलती है। इस दौरान उन्होंने 1865-66 में काठमांडू-ल्हासा-मानसरोवर, 1967 सतलज सिंधु उद्गम व थेक जालुंग, 1870 डगलस फोरसिथ का पहला यारकंद-काशगर मिशन, 1873 डगलस फोरसिथ का दूसरा यारकंद-काशगर मिशन, 1874-75 लेह-ल्हासा, तवांग थी।
पं. नैन सिंह रावत द्वारा तीन पुस्तकें ठोक-ज्यालुंग की यात्रा, यारकंद यात्रा और अक्षांस दर्पण पुस्तकें 1871 से 73 के मध्य प्रकाशित हुई थी। बताया जाता है कि उन्होंने अपनी जीवनी भी लिखी थी, लेकिन वह खो गई। तिब्बत की राजधानी ल्हासा का इसमें सुंदर वर्णन था। वर्ष 1890 में उनका देहांत हो गया।
कम्पेनियन इंडियन इम्पायर अवार्ड से हुए थे सम्मानित
1200 मील पैदल चल कर सर्वे करने वाले पं. नैन सिंह रावत को अंग्रेजी हुकूमत ने कोलकाता में सीआईएस (काम्पेनियन इंडियर अवार्ड) से सम्मानित किया था। तब एक भारतीय को अंग्रेजों द्वारा इतने बड़े सम्मान से सम्मानित किए जाने पर कोलकाता में जश्न मना था। भारतीयों ने इसका स्वागत अपने घरों में घी के दीये जलाकर किया था।
आज गूगल नैन सिंह की जयंती मना रहा है
सर्च इंजन गूगल ने नैन सिंह रावत का डूडल बनाया है, जिन्हें बिना किसी आधुनिक उपकरण के पूरे तिब्बत का नक्शा तैयार करने का श्रेय जाता है। कहा जाता है कि अंग्रेजी हुकूमत के लोग भी उनका नाम पूरे सम्मान के साथ लेते थे। उस समय तिबब्त में किसी विदेशी शख्स के जाने पर सख्त मनाही थी। अगर कोई चोरी छिपे तिब्बत पहुंच भी जाए तो पकड़े जाने पर उसे मौत तक की सजा दी सकती थी। ऐसे में स्थानीय निवासी नैन सिंह रावत अपने भाई के साथ रस्सी, थर्मामीटर और कंपस लेकर पूरा तिब्बत नाप आए। दरअसल 19वीं शताब्दी में अंग्रेज भारत का नक्शा तैयार कर रहे थे लेकिन तिब्बत का नक्शा बनाने में उन्हें परेशानी आ रही थी। तब उन्होंने किसी भारतीय नागरिक को ही वहां भेजने की योजना बनाई। जिसपर साल 1863 में अंग्रेज सरकार को दो ऐसे लोग मिल गए जो तिब्बत जान के लिए तैयार हो गए।

चंडीगढ़ में ली शंकराचार्य स्वामी माधवाश्रम महाराज ने अंतिम सांसे

उत्तराखंड क्षेत्र से शंकराचार्य के पद पर सुशोभित होने वाले पहले संन्यासी शंकराचार्य स्वामी माधवाश्रम जी महाराज ने शुक्रवार को चंडीगढ़ में अंतिम सांसे ली।
शंकराचार्य स्वामी माधवाश्रम महाराज भारत के बदरीनाथ तीर्थ के समीप जोशीमठ तीर्थ स्थित ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य थे। वर्ष 1993 से ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य पद पर आसीन माधवाश्रम महाराज ने शुक्रवार को चंडीगढ़ में देह त्याग दिया। महाराज लंबे समय से बीमार चल रहे थे। उनके पार्थिव शरीर को देर शाम तक ऋषिकेश स्थित दंडीबाड़ा आश्रम में लाया जाएगा। पार्थिव शरीर को ऋषिकेश स्थित दण्डीबाड़ा श्रीजनार्दन आश्रम में आम लोगों के दर्शनार्थ के लिए रखा जाएगा। इसके बाद विधि विधान के साथ आश्रम में जलसमाधि दी जाएगी। उनके अनुयायियों का तीर्थनगरी पहुंचने का क्रम शुरू हो गया है। स्वामी जी उत्तराखण्ड मूल से शंकराचार्य के पद पर सुशोभित होने वाले पहले संन्यासी थे। वे अखिल भारतीय धर्म संघ समेत विभिन्न धार्मिक संस्थाओं के अघ्यक्ष एवं सदस्य रहे।
गढ़वाल मंडल के रूद्रप्रयाग जिले में जन्में थे शंकराचार्य माधवाश्रम महाराज
स्वामी माधवाश्रम महाराज का जन्म उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले के अन्तर्गत बेंजी ग्राम में हुआ था। इनका मूल नाम केशवानन्द था। आरम्भिक विद्यालयी शिक्षा के पश्चात इन्होंने हरिद्वार, अम्बाला में सनातन धर्म संस्कृत कॉलेज, वृंदावन में बंशीवट में श्री प्रभुदत्त ब्रह्मचारी जी के आश्रम एवं वाराणसी समेत देश के विभिन्न स्थानों पर वेदों एवं धर्मशास्त्रों की दीक्षा ली। विवाह के उपरान्त कुछ वर्ष पश्चात इन्होंने संन्यास ग्रहण किया। इनकी विद्वता को देखते हुए धर्म संघ के तत्वाधान में धर्मसम्राट स्वामी करपात्री जी के आशीर्वाद से जगन्नाथ पुरीपीठ के तत्कालीन शंकराचार्य स्वामी निरंजनदेव तीर्थ जी ने इन्हें ज्योतिष्पीठ का शंकराचार्य नियुक्त किया। तब से वे इस परम्परा का बखूबी पालन कर रहे थे। स्वामी माधवाश्रम महाराज धर्मप्रचार एवं गौहत्या विरोधी विभिन्न आंदोलनों एवं संगठनों से जुड़े थे।

केदारनाथ निर्माण में मोदी का देश के उद्यमियों को निमंत्रण

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार को केदारनाथ धाम में केदारपुरी के पुनर्निर्माण से संबंधित पांच परियोजनाओं का शिलान्यास किया। इस अवसर पर राज्यपाल डॉ कृष्ण कान्त पाल और मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत भी उपस्थित थे। प्रधानमंत्री मोदी ने केदार मंदिर परिसर पहुंचने के मुख्य मार्ग के चौड़ीकरण और सौंदर्यीकरण कार्य, सरस्वती और मंदाकिनी नदियों के बाढ़ सुरक्षा और घाट निर्माण कार्य, तीर्थ पुरोहितों के लिए आवासीय भवनों के निर्माण कार्य तथा आदि शंकराचार्य के समाधि स्थल के पुनर्निर्माण कार्य का शिलान्यास किया। इस अवसर पर आयोजित समारोह में उपस्थित जन समुदाय को संबोधित करते हुए

प्रधानमंत्री ने कहा कि श्री केदारनाथ में प्रकृति और पर्यावरण के अनुकूल भव्य पुनर्निर्माण कार्य किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह पुनर्निर्माण कार्य एक निश्चित समयसीमा में तीर्थ क्षेत्र की गरिमा के अनुकूल, पुरोहितों और पंडितों की व्यवस्था और आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए किया जाएगा। प्रधानमंत्री ने पुनर्निर्माण कार्य के लिए देश की राज्य सरकारों को भी अपना योगदान देने के लिए कहा। उन्होंने आशा व्यक्त की कि औद्योगिक घराने सीएसआर के अंतर्गत पुर्ननिर्माण कार्य में योगदान देंगे। प्रधानमंत्री ने पर्यावरण के सभी नियमों का पालन करने की बात भी कही। उन्होंने कहा कि केदारपुरी में आधुनिक पुनर्निर्माण किया जाएगा, परंतु तीर्थ क्षेत्र की आत्मा और हिमालय की आध्यात्मिकता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। उत्तराखंड सरकार की सराहना करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने 6 महीने के अल्प समय में महत्वपूर्ण फैसले लिए हैं और विकास को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाने का संकल्प लिया है। प्रधानमंत्री ने हिमालयी राज्यों की विशिष्टता की सराहना करते हुए उत्तराखंड को 2022 तक ऑर्गेनिक स्टेट बनने का संकल्प लेने को कहा। उन्होंने कहा कि अभी दुनिया होलिस्टिक हेल्थ केयर की ओर चल रही है। ऐसे में केमिकल फर्टिलाइजर को अस्वीकार कर ऑर्गेनिक उत्पादों की दुनिया में उत्तराखंड अग्रणी भूमिका निभा सकता है। प्रधानमंत्री ने उत्तराखंड की स्वच्छता अभियान की भी सराहना करते हुए कहा कि उत्तराखंड देश में ग्रामीण क्षेत्रों में खुले में शौच से मुक्त करने वाला चौथा राज्य बन गया है। प्रधानमंत्री ने कहा कि देश में लगभग चार करोड़ परिवार ऐसे हैं जहां अभी तक बिजली नहीं पहुंची है। ऐसे लोगों के लिए प्रधानमंत्री सौभाग्य योजना लागू की गई है। उन्होंने आशा व्यक्त की उत्तराखंड सरकार प्रधानमंत्री सौभाग्य योजना को अपने राज्य में शीघ्र से शीघ्र पूरा करने का बीड़ा उठाएगी। उन्होंने कहा कि सभी हिमालयन राज्यों, सभी राज्यों के बीच विकास की दौड़ की एक स्वस्थ प्रतिस्पर्धा होनी चाहिए। प्रधानमंत्री ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार दोनों यह कार्य कर रहे हैं कि पहाड़ की जवानी और पहाड़ का पानी पहाड़ के काम आए। बाबा केदार के जयजयकारो के बीच प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गढ़वाली भाषा में अपना भाषण आरम्भ करते हुए बाबा केदारनाथ से देश, दुनिया व राज्य के लोगो के लिए खुशहाली की कामना की।

प्रधानमंत्री ने भव्य व आधुनिक केदारपुरी पुनर्निर्माण व विकास हेतु 5 प्रमुख योजनाओं का शिलान्यास किया। इनके अंतर्गत मंदिर परिसर की मुख्य सड़क का चौड़ीकरण किया जाएगा। इन कार्य में आरसीसी तथा आधुनिक तकनीकी का प्रयोग किया जाएगा। पुरोहितों हेतु थ्री इन वन आवासीय परिसरों का निर्माण किया जाएगा। जिसमें पुरोहितों की रहने की व्यवस्था के अतिरिक्त निचली मंजिल पर श्रद्धालुओं व यात्रियों तथा ऊपरी मंजिल पर उनके यजमानों व मेहमानों की व्यवस्था की जाएगी। आवासीय परिसरों में चौबीस घण्टे बिजली, पानी व स्वच्छता सुविधाओं की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाएगी। मंदिर परिसर में पोस्ट ऑफिस, टेलीफोन सुविधाओं तथा कम्युनिकेशन सुविधाओं की भी व्यवस्था की जाएगी। मन्दाकिनी और सरस्वती नदियों पर रिटेनिंग वॉल व घाटों का निर्माण किया जाएगा। आदि शंकराचार्य के समाधिस्थल का पुनर्निर्माण किया जाएगा। प्रधानमंत्री मोदी ने देश के अन्य राज्य सरकारों, सीएसआर के माध्यम से व्यापार जगत के उद्यमियों को निर्माण कार्य में सहयोग का निमंत्रण दिया। इस अवसर पर अपने सम्बोधन में मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कहा कि प्रधानमंत्री जी का बाबा केदार जी के आंगन में आने पर उत्तराखण्ड की ओर से हार्दिक अभिनन्दन व स्वागत है। प्रधानमंत्री द्वारा केदारनाथ मंदिर के कपाट खुलने तथा कपाट बन्द होने से पूर्व समाधि पूजा के समय लगभग 6 माह के भीतर दो बार दर्शन करने से पूरे विश्व में सुरक्षित व सुखमय केदारनाथ यात्रा का संदेश गया है। प्रधानमंत्री ने इस वर्ष दीपावली का पर्व सीमा पर तैनात हमारे वीर सैनिकों के साथ मनाया। सैनिकों की वीरभूमि उत्तराखण्ड के लिए यह सम्मान की बात है।

इससे पूर्व प्रधानमंत्री ने केदारनाथ मंदिर पहुंचकर गर्भगृह में सम्पूर्ण विधिविधान व मंत्रोचारण के साथ भगवान केदार का रूद्राभिषेक किया तथा मंदिर की परिक्रमा की। प्रधानमंत्री मोदी ने केदारनाथ मंदिर परिसर में लगभग डेढ़ घण्टे से अधिक समय व्यतीत किया। प्रधानमंत्री के समक्ष उत्तराखंड सरकार द्वारा तैयार किया केदारपुरी के पुनर्निर्माण पर एक 3डी प्रस्तुतीकरण भी दिया गया। प्रधानमंत्री मोदी को राज्यपाल डॉ. कृष्णकान्त पाल तथा मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने अंगवस्त्र तथा केदारनाथ मंदिर की अनुकृति भेंट की।