अयोध्या रामजन्म भूमिः देश दुनिया की नजरें सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर टिकेगी

देश विदेश में अयोध्या का नाम सुनते साथ ही हिन्दूओं की आस्था के प्रतीक श्रीराम की तस्वीर उभर कर सामने आ जाती है। इस मामले में नया घटनाक्रम यह है कि अब अयोध्या रामजन्म भूमि-बाबरी मस्जिद विवाद की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने 11 अगस्त से करने का फैसला किया है। इसके लिए सुप्रीम कोर्ट ने 3 जजों की स्पेशल बेंच तैयार की है। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने इस विवाद को कोर्ट के बाहर सुलझाने का सुझाव दिया था। ये एक ऐसा विवाद है, जिसकी आंच में भारतीय राजनीति आजादी के बाद से ही झुलसती रही है। 6 दिसंबर 1992 को बाबरी मस्जिद ढहा दी गई थी, जिसका मुकदमा आज भी लंबित है।
आपकों बताते चले कि देश की आजादी से पूर्व इस स्थान को लेकर दोनों पक्षों में विवाद है। एक ओर हिन्दू इसे श्री राम की जन्म स्थली बताकर राम मंदिर का निर्माण करना चाहते है वहीं मुस्लिम इसे बाबरी मस्जिद बताकर अपना पक्ष रख रहे है। दोनों के दावे अब तक कई कोर्ट से होते हुए सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गये है। पूर्व में इलाहाबाद कोर्ट ने उक्त स्थान की खुदाई करवाकर जिस पक्ष के अवशेष मिलेंगे, उसका दावा पुख्ता माना जायेगा कहा था। जिस पर खुदाई के दौरान हिन्दूओं से संबधित अवशेष मिले जिस पर कोर्ट ने इस स्थान को हिन्दुओं का माना। मुस्लिम पक्ष के सुप्रीम कोर्ट पहुंचने के बाद दोनों पक्षों ने अपने-अपने दावे किये।
इस बीच सुप्रीम कोर्ट ने इस विवाद को कोर्ट के बाहर सुलझाने का सुझाव भी दिया। लेकिन कोई ठोस निर्णय सामने नही आ सका। अब फिर सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या रामजन्म भूमि-बाबरी मस्जिद विवाद की सुनवाई 11 अगस्त से करने का फैसला किया है। अब देश दुनिया की नजरें फिर से हिन्दुस्तान की ओर होंगी। सुप्रीम कोर्ट के ट्रायल और फैसले से देश की राजनीति में इसका सीधा असर पड़ने की उम्मीद जताई जा रही है।

उत्तराखंड की राजनीति में जीना का नाम अमरः सीएम

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत मौसम की खराबी के कारण शुक्रवार को सोमेश्वर, अल्मोडा में प्रस्तावित स्व.श्री सोबन सिंह जीना की जयंती के अवसर पर उनकी मूर्ति अनावरण कार्यक्रम एवं जनसभा में सम्मिलित नही हो पाए। परन्तु इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने दूरभाष पर वहां आयोजित कार्यक्रम में उपस्थित जन समुदाय को संबांधित करते हुए कहा कि स्व.जीना जी की राजनीति में एक आदर्श पुरूष के रूप में गणना होती है। स्व.जीना ने उत्तराखण्ड राज्य निर्माण एवं सार्वजनिक जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। राज्य निर्माण से पूर्व उत्तराखण्ड कैसा होना चाहिए, उसके चिंतन की दिशा में जो काम स्व.जीना जी ने किया वह इतिहास के स्वर्णिम अक्षरों में अंकित रहेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि स्व.जीना जी का राजनीतिक जीवन साफ-सुथरा रहा है। इसके साथ ही उनकी पहचान नई पीढ़ी के लिए एक आदर्श पुरूष के रूप में सदैव बनी रहेगी। मुख्यमंत्री स्व. सोबन सिंह जीना की जयंती के अवसर पर उन्हें श्रद्धांजलि भी अर्पित की।
मुख्यमंत्री ने सोमेश्वर विधानसभा के लिए कई महत्वपूर्ण घोषणाएं की। उन्होंने तालुका में 33/11 के.वी. उपसंस्थान निर्माण का कार्य, राजकीय जूनियर हाईस्कूल भटूली का पुर्ननिर्माण कार्य, जनपद अल्मोड़ा के विकासखण्ड तालुका में सोमेश्वर में स्थित पुलिस थाना भवन की सांई नदी से बाढ़ सुरक्षा का कार्य, दौलाघाट ग्राम समूह पेयजल योजना का कार्य एवं शीतलाखेत को पर्यटन सर्किट से जोड़ने की स्वीकृति प्रदान की।
इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने जनपद अल्मोडा के विकासखण्ड ताडीखेत में कोसी नदी पर वृहद श्रोत संवर्धन कार्य के अन्तर्गत काकडीघाट के पास प्रस्तावित झील निर्माण हेतु सर्वेक्षण, अनुसंधान एवं डी.पी.आर. तैयार करने के कार्यों का प्राक्कलन बनाने, सोमेश्वर के सुनियोजित विकास के लिए मास्टर प्लान तैयार करना, सोमेश्वर में पार्किंग का निर्माण, सोमेश्वर में आधुनिक शौचालय निर्माण का कार्य, जनपद अल्मोडा के विधान सभा सोमेश्वर के अन्तर्गत नैनी जाना गिनाई मोटर मार्ग का डामरीकरण एवं सुधारीकरण (लगभग 8 किमी) के कार्य की घोषणा की।
मुख्यमंत्री ने जनपद अल्मोडा के विधानसभा सोमेश्वर के अन्तर्गत कालिका दलमोटी मोटर मार्ग का डामरीकरण एवं सुधार (5.40किमी) का कार्य, जनपद अल्मोड़ा के विधान सभा सोमेश्वर के अन्तर्गत मजखाली-सुन्दरखाल-बिटुलिया मोटर मार्ग के अवशेष भाग के पार्ट-1 एवं पार्ट-2 का निर्माण (लगभग 1.750 किमी) का कार्य, सोमेश्वर में पेयजल पम्पिंग योजना की स्वीकृति एवं काकडीघाट में मेडिटेशन सेंटर बनाने की भी घोषणा की।

लाल चौक पर तिरंगा फहराने में इसबार मिलेगी कामयाबी!

गुजरात मे अहमदाबाद की 14 साल की मुस्लिम बच्ची ने ऐलान किया है कि इस राखी के दिन वह श्रीनगर के लाल चौक पर तिरंगा लहराएंगी। एक समाचार एजेंसी से बातचीत करते हुए तंजीम मेरानी ने कहा कि मैं राखी का त्योहार जवान भाइयों के साथ मनाने वाली हूं और जवानों को राखी भी बांधूंगी।
तंजीम ने बताया, पिछले साल उसे एयरपोर्ट पर ही रोक दिया गया था और जिस पर उसने वहीं पर तिरंगा फहराया था। तंजीम का कहना है कि इस साल वह लाल चौक पर तिरंगा फहराकर ही रहेगी। उसका कहना है कि इस बार मैंने रक्षाबंधन का दिन इसलिए चुना है क्योंकि यह भाई-बहन का त्योहार है। राखी का यह त्योहार मैंने सेना के जवान भाइयों के साथ मनाने का संकल्प लिया है।
तंजीम की इस कोशिश में परिवार का भी पूरा समर्थन है। तंजीम के पिता बताते है कि मुझे भी लगता है कि कश्मीर जाने के लिए यह सही वक्त नहीं है, लेकिन सही वक्त के लिए हम कब तक इंतजार करें? किसी न किसी को तो इस दिशा में पहल करनी ही होगी जैसे इस बार मेरी बेटी ने यह शुरुआत की है। मैं अपनी बेटी की कोशिश के साथ खड़ा हूं। यह एक त्योहार है और इसें हिंदू-मुस्लिम के चश्मे से नहीं देखना चाहिए।
गौरतलब है कि पिछले साल भी तंजीम श्रीनगर के लाल चौक पर तिरंगा फहराना चाहती थीं। 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस के कारण सुरक्षा व्यवस्था काफी कड़ी थी। इस वजह से तंजीम को लाल चौक पर तिरंगा लहराने की अनुमति नहीं मिल सकी थी।

भद्रा काल और चन्द्र ग्रहण में न बांधे राखी

रक्षा बंधन का यह पवित्र पर्व इस बार सिर्फ पौने तीन घंटे तक ही मनाया जा सकता है। यानी आप पौने तीन घंटे के बीच ही अपने भाई की कलाई को अपनी प्यारी-प्यारी राखियों से सजा सकते हैं। सुबह भद्रा और फिर चंद्रगहण का सूतक लगने से यह स्थिति बन रही है।
दरअसल इस बार रक्षा बंधन का यह त्योहार सात अगस्त को पड़ रहा है और इसी दिन चंद्रगहण भी है। सुबह भद्रा होने और इसके बाद चंद्र ग्रहण का सूतक लगने से रक्षाबंधन पर यह स्थिति बन रही है। चंद्र ग्रहण लगभग एक घंटे 57 मिनट रहेगा। आचार्य डॉ. नवीन चंद्र जोशी बताते हैं कि रक्षाबंधन के लिए सुबह 11.05 बजे तक भद्रा है। भद्रा में भाई को राखी नहीं बांधी जाती है।
दोपहर 1.52 बजे चंद्र ग्रहण का सूतक चल रहा है और सूतक में भी रक्षाबंधन पर्व नहीं मनाया जा सकता। इसलिए सुबह 11.05 बजे से दोपहर 1.52 बजे तक यानी लगभग पौने तीन घंटे ही रक्षाबंधन का पर्व मनाया जा सकेगा।
वहीं माना जा रहा है कि इस ग्रहण के चलते समुद्र में भी उथल-पुथल आदि के योग बन रहे हैं, जिससे समुद्री इलाकों में जन-धन की हानि हो सकती है। इसका असर ग्रहण के दिन या उसके एक-दो दिन में देखने को मिल सकता है।

ग्रहण में क्या करें
ज्योतिष गणित के मुताबिक ग्रहण काल के दौरान ईष्ट देवता की आराधना, जप, धार्मिक पुस्तकों का अध्ययन, भजन-कीर्तन, आदि कार्य करना चाहिए। इनका विशेष फल प्राप्त होता है। ग्रह पीड़ा होने पर इसके निवारण के लिए जप, दान आदि करें।

किस राशि के लिए शुभ, किस राशि के लिए अशुभ
इसबार पड़ने वाला चंद्र ग्रहण मेष, सिंह, वृश्चिक, मीन राशि वालों के लिए शुभ है, जबकि वृष, कर्क, कन्या और धनु के लिए सामान्य और मिथुन, तुला, मकर, कुंभ राशि वालों के लिए अशुभ है। उनका कहना है कि जिनके लिए यह अशुभ है वह ग्रहण ना देखें, वैसे तो ग्रहण देखने से सभी को बचना चाहिए।

क्या ना करें, क्या करें
गर्भवती स्त्री ग्रहण काल में घर से बाहर न निकलें। बुजुर्ग, बच्चे और रोगी को छोड़ ग्रहण काल के दौरान भोजन न करें। मन में किसी प्रकार का दुर्विचार न आने दें साथ ही रात्रि में भ्रमण ना करें।

सीएम के प्रयासों से गढ़वाली व कुमाऊंनी बोली को मिलेगा बढ़ावा

गढ़वाली व कुमाऊंनी बोली के प्रचार-प्रसार के लिए एक अनूठी पहल की गई है। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा गढ़वाली व कुमाऊंनी बोली को संविधान की 8 वीं अनुसूची में शामिल किए जाने के प्रयास किए जा रहे है। उन्होंने कहा कि गढ़वाली व कुमाऊंनी बोली को दर्जा दिलाने की मांग पहले भी संसद में भी उठाई जा चुकी है और यह प्रयास जारी है।
उत्तराखंड की लोक भाषा के प्रचार-प्रसार के लिए अब मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र द्वारा सोशल मीडिया में भी गढ़वाली, कुमाऊंनी व उत्तराखंड की अन्य बोली भाषा में आम-जन से संवाद स्थापित किया जा रहा है। जिसकी शुरूआत आज मुख्यमंत्री ने अपने ट्वीटर अकाउंट में गढ़वाली व कुमाऊंनी बोली में ट्वीट कर की गई।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हमें सदैव अपनी संस्कृति, बोली भाषा से जुड़ाव रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि आज का युवा सोशल मीडिया में अधिक सक्रिय है। सोशल मीडिया में अपनी लोक भाषा गढ़वाली, कुमाऊंनी व उत्तराखंड की अन्य बोली भाषा में संवाद करने से युवा पीढ़ी के साथ-साथ भावी पीढ़ी को भी अपनी बोली व संस्कृति से जुड़ने का मौका मिलेगा। सीएम ने लोगों से अपेक्षा की है कि वे समय-समय पर सोशल मीडिया पर गढ़वाली, कुमाऊंनी व उत्तराखंड की अन्य बोली भाषा में भी उनसे संवाद स्थापित करेंगे।

पंतजलि के सहयोग से बदलेगी प्रदेश के किसानों की आर्थिकी

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत और बाबा रामदेव की मौजूदगी में राज्य सरकार और पतंजलि के बीच सहयोग कार्यक्रम पर विस्तृत विचार विमर्श किया गया। इस दौरान मुख्य रूप से 5 क्षेत्रों में आपसी सहयोग पर सहमति बनी।
मुख्यमंत्री आवास पर हुए इस कार्यक्रम में उत्तराखण्ड को जैविक कृषि और जड़ीबूटी राज्य बनाना, राज्य के मोटे अनाज की व्यवसायिक खपत को बढ़ाना, राज्य में आयुष ग्रामों की स्थापना करना, एक विशाल गोधाम (गाौ शाला) की स्थापना करना और पर्यटन को बढ़ावा देना सम्मिलित है। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि यह सारे सेक्टर राज्य की समृद्धि और खुशहाली की दृष्टि से गेम चेंजर साबित होंगे। इन सारे क्षेत्रों में संभावनाओं पर अभी तक काफी विचार-विमर्श हुआ है, लेकिन अब इस क्षेत्र में कुछ कर दिखाने की जरूरत है। उन्होंने ये भी कहा कि सरकार कड़े और साहसिक फैसले लेने से नहीं हिचकेगी।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वो एक महीन के अन्दर सभी क्षेत्रों में ठोस कार्ययोजना तैयार करें, जिसको लेकर ठीक एक महीने बाद समीक्षा बैठक की जाएगी और ठोस कार्ययोजना के आधार पर राज्य सरकार और पतंजलि के बीच आवश्यक समझौते भी किये जायेंगे। मुख्यमंत्री का कहना है कि जड़ीबूटी, औद्यानिकी, योग, आयुर्वेद और पर्यटन से राज्य के लोगों की आमदनी बढ़ाने पर कार्य किया जायेगा। पर्वतीय क्षेत्रों में पलायन रोकना और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना बहुत आवश्यक है।

किसानों की मदद करेगा पतंजलि
इस दौरान स्वामी रामदेव ने कहा कि पतंजलि संस्थान उत्तराखण्ड के किसानों को उनके उत्पादों के लिए प्रतिवर्ष एक हजार करोड़ रूपये से अधिक का भुगतान करने में सक्षम है। सिक्किम जिसे हाल ही में ऑर्गेनिक स्टेट का दर्जा दिया गया है, उससे कही अधिक भूभाग पर उत्तराखण्ड में ऑर्गेनिक खेती हो रही है।

नए पर्यटक स्थलों पर स्थापित होंगे पतंजलि आयुष ग्राम
कहा कि पतंजलि राज्य के उत्पादों के लिए बाईबैक सिस्टम बना रहा है। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के 13 जिले 13 नये पर्यटन स्थल बनाने के लक्ष्य की सराहना करते हुए स्वामी रामदेव ने कहा कि सभी नये पर्यटन स्थलों पर पतंजलि आयुष ग्राम की स्थापना में सहयोग देने को तैयार है।

विशाल गौशाला तैयार करने की योजना
यह भी कहा कि राज्य सरकार के सहयोग से एक विशाल गोशाला की स्थापना करने की योजना है, जिसमें 40 से 60 लीटर दूध देने वाली गायों की नस्ल तैयार की जायेगी। वहीं कार्यक्रम में मौजूद आचार्य बालकृष्ण ने कहा कि पतंजलि की रिसर्च लैब और अन्य सुविधाओं को आयुर्वेद के शोधार्थियों और शिक्षकों के लिए खोला जायेगा। पतंजलि के 300 से अधिक वनस्पति विज्ञानी राज्य की एक-एक जड़ीबूटी और पौधे का सर्वेक्षण कर उनका डॉक्यूमेंटेशन कर सकते हैं।

हार के बाद कौन सा दांव खेल रहे हरीश रावत

देहरादून।
पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत को विधानसभा चुनाव ने भले ही मायूस किया हो, लेकिन उनके हौसले अभी पस्त नहीं हुए हैं। दावतों का सिलसिला जारी रख वह खुद को सूबे की सियासत के केंद्र में बनाए रखने का कोई मौका चूकने को तैयार नहीं हैं। लेकिन, दो माह के भीतर उनकी दावतों का अंदाज कुछ अलहदा ही है।
विधानसभा चुनाव में हरिद्वार और ऊधमसिंहनगर की जिन दो सीटों पर मुख्यमंत्री रहते हुए उन्होंने जो दांव खेला था, उसमें उन्हें कामयाबी नहीं मिली। इसके बाद उन्होंने दून शहर से दूरी बनाकर पहाड़ की तलहटी को अपने आशियाने के लिए चुना। इसके बाद पहाड़ को केंद्र में रखकर उनकी दावतों का जो सिलसिला शुरू हुआ, उससे पार्टी के बाहर और भीतर उनके प्रतिद्वंद्वी भी खासे सकते में हैं। हरदा सुर्खिया बटोरने में उनसे कहीं आगे हैं।
पहाड़ के उत्पादों को उनकी दावतों में मिल रही तरजीह को उनके पहाड़ को केंद्र में रखकर बुने जा रहे सियासी एजेंडे से जोड़कर देखा जा रहा है। इस एजेंडे के निशाने पर वर्ष 2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव भी हैं। विधानसभा चुनाव उनके नेतृत्व में लड़ा जा चुका है, लिहाजा हरीश रावत यह जानते हैं कि लोकसभा चुनाव में उनकी सियासी हैसियत उनकी सक्रियता से ही साबित होनी है। ऐसे में हरदा अभी से फूंक-फूंककर कदम बढ़ाते दिख रहे हैं। पहाड़ की सियासत में रिवर्स पलायन को उनकी रणनीति का ही हिस्सा माना जा रहा है। इसके बूते ही पलायन से शहरों में उभर गए मतदाताओं के पहाड़ों पर भी उनकी नजरें टिकी हैं।

अजीब नाम से क्या पर्यटक डर जाते है?

नाम में क्या रखा है ? शैक्सपीयर ने भले कहा हो कि गुलाब का नाम कुछ और रख देने से उसकी खुशबू थोड़े ही बदल जायेगी ? लेकिन नैनीताल के विधायक संजीव आर्य शैक्सपीयर के इस कथन से सहमत नहीं हैं। वे नैनीताल की कुछ झीलों के नाम तो बदलना चाहते हैं जिनके नाम अजीब हैं। जैसे यहां एक झील का नाम है-‘सुसाइड प्वाइंट’, तो दूसरी ‘फांसी गधेरा’ कहलाती है तो तीसरी सादिया (नष्ट हो रही ) ताल। आर्य इस बारे में सरकार को पत्र लिख रहे है कि इन नामों के सुनने से पर्यटकों को धक्का लगता है। गौरतलब हो कि पिछले साल भी कुमाऊ में ही चोरगलिया का नाम बदले जाने का अभियान चला था।
विधायक संजीव आर्य का कहना है कि कुछ पर्यटक स्थलों के नाम सुनकर पर्यटकों को अजीब लगता है। विधायक ने जनता से इन और ऐसे नामों की जगह वैकल्पिक नामों के सुझाव मांगें हैं। उनका कहना है कि इनमें बहुत से नाम तो अधिकृत भी नही हैं। जैसे कि सुसाईड प्वाइंट नाम तो कुछ गाइडों और घोड़े वालों ने पर्यटकों के बीच केवल उत्सुकता पैदा करने को रख दिया और इसके समर्थन में मन गढ़ंत कहानियां तक सुनानी शुरू कर दी। जिसके पीछे कोई तर्क नहीं है। जबकि इस स्थल का नाम यहां की साहसिक संभावनाओं के दोहन को होना चाहिये। उन्होने बताया कि कुछ साल पहले जब सादिया ताल का सौन्दर्यीकरण किया गया तो इसका नाम सरिता ताल रखा गया था लेकिन प्रचलन में अभी सादिया ताल ही है। विधायक संजीव आर्य ने नगर पालिका से भी इनके नामकरण से संबंधित रिकार्ड खंगालने को कहा है ताकि इसके बाद मुख्यमंत्री और शहरी विकास मंत्री से इस बारे मे बातचीत की जा सके।
अलबत्ता, इतिहास में रूचि रखने वाले जानकारों का कहना है कि सुसाइड प्वाइंट नाम तो कभी अस्तित्व में ही नही रहा लेकिन बाकी दो का नाम इतिहास में है और उनका नाम न ही बदला जाये, तो अच्छा होगा। उदाहरण को फांसी गधेरा प्रथम विश्व युद्ध में अंग्रेजों के रोहिलाओं को फांसी दिये जाने की याद दिलाता है जिन्होने 1857 में हल्द्वानी पर हमला किया था। इसका नाम बदलने का अर्थ होगा, इतिहास को भुलाना। इसी प्रकार सादिया ताल मूलतः वेटलेंड और क्षेत्र के जल प्रबंधन का हिस्सा है। यहीं पर कुमाऊ कमिश्नर सर हेनरी रैमजे ने पहली बार 1856 में आलू की खेती शुरू कराई थी।

उत्तराखंडी फिल्म बोडिगे गंगा के पोस्टर और म्यूजिक का लोकार्पण

ऋषिकेश।
बुधवार को नगर पालिका सभागार में ड्रीम्स अनलिमिटेड फिल्म प्रोडक्शन हाउस के बैनर तले बनी उत्तराखंडी फीचर फिल्म के पोस्टर और म्यूजिक का लोकार्पण विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचन्द अग्रवाल ने किया। व्यवस्था परिवर्तन मंच की ओर से आयोजित कार्यक्रम में विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचन्द अग्रवाल, पालिकाध्यक्ष दीप शर्मा एवं भाजपा महिला मोर्चा जिलाध्यक्ष अनीता ममगाईं ने शिरकत की। निर्माता निदेशक अनिरूद्ध गुप्ता के निर्देशन में बन रही फिल्म बोडिगे गंगा की पटकथा अरूण प्रकाश बडोनी ने लिखी है। जानकारी देते हुए निदेशक ने बताया कि फिल्म पलायन के साथ ही त्रिकोणीय प्रेम कहानी पर आधारित है। जिसमें अधिकतर कलाकार ऋषिकेश के है।
फिल्म के अभिनेता प्रशांत मशहूर हास्य अभिनेता घनानंद (घन्ना) के पुत्र हैं। फिल्म में दूसरे अभिनेता रणवीर चौहान है, जो श्यामपुर के रहने वाले है, जबकि अभिनेत्री शिवांगी भंडारी तपोवन की रहने वाली है। फिल्म के कलाकार कई सीरियल और फिल्मों में काम कर चुके हैं। व्यवस्था परिवर्तन मंच के अध्यक्ष डॉ. राजे नेगी एवं डॉ. सुनील थपलियाल के संचालन में चले कार्यक्रम में पुरुषोत्तम जेठूडी, ममता गुप्ता, रवि कुकरेती, धूम सिंह, विनोद जुगरान, संजीव चौहान, बलराम शाह, राजा ढींगरा, हर्षित गुप्ता, वेदप्रकाश शर्मा, संदीप शास्त्री, अमित गांधी, रिंकी भारद्वाज आदि मौजूद थे।

मलासी सम्मान से नवाजीं गई कुसुम जोशी

ऋषिकेश।
मुनिकीरेती स्थित आश्रम परिसर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान स्वामी शंकर तिलक महाराज ने मैती स्वयंसेवी संस्था की संस्थापक अध्यक्ष कुसुम जोशी को स्व. द्वारिका प्रसाद मलासी सम्मान प्रदान किया। उन्हें बतौर सम्मान उत्तरीय, माता की चुनरी और स्मृति चिह्न दिया गया। इसबीच शादी विवाह और मांगलिक समाराहों में कॉकटेल के खिलाफ संघर्ष और मैती आंदोलन की तर्ज पर पर्यावरण संरक्षण के लिए सक्रिय जोशी के उल्लेखनीय कार्यों पर प्रकाश डाला गया। स्वामी शंकर तिलक ने उनके प्रयासों को समाज के लिए अनुकरणीय बताया। कार्यक्रम में कुसुम जोशी ने नशा विरोधी अभियान के दौरान आई दिक्कतों को भी साझा किया।
रामायण प्रचार समिति के पंडित रवि शास्त्री ने कहा कि कुसुम जोशी जैसे सामाजिक कार्यकर्ताओं का सम्मान जरूरी है। इससे युवा पीढ़ी को भी मार्गदर्शन मिल सकेगा। कहा कि अन्य संस्थाओं को भी सामाजिक बुराईयों के विरूद्ध आगे आना चाहिए। कार्यक्रम की अध्यक्षता अगनानंद सरस्वती और संचालन डा. सुनील दत्त थपलियाल ने किया। इस अवसर पर मनोज मलासी, जयेंद्र पुंडीर, सुरेंद्र गुसाईं, हर्षित उनियल, स्वतंत्रता चैतन्य, पवित्रता चैतन्य, गौरी चैतन्य, गुरू मंडला, चेतली चैतन्य, बानवी आदि उपस्थित थे।